Friday, March 12, 2021

अजीत जलान का धांधलियों के चलते जाना तय,दादागिरि के बल पर कर रहे है माहौल खराब

शुक्रवार -12 मार्च - 2021

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट (3011) में नामिनी पद (डीजीएनडी-वर्ष-23-24) की चुनावी लड़ाई में अजीत जलान ने जिन धांधलियों व भ्रष्टाचार के सहारे अपने विजयी होने की दास्तान लिखी , उनके विरोधी जितेंद्र गुप्ता ने रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड में दो हजार डॉलर की शिकायत कर उनकी धांधलियों का न सिर्फ खुलासा कर दिया,बल्कि अजीत जलान के वापस जाने की स्क्रिप्ट लिख डाली ? उनकी जीत की धांधलियों में शामिल अन्य पदाधिकारी अब स्वयं के बचाव में अजीबो-गरीब तर्क देते फिर रहे हैं। इस पूरे मामले से इतना तो साफ है कि अजीत जलान का जाना लगभग तय है? इसके बावजूद अजीत जलान की धांधलियों में बराबर के भागेदारी गर्वनर संजीव राय मेहरा अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। संजीव कुमार मेहरा के खिलाफ एक साल में दो हजार डॉलर की यह दूसरी शिकायत है,जिसने गवर्नर के पद को शर्मशार कर दिया। क्योंकि, पिछले पांच छह सालों से गर्वनर पद के किसी शख्सियत पर कोई आरोप नहीं लगा हैं। 

नई दिल्ली। डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के नामिनी पद की चुनावी लड़ाई में सत्ताधारी खेमे की पक्षपात पूर्ण मनमानियों और बेइमानियों को लेकर होने वाली शिकायत रोटरी इंटरनेशनल के बड़े और प्रमुख पदाधिकारियों तक जा पहुंची है और इस तरह डिस्ट्रिक्ट की चुनावी लड़ाई एक बड़ा मुद्दा बन गया है। डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के नामिनी पद की चुनावी लड़कई में अजीत जलान ने जीत के लिए जिन धांधलियों और बेईमानियों की सहारा लिया,उसकी सूची बहुत लंबी है। आरोप है कि उन्होंने सत्ताधारी गर्वनर के साथ मिलकर ग्लोबल ग्रॉट बांटी, डिस्ट्रिक्ट फंक्शन का मिस यूज किया। प्रेसीडेंटों को िगफ्ट बाटे। आरोप तो यहां तक है कि इलेक्ट्रोनिक्स वोटिंग का मिस यूज किया है। ऐसी न जाने कितनी हेराफेरी करके अजीत जलान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के नामिनी पद की चुनावी लड़ाई तो जीत गए,लेकिन उनकी इस जीत पर विरोधी जितेंद्र गुप्ता ने अपनी सक्रियता से इतनी जल्दी पानी फेर दिया इसका आभास तो शायद अजीत जलान को भी नहीं था। दूसरी तरफ इस मामले में शिकायतकर्ता जितेंद्र गुप्ता का कहना है कि मैं भले ही हार गया,लेकिन फाइट करता रहूंगा। बल्कि शिकायत करने के बाद जो लोग क्लब के दूसरे लोगों को धमकाकर अभद्र व्यवहार कर रहे है,उनके नामों का भी खुलासा करूंगा।

हालाकि, अजीत जलान की हेराफेरी व धांधलियों के आरोप विरोधी गुट समय समय पर लगाता रहा,इसके बावजूद उनकी जीत का मार्जिन इतना कम रहा,जो विरोधियों के लिए इक्के का काम कर गया।  रोटरी इंटरनेशनल के बड़े और प्रमुख पदाधिकारियों के पास दो हजार डॉलर की शिकायत पहुंचते ही, उन्हें भी तमाम खामियां दिखाई देने लगी, बल्कि पहले बीच बीच में चचार्ओं के दौरान धांधलियों के आरोप की सच्चाई समझ में आने लगी। फिलहाल, इस मामले में इन बातों को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है कि अजीत जलान का क्या होगा? अधिकांश लोगों का मानना है कि उनका जाना लगभग तय है। दूसरी तरफ पूरे मामले से वाकिफ अजीत जलान एक बार फिर पत्ते फेटने में लग गए है, उनके नजदीकियों का मानना है कि जब सत्ताधारी नेतृत्व गर्वनर संजीव राय मेहरा समेत  विनय भाटिया ने मिलकर जो धांधलियां की है वह अजीत जलान पर लगे आरोपों को गलत साबित करने का प्रयास करेंगे? जबकि गर्वनर संजीव राय मेहरा व उनके सहयोगी मामले को संभालने के बजाए सड़क छाप जैसी गुंडागर्दी पर उतारू है। क्लब के लोगों से इस मामले में आरोपों को वापस लेने के लिए न सिर्फ दबाव बना रहे,बल्कि उनको धमकाया जा रहा है। अजीत जलान ही नहीं बल्कि उनके साथ पूरे प्रकरण में शामिल सदस्य जिस तरह की हरकतों को अंजाम दे रहे है, उसका भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसकी चिंता किए बिना तमाम तरह का अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। पूरी फिल्म में अजीत जलान विलेन तो बन ही गए , अब फिल्म के निमार्ता- निर्देशक (रोटरी इंटरनेशनल के बड़े व प्रमुख पदाधिकारी)को तय करना है कि वह विलेन का जाना तय करते है या फिर कोई दूसरी कार्रवाई जो हर हाल में अजीत जलान के रोटरी भविष्य के लिए दागदार साबित होगा।

