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Monday, July 8, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के इंस्टॉलेशन समारोह में 'बिन बुलाए' आए यश पाल दास को मिली तवज्जो तथा शाजु पीटर व जेपीएस सिबिया की मौजूदगी को डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में राजा साबू गिरोह की वापसी करने की तैयारी के संकेतों के रूप में देखा जा रहा है

चंडीगढ़ । जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट इंस्टॉलेशन समारोह में राजेंद्र उर्फ राजा साबू के साथ-साथ उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स की उपस्थिति ने डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का सर चकराने का काम किया है । उल्लेखनीय है कि जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रमों में राजा साबू तो आते रहे हैं; लेकिन यश पाल दास, शाजु पीटर, जेपीएस सिबिया जैसे उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स कभी नहीं दिखे हैं । इसीलिए इनकी उपस्थिति पर लोगों को हैरानी हुई और फुसफुसाहटें शुरू हुईं कि यह लोग कैसे आ गए ? इन पूर्व गवर्नर्स का आरोप रहा है कि जितेंद्र ढींगरा ने इन्हें कभी अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित ही नहीं किया । पिछले एक कार्यक्रम में कुछेक लोगों के सामने राजा साबू ने जितेंद्र ढींगरा से यह शिकायत करते हुए उन्हें सुझाव दिया था कि वह इन पूर्व गवर्नर्स को भी आमंत्रित किया करें । समझा गया कि राजा साबू के सुझाव पर जितेंद्र ढींगरा ने इन पूर्व गवर्नर्स को भी आमंत्रित कर लिया होगा, और इसलिए यह जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रम में आ पहुँचे । जितेंद्र ढींगरा ने लेकिन कई मौकों पर अलग अलग लोगों के सामने स्पष्ट कहा कि उन्होंने इन्हें 'खासतौर' से नहीं आमंत्रित किया था । जितेंद्र ढींगरा का कहना रहा कि उन्होंने तो पहले की तरह ही सभी के लिए एक आम निमंत्रण भेजा था - पहले यह उस निमंत्रण को निमंत्रण नहीं मानते थे, लेकिन अब की बार उन्होंने मान लिया; तो इस बदले हुए रवैये का कारण वही जानते होंगे । दरअसल पिछले करीब तीन वर्षों में डिस्ट्रिक्ट में जो राजनीतिक व प्रशासनिक गंद मचा रहा, उसके लिए राजा साबू के इन तीन नजदीकी पूर्व गवर्नर्स को ही मुख्य रूप से जिम्मेदार माना/ठहराया जाता रहा है । इसीलिए पहले टीके रूबी के गवर्नर-वर्ष में इन्हें कोई तवज्जो नहीं मिली, और अब जितेंद्र ढींगरा के गवर्नर-वर्ष में भी इनके साथ वैसा ही सुलूक होने की उम्मीद की जा रही थी । इसीलिए लोगों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट में अपना 'वनवास' खत्म करने के लिए ही राजा साबू के नजदीकी पूर्व गवर्नर्स यश पाल दास, शाजु पीटर और जेपीएस सिबिया 'बिन बुलाए' ही जितेंद्र ढींगरा के कार्यक्रम में आ पहुँचे ।
दरअसल राजा साबू और उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट की प्रशासनिक व्यवस्था व राजनीति में पुनर्वापसी के लिए लगातार हाथ-पैर मार रहे हैं । अपनी पुनर्वापसी का विश्वास उन्हें मौजूदा व भावी गवर्नर्स - जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के 'व्यवहार' से भी हुआ । इन तीनों के 'व्यवहार' से राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स को लगा कि यह तीनों उनके नजदीक आना/रहना चाहते हैं । राजा साबू के नजदीकी मनमोहन सिंह को जितेंद्र ढींगरा द्वारा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाए जाने से राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स का पुनर्वापसी का हौंसला और बढ़ा । राजा साबू और उनके नजदीकी गवर्नर्स लेकिन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के प्रति अपनी खुन्नस को नहीं छोड़ पाए और उन्हें लगा कि जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के ढीले-ढाले रवैये में वह टीके रूबी को निशाना बना लेंगे । इसी के तहत अभी हाल तक, राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने टीके रूबी के डीआरएफसी (डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन) बनने में अड़चनें डालने के प्रयास किए । इन प्रयासों पर लेकिन जितेंद्र ढींगरा के कड़ा रवैया अपनाने से पानी फिर गया । जितेंद्र ढींगरा के 'कभी नर्म तो कभी गर्म' रहने पर राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को इतना तो शायद समझ में आ गया है कि जितेंद्र ढींगरा, रमेश बजाज व अजय मदान के साथ उनके नजदीक तो आ सकते हैं - लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह तीनों उन्हें टीके रूबी के साथ 'बदतमीजी' करने का मौका दे देंगे । माना/समझा जा रहा है कि इसीलिए राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने अब यह योजना बनाई है कि तवज्जो न दिए जाने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में उन्हें अपनी उपस्थिति बनानी और 'दिखानी' चाहिए; इससे वह सत्ता में न होते हुए भी मेडीकल मिशन जैसे अपने स्वार्थी 'काम' बना सकेंगे - और इसीलिए यश पाल दास, शाजु पीटर व जेपीएस सीबिया 'बिन बुलाए' ही जितेंद्र ढींगरा के इंस्टॉलेशन कार्यक्रम में आ पहुँचे ।
दरअसल राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में शामिल होकर वह एक तरफ तो अपने 'काम' बनाने/निकालने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट के लोगों को यह संकेत दे सकते हैं कि जितेंद्र ढींगरा और उनके साथियों ने उनके साथ नजदीकी बनाना शुरू कर दिया है और इसीलिए वह उन्हें अपने कार्यक्रमों में शामिल कर रहे हैं; और दूसरी तरफ वह विभिन्न मुद्दों पर अपनी अलग राय रख कर वह जितेंद्र ढींगरा और उनके साथियों के बीच खटराग पैदा करने का मौका पा सकते हैं । राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत हुई नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी के मामले में अपनी अलग राय देकर अपने इरादे जाहिर भी कर दिए हैं । खुद राजा साबू ने जितेंद्र ढींगरा को सलाह दी है कि इस वर्ष किसी महिला को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुना जाना चाहिए । इस सलाह के जरिए राजा साबू ने वास्तव में नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को विवादास्पद बनाने का दाँव चला है । जितेंद्र ढींगरा ने हालाँकि अभी तो नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी पर कोई 'समझौता' करने से इंकार कर दिया है; लेकिन कौन जानता है कि राजा साबू ने जो दाँव चला है, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में टीके रूबी व जितेंद्र ढींगरा की जो धाक जमी है, वह बिखर न जाए ! जितेंद्र ढींगरा के कई एक नजदीकियों का कहना है कि उन्हें यह बात समझ नहीं आती है कि जितेंद्र ढींगरा जब यह मानते हैं और कहते भी रहते हैं कि राजा साबू और उनके संगी-साथी अपनी 'हरकतों' से बाज नहीं आयेंगे, तब फिर वह उन्हें तवज्जो देते हुए हरकतें करने का मौका क्यों दे रहे हैं ? पिछले तीन वर्षों में राजा साबू और उनके गिरोह के साथ छिड़ी लड़ाई में टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा का लगातार साथ देने वाले कई लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति और व्यवस्था में राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को जब पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है, तब फिर उन्हें किसी भी तरह की तवज्जो देकर उनके लिए वापसी का रास्ता क्यों तैयार किया जा रहा है ? डिस्ट्रिक्ट के कई लोग इंस्टॉलेशन कार्यक्रम में यश पाल दास को मिली तवज्जो तथा शाजु पीटर व जेपीएस सिबिया की मौजूदगी को पिछले तीन वर्षों की 'लड़ाई' में मिली जीत पर पानी फिरने की शुरुआत के रूप में भी देख/पहचान रहे हैं ।

Sunday, March 18, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद पर रमेश बजाज की जीत कपिल गुप्ता के साथ-साथ वास्तव में राजा साबू और उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स की हार है तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी की जोरदार जीत है

