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Friday, October 30, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पंकज डडवाल के विजन प्रस्तावों से पड़ने वाले प्रभाव को देखते/समझते हुए जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेताओं को भी लगा है कि अरुण मोंगिया को भी पंकज डडवाल से सीखना चाहिए, अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि अरुण मोंगिया उनके लिए बदनामी तथा फजीहत का कारण बन जाएँ

कुरुक्षेत्र । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में अरुण मोंगिया की सुस्ती और गैरजिम्मेदाराना व्यवहार की शिकायतों ने जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेताओं को चिंता और परेशानी में डाल दिया है, जिसके चलते उन्होंने अरुण मोंगिया की जमकर क्लास ली है । जितेंद्र ढींगरा के यहाँ एक पारिवारिक समारोह में पहुँचे कई लोगों ने साफ साफ कहा कि अरुण मोंगिया के रंग-ढंग ऐसे नहीं हैं कि उन्हें वोट दिया/दिलवाया जाये तथा उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनाया/बनवाया जाये - उनके सामने यदि जितेंद्र ढींगरा तथा दूसरे नेताओं के लिहाज के कारण अरुण मोंगिया को वोट देने की मजबूरी न हो, तो वह हर्गिज अरुण मोंगिया को वोट न दें । जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के अन्य नेताओं से लोगों ने कहा कि उन्हें देख/समझ कर ही ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाना चाहिए, जो वास्तव में रोटरी के लिए कुछ करने के लिए उत्साहित हो तथा अपने व्यवहार से वह दूसरे लोगों को उत्साहित व प्रेरित कर सकता हो । लोगों की शिकायत रही कि अरुण मोंगिया चूँकि यह मान/समझ रहे हैं कि जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेता अपने अपने प्रभाव से उन्हें चुनाव जितवा ही देंगे, इसलिए वह अपनी तरफ से कुछ करने में दिलचस्पी ही नहीं ले रहे हैं । 
शिकायतों में हद की बात यह सुनी/बताई गई कि गिफ्ट के रूप में अरुण मोंगिया ने हाल-फिलहाल के दिनों में जो पौधे दिए, उसमें भी भारी नाटकबाजी की । कुछेक क्लब्स के लोगों ने जितेंद्र ढींगरा और या अन्य प्रमुख नेताओं को बताया कि अरुण मोंगिया ने पहले तो उनसे पूछा कि वह किन किन लोगों से मिल लें; लेकिन उन्हें जब क्लब के छह/आठ लोगों के नाम बताये तो वह यह कहते हुए भड़क उठे कि क्लब के जब दो वोट हैं, तो फिर छह/आठ लोगों को गिफ्ट क्यों दिलवा रहे हैं ? कहीं उन्होंने क्लब के चार लोगों को गिफ्ट दिया, लेकिन जब उन्हें दो/तीन लोगों के नाम और बताये गए तो वह यह कहते हुए नाराज हो गए कि आठ सौ रुपये तो उन्होंने खर्च कर दिए हैं, और कितने पैसे खर्च करवाओगे ? शिकायती अंदाज में लोगों का कहना रहा कि अरुण मोंगिया को चूँकि यह भरोसा है कि सत्ता खेमे का उम्मीदवार होने के नाते, वह आसानी से चुनाव तो जीत ही जायेंगे - इसलिए उन्हें एक उम्मीदवार के रूप में न तो सक्रिय होने तथा व्यवहार करने की जरूरत है, और न क्लब्स के पदाधिकरियों तथा अन्य प्रमुख लोगों की बात मानने तथा उनका सम्मान करने/रखने की आवश्यकता है ।
जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेताओं से लोगों ने कहा/बताया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार पंकज डडवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपना जो विजन प्रस्तुत किया है, वह लोगों को आकर्षित और प्रभावित कर रहा है - इसलिए अरुण मोंगिया को भी अपना विजन बताना/दिखाना चाहिए; लेकिन अरुण मोंगिया का चूँकि लोगों के साथ कोई संपर्क ही नहीं है, इसलिए उन्हें पता ही नहीं है कि लोगों को उनसे क्या और किस तरह की उम्मीदें हैं ? उल्लेखनीय है कि पंकज डडवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपने विजन में स्पष्ट कहा/बताया है कि वह ड्यूज के नाम पर रोटेरियंस पर खर्चों का बोझ नहीं डालेंगे और जरूरी खर्चे ही किए/लिए जायेंगे; ग्लोबल ग्रांट्स में सभी क्लब्स को समान