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Monday, March 23, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी से पीछा छुड़ा कर और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा के सहयोग/समर्थन के बल पर अशोक कंतूर ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जीता

नई दिल्ली । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल और रवि चौधरी पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अशोक कंतूर को जितवाने के लिए लगे थे, लेकिन चुनाव अशोक कंतूर की बजाये अनूप मित्तल जीत गए थे; इस वर्ष वह दोनों अजीत जालान को जितवाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन चुनाव अजीत जालान की बजाये अशोक कंतूर जीत गए हैं । इस तरह अशोक कंतूर की पिछले वर्ष की हार और इस वर्ष की जीत विनोद बंसल और रवि चौधरी के लिए किरकिरी करवाने वाली साबित हुई है । रवि चौधरी ने हालाँकि बीच बीच में कुछेक बार अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के समर्थन में आने की कोशिश की थी, लेकिन अशोक कंतूर ने खासी सतर्कता रखते हुए उन्हें अपनी उम्मीदवारी के पास फटकने नहीं दिया - दरअसल वह जान/समझ रहे थे कि रवि चौधरी यदि उनकी उम्मीदवारी के साथ जुड़े, तो उनकी चुनावी नैय्या शर्तिया डूब ही जाएगी । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष की चुनावी हार के लिए अशोक कंतूर ने रवि चौधरी को ही जिम्मेदार ठहराया था, और कहा/बताया था कि रवि चौधरी की बदनामी उनकी उम्मीदवारी पर भारी साबित हुई । अशोक कंतूर ने जान/समझ लिया था कि वह रवि चौधरी की छाया यदि मुक्त नहीं हुए, तो कभी गवर्नर नहीं बन पायेंगे; और इसलिए अपनी उम्मीदवारी को दोबारा से प्रस्तुत करने से पहले उन्होंने रवि चौधरी को क्लब से निकलवाने की 'व्यवस्था' की और रवि चौधरी को एक दूसरे क्लब में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा । रवि चौधरी ने इस वर्ष अजीत जालान की उम्मीदवारी का झंडा उठाया । अजीत जालान को बहुत लोगों ने समझाया कि रवि चौधरी से यदि उन्होंने दूरी नहीं बनाई, तो चुनाव में अपनी हार पक्की ही समझो । अजीत जालान ने किसी की नहीं सुनी, और नतीजा उनकी हार के रूप में सामने आया है ।
अजीत जालान को पहली वरीयता में तो कम वोट मिले ही, दूसरी वरीयता के 31 वोटों में से भी कुल 2 वोट ही मिले, जिसके कारण उनकी हार का अंतर 50 से भी अधिक वोटों का हो गया । दूसरी वरीयता के वोटों के मामले में अजीत जालान को वोटों का जो टोटा पड़ा, उसे रवि चौधरी की बदनामी से जोड़ कर देखा/पहचाना जा रहा है । अजीत जालान के कुछेक नजदीकियों का ही कहना है कि अजीत जालान की उम्मीदवारी के लिए की गई विनोद बंसल की मेहनत पर रवि चौधरी की बदनामी ने पानी फेर दिया है । इनका यह भी मानना और कहना है कि अजीत जालान की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में विनोद बंसल का देर से सक्रिय होना भी अजीत जालान की हार का एक प्रमुख कारण है - इनका विश्वास है कि विनोद बंसल यदि और पहले सक्रिय होते, तो अजीत जालान की उम्मीदवारी को और वोट मिल सकते थे और शायद वह चुनाव जीत ही जाते । अजीत जालान के नजदीकियों को लगता है कि विनोद बंसल ने वोटिंग शुरू होने तक अजीत जालान की उम्मीदवारी का समर्थन करने से 'छिपने' की, और अजीत जालान की उम्मीदवारी की कमान रवि चौधरी को सौंपे रखने की जो रणनीति बनाई - उसने उल्टा असर किया; दरअसल रवि चौधरी के अजीत जालान के समर्थन में सक्रिय दिखने से अजीत जालान की उम्मीदवारी का जो कबाड़ा हुआ, विनोद बंसल ने बाद में उसे संभालने की कोशिश तो बहुत की, लेकिन वह बहुत संभाल नहीं सके । विनोद बंसल का अपने क्लब का वोट आखिर में डलवाने का फैसला भी अजीत जालान की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने वाला रहा । अजीत जालान के कुछेक समर्थकों का ही मानना/कहना है कि विनोद बंसल के 'फैसले' से कई क्लब्स के पदाधिकारियों के बीच अजीत जालान को वोट देने का विश्वास नहीं बन पाया । इन्हें लगता है कि विनोद बंसल यदि अपने क्लब का वोट पहले डलवा देते, तो अजीत जालान को और कुछेक क्लब्स के वोट भी मिल सकते थे ।
इस वर्ष के चुनावी नतीजे में सबसे तगड़ा झटका महेश त्रिखा को लगा है - उन्हें नंबर एक या नंबर दो पर देखा/पहचाना जा रहा था, लेकिन चुनावी नतीजे में वह तीसरे नंबर पर पाए गए । उन्हें वोट देने वालों ने दूसरी वरीयता के लिए जिस थोक भाव में अशोक कंतूर को चुना, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि अशोक कंतूर ने उनके समर्थन-आधार में अच्छी सेंध लगाई है । अशोक कंतूर ने यह सेंध डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा के सहयोग से लगाई । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में आने वाले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के समर्थन की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है; असल में उसके पास अपनी डिस्ट्रिक्ट टीम के पदों का जखीरा होता है - जिसे 'दिखा' कर वह अपने उम्मीदवार के लिए वोट जुटाने की हैसियत रखता है । संजीव राय मेहरा ने इस वर्ष के कुछेक प्रेसीडेंट्स को जिस तरह से अपनी टीम का सदस्य बनाया है, उसे देख/जान कर ही समझ लिया गया कि यह सब उन्होंने अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के लिए वोट जुटाने के लिए किया है । संजीव राय मेहरा की तरकीब काम कर गई, और अशोक कंतूर को उसका अच्छा फायदा मिला । पिछले वर्ष की चुनावी हार से मिले सबक से अशोक कंतूर ने इस वर्ष की अपनी चुनावी तैयारी को अच्छे से संयोजित भी किया, और वह पूरे चुनाव-अभियान के दौरान कभी भी ओवर-कॉन्फीडेंट होते हुए नजर नहीं आए । चुनाव अभियान के दौरान 'बनने' वाले हर प्रतिकूल मौके को अनुकूल बनाने के लिए उन्हें प्रयास किए और इस वर्ष वह पिछले वर्ष जैसी गलतियाँ करने से बचते हुए दिखे - और इसी का नतीजा रहा कि वह 50 से अधिक वोटों से विजयी हुए हैं । 

Thursday, March 19, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अजीत जालान के बड़े अंतर से जीतने के विनोद बंसल के दावे ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच हलचल मचाई हुई है, और अशोक कंतूर व महेश त्रिखा के समर्थकों को डरा दिया है

नई दिल्ली । विनोद बंसल और रवि चौधरी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अजीत जालान की जीत का दावा करके न सिर्फ अशोक कंतूर और महेश त्रिखा के समर्थकों के बीच खासी हलचल मचा दी है, बल्कि डिस्ट्रिक्ट के लोगों को भी हैरान और चकित किया है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट में हर कोई अशोक कंतूर व महेश त्रिखा में से किसी एक के जीतने का अनुमान लगा रहा है, और अजीत जालान को तीसरे नंबर पर देख/पा रहा है । अजीत जालान के नजदीकी तथा उनकी उम्मीदवारी के समर्थक तक अजीत जालान को तीसरे नंबर पर देख रहे हैं । उनके कुछेक समर्थक बताते रहे हैं कि जैसे जैसे चुनाव आगे बढ़ा, उन्हें भी समझ में आ गया कि अजीत जालान तो मुकाबले में भी नहीं आ पा रहे हैं - और तब उनकी कोशिश यह हो गई कि अजीत जालान को कम से कम इतने वोट तो मिल जाएँ कि उन्हें शर्मनाक हार का सामना न करना पड़े और वह अगले रोटरी वर्ष में अपनी उम्मीदवारी का दावा पेश कर सकें । ऐसे में, अजीत जालान की जीत के विनोद बंसल और रवि चौधरी के दावे ने हर किसी को चौंकाया है । रवि चौधरी को तो डिस्ट्रिक्ट में कोई सीरियसली नहीं लेता है; लेकिन विनोद बंसल को लेकर लोगों को लगता है कि वह यदि अजीत जालान की जीत का दावा कर रहे हैं - तो जरूर चुनावी नतीजे में कुछ बड़ा उलटफेर हो रहा होगा । विनोद बंसल, रवि चौधरी और अजीत जालान के साथ नजदीकी रखने वाले कुछेक रोटेरियंस का कहना/बताना है कि वोटिंग लाइन खुलने से दो/एक दिन पहले विनोद बंसल ने अजीत जालान की उम्मीदवारी के पक्ष में जो सक्रियता दिखाई, उसने फिर चुनावी परिदृश्य का सारा नजारा ही बदल दिया है ।
उल्लेखनीय है कि विनोद बंसल को अजीत जालान के समर्थक के रूप देखा/पहचाना तो जा रहा था, लेकिन विनोद बंसल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति से दूर रहने के दावे कर रहे थे । हालाँकि कई मौकों पर उन्हें महेश त्रिखा और अशोक कंतूर के खिलाफ शब्दों के बाण चलाते तो सुना/देखा गया; और अशोक कंतूर को लेकर अक्सर ही वह यह कहते हुए सुने गए कि उन्हें चुनाव जितवाने के लिए जितनी कोशिश की जा सकती थी, वह पिछले वर्ष उन्होंने की थी - और उसके बाद भी अशोक कंतूर नहीं जीते, तो मतलब यही है कि गवर्नर बनना उनकी किस्मत में नहीं है । महेश त्रिखा और अशोक कंतूर को लेकर की जाने वाली कटाक्षभरी विरोधी बातों के जरिये विनोद बंसल यह संकेत तो देते रहे कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवारों में उनकी पसंद अजीत जालान हैं, लेकिन सच यह भी है कि वह अजीत जालान के लिए कुछ करते हुए नजर नहीं आए । इसके लिए अजीत जालान को कई लोगों से ताने भी सुनने को मिले कि विनोद बंसल ने उन्हें उम्मीदवार तो बना/बनवा दिया, लेकिन उनकी उम्मीदवारी के लिए कुछ कर नहीं रहे हैं । इस तरह के तानों पर अजीत जालान तो मुस्कुरा कर चुप रह जाते, लेकिन उनके कुछेक नजदीकी लोगों को कहते/बताते रहे कि विनोद बंसल अभी पर्दे के पीछे से अजीत जालान के लिए 'काम' कर रहे हैं, और उचित समय आने पर वह पर्दा हटा कर सामने आयेंगे । 
वोटिंग शुरू होने से दो/एक दिन पहले विनोद बंसल ने अजीत जालान की उम्मीदवारी की कमान सँभाली, और रवि चौधरी के साथ मिलकर अजीत जालान के लिए वोट डलवाने का काम शुरू किया । विनोद बंसल ने बहुत ही गुपचुप तरीके से काम किया, और दूसरे लोगों को ज्यादा हवा नहीं लगने दी कि वह क्या कर रहे हैं । वोटिंग शुरू होने के आठ/नौ दिन बाद अब जब अधिकतर क्लब्स के वोट पड़ चुके हैं, और दो/तीन क्लब्स ही वोट डालने के लिए बचे रह गए हैं - तब विनोद बंसल ने खुद से ही लोगों को कहना/बताना शुरू कर दिया है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव अजीत जालान जीत रहे हैं, और जल्दी ही इसकी सार्वजनिक घोषणा हो जाएगी । विनोद बंसल बता रहे हैं कि उन्हें प्रत्येक क्लब का पता है कि उसने किसे वोट दिया है, और इसी जानकारी के आधार पर उनका आकलन है कि पहली और दूसरी वरीयता के वोटों को जोड़ कर अजीत जालान को 80 से 90 के बीच वोट मिल रहे हैं, और वह एक अच्छे अंतर से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का चुनाव जीत रहे हैं । विनोद बंसल और रवि चौधरी का कहना/बताना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव का नतीजा उन लोगों के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा, जो अजीत जालान को तीसरे नंबर पर देख रहे हैं । यह दावा यदि रवि चौधरी की तरफ से किया गया होता, तो कोई भी इसे गंभीरता से नहीं लेता; लेकिन चूँकि यह दावा विनोद बंसल की भी तरफ से किया गया है - इसलिए इस दावे ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच हलचल मचाई हुई है, और अशोक कंतूर व महेश त्रिखा के समर्थकों को डरा दिया है । देखना दिलचस्प होगा कि अजीत जालान की जीत का विनोद बंसल का दावा सचमुच सच साबित होता है, या साबित होगा कि विनोद बंसल पर रवि चौधरी की संगत का कुछ ज्यादा ही असर हो गया है ।

