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Tuesday, November 3, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में जितेंद्र ढींगरा के नेतृत्व वाले मौजूदा सत्ताधारियों ने अपने विरोधियों को चुप करने तथा बदनाम करने के लिए राजा साबू के नेतृत्व वाले पिछले सत्ताधारियों जैसे हथकंडे अपना कर विडंबना, ट्रैजिडी और कॉमेडी का नजारा पेश किया हुआ है

कुरुक्षेत्र । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई में सत्ता खेमे की पक्षपातपूर्ण मनमानियों और बेईमानियों को लेकर होने वाली शिकायतें रोटरी इंटरनेशनल के बड़े और प्रमुख पदाधिकारियों तक जा पहुँची हैं, और इस तरफ डिस्ट्रिक्ट की चुनावी लड़ाई एक बड़ा मुद्दा बन गया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार पंकज डडवाल के क्लब - रोटरी क्लब शिमला मिडटाऊन के प्रेसीडेंट अनिल सूद ने पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज को पत्र लिख कर पक्षपातपूर्ण मनमानियों और बेईमानियों पर लगाम लगाने का अनुरोध किया था; लेकिन अपने अनुरोध पर उन्हें जब कोई कार्रवाई होते हुए नहीं दिखी तो उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों से लेकर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर्स भरत पांड्या व  कमल सांघवी को अपनी शिकायतों से अवगत कराते हुए पत्र लिखे/भेजे और उनसे उचित कार्रवाई का अनुरोध किया । इस घटना ने डिस्ट्रिक्ट में इतिहास को ट्रैजिक रूप में दोहराने का काम किया है । अभी कोई चार/पाँच वर्ष पहले ही, आज के सत्ताधारी तब के सत्ताधारियों की मनमानियों व बेईमानियों की शिकायत किया करते थे; राजा साबू के नेतृत्व वाले तब के सत्ताधारी बड़े अहंकार के साथ दावा किया करते थे कि रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों तक उनकी चूँकि सीधी पहुँच है, इसलिए उनके खिलाफ होने वाली शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी; विडंबना और ट्रैजिडी यह है कि आज के सत्ताधारी भी वही 'भाषा' बोल रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि पंकज डडवाल के समर्थक रोटरी इंटरनेशनल के किसी भी पदाधिकारी से चाहें जो शिकायत कर लें, उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी ।
इसी दावे के भरोसे, निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने घोषणा की है कि अभी वह अपने बेटे की शादी के आयोजन में व्यस्त थे, लेकिन अब वह जल्दी ही 'बिग गेट टुगेदर' आयोजित करेंगे । उनकी इस घोषणा पर उनके उम्मीदवार अरुण मोंगिया खुशी जता रहे हैं । पिछले दिनों पहले सहारनपुर में और फिर अंबाला में अरुण मोंगिया की उम्मीदवारी के समर्थन में वोट जुटाने के उद्देश्य से मीटिंग/पार्टी की गई, जिसमें जितेंद्र ढींगरा के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अजय मदान और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी नवीन गुलाटी भी शामिल हुए । किसी ने इसे लेकर आपत्ति की, तो उसे जबाव दिया गया कि जितेंद्र ढींगरा अपने बेटे की शादी में भीड़भाड़ से बचने के लिए लोगों को बुला नहीं सके थे, इसलिए वह अब लोगों को पार्टी दे रहे हैं । इस पर लोगों के बीच सुनने को मिला कि अपने बेटे की शादी की पार्टी लोगों को अपने घर बुला कर दी जाती है, जितेंद्र ढींगरा ने अलग रिवाज शुरू किया है, वह लोगों के घर जाकर पार्टी दे रहे हैं । जाहिर है कि उनके तर्क को डिस्ट्रिक्ट में लोग हजम नहीं कर पा रहे हैं, और इसे लोगों की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश के रूप में ही देखा/पहचाना जा रहा है ।
डिस्ट्रिक्ट में इतिहास अपने आप को सिर्फ ट्रैजिक रूप में ही नहीं दोहरा रहा है, बल्कि कुछेक मामलों में वह कॉमेडी भी बन गया है । लोगों को याद है कि डेविड हिल्टन के गवर्नर-वर्ष में टीके रूबी के पक्ष में आयोजित की गई मीटिंग में शामिल होने के 'अपराध' में डिस्ट्रिक्ट टीम के 12 प्रमुख सदस्यों को टीम से निलंबित कर दिया गया था, उसी तरह की 'मानसिकता' को प्रकट करते हुए पंकज डडवाल की उम्मीदवारी के एक समर्थक - रोटरी क्लब सोलन सिटी के पूर्व प्रेसीडेंट वीरेंद्र अग्रवाल को वाट्स-ऐप ग्रुपों से निकाल दिया गया है । वीरेंद्र अग्रवाल का 'अपराध' ठीक वही है, जो डेविड हिल्टन के गवर्नर-वर्ष में टीके रूबी और उन 12 सदस्यों का था - सत्ताधारियों की पक्षपातपूर्ण मनमानियों व बेईमानियों का विरोध करना । डेविड हिल्टन की डिस्ट्रिक्ट टीम से 12 सदस्यों को निकालने का कोई कारण नहीं बताया गया था, वीरेंद्र अग्रवाल को वाट्स-ऐप ग्रुपों से निकालने का भी कोई कारण नहीं बताया गया है । एक ग्रुप में एक सदस्य ने जितेंद्र ढींगरा से कारण पूछा तो जितेंद्र ढींगरा ने उन्हें जबाव दिया कि वह फोन पर उन्हें कारण बताते हैं । फोन पर क्यों ? वीरेंद्र अग्रवाल को आपने ग्रुपों से निकाला, यह बात सभी को पता है - तो कारण भी सभी को पता होना चाहिए ! कारण आप किसी के कान में क्यों बतायेंगे ? इस रवैये पर हर किसी को हैरानी है, और आरोप सुने जा रहे हैं कि कारण सार्वजनिक रूप से बताएंगे, तो हो सकता है कि वह झूठे साबित हों !
वीरेंद्र अग्रवाल, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अजय मदान के एक 'झूठे' बताये जा रहे आरोप के पहले भी शिकार हो चुके हैं । अजय मदान ने कई लोगों को अलग अलग बताया है कि वीरेंद्र अग्रवाल ने शेखर मेहता वाले कार्यक्रम में उनकी पत्नी के साथ बदतमीजी की थी । कुछेक लोगों के जरिये यह बात जब वीरेंद्र अग्रवाल के सामने पहुँची, तो उन्होंने पूरी घटना बताते हुए हैरानी प्रकट की कि एक सामान्य सी बात को बदतमीजी घोषित कर अजय मदान उन्हें बदनाम करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं ? वीरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, हुआ यह था कि कुरुक्षेत्र में आयोजित शेखर मेहता के सम्मान समारोह का आयोजन देर रात तक चलता रहा था । रात 12 बजे के करीब, कई लोगों को जब भूख सताने लगी और उन्होंने घर लौटने के बारे में भी सोचना शुरू किया, तो वह खाने के स्टॉल की तरफ बढ़े और खाना खाने की तैयारी करने लगे । तभी अजय मदान की पत्नी ने वहाँ आकर कहा कि अभी कार्यक्रम चल रहा है, इसलिए अभी खाना शुरू नहीं किया जाना चाहिए । इस पर कुछेक अन्य लोगों के साथ-साथ वीरेंद्र अग्रवाल ने भी कहा कि रात के 12 बज रहे हैं, लोगों को भूख लग रही है और वह घर लौटना चाहते हैं; जिन लोगों की कार्यक्रम में रुचि हो, वह रुकें - और जिन लोगों की रुचि न हो, उन्हें खाना खाकर घर जाने दिया जाए । वीरेंद्र अग्रवाल के इन तर्कों से दूसरे लोगों को भी बल मिला, और तब अजय मदान की पत्नी की खाना रोकने की कोशिश सफल नहीं हो सकी । अजय मदान इस घटना को अपनी पत्नी के साथ बदतमीजी करना कह/बता रहे हैं । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि तीन-चार वर्ष पहले तब के सत्ताधारी अपने विरोधियों को इसी तरह की बहानेबाजियों से बदनाम किया करते थे; विडंबना, ट्रैजिडी और कॉमेडी यह है कि तब के विरोधियों ने आज सत्ताधारी बन कर अपने विरोधियों से निपटने के लिए वैसे ही हथकंडे अपना लिए हैं ।

Saturday, October 17, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा के सहयोग व समर्थन से इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता के नाम पर रोटरी में धंधा, राजनीति और फर्जीवाड़ा करने के उद्देश्य से होने वाले कार्यक्रम की पोल खुलने के बाद शेखर मेहता ने कार्यक्रम में शामिल होने से इंकार किया

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा के सहयोग व समर्थन से फर्जी तरीके से रोटरी का नाम जोड़ कर एक फर्जी किस्म की संस्था के आज शाम हुए कार्यक्रम 'वर्चुअल ट्रु रिइंकार्नेशन इंटरसिटी' में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल करने की कोशिशें अंततः असफल हो गईं । शेखर मेहता को रोटरी के नाम पर किए जा रहे फर्जीवाड़े के बारे में तथ्य मिले, तो उन्होंने इस कार्यक्रम से दूर रहने का फैसला किया । कार्यक्रम के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े तथा राजनीतिक जुगाड़ को लेकर 'रचनात्मक संकल्प' ने दो दिन पहले ही एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें तथ्यों के साथ इस बात का खुलासा किया गया था कि कैसे और क्यों तो कार्यक्रम की आयोजक संस्था कागजी और फर्जी किस्म की है, कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े लोग क्यों और कैसे रोटरी को बदनाम करने वाले तथा रोटरी की वैल्यूज के साथ खिलवाड़ करने वाले हैं, और क्यों व किस तरह यह कार्यक्रम एक राजनीतिक एजेंडे के तहत किया जा रहा है - और सबसे ज्यादा दुर्भाग्य की बात यह कि शेखर मेहता जैसे रोटरी के सबसे बड़े पदाधिकारी के नाम पर किए जाने वाले गुलगपाड़े को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा ने किस किस तरीके से शह और समर्थन दिया । 'रचनात्मक संकल्प' में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद डिस्ट्रिक्ट में बबाल मचा और कई लोगों ने अपने अपने तरीके से कोशिशें कीं कि रोटरी के नाम पर किए जा रहे फर्जीवाड़े तथा राजनीतिक एजेंडे को थोपने की कोशिशों में शेखर मेहता को सहभागी नहीं बनना चाहिए - क्योंकि उनकी सहभागिता से सच्चे रोटेरियंस का मनोबल टूटेगा ।
'वर्चुअल ट्रु रिइंकार्नेशन इंटरसिटी' से जुड़े विवादों की जानकारी मिलने पर शेखर मेहता भी कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर असमंजस में पड़े । विवादों को लेकर उन्होंने संजीव राय मेहरा से पूछताछ की, तो संजीव राय मेहरा भी समझ गए कि 'रायता' फैल है । मजे की बात यह रही कि फैले रायते को समेटने के लिए संजीव राय मेहरा ने हर संभव कोशिश की । उनकी कोशिशों को पूर्व गवर्नर विनोद बंसल का सहयोग मिला । दरअसल विवादित कार्यक्रम की बागडोर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार अजीत जालान के हाथ में थी, जिन्हें विनोद बंसल के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है । विनोद बंसल ने समझ लिया कि मामला जिस तरह से बिगड़ा है, उसे अजीत जालान नहीं संभाल पायेंगे; और इसलिए उन्होंने विनय भाटिया को संजीव राय मेहरा की मदद में लगाया । विनय भाटिया डायरेक्टर पद की नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनोद बंसल के उम्मीदवार के रूप में देखे/पहचाने जा रहे हैं । विनोद बंसल, विनय भाटिया और संजीव राय मेहरा की तिकड़ी कार्यक्रम से जुड़े विवादित मामलों को दूर करते हुए शेखर मेहता के आगमन के रास्ते को साफ करने की कोशिशों में जुटी ।
कार्यक्रम शुरू होने के पहले के 25/30 घंटों में डिस्ट्रिक्ट में भारी गहमागहमी रही । एक तरफ कुछेक लोगों की कोशिश थी कि रोटरी के नाम पर धंधा, राजनीति और फर्जीवाड़ा करने वाले रोटेरियंस के चक्कर में कहीं डिस्ट्रिक्ट, रोटरी तथा शेखर मेहता को फजीहत का शिकार न होना पड़ जाए - तो दूसरी तरफ 'वर्चुअल ट्रु रिइंकार्नेशन इंटरसिटी' के आयोजन से जुड़े लोगों ने उन उपायों को अपनाने पर जोर दिया, जिनसे शेखर मेहता की आशंकाओं को दूर किया जा सके तथा कार्यक्रम में उनकी सहभागिता को सुनिश्चित किया जा सके । इस चक्कर में कार्यक्रम के बेचारे निमंत्रण पत्र की बहुत दुर्गति हुई । कार्यक्रम शुरू होने से पहले लोगों को कई कई तरह के निमंत्रण पत्र देखने को मिले । धीरे धीरे करके पहले तो एक कागजी व फर्जी किस्म की संस्था के कार्यक्रम को डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रम का रूप दिया गया, फिर विवादित आयोजकों का नाम हटाया गया, फिर आयोजक क्लब्स के नाम भी हटा लिए गए - हद की बात यह हुई कि बाद में निमंत्रण पत्र से उस कागजी व फर्जी संस्था का नाम भी हटा लिया गया, वास्तव में जिसके नाम से कार्यक्रम की योजना बनाई गई थी । जैसे एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं, ठीक उसी अंदाज में एक कागजी व फर्जी किस्म की संस्था के कार्यक्रम के जरिये धंधा जमाने व राजनीति करने की कोशिश को बदनामी के दाग से बचाने/छिपाने के लिए कई तरफ के उपाए आजमाये गए । संजीव राय मेहरा, अजीत जालान, विनय भाटिया व विनोद बंसल द्वारा आजमाये गए उपाए लेकिन शेखर मेहता को आश्वस्त नहीं कर सके; और शेखर मेहता ने अपने आप को कार्यक्रम से दूर करने/रखने में ही अपनी भलाई देखी । इस तरफ शेखर मेहता के नाम पर रोटरी में धंधा, राजनीति और फर्जीवाड़ा करने वाले रोटेरियंस की तैयारी धरी की धरी रह गई । 