इस सब के बीच रोटरी इंटरनेशनल के गर्वनर पद पर वर्तमान में काबिज संजीव राय मेहरा की हरकतों से प्रतिष्ठा व साख में जो गिरावट आई है। उसे हमेशा याद रखा जाएगा? बता दे कि गर्वनर ने पहले भी विनय भाटिया को डीएमसी पद पर बेशर्मी से नियमों के विरुद्ध जाकर नियुक्त किया था। जब इसकी शिकायत आरआई में की गई तो संजीव राय मेहरा को बड़ी बेइज्जद होकर नियुक्ति वापस लानी पड़ी। पूरे डिस्ट्रिक्ट में दोनों की थू-थू हो गई और मुंह छिपाना पड़ा। इतना ही नहीं दीपक तलवार ने  डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के नामिनी पद के चुनाव में प्रत्याशी के रूप में फार्म भरा था,लेकिन गर्वनर से उन्हें बिना कोई पावर के उन्हें डिस्कालिफाइड कर दिया था। इसकी शिकायत भी दीपक तलवार ने की है। सूत्रों के अनुसार यहां पर भी डिस्ट्रिक्ट गर्वनर संजीव राय मेहरा को मुंह की खानी पड़ेगी। आरआई उन्हें बर्खास्त भी कर सकता है। इन हरकतों के चलते गर्वनर संजीव राय मेहरा व अजीत जलान पर कई कार्रवाई होगी, इस पर सबकी निगाहें लगी हुई है?  

--------------------------

Tuesday, November 3, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में जितेंद्र ढींगरा के नेतृत्व वाले मौजूदा सत्ताधारियों ने अपने विरोधियों को चुप करने तथा बदनाम करने के लिए राजा साबू के नेतृत्व वाले पिछले सत्ताधारियों जैसे हथकंडे अपना कर विडंबना, ट्रैजिडी और कॉमेडी का नजारा पेश किया हुआ है

कुरुक्षेत्र । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई में सत्ता खेमे की पक्षपातपूर्ण मनमानियों और बेईमानियों को लेकर होने वाली शिकायतें रोटरी इंटरनेशनल के बड़े और प्रमुख पदाधिकारियों तक जा पहुँची हैं, और इस तरफ डिस्ट्रिक्ट की चुनावी लड़ाई एक बड़ा मुद्दा बन गया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार पंकज डडवाल के क्लब - रोटरी क्लब शिमला मिडटाऊन के प्रेसीडेंट अनिल सूद ने पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज को पत्र लिख कर पक्षपातपूर्ण मनमानियों और बेईमानियों पर लगाम लगाने का अनुरोध किया था; लेकिन अपने अनुरोध पर उन्हें जब कोई कार्रवाई होते हुए नहीं दिखी तो उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों से लेकर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर्स भरत पांड्या व  कमल सांघवी को अपनी शिकायतों से अवगत कराते हुए पत्र लिखे/भेजे और उनसे उचित कार्रवाई का अनुरोध किया । इस घटना ने डिस्ट्रिक्ट में इतिहास को ट्रैजिक रूप में दोहराने का काम किया है । अभी कोई चार/पाँच वर्ष पहले ही, आज के सत्ताधारी तब के सत्ताधारियों की मनमानियों व बेईमानियों की शिकायत किया करते थे; राजा साबू के नेतृत्व वाले तब के सत्ताधारी बड़े अहंकार के साथ दावा किया करते थे कि रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों तक उनकी चूँकि सीधी पहुँच है, इसलिए उनके खिलाफ होने वाली शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी; विडंबना और ट्रैजिडी यह है कि आज के सत्ताधारी भी वही 'भाषा' बोल रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि पंकज डडवाल के समर्थक रोटरी इंटरनेशनल के किसी भी पदाधिकारी से चाहें जो शिकायत कर लें, उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी ।
इसी दावे के भरोसे, निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने घोषणा की है कि अभी वह अपने बेटे की शादी के आयोजन में व्यस्त थे, लेकिन अब वह जल्दी ही 'बिग गेट टुगेदर' आयोजित करेंगे । उनकी इस घोषणा पर उनके उम्मीदवार अरुण मोंगिया खुशी जता रहे हैं । पिछले दिनों पहले सहारनपुर में और फिर अंबाला में अरुण मोंगिया की उम्मीदवारी के समर्थन में वोट जुटाने के उद्देश्य से मीटिंग/पार्टी की गई, जिसमें जितेंद्र ढींगरा के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अजय मदान और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी नवीन गुलाटी भी शामिल हुए । किसी ने इसे लेकर आपत्ति की, तो उसे जबाव दिया गया कि जितेंद्र ढींगरा अपने बेटे की शादी में भीड़भाड़ से बचने के लिए लोगों को बुला नहीं सके थे, इसलिए वह अब लोगों को पार्टी दे रहे हैं । इस पर लोगों के बीच सुनने को मिला कि अपने बेटे की शादी की पार्टी लोगों को अपने घर बुला कर दी जाती है, जितेंद्र ढींगरा ने अलग रिवाज शुरू किया है, वह लोगों के घर जाकर पार्टी दे रहे हैं । जाहिर है कि उनके तर्क को डिस्ट्रिक्ट में लोग हजम नहीं कर पा रहे हैं, और इसे लोगों की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश के रूप में ही देखा/पहचाना जा रहा है ।
