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Monday, February 25, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में एमपी गुप्ता की फील्डिंग के सामने राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में बनाये रखने के मामले में अपने आप को बेबस पाया और डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में बिजनेस सेशन शुरू होने से ठीक पहले हेमंत अरोड़ा का इस्तीफा ले लिया

चंडीगढ़ । रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के पूर्व प्रेसीडेंट और डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य एमपी गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स में फर्जीवाड़ा करने के आरोपों से घिरे हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाये जाने के खिलाफ जो अभियान शुरू किया था, अंततः वह रंग लाया - और डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के दौरान हेमंत अरोड़ा डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए मजबूर हुए । राजा साबू  और उनके साथियों के भरपूर समर्थन के बावजूद हेमंत अरोड़ा कुल चार-पाँच महीने ही डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के सदस्य बने रह सके । मजे की बात यह रही कि हेमंत अरोड़ा को जिस गुपचुप तरीके से डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाया गया था, उसी गुपचुप तरीके से कमेटी से उनकी विदाई भी हुई । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के बिजनेस सेशन में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अरुण शर्मा ने हेमंत अरोड़ा के मामले से जुड़े एमपी गुप्ता के क्लब के प्रस्ताव के वापस होने की जानकारी तो लोगों को दी, लेकिन हेमंत अरोड़ा के इस्तीफे की बात को वह 'पी' गए - सच्चाई जबकि यही है कि हेमंत अरोड़ा के इस्तीफा दे देने के बाद एमपी गुप्ता के क्लब के प्रस्ताव की कोई प्रासंगिकता ही नहीं रह गई थी, और इसीलिए उसे वापस ले लिया गया था । जानकारियों को डिस्ट्रिक्ट के लोगों से छिपा कर रखने की राजा साबू गिरोह के सदस्यों की प्रवृत्ति का प्रदर्शन करते हुए अरुण शर्मा ने एक बार फिर डिस्ट्रिक्ट के लोगों को लेकिन आधी-अधूरी बात ही बताई । उल्लेखनीय है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स तमाम महत्त्वपूर्ण बातें - खासकर डिस्ट्रिक्ट के तमाम प्रोजेक्ट्स व ट्रस्ट के हिसाब-किताब से जुड़ी बातें डिस्ट्रिक्ट के लोगों से - यहाँ तक कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स तक से - छिपा कर रखते हैं, जिसे लेकर निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को रोटरी इंटरनेशनल तक में शिकायत करने के लिए मजबूर होना पड़ा था; और जिसके चलते प्रोजेक्ट्स से जुड़े पैसों के मामले में राजा साबू और उनसे जुड़े पूर्व गवर्नर्स की भूमिका को संदेह से देखा जाता है । 
दरअसल इसी कारण से हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाए जाने से मामला भड़का हुआ था, और हेमंत अरोड़ा को फाइनेंस कमेटी से हटाने की माँग की जा रही थी । एमपी गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को पत्र लिख कर हेमंत अरोड़ा के वर्ष 2014-15 के कार्य-व्यवहार का उदाहरण देते हुए उन्हें डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाए जाने पर अपनी आपत्ति दर्ज करवायी थी और हेमंत अरोड़ा के उस कृत्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें तुरंत प्रभाव से डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हटाए जाने की माँग की थी । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स इस तरह की माँग पर ध्यान नहीं देते हैं, लिहाजा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल ने भी उक्त माँग पर ध्यान नहीं दिया । तब एमपी गुप्ता के क्लब - रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल ने हेमंत अरोड़ा से जुड़े इस मामले को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में उठाने को लेकर एक प्रस्ताव भेजा । राजा साबू की शह पर लेकिन प्रवीन गोयल ने उक्त प्रस्ताव को निष्प्रभावी करने की चाल चली । नियमों केअनुसार, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को इस प्रस्ताव से डिस्ट्रिक्ट के सभी क्लब्स को अवगत कराना चाहिए था, ताकि प्रस्ताव में उठाये मुद्दे पर डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में विचार-विमर्श हो सके और वोटिंग के जरिये प्रस्ताव में की गई माँग पर लोगों की राय ली जा सके । प्रवीन गोयल ने यह खुद तो नहीं ही किया, रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के पदाधकारियों तथा एमपी गुप्ता को भी ऐसा करने से रोका । प्रवीन गोयल की कोशिश थी कि हेमंत अरोड़ा से जुड़े मुद्दे/प्रस्ताव को वह डिस्ट्रिक्ट के लोगों के सामने आने ही न दें - और डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की आपाधापी में उक्त प्रस्ताव को रफादफा करवा दें । प्रवीन गोयल के रवैये से उनके इरादे को भाँप कर एमपी गुप्ता ने भी ऐसी फील्डिंग लगाई कि प्रवीन गोयल और राजा साबू तथा उनके संगी-साथियों को समझ में आ गया कि उन्होंने ज्यादा होशियारी दिखाई तो सिवाये फजीहत के उनके हाथ कुछ नहीं लगेगा । 
