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Friday, October 30, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पंकज डडवाल के विजन प्रस्तावों से पड़ने वाले प्रभाव को देखते/समझते हुए जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेताओं को भी लगा है कि अरुण मोंगिया को भी पंकज डडवाल से सीखना चाहिए, अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि अरुण मोंगिया उनके लिए बदनामी तथा फजीहत का कारण बन जाएँ

कुरुक्षेत्र । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में अरुण मोंगिया की सुस्ती और गैरजिम्मेदाराना व्यवहार की शिकायतों ने जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेताओं को चिंता और परेशानी में डाल दिया है, जिसके चलते उन्होंने अरुण मोंगिया की जमकर क्लास ली है । जितेंद्र ढींगरा के यहाँ एक पारिवारिक समारोह में पहुँचे कई लोगों ने साफ साफ कहा कि अरुण मोंगिया के रंग-ढंग ऐसे नहीं हैं कि उन्हें वोट दिया/दिलवाया जाये तथा उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनाया/बनवाया जाये - उनके सामने यदि जितेंद्र ढींगरा तथा दूसरे नेताओं के लिहाज के कारण अरुण मोंगिया को वोट देने की मजबूरी न हो, तो वह हर्गिज अरुण मोंगिया को वोट न दें । जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के अन्य नेताओं से लोगों ने कहा कि उन्हें देख/समझ कर ही ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाना चाहिए, जो वास्तव में रोटरी के लिए कुछ करने के लिए उत्साहित हो तथा अपने व्यवहार से वह दूसरे लोगों को उत्साहित व प्रेरित कर सकता हो । लोगों की शिकायत रही कि अरुण मोंगिया चूँकि यह मान/समझ रहे हैं कि जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेता अपने अपने प्रभाव से उन्हें चुनाव जितवा ही देंगे, इसलिए वह अपनी तरफ से कुछ करने में दिलचस्पी ही नहीं ले रहे हैं । 
शिकायतों में हद की बात यह सुनी/बताई गई कि गिफ्ट के रूप में अरुण मोंगिया ने हाल-फिलहाल के दिनों में जो पौधे दिए, उसमें भी भारी नाटकबाजी की । कुछेक क्लब्स के लोगों ने जितेंद्र ढींगरा और या अन्य प्रमुख नेताओं को बताया कि अरुण मोंगिया ने पहले तो उनसे पूछा कि वह किन किन लोगों से मिल लें; लेकिन उन्हें जब क्लब के छह/आठ लोगों के नाम बताये तो वह यह कहते हुए भड़क उठे कि क्लब के जब दो वोट हैं, तो फिर छह/आठ लोगों को गिफ्ट क्यों दिलवा रहे हैं ? कहीं उन्होंने क्लब के चार लोगों को गिफ्ट दिया, लेकिन जब उन्हें दो/तीन लोगों के नाम और बताये गए तो वह यह कहते हुए नाराज हो गए कि आठ सौ रुपये तो उन्होंने खर्च कर दिए हैं, और कितने पैसे खर्च करवाओगे ? शिकायती अंदाज में लोगों का कहना रहा कि अरुण मोंगिया को चूँकि यह भरोसा है कि सत्ता खेमे का उम्मीदवार होने के नाते, वह आसानी से चुनाव तो जीत ही जायेंगे - इसलिए उन्हें एक उम्मीदवार के रूप में न तो सक्रिय होने तथा व्यवहार करने की जरूरत है, और न क्लब्स के पदाधिकरियों तथा अन्य प्रमुख लोगों की बात मानने तथा उनका सम्मान करने/रखने की आवश्यकता है ।
जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के दूसरे नेताओं से लोगों ने कहा/बताया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार पंकज डडवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपना जो विजन प्रस्तुत किया है, वह लोगों को आकर्षित और प्रभावित कर रहा है - इसलिए अरुण मोंगिया को भी अपना विजन बताना/दिखाना चाहिए; लेकिन अरुण मोंगिया का चूँकि लोगों के साथ कोई संपर्क ही नहीं है, इसलिए उन्हें पता ही नहीं है कि लोगों को उनसे क्या और किस तरह की उम्मीदें हैं ? उल्लेखनीय है कि पंकज डडवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपने विजन में स्पष्ट कहा/बताया है कि वह ड्यूज के नाम पर रोटेरियंस पर खर्चों का बोझ नहीं डालेंगे और जरूरी खर्चे ही किए/लिए जायेंगे; ग्लोबल ग्रांट्स में सभी क्लब्स को समान अवसर दिए जायेंगे तथा छोटे क्लब्स को उसके लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रयत्न किए जायेंगे और हिसाब-किताब में पारदर्शिता रखी जायेगी । ऐसे समय में, जबकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज पर विभिन्न तरीकों से पैसे जुटाने और बनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, पंकज डडवाल के विजन में कही जा रहीं बातें डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस तथा प्रेसीडेंट्स को प्रभावित कर रही हैं । ऐसे में, उम्मीद की जा रही थी कि अरुण मोंगिया की तरफ से भी ऐसा कुछ कहा जायेगा जो लोगों को आकर्षित व प्रभावित करेगा - लेकिन अरुण मोंगिया ने ऐसा कुछ करने की जरूरत ही नहीं समझी है । जितेंद्र ढींगरा के यहाँ पारिवारिक समारोह में जुटे रोटेरियंस ने जितेंद्र ढींगरा तथा सत्ता खेमे के नेताओं से कहा/बताया कि उन्हें अरुण मोंगिया को समझाना/बताना चाहिए कि रोटरी पदाधिकारी व नेता के रूप में उन्हें कैसे क्या करना चाहिए - अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि अरुण मोंगिया उनके लिए बदनामी तथा फजीहत का कारण बन जाएँ । सत्ता खेमे के नेताओं का कहना/बताना है कि उन्होंने अरुण मोंगिया को समझाया तो बहुत है, लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि उनके समझाने का अरुण मोंगिया पर कोई असर हुआ भी है या नहीं ?  

Friday, October 23, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में सत्ता खेमे के प्रति पैदा हुई नाराजगी के कारण प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार पंकज डडवाल को लोगों के बीच मिलते दिख रहे समर्थन से होने वाले नुकसान से बचने के लिए जितेंद्र ढींगरा जल्दी चुनाव कराने के चक्कर में, लेकिन चुनाव जल्दी होने से अजय मदान की मुश्किलें बढ़ने का खतरा

पानीपत । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के समय को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज परस्पर विरोधी दबावों में फँस गए हैं, और उनके लिए यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि वह चुनाव कब करवाएँ ? रमेश बजाज की मुश्किलों को निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के उस दावे ने और बढ़ा दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि वह जब चाहेंगे, तब चुनाव होगा । लोगों का कहना/पूछना है कि रमेश बजाज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, या जितेंद्र ढींगरा की कठपुतली - जो उनके कहने से चुनाव की तारीख तय तथा घोषित करेंगे ? यह सवाल दरअसल इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमेश बजाज को जो काम अभी तक कर लेने चाहिए थे; वह तो उन्होंने किए नहीं हैं - जैसे चार महीने पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी का कोई अतापता नहीं है - किंतु चुनाव का जो काम जनवरी/फरवरी तक होता रहा है, रमेश बजाज उसे अभी कर लेना चाहते हैं, और वह भी जितेंद्र ढींगरा के दबाव में ! डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों ने और प्रेसीडेंट्स ने भी रमेश बजाज को कहा/सुझाया है कि अगले बीस-बाइस दिन त्यौहारी सीजन के हैं और लोग अपने अपने कामकाज तथा परिवार के साथ त्यौहार मनाने की तैयारियों में व्यस्त होंगे, इसलिए अभी करीब एक महीने तक तो चुनाव की प्रक्रिया को न शुरू करें ।
मजे की बात यह है कि अभी खुद जितेंद्र ढींगरा के लिए भी रोटरी की राजनीति के लिए समय निकाल पाना मुश्किल होगा - अभी उनके काम का सीजन है और फिर उन्हें एक बड़ी पारिवारिक जिम्मेदारी का निर्वाह करने में जुटना है; लेकिन उनके सामने चुनौती यह है कि उन्हें रोटरी की राजनीति की जिम्मेदारी भी निभानी है । असल में, जितेंद्र ढींगरा को डर हो चला है कि रमेश बजाज के कार्य-व्यवहार के कारण लोगों के बीच जो नाराजगी बढ़ रही है, उसका खामियाजा कहीं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उनके उम्मीदवार अरुण मोंगिया को न भुगतना पड़ जाए । अरुण मोंगिया चूँकि सत्ता खेमे के उम्मीदवार हैं, इसलिए अलग अलग कारणों से सत्ता खेमे के खिलाफ पैदा होने वाली नाराजगी का ठीकरा उन्हीं के सिर फूटने की आशंका है । इस आशंका के चलते ही, जितेंद्र ढींगरा को लग रहा है कि सत्ता खेमे के खिलाफ लोगों की नाराजगी ज्यादा बढ़े, उससे पहले ही चुनाव करवा लिया जाए और चुनावी नुकसान से अपने को बचा लिया जाए । सत्ता खेमे के ही दूसरे लोगों का हालाँकि यह मानना और कहना है कि रमेश बजाज के कार्य-व्यवहार के कारण लोगों के बीच अभी जो नाराजगी के सेंटीमेंट्स हैं, उन्हें अगले दो/एक महीने में अजय मदान के गवर्नर-वर्ष के पद बाँट कर सेटल कर लिया जा सकता है - इसलिए चुनाव करवाने की जल्दी नहीं करना चाहिए । इनका यह भी मानना और कहना है कि अभी त्यौहार का सीजन भी है, इसलिए अभी चुनाव करवाने से लोगों के नाराजगी वाले सेंटीमेंट्स और भड़क सकते हैं । 
अभी चुनाव न करने/करवाने को लेकर एक दलील यह भी दी जा रही है कि अभी चुनाव करवा लेने से अजय मदान के लिए मुसीबतें खड़ी हो जायेंगी । कहा/बताया जा रहा है कि अभी चुनाव निपट जाने से डिस्ट्रिक्ट के लोगों का ध्यान अगले वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अजय मदान पर जा टिकेगा और वह यह देखना/जानना शुरू करेंगे कि अजय मदान किस को क्या पद दे रहे हैं ? जिसे पद नहीं मिलेगा - या अपनी पसंद का नहीं मिलेगा, वह फिर अजय मदान के खिलाफ बातें बनाने लगेगा और तब अजय मदान के लिए अपने कार्यक्रम करना मुश्किल हो जायेगा तथा वह गवर्नर की कुर्सी पर बैठने से पहले ही आलोचनाओं व शिकायतों व आरोपों के भँवर में फँस जायेंगे । अजय मदान को आलोचनाओं व आरोपों से बचाये रखने तथा उनके कार्यक्रमों को बिना विवाद के संपन्न कर लेने के लिए जरूरी माना जा रहा है कि लोगों को अभी इसी वर्ष के चुनावी परिदृश्य में ही उलझा कर रखा जाए । सत्ता खेमे के लोगों को जल्दी चुनाव करवाने में कई तरह  नुकसान होते नजर आ रहे हैं, लेकिन अरुण मोंगिया और जितेंद्र ढींगरा को यह डर भी सता रहा है कि सत्ता खेमे के प्रति पैदा हुई नाराजगी के कारण प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार पंकज डडवाल को लोगों के बीच जो समर्थन मिलता दिख रहा है, वह यदि और बढ़ता गया तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में बाजी पलट भी सकती है । परस्पर विरोधी तर्कों व दलीलों के बीच सत्ता खेमे के नेताओं के लिए यह तय कर पाना सचमुच मुश्किल हो रहा है कि पंकज डडवाल से मिलने वाली चुनावी चुनौती से वह जल्दी चुनाव करवा कर बच सकते हैं, या समय से चुनाव करवाने में उन्हें फायदा होगा ?

Thursday, October 22, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट ड्यूज के मामले में सत्ता खेमे से जुड़े आम और खास नेताओं की नाराजगी के सामने आने से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति के समीकरणों पर असर पड़ने के बनते हालात में, पंकज डडवाल की उम्मीदवारी के समर्थकों को अपने लिए मौका और 'रास्ता' बनता नजर आ रहा है

शिमला । डिस्ट्रिक्ट डियूज के मामले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज को घेरने की कोशिशों ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी समीकरणों को जिस तरफ से डिस्टर्ब करना तथा बिगाड़ना शुरू किया है, उससे अरुण मोंगिया तथा उनके समर्थकों को चिंता होना शुरू हुई है - तथा पहली बार पंकज डडवाल के नजदीकियों व समर्थकों के बीच उम्मीद व उत्साह की लहर पैदा होती हुई देखी गई है । अरुण मोंगिया और पंकज डडवाल के बीच होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को अभी तक एकतरफ ही झुका हुआ माना/देखा जा रहा था, लेकिन पहली बार उक्त चुनाव को लेकर बने समीकरण डगमगाते हुए दिख रहे हैं । दरअसल, डिस्ट्रिक्ट ड्यूज के नाम पर की जा रही मनमानी और मचाई जा रही 'लूट' को लेकर लोगों के बीच जिस तरह की नाराजगी पैदा हुई है, उसे कई एक ऐसे लोगों ने भी समर्थन दिया है - जो सत्ता खेमे के नजदीक हैं । इससे माना/समझा जा रहा है कि लोगों के बीच पैदा हुई नाराजगी को रोकने/संभालने के लिए सत्ता खेमे के नेताओं ने यदि जल्दी ही प्रयास नहीं किए, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में कहीं लेने के देने न पड़ जाएँ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अजय मदान के गवर्नर वर्ष के लिए डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी बनाये गए संदीप गोयल के एक बयान ने आग में घी डालने का जो काम किया है, उससे भी सत्ता खेमे के नेताओं की मुश्किलें बढ़ी हैं और इसका सीधा असर अरुण मोंगिया की चुनावी जीत पर पड़ने का डर पैदा हुआ है ।
असल में, सत्ता खेमे के पदाधिकारियों व नेताओं की मनमानियों ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के साथ-साथ सत्ता खेमे के नेताओं के नजदीकियों व समर्थकों को भी अलग अलग कारणों से नाराज किया हुआ है । डिस्ट्रिक्ट ड्यूज के मामले ने उन नाराजगियों को मुखर बना दिया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज की तरफ से डिस्ट्रिक्ट ड्यूज के नाम पर प्रत्येक सदस्य से 750 रुपये बसूलने की तैयारी की गई है, जिसमें 150 रुपये जीएसटी के बताये/माने गए हैं । लोगों का कहना/पूछना यह है कि डिस्ट्रिक्ट जब दो वर्ष पहले ही जीएसटी के घेरे से बाहर आ गया है, तो जीएसटी के नाम पर पैसा क्यों लिया जा रहा है, और यह पैसा आखिर जायेगा कहाँ ? डिस्ट्रिक्ट ड्यूज में 250 रुपये पेट्स/सेट्स के नाम पर लिए जाते हैं, जो हुई ही नहीं हैं । वर्चुअल प्लेटफॉर्म जूम पर इनके नाम पर महज खानापूर्ति ही हुई है, जिसमें कोई खर्च नहीं हुआ । बाकी बची अन्य रकम को लेकर भी लोगों के सवाल और आपत्तियाँ हैं । आरोप यह भी है कि रमेश बजाज ने अपने गवर्नर वर्ष का बजट गुपचुप रूप से पेट्स में 'पास' तो करा लिया, लेकिन वह लोगों को उपलब्ध नहीं करवाया । लोगों के सवालों और आपत्तियों पर रमेश बजाज ने चुप्पी साधी हुई है । लोगों ने डिस्ट्रिक्ट ड्यूज के नाम पर होने वाली लूट को लेकर जितेंद्र ढींगरा से बात की, तो उन्होंने यह कह कर हाथ झाड़ लिए कि इस बारे में जो पूछना है रमेश बजाज से ही पूछो ।
संदीप गोयल ने लेकिन यह कह कर मामले को भड़का दिया है कि डिस्ट्रिक्ट ड्यूज के नाम पर 750 रुपये ही तो लिए जा रहे हैं, इतनी मामूली रकम को लेकर लोग सवाल ही क्यों उठा रहे हैं । लोगों का कहना है कि 750 रुपये के हिसाब से रमेश बजाज के पास 25 लाख रुपये पहुँच गए हैं, और संदीप गोयल कह रहे हैं कि लोगों को यह जानने/पूछने की जरूरत नहीं है कि रमेश बजाज इस रकम का आखिर करेंगे क्या ? संदीप गोयल अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी बनाये गए है, इसलिए लोगों को शक है कि संदीप गोयल ने जो कहा है, वह कहीं अजय मदान ने तो उनसे नहीं कहलवाया है और इस तरह कहीं अजय मदान भी तो वही सब करने की तैयारी नहीं कर रहे हैं, जो रमेश बजाज कर रहे हैं ?
यह नजारा देख कर पंकज डडवाल के नजदीकियों और समर्थकों के बीच पहली बार उम्मीद व उत्साह पैदा होता हुआ नजर आया है । पंकज डडवाल की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन का भाव रखने वाले लोगों को लगने लगा है कि पंकज डडवाल के समर्थक यदि 'चुनावी जरूरतों' को समझते/पहचानते हुए अपनी सक्रियता को दिखाएँ/बढ़ाएँ, तो डिस्ट्रिक्ट ड्यूज के मामले में लोगों के बीच बढ़ती नाराजगी का फायदा उठाते हुए वह एकपक्षीय नजर आ रहे चुनावी परिदृश्य को पलट भी सकते हैं । पंकज डडवाल की उम्मीदवारी के कई समर्थकों व शुभचिंतकों को लगातार यह लगता रहा है कि इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमेश बजाज की कार्यप्रणाली ने जिस तरह से सिर्फ डिस्ट्रिक्ट के आम लोगों को ही नहीं, बल्कि सत्ता खेमे के आम तथा खास नेताओं तक को नाराज किया हुआ है, उसके कारण इस वर्ष पंकज डडवाल के लिए जीतने की अच्छी संभावना थी - लेकिन उनकी तरफ से प्रभावी रूप में अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के प्रयास ही नहीं किए गए । पंकज डडवाल के नजदीकियों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट ड्यूज के मामले में सत्ता खेमे के पदाधिकरियों तथा नेताओं के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच जो नाराजगी पैदा हुई है, और खुद सत्ता खेमे से जुड़े लोग भी अपनी नाराजगी को खुलकर आवाज देने लगे हैं, उसने चुनावी राजनीति के समीकरणों पर असर डालना/दिखाना शुरू कर दिया है - और इसमें पंकज डडवाल की उम्मीदवारी की सफलता का 'रास्ता' बन सकता है । देखना दिलचस्प होगा कि पंकज डडवाल और उनके समर्थकों को अचानक से जो मौका मिला है, उसका फायदा उठाने के लिए वह कोई तैयारी कर पाते हैं या इस मौके को यूँ ही गवाँ देंगे ?

