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Friday, August 30, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के नाम पर पैसा इकट्ठा करने की राजा साबू की अपील को लोगों ने 'धंधे' का नाम दिया, जिसके बाद बाद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने पैसों की बजाये सामान जुटाने की अपील करके राजा साबू की पैसा जुटाने की कोशिश पर पानी फेरा

चंडीगढ़ । पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पैसे जुटाने की अपील करके भारी फजीहत का शिकार बन गए हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पैसों की बजाए सामान जुटाने की अपील करके राजा साबू की पैसे इकट्ठा करने की योजना पर पानी भी फेर दिया है । डिस्ट्रिक्ट के लोगों का कहना है कि उत्तराखंड के बाढ़ पीड़ितों के लिए इकट्ठा की गई रकम में से जो करीब तीन करोड़ रुपए बचे हुए हैं, राजा साबू उस पैसे को पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के लिए क्यों नहीं रिलीज करते - ताकि बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत पहुँचाई जा सके । उक्त करीब तीन करोड़ रुपयों पर कुंडली मारे बैठे राजा साबू तथा उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स ने लोगों की यह माँग सुनकर अपनी अपनी जुबानें सिल ली हैं, और चुप्पी साध ली है । डिस्ट्रिक्ट के लोगों का यह भी कहना है कि पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतों को देखते हुए राजा साबू को जिम्बाब्वे मेडीकल मिशन को रद्द करके उसमें खर्च होने वाले पैसे को पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए देना चाहिए । डिस्ट्रिक्ट के लोगों की इस माँग ने राजा साबू की ड्रामेबाजी तथा रोटरी को लूट-खसोट व मौज-मजे का जरिया मानने/बनाने की चालबाजियों को उद्घाटित करने का काम किया है । लोगों का आरोप है कि प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों तथा बीमारों की मदद को राजा साबू तथा उनके साथी गवर्नर्स ने 'धंधा' बना लिया है । 
उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में पानीपत में आयोजित हुए मेंबरशिप डेवलपमेंट सेमीनार में राजा साबू ने अपने भाषण को नाटकीय रूप देते हुए पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पैसे इकट्ठे करने की भावुकता भरी अपील की । डिस्ट्रिक्ट के लोग अब राजा साबू की नाटकबाजियों को खूब समझ/पहचान चुके हैं, इसलिए उन्होंने तुरंत ही कहना/पूछना शुरू कर दिया कि राजा साबू को सचमुच पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की चिंता है, या बाढ़ पीड़ितों के नाम पर पैसे इकट्ठे करने की चिंता है - और यदि उन्हें सचमुच पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की चिंता है तो उत्तराखंड बाढ़ पीड़ितों के लिए इकट्ठे हुए पैसों में से बाकी बचे करीब तीन करोड़ रुपए तथा जिम्बाब्वे दौरे में खर्च होने वाले पैसे को तुरंत से पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए उन्हें दे देने चाहिए । गौरतलब है कि कुछेक वर्ष पहले उत्तराखंड में बाढ़ ने जब विनाशलीला रची थी, तब राजा साबू की चेयरमैनी में एक प्रोजेक्ट-ट्रस्ट बना था, जिसमें करोड़ों रुपए इकट्ठा हुए थे । उस प्रोजेक्ट को बंद हुए करीब दो वर्ष हो चुके हैं, जिसका हिसाब-किताब भी दिया जा चुका है । उस हिसाब-किताब के अनुसार ही, दो करोड़ 83 लाख रुपए बचे हुए हैं । राजा साबू ने कभी किसी को नहीं बताया कि उस रकम का आखिर होगा क्या ? डिस्ट्रिक्ट में लोगों का कहना है कि राजा साबू अब जब पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की परेशानियों से व्यथित हैं और उनकी मदद करना चाहते हैं, तो उक्त रकम को तुरंत से पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के लिए रिलीज क्यों नहीं करते हैं और उक्त रकम को क्यों दबाए बैठे हैं ?
डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के सदस्य एमपी गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा को लिखे एक पत्र में राजा साबू तथा उनके साथी पूर्व गवर्नर्स द्वारा दबाई गई रकम का हवाला देते हुए कुल करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए का जोड़ लगाया है; उनका कहना है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स से उक्त पैसों को बसूल करके पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहिए । पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के नाम पर राजा साबू द्वारा पैसे इकट्ठे करने की अपील पर डिस्ट्रिक्ट के लोगों को भड़का देख कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने घोषणा कर दी है कि डिस्ट्रिक्ट में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए कोई नगद पैसा इकट्ठा नहीं किया जायेगा, और सिर्फ सामान के रूप में ही मदद जुटाई और की जाएगी । जितेंद्र ढींगरा की इस घोषणा से राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के नाम पर पैसा इकट्ठा करने की योजना को गहरा धक्का लगा है । इसके साथ ही, डीआरएफसी (डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन) के रूप में टीके रूबी ने पंजाब और महाराष्ट्र में बाढ़ की विनाशलीला को देखते हुए जिम्बाब्वे मेडीकल मिशन में खर्च होने वाले पैसे को बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए खर्च करने का वास्ता देकर उक्त मिशन को हरी झंडी देने से इंकार किया हुआ है; लेकिन राजा साबू और 'मेडीकल मिशन' के खेल में शामिल उनके सहयोगी मधुकर मल्होत्रा तरह तरह से टीके रूबी पर जिम्बाब्वे मेडीकल मिशन को हरी झंडी देने के लिए दबाव बना रहे हैं, और उन्हें 'ब्लैकमेल' करने की कोशिश कर रहे हैं । प्राकृतिक आपदाओं के अवसरों पर सरकारी अधिकारियों, ठेकेदारों व नेताओं को लूट-खसोट मचाते तो 'देखा'/पहचाना गया है; रोटरी में राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को उनके जैसी हरकतें करते देखना रोटरी की पहचान व प्रतिष्ठा के संदर्भ में बहुत ही शर्मनाक है ।  
[मेडीकल मिशन में वॉलिंटियर के नाम पर शामिल होकर राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स क्या करते हैं, इसका आभास इस रिपोर्ट के साथ प्रकाशित राजा साबू व मधुकर मल्होत्रा की तस्वीर को देख कर पाया/समझा जा सकता है !] 

Thursday, October 11, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स को मनमाने और अनुचित तरीके से 'बनाने' के आरोपी रहे हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाए जाने से भड़के माहौल में राजा साबू भी फजीहत का शिकार बने

चंडीगढ़/रुड़की । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाने को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल तो आरोपों के घेरे में आ ही गए हैं, खुद हेमंत अरोड़ा और पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू के लिए भी फजीहत वाली स्थिति बन गई है । हेमंत अरोड़ा को तुरंत प्रभाव से फाइनेंस कमेटी से हटाने की माँग की जा रही है; लोगों का कहना है कि प्रवीन गोयल यदि फाइनेंस कमेटी से उन्हें नहीं हटाते हैं तो राजा साबू को मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और हेमंत अरोड़ा को तुरंत डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हटवाना चाहिए । डिस्ट्रिक्ट के लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में प्रवीन गोयल ने हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाने के लिए राजा साबू से अवश्य ही हरी झंडी ली होगी; ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि हेमंत अरोड़ा 'जैसे' व्यक्ति को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाने का फैसला प्रवीन गोयल ने क्यों तो लिया - और क्यों राजा साबू ने उन्हें इस फैसले के लिए अपनी तरफ से हरी झंडी दी ? हेमंत अरोड़ा वर्ष 2014-15 के डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स के ऑडिटर थे, और उस वर्ष के अकाउंट्स में भारी झोलझाल हुआ था - और उस झोलझाल में ऑडिटर के रूप में हेमंत अरोड़ा की भूमिका को संदिग्ध देखा/समझा गया था । उक्त भूमिका को लेकर हेमंत अरोड़ा की उस समय भी खासी फजीहत हुई थी । डिस्ट्रिक्ट में लोग तीन वर्ष पुराने उस किस्से को भूलने लगे थे, लेकिन हेमंत अरोड़ा के डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनने की खबर मिलने के बाद से - हेमंत अरोड़ा की तीन वर्ष पहले की वह 'अनुचित' भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है, और लोगों की यादें ताजा हो गई हैं । 
उल्लेखनीय है कि दिलीप पटनायक के गवर्नर-वर्ष 2014-15 के डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स की दो बैलेंस-शीट बनी थीं, जिन्हें ऑडिटर के रूप में हेमंत अरोड़ा ने साइन किया था । यह दो बैलेंस-शीट का बनना और साइन होना विवाद और आरोपों का विषय इसलिए बना था - क्योंकि 16 सितंबर 2015 को साइन हुई बैलेंस-शीट में 20,407 रुपए का जो लाभ आ रहा था, वह 30 अक्टूबर 2015 को साइन हुई दूसरी बैलेंस-शीट में 6 लाख 23 हजार 547 रुपए के घाटे में बदल गया । इस 'जादु' को चार्टर्ड एकाउंटेंट व ऑडिटर हेमंत अरोड़ा के 'अनुचित व्यवहार' के रूप में देखा/समझा गया था । हेमंत अरोड़ा को इसलिए भी फजीहत का सामना करना पड़ा था क्योंकि बैलेंस-शीट में ऑडिटर के रूप में उन्होंने खुद दर्ज किया था कि बहुत से खर्चे कच्चे बिल्स के आधार पर हिसाब-किताब में लिए गए हैं । उस समय डिस्ट्रिक्ट के लोगों की तरफ से खुल कर आरोप लगे थे कि डिस्ट्रिक्ट के पैसों में हेराफेरी करने के उद्देश्य से फर्जी तरीके से लाभ को घाटे में बदला गया है - और इसमें दिलीप पटनायक से लेकर राजा साबू की भी मिलीभगत है । विवाद और आरोपों से परेशान और हताश हेमंत अरोड़ा ने कुछेक लोगों के बीच कहा भी था कि सभी जानते हैं कि डिस्ट्रिक्ट में किसके दबाव में न जाने क्या-क्या करना पड़ता है । डिस्ट्रिक्ट अकाउंट्स में फर्जीवाड़ा करने के आरोपों से घिरे हेमंत अरोड़ा के लिए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के नाते फजीहत की ज्यादा स्थिति बनी । वह पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न होते, तो सिर्फ ऑडिटर होने के नाते फजीहत का शिकार न बनते ।  
हेमंत अरोड़ा पर आरोपों की बौछार से बना माहौल धीरे-धीरे ठंडा पड़ रहा था, लेकिन अब जो फिर से गर्म हो उठा है । 'बिल्ली को थैले से बाहर निकालने' का काम डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ रोटेरियन तथा डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य एमपी गुप्ता ने किया । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को पत्र लिख कर उन्होंने हेमंत अरोड़ा के वर्ष 2014-15 के कार्य-व्यवहार का उदाहरण देते हुए डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाए जाने पर अपनी आपत्ति दर्ज करवायी है । एमपी गुप्ता ने अपने पत्र में प्रवीन गोयल को लिखा है कि हेमंत अरोड़ा के पिछले कृत्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें तुरंत प्रभाव से डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हटाया जाए । मजे की बात यह भी है कि हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य गुपचुप रूप से बनाया गया, और इसकी किसी को हवा भी नहीं लगी । इसका पता लोगों को अभी तब लगा, जब डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी की ई-कॉपी उन्हें मिली । प्रवीन गोयल की गवर्नरी का चौथा महीना चल रहा है, लेकिन कामकाज का आलम यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नरी की हॉर्ड-कॉपी का अभी तक कोई अता-पता नहीं है । डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी की ई-कॉपी भी लोगों को अभी मिल पायी है । इससे ही हेमंत अरोड़ा के डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के सदस्य बनने का लोगों को पता चला - और बबाल हो गया । डिस्ट्रिक्ट में राजा साबू और उनसे जुड़े लोगों की बेईमानियों के किस्से दरअसल इतने इकट्ठे हो गए हैं, कि लोगों को उनके द्वारा लिया जाने वाला कोई भी संदेहास्पद फैसला लूट-खसोट की मदद करने वाला दिखने/लगने लगता है । डिस्ट्रिक्ट के तमाम प्रोजेक्ट्स व ट्रस्ट के हिसाब-किताब जिस तरह से कुछेक लोगों की ही जानकारी में रहते हैं और उन्हें लोगों से - यहाँ तक कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स तक से - छिपा कर रखा जाता है; जिसे लेकर निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी रोटरी इंटरनेशनल तक में शिकायत कर चुके हैं; उसके चलते राजा साबू और उनसे जुड़े पूर्व गवर्नर्स की भूमिका को संदेह से देखा जाता है । इसी कारण से हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाए जाने से मामला भड़क गया है, और हेमंत अरोड़ा को फाइनेंस कमेटी से हटाने की माँग होने लगी है । 