एमपी गुप्ता की फील्डिंग के सामने राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में बनाये रखने के मामले में अपने आप को बेबस पाया और डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में बिजनेस सेशन शुरू होने से ठीक पहले डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हेमंत अरोड़ा का इस्तीफा ले लिया । दरअसल राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को डर हुआ कि बिजनेस सेशन में मामला आयेगा, तो पता नहीं क्या क्या सुनने को मिलेगा और क्या क्या पोल खुलेगी - इसलिए हेमंत अरोड़ा से छुटकारा पा लेने में ही भलाई है । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स के लिए फजीहत की बात सिर्फ यही नहीं रही कि उन्हें हेमंत अरोड़ा से इस्तीफा लेना पड़ा - बल्कि यह भी रही कि उन्हें हेमंत अरोड़ा के नजदीकियों तथा उनसे हमदर्दी रखने वाले लोगों के कोप का भी निशाना बनना पड़ा । हेमंत अरोड़ा के नजदीकियों का कहना है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने जिस तरह हेमंत अरोड़ा को बेइज्जत करवाया है - उससे राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स का लोगों के प्रति 'यूज एंड थ्रो' वाला रवैया एक बार फिर प्रकट हुआ है । हेमंत अरोड़ा के नजदीकियों का कहना है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने पहले तो अपनी बेईमानियों पर पर्दा डाले रखने के लिए हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में सदस्य बना लिया, लेकिन जब बबाल हुआ तो उन्हें दूध में पड़ी मक्खी की तरह बाहर निकाल फेंका । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने यही तरीका क्रमशः डीसी बंसल और कपिल गुप्ता के साथ भी अपनाया था - उन्हें जब तक लगा कि डीसी बंसल और कपिल गुप्ता के सहारे/भरोसे वह अपनी राजनीति चला सकते हैं, उन्होंने इन्हें अपने साथ रखा; लेकिन जैसे ही उन्हें लगा कि यह उनके काम के नहीं रह गए हैं इन्हें दूर छिटक दिया । हेमंत अरोड़ा के साथ भी यही हुआ । वर्ष 2014-15 के कार्य-व्यवहार को लेकर हेमंत अरोड़ा की जो बदनामी है, वह सब भी राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की देन है; लेकिन उसी देन के कारण हेमंत अरोड़ा फजीहत में फँसे - तो राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने उन्हें अकेला छोड़ दिया ।

Thursday, February 21, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में राजा साबू को फजीहत से बचाने के लिए ही हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हटाने की माँग के रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल डिस्ट्रिक्ट के क्लब्स से छिपा कर रखते हुए डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में चलते-फिरते अंदाज में लीपापोती कर निपटा देने की तैयारी में हैं

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में विचार करने के लिए रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल द्वारा दिए गए एक प्रस्ताव की उपेक्षा करके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल ने एक बार फिर यह साबित किया है कि डिस्ट्रिक्ट में राजा साबू और उनसे जुड़े लोग अपनी बेईमानियों को न सिर्फ जारी रखे हुए हैं, बल्कि उन पर पर्दा डाले रखने का भी 'इंतजाम' करने में लगे हुए हैं । रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के उक्त प्रस्ताव में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हेमंत अरोड़ा के बेईमानीपूर्ण कारनामों का हवाला देते हुए उन्हें डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी की सदस्यता से निलंबित करने की माँग की गई है । नियमों केअनुसार, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को इस प्रस्ताव से डिस्ट्रिक्ट के सभी क्लब्स को अवगत कराना चाहिए था, ताकि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रस्ताव में उठाये मुद्दे पर विचार-विमर्श हो सके और वोटिंग के जरिये प्रस्ताव में की गई माँग पर लोगों की राय ली जा सके । प्रवीन गोयल लेकिन नियमानुसार कार्रवाई करने की बजाये प्रस्ताव पर कुंडली मारे बैठे रहे । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के नजदीक आने पर चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के पूर्व प्रेसीडेंट तथा डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य एमपी गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को एकबार फिर अपने क्लब के प्रस्ताव की याद दिलाई और उनसे पूछा कि डिस्ट्रिक्ट कार्यालय यदि किसी कारणवश नियमों का पालन नहीं कर सका है, तो क्या वह डिस्ट्रिक्ट के सभी क्लब्स को उक्त प्रस्ताव की प्रति भेज दें - लेकिन प्रवीन गोयल की तरफ से उन्हें उक्त प्रस्ताव की प्रति डिस्ट्रिक्ट के सभी क्लब्स को भेजने से मना किया गया है और बताया गया है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के बिजनेस सेशन में उक्त प्रस्ताव को उपस्थित लोगों के बीच पढ़ा जायेगा । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल के इस रवैये से जाहिर है कि वह हेमंत अरोड़ा को 'बचाने' की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए नियमों की अवहेलना व अनदेखी करने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं ।   
हेमंत अरोड़ा दरअसल वर्ष 2014-15 के डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स को लेकर आरोपों के घेरे में हैं । उल्लेखनीय है कि उस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स में भारी झोलझाल हुआ था - और उस झोलझाल में ऑडिटर के रूप में हेमंत अरोड़ा की भूमिका को संदिग्ध देखा/समझा गया था । उक्त भूमिका को लेकर हेमंत अरोड़ा की उस समय भी खासी फजीहत हुई थी । डिस्ट्रिक्ट में लोग उस किस्से को भूलने लगे थे, लेकिन हेमंत अरोड़ा के डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनने की खबर मिलने के बाद से - हेमंत अरोड़ा की वह भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई । उल्लेखनीय है कि दिलीप पटनायक के गवर्नर वर्ष 2014-15 के डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स की दो बैलेंसशीट बनी थीं, जिन्हें ऑडिटर के रूप में हेमंत अरोड़ा ने साइन किया था । यह दो बैलेंसशीट का बनना और साइन होना विवाद और आरोपों का विषय इसलिए बना था - क्योंकि 16 सितंबर 2015 को साइन हुई बैलेंसशीट में 20,407 रुपए का जो लाभ आ रहा था, वह 30 अक्टूबर 2015 को साइन हुई दूसरी बैलेंसशीट में 6 लाख 23 हजार 547 रुपए के घाटे में बदल गया । इस 'जादु' को चार्टर्ड एकाउंटेंट व ऑडिटर हेमंत अरोड़ा के 'अनुचित व्यवहार' के रूप में देखा/समझा गया था । हेमंत अरोड़ा को इसलिए भी फजीहत का सामना करना पड़ा था क्योंकि बैलेंसशीट में ऑडिटर के रूप में उन्होंने खुद दर्ज किया था कि बहुत से खर्चे कच्चे बिल्स के आधार पर हिसाब-किताब में लिए गए हैं । उस समय डिस्ट्रिक्ट के लोगों की तरफ से खुल कर आरोप लगे थे कि डिस्ट्रिक्ट के पैसों में हेराफेरी करने के उद्देश्य से फर्जी तरीके से लाभ को घाटे में बदला गया है - और इसमें हेमंत अरोड़ा से लेकर राजा साबू की भी मिलीभगत है ।
