Showing posts with label SATISH SINGHAL. Show all posts
Showing posts with label SATISH SINGHAL. Show all posts

Wednesday, October 7, 2020

रोटरी इंटरनेशनल जोन 7 में डायरेक्टर पद पर महेश कोटबागी की चुनावी जीत से रोटरी में शेखर मेहता के 'रुतबे' में आए उछाल में, डिस्ट्रिक्ट 3012 के सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मान्यता मिलने की उम्मीद बढ़ी    

नोएडा । महेश कोटबागी के इंटरनेशनल डायरेक्टर चुने जाने से इंटरनेशनल प्रेसीडेंट शेखर मेहता के 'रुतबे' में जो वृद्धि हुई है, उससे डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहे सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की मान्यता मिलने की उम्मीद जाग उठी है । सतीश सिंघल वर्ष 2017-18 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर थे, और नोएडा रोटरी ब्लड बैंक का प्रेसीडेंट पद भी सँभाले हुए थे । नोएडा रोटरी ब्लड बैंक में घपलेबाजी के आरोपों के  चलते उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद खोना पड़ा था, और फिर उन्हें पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में भी मान्यता नहीं मिली । सतीश सिंघल पूर्व गवर्नर की मान्यता पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे । इस मामले में, इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद की तरफ बढ़ते शेखर मेहता से सतीश सिंघल को उम्मीद बनी थी । चर्चा सुनी गई थी कि शेखर मेहता ने रोटरी फाउंडेशन की ग्रांट की रकम में घपलेबाजी के आरोप में रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाए डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व गवर्नर अनिल अग्रवाल की सजा को कम करवाने के साथ साथ सतीश सिंघल के मामले को भी प्रायरिटी में रखा हुआ था । करीब चार महीने पहले अनिल अग्रवाल का काम तो बन गया था, और उनकी सजा कम कर दी गई थी - लेकिन सतीश सिंघल के मामले में उस समय फैसला नहीं हो सका था । 
उसके बाद, शेखर मेहता खुद मुसीबत में फँस गए । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड में कुछेक ऐसे फैसले हुए, जिन्होंने शेखर मेहता की 'हैसियत' को चोट पहुँचाने का काम किया और ऐसा लगा कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी/इलेक्ट होने के बावजूद रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में शेखर मेहता की वैसी 'हैसियत' नहीं बन पाई है, जैसी कि बननी/होनी चाहिए । दरअसल, कई घटनाएँ ऐसी होती हैं जो किसी पदाधिकारी की स्थिति पर तो कोई असर नहीं डालती हैं, लेकिन उसके 'रुतबे' को प्रभावित जरूर करती हैं - और उससे उसकी 'हैसियत' निर्धारित होती है । शेखर मेहता इसी चीज के शिकार बने । ऐसे में, जोन 7 में दोबारा होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के नतीजे का शेखर मेहता के 'रुतबे' के संदर्भ में खास महत्त्व था । जोन 7 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद पर महेश कोटबागी की जीत से शेखर मेहता की स्थिति पर 'तकनीकी रूप से' कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन महेश कोटबागी की जीत ने पिछले कुछ समय से दबाव झेल रहे शेखर मेहता को बड़ी राहत दी है - और उनके 'इकबाल' को बढ़ाया है । 

महेश कोटबागी की चुनावी जीत से रोटरी की राजनीति और व्यवस्था में शेखर मेहता के 'रुतबे' में जो उछाल आया है, उसमें सतीश सिंघल के सिफारिशियों को सतीश सिंघल का काम बनता नजर आ रहा है । शेखर मेहता के यहाँ सतीश सिंघल की वकालत करने वाले लोगों का कहना है कि अभी तक जब शेखर मेहता खुद मुसीबत में फँसे थे, तो उनसे सतीश सिंघल के मामले में कुछ करने के लिए कहना मुश्किल हो रहा था; लेकिन अब जोन 7 में दोबारा हुए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी नतीजे के चलते हालात बदल गए हैं - और उम्मीद की जानी चाहिए कि शेखर मेहता जल्दी ही डिस्ट्रिक्ट 3054 के अनिल अग्रवाल की तरह डिस्ट्रिक्ट 3012 के सतीश सिंघल का काम भी बनवा देंगे - और सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मान्यता मिल जाएगी ।

Tuesday, September 25, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'घोषित' करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता की अनधिकृत कार्रवाई ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सुशील गुप्ता के लिए भी फजीहत की स्थिति बनाई

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट 3012 के रोटेरियंस 13 अक्टूबर को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सुशील गुप्ता का स्वागत-सम्मान करने की तैयारी में लगे हुए हैं, लेकिन दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता ने सुशील गुप्ता की फजीहत करवाने के लिए मंच पूरी तरह से सजा दिया है । अपने पहले कार्यक्रम - पेम वन के मौके पर प्रकाशित डायरेक्टरी में दीपक गुप्ता ने सतीश सिंघल का नाम काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की सूची में प्रकाशित करते हुए उन्हें पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मान्यता दी है । पिछले रोटरी वर्ष में तत्कालीन इंटरनेशनल प्रेसीडेंट तथा रोटरी इंटरनेशनल का फैसला बताते हुए लिखे पत्र में सतीश सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से हटाते हुए साफ शब्दों में लिखा था कि सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में भी मान्यता नहीं मिलेगी । रोटरी को लेकर बड़ी बड़ी बातें करने तथा रोटरी से संबंधित ज्ञान झाड़ने वाले दीपक गुप्ता को क्या इतनी मामूली सी बात पता नहीं है, या समझ नहीं आ रही है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट ने जब यह कहा है - और बाकायदा लिखित में कहा है कि सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं माना/कहा जायेगा; तब फिर वह क्यों और कैसे अपने रिकॉर्ड में सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कह/बता सकते हैं ? दीपक गुप्ता अपने आपको क्या इंटरनेशनल प्रेसीडेंट और रोटरी इंटरनेशनल से भी ऊपर मानते/समझते हैं; और रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों की बजाये अपने नियम चलाना चाहते हैं ? इस मामले में दीपक गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर मुकेश अरनेजा का रवैया खासा दिलचस्प है । पेम वन समारोह में मौजूद डिस्ट्रिक्ट 3011 के कुछेक पूर्व गवर्नर्स ने दीपक गुप्ता की डायरेक्टरी में जब सतीश सिंघल का नाम छपा देखा, तो उन्होंने मुकेश अरनेजा से इस बारे में पूछा; मुकेश अरनेजा ने उस समय तो यह कहते हुए बात को टाल दिया कि डायरेक्टरी तैयार करने का काम दीपक गुप्ता ने ही किया है, और दीपक गुप्ता ने इसमें उनसे कोई सलाह नहीं ली, जिस कारण उनका इसमें कोई दखल नहीं रहा - बाद में लेकिन वह यह कहते/बताते हुए मजे लेते दिखे/सुने गए कि सतीश सिंघल के क्लब के रवि सचदेवा से दो लाख रुपए ऐंठने के लिए दीपक गुप्ता ने अपनी डायरेक्टरी में सतीश सिंघल को अनधिकृत रूप से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'दिखा' दिया है ।  
मुकेश अरनेजा के लोगों के बीच किए जा रहे दावों के अनुसार, दीपक गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के तीनों उम्मीदवारों से पेम वन के लिए दो दो लाख रुपए बसूले हैं । मुकेश अरनेजा का ही दावा है कि पेम वन के आयोजन में दीपक गुप्ता ने पैसों की जमकर बसूली की है, और पेम वन में करीब आठ/दस लाख रुपए कमा लिए हैं । नए रोटेरियंस को मुकेश अरनेजा से इस तरह की बातें सुनकर हैरानी भी हो रही है; क्योंकि वह देख रहे हैं कि दीपक गुप्ता और मुकेश अरनेजा तो साथ-साथ हैं, दीपक गुप्ता ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया है - आखिर फिर क्यों दीपक गुप्ता को लेकर मुकेश अरनेजा इस तरह की बातें कर रहे हैं ? लेकिन पुराने रोटेरियंस जानते हैं कि मुकेश अरनेजा जिस थाली में खाते हैं, उसमें ही छेद करने के शौकीन रहे हैं । उन्हें जानने वाले लोगों का कहना है कि अपने को महत्त्वपूर्ण बनाए रखने के लिए मुकेश अरनेजा 'क्रिएट द प्रॉब्लम, देन सॉल्व द प्रॉब्लम' वाले फार्मूले पर काम करते रहे हैं; पहले वह समस्या पैदा करते हैं और उसे बढ़ाते हैं, और फिर उसे हल करने में जुटते हैं । लोगों को लगता है कि वह दीपक गुप्ता के साथ भी यही खेल खेल रहे हैं, जिसके तहत मुकेश अरनेजा पहले तो दीपक गुप्ता को बदनामी और मुसीबत के दलदल में फँसायेंगे, ताकि दीपक गुप्ता मदद के लिए उन पर ज्यादा से ज्यादा आश्रित हों । उनके नजदीकियों को ही शक है कि पेम वन के आयोजन में दीपक गुप्ता द्वारा कमाई करने की बातों के साथ-साथ सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'घोषित' करने के मामले को भी हवा देने में मुकेश अरनेजा खुद दिलचस्पी ले रहे हैं, ताकि दीपक गुप्ता मुसीबत में फँसे और फजीहत का शिकार हों - और फिर उससे निकलने के लिए उनसे मदद माँगे और उन पर आश्रित हों ।
मुकेश अरनेजा जो कर रहे हैं या करना चाह रहे हैं, वह तो उन्हें जानने वालों को समझ में आ रहा है; लेकिन दीपक गुप्ता के शुभचिंतकों को हैरानी इस बात की है कि उनकी मति क्यों मारी गई है - जो वह रोटरी इंटरनेशनल के फैसलों को खुली चुनौती दे रहे हैं । सतीश सिंघल के मामले में दीपक गुप्ता हालाँकि लगातार सावधानी बरतते/दिखाते रहे हैं - सतीश सिंघल के प्रति गाहे-बगाहे हमदर्दी दिखाते रहने के बावजूद, 'होशियारी' के साथ आयोजित किए गए अनधिकृत थैंक्स गिविंग कार्यक्रम में दीपक गुप्ता नहीं गए; अनधिकृत थैंक्स गिविंग कार्यक्रम में अनधिकृत अवॉर्ड पाने वालों की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करने का 'जोश' डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी आलोक गुप्ता ने तो कई मौकों पर दिखाया, लेकिन दीपक गुप्ता ने ऐसा कोई काम नहीं किया; अभी हाल ही में सतीश सिंघल के क्लब के अधिष्ठापन समारोह में मुकेश अरनेजा और आलोक गुप्ता के साथ शामिल होना तो दीपक गुप्ता ने स्वीकार किया, और समारोह में एक साधारण रोटेरियन के रूप में मौजूद सतीश सिंघल के साथ उन्होंने तस्वीरें भी खिंचवाईं - लेकिन समारोह में सतीश सिंघल को निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर या पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का 'ओहदा' दिलवाने के लिए उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया । इस तरह, मुकेश अरनेजा और आलोक गुप्ता के साथ-साथ दीपक गुप्ता ने भी सतीश सिंघल के साथ सुविधानुसार कभी/कहीं पास तो कभी/कहीं दूर रहने/दिखने का नाटक खासी होशियारी के साथ किया है । उनके इस नाटक को देखते/समझते हुए ही लोगों को हैरानी है कि दीपक गुप्ता ने अपनी डायरेक्टरी में सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'घोषित' करने का रोटरी विरोधी काम कैसे और क्यों कर दिया ? कुछेक लोगों को लगता है कि दीपक गुप्ता ने यह काम अपने अहंकार में कर दिया है; दरअसल दीपक गुप्ता अक्सर ही दिखाते/जताते रहते हैं कि रोटरी के बारे में वह जितना जानते हैं उतना तो कोई भी नहीं जानता; सतीश सिंघल के मामले में हो सकता है कि उन्होंने मान लिया हो कि वह तो रोटरी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल प्रेसीडेंट से भी ज्यादा जानते हैं - और रोटरी इंटरनेशनल भले ही न माने, पर वह तो सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मानते हैं; कुछेक लोगों को मुकेश अरनेजा की बात सही लगती है कि रवि सचदेवा से दो लाख रुपए ऐंठने के लिए उन्होंने सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'घोषित' कर दिया है ।
दीपक गुप्ता की इस हरकत ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने गए सुशील गुप्ता के लिए भारी फजीहत की स्थिति पैदा कर दी है । नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार के रूप में चुने गए सुशील गुप्ता चेलैंज के लिए दी गई समयसीमा के पूरा होने के बाद एक अक्टूबर को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी घोषित होंगे । उससे पहले ही उनके समझे जाने वाले डिस्ट्रिक्ट के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता ने ऐसा कांड कर दिया, जो रोटरी इंटरनेशनल के फैसले को ही स्वीकार करने से इंकार करता है । विडंबना की बात यह भी है कि दीपक गुप्ता ने अपनी जिस डायरेक्टरी में रोटरी इंटरनेशनल के फैसले को ठेंगा दिखाते हुए सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'घोषित' किया है, उसके विमोचन होने के पेम वन समारोह में सुशील गुप्ता भी मौजूद थे । अभी दो-तीन वर्ष पहले ही किसी बातचीत में सुशील गुप्ता का जिक्र आने पर दीपक गुप्ता ने बड़ी हेकड़ी से कहा था - 'हू इज सुशील गुप्ता ?' तब से अब तक हालाँकि काफी कुछ बदल गया है - दीपक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने जा रहे हैं; सुशील गुप्ता इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होने जा रहे हैं; लेकिन लगता है कि दीपक गुप्ता का हेकड़ी वाला रवैया नहीं बदला है - सतीश सिंघल को मनमाने तरीके से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर घोषित करते हुए दीपक गुप्ता हो सकता है कि अब भी कह दें - 'हू इज सुशील गुप्ता', 'हू इज रोटरी इंटरनेशनल' ।
__________________________________________________________

रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के पत्र का वह हिस्सा, जिसमें सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मान्यता नहीं देने का फैसला सुनाया गया है : 

  
दीपक गुप्ता के पेम वन में विमोचित हुई डायरेक्टरी का वह पृष्ठ, जिसमें सतीश सिंघल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'घोषित' किया गया है : 


Saturday, September 22, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में मुकेश अरनेजा की हरकतों से परेशान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता ने यदि उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद से सचमुच हटाया, तो मुकेश अरनेजा के लिए यह तीसरी बार फजीहत की स्थिति होगी

