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Saturday, October 17, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा के सहयोग व समर्थन से इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता के नाम पर रोटरी में धंधा, राजनीति और फर्जीवाड़ा करने के उद्देश्य से होने वाले कार्यक्रम की पोल खुलने के बाद शेखर मेहता ने कार्यक्रम में शामिल होने से इंकार किया

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा के सहयोग व समर्थन से फर्जी तरीके से रोटरी का नाम जोड़ कर एक फर्जी किस्म की संस्था के आज शाम हुए कार्यक्रम 'वर्चुअल ट्रु रिइंकार्नेशन इंटरसिटी' में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल करने की कोशिशें अंततः असफल हो गईं । शेखर मेहता को रोटरी के नाम पर किए जा रहे फर्जीवाड़े के बारे में तथ्य मिले, तो उन्होंने इस कार्यक्रम से दूर रहने का फैसला किया । कार्यक्रम के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े तथा राजनीतिक जुगाड़ को लेकर 'रचनात्मक संकल्प' ने दो दिन पहले ही एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें तथ्यों के साथ इस बात का खुलासा किया गया था कि कैसे और क्यों तो कार्यक्रम की आयोजक संस्था कागजी और फर्जी किस्म की है, कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े लोग क्यों और कैसे रोटरी को बदनाम करने वाले तथा रोटरी की वैल्यूज के साथ खिलवाड़ करने वाले हैं, और क्यों व किस तरह यह कार्यक्रम एक राजनीतिक एजेंडे के तहत किया जा रहा है - और सबसे ज्यादा दुर्भाग्य की बात यह कि शेखर मेहता जैसे रोटरी के सबसे बड़े पदाधिकारी के नाम पर किए जाने वाले गुलगपाड़े को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा ने किस किस तरीके से शह और समर्थन दिया । 'रचनात्मक संकल्प' में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद डिस्ट्रिक्ट में बबाल मचा और कई लोगों ने अपने अपने तरीके से कोशिशें कीं कि रोटरी के नाम पर किए जा रहे फर्जीवाड़े तथा राजनीतिक एजेंडे को थोपने की कोशिशों में शेखर मेहता को सहभागी नहीं बनना चाहिए - क्योंकि उनकी सहभागिता से सच्चे रोटेरियंस का मनोबल टूटेगा ।
'वर्चुअल ट्रु रिइंकार्नेशन इंटरसिटी' से जुड़े विवादों की जानकारी मिलने पर शेखर मेहता भी कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर असमंजस में पड़े । विवादों को लेकर उन्होंने संजीव राय मेहरा से पूछताछ की, तो संजीव राय मेहरा भी समझ गए कि 'रायता' फैल है । मजे की बात यह रही कि फैले रायते को समेटने के लिए संजीव राय मेहरा ने हर संभव कोशिश की । उनकी कोशिशों को पूर्व गवर्नर विनोद बंसल का सहयोग मिला । दरअसल विवादित कार्यक्रम की बागडोर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार अजीत जालान के हाथ में थी, जिन्हें विनोद बंसल के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है । विनोद बंसल ने समझ लिया कि मामला जिस तरह से बिगड़ा है, उसे अजीत जालान नहीं संभाल पायेंगे; और इसलिए उन्होंने विनय भाटिया को संजीव राय मेहरा की मदद में लगाया । विनय भाटिया डायरेक्टर पद की नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनोद बंसल के उम्मीदवार के रूप में देखे/पहचाने जा रहे हैं । विनोद बंसल, विनय भाटिया और संजीव राय मेहरा की तिकड़ी कार्यक्रम से जुड़े विवादित मामलों को दूर करते हुए शेखर मेहता के आगमन के रास्ते को साफ करने की कोशिशों में जुटी ।
कार्यक्रम शुरू होने के पहले के 25/30 घंटों में डिस्ट्रिक्ट में भारी गहमागहमी रही । एक तरफ कुछेक लोगों की कोशिश थी कि रोटरी के नाम पर धंधा, राजनीति और फर्जीवाड़ा करने वाले रोटेरियंस के चक्कर में कहीं डिस्ट्रिक्ट, रोटरी तथा शेखर मेहता को फजीहत का शिकार न होना पड़ जाए - तो दूसरी तरफ 'वर्चुअल ट्रु रिइंकार्नेशन इंटरसिटी' के आयोजन से जुड़े लोगों ने उन उपायों को अपनाने पर जोर दिया, जिनसे शेखर मेहता की आशंकाओं को दूर किया जा सके तथा कार्यक्रम में उनकी सहभागिता को सुनिश्चित किया जा सके । इस चक्कर में कार्यक्रम के बेचारे निमंत्रण पत्र की बहुत दुर्गति हुई । कार्यक्रम शुरू होने से पहले लोगों को कई कई तरह के निमंत्रण पत्र देखने को मिले । धीरे धीरे करके पहले तो एक कागजी व फर्जी किस्म की संस्था के कार्यक्रम को डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रम का रूप दिया गया, फिर विवादित आयोजकों का नाम हटाया गया, फिर आयोजक क्लब्स के नाम भी हटा लिए गए - हद की बात यह हुई कि बाद में निमंत्रण पत्र से उस कागजी व फर्जी संस्था का नाम भी हटा लिया गया, वास्तव में जिसके नाम से कार्यक्रम की योजना बनाई गई थी । जैसे एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं, ठीक उसी अंदाज में एक कागजी व फर्जी किस्म की संस्था के कार्यक्रम के जरिये धंधा जमाने व राजनीति करने की कोशिश को बदनामी के दाग से बचाने/छिपाने के लिए कई तरफ के उपाए आजमाये गए । संजीव राय मेहरा, अजीत जालान, विनय भाटिया व विनोद बंसल द्वारा आजमाये गए उपाए लेकिन शेखर मेहता को आश्वस्त नहीं कर सके; और शेखर मेहता ने अपने आप को कार्यक्रम से दूर करने/रखने में ही अपनी भलाई देखी । इस तरफ शेखर मेहता के नाम पर रोटरी में धंधा, राजनीति और फर्जीवाड़ा करने वाले रोटेरियंस की तैयारी धरी की धरी रह गई । 

Thursday, October 15, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा की शह पर शेखर मेहता व भरत पांड्या को आगे रख कर, एक फर्जी व विवादग्रस्त संस्था के आयोजन को चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन के रूप में भी देखा/पहचाना जा रहा है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार अजीत जालान के 'मैनेजर' की भूमिका निभा रहे संजीव वर्मा 'रोटरी ट्रु रिइंकार्नेशन' नाम की फर्जी टाइप की संस्था को लेकर फिर से सक्रिय हो गए हैं, और इस बार उन्होंने इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या तथा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता के नाम का सहारा लेकर अपने आलोचकों का मुँह बंद करने की 'तैयारी' दिखाई है । उल्लेखनीय है कि संजीव वर्मा इस तथाकथित संस्था को लेकर काउंसिल ऑफ गवर्नर्स के निशाने पर आ चुके हैं, और काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में उन्हें रोटरी के नाम पर निजी संस्था चलाने के लिए लताड़ पड़ चुकी है । इस लताड़ के चलते ही संजीव वर्मा ने पिछले करीब दो वर्षों से इस तथाकथित संस्था की तथाकथित गतिविधियों को बंद किया हुआ था; लेकिन अजीत जालान की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी को मदद पहुँचाने के उद्देश्य से संजीव वर्मा ने इसे फिर से सक्रिय कर लिया है । इस सक्रियता के तहत वह 17 अक्टूबर को वर्चुअल ट्रु रिइंकार्नेशन इंटरसिटी कर रहे हैं, जिसमें स्पीकर के रूप में उन्होंने भरत पांड्या और शेखर मेहता को शामिल होने के लिए तैयार कर लिया है । संजीव वर्मा को विश्वास है कि भरत पांड्या और शेखर मेहता जैसे रोटरी के बड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी से वह अपनी संस्था के फर्जी टाइप होने तथा रोटरी के नाम व लोगो का गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल करने के आरोपों से बच जायेंगे ।
रोटेरियंस को यह समझना भी मुश्किल हो रहा है कि भरत पांड्या तथा शेखर मेहता जैसे बड़े पदाधिकारी रोटरी के नाम व लोगो का फर्जी तरीके से इस्तेमाल करने वाले रोटेरियन के निजी कार्यक्रम में क्यों तो शामिल हो रहे हैं, और क्यों रोटरी का नाम व लोगो फर्जी तरीके से इस्तेमाल होने दे रहे हैं । गौर करने वाला तथ्य यह है कि 'रोटरी ट्रु रिइंकार्नेशन' न तो क्लब का प्रोजेक्ट है, न डिस्ट्रिक्ट का प्रोजेक्ट है । दरअसल यह कोई प्रोजेक्ट ही नहीं है । इसकी वेबसाइट में खुद संजीव वर्मा ने बताया है कि यह उनकी सोच व भावना का उपक्रम है; और वास्तव में यह लोगों को अंगदान के प्रति शिक्षित करने का 'ऑनलाइन प्लेटफॉर्म' है । 'रोटरीऑर्गनडोनेशनडॉटओआरजी' नाम की वेबसाइट में संजीव वर्मा ने दावा किया है कि वह 'वैरी हार्ड वर्किंग' कर रहे हैं; लेकिन उनकी 'वैरी हार्ड वर्किंग' की पोल इसी वेबसाइट में 'लेटेस्ट न्यूज' कॉलम की सूचनाओं से खुल रही है - जहाँ 4 अगस्त 2020 की खबर से पहले 28 सितंबर 2018 की खबर है । यानि संजीव वर्मा अंगदान को लेकर लोगों को शिक्षित करने के लिए वर्चअल प्लेटफॉर्म तैयार करते हैं, और उसमें दो वर्ष तक उनके पास शेयर करने के लिए कोई सूचना या खबर नहीं होती है - और इसे वह 'वैरी हार्ड वर्किंग' कहते हैं ।
संजीव वर्मा इस इंटरसिटी को डीआरआर सार्थक बंसल के साथ मिल कर कर रहे हैं, जो रोट्रेक्ट वर्ष शुरू होने के दो महीने बाद नियम व व्यवस्थानुसार का उल्लंघन करते हुए मनमाने तरीके से डीआरआर बनाये गए हैं, और जिस पर खासा विवाद है । इस इंटरसिटी के आयोजन में संजीव वर्मा के क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के साथ रोटरी क्लब दिल्ली इलीट भी शामिल है, जिसके प्रेसीडेंट अनमोल चावला ने अभी पिछले दिनों रोट्रेक्ट की संस्था सीरिक के प्रेसीडेंट का चुनाव लड़ा था, जिसे जमकर धांधली करके उन्होंने जीता था । धांधली की शिकायत हुई, जाँच हुई, जाँच में आरोपों को सही पाया गया और चुनाव रद्द हुआ । इस तरह, सहज ही देखा/समझा जा सकता है कि 17 अक्टूबर को हो रही इस इंटरसिटी के आयोजन में प्रमुख भूमिका रोटरी व रोट्रेक्ट के नाम पर तरह तरह की धांधली करने वाले लोगों की ही है । इसमें विडंबना और मजे की बात यह है कि इस आयोजन को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा की पूरी पूरी शह और समर्थन है । उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों कई क्लब्स के सहयोग तथा उनकी भागीदारी से रोटरी क्लब दिल्ली राजेंद्र प्लेस द्वारा किए जा रहे आयोजन को, जिसमें मुख्य स्पीकर के रूप में शेखर मेहता ने शामिल होने की स्वीकृति दे दी थी, संजीव राय मेहरा ने यह कहते हुए जबर्दस्ती रद्द करवा दिया था कि चूंकि क्लब की सदस्या आभा झा चौधरी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवार हैं इसलिए उक्त आयोजन चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन होगा । उन्हीं संजीव राय चौधरी को लेकिन अब यह नहीं दिख रहा है कि 17 अक्टूबर के आयोजन के मुख्य कर्ताधर्ता संजीव वर्मा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के एक अन्य उम्मीदवार अजीत जालान के 'चुनावी मैनेजर' की भूमिका निभाते रहे हैं, और कार्यक्रम का आयोजक क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट अजीत जालान का क्लब है । रोटरी क्लब दिल्ली राजेंद्र प्लेस के आयोजन में चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन देखने वाले संजीव राय मेहरा को रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के आयोजन में चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन होता हुआ नहीं नजर आ रहा है - इसे उनकी पक्षपाती और बेईमान रवैये रूप में देखा/पहचाना जा रहा है ।

Wednesday, October 14, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा की मिलीभगत से रोट्रेक्ट डिस्ट्रिक्ट 3011 के अनमोल चावला का बेईमानीपूर्ण हरकतों से जीता सीरिक प्रेसीडेंट का चुनाव रद्द हुआ; और इसके चलते न सिर्फ डिस्ट्रिक्ट 3011 की, बल्कि रोट्रेक्ट्स मूवमेंट्स की भी भारी बदनामी हुई है

नई दिल्ली । रोट्रेक्ट्स की संस्था सीरिक (एसईएआरआईसी - साऊथ ईस्ट एशियन रोट्रेक्ट इन्फॉर्मेशन सेंटर) के प्रेसीडेंट पद पर रोट्रेक्ट डिस्ट्रिक्ट 3011 के अनमोल चावला की जीत के फैसले को रद्द कर देने की घोषणा अनमोल चावला के साथ-साथ रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा को भी बदनामी और फजीहत की कालिख का निशाना बनाती है । संजीव राय मेहरा ने अभी तक के अपने करीब तीन महीने के गवर्नर-काल में कई मौकों पर अपनी हरकतों से डिस्ट्रिक्ट तथा रोटरी को लज्जित व शर्मिंदा किया है, और खुद अपना मजाक उड़वाया है । सीरिक प्रेसीडेंट के चुनाव में धांधली करके जीत हासिल करने वाले अनमोल चावला ने रोट्रेक्ट डिस्ट्रिक्ट 3011 की जो बदनामी करवाई है, उसके लिए संजीव राय मेहरा को भी इसलिए जिम्मेदार माना जा रहा है क्योंकि सीरिक के प्रेसीडेंट पद के लिए अनमोल चावला की उम्मीदवारी वास्तव में संजीव राय मेहरा की ही नाजायज कार्रवाई का परिणाम है । उल्लेखनीय है कि अनमोल चावला पिछले दो वर्षों से सीरिक प्रेसीडेंट पद के लिए उम्मीदवार बनने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन डीआरआर (डिस्ट्रिक्ट रोट्रेक्ट रिप्रेजेंटेटिव) उनके बेईमानी व धांधलीबाज 'स्वभाव' को देखते/समझते हुए उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी नहीं दे रहे थे । उन्हें डर था कि अनमोल चावला अपनी बेईमानियों व धांधलियों से रोट्रेक्ट तथा डिस्ट्रिक्ट का नाम बदनाम ही करेंगे ।
उल्लेखनीय है कि अनमोल चावला पर डीआरआर पद पर रहते हुए पैसों में घपलेबाजी करने के गंभीर आरोप रहे हैं । आरोपों पर अनमोल चावला का रवैया चूँकि 'चोरी और सीनाजोरी' वाला रहा, जिसे देखते हुए पिछले दो वर्षों के डीआरआर ने यही समझा और पाया कि सीरिक प्रेसीडेंट के रूप में भी अनमोल चावला पैसों की घपलेबाजी ही करेंगे और इसलिए उन्हें सीरिक प्रेसीडेंट पद के लिए उम्मीदवार न बनाना ही उचित होगा । मौजूदा वर्ष की डीआरआर यामिनी थरेजा भी जब अनमोल चावला को सीरिक प्रेसीडेंट पद की उम्मीदवारी के लिए हरी झंडी देती हुई नहीं दिखीं, तब अनमोल चावला ने संजीव राय मेहरा से मदद माँगी । रोट्रेक्ट के पैसों की घपलेबाजी के आरोपों से घिरे अनमोल चावला के साथ संजीव राय मेहरा की पता नहीं किस तरह की क्या साँठगाँठ है कि संजीव राय मेहरा ने उनकी मदद करने के लिए यामिनी थरेजा को मनमाने तरीके और मनगढंत आरोपों के साथ डीआरआर पद से हटा दिया, और मनमाने तरीके से एक कठपुतली के रूप में सार्थक बंसल को डीआरआर नियुक्त कर दिया । सार्थक बंसल ने डिस्ट्रिक्ट 3011 के डीआरआर के रूप में सबसे पहला काम सीरिक प्रेसीडेंट पद के लिए अनमोल चावला की उम्मीदवारी को हरी झंडी देने का किया ।
सीरिक प्रेसीडेंट पद के उम्मीदवार के रूप में अनमोल चावला ने उन आशंकाओं व डर को सही साबित किया, जिनके कारण पिछले दो वर्षों से उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी देने से इंकार किया जा रहा था । उम्मीदवार के रूप में अनमोल चावला पर जिस तरह की गड़बड़ियों को करने के आरोप लगे, और जिन आरोपों को सही पाते हुए उनके चुनाव को रद्द कर दिया गया है, उससे लगता है कि बेईमानी व हेराफेरी करने की अनमोल चावला ने जैसे कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली हुई है । आरोपों का हवाला देते हुए रोट्रेक्ट्स को लगता है कि सीरिक प्रेसीडेंट तो दूर, अनमोल चावला को रोट्रेक्ट भी नहीं बने रहने देना चाहिए और उनकी सदस्यता तुरंत प्रभाव से खत्म कर देना चाहिए । अनमोल चावला की जीत के फैसले को रद्द करने के फैसले का स्वागत करते हुए कई रोट्रेक्ट्स का कहना है कि चुनाव रद्द करने का फैसला वास्तव में आधा-अधूरा फैसला है, और अनमोल चावला को चुनाव लड़ने के अयोग्य भी घोषित किया जाना चाहिए । रोट्रेक्ट्स का कहना है कि अनमोल चावला की हरकतों के कारण रोट्रेक्ट्स की पहचान व साख को बहुत बुरी चोट पहुँची है; और न सिर्फ रोट्रेक्ट डिस्ट्रिक्ट 3011 की बल्कि रोट्रेक्ट्स मूवमेंट्स की भारी बदनामी हुई है । इस बदनामी के लिए रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा को भी यह कहते/बताते हुए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है कि संजीव राय मेहरा यदि अनमोल चावला को उम्मीदवार बनवाने के लिए नियमों व व्यवस्था को रौंदते हुए मनमानी न करते, तो रोट्रेक्ट डिस्ट्रिक्ट 3011 को इस मनहूस स्थिति को न देखना पड़ता ।

Tuesday, October 6, 2020

रोटरी इंटरनेशनल जोन 7 में डायरेक्टर पद के चुनाव में महेश कोटबागी की जीत के साथ, रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में शेखर मेहता के दबदबे के बढ़ने से, जोन 4 की इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति में शेखर मेहता के नजदीकियों का हौंसला बढ़ा

नई दिल्ली । महेश कोटबागी के इंटरनेशनल डायरेक्टर चुने जाने से देश की रोटरी की चुनावी राजनीति में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता का 'इकबाल' एक बार फिर स्थापित होता हुआ दिखा है । रोटरी की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले बड़े नेताओं का भी कहना है कि जोन 7 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए दोबारा हुए चुनाव में महेश कोटबागी की जीत की खुद महेश कोटबागी को जितनी जरूरत थी, उससे कहीं ज्यादा जरूरत शेखर मेहता को थी । माना/समझा जा रहा है कि महेश कोटबागी की जीत के जरिये शेखर मेहता ने उस चोट का बदला ले लिया है, जो इंटरनेशनल डायरेक्टर के लिए पहले हुए चुनाव में जीते रवि वदलमानी की जीत को निरस्त करके उन्हें पहुँचाई गई थी । दरअसल रवि वदलमानी की जीत को निरस्त करने के फैसले तथा अन्य कुछेक घटनाओं के चलते रोटरी की राजनीति के खिलाड़ियों के बीच शेखर मेहता की स्थिति कमजोर हो चली थी, जिसका नतीजा यह देखने को मिल रहा है कि वर्षों से उनके साथ जुड़े रहे कई महत्त्वाकांक्षी रोटेरियंस ने दूसरे ठिकानों पर जगहें खोजने/बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं । ऐसे रोटेरियंस में लोगों को सबसे ज्यादा हैरान करने वाला उदाहरण डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व गवर्नर विनोद बंसल का लगा/दिखा है, जो वर्षों से शेखर मेहता के साथ लगे रहे हैं - लेकिन जो अब राजु सुब्रमणियन की 'मदद' करते हुए पूर्व प्रेसीडेंट केआर रविंद्रन के नजदीक होने की कोशिश करने में लगे नजर आ रहे हैं । 
दरअसल रोटरी की राजनीति और व्यवस्था में शेखर मेहता को केआर रविंद्रन से टक्कर और चुनौती मिलती दिख रही है, और देश में रोटरी की राजनीति इन्हीं दोनों के बीच विभाजित होती लग रही है । इसीलिए जिस किसी को शेखर मेहता के यहाँ अपनी दाल गलती हुई नहीं दिखती है, वह अपनी दाल की पतीली लेकर केआर रविंद्रन के दरवाजे पहुँच जाता है । पिछले दिनों घटी कुछेक घटनाओं ने शेखर मेहता की स्थिति को कमजोर होते दिखाया, तो उनके नजदीक जुड़े मतलबी रोटेरियंस के बीच भगदड़ मची देखी गई । इस भगदड़ का सबसे ज्यादा असर जोन 4 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी समीकरणों पर पड़ता नजर आया । जोन 4 में इंटरनेशनल डायरेक्टर के लिए जो भी उम्मीदवार हैं, उनमें से कुछेक को शेखर मेहता के तथा कुछेक को केआर रविंद्रन के नजदीकियों के रूप में देखा/पहचाना जाता है । शेखर मेहता जब इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने गए थे, तब विनोद बंसल ने उनके साथ अपनी नजदीकियत दिखाते/जताते हुए दावा करना शुरू किया था कि बस, अब तो उनका इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना पक्का हो गया है । लेकिन जल्दी ही दूसरों के साथ साथ खुद उन्हें भी समझ में आ गया कि शेखर मेहता के यहाँ रंजन ढींगरा और अशोक गुप्ता की स्थिति उनसे मजबूत है । विनोद बंसल ने हालाँकि तरह तरह से शेखर मेहता के यहाँ अपनी स्थिति नंबर वन की बनाने की कोशिश तो बहुत की, लेकिन उन्हें अपनी दाल गलती हुई दिखी नहीं ।
इस बीच शेखर मेहता को रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में कुछेक तगड़े वाले झटके लगे, जिनसे उनकी स्थिति को कमजोर होते हुए देखा/पहचाना गया - और केआर रविंद्रन का पलड़ा भारी होते हुए समझा गया । रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में शेखर मेहता को कमजोर पड़ते देख विनोद बंसल ने अपनी दाल की पतीली शेखर मेहता के यहाँ से उठा कर केआर रविंद्रन के दरवाजे रखने की तैयारी शुरू कर दी, और इसके लिए उन्होंने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी मुकाबले में एक प्रमुख उम्मीदवार के रूप में देखे जा रहे टीएन सुब्रमणियन उर्फ राजु सुब्रमनियन का दामन पकड़ा है । विनोद बंसल और उनके नजदीकियों ने जैसे तय कर लिया है कि यदि वह इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के मुकाबले से बाहर हो रहे हैं, तो वह डिस्ट्रिक्ट के दूसरे उम्मीदवारों को हराने/हरवाने की कोशिश करेंगे । इसी रणनीति के तहत देखने में आ रहा है कि डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनोद बंसल के उम्मीदवार विनय भाटिया तथा विनय भाटिया को जितवाने की जिम्मेदारी ले बैठे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा आजकल राजु सुब्रमणियन को प्रमोट कर रहे हैं । संजीव राय मेहरा ने अपने नए जीएमएल में अंतिम पृष्ठ पर राजु सुब्रमणियन को लेकर एक बड़ा आलेख प्रकाशित किया है । विनय भाटिया व संजीव राय मेहरा को हालाँकि यह डर भी है कि राजु सुब्रमणियन का समर्थन करने के कारण डिस्ट्रिक्ट में उन पर डिस्ट्रिक्ट के साथ बेईमानी व धोखेबाजी करने का आरोप लगेगा, इसलिए उन्होंने आपने आप को दीपक कपूर के समर्थकों के रूप में दिखाना/जताना शुरू किया, लेकिन दीपक कपूर ने उन्हें हड़का दिया कि अपने धोखेबाजी के काम में वह उनका नाम क्यों घसीट रहे हैं ? दीपक कपूर ने नोमीनेटिंग कमेटी के लिए दीपक तलवार पर भरोसा जता कर विनोद बंसल तथा विनय भाटिया की कोशिशों को और झटका दिया है ।
महेश कोटबागी की इंटरनेशनल डायरेक्टर पद पर हुई जीत के साथ रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में शेखर मेहता की स्थिति के फिर से मजबूत होने के जो संकेत मिले हैं, उससे जोन 4 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को लेकर बनने वाले समीकरणों के शेखर मेहता खेमे के उम्मीदवारों के पक्ष में संयोजित होने की संभावना को और बल मिला है । उम्मीद की जा रही है कि शेखर मेहता की टीम के सदस्यों ने जिस तरह से जोन 7 में काम किया है, वह वैसे ही जोन 4 में भी काम करेगी - इसलिए भी करेगी, ताकि रोटरी की राजनीति व व्यवस्था में शेखर मेहता का पलड़ा भारी रहे ।

Monday, September 7, 2020

रोट्रेक्ट इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अन्यायपूर्ण तरीके से डीआरआर पद से हटाई गईं यामिनी थरेजा को न्याय दिलवाने के अभियान में शामिल होने की बजाये डीआरआर बनने का लालच दिखाने के कारण सार्थक बंसल को मुश्किलों के साथ-साथ, फजीहत का सामना भी करना पड़ रहा है

