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Monday, July 8, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के इंस्टॉलेशन समारोह में 'बिन बुलाए' आए यश पाल दास को मिली तवज्जो तथा शाजु पीटर व जेपीएस सिबिया की मौजूदगी को डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में राजा साबू गिरोह की वापसी करने की तैयारी के संकेतों के रूप में देखा जा रहा है

चंडीगढ़ । जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में राजेंद्र उर्फ राजा साबू के साथ-साथ उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स की उपस्थिति ने डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का सर चकराने का काम किया है । उल्लेखनीय है कि जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रमों में राजा साबू तो आते रहे हैं; लेकिन यश पाल दास, शाजु पीटर, जेपीएस सिबिया जैसे उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स कभी नहीं दिखे हैं । इसीलिए इनकी उपस्थिति पर लोगों को हैरानी हुई और फुसफुसाहटें शुरू हुईं कि यह लोग कैसे आ गए ? इन पूर्व गवर्नर्स का आरोप रहा है कि जितेंद्र ढींगरा ने इन्हें कभी अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित ही नहीं किया । पिछले एक कार्यक्रम में कुछेक लोगों के सामने राजा साबू ने जितेंद्र ढींगरा से यह शिकायत करते हुए उन्हें सुझाव दिया था कि वह इन पूर्व गवर्नर्स को भी आमंत्रित किया करें । समझा गया कि राजा साबू के सुझाव पर जितेंद्र ढींगरा ने इन पूर्व गवर्नर्स को भी आमंत्रित कर लिया होगा, और इसलिए यह जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रम में आ पहुँचे । जितेंद्र ढींगरा ने लेकिन कई मौकों पर अलग अलग लोगों के सामने स्पष्ट कहा कि उन्होंने इन्हें 'खासतौर' से नहीं आमंत्रित किया था । जितेंद्र ढींगरा का कहना रहा कि उन्होंने तो पहले की तरह ही सभी के लिए एक आम निमंत्रण भेजा था - पहले यह उस निमंत्रण को निमंत्रण नहीं मानते थे, लेकिन अब की बार उन्होंने मान लिया; तो इस बदले हुए रवैये का कारण वही जानते होंगे । दरअसल पिछले करीब तीन वर्षों में डिस्ट्रिक्ट में जो राजनीतिक व प्रशासनिक गंद मचा रहा, उसके लिए राजा साबू के इन तीन नजदीकी पूर्व गवर्नर्स को ही मुख्य रूप से जिम्मेदार माना/ठहराया जाता रहा है । इसीलिए पहले टीके रूबी के गवर्नर-वर्ष में इन्हें कोई तवज्जो नहीं मिली, और अब जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-वर्ष में भी इनके साथ वैसा ही सुलूक होने की उम्मीद की जा रही थी । इसीलिए लोगों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट में अपना 'वनवास' खत्म करने के लिए ही राजा साबू के नजदीकी पूर्व गवर्नर्स यश पाल दास, शाजु पीटर और जेपीएस सिबिया 'बिन बुलाए' ही जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रम में आ पहुँचे ।
दरअसल राजा साबू और उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट की प्रशासनिक व्यवस्था व राजनीति में पुनर्वापसी के लिए लगातार हाथ-पैर मार रहे हैं । अपनी पुनर्वापसी का विश्वास उन्हें मौजूदा व भावी गवर्नर्स - जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के 'व्यवहार' से भी हुआ । इन तीनों के 'व्यवहार' से राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स को लगा कि यह तीनों उनके नजदीक आना/रहना चाहते हैं । राजा साबू के नजदीकी मनमोहन सिंह को जितेंद्र ढींगरा द्वारा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाए जाने से राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स का पुनर्वापसी का हौंसला और बढ़ा । राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स लेकिन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के प्रति अपनी खुन्नस को नहीं छोड़ पाए और उन्हें लगा कि जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के ढीले-ढाले रवैये में वह टीके रूबी को निशाना बना लेंगे । इसी के तहत अभी हाल तक, राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने टीके रूबी के डीआरएफसी (डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन) बनने में अड़चनें डालने के प्रयास किए । इन प्रयासों पर लेकिन जितेंद्र ढींगरा के कड़ा रवैया अपनाने से पानी फिर गया । जितेंद्र ढींगरा के 'कभी नर्म तो कभी गर्म' रहने पर राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को इतना तो शायद समझ में आ गया है कि जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के साथ उनके नजदीक तो आ सकते हैं - लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह तीनों उन्हें टीके रूबी के साथ 'बदतमीजी' करने का मौका दे देंगे । माना/समझा जा रहा है कि इसीलिए राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने अब यह योजना बनाई है कि तवज्जो न दिए जाने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में उन्हें अपनी उपस्थिति बनानी और 'दिखानी' चाहिए; इससे वह सत्ता में न होते हुए भी मेडीकल मिशन जैसे अपने स्वार्थी 'काम' बना सकेंगे - और इसीलिए यश पाल दास, शाजु पीटर व जेपीएस सीबिया 'बिन बुलाए' ही जितेंद्र ढींगरा के इंस्टॉलेशन कार्यक्रम में आ पहुँचे ।
दरअसल राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में शामिल होकर वह एक तरफ तो अपने 'काम' बनाने/निकालने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट के लोगों को यह संकेत दे सकते हैं कि जितेंद्र ढींगरा और उनके साथियों ने उनके साथ नजदीकी बनाना शुरू कर दिया है और इसीलिए वह उन्हें अपने कार्यक्रमों में शामिल कर रहे हैं; और दूसरी तरफ वह विभिन्न मुद्दों पर अपनी अलग राय रख कर वह जितेंद्र ढींगरा और उनके साथियों के बीच खटराग पैदा करने का मौका पा सकते हैं । राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत हुई नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी के मामले में अपनी अलग राय देकर अपने इरादे जाहिर भी कर दिए हैं । खुद राजा साबू ने जितेंद्र ढींगरा को सलाह दी है कि इस वर्ष किसी महिला को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुना जाना चाहिए । इस सलाह के जरिए राजा साबू ने वास्तव में नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को विवादास्पद बनाने का दाँव चला है । जितेंद्र ढींगरा ने हालाँकि अभी तो नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी पर कोई 'समझौता' करने से इंकार कर दिया है; लेकिन कौन जानता है कि राजा साबू ने जो दाँव चला है, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में टीके रूबी व जितेंद्र ढींगरा की जो धाक जमी है, वह बिखर न जाए ! जितेंद्र ढींगरा के कई एक नजदीकियों का कहना है कि उन्हें यह बात समझ नहीं आती है कि जितेंद्र ढींगरा जब यह मानते हैं और कहते भी रहते हैं कि राजा साबू और उनके संगी-साथी अपनी 'हरकतों' से बाज नहीं आयेंगे, तब फिर वह उन्हें तवज्जो देते हुए हरकतें करने का मौका क्यों दे रहे हैं ? पिछले तीन वर्षों में राजा साबू और उनके गिरोह के साथ छिड़ी लड़ाई में टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा का लगातार साथ देने वाले कई लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति और व्यवस्था में राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को जब पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है, तब फिर उन्हें किसी भी तरह की तवज्जो देकर उनके लिए वापसी का रास्ता क्यों तैयार किया जा रहा है ? डिस्ट्रिक्ट के कई लोग इंस्टॉलेशन कार्यक्रम में यश पाल दास को मिली तवज्जो तथा शाजु पीटर व जेपीएस सिबिया की मौजूदगी को पिछले तीन वर्षों की 'लड़ाई' में मिली जीत पर पानी फिरने की शुरुआत के रूप में भी देख/पहचान रहे हैं ।

Friday, July 27, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 के ग्लोबल ग्रांट प्रोजेक्ट को जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना ही मंजूर करवाने के पीछे राजा साबू की इमरजेंसी आखिर क्या है; और मुट्ठी भर रोटेरियंस के भ्रष्ट आचरण का रोना रोने वाले गुलाम वहनवती इस मामले में मजबूर क्यों हो गए हैं ?

चंडीगढ़ । रोटरी फाउंडेशन ने जरूरी शर्तों को अनदेखा करते हुए डिस्ट्रिक्ट 3080 के रोटरी ग्लोबल ग्रांट जीजी 1875158 के आवेदन को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 97 हजार अमेरिकी डॉलर, यानि करीब 67 लाख रुपए दिए जायेंगे । यह पैसा यूगांडा के मसाका शहर के हॉस्पिटल के मरीजों के ईलाज में तथा हॉस्पिटल के मेडीकल स्टाफ को आँख, नाक, कान, गले, दाँत की देखभाल व उनके ईलाज के लिए प्रशिक्षण देने पर खर्च किया जायेगा । इसके लिए डॉक्टरों तथा वॉलिंटियर्स की एक टीम चंडीगढ़ से मसाका जाएगी । मसाका, चंडीगढ़ से करीब साढ़े पाँच हजार किलोमीटर दूर है । मसाका की आबादी एक लाख से भी कम है । मरीज कहीं के भी हों, उनके ईलाज की व्यवस्था होनी ही चाहिए, और यह व्यवस्था कोई भी कहीं से भी कर सकता है । रोटरी इंटरनेशनल और रोटेरियंस ने मरीजों की देखभाल और उनके ईलाज पर विशेष ध्यान केंद्रित किया हुआ है, और इसके लिए खासी तत्परता के साथ काफी पैसा खर्च किया जाता है । हालाँकि पैसा कड़ी जाँच-पड़ताल के तहत ही खर्च किया जाता है, खासकर भारत के डिस्ट्रिक्ट्स की तरफ से जाने वाले आवेदनों की तो कड़ी जाँच-पड़ताल की जाती है । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 3011 में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल के क्लब के एक बड़े ग्रांट-प्रोजेक्ट की तीन बार ऑडिट करने की जरूरत पड़ी, जिसके चलते विनोद बंसल तथा क्लब के अन्य पदाधिकारियों के लिए शर्मिंदगी की स्थिति बनी । वित्तीय घपलेबाजी के आरोपों के चलते ही डिस्ट्रिक्ट 3012 में सतीश सिंघल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्त हुए और डिस्ट्रिक्ट 3030 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर निखिल किबे को रोटरी से ही बाहर होना पड़ा । रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वहनवती पिछले दिनों कई मौकों पर इस शर्मनाक तथ्य को बता चुके हैं कि भारत के कुछेक मुट्ठी भर रोटेरियंस के भ्रष्ट आचरण की वजह से रोटरी इंटरनेशनल में भारत की छवि कलुषित हो रही है; इस तथ्य पर गंभीर चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने बार-बार इसे बेहद शर्मनाक बताया है ।
इसके बावजूद, डिस्ट्रिक्ट 3080 के एक ग्रांट-आवेदन को जरूरी शर्तों को अनदेखा करते हुए मंजूर कर लिया जाता है । ऐसा इसलिए हो जाता है, क्योंकि इसके लिए पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू की जोरदार सिफारिश होती है । जाहिर है कि यह सुविधा हर किसी को नहीं मिलेगी । किसी के लिए भी यह समझना मुश्किल है कि मसाका जैसे एक छोटे से शहर में लोगों के नाक, कान, आँख, गले के ईलाज में ऐसी क्या इमरजेंसी आ गई कि राजा साबू को जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना अपने ग्रांट-आवेदन को मंजूर करने के लिए कहना पड़ा, और रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन को उनकी बात मानने के लिए मजबूर भी होना पड़ा ? आरोपपूर्ण चर्चाओं के अनुसार, मामला इमरजेंसी ईलाज का नहीं है, इमरजेंसी तो राजा साबू और उनके नजदीकियों के मौज-मजे की है । उल्लेखनीय है कि मसाका, अफ्रीका की एक साफ पानी की अत्यंत सुंदर व मशहूर झील, लेक विक्टोरिया के पश्चिम किनारे पर बसा शहर है और अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना/पहचाना जाता है । वहाँ घूमने/फिरने के लिहाज से जुलाई/अगस्त के महीने को ही उपयुक्त देखा/माना जाता है । राजा साबू ने जुलाई महीने में ही वहाँ के मरीजों के ईलाज की तैयारी की थी । मूल रूप में यह राजा साबू के क्लब का ही प्रोजेक्ट था । लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा ने प्रोजेक्ट को पूरा ब्यौरा जाने बिना प्रोजेक्ट के आवेदन पर हस्ताक्षर करने से चूँकि मना कर दिया था, इसलिए राजा साबू का यह प्रोजेक्ट खटाई में पड़ता दिख रहा था । ज्यादा देर होती तो मरीजों के ईलाज के बहाने जुलाई/अगस्त के सुहाने मौसम में मसाका घूमने जाने का मौका राजा साबू और उनके साथियों से छिन जाता । इसलिए अपने पूर्व प्रेसीडेंट होने के कारण बने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए राजा साबू ने जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना ही रोटरी फाउंडेशन से ग्रांट मंजूर करवा ली है ।
डिस्ट्रिक्ट के लोगों के लिए हैरानी की बात यह है कि राजा साबू को अपने डिस्ट्रिक्ट के भौगिलिक क्षेत्र - यानि चंडीगढ़, यमुनानगर, देहरादून, सहारनपुर, रुड़की, अंबाला, पानीपत तथा इनके आसपास के क्षेत्रों में नाक, कान, आँख, गले के मरीज दिखाई नहीं देते हैं क्या ? यह क्षेत्र, और खासकर उत्तराखंड का क्षेत्र इस समय बारिश और बाढ़ की भारी तबाही का शिकार है, और वहाँ राहत-कार्यों की तत्काल जरूरत है - राजा साबू और उनके साथी, पूर्व गवर्नर शाजु पीटर व मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल, उनकी तबाही पर ध्यान न देते हुए लेकिन मसाका जाने की तैयारी कर रहे हैं या करवा रहे हैं । इस ग्रांट के लिए जिस खुफिया तरीके से तैयारी की गई है, वही ग्रांट के नाम पर होने वाली घपलेबाजी के संदेह खड़ा करती है । रोटरी फाउंडेशन के नियमानुसार, डिस्ट्रिक्ट में ग्लोबल ग्रांट के आवेदन पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के भी हस्ताक्षर होना जब जरूरी हैं, तब सवाल यही है कि राजा साबू, शाजु पीटर और प्रवीन गोयल की तिकड़ी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा से तथ्यों को छिपा क्यों रही है; और क्यों जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना ग्लोबल ग्रांट को मंजूर करवाया गया है ? रोटरी फाउंडेशन में ट्रस्टी के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे गुलाम वहनवती, जो भारत के कुछेक मुट्ठी भर रोटेरियंस के भ्रष्ट आचरण के कारण रोटरी इंटरनेशनल में भारत के लिए बनने वाली शर्मनाक स्थिति का रोना रोते रहते हैं, इस मामले में आश्चर्यजनक रूप से चुप हैं । कुछेक लोगों का तो आरोप है कि शर्तों को पूरा किए बिना राजा साबू की ग्लोबल ग्रांट  मंजूर करवाने का काम गुलाम वहनवती ने ही किया है । देखना दिलचस्प होगा कि इसके बाद भी रोटरी के कार्यक्रमों में गुलाम वहनवती भारत के कुछेक मुट्ठी भर रोटेरियंस के भ्रष्ट आचरण के कारण रोटरी इंटरनेशनल में भारत के लिए बनने वाली शर्मनाक स्थिति की बात पर घड़ियाली आँसू बहाना जारी रखते हैं, या इस मामले को छोड़ देते हैं ।


Tuesday, July 3, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर का पद मिलने से पहले ही भरत पांड्या पद का रौब दिखा कर डिस्ट्रिक्ट 3080 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा को मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करके राजा साबू गिरोह की 'सेवा' करेंगे क्या ?

