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Friday, May 15, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव के मामले को गुपचुप रूप से क्रियान्वित करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा की कोशिशों ने लोगों को हैरान किया हुआ है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज तो उनके रवैये के चलते अपनी फजीहत होते हुए भी देख रहे हैं 

कुरुक्षेत्र । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज सीओएल (काउंसिल ऑन लेजिस्लेशन) प्रतिनिधि के चयन/चुनाव के मामले में अँधेरे में रखे जाने को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा से बुरी तरह खफा हैं । रमेश बजाज ने कुछेक मौकों पर अलग अलग लोगों से शिकायती स्वर में कहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट होने के बावजूद उन्हें यह नहीं पता है कि सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर डिस्ट्रिक्ट में क्या हो रहा है ? उन्होंने जितेंद्र ढींगरा से जब भी इस बारे में बात की, जितेंद्र ढींगरा ने बहानेबाजी करके बात को टाल दिया और कोई सीधा जबाव नहीं दिया । रमेश बजाज के नजदीकियों के अनुसार, रमेश बजाज को यह बात दरअसल इसलिए बुरी लगी है कि उनसे जब जब भी किसी ने सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर पूछा, तब तब उन्हें चुप रह जाना पड़ा और यह सोच कर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा - कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट होने के बावजूद उन्हें यही नहीं पता है कि सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर डिस्ट्रिक्ट में हो क्या रहा है ? रमेश बजाज के नजदीकियों के साथ-साथ दूसरों को भी यह बात समझना मुश्किल हो रही है कि रमेश बजाज तो जितेंद्र ढींगरा के खेमे के ही 'सदस्य' हैं, आखिर तब भी जितेंद्र ढींगरा उनसे उक्त मामले से जुड़ी कार्रवाई को छिपा क्यों रहे हैं ? उक्त मामले से जुड़ी कार्रवाई की बात जितेंद्र ढींगरा कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के दूसरे सदस्यों से छिपा रहे हैं, यह बात तो फिर भी लोगों की समझ में आ रही है, लेकिन अपने ही नजदीकी और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज को भी वह उक्त मामले में अँधेरे में रख रहे हैं - इस बात पर हर किसी को हैरानी है ।
उल्लेखनीय है कि 30 जून 2020 तक प्रत्येक डिस्ट्रिक्ट को रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को अपने सीओएल प्रतिनिधि का नाम भेजना है । इसे लेकर प्रत्येक डिस्ट्रिक्ट में सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव की सक्रियता है । अब जबकि तय समय सीमा को पूरा होने में करीब 45 दिन बचे हैं, डिस्ट्रिक्ट 3080 में सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर पूरी तरह अँधेरा छाया हुआ है । सीओएल प्रतिनिधि के लिए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ही उम्मीदवार हो सकते हैं; एक से ज्यादा उम्मीदवार होने की स्थिति में चुनाव होता है, जिसमें क्लब्स के प्रेसीडेंट वोट देते हैं । डिस्ट्रिक्ट 3080 में लेकिन नजारा यह है कि क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को तो छोड़िये, पूर्व गवर्नर्स तक को नहीं पता है कि सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर हो क्या रहा है । इस मामले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा से सीधा जबाव न मिलने पर लोग जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज से पूछते हैं, तो रमेश बजाज के लिए यह कहना/बताना भी मुश्किल हो जाता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट होने के बावजूद उन्हें भी उक्त मामले में कुछ नहीं पता है । मजे की बात यह है कि रमेश बजाज के नजदीकियों को ही लगता है कि जितेंद्र ढींगरा चूँकि रमेश बजाज को राजा साबू के नजदीक मानते/समझते हैं, इसलिए ही वह रमेश बजाज से बातें छिपाते हैं । इससे भी ज्यादा मजे की बात लेकिन यह है कि जितेंद्र ढींगरा जिन मनमोहन सिंह के साथ मिलकर सारी योजनाएँ बनाते हैं, उन्हें तो घोषित रूप में राजा साबू के नजदीक माना/पहचाना जाता है । इसलिए, जितेंद्र ढींगरा सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव में अपने खेमे के होने तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट होने के बावजूद रमेश बजाज को जिस तरह अँधेरे में रखे हुए हैं, उससे मामला कुछ ज्यादा ही रहस्यपूर्ण और विवादपूर्ण हो जाता है ।
जितेंद्र ढींगरा ने ही कुछेक मौकों पर बताया/कहा है कि राजा साबू ने भी उनसे पूछा था कि सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर क्या करना है, जिसके जबाव में जितेंद्र ढींगरा ने उनसे यह कहते हुए पीछा छुड़ाया कि समय आने पर तय करते हैं कि कैसे क्या करना है । जितेंद्र ढींगरा का कहना/बताना था कि यदि पहले से ही सीओएल प्रतिनिधि को लेकर चर्चा शुरू हो जायेगी, तो कई पूर्व गवर्नर उम्मीदवार बन जायेंगे और फिर चुनाव का झमेला खड़ा होगा । हालाँकि कई लोगों का कहना रहा कि चुनाव के झमेले के डर से डिस्ट्रिक्ट के लोगों को उनके अधिकार से वंचित करने का प्रयास क्यों किया जाना चाहिए - और पूर्व गवर्नर्स को उम्मीदवार बनने का तथा क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल करने देना चाहिए । जितेंद्र ढींगरा के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि उनके ही कई नजदीकी सीओएल प्रतिनिधि चयन/चुनाव के मामले में अपनाये गए उनके रवैये से खुश नहीं हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज तो उनके रवैये के चलते अपनी फजीहत होते हुए भी देख रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में कुछेक लोगों को लगता है कि जितेंद्र ढींगरा गुपचुप तरीके से मनमोहन सिंह को सीओएल प्रतिनिधि बनाना/चुनवाना चाहते हैं, और इसलिए ही सारी प्रक्रिया को ढँक कर रखने का काम कर रहे हैं । लोगों को लगता है कि सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर उचित तरीके से प्रक्रिया का पालन यदि किया गया तो जितेंद्र ढींगरा के लिए मनमोहन सिंह को चुनवाना/बनवाना मुश्किल हो जायेगा, और इसीलिए वह ऐसे हालात बना देना चाहते हैं कि चुनाव का मौका ही न बन सके - और मनमोहन सिंह बिना चुनाव का सामना किए ही सीओएल प्रतिनिधि बन जाएँ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज को भी इसीलिए वह सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव जैसे महत्त्वपूर्ण मामले से अलग रखे हुए हैं ।

Friday, March 27, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में कोरोना वायरस से उपजे हालात एक तरफ तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज के लिए 'वरदान' बने हैं, तो दूसरी तरफ राजा साबू के लिए सीओएल के मामले में अपनी दाल गलाने का 'मौका'

पानीपत । कोरोना वायरस की आपदा से निपटने के लिए अपनाई गई लॉकडाउन व कर्फ्यू जैसी देशव्यापी व्यवस्था डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज के लिए वरदान साबित हुई है । दरअसल इस व्यवस्था के चलते अप्रैल के पहले सप्ताह में होने वाले पेट्स कार्यक्रम के स्थगित होने से रमेश बजाज ने बड़ी राहत की साँस ली है । वास्तव में, लॉकडाउन व कर्फ्यू जैसी व्यवस्था के चलते अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स में पेट्स आदि कार्यक्रम स्थगित ही हुए हैं - लेकिन इसके कारण अधिकतर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट उदाश व परेशान ही हुए हैं, क्योंकि अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स में पेट्स की तैयारियाँ काफी हद तक पूरा हो चुकी थीं, और पेट्स के स्थगित होने से न केवल उन तैयारियों पर पानी फिर गया है, बल्कि काफी नुकसान होने के भी अनुमान हैं । ऐसे में, पेट्स के स्थगित होने से एक अकेले रमेश बजाज के 'खुश' होने का कारण यह बताया/सुना जा रहा है कि पेट्स आयोजन को लेकर दरअसल उनकी कोई तैयारी ही नहीं थी । पेट्स की तैयारी को लेकर प्रेसीडेंट्स इलेक्ट के बीच इस बात को लेकर खासा असमंजस रहा था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट की तरफ से उन्हें कोई सूचना और जानकारी ही नहीं मिल रही थी कि पेट्स के संबंध में उन्हें क्या करना है ? प्रेसीडेंट्स इलेक्ट का ही कहना/बताना रहा कि उन्होंने रमेश बजाज और उनके नजदीकियों से भी पेट्स की तैयारी को लेकर पूछताछ की, लेकिन हर कहीं से उन्हें टालमटोल वाले जबाव ही सुनने को मिले । रमेश बजाज के कुछेक नजदीकियों का तो यहाँ तक कहना/बताना रहा कि पेट्स को लेकर क्या तैयारी है, इसका खुद उन्हें ही कुछ पता नहीं है । ऐसे में समझा जाता है कि पेट्स को लेकर रमेश बजाज की वास्तव में कोई तैयारी थी ही नहीं, और वह अभी सोच ही रहे थे कि उन्हें करना क्या है कि लॉकडाउन व कर्फ्यू जैसी व्यवस्था लागू हो गई । जाहिर तौर पर लॉकडाउन व कर्फ्यू की यह व्यवस्था रमेश बजाज के लिए 'वरदान' बन गई । 
पेट्स से पहले एजीटीएस का आयोजन भी रमेश बजाज को रद्द करना पड़ा था, हालाँकि उसके लिए लॉकडाउन या कर्फ्यू जिम्मेदार नहीं था; और उससे भी पहले प्री-पेट्स के आयोजन को लेकर भारी विवाद पैदा हो गया था और उसका हो पाना खतरे में पड़ गया था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने मामला न संभाला होता, तो प्री-पेट्स का आयोजन भी नहीं ही हो पाता । पेट्स का आयोजन भी पहले कुफ्री में होना तय हुआ था, फिर वह कैंसिल हुआ और उसके पंचकुला में होने की बात सुनी गई - उसके बाद पेट्स के बारे में कुछ नहीं सुना गया । कोरोना वायरस दुनिया भर के लोगों के लिए भले ही अभिशाप साबित हो रहा हो, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में पेट्स करने को लेकर रमेश बजाज के लिए यह राहत पहुँचाने वाला साबित हुआ है ।  रमेश बजाज के कुछेक नजदीकियों का कहना है कि उन्हें अपनी टीम के सदस्यों का पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है, इसलिए उनके काम ठीक से संयोजित नहीं हो पा रहे हैं; लेकिन उनकी टीम के ही कुछेक सदस्यों का कहना है कि रमेश बजाज खुद कन्फ्यूज हैं और कार्यक्रमों को लेकर उनके पास कोई योजना या विजन ही नहीं है - और इसलिए उनके आयोजनों को लेकर अनिश्चिता बनी हुई है । मजे की बात यह है कि रमेश बजाज को अपने गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर अरुण शर्मा का ही उचित सहयोग नहीं मिल पा रहा है, हालाँकि अरुण शर्मा की तरफ से सुनने को मिल रहा है कि रमेश बजाज ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर तो बना दिया है - लेकिन अपने कार्यक्रमों को लेकर वह उनसे कोई विचार-विमर्श नहीं कर रहे हैं और न उनसे कोई सलाह ही ले रहे हैं । ऐसे में, लोगों के बीच चर्चा यह है कि रमेश बजाज आखिर सलाह ले किस से रहे हैं ?
डिस्ट्रिक्ट में एक तरफ तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज की आयोजनों को लेकर फजीहत हो रही है, तो दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा की कुछेक गतिविधियों को लेकर खूब वाहवाही हो रही है । लोगों को यह देख/सुन/जान कर और मजा आ रहा है कि जितेंद्र ढींगरा की तारीफ करने में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं । कोरोना से मुकाबले को लेकर जितेंद्र ढींगरा ने सोशल मीडिया में एक संदेश प्रसारित किया, जिसकी राजा साबू ने भरपूर तरीके से तारीफ की - ऐसी तारीफ, जैसी किसी और ने नहीं की । जितेंद्र ढींगरा के नजदीकियों के अनुसार, राजा साबू आजकल जितेंद्र ढींगरा की तारीफ करने के बहाने व मौके ढूँढ़ते रहते हैं - और जैसे ही कोई मौका मिलता है, तड़ से उनकी तरफ कर देते हैं । कोरोना से मुकाबले को लेकर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने भी सोशल मीडिया में दो/एक संदेश प्रसारित किए हैं, लेकिन वह जितेंद्र ढींगरा जैसे खुशकिस्मत नहीं 'दिखे' कि राजा साबू की तारीफ उन्हें भी मिले । अच्छे कामों की तारीफ के मामले में राजा साबू की यह पक्षपातपूर्ण भूमिका दरअसल उनके स्वार्थ से जुड़ी देखी जा रही है । राजा साबू के तौर-तरीकों से परिचित लोगों का कहना/बताना है कि राजा साबू किसी की तब ही तारीफ करते हैं, जब उन्हें अपना कोई काम निकालना होता है - अन्यथा तो वह आदमी को 'आदमी' भी नहीं समझते । समझा जा रहा है कि राजा साबू अपने किसी आदमी को सीओएल के लिए चयनित करवाने के उद्देश्य से जितेंद्र ढींगरा की तारीफों में लगे हुए हैं - उन्हें 'पता' है कि जितेंद्र ढींगरा ही सीओएल के लिए चयन होने/करने में निर्णायक भूमिका निभायेंगे । सीओएल के लिए अभी हालाँकि किसी/किन्हीं नामों की चर्चा नहीं है, पर माना/समझा जा रहा है कि राजा साबू और जितेंद्र ढींगरा की जिस नाम पर सहमति बन जायेगी - वह सीओएल के लिए 'चुन' लिया जायेगा । ऐसे में, मनमोहन सिंह का पलड़ा भारी लग रहा है, क्योंकि एक वही हैं जिनकी दोनों तरफ अच्छी पैठ है । वह हालाँकि सीओएल में एक बार जा चुके हैं, लेकिन इससे क्या होता है - नेता लोग राजी हो जाएँ, तो वह दूसरी बार भी सीओएल में चले जायेंगे !

Wednesday, November 6, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज द्वारा रोटरी क्लब पोंटा साहिब के पदाधिकारियों को विश्वास में लिए बिना प्री-पेट्स के आयोजन की जिम्मेदारी क्लब को सौंपने की कार्रवाई से पैदा हुई नाराजगी ने रमेश बजाज के पहले ही आयोजन को मुसीबत में फँसाया

पोंटा साहिब । रोटरी क्लब पोंटा साहिब के पदाधिकारियों के विरोधी रवैये के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज का प्री-पेट्स कार्यक्रम मुसीबत में फँस गया है, जिससे 'निकलने' के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा को मदद के लिए पुकारा जा रहा है । क्लब के पदाधिकारियों का कहना है कि प्री-पेट्स कार्यक्रम उनका क्लब कर रहा है, और यह बात उन्हें ही नहीं पता है - और यह बात उन्हें दूसरे लोगों से पता चल रही है । उनका कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज इस तरह की 'बेईमानी' भला कैसे कर सकते हैं कि उनसे पूछे बिना, उन्हें बताये बिना उनके क्लब पर अपना कार्यक्रम करने की जिम्मेदारी थोप दें । क्लब के पदाधिकारियों से यह सब सुन कर डिस्ट्रिक्ट के लोगों को कहने का मौका मिला है कि लगता है कि रमेश बजाज उसी रास्ते पर चल पड़े हैं, जिस रास्ते पर चलते हुए राजा साबू खेमे के नेता डिस्ट्रिक्ट के लोगों से दूर हुए और फिर राजनीतिक व प्रशासनिक व्यवस्था में अलग-थलग पड़े हैं । लोगों को लग रहा है कि रमेश बजाज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी पर पहुँचे तो हैं राजा साबू खेमे की विरोधी राजनीति पर सवार होकर; लेकिन उनके रंग-ढंग राजा साबू खेमे के नेताओं जैसे हैं, जिसमें क्लब के पदाधिकारियों को विश्वास में लिए बिना मनमानी करते/दिखाते हुए काम किए जाते हैं । लोगों का कहना है कि रमेश बजाज को यदि रोटरी क्लब पोंटा साहिब को प्री-पेट्स की जिम्मेदारी सौंपनी थी, तो क्लब के पदाधिकारियों से तो इस बारे में बात करना ही चाहिए थी ।
मजे की बात है कि रमेश बजाज के कुछेक नजदीकी इस झमेले के लिए रमेश बजाज के गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर अरुण शर्मा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । अरुण शर्मा रोटरी क्लब पोंटा साहिब के सदस्य और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं । रमेश बजाज के नजदीकियों का कहना/बताना है कि रमेश बजाज ने तो प्री-पेट्स के आयोजन की जिम्मेदारी अरुण शर्मा को सौंप दी थी, और अरुण शर्मा ने अपने क्लब को आयोजक बना लिया । अपने क्लब को आयोजक बनाते हुए अरुण शर्मा ने किससे पूछा और किससे नहीं पूछा, इस बारे में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमेश बजाज को कुछ नहीं पता है । उल्लेखनीय है कि अरुण शर्मा की रोटरी ट्रेनिंग 'राजा साबू स्कूल' में हुई है, जिसके सिलेबस में मनमानी करना तथा अधिकृत पदाधिकारियों की उपेक्षा करना तथा उन्हें अपमानित करना मुख्य विषय है । विषय में विशेषज्ञता रखने के कारण ही संभवतः अरुण शर्मा ने आयोजन की जिम्मेदारी सौंपते समय क्लब के पदाधिकारियों को विश्वास में लेना जरूरी नहीं समझा होगा, जिसे देख/जान कर क्लब के पदाधिकारी भड़क गए हैं और प्री-पेट्स कार्यक्रम मुसीबत में फँस गया है । दूसरे कई लोगों का कहना लेकिन यह है कि रोटरी क्लब पोंटा साहिब के पदाधिकारियों की नाराजगी से पैदा हुए हालात का ठीकरा रमेश बजाज भले ही अरुण शर्मा के सिर फोड़ने का प्रयास कर रहे हों, किंतु जो हुआ - उसके लिए रमेश बजाज भी कोई कम जिम्मेदार नहीं हैं । लोगों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का 'ताज' जब रमेश बजाज पहनेंगे, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की जिम्मेदारियाँ भी उन्हें ही निभानी/लेनी होंगी । जिम्मेदारियाँ दूसरों के सिर मढ़ कर बचने की उनकी कोशिश स्वीकार नहीं होगी ।
समस्या दरअसल यह है कि अब जो लोग डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बन रहे हैं, वह 'राजा साबू स्कूल' में ट्रेनिंग पाए हुए लोग हैं, जिनके तौर-तरीके लोगों को भड़का देते हैं । मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर मनमोहन सिंह के कुछेक फैसलों के चलते जितेंद्र ढींगरा को कई मौकों पर अपने ही समर्थकों के बीच परेशानी का सामना करना पड़ा है । एक कार्यक्रम में जितेंद्र ढींगरा को अँधेरे में रख कर मनमोहन सिंह ने यशपाल दास को आमंत्रित कर लिया; जितेंद्र ढींगरा के नजदीकियों ने उनसे पूछा, तो जितेंद्र ढींगरा से जबाव देते हुए नहीं बना । अन्य कुछेक मौकों पर मनमोहन सिंह को राजा साबू खेमे के लिए 'खेलते' हुए देखा/पाया गया, जिस पर जितेंद्र ढींगरा को अपने ही लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा । अरुण शर्मा के कारण रमेश बजाज जिस तरह से अपने पहले ही कार्यक्रम में मुसीबत में फँस गए हैं, उसे देखते हुए लोगों को लग रहा है कि जितेंद्र ढींगरा की तुलना में रमेश बजाज को ज्यादा मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है । उल्लेखनीय है कि रमेश बजाज के कई नजदीकियों ने उन्हें अरुण शर्मा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर न बनाने का सुझाव दिया था, और बहुत दिनों तक लगता रहा था कि रमेश बजाज अपने नजदीकियों की सुन/मान रहे हैं; लेकिन अंततः रमेश बजाज ने अपने नजदीकियों के सुझाव को दरकिनार करके अरुण शर्मा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर घोषित कर दिया - जिससे उनके कई नजदीकी खफा हुए हैं । रमेश बजाज के कुछेक नजदीकियों को तो लगता है कि पहले मनमोहन सिंह के जरिये, और अब अरुण शर्मा के जरिये राजा साबू खेमे के नेता सत्ता खेमे में असंतोष पैदा करके फूट डालने का प्रयास कर रहे हैं । रमेश बजाज अपने पहले ही कार्यक्रम को लेकर जिस तरह की मुसीबत में फँस गए हैं, उम्मीद है कि उसे तो जितेंद्र ढींगरा की कोशिशों से हल कर लिया जायेगा - लेकिन इस मामले से यह साफ संकेत मिला है कि रमेश बजाज ने यदि अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई/देखी और अरुण शर्मा पर ही निर्भर रहे, तो बार-बार मुसीबत में फँसेंगे तथा सत्ता खेमे के लोगों के बीच असंतोष व नाराजगी पैदा करेंगे । 

Monday, August 6, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा को अलग-थलग रखने/करने की कोशिशों में लगे राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को मनमोहन सिंह का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना हजम नहीं हो पा रहा है

चंडीगढ़ । मनमोहन सिंह का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार करने से राजेंद्र उर्फ राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स बुरी तरह नाराज हैं । दरअसल उन्हें लग रहा है कि इससे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के सामने उनके बीच फूट पड़ने और उनके खेमे के बिखरने का संदेश जा रहा है, जिसके चलते उनके लिए डिस्ट्रिक्ट की व्यवस्था और राजनीति में बने/टिके रहना मुश्किल ही हो जायेगा । उल्लेखनीय है कि राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स अभी हाल तक कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में अपनी एकता बनाए रखे हुए थे, जिसके चलते निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी अलग-थलग से पड़ते नजर आते थे - और इस 'एकता' के भरोसे उन्होंने टीके रूबी को दबाव में लेने/रखने की कोशिश की, और कुछेक मामलों में वह कामयाब भी हुए । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स की साख भले ही धूल चाटने लगी हो, लेकिन कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में अपनी एकता के भरोसे वह काफी मनमानियाँ कर ले रहे थे । इसीलिए कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में अपनी एकता बनाए रखना उन्हें जरूरी लगता रहा है । इसी संदर्भ में राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को मनमोहन सिंह के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनने में कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की एकता के लिए खतरे की घंटी बजती 'सुनाई' दे रही है । 
कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की एकता पर खतरे का साया हालाँकि पहली बार तब पड़ा दिखा था, जब पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अरुण शर्मा ने पिछले वर्ष हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में नोमीनेटिंग कमेटी में फैसले को अनिर्णीत छोड़ देने के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के 'दबावपूर्ण' सुझाव को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था । मधुकर मल्होत्रा के जरिये राजा साबू खेमे ने दरअसल कोशिश यह की थी कि नोमीनेटिंग कमेटी में अधिकृत उम्मीदवार को लेकर फैसला नहीं हो पायेगा तो रमेश बजाज आसानी से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी नहीं चुने जा पायेंगे । अरुण शर्मा भी हालाँकि राजा साबू खेमे के ही सदस्य के रूप में देखे जाते हैं, लेकिन राजा साबू गिरोह की राजनीति का साथ देने से उन्होंने इंकार कर दिया और उनके सख्त रवैये के कारण ही रमेश बजाज अधिकृत उम्मीदवार चुने जा सके - और फिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी घोषित हुए । अरुण शर्मा के रवैये से डिस्ट्रिक्ट में लोगों को यह समझने में देर नहीं लगी कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में राजा साबू की राजनीति और मनमानियों को जो समर्थन 'दिखता' है, वह मजबूरी का और विकल्पहीनता के चलते पैदा होने वाला समर्थन है - और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में कई सदस्य हैं जो मौका मिलने पर राजा साबू की मनमानियों का विरोध कर सकते हैं । अरुण शर्मा को मौका मिला, और उन्होंने राजा साबू गिरोह की गंदी राजनीति का सहभागी बनने से साफ इंकार कर दिया । अरुण शर्मा के रवैये से मिले झटके के बाद, मनमोहन सिंह ने जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार करके राजा साबू गिरोह को उससे भी बड़ा झटका दिया है ।
राजा साबू गिरोह की कोशिश दरअसल जितेंद्र ढींगरा को अलग-थलग करने की है, जिसके तहत उन्हें डिस्ट्रिक्ट के जरूरी कामों/कार्यक्रमों से भी दूर रखने की कोशिश की गई है । पिछले दिनों इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट भरत पांड्या का डिस्ट्रिक्ट में स्वागत कार्यक्रम हुआ, जिसके बारे में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी रमेश बजाज को अधिकृत रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई, और इस तरह उन्हें उक्त कार्यक्रम से दूर रखने की कोशिश की गई । हालाँकि भरत पांड्या की सदाश्यता और होशियारी ने राजा साबू और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल की इस टुच्ची हरकत को सफल नहीं होने दिया और अपनी तरफ से पहल करके उन दोनों को कार्यक्रम का निमंत्रण दिलवाया । भरत पांड्या के हस्तक्षेप के बाद राजा साबू की शह के चलते जितेंद्र ढींगरा और रमेश बजाज को निमंत्रण देने से बच रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल उन्हें कार्यक्रम में निमंत्रित करने के लिए मजबूर हुए । डिस्ट्रिक्ट में रोटरी फाउंडेशन से जुड़े खर्चों में राजा साबू की मनमानी चलती रहे, इसके लिए रोटरी फाउंडेशन से संबद्ध डिस्ट्रिक्ट क़्वालीफिकेशन मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा को शामिल करने से बचा जा रहा है । ऐसे में, राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को यह देख कर झटका लगा है कि एक तरफ तो वह जितेंद्र ढींगरा को अलग-थलग करने/रखने का प्रयास कर रहे हैं, और दूसरी तरफ उनके ही एक साथी मनमोहन सिंह ने जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार कर लिया है । राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के लिए झटके वाली बात दरअसल यह है कि जब से यह चर्चा फैली कि जितेंद्र ढींगरा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद के लिए मनमोहन सिंह को राजी करने का प्रयास कर रहे हैं, तभी से राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने तरह तरह से संदेश भेज कर मनमोहन सिंह को आगाह किया था कि वह जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-काल में ड्रिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना स्वीकार न करें - लेकिन मनमोहन सिंह ने उनकी लेकिन एक न सुनी और डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बन गए । 
राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को डर है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के दूसरे सदस्य भी यदि अरुण शर्मा और मनमोहन सिंह के 'रास्ते' पर चल पड़े, तो कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में उनके लिए मनमानी करना मुश्किल क्या - असंभव ही हो जायेगा और तब डिस्ट्रिक्ट पूरी तरह से उनके हाथ से निकल जायेगा । इसी डर के कारण मनमोहन सिंह का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनना राजा साबू और उनके गिरोह के गवर्नर्स को हजम नहीं हो पा रहा है ।