डिस्ट्रिक्ट में इतिहास अपने आप को सिर्फ ट्रैजिक रूप में ही नहीं दोहरा रहा है, बल्कि कुछेक मामलों में वह कॉमेडी भी बन गया है । लोगों को याद है कि डेविड हिल्टन के गवर्नर-वर्ष में टीके रूबी के पक्ष में आयोजित की गई मीटिंग में शामिल होने के 'अपराध' में डिस्ट्रिक्ट टीम के 12 प्रमुख सदस्यों को टीम से निलंबित कर दिया गया था, उसी तरह की 'मानसिकता' को प्रकट करते हुए पंकज डडवाल की उम्मीदवारी के एक समर्थक - रोटरी क्लब सोलन सिटी के पूर्व प्रेसीडेंट वीरेंद्र अग्रवाल को वाट्स-ऐप ग्रुपों से निकाल दिया गया है । वीरेंद्र अग्रवाल का 'अपराध' ठीक वही है, जो डेविड हिल्टन के गवर्नर-वर्ष में टीके रूबी और उन 12 सदस्यों का था - सत्ताधारियों की पक्षपातपूर्ण मनमानियों व बेईमानियों का विरोध करना । डेविड हिल्टन की डिस्ट्रिक्ट टीम से 12 सदस्यों को निकालने का कोई कारण नहीं बताया गया था, वीरेंद्र अग्रवाल को वाट्स-ऐप ग्रुपों से निकालने का भी कोई कारण नहीं बताया गया है । एक ग्रुप में एक सदस्य ने जितेंद्र ढींगरा से कारण पूछा तो जितेंद्र ढींगरा ने उन्हें जबाव दिया कि वह फोन पर उन्हें कारण बताते हैं । फोन पर क्यों ? वीरेंद्र अग्रवाल को आपने ग्रुपों से निकाला, यह बात सभी को पता है - तो कारण भी सभी को पता होना चाहिए ! कारण आप किसी के कान में क्यों बतायेंगे ? इस रवैये पर हर किसी को हैरानी है, और आरोप सुने जा रहे हैं कि कारण सार्वजनिक रूप से बताएंगे, तो हो सकता है कि वह झूठे साबित हों !
वीरेंद्र अग्रवाल, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अजय मदान के एक 'झूठे' बताये जा रहे आरोप के पहले भी शिकार हो चुके हैं । अजय मदान ने कई लोगों को अलग अलग बताया है कि वीरेंद्र अग्रवाल ने शेखर मेहता वाले कार्यक्रम में उनकी पत्नी के साथ बदतमीजी की थी । कुछेक लोगों के जरिये यह बात जब वीरेंद्र अग्रवाल के सामने पहुँची, तो उन्होंने पूरी घटना बताते हुए हैरानी प्रकट की कि एक सामान्य सी बात को बदतमीजी घोषित कर अजय मदान उन्हें बदनाम करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं ? वीरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, हुआ यह था कि कुरुक्षेत्र में आयोजित शेखर मेहता के सम्मान समारोह का आयोजन देर रात तक चलता रहा था । रात 12 बजे के करीब, कई लोगों को जब भूख सताने लगी और उन्होंने घर लौटने के बारे में भी सोचना शुरू किया, तो वह खाने के स्टॉल की तरफ बढ़े और खाना खाने की तैयारी करने लगे । तभी अजय मदान की पत्नी ने वहाँ आकर कहा कि अभी कार्यक्रम चल रहा है, इसलिए अभी खाना शुरू नहीं किया जाना चाहिए । इस पर कुछेक अन्य लोगों के साथ-साथ वीरेंद्र अग्रवाल ने भी कहा कि रात के 12 बज रहे हैं, लोगों को भूख लग रही है और वह घर लौटना चाहते हैं; जिन लोगों की कार्यक्रम में रुचि हो, वह रुकें - और जिन लोगों की रुचि न हो, उन्हें खाना खाकर घर जाने दिया जाए । वीरेंद्र अग्रवाल के इन तर्कों से दूसरे लोगों को भी बल मिला, और तब अजय मदान की पत्नी की खाना रोकने की कोशिश सफल नहीं हो सकी । अजय मदान इस घटना को अपनी पत्नी के साथ बदतमीजी करना कह/बता रहे हैं । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि तीन-चार वर्ष पहले तब के सत्ताधारी अपने विरोधियों को इसी तरह की बहानेबाजियों से बदनाम किया करते थे; विडंबना, ट्रैजिडी और कॉमेडी यह है कि तब के विरोधियों ने आज सत्ताधारी बन कर अपने विरोधियों से निपटने के लिए वैसे ही हथकंडे अपना लिए हैं ।