चंडीगढ़ । भरत पांड्या को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की कुर्सी तो अभी करीब एक वर्ष बाद मिलेगी, लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3080 से जुड़ी मुसीबतों ने उन्हें अभी से घेरना शुरू कर दिया है । पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने भरत पांड्या पर दबाव डालना शुरू किया है कि वह रोटरी फाउंडेशन से संबद्ध डिस्ट्रिक्ट क़्वालीफिकेशन मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा के हस्ताक्षर करवाएँ । भरत पांड्या चूँकि जितेंद्र ढींगरा के डायरेक्टर होंगे, इसलिए राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को यकीन है कि भरत पांड्या दबाव डालेंगे, तो जितेंद्र ढींगरा उक्त मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करने से बच नहीं सकेंगे । उल्लेखनीय है कि उक्त मेमोरेंडम के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट्स में रोटरी फाउंडेशन से जुड़े खर्चों की निगरानी की जिम्मेदारी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट तथा डीआरएफसी की होती है; इसलिए रोटरी फाउंडेशन को उक्त मेमोरेंडम पर डिस्ट्रिक्ट के इन तीनों पदाधिकारियों के हस्ताक्षर चाहिए होते हैं । डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा उक्त मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करने से पहले यह जानना चाहते हैं कि रोटरी फाउंडेशन से मिलने वाली रकम का किन प्रोजेक्ट्स में कैसे और कितना कितना इस्तेमाल होगा ? डीआरएफसी के रूप में शाजु पीटर का कहना है कि यह सब जानकार वह क्या करेंगे, वह तो बस चुपचाप उक्त मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर कर दें - जैसे कि अभी तक के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट्स करते आ रहे हैं । शाजु पीटर का कहना है कि यह सब तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल ने भी उनसे नहीं पूछा या कहा है और उन्होंने चुपचाप वहाँ हस्ताक्षर कर दिए, जहाँ उनसे हस्ताक्षर करने को कहा गया - जितेंद्र ढींगरा तो अभी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हैं, वह यह सब आखिर क्यों जानना चाह रहे हैं ?
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 3080 में रोटरी फाउंडेशन सहित दूसरे फंड्स के मामले में जिस फार्मूले को अपनाया जाता है, वह है - 'खाता न बही, जो राजा साबू कहें वही सही ।' डिस्ट्रिक्ट के कई एकाउंट्स पर राजा साबू और उनके चहेते कुंडली मारे बैठे हैं, और उनमें काला-सफेद करते रहते हैं । इसी कारण निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट से जुड़े कई एकाउंट्स के हिसाब-किताब देखने को नहीं मिले; जिसके चलते रोटरी के सौ वर्षों से अधिक के इतिहास में पहली बार एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को यह निवेदन करते हुए इंटरनेशनल बोर्ड में पिटीशन दायर करना पड़ी कि उन्हें उनके डिस्ट्रिक्ट से जुड़े एकाउंट्स के हिसाब-किताब उपलब्ध करवाए जाएँ । राजा साबू रोटरी इंटरनेशनल में यह जुगाड़ कर लेने में सफल हुए कि टीके रूबी की पिटीशन पर इंटरनेशनल बोर्ड टीके रूबी को हिसाब-किताब उपलब्ध करवाने का आदेश न जारी कर दे; रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सामने यह मजबूरी भी थी कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर से यह भी नहीं कह सकता था कि भई, तुम क्यों हिसाब-किताब माँग रहे हो, राजा साबू और उनके साथी जो काला-सफेद कर रहे हैं वह उन्हें करते रहने दो ! लिहाजा रोटरी इंटरनेशनल ने बीच का रास्ता निकाला और उसने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को लिखा कि यह आपके डिस्ट्रिक्ट का अंदरूनी मामला है, इसे आप डिस्ट्रिक्ट में ही आपस में मिल-बैठ कर हल करो - और हमें माफ करो । इस तरह, रोटरी इंटरनेशनल में पिटीशन दायर करने के बाद भी टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट से जुड़े हिसाब-किताब देखने को नहीं मिल सके । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी सुशील गुप्ता की सहमति तथा रोटरी इंटरनेशनल की रीजनल ग्रांट्स ऑफिसर चंद्रा पामर के आदेश के बावजूद डिस्ट्रिक्ट ग्रांट 1860814 को स्वीकृति देने के मामले में लगातार इंकार करते हुए और फिर अपने इंकार से पलटते हुए डीआरएफसी के रूप में शाजु पीटर ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को कितना और कैसे कैसे परेशान किया, उसे 'रचनात्मक संकल्प' की 17 जून की रिपोर्ट में पढ़ा जा सकता है ।
राजा साबू तथा उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स, खासकर डीआरएफसी के रूप में शाजु पीटर के रवैये को देखते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा ने साफ कह दिया है कि जब उन्हें यह बताया ही नहीं जा रहा है कि रोटरी फाउंडेशन से मिलने वाली रकम कहाँ और कैसे खर्च होगी, तब फिर वह उसकी निगरानी की जिम्मेदारी कैसे ले सकते हैं । समझा जाता है कि राजा साबू गिरोह के लोग रोटरी फाउंडेशन के पैसे पर किसी दूसरे देश एक मेडिकल मिशन पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा से छिपाया जा रहा है । उल्लेखनीय है कि अभी करीब तीन-चार महीने पहले ही पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रंजीत भाटिया तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के साथ धोखाधड़ी करके एक मेडीकल मिशन ले गए थे । दरअसल रंजीत भाटिया को जब टीके रूबी उक्त मेडीकल मिशन में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हुए नजर आए, तो रंजीत भाटिया ने उन्हें मेडीकल मिशन पर जाने का कार्यक्रम रद्द कर देने की सूचना दी और उक्त मिशन के लिए डीडीएफ से मिली रकम को भी वापस कर दिया; लेकिन बाद में पता चला कि टीके रूबी - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी से छिपा कर एक दूसरे डिस्ट्रिक्ट से डीडीएफ की रकम लेकर उक्त मिशन पर जाने का कार्यक्रम पूरा कर लिया गया । जितेंद्र ढींगरा का कहना है कि जिस तरह से टीके रूबी को धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया, उस तरह से वह शिकार नहीं बनेंगे । रोटरी फाउंडेशन से मिली रकम के एक एक पैसे का हिसाब यदि उन्हें जानने/देखने को नहीं मिलेगा, तो वह संदर्भित मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे । राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने अभी तक जिन जिन लोगों से जितेंद्र ढींगरा पर हस्ताक्षर करवाने के लिए दबाव डलवाया है, उनसे जितेंद्र ढींगरा ने एक ही बात कही है कि क्या आप गारंटी लेते हो कि रोटरी फाउंडेशन के पैसे का दुरूपयोग नहीं होगा; यदि आप गारंटी लो, तो मैं अभी हस्ताक्षर कर देता हूँ । लेकिन मजेदार दृश्य यह बना है कि कोई भी इस बात की गारंटी लेने को तैयार ही नहीं हो रहा है कि राजा साबू गिरोह के लोग रोटरी फाउंडेशन के पैसे में घपला नहीं करेंगे ।
राजा साबू गिरोह ने संदर्भित मेमोरेंडम पर जितेंद्र ढींगरा के हस्ताक्षर करवाने के लिए अब अगले रोटरी वर्ष में इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने वाले भरत पांड्या पर दबाव बनाना शुरू किया है । गिरोह के ही एक सदस्य ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया है कि भरत पांड्या का कहना टालना जितेंद्र ढींगरा के लिए मुश्किल होगा, और इस तरह भरत पांड्या के दबाव में जितेंद्र ढींगरा मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर हो जायेंगे । भरत पांड्या के लिए मुसीबत की बात लेकिन यह है कि जितेंद्र ढींगरा रोटरी फाउंडेशन से जुड़े हिसाब-किताब में पारदर्शिता रखने की जो माँग कर रहे हैं, उसे वह न तो ठुकरा सकते हैं - और न ही राजा साबू गिरोह के लोगों को उसके लिए राजी कर सकते हैं । भरत पांड्या को बताया गया है कि रोटरी के पैसों के इस्तेमाल को लेकर राजा साबू दोहरा रवैया दिखाते हैं : वरिष्ठ होने के नाते उनसे जब कहा जाता है कि वह मामलों को देखें और उन्हें दुरुस्त करवाएँ, तो राजा साबू यह कहते हुए बच निकलते हैं कि मुझे बीच में मत डालो, मुझसे कोई मतलब नहीं है; लेकिन जब मलाई बँट रही होती है तो राजा साबू लाइन में सबसे आगे खड़े नजर आते हैं । ऐसे में भरत पांड्या के सामने समस्या है कि कैसे वह मेमोरेंडम पर जितेंद्र ढींगरा के हस्ताक्षर करवाने की राजा साबू गिरोह की कोशिशों को सफल करें/करवाए ? देखना दिलचस्प होगा कि भरत पांड्या इंटरनेशनल डायरेक्टर का पद मिलने से पहले ही अपने पद का रौब दिखा कर अपने डायरेक्टर-काल के एक गवर्नर को कैसे मजबूर करके राजा साबू गिरोह की सेवा करते हैं ?

Saturday, June 23, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए माँगे जा रहे विज्ञापनों के रेट कार्ड देने से इंकार करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल तथा फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन शाजु पीटर की कार्रवाई ने डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के मामले में घपलेबाजी के आरोपों को हवा दी

चंडीगढ़ । प्रवीन गोयल के गले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की माला पड़ने में तो अभी करीब सप्ताह भर का समय बाकी है, लेकिन मुसीबतों की माला लगता है कि अभी से उनके गले का फंदा बनने लगी है । अपने गवर्नर-काल की डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए इकट्ठा किए जा रहे विज्ञापनों के रेट को छिपाने को लेकर प्रवीन गोयल संदेह और आरोपों के घेरे में आ गए हैं । दरअसल हुआ यह कि डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य एमपी गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के विभिन्न पृष्ठों के रेट उनसे पूछ लिए, जिस पर प्रवीन गोयल ने चुप्पी साध ली । एमपी गुप्ता को जब प्रवीन गोयल से कोई जबाव नहीं मिला तो उन्हें दाल में कुछ काला नजर आया, और तब उन्होंने डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन शाजु पीटर को यह कहते/बताते हुए चिट्ठी लिखी कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल उन्हें डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के विभिन्न पृष्ठों के विज्ञापन के रेट नहीं दे/बता रहे हैं, इसलिए वह आवश्यक कार्रवाई करें । एमपी गुप्ता को लेकिन शाजु पीटर से भी कोई जबाव नहीं मिला । यह बात जब डिस्ट्रिक्ट के लोगों के सामने आई तो कई लोगों ने कहा/बताया कि प्रवीन गोयल ने उनसे डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन तो माँगे हैं लेकिन रेट कार्ड नहीं दिया है - और इस तरह बात फिर बढ़ती ही गई । लोगों के बीच हुई बातचीत से पता चला कि प्रवीन गोयल ने समान श्रेणी के विज्ञापनों के लिए अलग अलग लोगों से अलग अलग दाम माँगे हैं, और शायद इसीलिए वह रेट कार्ड देने में आनाकानी कर रहे हैं । इसी तरह की बातों के बीच आरोप लगे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल अपनी डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन जुटाने की आड़ में घपलेबाजी कर रहे हैं और विज्ञापन के नाम पर लोगों से मनमाने दाम बसूल रहे हैं ।
एमपी गुप्ता को विज्ञापन के रेट न देने/बताने का प्रवीन गोयल ने अपने नजदीकियों को जो कारण बताया है, उसने मामले को और दिलचस्प व संदेहास्पद तथा आरोपपूर्ण बना दिया है । प्रवीन गोयल का कहना है कि एमपी गुप्ता रेट इसलिए नहीं पूछ रहे हैं, कि उन्हें विज्ञापन देना है; वह तो रेट इसलिए पूछ रहे हैं, ताकि उसमें वह कोई गड़बड़ी खोजें और फिर उन पर आरोप लगाने का काम करें । लोगों का कहना है कि यदि यह बात सच भी है, तो प्रवीन गोयल को इसमें परेशानी क्या है और क्यों है ? लोगों के बीच सवाल है कि प्रवीन गोयल ने क्या सचमुच डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन जुटाने के मामले में गड़बड़ी की हुई है, और उन्हें डर है कि एमपी गुप्ता या कोई और उन गड़बड़ियों को कहीं पकड़ न ले ? लोगों का कहना/पूछना है कि प्रवीन गोयल ने विज्ञापनों के मामले में यदि वास्तव में कोई घपला नहीं किया है, तो फिर उन्हें डर क्यों है कि एमपी गुप्ता को उन्होंने यदि रेट बताए तो वह उनकी घपलेबाजी पकड़ लेंगे ? प्रवीन गोयल के नजदीकियों और समर्थकों का भी मानना और कहना है कि एमपी गुप्ता द्वारा विज्ञापनों के रेट माँगने के बाद भी उन्हें रेट न देकर प्रवीन गोयल ने नाहक ही मुसीबत और बदनामी मोल ले ली है, और लोगों के दिमाग में शक के बीज बो दिए हैं । दरअसल डिस्ट्रिक्ट में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू की छत्रछाया में रहने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स पर बेईमानी करने के आरोप लगते और साबित होते रहे हैं; इसी चक्कर में एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को दो दो बैलेंसशीट लानी पड़ी थीं तथा एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को हेराफेरी के आरोप में उनके क्लब से ही निकल दिया गया है । इसलिए डिस्ट्रिक्ट में लोग राजा साबू की छत्रछाया में रहने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के कामों और फैसलों को लेकर सतर्क हो गए हैं ।
लोगों की यही सतर्कता प्रवीन गोयल के लिए मुसीबत तथा घबराहट का कारण बन गई है । घबराहट में व्यक्ति जैसे रस्सी को भी साँप समझ लेता है, लगता है कि वैसे ही एमपी गुप्ता द्वारा विज्ञापन के रेट माँगे जाने को प्रवीन गोयल ने 'पकड़े' जाने के रूप में समझ लिया - और उन्होंने मान लिया कि वह रेट नहीं दे कर पकड़े जाने से बच जायेंगे । इस मामले में एमपी गुप्ता की चिट्ठी पर फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन के रूप में शाजु पीटर द्वारा भी चुप्पी मार जाने से मामला और गड़बड़ा गया है । मजे की बात यह है कि इनके ही नजदीकियों और समर्थकों का कहना है कि विज्ञापन के रेट देने/बताने से बच/छिप कर प्रवीन गोयल और शाजु पीटर ने लोगों को यह सोचने के लिए प्रेरित किया है कि डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन जुटाने के मामले में जरूर ही ऐसी कोई बात है, जिसे यह दोनों लोगों से छिपाना चाहते हैं, और इस तरह इन्होंने अपने आप को मुसीबत व फजीहत के घेरे में फँसा लिया है । इनके नजदीकियों और समर्थकों का ही मानना और कहना है कि एमपी गुप्ता द्वारा विज्ञापनों के रेट कार्ड माँगते ही प्रवीन गोयल यदि उन्हें रेट कार्ड उपलब्ध करवा देते, तो बबाल न फैलता और प्रवीन गोयल आरोपों के घेरे में न फँसते । लोगों का कहना है कि इस प्रसंग से प्रवीन गोयल को सबक लेना चाहिए तथा अपने कार्यक्रमों के खर्चों को पारदर्शी बनाना/रखना चाहिए, जिससे कि कोई उन पर बेईमान होने का आरोप न लगा सके । कई लोगों को लेकिन यह भी लगता है कि राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट गवर्नर से इतनी हेराफेरियाँ करवाते हैं, कि वह बेचारा चाहे भी - तो भी अपने कार्यक्रमों के खर्चों को लेकर पारदर्शी नहीं हो सकता है । यह देखना दिलचस्प होगा कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में प्रवीन गोयल कैसे राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की बेईमानियों को अंजाम देते हैं, या अपने आप को उनसे बचाते हैं !