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव कपिल गुप्ता के लिए चुनौतीपूर्ण तो था, लेकिन वह इतनी बुरी तरह से चुनाव हार जायेंगे - इसकी उम्मीद उनके विरोधियों को भी नहीं थी । कपिल गुप्ता अपनी हार का ठीकरा जिस तरह पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के सिर फोड़ते 'सुने' जा रहे हैं, उससे लग रहा है कि वह आगे के लिए भी अपने रास्ते बंद कर ले रहे हैं । मोटे तौर पर डिस्ट्रिक्ट का चुनावी माहौल कपिल गुप्ता के लिए पूरी तरह अनुकूल था; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी भारी दबाव में थे, जिसके चलते उनके उम्मीदवार के रूप में देखे/पहचाने जा रहे रमेश बजाज को सत्ता का समर्थन मिलता नहीं दिख रहा था, उम्मीदवार के रूप में खुद रमेश बजाज का व्यवहार और रवैया भी ढीला/ढाला था - लेकिन फिर भी कपिल गुप्ता मौके का फायदा नहीं उठा सके, उसे देख कर लोगों को लग रहा है कि कपिल गुप्ता के बस की चुनाव लड़ना है ही नहीं । चुनाव वाले दिन, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में चुनाव संबंधी एक प्रस्ताव को लेकर मचे हंगामे में कपिल गुप्ता और उनके भाई कमल गुप्ता का 'कुल्हाड़ी पर पैर मारने' वाला जो रवैया देखा गया - उससे ही साबित हो गया था कि कपिल गुप्ता जब खुद ही अपनी उम्मीदवारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, और खुद ही अपनी चुनावी नाव डुबोने में लगे हैं, तब फिर उन्हें भला कौन बचा सकता है ? नोमीनेटिंग कमेटी में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के होने से कपिल गुप्ता को उम्मीद थी कि कमेटी के सदस्यों को वह मैनेज कर लेंगे और उन्हें अधिकृत उम्मीदवार चुनवा देंगे, लेकिन मधुकर मल्होत्रा ने अपनी तरफ से कोई अतिरिक्त प्रयास किया ही नहीं और कपिल गुप्ता नोमीनेटिंग कमेटी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव भारी अंतर से चुनाव हार गए ।
कपिल गुप्ता, राजा साबू और उनके गिरोह के जिन नेताओं के भरोसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी मैदान में थे - उनके बीच तालमेल के अभाव का नजारा यह रहा कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के पहले दिन राजा साबू और उनके गिरोह के नेता कॉन्फ्रेंस में आने की बजाये यमुना नगर में अपना एक अलग कार्यक्रम कर रहे थे । लोगों के बीच चर्चा रही कि राजा साबू गिरोह के सदस्यों ने यह हरकत डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को फेल करने के उद्देश्य से की थी । उन्हें उम्मीद थी कि डिस्ट्रिक्ट के लोग टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जाने की बजाये उनके कार्यक्रम में आना पसंद करेंगे और इस तरह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का रंग फीका पड़ जायेगा । पर हुआ उल्टा । टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रिकॉर्ड आठ/नौ सौ लोग जुटे और राजा साबू के कार्यक्रम में यमुनानगर के ही थोड़े से लोग आए । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि थे । राजा साबू ने जब देखा/पाया कि उनका कार्यक्रम तो पिट गया है और टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस 'सुपर हिट' जा रही है, तो उन्हें अक्ल आई और उन्होंने सोचा कि चलो, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में ही चलते हैं और वहाँ हरियाणा के राज्यपाल के साथ फोटो-सेशन भी कर/करवा लेंगे । लेकिन इस मामले में भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी उनसे तेज निकले । टीके रूबी को जैसे ही पता चला कि राजा साबू अपने साथी गवर्नर्स के साथ कॉन्फ्रेंस में आ रहे हैं, तो उन्होंने आनन-फानन में कॉन्फ्रेंस का समापन ही कर/करवा दिया । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को कॉन्फ्रेंस स्थल पर खाली कुर्सियाँ ही मिली/दिखीं - और इस तरह एक ही दिन में उन्हें दो बार चोट पड़ी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने पहला झटका तो उन्हें अपनी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रिकॉर्ड उपस्थिति के जरिये डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को खराब करने की उनकी कोशिश को फेल करके दिया, और दूसरे झटके के रूप में अंतिम क्षणों में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में शामिल होने की राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की कोशिश को फेल करने का काम किया ।
डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व सदस्यों के लिए और भी बुरा रहा । रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ पूर्व प्रेसीडेंट मोहिंदर पॉल गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी प्रक्रिया में संशोधन का एक प्रस्ताव रखा, जिसमें नोमीनेटिंग कमेटी की व्यवस्था को हटा कर रोटरी इंटरनेशनल की एमओपी के अनुसार चुनाव करवाने का सुझाव दिया गया । इस प्रस्ताव पर कॉन्फ्रेंस में बबाल हो गया । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर ने इस प्रस्ताव के खिलाफ भारी शोर मचाया । उनका कहना रहा कि इस प्रस्ताव पर कॉलिज और गवर्नर्स में कोई चर्चा नहीं हुई है, इसलिए इस प्रस्ताव पर यहाँ विचार नहीं हो सकता है । उन्होंने इस प्रस्ताव को स्थगित करने की माँग की । मोहिंदर पॉल गुप्ता का तर्क लेकिन यह रहा कि किसी भी प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रखने के लिए जिस भी प्रक्रिया का पालन करना होता है, उनके क्लब ने उस प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया है और इसलिए इस प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रखने से और इस पर फैसला होने से नहीं रोका जा सकता है । इसके बाद भी, राजा साबू की शह पर शुरू हुआ जेपीएस सीबिया व शाजु पीटर का शोर जब कम नहीं हुआ तथा राजा साबू गिरोह के कुछेक और पूर्व गवर्नर्स ने उनका साथ देना शुरू कर दिया, तब डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद मुकेश अरनेजा ने मोर्चा संभाला और साफ कहा कि किसी भी प्रस्ताव को कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में रखना कोई जरूरी नहीं है; कॉन्फ्रेंस में रखने वाले प्रस्ताव को क्लब्स के प्रेसीडेंट को भेजना जरूरी होता है और यदि किसी पूर्व गवर्नर को प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं है तो इस बारे में शिकायत उसे अपने क्लब में करना चाहिए । जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर वैसे तो अपने आप को रोटरी का बड़ा ज्ञाता समझते/बताते हैं, लेकिन मुकेश अरनेजा के तर्क से लोगों के सामने पोल खुली कि उन्हें या तो रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का अता/पता नहीं है और या वह अपनी हेकड़ी दिखाने/जताने की कोशिश कर रहे हैं ।
मुकेश अरनेजा से मिली जानकारी से कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोग जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर पर भड़क उठे । रोटरी क्लब करनाल मिडटाउन की युवा महिला सदस्य अंशु गोयल का चौधराहटभरी मनमानी राजनीति के खिलाफ जो गुस्सा फूटा, उसने कॉन्फ्रेंस के माहौल को ही बदल दिया । फिर तो हर किसी ने राजा साबू और उनके गिरोह के सदस्यों की लानत-मलानत शुरू कर दी । लोगों का आरोप रहा कि नोमीनेटिंग कमेटी के जरिये पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के चुनाव में अपनी मनमानी थोपने की कोशिश करते हैं, इसलिए मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव से उन्हें चूँकि अपनी मनमानी के मौके छिनते दिख रहे हैं - इसलिए वह बौखला रहे हैं । माहौल को खिलाफ बनता देख राजा साबू ने तो मौके से खिसक लेने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी और वह अपने संगी-साथियों को वही छोड़ कर चुपचाप कॉन्फ्रेंस से निकल गए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव पर मत-विभाजन करवाते हुए आह्वान किया कि जो लोग प्रस्ताव के समर्थन में हैं वह राइट साइड में आ जाएँ, और जो लोग प्रस्ताव के खिलाफ हैं वह लेफ्ट साइड में रहें । राजा साबू गिरोह के पूर्व गवनर्स के लिए शर्मनाक स्थिति यह बनी कि लेफ्ट साइड में उनके साथ कुल छह/आठ रोटेरियंस ही बचे, जबकि कॉन्फ्रेंस में मौजूद तमाम सदस्य राइट साइड में जा पहुँचे । मजेदार और आत्मघाती रवैया रहा कपिल गुप्ता और उनके भाई कमल गुप्ता का । वह देख रहे थे कि कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों में 95 प्रतिशत मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव के समर्थन में हैं, लेकिन फिर भी वह प्रस्ताव के विरोध में रहे - और बड़े मुखर तरीके से रहे । उनके समर्थकों को ही आश्चर्य हुआ कि उम्मीदवार होने के चलते उन्हें इस बबाल में सक्रिय रूप से कूदने की जरूरत भला क्या थी ? उनके सामने पूर्व गवर्नर्स का समर्थन करने की मजबूरी यदि थी भी, तो भी उन्हें 'साइलेंट समर्थक' की भूमिका में रहना था । मौके पर मौजूद हर किसी ने माना कि मोहिंदर पॉल गुप्ता के जिस प्रस्ताव को कॉन्फ्रेंस में जबर्दस्त समर्थन मिल रहा था, उसका सक्रिय विरोध करके कपिल गुप्ता ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मार ली थी, बल्कि अपने पैर ही कुल्हाड़ी पर मार लिए थे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में कपिल गुप्ता की हार को उसी समय लोगों ने पहचान लिया था और कहना शुरू कर दिया था कि कपिल गुप्ता को अब अगले वर्ष की तैयारी शुरू कर देना चाहिए । चुनाव शुरू होने से पहले ही लोगों के मुँह से इस तरह की बातें सुन कर कपिल गुप्ता की पत्नी ने कुछेक लोगों के प्रति अपनी नाराजगी भी दिखाई, लेकिन उनकी नाराजगी भी कपिल गुप्ता को एक बड़ी पराजय से नहीं बचा सकी ।

Wednesday, April 5, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 - यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह की पत्नी पूनम सिंह की अचानक से प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने दूसरे उम्मीदवारों के चुनावी समीकरणों को गड़बड़ाने का काम तो कर ही दिया है

चंडीगढ़ । वर्ष 2018-19 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अचानक से प्रस्तुत हुई पूनम सिंह की उम्मीदवारी ने एक विवाद को जन्म देने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के समीकरणों को नए सिरे से संयोजित होने की स्थितियाँ भी बनाई हैं । विवाद का कारण यह  आरोप बना है कि पूनम सिंह की उम्मीदवारी के जरिए राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू के नजदीकियों ने एक बार फिर रोटरी के नियमों तथा उसके आदर्शों के साथ खिलवाड़ शुरू कर दिया है । पूनम सिंह पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह की पत्नी हैं, और मौजूदा रोटरी वर्ष में असिस्टेंट गवर्नर के पद पर हैं । डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज के अनुसार, असिस्टेंट गवर्नर के पद पर होने के कारण वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार नहीं हो सकती हैं । आरोप के अनुसार, पूनम सिंह यदि एक सामान्य रोटेरियन होतीं, तो उन्हें डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज पढ़ा दिया जाता और उन्हें उम्मीदवार नहीं बनने दिया जाता - पूनम सिंह लेकिन एक सामान्य रोटेरियन नहीं हैं; वह पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह की पत्नी हैं, उन मनप्रीत सिंह की - जो राजा साबू के बड़े खास लोगों में हैं : इसलिए डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज को अनदेखा करते हुए पूनम सिंह की उम्मीदवारी को स्वीकृति दे दी गई है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा का कहना लेकिन यह है कि वर्ष 2018-19 के गवर्नर के लिए होने वाला चुनाव रोटरी इंटरनेशनल की एक विशेष घोषणा के तहत हो रहा है, जो डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज की बंदिश से अलग है; तथा व्यावहारिक कारणों से भी जिसे डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज के अनुसार नहीं करवाया जा सकता है । रमन अनेजा का कहना है कि उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल से भी पूछ लिया है कि पूनम सिंह का स्टेटस ऐसा ऐसा है, वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार हो सकती हैं या नहीं ? रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार, पूनम सिंह उम्मीदवार होने की पात्रता रखती हैं - इसलिए वहाँ से स्पष्ट जबाव आ गया कि हाँ, वह उम्मीदवार हो सकती हैं । रमन अनेजा का कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल से हरी झंडी मिलने के बाद ही वर्ष 2018-19 के लिए पूनम सिंह की उम्मीदवारी को मान्य किया गया है ।
पूनम सिंह की उम्मीदवारी पर सवाल उठाने वाले लोगों का कहना लेकिन यह है कि बात सिर्फ नियम-कानूनों की नहीं है, डिस्ट्रिक्ट में - राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में अपनाए गए ऊँचे आदर्शों का पालन करने की भी है । उनका तर्क है कि डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज बनाए ही इसलिए गए हैं, ताकि रोटरी में डिस्ट्रिक्ट की एक विशेष पहचान बनाई जा सके । यह ठीक है कि वर्ष 2018-19 के गवर्नर के लिए होने वाला चुनाव एक विशेष चुनाव है, जिसमें व्यावहारिक रूप में डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा सकता है - लेकिन इसका मतलब यह कहाँ है कि डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज की जो मुख्य बातें हैं - जो डिस्ट्रिक्ट की विशेष पहचान बनाने के लिए तय की गईं थीं, उनका भी पालन न किया जाए । डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों का मानना और कहना है कि कम से कम डिस्ट्रिक्ट के बड़े नेताओं व पदाधिकारियों से तो यह उम्मीद की ही जाती है कि डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज के जरिए जिन चीजों/बातों को रोकने की कोशिश की गई है, वह 'चोर-दरवाजों' से उन्हें करने का प्रयास न करें । इस तरह की बातों और आलोचनाओं से बेपरवाह बने पूनम सिंह की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं का कहना है कि चुनावी राजनीति में इस तरह की बातें होती ही हैं और तरह तरह के आरोप लगते ही हैं; पूनम सिंह की उम्मीदवारी रोटरी के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करती है, और रोटरी इंटरनेशनल के संबद्ध पदाधिकारियों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही पूनम सिंह की उम्मीदवारी को प्रस्तुत किया गया है - इसके बाद भी कुछेक लोग उनकी उम्मीदवारी पर विवाद खड़ा कर रहे हैं, तो यह दूसरे उम्मीदवारों के नजदीकी लोग हैं जो दरअसल पूनम सिंह की उम्मीदवारी प्रस्तुत होने के कारण अपने अपने उम्मीदवारों की स्थिति पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर से घबराए हुए हैं ।
पूनम सिंह की अचानक से प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने वर्ष 2018-19 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत किए बैठे दूसरे उम्मीदवारों के चुनावी समीकरणों को गड़बड़ाने का काम तो वास्तव में किया ही है । पूनम सिंह की उम्मीदवारी ने एक तरफ सत्ता खेमे का एकजुट समर्थन मिलने की उम्मीद कर रहे डॉक्टर सुधीर चौधरी, प्रदीप अग्रवाल, कपिल गुप्ता की संभावनाओं और उम्मीदों को चोट पहुँचाई है; तो दूसरी तरफ सत्ता खेमे में बिखराव के भरोसे अपनी नैय्या पार होने के प्रति आश्वस्त बैठे रमेश बजाज के लिए चुनौती बढ़ा दी है - और उनके लिए चुनावी मुकाबले को थोड़ा मुश्किल बना दिया है । असिस्टेंट गवर्नर के रूप में पूनम सिंह की डिस्ट्रिक्ट में प्रभावी सक्रियता रही है, जिस कारण क्लब्स के प्रेसीडेंट के बीच उनकी अच्छी पहचान और पैठ है - जबकि दूसरे उम्मीदवारों को अभी क्लब्स के प्रेसीडेंट्स से परिचित होने का काम ही करना है; यह बात उन्हें दूसरे उम्मीदवारों के मुकाबले बढ़त दिलाती है । असिस्टेंट गवर्नर होने के नाते पूनम सिंह को दूसरे असिस्टेंट गवर्नर्स की भी मदद मिल सकती है, जो अपने अपने जोन में उनके लिए समर्थन जुटाने का काम कर सकते हैं ।
पूनम सिंह को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मनप्रीत सिंह की पहचान और सक्रियता का फायदा भी मिल सकता है । उनके क्लब के वरिष्ठ सदस्य, दूसरे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपीएस सिबिया अगले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर होने के नाते उनकी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में मददगार हो सकते हैं । उल्लेखनीय है कि किसी भी वर्ष के क्लब-प्रेसीडेंट्स की अवॉर्ड और अगले रोटरी वर्ष की डिस्ट्रिक्ट टीम में जगह पर नजर होती है - और यह दोनों 'चीजें' ऑफर करने की स्थिति में पूनम सिंह की उम्मीदवारी के समर्थक नेता सक्षम हैं - इसलिए उनकी उम्मीदवारी एक मजबूत आधार पर खड़ी दिखती है । पूनम सिंह की उम्मीदवारी के सामने हालाँकि चुनौती भी कम नहीं है । उनकी जीत डिस्ट्रिक्ट के सत्ता समीकरणों में मनप्रीत सिंह और जेपीएस सिबिया की स्थिति को मजबूत बनाने का काम करेगी - जो मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर व यशपाल दास जैसे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को स्वीकार नहीं होगी । जेपीएस सिबिया के अगले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर हो जाने से मधुकर मल्होत्रा पहले से ही चिढ़े बैठे हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद उन्हें मिलेगा । ऐसे में, इन लोगों के पूनम सिंह की उम्मीदवारी के खिलाफ सक्रिय होने की पूरी पूरी संभावना है । सत्ता खेमे के नेताओं की आपसी होड़ के कारण हो सकने वाले नुकसान से बचना पूनम सिंह के लिए बड़ी चुनौती होगी, और उनकी इस चुनौती में ही दूसरे उम्मीदवारों को अपनी अपनी कामयाबी का रास्ता निकलता नजर आ रहा है । चुनावी परिदृश्य और साफ होने में अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन पूनम सिंह की अचानक से प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने चुनावी परिदृश्य को दिलचस्प अभी से बना दिया है ।

Thursday, March 9, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 - यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट की कॉन्फ्रेंस में डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के बारे में पूछे गए मोहिंदर पॉल गुप्ता के सवाल में रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट के जिक्र पर राजा साबू के भड़कने से प्रोजेक्ट की फंडिंग तथा उसके खर्च को लेकर लगने वाले आरोप और भी गंभीर हो उठे हैं

करनाल/चंडीगढ़ । करनाल में आयोजित हुई डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में पूछे गए एक सवाल में रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट का जिक्र सुन कर राजेंद्र उर्फ राजा साबू के गुस्से में आग-बबूला हो जाने के पीछे के रहस्य की पर्तें धीरे-धीरे खुल रही हैं - और जैसे जैसे सच्चाई लोगों के सामने आ रही है, राजा साबू का असली रूप लोगों के सामने प्रकट हो रहा है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जब रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ पूर्व अध्यक्ष मोहिंदर पॉल गुप्ता ने अपने एक सवाल में रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट का संदर्भ दिया, तो राजा साबू बुरी तरह बौखला गए थे और गुस्से से तमतमाते हुए वह अपनी सीट छोड़ कर हॉल के बीच आ गए थे और लोगों से सवाल करने लगे थे कि उन्हें रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट नहीं करना चाहिए क्या ? उनके इस व्यवहार और सवाल पर हॉल में मौजूद अधिकतर लोग तो हक्के-बक्के रह गए थे और उनके बीच जो जबाव मिला वह यही कि - जरूर करना चाहिए । रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट राजा साबू के क्लब का एक महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, और इसके पीछे की पूरी सोच सचमुच बहुत शानदार सोच है । इस प्रोजेक्ट से किसी को भी भला क्या ऐतराज हो सकता है ? मोहिंदर पॉल गुप्ता ने इस प्रोजेक्ट के होने या न होने को लेकर सवाल नहीं उठाया था; उनका सवाल तो डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के दुरुपयोग को लेकर था, जिसमें संदर्भ के रूप में रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट की फंडिंग का जिक्र था - लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हुआ कि प्रोजेक्ट की फंडिंग के बारे में पूछे गए सवाल का सीधा-सीधा जबाव देने की बजाए, सवाल से राजा साबू इस कदर बौखला क्यों गए ? राजा साबू की बौखलाहट 'बता' रही थी जैसे कि मोहिंदर पॉल गुप्ता के उक्त सवाल ने राजा साबू को भरी सभा में 'रंगे हाथ' पकड़ लिया था - जिससे बचने के लिए राजा साबू को अपना गुस्सा दिखा कर अपने लिए सहानुभूति जुटाने का नाटक करना पड़ा ।
राजा साबू के इस नाटक में राजा-भक्ति दिखाते हुए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपीएस सिबिया ने भी अतिथि कलाकार की भूमिका निभाने की कोशिश की, किंतु राजा साबू ने उन्हें जब अपना मुँह बंद रखने की हिदायत दी तो फिर वह चुप लगा गए । जेपीएस सिबिया ने दरअसल सुझाव दिया कि रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट होने या न होने को लेकर उपस्थिति लोगों के बीच वोटिंग करा ली जाए । कुछ ही वर्ष पहले राजा साबू के हाथों से आउटस्टैंडिंग डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन का अवॉर्ड ले चुके मोहिंदर पॉल गुप्ता ने कहा कि लोगों को पूरी बात बताई जाए और फिर वोटिंग करा ली जाए । मोहिंदर पॉल गुप्ता के तेवर देख कर राजा साबू ने मामले की नाजुकता को पहचाना और जेपीएस सिबिया को अपना मुँह बंद रखने को कहा । राजा-भक्ति में जेपीएस सिबिया ने जिस तत्परता के साथ अपना मुँह खोला था, राजा-झिड़की के बाद उसी तत्परता से उन्होंने फिर अपना मुँह बंद कर लिया - और वोटिंग की बात भी फिर गायब हो गई । राजा साबू ने भी मामले को जल्दी से समेट लिया - वह समझ रहे थे कि मामले में बात यदि आगे बढ़ी तो फिर उनकी सारी पोल पट्टी अभी यहीं खुल जायेगी । राजा साबू ने तो मामले को समेट लिया, किंतु लोगों के मन में यह सवाल बना ही रहा कि मोहिंदर पॉल गुप्ता के सवाल में आखिर ऐसा क्या था जिससे कि राजा साबू ने अपना आपा खो दिया और वह बुरी तरह बौखला गए ?