डिस्ट्रिक्ट में राजा साबू और उनसे जुड़े लोगों की बेईमानियों के किस्से दरअसल इतने इकट्ठे हो गए हैं, कि लोगों को उनके द्वारा लिया जाने वाला कोई भी संदेहास्पद फैसला लूट-खसोट की मदद करने वाला दिखने/लगने लगता है । डिस्ट्रिक्ट के तमाम प्रोजेक्ट्स व ट्रस्ट के हिसाब-किताब जिस तरह से कुछेक लोगों की ही जानकारी में रहते हैं और उन्हें लोगों से - यहाँ तक कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स तक से - छिपा कर रखा जाता है; जिसे लेकर निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी रोटरी इंटरनेशनल तक में शिकायत कर चुके हैं; उसके चलते राजा साबू और उनसे जुड़े पूर्व गवर्नर्स की भूमिका को संदेह से देखा जाता है । इसी कारण से हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाए जाने से मामला भड़क गया है, और हेमंत अरोड़ा को फाइनेंस कमेटी से हटाने की माँग होने लगी है । डिस्ट्रिक्ट के लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में प्रवीन गोयल ने हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाने के लिए राजा साबू से अवश्य ही हरी झंडी ली होगी; ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि हेमंत अरोड़ा 'जैसे' व्यक्ति को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाने का फैसला प्रवीन गोयल ने क्यों तो लिया - और क्यों राजा साबू ने उन्हें इस फैसले के लिए हरी झंडी दी ? लोगों को लगता है कि राजा साबू को फजीहत से बचाने के लिए ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल ने रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी की हुई है और इसीलिए वह उक्त प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट के क्लब्स से छिपा कर रखना चाहते हैं, और डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के बिजनेस सेशन में चलते-फिरते अंदाज में लीपापोती कर मामले को निपटा देने की तैयारी में हैं । 

Thursday, October 11, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स को मनमाने और अनुचित तरीके से 'बनाने' के आरोपी रहे हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाए जाने से भड़के माहौल में राजा साबू भी फजीहत का शिकार बने

चंडीगढ़/रुड़की । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाने को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल तो आरोपों के घेरे में आ ही गए हैं, खुद हेमंत अरोड़ा और पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू के लिए भी फजीहत वाली स्थिति बन गई है । हेमंत अरोड़ा को तुरंत प्रभाव से फाइनेंस कमेटी से हटाने की माँग की जा रही है; लोगों का कहना है कि प्रवीन गोयल यदि फाइनेंस कमेटी से उन्हें नहीं हटाते हैं तो राजा साबू को मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और हेमंत अरोड़ा को तुरंत डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हटवाना चाहिए । डिस्ट्रिक्ट के लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में प्रवीन गोयल ने हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाने के लिए राजा साबू से अवश्य ही हरी झंडी ली होगी; ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि हेमंत अरोड़ा 'जैसे' व्यक्ति को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाने का फैसला प्रवीन गोयल ने क्यों तो लिया - और क्यों राजा साबू ने उन्हें इस फैसले के लिए अपनी तरफ से हरी झंडी दी ? हेमंत अरोड़ा वर्ष 2014-15 के डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स के ऑडिटर थे, और उस वर्ष के अकाउंट्स में भारी झोलझाल हुआ था - और उस झोलझाल में ऑडिटर के रूप में हेमंत अरोड़ा की भूमिका को संदिग्ध देखा/समझा गया था । उक्त भूमिका को लेकर हेमंत अरोड़ा की उस समय भी खासी फजीहत हुई थी । डिस्ट्रिक्ट में लोग तीन वर्ष पुराने उस किस्से को भूलने लगे थे, लेकिन हेमंत अरोड़ा के डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनने की खबर मिलने के बाद से - हेमंत अरोड़ा की तीन वर्ष पहले की वह 'अनुचित' भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है, और लोगों की यादें ताजा हो गई हैं । 
उल्लेखनीय है कि दिलीप पटनायक के गवर्नर-वर्ष 2014-15 के डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स की दो बैलेंस-शीट बनी थीं, जिन्हें ऑडिटर के रूप में हेमंत अरोड़ा ने साइन किया था । यह दो बैलेंस-शीट का बनना और साइन होना विवाद और आरोपों का विषय इसलिए बना था - क्योंकि 16 सितंबर 2015 को साइन हुई बैलेंस-शीट में 20,407 रुपए का जो लाभ आ रहा था, वह 30 अक्टूबर 2015 को साइन हुई दूसरी बैलेंस-शीट में 6 लाख 23 हजार 547 रुपए के घाटे में बदल गया । इस 'जादु' को चार्टर्ड एकाउंटेंट व ऑडिटर हेमंत अरोड़ा के 'अनुचित व्यवहार' के रूप में देखा/समझा गया था । हेमंत अरोड़ा को इसलिए भी फजीहत का सामना करना पड़ा था क्योंकि बैलेंस-शीट में ऑडिटर के रूप में उन्होंने खुद दर्ज किया था कि बहुत से खर्चे कच्चे बिल्स के आधार पर हिसाब-किताब में लिए गए हैं । उस समय डिस्ट्रिक्ट के लोगों की तरफ से खुल कर आरोप लगे थे कि डिस्ट्रिक्ट के पैसों में हेराफेरी करने के उद्देश्य से फर्जी तरीके से लाभ को घाटे में बदला गया है - और इसमें दिलीप पटनायक से लेकर राजा साबू की भी मिलीभगत है । विवाद और आरोपों से परेशान और हताश हेमंत अरोड़ा ने कुछेक लोगों के बीच कहा भी था कि सभी जानते हैं कि डिस्ट्रिक्ट में किसके दबाव में न जाने क्या-क्या करना पड़ता है । डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स में फर्जीवाड़ा करने के आरोपों से घिरे हेमंत अरोड़ा के लिए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के नाते फजीहत की ज्यादा स्थिति बनी । वह पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न होते, तो सिर्फ ऑडिटर होने के नाते फजीहत का शिकार न बनते ।  
