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Wednesday, October 28, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के चेयरमैन क्षितिज शर्मा को पूर्व चेयरमैन पारस अग्रवाल के अकाउंट की जाँच रोकने के मामले में लायंस इंटरनेशनल से झटका लगा, और इस प्रकरण में काउंसिल सेक्रेटरी राजीव अग्रवाल की भूमिका की चर्चा ने मामले को और दिलचस्प बनाया  

आगरा । लायंस इंटरनेशनल कार्यालय ने पूर्व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पारस अग्रवाल के अकाउंट में गड़बड़ी के आरोपों की जाँच को रोकने के मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा के फैसले को रद्द करके जाँच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आदेश देकर पारस अग्रवाल की मुश्किलों को एक बार फिर से बढ़ा दिया है । लायंस इंटरनेशनल कार्यालय के फैसले से 'रचनात्मक संकल्प' की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट में व्यक्त की गई आशंका सच साबित हुई है, जिसमें कहा गया था कि जाँच रुकवाने की कोशिश करके पारस अग्रवाल ने अकाउंट में झोलझाल होने के आरोपों को विश्वसनीयता दे दी है, और इस तरह जो काम मधु सिंह लगातार सक्रियता दिखा/बना कर नहीं कर पा रही थीं - उसे खुद पारस अग्रवाल ने एक गलत कदम के जरिये कर दिया है । पारस अग्रवाल ने सोचा तो यह था कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद पर क्षितिज शर्मा नाम की जो एक कठपुतली है, उससे वह जाँच को रुकवा लेंगे; लेकिन उन्हें यह ध्यान नहीं रहा होगा कि ऊपर का कार्यालय जाँच रोकने के फैसले को रद्द भी कर सकता है और तब उनकी ज्यादा फजीहत होगी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में क्षितिज शर्मा ने मनमानी तथा नियमों की अनदेखी करते हुए पारस अग्रवाल के अकाउंट की जाँच को रोक देने का तो फैसला कर लिया था, लेकिन लायंस इंटरनेशनल कार्यालय ने उनके फैसले को रद्द करके जाँच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का जो आदेश दिया है, उसने क्षितिज शर्मा और पारस अग्रवाल के लिए मुसीबतों को और बढ़ा दिया है ।
पारस अग्रवाल दरअसल जाँच से इसलिए डरे हुए हैं, क्योंकि वह यह मान कर चल रहे हैं कि जाँच कमेटी अवश्य ही अकाउंट में फर्जीवाड़ा करने का उन्हें दोषी ठहरायेगी । जाँच कमेटी में अभी अशोक गुप्ता, पारस अग्रवाल के; अशोक कपूर, मधु सिंह के; और संजय चोपड़ा, विशाल सिन्हा के प्रतिनिधि के रूप में हैं - और इन तीनों को कमेटी का चेयरमैन चुनना है, जो मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स केएम गोयल, विनोद खन्ना व जगदीश गुलाटी में से कोई एक होगा । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इस वर्ष जो हो रहा है और इंटरनेशनल डायरेक्टर एंडॉर्सी जितेंद्र चौहान तथा मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा जिस तरह की मनमानी कर रहे हैं, उसके चलते तीनों पूर्व डायरेक्टर्स अपने आप को पूरी तरह उपेक्षित महसूस कर रहे हैं तथा बुरी तरह नाराज हैं । पारस अग्रवाल तथा उनके शुभचिंतकों को डर वास्तव में यही है कि तीनों पूर्व डायरेक्टर्स में से जो भी चेयरमैन बनेगा, वह अकाउंट की कमियों और गलतियों को खोजेगा तथा पारस अग्रवाल को दोषी ठहरायेगा । पारस अग्रवाल और उनके नजदीकी दरअसल इसीलिए चाहते थे कि मधु सिंह ने अकाउंट को लेकर जाँच की जो माँग की हुई है, उस माँग को किसी न किसी बहाने से रद्द किया जाए और जाँच से बचा जाए । लेकिन लायंस इंटरनेशनल कार्यालय ने मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन क्षितिज शर्मा से जाँच को रुकवा तथा रद्द करवा देने की उनकी कोशिश पर पानी फेर दिया है ।
पारस अग्रवाल के अकाउंट के मुद्दे पर मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में जो घमासान मचा हुआ है, उसने मल्टीपल काउंसिल सेक्रेटरी राजीव अग्रवाल के लिए एक अलग तरह की मुसीबत पैदा की है । पारस अग्रवाल और उनके समर्थकों ने राजीव अग्रवाल पर सूचनाओं को लीक करने का आरोप लगाया हुआ है । पारस अग्रवाल और उनके समर्थकों को असल में यह बात हैरान किए हुए है कि उनके बीच की बातें विरोधी खेमे के लोगों तक तुरंत कैसे पहुँच जाती हैं ? इस हैरानी को दूर करने की उनकी कोशिशें राजीव अग्रवाल को संदिग्ध बनाती हैं । दरसअल राजीव अग्रवाल ही मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के ऐसे पदाधिकारी हैं, जिनकी नजदीकियत विरोधी खेमे के नेताओं के साथ भी है । विरोधी खेमे के नेताओं के साथ उनकी नजदीकियत वास्तव में संयोगवश ही है । राजीव अग्रवाल अपने डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री - में जिन नेताओं के साथ और संपर्क में ज्यादा रहते हैं, वह मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में विरोधी खेमे के सक्रिय सदस्यों के रूप में देखे/पहचाने जाते हैं - और इसीलिए पारस अग्रवाल तथा उनके नजदीकियों को लगता है कि उन्हें बचाने के लिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारी जो भी योजना बनाते हैं, वह राजीव अग्रवाल के जरिये विरोधी खेमे के नेताओं तक पहुँच जाती है और विरोधी खेमे के लोग पहले से ही उनकी योजना को फेल करने में जुट जाते हैं । मामले में राजीव अग्रवाल को घसीटे जाने से लग रहा है कि अकाउंट के जरिये पारस अग्रवाल को घेरने/फँसाने तथा बचाने की 'लड़ाई' में अन्य कई लोगों के भी फजीहत का शिकार होने के हालात बन रहे हैं, और इससे मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक समीकरणों में कई तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे ।

Friday, October 9, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में पूर्व चेयरमैन पारस अग्रवाल की अपने अकाउंट में गड़बड़ी के आरोपों की जाँच को रोकने की कोशिश ने उनके अकाउंट को संदेहजनक बनाने का वह काम कर दिया है, जिसे मधु सिंह लगातार सक्रियता के बावजूद भी नहीं कर पा रही थीं  

आगरा । पूर्व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पारस अग्रवाल ने अपने अकाउंट को लेकर चल रहे विवाद में लगता है कि खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है, और अपने आपको ज्यादा बड़ी मुसीबत में फँसा लिया है ? पारस अग्रवाल के नजदीकियों और शुभचिंतकों का ही कहना है कि निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधु सिंह की अधिकृत शिकायत पर, लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानून के तहत मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में जाँच कमेटी बनने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद पारस अग्रवाल ने अधिकृत शिकायत को निरस्त करने की माँग करके मामले को पूरी तरह से पलटते हुए लोगों के बीच गड़बड़ी के संदेहों को बढ़ा दिया है, जिसके चलते मधु सिंह के आरोपों को गंभीरता से देखा जाने लगा है और मधु सिंह के आरोपों को जैसे नया जीवन मिल गया है । पारस अग्रवाल की उक्त माँग आने से पहले तक सीन यह बन गया था कि मधु सिंह के आरोपों पर मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के लोगों ने दिलचस्पी खो दी थी, और लोग समझने/मानने लगे थे कि मधु सिंह किसी निजी खुन्नसबाजी में पारस अग्रवाल को परेशान और बदनाम कर रही हैं । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में भी जाँच की जो कार्रवाई होनी थी, उसके 'समीकरण' भी पारस अग्रवाल के हक में थे, और पक्ष-विपक्ष के लोग मान रहे थे कि उक्त जाँच में पारस अग्रवाल को क्लीन चिट मिल जायेगी । लेकिन पारस अग्रवाल ने अधिकृत शिकायत को रद्द करने की माँग करके तथा शुरू हुई जाँच प्रक्रिया को रुकवा कर एक मरते हुए मामले को फिर से जिंदा कर दिया है ।
दरअसल, लोगों के बीच सवाल पैदा हुआ है कि पारस अग्रवाल जाँच को रोकना क्यों चाहते हैं ? इसी से लोगों के बीच संदेह बढ़ा है कि जरूर ही उनके अकाउंट में बड़ा झोलझाल है, और इसीलिए जाँच की प्रक्रिया के शुरू होने ने उन्हें डरा दिया है और वह जाँच को रोकने की कोशिशों में जुट गए हैं । पारस अग्रवाल के लिए फजीहत की बात यह हुई है कि जाँच को रोकने के लिए उन्होंने जो कारण बताया है, वह लोगों को नियमानुसार उचित नहीं लग रहा है और उसे एक बहानेबाजी के रूप में ही देखा/पहचाना जा रहा है । पारस अग्रवाल ने कारण बताया है कि अकाउंट के पास होने के बाद शिकायत करने के लिए जो समयसीमा तय है, मधु सिंह की शिकायत उस समयसीमा के समाप्त होने के बाद आई है, इसलिए उनकी शिकायत को अमान्य किया जाना चाहिए और उसके आधार पर कोई जाँच नहीं होना चाहिए । लेकिन पारस अग्रवाल जिस समयसीमा का वास्ता दे रहे हैं, वह अकाउंट के 'फाइनली' पास होने पर लागू होता है - अकाउंट फाइनली मल्टीपल कन्वेंशन में पास होते हैं, जो अभी हुई ही नहीं है । अभी तो उनके अकाउंट को मल्टीपल बोर्ड ने पास किया है, फाइनली पास तो उन्हें तब माना/कहा जायेगा, जब वह कन्वेंशन में पास होंगे । इसलिए जिस नियम का हवाला देकर पारस अग्रवाल ने बचने की कोशिश की है, वह नियम अभी लागू ही नहीं होता है । लोगों को लगता है कि पारस अग्रवाल ने सोचा होगा कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद पर क्षितिज शर्मा नाम की जो एक कठपुतली है, वह वही करेगी जैसा वह कहेंगे/चाहेंगे - लेकिन पारस अग्रवाल ने यह नहीं सोचा होगा कि जाँच से बचने की उनकी कोशिश उनकी मुश्किलों को कम करने की बजाये और बढ़ाने का ही काम करेगी ।
पारस अग्रवाल के अकाउंट का मामला दरअसल परसेप्शन का मामला है । अकाउंट में झोलझाल यदि साबित भी हो जाता है, तो क्या होगा ? लायंस व्यवस्था में सजा का कोई प्रावधान तो है नहीं ! ऐसे में, मधु सिंह की कोशिश इतनी ही लगती है कि वह पारस अग्रवाल को बदनाम करें, और इसके लिए वह लोगों के बीच संदेह तो पैदा कर ही दें । मधु सिंह ने इसके लिए बहुत प्रयास किए, लेकिन उनके प्रयास सफल नहीं हो रहे थे - और उनके आरोपों में दिलचस्पी व मजे लेने वाले लोग भी निराश हो चले थे । उनकी निराशा मधु सिंह द्वारा मल्टीपल में अधिकृत शिकायत दर्ज करवाने तथा उनकी शिकायत पर जाँच की प्रक्रिया शुरू होने से भी दूर नहीं हुई । हर किसी को लग रहा था कि मल्टीपल में होने वाली जाँच को पारस अग्रवाल 'मैनेज' कर लेंगे, और मधु सिंह की यह कोशिश भी व्यर्थ ही जायेगी । लेकिन पारस अग्रवाल ने मधु सिंह की शिकायत को रद्द करने का आवेदन दे कर अपने अकाउंट को संदेहजनक बना लिया है - और इस तरह जो काम, मधु सिंह लगातार सक्रियता दिखा/बना कर नहीं कर पा रही थीं, उसे खुद पारस अग्रवाल ने एक गलत कदम उठा कर दिया है । पारस अग्रवाल जाँच तो रुकवा लेंगे, लेकिन इससे उन्होंने मल्टीपल के लोगों के बीच यह संदेह और सवाल पैदा कर दिया है कि उनके अकाउंट में यदि कोई झोलझाल नहीं है, तो वह जाँच से डर क्यों रहे हैं ? 

Saturday, September 12, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में पारस अग्रवाल के मल्टीपल अकाउंट्स को लेकर लगे आरोपों की जाँच करने वाली कमेटी के चेयरमैन के चुनाव/चयन में अशोक कपूर के हाथ लगा अवसर, क्या सचमुच पारस अग्रवाल की मुश्किलों को बढ़ाने का काम कर सकेगा ?

आगरा । पूर्व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पारस अग्रवाल के अकाउंट्स को लेकर चल रहे विवाद में निर्णायक भूमिका निभाने का मौका जिस प्रकार पूर्व गवर्नर अशोक कपूर के हाथ में आ गया दिख रहा है, उससे निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधु सिंह और उनके नजदीकी खुश हो रहे हैं - और उन्हें लग रहा है कि अब पारस अग्रवाल को मुश्किल का सामना करना पड़ेगा । पारस अग्रवाल के अकाउंट्स को लेकर लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानून के तहत मधु सिंह ने मल्टीपल में अधिकृत रूप से शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर कार्रवाई करते हुए जाँच कमेटी बनाने की तैयारी शुरू हुई है । इस तैयारी के तहत शिकायतकर्ता के रूप में मधु सिंह ने अशोक कपूर को; तथा शिकायत में आरोपी बनाये गए पारस अग्रवाल और विशाल सिन्हा ने क्रमशः अशोक गुप्ता तथा संजय चोपड़ा को अपना अपना प्रतिनिधि बनाया है । जाँच कमेटी का चेयरमैन कोई पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर होगा, जिसका चुनाव/चयन तीनों प्रतिनिधियों के वोटों के बहुमत से तय होगा । नियमानुसार व व्यवस्थानुसार, तीनों प्रतिनिधियों को दो दो पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स के नाम देने होंगे, और जिसका नाम सबसे ज्यादा बार लिया गया होगा, वह चेयरमैन बनेगा । खेमेबाजी तथा पसंद/नापसंद के आधार पर जो अनुमान लगाए जा रहे हैं, उनमें अशोक कपूर के द्वारा दिए जाने वाले दो नामों में से एक के चेयरमैन बनने की संभावना देखी जा रही है - और लोगों को लग रहा है कि यह संभावना पारस अग्रवाल के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाली हो सकती है ।
पारस अग्रवाल के अकाउंट्स को लेकर लगे आरोपों की जाँच करने वाली कमेटी के चेयरमैन के चुनाव/चयन में अशोक कपूर के हाथ लगा अवसर दरअसल कई तरह के संयोगों के कारण बना है । माना/समझा जा रहा है कि पारस अग्रवाल और विशाल सिन्हा के प्रतिनिधि के रूप में अशोक गुप्ता तथा संजय चोपड़ा किसी भी हालत में विनोद खन्ना का नाम नहीं देंगे; ऐसे में उनके पास केएम गोयल व जगदीश गुलाटी का नाम देने का ही विकल्प बचा रह जाता है । अशोक कपूर को लेकर लोगों का मानना और कहना है कि वह विनोद खन्ना का नाम तो जरूर देंगे, और दूसरा नाम केएम गोयल तथा जगदीश गुलाटी में से किसी एक का देंगे । ऐसे में अशोक कपूर दूसरा जो भी नाम देंगे, वह सबसे ज्यादा - तीन वोट पाकर चेयरमैन बनने का अधिकारी हो जायेगा । वह चूँकि तीनों प्रतिनिधियों की पसंद होगा, इसलिए कोई उसके चुनाव/चयन पर आपत्ति भी नहीं कर पायेगा । ऐसे में जाहिर है कि अशोक कपूर के सामने यह देखने/समझने का पूरा मौका है कि जाँच कमेटी के चेयरमैन के रूप में केएम गोयल तथा जगदीश गुलाटी में से कौन पारस अग्रवाल के अकाउंट्स पर की जा रही आपत्तियों को सही ठहराने का 'काम' कर सकेगा - और पारस अग्रवाल की मुश्किलों को बढ़ायेगा ?
हालाँकि मल्टीपल के कई एक नेताओं को लगता है कि पारस अग्रवाल के समर्थक व शुभचिंतक अवश्य ही कोई तोड़ निकाल लेंगे और वह अशोक कपूर को मिलते दिख रहे 'अवसर' को आसानी से सफल नहीं होने देंगे । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जितेंद्र चौहान के एंडोर्समेंट को लेकर उड़ी एक बेफालतू की खबर पर बौखलाहट दिखाते हुए मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा ने जैसी जो सक्रियता दिखाई थी, उसे याद/ध्यान करते हुए लोगों को लगता है कि क्षितिज शर्मा जाँच कमेटी का ऐसा कोई स्वरूप तो नहीं 'बनने' देंगे, जो पारस अग्रवाल के लिए मुश्किलें खड़ी कर सके । इसके लिए नरेश अग्रवाल के नाम का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जो पूर्व प्रेसीडेंट होने के साथ-साथ पूर्व डायरेक्टर भी तो हैं - और जिन्हें लेकर भले ही कहा जा रहा हो कि उन्हें इस 'झगड़े' में नहीं खींचना चाहिए । मधु सिंह के नजदीकियों का भी कहना/बताना है कि उन्हें आशंका है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में पारस अग्रवाल के अकाउंट्स को लेकर की गई शिकायत की जाँच को आसानी से नहीं होने दिया जायेगा; लेकिन जो भी होगा - उससे अंततः लोगों के बीच यही संदेश जायेगा कि पारस अग्रवाल और उनके समर्थक व शुभचिंतक निष्पक्ष जाँच नहीं होने देना चाहते हैं; और यह संदेश कुल मिलाकर पारस अग्रवाल के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला ही साबित होगा । इसीलिए माना/समझा जा रहा है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में दर्ज हुई शिकायत पर जाँच की प्रक्रिया को पारस अग्रवाल और उनके समर्थकों ने यदि ठीक से हैंडल नहीं किया, और सारा मामला मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा पर ही छोड़ दिया, तो कहीं जितेंद्र चौहान वाले मामले की तरह लेने के देने न पड़ जाएँ ? 