Wednesday, October 21, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में कुरुक्षेत्र में छप रही डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी की क्वालिटी को लेकर जितेंद्र ढींगरा का अपेक्षित सहयोग न मिलने से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज के खफा होने के चक्कर में सारी तैयारी पूरी हो जाने के बावजूद डायरेक्टरी का आना लटक गया है 

पानीपत । डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी की छपाई की क्वालिटी तथा कीमत को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज और निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के बीच एक बार फिर 'शीतयुद्ध' जैसे हालात बन गए हैं, जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी का प्रकाशन लटक गया है । रमेश बजाज को प्रिंटर की तरफ से तैयार डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के जो कुछेक सैम्पल मिले, रमेश बजाज उनसे संतुष्ट नहीं दिखे और इसलिए उन्होंने प्रिंटर को डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी का काम आगे बढ़ाने से रोक दिया है । रमेश बजाज की शिकायत है कि प्रिंटर ने उन्हें जिस क्वालिटी का भरोसा दिया था, तैयार सैम्पल में वह क्वालिटी नहीं है - इसलिए प्रिंटर या तो वह उस क्वालिटी का काम दे जिसका उसने भरोसा दिया था, और या रेट कम करे । डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी कुरुक्षेत्र में छप रही है, और प्रिंटर के साथ रमेश बजाज का तालमेल जितेंद्र ढींगरा ने करवाया था । इस नाते, रमेश बजाज चाहते हैं कि प्रिंटर से उनकी जो माँग है उसे जितेंद्र ढींगरा पूरा करवाएँ । जितेंद्र ढींगरा लेकिन इस पचड़े में पड़ना नहीं चाहते हैं । जितेंद्र ढींगरा के नजदीकियों का कहना है कि रमेश बजाज नाहक ही बात का बतंगड़ बना रहे हैं, और ऐसा करके वह वास्तव में प्रिंटर को तय हुई रकम से कम रकम देना चाहते हैं । उधर रमेश बजाज की तरफ से शिकायत सुनी जा रही है कि जितेंद्र ढींगरा उनकी बातों व समस्या पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहे हैं और इस तरह वह प्रिंटर का पक्ष ले रहे हैं ।
उल्लेखनीय है कि रमेश बजाज ने कुरुक्षेत्र के प्रिंटर से डायरेक्टरी छपवाने का फैसला इस 'भरोसे' के साथ किया था कि उन्हें पिछले वर्ष जैसी डायरेक्टरी करीब आधी कीमत में मिल जायेगी । यह बात कहने/सुनने में अच्छी लगती है, लेकिन व्यावहारिक रूप में ऐसा होता नहीं है । पिछले वर्ष जितेंद्र ढींगरा ने दिल्ली के एक नामी प्रिंटर से डायरेक्टरी छपवाई थी । वह प्रिंटर नामी है ही इसलिए क्योंकि उसके पास बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर है, और अनुभवी लोगों की टीम है । प्रिंटिंग का काम ऊपर ऊपर से एक जैसा ही लगता है, लेकिन छोटी छोटी बातों से उसमें बड़ा बड़ा फर्क पड़ जाता है, और वह दिखता भी है । लोगों का कहना है कि रमेश बजाज को कॉमनसेंस से इतना तो समझना ही चाहिए था कि दिल्ली के एक नामी प्रिंटर के काम में और कुरुक्षेत्र के प्रिंटर के काम में कुछ अंतर तो होगा ही, तथा तब तो और भी जबकि कुरुक्षेत्र वाला प्रिंटर करीब आधी कीमत पर डायरेक्टरी छाप रहा है । लोगों को यह रमेश बजाज का 'भोलापन' ही लग रहा है कि उन्होंने इस दावे पर सहज ही विश्वास कर लिया कि उन्हें आधी कीमत में पिछले वर्ष जैसी ही डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी छप कर सचमुच मिल जायेगी ।  
रमेश बजाज को डर दरअसल यह है कि लोगों को जब उनकी डायरेक्टरी पिछले वर्ष की डायरेक्टरी से 'हल्की' लगेगी, तो यह आरोप लगेंगे कि डायरेक्टरी में उन्होंने पैसे बचा लिए हैं । डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन जुटाने में जबरदस्तियाँ करने को लेकर उनकी पहले से ही बदनामी है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच यह चर्चा पहले से ही है कि डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन जुटाने में जितेंद्र ढींगरा ने तो कभी किसी पर कोई दबाव नहीं बनाया था, जबकि रमेश बजाज ने विज्ञापन जुटाने को ही अपना उद्देश्य बना लिया है । ऐसे में, जब लोगों को रमेश बजाज की डायरेक्टरी मिलेगी और वह 'हल्की' लगेगी, तो यह बात तो उठेगी ही कि जितेंद्र ढींगरा ने विज्ञापनों के लिए जबरदस्ती किए बिना जब एक अच्छी डायरेक्टरी छाप ली - तो खूब खूब विज्ञापनों को जुटाने के बावजूद रमेश बजाज के लिए उनके जैसी डायरेक्टरी छापना क्यों संभव नहीं हुआ ? इन्हीं बातों से बचने के लिए रमेश बजाज प्रिंटर पर दबाव बना रहे हैं कि वह डायरेक्टरी की क्वालिटी को ठीक करे; उनकी कोशिश यह भी है कि प्रिंटर यदि क्वालिटी ठीक नहीं कर पाता है तो वह कुछ पैसे ही कम करवा लें । इस मामले में लेकिन जितेंद्र ढींगरा का अपेक्षित सहयोग न मिलने से रमेश बजाज कुछ खफा खफा से हैं; और इस चक्कर में सारी तैयारी के बावजूद डायरेक्टरी का आना लटक गया है ।

Thursday, September 24, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज की विज्ञापन के जरिये पैसे जुटाने के लिए की जा रही जबरदस्तियों के आरोपों ने जितेंद्र ढींगरा और अरुण मोंगिया को फँसाया और मुसीबत में डाला

पानीपत । डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन जुटाने तथा विज्ञापन के मनमाने दाम बसूलने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज द्वारा की जा रही जबरदस्तियों की शिकायतों ने निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार अरुण मोंगिया को खासी मुसीबत में डाल दिया है । डिस्ट्रिक्ट में कई आम और खास रोटेरियंस का आरोप है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमेश बजाज ने ज्यादा से ज्यादा पैसा इकट्ठा करने को ही अपना एकमात्र उद्देश्य बना लिया है । हालाँकि जितेंद्र ढींगरा ने इस तरह की बातों/शिकायतों पर यह कहते हुए मामले से अपना पल्ला झाड़ने का रवैया अपनाया हुआ है कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के काम में कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहते । लेकिन जैसे जैसे रमेश बजाज की तरफ से विज्ञापन लेने के लिए जबरदस्तियाँ बढ़ती गईं, जितेंद्र ढींगरा के पास शिकायतों का ढेर भी बढ़ता गया है । लोगों ने अरुण मोंगिया पर भी यह कहते हुए दबाव बनाया कि आप लोगों ने अच्छा गठजोड़ बना लिया है - आपको हमसे वोट चाहिए, और आपके गवर्नर को हमसे विज्ञापन/पैसे चाहिए । कई लोगों ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया कि उन्होंने अरुण मोंगिया से साफ कह दिया है कि उन्हें यदि अपनी उम्मीदवारी के लिए वोट चाहिए, तो गवर्नर से कहो कि विज्ञापन के लिए जबरदस्ती न करे ।
जितेंद्र ढींगरा और अरुण मोंगिया के लिए मुसीबत की बात यह भी है कि रमेश बजाज की तरफ से पहले से ही उनके खिलाफ यह शिकायत सुनी जा रही है कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन इकट्ठा करवाने में कोई मदद नहीं की है । रमेश बजाज के नजदीकियों के अनुसार, रमेश बजाज को इस बात की बड़ी नाराजगी और शिकायत है कि जितेंद्र ढींगरा डिस्ट्रिक्ट टीम की प्रस्तावित सूची में नाम कटवाने तथा जुड़वाने के लिए तो सक्रिय रहते हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट टीम में शामिल किए/करवाने वाले लोगों से विज्ञापन दिलवाने में कोई दिलचस्पी नहीं लेते हैं । रमेश बजाज ने अपने नजदीकियों के बीच कई बार यह रोना रोया है कि डिस्ट्रिक्ट टीम के लिए उन्होंने जो नाम तय किए थे, जितेंद्र ढींगरा ने उनमें से कई नामों को डिस्ट्रिक्ट टीम में शामिल न करने के लिए कहा; और जितेंद्र ढींगरा के दबाव के चलते उन्हें कई नाम हटाने पड़े तथा उनकी जगह दूसरे नाम तय करने पड़े - और इस चक्कर में डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी का काम लेटलतीफी का शिकार हुआ । रमेश बजाज की शिकायत यह है कि उन्होंने तो जितेंद्र ढींगरा की बातों को मानने तथा अपनाने में कोई देर नहीं की, लेकिन जितेंद्र ढींगरा ने जो नाम डिस्ट्रिक्ट टीम में शामिल करवाए - उनसे डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन दिलवाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली ।
डिस्ट्रिक्ट में आम और खास रोटेरियंस का मानना और कहना है कि लॉकडाउन के कारण रोटरी और डिस्ट्रिक्ट की गतिविधियाँ जब लगभग ठप्प पड़ी हैं, तो डिस्ट्रिक्ट का ज्यादा कोई खर्चा भी नहीं हो रहा है - लेकिन फिर भी रमेश बजाज पैसों को लेकर ज्यादा हायतौबा क्यों मचा रहे हैं ? जितेंद्र ढींगरा और उनसे पहले, टीके रूबी के गवर्नर-वर्ष का उदाहरण देते हुए रोटेरियंस का कहना है कि इन दोनों ने विज्ञापन जुटाने तथा अन्य तरीकों से पैसे इकट्ठे करने को लेकर कोई जबरदस्ती भी नहीं की थी, और अपने अपने कार्यक्रम भी बड़ी भव्यता के साथ किए थे । जितेंद्र ढींगरा तो एक बड़ी रकम के बचे होने की बात कहते/बताते भी सुने गए हैं । लॉकडाउन के चलते रमेश बजाज को कुछ करना भी नहीं पड़ रहा है, और वह पैसे जुटाने के काम में बुरी तरह से जुटे हुए भी हैं, और वह तरह तरह से जबरदस्ती कर रहे हैं । इससे ही लोगों को आरोपपूर्ण सवाल करने का मौका मिला है कि रमेश बजाज सिर्फ कमाई करने के लिए ही गवर्नर बने हैं क्या ? जितेंद्र ढींगरा से भी लोगों ने शिकायती स्वर में कहा है कि उन्हें अपने जो काम रमेश बजाज से करवाने होते हैं, वह तो करवा लेते हैं - लेकिन 'हम' रमेश बजाज की जबरदस्ती से बचाने की बात कहते हैं, तो बहाने करके बच निकलते हैं । रमेश बजाज की जबरदस्ती से बचने/बचाने के लिए जितेंद्र ढींगरा और अरुण मोंगिया से लगाई जा रही गुहारों का कोई असर होगा या नहीं, यह तो बाद में पता चलेगा - लेकिन इन गुहारों ने डिस्ट्रिक्ट में एक दिलचस्प नजारा तो बना ही दिया है । 

Friday, September 18, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए रीता कालरा की पीएस तुलसी की मदद से टीके रूबी का समर्थन जुटाने की कोशिशों ने अरुण मोंगिया को परेशान किया, तो जितेंद्र ढींगरा को सत्ता खेमे के गवर्नर्स की इमरजेंसी मीटिंग बुलाने के लिए मजबूर होना पड़ा 