Thursday, October 15, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा की शह पर शेखर मेहता व भरत पांड्या को आगे रख कर, एक फर्जी व विवादग्रस्त संस्था के आयोजन को चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन के रूप में भी देखा/पहचाना जा रहा है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार अजीत जालान के 'मैनेजर' की भूमिका निभा रहे संजीव वर्मा 'रोटरी ट्रु रिइंकार्नेशन' नाम की फर्जी टाइप की संस्था को लेकर फिर से सक्रिय हो गए हैं, और इस बार उन्होंने इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या तथा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता के नाम का सहारा लेकर अपने आलोचकों का मुँह बंद करने की 'तैयारी' दिखाई है । उल्लेखनीय है कि संजीव वर्मा इस तथाकथित संस्था को लेकर काउंसिल ऑफ गवर्नर्स के निशाने पर आ चुके हैं, और काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में उन्हें रोटरी के नाम पर निजी संस्था चलाने के लिए लताड़ पड़ चुकी है । इस लताड़ के चलते ही संजीव वर्मा ने पिछले करीब दो वर्षों से इस तथाकथित संस्था की तथाकथित गतिविधियों को बंद किया हुआ था; लेकिन अजीत जालान की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी को मदद पहुँचाने के उद्देश्य से संजीव वर्मा ने इसे फिर से सक्रिय कर लिया है । इस सक्रियता के तहत वह 17 अक्टूबर को वर्चुअल ट्रु रिइंकार्नेशन इंटरसिटी कर रहे हैं, जिसमें स्पीकर के रूप में उन्होंने भरत पांड्या और शेखर मेहता को शामिल होने के लिए तैयार कर लिया है । संजीव वर्मा को विश्वास है कि भरत पांड्या और शेखर मेहता जैसे रोटरी के बड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी से वह अपनी संस्था के फर्जी टाइप होने तथा रोटरी के नाम व लोगो का गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल करने के आरोपों से बच जायेंगे ।
रोटेरियंस को यह समझना भी मुश्किल हो रहा है कि भरत पांड्या तथा शेखर मेहता जैसे बड़े पदाधिकारी रोटरी के नाम व लोगो का फर्जी तरीके से इस्तेमाल करने वाले रोटेरियन के निजी कार्यक्रम में क्यों तो शामिल हो रहे हैं, और क्यों रोटरी का नाम व लोगो फर्जी तरीके से इस्तेमाल होने दे रहे हैं । गौर करने वाला तथ्य यह है कि 'रोटरी ट्रु रिइंकार्नेशन' न तो क्लब का प्रोजेक्ट है, न डिस्ट्रिक्ट का प्रोजेक्ट है । दरअसल यह कोई प्रोजेक्ट ही नहीं है । इसकी वेबसाइट में खुद संजीव वर्मा ने बताया है कि यह उनकी सोच व भावना का उपक्रम है; और वास्तव में यह लोगों को अंगदान के प्रति शिक्षित करने का 'ऑनलाइन प्लेटफॉर्म' है । 'रोटरीऑर्गनडोनेशनडॉटओआरजी' नाम की वेबसाइट में संजीव वर्मा ने दावा किया है कि वह 'वैरी हार्ड वर्किंग' कर रहे हैं; लेकिन उनकी 'वैरी हार्ड वर्किंग' की पोल इसी वेबसाइट में 'लेटेस्ट न्यूज' कॉलम की सूचनाओं से खुल रही है - जहाँ 4 अगस्त 2020 की खबर से पहले 28 सितंबर 2018 की खबर है । यानि संजीव वर्मा अंगदान को लेकर लोगों को शिक्षित करने के लिए वर्चअल प्लेटफॉर्म तैयार करते हैं, और उसमें दो वर्ष तक उनके पास शेयर करने के लिए कोई सूचना या खबर नहीं होती है - और इसे वह 'वैरी हार्ड वर्किंग' कहते हैं ।
संजीव वर्मा इस इंटरसिटी को डीआरआर सार्थक बंसल के साथ मिल कर कर रहे हैं, जो रोट्रेक्ट वर्ष शुरू होने के दो महीने बाद नियम व व्यवस्थानुसार का उल्लंघन करते हुए मनमाने तरीके से डीआरआर बनाये गए हैं, और जिस पर खासा विवाद है । इस इंटरसिटी के आयोजन में संजीव वर्मा के क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के साथ रोटरी क्लब दिल्ली इलीट भी शामिल है, जिसके प्रेसीडेंट अनमोल चावला ने अभी पिछले दिनों रोट्रेक्ट की संस्था सीरिक के प्रेसीडेंट का चुनाव लड़ा था, जिसे जमकर धांधली करके उन्होंने जीता था । धांधली की शिकायत हुई, जाँच हुई, जाँच में आरोपों को सही पाया गया और चुनाव रद्द हुआ । इस तरह, सहज ही देखा/समझा जा सकता है कि 17 अक्टूबर को हो रही इस इंटरसिटी के आयोजन में प्रमुख भूमिका रोटरी व रोट्रेक्ट के नाम पर तरह तरह की धांधली करने वाले लोगों की ही है । इसमें विडंबना और मजे की बात यह है कि इस आयोजन को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा की पूरी पूरी शह और समर्थन है । उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों कई क्लब्स के सहयोग तथा उनकी भागीदारी से रोटरी क्लब दिल्ली राजेंद्र प्लेस द्वारा किए जा रहे आयोजन को, जिसमें मुख्य स्पीकर के रूप में शेखर मेहता ने शामिल होने की स्वीकृति दे दी थी, संजीव राय मेहरा ने यह कहते हुए जबर्दस्ती रद्द करवा दिया था कि चूंकि क्लब की सदस्या आभा झा चौधरी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवार हैं इसलिए उक्त आयोजन चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन होगा । उन्हीं संजीव राय चौधरी को लेकिन अब यह नहीं दिख रहा है कि 17 अक्टूबर के आयोजन के मुख्य कर्ताधर्ता संजीव वर्मा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के एक अन्य उम्मीदवार अजीत जालान के 'चुनावी मैनेजर' की भूमिका निभाते रहे हैं, और कार्यक्रम का आयोजक क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट अजीत जालान का क्लब है । रोटरी क्लब दिल्ली राजेंद्र प्लेस के आयोजन में चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन देखने वाले संजीव राय मेहरा को रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के आयोजन में चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन होता हुआ नहीं नजर आ रहा है - इसे उनकी पक्षपाती और बेईमान रवैये रूप में देखा/पहचाना जा रहा है ।

Wednesday, October 7, 2020

रोटरी इंटरनेशनल जोन 7 में डायरेक्टर पद पर महेश कोटबागी की चुनावी जीत से रोटरी में शेखर मेहता के 'रुतबे' में आए उछाल में, डिस्ट्रिक्ट 3012 के सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मान्यता मिलने की उम्मीद बढ़ी    

नोएडा । महेश कोटबागी के इंटरनेशनल डायरेक्टर चुने जाने से इंटरनेशनल प्रेसीडेंट शेखर मेहता के 'रुतबे' में जो वृद्धि हुई है, उससे डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहे सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की मान्यता मिलने की उम्मीद जाग उठी है । सतीश सिंघल वर्ष 2017-18 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर थे, और नोएडा रोटरी ब्लड बैंक का प्रेसीडेंट पद भी सँभाले हुए थे । नोएडा रोटरी ब्लड बैंक में घपलेबाजी के आरोपों के  चलते उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद खोना पड़ा था, और फिर उन्हें पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में भी मान्यता नहीं मिली । सतीश सिंघल पूर्व गवर्नर की मान्यता पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे । इस मामले में, इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद की तरफ बढ़ते शेखर मेहता से सतीश सिंघल को उम्मीद बनी थी । चर्चा सुनी गई थी कि शेखर मेहता ने रोटरी फाउंडेशन की ग्रांट की रकम में घपलेबाजी के आरोप में रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाए डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व गवर्नर अनिल अग्रवाल की सजा को कम करवाने के साथ साथ सतीश सिंघल के मामले को भी प्रायरिटी में रखा हुआ था । करीब चार महीने पहले अनिल अग्रवाल का काम तो बन गया था, और उनकी सजा कम कर दी गई थी - लेकिन सतीश सिंघल के मामले में उस समय फैसला नहीं हो सका था । 
उसके बाद, शेखर मेहता खुद मुसीबत में फँस गए । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड में कुछेक ऐसे फैसले हुए, जिन्होंने शेखर मेहता की 'हैसियत' को चोट पहुँचाने का काम किया और ऐसा लगा कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी/इलेक्ट होने के बावजूद रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में शेखर मेहता की वैसी 'हैसियत' नहीं बन पाई है, जैसी कि बननी/होनी चाहिए । दरअसल, कई घटनाएँ ऐसी होती हैं जो किसी पदाधिकारी की स्थिति पर तो कोई असर नहीं डालती हैं, लेकिन उसके 'रुतबे' को प्रभावित जरूर करती हैं - और उससे उसकी 'हैसियत' निर्धारित होती है । शेखर मेहता इसी चीज के शिकार बने । ऐसे में, जोन 7 में दोबारा होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के नतीजे का शेखर मेहता के 'रुतबे' के संदर्भ में खास महत्त्व था । जोन 7 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद पर महेश कोटबागी की जीत से शेखर मेहता की स्थिति पर 'तकनीकी रूप से' कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन महेश कोटबागी की जीत ने पिछले कुछ समय से दबाव झेल रहे शेखर मेहता को बड़ी राहत दी है - और उनके 'इकबाल' को बढ़ाया है । 

महेश कोटबागी की चुनावी जीत से रोटरी की राजनीति और व्यवस्था में शेखर मेहता के 'रुतबे' में जो उछाल आया है, उसमें सतीश सिंघल के सिफारिशियों को सतीश सिंघल का काम बनता नजर आ रहा है । शेखर मेहता के यहाँ सतीश सिंघल की वकालत करने वाले लोगों का कहना है कि अभी तक जब शेखर मेहता खुद मुसीबत में फँसे थे, तो उनसे सतीश सिंघल के मामले में कुछ करने के लिए कहना मुश्किल हो रहा था; लेकिन अब जोन 7 में दोबारा हुए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी नतीजे के चलते हालात बदल गए हैं - और उम्मीद की जानी चाहिए कि शेखर मेहता जल्दी ही डिस्ट्रिक्ट 3054 के अनिल अग्रवाल की तरह डिस्ट्रिक्ट 3012 के सतीश सिंघल का काम भी बनवा देंगे - और सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मान्यता मिल जाएगी ।

Tuesday, October 6, 2020

रोटरी इंटरनेशनल जोन 7 में डायरेक्टर पद के चुनाव में महेश कोटबागी की जीत के साथ, रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में शेखर मेहता के दबदबे के बढ़ने से, जोन 4 की इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति में शेखर मेहता के नजदीकियों का हौंसला बढ़ा

नई दिल्ली । महेश कोटबागी के इंटरनेशनल डायरेक्टर चुने जाने से देश की रोटरी की चुनावी राजनीति में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता का 'इकबाल' एक बार फिर स्थापित होता हुआ दिखा है । रोटरी की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले बड़े नेताओं का भी कहना है कि जोन 7 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए दोबारा हुए चुनाव में महेश कोटबागी की जीत की खुद महेश कोटबागी को जितनी जरूरत थी, उससे कहीं ज्यादा जरूरत शेखर मेहता को थी । माना/समझा जा रहा है कि महेश कोटबागी की जीत के जरिये शेखर मेहता ने उस चोट का बदला ले लिया है, जो इंटरनेशनल डायरेक्टर के लिए पहले हुए चुनाव में जीते रवि वदलमानी की जीत को निरस्त करके उन्हें पहुँचाई गई थी । दरअसल रवि वदलमानी की जीत को निरस्त करने के फैसले तथा अन्य कुछेक घटनाओं के चलते रोटरी की राजनीति के खिलाड़ियों के बीच शेखर मेहता की स्थिति कमजोर हो चली थी, जिसका नतीजा यह देखने को मिल रहा है कि वर्षों से उनके साथ जुड़े रहे कई महत्त्वाकांक्षी रोटेरियंस ने दूसरे ठिकानों पर जगहें खोजने/बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं । ऐसे रोटेरियंस में लोगों को सबसे ज्यादा हैरान करने वाला उदाहरण डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व गवर्नर विनोद बंसल का लगा/दिखा है, जो वर्षों से शेखर मेहता के साथ लगे रहे हैं - लेकिन जो अब राजु सुब्रमणियन की 'मदद' करते हुए पूर्व प्रेसीडेंट केआर रविंद्रन के नजदीक होने की कोशिश करने में लगे नजर आ रहे हैं । 
दरअसल रोटरी की राजनीति और व्यवस्था में शेखर मेहता को केआर रविंद्रन से टक्कर और चुनौती मिलती दिख रही है, और देश में रोटरी की राजनीति इन्हीं दोनों के बीच विभाजित होती लग रही है । इसीलिए जिस किसी को शेखर मेहता के यहाँ अपनी दाल गलती हुई नहीं दिखती है, वह अपनी दाल की पतीली लेकर केआर रविंद्रन के दरवाजे पहुँच जाता है । पिछले दिनों घटी कुछेक घटनाओं ने शेखर मेहता की स्थिति को कमजोर होते दिखाया, तो उनके नजदीक जुड़े मतलबी रोटेरियंस के बीच भगदड़ मची देखी गई । इस भगदड़ का सबसे ज्यादा असर जोन 4 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी समीकरणों पर पड़ता नजर आया । जोन 4 में इंटरनेशनल डायरेक्टर के लिए जो भी उम्मीदवार हैं, उनमें से कुछेक को शेखर मेहता के तथा कुछेक को केआर रविंद्रन के नजदीकियों के रूप में देखा/पहचाना जाता है । शेखर मेहता जब इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने गए थे, तब विनोद बंसल ने उनके साथ अपनी नजदीकियत दिखाते/जताते हुए दावा करना शुरू किया था कि बस, अब तो उनका इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना पक्का हो गया है । लेकिन जल्दी ही दूसरों के साथ साथ खुद उन्हें भी समझ में आ गया कि शेखर मेहता के यहाँ रंजन ढींगरा और अशोक गुप्ता की स्थिति उनसे मजबूत है । विनोद बंसल ने हालाँकि तरह तरह से शेखर मेहता के यहाँ अपनी स्थिति नंबर वन की बनाने की कोशिश तो बहुत की, लेकिन उन्हें अपनी दाल गलती हुई दिखी नहीं ।
इस बीच शेखर मेहता को रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में कुछेक तगड़े वाले झटके लगे, जिनसे उनकी स्थिति को कमजोर होते हुए देखा/पहचाना गया - और केआर रविंद्रन का पलड़ा भारी होते हुए समझा गया । रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में शेखर मेहता को कमजोर पड़ते देख विनोद बंसल ने अपनी दाल की पतीली शेखर मेहता के यहाँ से उठा कर केआर रविंद्रन के दरवाजे रखने की तैयारी शुरू कर दी, और इसके लिए उन्होंने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी मुकाबले में एक प्रमुख उम्मीदवार के रूप में देखे जा रहे टीएन सुब्रमणियन उर्फ राजु सुब्रमनियन का दामन पकड़ा है । विनोद बंसल और उनके नजदीकियों ने जैसे तय कर लिया है कि यदि वह इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के मुकाबले से बाहर हो रहे हैं, तो वह डिस्ट्रिक्ट के दूसरे उम्मीदवारों को हराने/हरवाने की कोशिश करेंगे । इसी रणनीति के तहत देखने में आ रहा है कि डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनोद बंसल के उम्मीदवार विनय भाटिया तथा विनय भाटिया को जितवाने की जिम्मेदारी ले बैठे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा आजकल राजु सुब्रमणियन को प्रमोट कर रहे हैं । संजीव राय मेहरा ने अपने नए जीएमएल में अंतिम पृष्ठ पर राजु सुब्रमणियन को लेकर एक बड़ा आलेख प्रकाशित किया है । विनय भाटिया व संजीव राय मेहरा को हालाँकि यह डर भी है कि राजु सुब्रमणियन का समर्थन करने के कारण डिस्ट्रिक्ट में उन पर डिस्ट्रिक्ट के साथ बेईमानी व धोखेबाजी करने का आरोप लगेगा, इसलिए उन्होंने आपने आप को दीपक कपूर के समर्थकों के रूप में दिखाना/जताना शुरू किया, लेकिन दीपक कपूर ने उन्हें हड़का दिया कि अपने धोखेबाजी के काम में वह उनका नाम क्यों घसीट रहे हैं ? दीपक कपूर ने नोमीनेटिंग कमेटी के लिए दीपक तलवार पर भरोसा जता कर विनोद बंसल तथा विनय भाटिया की कोशिशों को और झटका दिया है ।
महेश कोटबागी की इंटरनेशनल डायरेक्टर पद पर हुई जीत के साथ रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में शेखर मेहता की स्थिति के फिर से मजबूत होने के जो संकेत मिले हैं, उससे जोन 4 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को लेकर बनने वाले समीकरणों के शेखर मेहता खेमे के उम्मीदवारों के पक्ष में संयोजित होने की संभावना को और बल मिला है । उम्मीद की जा रही है कि शेखर मेहता की टीम के सदस्यों ने जिस तरह से जोन 7 में काम किया है, वह वैसे ही जोन 4 में भी काम करेगी - इसलिए भी करेगी, ताकि रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में शेखर मेहता का पलड़ा भारी रहे ।

Monday, September 21, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व गवर्नर अनिल अग्रवाल को 'सर्विस अबव सेल्फ' का उदाहरण बताने वाले शेखर मेहता के ट्वीट को देख कर रोटेरियंस के बीच बूढ़ों, बीमारों, गरीबों व अनपढ़ों के नाम पर ली गई ग्रांट की रकम को हड़पने के मामले में अनिल अग्रवाल को दोषी ठहराए जाने तथा उनके सजायाफ्ता होने का मामला एक बार फिर चर्चा में आया  

