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Thursday, June 4, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में राजा साबू का क्लब सीओएल प्रतिनिधि पद के लिए पारित मधुकर मल्होत्रा के नाम का प्रस्ताव डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय भेजना 'भूल' गया, और इस तरह टीके रूबी निर्विरोध सीओएल प्रतिनिधि चुन लिए गए

चंडीगढ़ । पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू ने सीओएल प्रतिनिधि पद के लिए टीके रूबी की उम्मीदवारी के लिए 'सेफ पैसेज' बना कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के साथ अपनी नजदीकियत को और मजबूती दे दी है । इनके बीच नजदीकियत की ठोस जमीन हालाँकि तभी तैयार हो गई थी, जब राजा साबू के मेडीकल मिशन के प्रोजेक्ट को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जितेंद्र ढींगरा और डीआरएफसी (डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन) के रूप में टीके रूबी ने हरी झंडी दे दी थी । इनके बीच बनती हुई नजदीकियत का एक बड़ा सुबूत यह भी है कि पूर्व गवर्नर मनप्रीत सिंह गंधोके द्वारा डिस्ट्रिक्ट एकाउंट से अनधिकृत रूप से लिए गए करीब 15 लाख रुपये वापस लेने के लिए तो जितेंद्र ढींगरा ने जमीन-आसमान एक किया हुआ है, लेकिन टीके रूबी के गवर्नर-वर्ष में डिस्ट्रिक्ट सर्विस ट्रस्ट से उत्तराखंड के स्कूल प्रोजेक्ट में अनधिकृत रूप से ट्रांसफर किए गए करीब 20 लाख रुपये के तथा रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट के करीब तीन करोड़ रुपये के राजा साबू के मामले को वह कतई भूल गए लग रहे हैं । जितेंद्र ढींगरा और टीके रूबी के इन्हीं अहसानों का बदला चुकाने के लिए राजा साबू ने अपने क्लब के पदाधिकारियों को - सीओएल प्रतिनिधि पद के लिए क्लब में पारित हो चुके पूर्व गवर्नर मधुकर मल्होत्रा के नाम के प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय भेजना - भूल जाने को कह दिया, और इस तरह उन्होंने सीओएल प्रतिनिधि के पद पर टीके रूबी के निर्विरोध चुन लिए जाने का रास्ता बना दिया ।
राजा साबू और जितेंद्र ढींगरा व टीके रूबी के पिछली बातों को भूलने और डिस्ट्रिक्ट में एक नई शुरुआत करने के 'खेल' में ताजा शिकार बने मधुकर मल्होत्रा लेकिन थोड़े दुखी हैं । लेकिन उन की समस्या यह है कि वह अपना दुखड़ा ज्यादा 'रो' भी नहीं पा रहे हैं । अपने क्लब के अपने नजदीकियों से यह कहते हुए उन्होंने अपना दुःख हल्का करने का प्रयास जरूर किया है, कि राजा साबू को अपने 'खेल' में उन्हें मोहरा नहीं बनाना चाहिए था । मधुकर मल्होत्रा के साथ, समस्या दरअसल यह हुई कि रोटरी के देशी-विदेशी बड़े नेताओं के बीच यह खबर फैल चुकी थी कि सीओएल प्रतिनिधि के लिए राजा साबू ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है, और उनके नाम का प्रस्ताव उनके क्लब में पास भी हो गया है । लेकिन उनकी उम्मीदवारी का प्रस्ताव डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय तक नहीं पहुँचा । यह बात जब सामने आई, तो लोगों ने मधुकर मल्होत्रा से पूछा कि आखिर हुआ क्या ? मधुकर मल्होत्रा की तरफ से इसका बड़ा मासूम सा जबाव सुनने को मिला कि उनके क्लब की प्रेसीडेंट सुरिंदर कौर उक्त प्रस्ताव डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय भेजना भूल गईं । सुरिंदर कौर एक गंभीर और जिम्मेदार अधिकारी के तौर पर जानी/पहचानी जाती हैं । क्लब के संयुक्त उपक्रम रोटरी एंड ब्लड बैंक सोसायटी रिसोर्स सेंटर का कामकाज देखने की जिम्मेदारी राजा साबू ने उन्हें ही सौंपी हुई है । किसी को विश्वास नहीं हो रहा है कि कोई प्रेसीडेंट - और वह भी सुरिंदर कौर जैसी जिम्मेदार प्रेसीडेंट इस तरह के मामले में भूल कर सकती हैं । और फिर चलो, मान लो कि वह सचमुच भूल गईं - तब भी सवाल यह है कि मधुकर मल्होत्रा खुद क्या कर रहे थे ? क्या उन्हें जरूरी नहीं लगा कि उनकी उम्मीदवारी को लेकर क्लब में पास हुआ प्रस्ताव डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय पहुँचे - या वह भी भूल गए ?
रोटरी क्लब चंडीगढ़ में चर्चा यही है कि राजा साबू के कहने पर ही सीओएल प्रतिनिधि पद के लिए सुरिंदर कौर ने मधुकर मल्होत्रा की उम्मीदवारी के प्रस्ताव को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय तक नहीं पहुँचाया, ताकि टीके रूबी के सीओएल प्रतिनिधि चुने जाने में कोई समस्या न खड़ी हो । कुछेक लोगों का कहना/पूछना है कि राजा साबू को जब यही करना था, तो उन्होंने मधुकर मल्होत्रा की उम्मीदवारी का प्रस्ताव पास ही क्यों होने दिया ? क्लब के लोगों की तरफ से ही सुनने को मिला है कि राजा साबू दरअसल टीके रूबी की मदद सिर्फ करना ही नहीं चाहते थे, बल्कि मदद करते हुए 'दिखना' भी चाहते थे; उन्हें आशंका थी कि वह ऐसा यदि नहीं करते तो लोगों के बीच यही मैसेज जाता कि राजा साबू की तरफ से सीओएल प्रतिनिधि पद के लिए कोई प्रयास ही नहीं हुआ । जो हुआ - या जो किया गया, उसके जरिये राजा साबू ने दिखाने/बताने की कोशिश की है कि जब जितेंद्र ढींगरा और टीके रूबी उनके हितों को पूरा करने के लिए और उनके साथ नजदीकी बनाने के लिए बातों को भूल सकते हैं, तो वह भी मधुकर मल्होत्रा की उम्मीदवारी के कागज डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय भिजवाना भूल सकते हैं । राजा साबू, जितेंद्र ढींगरा, टीके रूबी की इस भूल-भुलैय्या को देखते हुए मनप्रीत सिंह गंधोके ने राजा साबू से सिफारिश करना शुरू किया है कि उन्होंने जैसे जितेंद्र ढींगरा को डिस्ट्रिक्ट सर्विस ट्रस्ट और उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ फंड के पैसों के मामलों को भुलवा दिया है, वैसे ही उनके मामले को भी भुलवा दें । देखना दिलचस्प होगा कि भूलने के - फिलहाल सेलेक्टिव - चल रहे खेल में और क्या क्या भूला जायेगा ?  