Monday, February 24, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में महेश त्रिखा की उम्मीदवारी को मिलते दिख रहे व्यापक समर्थन का मुकाबला करने के लिए अशोक कंतूर को नाराज चल रहे रवि चौधरी को मनाने तथा उन्हें अजीत जालान के समर्थन से दूर हटाने की जरूरत महसूस हो रही है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए वोटिंग शुरू होने के दिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा द्वारा एजीटीएस (असिस्टेंट गवर्नर्स ट्रेनिंग सेमीनार) करने का संज्ञान लेते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन ने वोटिंग शुरू करने की तारीख दो/एक दिन आगे बढ़ाने के लिए कार्रवाई शुरू की है, जिसके चलते खामःखाँ पैदा हुए विवाद का अंत होता हुआ दिख रहा है । इसके लिए हर कोई सुरेश भसीन की तारीफ कर रहा है; लोगों को लग रहा है कि नाहक ही पैदा हुए एक विवाद को सुरेश भसीन ने अपनी सूझबूझ से बहुत आराम से खत्म करवाने के लिए कदम उठाया है । उल्लेखनीय है कि एक तरफ तो घोषित कार्यक्रम के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए भारतीय समयानुसार 29 फरवरी की देर रात से वोटिंग लाइन खुलना हैं; और दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा ने 29 फरवरी व एक मार्च को एजीटीएस करने का रेसीडेंशियल प्रोग्राम बना लिया है, जिसमें कई मौजूदा प्रेसीडेंट्स को विभिन्न भूमिकाएँ देते हुए आमंत्रित किया गया है । संजीव राय मेहरा को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जाता है - इसलिए आरोप लगे कि संजीव राय मेहरा 29 फरवरी की रात को, एजीटीएस में इकट्ठा हुए प्रेसीडेंट्स से अपने सामने अशोक कंतूर के पक्ष में वोट डलवायेंगे । आरोप की शक्ल में विवाद बढ़ता दिखा, तो सुरेश भसीन ने हस्तक्षेप किया और कहा कि वह वोटिंग लाइन खुलने की तारीख दो/एक दिन आगे बढ़वाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करते हैं । उनके इस ऐलान से उक्त विवाद शांत हुआ है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव से जुड़ा एक विवाद तो शांत हो गया है, लेकिन अजीत जालान और उनके साथी एक दूसरे विवाद को जिंदा रखने के प्रयासों में लगे हुए हैं । उल्लेखनीय है कि अजीत जालान और उनके साथी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में उस समय भड़क उठे थे, जब लोगों के बीच उन्होंने चर्चा सुनी कि अजीत जालान को तो कुल दस/पंद्रह वोट ही मिल सकेंगे और वह नाहक ही उम्मीदवार बने हुए हैं । यह चर्चा सुन कर अजीत जालान और उनके साथियों ने आरोप लगाया कि प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार और उनके समर्थक इस तरह का नकारात्मक प्रचार करके उनकी चुनावी संभावना को खत्म करने का काम कर रहे हैं । उनके इस आरोप को उनका रोना-धोना बताते हुए कई एक लोगों ने उन्हें सलाह भी दी कि चुनाव से पहले हर कोई अपना अपना आकलन पेश करता ही है, इसमें आरोप वाली बात भला क्या है ? कई लोगों ने अजीत जालान और उनके साथियों को समझाया कि रोने-धोने की बजाये, अपनी चुनावी संभावना को मजबूत करने के लिए उन्हें दावा करना चाहिए कि अजीत जालान को तो 150 वोट मिल रहे हैं । अजीत जालान और उनके साथी लेकिन लगातार यही रोना रोये जा रहे हैं कि उन्हें दस/पंद्रह ही वोट मिलने की बात कह कर कुछेक लोग उनकी चुनावी जीत की संभावना को खत्म करने का षड्यंत्र कर हैं । अजीत जालान के नजदीकियों को ही कहना/बताना है कि अजीत जालान जीतने के लिए उम्मीदवार नहीं बने हुए हैं; असल में वह भी जान/समझ रहे हैं कि इस बार वह नहीं जीत रहे हैं - इसके बावजूद वह उम्मीदवार बने हुए हैं और समर्थन जुटाने के लिए प्रयास कर रहे हैं तो इसलिए ताकी अगले रोटरी वर्ष में उनकी उम्मीदवारी को प्रभावी तरीके से समर्थन मिल सके ।
उल्लेखनीय है कि अगले रोटरी वर्ष की उम्मीदवारी के लिए कई उम्मीदवारों ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है, जिसे देखते हुए अजीत जालान को लगता है कि इस बार के चुनाव में पिछड़ने/हारने के बाद भी उन्हें यदि अच्छे वोट मिल जाते हैं, तो अगली बार के लिए उनका दावा मजबूत हो जायेगा । अजीत जालान और उनके साथियों को डर है कि उन्हें मिलने वाले वोटों की संख्या यदि सचमुच दस/पंद्रह ही रह गई, तो अगले रोटरी वर्ष में भी उनकी उम्मीदवारी को कोई गंभीरता से नहीं लेगा । इसलिए वह दस/पंद्रह वोट मिलने की बात से भड़के हुए हैं । इस मामले में रोना/धोना मचाये रख कर अजीत जालान और उनके साथी अपने वोटों की संख्या को थोड़ा बढ़ा लेना चाहते हैं । उनकी इस कोशिश ने अशोक कंतूर और उनके साथियों को डराया हुआ है । दरअसल अशोक कंतूर और उनके साथियों को लगता है कि अजीत जालान को जो भी वोट मिलेंगे, वह वास्तव में उनके वोटों की संख्या को ही घटाने का काम करेंगे । उल्लेखनीय है कि पिछले रोटरी वर्ष में अशोक कंतूर और अजीत जालान एक साथ थे, लेकिन तब भी अशोक कंतूर जीतने के लिए जरूरी वोट प्राप्त नहीं कर सके थे । इस बार अजीत जालान जब खुद भी उम्मीदवार बन बैठे हैं, तब स्वाभाविक रूप से अशोक कंतूर के लिए जीतने के लिए जरूरी वोट पाना और मुश्किल बन गया दिख रहा है । इस मुश्किल को हल करने के लिए अशोक कंतूर की तरफ से पूर्व गवर्नर रवि चौधरी का समर्थन फिर से प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है । अशोक कंतूर की तरफ से कोशिश की जा रही है कि रवि चौधरी का समर्थन भले ही उन्हें न मिले, लेकिन रवि चौधरी - अजीत जालान को वोट दिलवाने की कोशिश करते हुए भी न दिखें । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रवि चौधरी जिस तरह से गायब रहे और अजीत जालान अकेले ही अपनी उम्मीदवारी के अभियान में जुटे नजर आए - उसे अशोक कंतूर ने रवि चौधरी की मदद के रूप में ही देखा/पहचाना है । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में तीनों उम्मीदवारों के 'प्रदर्शन' में महेश त्रिखा की प्रस्तुति को जिस तरह से व्यापक सराहना मिली और उनके क्लब के सदस्य - दोनों पूर्व गवर्नर्स सुरेश जैन तथा संजय खन्ना सहित - बड़ी संख्या में उनकी उम्मीदवारी के प्रति समर्थन दिखाते हुए नजर आये - उसके चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में महेश त्रिखा को एक अच्छी पोजीशन मिलती हुई लगी है । ऐसे में, अशोक कंतूर के शुभचिंतकों ने भी कहना शुरू कर दिया है कि अजीत जालान ने वोट जुटाने के अपने प्रयासों को यदि जारी रखा, तो अशोक कंतूर के लिए महेश त्रिखा की उम्मीदवारी का मुकाबला करना मुश्किल ही होगा ।

Wednesday, February 5, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने हेतु गणतंत्र दिवस पर दारू पार्टी का आयोजन करके अजीत जालान ने गणतंत्र दिवस की गरिमा को ठेस पहुँचाने के साथ क्लब, डिस्ट्रिक्ट व रोटरी की छवि व प्रतिष्ठा को भी दाँव पर लगाया

नई दिल्ली । गणतंत्र दिवस पर 'डे-आउट पार्टी' के नाम पर दारू पार्टी करने के लिए रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के प्रेसीडेंट संदीप मंडल अपने क्लब के सदस्यों की ही आलोचना के निशाने पर आ रहे हैं । क्लब के ही सदस्यों का कहना/पूछना है कि संदीप मंडल को दारू पार्टी ही करना थी, तो और किसी भी दिन कर सकते थे - गणतंत्र दिवस जैसे देश के लिए महत्त्वपूर्ण व गौरवपूर्ण दिवस पर, और जो दिन देश भर में ड्राई डे भी होता है, उस दिन दारू पार्टी करने की भला उन्हें क्या उतावली थी ? क्लब के सदस्यों का ही कहना है कि संदीप मंडल और उक्त दारू पार्टी में शामिल हुए क्लब के वरिष्ठ सदस्यों को क्या पता नहीं है कि उन्होंने जो किया है, वह संज्ञेय अपराध है, और क्लब व डिस्ट्रिक्ट के साथ-साथ रोटरी की छवि व प्रतिष्ठा को भी चोट पहुँचाने वाला है । मजे की बात यह है कि गणतंत्र दिवस पर दारू पार्टी करने के मामले में आलोचना का शिकार बने संदीप मंडल ने दारू पार्टी के लिए पूर्व प्रेसीडेंट अजीत जालान को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । संदीप मंडल का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से ही अजीत जालान ने उक्त पार्टी की योजना बनाई और अन्य क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को आमंत्रित किया । लेकिन गणतंत्र दिवस पर हुई डे-आउट पार्टी में शामिल होने वालों को 'ड्रिंक्स' का ऑफर तो संदीप मंडल की तरफ से ही था; इस पर संदीप मंडल का कहना है कि मौजूदा प्रेसीडेंट होने के नाते निमंत्रण पत्र पर नाम उनका जरूर था, लेकिन किया-धरा सब अजीत जालान का ही था ।


अजीत जालान ने दूसरे क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को आमंत्रित करने/करवाने में इस बात पर भी खासा जोर दिया था कि उक्त पार्टी में पूर्व गवर्नर्स विनोद बंसल तथा रवि चौधरी भी आयेंगे । हालाँकि जब यह दोनों ही पार्टी में नहीं पहुँचे, तो अजीत जालान ने ही वहाँ बताया कि अपनी अपनी निजी व्यस्तताओं के कारण विनोद बंसल व रवि चौधरी पार्टी में नहीं आ पा रहे हैं । हालाँकि अन्य कुछेक लोगों के अनुसार, विनोद बंसल व रवि चौधरी को पता चल गया था कि अजीत जालान के निमंत्रण को लोगों ने स्वीकार नहीं किया है, और पार्टी में गिनती के लोग - और वह भी सिर्फ क्लब के लोग ही पहुँचे हैं; इसलिए उन्होंने पार्टी में पहुँचने की जरूरत नहीं समझी । पार्टी में जितने जो लोग पहुँचे थे, उन्होंने पहले झंडा फहराया और फिर ड्राई डे के बावजूद हो रही दारू-पार्टी का आनंद लिया । 


मजे की बात यह भी रही कि क्लब के पदाधिकारियों तथा अजीत जालान ने गणतंत्र दिवस के नाम पर की गई दारू पार्टी की तस्वीरें सोशल मीडिया में भी प्रदर्शित कीं, और क्लब के फेसबुक पेज पर पार्टी की तस्वीरें लगाईं । दरअसल उन तस्वीरों को देख कर ही क्लब के सदस्यों के बीच मामला भड़का और उनका कहना रहा कि क्लब के पदाधिकारी व वरिष्ठ सदस्य इस तरह गणतंत्र दिवस का अपमान कैसे कर सकते हैं ? इस दारू पार्टी से नाराज क्लब के सदस्यों का हैरान हो कर कहना/पूछना है कि अजीत जालान के दावे के अनुसार, जो विनोद बंसल व रवि चौधरी पार्टी में शामिल होने वाले थे, उन्होंने भी यह बताने की जरूरत नहीं समझी कि गणतंत्र दिवस पर दारू पार्टी नहीं की जा सकती है - और नहीं करना चाहिए । गणतंत्र दिवस का मजाक बना देने तथा अपमान करने के मामले में क्लब के लोगों की नाराजगी सामने आने के बाद डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ सदस्यों ने रेखांकित किया है कि रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के वरिष्ठ सदस्य और पदाधिकारी अपनी उच्चकों जैसी हरकतों के कारण अक्सर ही फजीहत का शिकार होते रहे हैं । अभी कुछ ही समय पहले क्लब के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा बेईमानीपूर्ण तरीकों से बनाए गए एक ट्रस्ट का मामला सामने आया था, जिसमें काउंसिल ऑफ गवर्नर्स को फैसला करना पड़ा था और उक्त ट्रस्ट को बंद करने का आदेश देना पड़ा था । ओल्ड ऐज होम के नाम पर बने ट्रस्ट के हिसाब-किताब को लेकर गंभीर आरोप हैं, और हिसाब-किताब को छिपाया जा रहा है । ऐसे में, गणतंत्र दिवस को मजाक बना देने और उसकी गरिमा को चोट पहुँचाते हुए क्लब के पदाधिकारियों की मदद से अजीत जालान द्वारा अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से की गई दारू पार्टी ने क्लब, डिस्ट्रिक्ट व रोटरी की छवि व प्रतिष्ठा को दाँव पर लगा दिया है । 

Saturday, January 11, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में महेश त्रिखा की डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच बनी पहचान व प्रतिष्ठा को देखते हुए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी ने अशोक कंतूर की उम्मीदवारी की तरफ मुड़ने का संकेत देकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अजीत जालान की उम्मीदवारी के लिए संकट खड़ा किया 

नई दिल्ली । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए एक बार फिर अशोक कंतूर की उम्मीदवारी का झंडा उठाने की तैयारी करते दिख रहे हैं । उनके नजदीकियों का कहना है कि अशोक कंतूर ने रवि चौधरी से माफी माँग कर उनका समर्थन लेने/पाने का प्रयास किया है, जिस पर रवि चौधरी ने सकारात्मक रवैया दिखाया है । रवि चौधरी के बदले रवैये पर अजीत जालान ने अपने नजदीकियों के बीच चिंता जताई है । दरअसल रवि चौधरी अभी तक अजीत जालान की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशें करते देखे/सुने गए हैं । अजीत जालान के लिए चिंता की बात यह है कि रवि चौधरी ने यदि उन्हें छोड़ दिया, तो उनकी उम्मीदवारी की वकालत करने वाला कोई नहीं रह जायेगा । अजीत जालान पूर्व गवर्नर विनोद बंसल से मिले धोखे से उबरने की कोशिश अभी कर ही रहे थे, कि रवि चौधरी उन्हें झटका देते हुए दिख रहे हैं । अजीत जालान के लिए फजीहत की बात यह हुई है कि यूँ तो उन्हें विनोद बंसल के 'आदमी' के रूप में देखा/पहचाना जाता है, और वह खुद ही लोगों को कहते/बताते रहे हैं कि वह तो विनोद बंसल के ही कहने पर उम्मीदवार बने हैं - लेकिन अब विनोद बंसल ही उनकी उम्मीदवारी में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं । अजीत जालान ने अपने नजदीकियों को बताया है कि विनोद बंसल ने उन्हें आश्वस्त किया है कि उनके पास डिस्ट्रिक्ट में जो छह/आठ वोट हैं, वह उन्हें दिलवा देंगे - लेकिन उनके पक्ष में खुलकर कोई काम नहीं करेंगे । विनोद बंसल ने अजीत जालान को उम्मीदवार तो बना/बनवा दिया, लेकिन फिर उन्हें इस बार डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में तटस्थ 'दिखने' की जरूरत महसूस हुई और उन्होंने अपने आप को पीछे कर लिया । विनोद बंसल से मिले झटके के बाद अजीत जालान को रवि चौधरी का समर्थन मिला, तो अजीत जालान के चुनावी अभियान में कुछ जान पड़ी । लेकिन अब जब रवि चौधरी भी उनको छोड़ कर अशोक कंतूर के साथ जाने की तैयारी करते देखे जा रहे हैं, तो अजीत जालान को अपनी उम्मीदवारी का अभियान मुसीबत में फँसता/पड़ता नजर आ रहा है ।
रवि चौधरी के नजदीकियों का कहना/बताना है कि रवि चौधरी को दरअसल यह समझ में आ गया है कि वह अजीत जालान के लिए चाहें जितना/जो कर लें, उनकी उम्मीदवारी के लिए कोई माहौल नहीं बना सकते हैं; उन्होंने पाया है कि डिस्ट्रिक्ट में कोई भी अजीत जालान की उम्मीदवारी को गंभीरता से नहीं ले रहा है । इसके अलावा, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा तथा निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया के अशोक कंतूर के समर्थन में होने का दबाव भी रवि चौधरी पर है । रवि चौधरी के रवैये को बदलने का सबसे बड़ा कारण लेकिन अशोक कंतूर के रवि चौधरी के साथ अपने बिगड़े संबंधों को सुधारने के प्रयास रहे हैं । उल्लेखनीय है कि पिछले रोटरी वर्ष में अपनी पराजय के लिए अशोक कंतूर ने रवि चौधरी को जिम्मेदार ठहराया था; और कई मौकों पर कहा था कि रवि चौधरी की नॉनसेंस हरकतों तथा उनकी बदनामी के कारण वह चुनाव हार गए । बाद में जब रवि चौधरी को क्लब से निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा, तब भी यही चर्चा रही कि अशोक कंतूर ने इस वर्ष की अपनी उम्मीदवारी को रवि चौधरी की छाया से बचाने के लिए उन्हें क्लब से निकलवा दिया है । रवि चौधरी के नजदीकियों का कहना है कि लेकिन अब अशोक कंतूर ने रवि चौधरी से अपने कहे/किए की माफी माँग ली है, जिसके बाद रवि चौधरी ने अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के लिए काम करने की तैयारी शुरू कर दी है । अशोक कंतूर के नजदीकियों का कहना है कि पिछले वर्ष उन्होंने अपनी उम्मीदवारी की कमान पूरी तरह रवि चौधरी को सौंप दी थी, जिसके कारण रवि चौधरी की बदनामी अशोक कंतूर की उम्मीदवारी को ले डूबी थी । अशोक कंतूर ने लेकिन अब इस बात को समझ लिया है कि उन्हें रवि चौधरी की 'नॉनसेंस वैल्यू' का कैसे फायदा उठाना है । वह समझ गए हैं कि चुनावी राजनीति में 'नॉनसेंस' की भी एक 'वैल्यू' तो होती ही है, पिछले वर्ष लेकिन इस 'वैल्यू' पर पूरी तरह निर्भर हो जाने कारण उनकी लुटिया डूब गई थी । इसलिए अशोक कंतूर इस बार रवि चौधरी की मदद तो लेंगे, लेकिन अपनी उम्मीदवारी की कमान पूरी तरह उन्हें नहीं सौपेंगे ।
रवि चौधरी भी इस बात को समझ तो रहे हैं, लेकिन वह इस बात को ज्यादा अहमियत नहीं दे रहे हैं । रवि चौधरी का इस वर्ष का एजेंडा दरअसल यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में वह महेश त्रिखा को जीतने नहीं देना चाहते हैं । उन्होंने हाल ही दिनों में यह कहना भी शुरू किया है कि वह अजीत जालान व अशोक कंतूर में से उस उम्मीदवार को समर्थन देंगे, जो महेश त्रिखा को हराता हुआ दिखेगा । वास्तव में उनकी इस बात में ही, लोगों ने उन्हें अशोक कंतूर की तरफ लौटने की तैयारी करते हुए 'देखा' है । दरअसल, कई पूर्व गवर्नर्स के समर्थन तथा निरंतर सक्रियता के बल पर महेश त्रिखा ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच जो पैठ बनाई है, उसे देखते/पहचानते हुए रवि चौधरी को विश्वास हो चला है कि अजीत जालान के लिए तो महेश त्रिखा को हरा पाना मुश्किल ही नहीं, बल्कि असंभव ही है । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता ने दिल्ली में हुए अपने सम्मान समारोह में रोटरी के लिट्रेसी प्रोग्राम में महेश त्रिखा की निरंतर संलग्नता की जैसी प्रशंसा की, उसके बाद तो महेश त्रिखा की पहचान व साख लोगों के बीच और बढ़ गई है । लोगों ने इस बात को बड़ी तारीफ के योग्य माना/पाया है कि महेश त्रिखा के रूप में उनके बीच एक ऐसा रोटेरियन भी है, जो बिना ढिंढोरा पीटे पिछले कई वर्षों से लगातार रोटरी का काम करता आ रहा है । अधिकतर लोगों ने स्वीकार किया कि शेखर मेहता अपने भाषण में यदि महेश त्रिखा के काम का उल्लेख नहीं करते तो उन्हें तो इस बारे में पता ही नहीं चलता । शेखर मेहता से मिली प्रशंसा के बाद महेश त्रिखा की डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच बनी प्रतिष्ठा को देखते हुए रवि चौधरी को उन्हें हरा पाना और मुश्किल लगने लगा है । इस बात का तो उन्हें पक्का यकीन हो गया है कि अजीत जालान के भरोसे तो वह महेश त्रिखा को नहीं ही हरा सकेंगे । इसीलिए वह अब अशोक कंतूर की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए तैयार होते नजर आ रहे हैं । विनोद बंसल के बाद अब रवि चौधरी की तरफ से भी मिलने जा रहे इस झटके ने अजीत जालान की उम्मीदवारी के लिए संकट खड़ा कर दिया है । 