Sunday, August 23, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए हुए एंडोर्समेंट को लेकर उड़ी एक 'फर्जी' खबर पर जितेंद्र चौहान तथा क्षितिज शर्मा द्वारा दिखाई गई बौखलाहट ने एंडोर्समेंट को लोगों के बीच संदेहपूर्ण तथा जितेंद्र चौहान को फजीहत का शिकार बनाया 

नई दिल्ली । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा की ओवर-स्मार्ट बनने/दिखने तथा गैरजरूरी रूप से सक्रियता दिखाने की कोशिश ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के मल्टीपल एंडॉर्सी जितेंद्र चौहान की मल्टीपल के लोगों के बीच ही नहीं, बल्कि देश के लायन नेताओं और पदाधिकारियों के बीच खासी फजीहत कर/करवा दी है । मामला लायंस इंटरनेशनल द्वारा जितेंद्र चौहान को एंडॉर्सी रजिस्टर करने से इंकार करने की तथाकथित खबर को लेकर था । जब एक फर्जी वॉट्सऐप एकाउंट से यह खबर लोगों तक पहुँची, तब अधिकतर लोगों ने इसे झूठी खबर के रूप में ही लिया/पहचाना, और इस पर कोई ध्यान नहीं दिया । हाँ, वॉट्सऐप पर समय बिताने वाले कुछ ठलुए किस्म के लोगों ने इसे इधर-उधर फॉरवर्ड जरूर किया, लेकिन यह खबर लोगों के बीच कोई इश्यू नहीं बन पाई । किंतु मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा ने जिस तत्परता के साथ उक्त खबर का संज्ञान लिया, और इसका 'आधिकारिक खंडन' किया - उसके चलते उक्त खबर अचानक से 'महत्त्वपूर्ण' हो उठी और गंभीर चर्चा के केन्द्र में आ गई । जो लोग उक्त खबर को फर्जी मान रहे थे, क्षितिज शर्मा के 'आधिकारिक खंडन' के बाद उन्हें भी लगने लगा कि दाल में जरूर कुछ काला है । फिर तो हर किसी को लगने लगा कि जितेंद्र चौहान के एंडॉर्सी 'होने' में जरूर कोई लफड़ा है - अन्यथा मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन को एक लंबी चिट्ठी लिखने और खबर का 'आधिकारिक खंडन' करने की कोई जरूरत नहीं थी ।
कई लोगों का यह भी कहना रहा कि क्षितिज शर्मा को उक्त खबर का 'आधिकारिक खंडन' करने का कोई अधिकार ही नहीं है - खबर में चूँकि लायंस इंटरनेशनल का हवाला दिया गया है, इसलिए 'आधिकारिक खंडन' करने का अधिकार तो लायंस इंटरनेशनल कार्यालय में बैठे पदाधिकारियों का है । क्षितिज शर्मा यह कर सकते थे कि उन पदाधिकारियों से खंडन लेकर उसे प्रसारित करते और या ऐसा कोई डॉक्यूमेंट प्रस्तुत करते, जिससे साबित होता कि लायंस इंटरनेशनल ने जितेंद्र चौहान को मल्टीपल एंडॉर्सी रजिस्टर कर लिया है । ऐसा न करके, और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर क्षितिज शर्मा ने जो किया उससे वैसा ही किस्सा बना जिसमें पूछा गया कि 'आप कौन हैं', तो जबाव मिला 'मैं मिस्टर खामखाँ हूँ ।' सिर्फ इतना ही नहीं, क्षितिज शर्मा ने जिस अंदाज में संदेश लिखा उसमें उनकी खीझ, उनका चिड़चिड़ापन और उनकी बौखलाहट भी 'नजर' आई । अपनी खीझ, चिड़चिड़ाहट तथा बौखलाहट में क्षितिज शर्मा लगता है कि इस बात को पूरी तरह से भूले ही रहे कि वह मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन जैसे जिम्मेदार पद पर हैं, और आधिकारिक रूप से उनके लिखे/कहे में तथ्य व गरिमा होना ही चाहिए और उन्हें 'टू द प्वाइंट' बात लिखना/कहना चाहिए । लोगों का यह भी मानना और कहना है कि क्षितिज शर्मा को एक फर्जी अकाउंट से आने वाली झूठी खबर पर रिएक्ट ही नहीं करना चाहिए था, और उसे इग्नोर करना चाहिए था । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में क्षितिज शर्मा ने लेकिन रिएक्ट करके उक्त खबर को न सिर्फ महत्त्वपूर्ण बना दिया बल्कि एक नॉन-इश्यू को इश्यू बना दिया और जितेंद्र चौहान की खासी फजीहत करवा दी है ।
मजे की बात यह है, जैसा कि मल्टीपल में क्षितिज शर्मा के नजदीकियों का कहना है, कि क्षितिज शर्मा पर उक्त खबर का 'आधिकारिक खंडन' करने के लिए जितेंद्र चौहान ने ही दबाव बनाया था । कुछेक लोगों का कहना है कि उक्त फर्जी खबर के प्रसारित होने के बाद जितेंद्र चौहान ही बुरी तरह बौखला गए थे, और कई लोगों को फोन कर बैठे थे । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए मल्टीपल एंडोर्समेंट को लेकर हुए चुनाव में उनके प्रतिद्वंद्वी रहे दीपक तलवार के नजदीकियों का कहना/बताना है कि जितेंद्र चौहान ने बौखलाहट में दीपक तलवार को भी यह पूछते हुए फोन किया कि उक्त खबर उन्होंने तो नहीं दी है । जितेंद्र चौहान की इस फोनबाजी ने तथा उसके बाद सामने आए मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में क्षितिज शर्मा के 'आधिकारिक खंडन' ने एक बेबात की बात को लोगों के बीच मुद्दा बना दिया, और अब तो जितेंद्र चौहान के समर्थकों व शुभचिंतकों को भी लगने लगा है कि जितेंद्र चौहान के मल्टीपल एंडोर्समेंट में अवश्य ही कुछ लोचा है - जिसके चलते जितेंद्र चौहान उक्त खबर के सामने आने के बाद बुरी तरह से बौखला उठे हैं । जितेंद्र चौहान के नजदीकियों का भी मानना और कहना है कि उक्त खबर ने नहीं, बल्कि खबर पर जितेंद्र चौहान तथा क्षितिज शर्मा की तरफ से हुई 'कार्रवाई' ने जितेंद्र चौहान के एंडोर्समेंट को मल्टीपल के लोगों के बीच न सिर्फ संदेहपूर्ण बना दिया है, बल्कि जितेंद्र चौहान को फजीहत का शिकार भी बना दिया है ।  

Sunday, July 12, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की नई टीम में दीपक तलवार को शामिल देख कर उनके समर्थकों ने अपने आपको ठगा हुआ महसूस किया है, और इसके कारण वह अकाउंट्स के गड़बड़झाले में पारस अग्रवाल के खिलाफ कोई न कोई कार्रवाई होने की 'उम्मीद' को खोता देख रहे हैं

नई दिल्ली । दीपक तलवार को मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के नए पदाधिकारियों की टीम में शामिल देख कर उनके नजदीकियों और समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है, तथा उन्होंने अपने आप को ठगा हुआ महसूस किया है । नजदीकियों और समर्थकों का कहना/बताना है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में उन्होंने इनकी उम्मीदवारी का समर्थन करके जितेंद्र चौहान से 'दुश्मनी' मोल ले ली, जिसके चलते मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों की टीम में शामिल हो सकने की उनकी संभावनाएँ तो खत्म हो गईं - लेकिन खुद इन्होंने जितेंद्र चौहान के साथ 'सौदेबाजी' कर ली और मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट टीम में पद ले बैठे हैं । नजदीकियों और समर्थकों का सीधा आरोप है कि जितेंद्र चौहान ने तो इन्हें इसलिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट टीम में शामिल किया है, ताकि यह उनके चुनाव तथा पारस अग्रवाल के अकाउंट्स को लेकर लग रहे आरोपों पर 'आगे' न बढ़ें - और इन्होंने पद के लालच में लगता है कि जितेंद्र चौहान के सामने समर्पण कर दिया है । मजे की बात यह रही है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए मल्टीपल में एंडोर्समेंट लेने को लेकर जो प्रक्रिया अपनाई गई थी, उस पर दीपक तलवार के छोटे/बड़े समर्थकों ने तरह तरह के खूब आरोप लगाए थे । उन आरोपों के भरोसे समर्थकों को विश्वास था कि चुनाव के बाद चुनावी प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन को लेकर पिटीशन अवश्य ही दायर होगी, और चुनाव को ही रद्द करवा दिया जायेगा । लेकिन चुनाव संपन्न हो जाने तथा नतीजा घोषित हो जाने के बाद न तेजपाल खिल्लन ने पिटीशन दायर करने को लेकर कोई उत्सुकता दिखाई - और न दीपक तलवार ने । इनके इस रवैये से, नियमों के उल्लंघन को लेकर शोर मचाते रहे इनके समर्थकों को फजीहत का शिकार होना पड़ा ।
इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में करारी हार का सामना करने के कारण फजीहत का शिकार बने दीपक तलवार के नजदीकियों व समर्थकों को लेकिन तुरंत ही पारस अग्रवाल के मल्टीपल चेयरपर्सन के कार्यकाल के अकाउंट्स का मुद्दा हाथ लग गया । पारस अग्रवाल के अकाउंट्स  की कुछेक 'कमजोर कड़ियों' को मुद्दा बना कर, दीपक तलवार के कई एक समर्थकों ने तरह तरह से पारस अग्रवाल पर फंदा कसने की तैयारी की । इस तैयारी की अगुवा बनीं पारस अग्रवाल व जितेंद्र चौहान के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 सी टू की निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधु सिंह । मजे की बात यह रही कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में खुद मधु सिंह पर कई तरह के ड्यूज दबाने के आरोप रहे; अपने पर लगे आरोपों को क्लियर करने की बजाये वह लेकिन पारस अग्रवाल को बेईमान साबित करने के अभियान में जुटीं । उनके अभियान को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में भारी हार से बौखलाए दीपक तलवार के नजदीकियों तथा समर्थकों ने हवा देने का काम किया । उनके तमाम शोर-शराबे का लेकिन कोई असर पड़ता नहीं दिखा, जिससे उनकी बौखलाहट और बढ़ी । इस बौखलाहट में नजदीकियों और समर्थकों को उम्मीद रही कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनाव संबंधी शिकायतों को लेकर तो भले ही बात 'आगे' न बढ़ी हो, लेकिन पारस अग्रवाल के अकाउंट्स के मामले में तो अवश्य ही कुछ कार्रवाई होना चाहिए । नजदीकियों और समर्थकों को पक्का विश्वास रहा कि पारस अग्रवाल के अकाउंट्स को लेकर मचाया जा रहा उनका शोर-शराबा व्यर्थ नहीं जायेगा ।   
लेकिन जितेंद्र चौहान द्वारा 'बनाई' और/या बनवाई गई मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट टीम में तेजपाल खिल्लन के साथ-साथ दीपक तलवार को भी शामिल देख कर इनके नजदीकियों तथा समर्थकों को आभास हो चला है कि इन्होंने पद पाने के लालच में जितेंद्र चौहान के सामने समर्पण कर दिया है, और इसके चलते अब पारस अग्रवाल के अकाउंट्स के मामले में भी कुछ नहीं होगा । इस आभास के कारण ही, दीपक तलवार के नजदीकियों तथा समर्थकों ने अपने आप को ठगा हुआ पाया है । उन्हें झटका दरअसल यह देख कर लगा है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट टीम में सभी पद उन लोगों को मिले हैं, जो जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी में किसी न किसी रूप में मददगार थे - दीपक तलवार के नजदीकियों व समर्थकों में से किसी को भी कोई पद नहीं मिला है; जिनके पास पहले से पद थे और जो अभी भी पद पर बने रहने के लिए अधिकृत थे, उन्हें पद से हटा और दिया गया । दीपक तलवार के नजदीकियों व समर्थकों को इसका ज्यादा बुरा नहीं लगा; इसकी तो वह उम्मीद कर रहे थे - उन्हें विश्वास हो चला था कि ऐसा होगा ही; किंतु उन्होंने यह नहीं सोचा था कि दीपक तलवार खुद पद ले लेंगे । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट टीम में इन्हें पदासीन देख कर इनके नजदीकियों व समर्थकों को खासा तगड़ा झटका लगा है और उन्हें महसूस हुआ है कि उन्हें तो उनके अपनों ने ही ठग लिया है । दरअसल इसमें उन्हें अपनी 'वह' उम्मीद पूरी तरह ध्वस्त होती नजर आ रही है, जिसमें वह अकाउंट्स के गड़बड़झाले में पारस अग्रवाल के खिलाफ कोई न कोई कार्रवाई होने की आस लगाये बैठे हैं । 

Monday, June 29, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में विभिन्न कमेटियों के पद पाने और बचाने की कोशिश में दीपक तलवार तथा तेजपाल खिल्लन के नजदीकियों व समर्थकों ने नए बने मल्टीपल चेयरमैन क्षितिज शर्मा से संपर्क तो साधा है, लेकिन उम्मीद नहीं है कि डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के चुनाव को 'गंदा' करने/बनाने वाले लोगों के पद बचेंगे या उन्हें मिलेंगे