Monday, May 25, 2020

रोटरी इंटरनेशनल के डायरेक्टर भरत पांड्या तथा पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू सहित डिस्ट्रिक्ट 3080 की लीडरशिप पूर्व गवर्नर मनप्रीत सिंह गंधोके से करीब 15 लाख रुपए की रकम बसूलने के मामले में लाचार क्यों बनी हुई है ?

चंडीगढ़ । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह गंधोके ने डिस्ट्रिक्ट एकाउंट के करीब 15 लाख रुपए दबाए रखते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा, निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल तथा पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू को जैसा नाच नचाया हुआ है, वह डिस्ट्रिक्ट ही क्या - रोटरी के इतिहास की अनोखी घटना है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने उक्त रकम वापस करने के लिए मनप्रीत सिंह गंधोके को कई बार ईमेल संदेश लिखे हैं, लेकिन मनप्रीत सिंह गंधोके ने रकम वापस करना तो दूर - उनके ईमेल संदेशों का जबाव तक नहीं दिया है । जितेंद्र ढींगरा ने 16 सितंबर 2019 को एक ईमेल के जरिये इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या को भी मामले से परिचित कराया, लेकिन तब भी मनप्रीत सिंह गंधोके ने परवाह नहीं की । अभी हाल ही में, 5 अप्रैल 2020 को जितेंद्र ढींगरा ने फिर मनप्रीत सिंह गंधोके को उक्त रकम डिस्ट्रिक्ट एकाउंट में जमा करने की चेतावनी दी, लेकिन मनप्रीत सिंह गंधोके के कानों पर जूँ रेंगती हुई लग/दिख नहीं रही है । जितेंद्र ढींगरा ने निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल से भी ईमेल मैसेज के जरिये अनुरोध किया कि चूँकि उनके गवर्नर वर्ष में मनप्रीत सिंह गंधोके को डिस्ट्रिक्ट एकाउंट से उक्त रकम दी गई है, इसलिए वह उक्त रकम वापस करवाएँ । जबाव में प्रवीन गोयल ने भी रोना रो दिया कि मनप्रीत सिंह गंधोके उनकी सुन ही नहीं रहे हैं और जबाव ही नहीं दे रहे हैं ।
हैरत की बात यह है कि मनप्रीत सिंह गंधोके ने उक्त रकम दबाए रखने के लिए डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर और पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू को भी ठेंगा दिखाया हुआ है । जितेंद्र ढींगरा का कहना/बताना रहा है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में राजा साबू ने आश्वस्त किया था कि वह मनप्रीत सिंह गंधोके से उक्त रकम वापस करवायेंगे । राजा साबू के उस आश्वासन को कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन मनप्रीत सिंह गंधोके ने उक्त रकम वापस करने के कोई संकेत तक नहीं दिए हैं । इससे डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों को संदेह हो चला है कि मनप्रीत सिंह गंधोके उक्त रकम के बबाल में जो बेशर्मी दिखा रहे हैं, उसके पीछे राजा साबू की ही शह है - अन्यथा यह कतई संभव नहीं है कि राजा साबू सचमुच चाहें, और फिर भी मनप्रीत सिंह गंधोके रकम दबाए बैठे रहें । डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लगता है कि राजा साबू दोहरा खेल खेल रहे हैं - कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में तो उन्होंने कह दिया कि वह मनप्रीत सिंह गंधोके से रकम वापस दिलवायेंगे, लेकिन मनप्रीत सिंह गंधोके को भी संकेत दे दिया कि चुपचाप बैठो, बेशर्मी ओढ़े रहो - कोई आखिर क्या कर लेगा ? दरअसल, मनप्रीत सिंह गंधोके से रकम बसूलने के मामले में अभी तक जो कुछ हुआ है, उसे एक 'ट्रेजिडी' के 'कॉमिक' बनते जा रहे किस्से के रूप में देखा जाने लगा है । इस मामले को देख रहे डिस्ट्रिक्ट के आम और खास लोगों को यह तो विश्वास हो चला है कि मनप्रीत सिंह गंधोके से रकम वापस लेने के मामले में राजा साबू और प्रवीन गोयल तो नाटक कर रहे हैं, लेकिन उन्हें हैरानी इस बात की है कि जितेंद्र ढींगरा क्यों कोई कठोर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, और क्यों सिर्फ चेतावनी दे कर पीछे हट जा रहे हैं ?  