Monday, September 16, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अशोक कंतूर की डिस्ट्रिक्ट को 'बंद' करवा देने की धमकी, अजीत जालान की 'बनिया कार्ड' की राजनीति तथा महेश त्रिखा की निश्चिंतता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति के सीन को सी-ग्रेड हिंदी फिल्म के नाटक जैसा बना दिया है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव दूसरे वर्ष भी हारने की स्थिति में डिस्ट्रिक्ट 'बंद' करवा देने की अशोक कंतूर की धमकी तथा बनिया प्रेसीडेंट्स के भरोसे चुनाव जीतने की अजीत जालान की घोषणा ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में खासा ड्रामा पैदा कर दिया है । तीसरी तरफ महेश त्रिखा को उम्मीद है कि इन दोनों की आपसी लड़ाई उन्हें आसानी से जीत दिलवा देगी । इस तरह, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनावी परिदृश्य किसी सी-ग्रेड हिंदी फिल्म का सा आभास देता हुआ लग रहा है; जिसमें रोना-धोना है, साजिशें हैं, धमकियाँ हैं, चलताऊ किस्म के हथकंडे हैं, अच्छे-अच्छे सपने हैं - यानि फूहड़ किस्म के मनोरंजन का पूरा पूरा सामान है । सबसे धमाकेदार घोषणा अशोक कंतूर ने की हुई है । कुछेक लोगों से उन्होंने साफ कहा है कि इस बार भी वह यदि चुनाव नहीं जीते, तो डिस्ट्रिक्ट में हो रही गड़बड़ियों व बेईमानियों की वह पोल खोलेंगे और जिसके चलते हो सकता है कि रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट को नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस में ही डाल दे । अशोक कंतूर दरअसल उन पूर्व गवर्नर्स नेताओं से बहुत खफा हैं, जो पिछले वर्ष तो उनकी उम्मीदवारी के समर्थन में थे, लेकिन इस वर्ष उनकी उम्मीदवारी में  दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं ।अशोक कंतूर का कहना है कि उनके पास सभी गवर्नर्स की कारस्तानियों का कच्चा-चिट्ठा है, और यदि गवर्नर्स का समर्थन न मिलने के कारण वह चुनाव हारे - तो वह सभी की शिकायत रोटरी इंटरनेशनल में करेंगे । उनका कहना है कि उनके पास गड़बड़ियों व बेईमानियों के जो तथ्य हैं, वह इतने गंभीर हैं कि उन्हें देख/जान कर रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट को सस्पेंड भी कर सकता है ।
अजीत जालान ने अपनी जीत का जो फार्मूला लोगों को बताया है, वह भी लोगों का खासा मनोरंजन कर रहा है । उनका कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में करीब सत्तर प्रतिशत क्लब्स के प्रेसीडेंट बनिए हैं, इनमें से यदि कुछेक ने उन्हें धोखा दिया भी तो भी उन्हें इतने प्रेसीडेंट्स तो वोट दे ही देंगे जो उनकी जीत को सुनिश्चित करेंगे । अजीत जालान का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में हर कोई जानता है कि वह पूर्व गवर्नर विनोद बंसल के उम्मीदवार हैं, जो कि पंजाब के बनिए हैं और इस तरह वह उन्हें बनियों के साथ-साथ पंजाबियों का भी समर्थन मिलेगा और ऐसे में उन्हें भला कौन हरा सकेगा ? इस तरह की बातें करने पर अजीत जालान से कुछेक लोगों ने हालाँकि पूछा भी कि पिछले रोटरी वर्ष में उन्हें यह जरूरी नहीं लगता था क्या कि बनिए प्रेसीडेंट्स को बनिया उम्मीदवार को वोट देना चाहिए; पिछले वर्ष तो वह बनिए प्रेसीडेंट्स पर दबाव बना रहे थे कि वह पंजाबी उम्मीदवार को वोट दें ? इस सवाल पर कहीं चुप रह कर तो कहीं यह कहते हुए अजीत जालान ने अपने आप को 'बचाया' कि पिछले वर्ष की बात अलग थी । पिछले रोटरी वर्ष में अशोक कंतूर की हार के लिए अजीत जालान ने बनिया बहुल रोहतक क्षेत्र के रोटेरियंस को खूब कोसा था और उन पर धोखा देने का आरोप लगाया था । अजीत जालान ने कई लोगों को कहा/बताया है कि उनकी तथा उनके समर्थक नेताओं की तरफ से कोशिशें हो रही हैं कि इस बार रोहतक के क्लब्स के पदाधिकारी उनकी उम्मीदवारी के साथ धोखाधड़ी न कर सकें । कहीं कहीं अजीत जालान ने यह भी कहा है कि उन्हें तो उनके नेता जैसा कहने को कहते हैं, वह वैसा ही लोगों के बीच कहने लगते हैं । इससे लोगों को यह भी लग रहा है कि 'बनिया कार्ड' अजीत जालान का दिमागी फितूर नहीं है, बल्कि उनकी उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं की सोची-समझी रणनीति है ।
अशोक कंतूर व अजीत जालान को अपनी अपनी उम्मीदवारी को लेकर आक्रामक रवैया अपनाते देख महेश त्रिखा अपनी उम्मीदवारी को लेकर निश्चिंत हुए जा रहे हैं । उन्हें लग रहा है कि यह दोनों जितना ज्यादा सक्रिय होंगे, उतना ही एक दूसरे को नुकसान पहुँचायेंगे और इस तरह उनकी उम्मीदवारी के लिए रास्ते को आसान बनायेंगे । महेश त्रिखा और उनके समर्थक दरअसल पहले इस बात से डरे हुए थे कि अशोक कंतूर व अजीत जालान के बीच कहीं समझौता न हो जाए; उन्हें डर था कि यदि इन दोनों में से कोई एक उम्मीदवार रहा तो सीधे मुकाबले में महेश त्रिखा के लिए चुनाव निकालना मुश्किल हो सकता है - लेकिन जैसे जैसे यह साफ होता जा रहा है कि अशोक कंतूर के साथ-साथ अजीत जालान भी उम्मीदवार रहेंगे, वैसे वैसे महेश त्रिखा तथा उनके समर्थकों को अपना काम आसान होता नजर आ रहा है । महेश त्रिखा और उनके समर्थकों का गणित है कि पिछले रोटरी वर्ष में अशोक कंतूर व अजीत जालान की मिलीजुली 'ताकत' जब अशोक कंतूर को चुनाव नहीं जितवा सकी थी, तब अलग अलग होकर यह दोनों क्या पा लेंगे ? दूसरे लोगों को भी लगता है कि महेश त्रिखा का यदि अशोक कंतूर से सीधा मुकाबला हो रहा होता, तो अशोक कंतूर को सहानुभूति का फायदा मिल सकता था, लेकिन अजीत जालान की उम्मीदवारी प्रस्तुत होने से उस फायदे की उम्मीद पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है । अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के साथ रवि चौधरी वाली 'बीमारी' भी लगी हुई है । अशोक कंतूर को रवि चौधरी के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है और माना जाता है कि रवि चौधरी की हरकतों के चलते अशोक कंतूर की उम्मीदवारी को नुकसान हुआ था । रवि चौधरी की हरकतें बदस्तूर जारी हैं और अभी हाल ही में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा के पेम वन कार्यक्रम में कई गवर्नर्स को जिस तरह से अपमानित होना पड़ा, उसके लिए संजीव राय मेहरा के साथ-साथ उनके डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में रवि चौधरी को भी जिम्मेदार ठहराया गया है । समझा जाता है कि इस तरह की बातों से अशोक कंतूर की उम्मीदवारी को नुकसान होगा । सचमुच में क्या होगा, यह तो बाद में पता चलेगा - अभी लेकिन जिस तरह की बातें हो रही हैं, उसके चलते लोगों का फिलहाल मनोरंजन खूब हो रहा है ।

Sunday, September 8, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा का पहला ही कार्यक्रम प्रमुख पदाधिकारियों व वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स की बेइज्जती करने तथा पैसा कमाने का जरिया बनने के आरोपों के चलते बदनामी व फजीहत का शिकार हुआ

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा की अपने पहले कार्यक्रम - पेम वन में मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल, पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रंजन ढींगरा व विनय अग्रवाल की एक साथ 'बेइज्जती' करने के मुद्दे पर जैसी फजीहत हुई है, वैसी डिस्ट्रिक्ट में इससे पहले शायद ही कभी किसी की हुई होगी । फजीहत का शिकार होने के बाद संजीव राय मेहरा ने सारी कमियों/गलतियों का ठीकरा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर रवि चौधरी के सिर फोड़ कर अपने को बचाने की कोशिश की है; लेकिन इसके लिए भी उन्हें लोगों से सुनने को मिल रहा है कि छोटी और घटिया सोच रखने वाले रवि चौधरी को उन्होंने जब डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बना लिया है, तो उन्हें उस पर लगाम रखना भी तो सीखना पड़ेगा । संजीव राय मेहरा के नजदीकियों व शुभचिंतकों ने उन्हें आगाह किया है कि उन्होंने यदि रवि चौधरी की हरकतों पर लगाम नहीं लगाई तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें सिर्फ फजीहत और बदनामी ही झेलने को मिलेगी । पेम वन के आयोजन के नाम पर तथा डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदों को 'बेचने' के जरिये मोटी रकम कमाने/बनाने के आरोप भी संजीव राय मेहरा पर लग रहे हैं; हालाँकि कई लोग यह कहते हुए भी सुने गए हैं कि पता नहीं संजीव राय मेहरा को कुछ मिलेगा भी, या सारी रकम रवि चौधरी खुद अकेले ही हड़प जायेंगे ?
संजीव राय मेहरा ने पेम वन के आयोजन में पहला झटका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन को दिया । उल्लेखनीय है कि रोटरी में नियम और व्यवस्था के अनुसार डिस्ट्रिक्ट में कोई भी कार्यक्रम डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरफ से ही होता है - और हो सकता है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के भी जो कार्यक्रम होते हैं; प्रोटोकॉल के अनुसार, उनका निमंत्रण भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरफ से ही जाता है । संजीव राय मेहरा ने लेकिन मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन को पूरी तरह इग्नोर करते हुए तथा प्रोटोकॉल की ऐसीतैसी करते हुए निमंत्रण अपनी तरफ से दिया । सुरेश भसीन की इस बेइज्जती के लिए कुछेक लोग सुरेश भसीन को भी यह तर्क देते हुए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं कि सुरेश भसीन रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत करते तो संजीव राय मेहरा और रवि चौधरी यह हरकत नहीं कर पाते; लेकिन जब सुरेश भसीन ही अपनी बेइज्जती पर चुप लगा गए तो फिर दूसरा कौन उनकी मदद कर सकता है । वरिष्ठ रोटेरियंस ने अमित जैन के गवर्नर-वर्ष में हुए इसी से मिलती-जुलती हरकत को याद करते हुए बताया कि उस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में असित मित्तल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार विनोद बंसल के साथ मिल कर अमित जैन को इग्नोर करते हुए अपने एक कार्यक्रम की तैयारी शुरू कर दी थी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अमित जैन को चूँकि जितेंद्र गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा जा रहा था, इसलिए अमित जैन को बेइज्जत करने की असित मित्तल की मुहिम में विनोद बंसल भी बढ़चढ़ कर सहयोग कर रहे थे । आमतौर पर झगड़े-झंझट से दूर रहने वाले अमित जैन ने रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत कर उक्त कार्यक्रम को 'नल एंड वॉइड' घोषित करने का अनुरोध कर दिया, जिसकी जानकारी मिलने पर असित मित्तल ने फिर अमित जैन से विचार-विमर्श करके कार्यक्रम तय किया और प्रोटोकॉल के हिसाब से कार्यक्रम हुआ । लोगों का कहना है कि सुरेश भसीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, वह चाहें तो संजीव राय मेहरा को प्रोटोकॉल के हिसाब से कार्यक्रम करने के लिए 'मजबूर' कर सकते हैं - और अपने आप को बेइज्जत होने से बचा सकते हैं ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल का प्रोफाइल डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में नहीं छापा गया; इसके लिए बड़ा फनी कारण बताया गया कि प्रोफाइल माँगने और तैयार करने के बावजूद उसे इसलिए नहीं छापा जा सका, क्योंकि डायरेक्टरी में पेज नहीं बचा था । रंजन ढींगरा को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयर जैसे महत्त्वपूर्ण पद पर होने के बावजूद कार्यक्रम के महत्त्वपूर्ण मौकों पर मंच पर नहीं बुलाया गया । अनूप मित्तल और रंजन ढींगरा ने लोगों के बीच खुलकर अपनी नाराजगी को प्रदर्शित किया । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय अग्रवाल के लिए मुसीबत की बात यह रही कि अपनी उपेक्षा पर वह बेचारे खुलकर अपनी नाराजगी भी व्यक्त नहीं कर सके । दरअसल उन्हें तथा अन्य लोगों को उम्मीद थी कि संजीव राय मेहरा व रवि चौधरी की जोड़ी उन्हें डिस्ट्रिक्ट एडवाइजरी काउंसिल में अवश्य ही रखेंगे; लेकिन जब उन्हें वहाँ नहीं देखा/पाया गया, तो उन्होंने शिकायती स्वर में कुछ कहने/बोलने की कोशिश की तो लोगों ने यह कहते हुए उनका ही मजाक बनाना शुरू कर दिया कि आप तो इन दोनों की बड़ी तरफदारी करते रहे हैं, फिर भी इन्होंने आपको अपनी एडवाइजरी काउंसिल में रखने लायक नहीं समझा । कुछेक लोगों ने विनय अग्रवाल के साथ चुटकी भी ली कि आप क्या समझते थे कि रवि चौधरी सिर्फ दूसरों के साथ बदतमीजी करेगा, आपके साथ नहीं करेगा - अब जब उसकी 'बदतमीजी' का शिकार आप भी हो गए हैं, तो कैसा लग रहा है ? इस तरह की बातें सुनकर विनय अग्रवाल ने समझ लिया कि वह तो एडवाइजरी काउंसिल में जगह न मिलने का रोना भी किसी के सामने नहीं रो सकते हैं; यदि रोयेंगे तो हर कोई उनसे हमदर्दी दिखाने की बजाये उनका मजाक ही बनायेगा । 
संजीव राय मेहरा पेम वन के आयोजन तथा डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदों को 'बेचने' के जरिये मोटी रकम 'कमाने' के आरोपों के घेरे में भी फँसे हैं । पेम वन के आयोजन को उन्होंने 26 क्लब्स से स्पॉन्सर करवाया, जिसके तहत प्रत्येक क्लब से 60 हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक लिए गए । कुछेक रोटेरियंस ने व्यक्तिगत रूप से आयोजन को स्पॉन्सर किया । कई लोगों को लगता है कि संजीव राय मेहरा ने जितना पैसा इकट्ठा किया, खर्च उसका आधा भी नहीं हुआ । डायरेक्टरी में पेज कम पड़ जाने के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का प्रोफाइल नहीं छापे जा सकने वाली बात पर गौर करें, तो समझ सकते हैं कि संजीव राय मेहरा ने पैसे खर्च करने के मामले में कैसी कैसी कंजूसी व बचत की होगी और कितने पैसे बचाये होंगे ? अपनी डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदों के लिए चुने गए लोगों से भी संजीव राय मेहरा द्वारा मोटी मोटी रकमें बसूलने की चर्चा है । लोगों के बीच चर्चा सुनी जा रही है कि संजीव राय मेहरा ने अपनी गवर्नरी को पैसा कमाने/जुटाने का जरिया बना लिया है । संजीव राय मेहरा के नजदीकियों व शुभचिंतकों का कहना है कि असल में पैसों के मामले में रवि चौधरी की चूँकि खासी बदनामी रही है और उनके एकाउंट को लेकर भी खासी फजीहत वाली स्थिति रही थी, इसलिए भी संजीव राय मेहरा की हर कार्रवाई को शक/संदेह की निगाह से देखा जायेगा और यदि उन्होंने अपने तौर-तरीकों में पारदर्शिता नहीं रखी तो उनके हिस्से में भी रवि चौधरी जैसी ही बदनामी आएगी - और जो आना शुरू भी हो गई है ।