Sunday, September 16, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में टीके रूबी का 'मॉडल' अपनाने की बजाये राजा साबू वाला 'मॉडल' अपनाने के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन के कार्यक्रम के रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर फजीहत में फँसे

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल 29 सितंबर को आयोजित हो रही समिट के रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर भारी आलोचना का शिकार हो रहे हैं । सोशल मीडिया में अपने गुस्से और अपनी नाराजगी को व्यक्त करते हुए डिस्ट्रिक्ट के कई आम और खास लोगों ने इसे लूट-खसोट कहा/बताया है, और साफ-साफ आरोप लगाया है कि छोटे-छोटे आयोजनों के बड़े-बड़े रजिस्ट्रेशन चार्ज लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल खासी कमाई कर रहे हैं और अपनी जेब भर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि उक्त समिट में मुख्य वक्ता के रूप में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन आ रहे हैं । ज्यूडिशियल एकेडमी में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम के लिए प्रति व्यक्ति 700 रुपये तथा प्रति दंपति 1300 रुपये का रजिस्ट्रेशन चार्ज लिया जा रहा है । शाम 4 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर पहले लोगों को भ्रम रहा कि कार्यक्रम के बाद डिनर की व्यवस्था होगी, लेकिन जब भेद खुला कि डिनर नहीं - चाय आदि की ही व्यवस्था है, तो रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर लोगों का गुस्सा भड़क उठा । कई लोगों ने रजिस्ट्रेशन की रकम को बहुत ज्यादा बताया है । किसी किसी ने तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को ऑफर भी दिया कि उक्त कार्यक्रम वह 250 रुपये के रजिस्ट्रेशन चार्ज में करवा देंगे । डिस्ट्रिक्ट में, डिस्ट्रिक्ट के किसी कार्यक्रम के रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर इससे पहले किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को ऐसी फजीहत झेलना पड़ी हो - ऐसा डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ सदस्यों को भी याद नहीं पड़ता है ।
प्रवीन गोयल के लिए सबसे बड़ी फजीहत की बात यह हुई है कि लोगों ने पिछले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के साथ उनकी तुलना करके उन्हें नीचा और गया-बीता साबित करने की कोशिश की है । किसी ने पिछले रोटरी वर्ष में हुए एक इंटरसिटी कार्यक्रम की याद करते हुए बताया कि तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने 750 रुपये के रजिस्ट्रेशन चार्ज में लंच करवाया था, चाय पिलवाई थी और गिफ्ट भी दिए थे । लोगों का पूछना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी यदि 750 रुपये में इतना कुछ कर सकते हैं, तो प्रवीन गोयल के लिए कहाँ/क्या मुश्किल है ? इसी तुलना के आधार पर लोगों का कहना है कि टीके रूबी को तो चूँकि रोटरी से पैसे कमाने नहीं थे, इसलिए उन्होंने रोटेरियंस को अच्छी सुविधाएँ दीं, लेकिन प्रवीन गोयल ने लगता है कि रोटरी से पैसे कमाने को अपना लक्ष्य बना लिया है - इसलिए वह छोटी/मोटी सुविधाओं के बदले में मोटी-मोटी रकम बसूल रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य तथा रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के पूर्व प्रेसीडेंट एमपी गुप्ता ने पत्र लिख कर प्रवीन गोयल से रजिस्ट्रेशन चार्ज पर पुनर्विचार करने का अनुरोध भी किया है । अपने पत्र में एमपी गुप्ता ने प्रवीन गोयल को याद दिलाया है कि अभी दो महीने पहले ही, जुलाई में ज्यूडिशियल एकेडमी में ही उन्होंने एक सम्मान समारोह का आयोजन किया था, जिसमें 600 रूपये का रजिस्ट्रेशन था । एमपी गुप्ता के पत्र में याद दिलाए गए इस तथ्य के सामने आने के बाद लोगों को आश्चर्य हुआ कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल के सामने ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि उन्होंने दो महीने में ही उसी जगह तथा उसी तरह की सुविधाओं के लिए 100 रुपये बढ़ा दिए हैं ।
डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ रोटेरियंस को यह देख कर बहुत बुरा भी लग रहा है कि कुछ सौ रुपयों को लेकर डिस्ट्रिक्ट में सार्वजनिक रूप से इतनी थुक्का-फजीहत हो रही है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जैसे महत्त्वपूर्ण पद की छीछालेदर हो रही है । लेकिन उनका कहना है कि इस स्थिति को लाने/बनाने में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू और उनकी शह पर रहने/चलने वाले गवर्नर्स का व्यवहार ही मुख्य रूप से जिम्मेदार है । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स तरह तरह से लोगों से पैसा इकट्ठा करते रहे हैं, और फिर उसका हिसाब-किताब देने/बताने में आनाकानी करते रहे हैं और इकट्ठा हुई रकम पर कुंडली मार कर बैठे रहे हैं और मनमर्जी से उसका इस्तेमाल करते रहे हैं - इसका नतीजा है कि डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लगने लगा है कि यह लोग रोटरी और सेवा/प्रोजेक्ट्स के नाम पर पैसों की भारी हेराफेरी और चोरी-चकारी करते हैं । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स के लिए बदकिस्मती की बात यह रही कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी ने रोटेरियंस को मान/सम्मान तथा सुविधाएँ देने में इतने ऊँचे स्टैंडर्ड स्थापित किए कि लोगों को महसूस हुआ कि जैसे अभी तक तो वह ठगे जा रहे थे । हिसाब-किताब में पारदर्शिता रखने तथा लगातार उसके लिए प्रयास करने के टीके रूबी के प्रयत्नों का नतीजा यह हुआ है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स का हर काम संदेह से देखा जाने लगा है और उसका हिसाब-किताब माँगा जाने लगा है । इस बदले माहौल का खामियाजा प्रवीन गोयल को भुगतना पड़ रहा है - क्योंकि गवर्नरी के लिए उन्होंने टीके रूबी का 'मॉडल' अपनाने की बजाये राजा साबू वाला 'मॉडल' अपनाया, और अपने हर काम को संदेहास्पद बना लिया है । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन के लिए होने वाला कार्यक्रम रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर जिस तरह से विवाद में घिर गया है, उससे लग रहा है कि प्रवीन गोयल के लिए राजा साबू का 'मॉडल' मुसीबत बढ़ाने वाला साबित होगा ।

Saturday, June 23, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए माँगे जा रहे विज्ञापनों के रेट कार्ड देने से इंकार करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल तथा फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन शाजु पीटर की कार्रवाई ने डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के मामले में घपलेबाजी के आरोपों को हवा दी

चंडीगढ़ । प्रवीन गोयल के गले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की माला पड़ने में तो अभी करीब सप्ताह भर का समय बाकी है, लेकिन मुसीबतों की माला लगता है कि अभी से उनके गले का फंदा बनने लगी है । अपने गवर्नर-काल की डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए इकट्ठा किए जा रहे विज्ञापनों के रेट को छिपाने को लेकर प्रवीन गोयल संदेह और आरोपों के घेरे में आ गए हैं । दरअसल हुआ यह कि डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य एमपी गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के विभिन्न पृष्ठों के रेट उनसे पूछ लिए, जिस पर प्रवीन गोयल ने चुप्पी साध ली । एमपी गुप्ता को जब प्रवीन गोयल से कोई जबाव नहीं मिला तो उन्हें दाल में कुछ काला नजर आया, और तब उन्होंने डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन शाजु पीटर को यह कहते/बताते हुए चिट्ठी लिखी कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल उन्हें डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के विभिन्न पृष्ठों के विज्ञापन के रेट नहीं दे/बता रहे हैं, इसलिए वह आवश्यक कार्रवाई करें । एमपी गुप्ता को लेकिन शाजु पीटर से भी कोई जबाव नहीं मिला । यह बात जब डिस्ट्रिक्ट के लोगों के सामने आई तो कई लोगों ने कहा/बताया कि प्रवीन गोयल ने उनसे डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन तो माँगे हैं लेकिन रेट कार्ड नहीं दिया है - और इस तरह बात फिर बढ़ती ही गई । लोगों के बीच हुई बातचीत से पता चला कि प्रवीन गोयल ने समान श्रेणी के विज्ञापनों के लिए अलग अलग लोगों से अलग अलग दाम माँगे हैं, और शायद इसीलिए वह रेट कार्ड देने में आनाकानी कर रहे हैं । इसी तरह की बातों के बीच आरोप लगे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल अपनी डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन जुटाने की आड़ में घपलेबाजी कर रहे हैं और विज्ञापन के नाम पर लोगों से मनमाने दाम बसूल रहे हैं ।
एमपी गुप्ता को विज्ञापन के रेट न देने/बताने का प्रवीन गोयल ने अपने नजदीकियों को जो कारण बताया है, उसने मामले को और दिलचस्प व संदेहास्पद तथा आरोपपूर्ण बना दिया है । प्रवीन गोयल का कहना है कि एमपी गुप्ता रेट इसलिए नहीं पूछ रहे हैं, कि उन्हें विज्ञापन देना है; वह तो रेट इसलिए पूछ रहे हैं, ताकि उसमें वह कोई गड़बड़ी खोजें और फिर उन पर आरोप लगाने का काम करें । लोगों का कहना है कि यदि यह बात सच भी है, तो प्रवीन गोयल को इसमें परेशानी क्या है और क्यों है ? लोगों के बीच सवाल है कि प्रवीन गोयल ने क्या सचमुच डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन जुटाने के मामले में गड़बड़ी की हुई है, और उन्हें डर है कि एमपी गुप्ता या कोई और उन गड़बड़ियों को कहीं पकड़ न ले ? लोगों का कहना/पूछना है कि प्रवीन गोयल ने विज्ञापनों के मामले में यदि वास्तव में कोई घपला नहीं किया है, तो फिर उन्हें डर क्यों है कि एमपी गुप्ता को उन्होंने यदि रेट बताए तो वह उनकी घपलेबाजी पकड़ लेंगे ? प्रवीन गोयल के नजदीकियों और समर्थकों का भी मानना और कहना है कि एमपी गुप्ता द्वारा विज्ञापनों के रेट माँगने के बाद भी उन्हें रेट न देकर प्रवीन गोयल ने नाहक ही मुसीबत और बदनामी मोल ले ली है, और लोगों के दिमाग में शक के बीज बो दिए हैं । दरअसल डिस्ट्रिक्ट में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू की छत्रछाया में रहने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स पर बेईमानी करने के आरोप लगते और साबित होते रहे हैं; इसी चक्कर में एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को दो दो बैलेंसशीट लानी पड़ी थीं तथा एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को हेराफेरी के आरोप में उनके क्लब से ही निकल दिया गया है । इसलिए डिस्ट्रिक्ट में लोग राजा साबू की छत्रछाया में रहने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के कामों और फैसलों को लेकर सतर्क हो गए हैं ।
लोगों की यही सतर्कता प्रवीन गोयल के लिए मुसीबत तथा घबराहट का कारण बन गई है । घबराहट में व्यक्ति जैसे रस्सी को भी साँप समझ लेता है, लगता है कि वैसे ही एमपी गुप्ता द्वारा विज्ञापन के रेट माँगे जाने को प्रवीन गोयल ने 'पकड़े' जाने के रूप में समझ लिया - और उन्होंने मान लिया कि वह रेट नहीं दे कर पकड़े जाने से बच जायेंगे । इस मामले में एमपी गुप्ता की चिट्ठी पर फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन के रूप में शाजु पीटर द्वारा भी चुप्पी मार जाने से मामला और गड़बड़ा गया है । मजे की बात यह है कि इनके ही नजदीकियों और समर्थकों का कहना है कि विज्ञापन के रेट देने/बताने से बच/छिप कर प्रवीन गोयल और शाजु पीटर ने लोगों को यह सोचने के लिए प्रेरित किया है कि डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए विज्ञापन जुटाने के मामले में जरूर ही ऐसी कोई बात है, जिसे यह दोनों लोगों से छिपाना चाहते हैं, और इस तरह इन्होंने अपने आप को मुसीबत व फजीहत के घेरे में फँसा लिया है । इनके नजदीकियों और समर्थकों का ही मानना और कहना है कि एमपी गुप्ता द्वारा विज्ञापनों के रेट कार्ड माँगते ही प्रवीन गोयल यदि उन्हें रेट कार्ड उपलब्ध करवा देते, तो बबाल न फैलता और प्रवीन गोयल आरोपों के घेरे में न फँसते । लोगों का कहना है कि इस प्रसंग से प्रवीन गोयल को सबक लेना चाहिए तथा अपने कार्यक्रमों के खर्चों को पारदर्शी बनाना/रखना चाहिए, जिससे कि कोई उन पर बेईमान होने का आरोप न लगा सके । कई लोगों को लेकिन यह भी लगता है कि राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट गवर्नर से इतनी हेराफेरियाँ करवाते हैं, कि वह बेचारा चाहे भी - तो भी अपने कार्यक्रमों के खर्चों को लेकर पारदर्शी नहीं हो सकता है । यह देखना दिलचस्प होगा कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में प्रवीन गोयल कैसे राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की बेईमानियों को अंजाम देते हैं, या अपने आप को उनसे बचाते हैं !