अवसर दिए जायेंगे तथा छोटे क्लब्स को उसके लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रयत्न किए जायेंगे और हिसाब-किताब में पारदर्शिता रखी जायेगी । ऐसे समय में, जबकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज पर विभिन्न तरीकों से पैसे जुटाने और बनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, पंकज डडवाल के विजन में कही जा रहीं बातें डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस तथा प्रेसीडेंट्स को प्रभावित कर रही हैं । ऐसे में, उम्मीद की जा रही थी कि अरुण मोंगिया की तरफ से भी ऐसा कुछ कहा जायेगा जो लोगों को आकर्षित व प्रभावित करेगा - लेकिन अरुण मोंगिया ने ऐसा कुछ करने की जरूरत ही नहीं समझी है । जितेंद्र ढींगरा के यहाँ पारिवारिक समारोह में जुटे रोटेरियंस ने जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के नेताओं से कहा/बताया कि उन्हें अरुण मोंगिया को समझाना/बताना चाहिए कि रोटरी पदाधिकारी व नेता के रूप में उन्हें कैसे क्या करना चाहिए - अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि अरुण मोंगिया उनके लिए बदनामी तथा फजीहत का कारण बन जाएँ । सत्ता खेमे के नेताओं का कहना/बताना है कि उन्होंने अरुण मोंगिया को समझाया तो बहुत है, लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि उनके समझाने का अरुण मोंगिया पर कोई असर हुआ भी है या नहीं ?  

Friday, October 23, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में सत्ता खेमे के प्रति पैदा हुई नाराजगी के कारण प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार पंकज डडवाल को लोगों के बीच मिलते दिख रहे समर्थन से होने वाले नुकसान से बचने के लिए जितेंद्र ढींगरा जल्दी चुनाव कराने के चक्कर में, लेकिन चुनाव जल्दी होने से अजय मदान की मुश्किलें बढ़ने का खतरा

पानीपत । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के समय को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज परस्पर विरोधी दबावों में फँस गए हैं, और उनके लिए यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि वह चुनाव कब करवाएँ ? रमेश बजाज की मुश्किलों को निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के उस दावे ने और बढ़ा दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि वह जब चाहेंगे, तब चुनाव होगा । लोगों का कहना/पूछना है कि रमेश बजाज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, या जितेंद्र ढींगरा की कठपुतली - जो उनके कहने से चुनाव की तारीख तय तथा घोषित करेंगे ? यह सवाल दरअसल इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमेश बजाज को जो काम अभी तक कर लेने चाहिए थे; वह तो उन्होंने किए नहीं हैं - जैसे चार महीने पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी का कोई अतापता नहीं है - किंतु चुनाव का जो काम जनवरी/फरवरी तक होता रहा है, रमेश बजाज उसे अभी कर लेना चाहते हैं, और वह भी जितेंद्र ढींगरा के दबाव में ! डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों ने और प्रेसीडेंट्स ने भी रमेश बजाज को कहा/सुझाया है कि अगले बीस-बाइस दिन त्यौहारी सीजन के हैं और लोग अपने अपने कामकाज तथा परिवार के साथ त्यौहार मनाने की तैयारियों में व्यस्त होंगे, इसलिए अभी करीब एक महीने तक तो चुनाव की प्रक्रिया को न शुरू करें ।