Monday, November 2, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन लंबे समय तक डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के सीन से गायब रहने के बाद, अब जब पुनः वापस लौटे हैं, तो विनय भाटिया और विनोद बंसल के लिए वास्तव में मुसीबत बन कर ही लौटे हैं

नई दिल्ली । निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन की पुनः शुरू हुई सक्रियता ने रोटरी फाउंडेशन के लिए दिए गए दान के बदले में प्वाइंट न मिलने के मामले को एक बार फिर गर्म कर दिया है, और इस स्थिति ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन/चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है । ऐसे में, मजे की स्थिति यह बनी है कि सुरेश भसीन तो विनय भाटिया की उम्मीदवारी को मदद करने में जुटना चाहते हैं, लेकिन विनय भाटिया और उनकी उम्मीदवारी की कमान संभालने वाले विनोद बंसल उनकी मदद से बचने की कोशिश कर रहे हैं । दरअसल विनय भाटिया और विनोद बंसल जान/समझ रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट में सुरेश भसीन की जैसी बदनामी है, उसके कारण उनके साथ जुड़ने से लाभ की बजाये नुकसान ज्यादा होगा - इसलिए सुरेश भसीन से दूर रहने तथा उनको दूर रखने में ही भलाई है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच, सुरेश भसीन की बदनामी हालाँकि तभी शुरू हो गई थी, जब वह गवर्नर थे - और इसका खामियाजा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में महेश त्रिखा को तथा सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में अमित जैन को उठाना/भुगतना पड़ा था । सुरेश भसीन ने इन दोनों का खुलकर समर्थन किया था । डिस्ट्रिक्ट में हर किसी का मानना/समझना रहा कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुरेश भसीन की बदनामी के चलते उनका समर्थन महेश त्रिखा और अमित जैन को भारी पड़ा 
सुरेश भसीन के लिए फजीहत की बात यह रही कि गवर्नर पद से हटने के बाद उनकी बदनामी में और इजाफा ही हुआ है । दरअसल, उनके गवर्नर-वर्ष के आखिरी दो-तीन महीनों में रोटरी फाउंडेशन के लिए जिन लोगों ने पैसे दिए, उनमें से कईयों की शिकायत रही कि उनके द्वारा दी गई रकम के बदले में मिलने वाले प्वाइंट उन्हें नहीं मिले हैं । शुरू में तो सुरेश भसीन ने शिकायतकर्ताओं को यह कहते/बताते हुए टाला कि रोटरी फाउंडेशन के लिए रकम जुटाने/जुटवाने का काम विनोद बंसल और अशोक कंतूर ने किया था और जैसे ही उन्हें इन दोनों से संबंधित डिटेल्स मिलेंगे - वह प्वाइंट्स दिलवाने का काम करवायेंगे । खास बात यह रही कि सुरेश भसीन की इस बात पर विनोद बंसल और अशोक कंतूर ने पहले तो कोई सफाई या जबाव नहीं दिया, लेकिन जब शिकायतकर्ताओं का शोर बढ़ता गया और बदनामीभरे आरोपों ने सुरेश भसीन के साथ-साथ उन्हें भी घेरे में लेना शुरू कर दिया, तब मामले से पीछा छुड़ाने की कोशिश करते हुए उन्होंने कहा/बताया कि उन्होंने तो रोटरी फाउंडेशन के लिए रकम जमा करवाने के काम में सुरेश भसीन की मदद भर की थी, और हिसाब-किताब तो सुरेश भसीन के पास ही है । इस मामले में ज्यादातर शिकायतकर्ता ऐसे रोटेरियंस रहे, जिन्होंने रोटरी फाउंडेशन के लिए नकद रकम दी थी; इसलिए उन्हें डर हुआ कि उनके द्वारा दी गई रकम रोटरी फाउंडेशन में पहुँची भी कि नहीं । इस मामले में शोर-शराबा अभी चल ही रहा था कि सुरेश भसीन डिस्ट्रिक्ट और रोटरी के सीन से गायब ही हो गए । इससे पहले तो बबाल बढ़ा, लेकिन फिर मामला शांत-सा हो गया ।
सुरेश भसीन लेकिन अब जब यह बताते हुए फिर से सक्रिय हुए हैं कि कुछ व्यक्तिगत व पारिवारिक कारणों से वह पिछले कुछेक सप्ताहों से लोगों के संपर्क में नहीं रह पा रहे थे; तो फिर शांत सा पड़ा उक्त मामला भी गर्म होता लग रहा है । सुरेश भसीन ने यह कहते हुए उक्त गर्मी को राजनीतिक ट्विस्ट भी दे दिया है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए बनने वाली नोमीनेटिंग कमेटी में प्रतिनिधित्व के लिए वह विनोद बंसल के उम्मीदवार विनय भाटिया को चुनाव जितवाने के लिए काम करेंगे । सुरेश भसीन की इस घोषणा ने विनोद बंसल और विनय भाटिया को खुश करने की बजाये डरा और दिया है । उन्हें डर हुआ है कि सुरेश भसीन की बदनामी के कारण, उनका समर्थन वास्तव में नुकसान पहुँचाने का काम ही करेगा - इसलिए वह सुरेश भसीन को अपने से दूर रखने का ही प्रयास करना चाहते हैं । उनकी समस्या लेकिन यह भी है कि वह सुरेश भसीन को दूर रखने का, और उनसे पीछा छुड़ाने का काम करें, तो कैसे करें ? विनोद बंसल को सुरेश भसीन से, रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे देने वाले लोगों को अभी प्वाइंट दिलवाने का काम करवाना है - इसलिए उनके सामने सुरेश भसीन को साथ रखने की मजबूरी भी है । इस मजबूरी को निभाते हुए उन्हें लेकिन सुरेश भसीन की बदनामी के चलते होने वाले राजनीतिक नुकसान से बचने की चुनौती से भी जूझना है । इस तरह, लंबे समय से डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के सीन से गायब रहे सुरेश भसीन अब जब पुनः वापस लौटे हैं, तो विनय भाटिया और विनोद बंसल के लिए वास्तव में मुसीबत बन कर ही लौटे हैं । 

Sunday, November 1, 2020

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल में आनन-फानन में श्रीनगर में सब-रीजनल कॉन्फ्रेंस करने की तैयारी के पीछे चेयरमैन शशांक अग्रवाल की सेंट्रल काउंसिल की चुनावी तैयारी तथा इंस्टीट्यूट के पैसे पर श्रीनगर घूमने के जुगाड़ को देखा/पहचाना जा रहा है