मामला पिछले रोटरी वर्ष का है । एक ट्रेवल एजेंसी के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट द्वारा उपभोक्ता अदालत में किए गए केस में फैसला डिस्ट्रिक्ट के पक्ष में हुआ, जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट एकाउंट में 14 लाख 95 हजार 978 रुपए आए । उक्त केस मनप्रीत सिंह गंधोके के गवर्नर वर्ष में हुआ था । मनप्रीत सिंह गंधोके ने तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल को बताया कि जिस रकम पर ट्रेवल एजेंसी के साथ विवाद था, वह रकम उन्होंने अपने निजी एकाउंट से दी थी, इसलिए उक्त रकम पर उनका अधिकार है और वह उन्हें मिलनी चाहिए । प्रवीन गोयल इतने 'भोले' हैं कि मनप्रीत सिंह गंधोके ने उनसे कहा और उन्होंने बिना सच्चाई को जाने/समझे फटाक से उक्त रकम का चेक मनप्रीत सिंह गंधोके को दे दिया, जिसके बाद उक्त रकम डिस्ट्रिक्ट एकाउंट से मनप्रीत सिंह गंधोके के एकाउंट में चली गई । यह काम इतने आनन-फानन में हुआ कि प्रवीन गोयल की भूमिका भी संदेह और आरोपों की शिकार बनी । बाद में जैसे ही इस बात का पता चला, तब बबाल मचा । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में पूर्व गवर्नर टीके रूबी ने दावा किया कि इस रकम पर मनप्रीत सिंह गंधोके का दावा सरासर झूठ और धोखा है, तथा वास्तव में यह रकम रोटेरियंस की है, जिन्होंने बैंकॉक में होने वाली इंटरनेशनल कन्वेंशन में शामिल होने के लिए इसे जमा करवाया था । टीके रूबी ने चुनौती दी कि मनप्रीत सिंह गंधोके साबित करें कि यह रकम उन्होंने अपने किसी निजी एकाउंट से दी है । भेद खुला तो प्रवीन गोयल ने मासूमियत की चादर ओढ़ ली कि उन्हें तो बात का पता ही नहीं था, और मनप्रीत सिंह गंधोके ने उनसे जो कहा, उसे उन्होंने सच मान लिया । टीके रूबी द्वारा सच्चाई बताने तथा चुनौती देने के बाद से मनप्रीत सिंह गंधोके ने चुप्पी साध ली है, और वह उक्त रकम वापस करने संबंधी ईमेल संदेशों का जबाव भी नहीं दे रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा इस मामले में इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या से मदद माँग चुके हैं - लेकिन मनप्रीत सिंह गंधोके की बेशर्मी के सामने भरत पांड्या, राजा साबू सहित डिस्ट्रिक्ट 3080 की लीडरशिप की लाचारी ही सामने आ रही है । 

Sunday, December 1, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में होने वाले शेखर मेहता के सम्मान समारोह में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा को पटा-पटू कर राजा साबू ने अपना काम तो बना लिया, लेकिन पूर्व गवर्नर कवल बेदी को फजीहत से बचाने के लिए कोई कोशिश नहीं की

चंडीगढ़ । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कवल बेदी डिस्ट्रिक्ट में होने वाले इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के सम्मान-समारोह की तैयारी कमेटी के चेयरपरसन पद से हटाये जाने के कारण निराश और नाराज हैं । मजे की बात यह है कि अपनी निराशा व नाराजगी पर वह तो ज्यादा कुछ नहीं बोल रही हैं, लेकिन उनके साथ हमदर्दी रखने वाले लोग उन्हें चेयरपरसन के पद से हटाये जाने के लिए राजा साबू को कोस रहे हैं । उनका कहना है कि राजा साबू ने अपने स्वार्थ में डिस्ट्रिक्ट के सत्ता खेमे के नेताओं के साथ सौदा/समझौता कर लिया है, और अपने साथी गवर्नर्स के मान/अपमान व हितों की परवाह करना छोड़ दिया है । उल्लेखनीय है कि इससे पहले, पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह की तरफ से भी उस समय राजा साबू के लिए इसी तरह के विचार सुनने को मिले थे, जब कॉलिज ऑफ गवनर्स की मीटिंग में मनप्रीत सिंह को उक्त रकम वापस करने का फैसला सुनाया गया था - जो पिछले रोटरी वर्ष में तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल के साथ मिलकर धोखाधड़ी से डिस्ट्रिक्ट एकाउंट से उन्होंने निकाल ली थी । मनप्रीत सिंह तथा अन्य लोगों का मानना और कहना था कि राजा साबू की सहमति नहीं होती तो कॉलिज और गवर्नर्स की मीटिंग में मनप्रीत सिंह को झटका देने वाला फैसला न हो पाता । इस मामले में राजा साबू के रंग बदलने का 'सुबूत' यह भी है कि पिछले वर्ष मनप्रीत सिंह को डिस्ट्रिक्ट एकाउंट से मोटी रकम दिए जाने वाले फैसले में भी राजा साबू की 'सहमति' थी, और अब उक्त रकम मनप्रीत सिंह से वापस माँगने वाले फैसले में भी राजा साबू की रजामंदी है । राजा साबू के नजदीकी रहे लोगों का ही मानना और कहना है कि अपने निजी स्वार्थ पूरे करने के चक्कर में राजा साबू सत्ता खेमे के पदाधिकारियों और नेताओं के सामने समर्पण कर रहे हैं और वर्षों से अपने साथी/सहयोगी रहे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को छोड़ते जा रहे हैं ।
राजा साबू के रंग बदलने के चलते कवल बेदी की होने वाली फजीहत का मामला खासा दिलचस्प है । उल्लेखनीय है कि राजा साबू ने अपनी पहल से शेखर मेहता से बात करके उनके सम्मान समारोह के लिए 2 नवंबर की तारिख तय की थी और चंडीगढ़ में होने वाले उस समारोह की जिम्मेदारी कवल बेदी को सौंप दी थी । उन्होंने कवल बेदी को समारोह की तैयारी कमेटी का चेयरपरसन बना दिया था । राजा साबू ने जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा को विश्वास में लिए बिना, मनमाने तरीके से शेखर मेहता के सम्मान समारोह का कार्यक्रम तय कर लिया, उसका जितेंद्र ढींगरा और उनके साथियों ने बुरा माना और साफ घोषणा कर दी कि उक्त समारोह राजा साबू ही कर लें, उनका उक्त समारोह से कोई मतलब नहीं है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अजय मदान, जो शेखर मेहता के प्रेसीडेंट वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होंगे, ने उक्त समारोह में शामिल होने में अपनी असमर्थता जता दी । सत्ता खेमे के पदाधिकारियों और नेताओं की इस प्रतिक्रिया ने राजा साबू को असमंजस में डाल दिया । सहयोगियों/साथियों ने हालाँकि राजा साबू को समझाया कि उन्हें किसी की परवाह नहीं करना चाहिए और 2 नवंबर को समारोह करना चाहिए । राजा साबू को लेकिन सत्ता खेमे के पदाधिकारियों से 'लाभ' लेने हैं, इसलिए वह उनके साथ कोई पंगा नहीं लेना चाहते हैं - और इसी कारण से सत्ता खेमे के पदाधिकारियों व नेताओं के सामने समर्पण करते हुए राजा साबू ने 2 नवंबर का कार्यक्रम रद्द कर दिया और सत्ता खेमे के नेताओं से कह दिया कि वह जब चाहें, तब शेखर मेहता का सम्मान समारोह कर लें । सत्ता खेमे के नेताओं ने 20 दिसंबर को शेखर मेहता का सम्मान समारोह करने का फैसला किया, और समारोह के लिए चंडीगढ़ की बजाये कुरुक्षेत्र को चुना ।