Sunday, June 17, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में टीके रूबी को लेकर 'डाउन सिंड्रोम' के शिकार राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स के रवैये को एक बार फिर जाहिर करते हुए शाजु पीटर ने टीके रूबी के डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के आवेदन को चालाकी दिखाते हुए खारिज किया और कई क्लब्स का हक मारा

चंडीगढ़ । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी सुशील गुप्ता की सहमति तथा रोटरी इंटरनेशनल की रीजनल ग्रांट्स ऑफिसर चंद्रा पामर के आदेश के बावजूद डीआरएफसी के रूप में शाजु पीटर ने डिस्ट्रिक्ट ग्रांट 1860814 को स्वीकृति देने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी की माँग को खारिज करके एक बार फिर साबित कर दिया है कि रस्सी जल गई है, पर राजा साबू गिरोह के लोगों का बल अभी भी नहीं गया है - और डिस्ट्रिक्ट में मनमानी लूट-खसोट करने की कोशिशों से वह अभी भी बाज नहीं आ रहे हैं । पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन हाल ही में संपन्न हुए डिस्ट्रिक्ट असेम्बली कार्यक्रम में 'जोर का झटका धीरे से' वाले अंदाज में बता गए हैं कि रोटरी में राजा साबू और उनके डिस्ट्रिक्ट की अब पहले जैसी साख नहीं रह गई है; राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने इस बात को कैसे लिया, यह तो वही जानें, लेकिन शाजु पीटर की कार्रवाई 'बताती' है कि उन्होंने केआर रवींद्रन की 'चेतावनी' भरे तथ्य की परवाह करने की जरूरत नहीं समझी है । अभी हाल ही में, रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने डिस्ट्रिक्ट 3080 के गवर्नर्स को 'सलाह' दी है कि जिन मुद्दों पर उनके बीच मतभेद उभरते हैं, उन्हें आपस में विचार-विमर्श करके स्वयं ही हल करें - लेकिन लगता है कि टीके रूबी को लेकर राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने जिस तरह से अपना मुँह खुद ही नोच नोच कर कर लहुलुहान कर लिया है, उससे उनका मन अभी भी भरा नहीं है और वह अभी अपनी और फजीहत करवाने पर तुले हुए हैं ।
डिस्ट्रिक्ट ग्रांट 1860814 के मामले में शाजु पीटर ने जो रवैया 'दिखाया', उससे एक बार फिर लोगों को यह नजारा देखने को मिला कि टीके रूबी के मामले में राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स में 'डाउन सिंड्रोम' जैसी बीमारी के लक्षण न सिर्फ बने हुए हैं, बल्कि वह बढ़ते ही जा रहे हैं । इस बीमारी के शिकार लोगों में जो मानसिक विकार पैदा होता है, उसमें हालाँकि 'उचित देखभाल' से सुधार किया जा सकता है; लेकिन टीके रूबी को लेकर राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स में जो मानसिक विकार पैदा हुआ है, उसे रोटरी इंटरनेशनल के विभिन्न पदाधिकारियों के द्वारा किये गए 'उपचार' के बावजूद सुधारा नहीं जा सका है । इस बीमारी के शिकार राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने निवर्त्तमान इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म तक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, क्योंकि उन्होंने टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर घोषित कर दिया था । डिस्ट्रिक्ट 3080 में ही नहीं, शायद किसी भी डिस्ट्रिक्ट में पहली बार यह देखने को मिला कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में इंटरनेशनल डायरेक्टर को शामिल होना पड़ा हो, ताकि गवर्नर्स के बीच विचार-विमर्श के जरिये मामलों को हल करने की 'सोच' बन सके । लेकिन बासकर चॉकलिंगम के जरिये रोटरी इंटरनेशनल पदाधिकारियों द्वारा किया गया यह प्रयास भी राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की बीमारी दूर नहीं कर सका । एक सर्वमान्य समझ है कि व्यक्ति ठोकरें खाकर भी सबक सीखता है; टीके रूबी के मामले में राजा साबू और उनके साथी ठोकरों पर ठोकरें खाते रहे हैं लेकिन मजाल है कि उन्होंने कोई सबक सीखा हो । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने टीके रूबी को 'गिराने' के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से डिस्ट्रिक्ट में तिकड़में कीं, रोटरी इंटरनेशनल में शिकायतें कीं, थाना-कचहरी तक किया - लेकिन इतने सब के बाद भी वह टीके रूबी का कुछ नहीं बिगाड़ पाए हैं । इस असफलता ने लगता है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की बीमारी को और बढ़ा दिया है, जिसका असर डिस्ट्रिक्ट ग्रांट 1860814 के मामले में शाजु पीटर द्वारा अपनाए गए रवैये में दिखता है ।
शाजु पीटर को उक्त 'बीमारी' ने किस कदर जकड़ा हुआ है, यह इसी से साबित है कि चंद्रा पामर को संबोधित पत्र में शाजु पीटर यह झूठ बोलने में भी नहीं हिचकिचाये कि उक्त ग्रांट का पूरा लाभ टीके रूबी के क्लब को मिलेगा । शाजु पीटर ने अपने इस पत्र में यह जताने का प्रयास किया है कि जैसे वह बहुत नियम-कानून से काम करने वाले व्यक्ति हैं; पर यदि वह सचमुच नियम-कानून से काम करते होते तो वर्ष 2015-16 की जो डिस्ट्रिक्ट ग्रांट उन्होंने अब बंद की है, वह जून 2016 में बंद हो गई होती । जून 2016 में बंद हो जाने वाली डिस्ट्रिक्ट ग्रांट को शाजु पीटर ने यदि दो वर्ष तक खोले रखा है, तो इसमें पीछे उनका वास्तवविक उद्देश्य डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के पैसे को ग्लोबल ग्रांट में ट्रांसफर करवाने की तिकड़म के रूप में देखा गया है । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ग्लोबल ग्रांट को हड़प कर उससे अपने घूमने/फिरने और अपने संबंध बनाने का काम करने का जुगाड़ बनाये रखने में दिलचस्पी लेते हैं । शाजु पीटर ने जो डिस्ट्रिक्ट ग्रांट अब बंद की है, वह यदि जून 2016 में बंद हो गई होती, तो उसके बाद के दो वर्षों में मंजूर होने वाली डिस्ट्रिक्ट ग्रांट का पैसा क्लब्स को मिलता; लेकिन शाजु पीटर के बेईमानीपूर्ण रवैये से रमन अनेजा और टीके रूबी के गवर्नर-काल में डिस्ट्रिक्ट ग्रांट का पैसा ग्लोबल ग्रांट में ट्रांसफर हो गया है, जो प्रोजेक्ट्स के नाम पर राजा साबू व उनके साथी गवर्नर्स के घूमने/फिरने व संबंध बनाने के काम आयेगा । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी ने एक प्रोजेक्ट के जरिये डिस्ट्रिक्ट ग्रांट का पैसा कुछेक क्लब्स के प्रोजेक्ट्स को दिलवाने का प्रयास किया था, जिसे लेकिन शाजु पीटर ने नियमों का हवाला देकर सफल नहीं होने दिया ।
खास बात यह रही कि शाजु पीटर की आपत्ति को लेकर टीके रूबी ने रोटरी इंटरनेशनल की रीजनल ग्रांट्स ऑफिसर चंद्रा पामर से भी बात की और चंद्रा पामर ने भी माना और कहा कि टीके रूबी की माँग को पूरा किया जा सकता है; पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी सुशील गुप्ता ने भी टीके रूबी के दावे को उचित माना और उसके लिए समर्थन घोषित किया - लेकिन फिर भी शाजु पीटर ने टीके रूबी के आवेदन को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है । ऐसा करते हुए शाजु पीटर को यह भी लगता है कि जैसे उन्होंने टीके रूबी को भी चोट पहुँचाई है । आरोपपूर्ण चर्चा यही है कि शाजु पीटर ने ऐसा इसलिए भी किया है कि टीके रूबी की कोशिशों के चलते डिस्ट्रिक्ट ग्रांट का पैसा यदि क्लब्स को मिल गया तो ग्लोबल ग्रांट के जरिये राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को मिलने वाला पैसा कम पड़ जाता; राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को ग्लोबल ग्रांट में पैसे की कमी न पड़ जाये, इसलिए शाजु पीटर ने चालाकी दिखाते हुए क्लब्स को मिल सकने वाली ग्रांट का पैसा मार लिया है ।

Wednesday, June 6, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में पूर्व प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के मुख्य आतिथ्य में होने जा रही डिस्ट्रिक्ट असेम्बली से ठीक पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल पर अपने कार्यकाल के बजट प्रस्तावों पर लगे गंभीर आरोपों की फेहरिस्त को टीके रूबी का समर्थन मिलने से मामला गंभीर हुआ

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल अपने गवर्नर-काल के बजट प्रस्तावों को लेकर गंभीर आरोपों में घिर गए हैं, और डिस्ट्रिक्ट के अलग अलग 'क्षेत्रों' से उन पर मनमाने तरीके से पैसे इकट्ठे करने तथा हिसाब-किताब में 'धोखाधड़ी' के मौके बनाने के आरोप लगने लगे हैं । डिस्ट्रिक्ट ऑफिस के नाम पर रोटरी भवन के लिए खर्च लेने, जीएसटी के नाम पर पैसा लेने, वेबसाइट के नाम पर बढ़ा-चढ़ा कर पैसे लेने, डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए जुटाए विज्ञापनों के पैसों को छिपाने, आकस्मिक खर्चों तथा डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की सब्सिडी के नाम पर मोटी रकम लेने के बाबत प्रवीन गोयल पर गंभीर आरोप लगे हैं । सबसे मजेदार किस्सा प्रवीन गोयल ने निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को देने वाले पिन व गिफ्ट्स के मामले में किया है । इसके लिए प्रत्येक रोटेरियन से उन्होंने पंद्रह रुपए लेने का प्रस्ताव रखा है, जबकि निवर्तमान होने वाले मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि उन्हें कोई पिन और गिफ्ट्स न दिए जाएँ, उनका स्वागत वह एक गुलाब का फूल देकर ही कर दें । आरोप है कि प्रवीन गोयल ने इसी तरह के बेतुके खर्चे दिखा कर अपने गवर्नर-काल के लिए बढ़ा-चढ़ा कर बजट बनाया है । डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के एक पूर्व सदस्य एमपी गुप्ता ने प्रवीन गोयल के बजट प्रस्तावों पर जब गंभीर आपत्ति जताई, तो प्रवीन गोयल ने उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित किया; जिसमें एमपी गुप्ता और प्रवीन गोयल के अलावा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर जेपीएस सिबिया और फाइनेंस कमेटी के सदस्य शाजु पीटर भी शामिल हुए । एमपी गुप्ता की कई आपत्तियों व सुझावों के प्रति प्रवीन गोयल तथा उनके दोनों साथियों ने सहमति भी व्यक्त की और बजट प्रस्ताव में संशोधन करने के लिए हामी भी भरी, लेकिन डिस्ट्रिक्ट के कई लोगों को विश्वास है नहीं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल और उनके संगी-साथी अगले रोटरी वर्ष के प्रस्तावित बजट खर्चे में वास्तव में कोई कमी करेंगे भी ।
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को अपने कामकाज को व्यवस्थित रूप से करने के लिए रोटरी इंटरनेशनल से करीब 12 लाख रुपये मिलते हैं; अधिकतर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अपने घर या ऑफिस से काम करते हैं और उसी में रोटरी इंटरनेशनल से मिली रकम को एडजस्ट कर लेते हैं - लेकिन प्रवीन गोयल का पेट रोटरी इंटरनेशनल से मिले पैसों से नहीं भर रहा है, और डिस्ट्रिक्ट ऑफिस के नाम पर रोटरी भवन की व्यवस्था के लिए उन्होंने बजट में करीब दो लाख रुपये लेने का जुगाड़ कर लिया है । रोटरी भवन का रोटरी और या डिस्ट्रिक्ट के कामकाज से वास्तव में कोई लेनादेना नहीं है, यह सिर्फ तीन लोगों मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर व बीएल रामसिसरिया के गपशप के लिए बैठने का ठिकाना भर है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने कई मौकों पर शिकायत की कि डिस्ट्रिक्ट के विभिन्न प्रोजेक्ट्स से जुड़े जो रिकॉर्ड्स रोटरी भवन में मौजूद होने के दावे किये जाते रहे हैं, वह उन्हें रोटरी भवन में कभी नहीं मिले/दिखे । ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि प्रवीन गोयल को जब रोटरी भवन से कामकाज करना नहीं है, और यदि करना भी है तो उसके लिए उन्हें रोटरी इंटरनेशनल से पैसे मिलेंगे - तब फिर वह डिस्ट्रिक्ट के लोगों पर करीब दो लाख रुपये का बोझ क्यों डाल रहे हैं ? कुछेक लोगों का तो सीधे सीधे पूछना है कि यह पैसा आखिर किसकी जेब में जायेगा ? डिस्ट्रिक्ट की वेबसाइट के लिए 32 हजार रुपये का खर्चा दिखाया गया है, जबकि बाजार में 12 हजार रुपये में वेबसाइट बन जा रही है । जीएसटी के नाम पर करीब पौने चार लाख का खर्चा तो दिखा दिया गया है, पर इस बात को छिपा लिया गया है कि इसका तो इनपुट मिलेगा और आमदनी में इसका कोई जिक्र नहीं किया । आकस्मिक खर्चे के नाम पर प्रत्येक सदस्य से वसूली जाने वाली रकम दस रुपये से बढ़ा कर 45 रुपये तो कर दी गई, लेकिन यह नहीं बताया कि ऐसे कौन से आकस्मिक मौके हैं जिनके लिए उन्हें एकदम से 350 प्रतिशत की वृद्धि करनी पड़ रही है ।
इस मामले को गंभीर बनाने का काम किया डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के हस्तक्षेप ने । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल के बजट प्रस्तावों की डिस्ट्रिक्ट के विभिन्न कोनों से आलोचना शुरू हुई, तो टीके रूबी ने भी मामले में हस्तक्षेप किया और प्रवीन गोयल को सुझाव देते हुए पत्र लिखा कि उन्हें डिस्ट्रिक्ट के लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और डिस्ट्रिक्ट असेम्बली में बजट प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए । टीके रूबी ने अपने पत्र में निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें दिए जाने वाले पिन व गिफ्ट्स पर, आकस्मिक खर्चे पर, डिस्ट्रिक्ट कार्यालय के खर्चे पर तथा डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की सब्सिडी पर भी अपनी आपत्ति दर्ज की है तथा इन्हें गैर जरूरी व रोटेरियंस पर अतिरिक्त बोझ डालने के रूप में रेखांकित किया है । टीके रूबी के लिखे पत्र ने प्रवीन गोयल के लिए मामले को खासा गंभीर बना दिया है । दरअसल टीके रूबी के हस्तक्षेप ने प्रवीन गोयल पर बजट प्रस्तावों की आड़ में अनाप-शनाप तरीके से वसूली बढ़ा देने की तैयारी को सवालों के घेरे में ला कर विश्वसनीय बना दिया है । आम रोटेरियन कहते रहते और आरोप लगाते रहते, तो प्रवीन गोयल आराम से उनकी अनसुनी कर सकते थे; लेकिन अब जब मामले में मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी खुद कूद पड़े हैं, तो प्रवीन गोयल के लिए मामला खासा गंभीर हो गया है । हालाँकि अधिकतर लोगों का मानना और कहना है कि टीके रूबी के हस्तक्षेप के बाद भी प्रवीन गोयल पर कोई असर पड़ेगा, और वह अनाप-शनाप रूप में की जाने वाली वसूली से पीछे हटेंगे - इसकी उम्मीद न के बराबर ही है । प्रवीन गोयल को जानने वाले लोगों का हालाँकि कहना है कि प्रवीन गोयल तो सीधे/शरीफ व्यक्ति हैं और रोटरी के नाम पर वह कोई बेईमानी करने के बारे में नहीं सोच सकते हैं, इसीलिए उनके बजट प्रस्तावों की तीखी आलोचना करने वाले डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य एमपी गुप्ता से बात करने और मामले को समझने के लिए भी वह तैयार हुए - लेकिन वह जिस तरह के लोगों से घिरे हुए हैं उनकी जुबान ने रोटरी के पैसे का मजा चखा हुआ है, और वही लोग प्रवीन गोयल से उल्टा-पुल्टा काम करवा रहे हैं । ऐसा मानने और कहने वाले लोगों के लिए हालाँकि यह समझना मुश्किल हो रहा है कि डिस्ट्रिक्ट में बेईमानी के लिए बदनाम हो चुके नेताओं के हाथों प्रवीन गोयल आखिर मजबूर क्यों बने हुए हैं ?