Wednesday, June 6, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में पूर्व प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के मुख्य आतिथ्य में होने जा रही डिस्ट्रिक्ट असेम्बली से ठीक पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल पर अपने कार्यकाल के बजट प्रस्तावों पर लगे गंभीर आरोपों की फेहरिस्त को टीके रूबी का समर्थन मिलने से मामला गंभीर हुआ

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल अपने गवर्नर-काल के बजट प्रस्तावों को लेकर गंभीर आरोपों में घिर गए हैं, और डिस्ट्रिक्ट के अलग अलग 'क्षेत्रों' से उन पर मनमाने तरीके से पैसे इकट्ठे करने तथा हिसाब-किताब में 'धोखाधड़ी' के मौके बनाने के आरोप लगने लगे हैं । डिस्ट्रिक्ट ऑफिस के नाम पर रोटरी भवन के लिए खर्च लेने, जीएसटी के नाम पर पैसा लेने, वेबसाइट के नाम पर बढ़ा-चढ़ा कर पैसे लेने, डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी के लिए जुटाए विज्ञापनों के पैसों को छिपाने, आकस्मिक खर्चों तथा डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की सब्सिडी के नाम पर मोटी रकम लेने के बाबत प्रवीन गोयल पर गंभीर आरोप लगे हैं । सबसे मजेदार किस्सा प्रवीन गोयल ने निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को देने वाले पिन व गिफ्ट्स के मामले में किया है । इसके लिए प्रत्येक रोटेरियन से उन्होंने पंद्रह रुपए लेने का प्रस्ताव रखा है, जबकि निवर्तमान होने वाले मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि उन्हें कोई पिन और गिफ्ट्स न दिए जाएँ, उनका स्वागत वह एक गुलाब का फूल देकर ही कर दें । आरोप है कि प्रवीन गोयल ने इसी तरह के बेतुके खर्चे दिखा कर अपने गवर्नर-काल के लिए बढ़ा-चढ़ा कर बजट बनाया है । डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के एक पूर्व सदस्य एमपी गुप्ता ने प्रवीन गोयल के बजट प्रस्तावों पर जब गंभीर आपत्ति जताई, तो प्रवीन गोयल ने उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित किया; जिसमें एमपी गुप्ता और प्रवीन गोयल के अलावा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर जेपीएस सिबिया और फाइनेंस कमेटी के सदस्य शाजु पीटर भी शामिल हुए । एमपी गुप्ता की कई आपत्तियों व सुझावों के प्रति प्रवीन गोयल तथा उनके दोनों साथियों ने सहमति भी व्यक्त की और बजट प्रस्ताव में संशोधन करने के लिए हामी भी भरी, लेकिन डिस्ट्रिक्ट के कई लोगों को विश्वास है नहीं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल और उनके संगी-साथी अगले रोटरी वर्ष के प्रस्तावित बजट खर्चे में वास्तव में कोई कमी करेंगे भी ।
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को अपने कामकाज को व्यवस्थित रूप से करने के लिए रोटरी इंटरनेशनल से करीब 12 लाख रुपये मिलते हैं; अधिकतर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अपने घर या ऑफिस से काम करते हैं और उसी में रोटरी इंटरनेशनल से मिली रकम को एडजस्ट कर लेते हैं - लेकिन प्रवीन गोयल का पेट रोटरी इंटरनेशनल से मिले पैसों से नहीं भर रहा है, और डिस्ट्रिक्ट ऑफिस के नाम पर रोटरी भवन की व्यवस्था के लिए उन्होंने बजट में करीब दो लाख रुपये लेने का जुगाड़ कर लिया है । रोटरी भवन का रोटरी और या डिस्ट्रिक्ट के कामकाज से वास्तव में कोई लेनादेना नहीं है, यह सिर्फ तीन लोगों मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर व बीएल रामसिसरिया के गपशप के लिए बैठने का ठिकाना भर है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने कई मौकों पर शिकायत की कि डिस्ट्रिक्ट के विभिन्न प्रोजेक्ट्स से जुड़े जो रिकॉर्ड्स रोटरी भवन में मौजूद होने के दावे किये जाते रहे हैं, वह उन्हें रोटरी भवन में कभी नहीं मिले/दिखे । ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि प्रवीन गोयल को जब रोटरी भवन से कामकाज करना नहीं है, और यदि करना भी है तो उसके लिए उन्हें रोटरी इंटरनेशनल से पैसे मिलेंगे - तब फिर वह डिस्ट्रिक्ट के लोगों पर करीब दो लाख रुपये का बोझ क्यों डाल रहे हैं ? कुछेक लोगों का तो सीधे सीधे पूछना है कि यह पैसा आखिर किसकी जेब में जायेगा ? डिस्ट्रिक्ट की वेबसाइट के लिए 32 हजार रुपये का खर्चा दिखाया गया है, जबकि बाजार में 12 हजार रुपये में वेबसाइट बन जा रही है । जीएसटी के नाम पर करीब पौने चार लाख का खर्चा तो दिखा दिया गया है, पर इस बात को छिपा लिया गया है कि इसका तो इनपुट मिलेगा और आमदनी में इसका कोई जिक्र नहीं किया । आकस्मिक खर्चे के नाम पर प्रत्येक सदस्य से वसूली जाने वाली रकम दस रुपये से बढ़ा कर 45 रुपये तो कर दी गई, लेकिन यह नहीं बताया कि ऐसे कौन से आकस्मिक मौके हैं जिनके लिए उन्हें एकदम से 350 प्रतिशत की वृद्धि करनी पड़ रही है ।
इस मामले को गंभीर बनाने का काम किया डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के हस्तक्षेप ने । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल के बजट प्रस्तावों की डिस्ट्रिक्ट के विभिन्न कोनों से आलोचना शुरू हुई, तो टीके रूबी ने भी मामले में हस्तक्षेप किया और प्रवीन गोयल को सुझाव देते हुए पत्र लिखा कि उन्हें डिस्ट्रिक्ट के लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और डिस्ट्रिक्ट असेम्बली में बजट प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए । टीके रूबी ने अपने पत्र में निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें दिए जाने वाले पिन व गिफ्ट्स पर, आकस्मिक खर्चे पर, डिस्ट्रिक्ट कार्यालय के खर्चे पर तथा डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की सब्सिडी पर भी अपनी आपत्ति दर्ज की है तथा इन्हें गैर जरूरी व रोटेरियंस पर अतिरिक्त बोझ डालने के रूप में रेखांकित किया है । टीके रूबी के लिखे पत्र ने प्रवीन गोयल के लिए मामले को खासा गंभीर बना दिया है । दरअसल टीके रूबी के हस्तक्षेप ने प्रवीन गोयल पर बजट प्रस्तावों की आड़ में अनाप-शनाप तरीके से वसूली बढ़ा देने की तैयारी को सवालों के घेरे में ला कर विश्वसनीय बना दिया है । आम रोटेरियन कहते रहते और आरोप लगाते रहते, तो प्रवीन गोयल आराम से उनकी अनसुनी कर सकते थे; लेकिन अब जब मामले में मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी खुद कूद पड़े हैं, तो प्रवीन गोयल के लिए मामला खासा गंभीर हो गया है । हालाँकि अधिकतर लोगों का मानना और कहना है कि टीके रूबी के हस्तक्षेप के बाद भी प्रवीन गोयल पर कोई असर पड़ेगा, और वह अनाप-शनाप रूप में की जाने वाली वसूली से पीछे हटेंगे - इसकी उम्मीद न के बराबर ही है । प्रवीन गोयल को जानने वाले लोगों का हालाँकि कहना है कि प्रवीन गोयल तो सीधे/शरीफ व्यक्ति हैं और रोटरी के नाम पर वह कोई बेईमानी करने के बारे में नहीं सोच सकते हैं, इसीलिए उनके बजट प्रस्तावों की तीखी आलोचना करने वाले डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य एमपी गुप्ता से बात करने और मामले को समझने के लिए भी वह तैयार हुए - लेकिन वह जिस तरह के लोगों से घिरे हुए हैं उनकी जुबान ने रोटरी के पैसे का मजा चखा हुआ है, और वही लोग प्रवीन गोयल से उल्टा-पुल्टा काम करवा रहे हैं । ऐसा मानने और कहने वाले लोगों के लिए हालाँकि यह समझना मुश्किल हो रहा है कि डिस्ट्रिक्ट में बेईमानी के लिए बदनाम हो चुके नेताओं के हाथों प्रवीन गोयल आखिर मजबूर क्यों बने हुए हैं ?