मजे की बात यह है कि अभी खुद जितेंद्र ढींगरा के लिए भी रोटरी की राजनीति के लिए समय निकाल पाना मुश्किल होगा - अभी उनके काम का सीजन है और फिर उन्हें एक बड़ी पारिवारिक जिम्मेदारी का निर्वाह करने में जुटना है; लेकिन उनके सामने चुनौती यह है कि उन्हें रोटरी की राजनीति की जिम्मेदारी भी निभानी है । असल में, जितेंद्र ढींगरा को डर हो चला है कि रमेश बजाज के कार्य-व्यवहार के कारण लोगों के बीच जो नाराजगी बढ़ रही है, उसका खामियाजा कहीं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उनके उम्मीदवार अरुण मोंगिया को न भुगतना पड़ जाए । अरुण मोंगिया चूँकि सत्ता खेमे के उम्मीदवार हैं, इसलिए अलग अलग कारणों से सत्ता खेमे के खिलाफ पैदा होने वाली नाराजगी का ठीकरा उन्हीं के सिर फूटने की आशंका है । इस आशंका के चलते ही, जितेंद्र ढींगरा को लग रहा है कि सत्ता खेमे के खिलाफ लोगों की नाराजगी ज्यादा बढ़े, उससे पहले ही चुनाव करवा लिया जाए और चुनावी नुकसान से अपने को बचा लिया जाए । सत्ता खेमे के ही दूसरे लोगों का हालाँकि यह मानना और कहना है कि रमेश बजाज के कार्य-व्यवहार के कारण लोगों के बीच अभी जो नाराजगी के सेंटीमेंट्स हैं, उन्हें अगले दो/एक महीने में अजय मदान के गवर्नर-वर्ष के पद बाँट कर सेटल कर लिया जा सकता है - इसलिए चुनाव करवाने की जल्दी नहीं करना चाहिए । इनका यह भी मानना और कहना है कि अभी त्यौहार का सीजन भी है, इसलिए अभी चुनाव करवाने से लोगों के नाराजगी वाले सेंटीमेंट्स और भड़क सकते हैं । 
अभी चुनाव न करने/करवाने को लेकर एक दलील यह भी दी जा रही है कि अभी चुनाव करवा लेने से अजय मदान के लिए मुसीबतें खड़ी हो जायेंगी । कहा/बताया जा रहा है कि अभी चुनाव निपट जाने से डिस्ट्रिक्ट के लोगों का ध्यान अगले वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अजय मदान पर जा टिकेगा और वह यह देखना/जानना शुरू करेंगे कि अजय मदान किस को क्या पद दे रहे हैं ? जिसे पद नहीं मिलेगा - या अपनी पसंद का नहीं मिलेगा, वह फिर अजय मदान के खिलाफ बातें बनाने लगेगा और तब अजय मदान के लिए अपने कार्यक्रम करना मुश्किल हो जायेगा तथा वह गवर्नर की कुर्सी पर बैठने से पहले ही आलोचनाओं व शिकायतों व आरोपों के भँवर में फँस जायेंगे । अजय मदान को आलोचनाओं व आरोपों से बचाये रखने तथा उनके कार्यक्रमों को बिना विवाद के संपन्न कर लेने के लिए जरूरी माना जा रहा है कि लोगों को अभी इसी वर्ष के चुनावी परिदृश्य में ही उलझा कर रखा जाए । सत्ता खेमे के लोगों को जल्दी चुनाव करवाने में कई तरह  नुकसान होते नजर आ रहे हैं, लेकिन अरुण मोंगिया और जितेंद्र ढींगरा को यह डर भी सता रहा है कि सत्ता खेमे के प्रति पैदा हुई नाराजगी के कारण प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार पंकज डडवाल को लोगों के बीच जो समर्थन मिलता दिख रहा है, वह यदि और बढ़ता गया तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में बाजी पलट भी सकती है । परस्पर विरोधी तर्कों व दलीलों के बीच सत्ता खेमे के नेताओं के लिए यह तय कर पाना सचमुच मुश्किल हो रहा है कि पंकज डडवाल से मिलने वाली चुनावी चुनौती से वह जल्दी चुनाव करवा कर बच सकते हैं, या समय से चुनाव करवाने में उन्हें फायदा होगा ?

Thursday, September 24, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज की विज्ञापन के जरिये पैसे जुटाने के लिए की जा रही जबरदस्तियों के आरोपों ने जितेंद्र ढींगरा और अरुण मोंगिया को फँसाया और मुसीबत में डाला

पानीपत । डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन जुटाने तथा विज्ञापन के मनमाने दाम बसूलने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज द्वारा की जा रही जबरदस्तियों की शिकायतों ने निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार अरुण मोंगिया को खासी मुसीबत में डाल दिया है । डिस्ट्रिक्ट में कई आम और खास रोटेरियंस का आरोप है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमेश बजाज ने ज्यादा से ज्यादा पैसा इकट्ठा करने को ही अपना एकमात्र उद्देश्य बना लिया है । हालाँकि जितेंद्र ढींगरा ने इस तरह की बातों/शिकायतों पर यह कहते हुए मामले से अपना पल्ला झाड़ने का रवैया अपनाया हुआ है कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के काम में कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहते । लेकिन जैसे जैसे रमेश बजाज की तरफ से विज्ञापन लेने के लिए जबरदस्तियाँ बढ़ती गईं, जितेंद्र ढींगरा के पास शिकायतों का ढेर भी बढ़ता गया है । लोगों ने अरुण मोंगिया पर भी यह कहते हुए दबाव बनाया कि आप लोगों ने अच्छा गठजोड़ बना लिया है - आपको हमसे वोट चाहिए, और आपके गवर्नर को हमसे विज्ञापन/पैसे चाहिए । कई लोगों ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया कि उन्होंने अरुण मोंगिया से साफ कह दिया है कि उन्हें यदि अपनी उम्मीदवारी के लिए वोट चाहिए, तो गवर्नर से कहो कि विज्ञापन के लिए जबरदस्ती न करे ।