नई दिल्ली । सार्थक बंसल ने रोट्रेक्ट इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डीआरआर (डिस्ट्रिक्ट रोट्रेक्ट रिप्रेजेंटेटिव) का पद तो संभाल लिया है, लेकिन उन्हें अपनी टीम के लिए पदाधिकारियों को चुनने में खासे विरोध और फजीहत का सामना करना पड़ रहा है । दरअसल रोट्रेक्ट्स उनसे बुरी तरह नाराज हैं, और उनके साथ काम नहीं करना चाहते हैं । रोट्रेक्ट्स का कहना है कि सार्थक बंसल यदि एक सच्चे रोट्रेक्ट हैं, तो उन्हें यामिनी थरेजा को मनमाने व षडयंत्रपूर्ण तरीके से डीआरआर पद से हटाने का विरोध करना चाहिए, और डीआरआर पद पर हुई अपनी 'गैरकानूनी' नियुक्ति को स्वीकार नहीं करना चाहिए । रोट्रेक्ट्स का मानना और कहना है कि नैतिकता, न्याय की स्वाभाविक प्रक्रिया तथा रोटरी इंटरनेशनल के नियम व 'व्यवस्था' को एक साथ ठेंगा दिखाते हुए यामिनी थरेजा को डीआरआर पद से हटाये जाने के बाद सार्थक बंसल ने जिस तत्परता से डीआरआर का पद स्वीकार कर लिया - उससे साबित होता है कि सार्थक बंसल को न नैतिकता की परवाह है, न वह न्याय की स्वाभाविक प्रक्रिया में यकीन रखते हैं, और न वह रोटरी के उच्च आदर्शों व नियमों का पालन करने की जरूरत समझते हैं; उन्हें तो किसी भी तरह से सिर्फ बड़ा पद चाहिए । रोट्रेक्ट्स का कहना है कि सार्थक बंसल यदि डीआरआर का पद स्वीकारने की जल्दबाजी न दिखाते, तो यामिनी थरेजा को उक्त पद वापस दिलवाने के लिए रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के गवर्नर संजीव राय मेहरा पर दबाव बनाया जा सकता था ।
रोट्रेक्ट्स तथा रोटेरियंस का विश्वास है कि संजीव राय मेहरा को जिस तरह, मनमाने तरीके से रंजन ढींगरा को हटा कर विनय भाटिया को डीएमसी (डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन) बनाने के फैसले को वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया गया था, वैसे ही डीआरआर के मामले में भी मजबूर किया जा सकता था - लेकिन पद के लालच में सार्थक बंसल ने उस संभावना को समाप्त कर दिया; और इसी बात से नाराज रोट्रेक्ट्स उनके साथ काम करना नहीं चाहते हैं । उल्लेखनीय है कि एक जुलाई से डीआरआर के रूप में यामिनी थरेजा ने काम करना शुरू किया था । मजे की बात यह है कि डीआरआर के रूप में उनका चयन करीब पाँच महीने पहले कई उम्मीदवारों का इंटरव्यू करने के बाद खुद संजीव राय मेहरा ने ही किया था । डीआरआर के रूप में काम करते हुए यामिनी थरेजा को अभी 50 दिन ही हुए थे, कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में संजीव राय मेहरा ने उन्हें उनके पद से हटा देने की जानकारी दी । पद से हटाने का यामिनी थरेजा को कोई कारण नहीं बताया गया । इस मनमानी कार्रवाई पर संजीव राय मेहरा की जब थुक्काफजीहत होना शुरू हुई, तब चार दिन बाद बताया गया कि उन पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाये जाने के कारण उन्हें पद से हटाया गया है । हद की बात यह रही कि तब भी - और उसके बाद भी किसी को यह जानकारी नहीं है कि 50 दिन के अपने कार्यकाल में यामिनी थरेजा ने आखिर ऐसी क्या वित्तीय गड़बड़ी कर दी, जिसके चलते संजीव राय मेहरा को उन्हें आरोपों की जानकारी तथा आरोपों का जबाव देने का मौका दिए बिना तत्काल पद से हटा देने की जरूरत पड़ गई ?
यामिनी थरेजा को बिना कारण बताये, तथाकथित आरोपों की जानकारी दिए बिना, और उन्हें जबाव देने का मौका दिए बिना डीआरआर पद से मनमाने तरीके से हटाये जाने पर रोट्रेक्ट्स व रोटेरियंस के बीच नाराजगी और गुस्सा पैदा हुआ । लोगों का कहना रहा कि रोट्रेक्ट के रूप में बेहतर व उल्लेखनीय काम करने तथा उपलब्धियाँ हासिल करने वाली यामिनी थरेजा के साथ संजीव राय मेहरा का ऐसा व्यवहार रोट्रेक्ट्स को हतोत्साहित करेगा, तथा डिस्ट्रिक्ट में रोट्रेक्ट गतिविधियों पर बुरा असर डालेगा । यामिनी थरेजा को पिछले पाँच वर्षों में बेस्ट रोट्रेक्ट क्लब सेक्रेटरी, बेस्ट रोट्रेक्ट क्लब प्रेसीडेंट, बेस्ट रोट्रेक्टर, आउटस्टैंडिंग डिस्ट्रिक्ट रोट्रेक्ट सेक्रेटरी के अवॉर्ड मिले हैं; तथा रायला चेयरपरसन के रूप में रोटरी कैंसर फाउंडेशन में उनके सहयोग को विशेष तौर से रेखांकित किया गया और सराहा गया । कम समय में प्राप्त की गईं इन उपलब्धियों तथा निरंतर सक्रियता के कारण ही डीआरआर पद के उम्मीदवारों में उन्हें सबसे योग्य पाया गया था और चुना गया था । रोट्रेक्ट्स तथा रोटेरियंस का कहना रहा कि यामिनी थरेजा के साथ किया गया व्यवहार उनके साथ बहुत बड़ी नाइंसाफी है । उन्हें न्याय दिलवाने के लिए रोट्रेक्ट्स तथा रोटेरियंस ने तैयारी शुरू की थी, और अपनी तैयारी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने सार्थक बंसल से अनुरोध किया था कि उन्हें यामिनी थरेजा को न्याय दिलवाने की मुहिम में शामिल होना चाहिए और डीआरआर का पद स्वीकार नहीं करना चाहिए । सार्थक बंसल ने लेकिन पद को महत्ता दी । सार्थक बंसल के पद के लालच ने रोट्रेक्ट्स को उनके खिलाफ कर दिया है, और कई सक्रिय रोट्रेक्ट्स उनके साथ काम करने से इंकार करने लगे हैं । इससे, डीआरआर 'बनने' के बावजूद सार्थक बंसल को मुश्किलों का सामना करने के साथ-साथ, फजीहत का सामना भी करना पड़ रहा है । 

Friday, August 28, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा वरिष्ठ पूर्व गवर्नर दीपक तलवार पर लगाए आरोप का सुबूत प्रस्तुत करने की चुनौती से बचने/छिपने के कारण एक बार फिर रोटेरियंस के बीच फजीहत का शिकार हुए 

नई दिल्ली । संजीव राय मेहरा सिर्फ डाँट खाने, लताड़ सुनने और फजीहत झेलने के लिए ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बने हैं क्या ? लोगों के बीच यह सवाल दरअसल इसलिए चर्चा में है, क्योंकि अभी उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार संभाले दो महीने भी नहीं हुए हैं - कि तीन बड़े कांड में उन्हें डाँट खाना पड़ी है और फजीहत झेलना पड़ी है । ताजा प्रकरण में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक तलवार ने उन्हें चुनौती दी है कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड से उन्हें चेतावनी मिलने की जो बात उन्होंने कही/लिखी है, वह उसके सुबूत दें - अन्यथा माफी माँगे । संजीव राय मेहरा अपनी ही कही/लिखी बात का न कोई सुबूत दे रहे हैं, और न माफी माँग रहे हैं - बल्कि मुँह छिपाते फिर रहे हैं । इस प्रकरण पर वरिष्ठ पूर्व गवर्नर विनय अग्रवाल ने मजे लेते हुए संजीव राय मेहरा को बड़ी मीठी मीठी सी 'पिटाई' करते हुए चिट्ठी लिखी है । फजीहत के पिछले मामलों की तरह इस मामले में भी संजीव राय मेहरा ने मुसीबत खुद ही बुलाई और एक बार फिर साबित किया कि उम्र में वह भले ही बड़े हो गए हैं, लेकिन सोच/समझ और व्यवहार में वह बहुत 'छोटे' हैं ।
दीपक तलवार अगले रोटरी वर्ष, यानि वर्ष 2021-22 के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर हैं । इस नाते काम करते हुए उन्होंने क्लब्स के पदाधिकारियों से संपर्क किया । संपर्क करते हुए उन्होंने जो पत्र लिखा, उसमें उन्होंने अपने आप को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर तो लिखा/बताया - लेकिन वर्ष नहीं लिखा/बताया । इस तरह की चूक और या लापरवाही रोटरी में अधिकतर पदाधिकारी करते रहते हैं, और इसे प्रायः अनदेखा किया जाता है । अपनी सोच/समझ व व्यवहार के 'छोटेपन' को दर्शाते हुए संजीव राय मेहरा लेकिन दीपक तलवार की इस चूक और या लापरवाही पर जैसे आगबबूला हो गए, और बात का बतंगड़ बनाते हुए उन्होंने दीपक तलवार को तो बुरा-भला कहते हुई चिट्ठी लिख ही दी - और उससे भी जैसे उनका मन नहीं भरा, तो दीपक तलवार को लिखी अपनी चिट्ठी उन्होंने तमाम छोटे/बड़े पदाधिकारियों को भी भेज दी । संजीव राय मेहरा चाहते तो अपनी, अपने पद की, डिस्ट्रिक्ट की और रोटरी की गरिमा बनाये रखते हुए दीपक तलवार को उनकी चूक और या लापरवाही के प्रति आगाह करते हुए उसमें सुधार करवा सकते थे - लेकिन तब वह अपनी फजीहत का मौका कैसे बनाते ? संजीव राय मेहरा यदि दीपक तलवार को उनकी चूक और या लापरवाही पर ही घेरने तक टिकते, तब भी गनीमत होती और वह फजीहत से बच जाते । संजीव राय मेहरा लेकिन दीपक तलवार पर आरोप लगा बैठे कि वर्ष 2015-16 में डिस्ट्रिक्ट की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने के लिए रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड उन्हें चेतावनी दे चुका है । दीपक तलवार ने इसी बात को मुद्दा बना कर संजीव राय मेहरा पर पलट वार किया है और आरोप लगाया है कि संजीव राय मेहरा झूठे आरोप लगा कर उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की और डिस्ट्रिक्ट की गरिमा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं । दीपक तलवार ने संजीव राय मेहरा को चुनौती दी है कि वह रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा उन्हें चेतावनी देने वाला सुबूत प्रस्तुत करें । सुबूत प्रस्तुत करने की बजाये संजीव राय मेहरा लेकिन मुँह छिपाते फिर रहे हैं ।
दीपक तलवार पर झूठा आरोप लगाने के मामले में फजीहत का शिकार हो रहे संजीव राय मेहरा, इससे पहले रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का मजाक बनाते हुए रंजन ढींगरा की जगह विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बनाने के मामले में पहले रोटरी इंटरनेशनल के साउथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों से और फिर इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या से लताड़ खाकर फजीहत करा चुके हैं । उससे भी पहले, रोटरी ब्लड बैंक की एक मीटिंग में एक्स-ऑफिसो सदस्य के रूप में संजीव राय मेहरा को अनाप-शनाप बोलने पर ब्लड बैंक के वरिष्ठ पदाधिकारी रूपक जैन द्वारा लगभग डाँटते/फटकारते हुए चुप कराने का मामला सुना/बताया गया था । इस तरह, अपने दो महीने से भी कम के अभी तक के गवर्नर-काल में संजीव राय मेहरा ने तीन बड़े मामलों में डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स से लेकर रोटरी के बड़े पदाधिकारियों तक से डाँट, लताड़ और फटकार खा ली है - और सभी मामलों में उनका बचकाना रवैया ही जिम्मेदार रहा है । इसी को देखते हुए डिस्ट्रिक्ट में तथा बड़े रोटरी नेताओं के बीच चर्चापूर्ण सवाल है कि संजीव राय मेहरा क्या डाँट, लताड़, फटकार खाने और फजीहत का शिकार बनने के लिए ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बने हैं ?

Tuesday, July 14, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में चुनावी फायदे के लिए बड़ी संख्या में क्लब्स व सदस्य बना कर, नोमीनेटिंग कमेटी के चुनाव में दीपक तलवार से आगे निकलने की, विनय भाटिया की तैयारी पर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले ने पानी फेरा

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के एक फैसले के कारण पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया के लिए 'सिर मुँडाते ओले पड़ने' वाले हालात बन गए हैं । विनय भाटिया ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी का चुनाव जीतने के उद्देश्य से 'अपने' वोट बनाने के लिए कई नए क्लब बनाये, लेकिन रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के एक फैसले के चलते इस वर्ष बने क्लब्स को इस वर्ष होने वाले चुनाव में वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा - और इस तरह 'फर्जी' वोट बना कर चुनाव जीतने की विनय भाटिया की तैयारी शुरू होते ही औंधे मुँह गिर पड़ी है । उल्लेखनीय है कि रोटरी में होने वाले चुनावी मुकाबले में अपने आप को कमजोर समझने वाले उम्मीदवार फर्जी किस्म के नए क्लब बना कर तथा क्लब्स की सदस्यता फर्जी तरीके से बढ़ा कर 'अपने' वोट बनाते/बढ़ाते हैं, और चुनाव जीतने का जुगाड़ लगाते हैं । चुनाव संपन्न होते ही वोट बनाने/बढ़ाने के उद्देश्य से बने क्लब और सदस्य फिर गायब हो जाते हैं । चुनावी फायदे के लिए नए क्लब और नए सदस्य बनाने को लेकर रोटरी इंटरनेशनल को बहुत शिकायतें मिलती रही हैं - उन्हीं शिकायतों का संज्ञान लेकर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने कुछेक अन्य देशों के साथ-साथ भारत के लिए भी मौजूदा वर्ष से यह नियम बना दिया है कि इस वर्ष बनने वाले क्लब्स तथा नए सदस्यों को इस वर्ष के चुनाव में वोट देने/डालने का अधिकार नहीं मिलेगा । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के इस फैसले ने फर्जी वोट बना कर इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए बनने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के चुनाव में बढ़त बनाने की विनय भाटिया की तैयारी पर पानी फेर दिया है ।        
उल्लेखनीय है कि फर्जी तरीके से आठ दिन के लिए डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन 'बने' विनय भाटिया ने डिस्ट्रिक्ट वर्ष के पहले ही दिन 16 नए क्लब तथा करीब 500 नए सदस्य बनाने/बनवाने का काम किया था । उनकी तरफ से दावा किया गया था कि वह जल्दी ही 12 और नए क्लब बनायेंगे/बनवायेंगे तथा कुछेक क्लब्स की सदस्यता में वृद्धि करें/करवायेंगे । एकदम से कई नए क्लब बनाने/बनवाने की उनकी कार्रवाई को वास्तव में उनकी चुनावी तैयारी के रूप में ही देखा/पहचाना गया - और इस बारे में रोटरी इंटरनेशनल के विभिन्न पदाधिकारियों से शिकायतें भी की गईं । शिकायतों में साफ साफ कहा/बताया गया कि विनय भाटिया ने जो नए क्लब तथा सदस्य बनाये/बनवाये हैं, उनमें रोटरी इंटरनेशनल द्वारा तय की गई प्रक्रिया को नहीं अपनाया है, और 'कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा / भानुमती का कुनबा जोड़ा' वाली तर्ज पर क्लब्स बना दिए गए हैं, और जो चुनावी फायदा पहुँचा कर बंद हो जायेंगे । इस बारे में जोन 4 के रोटरी कोऑर्डीनेटर गुरजीत सिंह सेखों तथा असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डीनेटर प्रियेश भंडारी से भी शिकायत की गई; जिन्होंने लेकिन यह कहते हुए मामले से पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें तो सिर्फ इस बात से मतलब है कि उनके 'कार्यकाल' में रोटरी की सदस्यता बढ़ रही है । रोटरी में दरअसल यह 'बीमारी' पक्का घर बना चुकी है कि हर पदाधिकारी रिकॉर्ड बनाने के चक्कर में रहता है - और इसके लिए किसी भी स्तर का फर्जीवाड़ा करने के तैयार रहता है, और/या फर्जीवाड़े पर आँखें बंद कर लेता है । विनय भाटिया द्वारा नए क्लब्स व सदस्य बनाने के अभियान को इसीलिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा ने बढ़चढ़ कर न सिर्फ सहयोग दिया, बल्कि रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों को रौंदते हुए उन्होंने विनय भाटिया को फर्जी तरीके से डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बनाने की भी कोशिश की - जिसके लिए उन्हें खासी लताड़ सुनने को मिली और अपने फैसले को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा ।
विनय भाटिया के लिए मुसीबत की बात यह रही कि फर्जी तरीके से डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन का पद पाने और फिर हटाये जाने के मामले में हुई फजीहत के चलते उनके नोमीनेटिंग कमेटी के चुनाव अभियान पर खासा प्रतिकूल असर पड़ा, और लोगों से उन्हें सुनने को मिला कि रोटरी इंटरनेशनल नियम-कानूनों से धोखा करने की उनकी कोशिशों को देखते हुए उन्हें किसी भी पद के भला क्यों चुना जाना चाहिए ? इसके आलावा, नोमीनेटिंग कमेटी के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी करते सुने जा रहे वरिष्ठ पूर्व गवर्नर दीपक तलवार के मुकाबले विनय भाटिया को विभिन्न पैमानों के आधार पर कमजोर ही देखा/माना जा रहा है । रोटरी में काम करने का रिकॉर्ड हो, या रोटरी सक्रियता व प्रभाव का मामला हो - विनय भाटिया हर मामले में दीपक तलवार से बहुत ही 'हलके' पड़ते/लगते हैं । दीपक तलवार और विनय भाटिया के बीच तुलना करने के मौकों को हालाँकि विनोद बंसल ने विनय भाटिया के पक्ष में करने की यह कहते/बताते हुए कोशिश की कि विनय भाटिया उनके प्रतिनिधि हैं, इसलिए विनय भाटिया की कमजोरियों तथा उनके हल्केपन पर ध्यान मत दो । विनय भाटिया दरअसल विनोद बंसल के उम्मीदवार हैं, इसलिए उनका कहना/बताना है कि विनय भाटिया जैसे भी हैं और जो भी हैं - ध्यान रखने की बात सिर्फ यह है कि वह उनके प्रतिनिधि हैं; और यही मान कर उनका समर्थन करना है । विनोद बंसल की वैशाखी और फर्जी वोटों के सहारे विनय भाटिया अपनी उम्मीदवारी के अभियान को खड़ा करने की कोशिश कर ही रहे थे, कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का फैसला आ गया - जिसने विनय भाटिया की सारी तैयारी को चारों खाने चित्त कर दिया है ।
विनय भाटिया हालाँकि अभी रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले की लिखावट के शब्दों को पकड़कर लोगों को - और शायद अपने आपको भरोसा देने/दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का फैसला डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव  संदर्भ में है; और नोमीनेटिंग कमेटी के चुनाव में उक्त फैसला लागू नहीं होगा तथा उनके बनाये क्लब्स के वोटों का लाभ उन्हें मिलेगा । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का फैसला जिन कारणों से और जिस बड़े स्तर पर लागू हुआ है, उसे देखते/समझते हुए अधिकतर लोगों को लेकिन यही विश्वास है कि उक्त फैसला सभी चुनावों पर लागू होगा, और इस फैसले ने विनय भाटिया के फर्जी वोट बना कर चुनाव जीतने के प्रयासों पर ग्रहण लगा दिया है ।