नई दिल्ली । नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के चेयरमैन शशांक अग्रवाल की 'सब-रीजनल कॉन्फ्रेंस' के बहाने से श्रीनगर घूमने की तैयारी पर सेंट्रल काउंसिल सदस्य संजीव सिंघल ग्रहण लगाते दिख रहे हैं । संजीव सिंघल ने औपचारिक रूप से हालाँकि कोरोना से बचाव को लेकर लोगों की भागीदारी वाले आयोजनों के संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स - एमएचए) द्वारा जारी गाइडलाइंस का हवाला देकर 6 नबंवर को आयोजित की जाने वाली सब रीजनल कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाया है, लेकिन अनौपचारिक रूप से अपने संपर्क में आने वाले चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को वह इस कॉन्फ्रेंस को आनन-फानन में आयोजित करने तथा इसके बहाने से श्रीनगर घूमने व अपनी राजनीति चलाने की शशांक अग्रवाल की कोशिशों के रूप में व्याख्यायित कर हैं ।नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के ही सदस्यों का कहना/बताना है कि संजीव सिंघल को लग रहा है कि शशांक अग्रवाल सेंट्रल काउंसिल का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, और उनकी इस तैयारी को इंस्टीट्यूट के प्रेसीडेंट अतुल गुप्ता से सहयोग व समर्थन मिल रहा है । संजीव सिंघल को ही नहीं, अन्य कई सेंट्रल काउंसिल सदस्यों तथा प्रमुख चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को लग रहा है कि बिना किसी उचित योजना के जल्दीबाजी में 'सब रीजनल कॉन्फ्रेंस' के आयोजन पर अतुल गुप्ता ने कोई आपत्ति क्यों नहीं की ?
शशांक अग्रवाल की जल्दीबाजी में 'सब रीजनल कॉन्फ्रेंस' करने की घोषणा के पीछे कहानी यह बताई/सुनाई जा रही है कि 6 नबंवर को दरअसल श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर ब्रांच के एक प्रतिनिधि ऑफिस का उद्घाटन होने का कार्यक्रम है । यह ऑफिस और उसका उद्घाटन भी मजाक को विषय बना हुआ है, और इसकी जरूरत किसी को समझ में नहीं आ रही है । उल्लेखनीय है कि श्रीनगर में कश्मीर सीपीई चैप्टर है, और जाहिर है कि उसका ऑफिस भी है - जिसे श्रीनगर में जो थोड़े से चार्टर्ड एकाउंटेंट्स हैं उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना/समझा जाता है । ऐसे में, वहाँ तथाकथित प्रतिनिधि ऑफिस खोलना सिर्फ अपनी उपलब्धियों को बढ़ा/चढ़ा कर दिखाने का मौका बनाना भर है । और सिर्फ इतना ही नहीं, चेयरमैन शशांक अग्रवाल तथा सेक्रेटरी अजय सिंघल को लगा कि तथाकथित प्रतिनिधि ऑफिस के उद्घाटन में शामिल होने के नाम पर उन्हें इंस्टीट्यूट के पैसे पर श्रीनगर घूमने का मौका भी मिल जायेगा । हालाँकि इन्हें यह डर भी हुआ कि एक ब्रांच स्तर के छोटे से कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट के पैसे पर जाने को लेकर बबाल मचेगा, सो आनन-फानन में इन्होंने श्रीनगर में सब-रीजनल कॉन्फ्रेंस करने की तैयारी कर ली । आरोप है कि सब-रीजनल कॉन्फ्रेंस के नाम पर चेयरमैन शशांक अग्रवाल और सेक्रेटरी अजय सिंघल ने वास्तव में इंस्टीट्यूट के पैसे पर श्रीनगर घूमने का जुगाड़ बना लिया है । समझा जाता है कि प्रेसीडेंट अतुल गुप्ता ने भी आनन-फानन में सब-रीजनल कॉन्फ्रेंस करने पर आपत्ति इसीलिए नहीं की, क्योंकि शशांक अग्रवाल व अजय सिंघल की इस योजना में उन्हें भी श्रीनगर घूमने का मौका मिलता नजर आया ।
उल्लेखनीय है कि अतुल गुप्ता ने इसी तरह की जल्दबाजी के साथ अभी हाल ही में आयोजित हुए गुरुग्राम ब्रांच के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनने का जुगाड़ किया था, जिसकी जानकारी नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी नहीं थी - और यहाँ तक कि गुरुग्राम ब्रांच के चैयरमेन तक को उक्त कार्यक्रम में शामिल होने  का मौका नहीं मिला । गुरुग्राम ब्रांच के दूसरे सदस्यों को यही समझ में नहीं आया कि कार्यक्रम वास्तव में था क्या ? ब्रांच के एक पदाधिकारी ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया कि कार्यक्रम वास्तव में कुछ नहीं था, वह तो अतुल गुप्ता का सुबह सुबह फोन आया कि वह आयेंगे इसलिए तम्बू-कनात लगवा लेना और एक फोटोग्राफर बुलवा लेना । लोगों को ऐसा लगता है कि अतुल गुप्ता की उसी हरकत से प्रेरित होकर शशांक अग्रवाल और अजय सिंघल ने श्रीनगर का कार्यक्रम बना डाला । असल में, अतुल गुप्ता और शशांक अग्रवाल के लिए प्रेसीडेंट और चेयरमैन बनना कोरोना वायरस के प्रकोप से बने हालात की भेंट चढ़ गया है, और इन बेचारों को ब्रांचेज में आने-जाने, गले में माला डलवाने तथा फोटो खिंचवाने का मौका ही नहीं मिल सका है । इसलिए, इस तरह के मौके बनाने के लिए इन्हें फर्जी तरीके अपनाने पड़ रहे हैं । गुरुग्राम वाले मामले में तो ज्यादा बबाल नहीं हुआ, लेकिन श्रीनगर के कार्यक्रम को लेकर लोगों की नाराजगी इसलिए मुखर हो रही है, क्योंकि इसमें इंस्टीट्यूट की मोटी रकम बर्बाद होनी है, और इसे शशांक अग्रवाल की सेंट्रल काउंसिल की उम्मीदवारी की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है । 

Friday, October 30, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पंकज डडवाल के विजन प्रस्तावों से पड़ने वाले प्रभाव को देखते/समझते हुए जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेताओं को भी लगा है कि अरुण मोंगिया को भी पंकज डडवाल से सीखना चाहिए, अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि अरुण मोंगिया उनके लिए बदनामी तथा फजीहत का कारण बन जाएँ