कवल बेदी को लेकिन जोर का झटका यह देख कर लगा कि 2 नवंबर के समारोह में तो वह तैयारी कमेटी की चेयरपरसन थीं, जबकि 20 दिसंबर के कार्यक्रम में उनका कहीं कोई नाम ही नहीं है । इस बात पर उन्हें जोर का झटका दरअसल यह जान कर लगा कि राजा साबू ने अपने घर पर शेखर मेहता को चायपान करवाने के लिए तो जितेंद्र ढींगरा को राजी कर लिया, लेकिन कवल बेदी के चेयरपरसन मामले में जितेंद्र ढींगरा से बात तक नहीं की । उल्लेखनीय है कि राजा साबू को बड़े पदाधिकारियों को अपने घर बुलाने का बड़ा शौक है । अभी तक तो उनका यह शौक बड़ी सहजता से पूरा होता रहा है, किंतु डिस्ट्रिक्ट में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद उनके लिए अपने इस शौक को पूरा करने के लिए सत्ताधारियों का सहयोग लेना जरूरी हुआ है । इसीलिए कुरुक्षेत्र में शेखर मेहता के सम्मान समारोह होने की जानकारी मिलने पर राजा साबू को पहली चिंता यही हुई कि अब शेखर मेहता उनके घर चायपान के लिए कैसे आ पायेंगे ? डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा को इसके लिए राजी करके राजा साबू ने अपना काम तो बना लिया, लेकिन कवल बेदी के मामले में उन्होंने कोई दिलचस्पी नहीं ली । कुछ ही दिन पहले मनप्रीत सिंह के मामले में तथा अब कवल बेदी के मामले में राजा साबू के रवैये को देख/जान कर हर किसी ने समझ लिया है कि राजा साबू ने अपने स्वार्थ में और अपने काम निकालने के लिए सत्ता खेमे के पदाधिकारियों तथा नेताओं के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है और अपने सहयोगी/साथी रहे गवर्नर्स को अकेला छोड़ दिया है ।

Thursday, June 20, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में रोटेरियंस के करीब 14 लाख रुपयों पर हाथ साफ करने के मामले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल तथा पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह गंधोके को बचाने के लिए, इस्तीफा दे चुकने के बावजूद पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हेमंत अरोड़ा डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में बने हुए हैं

चंडीगढ़ । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हेमंत अरोड़ा ने इस्तीफा देने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में बने रहने का फैसला किया है, क्योंकि उन पर मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल तथा पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह गंधोके को करीब 14 लाख रुपयों की 'लूट' के आरोप से 'बचाने' की जिम्मेदारी आ पड़ी है । मनप्रीत सिंह गंधोके पर मुआवजे के रूप में डिस्ट्रिक्ट को मिले करीब 14 लाख रुपए कब्जाने का आरोप है, जिसमें उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल की मदद मिली । लोगों के बीच आरोप तो यह भी सुना जा रहा है कि मनप्रीत सिंह गंधोके ने गिरोह के बाकी लोगों को भी उक्त रकम में से हिस्सा दिया है, और इसीलिए राजा साबू से लेकर गिरोह के बाकी सभी पूर्व गवर्नर्स सदस्य मामले पर पर्दा डालने तथा मनप्रीत सिंह गंधोके को बचाने के प्रयासों में लगे हैं । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की पिछले दिनों हुई मीटिंग में जब यह मामला उठा, तो पूर्व गवर्नर मधुकर मल्होत्रा ने मनप्रीत सिंह गंधोके का बचाव करने का जोरदार तरीके से प्रयास किया । राजा साबू गिरोह को इस मामले को डिस्ट्रिक्ट एकाउंट में एडजस्ट करने की जरूरत पड़ेगी, और इसके लिए उन्हें हेमंत अरोड़ा की मदद चाहिए होगी - इसलिए इस्तीफा देने के बावजूद हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में बनाए रखा गया है । चार्टर्ड एकाउंटेंट होने के नाते एकाउंट्स को एडजस्ट करने में हेमंत अरोड़ा की एक्सपर्टीज है, और इसी एक्सपर्टीज का इस्तेमाल करते हुए वह दिलीप पटनायक के गवर्नर-वर्ष की फायदे वाली बैलेंसशीट को घाटे वाली बैलेंस शीट में बदलने का करतब दिखा चुके हैं । दरअसल उसी बेईमानीपूर्ण करतब के कारण हेमंत अरोड़ा को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का सदस्य बनाये जाने पर आपत्ति करते हुए डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रस्ताव रखा गया था, जिसके चलते होने वाली फजीहत से बचने के लिए हेमंत अरोड़ा ने डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से इस्तीफा देने में अपनी भलाई देखी/समझी थी ।
उल्लेखनीय है कि राजा साबू और उनके 'गिरोह' के गवर्नर्स डिस्ट्रिक्ट के तमाम प्रोजेक्ट्स व ट्रस्ट के हिसाब-किताब से जुड़ी बातें डिस्ट्रिक्ट के लोगों से - यहाँ तक कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स तक से - छिपा कर रखते हैं, जिसे लेकर निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को रोटरी इंटरनेशनल तक में शिकायत करने के लिए मजबूर होना पड़ा था; और जिसके चलते राजा साबू और उनसे जुड़े पूर्व गवर्नर्स की भूमिका को संदेह से देखा जाता है ।  मनप्रीत सिंह गंधोके के मामले में भी तथ्यों पर पर्दा डालने का प्रयास हो रहा है । 'रचनात्मक संकल्प' को जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार मामला मनप्रीत सिंह गंधोके के गवर्नर वर्ष का है । अपने गवर्नर वर्ष में उन्होंने बैंकॉक में कॉन्फ्रेंस करने की योजना बनाई थी, और जिसके रजिस्ट्रेशन के रूप में वह रोटेरियंस से पैसे ले चुके थे । राजा साबू ने लेकिन उनकी योजना में पंक्चर कर दिया था । उसी वर्ष चूँकि इंटरनेशनल कन्वेंशन बैंकॉक में हो रही थी, तो मनप्रीत सिंह गंधोके ने एक तरफ तो टूर ऑपरेटर कंपनी से बैंकॉक जाने के कार्यक्रम के समय में परिवर्तन करा लिया और दूसरी तरफ रोटेरियंस को इंटरनेशनल कन्वेंशन में जाने के लिए राजी कर लिया । यह सब हो तो गया, लेकिन इस चक्कर में हिसाब-किताब काफी गड़बड़ा गया और लोगों को पैसों का काफी नुकसान हुआ । मनप्रीत सिंह गंधोके ने हिसाब-किताब की गड़बड़ी के लिए टूर ऑपरेटर कंपनी को जिम्मेदार ठहराया और उपभोक्ता अदालत में उसके खिलाफ शिकायत कर दी । उपभोक्ता अदालत ने टूर ऑपरेटर कंपनी को दोषी ठहराते हुए करीब 14 लाख रुपए डिस्ट्रिक्ट 3080 को वापस करने का आदेश दिया । उक्त करीब 14 लाख रुपए डिस्ट्रिक्ट 3080 को मिले । यह रकम वास्तव में उन 80 रोटेरियंस की है, जिन्होंने मनप्रीत सिंह गंधोके की योजना में 'बदलाव' होने के कारण पैसों का नुकसान उठाया था । कायदे से और व्यवहारिक रूप से यह पैसा डिस्ट्रिक्ट के उन 80 रोटेरियंस को वापस किया जाना चाहिए था; लेकिन मनप्रीत सिंह गंधोके ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल के साथ मिलकर इस रकम को खुद ही हड़प लिया । 