जितेंद्र ढींगरा और अरुण मोंगिया के लिए मुसीबत की बात यह भी है कि रमेश बजाज की तरफ से पहले से ही उनके खिलाफ यह शिकायत सुनी जा रही है कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन इकट्ठा करवाने में कोई मदद नहीं की है । रमेश बजाज के नजदीकियों के अनुसार, रमेश बजाज को इस बात की बड़ी नाराजगी और शिकायत है कि जितेंद्र ढींगरा डिस्ट्रिक्ट टीम की प्रस्तावित सूची में नाम कटवाने तथा जुड़वाने के लिए तो सक्रिय रहते हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट टीम में शामिल किए/करवाने वाले लोगों से विज्ञापन दिलवाने में कोई दिलचस्पी नहीं लेते हैं । रमेश बजाज ने अपने नजदीकियों के बीच कई बार यह रोना रोया है कि डिस्ट्रिक्ट टीम के लिए उन्होंने जो नाम तय किए थे, जितेंद्र ढींगरा ने उनमें से कई नामों को डिस्ट्रिक्ट टीम में शामिल न करने के लिए कहा; और जितेंद्र ढींगरा के दबाव के चलते उन्हें कई नाम हटाने पड़े तथा उनकी जगह दूसरे नाम तय करने पड़े - और इस चक्कर में डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी का काम लेटलतीफी का शिकार हुआ । रमेश बजाज की शिकायत यह है कि उन्होंने तो जितेंद्र ढींगरा की बातों को मानने तथा अपनाने में कोई देर नहीं की, लेकिन जितेंद्र ढींगरा ने जो नाम डिस्ट्रिक्ट टीम में शामिल करवाए - उनसे डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन दिलवाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली ।
डिस्ट्रिक्ट में आम और खास रोटेरियंस का मानना और कहना है कि लॉकडाउन के कारण रोटरी और डिस्ट्रिक्ट की गतिविधियाँ जब लगभग ठप्प पड़ी हैं, तो डिस्ट्रिक्ट का ज्यादा कोई खर्चा भी नहीं हो रहा है - लेकिन फिर भी रमेश बजाज पैसों को लेकर ज्यादा हायतौबा क्यों मचा रहे हैं ? जितेंद्र ढींगरा और उनसे पहले, टीके रूबी के गवर्नर-वर्ष का उदाहरण देते हुए रोटेरियंस का कहना है कि इन दोनों ने विज्ञापन जुटाने तथा अन्य तरीकों से पैसे इकट्ठे करने को लेकर कोई जबरदस्ती भी नहीं की थी, और अपने अपने कार्यक्रम भी बड़ी भव्यता के साथ किए थे । जितेंद्र ढींगरा तो एक बड़ी रकम के बचे होने की बात कहते/बताते भी सुने गए हैं । लॉकडाउन के चलते रमेश बजाज को कुछ करना भी नहीं पड़ रहा है, और वह पैसे जुटाने के काम में बुरी तरह से जुटे हुए भी हैं, और वह तरह तरह से जबरदस्ती कर रहे हैं । इससे ही लोगों को आरोपपूर्ण सवाल करने का मौका मिला है कि रमेश बजाज सिर्फ कमाई करने के लिए ही गवर्नर बने हैं क्या ? जितेंद्र ढींगरा से भी लोगों ने शिकायती स्वर में कहा है कि उन्हें अपने जो काम रमेश बजाज से करवाने होते हैं, वह तो करवा लेते हैं - लेकिन 'हम' रमेश बजाज की जबरदस्ती से बचाने की बात कहते हैं, तो बहाने करके बच निकलते हैं । रमेश बजाज की जबरदस्ती से बचने/बचाने के लिए जितेंद्र ढींगरा और अरुण मोंगिया से लगाई जा रही गुहारों का कोई असर होगा या नहीं, यह तो बाद में पता चलेगा - लेकिन इन गुहारों ने डिस्ट्रिक्ट में एक दिलचस्प नजारा तो बना ही दिया है । 

Friday, September 18, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए रीता कालरा की पीएस तुलसी की मदद से टीके रूबी का समर्थन जुटाने की कोशिशों ने अरुण मोंगिया को परेशान किया, तो जितेंद्र ढींगरा को सत्ता खेमे के गवर्नर्स की इमरजेंसी मीटिंग बुलाने के लिए मजबूर होना पड़ा 