कुरुक्षेत्र । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में अरुण मोंगिया की सुस्ती और गैरजिम्मेदाराना व्यवहार की शिकायतों ने जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेताओं को चिंता और परेशानी में डाल दिया है, जिसके चलते उन्होंने अरुण मोंगिया की जमकर क्लास ली है । जितेंद्र ढींगरा के यहाँ एक पारिवारिक समारोह में पहुँचे कई लोगों ने साफ साफ कहा कि अरुण मोंगिया के रंग-ढंग ऐसे नहीं हैं कि उन्हें वोट दिया/दिलवाया जाये तथा उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनाया/बनवाया जाये - उनके सामने यदि जितेंद्र ढींगरा तथा दूसरे नेताओं के लिहाज के कारण अरुण मोंगिया को वोट देने की मजबूरी न हो, तो वह हर्गिज अरुण मोंगिया को वोट न दें । जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के अन्य नेताओं से लोगों ने कहा कि उन्हें देख/समझ कर ही ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाना चाहिए, जो वास्तव में रोटरी के लिए कुछ करने के लिए उत्साहित हो तथा अपने व्यवहार से वह दूसरे लोगों को उत्साहित व प्रेरित कर सकता हो । लोगों की शिकायत रही कि अरुण मोंगिया चूँकि यह मान/समझ रहे हैं कि जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेता अपने अपने प्रभाव से उन्हें चुनाव जितवा ही देंगे, इसलिए वह अपनी तरफ से कुछ करने में दिलचस्पी ही नहीं ले रहे हैं । 
शिकायतों में हद की बात यह सुनी/बताई गई कि गिफ्ट के रूप में अरुण मोंगिया ने हाल-फिलहाल के दिनों में जो पौधे दिए, उसमें भी भारी नाटकबाजी की । कुछेक क्लब्स के लोगों ने जितेंद्र ढींगरा और या अन्य प्रमुख नेताओं को बताया कि अरुण मोंगिया ने पहले तो उनसे पूछा कि वह किन किन लोगों से मिल लें; लेकिन उन्हें जब क्लब के छह/आठ लोगों के नाम बताये तो वह यह कहते हुए भड़क उठे कि क्लब के जब दो वोट हैं, तो फिर छह/आठ लोगों को गिफ्ट क्यों दिलवा रहे हैं ? कहीं उन्होंने क्लब के चार लोगों को गिफ्ट दिया, लेकिन जब उन्हें दो/तीन लोगों के नाम और बताये गए तो वह यह कहते हुए नाराज हो गए कि आठ सौ रुपये तो उन्होंने खर्च कर दिए हैं, और कितने पैसे खर्च करवाओगे ? शिकायती अंदाज में लोगों का कहना रहा कि अरुण मोंगिया को चूँकि यह भरोसा है कि सत्ता खेमे का उम्मीदवार होने के नाते, वह आसानी से चुनाव तो जीत ही जायेंगे - इसलिए उन्हें एक उम्मीदवार के रूप में न तो सक्रिय होने तथा व्यवहार करने की जरूरत है, और न क्लब्स के पदाधिकरियों तथा अन्य प्रमुख लोगों की बात मानने तथा उनका सम्मान करने/रखने की आवश्यकता है ।
जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेताओं से लोगों ने कहा/बताया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार पंकज डडवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपना जो विजन प्रस्तुत किया है, वह लोगों को आकर्षित और प्रभावित कर रहा है - इसलिए अरुण मोंगिया को भी अपना विजन बताना/दिखाना चाहिए; लेकिन अरुण मोंगिया का चूँकि लोगों के साथ कोई संपर्क ही नहीं है, इसलिए उन्हें पता ही नहीं है कि लोगों को उनसे क्या और किस तरह की उम्मीदें हैं ? उल्लेखनीय है कि पंकज डडवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपने विजन में स्पष्ट कहा/बताया है कि वह ड्यूज के नाम पर रोटेरियंस पर खर्चों का बोझ नहीं डालेंगे और जरूरी खर्चे ही किए/लिए जायेंगे; ग्लोबल ग्रांट्स में सभी क्लब्स को समान अवसर दिए जायेंगे तथा छोटे क्लब्स को उसके लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रयत्न किए जायेंगे और हिसाब-किताब में पारदर्शिता रखी जायेगी । ऐसे समय में, जबकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज पर विभिन्न तरीकों से पैसे जुटाने और बनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, पंकज डडवाल के विजन में कही जा रहीं बातें डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस तथा प्रेसीडेंट्स को प्रभावित कर रही हैं । ऐसे में, उम्मीद की जा रही थी कि अरुण मोंगिया की तरफ से भी ऐसा कुछ कहा जायेगा जो लोगों को आकर्षित व प्रभावित करेगा - लेकिन अरुण मोंगिया ने ऐसा कुछ करने की जरूरत ही नहीं समझी है । जितेंद्र ढींगरा के यहाँ पारिवारिक समारोह में जुटे रोटेरियंस ने जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के नेताओं से कहा/बताया कि उन्हें अरुण मोंगिया को समझाना/बताना चाहिए कि रोटरी पदाधिकारी व नेता के रूप में उन्हें कैसे क्या करना चाहिए - अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि अरुण मोंगिया उनके लिए बदनामी तथा फजीहत का कारण बन जाएँ । सत्ता खेमे के नेताओं का कहना/बताना है कि उन्होंने अरुण मोंगिया को समझाया तो बहुत है, लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि उनके समझाने का अरुण मोंगिया पर कोई असर हुआ भी है या नहीं ?  