नई दिल्ली । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में विभिन्न पदों के पदाधिकारियों को बड़े उलटफेर की आशंका लग रही है, और कुछेक पदाधिकारियों को पद छिनने का डर सताने लगा है; इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए हुए चुनाव में दीपक तलवार की उम्मीदवारी का समर्थन करने वालों को पद छिनने/खोने और न मिलने का सबसे ज्यादा डर लग रहा है - इस डर को दूर करने के लिए उन्होंने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा से तार जोड़ने शुरू तो किए हैं, लेकिन खुद उन्हें ही विश्वास नहीं है कि क्षितिज शर्मा कोई फैसला कर सकेंगे । दीपक तलवार के नजदीकियों और समर्थकों को लग रहा है कि दीपक तलवार की उम्मीदवारी के कारण जितेंद्र चौहान और उनके समर्थकों को जो मुश्किलें उठानी पड़ी हैं, उसका बदला अब दीपक तलवार के नजदीकियों और समर्थकों से लिया जायेगा, और उन्हें मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में पद नहीं दिए जायेंगे - जिनके पास पद हैं, उनसे ले लिए जायेंगे । हालाँकि, यदि सचमुच ऐसा होता है तो यह कोई हैरानी की और या कोई अनोखी बात नहीं होगी - क्योंकि हर सत्ताधारी यह कोशिश करता ही है कि वह अपने 'अधीन' पदों को अपने नजदीकियों और समर्थकों को सौंपे । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पद देने/बाँटने/सौंपने का अवसर यदि जितेंद्र चौहान को मिला है, तो यह बहुत स्वाभाविक ही है कि वह उनकी उम्मीदवारी को समर्थन दिलवाने वाले लोगों को उक्त पद दें/दिलवाएँ । उनके प्रतिद्वंद्वी रहे दीपक तलवार तथा तेजपाल खिल्लन के नजदीकियों और समर्थकों को यह उम्मीद करना भी भला क्यों चाहिए कि जितेंद्र चौहान उन्हें पद दिलवायेंगे । यह कोई अच्छी और आदर्श स्थिति नहीं है, लेकिन सच्चाई यही है - और विडंबना यह है कि हर किसी ने इस स्थिति को स्वीकार कर लिया है । ऐसे में, दीपक तलवार के नजदीकियों व समर्थकों का पद छिनने और न मिलने को लेकर आशंकित होने का कोई कारण समझ में नहीं आता है ।
हालाँकि मामला इतना सीधा व सरल भी नहीं है । पदों को देने/दिलवाने में खेमेबाजी होने के बावजूद, कुछेक लोगों के लिए खेमेबाजी दीवार नहीं बनती है, लेकिन इस बार खेमेबाजी से ऊपर देखे जाने वाले लोग भी खेमेबाजी का 'शिकार' होते देखे/सुने जा रहे हैं - लेकिन इसके लिए भी 'उन्हें' ही दोषी ठहराया/माना जा रहा है । लोगों का सीधा आरोप है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए हुए इस बार के चुनाव में दीपक तलवार की तरफ से खासी 'गंदगी' हुई, और उस गंदगी के लिए कीचड़ तैयार करने में उन लोगों ने भी बढ़-चढ़ कर भाग लिया, जो मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में पदाधिकारी हैं तथा लोगों के बीच जिनकी साफ-सुथरी इमेज रही है । दीपक तलवार का कैम्पेन पूरी तरह नकारात्मकता पर केंद्रित रहा, जिसमें दीपक तलवार की खूबियों की बात कम थी - जितेंद्र चौहान पर व्यक्तिगत छींटाकशी ज्यादा थी । शुरू में जरूर दीपक तलवार की खूबियों की बात हुई - जिसमें उनके पढ़े-लिखे होने और अंग्रेजी बोल सकने की क्षमता पर जोर था, उनकी बढ़ी उम्र का भी जिक्र था, और लायन लीडर्स के साथ काम करने के उनके अनुभव की बात थी; लेकिन जल्दी ही दीपक तलवार और उनके समर्थकों को समझ में आ गया कि इन खूबियों के भरोसे वोट नहीं मिल सकेंगे । इन बातों को लेकर दीपक तलवार का बल्कि मजाक और बना । लोगों ने कहा/पूछा कि डायरेक्टर बनने के लिए दीपक तलवार ने अपनी उम्र बढ़ने का इंतजार क्यों किया, वह पहले उम्मीदवार क्यों नहीं बने ? पीछे जो लोग डायरेक्टर बने, वह क्या दीपक तलवार से ज्यादा पढ़े-लिखे हैं, उनसे अच्छी अंग्रेजी बोल लेते हैं - दीपक तलवार इसलिए उनके सामने उम्मीदवार नहीं बने थे क्या ?
लोगों के बीच इस तरह की बातों के होने से दीपक तलवार की तरफ से उनकी खूबियों की बात होना बंद हो गया, और उनकी तरफ का कैम्पेन पूरी तरफ नकारात्मक हो गया । दीपक तलवार और उनके समर्थकों का सारा जोर जितेंद्र चौहान का मजाक बनाने पर, उनकी उम्मीदवारी के नामांकन में कमिया खोजने तथा किसी भी तरह से चुनाव को रद्द करवाने पर आ टिका । मजे की बात यह रही कि चुनाव-अभियान के गंदा होने की आशंका तेजपाल खिल्लन की तरफ से थी, लेकिन तेजपाल खिल्लन ने चुनाव बड़ी गरिमा के साथ लड़ा और चुनावी नतीजे को भी बड़े बड़प्पन के साथ स्वीकार किया । दीपक तलवार के समर्थकों ने लेकिन चुनाव को गटर-छाप बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी - और विडंबना यह रही कि ऐसा करने में उन लोगों की भी खासी सक्रिय भूमिका रही, जिन्हें भले व्यक्ति के रूप में देखा/पहचाना जाता रहा है । दरअसल इसीलिए, मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पदों पर होने वाली नियुक्ति के मामले में जितेंद्र चौहान और उनके नजदीकी उन लोगों के प्रति कोई रियायत बरतने को तैयार नहीं हैं, जिन्होंने चुनाव को गंदा करने/बनाने में भूमिका निभाई है । दीपक तलवार और तेजपाल खिल्लन की उम्मीदवारी के कुछेक समर्थकों ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा पर पदों के लिए दबाव बनाने का काम तो शुरू किया है, लेकिन लगता नहीं है कि जितेंद्र चौहान से विचार-विमर्श किए बिना क्षितिज शर्मा पदों को लेकर कोई फैसला करेंगे ।

Wednesday, June 24, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 सी टू की तरफ से मल्टीपल ड्यूज जमा करवाने को लेकर आनाकानी करती आ रहीं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधु सिंह ने पारस अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोल कर अपनी खुन्नस को ही जाहिर किया है क्या ?

आगरा । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधु सिंह ने मल्टीपल ड्यूज जमा न करने/करवाने के मामले में निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बीके गुप्ता को शर्मिंदा करने के लिए जैसे चादर बिछवाई थी, ठीक वैसे ही मधु सिंह के लिए भी चादर बिछवाने की तैयारी सुनी जा रही है - क्योंकि बीके गुप्ता की तरह ही मधु सिंह ने भी मल्टीपल ड्यूज जमा नहीं करवाए हैं, और जिसके कारण मल्टीपल काउंसिल के नए पदाधिकारियों की चुनावी प्रक्रिया में उनके डिस्ट्रिक्ट को प्रतिनिधित्व का अधिकार नहीं मिला है । उल्लेखनीय है कि बीके गुप्ता द्वारा मल्टीपल ड्यूज जमा न करने/करवाने के मामले को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार संभालते ही मधु सिंह ने बड़े जोरशोर से उठाया था, और इसे डिस्ट्रिक्ट की बदनामी के तौर पर रेखांकित किया था । मधु सिंह के उस रवैये को याद करते हुए लोगों को हैरानी है कि बीके गुप्ता के पदचिन्हों पर चलते हुए मधु सिंह खुद भी मल्टीपल ड्यूज जमा न करवा कर डिस्ट्रिक्ट की बदनामी क्यों करवा रही हैं ? सुना/बताया जाता है कि मल्टीपल ड्यूज जमा न करने/करवाने के मामले में बीके गुप्ता को शर्मिंदा करने के उद्देश्य से मधु सिंह ने अपनी शुरू की एक मीटिंग में यह कहते हुए लोगों के सामने एक चादर बिछवाई थी, कि मल्टीपल ड्यूज के रूप में इकट्ठा हुई रकम तो बीके गुप्ता ने अपने घर-खर्च में इस्तेमाल कर ली है, इसलिए उनसे यह कहने की जरूरत नहीं है कि वह उक्त रकम जमा करवाएँ - लेकिन डिस्ट्रिक्ट को बदनामी से बचाने के लिए उक्त रकम हमें चंदा करके जमा करनी/करवानी चाहिए । यह तो किसी को नहीं पता कि उस चादर में कोई रकम इकट्ठा हुई थी, या नहीं हुई थी - और यदि हुई थी, तो उसका हुआ क्या ? लेकिन वह घटना लोगों को याद रह गई । उस घटना का संदर्भ लेकर ही, ठीक उसी तर्ज पर डिस्ट्रिक्ट में कुछेक लोग मधु सिंह के लिए भी चंदा इकट्ठा करने हेतु चादर बिछाने/बिछवाने की तैयारी करते सुने जा रहे हैं ।
डिस्ट्रिक्ट में सुना जा रहा है कि सदस्यों से मल्टीपल ड्यूज ले लेने के बाद भी मधु सिंह इकट्ठा हुई रकम को मल्टीपल में जमा नहीं करवा रही हैं, उससे लगता है कि उक्त रकम उन्होंने अपने घर-खर्च में इस्तेमाल कर ली है । लोगों का कहना है कि अब जब उनके गवर्नर-काल को पूरा होने में मुश्किल से पाँच-छह दिन बचे हैं, और उन्होंने अभी भी मल्टीपल ड्यूज जमा नहीं करवाए हैं, उससे लगता है कि उनकी कोई आर्थिक मजबूरी होगी - इसलिए उनसे कहने की बजाये, चादर बिछवा कर चंदे के जरिये उक्त रकम इकट्ठा कर लेंगे और डिस्ट्रिक्ट को बदनामी से बचा लेंगे । उल्लेखनीय है कि तरह तरह की बहानेबाजी करके मल्टीपल ड्यूज जमा करवाने से बचने की मधु सिंह की कोशिशों को पहले उनकी राजनीतिक चाल के रूप में देखा/समझा गया था । समझा जा रहा था कि मल्टीपल कन्वेंशन से पहले वह इसलिए मल्टीपल ड्यूज नहीं जमा करवा रही हैं, ताकि उनके डिस्ट्रिक्ट के सदस्यों को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के चुनाव में वोट देने का अधिकार न मिले, और उम्मीदवार के रूप में जितेंद्र चौहान को झटका लगे । जितेंद्र चौहान लेकिन उनसे ज्यादा चतुर निकले, और लायंस इंटरनेशनल के नियम का सहारा लेकर डिस्ट्रिक्ट के सदस्यों के वोटिंग अधिकार ले आए और भारी मतों से विजयी हुए । माना/समझा गया था कि मधु सिंह उसके बाद मल्टीपल ड्यूज जमा करा देंगी, लेकिन मल्टीपल कन्वेशन हुए तीन सप्ताह का समय बीत चुका है - और मधु सिंह ने वह अभी तक जमा नहीं करवाए हैं, और उसके चलते डिस्ट्रिक्ट की बदनामी हो रही है । इसीलिए डिस्ट्रिक्ट में लोगों को कहने का मौका मिला है कि सदस्यों से इकट्ठा हुई मल्टीपल ड्यूज की रकम लगता है कि मधु सिंह ने अपने घर-खर्च में इस्तेमाल कर ली है, इसलिए ड्यूज जमा न करने को लेकर डिस्ट्रिक्ट को बदनामी से बचाने के लिए लोगों के सामने चादर बिछानी/बिछवानी ही पड़ेगी । 
मजे की बात लेकिन यह है कि तरह तरह की बहानेबाजी से मल्टीपल ड्यूज जमा करने/करवाने से बचती/छिपती, और इस तरह से डिस्ट्रिक्ट की बदनामी करवा रहीं मधु सिंह ने निवर्त्तमान मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पारस अग्रवाल के हिसाब-किताब को लेकर मोर्चा खोला हुआ है, और तरह तरह के सवालों के जरिये वह पारस अग्रवाल को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही हैं - और इस काम में उन्हें लगातार कुछेक बड़े नेताओं का सहयोग व समर्थन भी मिल रहा है । उनके अधिकतर सवाल 'बाल की खाल निकालने' वाली प्रवृत्ति के हैं, और सभी का मानना है कि इस प्रवृत्ति के आधार पर हिसाब-किताब यदि देखे गए तो क्लब से लेकर इंटरनेशनल तक के सभी पदाधिकारी 'अपराधी' साबित होंगे । मधु सिंह के सवालों से आभास होता है कि वह पदाधिकारी के रूप में पारस अग्रवाल से उच्च नैतिक आदर्शों की उम्मीद करती हैं । इसमें ऐतराज की कोई बात नहीं है । हर पदाधिकारी से ... हर पदाधिकारी से उच्च नैतिक आदर्शों की उम्मीद की ही जानी चाहिए - लेकिन यहाँ मजेदार सीन यह देखने को मिल रहा है कि उच्च नैतिक आदर्शों की ऐसीतैसी कर रहीं मधु सिंह दूसरे पदाधिकारी से इसकी उम्मीद कर रही हैं । एक 'पापी' दूसरे 'पापी' से पूछ रहा है कि तू पापी क्यों है ? इस मामले में मधु सिंह का सहयोग व समर्थन करने वाले बड़े नेताओं का रवैया और भी शर्मनाक है - उनके मुँह से एक बार भी नहीं फूटा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मधु सिंह को समय से मल्टीपल ड्यूज जमा करवाने चाहिएँ । जाहिर है कि मधु सिंह की सारी 'सक्रियता' निजी खुन्नस से संचालित है । डिस्ट्रिक्ट की राजनीति और व्यवस्था में मधु सिंह को चूँकि पारस अग्रवाल व जितेंद्र चौहान की जोड़ी से मात पर मात मिलती रही है, इसलिए उससे पैदा हुए फ्रस्ट्रेशन को निकालने के लिए उन्होंने पारस अग्रवाल के हिसाब-किताब को मुद्दा बना लिया है । दिलचस्प बात यह है कि मधु सिंह के और पारस अग्रवाल के नजदीकियों की तरफ से एक जैसा ही तर्क सुनने को मिल रहा है, दोनों ही तरफ के लोगों का मानना और कहना है कि दोनों के ही द्वारा बेईमानी करने के सुबूत अभी तक सामने नहीं आए हैं; जो तथ्य सामने हैं उनके आधार पर यही कहा जा सकता है कि दोनों ने ही प्रक्रियागत गलतियाँ की हैं । मधु सिंह यदि समय पर मल्टीपल ड्यूज जमा कर देतीं, और पारस अग्रवाल यदि समय पर अकाउंट दे देते - तो दोनों को ही सवालों और आरोपों का सामना न करना पड़ता । अपनी कमी और गलती को छिपा कर, पारस अग्रवाल को निशाने पर लेकर मधु सिंह ने लेकिन डिस्ट्रिक्ट से लेकर मल्टीपल तक में  अपना मजाक बनवा लिया है । चादर वाले किस्से से लगता है कि उन्हें लेकर अभी और तमाशे देखने को मिलेंगे ।

Tuesday, June 23, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में मल्टीपल के नियम-कानूनों का खुल्लमखुल्ला मजाक बनाने वाले डिस्ट्रिक्ट 321 डी के गवर्नर गुरमीत सिंह मक्कड़ के मल्टीपल का वाइस चेयरमैन बनने में संस्था की पहचान व साख के खराब होने का कारण देखा/बताया जा रहा है