जयपुर । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल के लिए इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता की तारीफ पाना फजीहत का कारण बन गया है । दरअसल ट्विटर पर शेखर मेहता ने ब्लड डोनेट करने को लेकर अनिल अग्रवाल की जो तारीफ की, उससे अनिल अग्रवाल का अपने गवर्नर वर्ष में ली गई ग्लोबल ग्रांट (नंबर 1420550) के करीब 20 लाख रुपये हड़पने का मामला एक बार फिर से चर्चा में आ गया, जिसके लिए अनिल अग्रवाल रोटरी में ग्रांट्स, अवॉर्ड्स, असाइनमेंट्स व अपॉइंटमेंट्स से वंचित किए जाने की सजा पा चुके हैं । हालाँकि काफी जद्दोजहद के बाद, उक्त हड़पी गई रकम वापस करने के चलते अनिल अग्रवाल को मिली सजा की अवधि कम कर दी गई, लेकिन रोटरी इंटरनेशनल के रिकॉर्ड में वह रोटरी फाउंडेशन की रकम हड़पने के मामले में दोषी हैं और सजायाफ्ता हैं । रोटेरियंस को हैरानी है कि बूढ़ों, बीमारों, गरीबों और अनपढ़ों की मदद के नाम पर रोटरी फाउंडेशन से ग्रांट लेकर उसे हड़प जाने वाले अनिल अग्रवाल को शेखर मेहता 'सर्विस अबव सेल्फ' का प्रतिनिधि/उदाहरण कैसे कह/बता सकते हैं ? और ऐसा करके शेखर मेहता रोटेरियंस को आखिर क्या संदेश और प्रेरणा दे रहे हैं ? रोटेरियंस के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि अनिल अग्रवाल आखिरकार शेखर मेहता के लिए किस रूप में उपयोगी हैं, जिसके लिए शेखर मेहता ने अपनी, रोटरी की, और इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जैसे बड़े पद की गरिमा और मर्यादा को दाँव पर लगा दिया है ?
रोटेरियंस का मानना/कहना है कि यह ठीक है कि अनिल अग्रवाल लगातार रक्तदान करके एक अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन उनके इस अच्छे काम के सामने बूढ़ों, बीमारों, गरीबों व अनपढ़ों की मदद के नाम पर ली गई रकम को हड़पने की उनकी हरकत रोटरी तथा रोटेरियंस को लज्जित व शर्मिंदा करने वाली बात है - और ऐसे व्यक्ति को शेखर मेहता द्वारा 'सर्विस अबव सेल्फ' का उदाहरण बताना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण तो है ही, एक गलत परंपरा डालना भी है । इस तरह की बातों और चर्चाओं ने अनिल अग्रवाल की बदनामी के दलदल से निकलने की कोशिशों पर एक बार फिर पानी फेर दिया है । उल्लेखनीय है कि रोटरी फाउंडेशन की ग्रांट की रकम को हड़पने और फिर रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाने के चलते मिली बदनामी से उबरने के लिए अनिल अग्रवाल ने पिछले कुछेक महीनों में प्रयास किए हैं । उनके प्रयासों को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजेश अग्रवाल से भरपूर सहयोग मिल रहा है । रोटरी इंटरनेशनल द्वारा असाइनमेंट्स व अपॉइंटमेंट्स से वंचित रखने की सजा के फैसले को अनदेखा करते हुए राजेश अग्रवाल ने अनिल अग्रवाल को डिस्ट्रिक्ट वाटर एंड सेनीटेशन कमेटी का चेयरमैन बना दिया तथा कुछेक आयोजनों में उन्हें प्रमुख भूमिका निभाने का मौका दिया । 
अनिल अग्रवाल ने राजेश अग्रवाल के सहयोग से डिस्ट्रिक्ट की गतिविधियों में वापसी की लेकिन जब जब कोशिश की, तब तब लोगों ने उन्हें 'आईना' दिखाया और जिसके चलते उन्हें फजीहत का सामना करना पड़ा । इस बीच 'बड़े नेताओं' के सहयोग से अनिल अग्रवाल ने अपनी सजा कम करवा लेने का जुगाड़ कर लिया । कोशिश तो उन्होंने दोषी ठहराये जाने के फैसले से मुक्त होने की की थी, लेकिन रोटरी इंटरनेशनल ने उन्हें दोषी होने तथा सजायाफ्ता होने से तो मुक्त नहीं किया - बस उनकी सजा की अवधि को कम कर दिया । इससे उनकी मुसीबतें बनी ही रहीं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजेश अग्रवाल भले ही उन्हें कुछेक आयोजनों में आगे आगे रखते रहे, लेकिन डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस को यह 'स्वीकार' नहीं हुआ कि बूढ़ों, बीमारों, गरीबों व अनपढ़ों के नाम पर ली गई ग्रांट की रकम को हड़पने के मामले में दोषी ठहराए गए तथा सजा पाए अनिल अग्रवाल उन्हें रोटरी का कोई पाठ पढ़ाएँ । डिस्ट्रिक्ट में रक्तदान करने वाले और कई रोटेरियंस हैं, लेकिन रक्तदान करने को नाटकबाजी में बदलने का काम सिर्फ अनिल अग्रवाल ने किया है । ऐसे ही एक मौके पर शेखर मेहता की तारीफ प्राप्त करके अनिल अग्रवाल ने सोचा तो यह था कि शेखर मेहता की तारीफ मिलने के बाद रोटेरियंस के बीच उनकी साख बनेगी/बढ़ेगी । लेकिन हो उलटा गया । शेखर मेहता के ट्वीट को देख कर रोटेरियंस को अनिल अग्रवाल का रोटरी फाउंडेशन के पैसे को हड़पना और सजायाफ्ता होना एक बार फिर याद आ गया । अनिल अग्रवाल को 'सर्विस अबव सेल्फ' का उदाहरण बताने वाले अपने ट्वीट को लेकर शेखर मेहता को रोटेरियंस की आलोचना का जिस तरह शिकार होना पड़ा है, उससे लग रहा है कि दोषी व सजायाफ्ता होने के दाग से छुटकारा पाने के लिए अनिल अग्रवाल को गंभीरता से कोई उपाय सोचना होगा - तमाशेबाजी से तो मामला बिगड़ता ही रहेगा ।

Tuesday, September 15, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में विनय भाटिया के साथ मिल कर विनोद बंसल एक बार फिर अपने निजी स्वार्थ में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के मामले में डिस्ट्रिक्ट के लोगों तथा डिस्ट्रिक्ट की पहचान को 'धोखा' देने की तैयारी कर रहे हैं क्या ? 

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट में आयोजित हुए रोटरी फाउंडेशन के लेबल टू ट्रेनिंग सेमीनार में की-नोट स्पीकर के रूप में शामिल हुए टीएन सुब्रमणियन उर्फ राजु सुब्रमनियन की पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल के साथ जो जुगलबंदी देखने को मिली, उससे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में इन दोनों के बीच गठबंधन होने के कयासों को खासी हवा मिली है । इन कयासों में यह भी सुना/बताया जा रहा है कि विनोद बंसल ने एक बार फिर अपने निजी स्वार्थ में डिस्ट्रिक्ट के हितों के साथ 'सौदा' कर लिया है, और इसके लिए पूर्व गवर्नर विनय भाटिया को अपने साथ मिला लिया है । दरअसल ट्रेनिंग सेमीनार में कुछेक लोगों ने जब रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे जुटाने के विनोद बंसल के 'तरीकों' को लेकर सवाल उठाये, तो राजु सुब्रमणियन ने खासी तत्परता के साथ विनोद बंसल का बचाव किया । यह नजारा देख कर ट्रेनिंग सेमीनार में शामिल लोगों का माथा ठनका । उल्लेखनीय है कि विनोद बंसल को डिस्ट्रिक्ट में रोटरी फाउंडेशन को 'एक के चार' करने का जरिया बना देने के आरोपों का सामना पड़ रहा है, और उन पर यह गंभीर आरोप लगता रहा है कि उन्होंने रोटरी को 'बिजनेस' तथा रोटरी फाउंडेशन में दिए जाने वाले दान को 'इन्वेस्टमेंट' बना दिया है । ऐसे में, राजु सुब्रमणियन की उनके बचाव की कोशिशों में 'राजनीतिक डील' के संकेतों को देखा/पहचाना गया - और डिस्ट्रिक्ट में चर्चा शुरू हुई कि विनोद बंसल और विनय भाटिया की जोड़ी ने डिस्ट्रिक्ट की पहचान के साथ 'धोखा' करने की तैयारी कर ली है ।
उल्लेखनीय है कि विनोद बंसल ने रोटरी में ऊँची छलाँग लगाने के लिए हमेशा ही डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों व प्रमुख लोगों को अँधेरे में रख कर बड़े नेताओं के साथ 'सौदेबाजी' करने के प्रयास किए हैं । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर पीटी प्रभाकर के साथ जोन इंस्टीट्यूट के चेयरमैन पद को लेकर की गई उनकी सौदेबाजी का किस्सा थोड़ा पुराना जरूर है, लेकिन लोगों को उसकी खूब याद है । विनोद बंसल ने पीटी प्रभाकर को अच्छी घुट्टी पिला कर इंस्टीट्यूट दिल्ली में करने के लिए राजी कर लिया था, और खुद इंस्टीट्यूट के चेयरमैन का पद 'ले लिया' था । यह सब जुगाड़ करते हुए विनोद बंसल ने अपने डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों व प्रमुख लोगों को भनक भी नहीं लगने दी । लेकिन उनकी यह जुगाड़बाजी तब ढेर हो गई, जब डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों व प्रमुख लोगों के सामने मामला आया । उन्होंने पीटी प्रभाकर से साफ कह दिया कि उन्हें यदि दिल्ली में इंस्टीट्यूट करना है, तो उन्हें दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों से बात करना होगी - और तब न इंस्टीट्यूट दिल्ली में हुआ, और न विनोद बंसल इंस्टीट्यूट के चेयरमैन बन सके । रोटरी ब्लड बैंक के अकाउंट से चार/पाँच करोड़ रूपये शेखर मेहता के एक प्रोग्राम के लिए देने का मामला तो अभी हाल ही का, जिसके लिए उन्होंने डिस्ट्रिक्ट तो छोड़िये - ब्लड बैंक के अन्य पदाधिकारियों से भी सलाह करना उचित नहीं समझा । इस मामले में भी न सिर्फ विनोद बंसल की फजीहत हुई, बल्कि उनके चक्कर में शेखर मेहता को भी बुरा बनना पड़ा ।
विनोद बंसल को समय समय पर उनके नजदीकी रहे प्रमुख लोग समझाते रहे हैं कि उन्हें रोटरी में जो कुछ करना/पाना है, उसके लिए उन्हें डिस्ट्रिक्ट के लोगों के साथ जुड़ कर प्रयास करने चाहिए - तथा अपने निजी स्वार्थ में डिस्ट्रिक्ट और डिस्ट्रिक्ट की पहचान को 'धोखा' देने का काम तो नहीं ही करना चाहिए । उनका खुद का अनुभव रहा है कि उन्होंने जब जब डिस्ट्रिक्ट को 'धोखा' देकर कुछ पाने की कोशिश की है, उसमें बुरी तरह असफल रहे हैं और फजीहत के शिकार बने हैं - लेकिन लगता है कि उन्होंने कोई सबक नहीं सीखा है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए डिस्ट्रिक्ट में कुछेक लोगों ने प्रयास किए हैं कि डिस्ट्रिक्ट में चूँकि एक से अधिक उम्मीदवार हैं, इसलिए उन्हें वरीयता क्रम अनुसार आपस में एक अंडरस्टैंडिंग बना लेना चाहिए । रंजन ढींगरा और दीपक कपूर के बीच यह अंडरस्टैंडिंग बनती नजर भी आ रही है, और दोनों नोमीनेटिंग कमेटी के लिए दीपक तलवार पर भरोसा करते देखे जा रहे हैं कि वह डिस्ट्रिक्ट की पहचान के हित में फैसला करेंगे - लेकिन विनोद बंसल ने नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनय भाटिया को आगे करके अपनी अलग चाल चली है, और डिस्ट्रिक्ट की बजाये अपने निजी हित को महत्ता दी है । रोटरी फाउंडेशन के लेबल टू ट्रेनिंग सेमीनार में डिस्ट्रिक्ट के लोगों को यह संकेत भी मिल गया है कि विनोद बंसल और विनय भाटिया ने डिस्ट्रिक्ट के हितों तथा डिस्ट्रिक्ट की पहचान के साथ धोखा करने के लिए कहाँ तार जोड़े हैं । विनोद बंसल ने जब जब अपने निजी स्वार्थ में डिस्ट्रिक्ट के लोगों के साथ 'धोखा' किया है, तब तब डिस्ट्रिक्ट के लोगों से उन्हें समर्थन नहीं मिला है, और उन्हें फजीहत का ही शिकार होना पड़ा है - इसलिए देखना दिलचस्प होगा कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में डिस्ट्रिक्ट के साथ 'धोखा' करने की उनकी तैयारी का कैसा क्या हश्र होता है ? 

Tuesday, September 8, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में पदों का लालच देकर अपने उम्मीदवार को नोमीनेटिंग कमेटी का चुनाव जितवाने के अभियान में लगे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मुकेश सिंघल अपने जोन के रोटेरियंस के साथ दोहरा विश्वासघात करने के आरोप में फँसे

अलीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मुकेश सिंघल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई में 'अपनी' पराजय को सुनिश्चित देख/जान कर जोन जीतने पर ध्यान केंद्रित किया है, और इसके लिए अपने जोन - अलीगढ़ के क्लब्स के साथ ही विश्वासघात करने पर उतर आए हैं । अभी हाल ही में अलीगढ़ के क्लब्स के पदाधिकारियों तथा नेताओं के बीच बनी सहमति में मुकेश सिंघल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए अपने उम्मीदवार अंबरीश गर्ग की उम्मीदवारी को वापस लेने का भरोसा दिया/दिलाया था, लेकिन गिरगिट की तरह रंग बदल कर अब वह अंबरीश गर्ग के लिए समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं - और इस चक्कर में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद की मर्यादा व गरिमा भी भूल बैठे हैं । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता कभी अप्रत्यक्ष तो कभी प्रत्यक्ष रूप से मुकेश सिंघल को कई मौकों पर नसीहत दे चुके हैं कि उन्हें नेतागिरी छोड़कर रोटरी तथा डिस्ट्रिक्ट के काम पर ध्यान देते हुए सभी को साथ लेकर चलना चाहिए, मुकेश सिंघल ने लेकिन शेखर मेहता की बात को भी एक कान से सुनकर दूसरे कान से बाहर निकालने का जुगाड़ अपना लिया है ।
मुकेश सिंघल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए अपने उम्मीदवार अंबरीश गर्ग को किसी भी तरह जितवाने को अपना उद्देश्य बना लिया है, और इसके लिए मुकेश सिंघल अलीगढ़ के रोटेरियंस के साथ दोहरा विश्वासघात करने तक पर उतर आए हैं । उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पहले, जब मुकेश सिंघल खुद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार थे, मुकेश सिंघल ने ही अलीगढ़ जोन में यह फार्मूला सुझाया था कि नोमीनेटिंग कमेटी में क्लब की वरिष्ठता के क्रम से प्रतिनिधित्व होना चाहिए । सभी को यह फार्मूला अच्छा लगा, और माना गया कि इससे आपस में व्यर्थ के विवाद व मनमुटाव नहीं होंगे तथा क्लब्स के बीच आपसी सौहार्द बना रहेगा । पिछले दो वर्ष उसी फार्मूले के अनुसार, नोमीनेटिंग कमेटी में अलीगढ़ जोन का प्रतिनिधित्व हुआ । इस वर्ष उक्त फार्मूले के हिसाब से वरिष्ठता क्रम में रोटरी क्लब अलीगढ़ मानसी को प्रतिनिधित्व का मौका मिलना था, और क्लब के पदाधिकारियों ने क्लब की सक्रिय व वरिष्ठ सदस्य शशि पवार को उम्मीदवार बनाया । शशि पवार का उम्मीदवार बनना मुकेश सिंघल को पसंद नहीं आया । मुकेश सिंघल के नजदीकियों का ही कहना/बताना है कि मुकेश सिंघल को शशि पवार के उम्मीदवार बनने से समस्या नहीं है - उनकी समस्या यह है कि रोटरी क्लब अलीगढ़ मानसी ने उनसे सलाह किए बिना शशि पवार को नोमीनेटिंग कमेटी के लिए उम्मीदवार क्यों और कैसे बना दिया ?
अलीगढ़ के क्लब्स पर यह दबाव बनाने के लिए कि वह जो भी फैसले करें, उनसे पूछ कर करें - मुकेश सिंघल ने अपने क्लब के अंबरीश गर्ग को नोमीनेटिंग कमेटी के लिए उम्मीदवार बना/बनवा दिया । मुकेश सिंघल को दो वर्ष से चले आ रहे फार्मूले के विरोध में उतरते देख, दो और क्लब्स ने अपने अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए । इस पर बबाल हुआ और अलीगढ़ के क्लब्स के नेताओं की बातचीत हुई; अधिकतर लोगों ने मुकेश सिंघल को इस बात के लिए कोसा कि वह अलीगढ़ में बने सौहार्द को नष्ट करने का काम कर रहे हैं । मुकेश सिंघल ने अपने खिलाफ ऊँची होती आवाजों को सुना, तो चुपचाप सरेंडर करने में ही अपनी भलाई देखी - और एक बार फिर अलीगढ़ के रोटेरियंस के बीच सहमति बनी कि पिछले दो वर्ष से अपनाए जा रहे फार्मूले के अनुसार, इस वर्ष रोटरी क्लब अलीगढ़ मानसी की शशि पवार नोमीनेटिंग कमेटी में अलीगढ़ जोन का प्रतिनिधित्व करेंगी । लेकिन जैसे जैसे चुनाव का समय नजदीक आता गया, लोगों को यह देख कर हैरानी हुई कि मुकेश सिंघल अपने उम्मीदवार अंबरीश गर्ग के लिए समर्थन जुटाने के अभियान में जुट गए हैं और क्लब्स के पदाधिकारियों व नेताओं को अगले वर्ष की अपनी गवर्नर टीम में पद देने का प्रलोभन देकर वोट पक्के करने में लगे हुए हैं । मुकेश सिंघल को विश्वास है कि पदों के लालच में क्लब्स के पदाधिकारी उनके उम्मीदवार को वोट दे देंगे, और इस तरह वह अपने उम्मीदवार को आसानी से नोमीनेटिंग कमेटी का चुनाव जितवा लेंगे । चुनाव का नतीजा क्या निकलेगा, यह तो बाद में पता चलेगा - अभी लेकिन लोगों के बीच यह सवाल जरूर चर्चा में है कि अपने पद की गरिमा व मर्यादा को भूल कर अपने जोन के रोटेरियंस के साथ दोहरा विश्वासघात करने वाले मुकेश सिंघल के नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट व रोटरी की कैसी पहचान बनेगी ? 