Monday, August 26, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अजीत जालान की उम्मीदवारी को जबर्दस्ती बनाने के पीछे विनोद बंसल का उद्देश्य क्या सचमुच इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के संदर्भ में डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में रवि चौधरी को कमजोर करना है ?

नई दिल्ली । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी के गुस्से का नया शिकार अजीत जालान बने हैं । एक समय हालाँकि दोनों के बीच बड़े अच्छे संबंध थे । लेकिन रवि चौधरी के बदतमीजीपूर्ण व्यवहार का कब कौन शिकार हो जाये - यह कोई नहीं जानता है । रवि चौधरी लोगों के साथ बदतमीजी करने के मामले में खासे कुख्यात हैं । एक मामले में तो उनकी शिकायत रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय तक पहुँची थी, और बड़ी मुश्किल से उन्हें बचाया जा सका था । लेकिन अपनी बदतमीजीपूर्ण हरकतों के चलते रवि चौधरी अपने क्लब की सदस्यता नहीं बचा सके । क्लब में उनसे साफ कह दिया गया कि क्लब से निलंबन की कार्रवाई से वह यदि बचना चाहते हैं, तो किसी दूसरे क्लब में ट्रांसफर ले लें । रवि चौधरी ने हालाँकि अपने क्लब में बने रहने के लिए हाथ-पैर तो खूब चलाये, लेकिन अंततः उन्हें क्लब से निकलना ही पड़ा । इस तरह की फजीहतों के बाद भी रवि चौधरी ने लेकिन कोई सबक नहीं सीखा है; और अभी हाल ही में उन्होंने अजीत जालान को अपनी बदतमीजी का शिकार बनाया है । मजे की बात यह है कि अजीत जालान अपने शिकार होने की बात जिस तरह से खुद ही फैला रहे हैं, रवि चौधरी उसके पीछे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल का षड्यंत्र बता रहे हैं । रवि चौधरी के नजदीकियों के अनुसार, रवि चौधरी का कहना है कि अजीत जालान बात का बतंगड़ बना रहे हैं और यह सब वह विनोद बंसल के भड़काने पर कर रहे हैं । रवि चौधरी का कहना है कि विनोद बंसल का रवैया उनके लिए पहेली बना हुआ है, क्योंकि वह खुद तो उनके नजदीक आने/रहने का प्रयास कर रहे हैं, और हर जगह दूसरों के सामने उन्हें तवज्जो देने की कोशिश करते हैं; लेकिन अजीत जालान के जरिये लोगों के बीच उन्हें बदनाम करवा रहे हैं ।  
रवि चौधरी के नजदीकियों के अनुसार, अभी हाल ही में एक क्लब के कार्यक्रम में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में रवि चौधरी ने अजीत जालान को हतोत्साहित करते हुए कुछ बातें कहीं । जिन कुछेक लोगों के सामने वह बातें हुईं, उनके हवाले से बताया गया है कि रवि चौधरी ने ज्यादा कुछ कहा तो नहीं, लेकिन कहने का उनका तरीका 'खराब' था । अजीत जालान उस समय तो चुप रहे, लेकिन बाद में उन्होंने लोगों से कहना/बताना शुरू किया कि रवि चौधरी ने उनके साथ बदतमीजी की और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी से हट जाने के लिए उन पर दबाव बनाया । जानकारों के अनुसार, रवि चौधरी ने उनसे कहा था कि वह नाहक ही अपनी उम्मीदवारी को लेकर मेहनत कर रहे हैं, और उनकी उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट में कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा है । रवि चौधरी ने अजीत जालान से 'बड़ी बात' यह कही कि वह जिसके इशारे पर उम्मीदवार बने हुए हैं, वह अपनी राजनीति के चक्कर में उन्हें इस्तेमाल कर रहा है; रवि चौधरी ने अजीत जालान को आगाह किया कि जिसके चक्कर में तुम इस बार उम्मीदवार बने हो, उसने अगले रोटरी वर्ष के लिए मोहन भाटिया को उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है - यानि तुम्हें अगले वर्ष में भी नंबर नहीं मिलेगा और तुम इस्तेमाल भर हो कर रह जाओगे । उस 'घटना' के गवाह रहे लोगों तथा खुद अजीत जालान के अनुसार, रवि चौधरी ने हालाँकि किसी का नाम नहीं लिया - लेकिन अजीत जालान व दूसरे लोगों को यह समझने में देर नहीं लगी कि रवि चौधरी का इशारा विनोद बंसल की तरफ है । उल्लेखनीय है कि अजीत जालान की उम्मीदवारी के पीछे डिस्ट्रिक्ट में हर कोई विनोद बंसल को ही देख/पहचान रहा है । हर किसी को हैरानी है कि अजीत जालान की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट में जब कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा है, तब विनोद बंसल आखिर अपनी कौन सी राजनीति को साधने के लिए अजीत जालान को जबर्दस्ती उम्मीदवार बनाए हुए हैं । पहले तो लोगों का अनुमान था कि अजीत जालान को उम्मीदवार बनवा कर विनोद बंसल वास्तव में अगले रोटरी वर्ष के लिए उनकी 'जमीन पक्की' कर रहे हैं; लेकिन अगले वर्ष के लिए उनके द्वारा रोटरी क्लब फरीदाबाद अरावली के मोहित भाटिया को 'हवा' देने की चर्चा से उक्त अनुमान गफलत में पड़ गया है । लोग अब कहने लगे हैं कि विनोद बंसल रोटरी की राजनीति में एक साथ इतनी चालें चलते हैं, कि वह चालें आपस में ही उलझ कर उन्हें और उनके लोगों को ही 'घायल' कर देती हैं । रवि गुगनानी उनकी बहुस्तरीय चालों का ऐसे शिकार हुए हैं, कि अभी तक संभल नहीं पाए हैं । रवि चौधरी की सुनें/मानें तो विनोद बंसल की चालों के अगले शिकार अजीत जालान होंगे ।
रवि चौधरी दरअसल अजीत जालान को यह समझाने/बताने की कोशिश कर रहे थे कि उनकी उम्मीदवारी के चलते अशोक कंतूर की जीतने की संभावना धूल में मिली जा रही है, और इससे खुद उन्हें (यानि अजीत जालान को) भी कोई फायदा नहीं होगा । रवि चौधरी ने अन्य मौकों पर अपने नजदीकियों व दूसरे लोगों के बीच कई बार कहा है कि विनोद बंसल दरअसल उन्हें नीचा दिखाने तथा 'कमजोर' करने के उद्देश्य से अशोक कंतूर को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का चुनाव हरवाना चाहते हैं, और इसके लिए ही उन्होंने अजीत जालान को जबर्दस्ती उम्मीदवार 'बनाया' हुआ है । उन्होंने अजीत जालान को समझाया है कि वह सीधे मुकाबले में नहीं, बल्कि त्रिकोणीय मुकाबले में चुनाव जीत सकते हैं; अजीत जालान को भी यह बात समझ में आ गई है और इसी उम्मीद में वह उम्मीदवार बन बैठे हैं । रवि चौधरी के अनुसार, विनोद बंसल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को लेकर जो चाल चल रहे हैं, उसके पीछे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उनकी राजनीति है । विनोद बंसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चुनाव/चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनय भाटिया को अपना उम्मीदवार बनाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन रवि चौधरी के भी उक्त कमेटी के लिए उत्सुकता दिखाने से विनोद बंसल को अपनी तैयारी कमजोर पड़ती लग रही है । रवि चौधरी को कमजोर करने तथा 'दिखाने' के लिए विनोद बंसल ने अशोक कंतूर को निशाने पर लिया है । अशोक कंतूर को चूँकि रवि चौधरी के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है, इसलिए विनोद बंसल को लगता है कि अशोक कंतूर की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में दोबारा होने वाली हार रवि चौधरी को कमजोर करेगी - और इससे विनय भाटिया को नोमीनेटिंग कमेटी के चुनाव में फायदा होगा । मजे की बात यह है कि रवि चौधरी को तो लग रहा है कि विनोद बंसल उनके खिलाफ षड्यंत्र कर रहे हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट में लोगों को 'दिख' यह रहा है कि विनोद बंसल तो रवि चौधरी को बहुत तवज्जो दे रहे हैं । ऐसे में रवि चौधरी के लिए भी यह बात बड़ी मुसीबत बनी हुई है कि विनोद बंसल के इस दोहरे रवैये से वह निपटें तो कैसे निपटें ? इस असमंजस में रवि चौधरी के गुस्से का शिकार फिलहाल अजीत जालान बन गए हैं । प्रतिक्रिया में अजीत जालान ने जिस तरह जगह जगह रवि चौधरी के व्यवहार का रोना रोना शुरू किया है, और उनके इस रोने को रवि चौधरी ने विनोद बंसल की 'रणनीति' बताया है - उससे लग रहा है कि इस तरह के और तमाशे अभी आगे भी देखने को मिलेंगे ।

Saturday, July 27, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे इकट्ठे करने के लिए विनोद बंसल के बनाए फार्मूले - 'दो, और उसके तिगुने लो' - ने विनय भाटिया का रिकॉर्ड बनवाने के साथ-साथ रोटरी फाउंडेशन के पैसों की लूट की जो 'तस्वीर' दिखाई है, उसे देख/समझ कर जरूरतमंदों की मदद के लिए पैसे देने वाले लोग अपने आप को ठगा पा रहे हैं

नई दिल्ली । रोटरी फाउंडेशन को दिया गया दान वापस माँगने की रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन के प्रेसीडेंट सुरेश गुप्ता की कार्रवाई ने रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों के बीच खासी खलबली तो मचा ही दी है, साथ ही डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी फाउंडेशन के पैसों की होने वाली लूट की 'तैयारी' पर भी उनका ध्यान खींचा है । रोटरी में इससे पहले शायद ही कभी हुआ हो कि रोटरी फाउंडेशन में दिए गए दान को किसी ने वापस माँगा हो; और इससे पहले शायद ही किसी डिस्ट्रिक्ट में रोटरी फाउंडेशन की बड़ी लूट का मामला सामने आया हो - मजे की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी फाउंडेशन की लूट का बड़ा मामला तो सामने आया ही है, तथा उसके पकड़े जाने के साथ-साथ ही और लूट की 'तैयारी' की बात सामने आई है, लेकिन उसके लिए किसी को भी आधिकारिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा है, सजा मिलना तो दूर की बात है । डिस्ट्रिक्ट 3011 में निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया ने पहले तो घपलेबाजी के आरोप के चलते रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन द्वारा वापस की गई ग्लोबल ग्रांट को रोटरी क्लब दिल्ली सेंट्रल को दिलवाने की 'बेईमानी' की और फिर रोटरी फाउंडेशन से और ज्यादा ग्रांट बटोरने के नाम पर रोटरी फाउंडेशन के लिए मोटी रकम इकट्ठी करने का 'करतब' किया । विनय भाटिया के इसी करतब को देखते हुए सुरेश गुप्ता का रोटरी फाउंडेशन से विश्वास उठ गया है और उन्हें लग रहा है कि अच्छी और सच्ची भावना से रोटरी फाउंडेशन को दिए गए दान को कुछेक बड़े खिलाड़ी तरह तरह की योजनाओं से हड़प लेते हैं । सुरेश गुप्ता क्लब का प्रेसीडेंट बनने से पहले ही मेजर डोनर बन चुके हैं, और अपने प्रेसीडेंट-वर्ष में उन्होंने एकेएस (ऑर्च क्लम्प सोसायटी) का सदस्य बनने की घोषणा की थी - लेकिन रोटरी फाउंडेशन के पैसों की खुली लूट के किस्सों को देखते हुए उन्होंने अपना इरादा बदल लिया है । रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस में रोटरी फाउंडेशन के मुखिया संजय परमार को लिखे पत्र में सारा हवाला देते हुए सुरेश गुप्ता ने रोटरी फाउंडेशन में दिए गए अपने पैसे वापस करने का अनुरोध किया है । 
सुरेश गुप्ता के इस अनुरोध ने रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों के बीच खासी हलचल मचा दी है । उन्हें डर हुआ है कि रोटरी फाउंडेशन ने इसी तरह से यदि और रोटेरियंस का विश्वास खो दिया, तो बड़ी समस्या हो जाएगी । इस समस्या की आशंका के चलते डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी फाउंडेशन के नाम पर जो घपलेबाजियाँ हो रही हैं, उन पर रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों का ध्यान गया है । इससे डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी फाउंडेशन के लिए 15 लाख डॉलर से अधिक की रकम का जमा होना संशय में आ गया है और रोटरी फाउंडेशन के बड़े पदाधिकारियों को भी आशंका हो चली है कि इस जमा हुई रकम के पीछे किसी बड़े घपले की तैयारी तो नहीं है । यह आशंका दरअसल इसलिए भी है क्योंकि निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया ने अपने गवर्नर-वर्ष के पहले ग्यारह महीनों में, यानि मई महीने तक रोटरी फाउंडेशन के लिए करीब साढ़े चार लाख डॉलर ही इकट्ठा किए थे, लेकिन आखिरी महीने में इकट्ठा हुई रकम का आँकड़ा ऊँची छलाँग लगा कर पंद्रह लाख डॉलर से भी ऊपर तक पहुँच गया । और इस रकम का बड़ा हिस्सा परोपकार के लिए नहीं, बल्कि परोपकार के नाम पर रोटरी फाउंडेशन से तीन से चार गुना रकम लेने के लिए 'दिया' गया है । लोगों के बीच होने वाली चर्चाओं में कहा/सुना जा रहा है कि कुछेक अस्पतालों/संस्थाओं से बात करके उनकी जरूरत की मशीनें व उनकी जरूरत के काम कुल लागत के आधे में या दो-तिहाई में करने/करवाने का ऑफर देकर उनसे सौदेबाजी की गई है । उदाहरण के लिए किसी अस्पताल/संस्था का कोई प्रोजेक्ट एक करोड़ रुपए का है; उसे ऑफर दिया गया कि उसका वह प्रोजेक्ट 70 लाख में लगवा देंगे; उससे 70 लाख लिए, उसमें से 40/50 लाख रोटरी फाउंडेशन में जमा करवाए और बाकी अपनी जेब में रख लिए । रोटरी फाउंडेशन को एक करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट दे दिया - उससे मिले एक करोड़ रुपए से अस्पताल/संस्था का प्रोजेक्ट लग गया/जायेगा । इस तरह से रोटरी में नाम भी हो गया, जिसके चलते रोटरी में कोई अवॉर्ड या असाइनमेंट मिल जायेगा; किसी प्रोजेक्ट में अपनी स्वर्गीय माता का नाम चिपकाने का मौका भी मिल गया और बैठे/बिठाए कमाई भी हो गई । ऐसे ही 'मौकों' के लिए कहावत बनी होगी - 'हींग लगे न फिटकरी, रंग और स्वाद चोखा ।' 
संजय परमार को लिखे सुरेश गुप्ता के पत्र ने लेकिन रंग और स्वाद बिगाड़ने का काम किया है । हालाँकि कई लोगों का कहना है कि यह कुछेक दिनों का बबाल है जो जल्दी ही शांत हो जायेगा और होगा कुछ नहीं । दरअसल रोटरी में सिस्टम ही कुछ ऐसा है कि बेईमानी करने वाले लोग होशियारी करके बड़ी आसानी से बच निकलते हैं । कुछेक 'मूर्ख' लोग हालाँकि फँसे भी हैं और सजा पाए हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में मामला रफा/दफा ही होता देखा गया है । विनय भाटिया जिस तरह से रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन द्वारा वापस की गई ग्रांट को रोटरी क्लब दिल्ली सेंट्रल को 'दिलवाने' के मामले में फँसे, और साफ बच निकले - उससे ही उन्हें अपने गवर्नर वर्ष के अंतिम महीने में रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसा इकट्ठा करने के लिए सौदेबाजी करने का हौंसला मिला होगा । इस सौदेबाजी में उन्हें पूर्व गवर्नर विनोद बंसल की मदद मिली सुनी/बताई जा रही है । विनय भाटिया इसीलिए आश्वस्त होंगे कि कहीं कुछ मामला फँसेगा, तो विनोद बंसल उन्हें बचा लेंगे । असल में रोटरी फाउंडेशन को दान देकर उससे तीन/चार गुना पैसे लेने के 'काम' को ऑर्गेनाइज्ड रूप देने का फंडा स्थापित करने का विनोद बंसल को ही श्रेय दिया जाता है । इस खेल का 'महारथी' होने के कारण विनोद बंसल हर वर्ष रोटरी फाउंडेशन के लिए अच्छी/मोटी रकम इकट्ठा करवाते हैं । उनकी मदद से उनके क्लब को भी रोटरी फाउंडेशन से खूब पैसे मिले हैं । इस बार भी उनके क्लब ने सबसे ज्यादा - करीब सवा दो लाख डॉलर रोटरी फाउंडेशन में दिए हैं; और इस तरह इसका करीब तीन गुना तो रोटरी फाउंडेशन से लेने की तैयारी की है । रवि चौधरी के गवर्नर-वर्ष में भी विनोद बंसल के क्लब ने रोटरी फाउंडेशन से मोटी रकम लेने की योजना बनाई थी, लेकिन हिस्सा न मिलने के कारण रवि चौधरी ने उसमें पंक्चर कर दिया था, और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वाहनवती के सामने विनोद बंसल तथा उनके क्लब के अन्य पदाधकारियों की बड़ी हील-हुज्जत की थी । विनोद बंसल का 'दो, और उसका तिगुना लो' का जो फार्मूला है, वह सुनने/देखने में तो उपयोगी लगता है और आकर्षित करता है, लेकिन अपनी शुरुआत से ही यह लालच, स्वार्थ व बेईमानी के रास्ते पर चल पड़ता है; दरअसल इस फार्मूले के तहत रोटरी फाउंडेशन में कोई भी 'देता' इसीलिए है, क्योंकि उसे तीन गुना 'लेना' होता है; और जब लेने की भावना प्रबल होती है तो फिर वह किसी भी तरह की बेईमानी करने से नहीं हिचकती है । इस बेईमानी और लूट की कोशिश उन लोगों की भावनाओं को ठगती है, जो सचमुच की जरूरत के लिए रोटरी फाउंडेशन में पैसे देते हैं । उन्हें लगता है कि रोटरी फाउंडेशन को दिया गया उनका पैसा जरूरतमंदों तक पहुँचने की बजाए रोटेरियंस के भेष में बैठे ठगों व लुटेरों की जेबों में चला जाता है । विनोद बंसल के ही डिस्ट्रिक्ट में, रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन के प्रेसीडेंट सुरेश गुप्ता ने अपने आप को ठगे जाने वाले लोगों में पाया, तो वह रोटरी फाउंडेशन को दिए गए अपने पैसों को वापस माँगने के लिए मजबूर हुए ।

Tuesday, July 23, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में विनय भाटिया के गवर्नर-वर्ष में रोटरी फाउंडेशन के लिए जुटी रकम को रोटरी फाउंडेशन के पैसों की लूट की 'तैयारी' के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी के प्रोजेक्ट ग्रांट के लिए बढ़चढ़ कर आवेदन करने से भी इस तैयारी का शक बढ़ा है

नई दिल्ली । विनय भाटिया के गवर्नर-वर्ष में रोटरी फाउंडेशन के लिए जुटे 1.53 मिलियन अमेरिकी डॉलर की जिस रकम को उपलब्धि के रूप में देखा/दिखाया जा रहा है, उसे डिस्ट्रिक्ट के कई प्रमुख लोग ही रोटरी फाउंडेशन के पैसों की लूट की 'तैयारी' के रूप में पहचान/समझ रहे हैं । यह पहचान और समझ दरअसल जुटी रकम को वर्गीकरण के लिहाज से देखने के कारण बनी है । रोटरी फाउंडेशन के लिए जो यह रकम जुटी है, उसका करीब 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वास्तव में ग्लोबल ग्रांट के तहत रोटरी फाउंडेशन से मोटी रकम लेने के लिए 'दिया' गया है - जो रोटरी व रोटरी फाउंडेशन के आदर्शों व लक्ष्यों को उलट-पलट देने का काम करता है । उल्लेखनीय है कि रोटरी और रोटरी फाउंडेशन की बुनियाद इस विचार पर टिकी है कि समाज में मोटे तौर पर दो तरह के लोग होते हैं - एक वह समर्थ लोग जो दान दे सकते हैं, और दूसरे वह असमर्थ लोग जिन्हें दान की जरूरत होती है । रोटरी और रोटेरियंस इस बात पर गर्व करते रहे हैं कि वह पहले वाली श्रेणी के लोग हैं - लेकिन विनय भाटिया और उनके सलाहकारों ने डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस को दूसरी श्रेणी में खड़ा कर दिया है । विनय भाटिया के गवर्नर-वर्ष में रोटरी फाउंडेशन के लिए 1.53 मिलियन, यानि करीब 15 लाख अमेरिकी डॉलर की जो रकम इकट्ठा हुई है - उसका करीब 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा देने वाले लोगों/क्लब्स ने दी गई रकम के बदले में कई गुना रकम 'लेने' की योजना के साथ दिया है; यानि यह लोग/क्लब्स वास्तव में पहली श्रेणी के देने वाले नहीं, बल्कि दूसरी श्रेणी के दान 'लेने' वाले लोग हैं । 
उल्लेखनीय है कि रोटरी फाउंडेशन में मुख्यतः चार उद्देश्यों के लिए पैसा दिया/लिया जाता है - एनुअल फंड, पोलियो फंड, एंडोवमेंट फंड तथा प्रोजेक्ट ग्रांट के लिए अपना हिस्सा । विनय भाटिया के गवर्नर-वर्ष में 15 लाख अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की जो रकम इकट्ठा हुई है, उसमें एनुअल फंड के लिए दो लाख अमेरिकी डॉलर से कम रकम जमा हुई है; पोलियो तथा एंडोवमेंट फंड के लिए कुल मिला कर एक लाख से कम अमेरिकी डॉलर जुटे हैं; बाकी बचे 12 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक रकम प्रोजेक्ट के लिए ग्रांट लेने के लिए मिली है - विनय भाटिया और उनके सलाहकार इसे गर्व की बात मानते हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट के कई प्रमुख लोगों की निगाह में यह शर्म की बात है । शर्म की बात इसलिए क्योंकि यह तथ्य दिखाता है कि डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटेरियंस के लिए रोटरी सेवा करने की बजाये 'धंधा' करने/जमाने का जरिया बन गया है । रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन की प्रोजेक्ट ग्रांट को लेकर अभी जो बबाल हो चुका है, और उसमें जिस तरह से विनय भाटिया की मिलीभगत सामने आई है, उसके चलते उनके गवर्नर-वर्ष में प्रोजेक्ट ग्रांट के लिए लगी होड़ ने संदेह पैदा कर दिया है । यह संदेह रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी के बढ़चढ़ कर प्रोजेक्ट ग्रांट के लिए आवेदन करने से भी पैदा हुआ है । विनय भाटिया के गवर्नर-वर्ष में प्रोजेक्ट ग्रांट के नाम पर जो 12 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक रकम मिली है, उसमें करीब सवा दो लाख अमेरिकी डॉलर रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी से मिले हैं । रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी पूर्व प्रेसीडेंट राजेश गुप्ता के कार्यकाल में मिली एक ग्लोबल ग्रांट को लेकर आरोपों के घेरे में तथा विवाद में रहा है । आरोपों के चलते उक्त ग्रांट का तीन बार तो ऑडिट हुआ था; आरोपों के ही कारण क्लब के एक प्रेसीडेंट ने उक्त प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया, जिस कारण उक्त प्रोजेक्ट क्लब से छिन कर दूसरे क्लब के नाम करवाना पड़ा और बाद में उक्त प्रोजेक्ट के कर्ताधर्ता के रूप में राजेश गुप्ता का नाम भी हटाया गया । उसके बाद रवि चौधरी के गवर्नर वर्ष में क्लब ने एक और बड़ी ग्लोबल ग्रांट के लिए आवेदन किया, जिसे रवि चौधरी ने स्वीकार नहीं किया और दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में क्लब के कई पदाधिकारियों के सामने रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वाहनवती से इस बात की शिकायत की कि रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी के पदाधिकारियों ने रोटरी फाउंडेशन से ग्रांट लेने को धंधा बना लिया है, और उन्होंने इसीलिए उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया ।
रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल भी सदस्य हैं, इसलिए क्लब के पदाधिकारियों पर लगने वाला आरोप उनकी भूमिका को भी संदेहास्पद बना देता है । क्लब के पदाधिकारियों की ग्रांट लेने में दिखने वाली दिलचस्पी इसलिए भी संदेहास्पद है क्योंकि प्रोजेक्ट ग्रांट के नाम पर करीब सवा दो लाख अमेरिकी डॉलर देने वाला क्लब एनुअल फंड में एक हजार डॉलर की मामूली रकम ही देता है, तथा पोलियो फंड व एंडोवमेंट फंड में तो इकन्नी भी नहीं देता है । जाहिर है कि रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी की रोटरी के बुनियादी कामों में कोई रुचि नहीं है, उसका सारा ध्यान तो बस रोटरी फाउंडेशन से ग्रांट लेने में है । डिस्ट्रिक्ट के प्रमुख लोगों का ही कहना है कि विनोद बंसल इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए उन्हें अपने क्लब की 'गतिविधियों' पर ध्यान देना चाहिए और क्लब में ऐसी गतिविधियों को नहीं होने देना चाहिए, जिससे कि उनकी भूमिका भी संदेह और विवाद के घेरे में आए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवारी पेश करने वाले अजीत जालान के क्लब ने भी विनय भाटिया के गवर्नर-वर्ष में ग्रांट जुगाड़ने के लिए प्रोजेक्ट बना कर उसके लिए अपना हिस्सा रोटरी फाउंडेशन में जमा कराया है । अजीत जालान का क्लब भी एकाउंट न देने के मामले में आरोपों का शिकार बन चुका है, और वह मामला काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग तक में आ गया था । अजीत जालान के क्लब ने एक ट्रस्ट भी बनाया था, जिसपर आरोप लगे थे कि रोटरी के पैसों की घपलेबाजी को अंजाम देने के लिए वह ट्रस्ट बनाया गया है । अजीत जालान और उनके नजदीकियों द्वारा बनाये गए उक्त ट्रस्ट को लेकर क्लब के भीतर व बाहर ऐसी घेरेबंदी की गई कि उस ट्रस्ट को बंद कर देने के लिए अजीत जालान और उनके साथी मजबूर हुए थे । उन्हीं बातों को याद/ध्यान करते हुए कई लोगों को शक है कि अजीत जालान द्वारा अपने क्लब से ग्लोबल ग्रांट के लिए आवेदन करवाने के पीछे कहीं यह उद्देश्य तो नहीं है कि रोटरी फाउंडेशन से मिली ग्रांट में 'डंडी' मार कर वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी में खर्च होने वाले पैसों को जुटा लें । रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन को मिली और फिर वापस हुई रोटरी फाउंडेशन की ग्रांट में विनय भाटिया की मदद से होने वाली घपलेबाजी की कोशिश जिस तरह से बेनकाब हुई है, उसके कारण उनके गवर्नर-वर्ष में रोटरी फाउंडेशन के लिए इकट्ठा हुई रकम के ऐवज में मंजूर हुईं ग्रांट्स संदेह के घेरे में आ गई हैं - खासकर उन क्लब्स की ग्रांट्स, जो पहले से ही वित्तीय घपलेबाजी के आरोपों में घिरे रहे हैं । ऐसे में, विनय भाटिया के गवर्नर-वर्ष में रोटरी फाउंडेशन के लिए इकट्ठा हुई 15 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की रकम गर्व करने की बजाये शर्म का कारण बन गई लग रही है ।

Sunday, July 21, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी फाउंडेशन के पैसों पर सीधे सीधे 'डकैती' डालने वाला प्रोजेक्ट अंततः रद्द हुआ; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन से कुछेक लोगों की माँग कि उन्हें तुरंत काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाना चाहिए और उस मीटिंग में उक्त प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने से लेकर उसे बनाये रखने की कोशिशें करने वाले और उन्हें समर्थन देने वाले गवर्नर्स की भूमिका की निंदा का प्रस्ताव पास कराना चाहिए

नई दिल्ली । रोटरी फाउंडेशन के पैसों की लूट के मामले में महीनों से तरह तरह से आँखों में धूल झोंकने की कुछेक गवर्नर्स की कोशिशें मामले के 'रचनात्मक संकल्प' में प्रकाशित होने के बाद तीन दिन भी आगे नहीं बढ़ सकीं और धराशाही हो गईं । 'रचनात्मक संकल्प' ने 17 जुलाई को उक्त मामले की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन ने 20 जुलाई को एक संदेश के जरिए जानकारी दी कि गरीब बच्चों को फ्री एजुकेशन देने के नाम पर करीब 50/60 लाख रूपए अपनी जेबों में भरने के लिए कुछेक गवर्नर्स ने जो प्रोजेक्ट बनाया था, उसे बंद कर दिया गया है और रोटरी फाउंडेशन से मिला पैसा जल्दी ही वापस कर दिया जायेगा । इस मामले में मजेदार बात यह हुई कि निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया की तरफ से सफाई सुनी गई कि इस मामले में उन्हें नाहक ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रवि चौधरी ने दिखाई थी । रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन के उक्त प्रोजेक्ट को लेकर शुरु से ही विवाद था, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रवि चौधरी ने किसी की नहीं सुनी थी और आनन-फानन में उन्होंने उक्त प्रोजेक्ट को क्लियर कर दिया था । प्रोजेक्ट को आनन-फानन में क्लियर करवाने में उस वर्ष डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटर रहे अशोक कंतूर तथा रवि चौधरी के समर्थन के भरोसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव लड़ रहे संजीव राय मेहरा की भी अहम् भूमिका थी । विनय भाटिया रोटरी फाउंडेशन के 50/60 लाख रुपयों की लूट के मामले में सारा दोष भले ही रवि चौधरी, संजीव राय मेहरा व अशोक कंतूर पर डालने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन लोगों का कहना है कि उस समय डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में विनय भाटिया उन्हीं के बड़े खास हुआ करते थे और बाद में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में विनय भाटिया को जब 'बहती गंगा' में हाथ धोने का मौका मिला तो उन्होंने भी पूरी बेशर्मी के साथ बेईमानीभरे उक्त प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का काम किया । 
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन ने अपने संदेश में उक्त प्रोजेक्ट के रद्द होने की सूचना देते हुए दावा किया है कि प्रोजेक्ट को रद्द करने की कार्रवाई डिस्ट्रिक्ट 3011 के कामकाज में पारदर्शिता बने रहने की प्रतिबद्धता का एक उदाहरण है । सुरेश भसीन के इस दावे को झूठ के पुलिंदे के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है और कहा जा रहा है कि डिस्ट्रिक्ट के कामकाज में यदि सचमुच पारदर्शिता होती तो उक्त प्रोजेक्ट क्लियर ही नहीं होता और यदि हो भी गया था तो रोटरी क्लब दिल्ली सेंट्रल को ट्रांसफर न हो पाता । लोगों का कहना है कि रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन के प्रेसीडेंट सुरेश गुप्ता यदि मामले को न उठाते और 'रचनात्मक संकल्प' में उक्त मामले की रिपोर्ट यदि प्रकाशित न होती तो पारदर्शिता की ऐसीतैसी करते हुए कुछेक गवर्नर्स ने रोटरी फाउंडेशन के 50/60 लाख रुपए हजम करने की पूरी 'व्यवस्था' कर ली थी । कुछेक लोगों का कहना है कि सुरेश भसीन डिस्ट्रिक्ट के कामकाज में पारदर्शिता यदि सचमुच बनाना चाहते हैं तो उन्हें तुरंत काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाना चाहिए और उस मीटिंग में उक्त प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने से लेकर उसे बनाये रखने की कोशिशें करने वाले और उन्हें समर्थन देने वाले गवर्नर्स की भूमिका की निंदा का प्रस्ताव पास कराना चाहिए तथा और कुछ नहीं तो कम-से-कम उन्हें चेतावनी तो देना ही चाहिए । ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि आगे इस तरह की जालसाजी न हो सके। ऐसा करना इसलिए और भी जरूरी है, क्योंकि उक्त प्रोजेक्ट के जरिये रोटरी फाउंडेशन के पैसों को हड़पने की योजना में शामिल लोग किसी न किसी रूप में सत्ता में आने वाले हैं या आने के प्रयासों में लगे हैं । रवि चौधरी व संजीव राय मेहरा की जो जोड़ी उक्त प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने के लिए जिम्मेदार ठहराई जा रही है, वही जोड़ी अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में फिर से इसी तरह के मौके बना सकती है; अशोक कंतूर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) बनने के लिए तैयार घूम रहे हैं, और विनय भाटिया इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव/चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी करते हुए सुने/बताए जा रहे हैं । 
बेईमानीपूर्ण इरादों से सुसज्जित उक्त प्रोजेक्ट के रद्द हो जाने से यह बात भी साबित हुई है और सबक मिला है कि आम रोटेरियंस यदि चाहें और कोशिश करें, तो गवर्नर्स की बेईमानियों को रोका जा सकता है । रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन के पिछले वर्ष के पदाधिकारियों तथा मौजूदा प्रेसीडेंट सुरेश गुप्ता ने इस मामले में जिस तरह की दिलचस्पी दिखाई, और मामले को लगातार उठाते रहे - उसके कारण बेईमान गवर्नर्स तथा पीछे से उन्हें समर्थन व हौंसला देने वाले गवर्नर्स की हिम्मत भी जबाव दे गई और उन्होंने प्रोजेक्ट को बनाये रखने की कोशिशों से हाथ खींच लिए । कुछेक लोगों का हालाँकि मानना/कहना है कि इस मामले में बेईमानों को मिली हार से ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है; क्योंकि यह मामला इस बात का भी सुबूत है कि बेईमान गवर्नर्स के हौंसले इस हद तक बुलंद हैं कि वह रोटरी फाउंडेशन के पैसों पर सीधे सीधे 'डकैती' डालने से भी नहीं हिचकिचाए - इसलिए उन्हें तात्कालिक झटका भले ही लगा हो, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज तो नहीं ही आयेंगे । यह मामला कितना बड़ा था, और इसके चलते डिस्ट्रिक्ट की साख व पहचान किस हद तक दाँव पर लग गई थी - इसका अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रोजेक्ट के रद्द होने की जानकारी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को देने की जरूरत पड़ी । इससे पहले शायद ही कभी किसी डिस्ट्रिक्ट में ऐसा हुआ हो कि किसी प्रोजेक्ट के मिलने और या रद्द होने की जानकारी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने लोगों को दी हो । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन इस प्रोजेक्ट के रद्द होने को भले ही डिस्ट्रिक्ट के कामकाज में पारदर्शिता बने रहने के उदाहरण के रूप में देख/बता रहे हों, लेकिन डिस्ट्रिक्ट के ही कई लोगों को लगता है कि कुछेक गवर्नर्स की हरकतों पर यदि निगाह नहीं रखी गई, तो फिर वह रोटरी के पैसों को लूटने की अपनी हरकतों से बाज नहीं आयेंगे । 

Saturday, July 13, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट से निकाले जाने से बचने का मौका खोज रहे पूर्व गवर्नर रवि चौधरी को रोटरी क्लब दिल्ली साऊथएक्स में शरण मिलने के बाद अशोक कंतूर का आरोप कि पूर्व गवर्नर रमेश चंदर अब उन्हें भी क्लब से निकलवाना चाहते हैं

नई दिल्ली । अपनी हरकतों के चलते अपने क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट से निकलने के लिए मजबूर किए गए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी को अंततः रोटरी क्लब दिल्ली साऊथएक्स में शरण मिल गई है, और अब अशोक कंतूर पर भी दबाव बनाया जा  रहा है कि वह भी क्लब से निकल लें ! रवि चौधरी और अशोक कंतूर क्लब में होने वाली अपनी दुर्दशा के लिए क्लब के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश चंद्र को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । उल्लेखनीय है कि पिछले रोटरी वर्ष में ही रवि चौधरी को क्लब से निकालने की तैयारी हो गई थी, लेकिन रवि चौधरी ने किसी तरह क्लब के पदाधिकारियों को इस बात के लिए राजी कर लिया था कि वह उन्हें क्लब से न निकालें, क्योंकि तब रोटरी और डिस्ट्रिक्ट में उनकी बहुत बदनामी होगी - उन्होंने क्लब के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि वह स्वयं ही किसी दूसरे क्लब में ट्रांसफर ले लेंगे, ताकि क्लब से निकाले जाने की बदनामी से बच सकें । रवि चौधरी के लिए बदकिस्मती की बात लेकिन यह रही कि उन्होंने जिस भी क्लब के लोगों से अपनी सदस्यता की बात की, उन्होंने रवि चौधरी के हाथ जोड़ लिए । दरअसल रवि चौधरी की हरकतों को तथा डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच उनकी बदनामी को देखते/पहचानते हुए कोई भी क्लब रवि चौधरी को अपने यहाँ लेने के लिए तैयार नहीं हुआ । मजे की बात यह रही कि रवि चौधरी ने अपनी इस बदनामीभरी स्थिति से शर्मसार होने की बजाये इसका लाभ उठाने की कोशिश की, और अपने क्लब में तर्क किया कि उन्हें चूँकि कोई और क्लब नहीं ले रहा है, इसलिए उन्हें दिल्ली वेस्ट में ही रहने दिया जाए । लेकिन रवि चौधरी की यह चालबाजी चली नहीं और उन्हें स्पष्ट कर दिया गया कि जल्दी से वह अपने लिए कोई क्लब खोज लें, अन्यथा उन्हें दिल्ली वेस्ट से तो निकाल ही दिया जायेगा । तब रवि चौधरी ने किसी तरह रोटरी क्लब दिल्ली साऊथएक्स के पदाधिकारियों को राजी किया और उसमें शरण ली ।
रवि चौधरी के निकलने के बाद रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट में अब अशोक कंतूर पर भी दबाव बनाया जा रहा है कि वह भी अपने लिए कोई और क्लब खोज लें ताकि उनकी हरकतों से क्लब का माहौल खराब न हो और क्लब अपनी पहचान व प्रतिष्ठा को बनाये/बचाये रख सके । क्लब के लोगों का कहना है कि रवि चौधरी और अशोक कंतूर की हरकतों के कारण क्लब का माहौल काफी खराब हो गया था; रवि चौधरी तो गवर्नर रह चुके थे, और अशोक कंतूर को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) चुने जाने का पूरा भरोसा था -  इसलिए दोनों लोग क्लब में अपनी मनमानी चलाने लगे थे, जिसके चलते क्लब के पदाधिकारियों के लिए काम कर पाना मुश्किल हो गया था । क्लब में खराब होते माहौल के लिए रवि चौधरी को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना गया और उन्हें क्लब से निकालने की तैयारी शुरू हो गई । रवि चौधरी ने पहले तो दादागिरी दिखाते हुए पदाधिकारियों को हड़काने की कोशिश की, लेकिन पदाधिकारियों को क्लब के दूसरे सदस्यों का समर्थन मिलता देख वह समझौते पर आ गए और किसी दूसरे क्लब में ट्रांसफर लेने की बात करने लगे । बाद में भी वह दिल्ली वेस्ट में बने रहने की तिकड़में करते रहे, लेकिन उनकी दाल गली नहीं । अंततः रवि चौधरी को रोटरी क्लब दिल्ली साऊथएक्स में शरण मिल गई है । रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट के पदाधिकारी और सदस्य अब अशोक कंतूर पर भी दबाव बना रहे हैं कि रवि चौधरी की तरह वह भी किसी और क्लब में ट्रांसफर ले लें । दिल्ली वेस्ट के पदाधिकारियों और सदस्यों को दरअसल लगता है कि रवि चौधरी के 'आदमी' के रूप में अशोक कंतूर यदि क्लब में रहेंगे, तो क्लब रवि चौधरी की हरकतों से वास्तव में मुक्त नहीं हो पायेगा । रवि चौधरी, अशोक कंतूर के जरिये दिल्ली वेस्ट की गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे और क्लब में गंद फैलाने का काम करेंगे । क्लब यदि सचमुच रवि चौधरी की हरकतों से आजाद होना चाहता है तो जरूरी है कि अशोक कंतूर भी क्लब छोड़ें । 
रवि चौधरी और अशोक कंतूर रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट में अपने खिलाफ बने माहौल के लिए क्लब के वरिष्ठ सदस्य व पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश चंदर को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । अशोक कंतूर ने तो पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में मिली पराजय के लिए भी रमेश चंदर को जिम्मेदार ठहराया था ।अशोक कंतूर का आरोप था कि रमेश चंदर ने उनके साथ धोखा किया था; और वास्तव में उनके साथ नहीं, बल्कि क्लब के साथ धोखा किया था - क्योंकि वह क्लब की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार थे । अशोक कंतूर का कहना है कि उनकी उम्मीदवारी के साथ धोखा करके रमेश चंदर ने असल में क्लब के साथ धोखा किया था - और इसलिए उन्हें क्लब से निकाला जाना चाहिए, न कि उन्हें या रवि चौधरी को । अशोक कंतूर के लिए मुसीबत की बात यह रही कि उनके इस तर्क को क्लब में कोई समर्थन नहीं मिला, और रवि चौधरी को तो क्लब से निकलने के लिए मजबूर होना ही पड़ा है, उन पर भी क्लब छोड़ने के लिए दबाव पड़ रहा है । अशोक कंतूर लेकिन रोटरी क्लब दिल्ली वेस्ट की अपनी सदस्यता बचाने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं; दरअसल उन्हें डर है कि रवि चौधरी की तरह यदि कहीं उन्हें भी क्लब छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा तो यह बात डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उंनकी उम्मीदवारी के लिए बड़ा नुकसान पहुँचाने वाली होगी । यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली वेस्ट की अपनी सदस्यता बचा सकने में फेल होने के बाद अशोक कंतूर कैसे अपनी सदस्यता बचा पाते हैं - बचा भी पाते हैं या नहीं ?

Saturday, June 1, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व गवर्नर विनोद बंसल की पूर्व प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन को खुश करने की कोशिश में आशीष घोष को कुछ न कुछ बनवा देने की मुहिम ने संजीव राय मेहरा के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के मामले को रोचक रूप दिया

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी संजीव राय मेहरा के गवर्नर-वर्ष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद को लेकर राजेश बत्रा और रवि चौधरी के बीच चल रही खींचतान का फायदा आशीष घोष को मिलने की चर्चा ने डिस्ट्रिक्ट में एक दिलचस्प नजारा प्रस्तुत किया हुआ है । डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद आशीष घोष को देने/सौंपने की विनोद बंसल द्वारा की जा रही वकालत ने मामले को और 'ट्रिकी' बना दिया है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के चयन/चुनाव को लेकर संजीव राय मेहरा खासे दबाव में हैं; एक तरफ रवि चौधरी डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनने के लिए हर हथकंडा आजमा रहे हैं - जिसके तहत उन्होंने संजीव राय मेहरा को धमकी दी हुई है कि वह यदि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर नहीं बनाये गए तो फिर गवर्नरी करना उनके लिए मुश्किल हो जायेगा; दूसरी तरफ राजेश बत्रा तथा अन्य कुछेक बड़े नेता उन्हें समझा रहे हैं कि रवि चौधरी यदि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बने, तो रवि चौधरी की हरकतों के चलते उनकी गवर्नरी का बेड़ागर्क तो अपने आप ही हो जायेगा । समझा जाता है कि संजीव राय मेहरा को रवि चौधरी के खिलाफ भड़काने का काम राजेश बत्रा इसलिए कर रहे हैं, ताकि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद उन्हें मिल जाए । रवि चौधरी और राजेश बत्रा की इस खींचतान में फँसे बेचारे संजीव राय मेहरा के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का फैसला कर पाना मुश्किल बना हुआ है, जबकि वह अपनी कोर टीम के सदस्यों की मीटिंग कर चुके हैं । रोटरी में जो 'व्यवस्था' है, उसके अनुसार 'भावी' डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सबसे पहला काम डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर तय करने का करता है, बाकी काम उसके बाद शुरू होते हैं । संजीव राय मेहरा को लेकिन उल्टी गंगा बहानी पड़ रही है; पिछले दिनों उन्होंने अपनी कोर टीम के सदस्यों को लेकर पहली मीटिंग तो कर ली है, लेकिन उनके डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का अभी तक भी कोई अता-पता नहीं है ।
दरअसल कोर टीम की मीटिंग के बाद संजीव राय मेहरा पर डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर 'बनाने' का दबाव और बढ़ गया है । इसी दबाव में आशीष घोष का नाम 'संकटमोचक' के रूप में सामने आया । संजीव राय मेहरा को कुछेक लोगों से सलाह मिली कि आशीष घोष चूँकि उनके ही क्लब के सदस्य हैं, इसलिए उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाने का उनके पास एक प्रभावी तर्क है, जिसका कोई विरोध भी नहीं कर पायेगा - और इससे उनका संकट बिना किसी विवाद के समाप्त हो जायेगा । चर्चा है कि इस आईडिया का समर्थन करते हुए विनोद बंसल भी आशीष घोष को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनवाने की मुहिम में शामिल हो गए हैं । विनोद बंसल की इस वकालत से मामला लेकिन सुलझने की बजाये उलझ और गया दिख रहा है । मजेदार जानकारी यह है कि विनोद बंसल की गैरजरूरी वकालत के कारण ही डीआरएफसी (डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन) का पद आशीष घोष को मिलते मिलते रह गया । जानकारों का कहना/बताना है कि डीआरएफसी पद के लिए आशीष घोष के नाम पर सहमति बन गई थी, और बस घोषणा होने ही वाली थी कि हेमंत आहूजा के एक आयोजन में विनोद बंसल ने गैरजरूरी ढंग से आशीष घोष को डीआरएफसी बनाने की वकालत शुरू कर दी, जिससे डीआरएफसी बनाने और 'बनवाने' वाले नेता लोग भड़क गए और आशीष घोष का नाम तुरंत से कट गया । नेता लोगों को दरअसल यह देख कर बुरा लगा कि विनोद बंसल खामख्वाह ही डीआरएफसी के मामले में अपनी टाँग अड़ा रहे हैं और आशीष घोष को डीआरएफसी बनवाने का श्रेय लेना चाहते हैं । बिडंवना की बात यह रही कि नेता लोगों का ऐतराज विनोद बंसल के रवैये/व्यवहार से था, लेकिन नुकसान आशीष घोष को उठाना पड़ा । डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के मामले में भी लोगों को डर है कि कहीं विनोद बंसल की वकालत आशीष घोष का बनता काम बिगाड़ न दे ।
आशीष घोष को कुछ न कुछ 'बनवा' देने में विनोद बंसल को जुटा देख कर भी कई लोगों को हैरानी हो रही है । इस हैरानी के चलते लोगों के बीच चर्चा है कि विनोद बंसल अचानक से आशीष घोष के शुभचिंतक कैसे बन गए ? यह हैरानी और चर्चा इसलिए है क्योंकि तीन/साढ़े तीन वर्ष पहले विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाने में हुई धाँधलीबाजी का रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने बिना अधिकृत शिकायत के जो संज्ञान लिया था और डिस्ट्रिक्ट के तीन पूर्व गवर्नर्स को चेतावनी दी थी, जिनमें एक विनोद बंसल थे - उसके 'पीछे' विनोद बंसल ने आशीष घोष का हाथ बताया था और जिसके चलते दोनों के बीच काफी तल्खी पैदा हो गई थी । आशीष घोष के चूँकि तत्कालीन इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के साथ खासे नजदीकी संबंध थे; इसलिए उन संबंधों का वास्ता देकर विनोद बंसल ने लोगों के कान भरे थे कि आशीष घोष ने ही केआर रवींद्रन को सारा फीडबैक दिया है, और डिस्ट्रिक्ट के लिए फजीहत वाले हालात पैदा किए । कानाफूसी के रूप में होने वाली इन बातों पर आशीष घोष ने काफी नाराजगी व्यक्त की थी और मामला खासा गंभीर हो गया था । तब से अब तक आँधी/बारिश के कई मौके आ चुके हैं और जिसके चलते वह मामला गहरे में दब गया है । इस बीच विनोद बंसल ने केआर रवींद्रन के साथ नजदीकी बनाने की कोशिशें की हैं; उन्हें लगता है कि रोटरी में उन्हें यदि 'ऊपर' बढ़ना है तो केआर रवींद्रन के साथ उनके अच्छे संबंध होने चाहिए; केआर रवींद्रन के साथ सचमुच अच्छे संबंध बने, इसके लिए विनोद बंसल को लगता है कि आशीष घोष के साथ भी उनके संबंध सुधरे होने चाहिए - और इसीलिए तीन/साढ़े तीन वर्ष पहले के मामले को भूल कर वह आशीष घोष के साथ अपने संबंध ठीक कर लेना चाहते हैं; और इसीलिए वह आशीष घोष को कुछ न कुछ बनवा देना चाहते हैं - और या उनके बनने का श्रेय लेना और 'दिखाना' चाहते हैं । डीआरएफसी के मामले में तो विनोद बंसल की तरकीब फेल हो गई; लेकिन आशीष घोष को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनवा कर वह उस 'झटके' से उबरने की कोशिश कर रहे हैं । संजीव राय मेहरा के नजदीकियों का कहना लेकिन यह है कि आशीष घोष के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनने के अच्छे चांस हैं, लेकिन जब से विनोद बंसल ने उनकी वकालत करना शुरू किया है तब से डर यह पैदा हुआ है कि डीआरएफसी वाले मामले की तरह कहीं इस मामले में भी विनोद बंसल की वकालत आशीष घोष को मिलता दिख रहा मौका छीन न ले ।

Monday, May 27, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव/चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी के लिए सौदेबाजी के चक्कर में विनोद बंसल ने अजीत जालान की उम्मीदवारी की बलि चढ़ाई है क्या ?

नई दिल्ली । रविंद्र उर्फ रवि गुगनानी के बाद, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के संभावित उम्मीदवारों में, अब अजीत जालान भी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया से नाराज हो चले हैं - जिसके चलते अजीत जालान की उम्मीदवारी तो खतरे में पड़ती दिख ही रही है, साथ ही डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में गर्मी भी बढ़ गई लग रही है । अजीत जालान इन दिनों विनोद बंसल और विनय भाटिया पर भड़के हुए नजर आ रहे हैं, और उन्हें जहाँ कहीं मौका मिलता/दिखता है, वह इन दोनों से मिले धोखे का रोना लेकर बैठ जाते हैं । सेक्रेटरीज इलेक्ट ट्रेनिंग सेमीनार में लोगों के बीच घूम घूम कर अजीत जालान ने अपना दुखड़ा खूब रोया । अजीत जालान के भड़कने का कारण यह है कि विनोद बंसल और विनय भाटिया ने अचानक से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अशोक कंतूर की उम्मीदवारी का समर्थन करने की घोषणा कर दी है, और अजीत जालान को उन्होंने बीच मँझधार में छोड़ दिया है । विनोद बंसल और विनय भाटिया के इस अचानक बदले रवैये से अजीत जालान हक्के-बक्के रह गए हैं; क्योंकि अभी तक यह दोनों उनकी उम्मीदवारी को प्रमोट करने के लिए तरह तरह के उपाय कर रहे थे, और उनके साथ मिल कर उनके चुनाव अभियान की योजना बना रहे थे । अजीत जालान का कहना है कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि विनोद बंसल और विनय भाटिया उन्हें इस तरह से धोखा देंगे । अजीत जालान के साथ हुए इस 'हादसे' ने रवि गुगनानी के साथ किए गए विनोद बंसल और विनय भाटिया के बर्ताव की घटना को लोगों के बीच ताजा कर दिया है । उल्लेखनीय है कि इन दोनों से मिले धोखे से रवि गुगनानी इस कदर भड़के थे कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के पहले प्रमुख सत्र का बहिष्कार ही कर दिया था, और फिर बाद में वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी दौड़ से भी बाहर हो गए थे । रवि गुगनानी की तरह, विनोद बंसल तथा विनय भाटिया से मिले धोखे के बाद, अजीत जालान की उम्मीदवारी को भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी दौड़ से बाहर निकलते 'देखा' जा रहा है ।
अजीत जालान ने ही सेक्रेटरीज इलेक्ट ट्रेनिंग सेमीनार में जुटे लोगों को बताया कि इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव/चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी को समर्थन दिलवाने के लिए सौदेबाजी करने के उद्देश्य से उनकी उम्मीदवारी की बलि चढ़ाई गई है । दरअसल पिछले दिनों उक्त कमेटी के लिए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक तलवार की उम्मीदवारी की घोषणा होने के बाद डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक समीकरणों में तेजी से उलटफेर हुआ है । दीपक तलवार की उम्मीदवारी को जिस तरह से 12/14 पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की मीटिंग में हरी झंडी मिली है, उसे देख/जान कर विनोद बंसल को भी तेजी से सक्रिय होने की जरूरत महसूस हुई । असल में, उक्त कमेटी के लिए विनोद बंसल ने विनय भाटिया को उम्मीदवार बनाने की तैयारी की हुई है । उक्त कमेटी के लिए निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी भी ताल ठोकते हुए सुने जा रहे हैं । अजीत जालान के अनुसार, विनोद बंसल ने अशोक कंतूर की उम्मीदवारी का समर्थन यही सोच कर किया है कि ऐसा करके वह रवि चौधरी के साथ इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव/चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थन के लिए सौदेबाजी कर लेंगे । अशोक कंतूर चूँकि रवि चौधरी के उम्मीदवार हैं, इसलिए विनोद बंसल को उम्मीद है कि वह अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के समर्थन के बदले में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव/चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी के लिए रवि चौधरी का समर्थन प्राप्त कर लेंगे ।
मजे की बात यह देखने में आ रही है कि विनोद बंसल से मिले झटके से अजीत जालान भड़के हुए तो हैं, लेकिन भड़कते हुए भी वह विनोद बंसल की 'फ़िक्र' भी कर रहे हैं । भविष्यवक्ता बन कर वह बता रहे हैं कि विनोद बंसल ने जैसे पहले रवि गुगनानी को और अब उन्हें धोखा दिया है, वैसे ही वह भी धोखा खायेंगे । अजीत जालान की भविष्यवाणी है कि जिन रवि चौधरी का समर्थन जुटाने के लिए विनोद बंसल ने उन्हें धोखा दिया है, उन्हीं रवि चौधरी से वह खुद धोखा पायेंगे । विनय भाटिया के लिए भी अजीत जालान की घोषणा है कि जल्दी ही वह भी विनोद बंसल की धोखाधड़ी का शिकार होंगे, क्योंकि रवि चौधरी इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव/चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए अपनी उम्मीदवारी छोड़ेंगे नहीं - और तब विनोद बंसल, विनय भाटिया को भी गच्चा दे देंगे । अजीत जालान की भविष्यवाणियाँ कितनी सच होंगी, यह तो समय बतायेगा - अभी लेकिन विनोद बंसल और विनय भाटिया की पलटीबाजी से अजीत जालान की उम्मीदवारी खतरे में पड़ी नजर आ रही है । विनोद बंसल और विनय भाटिया से मिले धोखे पर अजीत जालान जिस तरह से भड़के हुए हैं, और इन दोनों के खिलाफ जिस तरह की बातें कर रहे हैं - उससे डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का तापमान लेकिन खासा बढ़ गया है । 

Tuesday, February 19, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए विनोद बंसल के समर्थन को लेकर अजीत जालान और रवि गुगनानी के बीच छिड़े घमासान में अशोक कंतूर को अपनी राह आसान बनती तो नजर आ रही है, लेकिन उनके सामने रवि चौधरी के ड्रिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनने से होने वाले नुकसान से बचने की चुनौती भी है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी संजीव राय मेहरा को निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर न बनाने की सलाह देने वाले यूँ तो कई लोग हैं, लेकिन उक्त सलाह देने वालों में अशोक कंतूर का नाम भी जुड़ जाने से मामला खासा दिलचस्प हो गया है । मजे की बात यह है कि अशोक कंतूर खुद तो संजीव राय मेहरा से अनुरोध कर ही रहे हैं, साथ ही संजीव राय मेहरा के क्लब तथा डिस्ट्रिक्ट के कुछेक प्रमुख लोगों से भी रवि चौधरी को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर न बनाने के लिए दबाव पड़वा रहे हैं ।उनके इस विरोध पर रवि चौधरी भड़के न, इसके लिए अशोक कंतूर की तरफ से दावा भी सुना जा रहा है कि रवि चौधरी को वह अपने गवर्नर-वर्ष में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बना लेंगे, लेकिन रवि चौधरी अभी डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर न बनें । अशोक कंतूर का कहना है कि अगले वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के मामले में उनके लिए बहुत ही अच्छी संभावना है, लेकिन रवि चौधरी यदि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बन गए - तो उनका सब गुड़ गोबर हो सकता है । दिलचस्प नजारा यह है कि रवि चौधरी यूँ तो अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के सबसे बड़े समर्थक हैं, लेकिन अशोक कंतूर चाहते हैं कि रवि चौधरी उन पर एक अहसान करें - और वह यह कि वह उन पर कोई अहसान न करें । दरअसल, दूसरे लोगों के साथ-साथ अशोक कंतूर के शुभचिंतकों की तरफ से भी बार बार कहा/बताया जा रहा है कि रवि चौधरी यदि अशोक कंतूर की उम्मीदवारी से दूर नहीं रहे, तो अशोक कंतूर के लिए अगले वर्ष भी जीत हासिल कर पाना मुश्किल हो जायेगा ।
उल्लेखनीय है कि खुद अशोक कंतूर को भी लगता है कि अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए जो अजीत जालान और रवि गुगनानी उम्मीदवार बनने के लिए जोरशोर से प्रयास करते देखे जा रहे हैं, वह अपनी अपनी मुसीबतों में इस तरह से घिरे हुए हैं कि मुकाबले में उतरने से पहले ही विवादों में पड़ गए हैं - और इस कारण उनके लिए उन दोनों से मुकाबला करना तथा चुनावी वैतरणी पार करना आसान ही होगा । अजीत जालान को हालाँकि विनय भाटिया और विनोद बंसल के उम्मीदवार के रूप में देखे जाने के चलते अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन रवि गुगनानी ने विनय भाटिया और विनोद बंसल से मिले धोखे पर बखेड़ा खड़ा करके अजीत जालान की इस उम्मीद को तगड़ा झटका दिया हुआ है । दरअसल विनय भाटिया और विनोद बंसल ने अपना 'काम' निकालने के लिए रवि गुगनानी को भी समर्थन की 'गोली' दी हुई है । रवि गुगनानी को लेकिन जब विनय भाटिया और विनोद बंसल की धोखाधड़ी का आभास हुआ तो वह इन दोनों की खासी फजीहत कर इन्हें 'रास्ते' पर ले आए । रवि गुगनानी खासतौर से विनोद बंसल से ज्यादा खफा हैं । उन्हें लगता है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में उनके साथ जो धोखा व बेईमानी हुई, उसके लिए विनोद बंसल ही मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के पहले कार्यक्रम का बहिष्कार करने के जरिये अपनी नाराजगी दिखा कर रवि गुगनानी ने डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के कार्यक्रमों से उन्हें बाहर रखने की विनोद बंसल की योजना को फेल करने में जो सफलता पाई, उससे उत्साहित होकर उन्होंने अपने नजदीकियों के बीच कह दिया है कि विनोद बंसल ने उनके साथ यदि दोबारा चालबाजी करने की कोशिश की, तो वह विनोद बंसल के लिए मुसीबत खड़ी कर देंगे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए विनोद बंसल के समर्थन को लेकर अजीत जालान और रवि गुगनानी के बीच जो घमासान छिड़ा है, उसमें अशोक कंतूर को अपनी राह आसान बनती नजर आ रही है ।
अशोक कंतूर के लिए बस एक ही मुसीबत की बात है, और वह यह कि वह रवि चौधरी की हरकतों से होने वाले नुकसान से कैसे बचें ? अशोक कंतूर और उनके शुभचिंतकों को लगता है कि रवि चौधरी के पास डिस्ट्रिक्ट में यदि कोई पोजीशन नहीं होगी, तो उन्हें हरकतें करने का मौका ही नहीं मिलेगा । इसीलिए अशोक कंतूर को डर है कि संजीव राय मेहरा ने यदि रवि चौधरी को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बना दिया, तो रवि चौधरी को अपनी हरकतें दिखाने का मौका मिल जायेगा; कोई उन्हें कितना भी समझायेगा - रवि चौधरी लेकिन अपना असली रूप दिखाने से बाज नहीं आयेंगे; और इससे अशोक कंतूर का जमा-जमाया काम बिगड़ जायेगा । अशोक कंतूर को लगता है कि उनके चुनाव को रवि चौधरी की हरकतों का दोबारा शिकार होने से बचाने का एक ही तरीका है और वह यह कि 'न रहेगा बाँस, तो न बजेगी बाँसुरी' वाली तर्ज पर - रवि चौधरी डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर न बनें । इसके लिए अशोक कंतूर यह वायदा तक करने के लिए तैयार हैं कि गवर्नर बनने पर वह रवि चौधरी को ही डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनायेंगे; पर अभी रवि चौधरी उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तो बनने दें । मजे की बात यह है कि संजीव राय मेहरा के कई नजदीकी व शुभचिंतक उन्हें सलाह दे रहे हैं कि अपना गवर्नर-वर्ष यदि अच्छे से और बिना विवाद व फजीहत के चलाना चाहते हो - तो रवि चौधरी को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर न बनाना । लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि रवि चौधरी ने संजीव राय मेहरा के क्लब - रोटरी क्लब नई दिल्ली में ट्रांसफर लेने की कोशिश की थी, लेकिन क्लब के सदस्यों/पदाधिकारियों ने साफ कह दिया कि रवि चौधरी जैसे बदनाम व्यक्ति को वह क्लब में नहीं ले सकते हैं । उस मामले में संजीव राय मेहरा ने रवि चौधरी की मदद करने से इंकार कर दिया था । रवि चौधरी के लिए मुसीबत की बात यह बनी/सुनी जा रही है कि उनकी हरकतों तथा उनकी बदनामी को देखते हुए उनके अपने क्लब में उन्हें क्लब छोड़ने की चेतावनी मिली हुई है, लेकिन वह जिस किसी क्लब में ट्रांसफर लेने की कोशिश करते हैं - उसी क्लब के लोग उनके हाथ जोड़ लेते हैं कि 'भाई, हमसे दूर ही रहो ।' ऐसे में, संजीव राय मेहरा को रवि चौधरी को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाना मुसीबतों को निमंत्रण देने जैसा लग रहा है । रवि चौधरी के सबसे खास लोगों में गिने/पहचाने जाने वाले अशोक कंतूर भी जिस तरह से रवि चौधरी को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाये जाने की खिलाफत करने लगे हैं, उससे मामला और भी दिलचस्प हो गया है ।