जिन लोगों को डिस्ट्रिक्ट एकाउंट के जरिये हुए इस घपले की जानकारी मिली, उन्हें प्रवीन गोयल के रवैये पर खासी हैरानी हुई । उनके लिए यह समझना मुश्किल हुआ कि जो पैसा डिस्ट्रिक्ट के पास आया, और जिसे 80 रोटेरियंस को वापस होना था - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में प्रवीन गोयल ने उसे मनप्रीत सिंह गंधोके को क्यों दे दिया ? दरअसल इसी बात से लोगों को शक हुआ है कि प्रवीन गोयल को भी उक्त रकम में से कुछ हिस्सा मिला है, और इसीलिए 80 रोटेरियंस को वापस किया जाने वाला पैसा उन्होंने डिस्ट्रिक्ट एकाउंट से मनप्रीत गंधोके को दे दिया । उल्लेखनीय है कि मनप्रीत सिंह गंधोके पर अपने क्लब के एक प्रोजेक्ट के तहत बने रोटरी वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण कार्य में घपले का आरोप रहा है, जिसके चलते उन्हें क्लब से निलंबित करने का फैसला तक हो गया था, जिसे उन्होंने मन-मनौव्वल करके अप्रभावी करवा लिया था । मनप्रीत सिंह गंधोके खासे खुशकिस्मत हैं कि क्लब के सदस्यों से लेकर डिस्ट्रिक्ट के लोगों तक के पैसों पर हाथ साफ करने के बावजूद राजा साबू से लेकर उनके गिरोह के दूसरे पूर्व गवर्नर्स उन्हें बचाने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं । इसी तत्परता के चलते हेमंत अरोड़ा इस्तीफा देने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में बने रहने के लिए राजी हो गए हैं । उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में हेमंत अरोड़ा की कारगुजारियों पर चर्चा के लिए रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल ने जो प्रस्ताव दर्ज करवाया था, उसे निष्प्रभावी करने के लिए डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में बिजनेस सेशन शुरू होने से ठीक पहले डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी से हेमंत अरोड़ा का इस्तीफा ले लिया गया था । राजा साबू और उनके गिरोह के अन्य गवर्नर्स को दरअसल डर हुआ था कि बिजनेस सेशन में मामला आयेगा, तो पता नहीं क्या क्या सुनने को मिलेगा और क्या क्या पोल खुलेगी - इसलिए उन्होंने हेमंत अरोड़ा से छुटकारा पा लेने में ही भलाई देखी/पहचानी थी । लेकिन अब पता चला है कि हेमंत अरोड़ा का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है । इससे लोगों को समझ में आ रहा है कि उस समय दिया गया हेमंत अरोड़ा का इस्तीफा वास्तव में उनकी चालबाजी थी, ताकि रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के प्रस्ताव पर डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में चर्चा न हो सके ।  उस समय हेमंत अरोड़ा ने भी बड़ा नाटक दिखाया था कि वह तो डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में एक दिन भी नहीं रहना चाहते हैं; लेकिन अब वह अपने इस्तीफे को स्वीकार करवाने के लिए कोई जोर नहीं दे रहे हैं । समझा जाता है कि मनप्रीत सिंह गंधोके के मामले को एडजस्ट करने/करवाने के लिए राजा साबू गिरोह को हेमंत अरोड़ा की एक्सपर्टीज की जरूरत पड़ेगी, और इसीलिए इस्तीफा दे चुकने के बावजूद वह डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में बने हुए हैं ।

Tuesday, March 6, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में पैसों की घपलेबाजी के आरोप में पूर्व गवर्नर मनप्रीत सिंह के क्लब से निलंबित होने के बाद, राजा साबू के निर्देश पर पूनम सिंह ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी से नाम वापस लिया

चंडीगढ़ । राजेंद्र उर्फ राजा साबू के नजदीकी पूर्व गवर्नर मनप्रीत सिंह को क्लब के एक प्रोजेक्ट में करीब चार लाख रुपए की घपलेबाजी करने के आरोप में क्लब की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है - जिसके बाद उनकी पत्नी पूनम सिंह को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है । उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से राजा साबू और उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स पर रोटरी के नाम पर पैसों की लूट-खसोट के गंभीर आरोप लगते आ रहे हैं, जिनके चलते उनके द्वारा पैसों की लूट-खसोट करने के तौर-तरीकों का भंडाफोड़ तो हुआ ही है - काफी कुछ पैसा लुटने से बचा भी है । यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि राजा साबू और उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स अपनी देखरेख में चलने वाले प्रोजेक्ट्स का कभी हिसाब-किताब ही नहीं देते/बताते थे; आरोपों के चलते वह हिसाब-किताब देने/दिखाने के लिए मजबूर हुए तो उनके द्वारा की जाने वाली चोरी/चकारी का भंडाफोड़ हुआ । पोल खुली तो राजा साबू और उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स को अपने कुछेक 'प्रोजेक्ट्स' स्थगित भी करने पड़े - क्योंकि पोल खुलने के बाद उन प्रोजेक्ट्स में चोरी/चकारी कर पाना मुश्किल हो गया था, इसलिए उन्हें स्थगित कर देने में ही भलाई समझी गई । इतने सब के बावजूद, राजा साबू और उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स अपनी अपनी बेईमानियों को लेकर लगने वाले आरोपों को विरोधियों की उन्हें बदनाम करने वाली कार्रवाई के रूप में बताते हुए अपने आप को बचाने की कोशिश कर रहे थे । इस लिहाज से, मनप्रीत सिंह को क्लब से निलंबित किए जाने की घटना ने राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को दबाव में ला दिया है । डिस्ट्रिक्ट में सुना जा रहा है कि जैसा साहस मनप्रीत सिंह के क्लब - रोटरी क्लब मोहाली के पदाधिकारियों ने दिखाया है, वैसा ही साहस यदि अन्य पूर्व गवर्नर्स के क्लब्स के पदाधिकारियों ने भी दिखाया तो राजा साबू सहित अन्य कई पूर्व गवर्नर्स भी अपने अपने क्लब्स से निलंबित होंगे ।