गाजियाबाद । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में अगले लायन वर्ष के पदाधिकारियों के चुनाव में डिस्ट्रिक्ट 321 डी के गवर्नर गुरमीत सिंह मक्कड़ यदि सचमुच वाइस चेयरमैन बने, जैसी कि चर्चा है - तो यह मल्टीपल के इतिहास की अनोखी विरोधाभासी घटना होगी, जिसमें कि एक ऐसा गवर्नर मल्टीपल पदाधिकारी बनेगा, जिसने गवर्नर के रूप में मल्टीपल के नियमों का मजाक बनाने का काम किया है । इसे दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना के रूप में ही देखा/पहचाना जा रहा है कि जिन गुरमीत सिंह मक्कड़ ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की चुनावी प्रक्रिया में अभी करीब डेढ़/दो महीने पहले ही मल्टीपल के नियम-कानून को ठेंगा दिखाया था, वह मल्टीपल के पदाधिकारी बनेंगे । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 321 डी में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए ऐन मौके पर अचानक से प्रस्तुत हुई बलराज कुमार की उम्मीदवारी को लेकर शिकायत थी, कि नियमानुसार वह उम्मीदवार होने की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं और इसलिए उनके नामांकन को रद्द किया जाना चाहिए । इस मामले में डिस्ट्रिक्ट में सुनवाई न होती देख शिकायतकर्ताओं ने मल्टीपल के पदाधिकारियों तक भी शिकायत पहुँचाई, जहाँ उनकी शिकायत को सही माना/पाया गया ।
मल्टीपल की कॉन्स्टीट्यूशन एंड बॉयलॉज कमेटी के चेयरमैन एमआर शर्मा ने रिकॉर्ड्स देख कर साफ शब्दों में कहा कि मल्टीपल व इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार, बलराज कुमार की उम्मीदवारी नहीं बनती है, और यदि उनकी उम्मीदवारी के लिए नामांकन हुआ है तो उसे तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में गुरमीत सिंह मक्कड़ ने लेकिन इतने साफ शब्दों में दिए गए फैसले को रद्दी की टोकरी के हवाले किया और बलराज कुमार की उम्मीदवारी को बना रहने दिया । गुरमीत सिंह मक्कड़ के इस रवैये को रेखांकित करते हुए ही सवाल उठ रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जिस व्यक्ति ने मल्टीपल के फैसले का सम्मान करने/रखने की कोई जरूरत नहीं समझी, उसे मल्टीपल का पदाधिकारी क्यों बनाया जाना चाहिए ? गुरमीत सिंह मक्कड़ के खिलाफ पैसों के गड़बड़ी तथा लूट-खसोट के भी कई गंभीर आरोप हैं । चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए ऑनलाइन हुई डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रजिस्ट्रेशन के नाम पर प्रति प्रतिनिधि 1250 रुपए बसूलने की उनकी कार्रवाई को 'अपनी जेब भरने' की कार्रवाई के रूप में देखा/पहचाना गया है । ड्यूज के नाम पर अन्य गड़बड़झाले करने को लेकर भी गुरमीत सिंह मक्कड़ के खिलाफ गंभीर आरोप हैं ।
गुरमीत सिंह मक्कड़ के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 डी के कई पूर्व गवर्नर्स के साथ-साथ मल्टीपल के अन्य डिस्ट्रिक्ट्स के भी कई लोगों का मानना और कहना है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों का चयन/चुनाव करने वाले वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को कम से कम इतना ध्यान तो रखना ही चाहिए कि लायनिज्म के नाम पर पैसे बनाने तथा नियम-कानूनों की खुली अवहेलना करने वाले लोगों को न चुने - क्योंकि इससे अंततः संस्था की पहचान और साख ही खराब होती है । मजे की बात यह है कि गुरमीत सिंह मक्कड़ का मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन बनना अभी हाल ही में तब तय हुआ, जब इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए गुरमीत सिंह मक्कड़ ने जितेंद्र चौहान को वोट दिलाने की जिम्मेदारी ली । उससे पहले मल्टीपल के वाइस चेयरमैन पद के लिए डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला का नाम चल रहा था । लेकिन इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के चुनाव में जितेंद्र चौहान के लिए ज्यादा फायदेमंद होकर गुरमीत सिंह मक्कड़ ने मल्टीपल काउंसिल के वाइस चेयरमैन का पद मनोज रुहेला से छीन लिया । गुरमीत सिंह मक्कड़ शायद पहले गवर्नर होंगे, जो मल्टीपल के नियम-कानूनों की सीधे-सीधे ऐसीतैसी करने के बावजूद, मल्टीपल के पदाधिकारी बनेंगे !

Sunday, June 21, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में अगले वाइस चेयरमैन पद को लेकर नेताओं के बीच बने असमंजस में मनोज रुहेला की जगह गुरमीत सिंह मक्कड़ का पलड़ा भारी होता हुआ नजर आ रहा है

लखनऊ । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में अगले लायन वर्ष के वाइस चेयरमैन पद पर डिस्ट्रिक्ट 321 डी के गवर्नर गुरमीत सिंह मक्कड़ की ताजपोशी होने की चर्चाओं से डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के गवर्नर मनोज रुहेला के नजदीकियों और समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है । यह झटका इसलिए लगा है, क्योंकि अभी तक अगले वाइस चेयरमैन के रूप में मनोज रुहेला के नाम की चर्चा सुनी जा रही थी । समझा जा रहा था कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में जितेंद्र चौहान के नाम को एंडोर्स करवाने के लिए मनोज रुहेला इसीलिए जोरशोर से लगे हुए थे । उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए जितेंद्र चौहान के पक्ष में बिछाई गई चौसर की तैयारी मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के भावी पदाधिकारियों के चयन/चुनाव से ही शुरू हुई थी । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जितेंद्र चौहान की चुनावी व्यूह रचना में डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन को थोड़ा 'टफ' समझा जा रहा था, क्योंकि इस डिस्ट्रिक्ट के दो बड़े नेताओं में एक गुरनाम सिंह को विनोद खन्ना के साथ नजदीकी के चलते दीपक तलवार के तथा दूसरे नेता केएस लूथरा को तेजपाल खिल्लन के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था । ऐसे में, जितेंद्र चौहान की तरफ से इस डिस्ट्रिक्ट में पकड़ बनाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला को 'साधा' गया । समझा जाता है कि साधने की इसी प्रक्रिया के तहत मनोज रुहेला को अगले वाइस चेयरमैन का पद ऑफर हुआ होगा ।
मनोज रुहेला और उनके नजदीकियों व समर्थकों ने जितेंद्र चौहान के लिए कस कर काम किया, और इस चक्कर में मनोज रुहेला को 'गड़बड़ी करते सुने गए' गुरनाम सिंह से भी भिड़ना पड़ा था । जितेंद्र चौहान की बंपर जीत में मनोज रुहेला की भूमिका को उल्लेखनीय माना/पहचाना गया था । दरअसल इसीलिए, मनोज रुहेला के नजदीकियों और समर्थकों को अब जब यह सुनने को मिल रहा है कि वह अगली मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन नहीं बन रहे हैं, तो उन्हें झटका लगा है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट को लेकर मची आपाधापी में व्यस्त रहने के चलते दरअसल मल्टीपल काउंसिल की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले नेताओं को भी इसका पता नहीं चल पाया कि वाइस चेयरमैन पद के लिए कब मनोज रुहेला की जगह गुरमीत सिंह मक्कड़ का नाम आ गया । इस बारे में, नेताओं ने भावी चेयरमैन क्षितिज शर्मा और भावी सेक्रेटरी राजीव अग्रवाल से टोह लेने की भी कोशिश की, लेकिन इन दोनों ने मामले से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए अपने मुँह बंद ही रखे । इन दोनों के इस रवैये से नेताओं को यह अहसास तो हुआ ही है कि 'खेल' ऊपर के लेबल पर हुआ है, जिसकी जानकारी खेल से जुड़े दूसरे खिलाड़ियों को या तो सचमुच है नहीं, या वह अपना मुँह बंद रखने में ही अपनी भलाई देख रहे हैं ।
जितनी जो जानकारी मिली है, उसे जोड़कर देखने से अनुमान लगाया जा रहा है कि यह खेल इंटरेनशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए हुई वोटिंग से आठ/दस दिन पहले के दिनों का है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट 321 डी के पूर्व गवर्नर और पूर्व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन एसएल कपूर को दीपक तलवार के समर्थन में अचानक से सक्रिय हुआ देख कर जितेंद्र चौहान और उनके नजदीकियों का माथा ठनका था । एसएल कपूर को चूँकि पूर्व प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल के खास नजदीकी के रूप में देखा/पहचाना जाता है, इसलिए एसएल कपूर की सक्रियता के पीछे नरेश अग्रवाल की किसी 'योजना' की आशंका का डर बना । इस डर से निपटने के लिए जितेंद्र चौहान की तरफ से डिस्ट्रिक्ट 321 डी के गवर्नर गुरमीत सिंह मक्कड़ की मदद ली गई । समझा जाता है कि उसी मदद के चक्कर में अगली मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन के पद से मनोज रुहेला की छुट्टी होने का मौका बन गया था । मनोज रुहेला के कुछेक नजदीकियों और समर्थकों को हालाँकि अभी भी उम्मीद है कि अगली मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन मनोज रुहेला ही बनेंगे, लेकिन मल्टीपल की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के बीच जोरदार चर्चा गुरमीत सिंह मक्कड़ के वाइस चेयरमैन बनने की ही है । 

Wednesday, June 3, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में चौतरफा हमलों और दबावों का सामना करने के बावजूद जितेंद्र चौहान का पलड़ा लगातार भारी बना हुआ है, और चुनावी नतीजा उनके ही पक्ष में एकतरफा तौर पर झुका हुआ लग रहा है

नई दिल्ली । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में वोटिंग शुरू होने में अब जब कुछ घंटों का समय बचा है, तब दीपक तलवार की उम्मीदवारी के कमान सँभाले पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर विनोद खन्ना वोट जुटाने तथा अपने वोटों को पक्का करने की बजाये डिस्ट्रिक्ट 321 सी टू की गवर्नर मधु सिंह को आगे करके मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन विनय मित्तल को घेरने/फँसाने की चाल चल रहे हैं । इन बातों से लग रहा है कि विनोद खन्ना ने वोटिंग शुरू होने से पहले ही अपनी हार मान ली है, और उनकी वोट जुटाने तथा अपने वोट डलवाने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है । मजे की बात यह रही है कि विनोद खन्ना के कारण ही दीपक तलवार की उम्मीदवारी का ग्राफ तेजी से ऊँचा उठा और तेजपाल खिल्लन चुनावी दौड़ से बाहर ही हो गए लग रहे हैं, लेकिन विनोद खन्ना के कारण ही दीपक तलवार की उम्मीदवारी जितेंद्र चौहान से पिछड़ गई है । दरअसल विनोद खन्ना यह समझने में असफल रहे कि उन्हें जितेंद्र चौहान से लड़ना है, या विनय मित्तल से । उनकी तरफ से कभी जितेंद्र चौहान के 'देशी व्यक्तित्व' तथा अंग्रेजी ज्ञान को निशाना बनाने के प्रयास दिखे तो कभी उनके निशाने पर विनय मित्तल रहे । विनय मित्तल को तरह तरह से घेरने की उनकी कोशिशें विफल होती रहीं, लेकिन फिर भी वह अपनी एनर्जी, अपना समय और अपनी प्रतिभा विनय मित्तल पर ही खर्च करते रहे । इस के चलते, दीपक तलवार के लिए वोट जुटाने का काम करने का उन्हें मौका ही नहीं मिला और वह जितेंद्र चौहान के लिए कोई मुश्किल पैदा नहीं कर सके । 
जितेंद्र चौहान को उनके ही डिस्ट्रिक्ट में घेरा जा सकता था; क्योंकि वहाँ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर से लेकर कई एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स जितेंद्र चौहान के खिलाफ हैं; विनोद खन्ना यदि कोशिश करते तो वह जितेंद्र चौहान के डिस्ट्रिक्ट में दीपक तलवार को अच्छे खासे वोट दिलवाने का इंतजाम कर सकते थे - विनोद खन्ना लेकिन इस पर ध्यान देने की बजाये डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के जरिये विनय मित्तल को घेरने की कोशिशों में जुटे रहे । विनय मित्तल के डिस्ट्रिक्ट में विरोधी नेताओं की खुन्नस विनय मित्तल से है, विनोद खन्ना ने लेकिन इस तथ्य पर ध्यान ही नहीं दिया और विनय मित्तल को निशाना बनाने की अपनी कोशिशों में उनके विरोधियों के साथ तालमेल बनाने का कोई प्रयास नहीं किया । इस चक्कर में विनोद खन्ना न तो विनय मित्तल को दबाव में ले पाए और न दीपक तलवार के लिए वोटों की व्यवस्था कर सके । इसका नतीजा यह है कि जितेंद्र चौहान को दोनों डिस्ट्रिक्ट्स में ही पाँच सौ से अधिक वोट मिलने की संभावना बन रही है, और दीपक तलवार को चिल्लर वोटों से ही काम चलाना पड़ेगा । जितेंद्र चौहान और विनय मित्तल ने शुरू से ही अपने समर्थकों को एकजुट करने, उनके वोट पक्के करने तथा उनके वोट पड़ने की व्यवस्था करने के काम पर ध्यान दिया । विनय मित्तल यह सब करने में बड़े माहिर हैं । कुछेक लोगों को लगता भी है कि विनोद खन्ना ने विनय मित्तल को निशाने पर दरअसल इसलिए ही लिया हुआ था, ताकि उन्हें उलझाए रखा जाये और उन्हें अपने समर्थकों को एकजुट करने/रखने तथा उनके वोट पक्के करने व उन्हें डलवाने की व्यवस्था करने का काम करने का मौका ही न मिल सके ।
विनय मित्तल लेकिन राजनीति करने तथा व्यवस्था बनाने का 'कॉम्बो' हैं । यह बड़ा दुर्लभ गुण है और बहुत ही कम लोगों में ऐसा हुनर मिलता है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की मौजूदा चुनावी लड़ाई में उनके लिए काम आसान इसलिए भी रहा, क्योंकि यह काम उन्हें जितेंद्र चौहान के लिए करना रहा - जिनका पहले से एक बड़ा और प्रभावी नेटवर्क है । जितेंद्र चौहान और विनय मित्तल की जोड़ी - एक और एक मिलकर दो नहीं, बल्कि ग्यारह बनते/बनाते हैं । इसीलिए चौतरफा हमलों और दबावों का सामना करने के बावजूद इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में जितेंद्र चौहान का पलड़ा लगातार भारी बना रहा है, और इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव उनके ही पक्ष में एकतरफा तौर पर झुका हुआ लग रहा है । एक उम्मीदवार के रूप में जितेंद्र चौहान का व्यक्तित्व और बायोडाटा दीपक तलवार के मुकाबले कमजोर पड़ता है, लेकिन जितेंद्र चौहान और विनय मित्तल ने चुनाव की ऐसी पिच तैयार की कि जितेंद्र चौहान की कमजोरी मुद्दा ही नहीं बन सकी । कुछेक लोगों को लगता है कि विनय मित्तल ने जानबूझ कर कुछेक ऐसी 'कार्रवाइयाँ' की, जिससे कि विरोधियों के निशाने पर वह आ जाएँ और जितेंद्र चौहान की कमजोरियाँ मुद्दा न बन सकें । इस बार के इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव का मजेदार सीन यह है कि उम्मीदवार जितेंद्र चौहान हैं, उनके विरोधियों को लड़ना उनसे है - लेकिन लड़ वह विनय मित्तल से रहे हैं ।
विनोद खन्ना के प्रभाव से दीपक तलवार को डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन, 321 बी टू, 321 डी और 321 ई में अच्छा समर्थन मिलने की उम्मीद है, लेकिन जितेंद्र चौहान और विनय मित्तल की जोड़ी की रणनीति इन डिस्ट्रिक्ट्स में दीपक तलवार को अच्छी टक्कर देती हुई दिख रही है - जिस कारण दीपक तलवार का 321 सी वन और 321 सी टू में जितेंद्र चौहान को मिलने वाली एकतरफा बढ़त के सामने टिक पाना मुश्किल दिख रहा है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में करीब ढाई हजार वोटों को मान्यता मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है । उम्मीद की जा रही है कि 2000 से 2200 के बीच वोट पड़ेंगे । जितेंद्र चौहान के नजदीकियों और समर्थकों को उम्मीद है कि करीब 55 प्रतिशत वोट जितेंद्र चौहान को मिल जायेंगी और जितेंद्र चौहान एक बड़े अंतर से चुनाव जीत लेंगे ।   

Monday, June 1, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में झगड़ों और विवादों में फँसे लोगों के मदद की उम्मीद में विनोद खन्ना से जुड़ने की कोशिशें दीपक तलवार की उम्मीदवारी को लाभ पहुँचाती दिख रही हैं, और तेजपाल खिल्लन के लिए चुनावी मुकाबले में टिके/बने रहने को मुश्किल बना दे रही हैं 