हेमंत अरोड़ा पर आरोपों की बौछार से बना माहौल धीरे-धीरे ठंडा पड़ रहा था, लेकिन अब जो फिर से गर्म हो उठा है । 'बिल्ली को थैले से बाहर निकालने' का काम डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ रोटेरियन तथा डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य एमपी गुप्ता ने किया । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को पत्र लिख कर उन्होंने हेमंत अरोड़ा के वर्ष 2014-15 के कार्य-व्यवहार का उदाहरण देते हुए डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाए जाने पर अपनी आपत्ति दर्ज करवायी है । एमपी गुप्ता ने अपने पत्र में प्रवीन गोयल को लिखा है कि हेमंत अरोड़ा के पिछले कृत्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें तुरंत प्रभाव से डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हटाया जाए । मजे की बात यह भी है कि हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य गुपचुप रूप से बनाया गया, और इसकी किसी को हवा भी नहीं लगी । इसका पता लोगों को अभी तब लगा, जब डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी की ई-कॉपी उन्हें मिली । प्रवीन गोयल की गवर्नरी का चौथा महीना चल रहा है, लेकिन कामकाज का आलम यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नरी की हॉर्ड-कॉपी का अभी तक कोई अता-पता नहीं है । डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी की ई-कॉपी भी लोगों को अभी मिल पायी है । इससे ही हेमंत अरोड़ा के डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के सदस्य बनने का लोगों को पता चला - और बबाल हो गया । डिस्ट्रिक्ट में राजा साबू और उनसे जुड़े लोगों की बेईमानियों के किस्से दरअसल इतने इकट्ठे हो गए हैं, कि लोगों को उनके द्वारा लिया जाने वाला कोई भी संदेहास्पद फैसला लूट-खसोट की मदद करने वाला दिखने/लगने लगता है । डिस्ट्रिक्ट के तमाम प्रोजेक्ट्स व ट्रस्ट के हिसाब-किताब जिस तरह से कुछेक लोगों की ही जानकारी में रहते हैं और उन्हें लोगों से - यहाँ तक कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स तक से - छिपा कर रखा जाता है; जिसे लेकर निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी रोटरी इंटरनेशनल तक में शिकायत कर चुके हैं; उसके चलते राजा साबू और उनसे जुड़े पूर्व गवर्नर्स की भूमिका को संदेह से देखा जाता है । इसी कारण से हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाए जाने से मामला भड़क गया है, और हेमंत अरोड़ा को फाइनेंस कमेटी से हटाने की माँग होने लगी है । 

Sunday, October 2, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में राजा साबू 'गिरोह' के सामने जितेंद्र ढींगरा की उम्मीदवारी का मुकाबला करने के लिए उम्मीदवार तय करना चुनौती और मुसीबत बना

चंडीगढ़ । प्रमोद विज को अपने ही क्लब - रोटरी क्लब पानीपत मिडटाउन में टीके रूबी को मुख्य अतिथि के रूप में आने से रोकने के लिए क्लब के पदाधिकारियों के साथ बड़ी कठिन लड़ाई लड़नी पड़ी - इस लड़ाई को अंततः वह क्लब के प्रेसीडेंट के पिता से गुहार लगा कर ही जीत सके । इस पूरी लड़ाई में प्रमोद विज की बस एक ही रट रही कि टीके रूबी उनके क्लब में मुख्य अतिथि के रूप में यदि आए, तो राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू के सामने उनकी नाक कट जायेगी । प्रमोद विज रोटरी में और डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच में यूँ तो अपने आप को एक बड़े नेता के रूप में प्रोजेक्ट करते हैं, किंतु यह जान कर उनकी साँस थम गई कि उनके क्लब के एक कार्यक्रम में टीके रूबी को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया जा रहा है । पहले तो उन्होंने धौंस-डपट से क्लब के पदाधिकारियों पर दबाव डाला कि वह टीके रूबी को क्लब के कार्यक्रम में न बुलाएँ; धौंस-डपट से बात नहीं बनी, तो वह खुशामद पर उतरे; तब भी असफल रहने पर उन्होंने क्लब में झगड़ा करवाने की तरकीब लगाई; बदकिस्मती ने वहाँ भी उनका काम नहीं बनने दिया । प्रमोद विज तब फिर क्लब अध्यक्ष के पिता की शरण में गए, और वर्षों के परिचय का वास्ता देकर उनसे अनुरोध किया कि वह अपने बेटे को समझाएँ कि वह क्यों उनकी नाक कटवाने पर तुला है । क्लब अध्यक्ष को अपने पिता की बात मानने पर मजबूर होना पड़ा, और इस तरह टीके रूबी को दिया गया निमंत्रण वापस हुआ - और प्रमोद विज की नाक कटने से बची ।
टीके रूबी डिस्ट्रिक्ट के गवर्नर्स खेमे के लोगों के लिए ऐसी हड्डी बन गए हैं, जो रह रह कर उनके चुभती रहती है, और जिसके चुभने के दर्द से वह लगातार कराहते रहते हैं । रोटरी क्लब पानीपत मिडटाउन में अभी हाल ही में जो उक्त तमाशा हुआ, वह दरअसल इसी चुभन और कराह का नया उदाहरण है । अधिकतर पूर्व गवर्नर्स बेचारों की यह सोच सोच कर ही साँस अटकी रहती है कि उनके क्लब के पदाधिकारी अपने किसी कार्यक्रम में कहीं टीके रूबी को न आमंत्रित कर लें । दरअसल पिछले दिनों कैथल में आयोजित हुए इंटरसिटी कार्यक्रम में रोटेरियंस की जो भारी भीड़ जुटी, उसे देख कर राजा साबू गिरोह के सदस्यों के कान फिर से खड़े हो गए हैं । कैथल में आयोजित हुए इंटरसिटी कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी टीके रूबी के नजदीकियों व समर्थकों के पास थी । इस कार्यक्रम के प्रमुख कर्ताधर्ता जितेंद्र ढींगरा थे । इससे पहले, पिंजौर और सहारनपुर में इंटरसिटी के जो कार्यक्रम हुए, वह रोटेरियंस की उपस्थिति के लिहाज से बुरी तरह फ्लॉप रहे थे । इसी कारण से, कैथल में रोटेरियंस के ज्यादा संख्या में मौजूद होने को टीके रूबी और उनके साथियों के बने रहने वाले तथा बढ़ते प्रभाव के सुबूत के रूप में देखा/पहचाना गया - और गवर्नर्स खेमे के लोगों के बीच किसी भी तरह से अपनी अपनी नाक बचाने की कोशिशें एक बार फिर से तेज हुईं । इस चक्कर में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा को यशपाल दास व मधुकर मल्होत्रा से फटकार तक सुनने को मिली कि कैथल में इंटरसिटी की जिम्मेदारी जितेंद्र ढींगरा को कैसे और क्यों दे दी गई ?