मनप्रीत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने क्लब के एक प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए रोटरी वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण कार्य के खर्चों के अनाप-शनाप बिल दिए/लगाए और बसूले और फर्जी तरीके से उन्हें सत्यापित कराया । उनकी हरकत की जब पोल खुली, और उनसे उन्हीं के द्वारा दिए गए बिलों व दस्तावेजों को फिर से सत्यापित करवाने की कार्रवाई शुरू की गई - तो उन्होंने बचने/छिपने की कोशिश की और अलग अलग मौकों पर की गई कार्रवाइयों में कोई सहयोग नहीं किया । क्लब के कुछेक वरिष्ठ सदस्यों ने मामले को सम्मानजनक तरीके से निपटाने के लिए मनप्रीत सिंह को समझाने तथा जाँच में सहयोग करने के लिए मनाने का प्रयास भी किया, किंतु मनप्रीत सिंह किसी भी सवाल का जबाव देने को तैयार ही नहीं हुए । क्लब के वरिष्ठ सदस्य, एक अन्य पूर्व गवर्नर जेपीएस सिबिआ ने भी मनप्रीत सिंह को 'बचाने' का भरसक प्रयास किया, किंतु मनप्रीत सिंह की बेईमानियों के तथ्य इतने पुख्ता हैं कि उनके लिए भी मनप्रीत सिंह का बचाव कर पाना संभव नहीं हुआ । मनप्रीत सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले अपना बचाव करने तथा अपना पक्ष रखने के उन्हें कई मौके दिए गए, लेकिन हर मौके पर अपना पक्ष रखने की बजाए उन्होंने तिकड़मों से बचने का प्रयास किया - इससे उनका मामला लगातार बिगड़ता ही गया । क्लब से निलंबित किए जाने की सूचना देते हुए क्लब के प्रेसीडेंट हरविंदर सिंह ने उन्हें जो चिट्ठी लिखी है, उसमें उन्होंने विस्तार से इस बात का जिक्र किया है कि मनप्रीत सिंह को अपना बचाव करने के लिए कितने कितने मौके दिए गए, लेकि हर बार मनप्रीत सिंह ने चालाकी ही दिखाने की कोशिश की । पर उनकी चालाकी भी उन्हें बचा नहीं सकी ।
मनप्रीत सिंह के क्लब से निलंबित हो जाने का तत्काल सबसे बुरा प्रभाव उनकी पत्नी पूनम सिंह पर पड़ा, जिन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा । पूनम सिंह को राजा साबू खेमे के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था और चर्चा थी कि इस बार के चुनाव में राजा साबू खेमा अपने उम्मीदवार के रूप में पूनम सिंह को चुनाव जितवाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है - क्योंकि इस बार का चुनाव उसके लिए राजनीतिक रूप से जीने/मरने का मामला है । लेकिन मनप्रीत सिंह के क्लब से निलंबित हो जाने के बाद बनी परिस्थिति में राजा साबू खेमे के लिए पूनम सिंह की उम्मीदवारी पर बने/टिके रह पाना मुश्किल हुआ; आनन/फानन में राजा साबू से विचार/विमर्श हुआ और राजा साबू का भी मानना/कहना रहा कि वह लोग पहले से ही मुसीबत में घिरे/फँसे हुए हैं और मनप्रीत सिंह के निलंबन ने उनकी मुसीबतों को और बढ़ाने का ही काम किया है, जिसके बाद पूनम सिंह की उम्मीदवारी को लेकर आगे बढ़ पाना मुश्किल ही होगा और भलाई इसी में है कि पूनम सिंह की उम्मीदवारी को वापस ले लिया जाए । राजा साबू से मिले निर्देश के बाद फिर पूनम सिंह ने अपनी उम्मीदवारी को वापस ले लिया । इस तरह, मनप्रीत सिंह का क्लब की सदस्यता से निलंबन राजा साबू खेमे के लिए एक बड़ा और बहुआयामी झटका साबित हुआ है ।

Monday, July 10, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में रमेश बजाज की उम्मीदवारी के जरिए टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा की जोड़ी ने राजा साबू खेमे को घेरने की तैयारी की

पानीपत । डिस्ट्रिक्ट के हाल ही में हुए कार्यक्रमों में रमेश बजाज को जिस तरह आगे-आगे रखा गया है, उससे लग रहा है कि जितेंद्र ढींगरा और टीके रूबी की जोड़ी ने मौजूदा रोटरी वर्ष में होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में रमेश बजाज को कामयाब बनाने के लिए अभी से कमर कस ली है । उल्लेखनीय है कि भिन्न परिस्थिति में पिछले दिनों वर्ष 2018-19 के गवर्नर पद के लिए हो रहे चुनाव में भी रमेश बजाज उम्मीदवार थे, और दूसरे उम्मीदवारों के मुकाबले उनकी स्थिति को जीत के काफी नजदीक माना/देखा जा रहा था । रमेश बजाज के नजदीकियों का तो बल्कि कहना है कि उनकी इस स्थिति से ही घबरा कर राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने डीसी बंसल से कोर्ट केस करवाने तथा प्रवीन चंद्र गोयल से वापस वर्ष 2018-19 के गवर्नर पद पर लौटने का आवेदन करवाने का काम किया । इससे वर्ष 2018-19 के गवर्नर के लिए हो रहा चुनाव रद्द हो गया । रमेश बजाज की संभावित जीत को टाल/टलवा कर राजा साबू और उनके गिरोह के गवर्नर्स जश्न अभी मना ही रहे थे, कि रोटरी इंटरनेशनल ने टीके रूबी को अगले रोटरी वर्ष का गवर्नर नियुक्त करने का बम उनके सिर पर फोड़ दिया । बदली परिस्थिति में इस वर्ष अब वर्ष 2020-21 के गवर्नर का चुनाव होगा । इस वर्ष के अभी तक हुए डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों में रमेश बजाज को जिस तरह से आगे आगे रखा गया है, उससे संकेत मिल रहा है कि टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा ने इस वर्ष रमेश बजाज को उम्मीदवार बनाने और उन्हें कामयाबी दिलवाने की तैयारी कर ली है ।