चंडीगढ़ । रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन की पूर्व प्रेसीडेंट रीता कालरा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अपनी उम्मीदवारी को लेकर सक्रियता दिखा/जता कर डिस्ट्रिक्ट के सत्ता खेमे के नेताओं के बीच खलबली सी मचा दी है, जिसे शांत करने के लिए निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने कुरुक्षेत्र में अपने घर पर सत्ता खेमे के गवर्नर्स की एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई । समझा जाता है कि इस मीटिंग को करने/बुलाने के लिए जितेंद्र ढींगरा को सत्ता खेमे के उम्मीदवार के रूप में देखे/पहचाने जा रहे अरुण मोंगिया ने 'मजबूर' किया । दरअसल, रीता कालरा को अभी पंद्रह/बीस दिन पहले अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटने के बाद, अचानक से फिर आगे बढ़ता देख - अरुण मोंगिया को शक हो रहा है कि सत्ता खेमे के ही कुछेक नेता रीता कालरा की उम्मीदवारी को हवा दे रहे हैं । अरुण मोंगिया के नजदीकियों के अनुसार, उन्हें पूर्व गवर्नर टीके रूबी और मौजूदा गवर्नर रमेश बजाज के रवैये पर शक है । इसीलिए अरुण मोंगिया ने जितेंद्र ढींगरा पर दबाव बनाया कि उन्हें यह जानने/समझने की कोशिश करना चाहिए कि टीके रूबी और रमेश बजाज के मन में आखिर चल क्या रहा है, और यह दोनों डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उनकी उम्मीदवारी के समर्थन में सचमुच हैं भी या नहीं ?
रमेश बजाज के समर्थन को लेकर अरुण मोंगिया हालाँकि शुरू से ही कंफर्टेबल नहीं रहे हैं, लेकिन रमेश बजाज की उन्हें ज्यादा चिंता भी नहीं रही; अरुण मोंगिया को विश्वास रहा कि जितेंद्र ढींगरा उन्हें 'सँभाल' लेंगे । लेकिन टीके रूबी को लेकर अरुण मोंगिया को झटका लगा है । हालाँकि अरुण मोंगिया की तरफ से टीके रूबी को लेकर कभी कोई शिकायत या संदेह के स्वर सुनाई नहीं दिए हैं, और अरुण मोंगिया पूरी तरह उन पर विश्वास करते रहे हैं । लेकिन हाल ही के दिनों में उन्हें सुनने को मिला कि रीता कालरा अपनी उम्मीदवारी के लिए टीके रूबी का सहयोग/समर्थन लेने की कोशिश कर रही हैं, और इसके लिए उन्होंने अपने क्लब के वरिष्ठ सदस्य पीएस तुलसी की मदद भी ली है । टीके रूबी की इन दोनों से ही अच्छी नजदीकियत है; उनके गवर्नर-वर्ष में रीता कालरा क्लब की प्रेसीडेंट थीं और टीके रूबी की सलाह पर उन्होंने खूब काम किया था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी ने उन्हें और उनके क्लब को कई अवॉर्ड तो दिए ही थे, उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने के लिए भी प्रेरित किया था । पिछले दिनों रीता कालरा ने जब जब भी अपनी उम्मीदवारी की बात की, टीके रूबी के समर्थन का दावा जरूर किया । पीएस तुलसी की मदद के चलते टीके रूबी के यहाँ रीता कालरा का दावा और मजबूत हो गया, क्योंकि पीएस तुलसी के प्रति टीके रूबी बहुत ही मान/सम्मान रखते हैं ।
रीता कालरा की उम्मीदवार के रूप में वापसी करने में अरुण मोंगिया इन्हीं कयासों/अनुमानों के चलते डर गए । उल्लेखनीय है कि रीता कालरा ने करीब पंद्रह/बीस दिन पहले अपनी उम्मीदवारी को लेकर सक्रियता दिखाई थी, और इसके लिए सत्ता खेमे के मुखिया के रूप में देखे/पहचाने जाते जितेंद्र ढींगरा से बात की थी । जितेंद्र ढींगरा ने लेकिन उन्हें साफ कह दिया था कि इस वर्ष के उनके उम्मीदवार अरुण मोंगिया हैं, और इसमें कोई फेरबदल नहीं हो सकता है । रीता कालरा ने अगले रोटरी वर्ष के उम्मीदवार के रूप में अपने नाम की घोषणा करने की माँग की, जितेंद्र ढींगरा ने लेकिन उनकी इस माँग को यह कहते हुए टाल दिया कि इस वर्ष का चुनाव हो जाने के बाद अगले वर्ष के बारे में सोचेंगे । रीता कालरा को अपनी दाल गलती नहीं दिखी, तो वह चुप बैठ गईं । अभी लेकिन अचानक से उनकी उम्मीदवार के रूप में सक्रियता सुनी/देखी गई । पता चला कि अपनी उम्मीदवारी के लिए उन्होंने अपने क्लब में हरी झंडी भी ले ली है । डिस्ट्रिक्ट में हर किसी को हैरानी हुई कि इतना सब करने के लिए शह आखिर उन्हें कहाँ से और किससे मिली है ? क्लब के लोगों का कहना है कि रीता कालरा ने अपनी उम्मीदवारी को लेकर जल्दबाजी इसलिए भी दिखाई है, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं उनके क्लब की अन्य सदस्य ऋतु सिंघल अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत न कर दें । टीके रूबी ने उन्हें भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की प्रेरणा दी हुई है । रीता कालरा की सक्रियता और पीएस तुलसी की मदद से टीके रूबी का समर्थन जुटाने की कोशिशों की खबरों ने अरुण मोंगिया को परेशान किया, तो उन्होंने जितेंद्र ढींगरा पर जोर दिया कि उन्हें टीके रूबी और रमेश बजाज से बात तो करना चाहिए । जितेंद्र ढींगरा के घर पर हुई सत्ता खेमे के नेताओं की मीटिंग में क्या बातें हुईं, यह तो किसी को नहीं पता है - लेकिन उस मीटिंग के बाद से अरुण मोंगिया जिस तरह राहत महसूस करते देखे/सुने गए हैं, उससे लग रहा है कि जितेंद्र ढींगरा ने मामले को फिलहाल तो मैनेज कर लिया है ।

Tuesday, August 18, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज के लिए परेशानी खड़ी करने वाला, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जल्दी होने का अरुण मोंगिया का दावा क्या सचमुच जितेंद्र ढींगरा के आश्वासन पर निर्भर है ?

पानीपत । अरुण मोंगिया ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशों में तेजी ला कर और जल्दी चुनाव होने का दावा करके डिस्ट्रिक्ट में हलचल तो मचा दी है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज के लिए खासी परेशानी खड़ी कर दी है । रमेश बजाज के लिए लोगों को यह बता पाना मुश्किल हो रहा है कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव कब करवायेंगे; और लोगों को चूँकि सीधा जबाव नहीं मिल रहा है - तो उन्हें लग रहा है कि रमेश बजाज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद को लेकर कोई 'खेल' करने की योजना तो नहीं बना रहे हैं ? मजे की बात यह है कि रमेश बजाज की इस मुसीबत के पीछे अरुण मोंगिया के अति-उत्साह को देखा/पहचाना जा रहा है, लेकिन इसका ठीकरा फूट रहा है निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के सिर । रमेश बजाज के नजदीकियों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में अरुण मोंगिया लोगों के बीच जिस विश्वास से दावा कर रहे हैं कि जितेंद्र ढींगरा ने उन्हें जल्दी चुनाव होने की बात बता कर उम्मीदवार के रूप में सक्रिय होने के लिए कहा है, उसके चलते कोई शक नहीं रह जाता है कि जल्दी चुनाव की बात जितेंद्र ढींगरा ने ही की है - क्यों की है, इसका उन्हें कोई अंदाजा नहीं है । रमेश बजाज के नजदीकियों का दावा है कि चुनाव संबंधी नोटीफिकेशन जारी होने के अलावा, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की आगे की प्रक्रिया को लेकर अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है, और जितेंद्र ढींगरा ने भी इस बारे में रमेश बजाज से कोई बात नहीं की है ।
रमेश बजाज और उनके नजदीकियों को यह बात भी पसंद नहीं आ रही है कि अरुण मोंगिया डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव सिर्फ जितेंद्र ढींगरा के नाम पर लड़ते नजर आ रहे हैं, और उन्हें कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं । दरअसल रमेश बजाज और उनके नजदीकियों को लगातार यह शिकायत रही है कि अरुण मोंगिया ने उन्हें कभी भी उचित सम्मान नहीं दिया है । रमेश बजाज और उनके नजदीकियों की इस शिकायत को जितेंद्र ढींगरा ने भी गंभीरता से लिया; और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमेश बजाज का कार्यकाल शुरू होने के तुरंत बाद, 9 जुलाई को सोशल मीडिया में एक करीब पाँच माह पुरानी फोटो का इस्तेमाल करते हुए अरुण मोंगिया को उन्होंने यह अहसास कराते हुए मीठी से झिड़की दी कि रमेश बजाज के साथ जब 'टीम' के बाकी सदस्य खड़े होते हैं, तब वह 'मिसिंग' होते हैं । रमेश बजाज और उनके नजदीकियों का कहना है कि अरुण मोंगिया का व्यवहार लेकिन उसके बाद भी नहीं बदला है - और अब नोटीफिकेशन जारी होने के बाद डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जल्दी होने का दावा करके तो उन्होंने हद ही कर दी है ।