चंडीगढ़ । रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन की पूर्व प्रेसीडेंट रीता कालरा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अपनी उम्मीदवारी को लेकर सक्रियता दिखा/जता कर डिस्ट्रिक्ट के सत्ता खेमे के नेताओं के बीच खलबली सी मचा दी है, जिसे शांत करने के लिए निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने कुरुक्षेत्र में अपने घर पर सत्ता खेमे के गवर्नर्स की एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई । समझा जाता है कि इस मीटिंग को करने/बुलाने के लिए जितेंद्र ढींगरा को सत्ता खेमे के उम्मीदवार के रूप में देखे/पहचाने जा रहे अरुण मोंगिया ने 'मजबूर' किया । दरअसल, रीता कालरा को अभी पंद्रह/बीस दिन पहले अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटने के बाद, अचानक से फिर आगे बढ़ता देख - अरुण मोंगिया को शक हो रहा है कि सत्ता खेमे के ही कुछेक नेता रीता कालरा की उम्मीदवारी को हवा दे रहे हैं । अरुण मोंगिया के नजदीकियों के अनुसार, उन्हें पूर्व गवर्नर टीके रूबी और मौजूदा गवर्नर रमेश बजाज के रवैये पर शक है । इसीलिए अरुण मोंगिया ने जितेंद्र ढींगरा पर दबाव बनाया कि उन्हें यह जानने/समझने की कोशिश करना चाहिए कि टीके रूबी और रमेश बजाज के मन में आखिर चल क्या रहा है, और यह दोनों डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उनकी उम्मीदवारी के समर्थन में सचमुच हैं भी या नहीं ?
रमेश बजाज के समर्थन को लेकर अरुण मोंगिया हालाँकि शुरू से ही कंफर्टेबल नहीं रहे हैं, लेकिन रमेश बजाज की उन्हें ज्यादा चिंता भी नहीं रही; अरुण मोंगिया को विश्वास रहा कि जितेंद्र ढींगरा उन्हें 'सँभाल' लेंगे । लेकिन टीके रूबी को लेकर अरुण मोंगिया को झटका लगा है । हालाँकि अरुण मोंगिया की तरफ से टीके रूबी को लेकर कभी कोई शिकायत या संदेह के स्वर सुनाई नहीं दिए हैं, और अरुण मोंगिया पूरी तरह उन पर विश्वास करते रहे हैं । लेकिन हाल ही के दिनों में उन्हें सुनने को मिला कि रीता कालरा अपनी उम्मीदवारी के लिए टीके रूबी का सहयोग/समर्थन लेने की कोशिश कर रही हैं, और इसके लिए उन्होंने अपने क्लब के वरिष्ठ सदस्य पीएस तुलसी की मदद भी ली है । टीके रूबी की इन दोनों से ही अच्छी नजदीकियत है; उनके गवर्नर-वर्ष में रीता कालरा क्लब की प्रेसीडेंट थीं और टीके रूबी की सलाह पर उन्होंने खूब काम किया था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी ने उन्हें और उनके क्लब को कई अवॉर्ड तो दिए ही थे, उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने के लिए भी प्रेरित किया था । पिछले दिनों रीता कालरा ने जब जब भी अपनी उम्मीदवारी की बात की, टीके रूबी के समर्थन का दावा जरूर किया । पीएस तुलसी की मदद के चलते टीके रूबी के यहाँ रीता कालरा का दावा और मजबूत हो गया, क्योंकि पीएस तुलसी के प्रति टीके रूबी बहुत ही मान/सम्मान रखते हैं ।
रीता कालरा की उम्मीदवार के रूप में वापसी करने में अरुण मोंगिया इन्हीं कयासों/अनुमानों के चलते डर गए । उल्लेखनीय है कि रीता कालरा ने करीब पंद्रह/बीस दिन पहले अपनी उम्मीदवारी को लेकर सक्रियता दिखाई थी, और इसके लिए सत्ता खेमे के मुखिया के रूप में देखे/पहचाने जाते जितेंद्र ढींगरा से बात की थी । जितेंद्र ढींगरा ने लेकिन उन्हें साफ कह दिया था कि इस वर्ष के उनके उम्मीदवार अरुण मोंगिया हैं, और इसमें कोई फेरबदल नहीं हो सकता है । रीता कालरा ने अगले रोटरी वर्ष के उम्मीदवार के रूप में अपने नाम की घोषणा करने की माँग की, जितेंद्र ढींगरा ने लेकिन उनकी इस माँग को यह कहते हुए टाल दिया कि इस वर्ष का चुनाव हो जाने के बाद अगले वर्ष के बारे में सोचेंगे । रीता कालरा को अपनी दाल गलती नहीं दिखी, तो वह चुप बैठ गईं । अभी लेकिन अचानक से उनकी उम्मीदवार के रूप में सक्रियता सुनी/देखी गई । पता चला कि अपनी उम्मीदवारी के लिए उन्होंने अपने क्लब में हरी झंडी भी ले ली है । डिस्ट्रिक्ट में हर किसी को हैरानी हुई कि इतना सब करने के लिए शह आखिर उन्हें कहाँ से और किससे मिली है ? क्लब के लोगों का कहना है कि रीता कालरा ने अपनी उम्मीदवारी को लेकर जल्दबाजी इसलिए भी दिखाई है, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं उनके क्लब की अन्य सदस्य ऋतु सिंघल अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत न कर दें । टीके रूबी ने उन्हें भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की प्रेरणा दी हुई है । रीता कालरा की सक्रियता और पीएस तुलसी की मदद से टीके रूबी का समर्थन जुटाने की कोशिशों की खबरों ने अरुण मोंगिया को परेशान किया, तो उन्होंने जितेंद्र ढींगरा पर जोर दिया कि उन्हें टीके रूबी और रमेश बजाज से बात तो करना चाहिए । जितेंद्र ढींगरा के घर पर हुई सत्ता खेमे के नेताओं की मीटिंग में क्या बातें हुईं, यह तो किसी को नहीं पता है - लेकिन उस मीटिंग के बाद से अरुण मोंगिया जिस तरह राहत महसूस करते देखे/सुने गए हैं, उससे लग रहा है कि जितेंद्र ढींगरा ने मामले को फिलहाल तो मैनेज कर लिया है ।

Tuesday, August 18, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज के लिए परेशानी खड़ी करने वाला, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जल्दी होने का अरुण मोंगिया का दावा क्या सचमुच जितेंद्र ढींगरा के आश्वासन पर निर्भर है ?

पानीपत । अरुण मोंगिया ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशों में तेजी ला कर और जल्दी चुनाव होने का दावा करके डिस्ट्रिक्ट में हलचल तो मचा दी है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज के लिए खासी परेशानी खड़ी कर दी है । रमेश बजाज के लिए लोगों को यह बता पाना मुश्किल हो रहा है कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव कब करवायेंगे; और लोगों को चूँकि सीधा जबाव नहीं मिल रहा है - तो उन्हें लग रहा है कि रमेश बजाज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद को लेकर कोई 'खेल' करने की योजना तो नहीं बना रहे हैं ? मजे की बात यह है कि रमेश बजाज की इस मुसीबत के पीछे अरुण मोंगिया के अति-उत्साह को देखा/पहचाना जा रहा है, लेकिन इसका ठीकरा फूट रहा है निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के सिर । रमेश बजाज के नजदीकियों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में अरुण मोंगिया लोगों के बीच जिस विश्वास से दावा कर रहे हैं कि जितेंद्र ढींगरा ने उन्हें जल्दी चुनाव होने की बात बता कर उम्मीदवार के रूप में सक्रिय होने के लिए कहा है, उसके चलते कोई शक नहीं रह जाता है कि जल्दी चुनाव की बात जितेंद्र ढींगरा ने ही की है - क्यों की है, इसका उन्हें कोई अंदाजा नहीं है । रमेश बजाज के नजदीकियों का दावा है कि चुनाव संबंधी नोटीफिकेशन जारी होने के अलावा, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की आगे की प्रक्रिया को लेकर अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है, और जितेंद्र ढींगरा ने भी इस बारे में रमेश बजाज से कोई बात नहीं की है ।
रमेश बजाज और उनके नजदीकियों को यह बात भी पसंद नहीं आ रही है कि अरुण मोंगिया डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव सिर्फ जितेंद्र ढींगरा के नाम पर लड़ते नजर आ रहे हैं, और उन्हें कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं । दरअसल रमेश बजाज और उनके नजदीकियों को लगातार यह शिकायत रही है कि अरुण मोंगिया ने उन्हें कभी भी उचित सम्मान नहीं दिया है । रमेश बजाज और उनके नजदीकियों की इस शिकायत को जितेंद्र ढींगरा ने भी गंभीरता से लिया; और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमेश बजाज का कार्यकाल शुरू होने के तुरंत बाद, 9 जुलाई को सोशल मीडिया में एक करीब पाँच माह पुरानी फोटो का इस्तेमाल करते हुए अरुण मोंगिया को उन्होंने यह अहसास कराते हुए मीठी से झिड़की दी कि रमेश बजाज के साथ जब 'टीम' के बाकी सदस्य खड़े होते हैं, तब वह 'मिसिंग' होते हैं । रमेश बजाज और उनके नजदीकियों का कहना है कि अरुण मोंगिया का व्यवहार लेकिन उसके बाद भी नहीं बदला है - और अब नोटीफिकेशन जारी होने के बाद डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जल्दी होने का दावा करके तो उन्होंने हद ही कर दी है ।
रमेश बजाज के नजदीकियों का कहना/बताना है कि पिछले दिनों कुछेक मौकों पर अरुण मोंगिया की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जल्दी करवाने की बात चलवाई तो गई थी, किंतु वह बात व्यवस्थित रूप से आगे नहीं बढ़ी थी । रमेश बजाज अभी डिस्ट्रिक्ट टीम के सदस्यों के नाम फाइनल करने के ही काम में लगे हैं, ताकि पहले ही लेटलतीफी का शिकार हो चुकी डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी का काम पूरा हो तथा वह और ज्यादा लेट न हो - इसलिए बाकी कामों तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की प्रक्रिया तय करने पर वह कोई ध्यान नहीं दे पा रहे हैं । अरुण मोंगिया को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए चूँकि अभी कोई और उम्मीदवार सक्रिय नहीं है, इसलिए जल्दी चुनाव होने पर वह आसानी से - संभव है कि निर्विरोध ही - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बन जाएँ । अरुण मोंगिया ने लोगों के बीच उदाहरण भी दिया कि पिछले रोटरी वर्ष में जितेंद्र ढींगरा ने जल्दी चुनाव करवा कर नवीन गुलाटी के लिए चुनावी मुकाबले को आसान बना दिया था । लोगों के बीच चर्चा है कि संभव है कि अरुण मोंगिया ने इस बारे में जितेंद्र ढींगरा से बात की होगी, और जितेंद्र ढींगरा ने उन्हें आश्वस्त कर दिया होगा कि इस वर्ष भी जल्दी ही चुनाव हो जायेंगे । जितेंद्र ढींगरा के आश्वासन पर अरुण मोंगिया ने लोगों के बीच दावा कर दिया, जो रमेश बजाज के लिए मुसीबत का कारण बन गया है । अरुण मोंगिया के दावे पर डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच यह सवाल भी उठा है कि इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट चला कौन रहा है - जितेंद्र ढींगरा या रमेश बजाज ! 

Friday, July 17, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर अरुण शर्मा की तरफ से आरोप सुनने को मिल रहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज उनकी सिफारिश के बाद भी 'उनके' लोगों को डिस्ट्रिक्ट टीम में नहीं ले रहे हैं, और जितेंद्र ढींगरा की कठपुतली बने हुए हैं; उधर जितेंद्र ढींगरा के कई नजदीकी भी नाराज हैं कि रमेश बजाज उन्हें तवज्जो नहीं देते हैं

पानीपत । डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर अरुण शर्मा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज से बुरी तरह नाराज हैं । अरुण शर्मा की शिकायत है कि रमेश बजाज उन्हीं की कोशिशों से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी पर बैठे हैं, और उन्हीं के सुझावों व सिफारिशों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट टीम के लिए अरुण शर्मा ने जिन रोटेरियंस के नामों की सिफारिश की, उनमें से कईयों को रमेश बजाज ने अपनी टीम में जगह नहीं दी है - और इसी बात से अरुण शर्मा खासे भड़के हुए हैं । अरुण शर्मा की तरफ से गंभीर आरोप यह सुना जा रहा है कि रमेश बजाज अपनी टीम के सदस्यों का चयन/चुनाव निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा की सलाह से कर रहे हैं, और जितेंद्र ढींगरा के कहने पर ही रमेश बजाज ने उनके सुझाए रोटेरियंस को पद नहीं दिए हैं, तथा जितेंद्र ढींगरा की कठपुतली बने हुए हैं । अरुण शर्मा की सिफारिश के बाद भी पद न पाने वाले कुछेक रोटेरियंस ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया है कि रमेश बजाज ने ही उन्हें सूचित किया है कि उन्होंने तो उनके नाम टीम में शामिल कर लिए थे, और उन्हें पद दे दिए थे - लेकिन जितेंद्र ढींगरा के आपत्ति करने के बाद उन्हें उनके नाम टीम से हटाने पड़े हैं । उनके नामों को लेकर जितेंद्र ढींगरा की आपत्ति का कारण यह रहा कि टीके रूबी वाले मामले में डिस्ट्रिक्ट में पीछे दो/तीन वर्ष जो उठा-पटक चली थी, उसमें उनकी भूमिका काफी नकारात्मक थी; और उनकी उस नकारात्मक भूमिका को देखते/याद करते हुए वह उन्हें डिस्ट्रिक्ट टीम में तवज्जो मिलते हुए नहीं देख सकते हैं । मजे की बात लेकिन यह है कि जितेंद्र ढींगरा पर रमेश बजाज की टीम के सदस्यों के चयन/चुनाव पर अपनी पसंद/नापसंद थोपने के आरोपों के बावजूद रमेश बजाज की टीम में बहुत से ऐसे रोटेरियंस को जगह मिली सुनी/बताई गई है जो टीके रूबी वाले मामले में जितेंद्र ढींगरा की राजनीति के खिलाफ रहे थे ।
रमेश बजाज के लिए दुविधा, विडंबना और मुसीबत की बात दरअसल यह हुई है कि डिस्ट्रिक्ट में उन्हें अभी भी 'राजा साबू के आदमी' के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी तक वह जितेंद्र ढींगरा ग्रुप की तरफ से पहुँचे हैं; और इस कुर्सी तक पहुँचने की उनकी कोशिशों को आसान बनाया है राजा साबू खेमे के अरुण शर्मा ने । इस तरह, रमेश बजाज दोनों खेमों में हैं - लेकिन दोनों खेमे के लोग उन पर संदेह करते हैं, और इस कारण से दोनों खेमों की तरफ से उन्हें अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है । जितेंद्र ढींगरा खेमे के कई छोटे/बड़े प्रमुख सदस्यों के खुले ऐतराज के बाद भी रमेश बजाज ने राजा साबू खेमे के अरुण शर्मा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया, जिस कारण वह रमेश बजाज से नाराज हुए - और अब अरुण शर्मा की नाराजगी सामने आ रही है कि रमेश बजाज ने डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर तो उन्हें बनाया, लेकिन उनकी सुनने/मानने की बजाये रमेश बजाज फैसले जितेंद्र ढींगरा के कहने से कर रहे हैं । मजेदार और विडंबनापूर्ण नजारा यह है कि एक तरफ तो अरुण शर्मा की तरफ से सुना/बताया जा रहा है कि रमेश बजाज उनकी सिफारिश के बाद भी 'उनके' लोगों को डिस्ट्रिक्ट टीम में नहीं ले रहे हैं; और दूसरी जितेंद्र ढींगरा के नजदीकियों की शिकायत है कि जितेंद्र ढींगरा ने कैसे व्यक्ति को गवर्नर बना/बनवा दिया है, जो उनके नजदीकियों और समर्थकों को अपनी टीम में जगह ही नहीं दे रहा है, और जिसने अपनी टीम में विरोधियों को भर लिया है ।
इस स्थिति के लिए हालाँकि कई लोग रमेश बजाज को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । उनका कहना है कि रमेश बजाज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तो बन गए हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की जिम्मेदारी निभाने/संभालने की काबिलियत वह नहीं दिखा पा रहे हैं - और यही कारण है कि वह न तो ढंग से कोई काम कर पा रहे हैं, और न लोगों की ठीक से मदद ले पा रहे हैं । दरअसल वह किसी भी तरफ के लोगों का भरोसा नहीं जीत पाए हैं; अपनी तरफ से हालाँकि वह चतुराई तो खूब दिखाते हैं, लेकिन उनकी चतुराई उन्हें उल्टी पड़ती है और उनकी फजीहत करवाती है । जितेंद्र ढींगरा के नजदीकी कुछेक बड़े व प्रमुख लोगों को रमेश बजाज बिलकुल भी तवज्जो नहीं देते हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई लाभ होने की बजाये नुकसान ही उठाना पड़ा है - क्योंकि उनके इस व्यवहार के कारण उन्हें जितेंद्र ढींगरा ग्रुप का कोई सहयोग नहीं मिल पा रहा है - उधर राजा साबू खेमे के लोग उन्हें जितेंद्र ढींगरा के नजदीक पाते/देखते हुए उनसे दूर बने हुए हैं । अपने बिलकुल पहले कार्यक्रम - प्री-पेट्स - के आयोजन की जिम्मेदारी अरुण शर्मा के क्लब को देकर रमेश बजाज जिस मुसीबत में फँसे थे, और जिससे उन्हें जितेंद्र ढींगरा ने निकाला/बचाया था - उससे रमेश बजाज ने लगता है कि कोई सबक नहीं सीखा और वह लगातार वही गलतियाँ करते जा रहे हैं, जिनके कारण वह प्री-पेट्स में फजीहत का शिकार बने थे । दोनों तरफ के लोगों को खुश करने/रखने के चक्कर में रमेश बजाज ने दोनों तरफ के लोगों को नाराज किया हुआ है, जिस कारण डिस्ट्रिक्ट में उन्हें कोई भी गंभीरता से लेता हुआ नहीं दिख रहा है, और उनका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनना एक मजाक सा बन कर रह गया है ।  