राजा साबू और उनके गिरोह के गवर्नर्स अभी टीके रूबी के गवर्नर बनने पर लगी चोट को सहलाने में ही लगे हुए हैं, और उनके लिए अभी यही समझना मुश्किल हो रहा है कि टीके रूबी के गवर्नर-काल में वह करें - तो आखिर क्या करें ? टीके रूबी के गवर्नर-काल के शुरू के कार्यक्रमों में तो वह शामिल ही नहीं हुए, फिर उन्होंने शामिल होना शुरू किया तो 'चोरों की तरह' शामिल हुए - आए और झलक दिखा कर चले गए । वह यह भी समझ रहे हैं कि वह यदि डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए तो लोगों के बीच उनके प्रति और ज्यादा नकारात्मकता बनेगी तथा लोगों के साथ उनकी दूरी और बढ़ेगी । यह स्थिति डिस्ट्रिक्ट में और डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में 'वापसी' करने की उनकी कोशिशों को नुकसान पहुँचाने का ही काम करेगी - ऐसे में, डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच अपने लिए सम्मान और समर्थन पाने/बढ़ाने के लिए उन्हें डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों में शामिल होना ही पड़ेगा । जाहिर है कि उनके लिए कुछ भी करना आसान नहीं है ।
टीके रूबी के गवर्नर बनने से विरोधी खेमे के लोगों का कॉन्फीडेंस भी बढ़ा है, और कॉन्फीडेंस बढ़ता है तो मैच्योरिटी भी 'दिखने' लगती है । जब तक टीके रूबी गवर्नर घोषित नहीं हुए थे, और विरोधी खेमे की तरफ से अकेले जितेंद्र ढींगरा 'सत्ता' के हिस्सा थे - तब तक विरोधी खेमा कमजोर नजर आ रहा था, और जितेंद्र ढींगरा भी डरे डरे से और सावधानी से 'चलते' हुए दिख रहे थे; लेकिन टीके रूबी के गवर्नर बनने के बाद सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, और विरोधी खेमे की सत्ता पर पूरी पकड़ न सिर्फ बन गयी है - बल्कि वह ज्यादा कॉन्फीडेंस के साथ और मैच्योरिटी के साथ व्यवहार करने लगा है । रमेश बजाज की उम्मीदवारी को प्रमोट करने में जो तत्परता दिखाई गयी है, उसमें उनका कॉन्फीडेंस देखा जा सकता है; तथा टीके रूबी के गवर्नर-काल में जिस तरह से सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास किया जा रहा है, उसमें उनकी मैच्योरिटी की झलक है । उल्लेखनीय है कि टीके रूबी के गवर्नर-काल में उन लोगों को तो तवज्जो दी ही जा रही है, जो पिछले दो वर्षों के संघर्ष में उनके साथ खड़े रहे थे - साथ ही साथ उन लोगों को भी उचित जगह और सम्मान दिया जा रहा है, जो थे तो तत्कालीन सत्ता के साथ, लेकिन जो रोटरी और डिस्ट्रिक्ट के लिए सचमुच काम करना चाहते हैं । इससे टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा के नेतृत्व वाले खेमे का जनाधार और बढ़ता नजर आ रहा है । ऐसे में, रमेश बजाज की उम्मीदवारी को प्रमोट करने की उनकी कोशिश चुनावी समीकरणों को एकतरफा करती/बनाती दिख रही है ।
इस स्थिति ने कपिल गुप्ता और पूनम सिंह का मनोबल बुरी तरह तोड़ा हुआ है । उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018-19 के लिए हो रहे चुनाव में इन दोनों की उम्मीदवारी को भी कुछ कुछ गंभीरता से लिया जा रहा था । कपिल गुप्ता ने कुछ समय के लिए उम्मीदवार के रूप में अपनी अच्छी सक्रियता दिखाई थी, और पूनम सिंह को सक्रियता के साथ साथ अपने पति पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह के कारण भी थोड़ा गंभीरता से लिया/देखा जा रहा था । लेकिन यह तब की बात थी, जब टीके रूबी गवर्नर घोषित नहीं हुए थे और जितेंद्र ढींगरा भी रमेश बजाज की उम्मीदवारी का खुल कर समर्थन करने से बचते नजर आ रहे थे । टीके रूबी द्वारा गवर्नर का पद संभाल लेने के बाद जो स्थितियाँ बनी हैं, उसमें कपिल गुप्ता और पूनम सिंह के लिए मौका काफी घट गया है; और शायद इसीलिए उनकी तरफ से अपनी अपनी उम्मीदवारी को लेकर कोई हलचल नहीं है । राजा साबू खेमे की तरफ से अभी तक किसी और उम्मीदवार का नाम भी नहीं सुना गया है । इस वर्ष होने वाला डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का चुनाव राजा साबू खेमे के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण होगा । यह बात वह भी जानते/समझते हैं कि इस वर्ष उनका कोई उम्मीदवार यदि रमेश बजाज से मुकाबला करता हुआ नहीं दिखा - जीत/हार की बात अलग है - तो डिस्ट्रिक्ट में उनके लिए हालात फिर बहुत ही बुरे होंगे । लगता है कि उनके लिए हालात को सचमुच बुरा बनाने के लिए ही टीके रूबी और जितेंद्र ढींगरा के नेतृत्व वाले खेमे ने रमेश बजाज को आगे करके इस वर्ष के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है ।

Wednesday, April 5, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 - यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह की पत्नी पूनम सिंह की अचानक से प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने दूसरे उम्मीदवारों के चुनावी समीकरणों को गड़बड़ाने का काम तो कर ही दिया है

चंडीगढ़ । वर्ष 2018-19 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अचानक से प्रस्तुत हुई पूनम सिंह की उम्मीदवारी ने एक विवाद को जन्म देने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के समीकरणों को नए सिरे से संयोजित होने की स्थितियाँ भी बनाई हैं । विवाद का कारण यह  आरोप बना है कि पूनम सिंह की उम्मीदवारी के जरिए राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू के नजदीकियों ने एक बार फिर रोटरी के नियमों तथा उसके आदर्शों के साथ खिलवाड़ शुरू कर दिया है । पूनम सिंह पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह की पत्नी हैं, और मौजूदा रोटरी वर्ष में असिस्टेंट गवर्नर के पद पर हैं । डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज के अनुसार, असिस्टेंट गवर्नर के पद पर होने के कारण वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार नहीं हो सकती हैं । आरोप के अनुसार, पूनम सिंह यदि एक सामान्य रोटेरियन होतीं, तो उन्हें डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज पढ़ा दिया जाता और उन्हें उम्मीदवार नहीं बनने दिया जाता - पूनम सिंह लेकिन एक सामान्य रोटेरियन नहीं हैं; वह पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनप्रीत सिंह की पत्नी हैं, उन मनप्रीत सिंह की - जो राजा साबू के बड़े खास लोगों में हैं : इसलिए डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज को अनदेखा करते हुए पूनम सिंह की उम्मीदवारी को स्वीकृति दे दी गई है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा का कहना लेकिन यह है कि वर्ष 2018-19 के गवर्नर के लिए होने वाला चुनाव रोटरी इंटरनेशनल की एक विशेष घोषणा के तहत हो रहा है, जो डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज की बंदिश से अलग है; तथा व्यावहारिक कारणों से भी जिसे डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज के अनुसार नहीं करवाया जा सकता है । रमन अनेजा का कहना है कि उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल से भी पूछ लिया है कि पूनम सिंह का स्टेटस ऐसा ऐसा है, वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार हो सकती हैं या नहीं ? रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार, पूनम सिंह उम्मीदवार होने की पात्रता रखती हैं - इसलिए वहाँ से स्पष्ट जबाव आ गया कि हाँ, वह उम्मीदवार हो सकती हैं । रमन अनेजा का कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल से हरी झंडी मिलने के बाद ही वर्ष 2018-19 के लिए पूनम सिंह की उम्मीदवारी को मान्य किया गया है ।