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर मुकेश अरनेजा के साथ क्या वही सुलूक करने की तरफ बढ़ रहे हैं, जो आठ वर्ष पहले तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अमित जैन ने मुकेश अरनेजा के साथ किया था ? वरिष्ठ रोटेरियंस को याद है कि अमित जैन ने मुकेश अरनेजा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया था, किंतु एक-डेढ़ महीने में मुकेश अरनेजा की हरकतों को देख कर अमित जैन ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद से हटा दिया था । दीपक गुप्ता के नजदीकियों का कहना/बताना है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में मुकेश अरनेजा की हरकतों से दीपक गुप्ता भी परेशान हो उठे हैं, और वह मुकेश अरनेजा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद से हटा देने पर विचार कर रहे हैं । नजदीकियों के अनुसार, मुकेश अरनेजा से दीपक गुप्ता को कोई मदद तो मिल नहीं रही है - मुकेश अरनेजा उनके लिए मुसीबतें और खड़ी कर रहे हैं । पेम वन के आयोजन को लेकर मुकेश अरनेजा ने जो जो काम करने को लेकर दीपक गुप्ता को आश्वस्त किया था, उनमें से वह कोई भी काम करवा तो नहीं ही सके, ऐन मौके तक उन्होंने दीपक गुप्ता को अँधेरे में और रखा । दीपक गुप्ता के शुभचिंतकों का कहना है कि वह तो समय रहते दीपक गुप्ता ने मुकेश अरनेजा की क्षमताओं को भाँप लिया और जान/समझ लिया कि वह यदि मुकेश अरनेजा के चक्कर में रहे, तो फजीहत का शिकार होंगे - और इसलिए अपने पहले कार्यक्रम के रूप में पेम वन की तैयारी की कमान उन्होंने खुद सँभाल ली । दीपक गुप्ता का अनुभव रहा कि मुकेश अरनेजा बातें तो बड़ी ऊँची ऊँची करते हैं, लेकिन रिजल्ट देने के मामले में 'पिट' जाते हैं - इसीलिए दीपक गुप्ता के नजदीकियों को लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में दीपक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद से मुकेश अरनेजा की छुट्टी कर सकते हैं ।
मजे की बात यह है कि मुकेश अरनेजा यह तो समझ रहे हैं कि दीपक गुप्ता उनसे खुश नहीं हैं, लेकिन उनका दावा है कि दीपक गुप्ता उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद से हटाने की हिम्मत नहीं करेंगे । मुकेश अरनेजा के नजदीकियों के अनुसार, मुकेश अरनेजा का मानना/कहना है कि वह इस बात को अच्छी तरह से समझ रहे हैं कि दीपक गुप्ता ने खुशी से नहीं, बल्कि मजबूरी में उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया है - और दीपक गुप्ता की यही मजबूरी उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद पर बनाये रखेगी । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि दीपक गुप्ता ने पहले जेके गौड़ को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाने का निश्चय किया था, लेकिन हालात कुछ ऐसे पलटे कि फिर वह मुकेश अरनेजा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाने के लिए मजबूर हुए । मुकेश अरनेजा का मानना/कहना है कि दीपक गुप्ता जिस कारण से उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाने के लिए मजबूर हुए, उसी कारण से दीपक गुप्ता उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाये रखने के लिए भी मजबूर रहेंगे । मुकेश अरनेजा तो अपने नजदीकियों के बीच यह दावा करते हुए भी सुने गए हैं कि दीपक गुप्ता के बाद आलोक गुप्ता भी अपने गवर्नर-वर्ष में उन्हें ही डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनायेंगे । मुकेश अरनेजा के कुछेक नजदीकियों का तो यहाँ तक कहना/बताना है कि मुकेश अरनेजा ने तो आलोक गुप्ता के गवर्नर-वर्ष की टीम के सदस्यों को भी चुनना शुरू कर दिया है ।
डिस्ट्रिक्ट के जो लोग मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता - तीनों के नजदीक हैं, उनका कहना/बताना है कि दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता एक जैसे कारणों से मुकेश अरनेजा से खफा तो हैं; और मुकेश अरनेजा को इस बात का पता भी है । इन्हीं नजदीकियों को लगता है कि मुकेश अरनेजा ऊपर ऊपर से भले ही दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता के मजबूर होने का दावा करते हों, लेकिन वास्तव में वह इस आशंका से डरे हुए भी हैं कि दीपक गुप्ता कहीं सचमुच उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद से हटा न दें । दरअसल मुकेश अरनेजा के साथ बदकिस्मती की बात यह हुई है कि वह दो बार डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके हैं - अमित जैन ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया और फिर जल्दी ही हटा दिया; दूसरी बार पिछले वर्ष सतीश सिंघल ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया था - सतीश सिंघल को ही गवर्नरी पूरी करने का मौका नहीं मिला, जिस कारण मुकेश अरनेजा का डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का कार्यकाल भी पूरा नहीं हो सका । ऐसे में मुकेश अरनेजा को डर है कि कहीं दीपक गुप्ता ने भी उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद से हटा दिया, तो यह उनके लिए बड़ी फजीहत की बात होगी । उनके नजदीकियों के अनुसार, इसीलिए मुकेश अरनेजा बहुत सावधानी बरत रहे हैं और प्रयास कर रहे हैं कि उनकी किसी कार्रवाई से दीपक गुप्ता की नाराजगी भड़क न उठे । मुकेश अरनेजा को जानने वाले लोगों का मानना/कहना लेकिन यह है कि मुकेश अरनेजा की रगों में खून नहीं, कारस्तानियाँ व बदतमीजियाँ बहती हैं; और लाख कोशिशों के बाद भी वह सुधर नहीं सकते हैं । कुछेक वरिष्ठ रोटेरियंस का कहना है कि जैसे कुत्ते की पूँछ को कितना ही सीधा करने की कोशिश करो, लेकिन वह सीधी नहीं हो सकती है - ठीक वैसे ही मुकेश अरनेजा कितना भी सुधरने की कोशिश करें, वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ सकते हैं । हरकतें उनके शरीर में जैसे कुलबुलाती रहती हैं, और वह कभी भी कहीं भी फूट पड़ती हैं । इसीलिए उन्हें जानने वाले लोगों का कहना है कि अमित जैन की तरह दीपक गुप्ता भी यदि मुकेश अरनेजा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद से हटाने की घोषणा कर दें, तो किसी को हैरान नहीं होना चाहिए ।

Friday, September 14, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में रवि सचदेवा के क्लब के अधिष्ठापन समारोह की सफलता के जरिये रवि सचदेवा और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों में भरा जोश सचमुच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की गर्मी को बढ़ाते हुए उसे और दिलचस्प बना सकेगा क्या ?

नोएडा । रवि सचदेवा की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों की सक्रियता में अचानक से तेजी आ रही दिख रही है, जिसके चलते वह कल शाम एक मीटिंग कर रहे हैं - जिसमें रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के अभियान को लेकर आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी । दरअसल रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के नए पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में जुटी भीड़ ने रवि सचदेवा और उनकी उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों को खासा उत्साहित किया है, और उन्हें लगने लगा है कि वह यदि अपनी मुहिम को सावधानी से संयोजित करें और चलाएँ, तो रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को अच्छा समर्थन मिल सकेगा । उल्लेखनीय है कि रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस का अधिष्ठापन समारोह कहने को तो क्लब के नए पदाधिकारियों को अधिष्ठापित करने के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन उसे जिस बड़े और खास डिजाईन के साथ आयोजित किया गया था उसे देख कर हर किसी को ठीक ठीक समझ में आ गया कि इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के लिए डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच माहौल बनाना और संदेश पहुँचाना है । इस समारोह के चलते रवि सचदेवा की उम्मीदवारी में यदि एक ऊँची छलाँग देखी/पहचानी गई, तो इसके दो कारण रहे - एक तो इस समारोह में डिस्ट्रिक्ट के कई खास और आम लोगों की उपस्थिति तथा दूसरे पूर्व गवर्नर मुकेश अरनेजा के साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी आलोक गुप्ता की मौजूदगी । सामान्य स्थितियों में इन तीनों की मौजूदगी के कोई ज्यादा मतलब नहीं होते, और इनकी मौजूदगी को सामान्य शिष्टाचार के पर्याय के रूप में ही देखा/पहचाना जाता - लेकिन क्लब में और समारोह में सतीश सिंघल के होने के विवाद के बीच समारोह में इन तीनों की मौजूदगी के कुछ खास अर्थ 'बन' गए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत रवि सचदेवा की उम्मीदवारी ने उन 'अर्थों' को राजनीतिक आयाम भी दे दिया ।
समारोह को मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता की मौजूदगी के चलते राजनीतिक आयाम इसलिए भी मिला - क्योंकि अभी तक डिस्ट्रिक्ट में जो राजनीतिक समीकरण रहे हैं, उसमें सतीश सिंघल, मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता एक खेमा बना कर रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के प्रति रोटरी इंटरनेशनल के कठोर रवैये के सामने आने से - जिसके तहत सतीश सिंघल के खिलाफ कार्रवाई हुई और शरत जैन को चेतावनी मिली - डिस्ट्रिक्ट की राजनीति के समीकरणों में उलट-फेर होने की संभावना तो दिखी, लेकिन अभी तक कोई नया समीकरण बनता हुआ नजर नहीं आया है । पिछले दिनों मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता ने हालाँकि सतीश सिंघल के साथ दूरी बनाने/दिखाने की कोशिश तो की, लेकिन रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के अधिष्ठापन समारोह में एक साथ मौजूदगी दिखा कर - वह फिर 'पुराने घेरे' में वापस लौटते हुए दिखे हैं । जो लोग राजनीति के घुमावदार मोड़ों को जानते/समझते हैं, वह मानते/कहते हैं कि मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता अभी रवि सचदेवा की उम्मीदवारी का झंडा उठाने की जल्दबाजी नहीं करेंगे/दिखायेंगे; यह लोग अभी माहौल भाँपेंगे और यदि रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को दम पकड़ता पायेंगे, तभी आगे आयेंगे । रवि सचदेवा और उनकी उम्मीदवारी के समर्थक व शुभचिंतक भी इस बात को समझ रहे हैं, और इसलिए वह दो स्तरों पर एकसाथ तैयारी करते हुए देखे जा रहे हैं - एक स्तर पर वह मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता को रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में 'दिखाने' का काम कर रहे हैं, और दूसरे स्तर पर वह ऐसा दिखाते हुए रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच स्वीकृति दिलाने का प्रयास कर रहे हैं ।
रवि सचदेवा और उनकी उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों ने रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के अधिष्ठापन समारोह में दिए गए मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता के भाषणों के चुनिंदा अंशों को सोशल मीडिया के जरिये जिस तरह प्रचारित किया है, उसमें इन तीनों को रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में 'दिखाने' की होशियारी साफ झलकती है । हालाँकि रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के कुछेक समर्थकों का ही मानना/कहना है कि इस तरह की तरकीबों से क्षणिक रूप में तो माहौल में अनुकूलता और गर्मी लाई जा सकती है, किंतु इस अनुकूलता और गर्मी को यदि स्थाई रूप देना है तो इसके लिए जमीनी स्तर पर कुछ ठोस काम करना होगा । यह ठोस काम क्या होगा और इसे कैसे किया जायेगा, लगता है कि इसे तय करने के लिए ही रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों ने कल की बैठक बुलाई है । क्लब के अधिष्ठापन समारोह के रूप में रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के उद्देश्य से हुए आयोजन के सात/आठ दिन के भीतर ही समर्थकों व शुभचिंतकों की मीटिंग करने की तैयारी से संकेत मिल रहा है कि अधिष्ठापन समारोह की सफलता ने रवि सचदेवा और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों को उत्साहित किया है, तथा वह और जोरशोर के साथ रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के अभियान में जुटने की जरूरत समझ रहे हैं । कल शाम होने वाली मीटिंग का एक उद्देश्य समर्थकों व शुभचिंतकों को एकजुट व उत्साहित रखने के साथ-साथ अधिष्ठापन समारोह की सफलता को ज्यादा से ज्यादा भुनाने की कवायद के रूप में भी देखा/पहचाना जा रहा है । माना/समझा जा रहा है कि अधिष्ठापन समारोह की सफलता ने रवि सचदेवा और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों में जो जोश भरा है, वह इस वर्ष होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की गर्मी को और भड़कायेगा तथा उसे और दिलचस्प बनायेगा ।

Tuesday, September 4, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में सतीश सिंघल की व्यूह रचना में शामिल होने की मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता व आलोक गुप्ता की 'तैयारी' ने अशोक अग्रवाल के लिए चुनौती पैदा की तथा अमित गुप्ता के लिए मौका बनने के संकेत दिए हैं

नोएडा । रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के नए पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में मुकेश अरनेजा के मुख्य अतिथि तथा दीपक गुप्ता व आलोक गुप्ता के गेस्ट ऑफ ऑनर बनने ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में जो करंट पैदा किया है, उसने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में अशोक अग्रवाल के लिए चुनौती और अमित गुप्ता के लिए एक बेहतर मौका बनाने वाली स्थितियाँ पैदा की हैं । उल्लेखनीय है कि नोएडा एक्सेलेंस के इस समारोह को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के प्रमोशन के उपक्रम के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । मजे की बात यह है कि तीनों ही - मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता लोगों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास भी कर रहे हैं कि नोएडा एक्सेलेंस के अधिष्ठापन समारोह में उनके जाने को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए - और इसे रोटरी की एक गतिविधि के रूप में ही देखा जाना चाहिए । हालाँकि सयाने लोग जानते/समझते हैं कि सिर्फ रोटरी में ही नहीं, बल्कि जीवन और जगत में भी जो कुछ भी 'होता' है, उसका कोई न कोई खास उद्देश्य होता ही है - निरुद्देश्य या बेमतलब में तो पत्ता भी नहीं हिलता है । इसीलिए नोएडा एक्सेलेंस के अधिष्ठापन समारोह में जाने के पीछे कोई राजनीति न देखने के उक्त तीनों के आग्रह को राजनीति जानने/समझने वाले लोगों ने स्वीकार नहीं किया है; और माना/कहा जा रहा है कि यह पूरी तरह से एक राजनीतिक 'मूव' है - इसे राजनीतिक मूव स्वीकार करने से इंकार सिर्फ इसलिए किया जा रहा है ताकि इसके फेल हो जाने पर यह कह कर बचा जा सके कि 'हम' तो कोई राजनीति कर ही नहीं रहे थे !
सात सितंबर को होने जा रहे उक्त कार्यक्रम में इन तीनों के साथ सतीश सिंघल के भी 'दिखने' की संभावना है । इससे पिछले रोटरी वर्ष के उस घटना चक्र को याद करना प्रासंगिक होगा जब आलोक गुप्ता को चुनावी फायदा पहुँचवाने के लिए जल्दी चुनाव कराने से जुड़ी हलचल को देखते हुए, पूछे जाने पर इन चारों ने ही जल्दी चुनाव करवाने की बात से साफ-साफ इंकार किया था - लेकिन फिर जल्दी चुनाव करवा लिए थे । पहले इंकार और फिर स्वीकार का नाटक इसीलिए किया गया था, ताकि पूरी व्यवस्था कर लेने तथा पूरी तरह आश्वस्त हो लेने के बाद ही 'कार्यक्रम' की घोषणा की जाए । पिछले वर्ष के इसी 'व्यवहार' को देखते हुए लोगों को लग रहा है कि मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता पहले देख और समझ लेना चाहते हैं कि रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को लेकर डिस्ट्रिक्ट में सचमुच कोई स्वीकार्यता बन भी रही है क्या ? वह यदि आश्वस्त हुए, तो रवि सचदेवा की उम्मीदवारी का झंडा उठायेंगे, अन्यथा यही कहते/बताते रहेंगे कि भई 'हम' तो राजनीति करते नहीं हैं, 'हम' तो राजनीति से दूर ही रहते हैं, 'हम' तो अमित गुप्ता और अशोक अग्रवाल के कार्यक्रमों में भी गए हैं । राजनीति न करने का दावा करना भी हालाँकि राजनीति का एक बहुत पुराना दाँव है ।
इन तीनों की भूमिका इस कारण से भी संदेहास्पद बनी है कि यह तीनों घोषित रूप से असिस्टेंट गवर्नर्स द्वारा आयोजित थैंक्स गिविंग कार्यक्रम में नहीं गए थे; क्योंकि उस कार्यक्रम के पीछे सतीश सिंघल को ही देखा/पहचाना गया था - सात सितंबर का कार्यक्रम भी कहने को तो रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के नए पदाधिकारियों के अधिष्ठापन का कार्यक्रम है, लेकिन इसके पीछे मुख्य उद्देश्य रवि सचदेवा की उम्मीदवारी का प्रमोशन तथा शक्ति-प्रदर्शन है - और यह सतीश सिंघल की व्यूह रचना के अनुरूप है । करीब दो महीने पहले हुए थैंक्स गिविंग कार्यक्रम में सतीश सिंघल के नजदीक 'दिखने' से बचने की कोशिश करने वाले मुकेश अरनेजा. दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता को अब सतीश सिंघल के साथ दिखने में कोई समस्या नहीं है - तो इस हृदय परिवर्तन का एक ही कारण समझ में आता है और वह यह कि थैंक्स गिविंग कार्यक्रम की सफलता ने इन तीनों को अहसास कराया है कि सतीश सिंघल के साथ राजनीतिक गठजोड़ किया जा सकता है । इस गठजोड़ की संभावना को और पुख्ता करने के लिए ही इन तीनों ने सतीश सिंघल की व्यूह रचना में शामिल होना स्वीकार किया है । सतीश सिंघल की व्यूह रचना के तहत आ रही रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को लेकर अभी भी चूँकि यह पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं, इसलिए यह अभी रवि सचदेवा की उम्मीदवारी का झंडा नहीं उठा रहे हैं; लेकिन जिस तरह से यह उनकी तरफ बढ़ रहे हैं, उसे देख कर समझा जा रहा है कि हालात रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के जरा भी अनुकूल नजर आये तो मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता, आलोक गुप्ता के हाथों में रवि सचदेवा की उम्मीदवारी का झंडा होगा ।
यह स्थिति अशोक अग्रवाल की उम्मीदवारी के लिए खासी बड़ी चुनौती खड़ी करती है । दरअसल अभी उन तीनों को अशोक अग्रवाल अपनी उम्मीदवारी के समर्थन में दिखाते/जताते हैं; जो स्थिति बन रही है वह लेकिन यह संकेत दे रही है कि उक्त तीनों लोग अशोक अग्रवाल का विकल्प खोज रहे हैं - यह संकेत अशोक अग्रवाल के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से भी और व्यावहारिक कारणों से भी खासे झटके वाला है । इस स्थिति में अमित गुप्ता के समर्थकों व शुभचिंतकों को अमित गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए फायदे का मौका बनता दिख रहा है । उन्हें लगता है कि रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को उन तीनों के परोक्ष और या अपरोक्ष समर्थन से जो बल मिलेगा, वह वास्तव में अशोक अग्रवाल की स्थिति को कमजोर करने का काम करेगा और रवि सचदेवा व अशोक अग्रवाल के समर्थक एक-दूसरे पर जो कीचड़ उछालेंगे - उससे लोगों के बीच दोनों की ही स्थिति डावांडोल बनेगी - जिसका फायदा अमित गुप्ता को मिल सकेगा । दरअसल सतीश सिंघल के बहाने रवि सचदेवा को तथा जेके गौड़ की कारस्तानियों के बहाने अशोक अग्रवाल को घेरने की दोनों तरफ से जो कोशिश होगी, उसमें डिस्ट्रिक्ट के लोग एक निर्विवाद उम्मीदवार को चुनना पसंद करेंगे, और तब उनकी पसंद अमित गुप्ता बन सकते हैं । सिद्धांततः और तर्कपूर्ण नजरिये से ठीक लग रही यह उम्मीद सचमुच पूरी हो सकेगी या नहीं, यह इस पर निर्भर करता है कि स्थितियाँ किस रास्ते पर चलती हैं और क्या मोड़ लेती हैं ? 