Monday, August 17, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में, इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता की तारीफों से रंजन ढींगरा और दीपक तलवार की उम्मीदवारी को जोन तथा डिस्ट्रिक्ट में खासी चर्चा और ऊँची उड़ान मिली

नई दिल्ली । रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के प्रेसीडेंट अरुण जैन तथा उनकी टीम के सदस्यों के अधिष्ठापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता ने वाटर मिशन के कामकाज का उदाहरण देते हुए रंजन ढींगरा की जैसी जोरदार तारीफ की, उससे डिस्ट्रिक्ट और जोन 4 के रोटरी नेताओं के बीच खासी हलचल मची है । शेखर मेहता की उक्त तारीफ के चलते डिस्ट्रिक्ट में दीपक तलवार तथा जोन 4 में रंजन ढींगरा की राजनीतिक स्थिति को उड़ान भरते देखा/पहचाना जा रहा है । यूँ तो किसी क्लब के कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ता का किसी की तारीफ करने का कोई ज्यादा मतलब नहीं होता है, क्योंकि उसे प्रोटोकॉल की औपचारिकता के रूप में देखा/पहचाना जाता है । किसी भी क्लब के कार्यक्रम में वक्ता के सामने क्लब के पदाधिकारियों तथा नेताओं की तारीफ करने की 'मजबूरी' होती ही है, जिसे वह खुशी खुशी निभाता है - इसलिए उस तारीफ का कोई खास अर्थ होता नहीं है । लेकिन रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के कार्यक्रम में शेखर मेहता का रंजन ढींगरा की तारीफ करने को इसलिए महत्त्व दिया जा रहा है, क्योंकि रंजन ढींगरा तो इस क्लब के सदस्य नहीं हैं - और इसलिए मुख्य अतिथि के रूप में शेखर मेहता के सामने रंजन ढींगरा की तारीफ करने की कोई मजबूरी नहीं थी । शेखर मेहता द्वारा की गई तारीफ को सामान्य बात मान कर अनदेखा किया जा सकता था, यदि रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी पूर्व गवर्नर दीपक तलवार का क्लब न होता और दीपक तलवार जोन 4 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव की नोमीनेटिंग कमेटी के उम्मीदवार न होते - और जोन 4 में बनने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार रंजन ढींगरा के उम्मीदवार के रूप में न देखा जा रहा होता ।
मजे की बात यह देखने में आई कि दीपक तलवार के क्लब के कार्यक्रम में बोलते हुए शेखर मेहता ने दीपक तलवार की कोई तारीफ नहीं की । इस पूरे वाकये में राजनीति 'देखने'/पहचानने वाले लोगों का कहना है कि शेखर मेहता ने कुशल राजनीतिक की तरह काम किया और कोई बखेड़ा खड़ा होने का मौका छोड़े बिना उन्होंने दीपक तलवार और रंजन ढींगरा को एक साथ 'प्रोमोट' कर दिया । डिस्ट्रिक्ट 3011 में नोमीनेटिंग कमेटी में प्रतिनिधित्व के चुनाव की प्रक्रिया चूँकि शुरू हो चुकी है, और उसके लिए दीपक तलवार की उम्मीदवारी की बात भी चूँकि सभी के संज्ञान में है - इसलिए शेखर मेहता यदि दीपक तलवार के बारे में कुछ कहते, तो चुनावी आचारसंहिता के उल्लंघन के आरोपी बनते । शेखर मेहता ने होशियारी दिखाते हुए दीपक तलवार के बारे में तो कुछ नहीं कहा, लेकिन रंजन ढींगरा की जमकर तारीफ की - और उन्हें दूरदर्शिता व चाकचौबंद योजना के साथ काम करने वाला रोटेरियन बताया । शेखर मेहता ने रेखांकित किया कि केंद्र सरकार जलयोजना को लेकर अब जो रूपरेखा बना रही है, रंजन ढींगरा के नेतृत्व में रोटरी उस रूपरेखा को पहले ही तैयार कर चुकी है तथा सरकारी पदाधिकारियों व जलयोजना के विशेषज्ञों ने रंजन ढींगरा के नेतृत्व में तैयार हुई रोटरी की रूपरेखा को पूरी तरह परफेक्ट पाया है । रंजन ढींगरा की उपलब्धि के बारे में शेखर मेहता ने जिस विस्तार से बातें कीं, उसमें दीपक तलवार का नाम लिए बिना दीपक तलवार के लिए प्रशंसा के भाव छिपे नहीं रह सके - और इसी कारण से शेखर मेहता की बातों को सुनने वाले डिस्ट्रिक्ट के आम और खास रोटेरियंस का ध्यान बार-बार दीपक तलवार की उम्मीदवारी पर जाता रहा ।
शेखर मेहता यदि खुलकर रंजन ढींगरा की तारीफ कर रहे हैं, तो उसमें स्वाभाविक रूप से रंजन ढींगरा के नोमीनेटिंग उम्मीदवार दीपक तलवार की तारीफ के भाव हैं ही - जिन्हें पहचानने/पकड़ने में डिस्ट्रिक्ट 3011 ही नहीं, जोन 4 के अन्य डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों व नेताओं ने कोई चूक नहीं की । इस संदर्भ में, रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के सदस्य और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अनूप मित्तल की कुछेक मौकों पर शेखर मेहता द्वारा की गई तारीफ का भी लोगों ने खासा नोटिस लिया । नोटिस लेने वाले लोगों का ही कहना/बताना है कि शेखर मेहता द्वारा की गई अनूप मित्तल की तारीफ को यदि औपचारिकता मान/समझ भी लें, तो भी अनूप मित्तल की तारीफ के लिए शेखर मेहता ने जिन मौकों को 'चुना' और रंजन ढींगरा के काम के साथ उन्हें जिस तरह से 'दिखाया' - उसके राजनीतिक संकेत बहुत साफ हैं । शेखर मेहता के भाषण में रंजन ढींगरा की तारीफ का जोन 4 के रोटेरियंस के बीच जो ढिंढोरा पिटा और उसके जो राजनीतिक अर्थ निकाले गए, उसका एक बड़ा कारण यह भी रहा कि रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के पदाधिकारियों के अधिष्ठापन कार्यक्रम में भारी संख्या में विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारी और नेता जुटे - और सिर्फ जुटे ही नहीं, बल्कि कार्यक्रम में 'शामिल' भी हुए/रहे । ऑनलाइन कार्यक्रमों में शामिल हुए लोगों को कार्यक्रम में 'बनाये' रखना एक बड़ी चुनौती होती है; उक्त चुनौती से निपटने के लिए रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के कार्यक्रम के आयोजकों ने कार्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया कि वह सभी के लिए आकर्षक बना । आकर्षक प्रस्तुति के कारण विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों तथा पूर्व गवर्नर्स नेताओं की उपस्थिति में निरंतरता बनी, और इसके चलते प्रत्यक्ष रूप से रंजन ढींगरा की और अप्रत्यक्ष रूप से दीपक तलवार की शेखर मेहता द्वारा की गई तारीफ के 'राजनीतिक उद्देश्यों' को रोटेरियंस के बीच चर्चा मिली ।

Monday, August 3, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में जोन्स निर्धारण के मामले को मुद्दा बना कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिनेश शुक्ला को दबाव में लेने की कोशिश में फजीहत का शिकार बनने से, आईएस तोमर खेमे के नेताओं ने वास्तव में अपनी ही कमजोरी को साबित किया है और अपनी मुश्किलों को बढ़ा लिया है

बरेली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन/चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए जोन्स के निर्धारण को लेकर अपनी शिकायत इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी तक पहुँचा कर आईएस तोमर खेमे के नेताओं ने अपनी अच्छी फजीहत करवा ली है - और इस तरह उक्त मामले में बबाल मचाना उनके लिए न सिर्फ निरर्थक साबित हुआ, बल्कि उनके गले की फाँस और बन गया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिनेश शुक्ला ने त्वरित गति से काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुला कर तथा उस मीटिंग में कमल सांघवी को भी आमंत्रित करके आईएस तोमर खेमे की मुहिम का बीच रास्ते में ही जिस तरह से दम निकाल दिया, उससे आईएस तोमर खेमे को खासा तगड़ा झटका लगा है । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का कहना है कि आईएस तोमर खेमे के लिए सारा मामला 'खाया-पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना' टाइप का रहा है । इस पूरे मामले से आईएस तोमर खेमे की बौखलाहट और हताशा का भी डिस्ट्रिक्ट के आम और खास लोगों को आभास मिला है, तथा डिस्ट्रिक्ट में उनके विरोधियों को कहने का मौका मिला है कि यह पूरा प्रसंग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई में आईएस तोमर खेमे का अभी से अपनी हार स्वीकारने जैसा बन  गया है ।
उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिनेश शुक्ला ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन/चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए जोन्स निर्धारित किए । आईएस तोमर खेमे के नेता लोग तुरंत सक्रिय हुए और उन्होंने घोषित निर्धारण को डिस्ट्रिक्ट बायलॉज के नियमों का उल्लंघन बताते हुए बबाल मचाना शुरू कर दिया और धड़ाधड़ जहाँ/तहाँ ईमेल लिखना/भेजना शुरू कर दिया । मामले को बड़ा बनाने के उद्देश्य से उन्होंने शिकायती ईमेल की कॉपी शेखर मेहता और कमल सांघवी को भी भेज दी । उन्हें उम्मीद थी कि शिकायत मिलते ही शेखर मेहता और कमल सांघवी तुरंत से दिनेश शुक्ला के कान उमेठेंगे और उनके द्वारा घोषित किए गए निर्धारण को रद्द करवा देंगे । दिनेश शुक्ला लेकिन तुरंत एक्शन में आ गए, और उन्होंने काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की जूम मीटिंग बुला ली, और मीटिंग में कमल सांघवी को भी शामिल होने के लिए राजी कर लिया । कमल सांघवी ने सभी की बातें सुन कर अपना पक्ष दिया कि पूर्व गवर्नर्स का काम सुझाव/सलाह देना है, और फैसला डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को ही करना है - पूर्व गवर्नर्स अपनी कोई बात डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पर थोप नहीं सकते हैं । कमल सांघवी के यह कहने के साथ ही, आईएस तोमर खेमे की दिनेश शुक्ला को दबाव में लेने तथा जोन्स के निर्धारण की घोषणा को रद्द करवाने की सारी तैयारी की हवा निकल गई ।
इस मामले में दरअसल आईएस तोमर खेमे के नेताओं की बदनामी ने अहम् रोल निभाया । उल्लेखनीय है कि शेखर मेहता और कमल सांघवी कई मौकों पर डिस्ट्रिक्ट के नेताओं को 'सिर्फ और सिर्फ राजनीति करने के लिए' लताड़ चुके हैं । वास्तव में इसीलिए जोन्स के निर्धारण को लेकर आईएस तोमर खेमे के नेताओं की शिकायत को न शेखर मेहता ने कोई तवज्जो दी, और न कमल सांघवी ने उसे गंभीरता से लिया । आईएस तोमर खेमे के ही कुछेक वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि मामले में जिस तरह का उतावलापन तथा आक्रामकता दिखाई गई, उससे मामला बिगड़ गया - और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिनेश शुक्ला ने जिस तत्परता व होशियारी से मामले को अपने पक्ष में कर लिया, उससे लगता है कि उन्हें जोन्स निर्धारण के मामले में आईएस तोमर खेमे द्वारा बबाल करने का आभास था और उन्होंने उनके बबाल से निपटने के तरीके के बारे में पहले से सोचा हुआ था । पूरे प्रकरण से यह साबित हुआ कि आईएस तोमर खेमे के नेताओं के पास डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की राजनीति को लेकर कोई सुनियोजित योजना नहीं है, और वह सिर्फ शोरगुल मचा कर ही चुनाव जीतने की उम्मीद में हैं । मजे की बात यह है की कि खेमे के ही कुछेक नेताओं को लगता है कि इस वर्ष उनके लिए मौका अच्छा है - उनके उम्मीदवार के रूप में देवप्रिया उक्सा का पलड़ा सत्ता खेमे के उम्मीदवार विवेक गर्ग के मुकाबले भारी देखा/पहचाना जा रहा है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट  के रूप में मुकेश सिंघल अपने गवर्नर वर्ष के पद बाँट कर वोट जुटाने की स्थिति में भी हैं; लेकिन एक व्यवस्थित रणनीति के अभाव में आईएस तोमर खेमे के सक्रिय नेता अनुकूल स्थितियों का लाभ उठा पाने में सक्षम नहीं दिख रहे हैं । जोन्स निर्धारण के मामले में, अपने ही बिछाये जाल में खुद ही फँस कर खेमे के नेताओं ने अपनी जो फजीहत करवाई है, उससे वास्तव में उन्होंने अपनी ही कमजोरी को जाहिर किया है ।

Saturday, July 25, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता सदस्यता वृद्धि तथा फाउंडेशन की जमा राशि के मामले में उलटे नतीजे देकर, डिस्ट्रिक्ट और रोटरी को पीछे घसीटने पर शर्मिंदा होने की बजाये, अपनी उपलब्धियों का ढोल पीटने तथा खुद ही खुद को शाबासी देने में क्यों लगे हुए हैं ?