Friday, May 15, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव के मामले को गुपचुप रूप से क्रियान्वित करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा की कोशिशों ने लोगों को हैरान किया हुआ है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज तो उनके रवैये के चलते अपनी फजीहत होते हुए भी देख रहे हैं 

कुरुक्षेत्र । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज सीओएल (काउंसिल ऑन लेजिस्लेशन) प्रतिनिधि के चयन/चुनाव के मामले में अँधेरे में रखे जाने को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा से बुरी तरह खफा हैं । रमेश बजाज ने कुछेक मौकों पर अलग अलग लोगों से शिकायती स्वर में कहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट होने के बावजूद उन्हें यह नहीं पता है कि सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर डिस्ट्रिक्ट में क्या हो रहा है ? उन्होंने जितेंद्र ढींगरा से जब भी इस बारे में बात की, जितेंद्र ढींगरा ने बहानेबाजी करके बात को टाल दिया और कोई सीधा जबाव नहीं दिया । रमेश बजाज के नजदीकियों के अनुसार, रमेश बजाज को यह बात दरअसल इसलिए बुरी लगी है कि उनसे जब जब भी किसी ने सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर पूछा, तब तब उन्हें चुप रह जाना पड़ा और यह सोच कर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा - कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट होने के बावजूद उन्हें यही नहीं पता है कि सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर डिस्ट्रिक्ट में हो क्या रहा है ? रमेश बजाज के नजदीकियों के साथ-साथ दूसरों को भी यह बात समझना मुश्किल हो रही है कि रमेश बजाज तो जितेंद्र ढींगरा के खेमे के ही 'सदस्य' हैं, आखिर तब भी जितेंद्र ढींगरा उनसे उक्त मामले से जुड़ी कार्रवाई को छिपा क्यों रहे हैं ? उक्त मामले से जुड़ी कार्रवाई की बात जितेंद्र ढींगरा कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के दूसरे सदस्यों से छिपा रहे हैं, यह बात तो फिर भी लोगों की समझ में आ रही है, लेकिन अपने ही नजदीकी और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज को भी वह उक्त मामले में अँधेरे में रख रहे हैं - इस बात पर हर किसी को हैरानी है ।
उल्लेखनीय है कि 30 जून 2020 तक प्रत्येक डिस्ट्रिक्ट को रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को अपने सीओएल प्रतिनिधि का नाम भेजना है । इसे लेकर प्रत्येक डिस्ट्रिक्ट में सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव की सक्रियता है । अब जबकि तय समय सीमा को पूरा होने में करीब 45 दिन बचे हैं, डिस्ट्रिक्ट 3080 में सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर पूरी तरह अँधेरा छाया हुआ है । सीओएल प्रतिनिधि के लिए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ही उम्मीदवार हो सकते हैं; एक से ज्यादा उम्मीदवार होने की स्थिति में चुनाव होता है, जिसमें क्लब्स के प्रेसीडेंट वोट देते हैं । डिस्ट्रिक्ट 3080 में लेकिन नजारा यह है कि क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को तो छोड़िये, पूर्व गवर्नर्स तक को नहीं पता है कि सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर हो क्या रहा है । इस मामले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा से सीधा जबाव न मिलने पर लोग जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज से पूछते हैं, तो रमेश बजाज के लिए यह कहना/बताना भी मुश्किल हो जाता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट होने के बावजूद उन्हें भी उक्त मामले में कुछ नहीं पता है । मजे की बात यह है कि रमेश बजाज के नजदीकियों को ही लगता है कि जितेंद्र ढींगरा चूँकि रमेश बजाज को राजा साबू के नजदीक मानते/समझते हैं, इसलिए ही वह रमेश बजाज से बातें छिपाते हैं । इससे भी ज्यादा मजे की बात लेकिन यह है कि जितेंद्र ढींगरा जिन मनमोहन सिंह के साथ मिलकर सारी योजनाएँ बनाते हैं, उन्हें तो घोषित रूप में राजा साबू के नजदीक माना/पहचाना जाता है । इसलिए, जितेंद्र ढींगरा सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव में अपने खेमे के होने तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट होने के बावजूद रमेश बजाज को जिस तरह अँधेरे में रखे हुए हैं, उससे मामला कुछ ज्यादा ही रहस्यपूर्ण और विवादपूर्ण हो जाता है ।
जितेंद्र ढींगरा ने ही कुछेक मौकों पर बताया/कहा है कि राजा साबू ने भी उनसे पूछा था कि सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर क्या करना है, जिसके जबाव में जितेंद्र ढींगरा ने उनसे यह कहते हुए पीछा छुड़ाया कि समय आने पर तय करते हैं कि कैसे क्या करना है । जितेंद्र ढींगरा का कहना/बताना था कि यदि पहले से ही सीओएल प्रतिनिधि को लेकर चर्चा शुरू हो जायेगी, तो कई पूर्व गवर्नर उम्मीदवार बन जायेंगे और फिर चुनाव का झमेला खड़ा होगा । हालाँकि कई लोगों का कहना रहा कि चुनाव के झमेले के डर से डिस्ट्रिक्ट के लोगों को उनके अधिकार से वंचित करने का प्रयास क्यों किया जाना चाहिए - और पूर्व गवर्नर्स को उम्मीदवार बनने का तथा क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल करने देना चाहिए । जितेंद्र ढींगरा के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि उनके ही कई नजदीकी सीओएल प्रतिनिधि चयन/चुनाव के मामले में अपनाये गए उनके रवैये से खुश नहीं हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज तो उनके रवैये के चलते अपनी फजीहत होते हुए भी देख रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में कुछेक लोगों को लगता है कि जितेंद्र ढींगरा गुपचुप तरीके से मनमोहन सिंह को सीओएल प्रतिनिधि बनाना/चुनवाना चाहते हैं, और इसलिए ही सारी प्रक्रिया को ढँक कर रखने का काम कर रहे हैं । लोगों को लगता है कि सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर उचित तरीके से प्रक्रिया का पालन यदि किया गया तो जितेंद्र ढींगरा के लिए मनमोहन सिंह को चुनवाना/बनवाना मुश्किल हो जायेगा, और इसीलिए वह ऐसे हालात बना देना चाहते हैं कि चुनाव का मौका ही न बन सके - और मनमोहन सिंह बिना चुनाव का सामना किए ही सीओएल प्रतिनिधि बन जाएँ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज को भी इसीलिए वह सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव जैसे महत्त्वपूर्ण मामले से अलग रखे हुए हैं ।

Friday, March 27, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में कोरोना वायरस से उपजे हालात एक तरफ तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज के लिए 'वरदान' बने हैं, तो दूसरी तरफ राजा साबू के लिए सीओएल के मामले में अपनी दाल गलाने का 'मौका'

पानीपत । कोरोना वायरस की आपदा से निपटने के लिए अपनाई गई लॉकडाउन व कर्फ्यू जैसी देशव्यापी व्यवस्था डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज के लिए वरदान साबित हुई है । दरअसल इस व्यवस्था के चलते अप्रैल के पहले सप्ताह में होने वाले पेट्स कार्यक्रम के स्थगित होने से रमेश बजाज ने बड़ी राहत की साँस ली है । वास्तव में, लॉकडाउन व कर्फ्यू जैसी व्यवस्था के चलते अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स में पेट्स आदि कार्यक्रम स्थगित ही हुए हैं - लेकिन इसके कारण अधिकतर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट उदाश व परेशान ही हुए हैं, क्योंकि अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स में पेट्स की तैयारियाँ काफी हद तक पूरा हो चुकी थीं, और पेट्स के स्थगित होने से न केवल उन तैयारियों पर पानी फिर गया है, बल्कि काफी नुकसान होने के भी अनुमान हैं । ऐसे में, पेट्स के स्थगित होने से एक अकेले रमेश बजाज के 'खुश' होने का कारण यह बताया/सुना जा रहा है कि पेट्स आयोजन को लेकर दरअसल उनकी कोई तैयारी ही नहीं थी । पेट्स की तैयारी को लेकर प्रेसीडेंट्स इलेक्ट के बीच इस बात को लेकर खासा असमंजस रहा था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट की तरफ से उन्हें कोई सूचना और जानकारी ही नहीं मिल रही थी कि पेट्स के संबंध में उन्हें क्या करना है ? प्रेसीडेंट्स इलेक्ट का ही कहना/बताना रहा कि उन्होंने रमेश बजाज और उनके नजदीकियों से भी पेट्स की तैयारी को लेकर पूछताछ की, लेकिन हर कहीं से उन्हें टालमटोल वाले जबाव ही सुनने को मिले । रमेश बजाज के कुछेक नजदीकियों का तो यहाँ तक कहना/बताना रहा कि पेट्स को लेकर क्या तैयारी है, इसका खुद उन्हें ही कुछ पता नहीं है । ऐसे में समझा जाता है कि पेट्स को लेकर रमेश बजाज की वास्तव में कोई तैयारी थी ही नहीं, और वह अभी सोच ही रहे थे कि उन्हें करना क्या है कि लॉकडाउन व कर्फ्यू जैसी व्यवस्था लागू हो गई । जाहिर तौर पर लॉकडाउन व कर्फ्यू की यह व्यवस्था रमेश बजाज के लिए 'वरदान' बन गई । 
पेट्स से पहले एजीटीएस का आयोजन भी रमेश बजाज को रद्द करना पड़ा था, हालाँकि उसके लिए लॉकडाउन या कर्फ्यू जिम्मेदार नहीं था; और उससे भी पहले प्री-पेट्स के आयोजन को लेकर भारी विवाद पैदा हो गया था और उसका हो पाना खतरे में पड़ गया था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने मामला न संभाला होता, तो प्री-पेट्स का आयोजन भी नहीं ही हो पाता । पेट्स का आयोजन भी पहले कुफ्री में होना तय हुआ था, फिर वह कैंसिल हुआ और उसके पंचकुला में होने की बात सुनी गई - उसके बाद पेट्स के बारे में कुछ नहीं सुना गया । कोरोना वायरस दुनिया भर के लोगों के लिए भले ही अभिशाप साबित हो रहा हो, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में पेट्स करने को लेकर रमेश बजाज के लिए यह राहत पहुँचाने वाला साबित हुआ है ।  रमेश बजाज के कुछेक नजदीकियों का कहना है कि उन्हें अपनी टीम के सदस्यों का पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है, इसलिए उनके काम ठीक से संयोजित नहीं हो पा रहे हैं; लेकिन उनकी टीम के ही कुछेक सदस्यों का कहना है कि रमेश बजाज खुद कन्फ्यूज हैं और कार्यक्रमों को लेकर उनके पास कोई योजना या विजन ही नहीं है - और इसलिए उनके आयोजनों को लेकर अनिश्चिता बनी हुई है । मजे की बात यह है कि रमेश बजाज को अपने गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर अरुण शर्मा का ही उचित सहयोग नहीं मिल पा रहा है, हालाँकि अरुण शर्मा की तरफ से सुनने को मिल रहा है कि रमेश बजाज ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर तो बना दिया है - लेकिन अपने कार्यक्रमों को लेकर वह उनसे कोई विचार-विमर्श नहीं कर रहे हैं और न उनसे कोई सलाह ही ले रहे हैं । ऐसे में, लोगों के बीच चर्चा यह है कि रमेश बजाज आखिर सलाह ले किस से रहे हैं ?
डिस्ट्रिक्ट में एक तरफ तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज की आयोजनों को लेकर फजीहत हो रही है, तो दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा की कुछेक गतिविधियों को लेकर खूब वाहवाही हो रही है । लोगों को यह देख/सुन/जान कर और मजा आ रहा है कि जितेंद्र ढींगरा की तारीफ करने में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं । कोरोना से मुकाबले को लेकर जितेंद्र ढींगरा ने सोशल मीडिया में एक संदेश प्रसारित किया, जिसकी राजा साबू ने भरपूर तरीके से तारीफ की - ऐसी तारीफ, जैसी किसी और ने नहीं की । जितेंद्र ढींगरा के नजदीकियों के अनुसार, राजा साबू आजकल जितेंद्र ढींगरा की तारीफ करने के बहाने व मौके ढूँढ़ते रहते हैं - और जैसे ही कोई मौका मिलता है, तड़ से उनकी तरफ कर देते हैं । कोरोना से मुकाबले को लेकर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने भी सोशल मीडिया में दो/एक संदेश प्रसारित किए हैं, लेकिन वह जितेंद्र ढींगरा जैसे खुशकिस्मत नहीं 'दिखे' कि राजा साबू की तारीफ उन्हें भी मिले । अच्छे कामों की तारीफ के मामले में राजा साबू की यह पक्षपातपूर्ण भूमिका दरअसल उनके स्वार्थ से जुड़ी देखी जा रही है । राजा साबू के तौर-तरीकों से परिचित लोगों का कहना/बताना है कि राजा साबू किसी की तब ही तारीफ करते हैं, जब उन्हें अपना कोई काम निकालना होता है - अन्यथा तो वह आदमी को 'आदमी' भी नहीं समझते । समझा जा रहा है कि राजा साबू अपने किसी आदमी को सीओएल के लिए चयनित करवाने के उद्देश्य से जितेंद्र ढींगरा की तारीफों में लगे हुए हैं - उन्हें 'पता' है कि जितेंद्र ढींगरा ही सीओएल के लिए चयन होने/करने में निर्णायक भूमिका निभायेंगे । सीओएल के लिए अभी हालाँकि किसी/किन्हीं नामों की चर्चा नहीं है, पर माना/समझा जा रहा है कि राजा साबू और जितेंद्र ढींगरा की जिस नाम पर सहमति बन जायेगी - वह सीओएल के लिए 'चुन' लिया जायेगा । ऐसे में, मनमोहन सिंह का पलड़ा भारी लग रहा है, क्योंकि एक वही हैं जिनकी दोनों तरफ अच्छी पैठ है । वह हालाँकि सीओएल में एक बार जा चुके हैं, लेकिन इससे क्या होता है - नेता लोग राजी हो जाएँ, तो वह दूसरी बार भी सीओएल में चले जायेंगे !