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट 321 एफ के इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव की प्रक्रिया से बाहर होने की संभावना ने तेजपाल खिल्लन की उम्मीदवारी को खासी तगड़ी चोट पहुँचाई है, और उसका फायदा दीपक तलवार की उम्मीदवारी को मिलता दिख रहा है । तेजपाल खिल्लन को डिस्ट्रिक्ट 321 एफ से अच्छे वोट मिलने की संभावना थी; ऐसे में, डिस्ट्रिक्ट 321 एफ को वोट देने के अधिकार से वंचित किए जाने की स्थिति में तेजपाल खिल्लन की उम्मीदवारी को सीधा घाटा होने के हालात बन गए हैं । इस हालात ने दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में तेजपाल खिल्लन के समर्थकों और शुभचिंतकों को निराश व हतोत्साहित किया है - और वह तेजपाल खिल्लन के लिए तीसरे नंबर की सीट पक्की होती देखने लगे हैं । ऐसे में, दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के तेजपाल खिल्लन के समर्थक और शुभचिंतक यह भी सोचने लगे हैं कि तेजपाल खिल्लन को जब तीसरे नंबर पर ही रहना है, तो उन्हें वोट देकर अपना वोट खराब करने का भला क्या फायदा ? इस सोच के चलते, तेजपाल खिल्लन को सबसे तगड़ा झटका डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू तथा डिस्ट्रिक्ट 321 डी में लगता दिख रहा है, जिन्हें उनके बड़े वोट-बैंक के रूप में देखा/पहचाना जाता है । इन दोनों डिस्ट्रिक्ट्स में झगड़ेबाजी भी है, जो निश्चित रूप से लायंस इंटरनेशनल कार्यालय जायेगी ही - उसके चलते विरोधी खेमे के लोगों को लगता है कि तेजपाल खिल्लन की बजाये दीपक तलवार के साथ जुड़ पर वह लायंस इंटरनेशनल कार्यालय में अपने पक्ष में समर्थन जुटा सकते हैं ।
लायंस राजनीति और व्यवस्था में अभी तक सत्ता पक्ष चूँकि एकजुट रहता था, इसलिए सत्ता पक्ष से नाराज होने/रहने वाले लोगों को एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती थी - जो उनकी शिकायतों को लीडरशिप के सामने उठा सके । तेजपाल खिल्लन 'वैसे' व्यक्ति का रोल निभाने के कारण विरोधियों के नेता बन बैठे थे । लेकिन अब जब सत्ता पक्ष ही दो-फाड़ हो बैठा है, तो विरोधियों को सत्ता-पक्ष के 'विरोधी' हो गए पक्ष के साथ जुड़ने में ज्यादा फायदा दिख रहा है । इस प्रक्रिया में, सत्ता-पक्ष से नाराज होने/रहने वाले लोग तेजपाल खिल्लन को छोड़ कर विनोद खन्ना से जुड़ने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं । दरअसल, विनोद खन्ना चूँकि इंटरनेशनल डायरेक्टर रहे हैं और सत्ता-पक्ष के दाँव-पेंचों को जानते/समझते हैं, इसलिए सत्ता से नाराज और परेशान होने/रहने वाले लोगों को लग रहा है कि विनोद खन्ना ही उनके वास्तविक मददगार हो सकते हैं । इस सोच के चलते विनोद खन्ना से जुड़ने की लोगों की कोशिश इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी मुकाबले में दीपक तलवार की उम्मीदवारी को लाभ पहुँचाती दिख रही है, और तेजपाल खिल्लन के लिए चुनावी मुकाबले में टिके/बने रहने को मुश्किल बना दे रही है  । 
दीपक तलवार और तेजपाल खिल्लन की उम्मीदवारी के अभियान की तुलना करने पर एक बड़ा फर्क और दिखता है - तेजपाल खिल्लन का अभियान अकेले उन्हीं कंधों पर टिका है, जबकि दीपक तलवार के अभियान की कमान विनोद खन्ना ने सँभाली हुई है, जिन्हें एक दूसरे पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जगदीश गुलाटी का समर्थन भी मिलता सुना/देखा जा रहा है । कुछेक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स का समर्थन भी उनके साथ बताया/सुना जा रहा है । जितेंद्र चौहान के डिस्ट्रिक्ट के गवर्नर को ही दीपक तलवार की उम्मीदवारी के पक्ष में खुलकर काम करते हुए देखा जा रहा है । दूसरी तरफ, तेजपाल खिल्लन को डिस्ट्रिक्ट्स में ऐसे लोगों का समर्थन मिल रहा है जो अपने अपने डिस्ट्रिक्ट में बदनाम और थकेले नेता के रूप में देखे पहचाने जाते हैं, और जो बकवास करने तथा बड़बोले बोल बोलने वाले के रूप में ही जाने/पहचाने जाते हैं - और जो अपने खुद के चुनाव नहीं जीत सके हैं और न अपने उम्मीदवार को चुनाव जितवा सके हैं । सहज ही समझा जा सकता है कि ऐसे लोग तेजपाल खिल्लन की भला क्या मदद कर पायेंगे ? तेजपाल खिल्लन के मुकाबले दीपक तलवार को बढ़त बनाते देख दीपक तलवार के समर्थक खासे उत्साहित हुए हैं, उनमें से कुछेक को लगने लगा है कि दीपक तलवार चुनाव जीत भी सकते हैं । हालाँकि दीपक तलवार के ही कई समर्थकों व शुभचिंतकों का मानना और कहना है कि जितेंद्र चौहान की चुनाव पर जैसी मजबूत पकड़ है, और विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में उनके समर्थकों की जैसी सक्रियता और तैयारी है, उसका मुकाबला करना अभी भी बड़ी चुनौती है । लेकिन तेजपाल खिल्लन की उम्मीदवारी के मुकाबले बढ़त बना कर दीपक तलवार की उम्मीदवारी ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी परिदृश्य को दिलचस्प जरूर बना दिया है ।

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला को लग रहा है कि जितेंद्र चौहान को डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट दिलवाने की उनकी मुहिम को डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह फेल करने में लगे हुए हैं; और गुरनाम सिंह की तमाम सफाइयों के बावजूद मनोज रुहेला उनकी तरफ से संतुष्ट और आश्वस्त नहीं हो पा रहे हैं

लखनऊ । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में जितेंद्र चौहान को डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट दिलवाने के चक्कर में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह से ही भिड़ गए हैं । मनोज रुहेला का आरोप है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी का समर्थन करने का फैसला गुरनाम सिंह की सहमति और भागीदारी से ही लिया/किया गया था, लेकिन गुरनाम सिंह अब इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए दीपक तलवार को वोट दिलवाने का प्रयास कर रहे हैं । गुरनाम सिंह तरह तरह से मनोज रुहेला को समझा रहे हैं कि वह दीपक तलवार को वोट दिलवाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं, लेकिन मनोज रुहेला उन पर विश्वास नहीं कर रहे हैं और इस मामले में अपनी नाराजगी और विरोध जताने/दिखाने गुरनाम सिंह के घर तक जा पहुँचे । गुरनाम सिंह ने कुछेक लोगों की गवाहियाँ दिलवा कर भी मनोज रुहेला को आश्वस्त करने की कोशिश की - लेकिन लगता नहीं है कि मनोज रुहेला उनके द्वारा करवाई गई गवाहियों से संतुष्ट हुए हैं । जितेंद्र चौहान को वोट दिलवाने की मुहिम में मनोज रुहेला को दरअसल अगले महीने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार संभालने वाले कमल शेखर गुप्ता का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है, इसलिए भी उन्हें शक हुआ है कि कमल शेखर गुप्ता ने कहीं गुरनाम सिंह की शह पर ही तो उनके अभियान से दूरी नहीं बनाई हुई है । मनोज रुहेला के लिए विशाल सिन्हा की वह घोषणा भी मुसीबत बनी हुई है, जिसमें दावा किया गया है कि जितेंद्र चौहान इंटरनेशनल डायरेक्टर चुने जाने के बाद जगदीश अग्रवाल को 'न्याय' दिलवायेंगे । विशाल सिन्हा के इस दावे के चलते जगदीश अग्रवाल के खिलाफ वोट करने/करवाने वाले लोग जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी के विरोध में होते सुने जा रहे हैं ।
मनोज रुहेला जिस तरह से इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में लगे हुए हैं, और डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट जितेंद्र चौहान को दिलवाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं - उसके चलते डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा के रूप में गर्म है कि मनोज रुहेला को जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी में इतनी दिलचस्पी आखिर क्यों है ? मनोज रुहेला को अगली मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन का पद मिलने की चर्चा है, और यह पद उन्हें जितेंद्र चौहान की बदौलत ही मिलने की बात सामने आई है - इस नाते लोगों को यह तो लग रहा है कि मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन का पद दिलवाने का अहसान उतारने के लिए ही मनोज रुहेला ने डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट जितेंद्र चौहान को दिलवाने का जिम्मा ले लिया; किंतु फिर भी डिस्ट्रिक्ट के कई लोगों के लिए जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी के प्रति मनोज रुहेला का रवैया काफी पहेली भरा है । इस मामले में जितेंद्र चौहान जिस तरह से गुरनाम सिंह को निशाना बना रहे हैं, उससे उक्त पहेली और उलझती हुई सी लग रही है । गुरनाम सिंह को निशाना बनाने के पीछे मनोज रुहेला के पास असल में एक बड़ी वजह यह है कि वह अच्छी तरह जानते हैं कि दीपक तलवार की उम्मीदवारी के प्रमुख झंडावरदार पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर विनोद खन्ना के साथ गुरनाम सिंह के बहुत खास संबंध हैं, और दोनों ही जरूरत के समय एक-दूसरे के काम आते रहे हैं । ऐसे में, डिस्ट्रिक्ट में जहाँ कहीं मनोज रुहेला को दीपक तलवार के समर्थन के प्रति आवाज सुनाई देती है, उन्हें लगता है कि उस आवाज को गुरनाम सिंह की शह मिल रही है ।
गुरनाम सिंह का कहना है कि विनोद खन्ना से उनकी वर्षों पुरानी दोस्ती है, तो है - उसे वह किसी चुनाव के लिए खत्म थोड़े ही कर देंगे; लेकिन उनकी दोस्ती का हवाला देकर उन पर यह आरोप लगाना उचित नहीं है कि वह विनोद खन्ना के उम्मीदवार दीपक तलवार को वोट दिलवाने के लिए कोई प्रयास कर रहे हैं । गुरनाम सिंह की तमाम सफाइयों के बावजूद मनोज रुहेला उनकी तरफ से संतुष्ट और आश्वस्त नहीं हो पा रहे हैं । उन्हें लगातार यही लग रहा है कि जितेंद्र चौहान को डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट दिलवाने की उनकी मुहिम को गुरनाम सिंह फेल करने में लगे हुए हैं । मनोज रुहेला के नजदीकियों से ही सुनने को मिला है कि मनोज रुहेला लगातार जितेंद्र चौहान के संपर्क में रहते हैं, और उनसे पूछते रहते हैं कि उनके डिस्ट्रिक्ट से उन्हें कहीं से किसी और उम्मीदवार के समर्थन की आवाजें तो सुनाई नहीं दे रही हैं । समझा जाता है कि मनोज रुहेला को कहीं से यह फीडबैक जरूर मिला है कि दीपक तलवार को उनके डिस्ट्रिक्ट में समर्थन और वोट मिल रहा है । इससे मनोज रुहेला को पक्का विश्वास हो गया कि उनके डिस्ट्रिक्ट में दीपक तलवार को जो भी समर्थन और वोट मिलने की संभावना बन रही है, उसके पीछे अवश्य ही गुरनाम सिंह का हाथ है । मनोज रुहेला ने इसे लेकर गुरनाम सिंह के घर जाकर अपनी नाराजगी और शिकायत दर्ज कराई है । देखना दिलचस्प होगा कि गुरनाम सिंह पर दबाव बना कर मनोज रुहेला डिस्ट्रिक्ट में दीपक तलवार को वोट मिलने की संभावना पर सचमुच रोक लगा पाते हैं या नहीं ?     

Friday, May 29, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में दीपक तलवार तथा तेजपाल खिल्लन की दूसरे नंबर पर आने की कोशिशों ने मल्टीपल के राजनीतिक समीकरणों में बड़े उलटफेर के संकेत दिए और पूर्व प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल की मुसीबतों को बढ़ाया

नई दिल्ली । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में छिड़ी लड़ाई में तीन में से दो उम्मीदवारों - दीपक तलवार और तेजपाल खिल्लन ने जिस तरह से अपनी कोशिशें अपने आप को दूसरे नंबर पर लाने/रखने तक टिका दी हैं, उसके चलते मल्टीपल का चुनावी परिदृश्य खासा रोमांचपूर्ण हो गया है । दअरसल इन्हें लग गया है कि इनके लिए चुनाव जीतना तो मुश्किल क्या, असंभव ही है और ऐसे में यह दूसरे नंबर पर आकर मल्टीपल में अपनी राजनीतिक इज्जत बचा सकते हैं । इस स्थिति ने तीसरे उम्मीदवार जितेंद्र चौहान को बड़ी राहत पहुँचाई है । किसी भी उम्मीदवार के लिए इससे बड़ा वरदान और भला क्या होगा कि उसके प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार उससे लड़ने की बजाये आपस में ही लड़ने लगें । जितेंद्र चौहान और उनके समर्थकों का यह डर भी कुछ हद तक दूर हुआ लग रहा है, जिसमें कानूनी दाँवपेंच के जरिये चुनाव को रद्द करवाने की आशंका है । मजे की बात यह है कि दीपक तलवार तथा तेजपाल खिल्लन और इन दोनों के समर्थक अभी तक चुनाव को रद्द करवाने के लिए तरह तरह के प्रपंच रच रहे थे; लेकिन अब इन्होंने वोट जुटाने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं । चुनाव रद्द करने/करवाने के लिए जो जो तर्क दिए गए, मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन विनय मित्तल ने जिस सफाई, बेबाकी और पारदर्शिता के साथ उनके जबाव दिए - उससे दबाव बना कर चुनाव रद्द करवाने की योजना विफल हो गई है, और अब सभी को चुनाव में जुटना पड़ रहा है ।
असल में, इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव रद्द करवाने की कोशिशों के चलते दीपक तलवार और तेजपाल खिल्लन तथा इन दोनों के समर्थक नेताओं की मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में इतनी बदनामी हो चुकी है, कि इन्हें अब चुनाव लड़ने में ही अपनी भलाई नजर आ रही है । दीपक तलवार की तरफ से पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर विनोद खन्ना ने चुनाव रद्द करवाने को लेकर मोर्चा खोला हुआ था - लेकिन अब उनकी कोशिश है कि दीपक तलवार को तेजपाल खिल्लन से ज्यादा वोट तो मिलें ही । दीपक तलवार यदि तीसरे नंबर पर रहे, तो दीपक तलवार का तो कुछ नहीं बिगड़ेगा - विनोद खन्ना की सारी राजनीति चौपट जरूर हो जाएगी । दूसरी तरफ, मौजूदा परिस्थिति में तेजपाल खिल्लन को यह मौका दिख रहा है कि वह दीपक तलवार से ज्यादा वोट लेकर अपने आप को मल्टीपल में विनोद खन्ना से बड़ा नेता साबित कर सकें । दरअसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के चक्कर में विनोद खन्ना की पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल के साथ जो दूरी बनी है, उस दूरी में अपने आप को फिट करने के लिए तेजपाल खिल्लन को दीपक तलवार से ज्यादा वोट पाना जरूरी लग रहा है ।
मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद को लेकर छिड़ी लड़ाई ने नरेश अग्रवाल को भारी मुसीबत में फँसा दिया है । परिवार के बड़े बुजुर्ग के रूप में वह लगातार कोशिश कर रहे हैं कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चक्कर में मल्टीपल का माहौल न बिगड़े - लेकिन कोई भी उनकी सुन ही नहीं रहा है । नरेश अग्रवाल के लिए सबसे बड़े झटके की बात यह हुई है कि इस चुनावी चक्कर में उनके सबसे खास विनोद खन्ना ही उनसे दूर हो गए हैं । विनोद खन्ना के नजदीकियों का कहना है कि विनोद खन्ना इस बात पर उखड़ गए कि जितेंद्र चौहान को इंटरनेशनल डायरेक्टर बनाने की 'योजना' से पहले तो उन्हें अलग-थलग रखा गया और फिर जितेंद्र चौहान की तरफ से प्रचारित किया गया कि विनोद खन्ना के पास विकल्प ही क्या होगा - तेजपाल खिल्लन के साथ तो वह जायेंगे नहीं, और अंततः उनके समर्थन में ही आने के लिए मजबूर होंगे । इससे ही नाराज होकर विनोद खन्ना ने दीपक तलवार को उम्मीदवार बना/बनवा दिया । नरेश अग्रवाल ने दीपक तलवार की उम्मीदवारी वापस करवाने के लिए प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से कई प्रयास कर लिए हैं, लेकिन विनोद खन्ना के रवैये के चलते उनके प्रयास विफल ही हुए हैं । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए छिड़े/बने चुनावी चक्कर ने प्रत्येक पक्ष को इस तरह 'घेर' लिया है कि मामला हार-जीत से बड़ा हो गया है, और जो मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के राजनीतिक समीकरणों पर गुणात्मक असर डालेगा ।

Saturday, April 25, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 सी टू के पूर्व गवर्नर जितेंद्र चौहान ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अपना रास्ता साफ करने के उद्देश्य से दीपक तलवार की उम्मीदवारी को वापस करवाने की कोशिशों के साथ-साथ अपने डिस्ट्रिक्ट के सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में डमी उम्मीदवारों को इस्तेमाल करने का तरीका अपनाया है क्या ?