गाजियाबाद । निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता सच्चाई को छिपाते तथा तथ्यों से खिलवाड़ करते हुए डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच झूठी वाहवाही लेने की कोशिश भले ही कर रहे हों, लेकिन रोटरी जगत में यही माना/पहचाना जा रहा है कि उनके गवर्नर वर्ष में डिस्ट्रिक्ट 3012 तथा रोटरी को नुकसान ही हुआ है - तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट व रोटरी को पीछे ही ले गए हैं । सदस्य-संख्या के मामले में तो दीपक गुप्ता गोलमोल बातें बनाते हुए अपनी उपलब्धि का झूठा ही श्रेय लेने की कोशिश करते हुए 'रंगे हाथ' पकड़े गए हैं । उल्लेखनीय है कि वह जोरशोर से यह तो बता रहे हैं कि उनके गवर्नर वर्ष में 12 नए क्लब बने तथा 500 से अधिक नए सदस्य रोटरी से जुड़े - लेकिन यह बताते हुए वह धूर्तता यह दिखा रहे हैं कि वह यह नहीं बता रहे हैं कि उनके गवर्नर रहते हुए डिस्ट्रिक्ट की सदस्य संख्या क्या से क्या हुई है ? दरअसल वह यह इसलिए नहीं बता रहे हैं कि यह बात सामने आते ही उनकी पोल खुल जायेगी और लोगों को पता चल जायेगा कि उनके गवर्नर रहते हुए डिस्ट्रिक्ट व रोटरी को फायदा नहीं - बल्कि घाटा हुआ है । रोटरी इंटरनेशनल के रिकॉर्ड के अनुसार, एक जुलाई 2019 को जब दीपक गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार संभाला था, तब डिस्ट्रिक्ट की सदस्य-संख्या 3709 थी - लेकिन 30 जून 2020 को जब दीपक गुप्ता गवर्नर की कुर्सी से उतरे, तब सदस्य-संख्या घटकर 3695 रह गई । क्लब्स की औसत सदस्यता के संदर्भ में तो यह घाटा और भी बड़ा है, क्योंकि इस दौरान क्लब्स की संख्या 95 से बढ़कर 105 हुई है । सिर्फ इतना ही नहीं, रोटरी इंटरनेशनल के महिलाओं की सदस्यता को प्रोत्साहित करने के अभियान को पूरा करने के मामले में भी दीपक गुप्ता बुरी तरह असफल रहे हैं । उनके गवर्नर वर्ष में महिला सदस्यों की हिस्सेदारी 25.96 प्रतिशत से घटकर 23.57 प्रतिशत रह गई है ।
रोटरी फाउंडेशन के लिए जमा हुई रकम को लेकर भी दीपक गुप्ता तथ्यों से खिलवाड़ कर रहे हैं, और पूरी सच्चाई बताये बिना अपने आपको शाबासी दिए जा रहे हैं - जबकि सच्चाई यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्होंने रोटरी फाउंडेशन का अकाउंट भरने का नहीं, बल्कि खाली करने का काम किया है । दीपक गुप्ता रोटरी फाउंडेशन के लिए 10 लाख डॉलर से अधिक की रकम जमा होने की बात तो बता रहे हैं, लेकिन इस तथ्य को बहुत ही चालाकी से छिपा ले रहे हैं कि इसमें पाँच लाख डॉलर से अधिक की रकम तो टर्म गिफ्ट के रूप में है, जिसके बदले में तीन से चार गुना रकम ग्लोबल ग्रांट के रूप में रोटरी फाउंडेशन से ली जायेगी - यानि उक्त रकम दान नहीं है, बल्कि इन्वेस्टमेंट है; और यह रकम रोटरी फाउंडेशन के अकाउंट में जमा रकम को बढ़ाने का नहीं, उलटे घटाने का काम करेगी । इस तरह, दीपक गुप्ता ने रोटरी फाउंडेशन को चूना लगाने का ही काम नहीं किया है - बल्कि उनकी असफलता इस मामले में भी है कि टर्म गिफ्ट के नाम पर भी वह कुल करीब छह/आठ क्लब्स से ही पैसे जुटा पाए हैं और डिस्ट्रिक्ट के अधिकतर क्लब्स की तरफ से उन्हें ठेंगा ही मिला है ।
उल्लेखनीय है कि रोटरी का विकास सदस्यता वृद्धि तथा फाउंडेशन की जमा राशि पर ही निर्भर करता है, और इसीलिए रोटरी इंटरनेशनल इन दोनों क्षेत्रों में अधिक से अधिक ध्यान देने पर जोर देता है - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता ने लेकिन दोनों ही क्षेत्रों में उलटे नतीजे देकर वास्तव में रोटरी को आगे बढ़ाने की बजाये, पीछे घसीटने का ही काम किया है । हद की बात यह है कि अपनी असफलता पर शर्मिंदा होने की बजाये वह आधी-अधूरी बातें बता कर दोनों ही क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों का ढोल पीट रहे हैं और खुद ही खुद को शाबासी देने में लगे हुए हैं । 

Saturday, July 18, 2020

रोटरी जोन 4 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में रंजन ढींगरा तथा राजु सुब्रमणियन के बीच होते दिख रहे मुकाबले में, उत्तर/पश्चिम तथा एक ही डिस्ट्रिक्ट से बार-बार डायरेक्टर बनने के मुद्दे को हवा मिलने से अशोक गुप्ता व दीपक कपूर मुकाबले में शामिल होते नजर आ रहे हैं 

नई दिल्ली । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ने से जोन 4 के डिस्ट्रिक्ट्स में राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज होती हुई नजर आ रही हैं । संभावित उम्मीदवारों की तरफ से इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन/चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के संभावित उम्मीदवारों के साथ-साथ दूसरे नेताओं और पदाधिकारियों से भी संपर्क साधना शुरू करने की बातें सुनी जाने लगी हैं, और इससे जोन में तथा विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में राजनीतिक समीकरण तेजी से बनने/बिगड़ने लगे हैं । इस बार, इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जोन 4 के 12 डिस्ट्रिक्ट्स में से करीब 8 या 9 उम्मीदवार तैयारी करते सुने जा रहे हैं । उम्मीदवारों की इस संभावित भीड़ ने जोन तथा डिस्ट्रिक्ट्स के राजनीतिक समीकरणों को बुरी तरफ से गड़बड़ा दिया है, और नए समीकरण व गठजोड़ बनने के रास्ते बनते नजर आ रहे हैं । उम्मीदवारों की संख्या भले ही 8 या 9 हो रही हो, लेकिन मुकाबले में राजु सुब्रमणियन, रंजन ढींगरा और अशोक गुप्ता को देखा/पहचाना जा रहा है; गुलाम वाहनवती और दीपक कपूर किस्मत के भरोसे मैदान में हैं - बाकी संभावित उम्मीदवारों को कोई भी गंभीरता से लेता हुआ नजर नहीं आ रहा है, लेकिन वह किसी का 'खेल' बनाने या किसी का बिगाड़ने का काम जरूर कर सकते हैं ।
खेमेबाजी के लिहाज से रंजन ढींगरा तथा अशोक गुप्ता को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता के खेमे के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; जबकि राजु सुब्रमणियन, गुलाम वाहनवती व दीपक कपूर को विरोधी खेमे के उम्मीदवार के रूप में समझा जा रहा । विरोधी खेमे का कोई एक नेता नहीं है - यह बात उनकी स्थिति को नुकसान भी पहुँचाती है और फायदा भी देती है । फिलहाल शेखर मेहता खेमे में रंजन ढींगरा का, तो विरोधी खेमे में राजु सुब्रमणियन का पलड़ा भारी नजर आ रहा है - और जोन के छोटे/बड़े कई नेताओं को इन्हीं दोनों के बीच मुकाबला होता 'दिख' रहा है । हालाँकि अपने अपने डिस्ट्रिक्ट में रंजन ढींगरा को दीपक कपूर से, तथा राजु सुब्रमणियन को गुलाम वाहनवती से टक्कर मिलती दिख रही है । रंजन ढींगरा के डिस्ट्रिक्ट से विनोद बंसल भी उम्मीदवार बनने की तैयारी में हैं, लेकिन उनकी उम्मीदवारी को कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा है । पिछले कुछेक महीनों में उन्हें अपने डिस्ट्रिक्ट में लगातार मुसीबतों का सामना करना पड़ा है, और वह अलग-थलग पड़ते गए हैं । इसी के चलते, डिस्ट्रिक्ट के महत्त्वपूर्ण व प्रमुख प्रोजेक्ट रोटरी ब्लड बैंक के हिसाब-किताब में गड़बड़झाले के आरोपों के साथ वह प्रेसीडेंट पद से बड़े फजीहतभरे तरीके से हटाये गए । अतिमहत्त्वाकांक्षा और मौकापरस्ती वाले रवैये के चलते विनोद बंसल को हाल के दिनों में शेखर मेहता की नजदीकियत से भी हाथ धोना पड़ा है, जिसके तुरंत बाद से वह विरोधी खेमे में जगह पाने/बनाने के प्रयासों में जुट गए हैं - लेकिन वहाँ भी उनकी दाल गलती हुई नजर नहीं आ रही है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में इस बार खेमेबाजी वाला ऐंगल तो है ही, उत्तर/पश्चिम का और एक ही डिस्ट्रिक्ट से बार-बार डायरेक्टर बनने के मामले को भी हवा मिलती दिख रही है ।
उल्लेखनीय है कि राजु सुब्रमणियन तथा गुलाम वाहनवती उसी डिस्ट्रिक्ट के सदस्य हैं, जिस डिस्ट्रिक्ट के मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या सदस्य हैं । इस बिना पर जोन के नेताओं और पदाधिकारियों के बीच सवाल है कि हर बार एक ही डिस्ट्रिक्ट के लोग डायरेक्टर बनेंगे क्या ? पश्चिम और उत्तर का भी मामला है । मौजूदा डायरेक्टर भरत पांड्या पश्चिम से हैं, इसलिए उत्तर के रोटेरियंस को लगता है कि इस बार उत्तर से डायरेक्टर होना चाहिए । इस तरह की बातें राजु सुब्रमणियन व गुलाम वाहनवती की स्थिति को कमजोर करती हैं, और चुनावी मुकाबले को रंजन ढींगरा, अशोक गुप्ता तथा दीपक कपूर के बीच सीमित कर देती हैं । दीपक कपूर को उम्मीद है कि राजु सुब्रमणियन व गुलाम वाहनवती के मुकाबले से बाहर होने की स्थिति में विरोधी खेमे के नेताओं का समर्थन उन्हें मिलेगा, और उनका काम बन जायेगा । रंजन ढींगरा तथा अशोक गुप्ता के समर्थकों व शुभचिंतकों को लेकिन लगता है कि राजु सुब्रमणियन व गुलाम वाहनवती का मामला यदि बिगड़ा, तो उनकी कोशिश होगी कि इसका फायदा शेखर मेहता खेमे के उम्मीदवारों को मिलें - ताकि अगली बार वह उनका समर्थन पा सकें; यह फायदा लेकिन इस बात पर निर्भर करेगा कि नोमीनेटिंग कमेटी में रंजन ढींगरा और अशोक गुप्ता के समर्थक किस तरह अपने अपने उम्मीदवार के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास करते हैं ? एक संभावना यह भी व्यक्त की जा रही है कि कई उम्मीदवारों के होने से नोमीनेटिंग कमेटी में किसी एक उम्मीदवार को जरूरी 60 प्रतिशत वोट न मिल पाएँ और नोमीनेटिंग कमेटी अधिकृत उम्मीदवार न चुन सके - और तब खुला चुनाव होने की नौबत आ जाए । उस स्थिति में अशोक गुप्ता के फायदे में रहने का अनुमान लगाया जा रहा है, क्योंकि जिन चार-पाँच उम्मीदवारों को मुकाबले में देखा/पहचाना जा रहा है, उनमें अकेले अशोक गुप्ता ही अपने डिस्ट्रिक्ट से एकमात्र उम्मीदवार हैं, और उनके डिस्ट्रिक्ट के वोट भी अन्य डिस्ट्रिक्ट्स की तुलना में ज्यादा हैं ।
बहरहाल, अभी तो खेल शुरू हुआ है - और उम्मीद की जा रही है कि इस खेल में अभी नए समीकरण बनेंगे/बिगड़ेंगे, जो डायरेक्टर पद की राजनीति की दशा और दिशा तय करेंगे !

Wednesday, July 8, 2020

रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों तथा रोटेरियंस से डोनेशन के रूप में पैसे लेने की कोशिशों पर रोक लगाने की सिफारिशों ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता को जोर का झटका दिया है

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों पर गंभीर आपत्ति प्रकट करते हुए, वास्तव में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता की गर्दन ही पकड़ ली है । शेखर मेहता 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के चेयरमैन हैं, और स्काईलाइन हॉउस के उनके पते पर ही इस फाउंडेशन का मुख्यालय है । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज ने इस फाउंडेशन की गतिविधियों को रोटरी की 'समानांतर गतिविधियों' के रूप में देखा/पहचाना है, और आशंका व्यक्त की है कि इसकी गतिविधियाँ रोटेरियंस के बीच कन्फ्यूजन पैदा करके उन्हें रोटरी से अलग कर सकती हैं तथा इस तरीके से रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन को नुकसान पहुँचाने वाली साबित हो सकती हैं । एक तरह से रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज ने शेखर मेहता के नेतृत्व में चलने वाले 'द रोटरी ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' को रोटरी के लिए खतरे के रूप में देखा/पहचाना है - और इसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की है । शेखर मेहता के लिए बड़े झटके वाली बात यह रही है कि उनके फाउंडेशन की गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए तथा उन पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज करते हुए रोटरी इंटरनेशनल के बोर्ड व रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की जून में जो मीटिंग्स हुईं, उनमें अधिकृत पदाधिकारी होने के बावजूद प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता, डायरेक्टर्स भरत पांड्या व कमल सांघवी तथा फाउंडेशन ट्रस्टी गुलाम वाहनवती को शामिल नहीं किया गया । 
उल्लेखनीय है कि देश के रोटेरियंस के बीच इस फाउंडेशन को शेखर मेहता की 'निजी दुकान' के रूप में ही देखा/पहचाना गया है, जिसे इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी बनने के बाद से वह तेजी से बड़ा बना रहे हैं, तथा सजा/सँवार कर नई चमक के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं । रोटरी इंटरनेशनल की छत्रछाया में 'काम करने का नाम लेकर' यह फाउंडेशन रोटरी क्लब्स, अन्य तरह तरह के एनजीओज तथा सरकारी विभागों के साथ मिल कर गरीबों, बीमारों, अशिक्षितों तथा पिछड़े समुदायों के लिए काम करने की बात कर रहा है; इसने काम करने के लिए प्रायरिटीज एरिया'ज तय किए हैं, और उनके लिए छोटे-बड़े रोटेरियंस को लेकर भारी-भरकम टीमें बनाई हैं - और विभिन्न क्षेत्रों में काम को अंजाम देने के लिए रोटेरियंस से डोनेशन लिए/माँगे हैं । शेखर मेहता ने देश के प्रायः प्रत्येक बड़े रोटेरियन पदाधिकारी व नेता को इस फाउंडेशन में कोई न कोई पद देकर 'जोड़ा' है - और एक तरीके से यह 'दिखाया' हुआ है कि 'द रोटरी ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के लिए काम करने का मतलब रोटरी का काम करना है । कई प्रमुख व वरिष्ठ रोटेरियंस निजी बातचीत में इस फाउंडेशन को शेखर मेहता की निजी महत्त्वाकांक्षा से जोड़ कर देखते/बताते रहे हैं, और शिकायतें करते रहे हैं कि शेखर मेहता इसके जरिये अपना निजी संस्थान बना/खड़ा कर रहे हैं । शेखर मेहता चूँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की राह पर हैं, इसलिए तरह-तरह के स्वार्थों के चलते कोई भी खुलकर अपनी शिकायतों को व्यक्त नहीं कर पाया और शेखर मेहता को अपनी 'निजी दुकान' बढ़ाने का साफ रास्ता मिल गया ।
लेकिन रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की मीटिंग्स में जो बातें हुईं हैं, जो सवाल उठे हैं और जिस तरह के निर्णय हुए हैं - उससे लगता है कि शेखर मेहता के फाउंडेशन को ग्रहण लग गया है, और वह मुसीबत में घिर गया है । बोर्ड सदस्यों व ट्रस्टीज की मीटिंग्स में इस बात पर सवाल उठे हैं कि 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों के लिए रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन से अनुमति क्यों नहीं ली गईं; तथा रोटरी फाउंडेशन को अलग-थलग करके फाउंडेशन के लिए पैसा क्यों और कैसे लिया जा रहा है ? बोर्ड सदस्यों व ट्रस्टीज ने रोटरी इंटरनेशनल के जनरल सेक्रेटरी से अनुरोध किया है कि वह फाउंडेशन के पदाधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहें कि उनकी सभी गतिविधियाँ रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन के अंतर्गत होंगी और उनके प्रति ही जबावदेह व जिम्मेदार होंगी । रोटेरियंस से फाउंडेशन के लिए पैसे देने और जमा करने पर तुरंत रोक लगाने की माँग करते हुए अनुरोध किया गया है कि फाउंडेशन की गतिविधियों को तुरंत से रोका जाये और उन्हें रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन के मॉडल के अनुरूप ही काम करने को कहा जाए । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज के इस रवैये से 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के अस्तित्व को लेकर गंभीर संशय पैदा हो गया है, और इस फाउंडेशन के तहत बनी कमेटियों के पदाधिकारी तथा सदस्य अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं ।

Wednesday, July 1, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में नए रोटरी वर्ष के पहले ही दिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता के लिए 'चुनौती' खड़ी करते हुए, इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या की जैसी बेइज्जती की है, वैसी इससे पहले शायद ही किसी इंटरनेशनल डायरेक्टर की हुई होगी