Saturday, August 25, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में अवैध माने गए थैंक्स गिविंग कार्यक्रम में अवॉर्ड पाए लोगों को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी आलोक गुप्ता ने जिस तरह अचानक से चिन्हित करके शाबाशी देने का काम शुरू किया है, उसके पीछे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के पक्ष में माहौल बनाने का खेल भी छिपा है क्या ?

नोएडा । सतीश सिंघल को लेकर तमाम प्रतिकूल स्थितियों का सामना कर रहे रवि सचदेवा की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के खिलाड़ियों को असमंजस में डाला हुआ है - और जिस असमंजस को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी आलोक गुप्ता की अचानक से शुरू की गई थैंक्स गिविंग के अवॉर्डियों को शाबाशी देने की कार्रवाई ने और बढ़ाने का काम किया है । डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक खिलाड़ियों के लिए असमंजस की बात यह है कि रोटरी इंटरनेशनल के एक फैसले के चलते जो सतीश सिंघल डिस्ट्रिक्ट की प्रशासनिक व्यवस्था से 'बाहर' हैं, और जिस कारण उनके लिए डिस्ट्रिक्ट और क्लब्स की गतिविधियों में शामिल हो सकना भी मुश्किल बना हुआ है, या 'बना दिया गया' है - उन सतीश सिंघल के उम्मीदवार के रूप में रवि सचदेवा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में बने/टिके कैसे रह पायेंगे ? डिस्ट्रिक्ट के चुनावी खिलाड़ियों को हैरान/परेशान करते हुए रवि सचदेवा लेकिन न सिर्फ उम्मीदवार बने हुए हैं, बल्कि लोगों के बीच अपनी सक्रियता की निरंतरता को भी बनाए हुए हैं । उल्लेखनीय है कि रवि सचदेवा को सतीश सिंघल को अपने क्लब में शामिल करने/करवाने को लेकर डिस्ट्रिक्ट के स्वयंभू नेताओं की तरफ से बड़े भारी विरोध का सामना करना पड़ा है । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश अग्रवाल ने रवि सचदेवा पर तरह तरह से दबाव बनाया कि वह सतीश सिंघल को अपने क्लब में शामिल न करें । रवि सचदेवा ने लेकिन दो तर्कों के साथ उनके दबाव को स्वीकार करने से इंकार किया : रवि सचदेवा का कहना रहा कि पहली बात तो यह कि सतीश सिंघल के साथ उनकी बहुत पुरानी दोस्ती है, इसलिए आज जब सतीश सिंघल मुसीबत में हैं तो वह उनकी मदद करना अपना फर्ज और अपनी जिम्मेदारी समझते हैं; रवि सचदेवा का कहना है कि वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं कि अपने दोस्त को मुसीबत में देख/जान कर उसका साथ छोड़ दें; दूसरी बात यह कि रोटरी इंटरनेशनल को जब सतीश सिंघल के रोटेरियन होने/रहने पर कोई आपत्ति नहीं है, तो सतीश सिंघल के उनके क्लब का सदस्य होने पर आपत्ति क्यों की जा रही है ?
मजे की बात यह रही कि रमेश अग्रवाल तो रवि सचदेवा पर दबाव बना रहे थे कि वह सतीश सिंघल को अपने क्लब में न रहने दें; लेकिन रवि सचदेवा ने उनके दबाव में आने से इंकार करने के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अपनी उम्मीदवारी और प्रस्तुत कर दी । दरअसल इसके लिए उन्हें पिछले रोटरी वर्ष के थैंक्स गिविंग कार्यक्रम की सफलता से उत्साह मिला - जो घोषित रूप से तो असिस्टेंट गवर्नर्स की तरफ से आयोजित किया गया था, लेकिन अवॉर्ड देने का काम सतीश सिंघल ने ही किया था । रोटरी इंटरनेशनल द्वारा सतीश सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से हटा देने के बाद हुए इस कार्यक्रम को रोटरी के नजरिये से अवैध भले ही माना गया हो, लेकिन रोटेरियंस की अच्छी-खासी उपस्थिति के कारण वैध/अवैध के सारे तर्क बेअसर हो कर रह गए । मजे की बात यह रही कि थैंक्स गिविंग कार्यक्रम के अवैध होने को लेकर नेताओं के बीच ऐसा 'डर' रहा कि सतीश सिंघल के नजदीक समझे जाने वाले डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर मुकेश अरनेजा तथा सतीश सिंघल की मेहरबानी से गवर्नर की कुर्सी तक पहुँचने की लाइन में लगे दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता तक ने कार्यक्रम से दूरी बनाई, हालाँकि रोटेरियंस ने उक्त कार्यक्रम में उत्साह के साथ भाग लिया । रोटेरियंस की उपस्थिति के लिहाज से थैंक्स गिविंग कार्यक्रम को जो सफलता मिली, समझा जाता है कि उससे उत्साहित हो कर ही रवि सचदेवा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में कूद पड़े हैं । रवि सचदेवा तथा सतीश सिंघल के दूसरे नजदीकियों को लगता है कि रोटरी इंटरनेशनल ने भले ही सतीश सिंघल के साथ न्याय न किया हो, और डिस्ट्रिक्ट में कुछेक लोग भले ही सतीश सिंघल को रोटरी के दुश्मन के रूप में देखते हों - लेकिन आम रोटेरियंस के बीच सतीश सिंघल के प्रति प्रेम और समर्थन का भाव है, जो थैंक्स गिविंग कार्यक्रम में साफ-साफ नजर आया । रवि सचदेवा को विश्वास है कि सतीश सिंघल के प्रति आम रोटेरियंस का यही प्रेम और समर्थन तथा उनकी मेहनत उनकी उम्मीदवारी को कामयाब बनायेगी । रवि सचदेवा लोगों के बीच कहते भी हैं कि वह सिर्फ उम्मीदवार नहीं हैं, बल्कि 'फाइटर' हैं - और वह सिर्फ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने के लिए नहीं, बल्कि रोटरी से जुड़े कुछेक बड़े उद्देश्यों व लक्ष्यों को पूरा करने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में शामिल हुए हैं ।
रवि सचदेवा की उम्मीदवारी ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के खिलाड़ियों के समीकरणों को उलझाने का काम किया है, और इसीलिए उन्होंने तरह तरह से रवि सचदेवा को चुनावी मैदान से बाहर करने का प्रयास किया । रवि सचदेवा को कई मौकों पर सतीश सिंघल का संदर्भ देकर उकसाने/भड़काने का प्रयास किया गया, ताकि वह ऐसा कुछ कहें/करें जिससे उन्हें लोगों के बीच बदनामी मिले । रवि सचदेवा लेकिन होशियारी दिखाते हुए 'कूल' बने रहे हैं और अभी तक तो वह उकसाने/भड़काने वाली कार्रवाई से अपने आपको बचाये हुए हैं । रवि सचदेवा ने अभी तक अपनी उम्मीदवारी के अभियान को 'लो-प्रोफाइल' रखा हुआ है और अपनी सक्रियताओं को क्लब्स के प्रेसीडेंट्स के बीच तक सीमित रखा हुआ है, दरअसल इस कारण ही उनकी उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट के नेताओं के बीच ज्यादा 'भाव' नहीं मिल रहा है । दिलचस्प नजारा लेकिन यह है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के खिलाड़ी रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को ज्यादा भाव भी नहीं दे रहे हैं, किंतु उनकी उम्मीदवारी से 'डरे' हुए से भी हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी आलोक गुप्ता ने क्लब्स के जीओवी आयोजनों में अचानक से जिस तरह से सतीश सिंघल के अवैध माने गए थैंक्स गिविंग कार्यक्रम में अवॉर्ड पाए लोगों को चिन्हित करके उन्हें शाबाशी देने का काम शुरू किया है, उससे लग रहा है कि सतीश सिंघल के नजदीकियों की जैसे कोई अलग खिचड़ी पक रही है । रोटरी इंटरनेशनल की 'निगरानी' के चलते आलोक गुप्ता थैंक्स गिविंग कार्यक्रम में तो नहीं जा सके थे, इसलिए अब वह थैंक्स गिविंग के अवॉर्डियों को शाबाशी देकर सतीश सिंघल के 'उपकार' का ऋण चुकाने की कोशिश कर रहे हैं । आलोक गुप्ता की इस कोशिश का उद्देश्य सिर्फ सतीश सिंघल के उपकार का ऋण चुकाना भर है, या इसके पीछे रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के पक्ष में माहौल बनाने का खेल भी छिपा है - यह तो आने वाले समय में ही पता चल सकेगा; लेकिन अचानक से आलोक गुप्ता की तरफ से शुरू हुई इस कार्रवाई ने रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के 'भाव' को फिलहाल महत्त्वपूर्ण जरूर बना दिया है ।

Tuesday, July 24, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में चुनावबाज नेताओं के मुसीबतों में घिरे रहने के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई से दूर रहने के चलते चुनावी मुकाबला अशोक अग्रवाल के लिए एकपक्षीय होता जा रहा है क्या ?

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में डिस्ट्रिक्ट के चुनावबाज नेताओं और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के 'ठंडे' रवैये ने अमित गुप्ता की तुलना में अशोक अग्रवाल के लिए चुनावी मुकाबले को आसान बना दिया है । दरअसल व्यक्तित्वों की तुलना के मामले में अशोक अग्रवाल का पलड़ा यूँ भी भारी माना/देखा जाता है । यह बहुत स्वाभाविक भी है; क्योंकि अशोक अग्रवाल को रोटरी में अमित गुप्ता से अधिक समय हो चुका है, जिसके चलते उन्होंने ज्यादा बसंत और पतझड़ यहाँ देखे हैं । अमित गुप्ता के मुकाबले अशोक अग्रवाल ने 'काम' भी ज्यादा किया है । पिछले दो-तीन वर्षों में अमित गुप्ता ने भी हालाँकि काफी काम किया है, लेकिन उनके काम के 'नेचर' में फर्क रहा है । अमित गुप्ता ने जो काम किए हैं वह व्यवस्था-संबंधी रहे हैं, उनके काम से गवर्नर्स को तो फायदे मिले हैं, लेकिन लोगों के बीच उनकी छवि बनने/बनाने में कोई फायदा नहीं हुआ । इसके विपरीत अशोक अग्रवाल ने राजनीतिक काम किए, जिसके कारण लोगों के बीच उनकी पहचान तो बनी ही - राजनीतिक रूप से वह जिनके काम आए, उनके और उनके समर्थकों के साथ अशोक अग्रवाल के संबंध और गहरे बने । राजनीतिक काम करने के कारण अशोक अग्रवाल की राजनीतिक समझ व उनके अनुभव में भी इजाफा हुआ । वही समझ और अनुभव अब उनकी अपनी उम्मीदवारी को प्रमोट करने के काम आ रहा है । अमित गुप्ता ने चूँकि कभी कोई 'राजनीतिक' काम नहीं किया, इसलिए राजनीतिक समझ व अनुभव के मामले में वह कोरे कागज की तरह हैं । उनके नजदीकियों और समर्थकों का ही कहना है कि अमित गुप्ता अभी भी अपनी उम्मीदवारी को लेकर जिस तरह से सक्रिय हैं, उसमें 'राजनीतिक ऐंगल' पूरी तरह से नदारत ही है । अमित गुप्ता अभी तक भी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव लड़ना - या कोई भी चुनाव लड़ना - एक 'राजनीतिक काम' होता है, जिसे राजनीतिक तरीके से ही अंजाम दिया जा सकता है । उनकी इस कमजोरी का अशोक अग्रवाल पूरा पूरा फायदा उठा रहे हैं । मजे की बात यह है कि अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में फायदा उठाने के लिए भी अशोक अग्रवाल को ज्यादा प्रयास भी नहीं करने पड़ रहे हैं ।
रोटरी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव - या अन्य कोई भी चुनाव - उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि कभी स्पष्ट रूप से तो कभी 'छिपे' रूप से वास्तव में खेमों के बीच का चुनाव होता है । डिस्ट्रिक्ट 3012 में लेकिन इस वर्ष एक अप्रत्याशित स्थिति यह बनी है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव दो उम्मीदवारों के बीच ही होता नजर आ रहा है । दरअसल सतीश सिंघल के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्त होने के कारण एक खेमा पूरी तरह धूल-धूसरित हो गया है । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय द्वारा सतीश सिंघल के खिलाफ हुई कठोर कार्रवाई के कारण डिस्ट्रिक्ट के एक चुनावबाज नेता मुकेश अरनेजा को 'चुप' बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा है ।  मुकेश अरनेजा हालाँकि सीधी हो जाने वाली 'चीज' हैं नहीं; लेकिन लगता है कि सतीश सिंघल के खिलाफ हुई कार्रवाई ने उन्हें वास्तव में डरा दिया है । सुना जाता है कि रोटरी के बड़े नेताओं ने उन्हें आगाह कर दिया है कि रोटरी इंटरनेशनल में उनके खिलाफ बहुत शिकायतें हैं, और वह यदि अपनी हरकतों से बाज नहीं आए तो उनका हाल भी सतीश सिंघल जैसा हो सकता है । इसके बाद से ही मुकेश अरनेजा को अपनी हरकतों पर काबू रखने के लिए मजबूर होना पड़ा है । सतीश सिंघल के नजदीकी रहे दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता ने भी सतीश सिंघल के खिलाफ हुई कार्रवाई से बने माहौल में 'राजनीति' से दूर रहने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी है । डिस्ट्रिक्ट के एक दूसरे चुनावबाज नेता रमेश अग्रवाल अपनी हरकतों के चलते डिस्ट्रिक्ट में अलग-थलग पड़े हुए हैं और सचमुच कुछ कर सकने में असमर्थ हैं । नेताओं की मुसीबतें और असहायता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन के लिए वरदान बनी हैं और उन्हें अपने गवर्नर-काल में किसी चुनावी झमेले का सामना नहीं करना पड़ रहा है । सुभाष जैन शायद पहले ऐसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, जिन्हें दोनों उम्मीदवारों का हर संभव सहयोग भी मिल रहा है, और कोई भी उम्मीदवार उनके लिए 'जिम्मेदारी' नहीं बना है - और इस तरह राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से भी वह पूरी तरह बचे हुए हैं ।
डिस्ट्रिक्ट के चुनावबाज नेताओं और पूर्व/मौजूदा/भावी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई से दूर रहने की इस स्थिति ने डिस्ट्रिक्ट के चुनावी माहौल को 'ठंडा' बनाया हुआ है, और इस ठंडेपन ने अमित गुप्ता की चुनावी संभावनाओं को ग्रहण लगाया हुआ है । व्यक्तित्वों की लड़ाई में अशोक अग्रवाल से पिछड़ने के बावजूद अमित गुप्ता के नजदीकियों व समर्थकों को उम्मीद थी कि डिस्ट्रिक्ट के चुनावी माहौल में जब गर्मी आयेगी और चुनावबाज नेताओं व गवर्नर्स की खेमेबाजी सक्रिय होगी, तो अपनी तमाम कमजोरियों के बावजूद अमित गुप्ता की उम्मीदवारी आगे बढ़ेगी और अशोक अग्रवाल के लिए चुनौती पैदा करेगी । चुनावबाज नेता चूँकि अपनी अपनी मुसीबतों में घिरे हैं, इसलिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई को उनकी छतरी नहीं मिली है; और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव वास्तव में दो उम्मीदवारों के बीच का चुनाव हो कर रह गया है । इस स्थिति में अमित गुप्ता के लिए अपनी कमजोरियों को ढँक पाना मुश्किल हुआ है और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी मुकाबले में वह 'अकेले' से दिख रहे हैं और इस कारण उनकी स्थिति कमजोर ही बनी रह जा रही है । दरअसल अमित गुप्ता की चूँकि अपनी कोई 'राजनीतिक' पहचान नहीं है, और डिस्ट्रिक्ट में उनकी उम्मीदवारी की वकालत करने वाला कोई बड़ा नेता नहीं है - इसलिए लोगों से मिलजुल कर अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने की उनकी कोशिशों का कोई सुफल उन्हें मिलता दिख नहीं रहा है । अशोक अग्रवाल की चूँकि डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच अच्छी व प्रभावी 'राजनीतिक' पहचान है, इसलिए उन्हें अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन ज्यादा कुछ किये बिना ही मिलता नजर आ रहा है । लोगों का मानना/कहना है कि हालात यदि ऐसे ही बने रहे, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनावी मुकाबला अशोक अग्रवाल के लिए एकपक्षीय ही हो जायेगा ।