आगरा । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए दूसरी बार प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी को सफल होता देखने की उम्मीद रखे सुनीता बंसल और उनके समर्थकों को विश्वास तो है कि ऐन मौके पर अचानक से प्रस्तुत हुई अनिल अग्रवाल व तरुण अग्रवाल की उम्मीदवारी वापस हो जाएगी - और सुनीता बंसल निर्विरोध सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुन ली जायेंगी, लेकिन अपने इस विश्वास को लेकर वह पूरी तरह आश्वस्त भी नहीं हैं । सुनीता बंसल के समर्थकों का मानना और कहना है कि अनिल अग्रवाल और तरुण अग्रवाल की उम्मीदवारी के पीछे जो नेता हैं, वह भी जान/समझ रहे हैं कि यह दोनों या इनमें से कोई एक यदि सचमुच उम्मीदवार बना भी रहा तो उसे डिस्ट्रिक्ट में समर्थन तो नहीं ही मिलेगा और वह पराजित ही होगा - इसलिए इन्हें उम्मीदवार बनाये रख कर कोई फायदा नहीं होगा और बेवजह फजीहत ही होगी, इस कारण इनकी उम्मीदवारी वापस करवाने में ही उनका लाभ है । सुनीता बंसल के समर्थकों का कहना है कि अनिल अग्रवाल व तरुण अग्रवाल की उम्मीदवारी सुनीता बंसल पर दबाव बनाने तथा डिस्ट्रिक्ट में अपनी अपनी चौधराहट 'दिखाने' की कुछेक नेताओं की कोशिशों का नतीजा है, और डिस्ट्रिक्ट के अधिकतर लोग इन्हें 'डमी' उम्मीदवार के रूप में ही देख रहे हैं । उल्लेखनीय है कि इन दोनों उम्मीदवारों में से एक को गवर्नर-पति विश्वदीप सिंह तथा दूसरे को जितेंद्र चौहान के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । सुनीता बंसल के समर्थकों के अनुसार, विश्वदीप सिंह ने तो डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के लिए सुनीता बंसल द्वारा किए गए एक कमिटमेंट को पूरा करवाने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से उम्मीदवार खड़ा करके सुनीता बंसल की राह में रोड़े डालने का काम किया है, तो जितेंद्र चौहान ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में सुनीता बंसल की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं से समर्थन के लिए सौदेबाजी करने के इरादे से उम्मीदवार खड़ा कर दिया गया है ।
जितेंद्र चौहान को दरअसल डर है कि सुनीता बंसल की उम्मीदवारी के समर्थक नेता इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में तेजपाल खिल्लन और दीपक तलवार की उम्मीदवारी का समर्थन कर सकते हैं, और उसके चलते इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उनके द्वारा तैयार किया गया चुनावी-समीकरण गड़बड़ा सकता है । सुनीता बंसल की उम्मीदवारी के समर्थकों के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले, डिस्ट्रिक्ट 321 सी टू के कुछेक पूर्व गवर्नर्स नेताओं की तरफ से यह लगातार सुनने को मिल ही रहा है कि जितेंद्र चौहान लीडरशिप के जिन नेताओं के भरोसे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए मल्टीपल में एंडोर्समेंट लेने की उम्मीद कर रहे हैं, उन नेताओं ने तो डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर दीपक तलवार को उम्मीदवार बना/बनवा दिया है - ऐसे में, उनके लिए तो मौका खत्म हो जाता है । उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं - जितेंद्र चौहान, दीपक तलवार और तेजपाल खिल्लन । इनमें जितेंद्र चौहान और दीपक तलवार को लीडरशिप के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है, और तेजपाल खिल्लन विरोधी नेताओं के भरोसे मैदान में हैं । मल्टीपल के विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के नेताओं के बीच पैठ और सक्रियता के हिसाब से लोगों को जितेंद्र चौहान का पलड़ा भारी लगता है, लेकिन दीपक तलवार की उम्मीदवारी उनके भारीपन को हल्का करती नजर आ रही है । लीडरशिप खेमे के इस आपसी 'झगड़े' का तेजपाल खिल्लन फायदा उठाने की फिराक में हैं । तेजपाल खिल्लन की यह फिराक जितेंद्र चौहान को उनके अपने डिस्ट्रिक्ट में ही घेरने का काम करती है । लीडरशिप से नजदीकी रखने वाले डिस्ट्रिक्ट के कुछेक पूर्व गवर्नर्स नेता जितेंद्र चौहान से विरोध रखने के कारण दीपक तलवार के साथ जुड़ सकते हैं - इस तरह, जितेंद्र चौहान अपने ही डिस्ट्रिक्ट में दोतरफा रूप में घिरे नजर आ रहे हैं । संयोग से, दोनों तरफ के उनके विरोधी नेता सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए प्रस्तुत सुनीता बंसल की उम्मीदवारी के समर्थक हैं । समझा जाता है कि उन समर्थकों को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की अपनी उम्मीदवारी के समर्थन में लाने/करने की 'सौदेबाजी' करने के लिए ही जितेंद्र चौहान ने सुनीता बंसल की उम्मीदवारी के रास्ते में बाधा खड़ी करने का उपक्रम किया है ।
जितेंद्र चौहान की तरफ से यह दावा भी सुना जा रहा है कि लीडरशिप के नेताओं ने उन्हें दीपक तलवार की उम्मीदवारी को वापस करने/करवाने का भरोसा दिया हुआ है, इसलिए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए लीडरशिप का एकतरफा और पूर्ण समर्थन उन्हें ही मिलेगा । कहा/सुना जा रहा है कि पिछले दिनों जितेंद्र चौहान को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उम्मीदवारी को लेकर जब असमंजस में और अनमना-सा देखा जा रहा था, तब लीडरशिप के कुछेक नेताओं ने दीपक तलवार को उम्मीदवारी के लिए तैयार किया था; उन्हीं नेताओं का कहना है कि दीपक तलवार भले व्यक्ति हैं - इसलिए अब जब उनसे अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए कहा जायेगा, तो वह इंकार नहीं करेंगे और जितेंद्र चौहान के लिए रास्ता छोड़ देंगे । हालाँकि यह सब अभी अनुमान की बातें हैं और धीरे धीरे ही स्थितियाँ स्पष्ट होंगी कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति का ऊँठ किस करवट बैठ रहा है ? जितेंद्र चौहान की इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उम्मीदवारी के तार चूँकि उनके डिस्ट्रिक्ट में होने वाले सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव से भी जुड़े हुए हैं, इसलिए सुनीता बंसल और उनके समर्थकों को भी अभी इंतजार करना पड़ेगा कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में जिन्हें वह डमी उम्मीदवार मान/समझ रहे हैं, वह सचमुच डमी ही हैं - और या उम्मीदवार बने रह कर उन्हें चुनावी मुकाबले के लिए मजबूर करेंगे ?

Tuesday, January 28, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में उम्मीदवार के रूप में बिना कुछ किए-धरे इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने की जितेंद्र चौहान की कोशिशों में मल्टीपल की चुनावी राजनीति के बड़े नेता अपने आप को ठगा हुआ पा रहे हैं 

आगरा । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी को लेकर ढीलाढाला रवैया अपनाने के चलते जितेंद्र चौहान ने मल्टीपल के बड़े नेताओं को खासा संकट में डाल दिया है, और उन्हें इस संकट से निकलने का कोई उपाय भी नहीं सूझ रहा है । मल्टीपल में यूँ तो जितेंद्र चौहान को ही इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के सबसे मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है, और मल्टीपल के बड़े नेताओं का भी समर्थन उन्हें है - लेकिन चूँकि वह खुद अपनी उम्मीदवारी को लेकर सक्रिय नहीं हैं, इसलिए मल्टीपल के नेताओं को डर हो रहा है कि जितेंद्र चौहान के ढीलेढाले रवैये के कारण कहीं कोई विरोधी उम्मीदवार फायदा न उठा ले जाए । इसीलिए मल्टीपल के बड़े नेताओं ने वैकल्पिक उम्मीदवार की तलाश भी शुरू कर दी है; हालाँकि उनकी तलाश में कई 'अगर' और 'मगर' जुड़े हुए हैं और फिलहाल उनकी तलाश पूरी होती हुई नहीं दिख रही है । मल्टीपल के बड़े नेता अपनी तलाश में अच्छे से इसलिए जुट भी नहीं पा रहे हैं, क्योंकि जितेंद्र चौहान ने अभी मैदान छोड़ा नहीं है और नेता लोग भी अभी जितेंद्र चौहान को छोड़ना नहीं चाहते हैं । मजे की बात यह भी है कि जितेंद्र चौहान के ढीलेढाले रवैये और मल्टीपल के बड़े नेताओं की असमंजसता के कारण बनी स्थिति का फायदा उठाने की कोई कोशिश तेजपाल खिल्लन और या अरविंद संगल जैसे विरोधी उम्मीदवारों की तरफ से भी होती नहीं दिख रही है । मल्टीपल के बड़े नेताओं की वैकल्पिक उम्मीदवार की तलाश में अरुण मित्तल के नाम की चर्चा चली भी थी, लेकिन अपने डिस्ट्रिक्ट में मुकेश गोयल के साथ राजनीतिक नजदीकियत रखने/'दिखाने' की उनकी कोशिशों को देखते हुए उक्त चर्चा में उनका नाम तुरंत से कट भी गया ।
जितेंद्र चौहान के ढीलेढाले रवैये ने मल्टीपल के बड़े नेताओं के साथ-साथ उनके नजदीकियों को भी हैरान किया हुआ है । किसी के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि जितेंद्र चौहान के लिए सारा मामला जब पूरी तरह से आसान बना हुआ है, तब फिर वह कोई सक्रियता नहीं दिखा कर - अपने लिए खुद ही मुश्किलें क्यों पैदा कर रहे हैं ? उनके कुछेक नजदीकियों का अनुमान है कि चूँकि सारा मामला बहुत आसान है, इसलिए जितेंद्र चौहान को लग रहा है कि उन्हें कुछ भी करने की जरूरत भला क्या है - और वह तो घर बैठे ही इंटरनेशनल डायरेक्टर बन जायेंगे । नजदीकियों को लगता है कि जितेंद्र चौहान इसलिए भी चुप बैठे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वह यदि उम्मीदवार के रूप में सक्रिय होते हैं, तो छोटे/बड़े नेता उनकी जेब ढीली करवाने में लग जायेंगे । नजदीकियों का कहना है कि जितेंद्र चौहान इंटरनेशनल डायरेक्टर तो बनना चाहते हैं, लेकिन उसके लिए अपना ज्यादा समय और पैसा खर्च नहीं करना चाहते हैं । जितेंद्र चौहान को यह भी समझ में आ रहा है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद को लेकर मल्टीपल में राजनीतिक समीकरण के जो हालात बने हुए हैं, उनमें बड़े नेताओं के सामने उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने/बनवाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है - इसलिए वह निश्चिंत होकर बैठे हैं ।
मल्टीपल में तेजपाल खिल्लन, अरविंद संगल तथा अरुण मित्तल को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के अन्य संभावित उम्मीदवारों के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । इन तीनों में तेजपाल खिल्लन और अरविंद संगल मल्टीपल के बड़े नेताओं की आँखों में बुरी तरह खटकते हैं; और माना/समझा जाता है कि बड़े नेता इन्हें तो किसी भी कीमत पर इंटरनेशनल डायरेक्टर नहीं बनने देंगे । इन दोनों को भी इस बात का पता है, और इसी कारण से यह दोनों अपनी अपनी उम्मीदवारी बनाये रखने के बावजूद उम्मीदवार के रूप में जरा भी सक्रिय नहीं हैं । अरुण मित्तल के जरूर मल्टीपल के बड़े नेताओं के साथ अच्छे संबंध हैं और इन्हीं अच्छे संबंधों के कारण बड़े नेताओं के बीच जब जितेंद्र चौहान के अलावा दूसरे उम्मीदवार की खोज शुरू हुई, तो अरुण मित्तल का नाम लिया/सुना गया । लेकिन अपने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में अरुण मित्तल जिस तरह से मुकेश गोयल के नजदीक होते गए और 'दिख' रहे हैं, उसके चलते बड़े नेताओं ने उनके नाम पर फिर विराम लगा दिया । उल्लेखनीय है कि अपने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में अरुण मित्तल ने पहले तटस्थ रहने के संकेत दिए थे, और वह दोनों खेमों के आयोजनों में नजर आ रहे थे - लेकिन फिर वह मुकेश गोयल की तरफ ही पूरी तरह शिफ्ट हो गए । मल्टीपल की चुनावी राजनीति के खिलाड़ियों के बीच चूँकि मुकेश गोयल का खासा विरोध है, इसलिए मुकेश गोयल के साथ दिखने के चक्कर में उनके बीच अरुण मित्तल का पत्ता भी कट गया । इन स्थितियों ने जितेंद्र चौहान को इस बात के लिए और भी आश्वस्त कर दिया है कि वह बिना कुछ किए-धरे ही इंटरनेशनल डायरेक्टर बन जायेंगे । जितेंद्र चौहान के इस रवैये से मल्टीपल के बड़े नेता अपने आप को ठगा हुआ पा रहे हैं । 

Thursday, August 22, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के अधिकतर संभावित उम्मीदवारों के अलग अलग तरह की मुसीबतों में घिरे होने के कारण डिस्ट्रिक्ट 321 ई के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर क्षितिज शर्मा को अपनी उम्मीदवारी को सफल बनाना आसान दिखने लगा है