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा ने अपने गवर्नर-वर्ष की शुरुआत रोटरी इंटरनेशनल के दिशा-निर्देशों को रौंदते तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या के स्पष्ट शब्दों में दिए गए निर्देश की अवहेलना करते हुए की । संजीव राय मेहरा का यह रवैया शेखर मेहता के लिए भी सीधी चुनौती बना है । इंटरेनशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट के रूप में शेखर मेहता आज ही रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्य बने हैं - और आज ही संजीव राय मेहरा ने दिखा दिया कि शेखर मेहता के अपने देश में ही रोटरी के नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ेंगी । विडंबना की बात यह रही कि संजीव राय मेहरा द्वारा खुलेआम किए जा रहे रोटरी के 'चीरहरण' का नजारा डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स चुपचाप बैठे देखते रहे; और भरत पांड्या की खुल्लमखुल्ला हो रही बेइज्जती के गवाह जोन 4 के रोटरी कोऑर्डीनेटर गुरजीत सिंह सेखों तथा असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डीनेटर प्रियेश भंडारी भी बने । संजीव राय मेहरा ने भरत पांड्या की बेइज्जती करते हुए रोटरी का जो 'चीरहरण' किया, वह डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन पद की नियुक्ति के संबंध में उनकी मनमानी से जुड़ा हुआ है । उन्होंने अपने रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन का पद रंजन ढींगरा की जगह विनय भाटिया को दिया है । अभी पंद्रह/बीस दिन पहले ही रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय से उन्हें दो-टूक शब्दों में बताया गया था कि रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार उक्त पद पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी की सहमति से ही कोई नियुक्ति हो सकती है, और कोई भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अकेले यह नियुक्ति नहीं कर सकता है । उल्लेखनीय है कि पिछले रोटरी वर्ष में ही गवर्नर, गवर्नर इलेक्ट तथा गवर्नर नॉमिनी की सहमति से डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद पर रंजन ढींगरा की नियुक्ति हुई थी, जो रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के तहत तीन वर्षों के लिए होती है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में संजीव राय मेहरा ने भी रंजन ढींगरा के नाम पर अपनी सहमति दी थी; किंतु पिछले कुछ समय से संजीव राय मेहरा रोटरी नियमों की अनदेखी करते हुए 'अकेले' ही रंजन ढींगरा की जगह विनय भाटिया को उक्त पद देने का फैसला कर बैठे ।
उम्मीद की गई थी कि रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय द्वारा नियमों की स्पष्ट व्याख्या कर देने के बाद संजीव राय मेहरा मनमानी करने की अपनी कोशिश को छोड़ देंगे, लेकिन आज किए गए अपने पहले ही कार्यक्रम में उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानून को धता बता दिया ।
इस मामले में और भी ज्यादा गंभीर बात यह हुई कि कायर्क्रम शुरू होने से पहले इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या की तरफ से मिले निर्देश को भी संजीव राय मेहरा ने मानने से इंकार कर दिया । उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही संजीव राय मेहरा के पास भरत पांड्या का संदेश आ गया था, जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में लिखा/कहा कि रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार, भावी गवर्नर्स - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी - की सहमति के बिना वह डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन की नियुक्ति नहीं कर सकते हैं; और उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रंजन ढींगरा ही डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन हैं । इसके बावजूद, संजीव राय मेहरा ने कार्यक्रम में विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के रूप में संबोधित किया । सभी के लिए हैरानी की बात यह है कि शेखर मेहता के लिए चुनौती पैदा करने, भरत पांड्या की खुल्लमखुल्ला बेइज्जती करने और रोटरी इंटरनेशनल का चीरहरण करने की हरकत पर संजीव राय मेहरा आखिर क्यों टिके हुए हैं, और इसके लिए उन्हें 'खाद-पानी' आखिर कहाँ से मिल रहा है, और कौन उन्हें यह सब करने के लिए उकसा रहा है ?
समझा जाता है और डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच चर्चा है कि बड़े पदाधिकारियों की बेइज्जती तथा रोटरी का चीरहरण करते हुए विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बनाने के पीछे दरअसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार चुनने हेतु बनने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की चुनावी राजनीति को साधने का उद्देश्य है । विनय भाटिया ने उक्त कमेटी के लिए अपनी उम्मीदवारी की तैयारी शुरू की हुई है ।उन्हें विनोद बंसल के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । माना/समझा जा रहा है कि विनोद बंसल किसी भी तरह से विनय भाटिया को नोमीनेटिंग कमेटी का चुनाव जितवाना चाहते हैं, ताकि नोमीनेटिंग कमेटी में विनय भाटिया उनके काम आ सकें । डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के रूप में विनय भाटिया को क्लब्स के पदाधिकारियों के संपर्क में रहने का मौका मिलेगा, और इस तरह उन्हें अपनी उम्मीदवारी के लिए कैम्पेन करने का मौका मिलेगा । विनोद बंसल और विनय भाटिया के साथ-साथ संजीव राय मेहरा पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं - लोगों को लगता है कि उनके बीच काम का लेना-देना भी हो सकता है, जिसके 'सहारे' संजीव राय मेहरा ने विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन 'बनाने' का जिम्मा ले लिया है - और रोटरी पर पेशा 'भारी' पड़ गया है । उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में, जोन 7 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में कैम्पेन होने/करने के आरोपों के चलते विजेता रवि वदलमानी से डायरेक्टर पद छिन गया है - उससे कोई सबक न लेकर विनोद बंसल को खुश करने/रखने के लिए विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बना कर रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों को बेइज्जत करने तथा रोटरी का चीरहरण करने का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा ने जो काम किया है, वह डिस्ट्रिक्ट और रोटरी में एक नए विवाद को जन्म देता हुआ लग रहा है ।

Sunday, June 28, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी के खुले सहयोग व समर्थन के बावजूद, जोन 7 में डायरेक्टर पद का चुनाव जीते रवि वदलमानी, पराजित हुए उम्मीदवार सैम मोव्वा की तरफ से हुई चुनावी शिकायत का शिकार होने से नहीं बच सके और जीता-जिताया इंटरनेशनल डायरेक्टर का पद खो बैठे

नई दिल्ली । सैम मोव्वा (के क्लब) की शिकायत ने इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट रवि वदलमानी को तो 'डुबोया' ही, खुद सैम मोव्वा को भी ले डूबी - और इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी को भी बदनामी के छींटों से भिगो बैठी । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने जोन 7 में हुए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव और उसके नतीजे को रद्द कर दिया है, और फिर से चुनाव करवाने का फैसला सुनाया है । उक्त चुनाव में पराजित हुए सैम मोव्वा के क्लब की तरफ से रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत की गई थी कि चुनाव जीतने के लिए रवि वदलमानी ने कैम्पेन चलाया, और इस तरह रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का उल्लंघन किया है । रोटरी इंटरनेशनल की तरफ से एक जाँच-टीम बनाई गई, जिसने अपनी जाँच-पड़ताल में पाया कि उम्मीदवार के रूप में न सिर्फ रवि वदलमानी ने - बल्कि सैम मोव्वा ने भी कैम्पेन किया था । इस रिपोर्ट के आधार पर, रोटरी इंटरनेशनल ने उक्त चुनाव को तथा उसके नतीजे को अमान्य घोषित कर दिया - तथा दोबारा चुनाव करवाने का फैसला सुनाया । रवि वदलमानी तथा सैम मोव्वा के लिए बदकिस्मती की बात यह रही कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने दोबारा होने वाले चुनाव में इन दोनों के उम्मीदवार बनने पर रोक लगा दी है । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का यह फैसला इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी के लिए इसलिए झटके वाला माना/समझा जा रहा है, क्योंकि रवि वदलमानी के कैम्पेन में कमल सांघवी ने खूब बढ़चढ़ कर भाग लिया था - कमल सांघवी चूँकि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्य हैं, इसलिए माना/समझा जा रहा था कि सैम मोव्वा (के क्लब) की शिकायत पर बोर्ड में रवि वदलमानी को नुकसान पहुँचाने वाला फैसला नहीं हो सकेगा । दरअसल इसीलिए, रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का फैसला इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी के लिए भी झटके वाला साबित हुआ है ।
इस फैसले के पीछे रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व प्रेसीडेंट केआर रविंद्रन को देखा/पहचाना जा रहा है, और माना जा रहा है कि रवि वदलमानी रोटरी लीडरशिप की खेमेबाजी की 'लड़ाई' के शिकार बन गए हैं । उल्लेखनीय है कि सैम मोव्वा को पूर्व प्रेसीडेंट केआर रविंद्रन के तथा रवि वदलमानी को भावी प्रेसीडेंट शेखर मेहता के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था - और इस तरह से, उक्त चुनाव के जरिये वास्तव में केआर रविंद्रन व शेखर मेहता की राजनीतिक 'ताकत' को आँकने की तैयारी हो रही थी । चुनावी प्रक्रिया के पहले चरण में, नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा सैम मोव्वा को अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने से केआर रविंद्रन का पलड़ा भारी साबित हुआ; लेकिन रवि वदलमानी से चेलैंज करवा कर शेखर मेहता खेमे ने पहले चरण में हारी हुई बाजी को दूसरे चरण में जीतने की तैयारी की । रवि वदलमानी की जीत को सुनिश्चित करने के लिए ही शेखर मेहता खेमे की तरफ कमल सांघवी ने रवि वदलमानी की उम्मीदवारी की कमान संभाली । समझा जाता है कि इसी बात से चिढ़ कर केआर रविंद्रन खेमे के नेताओं ने, चुनाव में विजयी हुए रवि वदलमानी की जीत पर ग्रहण लगाने के उद्देश्य से सैम मोव्वा (के क्लब) की तरफ से शिकायत दर्ज करवाई गई । रवि वदलमानी और उनके समर्थकों ने उक्त शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया; उन्हें विश्वास रहा कि कमल सांघवी ने जैसे उनके कैम्पेन को संभाला, वैसे ही इंटरनेशनल बोर्ड में शिकायत को भी 'संभाल' लेंगे । लोगों के बीच की चर्चाओं के अनुसार, वह इसलिए भी निश्चिंत रहे, क्योंकि उन्हें यकीन रहा कि यह मामला अगले रोटरी वर्ष में होने वाली मीटिंग में आयेगा - जब शेखर मेहता भी बोर्ड में होंगे, और तब रवि वदलमानी के खिलाफ कोई फैसला नहीं हो सकेगा । रवि वदलमानी और उनके छोटे-बड़े समर्थकों को यह उम्मीद बिलकुल भी नहीं थी कि उक्त मामला मौजूदा रोटरी वर्ष में ही रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड की कार्रवाई में आ जायेगा, और उनकी चुनावी जीत के लिए मुसीबत बन जायेगा ।
रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से झटका खाए रवि वदलमानी और उनके समर्थकों के लिए राहत की बात यही है कि 'सजा' यदि रवि वदलमानी को मिली है, तो सैम मोव्वा भी अपनी ही शिकायत के शिकार हुए हैं; और इस तरह इंटरनेशनल डायरेक्टर पद यदि रवि वदलमानी से छिना है, तो सैम मोव्वा के लिए भी उक्त पद पाने की संभावना समाप्त हुई है । इस फैसले के सामने आने के बाद से, मजे की बात यह देखने/सुनने को मिल रही है कि कमल सांघवी के नजदीकी यह बताने/जताने/दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि कमल सांघवी यदि रवि वदलमानी का डायरेक्टर पद नहीं बचा सके हैं, तो उन्होंने सैम मोव्वा के लिए भी डायरेक्टर पद की कुर्सी पाने की संभावना नहीं बची रहने दी है - और इस तरह, मामले को 'बराबर' का बना दिया है । इस बताने/जताने/दिखाने को कमल सांघवी की तरफ से 'डैमेज कंट्रोल' की कोशिश के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । कमल सांघवी के नजदीकियों का कहना है कि उनकी कोशिश है कि जोन 7 में हुए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को लेकर हुई उठापटक उनकी 'स्थिति' पर प्रतिकूल प्रभाव न डाले, और रोटेरियंस उन्हें 'कमजोर' न समझने लगें । वैसे, रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के इस फैसले ने अधिकतर रोटेरियंस को हैरान ही किया है - क्योंकि वह तो हर चुनाव में उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को कैम्पेन करते हुए 'देखते' और सुनते हैं । रोटरी में होने वाले छोटे से छोटे चुनाव में बड़े बड़े नेताओं और पदाधिकारियों को कैम्पेन करते हुए देखा और सुना जाता है - उसकी शिकायतें भी होती हैं, लेकिन कार्रवाई होते हुए कभी-कभार ही देखा गया है । ऐसे में, रोटेरियंस को यही लग रहा है कि कैम्पेन करने जैसी शिकायतों पर कार्रवाई तभी होती है - जब बड़े नेताओं और पदाधिकारियों को अपने 'स्कोर सेटल' करने होते हैं ।  

Saturday, June 13, 2020

रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता की पद्मश्री पाने की कोशिशों पर, रोटरी के बेईमानों के साथ 'दिखती' उनकी नजदीकी के चलते कहीं पानी न फिर जाए !