रमेश बजाज के नजदीकियों का कहना/बताना है कि पिछले दिनों कुछेक मौकों पर अरुण मोंगिया की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जल्दी करवाने की बात चलवाई तो गई थी, किंतु वह बात व्यवस्थित रूप से आगे नहीं बढ़ी थी । रमेश बजाज अभी डिस्ट्रिक्ट टीम के सदस्यों के नाम फाइनल करने के ही काम में लगे हैं, ताकि पहले ही लेटलतीफी का शिकार हो चुकी डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी का काम पूरा हो तथा वह और ज्यादा लेट न हो - इसलिए बाकी कामों तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की प्रक्रिया तय करने पर वह कोई ध्यान नहीं दे पा रहे हैं । अरुण मोंगिया को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए चूँकि अभी कोई और उम्मीदवार सक्रिय नहीं है, इसलिए जल्दी चुनाव होने पर वह आसानी से - संभव है कि निर्विरोध ही - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बन जाएँ । अरुण मोंगिया ने लोगों के बीच उदाहरण भी दिया कि पिछले रोटरी वर्ष में जितेंद्र ढींगरा ने जल्दी चुनाव करवा कर नवीन गुलाटी के लिए चुनावी मुकाबले को आसान बना दिया था । लोगों के बीच चर्चा है कि संभव है कि अरुण मोंगिया ने इस बारे में जितेंद्र ढींगरा से बात की होगी, और जितेंद्र ढींगरा ने उन्हें आश्वस्त कर दिया होगा कि इस वर्ष भी जल्दी ही चुनाव हो जायेंगे । जितेंद्र ढींगरा के आश्वासन पर अरुण मोंगिया ने लोगों के बीच दावा कर दिया, जो रमेश बजाज के लिए मुसीबत का कारण बन गया है । अरुण मोंगिया के दावे पर डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच यह सवाल भी उठा है कि इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट चला कौन रहा है - जितेंद्र ढींगरा या रमेश बजाज ! 

Monday, February 24, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को मनमानी करने तथा उनकी लूट-खसोट को रोकने में मौजूदा लीडरशिप की असफलता के कारण डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच असमंजसता तथा निराशा फैल रही है

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जुटे रोटेरियंस की विभिन्न मामलों से जुड़ी शिकायतभरी बातों ने लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट की मौजूदा लीडरशिप के खिलाफ बढ़ती नाराजगी के संकेत देने का काम किया है । लोगों की एकतरफा और बड़ी शिकायत यही सुनी गई कि उन्होंने मौजूदा लीडरशिप को यह सोच कर समर्थन दिया था कि इससे उन्हें और डिस्ट्रिक्ट को राजा साबू गिरोह के कुशासन से मुक्ति मिलेगी तथा उनकी मनमानियों व ग्रांट के पैसों की उनकी लूट-खसोट पर रोक लगेगी - लेकिन लग रहा है कि मौजूदा लीडरशिप ने राजा साबू गिरोह के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है और उनके जैसे ही तौर-तरीके अपना लिए हैं । ग्रांट के पैसे राजा साबू गिरोह के लोगों को ही मिल रहे हैं, और उनके ही प्रोजेक्ट हो रहे हैं; डिस्ट्रिक्ट के दूसरे कामकाजों तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाने में भी पहले जैसे ही 'तरीके' अपनाए जा रहे हैं । अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए पहले सहारनपुर से उम्मीदवार आने/लाने की बात हो रही थी, लेकिन फिर अचानक पता चला कि नेताओं ने अरुण मोंगिया को उम्मीदवार बनाने का फैसला कर लिया है । सहारनपुर के रोटेरियंस के साथ-साथ दूसरे रोटेरियंस को भी इस फैसले से झटका लगा । इस झटके के चलते जले-भुने बैठे सहारनपुर के रोटेरियंस से डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में किसी ने पूछ लिया कि आपके यहाँ से कोई उम्मीदवार नहीं आ रहा है क्या ? इस पर उसे सुनने को मिला - अभी हमारा नंबर कहाँ आयेगा ? नेताओं के रवैये को देखते हुए हमें तो लग रहा है कि जब तक काबिल सिंह भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं बन जायेंगे, तब तक हमें तो इंतजार ही करना पड़ेगा ।