Monday, February 24, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को मनमानी करने तथा उनकी लूट-खसोट को रोकने में मौजूदा लीडरशिप की असफलता के कारण डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच असमंजसता तथा निराशा फैल रही है

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जुटे रोटेरियंस की विभिन्न मामलों से जुड़ी शिकायतभरी बातों ने लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट की मौजूदा लीडरशिप के खिलाफ बढ़ती नाराजगी के संकेत देने का काम किया है । लोगों की एकतरफा और बड़ी शिकायत यही सुनी गई कि उन्होंने मौजूदा लीडरशिप को यह सोच कर समर्थन दिया था कि इससे उन्हें और डिस्ट्रिक्ट को राजा साबू गिरोह के कुशासन से मुक्ति मिलेगी तथा उनकी मनमानियों व ग्रांट के पैसों की उनकी लूट-खसोट पर रोक लगेगी - लेकिन लग रहा है कि मौजूदा लीडरशिप ने राजा साबू गिरोह के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है और उनके जैसे ही तौर-तरीके अपना लिए हैं । ग्रांट के पैसे राजा साबू गिरोह के लोगों को ही मिल रहे हैं, और उनके ही प्रोजेक्ट हो रहे हैं; डिस्ट्रिक्ट के दूसरे कामकाजों तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाने में भी पहले जैसे ही 'तरीके' अपनाए जा रहे हैं । अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए पहले सहारनपुर से उम्मीदवार आने/लाने की बात हो रही थी, लेकिन फिर अचानक पता चला कि नेताओं ने अरुण मोंगिया को उम्मीदवार बनाने का फैसला कर लिया है । सहारनपुर के रोटेरियंस के साथ-साथ दूसरे रोटेरियंस को भी इस फैसले से झटका लगा । इस झटके के चलते जले-भुने बैठे सहारनपुर के रोटेरियंस से डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में किसी ने पूछ लिया कि आपके यहाँ से कोई उम्मीदवार नहीं आ रहा है क्या ? इस पर उसे सुनने को मिला - अभी हमारा नंबर कहाँ आयेगा ? नेताओं के रवैये को देखते हुए हमें तो लग रहा है कि जब तक काबिल सिंह भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं बन जायेंगे, तब तक हमें तो इंतजार ही करना पड़ेगा ।
मामला सिर्फ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार 'चुनने' का ही नहीं है - बल्कि दूसरे प्रशासनिक व व्यवस्था संबंधी मामलों में भी मनमानी व अराजकता से जुड़ा हुआ है । ग्रांट के लिए आवेदन करने के मामले में सहायता चाहने वाले लोगों को सलाह मिलती है कि मधुकर मल्होत्रा से बात कर लो । यह सलाह पाने वाले लोगों का कहना है कि इनकी राजनीति के चक्कर में तो उन्होंने मधुकर मल्होत्रा से झगड़ा कर लिया, अब वह किस मुँह से मधुकर मल्होत्रा के पास जाएँ । लोगों को लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट के नए लीडरों ने डिस्ट्रिक्ट की राजनीतिक सत्ता पर तो कब्जा कर लिया है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट चलाने तथा रोटरी के काम करने की कोई व्यवस्था नहीं की है - जिसके कारण एक तरफ तो राजा साबू और उनके गिरोह के दूसरे नेताओं ने मौजूदा लीडरों का अपने आगे समर्पण करवा लिया है, और अपने काम बना रहे हैं, और दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट में अराजकता सी पैदा हो रही है । इसे व्यवस्था संबंधी अराजकता का ही संकेत और सुबूत माना/कहा जायेगा कि रोटरी लीडरशिप इंस्टीट्यूट को लेकर लगातार असमंजस बना रहा है, जिसके चलते पहले तय की गई फैकल्टी बिदक गई और अब जब उक्त इंस्टीट्यूट का कार्यक्रम तय हुआ है, तब जैसे तैसे अन्य फैकल्टीज की व्यवस्था की गई है । फैसले करने में होने वाली देर/दार के कारण डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित किए गए स्पीकर्स भी लोगों को आकर्षित व प्रभावित नहीं कर सके और स्पीकर्स को लेकर लोगों के बीच असंतोष बना/रहा । 
लोगों को लग रहा है कि फैसलों में लेटलतीफी होने तथा असमंजस रहने का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज का गवर्नर-वर्ष और ज्यादा शिकार होने जा रहा है । रमेश बजाज के पेट्स कार्यक्रम को लेकर जो तमाशा देखने को मिल रहा है, उससे संकेत मिल रहा है कि रमेश बजाज के गवर्नर-वर्ष के कार्यक्रम तो बस राम-भरोसे ही रहने हैं । उल्लेखनीय है कि पेट्स का आयोजन पहले कुफरी में होना निश्चित हुआ था, लेकिन फिर उसे पंचकुला में करने का फैसला हुआ । रमेश बजाज के नजदीकियों के अनुसार ही, कुफरी में पेट्स के आयोजन में खर्चा ज्यादा हो रहा था, इसलिए वहाँ आयोजन करने का इरादा छोड़ दिया गया । खर्चे को लेकर हालाँकि समस्या के अभी भी अटके/फँसे होने की चर्चा है । रमेश बजाज यह सोच सोच कर परेशान बताये जा रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट एकाउंट से जितने/जो पैसे मिलेंगे, उतने में तो पेट्स का खर्चा निपटेगा नहीं - तो बाकी खर्चा कहाँ से और कैसे पूरा होगा ? डिस्ट्रिक्ट में जोन बनाने को लेकर भी रमेश बजाज और उनके सहयोगी गफलत में हैं और किसी अंतिम फैसले पर पहुँचने को लेकर असमंजस में हैं । रमेश बजाज ने अपने असिस्टेंट गवर्नर्स से सहायता न मिलने को लेकर शिकायतें करना अभी से शुरू कर दिया है । उनका कहना है कि 'राजनीतिक मजबूरियों' के चलते वह ऐसे लोगों को असिस्टेंट गवर्नर्स बनाने के लिए मजबूर हुए हैं, जो डिस्ट्रिक्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी मदद करने में सर्वथा अनुपयुक्त हैं । इस तरह की बातों से लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट की मौजूदा लीडरशिप डिस्ट्रिक्ट में हुए बड़े राजनीतिक बदलाव से जुड़ी लोगों की उम्मीदों को पूरा कर पाने में विफल हो रही है, जिसके कारण राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को मनमानी करने तथा लूट-खसोट बनाये रखने का मौका मिल रहा है तथा डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच असमंजसता तथा निराशा फैल रही है ।

Wednesday, November 6, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज द्वारा रोटरी क्लब पोंटा साहिब के पदाधिकारियों को विश्वास में लिए बिना प्री-पेट्स के आयोजन की जिम्मेदारी क्लब को सौंपने की कार्रवाई से पैदा हुई नाराजगी ने रमेश बजाज के पहले ही आयोजन को मुसीबत में फँसाया

पोंटा साहिब । रोटरी क्लब पोंटा साहिब के पदाधिकारियों के विरोधी रवैये के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज का प्री-पेट्स कार्यक्रम मुसीबत में फँस गया है, जिससे 'निकलने' के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा को मदद के लिए पुकारा जा रहा है । क्लब के पदाधिकारियों का कहना है कि प्री-पेट्स कार्यक्रम उनका क्लब कर रहा है, और यह बात उन्हें ही नहीं पता है - और यह बात उन्हें दूसरे लोगों से पता चल रही है । उनका कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज इस तरह की 'बेईमानी' भला कैसे कर सकते हैं कि उनसे पूछे बिना, उन्हें बताये बिना उनके क्लब पर अपना कार्यक्रम करने की जिम्मेदारी थोप दें । क्लब के पदाधिकारियों से यह सब सुन कर डिस्ट्रिक्ट के लोगों को कहने का मौका मिला है कि लगता है कि रमेश बजाज उसी रास्ते पर चल पड़े हैं, जिस रास्ते पर चलते हुए राजा साबू खेमे के नेता डिस्ट्रिक्ट के लोगों से दूर हुए और फिर राजनीतिक व प्रशासनिक व्यवस्था में अलग-थलग पड़े हैं । लोगों को लग रहा है कि रमेश बजाज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी पर पहुँचे तो हैं राजा साबू खेमे की विरोधी राजनीति पर सवार होकर; लेकिन उनके रंग-ढंग राजा साबू खेमे के नेताओं जैसे हैं, जिसमें क्लब के पदाधिकारियों को विश्वास में लिए बिना मनमानी करते/दिखाते हुए काम किए जाते हैं । लोगों का कहना है कि रमेश बजाज को यदि रोटरी क्लब पोंटा साहिब को प्री-पेट्स की जिम्मेदारी सौंपनी थी, तो क्लब के पदाधिकारियों से तो इस बारे में बात करना ही चाहिए थी ।
मजे की बात है कि रमेश बजाज के कुछेक नजदीकी इस झमेले के लिए रमेश बजाज के गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर अरुण शर्मा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । अरुण शर्मा रोटरी क्लब पोंटा साहिब के सदस्य और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं । रमेश बजाज के नजदीकियों का कहना/बताना है कि रमेश बजाज ने तो प्री-पेट्स के आयोजन की जिम्मेदारी अरुण शर्मा को सौंप दी थी, और अरुण शर्मा ने अपने क्लब को आयोजक बना लिया । अपने क्लब को आयोजक बनाते हुए अरुण शर्मा ने किससे पूछा और किससे नहीं पूछा, इस बारे में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज को कुछ नहीं पता है । उल्लेखनीय है कि अरुण शर्मा की रोटरी ट्रेनिंग 'राजा साबू स्कूल' में हुई है, जिसके सिलेबस में मनमानी करना तथा अधिकृत पदाधिकारियों की उपेक्षा करना तथा उन्हें अपमानित करना मुख्य विषय है । विषय में विशेषज्ञता रखने के कारण ही संभवतः अरुण शर्मा ने आयोजन की जिम्मेदारी सौंपते समय क्लब के पदाधिकारियों को विश्वास में लेना जरूरी नहीं समझा होगा, जिसे देख/जान कर क्लब के पदाधिकारी भड़क गए हैं और प्री-पेट्स कार्यक्रम मुसीबत में फँस गया है । दूसरे कई लोगों का कहना लेकिन यह है कि रोटरी क्लब पोंटा साहिब के पदाधिकारियों की नाराजगी से पैदा हुए हालात का ठीकरा रमेश बजाज भले ही अरुण शर्मा के सिर फोड़ने का प्रयास कर रहे हों, किंतु जो हुआ - उसके लिए रमेश बजाज भी कोई कम जिम्मेदार नहीं हैं । लोगों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का 'ताज' जब रमेश बजाज पहनेंगे, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की जिम्मेदारियाँ भी उन्हें ही निभानी/लेनी होंगी । जिम्मेदारियाँ दूसरों के सिर मढ़ कर बचने की उनकी कोशिश स्वीकार नहीं होगी ।
समस्या दरअसल यह है कि अब जो लोग डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बन रहे हैं, वह 'राजा साबू स्कूल' में ट्रेनिंग पाए हुए लोग हैं, जिनके तौर-तरीके लोगों को भड़का देते हैं । मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर मनमोहन सिंह के कुछेक फैसलों के चलते जितेंद्र ढींगरा को कई मौकों पर अपने ही समर्थकों के बीच परेशानी का सामना करना पड़ा है । एक कार्यक्रम में जितेंद्र ढींगरा को अँधेरे में रख कर मनमोहन सिंह ने यशपाल दास को आमंत्रित कर लिया; जितेंद्र ढींगरा के नजदीकियों ने उनसे पूछा, तो जितेंद्र ढींगरा से जबाव देते हुए नहीं बना । अन्य कुछेक मौकों पर मनमोहन सिंह को राजा साबू खेमे के लिए 'खेलते' हुए देखा/पाया गया, जिस पर जितेंद्र ढींगरा को अपने ही लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा । अरुण शर्मा के कारण रमेश बजाज जिस तरह से अपने पहले ही कार्यक्रम में मुसीबत में फँस गए हैं, उसे देखते हुए लोगों को लग रहा है कि जितेंद्र ढींगरा की तुलना में रमेश बजाज को ज्यादा मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है । उल्लेखनीय है कि रमेश बजाज के कई नजदीकियों ने उन्हें अरुण शर्मा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर न बनाने का सुझाव दिया था, और बहुत दिनों तक लगता रहा था कि रमेश बजाज अपने नजदीकियों की सुन/मान रहे हैं; लेकिन अंततः रमेश बजाज ने अपने नजदीकियों के सुझाव को दरकिनार करके अरुण शर्मा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर घोषित कर दिया - जिससे उनके कई नजदीकी खफा हुए हैं । रमेश बजाज के कुछेक नजदीकियों को तो लगता है कि पहले मनमोहन सिंह के जरिये, और अब अरुण शर्मा के जरिये राजा साबू खेमे के नेता सत्ता खेमे में असंतोष पैदा करके फूट डालने का प्रयास कर रहे हैं । रमेश बजाज अपने पहले ही कार्यक्रम को लेकर जिस तरह की मुसीबत में फँस गए हैं, उम्मीद है कि उसे तो जितेंद्र ढींगरा की कोशिशों से हल कर लिया जायेगा - लेकिन इस मामले से यह साफ संकेत मिला है कि रमेश बजाज ने यदि अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई/देखी और अरुण शर्मा पर ही निर्भर रहे, तो बार-बार मुसीबत में फँसेंगे तथा सत्ता खेमे के लोगों के बीच असंतोष व नाराजगी पैदा करेंगे । 

Monday, July 8, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के इंस्टॉलेशन समारोह में 'बिन बुलाए' आए यश पाल दास को मिली तवज्जो तथा शाजु पीटर व जेपीएस सिबिया की मौजूदगी को डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में राजा साबू गिरोह की वापसी करने की तैयारी के संकेतों के रूप में देखा जा रहा है