नई दिल्ली । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता की केंद्र सरकार के मंत्रियों के नजदीक घूम घूम कर रोटरी 'करने' की सक्रियता को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री पाने के उनके जुगाड़ के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । उनके नजदीकियों का तो कहना/बताना है कि शेखर मेहता ने पद्मश्री पाने की पूरी व्यवस्था कर ली है, और कभी भी राष्ट्रपति भवन से उन्हें बुलावा आ सकता है । लेकिन कुछेक लोगों को आशंका है कि रोटरी के तरह तरह के बेईमानों को शेखर मेहता के यहाँ जिस तरह का संरक्षण मिलता 'दिख' रहा है, उसके चलते पद्मश्री पाने की उनकी कोशिशों को झटका भी लग सकता है । शेखर मेहता के कुछेक नजदीकियों के अनुसार, उन्हें बार बार सावधान किया गया है कि रोटरी के बेईमानों से उन्हें दूरी बना कर रखना चाहिए, लेकिन शेखर मेहता ने पता नहीं क्यों इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया है । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी बनने के बाद शेखर मेहता जब पहली बार कोलकाता एयरपोर्ट पर उतरे थे, तब वहाँ उनके स्वागत में मौजूद रोटेरियंस में वह पूर्व गवर्नर भी कभी उनके दाएँ तो कभी उनके बाएँ खड़े हो कर तस्वीरें खिंचवा रहा था, जो बूढ़ों, बीमारों, गरीबों और अनपढ़ों के नाम पर ली गई ग्लोबल ग्रांट की रकम में घपलेबाजी करने के आरोप में रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाया हुआ था । कुछेक डिस्ट्रिक्ट्स में रोटरी के नियम-कानूनों तथा रोटरी के पैसों का मनमाना इस्तेमाल करने के आरोपियों को बार-बार शेखर मेहता के नजदीक देखा/पहचाना गया । वरिष्ठ रोटेरियंस ने बार-बार माना/कहा कि इस तरह की 'नजदीकियों' से शेखर मेहता की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ेगा - लेकिन शेखर मेहता इस तरह की बातों की परवाह करते हुए कभी नजर नहीं आए ।
ऐसे में, शेखर मेहता के नजदीकियों को डरभरी आशंका यही है कि शेखर मेहता ने जिन बातों की परवाह नहीं की है, कहीं वही बातें पद्मश्री पाने की उनकी कोशिशों में बाधा न बन जाएँ ? शेखर मेहता को लेकिन अपने उद्यम पर भरोसा है ! शायद उन्हें लगता है कि रोटरी में होने वाली बेईमानियों के बारे में जब अधिकतर रोटेरियंस को ही पता नहीं चल पाता है, और कुछ ही किस्से चर्चा में आ पाते हैं - तब सरकार के लोगों को भला कैसे उनके बारे में पता चलेगा ? इसलिए शेखर मेहता का सारा जोर रोटरी के सहारे सरकार के विभिन्न मंत्रियों और प्रमुख सरकारी विभागों के बड़े पदाधिकारियों के साथ संबंध बनाने पर है । इसके लिए उन्होंने पीएम कोविड 19 केयर्स फंड में रोटरी की तरफ से 25 करोड़ देने/दिलवाने का काम भी किया । हालाँकि इसके लिए शेखर मेहता की बड़ी आलोचना भी हुई । कई वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स ने कहा कि रोटरी एक सेवा संगठन है, जो अपने काम के लिए लोगों से, संस्थाओं से व सरकारों से पैसा लेता है - सरकार को पैसा देना उसका उद्देश्य या काम नहीं है; और शेखर मेहता जो कर रहे हैं, वह उल्टी गंगा बहाना है तथा रोटरी को सिर के बल खड़ा करना है । लेकिन पद्मश्री के लिए 'रास्ता बनाने' में लगे शेखर मेहता ने इस तरह की आलोचनाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया । उनका सारा ध्यान पद्मश्री पाने पर है । वह इसलिए भी है, क्योंकि उनसे पहले जो भी भारतीय रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बने हैं, उन सभी को पद्मश्री या उससे ऊपर के नागरिक सम्मान मिले हैं ।
उल्लेखनीय है कि कल्याण बनर्जी तथा राजेंद्र उर्फ राजा साबू को देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री मिला हुआ है, जबकि रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने वाले पहले भारतीय नितीश चंद्र लहरी को तो देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण मिला था । यहाँ तक कि प्रेसीडेंट न बन पाने वाले, लेकिन प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने गए सुशील गुप्ता भी पद्मश्री से सुशोभित हैं । हालाँकि इन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने और इनके प्रेसीडेंट(नॉमिनी) होने में कोई सीधा संबंध दिखता नहीं है - संयोग सिर्फ इतना ही है कि सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले जो चार रोटेरियन हैं, वह इंटरनेशनल प्रेसीडेंट(नॉमिनी) भी रहे हैं । राजेंद्र उर्फ राजा साबू वर्ष 1991-92 में प्रेसीडेंट थे, पद्मश्री लेकिन उन्हें वर्ष 2006 में मिला; कल्याण बनर्जी प्रेसीडेंट वर्ष 2011-12 में बने, जबकि पद्मश्री उन्हें वर्ष 2009 में ही मिल चुका था । कल्याण बनर्जी को मेडिसिन में काम करने के लिए उक्त सम्मान मिला था, और वह देश के पहले होम्योपैथ हैं, जिन्हें उक्त सम्मान मिला । सुशील गुप्ता इस्तीफा न देते, तो वर्ष 2020-21 में प्रेसीडेंट बनते, लेकिन पद्मश्री से वह 2007 में ही सम्मानित हो चुके हैं । नितीश चंद्र लहरी के साथ जरूर यह संयोग बना कि वर्ष 1962-63 में वह प्रेसीडेंट बने, और 1963 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान मिला । लेकिन नितीश चंद्र लहरी वास्तव में बड़े 'आदमी' थे - उन्होंने नोबेल पुरुस्कार प्राप्त रबीन्द्रनाथ टैगोर के साथ साहित्यिक गतिविधियों में भाग लिया था, और बंगला फिल्मों के उत्थान/विकास में उनका अप्रतिम योगदान था । वह पहली बंगला मोशन फिल्म के निर्माता थे । उनकी सक्रियता और संलग्नता देख कर दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्हें यूनाइटेड एस्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ डिफेन्स की आधिकारिक इकाई आर्म्ड फोर्सेस एंटरटेनमेंट का वाइस चेयरमैन बनाया गया था । जाहिर है कि अपनी पहचान के लिए वह रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद के मोहताज नहीं थे - और यही कारण है कि उन्हें पद्मभूषण के लिए चुना गया था ।
शेखर मेहता के लिए मुसीबत और चुनौती की बात यह है कि नितीश चंद्र लहरी के बाद, कोलकाता के वह दूसरे रोटेरियन हैं - जो रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बने हैं । ऐसे में, स्वाभाविक रूप से कोलकाता के लोगों की नजर इस बात पर है कि शेखर मेहता को पद्मभूषण न सही - पद्मश्री भी मिल पाता है, या नहीं । इसीलिए शेखर मेहता रोटरी के बहाने से मंत्रियों के नजदीक होने और रहने के जरिये पद्मश्री पाने की कोशिशों में कोई कोर-कसर तो नहीं छोड़ रहे हैं - बस डर यही है कि रोटरी के बेईमानों के साथ 'दिखती' उनकी नजदीकी कहीं उनकी कोशिशों पर पानी न फेर दे ?

Monday, April 27, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में हैंड क्राफ्ट ज्वैलरी का ऑक्शन करके डब्ल्यूजीमील के तहत रोटरी फाउंडेशन के पोलियो फंड के लिए रकम जुटाने के उपक्रम के जरिये आभा झा चौधरी ने रोटरी में तो एक नई इबारत लिखी ही है, डिस्ट्रिक्ट 3011 को भी एक विशिष्ट पहचान दी है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट 3011 से बहुत समय बाद एक अच्छी खबर सुनने को मिली, जिसकी वाहक बनीं वरिष्ठ रोटेरियन आभा झा चौधरी । आभा झा चौधरी के अपने अकेले के प्रयत्नों से रोटरी फाउंडेशन के पोलियो फंड में एक ही दिन में करीब 45 हजार अमेरिकी डॉलर की रकम जुटी । आभा झा चौधरी ने खुद तैयार की हैंड क्राफ्टेड ज्वैलरी का ऑक्शन करके उक्त रकम इकट्ठा की - वास्तव में रकम उन्होंने अपने पास इकट्ठा भी नहीं की; उन्होंने तो अपने द्वारा तैयार की हैंड क्राफ्टेड ज्वैलरी को दिखाया और उसे खरीदने वाले को उसकी कीमत सीधे रोटरी फाउंडेशन को भेजने को कहा । रोटरी फाउंडेशन के पोलियो फंड के लिए पैसा इकट्ठा करने के प्रयासों में सक्रिय रहने वाली संस्था डब्ल्यूजीमील (वर्ल्ड ग्रेटेस्ट मील) की कंट्री कोऑर्डीनेटर के रूप में आभा झा चौधरी ने इस तरह अपने काम को एक नई ऊँचाई दी है । ऐसे समय में, जबकि डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर और बड़े पदाधिकारी रोटरी फाउंडेशन को टर्म गिफ्ट के रूप में 'दान' देने की वकालत करने में लगे हुए हैं, एक पूर्व प्रेसीडेंट आभा झा चौधरी ने पोलियो फंड के लिए रकम जुटाने के लिए अपनी सोच, अपनी प्रतिभा, अपने समय और अपनी मेहनत को न सिर्फ इस्तेमाल किया - बल्कि कामयाबी भी हासिल की, और कामयाबी के जरिये फंड इकट्ठा करने के प्रयासों को एक नई दिशा भी दी । आभा झा चौधरी ने जो किया, वह इस बात का भी सुबूत है कि रोटरी में एक व्यक्ति के प्रयासों को भी फलने-फूलने का मौका मिल सकता है; और यहाँ कोई भी अपनी प्रतिभा तथा अपनी कोशिशों से बड़ा काम कर सकता है । आभा झा चौधरी ने जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, उसमें दो इंग्रेडिऐंट की खासी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही - एक उनका हुनर और दूसरा रोटरी के लिए कुछ करने का जज़्बा । 
आभा झा चौधरी ने जो किया, उसका आधार बस इन्हीं दो इंग्रेडिऐंट से ही बन गया । लॉकडाउन के चलते अन्य लोगों की तरह आभा झा चौधरी को भी जब घर की चारदीवारी में कैद हो जाना पड़ा, तो समय का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने हैंड क्राफ्ट ज्वैलरी बनाने के बारे में सोचा । खास बात यह रही कि इससे पहले उन्होंने कभी ऐसी ज्वैलरी नहीं बनाई थी और उन्हें इसका कोई अनुभव भी नहीं था । इसके बावजूद, उन्हें यह आईडिया इसलिए आया क्योंकि अलग अलग जरूरतों के चलते घर में आया कुछ ऐसा सामान बचा पड़ा था, जिसे देख कर उनकी क्रिएटिव प्रतिभा ने उनसे ज्वैलरी तैयार करने के बारे में सोचा । अब सोचा, तो काम शुरू हुआ । काम शुरू हुआ, तो ज्वैलरी के डिजाईन तैयार करने से लेकर उन्हें क्रियान्वित करने तक के काम में आभा झा चौधरी को अपनी दोनों बेटियों का भी सहयोग मिला । समय का सदुपयोग करने के उद्देश्य से शुरू हुआ ज्वैलरी तैयार करने का काम चल रहा था, तो साथ-साथ रोटरी के लिए कुछ करने का कीड़ा भी कुलबुला रहा था - और ऐसे ही किसी क्षण आभा झा चौधरी को सूझा कि वह हैंड क्राफ्ट ज्वैलरी का ऑक्शन करके क्यों न डब्ल्यूजीमील के तहत रोटरी फाउंडेशन के पोलियो फंड के लिए रकम जुटाने का प्रयास करें - और इस तरह समय का सदुपयोग करने के उद्देश्य से किए गए काम को और सार्थक रूप दें ।
आभा झा चौधरी ने अपने इस विचार को विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में डब्ल्यूजीमील के अपने सहयोगियों के साथ साझा किया, तो उन्हें उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया मिली । डब्ल्यूजीमील की अन्तर्राष्ट्रीय प्रमुख सुजेन रेआ ने भी उन्हें उनके विचार को अमल में लाने के लिए प्रोत्साहित किया । चारों तरफ से मिले उत्साहवर्धन से आभा झा चौधरी का विश्वास बढ़ा, तो उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों - इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता, इंटरनेशनल डायरेक्टर्स भरत पांड्या और कमल सांघवी, रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वाहनवती आदि के साथ-साथ अन्य कई प्रमुख रोटेरियंस से अपनी योजना के बारे में बात की; उनकी खुशकिस्मती रही कि सभी ने उनकी योजना की तारीफ तो की ही - ऑक्शन में शामिल होने के लिए भी अपनी स्वीकृति दी, और इस तरह हैंड क्राफ्ट ज्वैलरी के ऑक्शन के लिए एक बड़ा मजबूत आधार तैयार हुआ । लॉकडाउन के समय का सदुपयोग करने के इरादे से शुरू हुआ उपक्रम आभा झा चौधरी की प्रतिभा तथा रोटरी के लिए कुछ करने के जज़्बे के साथ जुड़ कर एक बड़ा आयोजन बन गया, जो 26 अप्रैल को रोटरी के बड़े पदाधिकारियों तथा अन्य प्रमुख रोटेरियंस की उपस्थिति में आयोजित हुआ । इस आयोजन की कामयाबी के जरिये आभा झा चौधरी ने रोटरी में तो एक नई इबारत लिखी ही है, डिस्ट्रिक्ट 3011 को भी एक विशिष्ट पहचान दी है । 

Saturday, April 18, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में पूर्व गवर्नर आईएस तोमर को चीफ पेटर्न बनाने की घोषणा के जरिये डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल ने इस वर्ष हुई चुनावी हार का बदला लेने के लिए, अभी से चुनावी माहौल बनाना शुरू कर दिया है क्या ? 

अलीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल की पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर आईएस तोमर को डिस्ट्रिक्ट चीफ पेटर्न बनाने की घोषणा तथा घोषणा की 'टाईमिंग' को अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई के 'शंखनाद' के रूप में देखा/सुना जा रहा है । माना/समझा जा रहा है कि आईएस तोमर को लेकर की गई उक्त घोषणा के जरिये मुकेश सिंघल ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को यह संकेत दे दिया है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई में इस वर्ष बुरी तरह मात खाने के बावजूद अभी उन्होंने 'हार' नहीं मानी है, और इस वर्ष की हार का बदला अगले रोटरी वर्ष में लेने के लिए उन्होंने अभी से कमर कसना शुरू कर दी है । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि पिछले दिनों इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता जब अलीगढ़ में आयोजित हुए कार्यक्रम में आये थे, तो उन्होंने इस बात के लिए बड़ी फटकार लगाई थी कि डिस्ट्रिक्ट में हमेशा राजनीतिक उठापटक ही चलती रहती है, और रोटरी के कामों की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है; उन्होंने सुझाव दिया था कि राजनीति कम करके रोटरी के कामों पर ध्यान देने की जरूरत है । मुकेश सिंघल ने लेकिन लगता है कि शेखर मेहता की फटकार और उनके सुझाव को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दिया और राजनीति को ही रोटरी का मुख्य काम मान लिया है । यद्यपि यह सच है कि आईएस तोमर को अपने गवर्नर-वर्ष में डिस्ट्रिक्ट चीफ पेटर्न बनाने की घोषणा करके मुकेश सिंघल ने कोई नियमविरुद्ध काम नहीं किया है; हर (भावी) गवर्नर को यह अधिकार है कि वह अपनी पसंद के लोगों को अपनी टीम में पद दे - मुकेश सिंघल ने अपने इसी अधिकार का उपयोग करते हुए आईएस तोमर को डिस्ट्रिक्ट चीफ पेटर्न बनाया है । लेकिन जिस 'परिस्थिति' में मुकेश सिंघल ने यह फैसला किया है, और फैसला सुनाने/बताने की उनकी जो टाईमिंग है - उसमें डिस्ट्रिक्ट के लोगों को राजनीति 'दिखाई' दे रही है ।
उल्लेखनीय है कि पिछले 12/14 महीनों में डिस्ट्रिक्ट में पहले डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन और फिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चयन/चुनाव को लेकर जो उठापटक और छीनाझपटी वाले कांड हुए, उनके केंद्र में आईएस तोमर रहे । आईएस तोमर और उनके लोग डिस्ट्रिक्ट पर कब्जे को बनाये रखना चाहते थे, और डिस्ट्रिक्ट के दूसरे कई लोग डिस्ट्रिक्ट को उनके कब्जे से छुड़ाना चाहते थे । इस चक्कर में डिस्ट्रिक्ट में भारी गंद मचा और अंततः आईएस तोमर खेमे को बुरी हार का सामना करना पड़ा । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के रूप में मुकेश सिंघल, पराजित हुए आईएस तोमर खेमे के मुख्य सिपाही थे - इसलिए उम्मीद की गई थी कि बुरी हार से सबक लेकर मुकेश सिंघल अब अपनी गवर्नरी पर ध्यान देंगे और राजनीति के पचड़े से दूर रहेंगे । आईएस तोमर को चीफ पेटर्न बना कर मुकेश सिंघल ने लेकिन जता दिया है कि उनके सिर से राजनीति का भूत अभी उतरा नहीं है और डिस्ट्रिक्ट पर आईएस तोमर का कब्जा करवाना ही उनका मुख्य उद्देश्य है । इस फैसले को 'सुनाने' की टाईमिंग ने भी मुकेश सिंघल के इरादे की पोल खोलने का काम किया । उल्लेखनीय है कि रोटरी की 'व्यवस्था' में मौजूदा दिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स इलेक्ट की सक्रियता के हैं; वह अपनी टीम पूरी कर रहे हैं, अपनी टीम के पदाधिकारियों की ट्रेनिंग करवा रहे हैं और अपने गवर्नर-वर्ष के कामकाज को पटरी पर लाने के प्रयासों में लगे हैं । रोटरी की व्यवस्था में, अभी का गवर्नर नॉमिनी जुलाई में गवर्नर इलेक्ट बनने के बाद अपनी टीम चुनने और घोषित करने का काम करता है । मुकेश सिंघल ने लेकिन गवर्नर नॉमिनी के रूप में अभी ही अपने पदाधिकारी घोषित करने शुरू कर दिए हैं । कई लोगों को कहना है कि इस तरह से मुकेश सिंघल, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दिनेश शुक्ला के कामकाज को डिस्टर्ब करने तथा डिस्ट्रिक्ट में एक समानांतर सत्ता केंद्र 'बनाने' का प्रयास कर रहे हैं; और उनके इस प्रयास के पीछे अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के लिए 'फील्डिंग' सजाने का उद्देश्य है ।
तोमर खेमे की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अभी रोटरी क्लब झांसी रानी की पूर्व अध्यक्ष देवप्रिया उक्सा के नाम की चर्चा है । उनका मुकाबला रोटरी क्लब कानपुर इंडस्ट्रियल के पूर्व अध्यक्ष विवेक गर्ग के साथ होने की संभावना देखी जा रही है । तोमर खेमे के कुछेक नेताओं का हालाँकि यह भी कहना है कि देवप्रिया उक्सा की स्थिति को विवेक गर्ग के मुकाबले कमजोर पहचाना/समझा जा रहा है, और खेमे के नेता कानपुर में ही कोई ऐसा उम्मीदवार खोज रहे हैं - जो विवेक गर्ग को सचमुच टक्कर दे सके । अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जीतना तोमर खेमे के लिए बहुत ही जरूरी है, अन्यथा आईएस तोमर के डिस्ट्रिक्ट में पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाने तथा तोमर खेमे के बिखर जाने का खतरा पैदा हो जायेगा । इस वर्ष हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में तोमर खेमे को जो झटका लगा है, उससे उनकी ताकत वैसे ही काफी कमजोर हो गई है । इस वर्ष लगे झटके के असर को तोमर खेमे के नेता हालाँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू द्वारा की गई बेईमानी को तथा अपने उम्मीदवार सतीश जायसवाल के मैदान छोड़ देने को जिम्मेदार ठहराकर खत्म करने की कोशिश तो खूब कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिश सफल होती हुई नजर नहीं आ रही है । ऐसे में यदि अगले रोटरी वर्ष में वह फिर चुनाव हार गए, तब उनके पास कोई बहाना भी नहीं बचेगा । तोमर खेमे के नेताओं के लिए मुसीबत और विडंबना की बात यह है कि उन्होंने देवप्रिया उक्सा को उम्मीदवार तो बना/बनवा दिया है, लेकिन उन्हें यह भरोसा भी नहीं हो पा रहा है कि उनकी उम्मीदवारी के सहारे वह लड़ाई जीत ही लेंगे । समझा जाता है और लोगों के बीच चर्चा है कि अपनी कमजोरी को भाँपते/पहचानते हुए ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल ने आईएस तोमर को चीफ पेटर्न बनाने की घोषणा अभी से करके डिस्ट्रिक्ट में चुनावी माहौल बनाना शुरू कर दिया है ।