Sunday, July 8, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में अशोक अग्रवाल ने अपने क्लब के सदस्यों को विश्वास में लेने के साथ साथ अपनी तरफ से डिस्ट्रिक्ट के लोगों से संपर्क करने की अपनी कोशिशों को भी बढ़ाया है, जिसका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में उन्हें अच्छा नतीजा भी मिलता दिख रहा है

गाजियाबाद । अशोक अग्रवाल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने हेतु न सिर्फ अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना शुरू किया है, बल्कि अपनी सक्रियता को भी बढ़ाया है, और वन-टू-वन पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है । मजे की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अधिकतर लोग अशोक अग्रवाल की स्थिति को ही मजबूत मान रहे हैं, और अधिकतर लोगों को लग रहा है कि उनके प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार के रूप में अमित गुप्ता के लिए उनका मुकाबला करना मुश्किल क्या, असंभव ही होगा । कई एक लोगों ने तो कहना भी शुरू कर दिया कि अमित गुप्ता जब अशोक अग्रवाल की मजबूत स्थिति को देखेंगे और पायेंगे कि डिस्ट्रिक्ट के अधिकतर लोग अशोक अग्रवाल के साथ हैं, तो वह अपनी उम्मीदवारी को वापस ही ले लेंगे । अधिकतर लोगों की इस राय और समझ ने लगता है कि अशोक अग्रवाल को अति-विश्वास से भर दिया और उन्होंने खुद को विजेता मानना/समझना शुरू भी कर दिया । लेकिन अमित गुप्ता को जब चुनावी मैदान में डटे देखा/पाया गया और महसूस किया गया कि अमित गुप्ता धीरे धीरे ही सही - चुनावी लड़ाई में 'टिक' और आगे बढ़ रहे हैं, तब अशोक अग्रवाल और उनके नजदीकियों का माथा ठनका । उन्हें डर हुआ कि अमित गुप्ता के साथ होने वाली उनकी चुनावी लड़ाई कहीं कछुए व खरगोश की दौड़ वाली कहानी को न दोहरा दे - जिसमें खरगोश और उसके साथी कछुए को दौड़ में कहीं देख/मान ही नहीं रहे थे व निश्चिन्त हो गए थे; और उनकी आँख तब 'खुली', जब उन्होंने दौड़ में अपने को पिछड़ा तथा कछुए को जीता हुआ पाया ।
अशोक अग्रवाल और उनके साथियों ने लगता है कि इस बात को समझा/पहचाना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई में अभी वह भले ही आगे दिख रहे हैं - लेकिन उनके और अमित गुप्ता के बीच की दूरी कम भी होती जा रही है; और उन्होंने यदि लापरवाही बरतना जारी रखा तो उन्हें पीछे होने में भी देर नहीं लगेगी । दरअसल चुनावी प्रक्रिया में उम्मीदवार से लोगों को - खासकर 'अपने' लोगों को कुछ अलग किस्म की उम्मीदें हो जाती हैं, और वह एक अलग तरीके से 'सेंटीमेंटल' हो जाते हैं । कई बार उम्मीदवारों को यह गलती करते देखा गया है कि वह 'अपने' लोगों पर यह सोच कर ध्यान देना कम या बंद कर देते हैं कि यह तो 'अपना' है ही; उसका यह रवैया देख कर उसका 'अपना' सोचता है कि इसमें अभी से इतनी अकड़ आ गई है और यह अभी से ही हमें तवज्जो नहीं दे रहा है, सो वही 'अपने' उसे सबक सिखाने के लिए उसकी जड़ें खोद देते हैं - फिर वह उम्मीदवार 'मुझे तो अपनों ने ही मारा. गैरों में कहाँ दम था' बुदबुदाते हुए अपने दिन काटता है । यूँ तो यह हर 'स्तर' पर होता है - जैसा कि डिस्ट्रिक्ट में सतीश सिंघल के साथ हुआ; उनके क्लब के जिन लोगों ने ब्लड बैंक बनवाने में उनका हर तरह से साथ दिया था, सतीश सिंघल के व्यवहार से अपमानित महसूस करते हुए उन्हीं लोगों ने ही सतीश सिंघल को 'तबाह' भी कर दिया । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अशोक अग्रवाल और उनके साथियों को खटका यह देख कर हुआ कि डिस्ट्रिक्ट में जब सभी उनके साथ हैं, तो अमित गुप्ता की उम्मीदवारी को खाद-पानी आखिर कौन दे रहा है ?
अशोक अग्रवाल ने इस बीच अलग अलग बहानों से दो एक बड़ी पार्टियाँ दीं, जिनमें लोगों की अच्छी भागीदारी भी रही; इससे अशोक अग्रवाल की उम्मीदवारी के पक्ष में माहौल तो अच्छा बना, लेकिन साथ साथ ही यह महसूस भी किया गया कि इससे लोगों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर उनकी बॉन्डिंग नहीं बन रही है । कई लोग शिकायत करते हुए भी सुने गए कि अशोक अग्रवाल जब बिलकुल सामने ही पड़ जाते हैं, तब तो बड़े तपाक से मिलते हैं, लेकिन वैसे उनकी न तो कोई खोज-खबर लेते हैं और न अपनी तरफ से उनसे मिलने या बात करने की कोशिश करते हैं । इस तरह की बातों से अशोक अग्रवाल और उनके साथियों को वन-टू-वन मिलने पर ध्यान देने की जरूरत महसूस हुई । हाल-फिलहाल के दिनों में अशोक अग्रवाल ने अपने क्लब के सदस्यों पर भी ध्यान देना शुरू किया है; अभी तक वह अपने क्लब के गिने-चुने सदस्यों के साथ ही दिखाई देते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछेक दिनों में उन्होंने अपने क्लब के अधिकतर सदस्यों को विश्वास में लेना शुरू किया है और अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने हेतु उन्हें सक्रिय करने का प्रयास किया है । अशोक अग्रवाल ने अपनी तरफ से लोगों से संपर्क करने की अपनी कोशिशों को भी बढ़ाया है, जिसका उन्हें अच्छा नतीजा मिलता दिख रहा है । अशोक अग्रवाल के रवैये में बदलाव आया है, तो उनके समर्थकों व शुभचिंतकों का भी उत्साह बढ़ा है - और समर्थकों व शुभचिंतकों के इस उत्साह ने अशोक अग्रवाल की उम्मीदवारी के दावे को फिर से मजबूती देने का काम किया है ।

Thursday, June 21, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से बर्खास्त सतीश सिंघल के अवॉर्ड फंक्शन पर रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के पदाधिकारियों की नजर होने की सूचना के चलते दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता ने तो अपने आपको फंक्शन से दूर कर लिया है, लेकिन मुकेश अरनेजा अभी असमंजस में हैं

गाजियाबाद । पैसों की बेईमानी करने के आरोप में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्त सतीश सिंघल द्वारा फर्जी तरीके से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अवॉर्ड फंक्शन किए जाने का संज्ञान लेते हुए फंक्शन पर निगाह रखने की रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय की कार्रवाई ने पूर्व गवर्नर मुकेश अरनेजा तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी दीपक गुप्ता व अतुल गुप्ता के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है । सतीश सिंघल की तरफ से दावा किया गया है कि यह तीनों उनके अवॉर्ड फंक्शन में शामिल होंगे । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय की 'सख्ती' के चलते दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता ने तो कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर अपने पाँव पीछे खींच लिए हैं, जबकि मुकेश अरनेजा कभी हाँ तो कभी न के झमेले में फँसे हैं । मुकेश अरनेजा कभी तो कहते हैं कि उस दिन वह एक पारिवारिक कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण अवॉर्ड फंक्शन में नहीं आ सकेंगे, अन्यथा वह जरूर शामिल होते; तो कभी दावा करते हैं कि वह अवॉर्ड फंक्शन में अवश्य ही शामिल होंगे और इसके लिए रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय द्वारा दी जाने वाली किसी भी सजा को भुगतने के लिए तैयार हैं । मुकेश अरनेजा तेवर दिखाते हुए कहते/बताते हैं कि रोटरी इंटरनेशनल उनका क्या कर लेगा, ज्यादा से ज्यादा दो-तीन वर्षों के लिए इंटरनेशनल असाईनमेंट देने पर रोक लगा देगा; ऐसे भी इंटरनेशनल असाईनमेंट उन्हें कौन से मिल रहे हैं, बड़े पदाधिकारियों की खुशामद कर-करा कर कभी कहीं किसी डिस्ट्रिक्ट में रिप्रेजेंटेटिव बनने का जुगाड़ वह कर लेते हैं, वह नहीं कर पायेंगे तो क्या हो गया ? साथ ही साथ मुकेश अरनेजा लेकिन डर भी जाते हैं कि बर्खास्त सतीश सिंघल के अवॉर्ड फंक्शन में जाने के कारण कहीं दीपक गुप्ता के गवर्नर-काल के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के उनके पद पर संकट न आ जाये, इसलिए वह पारिवारिक कार्यक्रम का वास्ता देकर अवॉर्ड फंक्शन से दूर रहने की बात भी करते हैं ।
रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से बर्खास्त किए गए सतीश सिंघल द्वारा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अवॉर्ड फंक्शन किए जाने की सूचना मिली तो उन्होंने यह देखने/जानने की 'व्यवस्था' की कि उनके फंक्शन को रोटरी इंटरनेशनल के कौन कौन पदाधिकारी समर्थन दे रहे हैं ? खास बात यह रही कि पदाधिकारियों ने फंक्शन के खिलाफ कार्रवाई करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि वह कोई पुलिस नहीं हैं कि रोटरी के नाम पर हो रही ठगी को रोकने के लिए अपने स्तर पर कार्रवाई करें; उनका कहना है कि रोटरी के नाम पर होने वाली ठगी से बचने के लिए रोटेरियंस को खुद ही बचने के प्रयत्न करने होंगे; रोट्रेरियंस यदि ठगी का शिकार होने के लिए और मूर्ख बनने के लिए तैयार हैं, तो वह क्या कर सकते हैं ? लेकिन यह 'देखना' उन्होंने अपनी जिम्मेदारी माना कि रोटरी इंटरनेशनल का कोई पदाधिकारी तो रोटरी के नाम पर होने वाली ठगी में सहायक नहीं बन रहा है । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के पदाधिकारियों का कहना है कि सतीश सिंघल चूँकि अब रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी नहीं रह गए हैं, इसलिए वह क्या करते हैं इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है; लेकिन दूसरे पदाधिकारी क्या कर रहे हैं, यह उन्हें जरूर देखना है । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के पदाधिकारी मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता व आलोक गुप्ता को सतीश सिंघल के समर्थकों व सहयोगियों के रूप में देखते हैं; ऐसा वह सतीश सिंघल की बातों के आधार पर ही 'देखते' हैं, सतीश सिंघल खुद कई बार कह चुके हैं कि अपने हर काम में उन्हें इन तीनों का सहयोग मिलता रहा है और मिलता रहेगा । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के पदाधिकारियों की नजर इसीलिए इन तीनों पर है ।
रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के पदाधिकारियों की नजर में होने की सूचना पा कर दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता ने तो अपने आपको सतीश सिंघल के अवॉर्ड फंक्शन से दूर कर लिया है । दीपक गुप्ता शहर से बाहर और दूर होने के कारण स्वतः बच गए और उन्हें कोई बहाने नहीं खोजने पड़े; आलोक गुप्ता ने लेकिन कुछ कुछ कारण बता कर 'व्यवस्था' कर ली है कि वह फंक्शन में और सतीश सिंघल के सहयोगी के रूप में न दिखें; मुकेश अरनेजा, जैसा कि पहले बताया जा चुका है, लेकिन अभी दोहरा रवैया अपनाए हुए हैं और ऐसा कोई उपाय देख रहे हैं जिससे लोगों को भी लगे कि उन्होंने सतीश सिंघल का साथ नहीं छोड़ा है, और रोटरी इंटरनेशनल की 'नजर' में आने से भी वह बच जाएँ । सतीश सिंघल और उनके साथियों को अवॉर्ड फंक्शन के प्रति रोटेरियंस के उपेक्षाभरे रवैये को भी झेलना पड़ रहा है । अवॉर्ड फंक्शन के निमंत्रण पत्र में जिन लोगों के नाम छपे हैं, उनमें ही कईयों का कहना है कि सतीश सिंघल ने मनमाने तरीके से उनके नाम छाप लिए हैं, और उनका इस अवॉर्ड फंक्शन से कोई लेनादेना नहीं है । दरअसल अवॉर्ड के आकांक्षी रोटेरियंस को भी लग रहा है कि रोटरी के नाम पर बेईमानी करने के आरोप में रोटरी इंटरनेशनल द्वारा बर्खास्त किये गए सतीश सिंघल के अवॉर्ड फंक्शन से जुड़ने में और या उनके हाथों से अवॉर्ड लेने में उपलब्धि और गर्व की बात भला क्या होगी, और इसीलिए अवॉर्ड को लेकर उनमें कोई उत्साह नहीं है । इसीलिए रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए निर्धारित की गई 20 जून की तारिख तक गिने-चुने लोगों ने ही रजिस्ट्रेशन करवाया है, जिसके कारण फंक्शन से जुड़े लोगों को 21 जून को लोगों को मैसेज भेजना पड़ा है कि जिन्होंने रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है, वह रजिस्ट्रेशन करवा लें । सतीश सिंघल के लिए मुसीबत और फजीहत की बात यह हो रही है कि उनके समर्थक व शुभचिंतक के रूप में देखे जाने वाले कई वरिष्ठ रोटेरियंस ने अपने आपको उनके अवॉर्ड फंक्शन से दूर रखा हुआ है, और वह यह मान/कह रहे हैं कि इस फंक्शन से सतीश सिंघल ने अपनी बदनामी और फजीहत को और बढ़ा लिया है ।