Tuesday, March 20, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में हुई अपनी फजीहत के लिए 'इंटरनेशनल प्रतिनिधि' मुकेश अरनेजा को जिम्मेदार मान रहे राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने मुकेश अरनेजा को सबक सिखाने की तैयारी दिखाई है

चंडीगढ़ । राजेंद्र उर्फ राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स ने रोटरी इंटरनेशनल में मुकेश अरनेजा के रवैये की शिकायत करने तथा यह अनुरोध करने की तैयारी शुरू की है कि मुकेश अरनेजा को आगे किसी भी डिस्ट्रिक्ट में प्रतिनिधि बना कर न भेजा जाये । मुकेश अरनेजा डिस्ट्रिक्ट 3012 के पूर्व गवर्नर हैं और राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 3080 की अभी हाल ही में संपन्न हुई डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए थे । राजा साबू और उनके साथी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स का आरोप है कि उनके डिस्ट्रिक्ट के एक मामले में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मुकेश अरनेजा ने हस्तक्षेप किया, जिसके कारण कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स की बदनामी हुई और उन्हें फजीहत का सामना करना पड़ा । डिस्ट्रिक्ट 3080 के एक पूर्व गवर्नर ने इन पंक्तियों के लेखक से बात करते हुए बताया कि उन्हें शिकायत इस बात की है कि मुकेश अरनेजा डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में एक मेहमान के रूप में थे, और रोटरी इंटरनेशनल का प्रतिनिधित्व कर रहे थे - लेकिन उन्होंने न एक मेहमान की गरिमा का ध्यान रखा और न रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि होने की जिम्मेदारी निभाई । कॉन्फ्रेंस में डिस्ट्रिक्ट की कार्यप्रणाली से जुड़े एक मामले में चल रही एक बहस में वह नाहक ही कूद पड़े और एक पक्ष बन गए - और इस तरह उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि होने का मजाक बना दिया । डिस्ट्रिक्ट 3080 के पूर्व गवर्नर्स का मानना और कहना है कि मुकेश अरनेजा का व्यवहार डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स को अपमानित करने वाला रहा और रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में उक्त मामले में उनका हस्तक्षेप गैरजरूरी था ।
राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट की कॉन्फ्रेंस में एक प्रस्ताव डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के चुनाव से जुड़ी व्यवस्था को लेकर प्रस्तुत हुआ । मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, अधिकृत उम्मीदवार का चुनाव करने के लिए नोमीनेटिंग कमेटी बनती है, जिसमें वरिष्टतानुसार दो पूर्व गवर्नर्स भी होते हैं । डिस्ट्रिक्ट में आरोप रहा है कि यह पूर्व गवर्नर्स नोमीनेटिंग कमेटी के फैसले को प्रभावित करते हैं और अपनी पसंद का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी 'चुनवाते' हैं । रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल ने प्रस्ताव दिया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में नोमीनेटिंग कमेटी की व्यवस्था को हटाया जाये और सीधा चुनाव करवाया जाये, ताकी क्लब्स के प्रेसीडेंट और बोर्ड सदस्यों की 'राय' से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का चुनाव हो सके । यह प्रस्ताव डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की मनमानी भूमिका को चूँकि खत्म करता है, इसलिए इस प्रस्ताव पर उनको भड़कना ही था - और वह भड़के भी, वह बुरी तरह भड़के । पूर्व गवर्नर्स की तरफ से मोर्चा संभाला जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर ने । उनका कहना था कि चूंकि इस प्रस्ताव पर कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में विचार नहीं किया गया है, इसलिए इसे अभी कॉन्फ्रेंस में नहीं रखा जा सकता है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी का कहना था कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में किसी प्रस्ताव को रखने के लिए रोटरी इंटरनेशनल का जो नियम है, उसका पूरी तरह पालन हुआ है - इसलिए यह प्रस्ताव और इस पर लिया जाने वाला फैसला पूरी तरह वैध होगा । दोनों पक्षों की तरफ से भारी गर्मागर्मी थी - पूर्व गवर्नर्स पूरा जोर लगाए हुए थे कि वह किसी भी तरह से इस प्रस्ताव को बेदखल कर/करवा दें । लेकिन अचानक से मामले में कूद पड़ कर मुकेश अरनेजा ने पूर्व गवर्नर्स के जोर की सारी हवा निकाल दी ।
मुकेश अरनेजा ने पूर्व गवर्नर्स के तर्कों को बेमानी बताया और कहा कि कॉन्फ्रेंस में प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित व्यवस्था का पालन यदि किया गया है, तो पूर्व गवर्नर्स का इस बिना पर विरोध करने का कोई मतलब नहीं रह जाता है कि प्रस्ताव पर उनके बीच चर्चा नहीं हुई है । मुकेश अरनेजा की बात को सुनकर पूर्व गवर्नर्स के प्रति लोगों के मन में दबा गुस्सा फूट पड़ा और फिर माहौल पूरी तरह पूर्व गवर्नर्स के खिलाफ हो गया । लोगों की बढ़ती और मुखर होती नाराजगी को भाँप कर राजा साबू तो चुपचाप मौके से ही निकल भागे । रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ पूर्व प्रेसीडेंट मोहिंदर पॉल गुप्ता द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव तो भारी समर्थन के साथ पास हुआ ही, राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स की भारी फजीहत भी हुई । राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स अपनी इस फजीहत के लिए मुकेश अरनेजा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । उनका मानना और कहना है कि वह अपनी एकजुटता से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी पर पहले के कई अवसरों की तरह दबाव बना ही लेते और उन्हें उक्त प्रस्ताव वापस लेने के लिए मजबूर कर देते, लेकिन मुकेश अरनेजा के गैरजरूरी व अनपेक्षित हस्तक्षेप ने मामले को इस तरह उनके खिलाफ कर दिया कि फिर उन्हें पीछे हटना ही पड़ा । अपनी फजीहत में मुकेश अरनेजा की निर्णायक भूमिका को देख/पहचान कर ही राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स मुकेश अरनेजा के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में जुट गए हैं । वह मुकेश अरनेजा के रवैये की शिकायत रोटरी इंटरनेशनल में करने की तैयारी कर रहे हैं ।
राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स मुद्दा बना रहे हैं कि मुकेश अरनेजा की पूर्व की हरकतों के साथ इस नई हरकत को देखते हुए उन्हें जिम्मेदारी का कोई काम सौंपना ही नहीं चाहिए । वह रेखांकित कर रहे हैं कि अपनी हरकतों के चलते ही मुकेश अरनेजा अपने क्लब से खदेड़े जा चुके हैं; पूर्व गवर्नर अमित जैन ने अपने गवर्नर-काल के लिए उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया था, लेकिन उनकी हरकतों से तंग आकर दो महीने बाद ही उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद से हटा दिया था; पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई ने मुकेश अरनेजा की कुख्याति को देखते हुए ही उन्हें अपनी देखरेख में हुई जोन इंस्टीट्यूट से दूर ही रखा था; डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन के रूप में मुकेश अरनेजा की बेईमानीपूर्ण कारगुजारियों की शिकायत निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर शरत जैन ने की हुई है; मुकेश अरनेजा के खिलाफ एक महिला रोटेरियन के साथ अभद्रता व बदतमीजी करने का आरोप लगा, जिसकी जाँच के लिए रोटरी इंटरनेशनल को जाँच टीम का गठन करना पड़ा था; आदि-इत्यादि ऐसे मामले हैं जो मुकेश अरनेजा के फितरती स्वभाव तथा उनके 'चरित्र' की तरफ संकेत करते हैं । अपनी फजीहत से परेशान और इसके लिए मुकेश अरनेजा को जिम्मेदार मान रहे राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने मुकेश अरनेजा को सबक सिखाने की जो तैयारी दिखाई है, उसने मुकेश अरनेजा के लिए मुश्किलों को बढ़ाने का ही काम किया है ।

Sunday, March 18, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद पर रमेश बजाज की जीत कपिल गुप्ता के साथ-साथ वास्तव में राजा साबू और उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स की हार है तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी की जोरदार जीत है