कॉन्फ्रेंस के बाद जिन लोगों ने इस बारे में सच्चाई समझने/जानने की कोशिश की, उन्हें यह जानकर गहरा धक्का लगा कि राजा साबू जैसे व्यक्ति ने सेवा कार्यों की आड़ में कैसे कैसे कारनामे किये हुए हैं, और जैसे ही उनके कारनामे सामने आने को हुए वह अपने गुस्से को दिखाते हुए लोगों को भावनात्मक रूप से भड़काने का प्रयास करने लगे । मोहिंदर पॉल गुप्ता का सवाल वास्तव में डिस्ट्रिक्ट ग्रांट को लेकर था; उनका आरोप था कि डिस्ट्रिक्ट ग्रांट को कुछ ही क्लब मनमाने तरीके से इस्तेमाल करते हैं और उसे दिखा कर मैचिंग ग्रांट ले लेते हैं - जिसे ऐसे कामों में खर्च किया जाता है जो डिस्ट्रिक्ट की भौगोलिक सीमाओं से दूर-दराज होते हैं । मोहिंदर पॉल गुप्ता का कहना था कि इससे रोटरी की बुनियादी सोच का उल्लंघन होता है । इसी संदर्भ में उन्होंने राजा साबू के क्लब के रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट का जिक्र किया, जिस पर राजा साबू बुरी तरह भड़क गए । उनके भड़कने से लोगों का ध्यान रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट की फंडिंग संरचना पर गया तो इसमें चल रही धोखाधड़ी की पोल खुली । मजे की बात यह है कि रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट की फंडिंग को लेकर कई बार सवाल उठे हैं, लेकिन कभी भी लोगों को इसका जबाव नहीं मिला । जो तथ्य चर्चा में आया है, वह यह है कि राजा साबू पहले तो डिस्ट्रिक्ट ग्रांट से इस प्रोजेक्ट के लिए पैसे ले लेते हैं, फिर इस पैसे से मैचिंग ग्रांट का जुगाड़ करते हैं और फिर इस पैसे से समाज सेवा करते हुए अपनी फोटो खिंचवाते हैं । राजा साबू ने डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में लोगों से पूछा था कि उन्हें यह प्रोजेक्ट करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए ? लोग अब उसका जबाव देते हुए कह रहे हैं कि राजा साबू को यह प्रोजेक्ट अवश्य करना चाहिए - किंतु अपने पैसे से करना चाहिए; डिस्ट्रिक्ट ग्रांट पर डिस्ट्रिक्ट के दूसरे क्लब्स का भी अधिकार हैं, उन्हें भी डिस्ट्रिक्ट ग्रांट इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए ।
रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट धोखाधड़ीभरी फंडिंग संरचना के कारण ही विवाद में नहीं है, बल्कि अपनी 'प्रकृति' के कारण भी संदिग्ध बना हुआ है । यह प्रोजेक्ट उस मशहूर कहावत/शिक्षा का मजाक बनाता है - जिसमें कहा गया है कि 'चैरिटी बिगिन्स एट होम' । मैं यदि अपने पड़ोसियों/नजदीकियों की मुश्किलों व परेशानियों की अनदेखी करके दूर-दराज के लोगों की मुश्किलों व परेशानियों को दूर करने की बात करता हूँ, तो वास्तव में मैं धूर्तता और पाखंड का परिचय दे रहा होता हूँ । रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट के जरिये राजा साबू अपना ऐसा ही परिचय दे रहे हैं । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि कुछ वर्ष पहले राजा साबू का क्लब चंडीगढ़ में गरीब बच्चों के लिए एक स्कूल चलाया करता था, जिसमें कुछ हजार रुपए वार्षिक का खर्च आता था - लेकिन जिसे पैसों की कमी के कारण बंद कर दिया गया । चंडीगढ़ में गरीब बच्चों के लिए स्कूल को चलाते रहने में राजा साबू ने कोई दिलचस्पी नहीं ली, इसीलिए अफ्रीका के बच्चों के लिए उनकी दिलचस्पी सवालों के घेरे है । लोगों को लगता है कि राजा साबू दिखावे के लिए लिए सेवा करते हैं - और इसलिए ही वहीं सेवा करते हैं जहाँ बड़ा दिखावा किया जा सकने की संभावना बनती है । अब चंडीगढ़ में गरीब बच्चों का स्कूल चलाने में तो कोई 'फायदा' नहीं है, इसलिए उसे बंद कर देने में ही अक्लमंदी है; लेकिन अफ्रीकी देशों में बच्चों का ईलाज कराने में फायदा ही फायदा है - लोगों के बीच आरोपपूर्ण चर्चा है कि रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट के नाम पर अफ्रीकी देशों में जाकर राजा साबू अपने बिजनेस के लिए संभावनाएँ जुगाड़ने का काम करते हैं । किसी की भी समझ में यह बात नहीं आती है कि अफ्रीकी देशों में बच्चों का ईलाज करने के लिए जाने वाली डॉक्टर्स की टीम में राजा साबू क्यों और क्या करने जाते हैं ?
रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट की फंडिंग संरचना तथा उसके खर्च का हिसाब-किताब देने में राजा साबू जिस तरह से बचने की कोशिश करते हैं, उससे अफ्रीकी बच्चों के ईलाज के नाम पर चलने वाले इस प्रोजेक्ट में पैसों की हेराफेरी के आरोपों को भी बल मिला है । लोगों का कहना है कि इस तरह के आरोपों की चर्चा को रोकने का सबसे अच्छा और आसान तरीका है कि राजा साबू फंडिंग और खर्च का सारा ब्यौरा सार्वजनिक कर दें - इससे आरोप लगाने वालों का मुँह अपने आप बंद हो जायेगा । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के बारे में पूछे जाने वाले मोहिंदर पॉल गुप्ता के सवाल में रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट का जिक्र आने से राजा साबू जिस तरह भड़के, उससे उक्त आरोप और भी गंभीर हो उठे हैं ।