चंडीगढ़ । जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में राजेंद्र उर्फ राजा साबू के साथ-साथ उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स की उपस्थिति ने डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का सर चकराने का काम किया है । उल्लेखनीय है कि जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रमों में राजा साबू तो आते रहे हैं; लेकिन यश पाल दास, शाजु पीटर, जेपीएस सिबिया जैसे उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स कभी नहीं दिखे हैं । इसीलिए इनकी उपस्थिति पर लोगों को हैरानी हुई और फुसफुसाहटें शुरू हुईं कि यह लोग कैसे आ गए ? इन पूर्व गवर्नर्स का आरोप रहा है कि जितेंद्र ढींगरा ने इन्हें कभी अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित ही नहीं किया । पिछले एक कार्यक्रम में कुछेक लोगों के सामने राजा साबू ने जितेंद्र ढींगरा से यह शिकायत करते हुए उन्हें सुझाव दिया था कि वह इन पूर्व गवर्नर्स को भी आमंत्रित किया करें । समझा गया कि राजा साबू के सुझाव पर जितेंद्र ढींगरा ने इन पूर्व गवर्नर्स को भी आमंत्रित कर लिया होगा, और इसलिए यह जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रम में आ पहुँचे । जितेंद्र ढींगरा ने लेकिन कई मौकों पर अलग अलग लोगों के सामने स्पष्ट कहा कि उन्होंने इन्हें 'खासतौर' से नहीं आमंत्रित किया था । जितेंद्र ढींगरा का कहना रहा कि उन्होंने तो पहले की तरह ही सभी के लिए एक आम निमंत्रण भेजा था - पहले यह उस निमंत्रण को निमंत्रण नहीं मानते थे, लेकिन अब की बार उन्होंने मान लिया; तो इस बदले हुए रवैये का कारण वही जानते होंगे । दरअसल पिछले करीब तीन वर्षों में डिस्ट्रिक्ट में जो राजनीतिक व प्रशासनिक गंद मचा रहा, उसके लिए राजा साबू के इन तीन नजदीकी पूर्व गवर्नर्स को ही मुख्य रूप से जिम्मेदार माना/ठहराया जाता रहा है । इसीलिए पहले टीके रूबी के गवर्नर-वर्ष में इन्हें कोई तवज्जो नहीं मिली, और अब जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-वर्ष में भी इनके साथ वैसा ही सुलूक होने की उम्मीद की जा रही थी । इसीलिए लोगों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट में अपना 'वनवास' खत्म करने के लिए ही राजा साबू के नजदीकी पूर्व गवर्नर्स यश पाल दास, शाजु पीटर और जेपीएस सिबिया 'बिन बुलाए' ही जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रम में आ पहुँचे ।
दरअसल राजा साबू और उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट की प्रशासनिक व्यवस्था व राजनीति में पुनर्वापसी के लिए लगातार हाथ-पैर मार रहे हैं । अपनी पुनर्वापसी का विश्वास उन्हें मौजूदा व भावी गवर्नर्स - जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के 'व्यवहार' से भी हुआ । इन तीनों के 'व्यवहार' से राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स को लगा कि यह तीनों उनके नजदीक आना/रहना चाहते हैं । राजा साबू के नजदीकी मनमोहन सिंह को जितेंद्र ढींगरा द्वारा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाए जाने से राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स का पुनर्वापसी का हौंसला और बढ़ा । राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स लेकिन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के प्रति अपनी खुन्नस को नहीं छोड़ पाए और उन्हें लगा कि जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के ढीले-ढाले रवैये में वह टीके रूबी को निशाना बना लेंगे । इसी के तहत अभी हाल तक, राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने टीके रूबी के डीआरएफसी (डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन) बनने में अड़चनें डालने के प्रयास किए । इन प्रयासों पर लेकिन जितेंद्र ढींगरा के कड़ा रवैया अपनाने से पानी फिर गया । जितेंद्र ढींगरा के 'कभी नर्म तो कभी गर्म' रहने पर राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को इतना तो शायद समझ में आ गया है कि जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के साथ उनके नजदीक तो आ सकते हैं - लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह तीनों उन्हें टीके रूबी के साथ 'बदतमीजी' करने का मौका दे देंगे । माना/समझा जा रहा है कि इसीलिए राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने अब यह योजना बनाई है कि तवज्जो न दिए जाने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में उन्हें अपनी उपस्थिति बनानी और 'दिखानी' चाहिए; इससे वह सत्ता में न होते हुए भी मेडीकल मिशन जैसे अपने स्वार्थी 'काम' बना सकेंगे - और इसीलिए यश पाल दास, शाजु पीटर व जेपीएस सीबिया 'बिन बुलाए' ही जितेंद्र ढींगरा के इंस्टॉलेशन कार्यक्रम में आ पहुँचे ।
दरअसल राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में शामिल होकर वह एक तरफ तो अपने 'काम' बनाने/निकालने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट के लोगों को यह संकेत दे सकते हैं कि जितेंद्र ढींगरा और उनके साथियों ने उनके साथ नजदीकी बनाना शुरू कर दिया है और इसीलिए वह उन्हें अपने कार्यक्रमों में शामिल कर रहे हैं; और दूसरी तरफ वह विभिन्न मुद्दों पर अपनी अलग राय रख कर वह जितेंद्र ढींगरा और उनके साथियों के बीच खटराग पैदा करने का मौका पा सकते हैं । राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत हुई नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी के मामले में अपनी अलग राय देकर अपने इरादे जाहिर भी कर दिए हैं । खुद राजा साबू ने जितेंद्र ढींगरा को सलाह दी है कि इस वर्ष किसी महिला को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुना जाना चाहिए । इस सलाह के जरिए राजा साबू ने वास्तव में नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को विवादास्पद बनाने का दाँव चला है । जितेंद्र ढींगरा ने हालाँकि अभी तो नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी पर कोई 'समझौता' करने से इंकार कर दिया है; लेकिन कौन जानता है कि राजा साबू ने जो दाँव चला है, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में टीके रूबी व जितेंद्र ढींगरा की जो धाक जमी है, वह बिखर न जाए ! जितेंद्र ढींगरा के कई एक नजदीकियों का कहना है कि उन्हें यह बात समझ नहीं आती है कि जितेंद्र ढींगरा जब यह मानते हैं और कहते भी रहते हैं कि राजा साबू और उनके संगी-साथी अपनी 'हरकतों' से बाज नहीं आयेंगे, तब फिर वह उन्हें तवज्जो देते हुए हरकतें करने का मौका क्यों दे रहे हैं ? पिछले तीन वर्षों में राजा साबू और उनके गिरोह के साथ छिड़ी लड़ाई में टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा का लगातार साथ देने वाले कई लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति और व्यवस्था में राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को जब पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है, तब फिर उन्हें किसी भी तरह की तवज्जो देकर उनके लिए वापसी का रास्ता क्यों तैयार किया जा रहा है ? डिस्ट्रिक्ट के कई लोग इंस्टॉलेशन कार्यक्रम में यश पाल दास को मिली तवज्जो तथा शाजु पीटर व जेपीएस सिबिया की मौजूदगी को पिछले तीन वर्षों की 'लड़ाई' में मिली जीत पर पानी फिरने की शुरुआत के रूप में भी देख/पहचान रहे हैं ।

Monday, August 6, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा को अलग-थलग रखने/करने की कोशिशों में लगे राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को मनमोहन सिंह का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना हजम नहीं हो पा रहा है

चंडीगढ़ । मनमोहन सिंह का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार करने से राजेंद्र उर्फ राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स बुरी तरह नाराज हैं । दरअसल उन्हें लग रहा है कि इससे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के सामने उनके बीच फूट पड़ने और उनके खेमे के बिखरने का संदेश जा रहा है, जिसके चलते उनके लिए डिस्ट्रिक्ट की व्यवस्था और राजनीति में बने/टिके रहना मुश्किल ही हो जायेगा । उल्लेखनीय है कि राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स अभी हाल तक कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में अपनी एकता बनाए रखे हुए थे, जिसके चलते निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी अलग-थलग से पड़ते नजर आते थे - और इस 'एकता' के भरोसे उन्होंने टीके रूबी को दबाव में लेने/रखने की कोशिश की, और कुछेक मामलों में वह कामयाब भी हुए । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स की साख भले ही धूल चाटने लगी हो, लेकिन कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में अपनी एकता के भरोसे वह काफी मनमानियाँ कर ले रहे थे । इसीलिए कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में अपनी एकता बनाए रखना उन्हें जरूरी लगता रहा है । इसी संदर्भ में राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को मनमोहन सिंह के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनने में कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की एकता के लिए खतरे की घंटी बजती 'सुनाई' दे रही है । 
कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की एकता पर खतरे का साया हालाँकि पहली बार तब पड़ा दिखा था, जब पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अरुण शर्मा ने पिछले वर्ष हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में नोमीनेटिंग कमेटी में फैसले को अनिर्णीत छोड़ देने के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के 'दबावपूर्ण' सुझाव को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था । मधुकर मल्होत्रा के जरिये राजा साबू खेमे ने दरअसल कोशिश यह की थी कि नोमीनेटिंग कमेटी में अधिकृत उम्मीदवार को लेकर फैसला नहीं हो पायेगा तो रमेश बजाज आसानी से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी नहीं चुने जा पायेंगे । अरुण शर्मा भी हालाँकि राजा साबू खेमे के ही सदस्य के रूप में देखे जाते हैं, लेकिन राजा साबू गिरोह की राजनीति का साथ देने से उन्होंने इंकार कर दिया और उनके सख्त रवैये के कारण ही रमेश बजाज अधिकृत उम्मीदवार चुने जा सके - और फिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी घोषित हुए । अरुण शर्मा के रवैये से डिस्ट्रिक्ट में लोगों को यह समझने में देर नहीं लगी कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में राजा साबू की राजनीति और मनमानियों को जो समर्थन 'दिखता' है, वह मजबूरी का और विकल्पहीनता के चलते पैदा होने वाला समर्थन है - और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में कई सदस्य हैं जो मौका मिलने पर राजा साबू की मनमानियों का विरोध कर सकते हैं । अरुण शर्मा को मौका मिला, और उन्होंने राजा साबू गिरोह की गंदी राजनीति का सहभागी बनने से साफ इंकार कर दिया । अरुण शर्मा के रवैये से मिले झटके के बाद, मनमोहन सिंह ने जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार करके राजा साबू गिरोह को उससे भी बड़ा झटका दिया है ।
राजा साबू गिरोह की कोशिश दरअसल जितेंद्र ढींगरा को अलग-थलग करने की है, जिसके तहत उन्हें डिस्ट्रिक्ट के जरूरी कामों/कार्यक्रमों से भी दूर रखने की कोशिश की गई है । पिछले दिनों इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट भरत पांड्या का डिस्ट्रिक्ट में स्वागत कार्यक्रम हुआ, जिसके बारे में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी रमेश बजाज को अधिकृत रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई, और इस तरह उन्हें उक्त कार्यक्रम से दूर रखने की कोशिश की गई । हालाँकि भरत पांड्या की सदाश्यता और होशियारी ने राजा साबू और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल की इस टुच्ची हरकत को सफल नहीं होने दिया और अपनी तरफ से पहल करके उन दोनों को कार्यक्रम का निमंत्रण दिलवाया । भरत पांड्या के हस्तक्षेप के बाद राजा साबू की शह के चलते जितेंद्र ढींगरा और रमेश बजाज को निमंत्रण देने से बच रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल उन्हें कार्यक्रम में निमंत्रित करने के लिए मजबूर हुए । डिस्ट्रिक्ट में रोटरी फाउंडेशन से जुड़े खर्चों में राजा साबू की मनमानी चलती रहे, इसके लिए रोटरी फाउंडेशन से संबद्ध डिस्ट्रिक्ट क़्वालीफिकेशन मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा को शामिल करने से बचा जा रहा है । ऐसे में, राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को यह देख कर झटका लगा है कि एक तरफ तो वह जितेंद्र ढींगरा को अलग-थलग करने/रखने का प्रयास कर रहे हैं, और दूसरी तरफ उनके ही एक साथी मनमोहन सिंह ने जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार कर लिया है । राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के लिए झटके वाली बात दरअसल यह है कि जब से यह चर्चा फैली कि जितेंद्र ढींगरा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद के लिए मनमोहन सिंह को राजी करने का प्रयास कर रहे हैं, तभी से राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने तरह तरह से संदेश भेज कर मनमोहन सिंह को आगाह किया था कि वह जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल में ड्रिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार न करें - लेकिन मनमोहन सिंह ने उनकी लेकिन एक न सुनी और डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बन गए । 
राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को डर है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के दूसरे सदस्य भी यदि अरुण शर्मा और मनमोहन सिंह के 'रास्ते' पर चल पड़े, तो कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में उनके लिए मनमानी करना मुश्किल क्या - असंभव ही हो जायेगा और तब डिस्ट्रिक्ट पूरी तरह से उनके हाथ से निकल जायेगा । इसी डर के कारण मनमोहन सिंह का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना राजा साबू और उनके गिरोह के गवर्नर्स को हजम नहीं हो पा रहा है ।

Thursday, May 17, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में रमेश बजाज के फेलिसिटेशन कार्यक्रम में लोगों की तरफ से अजय मदान को अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार बनाने की उठी माँग ने राजा साबू गिरोह के सामने अपना अस्तित्व बचाने की चुनौती पेश की

पानीपत । पानीपत में आज आयोजित हुए रमेश बजाज के फेलिसिटेशन कार्यक्रम में डिस्ट्रिक्ट के कई क्लब्स का प्रतिनिधित्व करते जुटे लोगों ने अजय मदान को अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार बनाने की जो माँग रखी, उसमें राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के साथ बड़ा क्रूर मजाक होता हुआ नजर आया । दरअसल जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज, अजय मदान उन बारह रोटेरियंस में हैं, जिन्हें करीब दो/ढाई वर्ष पहले राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के निशाने पर रहे टीके रूबी के पक्ष में हुई एक मीटिंग में शामिल होने के 'अपराध' में राजा साबू के निर्देश पर डिस्ट्रिक्ट टीम में मिले उनके पदों से हटा दिया गया था । राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स पूरी ताकत लगा लेने/देने के बावजूद टीके रूबी का तो कुछ नहीं ही बिगाड़ पाए, टीके रूबी का साथ देने वाले जितेंद्र ढींगरा और रमेश बजाज को भी गवर्नर चुने जाने से नहीं रोक पाए । राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के लिए फजीहत का सिलसिला जारी रखते हुए डिस्ट्रिक्ट के लोगों ने अब अजय मदान को गवर्नर के रूप में 'चुनने' का ऐलान और कर दिया है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच मजाक में कही जा रही यह बात अब सीरियसली ली जाने लगी है कि टीके रूबी का साथ देने के लिए राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने जिन बारह रोटेरियंस को डिस्ट्रिक्ट टीम के पदों से हटवाया था, वह एक एक करके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनेंगे - और राजा साबू तथा उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स लाख कोशिशों के बावजूद कुछ नहीं कर पायेंगे । टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा के बाद, रमेश बजाज के मामले में भी राजा साबू तथा उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की इस बेचारगी को देखा गया है ।
रमेश बजाज को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने से रोकने के लिए राजा साबू तथा उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने हर मौके पर प्रयास किया, लेकिन हर मौके पर उन्हें मुँहकी ही खानी पड़ी । नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग में रमेश बजाज को अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने से रोकने के लिए पूर्व गवर्नर मधुकर मल्होत्रा ने हर हथकंडा आजमाया, लेकिन नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्यों ने उनकी किसी भी चालबाजी को कामयाब नहीं होने दिया । राजा साबू गिरोह के लिए झटके की दूसरी बात यह रही कि कपिल गुप्ता ने उन पर भरोसा करने से इंकार कर दिया, और उनके भरोसे अधिकृत उम्मीदवार के रूप में रमेश बजाज को चेलैंज करने की प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए । कपिल गुप्ता ने जान/समझ लिया कि राजा साबू गिरोह के झाँसे में फँस कर वह अपनी फजीहत ही करवायेंगे, सो उन्होंने सदाशयता दिखाते हुए नोमीनेटिंग कमेटी के फैसले को स्वीकार करते हुए अपने आप को राजा साबू गिरोह की गंदी राजनीति से दूर कर लिया । राजा साबू गिरोह ने तब सुरेश सबलोक के कंधे पर अपनी राजनीति का बोझ टिकाया । सुरेश सबलोक से उन्होंने चेलैंज तो करवा दिया, और कुछेक पूर्व गवर्नर्स उनके चेलैंज को स्वीकृत करवाने के लिए क्लब्स का समर्थन जुटाने में भी लगे - लेकिन वह खुद पर ही भरोसा नहीं कर सके, और इस कारण राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने अपने अपने क्लब का समर्थन सुरेश सबलोक को नहीं दिया/दिलवाया । राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने दूसरे क्लब्स के पदाधिकारियों से तरह तरह के झूठ बोल कर और उन्हें झाँसा देकर उनका समर्थन जुटाने का भरसक प्रयास तो किया, लेकिन पर्याप्त क्लब्स का समर्थन जुटाने में वह फेल हो गए - और इस तरह सुरेश सबलोक का चेलैंज स्वतः ही निरस्त हो गया और रमेश बजाज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी घोषित हो गए ।
राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स इसके बाद भी अपनी चालबाजियों से लेकिन बाज नहीं आए । उन्होंने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच प्रचारित किया कि वह सुरेश सबलोक की तरफ से रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत करवायेंगे कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी ने बेईमानीपूर्ण तरीके से सुरेश सबलोक के चेलैंज को निरस्त किया है । सुरेश सबलोक के क्लब की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय को इस संबंध में शिकायती पत्र भेज भी दिया गया । राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने इस बीच एक और हरकत की, जिसके तहत उन्होंने कोशिश की कि प्रेसीडेंट्स इलेक्ट व सेक्रेटरीज इलेक्ट सेमीनार में रमेश बजाज का फेलिसिटेशन न हो । तर्क दिया गया कि चूँकि रमेश बजाज के चुने जाने की रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत हो सकती है, इसलिए अभी उनका फेलिसिटेशन करना उचित नहीं होगा । यह तर्क लेकिन रमेश बजाज के समर्थकों के तर्क के सामने टिक नहीं सका, जिनका कहना रहा कि आगे क्या होगा यह आगे देखा जायेगा, आज का सच यह है कि रमेश बजाज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी हैं और इस सच्चाई को अभी कोई चेलैंज नहीं है - इसलिए उनका फेलिसिटेशन होना चाहिए । इस तर्क पर निरुत्तर होने के बावजूद राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स मनमानी करना तो चाहते थे, लेकिन सेमीनार में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम की उपस्थिति को देखते हुए उनकी मनमानी करने की हिम्मत हुई नहीं - और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के विजेता के रूप में वह रमेश बजाज का फेलिसिटेशन करने के लिए मजबूर हुए । राजा साबू गिरोह के लिए सबसे बड़े झटके की बात यह रही कि सुरेश सबलोक की तरफ से रोटरी इंटरनेशनल में जो शिकायत दर्ज करने/करवाने की तैयारी की जा रही थी, उसके लिए तय समय सीमा के भीतर जरूरी संख्या के क्लब्स का समर्थन नहीं जुटाया जा सका - और इस तरह रमेश बजाज के रास्ते में खड़ी की जा सकने वाली अंतिम बाधा का मौका भी राजा साबू गिरोह से छूट/छिन गया ।
सभी बाधाओं से मुक्त होने के बाद, रमेश बजाज के समर्थकों व शुभचिंतकों ने पानीपत में आज उनका जोरदार तरीके से फेलिसिटेशन किया । कार्यक्रम में मौजूद डिस्ट्रिक्ट के क्लब्स के प्रतिनिधियों का उत्साह देखने लायक था । वरिष्ठ रोटेरियंस का कहना रहा कि इस तरह का स्वागत समारोह तो टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा का भी नहीं हो सका था । टीके रूबी की जीत में तो राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने मट्ठा डालने की हर संभव कोशिश की ही थी, जितेंद्र ढींगरा और रमेश बजाज की जीत को भी वह आसानी से हजम नहीं कर सके - लेकिन डिस्ट्रिक्ट के लोगों का इन्हें जो समर्थन और सहयोग मिला है, वह राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के लिए एक कड़ा संदेश है । इस संदेश को और कड़ा करने का काम डिस्ट्रिक्ट के लोगों ने अजय मदान को अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार बनाने की माँग करके किया है । अजय मदान के अगले रोटरी वर्ष में उम्मीदवार हो सकने की चर्चा तो हालाँकि पहले से थी, लेकिन अजय मदान अपनी निजी व्यस्तता का वास्ता देकर 'बचने' की कोशिश करते सुने जा रहे थे । पर अब जब डिस्ट्रिक्ट के लोगों की तरफ से ही माँग उठी है, तो माना/समझा जा रहा है कि अजय मदान को उम्मीदवार बनने के लिए राजी कर ही लिया जायेगा । इन घटनाओं से जाहिर है कि राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट में पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं, और डिस्ट्रिक्ट में उनकी भूमिका नकारात्मक किस्म के टुच्चे षड्यंत्र करने और उनमें फेल होते रहने तक ही बची रह गई है । इसी से जुड़ी एक खास बात आज पानीपत में हुए रमेश बजाज के फेलिसिटेशन कार्यक्रम में देखने को मिली, और वह यह कि पानीपत में रह रहे तीन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रंजीत भाटिया, प्रमोद विज और रमन अनेजा निमंत्रण पाने के बावजूद कार्यक्रम में शामिल होने का साहस नहीं दिखा सके ।