Wednesday, April 15, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में रोटरी क्लब दिल्ली अनंता ने कोरोना-काल में सेवा-कार्यों के जरिये दूसरों को प्रेरित करने के साथ साथ डिस्ट्रिक्ट की इज्जत बचाई, तो प्रियतोष गुप्ता ने रोटरी के सेवा-धर्म के अभियान को नागरिक-समाज में और विश्वसनीय व प्रतिष्ठित करने की लीडरशिप खूबी को दिखाया

गाजियाबाद । कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते बने हालात में परेशानी का शिकार बन रहे लोगों की मदद के लिए आगे आकर रोटरी क्लब दिल्ली अनंता, रोटरी क्लब दिल्ली शाहदरा, रोटरी क्लब दिल्ली अशोका, रोटरी क्लब इंदिरापुरम परिवार, रोटरी क्लब गाजियाबाद मेट्रो, रोट्रेक्टर्स आदि ने मानवता की सेवा का रोटरी धर्म तो निभाया ही है, साथ ही साथ डिस्ट्रिक्ट की इज्जत बचाने का काम भी किया है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता ने कोरोना वायरस के प्रकोप से बने हालात के पीड़ितों के लिए किसी भी तरह के सहायता कार्यक्रम चलाने से इंकार कर दिया था । कुछेक रोटेरियंस ने उन्हें सहायता कार्यक्रम चलाने के लिए कहा था, तो उन्होंने उन्हें सिविल डिफेंस के साथ मिल कर सहायता कार्यक्रम करने/चलाने की सलाह देकर अपनी जिम्मेदारी से हाथ झाड़ लिया था । दीपक गुप्ता के गैरजिम्मेदारी से भरे इस रवैये से निराश होकर कुछेक क्लब्स ने अपनी अपनी पहल से पीड़ितों की मदद के लिए सक्रियता दिखाई । इस मामले में रोटरी क्लब दिल्ली अनंता डिस्ट्रिक्ट के दूसरे क्लब्स तथा रोटेरियंस के लिए प्रेरणास्रोत बना । इस क्लब ने रोटरी इंडिया ह्यूमेनिटी फाउंडेशन में मोटी रकम तो दान में दी ही, परेशान और पीड़ित लोगों की मदद करने तथा उनके लिए खाने की व्यवस्था करने को लेकर भी निरंतर सक्रियता दिखाई । रोटरी क्लब दिल्ली अनंता की सक्रियता के क्षेत्र दिल्ली की बस्तियाँ रहीं, तो गाजियाबाद क्षेत्र में परेशान व पीड़ितों की तरफ रोटरी क्लब गाजियाबाद मेट्रो के पदाधिकारियों व सदस्यों ने मदद का हाथ बढ़ाया । दीपक गुप्ता ने खासा अवसरवादी रवैया दिखाया - पहले तो वह कोई सहायता कार्यक्रम चलाने/करने के पक्ष में ही नहीं थे, लेकिन उनके द्वारा हतोत्साहित किए जाने के बाद भी कुछेक क्लब्स ने जब अपने अपने स्तर पर काम शुरू किए, तो उन कामों का श्रेय जबर्दस्ती लेने के लिए वह आगे आ गए; और शेखर मेहता, भरत पांड्या, कमल सांघवी आदि को यह 'दिखाने' लगे जैसे कि यह सब काम वही कर/करवा रहे हैं ।
अच्छी बात यह रही कि दीपक गुप्ता की इस हरकत पर काम करने वाले क्लब्स के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कोई ध्यान नहीं दिया, और इसलिए नाहक कोई विवाद पैदा नहीं हुआ । क्लब्स के पदाधिकारियों और सदस्यों ने अपने अपने काम पर ध्यान दिया, और अपनी अपनी सामर्थ्यानुसार पीड़ितों व परेशान लोगों की मदद के लिए काम किया । रोटरी क्लब दिल्ली अनंता ने अपने स्तर पर तो मदद की ही, रिलायंस फाउंडेशन के साथ तालमेल बना कर भी मदद की व्यवस्था की । रोटरी क्लब दिल्ली अनंता की सक्रियता दूसरे कुछेक क्लब्स के लिए भी प्रेरणा बनी और इस तरह डिस्ट्रिक्ट में रोटरी के सेवा-धर्म के संदर्भ में माहौल बना । रोटरी क्लब गाजियाबाद मेट्रो के पदाधिकारियों और सदस्यों ने गाजियाबाद क्षेत्र में दिल्ली अनंता की तर्ज पर काम किया । गाजियाबाद मेट्रो के पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रेरित व सक्रिय करने का काम क्लब के वरिष्ठ सदस्य प्रियतोष गुप्ता ने किया । प्रियतोष गुप्ता अगले रोटरी वर्ष की आलोक गुप्ता की डिस्ट्रिक्ट टीम के एक प्रमुख पदाधिकारी भी हैं, और इस नाते उन्हें आलोक गुप्ता द्वारा आयोजित की जाने वाली कई जूम मीटिंग्स में भी शामिल होना पड़ा - और अपने पद की जरूरत के अनुसार, उसके लिए आवश्यक तैयारी करने में भी व्यस्त होना पड़ा । उल्लेखनीय है कि आलोक गुप्ता ने हाल ही के दिनों में रोटरी के बड़े पदाधिकारियों से लेकर अगले वर्ष के अपने गवर्नर-काल के क्लब-प्रेसीडेंट्स तथा अपनी डिस्ट्रिक्ट टीम के सदस्यों साथ अलग अलग ग्रुप्स में जूम मीटिंग्स की हैं; जिनके चलते आलोक गुप्ता की डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदाधिकारी होने के नाते प्रियतोष गुप्ता को उक्त मीटिंग्स की तैयारी करने से लेकर अपने पद की जिम्मेदारी निभाने की तैयारी तक में जुटना और व्यस्त रहना पड़ा ।
प्रियतोष गुप्ता ने आलोक गुप्ता के कार्यक्रमों में जिम्मेदारी निभाने से लेकर समाज में पैदा हुई विपदा में रोटरी का सेवा-धर्म निभाने के संदर्भ में अपनी सक्रियता और व्यस्तता को जिस प्रभावी तरीके से संभव किया और दिखाया, उसके जरिये डिस्ट्रिक्ट में लोगों को प्रियतोष गुप्ता की लीडरशिप खूबियों से परिचित होने का मौका मिला । प्रियतोष गुप्ता चूँकि अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए उनकी लीडरशिप खूबियों से परिचित होने का डिस्ट्रिक्ट के लोगों को मिले मौके का राजनीतिक अर्थ और महत्त्व भी है । रोटरी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति में उम्मीदवारों को रोटेरियंस से अलग नागरिक-समाज की मदद करते हुए कम ही देखा गया है । इस लिहाज से, कोरोना प्रकोप के चलते बने हालात में जरूरतमंदों की मदद को लेकर दिखाई गई प्रियतोष गुप्ता की सक्रियता ने वास्तव में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है । प्रियतोष गुप्ता ने अपने क्लब के पदाधिकारियों व सदस्यों को तो जरूरतमंदों की मदद के लिए तो प्रेरित किया ही, शहर की अन्य कुछेक सामाजिक संस्थाओं के साथ भी तालमेल बनाया - और इस तरह न सिर्फ जरूरतमंदों को पहुँचाई जाने वाली मदद को व्यापक बनाने का काम किया, बल्कि अन्य सामाजिक संस्थाओं के साथ तालमेल बनाने के 'रास्ते' भी खोजे और खोले । प्रियतोष गुप्ता की इन कार्रवाईयों को रोटरी के सेवा-धर्म के अभियान को नागरिक-समाज में और विश्वसनीय व प्रतिष्ठित करने की लीडरशिप खूबी के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है ।  

Thursday, April 9, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व गवर्नर मंजीत साहनी ने रोटरी ब्लड बैंक के अकाउंट से बड़ी रकम दान करने के जरिये शेखर मेहता को खुश करके अपनी राजनीति संभालने की विनोद बंसल की कोशिश को बाहर से जो झटका दिया, उसे गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में सुरेश जैन ने अंजाम तक पहुँचाया और विनोद बंसल की योजना पर पानी फेर दिया 

नई दिल्ली । विनोद बंसल ने रोटरी ब्लड बैंक के अकाउंट से मोटी रकम दान में देने के अपने मनमाने फैसले को तथाकथित गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में मंजूर करवाने के लिए फील्डिंग तो बेहद कसी हुई सजाई थी, लेकिन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मंजीत साहनी की एक 'आउट स्विंग' ने उनकी फील्डिंग को ऐसा ऐसा तहसनहस किया कि फिर उनका फैसला तो मंजूर नहीं ही हुआ - उन्हें फजीहत का सामना और करना पड़ा । इस मामले में और भी बुरी बात यह हुई कि विनोद बंसल के चक्कर में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के लिए भी दुविधा के हालात बने । मामले से परिचित हर व्यक्ति को हैरानी हुई कि शेखर मेहता आखिर विनोद बंसल के चक्कर में फँस कैसे गए ? हालाँकि मीटिंग से पहले तक जो 'स्थिति' थी, उसमें कोई भी विनोद बंसल के चक्कर में फँस सकता था । अपने फैसले को मंजूर करवाने के लिए विनोद बंसल ने बड़ी चाक-चौबंद व्यवस्था की थी; उनकी 'व्यवस्था' में कोई सेंध न लगा सके, इसके लिए उन्होंने शेखर मेहता का और उनके नाम का भरपूर इस्तेमाल किया । मीटिंग में उन्हें, जिन सदस्यों की तरफ से विरोध की आशंका थी, उनके मुँह बंद रखवाने के लिए उन्होंने शेखर मेहता रूपी टेप का पक्का इस्तेमाल किया हुआ था । विनोद बंसल ने ब्लड बैंक के सेक्रेटरी रमेश अग्रवाल और ट्रेजरर संजय खन्ना को अपने फैसले के पक्ष में करके हालात को पूरी तरह साध लिया था; यह दोनों सिर्फ विनोद बंसल के फैसले के साथ ही नहीं थे, बल्कि फैसले के विरोध में दिख रहे गवर्निंग बॉडी के सदस्यों को भी मनाने के काम में लगे हुए थे । ऐसे में, यही माना/समझा जा रहा था कि रोटरी ब्लड बैंक की गवर्निंग बॉडी की जूम मीटिंग में 'अपने' फैसले को मंजूर करवाने में विनोद बंसल को कोई दिक्कत नहीं होगी ।
लेकिन मंजीत साहनी ने विनोद बंसल की सारी तैयारी पर पानी फेर दिया ।
मीटिंग शुरू होने से कुछेक घंटे पहले, मंजीत साहनी ने सोशल मीडिया में एक संदेश दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि रोटरी में बने ट्रस्ट के असली 'मालिक' डिस्ट्रिक्ट के सदस्य होते हैं, और काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की सहमति के बाद ही वह बनते हैं - इसलिए उसकी संपत्ति व जमापूँजी के बारे में फैसला करने का अधिकार ट्रस्ट की गवर्निंग बॉडी को नहीं है । मंजीत साहनी के इस संदेश ने दरअसल 'बिल्ली के गले में घंटी बाँधने' का काम किया । असल में, मंजीत साहनी के मामले में कूदने से पहले हर कोई शेखर मेहता की संलग्नता के कारण चुप बना हुआ था । विनोद बंसल इसी चुप्पी में अपना काम निकालने की तैयारी में थे । मंजीत साहनी के संदेश ने लेकिन उक्त चुप्पी को भंग कर दिया । सोशल मीडिया में फिर कई पूर्व गवर्नर्स ने विनोद बंसल की ब्लड बैंक का अकाउंट खाली करने की मनमानी कार्रवाई के प्रति अपनी नाराजगी दिखाई । यह इस बात का स्पष्ट संकेत था कि विनोद बंसल का 'रायता' फैलने लगा है । यह फैलता 'रायता' गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में लेथन/गंदगी न करे, इसके लिए विनोद बंसल ने अभूतपूर्व तरीका अपनाया - और वह यह कि गवर्निंग बॉडी की मीटिंग की शुरुआत उन्होंने शेखर मेहता से करवाई । दिल्ली स्थित रोटरी ब्लड बैंक से शेखर मेहता का कोई मतलब नहीं है; एक बड़े पदाधिकारी होने के नाते ब्लड बैंक के किसी समारोह में शेखर मेहता उपस्थित हों - तो बात समझ में आती है; लेकिन ब्लड बैंक की गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में उनकी मौजूदगी एक अभूतपूर्व बात बनी । समझा जाता है कि विनोद बंसल ने शेखर मेहता से मीटिंग की शुरुआत मीटिंग में मौजूद सदस्यों पर दबाव बनाने के लिए करवाई । लेकिन उनकी  तरकीब बुरी तरह फेल हो गई ।
मंजीत साहनी ने जो काम 'बाहर' किया था, गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में वही काम वरिष्ठ पूर्व गवर्नर सुरेश जैन ने किया । मीटिंग में, शेखर मेहता के तुरंत बाद सुरेश जैन ने बोला और उन्होंने पूरी स्पष्टता व दृढ़ता के साथ ब्लड बैंक के अकाउंट को खाली करने की विनोद बंसल की कोशिश का दो-टूक विरोध किया । सुरेश जैन की बातों ने शेखर मेहता की मौजूदगी तथा उनकी अपील से बने प्रभाव को पूरी तरह धो-पोंछ दिया । सुरेश जैन की बातों ने एक तरह से मीटिंग की दशा-दिशा तय कर दी । रही-सही कसर रूपक जैन ने पूरी कर दी । इसके बाद तो हर कोई जैसे विनोद बंसल से बदला लेने पर उतारू दिखा । माहौल देख कर रमेश अग्रवाल और संजय खन्ना ने भी पाला बदल लिया, और वह भी विनोद बंसल के फैसले की खिलाफत करते नजर आए । रमेश अग्रवाल ने तो जोश जोश में यह पोल भी खोल दी कि विनोद बंसल तो यह मीटिंग ही नहीं करना चाहते थे, वह तो इस कोशिश में थे कि तीन-चार पदाधिकारी मिल कर ही ब्लड बैंक के अकाउंट को खाली करने का फैसला कर लें । यह पोल खुलने के बाद माहौल और गर्मा गया, तथा अनूप मित्तल बुरी तरह भड़के । इसके बाद तो मीटिंग में विनोद बंसल पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए और किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया । ऐसे में, विनोद बंसल ब्लड बैंक के अकाउंट को खाली करने का अपना फैसला मंजूर भला कैसे करवाते ? मीटिंग  में जो हुआ, उसमें विनोद बंसल को सिर्फ अपना फैसला मंजूर करवाने में ही हार का मुँह नहीं देखना पड़ा, बल्कि यह सच्चाई भी लोगों के सामने आई कि अपने ही डिस्ट्रिक्ट में वह पूरी तरह अलग-थलग हैं । इस बात ने राजनीतिक रूप से विनोद बंसल को तगड़ा झटका दिया है ।