Friday, July 10, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा द्वारा फर्जी तरीके से डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बनाये गए विनय भाटिया, फजीहतपूर्ण तरीके से चेयरमैन पद से हटाये जाने के कारण डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच मजाक का विषय बन गए हैं, जिससे अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने का उनका अभियान भी मुसीबत में फँस गया है 

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा ने अपनी बेशर्मीपूर्ण चालबाजियों से डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन का पद रंजन ढींगरा से छीन कर विनय भाटिया को सौंपने की कोशिश तो बहुत की, लेकिन अंततः उन्हें मुँहकी ही खानी पड़ी - और आठ दिन के अंदर ही उन्हें विनय भाटिया को बड़े फजीहतभरे तरीके से डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन पद से हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है । इस तरह विनय भाटिया ने रोटरी के इतिहास में आठ दिन के डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद पर रहने का अनोखा, लेकिन शर्मनाक रिकॉर्ड बनाया - शर्मनाक इसलिए, क्योंकि यह आठ दिन भी वह रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों का उल्लंघन करते हुए फर्जी रूप में ही चेयरमैन थे । रोटरी इंटरनेशनल की व्यवस्था में यह पद तीन वर्ष के लिए मिलता है, लेकिन विनय भाटिया इस पद पर कुल आठ दिन ही रह पाए - और हटा दिए गए । आठवें दिन ही पद से हटा दिए जाने के कारण, इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार चुनने के लिए बनने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी के अभियान को खासा तगड़ा झटका लगा है । विनय भाटिया के लिए मुसीबत की बात यह रही कि डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद पर उन्हें बैठाने के लिए तरह तरह के हथकंडे तो इसीलिए अपनाए गए थे, ताकि उनकी उम्मीदवारी के अभियान को फायदा मिले - लेकिन आठवें दिन ही उन्हें चेयरमैन के पद से हटा देने के कारण उनकी सारी योजना तो फेल हुई ही, उन्हें लोगों के बीच शर्मिंदगी का सामना और करना पड़ रहा है । लोगों की कमेंटबाजी से पैदा होने वाली शर्मिंदगी से बचने के लिए विनय भाटिया को कुछेक वॉट्सऐप ग्रुप छोड़ने के लिए मजबूर तक होना पड़ा है । ऐसे में, विनय भाटिया के लिए समस्या यह पैदा हुई है कि नोमीनेटिंग कमेटी के लिए अपनी उम्मीदवारी के अभियान के तहत वह लोगों का सामना कैसे करें ?
विनय भाटिया के लिए शर्मिंदगी के साथ-साथ फजीहत की बात यह भी हुई है कि वह जब अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से प्रेसीडेंट्स तथा अन्य रोटेरियंस से मिलजुल रहे थे, तभी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा की वह चिट्ठी प्रेसीडेंट्स व अन्य रोटेरियंस को मिली - जिसमें विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद से हटाने की जानकारी दी गई थी । संजीव राय मेहरा ने अपनी उक्त चिट्ठी में विनय भाटिया को पद से हटाने के कारणों के बारे में झूठ बोलते हुए, विनय भाटिया को फजीहत से बचाने की कोशिश तो खूब की - लेकिन उनकी और विनय भाटिया की बदकिस्मती रही कि प्रेसीडेंट्स व अन्य रोटेरियंस को यह अच्छी तरह से पता है कि विनय भाटिया को उक्त पद देने के लिए संजीव राय मेहरा ने किस हद तक की निचले स्तर की हरकतें करते हुए झूठ बोले, इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या के स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए उन्हें बेइज्जत किया और रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों तक का मजाक बनाया । वह तो भरत पांड्या ने जब 'सख्ती दिखाई' और संजीव राय मेहरा को 'स्पष्ट संदेश' दिया कि यदि उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों का मजाक बनाते हुए अपनी मनमानी कार्रवाई को नहीं रोका, तो उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है - तब संजीव राय मेहरा की अकड़ ढीली पड़ी और उन्होंने विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद से हटाया और रंजन ढींगरा को उनका अधिकार सौंपा । 
संजीव राय मेहरा और विनय भाटिया ने मिलकर डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन पद को लेकर जो तिकड़म तथा फर्जीवाड़ा किया, उसे क्लब्स के प्रेसीडेंट्स तथा अन्य रोटेरियंस ने बड़ी हैरानी और अफसोस के साथ देखा/समझा है । कई एक प्रेसीडेंट्स का कहना/पूछना है कि इन लोगों के मन में जब रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों को लेकर कोई सम्मान नहीं है, इन्हें उनकी कोई परवाह नहीं करना है, इन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर तक की बात नहीं माननी है - तो यह लोग रोटरी में हैं क्यों, और क्यों इन्हें नए नए पद चाहिए ? प्रेसीडेंट्स के बीच उठने वाले इन सवालों ने विनय भाटिया के सामने खासी बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है । दरअसल अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से लोगों से मिलते/जुलते व बात करते हुए विनय भाटिया को इस सवाल का सामना करना पड़ रहा है कि चूँकि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रह चुके हैं, इसलिए उन्हें यह तो पता होगा ही कि रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के तहत, सिर्फ एक गवर्नर के समर्थन के भरोसे, वह डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन नहीं बन सकते हैं - इसलिए उन्होंने फर्जी तरीके से उक्त पद पाने की कोशिश क्यों की ? रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों को जब उन्हें नहीं मानना है, तो वह रोटरी में कोई भी पद क्यों लेना चाहते हैं, और क्यों उम्मीदवार बने हुए हैं ? फर्जी तरीके से डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बने/बनाये गए विनय भाटिया जिस फजीहतपूर्ण तरीके से चेयरमैन पद से हटाये गए हैं, उसके कारण वह लोगों के बीच मजाक का विषय बन गए हैं, जिससे अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने का उनका अभियान मुसीबत में फँस गया है । 

Wednesday, July 1, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में नए रोटरी वर्ष के पहले ही दिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता के लिए 'चुनौती' खड़ी करते हुए, इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या की जैसी बेइज्जती की है, वैसी इससे पहले शायद ही किसी इंटरनेशनल डायरेक्टर की हुई होगी

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा ने अपने गवर्नर-वर्ष की शुरुआत रोटरी इंटरनेशनल के दिशा-निर्देशों को रौंदते तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या के स्पष्ट शब्दों में दिए गए निर्देश की अवहेलना करते हुए की । संजीव राय मेहरा का यह रवैया शेखर मेहता के लिए भी सीधी चुनौती बना है । इंटरेनशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट के रूप में शेखर मेहता आज ही रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्य बने हैं - और आज ही संजीव राय मेहरा ने दिखा दिया कि शेखर मेहता के अपने देश में ही रोटरी के नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ेंगी । विडंबना की बात यह रही कि संजीव राय मेहरा द्वारा खुलेआम किए जा रहे रोटरी के 'चीरहरण' का नजारा डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स चुपचाप बैठे देखते रहे; और भरत पांड्या की खुल्लमखुल्ला हो रही बेइज्जती के गवाह जोन 4 के रोटरी कोऑर्डीनेटर गुरजीत सिंह सेखों तथा असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डीनेटर प्रियेश भंडारी भी बने । संजीव राय मेहरा ने भरत पांड्या की बेइज्जती करते हुए रोटरी का जो 'चीरहरण' किया, वह डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन पद की नियुक्ति के संबंध में उनकी मनमानी से जुड़ा हुआ है । उन्होंने अपने रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन का पद रंजन ढींगरा की जगह विनय भाटिया को दिया है । अभी पंद्रह/बीस दिन पहले ही रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय से उन्हें दो-टूक शब्दों में बताया गया था कि रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार उक्त पद पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी की सहमति से ही कोई नियुक्ति हो सकती है, और कोई भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अकेले यह नियुक्ति नहीं कर सकता है । उल्लेखनीय है कि पिछले रोटरी वर्ष में ही गवर्नर, गवर्नर इलेक्ट तथा गवर्नर नॉमिनी की सहमति से डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद पर रंजन ढींगरा की नियुक्ति हुई थी, जो रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के तहत तीन वर्षों के लिए होती है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में संजीव राय मेहरा ने भी रंजन ढींगरा के नाम पर अपनी सहमति दी थी; किंतु पिछले कुछ समय से संजीव राय मेहरा रोटरी नियमों की अनदेखी करते हुए 'अकेले' ही रंजन ढींगरा की जगह विनय भाटिया को उक्त पद देने का फैसला कर बैठे ।
उम्मीद की गई थी कि रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय द्वारा नियमों की स्पष्ट व्याख्या कर देने के बाद संजीव राय मेहरा मनमानी करने की अपनी कोशिश को छोड़ देंगे, लेकिन आज किए गए अपने पहले ही कार्यक्रम में उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानून को धता बता दिया ।
इस मामले में और भी ज्यादा गंभीर बात यह हुई कि कायर्क्रम शुरू होने से पहले इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या की तरफ से मिले निर्देश को भी संजीव राय मेहरा ने मानने से इंकार कर दिया । उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही संजीव राय मेहरा के पास भरत पांड्या का संदेश आ गया था, जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में लिखा/कहा कि रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार, भावी गवर्नर्स - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी - की सहमति के बिना वह डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन की नियुक्ति नहीं कर सकते हैं; और उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रंजन ढींगरा ही डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन हैं । इसके बावजूद, संजीव राय मेहरा ने कार्यक्रम में विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के रूप में संबोधित किया । सभी के लिए हैरानी की बात यह है कि शेखर मेहता के लिए चुनौती पैदा करने, भरत पांड्या की खुल्लमखुल्ला बेइज्जती करने और रोटरी इंटरनेशनल का चीरहरण करने की हरकत पर संजीव राय मेहरा आखिर क्यों टिके हुए हैं, और इसके लिए उन्हें 'खाद-पानी' आखिर कहाँ से मिल रहा है, और कौन उन्हें यह सब करने के लिए उकसा रहा है ?
समझा जाता है और डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच चर्चा है कि बड़े पदाधिकारियों की बेइज्जती तथा रोटरी का चीरहरण करते हुए विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बनाने के पीछे दरअसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार चुनने हेतु बनने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की चुनावी राजनीति को साधने का उद्देश्य है । विनय भाटिया ने उक्त कमेटी के लिए अपनी उम्मीदवारी की तैयारी शुरू की हुई है ।उन्हें विनोद बंसल के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । माना/समझा जा रहा है कि विनोद बंसल किसी भी तरह से विनय भाटिया को नोमीनेटिंग कमेटी का चुनाव जितवाना चाहते हैं, ताकि नोमीनेटिंग कमेटी में विनय भाटिया उनके काम आ सकें । डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के रूप में विनय भाटिया को क्लब्स के पदाधिकारियों के संपर्क में रहने का मौका मिलेगा, और इस तरह उन्हें अपनी उम्मीदवारी के लिए कैम्पेन करने का मौका मिलेगा । विनोद बंसल और विनय भाटिया के साथ-साथ संजीव राय मेहरा पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं - लोगों को लगता है कि उनके बीच काम का लेना-देना भी हो सकता है, जिसके 'सहारे' संजीव राय मेहरा ने विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन 'बनाने' का जिम्मा ले लिया है - और रोटरी पर पेशा 'भारी' पड़ गया है । उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में, जोन 7 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में कैम्पेन होने/करने के आरोपों के चलते विजेता रवि वदलमानी से डायरेक्टर पद छिन गया है - उससे कोई सबक न लेकर विनोद बंसल को खुश करने/रखने के लिए विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बना कर रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों को बेइज्जत करने तथा रोटरी का चीरहरण करने का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा ने जो काम किया है, वह डिस्ट्रिक्ट और रोटरी में एक नए विवाद को जन्म देता हुआ लग रहा है ।

Tuesday, June 23, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में बड़ी और एकतरफा जीत पाने वाले सुधीर मंगला ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल के दिशा-निर्देशन में, अमित जैन को नहीं - वास्तव में, उनकी उम्मीदवारी का नामांकन वापस करवाने की कोशिश करने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन तथा अन्य पूर्व गवर्नर्स नेताओं को हराया है

नई दिल्ली । सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में अमित जैन के मुकाबले सुधीर मंगला का पलड़ा भारी तो पहले दिन से ही माना/पहचाना जा रहा था, लेकिन किसी को भी - खुद सुधीर मंगला और उनके समर्थकों को भी - सुधीर मंगला की इतनी बड़ी और एकतरफा जीत की उम्मीद नहीं थी । कुल 156 वोटों में से 119 वोट प्राप्त करके सुधीर मंगला ने जो छप्परफाड़ जीत हासिल की है, वह इसलिए और भी बड़ी जीत है - क्योंकि अमित जैन की उम्मीदवारी के पक्ष में गवर्नर्स की खासी बड़ी फौज समर्थन जुटाने के अभियान में लगी हुई थी । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए तैयारी कर रहे पूर्व गवर्नर विनोद बंसल ने अमित जैन की उम्मीदवारी की कमान संभाली हुई थी, और इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता के लिए विनोद बंसल के उम्मीदवार के उम्मीदवार के रूप में तैयारी कर रहे निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया ने अमित जैन को वोट दिलवाने का जिम्मा लिया हुआ था - और उन्हें रवि चौधरी सहित कुछेक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स के साथ-साथ मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा का सक्रिय समर्थन मिला हुआ था; इतने सारे नेता मिलकर अमित जैन को लेकिन कुल 37 वोट ही दिलवा सके । इस चुनाव में सबसे शर्मनाक भूमिका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन की देखी/सुनी गई । नामांकन वापसी के समय तक सुरेश भसीन ने सुधीर मंगला पर यह कहते हुए नाम वापस लेने के लिए खासा दबाव बनाया कि उनके जीतने की तो कोई उम्मीद नहीं है, इसलिए पराजय की शर्मिंदगी से बचने के लिए अच्छा होगा कि वह अपनी उम्मीदवारी छोड़ दें ।
सुधीर मंगला लेकिन सुरेश भसीन के किसी दबाव में नहीं आए । सुधीर मंगला को कुछेक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स का समर्थन था तो, लेकिन उनके समर्थन में कोई पूर्व गवर्नर सक्रिय नहीं दिख रहा था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल को जरूर उनके समर्थन में सक्रिय सुना जा रहा था । लेकिन अपने पद की गरिमा का ख्याल रखते हुए वह भी पर्दे के पीछे रहते हुए ही काम करते सुने जा रहे थे ।डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों को हालाँकि लगता है कि सुधीर मंगला की उम्मीदवारी की कमान अनूप मित्तल के हाथ में ही थी, और उन्होंने बड़ी होशियारी से सुधीर मंगला के लिए वोट जुटाने का काम किया । सीओएल प्रतिनिधि के चुनावी परिदृश्य में मजे की बात यह थी कि डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच - खासकर प्रेसीडेंट्स के बीच सुधीर मंगला की पहचान और सक्रियता ज्यादा थी, जबकि बड़े नेताओं और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के समर्थन के रूप में 'शोर' अमित जैन का ज्यादा था । ऐसे में अनूप मित्तल और सुधीर मंगला की जोड़ी ने चुपचाप तरीके से काम करने पर ध्यान केंद्रित किया और अपने संपर्कों व समर्थकों से व्यावहारिक काम लिया । अनूप मित्तल ने अपने खेमे के पूर्व गवर्नर्स की गरिमा को बनाये/बचाये रखते हुए उनके समर्थन तथा उनके संपर्कों का फायदा सुधीर मंगला को दिलवाया और साथ-साथ 'कमजोर जगहों' की पहचान करते हुए उन्हें मजबूती देने का काम सुधीर मंगला से करवाया । सुधीर मंगला की इस बड़ी और एकतरफा चुनावी जीत के पीछे अनूप मित्तल की सुनियोजित रणनीति को ही मुख्य रूप से जिम्मेदार माना/समझा जा रहा है ।
दरअसल अनूप मित्तल और सुधीर मंगला की जोड़ी ने पहले ही भाँप लिया था कि अमित जैन को चूँकि सक्रिय गवर्नर्स का समर्थन है, इसलिए 'शोर' उनका ही ज्यादा बनेगा/रहेगा । ऐसे में, अनूप मित्तल और सुधीर मंगला ने 'शोर' की पिच पर खेलने की बजाये एक अलग रणनीति बनाई और चुपचाप काम करने पर जोर दिया - जिसके तहत अनूप मित्तल ने पर्दे के पीछे से मोर्चा संभाला और सुधीर मंगला मैदान में डटे । इन्होंने बड़ी होशियारी से संपर्क, सक्रियता और पहचान के मामले में अमित जैन की कमजोरी को मुद्दा बनाया - अमित जैन के समर्थक नेता इस मुद्दे पर असहाय नजर आये । उन्हें लोगों की इस शिकायत का कोई जबाव ही नहीं सूझा कि अमित जैन तो डिस्ट्रिक्ट और रोटरी की गतिविधियों में कहीं नजर ही नहीं आते हैं, और कई प्रेसीडेंट्स तो अमित जैन को पहचानते भी नहीं हैं । अमित जैन और सुधीर मंगला के बायोडेटाज को देखने/पढ़ने वाले लोगों ने भी देखा/पाया और जाना/समझा कि अमित जैन के मुकाबले सुधीर मंगला की डिस्ट्रिक्ट और रोटरी में कहीं ज्यादा सक्रियता है, और सुधीर मंगला डिस्ट्रिक्ट के साथ-साथ जोन व इंटरनेशनल स्तर के आयोजनों में भी लगातार शामिल होते रहे हैं । अमित जैन के समर्थक नेता इस सच्चाई के सामने निरुत्तर ही रहे और सिर्फ इस बात की कोशिश करते रहे कि लोग उनके कहने से अमित जैन को वोट दे दें । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट तथा पूर्व गवर्नर्स नेताओं की भारी-भरकम फौज अपने कहने पर लेकिन अमित जैन को कुल 37 वोट ही दिलवा सकी । इसी आधार पर डिस्ट्रिक्ट के आम और खास लोगों का मानना और कहना है कि सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में सुधीर मंगला ने अमित जैन को नहीं - वास्तव में, उनकी उम्मीदवारी का नामांकन वापस करवाने की कोशिश करने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन तथा अन्य पूर्व गवर्नर्स नेताओं को हराया है ।

Thursday, May 28, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन पद पर अपनी मनमानी से नियुक्ति करने के मामले में रोटरी इंटरनेशनल के साऊथ एशिया ऑफिस से 'बड़े बेआबरू होकर निकले'

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा ने अपने गवर्नर-वर्ष में विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बनाने के लिए जो अभियान छेड़ा हुआ है, उसे रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस से तगड़ा झटका लगा है । साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों ने उन्हें दो-टूक शब्दों में बता दिया है कि रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार उक्त पद पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी की सहमति से ही कोई नियुक्ति हो सकती है । साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों ने हालाँकि उन्हें यह सुझाव देते हुए एक मौका दे दिया है कि इसके बावजूद वह जो करना चाहते हैं, उसके लिए वह इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या से बात कर लें । संजीव राय मेहरा अब इस कोशिश में जुटे हैं कि रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का मजाक बनाने वाले अपने फैसले को हरी झंडी देने के लिए वह कैसे भरत पांड्या को राजी कर लें । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 3011 में गवर्नर, गवर्नर इलेक्ट तथा गवर्नर नॉमिनी की सहमति से डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद पर इस वर्ष रंजन ढींगरा की नियुक्ति हुई थी । रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के तहत यह नियुक्ति तीन वर्षों के लिए होती है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में संजीव राय मेहरा ने भी रंजन ढींगरा के नाम पर अपनी सहमति दी थी । दस महीने बीतने के बाद संजीव राय मेहरा को 'ज्ञान' प्राप्त हुआ कि उक्त पद पर रंजन ढींगरा की नियुक्ति गलत हो गई है । कुछेक आरोप, जिनमें कुछ मनगढंत हैं और कुछ बाल की खाल निकालने वाली प्रकृति के हैं, लगाते हुए संजीव राय मेहरा ने घोषणा कर दी कि अपने गवर्नर वर्ष में डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद पर वह रंजन ढींगरा को हटा कर विनय भाटिया को नियुक्त कर रहे हैं ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल ने उनके फैसले का विरोध किया । अनूप मित्तल का कहना रहा कि संजीव राय मेहरा जो कर रहे हैं, वह रोटरी इंटरेनशनल के नियमों का सरासर उल्लंघन है, और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए । अनूप मित्तल का सुझाव रहा कि संजीव राय मेहरा डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद की नियुक्ति में यदि कोई बदलाव करना चाहते हैं, तो उन्हें रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का पालन करते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के साथ विचार विमर्श करना चाहिए । संजीव राय मेहरा लेकिन अपनी जिद पर अड़े रहे और यह 'दिखाते' रहे तथा घोषणा कर बैठे कि डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन की नई नियुक्ति वह अकेले ही करेंगे और उन्हें किसी से पूछने/बताने की जरूरत नहीं है । इस मामले में संजीव राय मेहरा ने रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थिति साऊथ एशिया ऑफिस से मिले दिशा-निर्देशों को भी स्वीकार करने से इंकार कर दिया । इसके बाद, मामला गंभीर हो गया और साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों को उन्हें स्पष्ट रूप से बताना पड़ा कि रोटरी इंटरनेशनल के नियम उन्हें अकेले वह करने की अनुमति नहीं देते हैं, जो डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन की नई नियुक्ति के मामले में वह कर रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में हर किसी को हैरानी है कि संजीव राय मेहरा रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का मजाक बनाने तथा ऐसा करते हुए रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थिति साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों से भी टकराने का काम वह आखिर किसकी शह पर कर रहे हैं ? डिस्ट्रिक्ट में अधिकतर लोग संजीव राय मेहरा के इस मनमाने कार्यक्रम को विनोद बंसल द्वारा स्पॉन्सर्ड कार्यक्रम के रूप में देख/पहचान रहे हैं, और इसे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई के शुरुआती अध्याय के रूप में पढ़/समझ रहे हैं ।
उल्लेखनीय है कि रंजन ढींगरा और विनोद बंसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार के रूप में तैयारी करते सुने जा रहे हैं । विनोद बंसल को पिछले दिनों डिस्ट्रिक्ट के महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट रोटरी ब्लड बैंक के प्रेसीडेंट पद से जिस तरह जबर्दस्ती हटाया गया है, उससे विनोद बंसल की भारी फजीहत हुई है और डिस्ट्रिक्ट में उन्हें पूरी तरह अलग-थलग पड़ा देखा/पहचाना गया है; दूसरी तरफ रोटरी इंडिया वाटर मिशन के मुखिया के तौर पर रंजन ढींगरा को अपने डिस्ट्रिक्ट के साथ-साथ दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में भी खासी तवज्जो मिलती दिख रही है । इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी ने कोच्ची इंस्टीट्यूट के कन्वेनर के रूप में रंजन ढींगरा को इंस्टीट्यूट के ट्रेजरर पद की जिम्मेदारी दी है । यह जिक्र आ ही चुका है कि डिस्ट्रिक्ट के तीन वर्षों के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने आपसी सहमति से रंजन ढींगरा को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन चुना है । इन उपलब्धियों के साथ, रंजन ढींगरा रोटरी समुदाय में अपनी बड़ी पहचान और स्वीकार्यता बनाते नजर आ रहे हैं, तथा विनोद बंसल खुद को उनके मुकाबले बुरी तरह पिछड़ता देख रहे हैं । दुनिया और समाज में यह एक आम समझ है कि जब कोई अपने आप को 'बड़ा' नहीं बना पाता है, तो वह अपने प्रतिद्धंद्धी को नीचे गिराने की कोशिशें शुरू कर देता है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लग रहा है कि रंजन ढींगरा को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद से हटवाने की कार्रवाई के रूप में संजीव राय मेहरा के जरिये विनोद बंसल ने वही खेल शुरू किया है । विनोद बंसल और संजीव राय मेहरा चार्टर्ड एकाउंटेंट्स हैं; आरोपपूर्ण चर्चाएँ हैं कि विनोद बंसल से प्रोफेशनल फायदे लेने की उम्मीद में संजीव राय मेहरा उनके खेल का हिस्सा बन गए हैं, और इसके लिए रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का मजाक बनाने की हद तक जा पहुँचे हैं । बताते चलें कि रंजन ढींगरा की जगह जिन विनय भाटिया को दिलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं, वह विनय भाटिया इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता के लिए विनोद बंसल के उम्मीदवार के रूप में तैयारी कर रहे हैं । विनोद बंसल को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बन जाने पर विनय भाटिया की उक्त उम्मीदवारी को फायदा मिलेगा ।
रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस से विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन का पद दिलवाने की कोशिश को भले ही झटका लगा हो, लेकिन विनोद बंसल ने संजीव राय मेहरा तथा विनय भाटिया को आश्वस्त किया है कि उक्त मामले में भले ही रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का उल्लंघन हो रहा हो, किंतु वह भरत पांड्या से संजीव राय मेहरा के फैसले को हरी झंडी दिलवा देंगे । 

Monday, March 23, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी से पीछा छुड़ा कर और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा के सहयोग/समर्थन के बल पर अशोक कंतूर ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जीता

नई दिल्ली । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल और रवि चौधरी पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अशोक कंतूर को जितवाने के लिए लगे थे, लेकिन चुनाव अशोक कंतूर की बजाये अनूप मित्तल जीत गए थे; इस वर्ष वह दोनों अजीत जालान को जितवाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन चुनाव अजीत जालान की बजाये अशोक कंतूर जीत गए हैं । इस तरह अशोक कंतूर की पिछले वर्ष की हार और इस वर्ष की जीत विनोद बंसल और रवि चौधरी के लिए किरकिरी करवाने वाली साबित हुई है । रवि चौधरी ने हालाँकि बीच बीच में कुछेक बार अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के समर्थन में आने की कोशिश की थी, लेकिन अशोक कंतूर ने खासी सतर्कता रखते हुए उन्हें अपनी उम्मीदवारी के पास फटकने नहीं दिया - दरअसल वह जान/समझ रहे थे कि रवि चौधरी यदि उनकी उम्मीदवारी के साथ जुड़े, तो उनकी चुनावी नैय्या शर्तिया डूब ही जाएगी । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष की चुनावी हार के लिए अशोक कंतूर ने रवि चौधरी को ही जिम्मेदार ठहराया था, और कहा/बताया था कि रवि चौधरी की बदनामी उनकी उम्मीदवारी पर भारी साबित हुई । अशोक कंतूर ने जान/समझ लिया था कि वह रवि चौधरी की छाया यदि मुक्त नहीं हुए, तो कभी गवर्नर नहीं बन पायेंगे; और इसलिए अपनी उम्मीदवारी को दोबारा से प्रस्तुत करने से पहले उन्होंने रवि चौधरी को क्लब से निकलवाने की 'व्यवस्था' की और रवि चौधरी को एक दूसरे क्लब में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा । रवि चौधरी ने इस वर्ष अजीत जालान की उम्मीदवारी का झंडा उठाया । अजीत जालान को बहुत लोगों ने समझाया कि रवि चौधरी से यदि उन्होंने दूरी नहीं बनाई, तो चुनाव में अपनी हार पक्की ही समझो । अजीत जालान ने किसी की नहीं सुनी, और नतीजा उनकी हार के रूप में सामने आया है ।
अजीत जालान को पहली वरीयता में तो कम वोट मिले ही, दूसरी वरीयता के 31 वोटों में से भी कुल 2 वोट ही मिले, जिसके कारण उनकी हार का अंतर 50 से भी अधिक वोटों का हो गया । दूसरी वरीयता के वोटों के मामले में अजीत जालान को वोटों का जो टोटा पड़ा, उसे रवि चौधरी की बदनामी से जोड़ कर देखा/पहचाना जा रहा है । अजीत जालान के कुछेक नजदीकियों का ही कहना है कि अजीत जालान की उम्मीदवारी के लिए की गई विनोद बंसल की मेहनत पर रवि चौधरी की बदनामी ने पानी फेर दिया है । इनका यह भी मानना और कहना है कि अजीत जालान की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में विनोद बंसल का देर से सक्रिय होना भी अजीत जालान की हार का एक प्रमुख कारण है - इनका विश्वास है कि विनोद बंसल यदि और पहले सक्रिय होते, तो अजीत जालान की उम्मीदवारी को और वोट मिल सकते थे और शायद वह चुनाव जीत ही जाते । अजीत जालान के नजदीकियों को लगता है कि विनोद बंसल ने वोटिंग शुरू होने तक अजीत जालान की उम्मीदवारी का समर्थन करने से 'छिपने' की, और अजीत जालान की उम्मीदवारी की कमान रवि चौधरी को सौंपे रखने की जो रणनीति बनाई - उसने उल्टा असर किया; दरअसल रवि चौधरी के अजीत जालान के समर्थन में सक्रिय दिखने से अजीत जालान की उम्मीदवारी का जो कबाड़ा हुआ, विनोद बंसल ने बाद में उसे संभालने की कोशिश तो बहुत की, लेकिन वह बहुत संभाल नहीं सके । विनोद बंसल का अपने क्लब का वोट आखिर में डलवाने का फैसला भी अजीत जालान की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने वाला रहा । अजीत जालान के कुछेक समर्थकों का ही मानना/कहना है कि विनोद बंसल के 'फैसले' से कई क्लब्स के पदाधिकारियों के बीच अजीत जालान को वोट देने का विश्वास नहीं बन पाया । इन्हें लगता है कि विनोद बंसल यदि अपने क्लब का वोट पहले डलवा देते, तो अजीत जालान को और कुछेक क्लब्स के वोट भी मिल सकते थे ।
इस वर्ष के चुनावी नतीजे में सबसे तगड़ा झटका महेश त्रिखा को लगा है - उन्हें नंबर एक या नंबर दो पर देखा/पहचाना जा रहा था, लेकिन चुनावी नतीजे में वह तीसरे नंबर पर पाए गए । उन्हें वोट देने वालों ने दूसरी वरीयता के लिए जिस थोक भाव में अशोक कंतूर को चुना, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि अशोक कंतूर ने उनके समर्थन-आधार में अच्छी सेंध लगाई है । अशोक कंतूर ने यह सेंध डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा के सहयोग से लगाई । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में आने वाले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के समर्थन की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है; असल में उसके पास अपनी डिस्ट्रिक्ट टीम के पदों का जखीरा होता है - जिसे 'दिखा' कर वह अपने उम्मीदवार के लिए वोट जुटाने की हैसियत रखता है । संजीव राय मेहरा ने इस वर्ष के कुछेक प्रेसीडेंट्स को जिस तरह से अपनी टीम का सदस्य बनाया है, उसे देख/जान कर ही समझ लिया गया कि यह सब उन्होंने अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के लिए वोट जुटाने के लिए किया है । संजीव राय मेहरा की तरकीब काम कर गई, और अशोक कंतूर को उसका अच्छा फायदा मिला । पिछले वर्ष की चुनावी हार से मिले सबक से अशोक कंतूर ने इस वर्ष की अपनी चुनावी तैयारी को अच्छे से संयोजित भी किया, और वह पूरे चुनाव-अभियान के दौरान कभी भी ओवर-कॉन्फीडेंट होते हुए नजर नहीं आए । चुनाव अभियान के दौरान 'बनने' वाले हर प्रतिकूल मौके को अनुकूल बनाने के लिए उन्हें प्रयास किए और इस वर्ष वह पिछले वर्ष जैसी गलतियाँ करने से बचते हुए दिखे - और इसी का नतीजा रहा कि वह 50 से अधिक वोटों से विजयी हुए हैं । 

Monday, February 24, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में महेश त्रिखा की उम्मीदवारी को मिलते दिख रहे व्यापक समर्थन का मुकाबला करने के लिए अशोक कंतूर को नाराज चल रहे रवि चौधरी को मनाने तथा उन्हें अजीत जालान के समर्थन से दूर हटाने की जरूरत महसूस हो रही है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए वोटिंग शुरू होने के दिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा द्वारा एजीटीएस (असिस्टेंट गवर्नर्स ट्रेनिंग सेमीनार) करने का संज्ञान लेते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन ने वोटिंग शुरू करने की तारीख दो/एक दिन आगे बढ़ाने के लिए कार्रवाई शुरू की है, जिसके चलते खामःखाँ पैदा हुए विवाद का अंत होता हुआ दिख रहा है । इसके लिए हर कोई सुरेश भसीन की तारीफ कर रहा है; लोगों को लग रहा है कि नाहक ही पैदा हुए एक विवाद को सुरेश भसीन ने अपनी सूझबूझ से बहुत आराम से खत्म करवाने के लिए कदम उठाया है । उल्लेखनीय है कि एक तरफ तो घोषित कार्यक्रम के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए भारतीय समयानुसार 29 फरवरी की देर रात से वोटिंग लाइन खुलना हैं; और दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा ने 29 फरवरी व एक मार्च को एजीटीएस करने का रेसीडेंशियल प्रोग्राम बना लिया है, जिसमें कई मौजूदा प्रेसीडेंट्स को विभिन्न भूमिकाएँ देते हुए आमंत्रित किया गया है । संजीव राय मेहरा को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जाता है - इसलिए आरोप लगे कि संजीव राय मेहरा 29 फरवरी की रात को, एजीटीएस में इकट्ठा हुए प्रेसीडेंट्स से अपने सामने अशोक कंतूर के पक्ष में वोट डलवायेंगे । आरोप की शक्ल में विवाद बढ़ता दिखा, तो सुरेश भसीन ने हस्तक्षेप किया और कहा कि वह वोटिंग लाइन खुलने की तारीख दो/एक दिन आगे बढ़वाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करते हैं । उनके इस ऐलान से उक्त विवाद शांत हुआ है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव से जुड़ा एक विवाद तो शांत हो गया है, लेकिन अजीत जालान और उनके साथी एक दूसरे विवाद को जिंदा रखने के प्रयासों में लगे हुए हैं । उल्लेखनीय है कि अजीत जालान और उनके साथी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में उस समय भड़क उठे थे, जब लोगों के बीच उन्होंने चर्चा सुनी कि अजीत जालान को तो कुल दस/पंद्रह वोट ही मिल सकेंगे और वह नाहक ही उम्मीदवार बने हुए हैं । यह चर्चा सुन कर अजीत जालान और उनके साथियों ने आरोप लगाया कि प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार और उनके समर्थक इस तरह का नकारात्मक प्रचार करके उनकी चुनावी संभावना को खत्म करने का काम कर रहे हैं । उनके इस आरोप को उनका रोना-धोना बताते हुए कई एक लोगों ने उन्हें सलाह भी दी कि चुनाव से पहले हर कोई अपना अपना आकलन पेश करता ही है, इसमें आरोप वाली बात भला क्या है ? कई लोगों ने अजीत जालान और उनके साथियों को समझाया कि रोने-धोने की बजाये, अपनी चुनावी संभावना को मजबूत करने के लिए उन्हें दावा करना चाहिए कि अजीत जालान को तो 150 वोट मिल रहे हैं । अजीत जालान और उनके साथी लेकिन लगातार यही रोना रोये जा रहे हैं कि उन्हें दस/पंद्रह ही वोट मिलने की बात कह कर कुछेक लोग उनकी चुनावी जीत की संभावना को खत्म करने का षड्यंत्र कर हैं । अजीत जालान के नजदीकियों को ही कहना/बताना है कि अजीत जालान जीतने के लिए उम्मीदवार नहीं बने हुए हैं; असल में वह भी जान/समझ रहे हैं कि इस बार वह नहीं जीत रहे हैं - इसके बावजूद वह उम्मीदवार बने हुए हैं और समर्थन जुटाने के लिए प्रयास कर रहे हैं तो इसलिए ताकी अगले रोटरी वर्ष में उनकी उम्मीदवारी को प्रभावी तरीके से समर्थन मिल सके ।
उल्लेखनीय है कि अगले रोटरी वर्ष की उम्मीदवारी के लिए कई उम्मीदवारों ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है, जिसे देखते हुए अजीत जालान को लगता है कि इस बार के चुनाव में पिछड़ने/हारने के बाद भी उन्हें यदि अच्छे वोट मिल जाते हैं, तो अगली बार के लिए उनका दावा मजबूत हो जायेगा । अजीत जालान और उनके साथियों को डर है कि उन्हें मिलने वाले वोटों की संख्या यदि सचमुच दस/पंद्रह ही रह गई, तो अगले रोटरी वर्ष में भी उनकी उम्मीदवारी को कोई गंभीरता से नहीं लेगा । इसलिए वह दस/पंद्रह वोट मिलने की बात से भड़के हुए हैं । इस मामले में रोना/धोना मचाये रख कर अजीत जालान और उनके साथी अपने वोटों की संख्या को थोड़ा बढ़ा लेना चाहते हैं । उनकी इस कोशिश ने अशोक कंतूर और उनके साथियों को डराया हुआ है । दरअसल अशोक कंतूर और उनके साथियों को लगता है कि अजीत जालान को जो भी वोट मिलेंगे, वह वास्तव में उनके वोटों की संख्या को ही घटाने का काम करेंगे । उल्लेखनीय है कि पिछले रोटरी वर्ष में अशोक कंतूर और अजीत जालान एक साथ थे, लेकिन तब भी अशोक कंतूर जीतने के लिए जरूरी वोट प्राप्त नहीं कर सके थे । इस बार अजीत जालान जब खुद भी उम्मीदवार बन बैठे हैं, तब स्वाभाविक रूप से अशोक कंतूर के लिए जीतने के लिए जरूरी वोट पाना और मुश्किल बन गया दिख रहा है । इस मुश्किल को हल करने के लिए अशोक कंतूर की तरफ से पूर्व गवर्नर रवि चौधरी का समर्थन फिर से प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है । अशोक कंतूर की तरफ से कोशिश की जा रही है कि रवि चौधरी का समर्थन भले ही उन्हें न मिले, लेकिन रवि चौधरी - अजीत जालान को वोट दिलवाने की कोशिश करते हुए भी न दिखें । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रवि चौधरी जिस तरह से गायब रहे और अजीत जालान अकेले ही अपनी उम्मीदवारी के अभियान में जुटे नजर आए - उसे अशोक कंतूर ने रवि चौधरी की मदद के रूप में ही देखा/पहचाना है । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में तीनों उम्मीदवारों के 'प्रदर्शन' में महेश त्रिखा की प्रस्तुति को जिस तरह से व्यापक सराहना मिली और उनके क्लब के सदस्य - दोनों पूर्व गवर्नर्स सुरेश जैन तथा संजय खन्ना सहित - बड़ी संख्या में उनकी उम्मीदवारी के प्रति समर्थन दिखाते हुए नजर आये - उसके चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में महेश त्रिखा को एक अच्छी पोजीशन मिलती हुई लगी है । ऐसे में, अशोक कंतूर के शुभचिंतकों ने भी कहना शुरू कर दिया है कि अजीत जालान ने वोट जुटाने के अपने प्रयासों को यदि जारी रखा, तो अशोक कंतूर के लिए महेश त्रिखा की उम्मीदवारी का मुकाबला करना मुश्किल ही होगा ।

Saturday, January 11, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में महेश त्रिखा की डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच बनी पहचान व प्रतिष्ठा को देखते हुए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी ने अशोक कंतूर की उम्मीदवारी की तरफ मुड़ने का संकेत देकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अजीत जालान की उम्मीदवारी के लिए संकट खड़ा किया 

नई दिल्ली । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए एक बार फिर अशोक कंतूर की उम्मीदवारी का झंडा उठाने की तैयारी करते दिख रहे हैं । उनके नजदीकियों का कहना है कि अशोक कंतूर ने रवि चौधरी से माफी माँग कर उनका समर्थन लेने/पाने का प्रयास किया है, जिस पर रवि चौधरी ने सकारात्मक रवैया दिखाया है । रवि चौधरी के बदले रवैये पर अजीत जालान ने अपने नजदीकियों के बीच चिंता जताई है । दरअसल रवि चौधरी अभी तक अजीत जालान की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशें करते देखे/सुने गए हैं । अजीत जालान के लिए चिंता की बात यह है कि रवि चौधरी ने यदि उन्हें छोड़ दिया, तो उनकी उम्मीदवारी की वकालत करने वाला कोई नहीं रह जायेगा । अजीत जालान पूर्व गवर्नर विनोद बंसल से मिले धोखे से उबरने की कोशिश अभी कर ही रहे थे, कि रवि चौधरी उन्हें झटका देते हुए दिख रहे हैं । अजीत जालान के लिए फजीहत की बात यह हुई है कि यूँ तो उन्हें विनोद बंसल के 'आदमी' के रूप में देखा/पहचाना जाता है, और वह खुद ही लोगों को कहते/बताते रहे हैं कि वह तो विनोद बंसल के ही कहने पर उम्मीदवार बने हैं - लेकिन अब विनोद बंसल ही उनकी उम्मीदवारी में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं । अजीत जालान ने अपने नजदीकियों को बताया है कि विनोद बंसल ने उन्हें आश्वस्त किया है कि उनके पास डिस्ट्रिक्ट में जो छह/आठ वोट हैं, वह उन्हें दिलवा देंगे - लेकिन उनके पक्ष में खुलकर कोई काम नहीं करेंगे । विनोद बंसल ने अजीत जालान को उम्मीदवार तो बना/बनवा दिया, लेकिन फिर उन्हें इस बार डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में तटस्थ 'दिखने' की जरूरत महसूस हुई और उन्होंने अपने आप को पीछे कर लिया । विनोद बंसल से मिले झटके के बाद अजीत जालान को रवि चौधरी का समर्थन मिला, तो अजीत जालान के चुनावी अभियान में कुछ जान पड़ी । लेकिन अब जब रवि चौधरी भी उनको छोड़ कर अशोक कंतूर के साथ जाने की तैयारी करते देखे जा रहे हैं, तो अजीत जालान को अपनी उम्मीदवारी का अभियान मुसीबत में फँसता/पड़ता नजर आ रहा है ।
रवि चौधरी के नजदीकियों का कहना/बताना है कि रवि चौधरी को दरअसल यह समझ में आ गया है कि वह अजीत जालान के लिए चाहें जितना/जो कर लें, उनकी उम्मीदवारी के लिए कोई माहौल नहीं बना सकते हैं; उन्होंने पाया है कि डिस्ट्रिक्ट में कोई भी अजीत जालान की उम्मीदवारी को गंभीरता से नहीं ले रहा है । इसके अलावा, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा तथा निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया के अशोक कंतूर के समर्थन में होने का दबाव भी रवि चौधरी पर है । रवि चौधरी के रवैये को बदलने का सबसे बड़ा कारण लेकिन अशोक कंतूर के रवि चौधरी के साथ अपने बिगड़े संबंधों को सुधारने के प्रयास रहे हैं । उल्लेखनीय है कि पिछले रोटरी वर्ष में अपनी पराजय के लिए अशोक कंतूर ने रवि चौधरी को जिम्मेदार ठहराया था; और कई मौकों पर कहा था कि रवि चौधरी की नॉनसेंस हरकतों तथा उनकी बदनामी के कारण वह चुनाव हार गए । बाद में जब रवि चौधरी को क्लब से निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा, तब भी यही चर्चा रही कि अशोक कंतूर ने इस वर्ष की अपनी उम्मीदवारी को रवि चौधरी की छाया से बचाने के लिए उन्हें क्लब से निकलवा दिया है । रवि चौधरी के नजदीकियों का कहना है कि लेकिन अब अशोक कंतूर ने रवि चौधरी से अपने कहे/किए की माफी माँग ली है, जिसके बाद रवि चौधरी ने अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के लिए काम करने की तैयारी शुरू कर दी है । अशोक कंतूर के नजदीकियों का कहना है कि पिछले वर्ष उन्होंने अपनी उम्मीदवारी की कमान पूरी तरह रवि चौधरी को सौंप दी थी, जिसके कारण रवि चौधरी की बदनामी अशोक कंतूर की उम्मीदवारी को ले डूबी थी । अशोक कंतूर ने लेकिन अब इस बात को समझ लिया है कि उन्हें रवि चौधरी की 'नॉनसेंस वैल्यू' का कैसे फायदा उठाना है । वह समझ गए हैं कि चुनावी राजनीति में 'नॉनसेंस' की भी एक 'वैल्यू' तो होती ही है, पिछले वर्ष लेकिन इस 'वैल्यू' पर पूरी तरह निर्भर हो जाने कारण उनकी लुटिया डूब गई थी । इसलिए अशोक कंतूर इस बार रवि चौधरी की मदद तो लेंगे, लेकिन अपनी उम्मीदवारी की कमान पूरी तरह उन्हें नहीं सौपेंगे ।
रवि चौधरी भी इस बात को समझ तो रहे हैं, लेकिन वह इस बात को ज्यादा अहमियत नहीं दे रहे हैं । रवि चौधरी का इस वर्ष का एजेंडा दरअसल यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में वह महेश त्रिखा को जीतने नहीं देना चाहते हैं । उन्होंने हाल ही दिनों में यह कहना भी शुरू किया है कि वह अजीत जालान व अशोक कंतूर में से उस उम्मीदवार को समर्थन देंगे, जो महेश त्रिखा को हराता हुआ दिखेगा । वास्तव में उनकी इस बात में ही, लोगों ने उन्हें अशोक कंतूर की तरफ लौटने की तैयारी करते हुए 'देखा' है । दरअसल, कई पूर्व गवर्नर्स के समर्थन तथा निरंतर सक्रियता के बल पर महेश त्रिखा ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच जो पैठ बनाई है, उसे देखते/पहचानते हुए रवि चौधरी को विश्वास हो चला है कि अजीत जालान के लिए तो महेश त्रिखा को हरा पाना मुश्किल ही नहीं, बल्कि असंभव ही है । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता ने दिल्ली में हुए अपने सम्मान समारोह में रोटरी के लिट्रेसी प्रोग्राम में महेश त्रिखा की निरंतर संलग्नता की जैसी प्रशंसा की, उसके बाद तो महेश त्रिखा की पहचान व साख लोगों के बीच और बढ़ गई है । लोगों ने इस बात को बड़ी तारीफ के योग्य माना/पाया है कि महेश त्रिखा के रूप में उनके बीच एक ऐसा रोटेरियन भी है, जो बिना ढिंढोरा पीटे पिछले कई वर्षों से लगातार रोटरी का काम करता आ रहा है । अधिकतर लोगों ने स्वीकार किया कि शेखर मेहता अपने भाषण में यदि महेश त्रिखा के काम का उल्लेख नहीं करते तो उन्हें तो इस बारे में पता ही नहीं चलता । शेखर मेहता से मिली प्रशंसा के बाद महेश त्रिखा की डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच बनी प्रतिष्ठा को देखते हुए रवि चौधरी को उन्हें हरा पाना और मुश्किल लगने लगा है । इस बात का तो उन्हें पक्का यकीन हो गया है कि अजीत जालान के भरोसे तो वह महेश त्रिखा को नहीं ही हरा सकेंगे । इसीलिए वह अब अशोक कंतूर की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए तैयार होते नजर आ रहे हैं । विनोद बंसल के बाद अब रवि चौधरी की तरफ से भी मिलने जा रहे इस झटके ने अजीत जालान की उम्मीदवारी के लिए संकट खड़ा कर दिया है । 

Sunday, October 13, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में शेखर मेहता के स्वागत-समारोह की बागडोर थामने की विनोद बंसल की कोशिशों को सुरेश भसीन के रवैये से जो झटका लगा है, उसमें विनोद बंसल को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी का अभियान मुश्किल में फँसता दिख रहा है

नई दिल्ली । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में शेखर मेहता के दिल्ली में होने वाले स्वागत-समारोह के मुखिया बनने की विनोद बंसल की कोशिशों को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन ने तगड़ा झटका दिया है । विनोद बंसल के लिए इससे भी ज्यादा बुरी बात यह हुई है कि सुरेश भसीन ने शेखर मेहता के स्वागत समारोह की कमान रंजन ढींगरा के हाथों में सौंप दी है । शेखर मेहता के स्वागत समारोह की कमान अपने हाथ में रख कर विनोद बंसल दरअसल शेखर मेहता को यह दिखाना/जताना चाहते हैं कि अपने डिस्ट्रिक्ट में उनकी खूब चलती है । विनोद बंसल को लगता है कि शेखर मेहता यह देखेंगे, तो इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए तैयार हो जायेंगे - और शेखर मेहता के समर्थन का जुगाड़ करके वह इंटरनेशनल डायरेक्टर बन जायेंगे । लेकिन सुरेश भसीन उनकी इस जुगाड़बाजी में बाधा बनते नजर आ रहे हैं । शेखर मेहता के स्वागत-समारोह की तैयारी के लिए वह पूरी तरह रंजन ढींगरा पर निर्भर कर रहे हैं, और उन्हीं से विचार-विमर्श कर रहे हैं । विनोद बंसल ने उक्त तैयारी में जब भी जबरन 'घुसने' की कोशिश की, तो सुरेश भसीन ने दो-टूक तरीके से उन्हें बता दिया कि 'यह' रंजन ढींगरा देख/कर लेंगे । विनोद बंसल ने दो एक बार शेखर मेहता का नाम लेकर सुरेश भसीन को दबाव में लेने की कोशिश की, लेकिन सुरेश भसीन ने यह कहते हुए उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया कि वह और/या रंजन ढींगरा - शेखर मेहता से बात कर लेंगे ।           
विनोद बंसल ने शेखर मेहता के स्वागत-समारोह की तैयारी में प्रमुख भूमिका पाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल की मदद लेने का प्रयास भी किया, लेकिन सुरेश भसीन की तगड़ी घेराबंदी के चलते उनका यह प्रयास भी सफल नहीं हो सका है । सुरेश भसीन के इस रवैये से विनोद बंसल को यह चिंता हो चली है कि शेखर मेहता के स्वागत-समारोह में उनकी कोई भूमिका यदि नहीं बनी/दिखी तो इसका शेखर मेहता तथा उनके नजदीकियों पर बहुत ही खराब असर पड़ेगा और इससे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उनकी उम्मीदवारी का अभियान मुश्किल में फँसेगा । विनोद बंसल दरअसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की अपनी उम्मीदवारी के लिए पूरी तरह शेखर मेहता पर निर्भर कर रहे हैं; ऐसे में उन्हें आशंका हो चली है कि शेखर मेहता जब देखेंगे कि उनकी अपने डिस्ट्रिक्ट में ही नहीं चल रही है तथा डिस्ट्रिक्ट के गवर्नर्स उन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं - तब फिर शेखर मेहता भी उनकी उम्मीदवारी में दिलचस्पी लेने से बचेंगे । विनोद बंसल को लग रहा है कि इससे शेखर मेहता के भरोसे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने की उनकी प्लानिंग फेल ही हो जाएगी ।
विनोद बंसल को डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में तथा प्रशासनिक व्यवस्था में पिछले करीब एक वर्ष से झटके पर झटके लग रहे हैं । पिछले रोटरी वर्ष में अनूप मित्तल व अशोक कंतूर के बीच हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में विनोद बंसल जिन अशोक कंतूर की उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे थे; उन अशोक कंतूर की हार तथा अनूप मित्तल की जीत से विनोद बंसल को तगड़ा झटका लगा था । मौजूदा रोटरी वर्ष में विनोद बंसल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए जिन अजीत जालान की उम्मीदवारी को हवा दी हुई है, उनकी स्थिति कमजोर तो चल ही रही है - उन पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन के गंभीर आरोप भी लग रहे हैं, और डिस्ट्रिक्ट में चर्चा है कि अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से उनके द्वारा किए गए कुछेक 'कामों' की रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत करने की तैयारी की जा रही है । उल्लेखनीय है कि विनोद बंसल पहले भी, केआर रविंद्रन के प्रेसीडेंट-वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पक्षपातपूर्ण भूमिका निभाने के लिए रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड से फटकार खा चुके हैं । इस सब के बीच सुरेश भसीन का रवैया उनके लिए मुसीबत भरा बना हुआ है । अभी पिछले दिनों ही रोटरी कैंसर फाउंडेशन के मुखिया पद से अजय नारायण को हटाने की सुरेश भसीन की कार्रवाई का विनोद बंसल ने विरोध करते हुए अजय नारायण को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन सुरेश भसीन के कड़े रवैये को देखते विनोद बंसल को फिर चुप रह जाने के लिए मजबूर होना पड़ा । शेखर मेहता के स्वागत-समारोह की तैयारी की बागडोर थामने की कोशिश करते हुए विनोद बंसल ने सुरेश भसीन को यह भरोसा भी दिया कि समारोह के खर्च की व्यवस्था वह कर लेंगे, और डिस्ट्रिक्ट एकाउंट से कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा; सुरेश भसीन ने लेकिन फिर भी स्वागत-समारोह की कमान उन्हें सौंपने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है । विनोद बंसल ने हालाँकि अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी है, और वह लगातार प्रयास में हैं कि अपने डिस्ट्रिक्ट में होने वाले शेखर मेहता के स्वागत-समारोह में उन्हें कोई ऐसी भूमिका मिल जाए, जिसके जरिये वह अपने डिस्ट्रिक्ट में अपनी महत्ता दिखा सकें ।  