इन स्थितियों के कारण गवर्नर्स खेमे में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए 'अपना' उम्मीदवार चुनने का काम और उलझ गया है । गवर्नर्स खेमे को इस वर्ष एक बार फिर से जितेंद्र ढींगरा से मुकाबला करना है; और इसके लिए उनके सामने सुधीर चौधरी, नवजीत सिंह औलख और गुरदीप सिंह दीप में से किसी एक को चुनने की जिम्मेदारी है । सुधीर चौधरी के लिए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हेमंत अरोड़ा बैटिंग कर रहे हैं । हेमंत अरोड़ा का तर्क है कि गवर्नर्स खेमे की काली करतूतों पर पर्दा डालने के लिए उन्होंने चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में अपनी जो सेवाएँ दी हैं और अपनी प्रोफेशनल पहचान तक को जिस तरह से खतरे में डाला है, उसके बदले में गवर्नर्स खेमा उनके उम्मीदवार के रूप में सुधीर चौधरी को गवर्नर नहीं बनवा सकता क्या ? हेमंत अरोड़ा की राह में सबसे बड़ा रोड़ा लेकिन मधुकर मल्होत्रा ने अटका रखा है । मधुकर मल्होत्रा ने नवजीत सिंह औलख की उम्मीदवारी का झंडा उठा रखा है । मधुकर मल्होत्रा लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट के सबसे ताकतवर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने का प्रभाव बनाए हुए हैं, और अपने आप को राजा साबू व यशपाल दास के बाद तीसरे नंबर का नेता मानते/जताते हैं । उन्होंने नवजीत सिंह औलख की उम्मीदवारी का झंडा पिछले वर्ष भी उठाया था, लेकिन फिर ऐन मौके पर उन्हें यह झंडा छोड़ना पड़ा था । मधुकर मल्होत्रा के सामने मुसीबत की बात यह है कि यदि इस वर्ष भी वह नवजीत सिंह औलख को गवर्नर्स खेमे का समर्थन नहीं दिलवा सके, तो फिर लोगों के बीच उनकी भारी फजीहत होगी । गुरदीप सिंह दीप अपने ही क्लब के सदस्य और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर शाजु पीटर के भरोसे हैं, लेकिन शाजु पीटर उनके लिए कुछ करते हुए नज़र ही नहीं आ रहे हैं । इस कारण से शाजु पीटर अपने ही क्लब के सदस्यों के निशाने पर हैं ।
गवर्नर्स खेमे के लिए समस्या और चुनौती की बात यह है कि पिछले वर्ष तो क्लब्स के पदाधिकारियों की खुशामद करके और उन्हें तरह तरह से डरा-धमका कर उन्होंने जितेंद्र ढींगरा को चुनाव हरवा दिया था, इस वर्ष लेकिन कोई जरूरी नहीं है कि वही फार्मूला फिर से सफल हो जाए । सयानों ने कहा भी है कि काठ की हांडी चूल्हे पर बार-बार थोड़े ही चढ़ती है । उम्मीदवार के रूप में जितेंद्र ढींगरा ने जिस तरह से अपनी सक्रियताओं को संयोजित किया है, तथा क्लब्स के पदाधिकारियों व अन्य प्रमुख लोगों के बीच अपनी पैठ बनाई है; उसका मुकाबला करने के लिए बाकी के संभावित उम्मीदवारों में से किसी ने भी अभी तक कोई तैयारी या सक्रियता नहीं दिखाई है । सभी अभी दरअसल गवर्नर्स खेमे की तरफ से हरी झंडी मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं । सुधीर चौधरी ने पिछले दिनों जरूर लोगों के साथ मेल-मुलाकात का सिलसिला शुरू किया था और अपने चुनाव अभियान में तेजी दिखाई थी, किंतु फिर वह भी घर बैठ गए । उनके नजदीकियों का कहना है कि सुधीर चौधरी को लगा कि गवर्नर्स खेमे की तरफ से उन्हें यदि हरी झंडी नहीं मिली, तो यह मेल-मुलाकातें क्या करेंगी - इसलिए अभी चुपचाप घर बैठना ही ठीक है ।
राजा साबू गिरोह के नेता लोग जितेंद्र ढींगरा को रोकने के लिए इस वर्ष भी अपनी अपनी फजीहत करवायेंगे क्या - यह देखना वास्तव में दिलचस्प होगा ।

Thursday, February 18, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 की देहरादून में होने वाली डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रेसीडेंट नॉमिनी ईआन रिसले को अपने ही डिस्ट्रिक्ट के लोगों से दूर रखने की राजा साबू और उनके संगी-साथी गवर्नर्स की कोशिश सफल होगी क्या ?