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव कपिल गुप्ता के लिए चुनौतीपूर्ण तो था, लेकिन वह इतनी बुरी तरह से चुनाव हार जायेंगे - इसकी उम्मीद उनके विरोधियों को भी नहीं थी । कपिल गुप्ता अपनी हार का ठीकरा जिस तरह पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के सिर फोड़ते 'सुने' जा रहे हैं, उससे लग रहा है कि वह आगे के लिए भी अपने रास्ते बंद कर ले रहे हैं । मोटे तौर पर डिस्ट्रिक्ट का चुनावी माहौल कपिल गुप्ता के लिए पूरी तरह अनुकूल था; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी भारी दबाव में थे, जिसके चलते उनके उम्मीदवार के रूप में देखे/पहचाने जा रहे रमेश बजाज को सत्ता का समर्थन मिलता नहीं दिख रहा था, उम्मीदवार के रूप में खुद रमेश बजाज का व्यवहार और रवैया भी ढीला/ढाला था - लेकिन फिर भी कपिल गुप्ता मौके का फायदा नहीं उठा सके, उसे देख कर लोगों को लग रहा है कि कपिल गुप्ता के बस की चुनाव लड़ना है ही नहीं । चुनाव वाले दिन, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में चुनाव संबंधी एक प्रस्ताव को लेकर मचे हंगामे में कपिल गुप्ता और उनके भाई कमल गुप्ता का 'कुल्हाड़ी पर पैर मारने' वाला जो रवैया देखा गया - उससे ही साबित हो गया था कि कपिल गुप्ता जब खुद ही अपनी उम्मीदवारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, और खुद ही अपनी चुनावी नाव डुबोने में लगे हैं, तब फिर उन्हें भला कौन बचा सकता है ? नोमीनेटिंग कमेटी में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के होने से कपिल गुप्ता को उम्मीद थी कि कमेटी के सदस्यों को वह मैनेज कर लेंगे और उन्हें अधिकृत उम्मीदवार चुनवा देंगे, लेकिन मधुकर मल्होत्रा ने अपनी तरफ से कोई अतिरिक्त प्रयास किया ही नहीं और कपिल गुप्ता नोमीनेटिंग कमेटी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव भारी अंतर से चुनाव हार गए ।
कपिल गुप्ता, राजा साबू और उनके गिरोह के जिन नेताओं के भरोसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी मैदान में थे - उनके बीच तालमेल के अभाव का नजारा यह रहा कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के पहले दिन राजा साबू और उनके गिरोह के नेता कॉन्फ्रेंस में आने की बजाये यमुना नगर में अपना एक अलग कार्यक्रम कर रहे थे । लोगों के बीच चर्चा रही कि राजा साबू गिरोह के सदस्यों ने यह हरकत डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को फेल करने के उद्देश्य से की थी । उन्हें उम्मीद थी कि डिस्ट्रिक्ट के लोग टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जाने की बजाये उनके कार्यक्रम में आना पसंद करेंगे और इस तरह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का रंग फीका पड़ जायेगा । पर हुआ उल्टा । टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रिकॉर्ड आठ/नौ सौ लोग जुटे और राजा साबू के कार्यक्रम में यमुनानगर के ही थोड़े से लोग आए । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि थे । राजा साबू ने जब देखा/पाया कि उनका कार्यक्रम तो पिट गया है और टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस 'सुपर हिट' जा रही है, तो उन्हें अक्ल आई और उन्होंने सोचा कि चलो, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में ही चलते हैं और वहाँ हरियाणा के राज्यपाल के साथ फोटो-सेशन भी कर/करवा लेंगे । लेकिन इस मामले में भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी उनसे तेज निकले । टीके रूबी को जैसे ही पता चला कि राजा साबू अपने साथी गवर्नर्स के साथ कॉन्फ्रेंस में आ रहे हैं, तो उन्होंने आनन-फानन में कॉन्फ्रेंस का समापन ही कर/करवा दिया । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को कॉन्फ्रेंस स्थल पर खाली कुर्सियाँ ही मिली/दिखीं - और इस तरह एक ही दिन में उन्हें दो बार चोट पड़ी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने पहला झटका तो उन्हें अपनी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रिकॉर्ड उपस्थिति के जरिये डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को खराब करने की उनकी कोशिश को फेल करके दिया, और दूसरे झटके के रूप में अंतिम क्षणों में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में शामिल होने की राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की कोशिश को फेल करने का काम किया ।
डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व सदस्यों के लिए और भी बुरा रहा । रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ पूर्व प्रेसीडेंट मोहिंदर पॉल गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी प्रक्रिया में संशोधन का एक प्रस्ताव रखा, जिसमें नोमीनेटिंग कमेटी की व्यवस्था को हटा कर रोटरी इंटरनेशनल की एमओपी के अनुसार चुनाव करवाने का सुझाव दिया गया । इस प्रस्ताव पर कॉन्फ्रेंस में बबाल हो गया । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर ने इस प्रस्ताव के खिलाफ भारी शोर मचाया । उनका कहना रहा कि इस प्रस्ताव पर कॉलिज और गवर्नर्स में कोई चर्चा नहीं हुई है, इसलिए इस प्रस्ताव पर यहाँ विचार नहीं हो सकता है । उन्होंने इस प्रस्ताव को स्थगित करने की माँग की । मोहिंदर पॉल गुप्ता का तर्क लेकिन यह रहा कि किसी भी प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रखने के लिए जिस भी प्रक्रिया का पालन करना होता है, उनके क्लब ने उस प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया है और इसलिए इस प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रखने से और इस पर फैसला होने से नहीं रोका जा सकता है । इसके बाद भी, राजा साबू की शह पर शुरू हुआ जेपीएस सीबिया व शाजु पीटर का शोर जब कम नहीं हुआ तथा राजा साबू गिरोह के कुछेक और पूर्व गवर्नर्स ने उनका साथ देना शुरू कर दिया, तब डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद मुकेश अरनेजा ने मोर्चा संभाला और साफ कहा कि किसी भी प्रस्ताव को कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में रखना कोई जरूरी नहीं है; कॉन्फ्रेंस में रखने वाले प्रस्ताव को क्लब्स के प्रेसीडेंट को भेजना जरूरी होता है और यदि किसी पूर्व गवर्नर को प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं है तो इस बारे में शिकायत उसे अपने क्लब में करना चाहिए । जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर वैसे तो अपने आप को रोटरी का बड़ा ज्ञाता समझते/बताते हैं, लेकिन मुकेश अरनेजा के तर्क से लोगों के सामने पोल खुली कि उन्हें या तो रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का अता/पता नहीं है और या वह अपनी हेकड़ी दिखाने/जताने की कोशिश कर रहे हैं ।
मुकेश अरनेजा से मिली जानकारी से कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोग जेपीएस सीबिया और शाजु पीटर पर भड़क उठे । रोटरी क्लब करनाल मिडटाउन की युवा महिला सदस्य अंशु गोयल का चौधराहटभरी मनमानी राजनीति के खिलाफ जो गुस्सा फूटा, उसने कॉन्फ्रेंस के माहौल को ही बदल दिया । फिर तो हर किसी ने राजा साबू और उनके गिरोह के सदस्यों की लानत-मलानत शुरू कर दी । लोगों का आरोप रहा कि नोमीनेटिंग कमेटी के जरिये पूर्व गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के चुनाव में अपनी मनमानी थोपने की कोशिश करते हैं, इसलिए मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव से उन्हें चूँकि अपनी मनमानी के मौके छिनते दिख रहे हैं - इसलिए वह बौखला रहे हैं । माहौल को खिलाफ बनता देख राजा साबू ने तो मौके से खिसक लेने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी और वह अपने संगी-साथियों को वही छोड़ कर चुपचाप कॉन्फ्रेंस से निकल गए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव पर मत-विभाजन करवाते हुए आह्वान किया कि जो लोग प्रस्ताव के समर्थन में हैं वह राइट साइड में आ जाएँ, और जो लोग प्रस्ताव के खिलाफ हैं वह लेफ्ट साइड में रहें । राजा साबू गिरोह के पूर्व गवनर्स के लिए शर्मनाक स्थिति यह बनी कि लेफ्ट साइड में उनके साथ कुल छह/आठ रोटेरियंस ही बचे, जबकि कॉन्फ्रेंस में मौजूद तमाम सदस्य राइट साइड में जा पहुँचे । मजेदार और आत्मघाती रवैया रहा कपिल गुप्ता और उनके भाई कमल गुप्ता का । वह देख रहे थे कि कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों में 95 प्रतिशत मोहिंदर पॉल गुप्ता के प्रस्ताव के समर्थन में हैं, लेकिन फिर भी वह प्रस्ताव के विरोध में रहे - और बड़े मुखर तरीके से रहे । उनके समर्थकों को ही आश्चर्य हुआ कि उम्मीदवार होने के चलते उन्हें इस बबाल में सक्रिय रूप से कूदने की जरूरत भला क्या थी ? उनके सामने पूर्व गवर्नर्स का समर्थन करने की मजबूरी यदि थी भी, तो भी उन्हें 'साइलेंट समर्थक' की भूमिका में रहना था । मौके पर मौजूद हर किसी ने माना कि मोहिंदर पॉल गुप्ता के जिस प्रस्ताव को कॉन्फ्रेंस में जबर्दस्त समर्थन मिल रहा था, उसका सक्रिय विरोध करके कपिल गुप्ता ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मार ली थी, बल्कि अपने पैर ही कुल्हाड़ी पर मार लिए थे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में कपिल गुप्ता की हार को उसी समय लोगों ने पहचान लिया था और कहना शुरू कर दिया था कि कपिल गुप्ता को अब अगले वर्ष की तैयारी शुरू कर देना चाहिए । चुनाव शुरू होने से पहले ही लोगों के मुँह से इस तरह की बातें सुन कर कपिल गुप्ता की पत्नी ने कुछेक लोगों के प्रति अपनी नाराजगी भी दिखाई, लेकिन उनकी नाराजगी भी कपिल गुप्ता को एक बड़ी पराजय से नहीं बचा सकी ।

Wednesday, December 13, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई में अशोक गुप्ता को बढ़त बनाते देख पैदा हुई राजा साबू की बौखलाहट ने अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स में भरत पांड्या की उम्मीदवारी की कमजोर स्थिति की पोल खोलने का काम और कर दिया है

चंडीगढ़ । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई में अशोक गुप्ता के मुकाबले भरत पांड्या को पिछड़ता देख बौखलाए राजा साबू ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में अपनी बौखलाहट को प्रदर्शित किया । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में राजा साबू ने अपनी बौखलाहट में निशाना बनाया मोहिंदर पॉल गुप्ता को, जो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी की डिस्ट्रिक्ट टीम में कई एक कमेटियों में या तो चेयरमैन हैं और या सदस्य हैं । राजा साबू का कहना रहा कि मोहिंदर पॉल गुप्ता डिस्ट्रिक्ट के क्लब्स के प्रेसीडेंट्स पर इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अशोक गुप्ता को वोट देने के लिए तैयार कर रहे हैं, इसलिए मोहिंदर पॉल गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट टीम की सभी कमेटियों से हटा देना चाहिए । रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ पूर्व अध्यक्ष मोहिंदर पॉल गुप्ता ने पिछले कुछ समय से डिस्ट्रिक्ट में रोटरी के पैसों में हिसाब/किताब में पारदर्शिता तथा ईमानदारी लाने/बरतने के लिए अभियान छेड़ा हुआ है, और निरंतरता के साथ कई ऐसे ऐसे तथ्य उद्घाटित किये हैं, जिनसे पता चला है कि राजा साबू और उनके करीबी पूर्व गवर्नर्स ने किस किस तरीके की 'बेईमानियों' से विभिन्न ग्रांट्स को इधर से उधर करके मोटी मोटी रकमें जुटा लीं, और उनसे सेवा के नाम पर अपनी राजनीति तथा अपने मौज-मजे के लिए मौके बनाए है । इसलिए मोहिंदर पॉल गुप्ता को लेकर राजा साबू का गुस्सा सातवें आसमान पर हैं, पर अपने गुस्से में राजा साबू इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को बीच में ले आयेंगे - यह किसी ने कल्पना भी नहीं की थी । ऐसे में लोगों को लग रहा है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अधिकृत उम्मीदवार होने के बावजूद भरत पांड्या की कमजोर होती/पड़ती स्थिति और उनके लिए कुछ कर न पाने की अपनी विवशता को देख कर राजा साबू इस हद तक बौखला गए हैं कि इसके लिए भी उन्होंने मोहिंदर पॉल गुप्ता को जिम्मेदार ठहरा दिया है ।
कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को लेकर राजा साबू द्वारा दिखाई गई बौखलाहट से कुछेक लोगों ने हालाँकि यह नतीजा भी निकाला है कि मोहिंदर पॉल गुप्ता के बहाने राजा साबू ने वास्तव में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी जितेंद्र ढींगरा को 'चेतावनी' दी है । इन दोनों को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अशोक गुप्ता के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जाता है । ऐसे में माना/समझा जा रहा है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में इंटरनेशनल डायरेक्टर के चुनाव का जिक्र करके मोहिंदर पॉल गुप्ता को अशोक गुप्ता का समर्थक बताते हुए उन्हें कमेटियों से हटाने की माँग के जरिये राजा साबू ने वास्तव में टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा को खबरदार करने की कोशिश की है । मजे की बात यह हुई है कि अपनी इस कोशिश के जरिये राजा साबू ने वास्तव में इनकी और अशोक गुप्ता की मदद ही कर दी है । दरअसल टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा और मोहिंदर पॉल गुप्ता ने अभी तक इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव की तरफ ध्यान ही नहीं दिया था । टीके रूबी जिस तरह से घिरे हुए हैं, उसके चलते वह अपनी गवर्नरी संभल-संभल कर ही करने में लगे हैं; जितेंद्र ढींगरा इन दिनों अपने काम में व्यस्त है और मोहिंदर पॉल गुप्ता इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी खेल में 'बाहर' के व्यक्ति हैं (राजा साबू ने लेकिन अपनी बौखलाहट में उन्हें 'अंदर' का व्यक्ति बना दिया है) - इस कारण यह लोग अभी तक इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के अभियान से दूर ही थे; लेकिन राजा साबू ने इनका काम आसान करते हुए खुद ही लोगों को बता दिया है कि यह लोग इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अशोक गुप्ता के साथ हैं, और चाहते हैं कि इनके डिस्ट्रिक्ट के क्लब्स के प्रेसीडेंट्स अशोक गुप्ता को वोट दें । 
कई लोगों को हैरानी हो सकती है और उनके लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि राजा साबू इतनी बड़ी राजनीतिक बेबकूफी कैसे कर सकते हैं कि अपने विरोधियों का काम भी वह खुद ही कर दें ? लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों की उनके डिस्ट्रिक्ट की गतिविधियों को देखें/समझें तो पायेंगे कि राजनीतिक बेबकूफियाँ करने में राजा साबू बड़े 'एक्सपर्ट' हैं । राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स अपने खुले और सक्रिय समर्थन के बावजूद टीके रूबी के मुकाबले डीसी बंसल को 'जीत' नहीं दिलवा सके, यह तो उनकी राजनीतिक कमजोरी का सुबूत है - लेकिन टीके रूबी का इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर होना राजा साबू की राजनीतिक बेबकूफी का प्रचंड सुबूत और उदाहरण है । वास्तव में राजा साबू के लिए फजीहत की बात ही यह हुई है कि उन्होंने अपनी सारी ताकत, अपनी सारी पहचान, अपनी सारी प्रतिष्ठा को सिर्फ इसलिए दाँव पर लगा दिया कि कहीं टीके रूबी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न बन जाएँ - लेकिन अंत में बेबकूफी करते हुए प्रवीन गोयल को पहले तो वर्ष 2017-18 की गवर्नरी सँभलवाने की और फिर हटवाने की ऐसी कोशिश की कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद टीके रूबी की गोद में खुद-ब-खुद आ गिरा । पिछले ढाई-तीन वर्षों की लड़ाई में राजा साबू ने अपनी हरकतों से अपने कई नए 'दुश्मन' बनाए, जिनमें से एक मोहिंदर पॉल गुप्ता की सक्रियता राजा साबू और उनके संगी-साथी गवर्नर्स की बेईमानियों की पोल खोलने का वाहक बनी । टीके रूबी को गवर्नर न बनने देने की जिद ने राजा साबू की सारी पहचान और प्रतिष्ठा को धूल में मिला दिया है - और आज राजा साबू राजनीतिक व आर्थिक बेईमानी के 'प्रतीक-पुरुष' बन गए हैं । बड़े पदों पर रहे लोगों के पतन की कीचड़ में लिथड़ने के किस्से यूँ तो बहुत हैं, लेकिन रोटरी में एक अकेले राजा साबू ने ही यह पतन-गाथा लिखी है । जिन लोगों ने रोटरी में राजा साबू का 'भव्य-काल' देखा है, उन लोगों के लिए राजा साबू को पतन की कीचड़ में लिथड़ते देखना सचमुच निराशाजनक और शर्मिंदगी भरा है ।
राजा साबू के पतन की यही स्थिति इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में भरत पांड्या के लिए मुसीबत बन गई है । कहने/होने को तो भरत पांड्या की उम्मीदवारी के सबसे बड़े समर्थक राजा साबू हैं, लेकिन राजा साबू के ही डिस्ट्रिक्ट में भरत पांड्या की स्थिति सबसे खराब है - सबसे खराब इसलिए क्योंकि यही एक डिस्ट्रिक्ट है, जहाँ भरत पांड्या के वोट अपने समर्थक नेताओं के कारण बढ़ने की बजाए घटेंगे । डिस्ट्रिक्ट में तमाम लोगों का कहना है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में वह किसी भी उम्मीदवार को नहीं जानते हैं, लेकिन वह उस उम्मीदवार को तो हरगिज वोट नहीं देंगे जिसका समर्थन राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स कर रहे होंगे । यह स्थिति भरत पांड्या के लिए मुसीबत बनी है । राजा साबू ने अपने रवैये से अपने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच अशोक गुप्ता के लिए सहानुभूति और समर्थन पैदा करने का ही काम किया है । कुछ समय पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने इंटरसिटी सेमीनार में अशोक गुप्ता को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था; अशोक गुप्ता द्वारा आमंत्रण स्वीकार कर लेने के बाद उनके नाम और फोटो के साथ निमंत्रण पत्र भी छप/बँट गए थे - लेकिन राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स ने आपत्ति व शिकायत करके अशोक गुप्ता का उक्त सेमीनार में आना स्थगित करवा दिया था । इसका असर लेकिन यह हुआ कि डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच अशोक गुप्ता के प्रति सहानुभूति और समर्थन पैदा हुआ, और राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स का दाँव उल्टा पड़ा । अभी जब कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में राजा साबू ने अशोक गुप्ता का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए मोहिंदर पॉल गुप्ता को कमेटियों से हटाने की बात कही, तब फिर लोगों की तरफ से यही प्रतिक्रिया देखने/सुनने को मिली है । जिन लोगों को अभी तक इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को लेकर कोई जानकारी नहीं थी और जिन्होंने अभी तक अपनी कोई भूमिका तय नहीं की थी, राजा साबू की हरकत के चलते उनके सामने भी सारा नजारा स्पष्ट हो गया है, और लोगों के सामने राजा साबू तथा उनके संगी-साथी गवर्नर्स का राजनीतिक छोटापन एक बार फिर जाहिर हो गया है ।
भरत पांड्या और उनके नजदीकियों के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि उनके सबसे बड़े समर्थक राजा साबू की अपने ही डिस्ट्रिक्ट में जो फजीहत हुई है, जिसके चलते रोटरी की व्यवस्था और राजनीति में राजा साबू पतन की ओर बढ़े हैं - उसकी प्रतिक्रिया के रूप में आसपास के दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में भी राजा साबू की 'अपील' न सिर्फ कमजोर पड़ी है, बल्कि राजा साबू के समर्थक के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले नेताओं ने बचना/छिपना शुरू कर दिया है । इसका नतीजा यह है कि अधिकतर डिस्ट्रिक्ट्स में भरत पांड्या की उम्मीदवारी के लिए कैम्पेन चलाने और चुनाव की व्यवस्था देखने/सँभालने के लिए व्यक्तियों का टोटा तक पड़ गया है ।