Wednesday, October 28, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के चेयरमैन क्षितिज शर्मा को पूर्व चेयरमैन पारस अग्रवाल के अकाउंट की जाँच रोकने के मामले में लायंस इंटरनेशनल से झटका लगा, और इस प्रकरण में काउंसिल सेक्रेटरी राजीव अग्रवाल की भूमिका की चर्चा ने मामले को और दिलचस्प बनाया  

आगरा । लायंस इंटरनेशनल कार्यालय ने पूर्व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पारस अग्रवाल के अकाउंट में गड़बड़ी के आरोपों की जाँच को रोकने के मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा के फैसले को रद्द करके जाँच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आदेश देकर पारस अग्रवाल की मुश्किलों को एक बार फिर से बढ़ा दिया है । लायंस इंटरनेशनल कार्यालय के फैसले से 'रचनात्मक संकल्प' की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट में व्यक्त की गई आशंका सच साबित हुई है, जिसमें कहा गया था कि जाँच रुकवाने की कोशिश करके पारस अग्रवाल ने अकाउंट में झोलझाल होने के आरोपों को विश्वसनीयता दे दी है, और इस तरह जो काम मधु सिंह लगातार सक्रियता दिखा/बना कर नहीं कर पा रही थीं - उसे खुद पारस अग्रवाल ने एक गलत कदम के जरिये कर दिया है । पारस अग्रवाल ने सोचा तो यह था कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद पर क्षितिज शर्मा नाम की जो एक कठपुतली है, उससे वह जाँच को रुकवा लेंगे; लेकिन उन्हें यह ध्यान नहीं रहा होगा कि ऊपर का कार्यालय जाँच रोकने के फैसले को रद्द भी कर सकता है और तब उनकी ज्यादा फजीहत होगी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में क्षितिज शर्मा ने मनमानी तथा नियमों की अनदेखी करते हुए पारस अग्रवाल के अकाउंट की जाँच को रोक देने का तो फैसला कर लिया था, लेकिन लायंस इंटरनेशनल कार्यालय ने उनके फैसले को रद्द करके जाँच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का जो आदेश दिया है, उसने क्षितिज शर्मा और पारस अग्रवाल के लिए मुसीबतों को और बढ़ा दिया है ।
पारस अग्रवाल दरअसल जाँच से इसलिए डरे हुए हैं, क्योंकि वह यह मान कर चल रहे हैं कि जाँच कमेटी अवश्य ही अकाउंट में फर्जीवाड़ा करने का उन्हें दोषी ठहरायेगी । जाँच कमेटी में अभी अशोक गुप्ता, पारस अग्रवाल के; अशोक कपूर, मधु सिंह के; और संजय चोपड़ा, विशाल सिन्हा के प्रतिनिधि के रूप में हैं - और इन तीनों को कमेटी का चेयरमैन चुनना है, जो मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स केएम गोयल, विनोद खन्ना व जगदीश गुलाटी में से कोई एक होगा । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इस वर्ष जो हो रहा है और इंटरनेशनल डायरेक्टर एंडॉर्सी जितेंद्र चौहान तथा मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा जिस तरह की मनमानी कर रहे हैं, उसके चलते तीनों पूर्व डायरेक्टर्स अपने आप को पूरी तरह उपेक्षित महसूस कर रहे हैं तथा बुरी तरह नाराज हैं । पारस अग्रवाल तथा उनके शुभचिंतकों को डर वास्तव में यही है कि तीनों पूर्व डायरेक्टर्स में से जो भी चेयरमैन बनेगा, वह अकाउंट की कमियों और गलतियों को खोजेगा तथा पारस अग्रवाल को दोषी ठहरायेगा । पारस अग्रवाल और उनके नजदीकी दरअसल इसीलिए चाहते थे कि मधु सिंह ने अकाउंट को लेकर जाँच की जो माँग की हुई है, उस माँग को किसी न किसी बहाने से रद्द किया जाए और जाँच से बचा जाए । लेकिन लायंस इंटरनेशनल कार्यालय ने मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन क्षितिज शर्मा से जाँच को रुकवा तथा रद्द करवा देने की उनकी कोशिश पर पानी फेर दिया है ।
पारस अग्रवाल के अकाउंट के मुद्दे पर मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में जो घमासान मचा हुआ है, उसने मल्टीपल काउंसिल सेक्रेटरी राजीव अग्रवाल के लिए एक अलग तरह की मुसीबत पैदा की है । पारस अग्रवाल और उनके समर्थकों ने राजीव अग्रवाल पर सूचनाओं को लीक करने का आरोप लगाया हुआ है । पारस अग्रवाल और उनके समर्थकों को असल में यह बात हैरान किए हुए है कि उनके बीच की बातें विरोधी खेमे के लोगों तक तुरंत कैसे पहुँच जाती हैं ? इस हैरानी को दूर करने की उनकी कोशिशें राजीव अग्रवाल को संदिग्ध बनाती हैं । दरसअल राजीव अग्रवाल ही मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के ऐसे पदाधिकारी हैं, जिनकी नजदीकियत विरोधी खेमे के नेताओं के साथ भी है । विरोधी खेमे के नेताओं के साथ उनकी नजदीकियत वास्तव में संयोगवश ही है । राजीव अग्रवाल अपने डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री - में जिन नेताओं के साथ और संपर्क में ज्यादा रहते हैं, वह मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में विरोधी खेमे के सक्रिय सदस्यों के रूप में देखे/पहचाने जाते हैं - और इसीलिए पारस अग्रवाल तथा उनके नजदीकियों को लगता है कि उन्हें बचाने के लिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारी जो भी योजना बनाते हैं, वह राजीव अग्रवाल के जरिये विरोधी खेमे के नेताओं तक पहुँच जाती है और विरोधी खेमे के लोग पहले से ही उनकी योजना को फेल करने में जुट जाते हैं । मामले में राजीव अग्रवाल को घसीटे जाने से लग रहा है कि अकाउंट के जरिये पारस अग्रवाल को घेरने/फँसाने तथा बचाने की 'लड़ाई' में अन्य कई लोगों के भी फजीहत का शिकार होने के हालात बन रहे हैं, और इससे मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक समीकरणों में कई तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे ।

Friday, October 23, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में सत्ता खेमे के प्रति पैदा हुई नाराजगी के कारण प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार पंकज डडवाल को लोगों के बीच मिलते दिख रहे समर्थन से होने वाले नुकसान से बचने के लिए जितेंद्र ढींगरा जल्दी चुनाव कराने के चक्कर में, लेकिन चुनाव जल्दी होने से अजय मदान की मुश्किलें बढ़ने का खतरा