Sunday, March 18, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद पर रमेश बजाज की जीत कपिल गुप्ता के साथ-साथ वास्तव में राजा साबू और उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स की हार है तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी की जोरदार जीत है

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव कपिल गुप्ता के लिए चुनौतीपूर्ण तो था, लेकिन वह इतनी बुरी तरह से चुनाव हार जायेंगे - इसकी उम्मीद उनके विरोधियों को भी नहीं थी । कपिल गुप्ता अपनी हार का ठीकरा जिस तरह पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के सिर फोड़ते 'सुने' जा रहे हैं, उससे लग रहा है कि वह आगे के लिए भी अपने रास्ते बंद कर ले रहे हैं । मोटे तौर पर डिस्ट्रिक्ट का चुनावी माहौल कपिल गुप्ता के लिए पूरी तरह अनुकूल था; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी भारी दबाव में थे, जिसके चलते उनके उम्मीदवार के रूप में देखे/पहचाने जा रहे रमेश बजाज को सत्ता का समर्थन मिलता नहीं दिख रहा था, उम्मीदवार के रूप में खुद रमेश बजाज का व्यवहार और रवैया भी ढीला/ढाला था - लेकिन फिर भी कपिल गुप्ता मौके का फायदा नहीं उठा सके, उसे देख कर लोगों को लग रहा है कि कपिल गुप्ता के बस की चुनाव लड़ना है ही नहीं । चुनाव वाले दिन, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में चुनाव संबंधी एक प्रस्ताव को लेकर मचे हंगामे में कपिल गुप्ता और उनके भाई कमल गुप्ता का 'कुल्हाड़ी पर पैर मारने' वाला जो रवैया देखा गया - उससे ही साबित हो गया था कि कपिल गुप्ता जब खुद ही अपनी उम्मीदवारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, और खुद ही अपनी चुनावी नाव डुबोने में लगे हैं, तब फिर उन्हें भला कौन बचा सकता है ? नोमीनेटिंग कमेटी में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के होने से कपिल गुप्ता को उम्मीद थी कि कमेटी के सदस्यों को वह मैनेज कर लेंगे और उन्हें अधिकृत उम्मीदवार चुनवा देंगे, लेकिन मधुकर मल्होत्रा ने अपनी तरफ से कोई अतिरिक्त प्रयास किया ही नहीं और कपिल गुप्ता नोमीनेटिंग कमेटी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव भारी अंतर से चुनाव हार गए ।
कपिल गुप्ता, राजा साबू और उनके गिरोह के जिन नेताओं के भरोसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी मैदान में थे - उनके बीच तालमेल के अभाव का नजारा यह रहा कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के पहले दिन राजा साबू और उनके गिरोह के नेता कॉन्फ्रेंस में आने की बजाये यमुना नगर में अपना एक अलग कार्यक्रम कर रहे थे । लोगों के बीच चर्चा रही कि राजा साबू गिरोह के सदस्यों ने यह हरकत डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को फेल करने के उद्देश्य से की थी । उन्हें उम्मीद थी कि डिस्ट्रिक्ट के लोग टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जाने की बजाये उनके कार्यक्रम में आना पसंद करेंगे और इस तरह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का रंग फीका पड़ जायेगा । पर हुआ उल्टा । टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रिकॉर्ड आठ/नौ सौ लोग जुटे और राजा साबू के कार्यक्रम में यमुनानगर के ही थोड़े से लोग आए । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि थे । राजा साबू ने जब देखा/पाया कि उनका कार्यक्रम तो पिट गया है और टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस 'सुपर हिट' जा रही है, तो उन्हें अक्ल आई और उन्होंने सोचा कि चलो, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में ही चलते हैं और वहाँ हरियाणा के राज्यपाल के साथ फोटो-सेशन भी कर/करवा लेंगे । लेकिन इस मामले में भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी उनसे तेज निकले । टीके रूबी को जैसे ही पता चला कि राजा साबू अपने साथी गवर्नर्स के साथ कॉन्फ्रेंस में आ रहे हैं, तो उन्होंने आनन-फानन में कॉन्फ्रेंस का समापन ही कर/करवा दिया । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को कॉन्फ्रेंस स्थल पर खाली कुर्सियाँ ही मिली/दिखीं - और इस तरह एक ही दिन में उन्हें दो बार चोट पड़ी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने पहला झटका तो उन्हें अपनी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रिकॉर्ड उपस्थिति के जरिये डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को खराब करने की उनकी कोशिश को फेल करके दिया, और दूसरे झटके के रूप में अंतिम क्षणों में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में शामिल होने की राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की कोशिश को फेल करने का काम किया ।
डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व सदस्यों के लिए और भी बुरा रहा । रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ पूर्व प्रेसीडेंट मोहिंदर पॉल गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी प्रक्रिया में संशोधन का एक प्रस्ताव रखा, जिसमें नोमीनेटिंग कमेटी की व्यवस्था को हटा कर रोटरी इंटरनेशनल की एमओपी के अनुसार चुनाव करवाने का सुझाव दिया गया । इस प्रस्ताव पर कॉन्फ्रेंस में बबाल हो गया । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर ने इस प्रस्ताव के खिलाफ भारी शोर मचाया । उनका कहना रहा कि इस प्रस्ताव पर कॉलिज और गवर्नर्स में कोई चर्चा नहीं हुई है, इसलिए इस प्रस्ताव पर यहाँ विचार नहीं हो सकता है । उन्होंने इस प्रस्ताव को स्थगित करने की माँग की । मोहिंदर पॉल गुप्ता का तर्क लेकिन यह रहा कि किसी भी प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रखने के लिए जिस भी प्रक्रिया का पालन करना होता है, उनके क्लब ने उस प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया है और इसलिए इस प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रखने से और इस पर फैसला होने से नहीं रोका जा सकता है । इसके बाद भी, राजा साबू की शह पर शुरू हुआ जेपीएस सीबिया व शाजु पीटर का शोर जब कम नहीं हुआ तथा राजा साबू गिरोह के कुछेक और पूर्व गवर्नर्स ने उनका साथ देना शुरू कर दिया, तब डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद मुकेश अरनेजा ने मोर्चा संभाला और साफ कहा कि किसी भी प्रस्ताव को कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में रखना कोई जरूरी नहीं है; कॉन्फ्रेंस में रखने वाले प्रस्ताव को क्लब्स के प्रेसीडेंट को भेजना जरूरी होता है और यदि किसी पूर्व गवर्नर को प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं है तो इस बारे में शिकायत उसे अपने क्लब में करना चाहिए । जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर वैसे तो अपने आप को रोटरी का बड़ा ज्ञाता समझते/बताते हैं, लेकिन मुकेश अरनेजा के तर्क से लोगों के सामने पोल खुली कि उन्हें या तो रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का अता/पता नहीं है और या वह अपनी हेकड़ी दिखाने/जताने की कोशिश कर रहे हैं ।
मुकेश अरनेजा से मिली जानकारी से कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोग जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर पर भड़क उठे । रोटरी क्लब करनाल मिडटाउन की युवा महिला सदस्य अंशु गोयल का चौधराहटभरी मनमानी राजनीति के खिलाफ जो गुस्सा फूटा, उसने कॉन्फ्रेंस के माहौल को ही बदल दिया । फिर तो हर किसी ने राजा साबू और उनके गिरोह के सदस्यों की लानत-मलानत शुरू कर दी । लोगों का आरोप रहा कि नोमीनेटिंग कमेटी के जरिये पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के चुनाव में अपनी मनमानी थोपने की कोशिश करते हैं, इसलिए मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव से उन्हें चूँकि अपनी मनमानी के मौके छिनते दिख रहे हैं - इसलिए वह बौखला रहे हैं । माहौल को खिलाफ बनता देख राजा साबू ने तो मौके से खिसक लेने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी और वह अपने संगी-साथियों को वही छोड़ कर चुपचाप कॉन्फ्रेंस से निकल गए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव पर मत-विभाजन करवाते हुए आह्वान किया कि जो लोग प्रस्ताव के समर्थन में हैं वह राइट साइड में आ जाएँ, और जो लोग प्रस्ताव के खिलाफ हैं वह लेफ्ट साइड में रहें । राजा साबू गिरोह के पूर्व गवनर्स के लिए शर्मनाक स्थिति यह बनी कि लेफ्ट साइड में उनके साथ कुल छह/आठ रोटेरियंस ही बचे, जबकि कॉन्फ्रेंस में मौजूद तमाम सदस्य राइट साइड में जा पहुँचे । मजेदार और आत्मघाती रवैया रहा कपिल गुप्ता और उनके भाई कमल गुप्ता का । वह देख रहे थे कि कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों में 95 प्रतिशत मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव के समर्थन में हैं, लेकिन फिर भी वह प्रस्ताव के विरोध में रहे - और बड़े मुखर तरीके से रहे । उनके समर्थकों को ही आश्चर्य हुआ कि उम्मीदवार होने के चलते उन्हें इस बबाल में सक्रिय रूप से कूदने की जरूरत भला क्या थी ? उनके सामने पूर्व गवर्नर्स का समर्थन करने की मजबूरी यदि थी भी, तो भी उन्हें 'साइलेंट समर्थक' की भूमिका में रहना था । मौके पर मौजूद हर किसी ने माना कि मोहिंदर पॉल गुप्ता के जिस प्रस्ताव को कॉन्फ्रेंस में जबर्दस्त समर्थन मिल रहा था, उसका सक्रिय विरोध करके कपिल गुप्ता ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मार ली थी, बल्कि अपने पैर ही कुल्हाड़ी पर मार लिए थे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में कपिल गुप्ता की हार को उसी समय लोगों ने पहचान लिया था और कहना शुरू कर दिया था कि कपिल गुप्ता को अब अगले वर्ष की तैयारी शुरू कर देना चाहिए । चुनाव शुरू होने से पहले ही लोगों के मुँह से इस तरह की बातें सुन कर कपिल गुप्ता की पत्नी ने कुछेक लोगों के प्रति अपनी नाराजगी भी दिखाई, लेकिन उनकी नाराजगी भी कपिल गुप्ता को एक बड़ी पराजय से नहीं बचा सकी ।

Saturday, September 23, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में राजा साबू व यशपाल दास तथा उनके साथी गवर्नर्स सीधे-सीधे हिसाब-किताब देने के नाम पर अपनी छवि खराब होने/करने का रोना क्यों रो रहे हैं ?