Monday, April 30, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 के प्रेसीडेंट्स इलेक्ट सेमीनार में इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम के कड़े तेवरों से सुरेश सबलोक को मोहरा बना कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को घेरने/फँसाने की चली राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की चाल एक बार फिर फेल हुई

चंडीगढ़ । प्रेसीडेंट्स इलेक्ट व सेक्रेटरीज इलेक्ट सेमीनार में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए और पधारे इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम के कड़े तेवर देख कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल ने वर्ष 2020-21 के लिए चुने गए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज को बधाई देने का कार्यक्रम करने में ही भलाई देखी/पहचानी । राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के इशारे पर प्रवीन गोयल पहले रमेश बजाज को बधाई देने/दिलवाने का कार्यक्रम करवाने में आनाकानी कर रहे थे । दरअसल राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स अभी भी रमेश बजाज की जीत की घोषणा को हजम नहीं कर पा रहे हैं । प्रेम भल्ला, शाजु पीटर, जेपीएस सिबिआ, रंजीत भाटिया, रमन अनेजा आदि पूर्व गवर्नर्स ने बासकर चॉकलिंगम से मिलकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी की शिकायत की कि उन्होंने चैलेंजिंग उम्मीदवार सुरेश सबलोक के पक्ष में आईं कॉन्करेंस की संख्या को जानबूझ कर कम दिखा कर मनमाने तरीके से रमेश बजाज को विजेता घोषित कर दिया है । बासकर चॉकलिंगम ने लेकिन उन्हें यह जानकारी देते हुए उनका मुँह बंद कर दिया कि टीके रूबी लगातार उन्हें और दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस को तथ्यों से अवगत कराते रहे हैं और उन्होंने जो भी फैसला लिया, वह उनसे विचार-विमर्श करके ही लिया है । इन पूर्व गवर्नर्स ने बासकर चॉकलिंगम के सामने धमकी वाले अंदाज में यह बात भी कही कि इस मामले में यदि अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो सुरेश सबलोक रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत करेंगे । बासकर चॉकलिंगम ने भी उन्हें टका सा जबाव दे दिया कि मेरे हिसाब से टीके रूबी ने जो किया है, वह ठीक किया है - अब इसके बाद जिसे जो करना है, वह करे । बासकर चॉकलिंगम द्वारा मौजूदा लीडर्स के साथ खिंचवाई जा रही तस्वीर में रमेश बजाज को भी शामिल किए जाने का दृश्य देख कर राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स पीछे हटने के लिए मजबूर हुए और प्रवीन गोयल को भी 'संदेश' मिल गया कि रमेश बजाज को विजेता मानने में ही उनकी भलाई है; और फिर रमेश बजाज के लिए बधाई देने/दिलवाने वाला कार्यक्रम करवाने को लेकर आनाकानी करने वाला रवैया उन्होंने छोड़ा और प्रेसीडेंट्स इलेक्ट व सेक्रेटरीज इलेक्ट सेमीनार में उन्होंने वर्ष 2020-21 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमेश बजाज का स्वागत किया/करवाया ।
बासकर चॉकलिंगम के कड़े तेवर देख कर राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स अभी भले ही पीछे हटने के लिए मजबूर हुए हैं; लेकिन लोगों को आशंका है कि अपनी घटिया व टुच्ची सोच को वह आसानी से छोड़ेंगे नहीं और कुछ न कुछ बबाल खड़ा करेंगे ही । मजे की बात यह है कि उनके द्वारा किए जाने वाले संभावित बबाल का वास्ता देकर सुरेश सबलोक टीके रूबी वाले खेमे के नेताओं के साथ सौदेबाजी करने लगे हैं । सुरेश सबलोक ऑफर दे रहे हैं कि टीके रूबी वाले खेमे के नेता अगले वर्ष में उन्हें यदि अपना उम्मीदवार बना/मान लेने का आश्वासन दें, तो वह राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के हाथों का खिलौना नहीं बनेंगे और उनकी बात नहीं मानेंगे और इस बार अपनी हार स्वीकार कर लेंगे और चुप बैठेंगे । टीके रूबी वाले खेमे के नेता लोग लेकिन सुरेश सबलोक के इस ऑफर में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं । उनका मानना/कहना है कि सुरेश सबलोक यदि उनकी बाँह मरोड़ कर अपनी उम्मीदवारी के लिए उनका समर्थन चाह रहे हैं, तो यह तो नहीं हो पायेगा । सुरेश सबलोक यदि दोस्तों की तरह साथ आएँ तो अगले दो-तीन वर्षों में गवर्नर चुन लिए जा सकेंगे - लेकिन इसके लिए कोई सौदेबाजी नहीं की जा सकती है । टीके रूबी वाले खेमे के नेताओं का कहना है कि सुरेश सबलोक सौदेबाजी फलीभूत न होने की स्थिति में यदि डीसी बंसल वाले 'रास्ते' पर ही जाना चाहते हैं, तो फिर उन्हें कौन रोक सकता है ? राजा साबू गिरोह के चक्कर में फँस कर डीसी बंसल को अपना रोटरी जीवन बर्बाद करने से जब कोई नहीं रोक पाया, तो सुरेश सबलोक को भी कोई नहीं रोक पायेगा ।
ऐसे में, सभी की निगाह इस बात पर है कि सुरेश सबलोक एक सच्चे रोटेरियन की तरह क्या इस सच्चाई को स्वीकार करेंगे कि वह निर्धारित समय तक अपने चैलेंज के लिए जरूरी कॉन्करेंस की व्यवस्था करने में असफल रहे हैं और इस तरह इस वर्ष की चुनावी लड़ाई को हार चुके हैं; और या राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की बबाल पैदा करने वाली राजनीति का 'मोहरा' बनेंगे । उनके नजदीकियों की मानें तो सुरेश सबलोक इस बात को जान/समझ तो रहे हैं कि राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स उन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन कहीं न कहीं उन्हें यह भी लग रहा है कि इस तरह इस्तेमाल होकर ही वह टीके रूबी वाले खेमे के नेताओं को अगले वर्ष के समर्थन के समझौते के लिए राजी कर सकते हैं - इसलिए हो सकता है कि वह राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स का 'मोहरा' बने रहें । देखने की बात सिर्फ यह होगी कि सुरेश सबलोक को मोहरा बना कर राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स का खेल कितना दूर तक जायेगा और चलेगा । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद पर रमेश बजाज की जोरदार चुनावी जीत और उनकी जीत को इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम की तरफ से मिली खुली व स्पष्ट दो-टूक मान्यता से टीके रूबी वाले खेमे के नेताओं तथा समर्थकों के हौंसले खासे बुलंद हैं । प्रेसीडेंट्स इलेक्ट व सेक्रेटरीज इलेक्ट सेमीनार में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी द्वारा दिए गए भाषण को लोगों की जो तालियाँ मिलीं, और बासकर चॉकलिंगम ने अपने भाषण में टीके रूबी की जैसी जो खुली ढेर प्रशंसा की - उससे भी टीके रूबी वाले खेमे के लोगों को उत्साह मिला है, और राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स दबाव में आए हैं और कमजोर पड़ते दिखे हैं । लेकिन फिर भी अगले कुछ दिनों की घटनाएँ डिस्ट्रिक्ट के आगे के माहौल को तय करने वाली साबित होंगी ।

Wednesday, April 25, 2018

रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले के चलते डिस्ट्रिक्ट 3080 में तरह तरह की बेईमानियों के आरोपों में घिरे राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की गर्दन अभी तो बच गई है, लेकिन वह भी समझ रहे हैं कि इस बचने में - वास्तव में वह ऐसे फँसे हैं कि ज्यादा दिन बचे रह नहीं पायेंगे

चंडीगढ़ । रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू को रोटरी इंटरनेशनल के जनरल सेक्रेटरी जॉन हेव्को का 24 अप्रैल को लिखा/भेजा पत्र पढ़ने को मिला, तो राजा साबू के लिए यह समझना थोड़ा मुश्किल हुआ कि वह हँसे या रोएँ । हँसने का तो उन्हें इसलिए विचार आया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने उनके और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स की कारस्तानियों को लेकर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड में जो पिटीशन दायर की थी, बोर्ड ने उसमें सीधी कार्रवाई करने से इंकार कर दिया है; लेकिन इस बात पर खुश होने और हँसने का आया विचार यह जान कर तुरंत उड़नछू हो गया कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने डिस्ट्रिक्ट के सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के साथ सहयोग करें और यदि ऐसा होता हुआ नहीं दिखा तो इंटरनेशनल उचित कार्रवाई करेगा । यह राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स के लिए रोने की बात है । उल्लेखनीय है कि टीके रूबी ने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को जो पिटीशन दी थी, उसमें उन्होंने डिस्ट्रिक्ट 3080 में रोटरी के नाम पर चल रहे कुछेक प्रोजेक्ट्स में हो रही पैसों की धाँधली का मुद्दा उठाया था और धोखाधड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की माँग की थी ।
अपनी पिटीशन में टीके रूबी ने आरोप लगाया था कि पूर्व गवर्नर्स का एक ग्रुप रोटरी के नाम पर प्रोजेक्ट्स करने के लिए बड़ी रकम इकट्ठी करता रहा है, जिसका कोई हिसाब-किताब वह डिस्ट्रिक्ट के मौजूदा नेतृत्व को देने को तैयार नहीं है । 
रोटरी इंटरनेशनल के अभी तक के इतिहास में यह अनोखी घटना है कि एक डिस्ट्रिक्ट का गवर्नर अपने डिस्ट्रिक्ट में रोटरी के नाम पर चल रहे प्रोजेक्ट्स का हिसाब-किताब जानने/देखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन असफल हो रहा है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट 3080 में रोटरी के नाम पर चलने वाले तमाम प्रोजेक्ट्स की चाबी राजा साबू और यशपाल दास के पास है । डिस्ट्रिक्ट सर्विस सोसायटी का मुखिया, नियमानुसार डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होता है; लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को गवर्नर का पदभार सँभाले हुए दस महीने होने के बाद भी इस सोसायटी का हिसाब-किताब नहीं मिला है । इस सोसायटी का फंड पूरी तरह राजा साबू और यशपाल दास के कब्जे में है और वह मनमाने तरीके से इसका पैसा दाएँ/बाएँ करते रहते हैं । टीके रूबी कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में इस सोसायटी के हिसाब/किताब का मुद्दा उठा चुके हैं, दिल्ली स्थित रोटरी इंटरनेशनल के साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों के साथ-साथ इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन राजा साबू और यशपाल दास इस सोसायटी के फंड पर ऐसी केंचुली मार कर बैठे हुए हैं कि इसका हिसाब-किताब बाहर ही नहीं आ पा रहा है । रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट में दो करोड़ 83 लाख रुपए की घपलेबाजी का आरोप राजा साबू और यशपाल दास पर बुरी तरह चिपका हुआ है, लेकिन इस मामले में भी ट्रस्ट के चेयरमैन राजा साबू ने बेशर्मीभरी चुप्पी साधी हुई है । उनकी चुप्पी और हिसाब-किताब पर कुंडली मारे बैठे रहने के कारण ही टीके रूबी को इंटरनेशनल बोर्ड में पिटीशन देने के लिए मजबूर होना पड़ा ।
टीके रूबी की पिटीशन पर इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों का फैसला हालाँकि विभिन्न अकाउंट्स पर केंचुली मार कर बैठे राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स को फिलहाल राहत तो देती है, लेकिन उक्त फैसले में डिस्ट्रिक्ट की गतिविधियों पर नजर रखने की जो बात कही गई है, उससे लगता है कि रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों की तरफ से राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की गर्दन पर फंदा धीरे-धीरे ही सही लेकिन कसता जा रहा है । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने इस वर्ष जिस तरह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा चुने गए अधिकृत उम्मीदवार रमेश बजाज की उम्मीदवारी को चेलैंज करने/करवाने की कार्रवाई से अपने आप को दूर रखा है, उससे लग रहा है कि वह अपने आप को दबाव में और हारा हुआ मानने लगे हैं । इसके अलावा, राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स अपने ही एक साथी पूर्व गवर्नर मनप्रीत सिंह का हाल देख कर भी डरे हुए हैं । मनप्रीत सिंह को क्लब के एक प्रोजेक्ट में घपलेबाजी करने के आरोप में क्लब की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है, जिसके बाद से राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स को डर हुआ है कि कहीं अपनी अपनी बेईमानियों के कारण वह भी अपने अपने क्लब्स से निलंबित न कर दिए जाएँ । तरह तरह की बेईमानियों में संलिप्तता के चलते राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने वास्तव में लोगों को वह 'तोते' दिखा दिए हैं, जिनमें उनकी जान बसती है । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड में पिटीशन के जरिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने दरअसल उन 'तोतों' की ही गर्दन मरोड़ने की कोशिश की है; राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स फिलहाल टीके रूबी की कोशिश से बच तो गए हैं, लेकिन वह भी समझ रहे हैं कि इस बचने में - वास्तव में वह ऐसे फँसे हैं कि ज्यादा दिन बचे रह नहीं पायेंगे ।

Friday, March 30, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के सामने राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की पतली हुई हालत को देखते हुए ही कपिल गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए चैलेंज करने से पीछे हट रहे हैं क्या ?