Tuesday, June 19, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी की बदतमीजी का शिकार बनीं आभा झा चौधरी की बढ़ती पहचान-प्रतिष्ठा को देख कर बौखलाए रवि चौधरी अपनी हरकतों से अपनी कलंक-कथा को और 'चर्चित' करने में जुटे

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी इन दिनों जिस तरह से लगभग बंद हो चुके आभा झा चौधरी के मामले से जुड़े अध्याय को पुनर्जीवित करने में लगे हैं और जहाँ तहाँ आभा झा चौधरी की शिकायत करते सुने जा रहे हैं, उससे लोगों को लग रहा है कि आभा झा चौधरी के मामले में रवि चौधरी को कुछ ज्यादा गहरी चोट लगी है - जिसके दर्द से वह रह रह कर कराह उठते हैं । मजे की बात यह भी है कि उक्त मामले में रवि चौधरी अपने आपको विजेता की तरह 'दिखाते' हैं और लोगों को बताते/कहते फिर रहे हैं कि रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत करने के बावजूद आभा झा चौधरी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाईं, जबकि उन्होंने उन्हें उनके क्लब से ही निकलवा दिया है । लोगों के बीच हैरानी इस बात को लेकर है कि रवि चौधरी जब अपने आप को विजेता मान/समझ रहे हैं तो वह अपनी तथाकथित जीत को एन्जॉय क्यों नहीं कर पा रहे हैं, वह जहाँ तहाँ आभा झा चौधरी को लेकर शिकायतों की पोटली खोल कर क्यों बैठ जाते हैं ? लोगों के बीच यह बात इसलिए भी उठती है, क्योंकि वह देखते/पाते हैं कि आभा झा चौधरी तो उक्त मामले का रोना नहीं रोती हैं, वह तो अपनी गतिविधियों के साथ सामाजिक जीवन में आगे बढ़ चुकी हैं - रवि चौधरी लगता है कि वहीं के वहीं ठहरे हुए हैं । रवि चौधरी का यह हाल देख कर मशहूर कहानी 'जीत की हार' याद आती है, जिसमें डाकू खड़क सिंह लूट में कामयाब हो जाने के बाद भी अपने आप को हारा हुआ महसूस करता है । रवि चौधरी की हालत भी कहानी के डाकू खड़क सिंह जैसी लग रही है; रवि चौधरी ने डॉक्टर सुब्रमणियन व संजीव राय मेहरा के साथ मिलकर तिकड़मबाजी करके पहले तो अपने आप को आभा झा चौधरी के आरोपों से बचा लिया और फिर उन्हें ही उनके क्लब से निकलवा भी दिया - लेकिन इस चक्कर में रोटरी जगत में रवि चौधरी ने अपनी जो थू थू करवाई, उसने उनकी 'जीत' को हार में बदलने का ही काम किया है । दरअसल आभा झा चौधरी के मामले ने रवि चौधरी की छिछोरबाजी के दबे/ढके 'व्यवहार' को सामने लाने का काम किया और उनकी कारस्तानियों की पोल खोली, जिसके चलते रवि चौधरी बदनामी के ऐसे दलदल में धँसे/फँसे कि उससे उनका उबरना मुश्किल क्या, असंभव ही हुआ ।
अपनी 'जीत' को हार में बदलते देख कर ही रवि चौधरी बौखलाए हुए हैं और एक लगभग बीत चुकी बात को अभी भी याद करते हुए अपनी जीत की झूठी शेखी दिखाते हुए अपने 'दर्द' को सहलाते रहते हैं । रवि चौधरी के नजदीकियों का कहना है कि रवि चौधरी वास्तव में यह देख कर और चिढ़े हुए हैं कि अपने डिस्ट्रिक्ट में तो उन्होंने तिकड़म करके आभा झा चौधरी को अलग-थलग कर दिया था, लेकिन रोटरी जगत में आभा झा चौधरी की पहचान और सक्रियता को बढ़ने से वह नहीं रोक पाए हैं । अभी हाल ही में रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3170 के एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम में तथा रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3250 के रोटरी क्लब मिथिला के एक बड़े स्थानीय आयोजन में आभा झा चौधरी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया । गवर्नर्स के अलावा किसी रोटेरियन को रोटरी जगत में और दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में ऐसी पहचान व सम्मान मिला हो, जैसा सम्मान आभा झा चौधरी को मिला है - ऐसा देखने/सुनने में नहीं आया है । रवि चौधरी के लिए चिढ़ने की बात दरअसल यही हुई है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने तथा तमाम तिकड़मों में पारंगत होने के बावजूद उनके हिस्से में तो सिर्फ बदनामी और फजीहत आ रही है, जबकि आभा झा चौधरी रोटरी में लगातार सक्रिय बनी हुई हैं और जगह जगह सम्मानित हो रही हैं । इतना ही नहीं, रोटरी के बाहर भी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में आभा झा चौधरी ने अपनी सक्रियता से न सिर्फ अपनी पहचान बनाई है, बल्कि विभिन्न रूपों में सम्मानित भी हुई हैं । कुछ ही समय पहले एक भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह व देश के अन्य प्रमुख लोगों के हाथों आभा झा चौधरी सम्मानित हुई हैं, जिससे उनकी सामाजिक पहचान का दायरा लोगों को न सिर्फ बढ़ा हुआ दिखा है - बल्कि उसमें प्रतिष्ठित होने का सुबूत भी लोगों को देखने को मिला है ।
रवि चौधरी के साथ लेकिन इसका ठीक उल्टा हुआ है । उनकी हरकतों का ही नतीजा रहा कि डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर होते हुए भी उन्हें डिस्ट्रिक्ट के बड़े आयोजनों में अलग-थलग कर देने के प्रयास हुए - जिसका नजारा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट विनय भाटिया की डिस्ट्रिक्ट असेम्बली में देखने को मिला, जहाँ पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन और पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता की मौजूदगी में रवि चौधरी को रिकॉग्नाइज तक नहीं किया गया । रवि चौधरी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट विनय भाटिया तथा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर व पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल के खिलाफ गाली-गलौच करके बताना पड़ा कि वह अभी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, और उन्हें इस तरह से अपमानित नहीं किया जा सकता है । इसके बाद, रवि चौधरी ने डिस्ट्रिक्ट असेम्बली में हुए अपने अपमान के मुद्दे पर काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलवाई, तो उसमें भी प्रायः सभी पूर्व गवर्नर्स ने उनके व्यवहार और रवैये के लिए उन्हें ही जमकर लताड़ा । रोटरी साऊथ एशिया जोन के 39 डिस्ट्रिक्ट्स में किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को अपने ही डिस्ट्रिक्ट में काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में ऐसी लताड़ पड़ी हो, ऐसा सुनने/देखने को नहीं मिला है । समझा जा सकता है कि जब अपने ही डिस्ट्रिक्ट में रवि चौधरी की यह 'औकात' रह गई है, और वह भी तब जब वह अभी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर हैं - तो कुल मिलाकर रोटरी में उनकी 'पहचान' क्या बनी रह गई है । रोटरी साऊथ एशिया जोन में डिस्ट्रिक्ट 3012 के गवर्नर सतीश सिंघल हालाँकि बेईमानी के आरोपों के चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से बर्खास्त किये गए हैं, लेकिन रोटरी में बदनामी के मामले में रवि चौधरी उनसे भी आगे 'देखे/पहचाने' जा रहे हैं । आभा झा चौधरी द्वारा की गई शिकायत पर रवि चौधरी तीन-तिकड़म करके अपनी गवर्नरी तो बचाने में किसी तरह सफल हो गए, लेकिन बदनामी के कलंक से वह फिर भी नहीं बच सके ।
रवि चौधरी के नजदीकियों का कहना/बताना है कि रवि चौधरी भी सच्चाई को समझ/पहचान रहे हैं, और इसीलिए वह तरह तरह से बौखला रहे हैं । ऐसे में, आभा झा चौधरी की सक्रियता और उपलब्धियों की खबरें व तस्वीरें उनकी बौखलाहट को और बढ़ाने का काम कर रही हैं । इसी बौखलाहट में रवि चौधरी लोगों को बताने/जताने में लगे हैं कि आभा झा चौधरी के मामले में 'जीते' तो वह हैं, और इस तरह एक लगभग बंद हो चुके अध्याय को वह पुनर्जीवित कर रहे हैं तथा अपनी ही कलंक-कथा को 'चर्चित' बनाने में लग गए हैं । लोगों का कहना है कि जीत का उनका दावा लेकिन उनकी खुशी या संतुष्टि को नहीं, बल्कि उनकी निराशा व बौखलाहटभरी चिढ़ को ही सामने ला रहा है - तथा 'दिखा/बता' रहा है कि आभा झा चौधरी के साथ की गई उनकी बदतमीजीपूर्ण हरकत तथा उस हरकत का संज्ञान लेते हुए आभा झा चौधरी द्वारा की गई कार्रवाई ने रवि चौधरी का असली रूप लोगों के सामने ला दिया है, जिसने उनकी तथाकथित जीत को भी वास्तव में हार में बदल दिया है ।

Saturday, June 2, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में जबर्दस्ती गवर्नरी 'करने' की सतीश सिंघल की कोशिशों पर जतिंदर सिंह द्वारा लगी रोक ने प्रेसीडेंट्स को तो उल्लू बनने से बचा ही लिया है, साथ ही अशोक अग्रवाल के चुनावी अभियान को भी बड़ी राहत पहुँचाई है

नोएडा । अदालती फैसले की झूठी व्याख्या करके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्त सतीश सिंघल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद पर अपनी प्रतिनियुक्ति को लेकर क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को पटाने की जो कोशिश की, उसे रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारी जतिंदर सिंह ने तुरंत फुरत कार्रवाई करके फेल कर दिया है । सतीश सिंघल के साथ हमदर्दी रखने वाले लोगों का भी कहना और पूछना है कि सतीश सिंघल पता नहीं क्यों अपनी फजीहत पर फजीहत करवाए जा रहे हैं, और खुद को बदनामी के दलदल में और गहरे धँसाते जा रहे हैं । ताजा प्रकरण में सतीश सिंघल ने अदालत के साथ-साथ रोटरी इंटरनेशनल के साथ भी धोखाधड़ी करने का प्रयास किया है, लेकिन जो तुरंत ही पकड़ी गई है । अदालत ने 28 मई की सुनवाई में यथास्थिति बनाए रखने का जो आदेश दिया, सतीश सिंघल ने उसकी झूठी व्याख्या करते हुए क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को लिख भेजा कि अदालत ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर बहाल कर दिया है और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वह जीओवी तथा थैंक्स-गिविंग कार्यक्रम करेंगे तथा अवॉर्ड बाटेंगे । सतीश सिंघल ने रोटरी फाउंडेशन के नाम पर क्लब्स के प्रेसीडेंट्स से पैसे बसूलने के लिए भी दबाव बनाया । कुछेक प्रेसीडेंट्स को सतीश सिंघल के 'व्यवहार' पर शक हुआ और उन्हें लगा कि सतीश सिंघल धोखेबाजी कर रहे हैं, सो अपना शक दूर करने के लिए उन्होंने इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम तथा रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस से संपर्क किया । रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस में क्लब व डिस्ट्रिक्ट मामलों के मुखिया जतिंदर सिंह के जबाव ने सतीश सिंघल की धोखाधड़ी की पोल खोल दी । मामले में संगीन पहलू यह है कि रोटरी इंटरनेशनल के अधिकृत पदाधिकारी जतिंदर सिंह द्वारा पोल खोले जाने के बाद भी सतीश सिंघल अपने गवर्नर होने का दावा यह कहते हुए कर रहे हैं कि जतिंदर सिंह कौन होता है यह कहने वाला कि वह गवर्नर नहीं हैं ?
गौर करने की बात यह है कि सतीश सिंघल के दावे को झूठा बताते हुए, रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस में क्लब व डिस्ट्रिक्ट मामलों के मुखिया जतिंदर सिंह ने जो कहा/बताया है - वह उन्होंने अपनी तरफ से नहीं कहा है, बल्कि इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम के हवाले से कहा है । डिस्ट्रिक्ट 3012 के क्लब्स के प्रेसीडेंट्स से सतीश सिंघल के दावों को लेकर मिली शिकायतों पर जतिंदर सिंह ने बासकर चॉकलिंगम से बात की, और उनसे मिले जबाव से क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को अवगत कराया । गनीमत है कि सतीश सिंघल ने अभी तक यह नहीं कहा है कि बासकर चॉकलिंगम कौन होता है उन्हें गवर्नर पद की जिम्मेदारी निभाने से रोकने वाला ! बासकर चॉकलिंगम के हवाले से जतिंदर सिंह ने साफ लिखा/बताया है कि रोटरी इंटरनेशनल ने सतीश सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से हटाने का जो फैसला किया हुआ है, उसमें अदालती फैसले के चलते कोई बदलाव नहीं हुआ है और सतीश सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में किसी भी तरह का काम करने का कोई हक नहीं मिला है । सतीश सिंघल के जले पर नमक छिड़कने जैसा काम जतिंदर सिंह ने प्रेसीडेंट्स को यह बता कर और कर दिया कि उन्हें यदि कोई जानकारी चाहिए हो तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट सुभाष जैन से संपर्क करें । जतिंदर सिंह के इस कहे के अनुसार, रोटरी इंटरनेशनल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सतीश सिंघल द्वारा कुछ भी करने/धरने के दावे को पूरी तरह झूठा घोषित कर दिया है ।
जतिंदर सिंह के प्रेसीडेंट्स को लिखे इस पत्र ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अशोक अग्रवाल को बड़ी राहत दी है । दरअसल सतीश सिंघल ने जब क्लब्स के प्रेसीडेंट्स से संपर्क करना शुरू किया और गवर्नर पद पर अपने बहाल होने का दावा करना शुरू किया, तो डिस्ट्रिक्ट में राजनीतिक सरगर्मी एकदम से बढ़ गई । सतीश सिंघल के मूवमेंट के पीछे मुकेश अरनेजा को देखा/पहचाना गया है । असल में, सतीश सिंघल के गवर्नर पद से बर्खास्त होने के बाद वास्तव में तगड़ा झटका मुकेश अरनेजा को ही लगा है, और डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के समीकरण में वह पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं । मुकेश अरनेजा और सतीश सिंघल के नजदीकियों के ही अनुसार, सतीश सिंघल के जरिये अदालती फैसले की झूठी व्याख्या करवा कर मुकेश अरनेजा ने क्लब्स के पदाधिकारियों के बीच अपनी पहुँच/पैठ बनाने की कोशिश की थी, ताकि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति में अपनी भूमिका निभा सकें । मुकेश अरनेजा और सतीश सिंघल के इस 'खेल' को अशोक अग्रवाल की उम्मीदवारी के लिए चुनौती और मुसीबत के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था । इसलिए जैसे ही उनके खेल की हवा निकली, अशोक अग्रवाल और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों ने राहत की साँस ली । सतीश सिंघल के रोटरी इंटरनेशनल व अदालती फैसले को ठेंगा दिखाते हुए जबर्दस्ती गवर्नरी 'करने' की कोशिशों पर जतिंदर सिंह के पत्र ने जो रोक लगाई है, उसने क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को तो उल्लू बनने से बचा ही लिया है, साथ ही अशोक अग्रवाल के चुनावी अभियान को भी बड़ी राहत पहुँचाई है ।