चंडीगढ़/देहरादून । राजेंद्र उर्फ राजा साबू तथा उनके साथी गवर्नर्स के लिए रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी ईआन रिसले को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में अपने डिस्ट्रिक्ट के उन वरिष्ठ सदस्यों से 'बचा' कर रखना बड़ी चुनौती होगी, जो उनसे मिल कर डिस्ट्रिक्ट में होने वाली फंड की गड़बड़ियों पर बात करना चाहेंगे । ईआन रिसले देहरादून में होने वाली डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में शामिल होने पहुँच रहे हैं । राजा साबू तथा डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों को खबर मिली है कि डिस्ट्रिक्ट के कुछेक वरिष्ठ सदस्य ईआन रिसले के संज्ञान में डिस्ट्रिक्ट में फंड को लेकर होने वाली अनियमितताओं तथा गड़बड़ियों की बात लाने की तैयारी कर रहे हैं, और वह इस संदर्भ में ईआन रिसले को ज्ञापन आदि सौपेंगे । उल्लेखनीय है कि रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ सदस्य व पूर्व प्रेसीडेंट एमपी गुप्ता इस तरह की कार्रवाई मौजूदा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के साथ कर चुके हैं, जिसके चलते पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू तथा डिस्ट्रिक्ट के दूसरे प्रमुख गवर्नर्स को रोटरी समाज में भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है । उनकी मुसीबत को केआर रवींद्रन की तरफ से एमपी गुप्ता को मिली तवज्जो ने और बढ़ाया । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने लोगों के सामने एमपी गुप्ता को जिस तरह की इम्पोर्टेंस दी, उससे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच एमपी गुप्ता का कद खासा बढ़ा नजर आया । इसमें राजा साबू और उनके संगी-साथी गवर्नर्स के लिए बुरी बात यह हुई कि इससे प्रेरित होकर डिस्ट्रिक्ट के कुछेक और लोग भी एमपी गुप्ता के नक्शेकदम पर चलने को तैयार होने लगे हैं ।
हैरत की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट से जुड़े कई मामलों के फंड के हिसाब-किताब को लेकर सवाल उठने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन और दूसरे प्रोजेक्ट्स से जुड़े पूर्व गवर्नर्स हिसाब-किताब देने/बताने को तैयार नहीं दिख रहे हैं; और तरह तरह की बहानेबाजियों से हिसाब-किताब देने को टालने की कोशिश करते हुए ही देखे जा रहे हैं । इस कोशिश को राजा साबू का पूरा समर्थन बताया और देखा जा रहा है । राजा साबू के समर्थन के भरोसे ही पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास ने तो 18 अक्टूबर को अंबाला में हुई इंटरसिटी में यह कहते हुए लोगों को सीधी चुनौती ही दे डाली थी कि हम कोई हिसाब-किताब नहीं देंगे, बताओ क्या कर लोगे ? हिसाब-किताब को लेकर सबसे ज्यादा छीछालेदर पिछले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिलीप पटनायक की हुई है - और उनके चक्कर में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हेमंत अरोड़ा भी फजीहत का शिकार हुए । दरअसल डिस्ट्रिक्ट में हिसाब-किताब देने की माँग के बढ़ने से जो दबाव बना, उससे दिलीप पटनायक के गवर्नर-काल की दो बैलेंस-शीट सामने आने का अद्भुत नजारा पेश हुआ । चूँकि पिछले वर्षों में होता यह रहा है कि गवर्नर अपने कार्यकाल की काली-पीली जैसी जो बैलेंस-शीट बनाता है, वह चुपचाप पास करा लेता रहा है - तो उसी तर्ज पर दिलीप पटनायक के कार्यकाल की भी बैलेंस-शीट बन गई । इस बीच लेकिन डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच हिसाब-किताब को लेकर जागरूकता बढ़ी देखी गई, तो दिलीप पटनायक व उनके सलाहकारों को बैलेंस-शीट 'ठीक' से बनाने की जरूरत महसूस हुई । हेमंत अरोड़ा 'सेवा' करने के लिए तैयार बैठे ही थे । हेमंत अरोड़ा को लोग पढ़े-लिखे चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में समझते/पहचानते रहे हैं - किंतु लोगों को अब पता चला कि चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में हेमंत अरोड़ा तो बस आँख बंद करके 'ठप्पे' लगाने का काम करते हैं - उनकी फीस उन्हें दे दो, और जहाँ चाहो वहाँ ठप्पा लगवा लो । चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में हेमंत अरोड़ा ने दिलीप पटनायक के गवर्नर-काल की पहली बैलेंस-शीट में जिस श्रद्धा-भाव से ठप्पा लगाया था, उसी श्रद्धा-भाव से उन्होंने दूसरी बैलेंस-शीट में भी ठप्पा लगा दिया । पहली बैलेंस-शीट में दिखाया गया फायदा दूसरी बैलेंस-शीट में भारी घाटे में बदल गया । फायदे को भारी घाटे में बदलने के लिए की गई हेराफेरी के लिए हेमंत अरोड़ा को फीस कितनी मिली, यह तो हेमंत अरोड़ा और दिलीप पटनायक ही जानते होंगे - लेकिन फायदे के भारी घाटे में बदलने का जादू लोगों ने मुफ्त में देखा ।