मामला सिर्फ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार 'चुनने' का ही नहीं है - बल्कि दूसरे प्रशासनिक व व्यवस्था संबंधी मामलों में भी मनमानी व अराजकता से जुड़ा हुआ है । ग्रांट के लिए आवेदन करने के मामले में सहायता चाहने वाले लोगों को सलाह मिलती है कि मधुकर मल्होत्रा से बात कर लो । यह सलाह पाने वाले लोगों का कहना है कि इनकी राजनीति के चक्कर में तो उन्होंने मधुकर मल्होत्रा से झगड़ा कर लिया, अब वह किस मुँह से मधुकर मल्होत्रा के पास जाएँ । लोगों को लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट के नए लीडरों ने डिस्ट्रिक्ट की राजनीतिक सत्ता पर तो कब्जा कर लिया है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट चलाने तथा रोटरी के काम करने की कोई व्यवस्था नहीं की है - जिसके कारण एक तरफ तो राजा साबू और उनके गिरोह के दूसरे नेताओं ने मौजूदा लीडरों का अपने आगे समर्पण करवा लिया है, और अपने काम बना रहे हैं, और दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट में अराजकता सी पैदा हो रही है । इसे व्यवस्था संबंधी अराजकता का ही संकेत और सुबूत माना/कहा जायेगा कि रोटरी लीडरशिप इंस्टीट्यूट को लेकर लगातार असमंजस बना रहा है, जिसके चलते पहले तय की गई फैकल्टी बिदक गई और अब जब उक्त इंस्टीट्यूट का कार्यक्रम तय हुआ है, तब जैसे तैसे अन्य फैकल्टीज की व्यवस्था की गई है । फैसले करने में होने वाली देर/दार के कारण डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित किए गए स्पीकर्स भी लोगों को आकर्षित व प्रभावित नहीं कर सके और स्पीकर्स को लेकर लोगों के बीच असंतोष बना/रहा । 
लोगों को लग रहा है कि फैसलों में लेटलतीफी होने तथा असमंजस रहने का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज का गवर्नर-वर्ष और ज्यादा शिकार होने जा रहा है । रमेश बजाज के पेट्स कार्यक्रम को लेकर जो तमाशा देखने को मिल रहा है, उससे संकेत मिल रहा है कि रमेश बजाज के गवर्नर-वर्ष के कार्यक्रम तो बस राम-भरोसे ही रहने हैं । उल्लेखनीय है कि पेट्स का आयोजन पहले कुफरी में होना निश्चित हुआ था, लेकिन फिर उसे पंचकुला में करने का फैसला हुआ । रमेश बजाज के नजदीकियों के अनुसार ही, कुफरी में पेट्स के आयोजन में खर्चा ज्यादा हो रहा था, इसलिए वहाँ आयोजन करने का इरादा छोड़ दिया गया । खर्चे को लेकर हालाँकि समस्या के अभी भी अटके/फँसे होने की चर्चा है । रमेश बजाज यह सोच सोच कर परेशान बताये जा रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट एकाउंट से जितने/जो पैसे मिलेंगे, उतने में तो पेट्स का खर्चा निपटेगा नहीं - तो बाकी खर्चा कहाँ से और कैसे पूरा होगा ? डिस्ट्रिक्ट में जोन बनाने को लेकर भी रमेश बजाज और उनके सहयोगी गफलत में हैं और किसी अंतिम फैसले पर पहुँचने को लेकर असमंजस में हैं । रमेश बजाज ने अपने असिस्टेंट गवर्नर्स से सहायता न मिलने को लेकर शिकायतें करना अभी से शुरू कर दिया है । उनका कहना है कि 'राजनीतिक मजबूरियों' के चलते वह ऐसे लोगों को असिस्टेंट गवर्नर्स बनाने के लिए मजबूर हुए हैं, जो डिस्ट्रिक्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी मदद करने में सर्वथा अनुपयुक्त हैं । इस तरह की बातों से लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट की मौजूदा लीडरशिप डिस्ट्रिक्ट में हुए बड़े राजनीतिक बदलाव से जुड़ी लोगों की उम्मीदों को पूरा कर पाने में विफल हो रही है, जिसके कारण राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को मनमानी करने तथा लूट-खसोट बनाये रखने का मौका मिल रहा है तथा डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच असमंजसता तथा निराशा फैल रही है ।