Monday, November 27, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में ग्लोबल ग्रांट्स हड़प कर उससे अपनी राजनीति साधने तथा मौज-मजा करने की पोल खुलती देख राजा साबू ने मोहिंदर पॉल गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से निकलवाने के लिए कमर कसने के जरिए क्या अपनी ही कमजोरी को साबित नहीं किया है ?

चंडीगढ़ । राजा साबू - पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू ने एक बार फिर मोहिंदर पॉल गुप्ता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उन्हें डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हटाने के लिए मुहिम छेड़ दी है । राजा साबू के करीबियों का कहना/बताना है कि राजा साबू ने अब पक्की तरह से ठान लिया है कि वह मोहिंदर पॉल गुप्ता को तीन सदस्यीय डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में नहीं रहने देंगे और इसके लिए यदि जरूरत पड़ी तो इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम पर भी दबाव डालेंगे कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी से मोहिंदर पॉल गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हटाने के लिए कहें । उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले ही बासकर चॉकलिंगम की मौजूदगी में चंडीगढ़ में संपन्न हुई कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में मोहिंदर पॉल गुप्ता को सदस्य बनाने पर आपत्ति की थी । उक्त आपत्ति के लिए उन्होंने मोहिंदर पॉल गुप्ता के पूर्व गवर्नर न होने के तथ्य को बहाना बनाया था । उनका कहना था कि डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में पूर्व गवर्नर्स ही सदस्य हो सकते हैं । उक्त मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को आईना दिखाते हुए बताया था कि पिछले रोटरी वर्ष में उन्होंने ही यह नियम बनाया था कि डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में एक सदस्य कोई रोटेरियन भी हो सकता है; इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्होंने तो उसी नियम का पालन करते हुए मोहिंदर पॉल गुप्ता को सदस्य बनाया है । टीके रूबी के इस जबाव के बाद राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को बासकर चॉकलिंगम के सामने फजीहत का शिकार होना पड़ा था - और मोहिंदर पॉल गुप्ता के खिलाफ उनकी मुहिम औंधे मुँह गिर पड़ी थी ।
राजा साबू को मोहिंदर पॉल गुप्ता का बुखार लेकिन एक बार फिर चढ़ आया है, जिसके फलस्वरूप उन्होंने मोहिंदर पॉल गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हटवाने के लिए फिर से कमर कस ली है । राजा साबू के करीबियों के अनुसार, मोहिंदर पॉल गुप्ता के खिलाफ राजा साबू का गुस्सा एक बार फिर दरअसल इसलिए फूटा है, क्योंकि मोहिंदर पॉल गुप्ता ने हाल ही दिनों में डिस्ट्रिक्ट में ग्लोबल ग्रांट्स के नाम पर मची धाँधली को बेनकाब किया है - जिसके चलते राजा साबू की देखरेख में ग्लोबल ग्रांट्स की होने वाली बंदरबाँट की पोल खुली है । अभी हाल ही में मोहिंदर पॉल गुप्ता ने क्लब्स के प्रेसीडेंट्स और सेक्रेटरीज को पत्र लिख कर ग्लोबल ग्रांट्स से संबंधित तथ्यों और नियमों से परिचित करवाया और राजा साबू के क्लब का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह अपनी तरफ से मामूली रकम देकर ग्लोबल ग्रांट्स के नाम पर मोटी रकम ली जा सकती है । अपने पत्र में मोहिंदर पॉल गुप्ता ने इस तथ्य को उद्घाटित किया कि कैसे राजा साबू के क्लब ने कुल करीब तीस हजार डॉलर देकर ग्रांट्स के नाम पर दस लाख डॉलर से अधिक की रकम जुटा ली । मोहिंदर पॉल गुप्ता ने पिछले दिनों निरंतरता के साथ जो जो तथ्य उद्घाटित किये हैं, उनसे डिस्ट्रिक्ट के लोगों को पता चला है कि राजा साबू और उनके करीबी पूर्व गवर्नर्स ने किस किस तरीके से विभिन्न ग्रांट्स को इधर से उधर करके मोटी मोटी रकमें जुटा लीं, और उनसे सेवा के नाम पर अपनी राजनीति तथा अपने मौज-मजे के लिए मौके बनाए हैं । राजा साबू के क्लब ने कुछेक ग्रांट्स तो ऐसी जुगाड़ लीं, जिनमें क्लब ने इकन्नी भी नहीं दी और ग्रांट के रूप में मिले लाखों रुपए से राजा साबू, मधुकर मल्होत्रा और कमल बेदी तथा क्लब के दूसरे कुछेक सदस्यों ने मौज/मस्ती की और या कमाई की । मोहिंदर पॉल गुप्ता की कोशिशों के चलते ही राजा साबू की चेयरमैनी में चल रहे रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के अकाउंट्स को छिपा कर रखने के प्रयास फेल हुए और उसके अकाउंट्स सामने आ सके, और उसमें बेहद चालाकी से 'ठिकाने' लगाई जा रही दो करोड़ 83 लाख रुपए की रकम 'पकड़ी' जा सकी ।
मोहिंदर पॉल गुप्ता की इन कोशिशों से लोगों को पहली बार तथ्यों और सुबूतों के साथ पता चला कि राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स किस तरह ग्लोबल ग्रांट्स हड़पने का खेल खेलते रहे हैं । अपने इस खेल को बचाने के लिए राजा साबू को मोहिंदर पॉल गुप्ता का मुँह बंद करना जरूरी लगा है; और इसीलिए वह कुछ भी करके मोहिंदर पॉल गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हटवा देना चाहते हैं । मजे की बात यह है कि राजा साबू के गिरोह के ही कुछेक पूर्व गवर्नर्स को लगता है कि ऐसा करने के जरिए राजा साबू अपने लिए मुसीबतों को कम करने की बजाए बढ़ाने का ही काम करेंगे - क्योंकि मोहिंदर पॉल गुप्ता ने हिसाब/किताब में पारदर्शिता तथा ईमानदारी लाने/बरतने के लिए जो अभियान छेड़ा हुआ है, वह डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के सदस्य के रूप में नहीं बल्कि एक रोटेरियन के रूप में छेड़ा हुआ है । ऐसे में, मोहिंदर पॉल गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से राजा साबू हटवा भी देते हैं, तो उससे मोहिंदर पॉल गुप्ता के अभियान पर भला क्या असर पड़ेगा ? ऐसा मानने और कहने वाले पूर्व गवर्नर्स ने याद दिलाया कि पिछले रोटरी वर्ष में करनाल में हुई रमन अनेजा की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में हार्टलैंड प्रोजेक्ट की फंडिंग को लेकर पूछे गए मोहिंदर पॉल गुप्ता के सवाल पर राजा साबू ने बौखला कर जो नाटक किया था और जिसके चलते लोगों के बीच उनकी भारी फजीहत हुई थी, उस समय मोहिंदर पॉल गुप्ता किसी कमेटी के सदस्य नहीं थे । इन पूर्व गवर्नर्स का हालाँकि कहना यह भी है कि राजा साबू अपने सामने किसी की सुनते/मानते तो हैं नहीं, और अपने मन की ही करते हैं और इसीलिए लगातार अपनी किरकिरी करवा रहे हैं । राजा साबू को स्वीकार करना और समझना चाहिए कि समय अब उनके अनुकूल नहीं रह गया है, और लोगों के बीच बना उनका ऑरा(आभामंडल) अब धूमिल पड़ गया है - इसलिए उन्हें मनमाने और तानाशाहीभरे रवैये से नहीं, बल्कि थोड़े उदार रवैये से हालात को अनुकूल बनाने का प्रयास करना चाहिए ।
राजा साबू के नजदीकियों का ही कहना है कि बदले हुए हालात और माहौल में राजा साबू को मोहिंदर पॉल गुप्ता को हल्के में नहीं लेना चाहिए और समझना चाहिए कि मोहिंदर पॉल गुप्ता एक वरिष्ठ व अनुभवी रोटेरियन हैं, जिन्होंने कई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के साथ नजदीकियत रखते हुए काम किया है और महत्त्वपूर्ण अवॉर्ड प्राप्त किए हैं । सतीश सलूजा के गवर्नर-काल में उन्हें 'मोस्ट रेस्पॉन्सिबिल प्रेसीडेंट ऑफ द ईयर' का अवॉर्ड मिला था; मधुकर मल्होत्रा ने अपने गवर्नर-काल में उन्हें 'मोस्ट आउटस्टैंडिंग चेयरमैन' के अवॉर्ड के लिए चुना था, और जो खुद राजा साबू ने उन्हें दिया था । मनप्रीत सिंह और डेविड हिल्टन के गवर्नर-काल में भी उन्हें उल्लेखनीय काम करने के लिए सम्मानित किया गया था । मोहिंदर पॉल गुप्ता के कामकाज के तथा पिछले वर्षों में लगातार सम्मानित होते रहे उनके रिकॉर्ड को देखते हुए टीके रूबी ने अपने गवर्नर-काल में उन्हें कई कमेटियों में शामिल किया है । पिछले दिनों पानीपत में आयोजित हुए रोटरी फाउंडेशन सेमीनार में हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें सम्मानित किया । अपने लंबे अनुभव और अपनी निरंतर सक्रियता के बल पर ही मोहिंदर पॉल गुप्ता ने जब डिस्ट्रिक्ट के हिसाब-किताब में ईमानदारी और पारदर्शिता लाने/बरतने के लिए अभियान छेड़ा, तो उनके अभियान पर लोगों ने विश्वास तो किया ही - साथ ही साथ उनके अभियान के प्रति समर्थन भी व्यक्त किया । इसीलिए राजा साबू के करीबियों को भी लगता है कि मोहिंदर पॉल गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से निकलवाने का अभियान छेड़ कर राजा साबू ने अपनी कमजोरी को खुद ही साबित करने के साथ-साथ जैसे अपना 'अपराध' भी क़ुबूल कर लिया है; ऐसे में राजा साबू यदि इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम से दबाव डलवा कर मोहिंदर पॉल गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से निकलवा भी देते हैं - तो यह 'जीत' वास्तव में उनकी हार ही होगी ।