Monday, May 14, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में दीपक गुप्ता के गवर्नर-काल के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद जेके गौड़ से छीनने की मुकेश अरनेजा की कोशिश की सफलता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव अभियान को भी रोमांचक बनायेगी

गाजियाबाद । दीपक गुप्ता की तरफ से जेके गौड़ की बजाये मुकेश अरनेजा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाये जाने के मिल रहे संकेतों ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के समीकरणों में हलचल पैदा करने का काम किया है, और इस हलचल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अशोक अग्रवाल की स्थिति को झटका देने का काम किया है । अशोक अग्रवाल को जेके गौड़ के 'आदमी' के रूप में देखा/पहचाना जाता है, ऐसे में जेके गौड़ को यदि आश्वस्त करने के बाद भी दीपक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर नहीं बनाते हैं - तो यह जेके गौड़ के साथ-साथ अशोक अग्रवाल के लिए भी झटके वाली बात तो है ही । जेके गौड़ अपने समर्थकों से हालाँकि दीपक गुप्ता पर दबाव डलवा रहे हैं कि वह जेके गौड़ को ही डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाएँ; और उन्हें विश्वास भी है कि उनके समर्थक उन्हें ही डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाने के लिए दीपक गुप्ता को राजी कर लेंगे । हालाँकि मुकेश अरनेजा को भी कम नहीं समझा जा रहा है । लोगों को लग रहा है कि वह एक बार जब डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद जेके गौड़ से छीनने में कामयाब हो गए हैं, तो अब वह उसे आसानी से वापस तो नहीं ही जाने देंगे । दीपक गुप्ता के गवर्नर-काल के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद को लेकर जेके गौड़ और मुकेश अरनेजा के बीच छिड़ी यह लड़ाई वास्तव में इसलिए भी दिलचस्प हो गई है, क्योंकि इससे डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के अभी बने हुए समीकरणों पर भी सीधा असर पड़ेगा - और यह लड़ाई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी सीन को विभाजित करके दो पक्षीय बनाने का काम करेगी ।
जेके गौड़ बेचारे दीपक गुप्ता के गवर्नर-काल में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर की जिम्मेदारी संभालने की तैयारी कर चुके थे, इसलिए उन्हें जब संकेत मिले कि दीपक गुप्ता उनकी बजाये मुकेश अरनेजा को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाने जा रहे हैं - तो उनके तो तोते ही उड़ गए । यह संकेत उन्हें इस बात से मिले कि दीपक गुप्ता ने अपनी पेम वन की तैयारी शुरू कर दी, और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगने दी; उन्हें तो भनक भी नहीं लगी, जबकि मुकेश अरनेजा उनकी तैयारी में मदद करते सुने/देखे गए । दरअसल दीपक गुप्ता ने पेम वन के स्पॉन्सर्स के रूप में जब कुछेक क्लब्स के पदाधिकारियों से बात करना शुरू की, और क्लब्स के पदाधिकारी बचते व पीछे हटते दिखे, तो वह परेशान हुए - और उनकी परेशानी को हल करने के लिए मुकेश अरनेजा आगे आए । मुकेश अरनेजा ने उन्हें आश्वस्त किया कि पेम वन की स्पॉन्सरिंग के लिए क्लब्स वह उन्हें दिलवायेंगे । मुकेश अरनेजा रोटरी में कुशल 'सौदेबाज' और 'व्यापारी' रोटेरियन हैं, समझा जाता है कि इस आश्वासन के बदले उन्होंने दीपक गुप्ता से डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद के लिए सौदा कर लिया । मुकेश अरनेजा की बदकिस्मती दरअसल यह रही है कि उन्होंने सौदेबाजी करके दो बार डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद तो पाया, लेकिन वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए । अमित जैन ने उन्हें अपने गवर्नर-काल में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया था, लेकिन करीब महीने/डेढ़ महीने में ही उनकी हरकतों से तंग आकर उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद से हटा दिया था । रोटरी के इतिहास में शायद यह पहला मौका होगा, जब किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने एक-डेढ़ महीने में ही अपने डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर को पद से हटा दिया हो । मौजूदा रोटरी वर्ष में भी वह सतीश सिंघल द्वारा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाए गए थे, लेकिन ब्लड बैंक में घपलेबाजी के आरोपों के चलते सतीश सिंघल की गवर्नरी गई, तो साथ-साथ मुकेश अरनेजा की ड्रिस्ट्रिक्ट ट्रेनरी भी चली गयी । 
मुकेश अरनेजा जब दूसरी बार भी डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके, तो उनकी नजर दीपक गुप्ता के गवर्नर-काल के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद पर पड़ी । दीपक गुप्ता हालाँकि जेके गौड़ को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाने का संकेत दे चुके थे, लेकिन फिर भी मुकेश अरनेजा को विश्वास रहा कि अपनी चालबाजी से वह डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद जेके गौड़ से छीन लेंगे । पेम वन की तैयारी में मुकेश अरनेजा पर दीपक गुप्ता की निर्भरता देख कर लोगों को ऐसा लग रहा है कि मुकेश अरनेजा अपनी चालबाजी में सफल हो गए हैं । अभी लेकिन चूँकि आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद अपने पास ही बनाए रखने के लिए जेके गौड़ ने भी कमर कस ली है । इस होड़ में हालाँकि लोगों को मुकेश अरनेजा का पलड़ा ही भारी दिख रहा है । दरअसल दीपक गुप्ता ढीले ढाले से व्यक्ति हैं, और उनके साथ कोई काम करने वाला व्यक्ति भी नहीं है; इसलिए लोगों को भी लग रहा है - और शायद उन्हें भी लग रहा होगा कि एक तेज-तर्रार व्यक्ति का संग-साथ ही उनकी गवर्नरी की नैय्या को पार लगा सकेगा; और इस नाते जेके गौड़ की बजाए मुकेश अरनेजा ही डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में उनके सही मददगार साबित होंगे । सतीश सिंघल के साथ मिल कर मुकेश अरनेजा डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति पर काबिज होने की जो कोशिश कर रहे थे, उसे सतीश सिंघल के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से निलंबित होने से तगड़ा झटका लगा है । इस झटके से उबरने के लिए मुकेश अरनेजा को दीपक गुप्ता के गवर्नर काल में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनने की जरूरत महसूस हो रही है । अपनी अपनी जरूरतों के चलते मुकेश अरनेजा और दीपक गुप्ता यदि सचमुच साथ आए, तो यह साथ डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बनने का प्रस्थान बिंदु भी बन सकता है । लोगों को लग रहा है कि यह स्थिति डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अभी तक अशोक अग्रवाल के लिए आसान दिख रहे माहौल में अड़चन डालने का काम कर सकती है । इस लिहाज से माना जा रहा है कि दीपक गुप्ता के गवर्नर-काल के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद जेके गौड़ से छीनने में मुकेश अरनेजा यदि सचमुच सफल रहे, तो इससे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का अभी तक ठंडा-ठंडा सा चल रहा चुनाव अभियान रोमांचक हो उठेगा ।

Sunday, May 6, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में तमाम मौकों पर गतिविधियाँ करने/दिखाने के बावजूद अमित गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी सीन में अशोक अग्रवाल के मुकाबले में आते हुए दिख ही नहीं रहे हैं

गाजियाबाद । अमित गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के प्रयास जिस तरह बेअसर से साबित हो रहे हैं, उससे उनसे सहानुभूति रखने वाले लोग निराश होते जा रहे हैं । अमित गुप्ता से सहानुभूति रखने वाले कुछेक लोगों ने ही इन पंक्तियों के लेखक को बताया कि अमित गुप्ता पिछले दिनों कुछेक प्रमुख नेताओं से मिले, जिनमें से कुछेक को उन्होंने अपने घर बुलाया और कुछेक के घर या ऑफिस वह खुद गए - और इस तरह उनके साथ काफी समय व्यतीत किया, लेकिन जिन लोगों से अमित गुप्ता मिले उनकी प्रतिक्रिया अमित गुप्ता के लिए कोई उत्साहजनक नहीं रही । लोगों को अमित गुप्ता की बातों व उनके व्यवहार में बनावटीपन नजर आया और अपनी बातों व अपने व्यवहार से वह लीडर हो सकने की छाप छोड़ पाने में विफल ही रहे । अमित गुप्ता की गतिविधियों को नजदीक से देखने/परखने वाले अनुभवी लोगों का मानना और कहना है कि अमित गुप्ता की गतिविधियाँ दरअसल एक उम्मीदवार की गतिविधियों के अनुरूप नहीं बन पा रही हैं, और वह सामान्य मेल-मिलाप की गतिविधियाँ ही बन कर रह जा रही हैं - इसीलिए एक उम्मीदवार के रूप में अमित गुप्ता को उनका कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है । अमित गुप्ता के लिए बदकिस्मती की बात यह रही कि पेट्स और सेट्स की सफलता को सेलीब्रेट करने तथा अगले रोटरी वर्ष में मेजर डोनर बनने की घोषणा करने वाले रोटेरियंस के फेलिसिटेशन के लिए आयोजित हुए अपने ही क्लब के कार्यक्रम का अपनी उम्मीदवारी के संदर्भ में वह कोई लाभ नहीं उठा सके । उक्त कार्यक्रम में मौजूद रहे कुछेक लोगों के अनुसार, अमित गुप्ता ने लाभ उठाने का प्रयास तो जरूर किया, लेकिन कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी एक आउटसाइडर जैसी ही रही । अपने शिक्षण संस्थान की एक नई ब्रांच के उद्घाटन अवसर का 'राजनीतक लाभ' उठाने का भी उनके पास एक अच्छा मौका था, उनके नजदीकियों के अनुसार ही लेकिन जिसके लिए उन्होंने कोई प्रयास भी नहीं किया ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति के अनुभवी खिलाड़ियों का मानना और कहना है कि तमाम मौकों और गतिविधियों के बावजूद एक उम्मीदवार के रूप में अमित गुप्ता चुनावी सीन में अपने लिए कोई स्पेस नहीं बना पा रहे हैं, तो इसका प्रमुख कारण उनकी रोटरी की राजनीतिक अनुभवहीनता है । उनकी अनुभवहीनता उनके लिए मुसीबत की बात इसलिए भी है, क्योंकि उनका चुनावी मुकाबला जिन अशोक अग्रवाल से होता हुआ नजर आ रहा है, वह रोटरी की चुनावी राजनीति की नस नस से परिचित हैं, और छोटे छोटे मौकों को भी राजनीतिक रंग दे देने की कला में पारंगत हैं । पिछले वर्षों में हुए चुनावों में अशोक अग्रवाल की किसी न किसी रूप में सहभागिता रही ही है और इसके चलते चुनावी दाँव-पेंचों को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा/पहचाना/परखा है । पिछले वर्षों में हुए चुनावों में अशोक अग्रवाल जिन के साथ/समर्थन में रहे हैं, उन्हें हार का भी सामना करना पड़ा है - लेकिन उन पराजयों ने अशोक अग्रवाल के राजनीतिक अनुभवों को और समृद्ध करने का ही काम किया है, जो अब उनके अपने चुनाव में उनके लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं । रोटरी की चुनावी राजनीति के अच्छे-बुरे पक्षों को गहराई से समझने के कारण ही अशोक अग्रवाल कम समय और अपेक्षाकृत कम सक्रियता के बावजूद डिस्ट्रिक्ट के चुनावी सीन में अपनी पैठ बनाने में कामयाब हुए हैं । अमित गुप्ता ने किन्हीं किन्हीं लोगों के सामने अशोक अग्रवाल और अपनी गतिविधियों की तुलना करते हुए गतिविधियों के मामले में अपने पलड़े को भारी बताने/दिखाने का प्रयास किया भी, किंतु उनके इस प्रयास का उन्हें कोई फायदा नहीं मिला - क्योंकि बात गतिविधियों के कम या ज्यादा होने की नहीं है, बात आउटपुट की है । कम गतिविधि के बावजूद अशोक अग्रवाल डिस्ट्रिक्ट के चुनावी सीन में यदि अमित गुप्ता के मुकाबले बहुत बहुत आगे नजर आ रहे हैं, तो अमित गुप्ता के लिए यह चिंता और चुनौती की बात तो होनी ही चाहिए ।
अमित गुप्ता के लिए मुसीबत की बात यह है कि वह ऐसे रोटेरियंस का भी कोई सहयोग नहीं ले पा रहे हैं, जिन्हें रोटरी की चुनावी राजनीति का कोई अनुभव हो और जो अमित गुप्ता की गतिविधियों को 'राजनीतिक रंग' दे सकें । उनके नजदीकियों का कहना/बताना है कि दरअसल इसके लिए उनकी तरफ से कोई प्रयास भी नहीं हुआ है । पिछले तीन-चार वर्षों से अमित गुप्ता हालाँकि रोटरी और डिस्ट्रिक्ट में काफी सक्रिय रहे हैं, किंतु लगता है कि उस सक्रियता से उन्होंने न तो सच्चे दोस्त बनाए और न रोटरी की राजनीति के गुण ही सीखे हैं । मौजूदा रोटरी वर्ष में सतीश सिंघल के साथ उन्होंने डिस्ट्रिक्ट में प्रमुख और महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन सतीश सिंघल के मुसीबत में पड़ने/घिरने से उनकी उस भूमिका पर ही पानी पड़ गया है । इससे भी बड़ी आफत अमित गुप्ता के लिए यह बात बनी है कि सतीश सिंघल के खास और नजदीकी रहे लोग भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी को सहयोग और समर्थन देते हुए नहीं नजर आ रहे हैं । इस तरह से देखा जाए, तो सतीश सिंघल के साथ जुड़ कर अमित गुप्ता ने अपना जो समय, एनर्जी और पैसा लगाया - उसका उन्हें अपनी उम्मीदवारी के संदर्भ में कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है । यह सब देख/जान कर अमित गुप्ता के नजदीकियों और शुभचिंतकों को लगने लगा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई लड़ना उनके बस की बात शायद है ही नहीं, और वह यहाँ बेकार में ही अपना समय, एनर्जी और पैसा बर्बाद कर रहे हैं ।

Friday, May 4, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर शरत जैन को घपलेबाजी के आरोपों से बचाने में सुशील गुप्ता की मदद ले पाने में रमेश अग्रवाल के विफल रहने के बाद डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच सवाल गंभीर हुआ कि शरत जैन का भी हाल कहीं सतीश सिंघल जैसा ही तो नहीं होगा ?