पानीपत । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के समय को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज परस्पर विरोधी दबावों में फँस गए हैं, और उनके लिए यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि वह चुनाव कब करवाएँ ? रमेश बजाज की मुश्किलों को निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के उस दावे ने और बढ़ा दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि वह जब चाहेंगे, तब चुनाव होगा । लोगों का कहना/पूछना है कि रमेश बजाज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, या जितेंद्र ढींगरा की कठपुतली - जो उनके कहने से चुनाव की तारीख तय तथा घोषित करेंगे ? यह सवाल दरअसल इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमेश बजाज को जो काम अभी तक कर लेने चाहिए थे; वह तो उन्होंने किए नहीं हैं - जैसे चार महीने पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी का कोई अतापता नहीं है - किंतु चुनाव का जो काम जनवरी/फरवरी तक होता रहा है, रमेश बजाज उसे अभी कर लेना चाहते हैं, और वह भी जितेंद्र ढींगरा के दबाव में ! डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों ने और प्रेसीडेंट्स ने भी रमेश बजाज को कहा/सुझाया है कि अगले बीस-बाइस दिन त्यौहारी सीजन के हैं और लोग अपने अपने कामकाज तथा परिवार के साथ त्यौहार मनाने की तैयारियों में व्यस्त होंगे, इसलिए अभी करीब एक महीने तक तो चुनाव की प्रक्रिया को न शुरू करें ।
मजे की बात यह है कि अभी खुद जितेंद्र ढींगरा के लिए भी रोटरी की राजनीति के लिए समय निकाल पाना मुश्किल होगा - अभी उनके काम का सीजन है और फिर उन्हें एक बड़ी पारिवारिक जिम्मेदारी का निर्वाह करने में जुटना है; लेकिन उनके सामने चुनौती यह है कि उन्हें रोटरी की राजनीति की जिम्मेदारी भी निभानी है । असल में, जितेंद्र ढींगरा को डर हो चला है कि रमेश बजाज के कार्य-व्यवहार के कारण लोगों के बीच जो नाराजगी बढ़ रही है, उसका खामियाजा कहीं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उनके उम्मीदवार अरुण मोंगिया को न भुगतना पड़ जाए । अरुण मोंगिया चूँकि सत्ता खेमे के उम्मीदवार हैं, इसलिए अलग अलग कारणों से सत्ता खेमे के खिलाफ पैदा होने वाली नाराजगी का ठीकरा उन्हीं के सिर फूटने की आशंका है । इस आशंका के चलते ही, जितेंद्र ढींगरा को लग रहा है कि सत्ता खेमे के खिलाफ लोगों की नाराजगी ज्यादा बढ़े, उससे पहले ही चुनाव करवा लिया जाए और चुनावी नुकसान से अपने को बचा लिया जाए । सत्ता खेमे के ही दूसरे लोगों का हालाँकि यह मानना और कहना है कि रमेश बजाज के कार्य-व्यवहार के कारण लोगों के बीच अभी जो नाराजगी के सेंटीमेंट्स हैं, उन्हें अगले दो/एक महीने में अजय मदान के गवर्नर-वर्ष के पद बाँट कर सेटल कर लिया जा सकता है - इसलिए चुनाव करवाने की जल्दी नहीं करना चाहिए । इनका यह भी मानना और कहना है कि अभी त्यौहार का सीजन भी है, इसलिए अभी चुनाव करवाने से लोगों के नाराजगी वाले सेंटीमेंट्स और भड़क सकते हैं । 
अभी चुनाव न करने/करवाने को लेकर एक दलील यह भी दी जा रही है कि अभी चुनाव करवा लेने से अजय मदान के लिए मुसीबतें खड़ी हो जायेंगी । कहा/बताया जा रहा है कि अभी चुनाव निपट जाने से डिस्ट्रिक्ट के लोगों का ध्यान अगले वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अजय मदान पर जा टिकेगा और वह यह देखना/जानना शुरू करेंगे कि अजय मदान किस को क्या पद दे रहे हैं ? जिसे पद नहीं मिलेगा - या अपनी पसंद का नहीं मिलेगा, वह फिर अजय मदान के खिलाफ बातें बनाने लगेगा और तब अजय मदान के लिए अपने कार्यक्रम करना मुश्किल हो जायेगा तथा वह गवर्नर की कुर्सी पर बैठने से पहले ही आलोचनाओं व शिकायतों व आरोपों के भँवर में फँस जायेंगे । अजय मदान को आलोचनाओं व आरोपों से बचाये रखने तथा उनके कार्यक्रमों को बिना विवाद के संपन्न कर लेने के लिए जरूरी माना जा रहा है कि लोगों को अभी इसी वर्ष के चुनावी परिदृश्य में ही उलझा कर रखा जाए । सत्ता खेमे के लोगों को जल्दी चुनाव करवाने में कई तरह  नुकसान होते नजर आ रहे हैं, लेकिन अरुण मोंगिया और जितेंद्र ढींगरा को यह डर भी सता रहा है कि सत्ता खेमे के प्रति पैदा हुई नाराजगी के कारण प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार पंकज डडवाल को लोगों के बीच जो समर्थन मिलता दिख रहा है, वह यदि और बढ़ता गया तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में बाजी पलट भी सकती है । परस्पर विरोधी तर्कों व दलीलों के बीच सत्ता खेमे के नेताओं के लिए यह तय कर पाना सचमुच मुश्किल हो रहा है कि पंकज डडवाल से मिलने वाली चुनावी चुनौती से वह जल्दी चुनाव करवा कर बच सकते हैं, या समय से चुनाव करवाने में उन्हें फायदा होगा ?