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने डिस्ट्रिक्ट और डिस्ट्रिक्ट में रोटरी के नाम पर चल रही संस्थाओं के हिसाब-किताब सँभालने की छोटी-सी कोशिश क्या की, कि डिस्ट्रिक्ट के बड़े बड़े महारथी 'नंगे' होते चले जा रहे हैं । टीके रूबी ने निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा से 'रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 ट्रस्ट' के अकाउंट के बारे में पत्र लिख कर पूछा, तो रमन अनेजा की तरफ से उन्हें जबाव मिला कि उक्त ट्रस्ट का काम पूर्व गवर्नर शाजु पीटर देखते हैं और उसका अकाउंट उन्हीं से मिलेगा । तब टीके रूबी ने शाजु पीटर का दरवाजा खटखटाया, लेकिन शाजु पीटर से यह सुन  कर वह अवाक् रह गए कि उक्त ट्रस्ट से उनका कोई वास्ता नहीं है और इसलिए उसके अकाउंट से भी उनका कोई लेना-देना नहीं है । अपनी जिम्मेदारी से बचने/भागने और दूसरे पर थोपने का यह सर्कस मजेदार है - करीब तीन महीने पहले तक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर रहे रमन अनेजा ने क्या अपने आप को या किसी और को बचाने के लिए झूठे ही शाजु पीटर का नाम लिया है, या शाजु पीटर झूठ बोल रहे हैं ? 'रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 ट्रस्ट' के अकाउंट में आखिर ऐसा क्या झोलझाल है कि डिस्ट्रिक्ट के इन दोनों बड़े लोगों को इस तरह से सच्चाई छिपाना पड़ रहा है - और कोई माई का लाल अभी तक सामने नहीं आया है जो कहे कि ट्रस्ट का हिसाब-किताब मेरे पास है, और मैं उसका अकाउंट देता हूँ । डिस्ट्रिक्ट ट्रस्ट का हिसाब-किताब किसके पास है, यह पता लगाने का काम क्या अब सीबीआई को सौंपना पड़ेगा ?
इस तरह के मामलों में चटक मजेदारी का तड़का पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास ने यह कहते हुए लगाया है कि टीके रूबी लोगों के बीच पूर्व गवर्नर्स की छवि खराब करने तथा उन्हें बदनाम करने का काम कर रहे हैं । किसी की भी समझ में नहीं आ रहा है कि पूर्व गवर्नर्स का जो नंगापन सामने आ रहा है, उसके लिए टीके रूबी को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी तो डिस्ट्रिक्ट का हिसाब/किताब व्यवस्थित करते हुए विभिन्न कमेटियों और ट्रस्टों के अकाउंट माँग रहे हैं, अब इसके जबाव में सीधे सीधे एकाउंट देने की बजाए कमेटियों और ट्रस्टों पर कुंडली मारे बैठे पूर्व गवर्नर्स यदि अपने या दूसरे के कपड़े उतारने में जुट गए हैं तो इसके लिए टीके रूबी को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है ? वह तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपना काम कर रहे हैं । ऐसे में, टीके रूबी पर पूर्व गवर्नर्स की छवि खराब करने का यशपाल दास का आरोप ही संदेह के घेरे में आ जाता है - और लोगों को लगता है कि यशपाल दास अपनी और अपने साथी गवर्नर्स की कारस्तानियों पर पर्दा डालने के लिए टीके रूबी को निशाना बना रहे हैं । लोगों को याद नहीं है कि यशपाल दास ने कभी दिलीप पटनायक पर सवाल उठाया हो, जिन्हें अपने गवर्नर-काल के हिसाब/किताब की गड़बड़ियों पर पर्दा डालने के लिए दो दो बैलेंसशीट तैयार करवाना पड़ी थीं; रमन अनेजा की कारस्तानी पर भी यशपाल दास चुप बने हुए हैं, जिन्होंने अपने गवर्नर-काल के हिसाब/किताब को लेकर गजब किस्म की नाटकबाजी की हुई है - उल्लेखनीय है कि रमन अनेजा को मौजूदा रोटरी वर्ष की फाइनेंस कमेटी को अपने गवर्नर-काल का हिसाब/किताब देना है; रमन अनेजा ने लेकिन फाइनेंस कमेटी को हिसाब/किताब न देकर सुभाष गर्ग को दे दिया - सुभाष गर्ग ने उसे हेमंत अरोड़ा को भेज दिया, हेमंत अरोड़ा पूछ रहे हैं कि यह मुझे क्यों दे दिया, मेरा इससे क्या मतलब, मैं इसका क्या करूँ ? लोगों के बीच पूर्व गवर्नर्स की छवि खराब करने वाली रमन अनेजा की इस हरकत पर तो यशपाल दास चुप बने हुए हैं, और आरोप टीके रूबी पर लगा रहे हैं ।
हिसाब/किताब को लेकर नाटकबाजी करने के मामले में तो यशपाल दास ने रमन अनेजा को भी पछाड़ दिया है । उल्लेखनीय है कि पिछले दो वर्षों में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में खुद यशपाल दास ने लोगों के बीच घोषणा की कि रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के अकाउंट वह या तो ईमेल के जरिए लोगों को भेजेंगे और या जीएमएल में प्रकाशित करवायेंगे । उनकी इसी घोषणा का उल्लेख करते हुए टीके रूबी ने जीएमएल के अगले अंक के लिए उनसे उक्त ट्रस्ट के अकाउंट भेजने का अनुरोध किया । टीके रूबी ने तो उम्मीद की थी कि उनके अनुरोध पर यशपाल दास की तरफ से उन्हें खुशी खुशी अकाउंट मिल जायेंगे, लेकिन यशपाल दास को तो नाटक दिखाना था - सो उन्होंने टीके रूबी को लंबा/चौड़ा पत्र लिख मारा जिसमें विस्तार से बताया कि राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू की चेयरमैनी वाले उक्त ट्रस्ट में कौन कौन हैं और ट्रस्ट ने क्या क्या किया है; यशपाल दास ने यह भी बताया कि ट्रस्ट की हर वर्ष बैलेंसशीट तैयार होती है जिसे ट्रस्टियों को भेजा जाता है; उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट के अकाउंट जल्दी ही रोटरी न्यूज में प्रकाशित किए/करवाए जायेंगे; यशपाल दास ने और भी बहुत कुछ बताया, पर जीएमएल के लिए अकाउंट नहीं दिए - अपने पत्र में उन्होंने टीके रूबी पर आरोप और मढ़ दिया कि वह लोगों के बीच उनकी छवि खराब कर रहे हैं । उक्त ट्रस्ट का हिसाब/किताब जीएमएल में प्रकाशित करने का आईडिया यशपाल दास का ही था, अपना यह आईडिया उन्होंने खुद ही लोगों के सामने जाहिर किया था - टीके रूबी तो उनके ही आईडिया को अमल में लाने का प्रयास कर रहे थे । ऐसे में यशपाल दास का भड़कना किसी को भी समझ में नहीं आया - 'चोर की दाढ़ी में तिनका' वाली कहावत लोगों को लेकिन जरूर याद आई है ।
इस बीच मेडीकल मिशन टीम के साथ वॉलिंटियर के रूप में मंगोलिया गए राजा साबू और मधुकर मल्होत्रा की तस्वीरें लोगों को देखने को मिली हैं, जिनमें यह दोनों पर्यटन करते और मौज-मजा करते देखे गए हैं । लोगों के लिए हमेशा ही यह उत्सुकता का विषय रहा है कि मेडीकल मिशन में वॉलिंटियर के रूप में यह दोनों करते क्या होंगे ? तस्वीरों को देख कर भेद खुला है कि यह वास्तव में क्या करते हैं । इनके क्लब के कई लोगों का कहना है कि उनका भी मन है कि वह भी वॉलिंटियर के रूप में मेडीकल मिशन में जाएँ - पर राजा साबू और मधुकर मल्होत्रा के होते हुए हुए 'सेवा' और कोई कैसे कर सकता है ? लेकिन खबरदार, राजा साबू और मधुकर मल्होत्रा की इस सेवा में किसी ने भी 'मेवा' 'देखने' की कोशिश की - और यह सवाल उठाया कि मंगोलिया मेडीकल मिशन में कितनी रकम खर्च हुई है और कैसे-कैसे खर्च हुई है; ऐसा हुआ तो यही समझा जायेगा कि वह इन बेचारों की छवि खराब करने तथा इन्हें बदनाम करने का काम कर रहा है ।

Friday, September 8, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के दिशा-निर्देशन में हुए डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप सेमीनार की अपार और रिकॉर्ड सफलता ने राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के प्रति लोगों की नाराजगी को भी जाहिर किया है

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के कार्यकाल में हुए डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप सेमीनार में रोटेरियंस पदाधिकारियों तथा सदस्यों की जैसी जोशपूर्ण भागीदारी रही, उसने डिस्ट्रिक्ट 3080 के इतिहास में एक अनोखा रिकॉर्ड तो बनाया ही है - साथ ही साथ डिस्ट्रिक्ट में अपने आप को तुर्रमखाँ समझने वाले पूर्व गवर्नर्स की नींद भी उड़ा दी है । ऐसे ही पूर्व गवर्नर्स यमुनानगर में पूर्व गवर्नर सुभाष गर्ग के यहाँ जुटे और उन्होंने इस बात को लेकर घंटों माथापच्ची की कि डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच टीके रूबी की बढ़ती लोकप्रियता और स्वीकार्यता से कैसे मुकाबला किया जाए ? अपने आप को तुर्रमखाँ समझने वाले इन पूर्व गवर्नर्स के लिए मुसीबत और चुनौती की बात वास्तव में यह है कि यह लोग तो टीके रूबी के गवर्नर-काल को फेल करने, बताने और दिखाने की जीतोड़ कोशिशों में लगे हैं - लेकिन डिस्ट्रिक्ट के लोग टीके रूबी के साथ ऐसे जुड़ते जा रहे हैं, जैसे टीके रूबी के रूप में वह रोटरी और डिस्ट्रिक्ट का कोई मसीहा पा गए हैं । सुभाष गर्ग के यहाँ जुटे पूर्व गवर्नर्स के लिए फजीहत की बात यह भी रही कि वह तो टीके रूबी के गवर्नर-काल में कोई भी सहयोग करने और या भूमिका निभाने से पीछे हट रहे हैं, लेकिन उनके क्लब के पदाधिकारी और वरिष्ठ सदस्य टीके रूबी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं ।
इस संदर्भ में सबसे ज्यादा फजीहत शाजु पीटर को झेलना पड़ रही है । शाजु पीटर ने तो टीके रूबी के विरोध का झंडा उठाया हुआ है और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी के हर फैसले व कदम का विरोध करने का ठेका लिया हुआ है, लेकिन उनके क्लब के वरिष्ठ सदस्य रवि तुलसी ने टीके रूबी के गवर्नर-काल की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाली हुई है । शाजु पीटर ने बहुत प्रयास किए कि रवि तुलसी इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने से इंकार कर दें, रवि तुलसी को उन्होंने क्लब से निकलवाने तक की धमकी भी दी - लेकिन शाजु पीटर को अंततः मनमसोस कर ही रह जाना पड़ा । शाजु पीटर के लिए इससे भी बड़े झटके वाली बात यह हुई कि उनके क्लब के साप्ताहिक बुलेटिन के नए अंक में मुख्य पृष्ठ पर ही टीके रूबी के साथ क्लब के पदाधिकारियों की तस्वीरें प्रमुखता से प्रकाशित की गईं हैं । टीके रूबी के गवर्नर-काल में सहयोग करने और भूमिका निभाने से इंकार करने वाले - किसी भी तरह से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी को फेल साबित करने के चक्कर में लगे पूर्व गवर्नर्स के अपने अपने क्लब में अलग-थलग पड़ जाने का इससे बड़ा सुबूत और भला क्या होगा कि टीके रूबी के दिशा-निर्देशन में हुए डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप सेमीनार में डिस्ट्रिक्ट के 77 क्लब्स में से 71 क्लब्स का प्रतिनिधित्व हुआ और सेमीनार में एक हजार से ज्यादा रोटेरियंस शामिल हुए । इससे पहले, इतनी बड़ी संख्या में रोटेरियंस की भागीदारी तो डिस्ट्रिक्ट के अवॉर्ड फंक्शन और या डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस तक में देखने/सुनने को कभी नहीं मिली है ।
डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों का मानना और कहना है कि टीके रूबी के गवर्नर-काल में सक्रिय होने और दिखने को लेकर डिस्ट्रिक्ट के लोगों में जो उत्साह है, वह वास्तव में राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के प्रति लोगों की नाराजगी की अभिव्यक्ति भी है । राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की हरकतों और कारस्तानियों से लोग दुःखी और परेशान तो थे ही, उससे भी बड़ी मुसीबत उनके लिए यह थी कि अपने दुःख व अपनी परेशानी से पैदा होने वाली अपनी नाराजगी को जताने का उनके पास कोई मौका नहीं था । टीके रूबी के गवर्नर-काल के रूप में उन्हें यह मौका मिला है, तो इसका वह भरपूर फायदा उठा लेना चाहते हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी ने जिस तरह से पूर्व गवर्नर्स द्वारा कब्जा जमाये ट्रस्टों के हिसाब-किताब में दिलचस्पी लेना शुरू किया है, उससे भी पूर्व गवर्नर्स हड़बड़ाए हुए हैं । उन्हें डर हुआ है कि टीके रूबी की यह दिलचस्पी ट्रस्टों की आड़ में हो रही बेईमानियों और लूट-खसोट की पोल खोलेगी । ऐसे में, पूर्व गवर्नर्स को लग रहा है कि टीके रूबी के विरोध का झंडा उठाए रख कर वह ट्रस्टों के हिसाब-किताब में दिलचस्पी लेने से टीके रूबी को रोक सकेंगे - लेकिन डिस्ट्रिक्ट के लोगों की तरफ से, यहाँ तक कि पूर्व गवर्नर्स के क्लब्स तक के लोगों की तरफ से मिल रहे समर्थन को देख कर टीके रूबी ने भी पूर्व गवर्नर्स के विरोधी रवैये की परवाह न करने का तेवर दिखाया हुआ है । दरअसल उन्होंने पाया/समझा है कि डिस्ट्रिक्ट में मनमानी करते और थोपते रहे पूर्व गवर्नर्स के वह जितना ज्यादा 'विरोध' में  रहेंगे और दिखेंगे, लोगों के बीच उतना ही ज्यादा समर्थन और सहयोग वह पायेंगे । डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप सेमीनार की अपार और रिकॉर्ड बनाती सफलता तो बस एक झलक भर है ।

Sunday, July 30, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में टीके रूबी व जितेंद्र ढींगरा की जोड़ी के सामने अपनी उम्मीदवारी को समर्पित कर कपिल गुप्ता ने राजा साबू गिरोह की राजनीति को तगड़ी चोट पहुँचाई

यमुना नगर । कपिल गुप्ता को टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा की जोड़ी के सामने अपनी उम्मीदवारी को समर्पित करता देख राजा साबू गिरोह के लोगों की राजनीति को तगड़ा झटका लगा है, जिससे उबरने की कोशिश में उनकी तरफ से कपिल गुप्ता को तरह तरह से उकसाने और भड़काने के प्रयास हो रहे हैं । मजे की बात यह है कि पिछले दिनों, वर्ष 2018-19 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए हो रहे चुनाव में तो कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी का विरोध करने में राजा साबू गिरोह के कुछेक नेता आगे-आगे थे, लेकिन अब वर्ष 2020-21 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए होने वाले चुनाव को लेकर कपिल गुप्ता जब पीछे हटते दिख रहे हैं - तो उनका विरोध करने वाले वही नेता अचानक से कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी में संभावना देखने लगे हैं । उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020-21 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए होने वाले चुनाव में टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा की जोड़ी की तरफ से रमेश बजाज की उम्मीदवारी को जहाँ पक्का सा माना जा रहा है, वहाँ राजा साबू गिरोह की तरफ से उम्मीदवारी को लेकर अभी असमंजस बना हुआ है । उम्मीद की जा रही थी कि उनकी तरफ से पूनम सिंह और कपिल गुप्ता में से कोई एक उम्मीदवार बनेगा/रहेगा । कपिल गुप्ता लेकिन जिस तरह से टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा की जोड़ी के सामने अपनी उम्मीदवारी को समर्पित करते नजर आ रहे हैं, उससे राजा साबू गिरोह को अपना गेम-प्लान बिगड़ता दिख रहा है ।
कपिल गुप्ता के नजदीकियों के अनुसार, टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा की जोड़ी ने उन्हें अगले रोटरी वर्ष में 'अपना' उम्मीदवार बनाने का भरोसा दे दिया है, जिसके चलते कपिल गुप्ता ने इस वर्ष रमेश बजाज की उम्मीदवारी की राह में काँटा बनने का इरादा त्याग दिया है । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सतीश सलूजा तो कपिल गुप्ता को इस समर्पण के लिए राजी करने का प्रयास कर ही रहे थे, प्रमोद विज और रंजीत भाटिया जैसे पूर्व गवर्नर्स को भी कमजोर पड़ता देख कपिल गुप्ता को भी अपनी उम्मीदवारी समर्पित करने में ही अपनी भलाई दिखी । कपिल गुप्ता के नजदीकियों के अनुसार, प्रमोद विज और रंजीत भाटिया ने पहले तो कपिल गुप्ता में उम्मीदवारी के लिए हवा भरने की कोशिश की थी, लेकिन फिर धीरे धीरे वह ठंडे पड़ते गए । दरअसल उन्होंने समझ लिया कि जब वर्ष 2018-19 के लिए चुनाव हो रहा था, तब हालात अलग थे और उस समय टीके रूबी व जितेंद्र ढींगरा के उम्मीदवार के रूप में रमेश बजाज की उम्मीदवारी से मुकाबला किया जा सकता था, लेकिन अब के हालात में रमेश बजाज की उम्मीदवारी से निपटना मुश्किल होगा । प्रमोद विज और रंजीत भाटिया को ठंडा पड़ता देख, कपिल गुप्ता के सामने टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा की जोड़ी के सामने अपनी उम्मीदवारी का समर्पण करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा ।
कपिल गुप्ता को अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटता देख राजा साबू गिरोह के नेताओं को दोहरा झटका लगा है - एक तरफ तो उनके पास उम्मीदवारों की कमी हो गयी, और दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट में लोगों को टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा की राजनीतिक ताकत और बढ़ती हुई दिखी है । राजा साबू गिरोह के लोगों ने हालाँकि अभी भी टीके रूबी के गवर्नर-काल के प्रति असहयोग व उपेक्षा का रवैया अपनाया हुआ है, लेकिन धीरे धीरे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स राजा साबू की छत्र-छाया से बाहर निकल कर इस 'सच्चाई' को स्वीकारने लगे हैं कि टीके रूबी ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'हैं' । राजा साबू, यशपाल दास और शाजु पीटर ही अभी इस 'सच्चाई' को हजम कर पाने में दर्द महसूस कर रहे हैं और उनकी मरोड़े कम नहीं हो रही हैं । उन्हें उम्मीद थी कि प्रमोद विज और रंजीत भाटिया भी उनके जैसे तेवर बनाए रहेंगे; किंतु कपिल गुप्ता के उम्मीदवारी से पीछे हटने में उन्हें कपिल गुप्ता के साथ-साथ प्रमोद विज और रंजीत भाटिया भी टीके रूबी व जितेंद्र ढींगरा की जोड़ी के आगे समर्पण करते नजर आ रहे हैं । दरअसल इसीलिए, कपिल गुप्ता को अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटता तथा उन्हें टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा की जोड़ी के साथ जुड़ता देख राजा साबू और उनके नजदीकियों की बेचैनी बढ़ गयी है ।
बढ़ती बेचैनी में राजा साबू के नजदीकी एक तरफ कपिल गुप्ता और उनके साथ-साथ प्रमोद विज व रंजीत भाटिया को कोसने में लगे हैं, तथा दूसरी तरफ उन्हें भड़काने व उकसाने के प्रयास भी कर रहे हैं । उनका कहना है कि कपिल गुप्ता अगले रोटरी वर्ष में टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा की मदद से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने का जो ख्बाव देख रहे हैं, वह कभी पूरा नहीं होगा - क्योंकि वह लोग उन्हें प्रमोद विज व रंजीत भाटिया के 'आदमी' के रूप में देखते हैं और इसलिए उन्हें कभी समर्थन नहीं देंगे । कपिल गुप्ता को यह याद दिलाते हुए भी भड़काने/उकसाने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्होंने रमेश बजाज से पहले अपनी उम्मीदवारी घोषित की थी, इसलिए रमेश बजाज उनसे पहले कैसे गवर्नर बन सकते  हैं ? समझा जाता है कि कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी जब पहली बार सामने आई थी, तब उन्हें सतीश सलूजा के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना गया था और जितेंद्र ढींगरा का समर्थन भी उनके साथ बताया गया था । समस्या लेकिन तब पैदा हुई, जब कपिल गुप्ता ने पानीपत में अपने आप को प्रमोद विज व रणजीत भाटिया के साथ खड़ा कर लिया । उनकी इस कार्रवाई के विरोध में ही रमेश बजाज की उम्मीदवारी प्रकट हुई । अचानक प्रकट हुई रमेश बजाज की उम्मीदवारी से जितेंद्र ढींगरा खुश नहीं थे और वह मजबूरी में ही रमेश बजाज की उम्मीदवारी के साथ बने हुए थे ।
जितेंद्र ढींगरा को उस समय दरअसल अपनी चिंता थी । राजा साबू के चक्रव्यूह को भेद कर जितेंद्र ढींगरा सत्ता के निकट तो पहुँच गए थे, लेकिन वह देख रहे थे कि राजा साबू की 'कौरव सेना' ने उन्हें चारों तरफ से घेरा हुआ है और उन्हें 'कुरुक्षेत्र' में ही निपटा देने की कोशिश की जाएगी । इसलिए जितेंद्र ढींगरा को डर हुआ था कि रमेश बजाज की उम्मीदवारी के चक्कर में कहीं वह अपने लिए मुसीबतों को न बढ़ा लें । बाद के हालात में जब टीके रूबी के हाथ सत्ता की सीधी बागडोर आ गयी तो राजा साबू की कौरव सेना का घेरा अपने आप दरक उठा और कमजोर पड़ गया । इससे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति के समीकरण भी बदल गए हैं और राजा साबू गिरोह के भरोसे उम्मीदवार बनने वाले लोग अपनी अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटते नजर आए । ऐसे में, कपिल गुप्ता ने होशियारी दिखाई और टीके रूबी व जितेंद्र ढींगरा की जोड़ी के साथ समझौता कर लिया । कपिल गुप्ता के इस फैसले ने राजा साबू गिरोह की राजनीति को तगड़ी चोट पहुँचाई है और उनके लिए आगे की राह को और ज्यादा मुश्किल बना दिया है ।