Monday, January 14, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के दूसरे सदस्यों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से की जा रही विनोद बंसल की कार्रवाई रवि चौधरी की लूट-खसोट पर पर्दा डालने का मौका बना रही है, जो इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सुशील गुप्ता के लिए भी फजीहत का कारण हो सकता है

नई दिल्ली । पिछले रोटरी वर्ष के अपने गवर्नर-काल के हिसाब-किताब को लेकर निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी ने डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन विनोद बंसल पर राजनीति करने तथा उन्हें परेशान और बदनाम करने का आरोप लगाया है । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सुशील गुप्ता का डिस्ट्रिक्ट होने के नाते इस मामले में रोटरी के छोटे/बड़े नेताओं की भी दिलचस्पी नजर आ रही है । रवि चौधरी की तरफ से गंभीर आरोप यह सुनने को मिल रहा है कि विनोद बंसल डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के बाकी सदस्यों को विश्वास में लिए बिना, उनके द्वारा दिए/सौंपे गए विवरण में कमी निकाल रहे हैं और तरह तरह से उन्हें दबाव में लेने की कोशिश कर रहे हैं । रवि चौधरी की तरफ से कहा/बताया जा रहा है कि उन्होंने अक्टूबर में ही अपने गवर्नर-वर्ष के अकाउंट्स डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के तीनों सदस्यों को भेज दिए थे, जिस पर तीनों सदस्यों को मीटिंग करना थी और तीनों सदस्य जिन कमियों पर एकराय होते - उन कमियों के बारे में उनसे स्पष्टीकरण माँगते - चेयरमैन के रूप में विनोद बंसल ने लेकिन डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के बाकी सदस्यों के साथ कोई मीटिंग ही नहीं की, और खुद 'चौधरी' बन कर हिसाब-किताब में कमियाँ निकालने/बताने लगे । रवि चौधरी का कहना है कि विनोद बंसल उनके द्वारा दिए गए विवरणों को लीक कर रहे हैं, और उनके आधे-अधूरे होने की बात कहते हुए उन पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में पैसे कमाने/बनाने के आरोपों को हवा दे रहे हैं । रवि चौधरी और उनके समर्थकों की तरफ से कहा जा रहा है कि विनोद बंसल के रवैये से लग रहा है कि उनकी दिलचस्पी पिछले रोटरी वर्ष के अकाउंट्स को क्लियर करने/करवाने में नहीं है, और वह उसकी आड़ में डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के बाकी दो सदस्यों के सामने खुद को 'बॉस' दिखाने/जताने तथा रवि चौधरी को परेशान और बदनाम करने का काम कर रहे हैं ।
विनोद बंसल पर लगाए जा रहे रवि चौधरी के इन आरोपों को डिस्ट्रिक्ट में अधिकतर लोग 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' वाले मुहावरे के रूप में ले रहे हैं । लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रवि चौधरी ने पैसों की जो लूट-खसोट मचाई, और जिसे लेकर खुद अपने द्वारा दिए विवरण में ही वह 'पकड़े/फँसते' दिख रहे हैं - उससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए वह उलटे विनोद बंसल पर ही आरोप लगा रहे हैं । लोगों का कहना है कि विनोद बंसल पर आरोप लगाने की बजाये; कई एक रोटेरियंस से पैसे लेने और उस पैसे का विवरण न देने के जो आरोप 'पब्लिक डोमेन' में सुने/सुनाये जा रहे हैं - वह भले ही विनोद बंसल के यहाँ से लीक हुए हों - रवि चौधरी को उन आरोपों का जबाव देना चाहिए । लोगों की माँग है कि रवि चौधरी पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में लोगों से पैसे लेने और उसका विवरण हिसाब-किताब में न देने तथा खर्चों के कच्चे/फर्जी बिल देने के जो आरोप लग रहे हैं, वह बहुत ही गंभीर किस्म के आरोप हैं, और डिस्ट्रिक्ट व रोटरी को कलंकित करने वाले हैं - इसलिए रवि चौधरी को सीधे सीधे तरीके से उनके जबाव देने चाहिए; और यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो काउंसिल ऑफ गवर्नर्स को रवि चौधरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना चाहिए ।
रवि चौधरी अपने ऊपर लगे आरोपों को भटकाने का जो प्रयास कर रहे हैं, कई लोग उसके लिए विनोद बंसल को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । लोगों का कहना है कि विनोद बंसल डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के बाकी दोनों सदस्यों - आशीष घोष और राजेश बत्रा को दरकिनार कर पिछले रोटरी वर्ष के अकाउंट्स को लेकर रवि चौधरी के साथ जो 'खेल' खेल रहे हैं, उसने रवि चौधरी को 'टेबल टर्न' करने का अवसर दिया है, और रवि चौधरी इसी का फायदा उठा रहे हैं । उल्लेखनीय है कि नियम, तरीका, परंपरा यह है कि निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अपने वर्ष के अकाउंट्स का विवरण डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के सभी सदस्यों को भेजता है; कमेटी सदस्य उस विवरण को लेकर मीटिंग करते हैं - और आपसी सहमति से उन्हें जो कोई तथ्य संदेहास्पद लगते हैं, उसके बारे में कमेटी निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर से स्पष्टीकरण माँगती है; और इस तरह अकाउंट्स मान्य होने की तरफ बढ़ते हैं । इस बार लेकिन विनोद बंसल ने एक अलग ही नजारा पेश किया । वह चूँकि डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन हैं, शायद इसलिए उन्होंने मान लिया कि 'बॉस' वही हैं और उन्हें बाकी सदस्यों के साथ मीटिंग करने की कोई जरूरत ही नहीं है और उन्होंने अकेले ही रवि चौधरी से मीटिंग कर ली । रवि चौधरी ने अक्टूबर में अपने अकाउंट्स के विवरण सौंप दिए थे; उसके बाद किसी किसी ने विनोद बंसल से डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी की मीटिंग के बारे में पूछा भी, लेकिन हर किसी को विनोद बंसल से यही सुनने को मिला कि जल्दी क्या है, मीटिंग हो जाएगी - पर जो अभी करीब करीब तीन महीने होने पर भी नहीं हो पाई है । तीन सदस्यीय डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में चेयरमैन होता जरूर है, लेकिन वह सिर्फ एक व्यवस्था के तहत होता है, उसे कोई विशेषाधिकार नहीं होता है - लेकिन विनोद बंसल ने लगता है कि अपने लिए विशेषाधिकार खुद गढ़ लिया और चेयरमैन होने के नाते उन्होंने अपने आप को डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी का 'बॉस' मान लिया । विनोद बंसल के इस रवैये ने पिछले रोटरी वर्ष के अकाउंट्स के मामले को और उलझा दिया है, जिसमें रवि चौधरी को बचने का चोर-दरवाजा नजर आ रहा है । विनोद बंसल के रवैये के चलते रवि चौधरी की लूट-खसोट पर यदि पर्दा पड़ा रह गया, तो यह इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सुशील गुप्ता के लिए भी फजीहत भरी स्थिति हो सकती है । 

Wednesday, December 26, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में विनोद बंसल ने पिछले वर्ष के एकाउंट्स के आधे-अधूरे विवरणों के मामले में सवाल उठा कर निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी की कारस्तानियों की पोल खोलने तथा उनके द्वारा की गई लूट-खसोट को सामने लाने का काम किया है

नई दिल्ली । निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी अपने गवर्नर-वर्ष के हिसाब-किताब में भारी हेराफेरी करने के मामले में गहरे फँसते जा रहे हैं, और इसी कारण से पिछले रोटरी वर्ष के उनके एकाउंट्स अभी तक फाइनल नहीं हो सके हैं । डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन के रूप में विनोद बंसल द्वारा की गई तहकीकात ने रवि चौधरी के आर्थिक घपलों से जुड़ी कारस्तानियों की और पोल खोल दी है । रवि चौधरी के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि कई मौकों पर उनके संकट मोचक की भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजेश बत्रा ने भी उनकी मदद करने से इंकार कर दिया है । तीन सदस्यीय डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी में राजेश बत्रा भी एक सदस्य हैं । कमेटी के तीसरे सदस्य आशीष घोष हैं, जो कमेटी के को-चेयरमैन भी हैं । रोटरी इंटरनेशनल के नियमानुसार, रवि चौधरी के पिछले वर्ष के गवर्नर-काल के एकाउंट्स अभी तक मिल जाने चाहिए थे; लेकिन वह अभी तक तैयार ही नहीं हो सके हैं । रवि चौधरी ने अपनी तरफ से एकाउंट्स फाइनल करके डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन विनोद बंसल को सौंप दिए थे, लेकिन विनोद बंसल ने पहली ही नजर में उन्हें आधा/अधूरा पाया । विनोद बंसल को कई एंट्रीज पर संदेह हुआ, जिन पर स्पष्टीकरण देने रवि चौधरी उनके ऑफिस भी आए - लेकिन विनोद बंसल उनके दिए स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए । विनोद बंसल ने एकाउंट्स में उनके द्वारा दिए गए संदेहास्पद विवरणों से संबंधित सवालों का एक पुलिंदा रवि चौधरी को भेज दिया है, जिसने रवि चौधरी की नींद उड़ा दी है ।
विनोद बंसल द्वारा पूछे गए सवालों में सबसे गंभीर सवाल वह हैं जिनमें कुछेक प्रेसीडेंट्स से नगद में लिए गए लाखों रुपयों का विवरण माँगा गया है, जिनका जिक्र रवि चौधरी द्वारा सौंपे गए विवरण में है ही नहीं । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष ही डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच चर्चा थी कि कुछेक तत्कालीन प्रेसीडेंट्स से अलग अलग आयोजनों की स्पॉन्सरशिप  के नाम पर रवि चौधरी ने अवॉर्ड का लालच दिखा कर चार-चार पाँच-पाँच लाख रुपए लिए हैं । रवि चौधरी द्वारा सौंपे गए विवरण में विनोद बंसल को जब उन रुपयों का जिक्र नहीं दिखा, तो उन्होंने पहले तो उन तत्कालीन प्रेसीडेंट्स से रुपये देने की बात पूछी और पुष्टि होने पर फिर रवि चौधरी से पूछा कि उन रुपयों को लिए जाने का विवरण उनके द्वारा सौंपे गए हिसाब-किताब में क्यों नहीं है ? आरोप है कि उन लाखों रुपयों को रवि चौधरी ने हड़प लिया है । रवि चौधरी ने उस मोटी रकम को लेकर लीपापोती करने की कोशिश की, विनोद बंसल लेकिन उनके जबाव से संतुष्ट नहीं हुए । विनोद बंसल जिस तरह से रवि चौधरी द्वारा सौंपे गए हिसाब-किताब के ब्यौरे को खंगाल रहे थे और बारीकी से जाँच रहे थे, उससे रवि चौधरी को आभास हो गया था कि हिसाब-किताब में हेराफेरी को लेकर वह फँस सकते हैं । अपने आपको बचाने के लिए उन्होंने राजेश बत्रा की मदद लेने संकेत दिए । विनोद बंसल लेकिन उनसे ज्यादा होशियार निकले; उन्होंने रवि चौधरी द्वारा दिए गए विवरणों में नजर आ रही कमियों को लेकर डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के बाकी दोनों सदस्यों से बात की - और उन्हें यह देख कर खासी राहत मिली कि आशीष घोष के साथ-साथ राजेश बत्रा ने भी साफ कहा कि एकाउंट्स में पारदर्शिता और ईमानदारी होनी भी चाहिए और 'दिखनी' भी चाहिए । रवि चौधरी के समर्थक के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले राजेश बत्रा से हरी झंडी मिलने के बाद विनोद बंसल ने अपने आपको दबावमुक्त पाया और रवि चौधरी द्वारा सौंपे गए विवरण में दिए गए आधे-अधूरे तथ्यों को लेकर सवालों की सूची रवि चौधरी को सौंप दी ।
रवि चौधरी द्वारा दिए गए विवरण में घपलेबाजी का संदेह दरअसल इसलिए है, क्योंकि रवि चौधरी ने अधिकतर खर्चों के विवरण कच्चे रूप में दिए हैं; रोटरी तथा देश के नियमों के अनुसार, जो पक्के बिल के रूप में होने चाहिए । देश के आयकर विभाग की नजर कच्चे रूप में होने वाले 'बड़े' खर्चों पर है, और उनकी चपेट में रोटरी भी आ चुकी है - रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस को आयकर विभाग की तरफ से एक नोटिस मिल चुका है, जिसमें रोटरी का पक्ष रखने का काम खुद विनोद बंसल कर चुके हैं । डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन के रूप में विनोद बंसल के लिए रवि चौधरी के गवर्नर-वर्ष के एकाउंट्स इसलिए भी एक चुनौती हैं, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट में बहुत से लोगों की निगाह उस पर है । दरअसल रवि चौधरी ने अपने व्यवहार और रवैये से डिस्ट्रिक्ट में तमाम लोगों को नाराज किया हुआ है; रवि चौधरी विभिन्न मौकों पर विनोद बंसल सहित अन्य पूर्व गवर्नर्स पर बेईमानी करने के आरोप लगाते रहे हैं - ऐसे में अब पूर्व गवर्नर्स तथा अन्य लोगों को यह दिखाने/बताने का मौका मिला है कि रोटरी के सबसे बड़े 'लुटेरे' तो रवि चौधरी ही हैं । रवि चौधरी पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में पैसे कमाने/बनाने के जो आरोप लगते रहे हैं, उनके एकाउंट्स के विवरण उन आरोपों के सच साबित होने के संकेत दे रहे हैं । इसलिए पूर्व गवर्नर्स व अन्य लोगों का फाइनेंस कमेटी के सदस्यों पर दबाव है कि वह रवि चौधरी के एकाउंट्स में लीपापोती न करें । इसी दबाव के चलते राजेश बत्रा तक एकाउंट्स के मामले में रवि चौधरी का बचाव करने से पीछे हट गए हैं । कुछेक लोगों को हालाँकि यह भी लगता है और उनका कहना है कि विनोद बंसल भी हो सकता है कि एकाउंट्स में थोड़ी बहुत 'ड्रेसिंग' करके लीपापोती करते हुए अंततः रवि चौधरी को बचाने का प्रयास करें - लेकिन रवि चौधरी से स्पष्टीकरण लेने के लिए उनके द्वारा किए सवालों ने रवि चौधरी की कारस्तानियों की पोल खोलने तथा उनके द्वारा की गई लूट-खसोट को सामने लाने का काम तो कर ही दिया है ।