यशपाल दास की 'हिसाब नहीं देंगे, बताओ क्या कर लोगे' जैसी धमकीभरी चुनौती और दिलीप पटनायक के गवर्नर-काल की दो बैलेंस-शीट आने से साफ हो गया कि मामला 'दाल में कुछ काला' भर होने का नहीं है, बल्कि पूरी की पूरी दाल के काला होने का है । राजा साबू और उनके संगी-साथी गवर्नर्स को हालाँकि इस बात की ज्यादा परवाह नहीं है कि डिस्ट्रिक्ट में और या रोटरी में लोग उनके बारे में कैसी कैसी बातें कर रहे हैं, और कैसे कैसे सवाल उठा रहे हैं; लोगों  के सवालों पर वह चुप्पी मार कर बैठे हैं - क्योंकि वह जानते हैं कि लोग सवाल करने के अलावा कुछ और कर भी नहीं पायेंगे । दरअसल इसी विश्वास के चलते यशपाल दास यह कहने का साहस कर सके कि 'हम हिसाब नहीं देंगे, बताओ क्या कर लोगे ।' किंतु उनकी समस्या और चिंता यह है कि ईआन रिसले के मन में यदि यह बात बैठ गई कि राजा साबू और उनके संगी-साथी हिसाब-किताब में गड़बड़ी करते हैं, तो क्या होगा । ईआन रिसले अभी रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी हैं - उनके प्रेसीडेंट बनने में अभी समय है; पर अभी से उनके मन में यदि यह बात बैठा दी गई कि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में हिसाब-किताब में भारी हेराफेरी होती है, और इसके चलते प्रेसीडेंट पद तक पहुँचने पर उन्होंने राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट के हिसाब-किताब को सख्ती से देखना/दिखवाना शुरू कर दिया - तो फिर क्या होगा ? राजा साबू और उनके संगी-साथी गवर्नर्स को एमपी गुप्ता तथा दूसरे लोगों के सवालों से ज्यादा परेशानी नहीं है; वह जानते/समझते हैं कि एमपी गुप्ता तथा दूसरे लोगों के सवाल उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकेंगे; लेकिन यह बात वह जरूर समझ रहे हैं कि एमपी गुप्ता तथा दूसरे लोगों द्धारा लगातार उठाए जा रहे सवालों से रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय में उनके खिलाफ सुबूत इकट्ठे हो रहे हैं, जो उनके लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं । उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले तक कौन इस बात पर विश्वास कर सकता था कि राजा साबू का डिस्ट्रिक्ट पायलट प्रोजेक्ट के घेरे में आ जायेगा, और डिस्ट्रिक्ट में राजा साबू कोई मनमानी करें - और रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय उनकी मनमानी को पूरा नहीं होने देगा । इसी तरह के झटकों से सबक लेते हुए राजा साबू तथा उनके संगी-साथी गवर्नर्स कोशिश करना चाहते हैं कि हिसाब-किताब पर सवाल उठा रहे लोगों की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में ईआन रिसले से ज्यादा देर की मुलाकात और बातचीत न हो सके । देहरादून में होने वाली डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रेसीडेंट नॉमिनी ईआन रिसले को अपने ही डिस्ट्रिक्ट के लोगों से दूर रखने की राजा साबू और उनके संगी-साथी गवर्नर्स की यह कोशिश क्या गुल खिलायेगी, यह देखना दिलचस्प होगा ।

Friday, December 25, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में की गईं दिलीप पटनायक की बेईमानियों को हेमंत अरोड़ा व राजा साबू से मिल रहे सहयोग/समर्थन से मामला गंभीर हुआ

देहरादून/चंडीगढ़ । दिलीप पटनायक की बेईमानियों और घपलेबाजियों पर पर्दा डालने के लिए हेमंत अरोड़ा जिस तरह अपने प्रोफेशन तक के साथ बेईमानी करने को तैयार हो गए - उसे देख/जान कर कहा जा सकता है कि डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स में बहुत याराना है - पर्दे के पीछे एक दूसरे को गिराने/धकेलने के वह चाहें जितने करतब करते हों, लेकिन 'मुसीबत' के समय यह 'मौसेरे भाई' बन जाते हैं और एक दूसरे की मदद करने के लिए वह किसी भी हद तक चले जाते हैं । पिछले दिनों ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में टीके रूबी को हराने के लिए इन्होंने अपनी अपूर्व एकता का परिचय दिया था, और अब दिलीप पटनायक की घपलेबाजियों पर पर्दा डालने के मामले में इन्होंने आपस में हाथ मिला लिए हैं । हेमंत अरोड़ा जहाँ अपने प्रोफेशन तक से बेईमानी करने को तैयार हो गए, वहाँ दूसरे 'मौसेरे भाई' डिस्ट्रिक्ट में यह माहौल बनाने में जुट गए हैं कि कोई भी दिलीप पटनायक की बेईमानी पर बात नहीं करेगा । हालाँकि बातें तो हो रही हैं, लेकिन जिस गुपचुप और फुसफुसाहटों वाले अंदाज में हो रही हैं - उसने मामले को और दिलचस्प बना दिया है । हेमंत अरोड़ा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में की गई दिलीप पटनायक की वित्तीय हेराफेरियों को छिपाने के लिए 'मौसेरे भाई' का फर्ज अदा करते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रोफेशन में एक बड़ा कमाल यह किया है कि एक ही वर्ष के लिए दो दो बैलेंसशीट साइन कर दीं । जानकारों का कहना है कि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया में हेमंत अरोड़ा की इस कारस्तानी की उचित तरीके से यदि रिपोर्ट हो जाए, तो चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में काम करने वाली उनकी फर्म का अधिकार छिन जायेगा - और उनकी पिछले करीब तीस वर्षों में कमाई साख धूल में मिल जायेगी ।
हेमंत अरोड़ा के जो लोग नजदीकी हैं वह हैरान हैं कि हेमंत अरोड़ा तो बहुत व्यवस्थित तरीके से काम करने वाले व्यक्ति हैं, आखिर तब फिर वह इस तरह की बेईमानी करने के लिए कैसे और क्यों तैयार हो गए ? हेमंत अरोड़ा ने इंडस्ट्री और प्रशासन और अपने शहर-समाज में अपनी विशेष पहचान बनाई है - और इस तरह अपने पिता एएल अरोड़ा की पहचान की विरासत को और समृद्ध किया है । ऐसे में उनसे यह उम्मीद किसी को नहीं रही कि वह ऐसा कोई काम करेंगे जो उनकी विरासत और उनकी पहचान पर कालिख पोतती हो । लेकिन तथ्य बता रहे हैं कि हेमंत अरोड़ा ने ऐसा काम कर दिया है । क्यों कर दिया - इसे लेकर अलग अलग किस्से/कहानियाँ हैं : कुछ कहते हैं कि दिलीप पटनायक ने फर्जी बिल लगाकर जो पैसे बनाए हैं, उनमें हेमंत अरोड़ा की भी मिलीभगत रही है, और इसलिए यह करना उनकी मजबूरी था; कुछ कहते हैं कि राजा साबू के कहने पर वह अपने प्रोफेशन के साथ धोखाधड़ी करने को तैयार हो गए; कुछ कहते हैं