नई दिल्ली । रोटरी फाउंडेशन के नाम पर इकट्ठा किए गए पैसों में हेराफेरी करने और फिर उनकी बंदरबाँट करने के आरोप में डिस्ट्रिक्ट 3012 के पिछले वर्ष के गवर्नर शरत जैन के खिलाफ जाँच पूरी हो गई है, और जाँच करने वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को सौंप दी है - माना जा रहा है कि उक्त जाँच रिपोर्ट के आधार पर रोटरी इंटरनेशनल का फैसला जल्दी ही आ जायेगा । जाँच कमेटी के सामने जिन जिन लोगों को अपना अपना पक्ष रखने का मौका मिला, संभावित फैसले को लेकर उनकी राय बँटी हुई है, कुछ लोग यह मान रहे हैं कि कमेटी के सदस्यों ने रोटरी फाउंडेशन के पैसों को लेकर शरत जैन के पार्ट पर व्यवस्था संबंधी गड़बड़ियाँ तो पाई है और माना/कहा है कि पैसों का हिसाब-किताब रखने में शरत जैन ने न तो नियमितता रखी और न पारदर्शिता दिखाई, लेकिन बेईमानी होने/करने के कमेटी को कोई सुबूत नहीं मिले; जबकि अन्य कुछ लोगों का कहना/बताना है कि कमेटी के सदस्यों ने शरत जैन के हिसाब-किताब में जो अनियमितता तथा व्यवस्था संबंधी गड़बड़ियाँ पाई है, उन्हें बेईमानी करने के इरादे से ही 'की गई' गड़बड़ियों के रूप में देखा/पाया है । कमेटी के सामने चूँकि सबसे ज्यादा समय शरत जैन का लगा, लिहाजा उसे लेकर भी परस्पर विरोधी आकलन हैं । कुछेक लोगों का कहना है कि शरत जैन को कमेटी के सदस्यों के सामने ज्यादा समय इसीलिए लगा, क्योंकि उन्होंने एक एक मुद्दे पर अपनी सफाई दी और सुबूत रखे - जिन्हें देखने/सुनने में कमेटी के सदस्यों ने भी दिलचस्पी दिखाई; जबकि अन्य कुछेक लोगों का कहना है कि शरत जैन को कमेटी के सदस्यों के सामने ज्यादा समय इसलिए लगा, क्योंकि उनके पास शरत जैन से पूछने के लिए बहुत सारे सवाल थे और शरत जैन को उनका जबाव देने में मुश्किल आ रही थी । इसी आधार पर कुछ लोगों को लगता है कि शरत जैन का कुछ नहीं होगा, और ज्यादा से ज्यादा एक नसीहत या एक फटकार देकर उन्हें छोड़ दिया जायेगा; लेकिन कुछ अन्य लोगों को लगता है कि शरत जैन का गुनाह सतीश सिंघल से भी गंभीर है, और इसलिए रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय उन्हें भी सतीश सिंघल के 'रास्ते' पर ही भेजेगा - और सख्त कार्रवाई करते हुए शरत जैन से भी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने का अधिकार छीन लिया जायेगा ।
इस बीच शरत जैन के मामले ने रोटरी के बड़े सर्कल में राजनीतिक रंग भी ले लिया है, जो पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश अग्रवाल की बयानबाजी के चलते हुआ । दरअसल रमेश अग्रवाल ने यह कहते/बताते हुए शरत जैन और अपने लिए सहानुभूति जुटाने का प्रयास किया कि कुछ लोग रोटरी में उनके बढ़ते कदमों को रोकने के लिए शरत जैन को बली का बकरा बना रहे हैं । रमेश अग्रवाल ने अपने कुछेक नजदीकियों को बताया है कि वह पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता से मिले संकेतों के आधार पर यह बात कह रहे हैं । सुशील गुप्ता के नजदीकियों का कहना/बताना है कि शरत जैन को बचाने/बचवाने में रमेश अग्रवाल ने सुशील गुप्ता की मदद लेने की कोशिश की थी, लेकिन सुशील गुप्ता ने यह कहते हुए इस पचड़े में पड़ने से साफ इंकार कर दिया कि इंटरनेशनल वाइस प्रेसिडेंट पद के लिए अपनी उम्मीदवारी के चलते उनके लिए इस मामले में दिलचस्पी लेना उचित नहीं होगा । समझा जाता है कि इसी बातचीत में सुशील गुप्ता ने रमेश अग्रवाल से ऐसा कुछ कहा/बताया होगा, जिससे रमेश अग्रवाल को लगा है कि रोटरी में उनके आगे बढ़ने के रास्ते को रोकने के लिए कुछेक लोगों ने शरत जैन के मामले को एक मौके के रूप में देखा/पहचाना है - और शरत जैन के बहाने उन्होंने रमेश अग्रवाल का शिकार करने की तैयारी कर ली है । कुछेक लोगों को लगता है कि इस तरह की बातें करके रमेश अग्रवाल ने पहले से ही अपने बचाव की तैयारी शुरू की है । रमेश अग्रवाल को डर है कि शरत जैन को यदि 'सजा' हुई तो उसके छीटें उन पर भी पड़ेंगे, क्योंकि शरत जैन के गवर्नर-काल में वह डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर थे और उस नाते शरत जैन द्वारा की गई अनियमितताओं और बेईमानियों में उनकी भी मिलीभगत मानी जाएगी । 
मजे की बात यह है कि शरत जैन जिस मुसीबत में घिरे/फँसे हैं, उसे उन्होंने अपनी 'होशियारी' दिखाने के चक्कर में खुद ही आमंत्रित किया है । रोटरी फाउंडेशन के लिए फंड इकट्ठा करने हेतु डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में शरत जैन ने जो बॉल की, उसमें शुरू से ही शरत जैन की पैंतरेबाजी और बेईमानी देखी/पहचानी गई । शरत जैन ने फाउंडेशन बॉल का आयोजन वास्तव में किया ही नहीं; इसे उन्होंने रोटरी क्लब दिल्ली निरवाना के एक कार्यक्रम के साथ जोड़ दिया था । वह जो कार्यक्रम था, उसकी 'प्रकृति' फाउंडेशन बॉल के लिए उपयुक्त थी ही नहीं - लेकिन शरत जैन ने इस बात की परवाह ही नहीं की । आरोप लगा कि इस तरह शरत जैन ने कार्यक्रम आयोजित करने में होने वाले खर्च में हेराफेरी कर ली । इसके बाद शरत जैन के बड़बोलेपन ने उनकी मुसीबत बढ़ाने का काम किया । फाउंडेशन बॉल का तथाकथित आयोजन हो जाने के बाद शरत जैन ने बढ़चढ़ कर दावा किया कि उनकी बॉल में तीन हजार से ज्यादा लोग आए । उनके इस दावे के आधार पर लोगों ने गणना कर ली कि बॉल में शामिल होने के लिए चूँकि छह हजार रुपए का रजिस्ट्रेशन रखा गया था, इसलिए उनकी बॉल में एक करोड़ 80 लाख रुपए आ गए । लेकिन शरत जैन ने करीब 20 लाख रुपए ही दिखाए । बाकी रकम के लिए पूछा गया, तो शरत जैन अपने दावे से पलट गए और कहने/बताने लगे कि तीन हजार लोगों की गिनती तो उन्होंने कार्यक्रम में आये बच्चों को भी शामिल करके बताई थी, और रजिस्ट्रेशन वाले लोगों की संख्या तो तीन सौ के करीब ही थी । शरत जैन द्वारा गोलमोल बातें करने से लोगों का शक बढ़ा, तो कुछेक लोगों ने अपने अपने स्तर पर जाँच-पड़ताल की ।
जाँच-पड़ताल में शरत जैन के कारनामों का चौंकाने वाला खुलासा हुआ । आरोपों के अनुसार, रोटरी फाउंडेशन के लिए जो पैसा शरत जैन को 'रोटरी फाउंडेशन इंडिया' के नाम पर लेना था और या उसमें जमा करना था, वह पैसा पहले उन्होंने डिस्ट्रिक्ट ट्रस्ट में जमा कराया, वहाँ से वह पैसा उन्होंने एक गैर रोटरी ट्रस्ट में ट्रांसफर किया और वहाँ से फिर वह रोटरी फाउंडेशन इंडिया में गया । रोटरी फाउंडेशन के पैसे को इतनी चहल-कदमी करवाने के पीछे शरत जैन का क्या उद्देश्य रहा होगा, यह तो वही जानते होंगे; लोगों को लेकिन इसमें बड़ा गड़बड़झाला लगा । शरत जैन की तरफ से कुछेक जरूरी सरकारी नियमों के पूरा न होने को इसका कारण बताया गया । लोगों को यह कारण लेकिन हजम नहीं हुआ; उनका कहना रहा कि शरत जैन को उक्त जरूरी सरकारी नियमों को पूरा करवा लेना चाहिए था । आरोप के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में शरत जैन ने दोहरा अपराध किया - पहले तो उन्होंने जरूरी सरकारी नियमों को पूरा नहीं किया, और फिर इसका वास्ता देकर गड़बड़झाले को जस्टीफाई करने की कोशिश की । बॉल के लिए स्पॉन्सर्स से जो पैसे लिए गए थे, उनके रिकॉर्ड्स में भी हेराफेरी के आरोप लगे । रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत हुई, तो इंटरनेशनल पदाधिकारियों ने आरोपों को गंभीर माना और जाँच के योग्य पाया । जाँच के लिए कमेटी गठित की, और जैसा कि शुरू में ही बताया जा चुका है कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट रोटरी इंटरनेशनल को सौंप दी है । रमेश अग्रवाल ने इस मामले को जो राजनीतिक रंग दिया है, उसके चलते जाँच रिपोर्ट पर लिए जाने वाले फैसले का खास महत्त्व हो गया है । ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि शरत जैन बचते हैं, या सतीश सिंघल की 'दशा' को प्राप्त होते हैं ?

Friday, April 20, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में सतीश सिंघल के रोटरी और डिस्ट्रिक्ट से बाहर होने की बन रही संभावना के चलते अमित गुप्ता और रवि सचदेवा के गेम-प्लान के पूरी तरह तहस-नहस हो जाने की स्थिति डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अशोक अग्रवाल के लिए वरदान की तरह ही है

गाजियाबाद । सतीश सिंघल की मुश्किलें और उनके कारण बनी स्थितियाँ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अशोक अग्रवाल की उम्मीदवारी के लिए जैसे वरदान बन कर आई हैं । दरअसल सतीश सिंघल को लेकर जो हालात बने हैं, उन्होंने अन्य संभावित उम्मीदवारों - अमित गुप्ता और रवि सचदेवा के सामने अप्रत्याशित आफतें खड़ी कर दी हैं, और उनकी यही अप्रत्याशित आफतें अशोक अग्रवाल के लिए वरदान बन गईं हैं । मजे की बात यह है कि सतीश सिंघल के कारण बनी मुश्किलों को अमित गुप्ता और रवि सचदेवा ने अलग अलग तरीकों से खुद ही आमंत्रित किया है । रवि सचदेवा का मामला तो ज्यादा ही दिलचस्प है । उल्लेखनीय है कि सतीश सिंघल को मुसीबतों ने जब घेरना शुरू किया, और उसके एक पड़ाव पर उन्हें जब अपने ही क्लब से निकाला गया - तब रवि सचदेवा ने उन्हें अपने क्लब में शरण दी/दिलवाई । रवि सचदेवा और उनके संगी-साथियों ने सोचा था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर उनके क्लब का सदस्य होगा, तो उनके क्लब की धाक बनेगी और एक उम्मीदवार के रूप में रवि सचदेवा का पलड़ा भारी होगा । ऐसा सोचते हुए उन्हें जरा भी आशंका नहीं रही होगी कि सतीश सिंघल को अपने क्लब में शामिल करने के साथ ही बदकिस्मती ने भी उनके क्लब में डेरा डाल दिया है । पहले तो, रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को बड़े जोरशोर के साथ प्रमोट करने के लिए जो कार्यक्रम बनाया गया, उसके ठीक एक दिन पहले सतीश सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्त करने की घोषणा हो गई - जिसके चलते कार्यक्रम का सारा तामझाम निरर्थक हो गया । दूसरी मुसीबत अब यह आ पड़ी है कि सतीश सिंघल द्वारा रोटरी इंटरनेशनल के खिलाफ अदालती कार्रवाई शुरू किए जाने की प्रतिक्रिया में रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय की तरफ से सतीश सिंघल को क्लब से निकालने के लिए दबाव बनाया जा रहा है । 
 उल्लेखनीय है कि रोटरी इंटरनेशनल का यह नियम है कि कोई रोटेरियन यदि उसके खिलाफ अदालत जाता है, तो उसके क्लब को उसकी सदस्यता खत्म करने के लिए कहा जाता है, और यदि क्लब ऐसा नहीं करता है तो क्लब को ही बंद कर दिया जाता है । पिछले दिनों ही गवर्नरी के चक्कर में डिस्ट्रिक्ट 3100 और डिस्ट्रिक्ट 3080 में ऐसा हो चुका है । इसीलिए रवि सचदेवा के क्लब के सामने अपने आप को बचाये रखने के लिए एक ही विकल्प है - और वह यह कि वह सतीश सिंघल को क्लब से निकाल दें । यह स्थिति रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को बड़ा झटका देने वाली है, जिससे उबर पाना उनके लिए मुश्किल ही होगा । अमित गुप्ता का मामला थोड़ा अलग है, और एक बड़ी सुनियोजित योजना के फेल हो जाने की कहानी कहता है । दरअसल अमित गुप्ता ने अगले रोटरी वर्ष में अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की योजना सतीश सिंघल के कहने पर ही बनाई थी । वास्तव में अमित गुप्ता इसी वर्ष उम्मीदवार होने की तैयारी कर रहे थे । उनके नजदीकियों ने उन्हें समझाया था कि यह वर्ष उनके लिए बहुत ही मुफीद रहेगा; क्योंकि मुकेश अरनेजा ने आलोक गुप्ता की उम्मीदवारी के प्रति अपना अनमनापन प्रकट कर ही दिया था - इसलिए अलग अलग कारणों से अमित गुप्ता को कई नेताओं का समर्थन मिल सकने की संभावना बन रही थी । सतीश सिंघल ने लेकिन अमित गुप्ता को अपनी टीम में महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ दीं और समझाया कि इन जिम्मेदारियों को निभाते और काम करते हुए इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच पहचान और पैठ बनाओ और अगले वर्ष उम्मीदवार बनो ।
सतीश सिंघल ने तर्क दिया कि अगले वर्ष गवर्नर के क्लब का उम्मीदवार होने का फायदा मिलेगा और फिर निवर्त्तमान गवर्नर के रूप में मेरा और आने वाले दो गवर्नरों का समर्थन मिलेगा । किसी भी उम्मीदवार को यह तर्क लुभायेगा ही, सो अमित गुप्ता को भी इस तर्क ने लुभा लिया और अपने तमाम समर्थकों की सलाह को दरकिनार कर उन्होंने अगले वर्ष के लिए उम्मीदवारी लाने का फैसला कर लिया । उनके कुछेक नजदीकियों ने फिर भी समझाया कि इस वर्ष यदि हार भी गए तो अगले वर्ष अपनी स्थिति को मजबूत करोगे । अमित गुप्ता पर लेकिन सतीश सिंघल के तर्क का जादु चढ़ चुका था, लिहाजा उन्होंने किसी की नहीं सुनी । पर अब जब अमित गुप्ता को सतीश सिंघल की मदद की जरूरत पड़ी, तब सतीश सिंघल खुद मुसीबत में फँस गए और ऐसी मुसीबत में फँस गए कि किसी उम्मीदवार के तो काम के नहीं ही रह गए । सतीश सिंघल के मुसीबत में फँसने से अमित गुप्ता और रवि सचदेवा के सामने बैठे-बिठाए जो संकट आ खड़ा हुआ है, उसने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अशोक अग्रवाल को बिना कुछ करे-धरे ही लाभ की स्थिति में ला दिया है । सतीश सिंघल के साथ जो हुआ है, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के समीकरणों का ताना-बाना पूरी तरह बिखर गया है और दूसरे किसी खेमे के 'बनने' की संभावना फिलहाल धूमिल ही लगती है । अलग अलग कारणों से और अलग अलग तरीकों से अमित गुप्ता तथा रवि सचदेवा चूँकि सतीश सिंघल के समर्थन पर निर्भर थे, इसलिए सतीश सिंघल के रोटरी और डिस्ट्रिक्ट से बाहर होने की बन रही संभावना के चलते इनका गेम-प्लान पूरी तरह तहस-नहस हो गया है । चुनावी मुकाबला शुरू होने से पहले ही संभावित प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवारों के गेम प्लान के ध्वस्त होने की स्थिति अशोक अग्रवाल के लिए वरदान से कम नहीं है ।