चंडीगढ़ । कपिल गुप्ता को चैलेंजिंग उम्मीदवार बनने से पीछे हटता देख राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के लिए और ज्यादा फजीहत की स्थिति पैदा हो गई है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा चुने गए अधिकृत उम्मीदवार को चेलैंज करने की समय-सीमा समाप्त होने को आ रही है, लेकिन कपिल गुप्ता और या उनके क्लब की तरफ से चेलैंज करने को लेकर कोई हलचल ही नहीं सुनाई/दिखाई दे रही है । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में और नोमीनेटिंग कमेटी का नतीजा आने के तुरंत बाद कपिल गुप्ता और उनके भाई कमल गुप्ता तथा उनके क्लब के लोगों ने 'गर्मी' तो बहुत दिखाई थी, जिससे लगा था कि कपिल गुप्ता नोमीनेटिंग कमेटी के फैसले को अवश्य ही चेलैंज करेंगे; लेकिन फिर जल्दी ही उनकी गर्मी उतर गई लगी । हालाँकि इस बीच राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने हर संभव कोशिश की कि कपिल गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए चुने गए अधिकृत उम्मीदवार रमेश बजाज को चेलैंज करें और चुनाव लड़ें, लेकिन उन्होंने पाया कि कपिल गुप्ता की चुनाव लड़ने की हिम्मत ही नहीं हो पा रही है । कपिल गुप्ता लगता है कि समझ रहे हैं कि राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स डीसी बंसल की तरह उन्हें पहले तो झाड़ पर चढ़ा देंगे और फिर उन्हें बलि का बकरा बना देंगे ।  इसी समझ के चलते कपिल गुप्ता अपने क्लब के सदस्य पूर्व गवर्नर सुभाष गर्ग की भी नहीं 'सुन' रहे हैं । कपिल गुप्ता ने टीके रूबी के गवर्नर-काल की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स की डिस्ट्रिक्ट के लोगों के जरिये जो एकतरफा फजीहत होती हुई देखी, उससे भी वह सावधान हो गए हैं ।
राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को डर दरअसल यह भी है कि कपिल गुप्ता कहीं टीके रूबी खेमे के साथ न मिल जाएँ । डिस्ट्रिक्ट में इस समय जो राजनीतिक माहौल है, उसमें टीके रूबी खेमे का पलड़ा भारी नजर आ रहा है; और हर किसी को लग रहा है कि राजा साबू खेमे के लिए अपने उम्मीदवार को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवा पाना निकट भविष्य में तो संभव नहीं है । वास्तव में यही कारण है कि राजा साबू खेमे के भरोसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवार एकदम पीछे हट गए हैं । ऐसे में, राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को डर हुआ है कि कहीं कपिल गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) बनने के लिए टीके रूबी खेमे के साथ न जा मिलें । कपिल गुप्ता के नजदीकियों व शुभचिंतकों को यह कहते और सलाह देते हुए सुना भी गया है कि कपिल गुप्ता को यदि सचमुच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) बनना है, तो उन्हें राजा साबू खेमे का साथ छोड़ कर टीके रूबी खेमे के साथ मिल जाना चाहिए । कपिल गुप्ता के कुछेक नजदीकी और शुभचिंतक टीके रूबी और उनके खेमे के दूसरे नेताओं के नजदीक भी हैं, जिनकी मदद से कपिल गुप्ता की टीके रूबी खेमे में एंट्री और स्वीकार्यता आसानी से हो भी जाएगी । यह 'काम' कोशिश करेंगे, तो कपिल गुप्ता के क्लब के सदस्य पूर्व गवर्नर सतीश सलूजा ही करवा देंगे । सतीश सलूजा का टीके रूबी खेमे में अच्छा सम्मान है । बल्कि पिछले रोटरी वर्ष में जब वर्ष 2018-19 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब प्रस्तुत हुई कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी को टीके रूबी खेमे का समर्थन दिलवाने के लिए सतीश सलूजा की तरफ से कोशिश हुई भी थी, जिस पर मधुकर मल्होत्रा ने आपत्ति की थी और नाराजगी दिखाई थी - जिसकी शिकायत सतीश सलूजा ने राजा साबू से भी की थी ।
उसके बाद भी, कुछेक मौकों पर ऐसा लगा तो था कि कपिल गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में टीके रूबी खेमे के उम्मीदवार हो सकते हैं । दरअसल एक उम्मीदवार के रूप में रमेश बजाज की कोई सक्रियता ही नहीं बन सकी थी, और खुद टीके रूबी खेमे में ही उन्हें एक 'बोझ' की तरह देखा जा रहा था । ऐसे में, कपिल गुप्ता के नजदीकियों और शुभचिंतकों को लगा भी था कि कपिल गुप्ता यदि थोड़ा सा भी प्रयास करें - तो वह रमेश बजाज की जगह टीके रूबी खेम के उम्मीदवार हो सकते हैं । कपिल गुप्ता लेकिन पता नहीं किस गलतफहमी में रहे कि हाथ में आए सुनहरे मौके को गवाँ बैठे । उनके नजदीकियों और शुभचिंतकों को लग रहा है कि अभी तक जो हुआ सो हुआ, कपिल गुप्ता अब तो लेकिन हालात की सच्चाई को समझें और टीके रूबी खेमे का समर्थन जुगाड़ने का प्रयास करें । मजे की बात यह है कि टीके रूबी खेमे के पास उम्मीदवारों का टोटा भी दिख रहा है । खेमे के नेताओं की तरफ से अगले रोटरी वर्ष में अजय मदान को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा सुनी गई है, हालाँकि अजय मदान उम्मीदवार बनने से अभी इंकार कर रहे हैं । ऐसे में, कपिल गुप्ता के नजदीकियों और शुभचिंतकों को कपिल गुप्ता के लिए अच्छा मौका 'दिख' रहा है । राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को डर और शक है कि चैलेंज न करके कपिल गुप्ता कहीं इस 'अच्छे' मौके का फायदा उठाने के लिए ही जमीन तैयार तो नहीं कर रहे हैं ? वह समझ रहे हैं कि कपिल गुप्ता ने यदि सचमुच ऐसा कर लिया, तो यह उनके लिए बड़ी फजीहत की बात होगी । इसीलिए राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स कपिल गुप्ता को तरह तरह से उकसा रहे हैं कि वह अधिकृत उम्मीदवार रमेश बजाज को चेलैंज करें । लेकिन जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है, लग नहीं रहा है कि कपिल गुप्ता उनके झाँसे में आ रहे हैं । जल्दी ही यह स्पष्ट हो जायेगा कि कपिल गुप्ता को राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स पर भरोसा रह गया है या नहीं ?

Sunday, March 18, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद पर रमेश बजाज की जीत कपिल गुप्ता के साथ-साथ वास्तव में राजा साबू और उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स की हार है तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी की जोरदार जीत है

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव कपिल गुप्ता के लिए चुनौतीपूर्ण तो था, लेकिन वह इतनी बुरी तरह से चुनाव हार जायेंगे - इसकी उम्मीद उनके विरोधियों को भी नहीं थी । कपिल गुप्ता अपनी हार का ठीकरा जिस तरह पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के सिर फोड़ते 'सुने' जा रहे हैं, उससे लग रहा है कि वह आगे के लिए भी अपने रास्ते बंद कर ले रहे हैं । मोटे तौर पर डिस्ट्रिक्ट का चुनावी माहौल कपिल गुप्ता के लिए पूरी तरह अनुकूल था; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी भारी दबाव में थे, जिसके चलते उनके उम्मीदवार के रूप में देखे/पहचाने जा रहे रमेश बजाज को सत्ता का समर्थन मिलता नहीं दिख रहा था, उम्मीदवार के रूप में खुद रमेश बजाज का व्यवहार और रवैया भी ढीला/ढाला था - लेकिन फिर भी कपिल गुप्ता मौके का फायदा नहीं उठा सके, उसे देख कर लोगों को लग रहा है कि कपिल गुप्ता के बस की चुनाव लड़ना है ही नहीं । चुनाव वाले दिन, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में चुनाव संबंधी एक प्रस्ताव को लेकर मचे हंगामे में कपिल गुप्ता और उनके भाई कमल गुप्ता का 'कुल्हाड़ी पर पैर मारने' वाला जो रवैया देखा गया - उससे ही साबित हो गया था कि कपिल गुप्ता जब खुद ही अपनी उम्मीदवारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, और खुद ही अपनी चुनावी नाव डुबोने में लगे हैं, तब फिर उन्हें भला कौन बचा सकता है ? नोमीनेटिंग कमेटी में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के होने से कपिल गुप्ता को उम्मीद थी कि कमेटी के सदस्यों को वह मैनेज कर लेंगे और उन्हें अधिकृत उम्मीदवार चुनवा देंगे, लेकिन मधुकर मल्होत्रा ने अपनी तरफ से कोई अतिरिक्त प्रयास किया ही नहीं और कपिल गुप्ता नोमीनेटिंग कमेटी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव भारी अंतर से चुनाव हार गए ।
कपिल गुप्ता, राजा साबू और उनके गिरोह के जिन नेताओं के भरोसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी मैदान में थे - उनके बीच तालमेल के अभाव का नजारा यह रहा कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के पहले दिन राजा साबू और उनके गिरोह के नेता कॉन्फ्रेंस में आने की बजाये यमुना नगर में अपना एक अलग कार्यक्रम कर रहे थे । लोगों के बीच चर्चा रही कि राजा साबू गिरोह के सदस्यों ने यह हरकत डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को फेल करने के उद्देश्य से की थी । उन्हें उम्मीद थी कि डिस्ट्रिक्ट के लोग टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जाने की बजाये उनके कार्यक्रम में आना पसंद करेंगे और इस तरह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का रंग फीका पड़ जायेगा । पर हुआ उल्टा । टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रिकॉर्ड आठ/नौ सौ लोग जुटे और राजा साबू के कार्यक्रम में यमुनानगर के ही थोड़े से लोग आए । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि थे । राजा साबू ने जब देखा/पाया कि उनका कार्यक्रम तो पिट गया है और टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस 'सुपर हिट' जा रही है, तो उन्हें अक्ल आई और उन्होंने सोचा कि चलो, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में ही चलते हैं और वहाँ हरियाणा के राज्यपाल के साथ फोटो-सेशन भी कर/करवा लेंगे । लेकिन इस मामले में भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी उनसे तेज निकले । टीके रूबी को जैसे ही पता चला कि राजा साबू अपने साथी गवर्नर्स के साथ कॉन्फ्रेंस में आ रहे हैं, तो उन्होंने आनन-फानन में कॉन्फ्रेंस का समापन ही कर/करवा दिया । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को कॉन्फ्रेंस स्थल पर खाली कुर्सियाँ ही मिली/दिखीं - और इस तरह एक ही दिन में उन्हें दो बार चोट पड़ी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने पहला झटका तो उन्हें अपनी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रिकॉर्ड उपस्थिति के जरिये डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को खराब करने की उनकी कोशिश को फेल करके दिया, और दूसरे झटके के रूप में अंतिम क्षणों में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में शामिल होने की राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की कोशिश को फेल करने का काम किया ।
डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व सदस्यों के लिए और भी बुरा रहा । रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ पूर्व प्रेसीडेंट मोहिंदर पॉल गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी प्रक्रिया में संशोधन का एक प्रस्ताव रखा, जिसमें नोमीनेटिंग कमेटी की व्यवस्था को हटा कर रोटरी इंटरनेशनल की एमओपी के अनुसार चुनाव करवाने का सुझाव दिया गया । इस प्रस्ताव पर कॉन्फ्रेंस में बबाल हो गया । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर ने इस प्रस्ताव के खिलाफ भारी शोर मचाया । उनका कहना रहा कि इस प्रस्ताव पर कॉलिज और गवर्नर्स में कोई चर्चा नहीं हुई है, इसलिए इस प्रस्ताव पर यहाँ विचार नहीं हो सकता है । उन्होंने इस प्रस्ताव को स्थगित करने की माँग की । मोहिंदर पॉल गुप्ता का तर्क लेकिन यह रहा कि किसी भी प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रखने के लिए जिस भी प्रक्रिया का पालन करना होता है, उनके क्लब ने उस प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया है और इसलिए इस प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रखने से और इस पर फैसला होने से नहीं रोका जा सकता है । इसके बाद भी, राजा साबू की शह पर शुरू हुआ जेपीएस सीबिया व शाजु पीटर का शोर जब कम नहीं हुआ तथा राजा साबू गिरोह के कुछेक और पूर्व गवर्नर्स ने उनका साथ देना शुरू कर दिया, तब डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद मुकेश अरनेजा ने मोर्चा संभाला और साफ कहा कि किसी भी प्रस्ताव को कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में रखना कोई जरूरी नहीं है; कॉन्फ्रेंस में रखने वाले प्रस्ताव को क्लब्स के प्रेसीडेंट को भेजना जरूरी होता है और यदि किसी पूर्व गवर्नर को प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं है तो इस बारे में शिकायत उसे अपने क्लब में करना चाहिए । जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर वैसे तो अपने आप को रोटरी का बड़ा ज्ञाता समझते/बताते हैं, लेकिन मुकेश अरनेजा के तर्क से लोगों के सामने पोल खुली कि उन्हें या तो रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का अता/पता नहीं है और या वह अपनी हेकड़ी दिखाने/जताने की कोशिश कर रहे हैं ।
मुकेश अरनेजा से मिली जानकारी से कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोग जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर पर भड़क उठे । रोटरी क्लब करनाल मिडटाउन की युवा महिला सदस्य अंशु गोयल का चौधराहटभरी मनमानी राजनीति के खिलाफ जो गुस्सा फूटा, उसने कॉन्फ्रेंस के माहौल को ही बदल दिया । फिर तो हर किसी ने राजा साबू और उनके गिरोह के सदस्यों की लानत-मलानत शुरू कर दी । लोगों का आरोप रहा कि नोमीनेटिंग कमेटी के जरिये पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के चुनाव में अपनी मनमानी थोपने की कोशिश करते हैं, इसलिए मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव से उन्हें चूँकि अपनी मनमानी के मौके छिनते दिख रहे हैं - इसलिए वह बौखला रहे हैं । माहौल को खिलाफ बनता देख राजा साबू ने तो मौके से खिसक लेने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी और वह अपने संगी-साथियों को वही छोड़ कर चुपचाप कॉन्फ्रेंस से निकल गए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव पर मत-विभाजन करवाते हुए आह्वान किया कि जो लोग प्रस्ताव के समर्थन में हैं वह राइट साइड में आ जाएँ, और जो लोग प्रस्ताव के खिलाफ हैं वह लेफ्ट साइड में रहें । राजा साबू गिरोह के पूर्व गवनर्स के लिए शर्मनाक स्थिति यह बनी कि लेफ्ट साइड में उनके साथ कुल छह/आठ रोटेरियंस ही बचे, जबकि कॉन्फ्रेंस में मौजूद तमाम सदस्य राइट साइड में जा पहुँचे । मजेदार और आत्मघाती रवैया रहा कपिल गुप्ता और उनके भाई कमल गुप्ता का । वह देख रहे थे कि कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों में 95 प्रतिशत मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव के समर्थन में हैं, लेकिन फिर भी वह प्रस्ताव के विरोध में रहे - और बड़े मुखर तरीके से रहे । उनके समर्थकों को ही आश्चर्य हुआ कि उम्मीदवार होने के चलते उन्हें इस बबाल में सक्रिय रूप से कूदने की जरूरत भला क्या थी ? उनके सामने पूर्व गवर्नर्स का समर्थन करने की मजबूरी यदि थी भी, तो भी उन्हें 'साइलेंट समर्थक' की भूमिका में रहना था । मौके पर मौजूद हर किसी ने माना कि मोहिंदर पॉल गुप्ता के जिस प्रस्ताव को कॉन्फ्रेंस में जबर्दस्त समर्थन मिल रहा था, उसका सक्रिय विरोध करके कपिल गुप्ता ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मार ली थी, बल्कि अपने पैर ही कुल्हाड़ी पर मार लिए थे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में कपिल गुप्ता की हार को उसी समय लोगों ने पहचान लिया था और कहना शुरू कर दिया था कि कपिल गुप्ता को अब अगले वर्ष की तैयारी शुरू कर देना चाहिए । चुनाव शुरू होने से पहले ही लोगों के मुँह से इस तरह की बातें सुन कर कपिल गुप्ता की पत्नी ने कुछेक लोगों के प्रति अपनी नाराजगी भी दिखाई, लेकिन उनकी नाराजगी भी कपिल गुप्ता को एक बड़ी पराजय से नहीं बचा सकी ।