Thursday, March 9, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 - यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट की कॉन्फ्रेंस में डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के बारे में पूछे गए मोहिंदर पॉल गुप्ता के सवाल में रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट के जिक्र पर राजा साबू के भड़कने से प्रोजेक्ट की फंडिंग तथा उसके खर्च को लेकर लगने वाले आरोप और भी गंभीर हो उठे हैं

करनाल/चंडीगढ़ । करनाल में आयोजित हुई डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में पूछे गए एक सवाल में रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट का जिक्र सुन कर राजेंद्र उर्फ राजा साबू के गुस्से में आग-बबूला हो जाने के पीछे के रहस्य की पर्तें धीरे-धीरे खुल रही हैं - और जैसे जैसे सच्चाई लोगों के सामने आ रही है, राजा साबू का असली रूप लोगों के सामने प्रकट हो रहा है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जब रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ पूर्व अध्यक्ष मोहिंदर पॉल गुप्ता ने अपने एक सवाल में रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट का संदर्भ दिया, तो राजा साबू बुरी तरह बौखला गए थे और गुस्से से तमतमाते हुए वह अपनी सीट छोड़ कर हॉल के बीच आ गए थे और लोगों से सवाल करने लगे थे कि उन्हें रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट नहीं करना चाहिए क्या ? उनके इस व्यवहार और सवाल पर हॉल में मौजूद अधिकतर लोग तो हक्के-बक्के रह गए थे और उनके बीच जो जबाव मिला वह यही कि - जरूर करना चाहिए । रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट राजा साबू के क्लब का एक महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, और इसके पीछे की पूरी सोच सचमुच बहुत शानदार सोच है । इस प्रोजेक्ट से किसी को भी भला क्या ऐतराज हो सकता है ? मोहिंदर पॉल गुप्ता ने इस प्रोजेक्ट के होने या न होने को लेकर सवाल नहीं उठाया था; उनका सवाल तो डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के दुरुपयोग को लेकर था, जिसमें संदर्भ के रूप में रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट की फंडिंग का जिक्र था - लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हुआ कि प्रोजेक्ट की फंडिंग के बारे में पूछे गए सवाल का सीधा-सीधा जबाव देने की बजाए, सवाल से राजा साबू इस कदर बौखला क्यों गए ? राजा साबू की बौखलाहट 'बता' रही थी जैसे कि मोहिंदर पॉल गुप्ता के उक्त सवाल ने राजा साबू को भरी सभा में 'रंगे हाथ' पकड़ लिया था - जिससे बचने के लिए राजा साबू को अपना गुस्सा दिखा कर अपने लिए सहानुभूति जुटाने का नाटक करना पड़ा ।
राजा साबू के इस नाटक में राजा-भक्ति दिखाते हुए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपीएस सिबिया ने भी अतिथि कलाकार की भूमिका निभाने की कोशिश की, किंतु राजा साबू ने उन्हें जब अपना मुँह बंद रखने की हिदायत दी तो फिर वह चुप लगा गए । जेपीएस सिबिया ने दरअसल सुझाव दिया कि रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट होने या न होने को लेकर उपस्थिति लोगों के बीच वोटिंग करा ली जाए । कुछ ही वर्ष पहले राजा साबू के हाथों से आउटस्टैंडिंग डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन का अवॉर्ड ले चुके मोहिंदर पॉल गुप्ता ने कहा कि लोगों को पूरी बात बताई जाए और फिर वोटिंग करा ली जाए । मोहिंदर पॉल गुप्ता के तेवर देख कर राजा साबू ने मामले की नाजुकता को पहचाना और जेपीएस सिबिया को अपना मुँह बंद रखने को कहा । राजा-भक्ति में जेपीएस सिबिया ने जिस तत्परता के साथ अपना मुँह खोला था, राजा-झिड़की के बाद उसी तत्परता से उन्होंने फिर अपना मुँह बंद कर लिया - और वोटिंग की बात भी फिर गायब हो गई । राजा साबू ने भी मामले को जल्दी से समेट लिया - वह समझ रहे थे कि मामले में बात यदि आगे बढ़ी तो फिर उनकी सारी पोल पट्टी अभी यहीं खुल जायेगी । राजा साबू ने तो मामले को समेट लिया, किंतु लोगों के मन में यह सवाल बना ही रहा कि मोहिंदर पॉल गुप्ता के सवाल में आखिर ऐसा क्या था जिससे कि राजा साबू ने अपना आपा खो दिया और वह बुरी तरह बौखला गए ?
कॉन्फ्रेंस के बाद जिन लोगों ने इस बारे में सच्चाई समझने/जानने की कोशिश की, उन्हें यह जानकर गहरा धक्का लगा कि राजा साबू जैसे व्यक्ति ने सेवा कार्यों की आड़ में कैसे कैसे कारनामे किये हुए हैं, और जैसे ही उनके कारनामे सामने आने को हुए वह अपने गुस्से को दिखाते हुए लोगों को भावनात्मक रूप से भड़काने का प्रयास करने लगे । मोहिंदर पॉल गुप्ता का सवाल वास्तव में डिस्ट्रिक्ट ग्रांट को लेकर था; उनका आरोप था कि डिस्ट्रिक्ट ग्रांट को कुछ ही क्लब मनमाने तरीके से इस्तेमाल करते हैं और उसे दिखा कर मैचिंग ग्रांट ले लेते हैं - जिसे ऐसे कामों में खर्च किया जाता है जो डिस्ट्रिक्ट की भौगोलिक सीमाओं से दूर-दराज होते हैं । मोहिंदर पॉल गुप्ता का कहना था कि इससे रोटरी की बुनियादी सोच का उल्लंघन होता है । इसी संदर्भ में उन्होंने राजा साबू के क्लब के रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट का जिक्र किया, जिस पर राजा साबू बुरी तरह भड़क गए । उनके भड़कने से लोगों का ध्यान रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट की फंडिंग संरचना पर गया तो इसमें चल रही धोखाधड़ी की पोल खुली । मजे की बात यह है कि रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट की फंडिंग को लेकर कई बार सवाल उठे हैं, लेकिन कभी भी लोगों को इसका जबाव नहीं मिला । जो तथ्य चर्चा में आया है, वह यह है कि राजा साबू पहले तो डिस्ट्रिक्ट ग्रांट से इस प्रोजेक्ट के लिए पैसे ले लेते हैं, फिर इस पैसे से मैचिंग ग्रांट का जुगाड़ करते हैं और फिर इस पैसे से समाज सेवा करते हुए अपनी फोटो खिंचवाते हैं । राजा साबू ने डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में लोगों से पूछा था कि उन्हें यह प्रोजेक्ट करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए ? लोग अब उसका जबाव देते हुए कह रहे हैं कि राजा साबू को यह प्रोजेक्ट अवश्य करना चाहिए - किंतु अपने पैसे से करना चाहिए; डिस्ट्रिक्ट ग्रांट पर डिस्ट्रिक्ट के दूसरे क्लब्स का भी अधिकार हैं, उन्हें भी डिस्ट्रिक्ट ग्रांट इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए ।
रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट धोखाधड़ीभरी फंडिंग संरचना के कारण ही विवाद में नहीं है, बल्कि अपनी 'प्रकृति' के कारण भी संदिग्ध बना हुआ है । यह प्रोजेक्ट उस मशहूर कहावत/शिक्षा का मजाक बनाता है - जिसमें कहा गया है कि 'चैरिटी बिगिन्स एट होम' । मैं यदि अपने पड़ोसियों/नजदीकियों की मुश्किलों व परेशानियों की अनदेखी करके दूर-दराज के लोगों की मुश्किलों व परेशानियों को दूर करने की बात करता हूँ, तो वास्तव में मैं धूर्तता और पाखंड का परिचय दे रहा होता हूँ । रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट के जरिये राजा साबू अपना ऐसा ही परिचय दे रहे हैं । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि कुछ वर्ष पहले राजा साबू का क्लब चंडीगढ़ में गरीब बच्चों के लिए एक स्कूल चलाया करता था, जिसमें कुछ हजार रुपए वार्षिक का खर्च आता था - लेकिन जिसे पैसों की कमी के कारण बंद कर दिया गया । चंडीगढ़ में गरीब बच्चों के लिए स्कूल को चलाते रहने में राजा साबू ने कोई दिलचस्पी नहीं ली, इसीलिए अफ्रीका के बच्चों के लिए उनकी दिलचस्पी सवालों के घेरे है । लोगों को लगता है कि राजा साबू दिखावे के लिए लिए सेवा करते हैं - और इसलिए ही वहीं सेवा करते हैं जहाँ बड़ा दिखावा किया जा सकने की संभावना बनती है । अब चंडीगढ़ में गरीब बच्चों का स्कूल चलाने में तो कोई 'फायदा' नहीं है, इसलिए उसे बंद कर देने में ही अक्लमंदी है; लेकिन अफ्रीकी देशों में बच्चों का ईलाज कराने में फायदा ही फायदा है - लोगों के बीच आरोपपूर्ण चर्चा है कि रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट के नाम पर अफ्रीकी देशों में जाकर राजा साबू अपने बिजनेस के लिए संभावनाएँ जुगाड़ने का काम करते हैं । किसी की भी समझ में यह बात नहीं आती है कि अफ्रीकी देशों में बच्चों का ईलाज करने के लिए जाने वाली डॉक्टर्स की टीम में राजा साबू क्यों और क्या करने जाते हैं ?
रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट की फंडिंग संरचना तथा उसके खर्च का हिसाब-किताब देने में राजा साबू जिस तरह से बचने की कोशिश करते हैं, उससे अफ्रीकी बच्चों के ईलाज के नाम पर चलने वाले इस प्रोजेक्ट में पैसों की हेराफेरी के आरोपों को भी बल मिला है । लोगों का कहना है कि इस तरह के आरोपों की चर्चा को रोकने का सबसे अच्छा और आसान तरीका है कि राजा साबू फंडिंग और खर्च का सारा ब्यौरा सार्वजनिक कर दें - इससे आरोप लगाने वालों का मुँह अपने आप बंद हो जायेगा । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के बारे में पूछे जाने वाले मोहिंदर पॉल गुप्ता के सवाल में रीचआउट टू अफ्रीका प्रोजेक्ट का जिक्र आने से राजा साबू जिस तरह भड़के, उससे उक्त आरोप और भी गंभीर हो उठे हैं ।

Friday, January 27, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में अपनी करतूतों के चलते इंटरनेशनल बोर्ड से लताड़ खाने वाली राजा साबू के नेतृत्व वाली लीडरशिप इस वर्ष भी अपनी टुच्ची हरकतों के सहारे चुनाव को प्रभावित करने से लेकिन बाज नहीं आ रही है

चंडीगढ़ । राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू तथा उनके गिरोह के सदस्यों को रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड से एक बार फिर बड़ी चमाट पड़ी है - और इस तरह रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व प्रेसीडेंट्स में राजा साबू ने अकेले ऐसे पूर्व प्रेसीडेंट बनने का रिकॉर्ड बनाया है, जिन्हें रोटरी इंटरनेशनल से कई बार लताड़ खाने को मिली है । अभी हाल ही में संपन्न हुई रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड की मीटिंग में राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 3080 में वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के हुए चुनाव को रद्द करने का फैसला करते हुए, इस चुनाव में अपनाई गई भूमिका के लिए डिस्ट्रिक्ट लीडरशिप की कड़ी भर्त्सना की गई है । उल्लेखनीय है कि उक्त चुनाव में राजा साबू और डिस्ट्रिक्ट के प्रायः सभी पूर्व गवर्नर्स ने खुली तरफदारी, तिकड़म, मनमानी और बेईमानी से डीसी बंसल को चुनाव जितवाया था । इसकी शिकायत हुई, जिसे रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने सही पाया और अंततः चुनाव रद्द घोषित कर दिया । गौर करने वाली बात यह है कि अभी जिस चुनाव पर फैसला हुआ है, वह दूसरी बार हुआ था । पहली बार, फरवरी 2015 में हुआ चुनाव भी मनमानियों और बेईमानियों के आरोपों में घिरा था; और रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने राजा साबू और डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स के मुँह पर तमाचा-सा जड़ते हुए दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया था । राजा साबू और डिस्ट्रिक्ट के दूसरे अधिकतर पूर्व गवर्नर्स ने उससे लेकिन कोई सबक नहीं लिया, और पूरी बेशर्मी और निर्लज्जता के साथ दोबारा हुए चुनाव में भी अपनी मनमानियाँ और बेईमानियाँ कीं - जिसकी शिकायत को सही पाकर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने उसे भी रद्द कर दिया है ।
राजा साबू और डिस्ट्रिक्ट के अन्य पूर्व गवर्नर्स बस एक बात पर 'गर्व' कर सकते हैं कि अंततः उन्होंने टीके रूबी को गवर्नर न बनने देने में सफलता प्राप्त कर ली । उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता होगा कि इस चक्कर में पिछले दो वर्षों में उन्हें कई कई बार अपने अपने चेहरों पर कालिख पुतवानी पड़ी है । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने पिछले दो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स - दिलीप पटनायक तथा डेविड हिल्टन की नाम लेकर भर्त्सना की है कि चुनावी प्रक्रिया में इन्होंने नियमों व व्यवस्था का पालन नहीं किया । इन दोनों को इस भर्त्सना का शिकार सिर्फ इसलिए होना पड़ा है, क्योंकि इन्होंने अपने आपको राजा साबू तथा दूसरे पूर्व गवर्नर्स की कठपुतलियाँ बना लिया था और उनके इशारों पर ही काम करना मंजूर कर लिया था ।
जो हुआ है, उससे राजा साबू और दूसरे पूर्व गवर्नर्स तथा मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा ने शायद ही कोई सबक सीखा है - क्योंकि इस बार के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में फिर वही मनमानियाँ, तिकड़में और बेईमानियाँ हो रही हैं; क्योंकि एक बार फिर राजा साबू और डिस्ट्रिक्ट के दूसरे पूर्व गवर्नर्स ने तय कर लिया है कि इस बार उन्हें जितेंद्र ढींगरा को जीतने नहीं देना है । पिछले अनुभव से, उन्होंने यह सबक जरूर सीख लिया है कि मनमानियाँ, तिकड़में और बेईमानियाँ पहले से ही कर लो - पिछली बार पहले से तैयारी नहीं की थी, जिसके चलते बाद में करना पड़ीं । पिछली बार नोमीनेटिंग कमेटी ने अपनी मर्जी से फैसला करते हुए टीके रूबी को चुन लिया था, इसलिए इस बार नोमीनेटिंग कमेटी को ही मजाक बनाते हुए रोटरी की 'व्यवस्था' को ही मानने से इंकार कर दिया गया है ।
उल्लेखनीय है कि रोटरी की व्यवस्था में क्लब का बड़ा महत्त्व है । रोटरी के किसी भी चुनाव में रोटेरियन खुद सामने नहीं आता है, बल्कि क्लब उसे अपने उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करता है । लेकिन राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में इस बार बनाए गए अनोखे नियम के तहत डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए होने वाले चुनाव में क्लब के इस अधिकार को खत्म कर दिया गया है । नोमीनेटिंग कमेटी के लिए उम्मीदवार तय करने के क्लब के अधिकार को छीन कर नई व्यवस्था यह बनाई गई है कि नोमीनेटिंग कमेटी बनने के दौरान क्लब्स के जो पूर्व प्रेसीडेंट्स मौके पर उपस्थित होंगे, उनके नाम की पर्ची पड़ेगी और उसमें से नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्यों का नाम निकलेगा । क्या किसी डिस्ट्रिक्ट को यह अधिकार है कि वह रोटरी इंटरनेशनल के नियमों तथा व्यवस्थाओं में मनमाने तरीके से परिवर्तन कर ले, और रोटरी इंटरनेशनल के मूल आदर्शों के साथ खिलवाड़ करे ? इससे भी बड़ा मजाक इस बार यह हो रहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की चुनावी प्रक्रिया में उन क्लब्स को शामिल होने का अधिकार नहीं है, जिनके सभी ड्यूज निर्धारित समय पर जमा नहीं हो सके हैं - किंतु डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार प्रस्तुत करने को लेकर उन क्लब्स पर कोई रोक नहीं है । इस तरह के तमाशे सिर्फ इसलिए किए जा रहे हैं ताकी राजा साबू और उनके गुर्गे पूर्व गवर्नर्स किसी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बनवा सकें या किसी को बनने से रोक सकें ।
इस 'काम' को अंजाम तक पहुँचाने के लिए राजा साबू और उनके गुर्गे पूर्व गवर्नर्स ने पहला काम मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा को दिलीप पटनायक तथा डेविड हिल्टन की तरह से ही अपनी कठपुतली बनाने का किया है । यह बात रमन अनेजा की एक हरकत से साबित होती है । रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के पूर्व प्रेसीडेंट मोहिंदर पॉल गुप्ता ने नोमीनेटिंग कमेटी बनने/बनाने की प्रक्रिया में रोटरी इंटरनेशनल के नियमों व दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के मामले को लेकर रमन अनेजा से शिकायत की । रमन अनेजा ने उन्हें उस समय तो ठीक वैसे ही जबाव दिया, जैसे एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को देना चाहिए - रमन अनेजा ने उनसे कहा कि उन्हें जो कुछ भी कहना है उसे वह अपने क्लब से एक प्रस्ताव के रूप में भेजें, जिसे डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में विचार के लिए लोगों के सामने रख दिया जायेगा । लेकिन दो दिन बाद ही रमन अनेजा ने पलटी मारी और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का चोला उतार कर कठपुतली का चोला पहन कर मोहिंदर पॉल गुप्ता से कहा कि उन्हें अपने क्लब से प्रस्ताव भिजवाने की जरूरत नहीं है, वह खुद ही उक्त मामले में कार्रवाई करेंगे । रमन अनेजा का यह बदला हुआ रवैया बता/दिखा रहा है कि यह सिर्फ उनकी बहानेबाजी है, जिसका उद्देश्य मोहिंदर पॉल गुप्ता को प्रस्ताव भेजने से रोकना है । समझा जाता है कि राजा साबू और दूसरे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की तरफ से रमन अनेजा के कान उमेंठे गए होंगे कि प्रस्ताव मँगा कर क्यों मुसीबत पैदा कर/करवा रहे हो; सो, रमन अनेजा ने खुद ही कार्रवाई करने का वायदा करते हुए मोहिंदर पॉल गुप्ता को प्रस्ताव भेजने/भिजवाने से रोकने का काम किया । हर कोई जानता है कि रमन अनेजा भले ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं - और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के नाते उन्हें रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार काम करना चाहिए, लेकिन वह करेंगे वही जो राजा साबू और उनकी 'कंपनी' के लोग कहेंगे ।
मजेदार संयोग है कि इन्हीं मोहिंदर पॉल गुप्ता ने पिछले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन को रोटरी इंटरनेशनल की व्यवस्थानुसार ई-वोटिंग के जरिए चुनाव करवाने का सुझाव दिया था, जिसे स्वीकार करने से डेविड हिल्टन ने इंकार कर दिया था । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने अपने फैसले में डेविड हिल्टन के रवैये की भर्त्सना करते हुए साफ कहा है कि वह यदि ई-वोटिंग से चुनाव करवाते, तो चुनाव में बेईमानी नहीं हो पाती; डेविड हिल्टन को लेकिन मोहिंदर पॉल गुप्ता के सुझाव को मानने की बजाए राजा साबू एंड कंपनी की बात माननी थी, ताकि उन्हें चुनाव में मनमानी व बेईमानी करने का मौका मिल सके । रमन अनेजा भी लगता है कि डेविड हिल्टन की राह पर हैं - और रोटरी इंटरनेशनल की व्यवस्थानुसार काम करने के मोहिंदर पॉल गुप्ता के सुझाव को मानने से बचने तथा राजा साबू एंड कंपनी की मनमानी के अनुसार ही काम करने की तिकड़म लगा रहे हैं ।
रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने अपने फैसले में इस तथ्य को बहुत स्पष्टता के साथ रेखांकित किया है कि वर्ष 2017-18 के गवर्नर पद के चुनाव में डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप 4-वे-टेस्ट तथा रोटरी के आदर्शों का पालन करने में फेल रही है । यह देखना सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपनी करतूतों से डिस्ट्रिक्ट तथा रोटरी का नाम खराब करने वाली वही लीडरशिप इस वर्ष भी अपनी टुच्ची हरकतों के सहारे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है ।