वाराणसी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए राजीव अग्रवाल तथा गुरचरण सिंह भोला की दावेदारी के कमजोर पड़ने के साथ ही डिस्ट्रिक्ट 321 ई के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर क्षितिज शर्मा का दावा मजबूत होता नजर आने लगा है । उनके नजदीकियों का भी कहना/बताना है कि क्षितिज शर्मा ने पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जगदीश गुलाटी के जरिये लीडरशिप के नेताओं को भी अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में लेने/करने का काम शुरू कर दिया है । क्षितिज शर्मा की उम्मीदवारी को हालाँकि डिस्ट्रिक्ट 321 एफ के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर गोपाल कृष्ण शर्मा से चुनौती मिलने की उम्मीद की जा रही है, लेकिन क्षितिज शर्मा को विश्वास है कि फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में पिछले वर्ष गोपाल कृष्ण शर्मा की जैसी जो राजनीति रही, उससे लीडरशिप के नेता उनसे नाराज हैं, और इसके चलते गोपाल कृष्ण शर्मा की उम्मीदवारी की तरफ से मिल सकने वाली चुनौती से निपटना उनके लिए आसान होगा । उल्लेखनीय है कि पिछले लायन वर्ष में बिरिंदर सिंह सोहल के खिलाफ गोपाल कृष्ण शर्मा की जैसी जो जिद रही थी, उसके चलते बिरिंदर सिंह सोहल की राजनीति तो खराब हुई ही, लीडरशिप को भी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा । क्षितिज शर्मा मान रहे हैं कि लीडरशिप इसका बदला गोपाल कृष्ण शर्मा से अवश्य ही लेगी, और इसके चलते मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की तरफ उनकी राह आसान हो जाएगी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए क्षितिज शर्मा का पलड़ा इसलिए भी भारी लग रहा है क्योंकि उनके अलावा बाकी जो संभावित उम्मीदवार हैं, उनमें से किसी के पास कोई उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में बात करने के लिए कोई 'वकील' नहीं है - एक अकेले क्षितिज शर्मा ही हैं, जिनकी उम्मीदवारी की वकालत के लिए जगदीश गुलाटी मुस्तैद हैं ।
'वकील' न होने के कारण ही डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजीव अग्रवाल की स्थिति में भारी उलटफेर हो गया है । उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले तक मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए उनकी स्थिति को सबसे मजबूत माना/पहचाना जा रहा था । लीडरशिप के साथ उनकी जैसी निकटता है, वैसी किसी की नहीं है; चुनावी राजनीति के खिलाड़ियों को साधने का 'हुनर' भी उनमें खूब है । लेकिन उनके डिस्ट्रिक्ट के झगड़ों ने उनके लिए मुसीबतें खड़ी कर दी हैं; डिस्ट्रिक्ट के नेताओं के बीच के झगड़ों ने उनके लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नरी करना मुश्किल बना दिया है - और ऐसे में लीडरशिप के नेताओं का समर्थन मिलने की उम्मीद भी कमजोर पड़ गई है । डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के गवर्नर गुरचरण सिंह भोला लीडरशिप के नेताओं के समर्थन के भरोसे मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने की उम्मीद में थे, लेकिन अपने डिस्ट्रिक्ट के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन गुप्ता का समर्थन जुटाना मुश्किल होने के कारण उन्हें अपनी दाल गलना मुश्किल ही लग रहा है । लीडरशिप के नेताओं ने पिछले वर्ष बिरिंदर सिंह सोहल के चक्कर में अपनी जैसी फजीहत करवाई है, उसे वह इस वर्ष गुरचरण सिंह भोला के चक्कर में दोहराना नहीं चाहेंगे । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के पद को लेकर डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला तथा डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बलविंदर सिंह सैनी ने भी अपनी अपनी उत्सुकता दिखाई है, लेकिन अभी तक इनकी उम्मीदवारी को किसी ने भी गंभीरता से लिया/देखा नहीं है । मनोज रुहेला ने हालाँकि विरोधी खेमे के नेताओं के साथ 'दोस्ती' करने के प्रयास तो खूब किए हैं, लेकिन पिछले वर्ष वाइस चेयरमैन पद के लिए एके सिंह का समर्थन करने के कारण विरोधी खेमे के मुखिया गुरनाम सिंह ने उन्हें धमकी दी थी कि वह देखेंगे कि मनोज रुहेला गवर्नरी कैसे करते हैं । ऐसे में, मनोज रुहेला के लिए अपने डिस्ट्रिक्ट के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कमल गुप्ता का समर्थन पाना ही मुश्किल होगा । 
मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के अधिकतर संभावित उम्मीदवारों के अलग अलग तरह की मुसीबतों में घिरे होने के कारण क्षितिज शर्मा को अपनी उम्मीदवारी को सफल बनाना आसान दिखने लगा है । हालाँकि मल्टीपल काउंसिल की चुनावी राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख नेताओं ने अभी अपने अपने इरादे जाहिर नहीं किए हैं, इसलिए मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद को लेकर बनने वाले समीकरण अभी अस्पष्ट हैं - और अभी कोई भी दावे के साथ नहीं कह सकता है कि मल्टीपल की चुनावी राजनीति में प्रभावी समीकरण का ऊँट किस करवट बैठेगा ? मल्टीपल काउंसिल की राजनीति को प्रभावित कर सकने वाले नेता लोग अभी जिस तरह से चुप्पी साधे बैठे हैं, और हालात की टोह ले रहे हैं - उससे यह आभास भी लग रहा है कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के पद को लेकर बनने वाले समीकरणों में खासा उलटफेर हो सकता है । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों का हालाँकि कहना है कि नेताओं का रवैया अभी स्पष्ट न होने का कारण ही यह है कि नेता लोग किसी अन्य उम्मीदवार में ऐसा दम ही नहीं देख रहे हैं, जिस पर वह दाँव लगाने की हिम्मत कर सकें; इसलिए नेता लोग अंततः क्षितिज शर्मा के समर्थन में आ जायेंगे । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों व समर्थकों का कहना/बताना है कि अभी क्षितिज शर्मा ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए अपनी उम्मीदवारी को लेकर गंभीरता से काम करना वास्तव में शुरू भी नहीं किया है, लेकिन फिर भी अभी से उन्हें सबसे मजबूत व काफी बढ़त बनाते हुए देखा/पहचाना जा रहा है - ऐसे में सोचने की बात यही है कि जब वह सचमुच अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने निकलेंगे, तब फिर दूसरे उम्मीदवार और नेता उनके सामने कहाँ और कैसे टिकेंगे ?

Tuesday, May 21, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय मित्तल ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए जीत हासिल करते हुए मल्टीपल की राजनीति में एक नया अध्याय भी जोड़ा है और अपने डिस्ट्रिक्ट को 19 वर्ष बाद मल्टीपल का नेतृत्व करने का अवसर उपलब्ध करवाया है

गाजियाबाद । विनय मित्तल ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए निर्वाचित होते हुए कई एक दिलचस्प किस्म के संयोग बनाए हैं । सबसे ज्यादा मजे की बात यह रही कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए जिन चार उम्मीदवारों की चर्चा थी, उनमें विनय मित्तल को सबसे पीछे देखा/पहचाना जा रहा था, लेकिन मुकाबले का मौका आते आते ऐसा माहौल बना कि बाकी तीनों उम्मीदवार बीच दौड़ में ही मुकाबले से बाहर हो गए और विनय मित्तल निर्विरोध मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन चुने गए । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के इतिहास में इससे पहले शायद ही कभी यह हुआ होगा कि सभी दसों डिस्ट्रिक्ट्स के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने किसी एक उम्मीदवार के समर्थन में हस्ताक्षर किए हों ।हालाँकि निर्विरोध तो पहले भी कई लोग मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बने हैं, किंतु वह मजबूरी के 'सौदे' रहे हैं - किसी को शर्तिया जीतता देख, दूसरा कोई उम्मीदवार बना ही नहीं तो उसके विरोध में रहने वाले फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स भी मनमसोस कर चुप बैठ गए । इस बार का नजारा लेकिन बिलकुल अलग था । ऐसा नहीं है कि सभी फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय मित्तल के समर्थक ही थे; लेकिन ऐसा जरूर है कि किसी भी फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का - और उसे 'कंट्रोल' करने वाले नेता का भी - विनय मित्तल के साथ (अंध)विरोध का संबंध नहीं था । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के चुनाव में यही बात विनय मित्तल के पक्ष में गई; और उन्होंने अपने डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन को 19 वर्ष बाद मल्टीपल काउंसिल का प्रतिनिधित्व करने का अवसर उपलब्ध करवाया ।
उल्लेखनीय है कि विनय मित्तल के अलावा बाकी जिन तीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स - वीके हंस, बिरिंदर सोहल तथा तेजपाल खिल्लन के नाम मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए चर्चा में थे, उन्हें अलग अलग कारणों से विनय मित्तल की तुलना में मजबूत तो समझा जा रहा था; लेकिन उन तीनों के साथ एक समान समस्या यह थी कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले लोगों में से कुछेक लोग उनके खिलाफ ताल ठोके खड़े थे । विनय मित्तल के विरोध में भी लोग सक्रिय तो थे - खुद उनके डिस्ट्रिक्ट से निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अजय सिंघल उनके खिलाफ लॉबीइंग करने के लिए अपनी पत्नी के साथ मौजूदा मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पारस अग्रवाल के घर तक गए और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मुकेश गोयल ने भी अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किए; लेकिन इन दोनों की चूँकि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले लोगों में गिनती नहीं होती है, इसलिए इनके विरोध का बाल बराबर भी असर नहीं पड़ा । जैसा कि पहले कहा जा चुका है, उसे फिर दोहराया जा रहा है कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले लोगों में कई लोग विनय मित्तल की उम्मीदवारी के समर्थक नहीं थे, लेकिन उनकी उम्मीदवारी का धुर विरोधी भी कोई नहीं था - और यही कारण रहा कि चेयरमैन पद के लिए विनय मित्तल की उम्मीदवारी का भार जैसे जैसे बढ़ना शुरू हुआ, तो फिर पलड़ा विनय मित्तल के पक्ष में झुकता ही चला गया ।
विनय मित्तल के मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन चुने जाने में डिस्ट्रिक्ट 321 सी टू के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र चौहान और मौजूदा मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पारस अग्रवाल की निर्णायक भूमिका रही । वास्तव में यही दोनों शुरू से विनय मित्तल की उम्मीदवारी के समर्थक थे; और इनमें भी जितेंद्र चौहान ने अपने निरंतर प्रयासों से विनय मित्तल की उम्मीदवारी को न सिर्फ चौथे नंबर से पहले नंबर तक पहुँचाया, बल्कि विनय मित्तल की उम्मीदवारी के पक्ष में सभी फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स का समर्थन 'इकट्ठा' किया । एक बार उस समय जरूर विनय मित्तल की उम्मीदवारी को मिल रहे जितेंद्र चौहान के सक्रिय समर्थन को खतरे में पड़ा देखा जा रहा था, जब इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए जितेंद्र चौहान के साथ साथ तेजपाल खिल्लन के उम्मीदवार के रूप में वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी आ गई थी । नेताओं के बीच चर्चा छिड़ी थी कि तेजपाल खिल्लन ने वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी प्रस्तुत ही इसलिए की/करवाई है, ताकि वह मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के पद के लिए जितेंद्र चौहान के साथ सौदेबाजी कर सकें । हालाँकि इस चर्चा को ज्यादा 'हवा' मिली नहीं और फिर मल्टीपल कॉन्फ्रेंस स्थगित हो जाने से इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट का मामला भी हवाहवाई हो गया । विनय मित्तल इससे पहले अपने डिस्ट्रिक्ट में चौतरफा षड्यंत्रों और विरोध के बावजूद सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए 'अपने' उम्मीदवार को बड़ी जीत दिलवा कर डिस्ट्रिक्ट तथा लायन राजनीति में इतिहास रच चुके हैं; उसके ठीक बाद मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए उन्होंने सिर्फ जीत ही हासिल नहीं की है - बल्कि मल्टीपल की चुनावी राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ा है । 

Thursday, April 4, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल के मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 की चुनावी राजनीति लीडरशिप के प्रयासों से इस बार जिस सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटती नजर आ रही है, उससे मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए विनय मित्तल के नाम पर बनती दिख रही सहमति को निर्णायक रूप लेते हुए देखा/पहचाना जा रहा है

नई दिल्ली । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के पद को लेकर शुरू में गर्मी खा रही राजनीति अब जिस तरह ठंडी पड़ती और गंतव्य पर पहुँचती दिख रही है, उसमें संभावित उम्मीदवारों में सबसे पीछे चल रहे विनय मित्तल की दाल गलने का मौका बनता नजर आ रहा है । उल्लेखनीय है कि अभी दो/ढाई महीने पहले तक मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद को लेकर राजनीतिक उठापटक खासी तेज थी, और उक्त पद के लिए लीडरशिप के बीच वीके हंस तथा बिरिंदर सोहल की दावेदारी पर चर्चा थी, और विरोधी उम्मीदवार के रूप में तेजपाल खिल्लन की सक्रियता थी । विनय मित्तल का नाम भी उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना तो जा रहा था, लेकिन चूँकि उनकी उम्मीदवारी की वकालत लीडरशिप का कोई बड़ा नेता नहीं कर रहा था - इसलिए संभावित चार उम्मीदवारों में उन्हें सबसे पीछे माना/समझा जा रहा था । लेकिन पिछले दिनों मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट तथा मल्टीपल के विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में राजनीति की जैसी जो हवा चली, उसके चलते मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की चुनावी राजनीति के सारे समीकरण उलट-पलट गए । दरअसल वीके हंस और बिरिंदर सोहल अपने अपने डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक चक्रव्यूह में ऐसे फँसे कि उनकी वकालत करने वाले नेता पीछे हट गए और इस तरह मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की उनकी उम्मीदवारी पर नकारात्मक असर पड़ा । इनके उलट, विनय मित्तल ने अपने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में अपनी ऐसी धमक दिखाई, जो किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के लिए सोची भी नहीं जा सकती है । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में विनय मित्तल ने जो हासिल किया, वह धैर्य-धीरज, मिलनसार, सभी को उचित सम्मान देने, ईमानदारी से काम करने और प्रशासनिक प्रबंधन की खूबी रखने जैसे अपने रवैये से हासिल किया । विनय मित्तल ने अपने इसी रवैये से मल्टीपल के छोटे-बड़े नेताओं तथा विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के बीच अपनी पहचान, साख और विश्वसनीयता बनाई ।
मल्टीपल के नेताओं के बीच विनय मित्तल की पहचान, साख और विश्वसनीयता भले ही बनी हो; लेकिन मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए वकालत करने वाला नेता विनय मित्तल को तब भी नहीं मिला । वीके हंस तथा बिरिंदर सोहल की तरफ से निराश होने के बाद मल्टीपल के नेताओं के बीच प्रभात चतुर्वेदी का नाम आया । प्रभात चतुर्वेदी ने लेकिन निजी कारणों से मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने से इंकार कर दिया । लीडरशिप के बीच मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के उम्मीदवार को लेकर असमंजस व अनिर्णय दिखा, तो तेजपाल खिल्लन ने अपनी उम्मीदवारी के लिए कमर कस ली । तेजपाल खिल्लन की सक्रियता ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए उम्मीदवार तय करने के मामले में लीडरशिप के नेताओं को चौकन्ना किया, और तब विनय मित्तल का नाम लीडरशिप के नेताओं के बीच चर्चा में आया । यह सच है कि लीडरशिप के नेताओं में विनय मित्तल की उम्मीदवारी का कोई 'वकील' नहीं है, लेकिन सच यह भी है कि विनय मित्तल के नाम पर किसी का कोई विरोध भी नहीं है । बल्कि अपने डिस्ट्रिक्ट में विनय मित्तल ने जो 'राजनीतिक धमाल' किया है, उसके 'राजनीतिक संदेशों' को 'पढ़ते' हुए लीडरशिप के नेताओं के बीच विनय मित्तल को लेकर एक बड़ी 'राजनीतिक उम्मीद' बनी है । लीडरशिप के बीच मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए विनय मित्तल का नाम जिस तरह चर्चा में आ गया है, उसने विनय मित्तल की उम्मीदवारी को अचानक से महत्त्वपूर्ण और गंभीर बना दिया है ।
मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए लीडरशिप के बीच विनय मित्तल की उम्मीदवारी के गंभीर रूप लेने का एक अन्य प्रमुख कारण विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के बीच विनय मित्तल के लिए बना/दिखा समर्थन भी रहा । दरअसल धैर्य-धीरज, मिलनसार, सभी को उचित सम्मान देने, ईमानदारी से काम करने और प्रशासनिक प्रबंधन की खूबी रखने जैसे अपने रवैये से विनय मित्तल ने डिस्ट्रिक्ट में अपनी जो धमक जमाई; उसी रवैये से उन्होंने विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों के बीच भी अपनी पहचान व साख बनाई - जो मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए समर्थन में परिवर्तित हुई नजर आ रही है । लीडरशिप के नेताओं ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की राय जानने का काम किया, तो उन्हें विनय मित्तल के लिए अच्छा समर्थन दिखा । इस बार लीडरशिप के व्यवहार में एक बड़ा परिवर्तन यह भी देखने में आ रहा है कि वह अपनी पसंद थोपने की जिद नहीं पकड़े हुए है, और फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की राय को भी महत्त्व देती हुई नजर आ रही है और उन्हें विश्वास में लेकर एक बेहतर प्रशासनिक क्षमता के व्यक्ति को ही मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के पद पर लाना चाहती है । इस चक्कर में मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए विनय मित्तल की उम्मीदवारी महत्त्वपूर्ण होती हुई लग रही है । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के चुनाव में अभी हालाँकि करीब एक महीने से कुछ अधिक का समय बाकी है और इतना समय बड़े उलट-फेर के लिए काफी माना जाता है - लेकिन इस बार मल्टीपल की चुनावी राजनीति जिस सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटती दिख रही है, और लीडरशिप छोटे-छोटे झगड़े आपसी बातचीत से हल करने तथा उन्हें बढ़ने न देने में दिलचस्पी ले रही है, उससे लगता नहीं है कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद को लेकर अब ज्यादा उथल-पुथल होने का मौका बचा है; लेकिन राजनीति में कब क्या हो जाए - यह भी दावे के साथ कोई नहीं कह सकता है ।