पूनम सिंह की उम्मीदवारी पर सवाल उठाने वाले लोगों का कहना लेकिन यह है कि बात सिर्फ नियम-कानूनों की नहीं है, डिस्ट्रिक्ट में - राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में अपनाए गए ऊँचे आदर्शों का पालन करने की भी है । उनका तर्क है कि डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज बनाए ही इसलिए गए हैं, ताकि रोटरी में डिस्ट्रिक्ट की एक विशेष पहचान बनाई जा सके । यह ठीक है कि वर्ष 2018-19 के गवर्नर के लिए होने वाला चुनाव एक विशेष चुनाव है, जिसमें व्यावहारिक रूप में डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा सकता है - लेकिन इसका मतलब यह कहाँ है कि डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज की जो मुख्य बातें हैं - जो डिस्ट्रिक्ट की विशेष पहचान बनाने के लिए तय की गईं थीं, उनका भी पालन न किया जाए । डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों का मानना और कहना है कि कम से कम डिस्ट्रिक्ट के बड़े नेताओं व पदाधिकारियों से तो यह उम्मीद की ही जाती है कि डिस्ट्रिक्ट बाइलॉज के जरिए जिन चीजों/बातों को रोकने की कोशिश की गई है, वह 'चोर-दरवाजों' से उन्हें करने का प्रयास न करें । इस तरह की बातों और आलोचनाओं से बेपरवाह बने पूनम सिंह की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं का कहना है कि चुनावी राजनीति में इस तरह की बातें होती ही हैं और तरह तरह के आरोप लगते ही हैं; पूनम सिंह की उम्मीदवारी रोटरी के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करती है, और रोटरी इंटरनेशनल के संबद्ध पदाधिकारियों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही पूनम सिंह की उम्मीदवारी को प्रस्तुत किया गया है - इसके बाद भी कुछेक लोग उनकी उम्मीदवारी पर विवाद खड़ा कर रहे हैं, तो यह दूसरे उम्मीदवारों के नजदीकी लोग हैं जो दरअसल पूनम सिंह की उम्मीदवारी प्रस्तुत होने के कारण अपने अपने उम्मीदवारों की स्थिति पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर से घबराए हुए हैं ।
पूनम सिंह की अचानक से प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने वर्ष 2018-19 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत किए बैठे दूसरे उम्मीदवारों के चुनावी समीकरणों को गड़बड़ाने का काम तो वास्तव में किया ही है । पूनम सिंह की उम्मीदवारी ने एक तरफ सत्ता खेमे का एकजुट समर्थन मिलने की उम्मीद कर रहे डॉक्टर सुधीर चौधरी, प्रदीप अग्रवाल, कपिल गुप्ता की संभावनाओं और उम्मीदों को चोट पहुँचाई है; तो दूसरी तरफ सत्ता खेमे में बिखराव के भरोसे अपनी नैय्या पार होने के प्रति आश्वस्त बैठे रमेश बजाज के लिए चुनौती बढ़ा दी है - और उनके लिए चुनावी मुकाबले को थोड़ा मुश्किल बना दिया है । असिस्टेंट गवर्नर के रूप में पूनम सिंह की डिस्ट्रिक्ट में प्रभावी सक्रियता रही है, जिस कारण क्लब्स के प्रेसीडेंट के बीच उनकी अच्छी पहचान और पैठ है - जबकि दूसरे उम्मीदवारों को अभी क्लब्स के प्रेसीडेंट्स से परिचित होने का काम ही करना है; यह बात उन्हें दूसरे उम्मीदवारों के मुकाबले बढ़त दिलाती है । असिस्टेंट गवर्नर होने के नाते पूनम सिंह को दूसरे असिस्टेंट गवर्नर्स की भी मदद मिल सकती है, जो अपने अपने जोन में उनके लिए समर्थन जुटाने का काम कर सकते हैं ।
पूनम सिंह को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मनप्रीत सिंह की पहचान और सक्रियता का फायदा भी मिल सकता है । उनके क्लब के वरिष्ठ सदस्य, दूसरे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपीएस सिबिया अगले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर होने के नाते उनकी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में मददगार हो सकते हैं । उल्लेखनीय है कि किसी भी वर्ष के क्लब-प्रेसीडेंट्स की अवॉर्ड और अगले रोटरी वर्ष की डिस्ट्रिक्ट टीम में जगह पर नजर होती है - और यह दोनों 'चीजें' ऑफर करने की स्थिति में पूनम सिंह की उम्मीदवारी के समर्थक नेता सक्षम हैं - इसलिए उनकी उम्मीदवारी एक मजबूत आधार पर खड़ी दिखती है । पूनम सिंह की उम्मीदवारी के सामने हालाँकि चुनौती भी कम नहीं है । उनकी जीत डिस्ट्रिक्ट के सत्ता समीकरणों में मनप्रीत सिंह और जेपीएस सिबिया की स्थिति को मजबूत बनाने का काम करेगी - जो मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर व यशपाल दास जैसे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को स्वीकार नहीं होगी । जेपीएस सिबिया के अगले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर हो जाने से मधुकर मल्होत्रा पहले से ही चिढ़े बैठे हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद उन्हें मिलेगा । ऐसे में, इन लोगों के पूनम सिंह की उम्मीदवारी के खिलाफ सक्रिय होने की पूरी पूरी संभावना है । सत्ता खेमे के नेताओं की आपसी होड़ के कारण हो सकने वाले नुकसान से बचना पूनम सिंह के लिए बड़ी चुनौती होगी, और उनकी इस चुनौती में ही दूसरे उम्मीदवारों को अपनी अपनी कामयाबी का रास्ता निकलता नजर आ रहा है । चुनावी परिदृश्य और साफ होने में अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन पूनम सिंह की अचानक से प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने चुनावी परिदृश्य को दिलचस्प अभी से बना दिया है ।