Wednesday, July 19, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में शाजु पीटर की माफियागीरी से परेशान क्लब सदस्यों की बेनामी मेल शाजु पीटर के खिलाफ खुली बगावत की शुरुआत है क्या ?

चंडीगढ़ । रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन में हो रही घपलेबाजियों को उजागर करती एक बेनामी मेल ने उस खतरे से राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू तथा उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स का सीधा सामना करवा दिया है, जिसका डर उन्हें सता रहा था - और जिस डर के कारण ही टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न बनने देने के लिए राजा साबू और उनके गुर्गों ने पिछले दो वर्षों से बबाल मचाया हुआ था । राजा साबू और उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स नेताओं ने डिस्ट्रिक्ट और क्लब्स में ऐसा आतंक और अंधेर मचाया हुआ था कि उनकी कारस्तानियों पर आवाज उठाने की कोई हिम्मत ही नहीं कर सकता था । इसका नजारा करनाल में आयोजित हुई रमन अनेजा के गवर्नर-काल की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में भी देखने को मिला था, जब रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ पूर्व अध्यक्ष मोहिंदर पॉल गुप्ता द्वारा पूछे गए एक सवाल में हार्टलैंड प्रोजेक्ट का संदर्भ आने पर राजा साबू बुरी तरह बौखला गए थे और उनके चंपू पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपीएस सिबिया ने मोहिंदर पॉल गुप्ता को सवाल पूछने से ही रोक दिया था । राजा साबू और उनके समर्थन की छाँह में पलते-बढ़ते पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स इस बात को जरा भी बर्दाश्त नहीं कर पाते रहे हैं कि उनकी कारगुजारियों के बारे में कोई सवाल पूछे जाएँ । इसीलिए उन्हें डर था कि टीके रूबी यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बने, तो लोगों को सवाल पूछने की प्रेरणा और हौंसला मिलेगा - और यह बात राजा साबू और उनके नजदीकी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की करतूतों को सामने लाने का काम करेगी ।
जिसका डर था, अंततः वही हुआ । टीके रूबी को गवर्नर पद से दूर रखने के लिए राजा साबू और उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स द्वारा की गई दो वर्षों की मेहनत व्यर्थ गई और टीके रूबी गवर्नर बने तो राजा साबू और उनके नजदीकियों के खिलाफ आवाजें उठना शुरू हो गईं - और इसके पहले शिकार बने हैं शाजु पीटर । रोटरी क्लब चंडीगढ़ मिडटाउन उन्हीं के क्लब के रूप में देखा/पहचाना जाता है, और जो बेनामी मेल कई लोगों को मिली है - उसमें शाजु पीटर को ही निशाना बनाया गया है । बेनामी मेल में शाजु पीटर पर क्लब में एक माफिया की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए बताया गया है कि क्लब में अपनी मनमानी और विभिन्न ग्रांट्स की लूट को बनाए रखने के लिए शाजु पीटर क्लब्स के पूर्व प्रेसीडेंट्स तक को क्लब की गतिविधियों से दूर रखते हैं - और क्लब को चलाने में रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का खुला उल्लंघन करते हैं । इस बेनामी मेल में हुए खुलासे ने डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों को चौंकाया है, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट में शाजु पीटर की पहचान और छवि एक बड़े जेनुइन व्यक्ति की रही है । लेकिन बेनामी मेल में दिए गए तथ्यों ने 'चमचमाती कारपेट' को जो थोड़ा सा उठाया है, तो उसके नीचे छिपी/छिपाई गई गंदगी ने ऊपरी चमक की सारी पोल खोल दी है । इस बेनामी मेल को क्लब में शाजु पीटर के खिलाफ उठते विद्रोह के रूप में भी देखा जा रहा है - लोगों का मानना और कहना है कि क्लब में शाजु पीटर की माफियागीरी से परेशान सदस्यों ने अभी तो पर्दे के पीछे रह कर मोर्चा खोला है, लेकिन जल्दी ही यह क्लब में शाजु पीटर के खिलाफ खुली बगावत में बदल जा सकता है ।
क्लब में शाजु पीटर और उनके नजदीकियों ने इस बेनामी मेल को उन असंतुष्ट सदस्यों का 'काम' बताया है, जो शाजु पीटर को बदनाम करके टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा को खुश करके लाइमलाइट में आना चाहते हैं । शाजु पीटर और उनके नजदीकी इस बेनामी मेल की टाइमिंग पर भी सवाल उठा रहे हैं - उल्लेखनीय है कि यह बेनामी मेल क्लब का अधिष्ठापन कार्यक्रम होने के तुरंत बाद आई है, जिसमें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी को आमंत्रित नहीं किया गया था । दरअसल राजा साबू और उनके समर्थक कुछेक नेताओं को टीके रूबी को गवर्नर के रूप में देखने में अभी भी भारी पीड़ा हो रही है, और इसीलिए उन्होंने टीके रूबी के प्रति उपेक्षा का भाव बनाया हुआ है - इसी भाव को प्रदर्शित करते हुए शाजु पीटर के क्लब के अधिष्ठापन कार्यक्रम में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी जितेंद्र ढींगरा को नहीं बुलाया गया; और उनके कार्यक्रम की शोभा एक अकेले राजा साबू ने बढ़ाई । शाजु पीटर और उनके नजदीकियों का ही कहना है कि क्लब के असंतुष्टों ने उम्मीद की है कि अधिष्ठापन कार्यक्रम में आमंत्रित न किए जाने से टीके रूबी नाराज होंगे ही और उनकी इस नाराजगी का फायदा उठाने के लिए ही असंतुष्टों ने टीके रूबी को संबोधित करते हुए मेल लिख दी है ।
शाजु पीटर और उनके नजदीकी क्लब के असंतुष्टों की इस कार्रवाई से अभी तो ज्यादा परेशान नहीं नजर आ रहे हैं, लेकिन दूसरे लोगों को लग रहा है कि यह उनके बुरे दिनों की शुरुआत का संकेत है - दूसरे लोगों को लग रहा है कि इस संकेत को समझ/पहचान कर शाजु पीटर ने यदि अपने तौर-तरीकों को नहीं सुधारा तथा क्लब के वरिष्ठ सदस्यों और पूर्व प्रेसीडेंट्स को उचित सम्मान देना शुरू नहीं किया, तो मुखर होती नाराजगी क्लब के विभाजन का कारण भी बन सकती है । शाजु पीटर के क्लब के सदस्यों की तरफ से शाजु पीटर के कारनामों की पोल खोलती आई इस बेनामी मेल ने इस बात की संभावना को भी पुष्ट किया है कि अब राजा साबू और उनके नजदीकियों के क्लब्स में विरोध और बगावत की आवाजें उठेंगी तथा गूँजेंगी ।

Monday, January 30, 2017

रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 - यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप की इंटरनेशनल बोर्ड द्धारा की गई भर्त्सना के लिए मनोज देसाई को निशाना बनाने/बनवाने की यशपाल दास की 'कार्रवाई' ने तमाशा और बढ़ाया

अंबाला । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास के क्लब के प्रमुख सदस्य और यशपाल दास के नजदीकी नैन कँवर द्धारा वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के हुए चुनाव को रद्द करने के फैसले को लेकर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड की - की गई कड़ी आलोचना ने डिस्ट्रिक्ट में एक नया तमाशा खड़ा कर दिया है । इंटरनेशनल बोर्ड के प्रति नैन कँवर की नाराजगी को दरअसल यशपाल दास की नाराजगी के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है, और इसीलिए लोगों को हैरानी इस बात पर है कि राजा साबू गिरोह के दूसरे लोग तो इस फैसले पर जब खुशी व्यक्त कर रहे हैं - तब यशपाल दास इस फैसले पर दुखी क्यों हैं, और अपने लोगों के जरिए इंटरनेशनल बोर्ड को इस फैसले के लिए लानत क्यों भेज/भिजवा रहे हैं ? इंटरनेशनल बोर्ड के प्रति नैन कँवर के गुस्से का आलम यह है कि फैसले को लेकर बोर्ड सदस्यों की समझदारी और नीयत के साथ-साथ उनके 'अधिकारों' पर ही सवाल उठाते हुए उन्होंने इस फैसले को पक्षपातपूर्ण भी करार दिया है, और घोषणा की है कि वह इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों को बेनकाब करेंगे तथा बोर्ड सदस्यों का रवैया यदि नहीं बदला तो वह रोटरी ही छोड़ देंगे । उन्होंने आह्वान किया कि दूसरे रोटेरियंस इस काम में उनकी मदद करें । समझा जा रहा है कि नैन कँवर ने इशारों ही इशारों में इंटरनेशनल बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई को निशाना बनाया है । कई लोगों को लगता है कि नैन कँवर तो सिर्फ जरिया हैं, मनोज देसाई पर यह निशाना वास्तव में यशपाल दास ने लगाया/लगवाया है ।
राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट के वर्ष 2017-18 के लिए हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के चुनाव को रद्द कर देने के इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से वास्तव में यशपाल दास को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है । राजा साबू सहित डिस्ट्रिक्ट के दूसरे पूर्व गवर्नर्स की तरह यशपाल दास की भी फजीहत तो हुई ही है, उनका तो लेकिन रोटरी कैरियर ही खतरे में पड़ गया है । दरअसल संदर्भित चुनाव में यशपाल दास की सक्रिय पक्षपाती भूमिका को साबित करता हुआ उनका एक ईमेल संदेश खासी चर्चा में रहा है, जिसने रोटरी जगत में उनकी काफी बदनामी की/करवाई हुई है । उक्त ईमेल के सार्वजनीकरण के लिए भी यशपाल दास ने मनोज देसाई को जिम्मेदार ठहराया हुआ है । वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव के चलते राजा साबू एंड कंपनी को जो भी प्रतिकूल स्थितियों तथा फजीहतों का सामना करना पड़ा है, उसके लिए यशपाल दास और मधुकर मल्होत्रा लगातार पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता और मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई को कोसते सुने गए हैं । यशपाल दास का साफ आरोप रहा है कि रोटरी समुदाय में उन्हें बदनाम करने तथा अलग-थलग करने के लिए सुशील गुप्ता और मनोज देसाई ने ही षड्यंत्र रचा, और उनके डिस्ट्रिक्ट के एक चुनावी विवाद के बहाने उनकी फजीहत की/कराई है ।
वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के चुनाव को लेकर चले झगड़े में राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों के बीच इस बात पर जब-तब चर्चा तो होती ही रहती है कि यह झगड़ा करके उन्हें आखिर मिला क्या ? गिरोह के कुछेक लोगों को लगता है कि इस झगड़े की शुरुआत इस लक्ष्य को पाने के लिए हुई थी कि राजा साबू एंड कंपनी टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं बनने देगी, और अंततः इस लक्ष्य को चूँकि पा लिया गया है - इसलिए यह राजा साबू एंड कंपनी की जीत है । गिरोह/कंपनी के ही कई लोगों को लेकिन यह भी लगता है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए डिस्ट्रिक्ट को बदनामी व फजीहत के रूप में चूँकि भारी कीमत चुकानी पड़ी है - इसलिए यह तथाकथित 'जीत' वास्तव में बड़ी हार है । रोटरी जगत में इससे ज्यादा शर्म की बात भला क्या होगी कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने अपने फैसले में राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट की पूरी लीडरशिप की इस बात के लिए भर्त्सना की है कि वह चुनावी प्रक्रिया में 4-वे-टेस्ट तथा रोटरी के अन्य महान आदर्शों व परंपराओं का पालन करने में फेल रही है । रोटरी जगत में इससे यही संदेश गया है कि राजा साबू दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में जाकर जो बड़ी बड़ी बातें करते हैं, वह उनकी थोथी बातें ही हैं; उनका असली चेहरा देखना हो तो उनके अपने डिस्ट्रिक्ट में उनकी कारगुजारियों को देखो ! राजा साबू को जानने वालों का कहना है कि पोल खुलने के बाद भी राजा साबू लोगों के बीच बड़ी बड़ी हाँकने से बाज तो नहीं ही आयेंगे, और पूरी बेशर्मी से रोटरी के आदर्शों को लेकर बड़ी बड़ी बातें करते रहेंगे- लेकिन इंटरनेशनल बोर्ड द्धारा की गई टिप्पणियों को जानने वाले लोगों को तो उनकी बड़ी बड़ी बातों के पीछे छिपे नकलीपन को पहचानने में कोई समस्या नहीं होगी । इसीलिए कई लोगों को लगता है कि टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने से रोकने के चक्कर में राजा साबू ने रोटरी में अपने जीवन की सारी 'कमाई' गँवा दी है ।
रोटरी जगत के कई बड़े नेताओं का भी मानना और कहना है कि टीके रूबी को हराने की जिद में राजा साबू ने वास्तव में अपने डिस्ट्रिक्ट को तथा रोटरी को ही हरा दिया है । मजे की बात यह नजर आ रही है कि संदर्भित मामले में डिस्ट्रिक्ट और डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप की जो फजीहत हुई है, उसने राजा साबू गिरोह के दूसरे प्रमुख सदस्यों को ज्यादा निराश और परेशान किया हुआ है । दरअसल गिरोह के जिन सदस्यों को डिस्ट्रिक्ट से ऊपर जाना/पाना नहीं है, उन्हें तो डिस्ट्रिक्ट की और अपनी फजीहत से कोई फर्क पड़ता नहीं है; लेकिन यशपाल दास, मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर जैसे सदस्यों को इस बदनामी और फजीहत में अपनी महत्वाकाँक्षा के पंख टूटते दिख रहे हैं । इन लोगों को यह भी लग रहा है कि फजीहत और बदनामी से राजा साबू को तो कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन इनके लिए तो आगे का रास्ता ही बंद हो गया है । मधुकर मल्होत्रा और शाजु पीटर को इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना है; यशपाल दास की इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की इच्छा है - लेकिन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी बेईमानी में इनकी मिलीभगत और हरकतों की रोटरी जगत में जो चर्चा हुई है, उसके कारण इनके आगे के सफ़र पर ब्रेक लग गया है । इनकी समस्या यह है कि डिस्ट्रिक्ट में इनकी ही हरकतों के चलते जो हालात बन गए हैं, उसके कारण इनके लिए अपने ऊपर लगे धब्बों को जल्दी से धो पाना भी संभव नहीं होगा । इस स्थिति ने इन्हें बुरी तरह निराश और परेशान कर दिया है ।
इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को लेकर यशपाल दास के नजदीकी नैन कँवर की जो नाराजगी फूटी है, वह वास्तव में यशपाल दास की निराशा और परेशानी की ही अभिव्यक्ति है । समझा जाता है कि यशपाल दास चूँकि खुद तो इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले की खुली आलोचना कर नहीं सकते हैं, इसलिए उन्होंने अपने क्लब के वरिष्ठ सदस्य और अपने नजदीकी नैन कँवर को 'काम' पर लगाया है । लोगों का मानना और कहना है कि यशपाल दास की शह और सहमति नहीं होती, तो नैन कँवर को इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले पर कुछ कहने की जरूरत भला क्यों और क्या होती ? इस तरह की बातों ने डिस्ट्रिक्ट में एक नया तमाशा खड़ा कर दिया है । यशपाल दास के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपनी नाराजगी के लिए नैन कँवर ने लोगों से जो समर्थन माँगा, वह उन्हें नहीं मिला । इससे यही नतीजा निकाला जा रहा है कि इंटरनेशनल बोर्ड ने राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप की जो भर्त्सना की है, डिस्ट्रिक्ट के लोग उससे सहमत हैं और उसे उचित मानते हैं ।
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Monday, January 2, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080, यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में टीके रूबी मामले में हुई फजीहत का शिकार राजा साबू एंड कंपनी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति में फिलहाल अपने उम्मीदवारों को बेसहारा छोड़ा

चंडीगढ़ । प्रदीप अग्रवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने वास्ते जो तेजी भरी सक्रियता दिखाई हुई है, उसने नवजीत सिंह औलख - और उनके राजनीतिक गॉड फादर के रूप में देखे/पहचाने जा रहे मधुकर मल्होत्रा के लिए भारी समस्या पैदा कर दी है । इनकी समस्या ने डिस्ट्रिक्ट के बड़े वाले गॉड फादर राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू की असमंजसता को सामने लाने का काम किया हुआ है । हाल के दिनों में राजा साबू हालाँकि शांता क्लॉज तो बने हुए थे, लेकिन अपने लोगों को उपकृत करने के मामले में उनकी दशा बड़ी सूनी सूनी नजर आई । दुबई में आयोजित हुए रोटरी जोन इंस्टीट्यूट में राजा साबू की अनुपस्थिति का खास नोटिस लिया गया - और वहाँ उनकी इस अनुपस्थिति को उनके डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट टीके रूबी के मामले में हुई फजीहत से जोड़ कर देखा/पहचाना और बतियाया गया । राजा साबू ने हालाँकि दुबई इंस्टीट्यूट में न पहुँचने का ठीकरा अपनी पत्नी ऊषा साबू के सिर फोड़ा । उनके नजदीकियों के अनुसार, राजा साबू ने दुबई इंस्टीट्यूट में न आने/पहुँचने का कारण बताते हुए कहा/बताया है कि ऊषा जी को बाहर आने-जाने में तकलीफ होने लगी है - और वह उनको साथ लिए बिना कहीं आते-जाते नहीं हैं । इस तर्क को अधिकतर लोगों ने राजा साबू की बहानेबाजी के रूप में ही लिया/समझा, (इंस्टीट्यूट के तुरंत बाद जमशेदपुर में आयोजित हुई डिस्ट्रिक्ट 3250 की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में ऊषा जी को साथ लिए बिना उनके पहुँचने से यह बात तुरंत ही साबित भी हो गई) और यही माना कि टीके रूबी के मामले में हुई फजीहत से जुड़े सवालों से बचने के लिए ही राजा साबू ने दुबई इंस्टीट्यूट से दूर रहने का फैसला किया है । रोटरी के बड़े कार्यक्रमों में राजा साबू द्धारा की जाने वाली प्रमोशनल 'नाटकबाजी' को देखते आ रहे रोटेरियंस का कहना रहा कि राजा साबू का जोन इंस्टीट्यूट जैसे बड़े कार्यक्रम में न पहुँचना बड़ी 'घटना' है, जो वास्तव में टीके रूबी मामले में हुई फजीहत वाली घटना का 'बॉय  प्रॉडक्ट' है ।
टीके रूबी मामले में हुई फजीहत ने ही राजा साबू और उनके सिपहसालारों के लिए इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है - जिसके चलते उनके भरोसे रहने वाले उम्मीदवार मुसीबत में फँस गए हैं । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में तुर्रमखाँ बने रहने वाले पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स अपने अपने उम्मीदवारों से बचते/छिपते नजर आ रहे हैं । इस समय के डिस्ट्रिक्ट के सबसे बड़े तुर्रमखाँ मधुकर मल्होत्रा की बेचारगी देख कर उनके भरोसे उम्मीदवारी प्रस्तुत करने वाले नवजीत सिंह औलख अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटते हुए दिख रहे हैं; तो अपने आप को राजा साबू के सबसे ज्यादा नजदीक मानने/समझने वाले शाजु पीटर अपने उम्मीदवार गुरदीप सिंह दीप को राजा साबू का आशीर्वाद दिलवाने में असफल रहने के बाद से बुरी तरह निराश हो गए हैं । गुरदीप सिंह दीप को लेकर शाजु पीटर बड़ी उम्मीद से राजा साबू के पास गए थे, किंतु राजा साबू ने उन्हें टका-सा जबाव देकर यह कहते हुए टरका दिया कि, 'आप तो जानते ही हैं कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के झंझट में मैं नहीं पड़ता हूँ ।' राजा साबू के इस बदले रूप को देख कर शाजु पीटर सकते में आ गए और उनके सामने नौ सौ चूहे खा चुकी बिल्ली के हज पर जाने की तैयारी करने वाला दृश्य कौंध गया - गुरदीप सिंह दीप के सामने उनकी जो किरकिरी हुई, सो अलग ।
अपने अपने गॉड फादर से मदद मिलने की उम्मीद के कमजोर पड़ने के बाद से नवजीत सिंह औलख और गुरदीप सिंह दीप के प्रचार अभियान में जो ढील पैदा हुई, उसका फायदा उठाने में प्रदीप अग्रवाल ने जो तत्परता दिखाई - उसने सत्ता खेमे में जरूर हलचल मचाई है । दरअसल प्रदीप अग्रवाल को भी मधुकर मल्होत्रा के 'आदमी' के रूप में देखा/पहचाना जाता है । इस नाते से माना/समझा जा रहा है कि प्रदीप अग्रवाल को अवश्य ही मधुकर मल्होत्रा से हरी झंडी मिली होगी; और उनसे मिली हरी झंडी के बाद ही प्रदीप अग्रवाल ने तेजी और सक्रियता के साथ अपना अभियान शुरू किया है । मधुकर मल्होत्रा के कुछेक नजदीकियों का कहना है कि नवजीत सिंह औलख असल में मधुकर मल्होत्रा की उम्मीद के अनुसार सक्रिय नहीं हो सके; कुछेक मौकों पर मधुकर मल्होत्रा उनसे जो पैसे खर्च करवाना चाहते थे - नवजीत सिंह औलख ने चूँकि उसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली, इसलिए मधुकर मल्होत्रा ने उनकी उम्मीदवारी के समर्थन से हाथ खींच लिया है । कुछेक लोगों को लेकिन लगता है कि मधुकर मल्होत्रा ने डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में अपनी जगह बढ़ाने के लिए प्रदीप अग्रवाल को आगे कर दिया है, और वह प्रदीप अग्रवाल को सिर्फ इस्तेमाल कर रहे हैं - नवजीत सिंह औलख और प्रदीप अग्रवाल में से किसी एक को चुनने की नौबत आएगी, तब देखियेगा कि वह प्रदीप अग्रवाल को धोखा देकर नवजीत सिंह औलख को ही चुनेंगे ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में सत्ता खेमे के नेताओं के सामने दरअसल जितेंद्र ढींगरा की उम्मीदवारी से निपटने की गंभीर चुनौती है । टीके रूबी के मामले में सत्ता खेमे के नेताओं को रोटरी इंटरनेशनल से जो झटका लगा है, उससे कम से कम सत्ता खेमे के नेताओं को यह तो समझ में आ गया है कि उनकी मनमानियाँ मनमाने तरीके से तो अब नहीं चलेंगी । इस माह के अंत तक टीके रूबी के मामले में रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का जो फैसला आना है, उस पर भी सत्ता खेमे की भविष्य की राजनीति का भविष्य टिका है । टीके रूबी के मामले में इंटरनेशनल बोर्ड से सत्ता खेमे के नेताओं को यदि ज्यादा तगड़ा झटका लग गया, तो फिर जितेंद्र ढींगरा की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट में ऐसी मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल जाएगी - जिससे निपटना सत्ता खेमे के नेताओं के लिए मुश्किल ही होगा । दरअसल इसी बात को समझते हुए सत्ता खेमे के नेताओं ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की इस वर्ष की राजनीति से अभी अपने आप को पीछे किया हुआ है । वह टीके रूबी मामले में इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले का इंतजार कर लेना चाहते हैं, और उक्त फैसला आने के बाद ही वह तय करेंगे कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की इस वर्ष की राजनीति में वह अपनी कैसी क्या भूमिका निभाएँ - और निभाएँ भी या न निभाएँ ! सत्ता खेमे के नेताओं के इस रवैये ने उनके भरोसे रहने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवारों की मुसीबतों को बढ़ा दिया है । ऐसे में, प्रदीप अग्रवाल की अचानक से पैदा हुई/बनी सक्रियता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है ।

Thursday, July 21, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080, यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट से दर्ज हुई चुनावी शिकायत में आरोपी बनाए जाने के कारण इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म ने पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास की इलेक्शन रिव्यू कमेटी से छुट्टी की

अंबाला । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास को मौजूदा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म ने जोर का झटका जोर से देते हुए रोटरी इंटरनेशनल की इलेक्शन रिव्यू कमेटी के न सिर्फ चेयरमैन पद से हटा दिया है, बल्कि कमेटी से ही बाहर कर दिया है । इस कारण हुई अपनी फजीहत के असर को कम करने के लिए यशपाल दास हालाँकि लोगों को बता रहे हैं कि उन्हें हटाया नहीं गया है, चेयरमैन पद से और कमेटी से उन्होंने खुद ही इस्तीफा दिया है । तकनीकी रूप से यशपाल दास का कहना सही है और रिकॉर्ड पर दर्ज यही है कि उन्होंने इस्तीफा दिया है । किंतु यह रोटरी इंटरनेशनल की 'व्यवस्था' की व्यावहारिक प्रैक्टिस के तहत हुआ है - रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को जब किसी पदाधिकारी को उसके पद से हटाना होता है, तो वह उसे इस्तीफा देने का सुझाव देता है, ताकि उसे लोगों के बीच ज्यादा बेइज्जती न महसूस हो । यशपाल दास के साथ भी यही प्रकिया अपनाई गई, और इस प्रक्रिया के तहत इस्तीफा 'देकर' यशपाल दास ने अपनी इज्ज़त/फजीहत बचाने की कोशिश की है । किंतु फजीहत तो उनकी हो ही चुकी है । दरअसल इंटरनेशनल इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता और फिर चेयरमैनी पाने के लिए यशपाल दास ने पिछले रोटरी वर्ष में जोरदार लॉबिंग की थी और कई तरह की तिकड़में लगाने के बाद उन्हें यह पोजीशन मिली थी । इलेक्शन रिव्यू कमेटी के चैयरमैन के रूप में यशपाल दास ने जो 'जलवा' दिखाने की योजनाएँ बनाई थीं, रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म ने उन सब पर पानी फेर दिया है ।
यशपाल दास की इस फजीहत से सबसे ज्यादा खुश मुकेश अरनेजा हैं । डिस्ट्रिक्ट 3012 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मुकेश अरनेजा भी दरअसल इलेक्शन रिव्यू कमेटी के सदस्य होने के लिए प्रयास कर रहे थे और मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के समर्थन के भरोसे उन्हें पूरी पूरी उम्मीद थी कि उक्त कमेटी की सदस्यता उन्हें मिल ही जाएगी । मनोज देसाई ने इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता मुकेश अरनेजा को दिलवाने के लिए उचित तरीके से प्रयास नहीं किया और मुकेश अरनेजा को भ्रम में रखने के लिए उन्हें 'गोली' देते रहे, या मनोज देसाई की चली नहीं - यह तो किसी को नहीं पता, लेकिन यह सभी को पता है कि यशपाल दास के सामने मुकेश अरनेजा की दाल नहीं गली । हालाँकि इसके लिए मुकेश अरनेजा की बेवकूफीभरी अति महत्वाकांक्षा को भी जिम्मेदार माना/ठहराया गया । उल्लेखनीय है कि रोटरी इंटरनेशनल ने एक जुलाई 2015 को वर्ष 2016-17 के लिए नौ कमेटियों के लिए नाम आमंत्रित किए थे, जिसके जबाव में कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने अपनी अपनी पसंददीदा कमेटी की सदस्यता के लिए आवेदन किया था । आम तौर पर एक पूर्व गवर्नर ने किसी भी एक कमेटी की सदस्यता के लिए आवेदन किया, किंतु मुकेश अरनेजा ने हद यह की कि उन्होंने एक साथ चार कमेटियों का नाम दे दिया । उनका रवैया ऐसा था, जैसे वह कह रहे हों कि बस दे दो, चाहे कुछ भी दे दो । कुछ भी हड़प लेने की ताक में होने के बावजूद मुकेश अरनेजा ने इलेक्शन रिव्यू कमेटी के लिए सारा जोर लगाया हुआ था । इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता का रोटरी में ज्यादा 'ग्लैमर' है, और चर्चा सुनी जाती है कि इसमें बैठे-बैठाए 'कमाई' भी हो जाती है । तमाम कोशिशों के बावजूद लेकिन मुकेश अरनेजा का काम नहीं बना, और बाजी यशपाल दास के हाथ लगी । इसीलिए अब जब यशपाल दास से उक्त कमेटी की सदस्यता छीन ली गई है, तो स्वाभाविक रूप से मुकेश अरनेजा के दिल को तसल्ली मिली है - और मुकेश अरनेजा की यह खास खूबी है कि वह अपनी खुशी को छिपा कर नहीं रख पाते हैं और धूमधाम से उसे लोगों के बीच 'बाँटते' हैं ।
जानकारों के बीच की चर्चाओं के अनुसार, यशपाल दास से इलेक्शन रिव्यू कमेटी की चेयरमैनी तथा सदस्यता छिनने का कारण उनके अपने डिस्ट्रिक्ट से दर्ज हुई चुनावी शिकायत रही । यशपाल दास के लिए मुसीबत की बात सिर्फ यही नहीं हुई कि उनके अपने डिस्ट्रिक्ट से चुनावी शिकायत दर्ज हुई; मुसीबत की बात यह भी हुई कि चुनावी शिकायत में खुद यशपाल दास के खिलाफ गंभीर आरोप हैं । नैसर्गिक न्याय की माँग कहती है कि आरोपी ही जज नहीं हो सकता है - और इस नाते से यशपाल दास को खुद ही उक्त कमेटी को छोड़ देना चाहिए था । यशपाल दास ने लेकिन कमेटी में बने रहने की कोशिशें और तिकड़में कीं - उन्होंने यहाँ तक तर्क किया कि जिस मीटिंग में उनके अपने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी शिकायत पर चर्चा होगी, वह उस मीटिंग का हिस्सा नहीं बनेंगे । उल्लेखनीय है कि यशपाल दास के डिस्ट्रिक्ट के रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस मनसा देवी की तरफ से रोटरी इंटरनेशनल में 22 जून को चुनावी शिकायत दर्ज हुई । यशपाल दास में यदि जरा सी भी नैतिकता होती और रोटरी की साख व प्रतिष्ठा के प्रति उनके मन में जरा सा भी सम्मान होता, तो वह उसी समय इलेक्शन रिव्यू कमेटी के लिए दिए गए अपने आवेदन को वापस ले लेते । उस समय नहीं लिया, तो जून के आखिरी सप्ताह में जब उनका नाम इलेक्शन रिव्यू कमेटी के सदस्य और चेयरमैन के रूप में घोषित हुआ, तब तुरंत उन्हें उक्त पद को स्वीकार करने से इंकार कर देना चाहिए था । यशपाल दास ने लेकिन ऐसा करने की बजाए डिस्ट्रिक्ट में लोगों को यह बताना/कहना और शुरू कर दिया कि इलेक्शन रिव्यू कमेटी का चेयरमैन जब मैं ही हूँ, तो रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस मनसादेवी की चुनावी शिकायत का क्या होगा - समझ लो ! रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस मनसादेवी की चुनावी शिकायत का क्या होगा, यह तो बाद में पता चलेगा; अभी लेकिन यह हुआ है कि पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास को उक्त कमेटी से ही चलता कर दिया गया है ।
जाहिर है कि यशपाल दास अपनी ही हरकतों के कारण इस फजीहत का शिकार हुए हैं । इलेक्शन रिव्यू कमेटी का चेयरमैन बनने के बाद उन्होंने रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस मनसादेवी के खिलाफ जिस तरह की आक्रामकता का इज़हार किया, उसके कारण ही कमेटी से उनके हटने को लेकर ज्यादा चर्चा हुई है - और उन्हें अपने डिस्ट्रिक्ट के साथ-साथ दूसरे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच भी फजीहत का शिकार होना पड़ा है । यशपाल दास के लिए और भी ज्यादा फजीहत की बात यह हुई है कि कमेटियाँ गठित करने को लेकर रोटरी इंटरनेशनल ने पिछले रोटरी वर्ष से जो प्रक्रिया शुरू की, जिसके तहत यशपाल दास इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता व चेयरमैनी पाने की तिकड़म में सफल हुए - उसे लेकर डिस्ट्रिक्ट के ही एक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर शाजु पीटर पिछले रोटरी वर्ष में ही गंभीर संदेह व सवाल खड़े कर चुके थे । यशपाल दास के साथ जो हुआ, उसे शाजु पीटर के लिखे हुए को पढ़ते हुए 'देखें' - तो यशपाल दास का खासा भद्दा मजाक बना नजर आता है । रोटरी में लोगों को कहने का मौका मिला है कि यशपाल दास से होशियार तो शाजु पीटर साबित हुए हैं ।

Saturday, May 21, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080, यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में क्लब्स के पदाधिकारियों ने राजा साबू की धूर्त राजनीति को एक बार फिर तगड़ा झटका दिया

देहरादून । राजा साबू और उनके दरबार में नंबर एक 'बनने' की दौड़ में शामिल पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने डीसी बंसल के सिर पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नरी का ताज सजाने की जो तैयारी की थी, क्लब्स के पदाधिकारियों ने खासी चतुराई दिखाते हुए उसे धूल में मिला दिया है - जो हुआ है, उसे देख/जान कर राजा साबू व उनके 'शार्प शूटर' पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स सकते में हैं और उन्हें अपनी इज्ज़त बचाने का कोई तरीका समझ नहीं आ रहा है । जो हुआ है, वह टीके रूबी व डीसी बंसल के बीच हुए चुनाव का नतीजा भर नहीं है - बल्कि राजा साबू की तिकड़मी राजनीति पर ऐसा झन्नाटेदार तमाचा है, जिसकी गूँज देर तक व दूर तक सुनी जाएगी । मजे की बात हालाँकि यह है कि राजा साबू की चुनाव में कोई खुली भूमिका नहीं थी, किंतु चुनाव में कदम कदम पर उनके नाम का हवाला पूरा था । यशपाल दास, मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर व अन्य जो लोग डीसी बंसल के पक्ष में वोट इकट्ठा कर रहे थे, वह खुल कर राजा साबू का नाम ले रहे थे; और राजा साबू के नाम पर क्लब्स के पदाधिकारियों पर भावनात्मक व प्रशासनिक दबाव बना कर उन्हें मजबूर कर रहे थे । यशपाल दास को तो अपने ही क्लब में राजा साबू के नाम की दुहाई देनी पड़ी । यह हरकतें राजा साबू के संज्ञान में थीं, किंतु उन्होंने कभी भी चुनावी राजनीति में अपना नाम घसीटे जाने पर आपत्ति नहीं की - तो इसका कारण यही था कि इस हरकत में उनकी सिर्फ मिलीभगत ही नहीं थी, बल्कि यह हरकत वास्तव में उनका ही प्लान थी । इस प्लान में राजा साबू एक तरफ यह 'दिखाने' का प्रयास कर रहे थे कि वह तो इस चुनाव से दूर ही हैं, और दूसरी तरफ वह चुनाव को निर्णायक तरीके से प्रभावित भी कर रहे थे । राजा साबू 'इसी तरीके' से अपने 'कामों' को अंजाम देते रहे हैं - इस बार लेकिन उन्हें क्लब्स के पदाधिकारियों की तरफ से ऐसा जबाव मिला है, कि उनकी सारी होशियारी हवा हो गई है ।
राजा साबू की चाल को सफल बनाने में लगे यशपाल दास, मधुकर मल्होत्रा व शाजु पीटर अभी हाल ही में संपन्न हुई डिस्ट्रिक्ट असेम्बली तथा उससे पहले तक दावा करते सुने गए थे कि डीसी बंसल के पक्ष के अस्सी वोट तो उनके पास आ चुके हैं । इन दावों के भरोसे ही वोटों की गिनती शुरू होने तक हर किसी को डीसी बंसल की भारी जीत घोषित होने का इंतजार था । लेकिन वोटों की गिनती जब पूरी हुई, तो नतीजा देख/सुन कर हर कोई हैरान रह गया । टीके रूबी और डीसी बंसल को बराबर बराबर वोट मिले और नतीजा टाई के रूप में निकला । यह तथ्य तो सिर्फ नतीजा है, इससे पूरी बात पता नहीं चलती है । पूरी बात तब पता चलेगी, जब वोटों का पूरा विवरण जानेंगे - और तभी जान सकेंगे कि पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू की धूर्त राजनीति को सबक सिखाने के लिए क्लब्स के पदाधिकारियों ने किस तरह का 'कौशल' दिखाया । उल्लेखनीय है कि कुल वोट 129 थे, जिनमें से टीके रूबी और डीसी बंसल को 39-39 वोट मिले, तथा 43 वोट अवैध घोषित हुए - और 14 वोट डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय पहुँचे ही नहीं । रोटरी के किसी भी चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में वोटों का अवैध होना तथा गायब हो जाना - जबकि एक एक वोट के लिए भयानक मारामारी मची हुई हो, और डिस्ट्रिक्ट के बड़े बड़े सूरमा वोट जुटाने के काम में लगे हुए हों - भारी हैरान करने वाली बात है । लेकिन इस हैरान करने वाली बात में ही क्लब्स के पदाधिकारियों का वह 'कौशल' छिपा है, जो उन्होंने राजा साबू की धूर्त राजनीति से निपटने में इस्तेमाल किया । यशपाल दास, मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर आदि की तरफ से दावा किया गया है कि अवैध व गायब हुए वोट डीसी बंसल के थे, और जिनके सहारे डीसी बंसल को बड़ी जीत मिलनी थी । उनकी तरफ से किए जा रहे इस दावे को हर कोई सच भी मान रहा है, किंतु सच्चाई यह है कि अवैध व गायब हुए वोट डीसी बंसल की उम्मीदवारी के पक्ष में पड़े तो जरूर - लेकिन वह इस तरह 'पड़े' कि डीसी बंसल के काम न आ सके ।
समझा जा रहा है कि क्लब्स के पदाधिकारियों के बीच राजा साबू की धूर्त राजनीति के खिलाफ जो रोष पैदा हुआ, वोटों को जानबूझ कर अवैध व गायब करके क्लब्स के पदाधिकारियों ने उसका इजहार किया है । राजा साबू का नाम लेकर यशपाल दास, मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर आदि ने क्लब्स के पदाधिकारियों पर जिस तरह का दबाव बनाया, उससे क्लब्स के पदाधिकारियों ने अपने आपको अपमानित महसूस किया और पाया कि राजा साबू तथा उनके लोगों ने उन्हें तो जैसे अपना 'पालतू' समझ लिया है - और उनके नाम पर कैसी भी मनमानी करने लगते हैं । खुद को अपमानित महसूस करने तथा रोष में होने के बावजूद उन्हें जब राजा साबू की धूर्त राजनीति का खुला विरोध करना मुश्किल लगा, तो उन्होंने 'असहयोग' का रास्ता अपनाया और विरोध का ऐसा तरीका अपनाया - जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी । अपनी नाराजगी, अपने गुस्से, अपने विरोध को जाहिर करने के खासे अनोखे अनोखे तरीके दुनिया के इतिहास में खूब मिलते हैं - डिस्ट्रिक्ट 3080 के क्लब्स के पदाधिकारियों ने उनमें जो इजाफा किया है, उसे दुनिया को व समाज को रोटरी की एक देन के रूप में निश्चित ही पहचाना जायेगा । रोटरी ने दुनिया को व समाज को बहुत कुछ दिया है, इसलिए शातिर व धूर्त लोगों को सबक सिखाने के लिए अपनाया गया विरोध का यह तरीका भी रोटरी की देन के रूप में ही देखा जायेगा ।
यशपाल दास, मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर की तिकड़ी के रूप में 'टीम राजा साबू' ने हालाँकि अभी भी सबक नहीं सीखा है और वह चुनावी नतीजे को प्रभावित करने की कोशिशों से बाज नहीं आ रहे हैं । उल्लेखनीय है कि रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानून में स्पष्ट निर्देश है कि चुनाव में बराबर बराबर वोट होने की स्थिति में नोमीनेटिंग कमेटी द्धारा चुने गए अधिकृत उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जायेगा । इस निर्देश के अनुसार, नोमीनेटिंग कमेटी द्धारा चुने गए अधिकृत उम्मीदवार टीके रूबी को विजेता घोषित होना चाहिए । किंतु डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन ने रोटरी इंटरनेशनल के इस स्पष्ट निर्देश का पालन  करने में कोई दिलचस्पी नहीं ली । चर्चा रही कि राजा साबू की तरफ से उन्हें निर्देश मिला कि टीके रूबी को विजेता घोषित करने की बजाए, चोर दरवाजे व बहाने खोजे जाएँ - जिनकी आड़ लेकर डीसी बंसल को विजेता घोषित किया जाए । तर्क दिया गया है कि रोटरी इंटरनेशनल के फैसले के कारण वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का चुनाव नए सिरे से हुआ है, इसलिए टीके रूबी के अधिकृत उम्मीदवार होने की बात स्वतः खारिज हो जाती है - और इसलिए अब यह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के अधिकार-क्षेत्र की बात हो जाती है कि बराबर बराबर वोट पाने वाले उम्मीदवारों में से वह किसे विजेता घोषित करे । राजा साबू का नाम लेकर यह तर्क दिया तो गया, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन की इस पर अमल करने की हिम्मत नहीं हुई । सुरक्षित तरीका यह समझा गया कि इस पर रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय की राय माँगी जाए । यशपाल दास, मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर आदि की तरफ से दावा किया जा रहा है कि रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय से राजा साबू मनमाफिक फैसला करवा ही लेंगे और अंततः वही होगा - जो 'हम' चाहेंगे ।
उल्लेखनीय है कि ठीक 15 महीने पहले - 22 फरवरी 2015 को टीके रूबी नोमीनेटिंग कमेटी के द्वारा अधिकृत उम्मीदवार चुने गए थे, जिसके बाद से ही राजा साबू के नेतृत्व में उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से दूर रखने की तरकीबें लगाना शुरू हो गईं थीं । इससे पहले तक नोमीनेटिंग कमेटी द्धारा चुना गया अधिकृत उम्मीदवार ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनता रहा है; लेकिन टीके रूबी के मामले में डिस्ट्रिक्ट में चली आ रही इस महान परंपरा को तिलांजलि दे दी गई । पिछले पंद्रह महीनों से चला आ रहा घटनाक्रम देखें तो पाते हैं कि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव नहीं हो रहा है, बल्कि एक जंग हो रही है; जंग भी ऐसी जिसमें भारी भरकम फौज एक अकेले उम्मीदवार के खिलाफ पिली पड़ी है । राजा साबू के नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स की फौज ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को इस हद तक अपना गुलाम बना लिया है कि टीके रूबी द्धारा आयोजित एक कार्यक्रम में डिस्ट्रिक्ट टीम के जो पदाधिकारी शामिल हुए, उन्हें डिस्ट्रिक्ट टीम से निकाल दिया गया । तमाम हरकतों के बावजूद 'टीम राजा साबू' को अपने लक्ष्य में सफलता नहीं मिली है, और डिस्ट्रिक्ट से लेकर रोटरी इंटरनेशनल तक उनकी चालबाजियाँ पिटती रही हैं । आज के चुनावी नतीजे से यह भी साफ हो गया है कि डिस्ट्रिक्ट में टीम राजा साबू के खिलाफ माहौल पूरी तरह से पक चुका है । इसके बावजूद जिस तरह से टीम राजा साबू अपनी हरकतों से बाज आती हुई नहीं दिख रही है, उससे लगता है कि डिस्ट्रिक्ट में अभी और दिलचस्प नज़ारे देखने को मिलेंगे ।