Thursday, March 14, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तेजपाल खिल्लन के खिलाफ कार्रवाई करने/करवाने से नरेश अग्रवाल को बचता देख, जेपी सिंह ने भी केएम गोयल को अधर में छोड़ा और फजीहत का शिकार बनाया

नई दिल्ली । इंटरनेशनल डायरेक्टर जेपी सिंह के ऐन मौके पर 'पीछे हटने' के कारण डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की कॉल को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तेजपाल खिल्लन को घेरने/फँसाने की पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर केएम गोयल की कोशिशों में पलीता लग गया लगता है । केएम गोयल के नजदीकियों का कहना है कि तेजपाल खिल्लन को फँसाने के लिए जेपी सिंह ने पहले तो केएम गोयल को इस्तेमाल किया, लेकिन फिर लगता है कि उन्होंने तेजपाल खिल्लन से कोई 'सौदा' कर लिया है - और केएम गोयल के साथ मिलकर की जा रही कार्रवाई से अपने आपको अलग कर लिया है । कुछेक लोगों को इस मामले में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल की भूमिका भी नजर आ रही है, जिसके चलते जेपी सिंह के लिए भी कुछ कर सकना असंभव हुआ है । केएम गोयल के कुछेक नजदीकियों को यह भी लग रहा है कि जेपी सिंह के बस की कुछ करना/करवाना है नहीं; और केएम गोयल नाहक ही उनकी बातों में आ गए । केएम गोयल के नजदीकियों को यह भी शक है कि जेपी सिंह चूँकि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव से जुड़ी अदालती कार्रवाई से परेशान हैं, और इस परेशानी से मुक्त होना चाहते हैं - और उन्हें लगता है कि तेजपाल खिल्लन उन्हें उक्त झमेले से मुक्ति दिला सकते हैं, इसलिए वह तेजपाल खिल्लन से कभी 'गर्म' तो कभी 'सर्द' संबंध बनाते रहते हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की कॉल को लेकर तेजपाल खिल्लन ने लायंस इंटरनेशनल व मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के नियम-कानूनों की जैसी जो ऐसीतैसी की, उसमें जेपी सिंह को तेजपाल खिल्लन की 'गर्दन मरोड़ने' का मौका दिखा, और इस मौके का इस्तेमाल करने की कार्रवाई में उन्होंने केएम गोयल को शामिल कर लिया । एक ही डिस्ट्रिक्ट में होने के बावजूद केएम गोयल और तेजपाल खिल्लन के बीच वर्षों से चलती रहने वाली उठापटक लायन समाज में जगजाहिर है ही; लिहाजा केएम गोयल को जेपी सिंह के 'खेल' में शामिल होने में गुरेज नहीं हुआ । 
जेपी सिंह की योजना थी कि केएम गोयल डिस्ट्रिक्ट के किसी लायन से कॉल को लेकर हुए नियमों के उल्लंघन की शिकायत लायंस इंटरनेशनल में दर्ज करवाएँ/भिजवाएँ - लायंस इंटरनेशनल से कार्रवाई वह करवायेंगे । शिकायत दर्ज होने के बाद जेपी सिंह की तरफ से तेजपाल खिल्लन के खिलाफ लायंस इंटरनेशनल की कार्रवाई का भरोसा केएम गोयल को लगातार मिलता रहा, लेकिन जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है - उससे केएम गोयल और उनके नजदीकियों को लग रहा है कि जेपी सिंह ने उनका पोपट बना दिया है - और तेजपाल खिल्लन से हाथ मिला लिया है ।  उल्लेखनीय है कि तेजपाल खिल्लन की तरफ से पहले 5 जनवरी को ऑफिशियल कॉल निकाली गई, जिसमें 8 मार्च को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस करने की बात कही गई थी । उक्त कॉल में रही/बनी खामियों की शिकायत लायंस इंटरनेशनल कार्यालय तक जा पहुँची, तब तेजपाल खिल्लन ने आनन/फानन में दूसरी कॉल निकाल दी, जिसके अनुसार डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के लिए 30 मार्च की नई तारीख और फरीदाबाद के रूप में नई जगह का ऐलान किया गया । तेजपाल खिल्लन द्वारा निकाली गई दूसरी कॉल को लेकर आरोप यह लगा कि इसके लिए तेजपाल खिल्लन ने डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट की मंजूरी नहीं ली है, और मनमाने तरीके से इसे जारी कर दिया है । लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानूनों के अनुसार, ऑफिशियल कॉल के लिए डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होती है; और ऑफिशियल कॉल में बाद में यदि कोई संशोधन/परिवर्तन करने की जरूरत होती है तो उसके लिए भी कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत होती है । तेजपाल खिल्लन ने ऑफिशियल कॉल में संशोधन/परिवर्तन ही नहीं किया है, बल्कि पूरी कॉल ही बदल दी है - और एक तरीके से दूसरी नई कॉल जारी की है, और इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी ही नहीं ली है । इस तरह, इस दूसरी ऑफिशियल कॉल को भी अवैधानिक माना/बताया गया । इस पर लायंस इंटरनेशनल से कार्रवाई करवाने के लिए ही जेपी सिंह ने केएम गोयल से हाथ मिलाया था - केएम गोयल के नजदीकियों का कहना है कि जेपी सिंह ने अपना मतलब निकालने के लिए अपना दूसरा हाथ तेजपाल खिल्लन से मिला लिया और इस तरह लायंस इंटरनेशनल की तरफ से तेजपाल खिल्लन के खिलाफ हो सकने वाली कार्रवाई अधर में लटक गई है ।
लायन लीडर्स के नजदीकियों का इस मामले में यह भी कहना है कि पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल के हस्तक्षेप के कारण जेपी सिंह और केएम गोयल की तेजपाल खिल्लन को फँसाने की योजना में पंक्चर हुआ है । नरेश अग्रवाल दरअसल चेन्नई व मुंबई के कुछेक लायंस द्वारा लायंस को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इंडिया एसोसिएशन के खिलाफ छेड़ी गई 'लड़ाई' से ही परेशान हैं, और वह अभी दिल्ली में कोई और लड़ाई का माहौल नहीं बनाना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने तेजपाल खिल्लन की 'हरकत' को लायंस इंटरनेशनल द्वारा नजरअंदाज करने/करवाने का काम किया है । नरेश अग्रवाल को डर हुआ कि कॉल के मामले में नियमों का उल्लंघन करने को लेकर तेजपाल खिल्लन के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई, तो तेजपाल खिल्लन चेन्नई व मुंबई के विरोधी बने लायन नेताओं से तार जोड़ लेंगे और दिल्ली में उनके खिलाफ मोर्चा खोल देंगे, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई को टाल दिए जाने में ही भलाई है । लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारी भी 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' वाले अंदाज में फैसले करते हैं, इसलिए तेजपाल खिल्लन की नियम विरुद्ध हरकत पर वह चुप्पी मार कर बैठ गए हैं । नरेश अग्रवाल के रवैये को देख/जान कर जेपी सिंह ने भी मामले से अपने हाथ खींच लिए हैं । मजे की बात यह हुई है कि केएम गोयल के साथ मिल कर तेजपाल खिल्लन की गर्दन दबोचने की तैयारी कर रहे जेपी सिंह अब इस जुगाड़ में लग गए हैं कि तेजपाल खिल्लन उनके मामले में चल रही अदालती कार्रवाई के मसले को निपटवाएँ - ताकि इंटरनेशनल डायरेक्टरी वह चैन से कर सकें । जेपी हालाँकि अभी केएम गोयल को तेजपाल खिल्लन के खिलाफ कार्रवाई होने का झाँसा भी दे रहे हैं, जिसके चलते लेकिन केएम गोयल को फजीहत का शिकार होना पड़ रहा है । 

Sunday, February 3, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वीके हंस की मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने की कोशिशों को चंदर शेखर मेहता को मल्टीपल ट्रेजरर बनवाने की मुहिम के जरिये राजीव अग्रवाल और जेपी सिंह ने फेल किया

नई दिल्ली । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चंदर शेखर मेहता और फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजीव अग्रवाल की मिलीजुली कोशिशों से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वीके हंस को मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए अपनी उम्मीदवारी खतरे में पड़ती दिख रही है, और वीके हंस इसके लिए इंटरनेशनल डायरेक्टर जेपी सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें जमकर कोस रहे हैं । वीके हंस इसलिए और भड़के हुए हैं, क्योंकि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के चक्कर में उन्होंने हाल ही में हरिद्वार में संपन्न हुई मल्टीपल काउंसिल की मीटिंग में एयर प्यूरीफायर गिफ्ट के रूप में बाँट दिए; उनका रोना है कि जेपी सिंह और राजीव अग्रवाल ने उनसे गिफ्ट तो बँटवा दिए हैं, लेकिन पर्दे के पीछे वह खेल कुछ और खेल रहे हैं । मल्टीपल काउंसिल की मीटिंग में वीके हंस को दो झटके एक साथ लगे - पहले तो वह यह सुन/देख का चकराए कि चंदर शेखर मेहता मीटिंग में पहुँचे हैं और मल्टीपल ट्रेजरर बनने के जुगाड़ में हैं; दूसरा झटका उन्हें राजीव अग्रवाल को अपने से दूर 'दिखने' की कोशिश करते देख लगा । राजीव अग्रवाल के प्रति तो वीके हंस ने कई लोगों के सामने चिल्ला कर अपनी नाराजगी भी प्रकट की । पूरे घटनाचक्र को मिला कर वीके हंस ने देखा, तो समझा/पाया कि इसके पीछे जेपी सिंह की शह है;और जेपी सिंह ने राजीव अग्रवाल को अगले लायन वर्ष में मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनवाने का ऑफर देकर वीके हंस को इस वर्ष मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की दौड़ से हटाने का प्रबंध कर लिया है ।
चंदर शेखर मेहता को मल्टीपल ट्रेजरर बनवाने की मुहिम के पीछे जेपी सिंह और राजीव अग्रवाल की सोची-समझी योजना को देखा/पहचाना जा रहा है । माना/कहा जा रहा है कि इसके जरिये अगले लायन वर्ष में राजीव अग्रवाल की मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की उम्मीदवारी के लिए हरदीप सरकारिया का वोट/समर्थन पक्का कर लिया गया है । हरदीप सरकारिया को चंदर शेखर मेहता के नजदीकी के रूप में देखा/पहचाना जाता है; ऐसे में यह उम्मीद करना स्वाभाविक भी है कि मल्टीपल ट्रेजरर बनने के ऐवज में चंदर शेखर मेहता अगले लायन वर्ष में मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए हरदीप सरकारिया का वोट/समर्थन बिना किसी हील-हुज्जत के राजीव अग्रवाल को दिलवा ही देंगे । पर्दे के पीछे चले इस खेल को लेकर वीके हंस को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर केएल खट्टर के व्यवहार से भी शिकायत और नाराजगी है । केएल खट्टर को वीके हंस अपने बड़े समर्थक और शुभचिंतक के रूप में देखते/समझते हैं; लेकिन अब वीके हंस को लगता है कि केएल खट्टर ने उनके साथ धोखा किया है । उल्लेखनीय है कि चंदर शेखर मेहता हरिद्वार में संपन्न हुई मल्टीपल काउंसिल की मीटिंग में केएल खट्टर के साथ ही पहुँचे थे । इससे वीके हंस मान/समझ रहे हैं कि चंदर शेखर मेहता को मल्टीपल ट्रेजरर बनवाने की मुहिम की जानकारी केएल खट्टर को भी थी, जिसे केएल खट्टर ने उनसे छिपाया - और इस तरह उन्हें धोखा दिया । दरअसल चंदर शेखर मेहता के मल्टीपल ट्रेजरर बनने से वीके हंस का मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने का मामला अपने आप खत्म हो जाता है, क्योंकि एक ही डिस्ट्रिक्ट को मल्टीपल में दो पद तो नहीं ही मिल सकेंगे ।
चंदर शेखर मेहता को मल्टीपल ट्रेजरर बनवाने की मुहिम के जरिये वीके हंस को रास्ते से हटाने के खेल के प्रति आश्वस्त होने के कारण ही राजीव अग्रवाल ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए अभियान चला रहे वीके हंस से दूरी बनाने/दिखाने की कोशिश की । उल्लेखनीय है कि वीके हंस ने अपनी उम्मीदवारी के लिए माहौल बनाने के उद्देश्य से मल्टीपल काउंसिल की मीटिंग में एयर प्यूरीफायर गिफ्ट में देने की तैयारी की थी । इस तैयारी में वह चाहते थे कि गिफ्ट देने/बाँटने के काम में राजीव अग्रवाल उनके साथ रहें/दिखें, ताकि वह राजीव अग्रवाल के समर्थन के प्रति दूसरे लोगों को आश्वस्त कर सकें । वीके हंस ने राजीव अग्रवाल से साथ रहने के लिए बात भी कर ली, और राजीव अग्रवाल ने इसके लिए हामी भी भर दी; लेकिन वीके हंस जब गिफ्ट देने/बाँटने के काम पर निकले, तब राजीव अग्रवाल दाएँ/बाएँ हो गए । वीके हंस को राजीव अग्रवाल का यह रवैया नागवार लगा और उन्होंने कई लोगों के सामने ही राजीव अग्रवाल को जोर से चिल्ला कर हड़काया । वीके हंस का यह व्यवहार राजीव अग्रवाल को बुरा लगा और फिर वीके हंस को अकेले ही गिफ्ट देने/बाँटने का काम करना पड़ा । इस स्थिति के लिए लोगों ने वीके हंस को ही जिम्मेदार ठहराया; उनका कहना है कि वीके हंस को राजीव अग्रवाल के साथ बदतमीजी नहीं करना चाहिए थी । वीके हंस का कहना है कि राजीव अग्रवाल को यदि उनके साथ नहीं आना था, तो साफ मना कर देना चाहिए था । बाद में जब पर्दे के पीछे चले खेल की पूरी जानकारी वीके हंस को मिली, तो वह और नाराज हुए । उनका कहना है कि जेपी सिंह और राजीव अग्रवाल को उनके साथ यही धोखा करना था तब फिर उन्होंने मल्टीपल काउंसिल की मीटिंग में उनसे गिफ्ट बँटवा कर उनके पैसे क्यों खराब करवाए ? मल्टीपल काउंसिल में वीके हंस के साथ जो हुआ, उसे 'देख' कर वीके हंस अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और इस 'ठगी' के लिए जेपी सिंह और राजीव अग्रवाल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं ।