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Sunday, September 16, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में टीके रूबी का 'मॉडल' अपनाने की बजाये राजा साबू वाला 'मॉडल' अपनाने के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन के कार्यक्रम के रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर फजीहत में फँसे

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल 29 सितंबर को आयोजित हो रही समिट के रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर भारी आलोचना का शिकार हो रहे हैं । सोशल मीडिया में अपने गुस्से और अपनी नाराजगी को व्यक्त करते हुए डिस्ट्रिक्ट के कई आम और खास लोगों ने इसे लूट-खसोट कहा/बताया है, और साफ-साफ आरोप लगाया है कि छोटे-छोटे आयोजनों के बड़े-बड़े रजिस्ट्रेशन चार्ज लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल खासी कमाई कर रहे हैं और अपनी जेब भर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि उक्त समिट में मुख्य वक्ता के रूप में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन आ रहे हैं । ज्यूडिशियल एकेडमी में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम के लिए प्रति व्यक्ति 700 रुपये तथा प्रति दंपति 1300 रुपये का रजिस्ट्रेशन चार्ज लिया जा रहा है । शाम 4 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर पहले लोगों को भ्रम रहा कि कार्यक्रम के बाद डिनर की व्यवस्था होगी, लेकिन जब भेद खुला कि डिनर नहीं - चाय आदि की ही व्यवस्था है, तो रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर लोगों का गुस्सा भड़क उठा । कई लोगों ने रजिस्ट्रेशन की रकम को बहुत ज्यादा बताया है । किसी किसी ने तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को ऑफर भी दिया कि उक्त कार्यक्रम वह 250 रुपये के रजिस्ट्रेशन चार्ज में करवा देंगे । डिस्ट्रिक्ट में, डिस्ट्रिक्ट के किसी कार्यक्रम के रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर इससे पहले किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को ऐसी फजीहत झेलना पड़ी हो - ऐसा डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ सदस्यों को भी याद नहीं पड़ता है ।
प्रवीन गोयल के लिए सबसे बड़ी फजीहत की बात यह हुई है कि लोगों ने पिछले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के साथ उनकी तुलना करके उन्हें नीचा और गया-बीता साबित करने की कोशिश की है । किसी ने पिछले रोटरी वर्ष में हुए एक इंटरसिटी कार्यक्रम की याद करते हुए बताया कि तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने 750 रुपये के रजिस्ट्रेशन चार्ज में लंच करवाया था, चाय पिलवाई थी और गिफ्ट भी दिए थे । लोगों का पूछना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी यदि 750 रुपये में इतना कुछ कर सकते हैं, तो प्रवीन गोयल के लिए कहाँ/क्या मुश्किल है ? इसी तुलना के आधार पर लोगों का कहना है कि टीके रूबी को तो चूँकि रोटरी से पैसे कमाने नहीं थे, इसलिए उन्होंने रोटेरियंस को अच्छी सुविधाएँ दीं, लेकिन प्रवीन गोयल ने लगता है कि रोटरी से पैसे कमाने को अपना लक्ष्य बना लिया है - इसलिए वह छोटी/मोटी सुविधाओं के बदले में मोटी-मोटी रकम बसूल रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के पूर्व सदस्य तथा रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के पूर्व प्रेसीडेंट एमपी गुप्ता ने पत्र लिख कर प्रवीन गोयल से रजिस्ट्रेशन चार्ज पर पुनर्विचार करने का अनुरोध भी किया है । अपने पत्र में एमपी गुप्ता ने प्रवीन गोयल को याद दिलाया है कि अभी दो महीने पहले ही, जुलाई में ज्यूडिशियल एकेडमी में ही उन्होंने एक सम्मान समारोह का आयोजन किया था, जिसमें 600 रूपये का रजिस्ट्रेशन था । एमपी गुप्ता के पत्र में याद दिलाए गए इस तथ्य के सामने आने के बाद लोगों को आश्चर्य हुआ कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल के सामने ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि उन्होंने दो महीने में ही उसी जगह तथा उसी तरह की सुविधाओं के लिए 100 रुपये बढ़ा दिए हैं ।
डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ रोटेरियंस को यह देख कर बहुत बुरा भी लग रहा है कि कुछ सौ रुपयों को लेकर डिस्ट्रिक्ट में सार्वजनिक रूप से इतनी थुक्का-फजीहत हो रही है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जैसे महत्त्वपूर्ण पद की छीछालेदर हो रही है । लेकिन उनका कहना है कि इस स्थिति को लाने/बनाने में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू और उनकी शह पर रहने/चलने वाले गवर्नर्स का व्यवहार ही मुख्य रूप से जिम्मेदार है । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स तरह तरह से लोगों से पैसा इकट्ठा करते रहे हैं, और फिर उसका हिसाब-किताब देने/बताने में आनाकानी करते रहे हैं और इकट्ठा हुई रकम पर कुंडली मार कर बैठे रहे हैं और मनमर्जी से उसका इस्तेमाल करते रहे हैं - इसका नतीजा है कि डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लगने लगा है कि यह लोग रोटरी और सेवा/प्रोजेक्ट्स के नाम पर पैसों की भारी हेराफेरी और चोरी-चकारी करते हैं । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स के लिए बदकिस्मती की बात यह रही कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी ने रोटेरियंस को मान/सम्मान तथा सुविधाएँ देने में इतने ऊँचे स्टैंडर्ड स्थापित किए कि लोगों को महसूस हुआ कि जैसे अभी तक तो वह ठगे जा रहे थे । हिसाब-किताब में पारदर्शिता रखने तथा लगातार उसके लिए प्रयास करने के टीके रूबी के प्रयत्नों का नतीजा यह हुआ है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स का हर काम संदेह से देखा जाने लगा है और उसका हिसाब-किताब माँगा जाने लगा है । इस बदले माहौल का खामियाजा प्रवीन गोयल को भुगतना पड़ रहा है - क्योंकि गवर्नरी के लिए उन्होंने टीके रूबी का 'मॉडल' अपनाने की बजाये राजा साबू वाला 'मॉडल' अपनाया, और अपने हर काम को संदेहास्पद बना लिया है । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी रसिन के लिए होने वाला कार्यक्रम रजिस्ट्रेशन चार्ज को लेकर जिस तरह से विवाद में घिर गया है, उससे लग रहा है कि प्रवीन गोयल के लिए राजा साबू का 'मॉडल' मुसीबत बढ़ाने वाला साबित होगा ।