कि हेमंत अरोड़ा ने जब से मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचा ली है और जज साहब के साथ गोल्फ खेल लिया है, तब से वह यह समझने लगे हैं कि उन्हें तो कुछ भी करने का लाइसेंस मिल गया है । बदकिस्मती की बात यह रही कि दिलीप पटनायक को 'बचाने' के लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में हेमंत अरोड़ा ने जो तिकड़म की, उससे दिलीप पटनायक बचने की बजाए फँस और गए हैं । हेमंत अरोड़ा ने दूसरी बैलेंसशीट साइन करने की जो बेईमानी की, उसमें भी एक यह और बेईमानी की कि कुछेक कैटेगरी की जानकारी दी ही नहीं, जो कि पहले वाली बैलेंसशीट में थीं । हेमंत अरोड़ा की इस कारस्तानी से दिलीप पटनायक की हरकत न सिर्फ और साफ तरीके से निशाने पर आ गई, बल्कि उसके सुबूतों पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित हो गया । 
दिलीप पटनायक के गवर्नर-काल की हेमंत अरोड़ा ने जो पहली बैलेंसशीट साइन की उसमें 20 हजार 407 रुपए का फायदा दिखाया गया था; लेकिन तथ्यों की बाजीगरी के साथ हेमंत अरोड़ा ने जो दूसरी बैलेंसशीट साइन की, उसमें उक्त फायदा जादुई तरीके से छह लाख 23 हजार 547 रुपए के घाटे में बदल गया । फायदे को घाटे में बदलने का 'खेल' करने के लिए मुख्य रूप से पेट्स के खर्चों में हेराफेरी करना पड़ी । पहली बैलेंसशीट में पेट्स का जो खर्चा 9 लाख 63 हजार 475 रुपए था, वह दूसरी बैलेंसशीट में 13 लाख 50 हजार 450 रुपए हो गया । यह जो खर्चा बढ़ा, इसे 'दिखाने' वाले सारे बिल कच्चे हैं । इससे समझा जा सकता है कि फायदे को घाटे में बदलने के लिए फर्जी बिल बनवाए और लगाए गए हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस सब्सिडी में भी इसी तरह का खेल हुआ : पहली बैलेंसशीट में कॉन्फ्रेंस सब्सिडी में 6 लाख 49 हजार रुपए दिखाए गए, जो दूसरी बैलेंसशीट में बढ़ कर 9 लाख 63 हजार 475 रुपए हो गई । दिलीप पटनायक के गवर्नर-काल के हिसाब-किताब को लेकर दो बैलेंसशीट बनना; खर्चों को बढ़ा-चढ़ा कर फायदे को नुकसान में बदलना; और इसके लिए कच्चे बिल प्रस्तुत करना - ऐसे काम साबित हुए कि दिलीप पटनायक बेईंमान कहे जाने लगे और उनकी इस बेईमानी में हेमंत अरोड़ा तथा राजा साबू की मिलीभगत के चर्चे होने लगे । टीके रूबी के मामले के चलते राजा साबू तथा डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स की राजनीतिक बेईमानी के चर्चे पहले से ही थे; अब इस प्रकरण से साबित है कि राजनीतिक बेईमानी करने वाले लोग पैसों की बेईमानी करने में और उसे सपोर्ट करने में भी नहीं हिचकते हैं । 
दिलीप पटनायक के घोटाले के सामने आने का किस्सा और उसका सबक भी खासा दिलचस्प है । बताया गया है कि रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ सदस्य एमपी गुप्ता ने ऐसे ही खेल खेल में जिज्ञासावश मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन को एक ईमेल पत्र लिख कर पिछले रोटरी वर्ष का हिसाब-किताब माँग लिया । डेविड हिल्टन ने हिसाब-किताब देने में आनाकानी सी की, तो एमपी गुप्ता को अपनी माँग दोहराने में मजा आने लगा । एमपी गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि एमपी गुप्ता को भी अनुमान नहीं था कि जिज्ञासावश शुरू किया गया उनका अभियान इतना बड़ा गुल खिला देगा और डिस्ट्रिक्ट की पूरी लीडरशिप को मुसीबत में डाल देगा । डिस्ट्रिक्ट के कुछेक नेताओं ने एमपी गुप्ता की इस मुहिम में उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी देखने/पहचानने की कोशिश की, पर उन्हें कुछ मिला नहीं । एमपी गुप्ता को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के नजदीक देखा/समझा जाता रहा है, क्योंकि मधुकर मल्होत्रा के गवर्नर-काल का बहुत सा काम एमपी गुप्ता के ऑफिस से होता था; इसलिए कयास लगाया जाने लगा कि एमपी गुप्ता की इस मुहिम के पीछे कहीं मधुकर मल्होत्रा तो नहीं हैं ? इस तरह के कयास सार्वजनिक होने लगे तो मधुकर मल्होत्रा को खुद आगे आकर यह सफाई देने के लिए मजबूर होना पड़ा कि एमपी गुप्ता की इस मुहिम से उनका कोई लेनादेना नहीं है । मधुकर मल्होत्रा ने तो लोगों को यहाँ तक बताया कि उन्होंने तो एमपी गुप्ता को आगाह किया है कि इस तरह की मुहिम से उनके रोटरी कैरियर का नुकसान होगा । (चलो, इससे यह भी पता चला कि मधुकर मल्होत्रा रोटरी में भी कैरियर देखते हैं !) एमपी गुप्ता ने यह मुहिम क्यों शुरू की है, यह तो वही बता सकते हैं; लेकिन उनकी मुहिम का नतीजा यह जरूर बताता है कि बिना आक्रामक हुए और बिना आरोप लगाए भी डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों और नेताओं की पोल खोली जा सकती है । 
रोटरी में तमाम लोग शिकायत करते हुए सुने जा सकते हैं कि पदाधिकारी और नेता मनमानी करते हैं और मनमानी के जरिए बेईमानी करते हैं; शिकायत करने वाले लोग चूँकि विरोध करने का साहस नहीं दिखा पाते हैं - इसलिए मनमानियाँ और बेईमानियाँ भी चलती रहती हैं और उनके बारे में दबे-छिपे तरीके से शिकायतें भी चलती रहती हैं । एमपी गुप्ता द्वारा अपनाए गए तरीके ने सबक दिया है कि कोई आरोप मत लगाओ, कोई विरोध मत करो - बस विनम्रता के साथ सिर्फ सवाल करो; आप देखोगे कि बड़ी बड़ी मूरतों की चमक उतरने लगेगी और उनकी असलियत सामने आने लगेगी । एमपी गुप्ता के सवालों ने दिलीप पटनायक की बेईमानियों और उनकी बेईमानियों को सहयोग/समर्थन देते हेमंत अरोड़ा व राजा साबू जैसे बड़े लोगों की भी असलियत को लोगों के सामने ला ही दिया है न !