Wednesday, April 18, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से सतीश सिंघल की बर्खास्तगी के मामले में यथास्थिति बनाये रखने के अदालत के फैसले के चलते सतीश सिंघल को तो कोई फायदा नहीं ही मिला, डिस्ट्रिक्ट और उनकी टीम के सदस्यों तथा उनके प्रेसीडेंट्स को 'अनाथ' और हो जाना पड़ा है

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्तगी के रोटरी इंटरनेशनल के फैसले के खिलाफ अदालत जाने की सतीश सिंघल की कार्रवाई ने डिस्ट्रिक्ट के क्लब्स के कामकाज को बुरी तरह प्रभावित किया है और क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को 'अनाथ' कर दिया है । सतीश सिंघल द्वारा अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ की गई अपील पर अदालत ने तात्कालिक रूप से जो फैसला दिया है, उसने क्लब्स के प्रोजेक्ट्स के लिए ग्रांट्स लेने/मिलने की प्रक्रिया को बाधित कर दिया है, और प्रेसीडेंट्स व अन्य पदाधिकारियों को अवॉर्ड्स आदि मिलने की संभावनाओं को खत्म कर दिया है । दरअसल अदालती फैसले के चलते डिस्ट्रिक्ट में पहली बार ऐसा होगा कि डिस्ट्रिक्ट में करीब ढाई महीने तक कोई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं होगा, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस नहीं होगी और डिस्ट्रिक्ट टीम तथा क्लब्स के पदाधिकारियों को अवॉर्ड नहीं मिलेंगे । डिस्ट्रिक्ट और क्लब्स की फंक्शनिंग में चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की ही भूमिका होती है, इसलिए अब जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ही नहीं होगा तो उसकी भूमिका के साथ/जरिये होने वाले काम भी नहीं होंगे - और इस तरह क्लब्स के प्रेसिडेंट्स के लिए उनका कार्यकाल निरर्थक ही हो गया है । डिस्ट्रिक्ट 3012 के कुछेक क्लब्स के प्रेसीडेंट्स ने कहना शुरू भी कर दिया है कि सतीश सिंघल खुद भी डूबे और दूसरों को भी ले डूबे हैं ।
इस स्थिति को देख/भाँप कर कुछेक लोगों की तरफ से यह भी सुनने को मिला है कि सतीश सिंघल ने सारे मामले को हैंडल करने में न तो कोई व्यावहारिक होशियारी दिखाई और न ग्रेस ही प्रदर्शित किया, जिसके चलते न सिर्फ वह खुद मुसीबतों में घिरते/फँसते चले गए - बल्कि अब हालात यहाँ तक आ पहुँचे हैं कि मौजूदा रोटरी वर्ष के बाकी बचे समय के लिए डिस्ट्रिक्ट ही कब्र में जा पहुँचा है । सतीश सिंघल के साथ हमदर्दी रखने वाले लोगों का भी मानना/कहना है कि मुसीबतों ने जब सतीश सिंघल को घेरना शुरू ही किया था, तब सतीश सिंघल यदि मामले की गंभीरता को समझते और हो सकने वाले नुकसान को कम से कम करने/रखने की कोशिश करते, तो न तो उन्हें बढ़ी/चढ़ी मुसीबतों का शिकार होना पड़ता और न ही डिस्ट्रिक्ट व उनके प्रेसीडेंट्स को अनाथ होना पड़ता । गवर्नरी शुरू करते हुए सतीश सिंघल ने दावा किया था कि उनका गवर्नर-काल ऐसा ऐतिहासिक होगा, जैसा किसी डिस्ट्रिक्ट में पहले न कभी रहा होगा, और न कभी आगे हो पायेगा । उनका दावा सही साबित तो हो गया है, लेकिन जिस रूप में वह सही साबित हुआ है - वह खुद उनके लिए और डिस्ट्रिक्ट के लिए बदकिस्मतीभरा ही है । कुछेक लोगों के अनुसार, बदकिस्मती की बात यह भी है कि जिस रोटरी में वह वर्षों से हैं और जिसे वह गर्व के साथ कहते/बताते रहे हैं, उस रोटरी के शीर्ष नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करने में वह ग्रेस नहीं दिखा सके, और एक ऐसी प्रक्रिया में गए - जिसमें उन्हें तो कोई फायदा नहीं ही मिला, डिस्ट्रिक्ट और उनकी टीम के सदस्यों तथा उनके प्रेसीडेंट्स को 'अनाथ' और हो जाना पड़ा है ।
सतीश सिंघल की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्तगी के बाद रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय डिस्ट्रिक्ट 3012 के गवर्नर पद की जिम्मेदारी निभाने के लिए किसी को नियुक्त करता - और उसकी देखरेख में बाकी बचे काम पूरे होते । लेकिन सतीश सिंघल की अदालती कार्रवाई के चलते अदालत ने यथास्थिति बनाये रखने का जो फैसला दिया है, उसके बाद डिस्ट्रिक्ट को बिना डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के ही रहना होगा । यथास्थिति बनाये रखने के अदालत के फैसले के चलते सतीश सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में काम करने का अधिकार तो नहीं ही मिला, उनकी जगह गवर्नर पद की जिम्मेदारी निभाने के लिए किसी को नियुक्त करने का रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय का मौका भी छिन गया है । सतीश सिंघल के समर्थकों का कहना है कि जो स्थिति बनी है, वह निश्चित ही दुर्भाग्यपूर्ण है - लेकिन सतीश सिंघल को जब रोटरी के शीर्ष पदाधिकारियों से न्याय नहीं मिला, तो वह अदालत न जाते तो क्या करते ? पहली बात तो यह कि इस तर्क में यह अहंकार झलकता है कि जो फैसला हमारे माफिक नहीं है, वह न्याय नहीं है; यानि न्याय वही है जो हमारे माफिक हो, हमारे अनुकूल हो । दूसरी बात यह कि यदि मान भी लें कि रोटरी इंटरनेशनल ने सतीश सिंघल के साथ न्याय नहीं ही किया, तो ? किसी भी संस्था, समाज और या देश में जब हम होते हैं, तो हमें उसकी न्याय प्रणाली को स्वीकार करना ही होता है - भले ही वहाँ न्याय न हो रहा हो । सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी किसी को यदि लगता है कि उसके साथ न्याय नहीं हुआ है, तो उसके पास क्या करने को बचता है, तब उसे क्या करना चाहिए ? जीवन में बहुत से मौके आते हैं, जब हम अपने आप को अन्याय का शिकार होता पाते हैं; कई बार अपमानित होकर, खून का घूँट पीकर रह जाना पड़ता है - क्योंकि हर बार यदि न्याय पाने की कोशिश करेंगे, तो अपने साथ-साथ अपने नजदीकियों के जीवन को भी और और मुसीबत में ही डालेंगे ।
इसी तर्ज पर देखें, तो जो लोग रोटरी में वर्षों से हैं और इस बात पर गर्व करते रहे हैं, लेकिन रोटरी के शीर्ष नेतृत्व से एक फैसला उनके अनुकूल नहीं आता है तो वह उस नेतृत्व को ही अदालत में घसीट लेते हैं, अपने ही सहयोगियों के हक/अधिकार को छिनवा देते हैं - तो उनसे पूछा जाना चाहिए कि फिर रोटरी में हो क्यों और क्यों यहाँ रहना चाहते हो ? सतीश सिंघल की अदालती कार्रवाई से उन्हें न्याय - उनका मनमाफिक फैसला मिलेगा या नहीं, यह तो बाद में पता चलेगा; अभी लेकिन उनकी कार्रवाई के चलते उनके सहयोगियों के रूप में उनकी टीम के सदस्य और उनके प्रेसीडेंट्स 'अनाथ' जरूर हो गए हैं ।

Monday, April 9, 2018

रोटरी इंटरनेशनल पदाधिकारियों का अजब गजब न्याय : चोरी के आरोपी को तुरंत 'फाँसी', और 'डकैती' के आरोपियों पर चुप्पी

चंडीगढ़ । रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सतीश सिंघल को ब्लड बैंक प्रोजेक्ट में पैसों की हेराफेरी करने के आरोप में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्त कर देने के रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के फैसले ने राजा साबू और यशपाल दास  के नजदीकियों की नींद उड़ा दी हुई है । उन्हें डर हुआ है कि सतीश सिंघल पर जिस प्रकृति के आरोप थे, चूँकि ठीक उसी प्रकृति के आरोप राजा साबू और यशपाल दास पर हैं; बल्कि राजा साबू और यशपाल दास पर लगे आरोप तो और भी गंभीर प्रकृति के हैं - तो क्या राजा साबू और यशपाल दास को भी रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय की तरफ से किसी सख्त कार्रवाई का शिकार होना पड़ेगा ? राजा साबू और यशपाल दास के नजदीकियों का ही मानना और कहना है कि सतीश सिंघल के खिलाफ जो आरोप रहे, वह तो सामान्य चोरी-चकारी की श्रेणी के आरोप हैं; जबकि राजा साबू और यशपाल दास पर जो आरोप हैं, वह तो डकैती की श्रेणी वाले कहे जा सकते हैं; इसके अलावा बड़ी बात यह है कि राजा साबू और यशपाल दास पर जो आरोप हैं, उनकी पुष्टि करने और उन्हें दोहराने का काम डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के द्वारा भी किया गया है - इसलिए सतीश सिंघल के बाद राजा साबू और यशपाल दास के खिलाफ कार्रवाई होने की पूरी आशंका है । हालाँकि राजा साबू और यशपाल दास के कुछेक अन्य नजदीकियों और समर्थकों का कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के बस की छोटी मछलियों का शिकार करना ही है, बड़े मगरमच्छों पर हाथ डालना उनकी क्षमता से बाहर की बात है - इसलिए राजा साबू और यशपाल दास के कारनामे भले ही 'डकैती' वाले हों, रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय की तरफ से उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकना मुश्किल ही क्या - असंभव ही है । आखिरकार, राजा साबू इंटरनेशनल प्रेसीडेंट और यशपाल दास इंटरनेशनल डायरेक्टर रहे हैं ।
उल्लेखनीय है कि राजा साबू की चेयरमैनशिप तथा यशपाल दास की देखरेख में चले रोटरी उत्तराखंड डिजास्टर रिलीफ ट्रस्ट में दो करोड़ 83 लाख रुपए की घपलेबाजी के आरोपों पर तो इन दोनों ने चुप्पी ही साधे रखी है । खास बात यह रही कि सालों तक तो इन दोनों ने उक्त ट्रस्ट का हिसाब-किताब देने की जरूरत ही नहीं समझी; शोर-शराबे के कारण जब यह हिसाब-किताब देने को मजबूर हुए तब खुद इनके द्वारा दी गई बैलेंसशीट्स में ही दो करोड़ 83 लाख की घपलेबाजी का मामला लोगों ने पकड़ा । इस ट्रस्ट में इन दोनों की घपलेबाजी का आलम और बेशर्मीभरे इनके साहस का उदाहरण यह है कि यशपाल दास ने 17 अगस्त 2017 के अपने एक ईमेल पत्र में इस प्रोजेक्ट के पूरा होने की घोषणा करने के बाद 14 सितंबर 2017 को डिस्ट्रिक्ट सर्विस सोसायटी के एकाउंट से मनमाने व गुपचुप तरीके से 21 लाख 44 हजार रुपए ट्रांसफर कर लिए । नियमानुसार, डिस्ट्रिक्ट सर्विस सोसायटी का मुखिया डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होता है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को नौ महीने बीत जाने के बाद भी इस सोसायटी का हिसाब-किताब नहीं मिला है । नियमानुसार, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट इस सोसायटी का सेक्रेटरी तथा निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ट्रेजरर होता है - लेकिन बेचारे प्रवीन चंद्र गोयल और रमन अनेजा को भी नहीं पता कि डिस्ट्रिक्ट सर्विस सोसायटी के फंड का आखिर होता क्या है ? इस सोसायटी का फंड पूरी तरह राजा साबू और यशपाल दास के कब्जे में है और वह मनमाने तरीके से इसका पैसा दाएँ/बाएँ करते रहते हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में इस सोसायटी के हिसाब/किताब का मुद्दा उठा चुके हैं, दिल्ली स्थित रोटरी इंटरनेशनल के साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों के साथ-साथ इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन राजा साबू और यशपाल दास इस सोसायटी के फंड पर केंचुली मार कर बैठे हुए हैं और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को इसका हिसाब-किताब नहीं मिल पा रहा है । समझा जा रहा है कि राजा साबू और यशपाल दास को डर है कि डिस्ट्रिक्ट सर्विस सोसायटी का हिसाब-किताब यदि सामने आ गया, तो डिस्ट्रिक्ट के लोगों के सामने पोल खुल जाएगी कि सोसायटी की सर्विस के नाम पर इकट्ठा किए गए पैसों से आखिर किन किन रसूख वाले लोगों की सर्विस हुई है । 
रोटरी इंटरनेशनल के अभी तक के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि एक डिस्ट्रिक्ट का गवर्नर अपने डिस्ट्रिक्ट में रोटरी के नाम पर चल रहे प्रोजेक्ट्स का हिसाब-किताब जानने/देखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन असफल हो रहा है । डिस्ट्रिक्ट में रोटरी के नाम पर चलने वाले तमाम प्रोजेक्ट्स की चाबी चूँकि राजा साबू और यशपाल दास के पास है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी की शिकायतों पर रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी भी चुप्पी साध जाते हैं । सुना जा रहा है कि थक-हार कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी ने राजा साबू और यशपाल दास की घपलेबाजियों को लेकर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड में इस उम्मीद से पिटीशन डाली है, कि शायद इंटरनेशनल बोर्ड डिस्ट्रिक्ट के तमाम प्रोजेक्ट्स के हिसाब-किताब को राजा साबू और यशपाल दास के चंगुल से छुड़वा सके । डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सतीश सिंघल की उनके क्लब के पदाधिकारियों ने शिकायत की, तो रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने तुरंत जाँच कमेटी नियुक्त कर दी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर करीब चार महीने के भीतर भीतर सतीश सिंघल के खिलाफ कार्रवाई भी कर दी गई - लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके गवर्नर की लगातार की जा रही शिकायतों पर रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी कानों में तेल डाले बैठे हैं । इसका कारण क्या सिर्फ यही है कि डिस्ट्रिक्ट 3080 में रोटरी के नाम पर हो रही घपलेबाजी और लूट के आरोप जिन लोगों पर हैं, वह रोटरी में बड़े रसूख वाले लोग हैं ।
मजे की, लेकिन निहायत शर्म की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट 3080 में रसूख वाले लोग अपनी बेईमानियों के कारण रोटरी इंटरनेशनल की कार्रवाई से भले ही बच रहे हों, लेकिन अपने क्लब में 'पिट' रहे हैं । राजा साबू के नजदीकी पूर्व गवर्नर मनप्रीत सिंह को अभी हाल ही में क्लब के एक प्रोजेक्ट में घपलेबाजी करने के आरोप में क्लब की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है । मनप्रीत सिंह को क्लब से निलंबित किए जाने की घटना ने राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को दबाव में तो ला दिया है, और उन्हें डर हुआ है कि कहीं अपनी अपनी बेईमानियों के कारण वह भी अपने अपने क्लब्स से निलंबित न कर दिए जाएँ । डिस्ट्रिक्ट 3080 के बड़े रसूख वाले लोग अपने अपने क्लब्स और डिस्ट्रिक्ट में भले ही लांछित हो रहे हों, लेकिन रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय से उन्हें जिस तरह से अभयदान मिला हुआ है - उसने रोटरी इंटरनेशनल की न्यायप्रणाली पर सवाल जरूर उठा दिया है । लोगों के बीच यह चर्चा छिड़ी हुई है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सतीश सिंघल के खिलाफ तत्परता से कार्रवाई करने वाले रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों को राजा साबू तथा यशपाल दास जैसे लोगों के खिलाफ लगने वाले आरोपों के मामले में साँप क्यों सूँघ जाता है ?