Monday, September 16, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अशोक कंतूर की डिस्ट्रिक्ट को 'बंद' करवा देने की धमकी, अजीत जालान की 'बनिया कार्ड' की राजनीति तथा महेश त्रिखा की निश्चिंतता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति के सीन को सी-ग्रेड हिंदी फिल्म के नाटक जैसा बना दिया है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव दूसरे वर्ष भी हारने की स्थिति में डिस्ट्रिक्ट 'बंद' करवा देने की अशोक कंतूर की धमकी तथा बनिया प्रेसीडेंट्स के भरोसे चुनाव जीतने की अजीत जालान की घोषणा ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में खासा ड्रामा पैदा कर दिया है । तीसरी तरफ महेश त्रिखा को उम्मीद है कि इन दोनों की आपसी लड़ाई उन्हें आसानी से जीत दिलवा देगी । इस तरह, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनावी परिदृश्य किसी सी-ग्रेड हिंदी फिल्म का सा आभास देता हुआ लग रहा है; जिसमें रोना-धोना है, साजिशें हैं, धमकियाँ हैं, चलताऊ किस्म के हथकंडे हैं, अच्छे-अच्छे सपने हैं - यानि फूहड़ किस्म के मनोरंजन का पूरा पूरा सामान है । सबसे धमाकेदार घोषणा अशोक कंतूर ने की हुई है । कुछेक लोगों से उन्होंने साफ कहा है कि इस बार भी वह यदि चुनाव नहीं जीते, तो डिस्ट्रिक्ट में हो रही गड़बड़ियों व बेईमानियों की वह पोल खोलेंगे और जिसके चलते हो सकता है कि रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट को नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस में ही डाल दे । अशोक कंतूर दरअसल उन पूर्व गवर्नर्स नेताओं से बहुत खफा हैं, जो पिछले वर्ष तो उनकी उम्मीदवारी के समर्थन में थे, लेकिन इस वर्ष उनकी उम्मीदवारी में  दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं ।अशोक कंतूर का कहना है कि उनके पास सभी गवर्नर्स की कारस्तानियों का कच्चा-चिट्ठा है, और यदि गवर्नर्स का समर्थन न मिलने के कारण वह चुनाव हारे - तो वह सभी की शिकायत रोटरी इंटरनेशनल में करेंगे । उनका कहना है कि उनके पास गड़बड़ियों व बेईमानियों के जो तथ्य हैं, वह इतने गंभीर हैं कि उन्हें देख/जान कर रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट को सस्पेंड भी कर सकता है ।
अजीत जालान ने अपनी जीत का जो फार्मूला लोगों को बताया है, वह भी लोगों का खासा मनोरंजन कर रहा है । उनका कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में करीब सत्तर प्रतिशत क्लब्स के प्रेसीडेंट बनिए हैं, इनमें से यदि कुछेक ने उन्हें धोखा दिया भी तो भी उन्हें इतने प्रेसीडेंट्स तो वोट दे ही देंगे जो उनकी जीत को सुनिश्चित करेंगे । अजीत जालान का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में हर कोई जानता है कि वह पूर्व गवर्नर विनोद बंसल के उम्मीदवार हैं, जो कि पंजाब के बनिए हैं और इस तरह वह उन्हें बनियों के साथ-साथ पंजाबियों का भी समर्थन मिलेगा और ऐसे में उन्हें भला कौन हरा सकेगा ? इस तरह की बातें करने पर अजीत जालान से कुछेक लोगों ने हालाँकि पूछा भी कि पिछले रोटरी वर्ष में उन्हें यह जरूरी नहीं लगता था क्या कि बनिए प्रेसीडेंट्स को बनिया उम्मीदवार को वोट देना चाहिए; पिछले वर्ष तो वह बनिए प्रेसीडेंट्स पर दबाव बना रहे थे कि वह पंजाबी उम्मीदवार को वोट दें ? इस सवाल पर कहीं चुप रह कर तो कहीं यह कहते हुए अजीत जालान ने अपने आप को 'बचाया' कि पिछले वर्ष की बात अलग थी । पिछले रोटरी वर्ष में अशोक कंतूर की हार के लिए अजीत जालान ने बनिया बहुल रोहतक क्षेत्र के रोटेरियंस को खूब कोसा था और उन पर धोखा देने का आरोप लगाया था । अजीत जालान ने कई लोगों को कहा/बताया है कि उनकी तथा उनके समर्थक नेताओं की तरफ से कोशिशें हो रही हैं कि इस बार रोहतक के क्लब्स के पदाधिकारी उनकी उम्मीदवारी के साथ धोखाधड़ी न कर सकें । कहीं कहीं अजीत जालान ने यह भी कहा है कि उन्हें तो उनके नेता जैसा कहने को कहते हैं, वह वैसा ही लोगों के बीच कहने लगते हैं । इससे लोगों को यह भी लग रहा है कि 'बनिया कार्ड' अजीत जालान का दिमागी फितूर नहीं है, बल्कि उनकी उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं की सोची-समझी रणनीति है ।
अशोक कंतूर व अजीत जालान को अपनी अपनी उम्मीदवारी को लेकर आक्रामक रवैया अपनाते देख महेश त्रिखा अपनी उम्मीदवारी को लेकर निश्चिंत हुए जा रहे हैं । उन्हें लग रहा है कि यह दोनों जितना ज्यादा सक्रिय होंगे, उतना ही एक दूसरे को नुकसान पहुँचायेंगे और इस तरह उनकी उम्मीदवारी के लिए रास्ते को आसान बनायेंगे । महेश त्रिखा और उनके समर्थक दरअसल पहले इस बात से डरे हुए थे कि अशोक कंतूर व अजीत जालान के बीच कहीं समझौता न हो जाए; उन्हें डर था कि यदि इन दोनों में से कोई एक उम्मीदवार रहा तो सीधे मुकाबले में महेश त्रिखा के लिए चुनाव निकालना मुश्किल हो सकता है - लेकिन जैसे जैसे यह साफ होता जा रहा है कि अशोक कंतूर के साथ-साथ अजीत जालान भी उम्मीदवार रहेंगे, वैसे वैसे महेश त्रिखा तथा उनके समर्थकों को अपना काम आसान होता नजर आ रहा है । महेश त्रिखा और उनके समर्थकों का गणित है कि पिछले रोटरी वर्ष में अशोक कंतूर व अजीत जालान की मिलीजुली 'ताकत' जब अशोक कंतूर को चुनाव नहीं जितवा सकी थी, तब अलग अलग होकर यह दोनों क्या पा लेंगे ? दूसरे लोगों को भी लगता है कि महेश त्रिखा का यदि अशोक कंतूर से सीधा मुकाबला हो रहा होता, तो अशोक कंतूर को सहानुभूति का फायदा मिल सकता था, लेकिन अजीत जालान की उम्मीदवारी प्रस्तुत होने से उस फायदे की उम्मीद पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है । अशोक कंतूर की उम्मीदवारी के साथ रवि चौधरी वाली 'बीमारी' भी लगी हुई है । अशोक कंतूर को रवि चौधरी के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है और माना जाता है कि रवि चौधरी की हरकतों के चलते अशोक कंतूर की उम्मीदवारी को नुकसान हुआ था । रवि चौधरी की हरकतें बदस्तूर जारी हैं और अभी हाल ही में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा के पेम वन कार्यक्रम में कई गवर्नर्स को जिस तरह से अपमानित होना पड़ा, उसके लिए संजीव राय मेहरा के साथ-साथ उनके डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में रवि चौधरी को भी जिम्मेदार ठहराया गया है । समझा जाता है कि इस तरह की बातों से अशोक कंतूर की उम्मीदवारी को नुकसान होगा । सचमुच में क्या होगा, यह तो बाद में पता चलेगा - अभी लेकिन जिस तरह की बातें हो रही हैं, उसके चलते लोगों का फिलहाल मनोरंजन खूब हो रहा है ।

Sunday, September 8, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा का पहला ही कार्यक्रम प्रमुख पदाधिकारियों व वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स की बेइज्जती करने तथा पैसा कमाने का जरिया बनने के आरोपों के चलते बदनामी व फजीहत का शिकार हुआ

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा की अपने पहले कार्यक्रम - पेम वन में मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल, पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रंजन ढींगरा व विनय अग्रवाल की एक साथ 'बेइज्जती' करने के मुद्दे पर जैसी फजीहत हुई है, वैसी डिस्ट्रिक्ट में इससे पहले शायद ही कभी किसी की हुई होगी । फजीहत का शिकार होने के बाद संजीव राय मेहरा ने सारी कमियों/गलतियों का ठीकरा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर रवि चौधरी के सिर फोड़ कर अपने को बचाने की कोशिश की है; लेकिन इसके लिए भी उन्हें लोगों से सुनने को मिल रहा है कि छोटी और घटिया सोच रखने वाले रवि चौधरी को उन्होंने जब डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बना लिया है, तो उन्हें उस पर लगाम रखना भी तो सीखना पड़ेगा । संजीव राय मेहरा के नजदीकियों व शुभचिंतकों ने उन्हें आगाह किया है कि उन्होंने यदि रवि चौधरी की हरकतों पर लगाम नहीं लगाई तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें सिर्फ फजीहत और बदनामी ही झेलने को मिलेगी । पेम वन के आयोजन के नाम पर तथा डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदों को 'बेचने' के जरिये मोटी रकम कमाने/बनाने के आरोप भी संजीव राय मेहरा पर लग रहे हैं; हालाँकि कई लोग यह कहते हुए भी सुने गए हैं कि पता नहीं संजीव राय मेहरा को कुछ मिलेगा भी, या सारी रकम रवि चौधरी खुद अकेले ही हड़प जायेंगे ?
संजीव राय मेहरा ने पेम वन के आयोजन में पहला झटका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन को दिया । उल्लेखनीय है कि रोटरी में नियम और व्यवस्था के अनुसार डिस्ट्रिक्ट में कोई भी कार्यक्रम डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरफ से ही होता है - और हो सकता है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के भी जो कार्यक्रम होते हैं; प्रोटोकॉल के अनुसार, उनका निमंत्रण भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की तरफ से ही जाता है । संजीव राय मेहरा ने लेकिन मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन को पूरी तरह इग्नोर करते हुए तथा प्रोटोकॉल की ऐसीतैसी करते हुए निमंत्रण अपनी तरफ से दिया । सुरेश भसीन की इस बेइज्जती के लिए कुछेक लोग सुरेश भसीन को भी यह तर्क देते हुए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं कि सुरेश भसीन रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत करते तो संजीव राय मेहरा और रवि चौधरी यह हरकत नहीं कर पाते; लेकिन जब सुरेश भसीन ही अपनी बेइज्जती पर चुप लगा गए तो फिर दूसरा कौन उनकी मदद कर सकता है । वरिष्ठ रोटेरियंस ने अमित जैन के गवर्नर-वर्ष में हुए इसी से मिलती-जुलती हरकत को याद करते हुए बताया कि उस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में असित मित्तल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार विनोद बंसल के साथ मिल कर अमित जैन को इग्नोर करते हुए अपने एक कार्यक्रम की तैयारी शुरू कर दी थी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अमित जैन को चूँकि जितेंद्र गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा जा रहा था, इसलिए अमित जैन को बेइज्जत करने की असित मित्तल की मुहिम में विनोद बंसल भी बढ़चढ़ कर सहयोग कर रहे थे । आमतौर पर झगड़े-झंझट से दूर रहने वाले अमित जैन ने रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत कर उक्त कार्यक्रम को 'नल एंड वॉइड' घोषित करने का अनुरोध कर दिया, जिसकी जानकारी मिलने पर असित मित्तल ने फिर अमित जैन से विचार-विमर्श करके कार्यक्रम तय किया और प्रोटोकॉल के हिसाब से कार्यक्रम हुआ । लोगों का कहना है कि सुरेश भसीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, वह चाहें तो संजीव राय मेहरा को प्रोटोकॉल के हिसाब से कार्यक्रम करने के लिए 'मजबूर' कर सकते हैं - और अपने आप को बेइज्जत होने से बचा सकते हैं ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल का प्रोफाइल डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में नहीं छापा गया; इसके लिए बड़ा फनी कारण बताया गया कि प्रोफाइल माँगने और तैयार करने के बावजूद उसे इसलिए नहीं छापा जा सका, क्योंकि डायरेक्टरी में पेज नहीं बचा था । रंजन ढींगरा को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयर जैसे महत्त्वपूर्ण पद पर होने के बावजूद कार्यक्रम के महत्त्वपूर्ण मौकों पर मंच पर नहीं बुलाया गया । अनूप मित्तल और रंजन ढींगरा ने लोगों के बीच खुलकर अपनी नाराजगी को प्रदर्शित किया । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय अग्रवाल के लिए मुसीबत की बात यह रही कि अपनी उपेक्षा पर वह बेचारे खुलकर अपनी नाराजगी भी व्यक्त नहीं कर सके । दरअसल उन्हें तथा अन्य लोगों को उम्मीद थी कि संजीव राय मेहरा व रवि चौधरी की जोड़ी उन्हें डिस्ट्रिक्ट एडवाइजरी काउंसिल में अवश्य ही रखेंगे; लेकिन जब उन्हें वहाँ नहीं देखा/पाया गया, तो उन्होंने शिकायती स्वर में कुछ कहने/बोलने की कोशिश की तो लोगों ने यह कहते हुए उनका ही मजाक बनाना शुरू कर दिया कि आप तो इन दोनों की बड़ी तरफदारी करते रहे हैं, फिर भी इन्होंने आपको अपनी एडवाइजरी काउंसिल में रखने लायक नहीं समझा । कुछेक लोगों ने विनय अग्रवाल के साथ चुटकी भी ली कि आप क्या समझते थे कि रवि चौधरी सिर्फ दूसरों के साथ बदतमीजी करेगा, आपके साथ नहीं करेगा - अब जब उसकी 'बदतमीजी' का शिकार आप भी हो गए हैं, तो कैसा लग रहा है ? इस तरह की बातें सुनकर विनय अग्रवाल ने समझ लिया कि वह तो एडवाइजरी काउंसिल में जगह न मिलने का रोना भी किसी के सामने नहीं रो सकते हैं; यदि रोयेंगे तो हर कोई उनसे हमदर्दी दिखाने की बजाये उनका मजाक ही बनायेगा । 
संजीव राय मेहरा पेम वन के आयोजन तथा डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदों को 'बेचने' के जरिये मोटी रकम 'कमाने' के आरोपों के घेरे में भी फँसे हैं । पेम वन के आयोजन को उन्होंने 26 क्लब्स से स्पॉन्सर करवाया, जिसके तहत प्रत्येक क्लब से 60 हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक लिए गए । कुछेक रोटेरियंस ने व्यक्तिगत रूप से आयोजन को स्पॉन्सर किया । कई लोगों को लगता है कि संजीव राय मेहरा ने जितना पैसा इकट्ठा किया, खर्च उसका आधा भी नहीं हुआ । डायरेक्टरी में पेज कम पड़ जाने के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का प्रोफाइल नहीं छापे जा सकने वाली बात पर गौर करें, तो समझ सकते हैं कि संजीव राय मेहरा ने पैसे खर्च करने के मामले में कैसी कैसी कंजूसी व बचत की होगी और कितने पैसे बचाये होंगे ? अपनी डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदों के लिए चुने गए लोगों से भी संजीव राय मेहरा द्वारा मोटी मोटी रकमें बसूलने की चर्चा है । लोगों के बीच चर्चा सुनी जा रही है कि संजीव राय मेहरा ने अपनी गवर्नरी को पैसा कमाने/जुटाने का जरिया बना लिया है । संजीव राय मेहरा के नजदीकियों व शुभचिंतकों का कहना है कि असल में पैसों के मामले में रवि चौधरी की चूँकि खासी बदनामी रही है और उनके एकाउंट को लेकर भी खासी फजीहत वाली स्थिति रही थी, इसलिए भी संजीव राय मेहरा की हर कार्रवाई को शक/संदेह की निगाह से देखा जायेगा और यदि उन्होंने अपने तौर-तरीकों में पारदर्शिता नहीं रखी तो उनके हिस्से में भी रवि चौधरी जैसी ही बदनामी आएगी - और जो आना शुरू भी हो गई है ।

Sunday, July 21, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी फाउंडेशन के पैसों पर सीधे सीधे 'डकैती' डालने वाला प्रोजेक्ट अंततः रद्द हुआ; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन से कुछेक लोगों की माँग कि उन्हें तुरंत काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाना चाहिए और उस मीटिंग में उक्त प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने से लेकर उसे बनाये रखने की कोशिशें करने वाले और उन्हें समर्थन देने वाले गवर्नर्स की भूमिका की निंदा का प्रस्ताव पास कराना चाहिए

नई दिल्ली । रोटरी फाउंडेशन के पैसों की लूट के मामले में महीनों से तरह तरह से आँखों में धूल झोंकने की कुछेक गवर्नर्स की कोशिशें मामले के 'रचनात्मक संकल्प' में प्रकाशित होने के बाद तीन दिन भी आगे नहीं बढ़ सकीं और धराशाही हो गईं । 'रचनात्मक संकल्प' ने 17 जुलाई को उक्त मामले की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन ने 20 जुलाई को एक संदेश के जरिए जानकारी दी कि गरीब बच्चों को फ्री एजुकेशन देने के नाम पर करीब 50/60 लाख रूपए अपनी जेबों में भरने के लिए कुछेक गवर्नर्स ने जो प्रोजेक्ट बनाया था, उसे बंद कर दिया गया है और रोटरी फाउंडेशन से मिला पैसा जल्दी ही वापस कर दिया जायेगा । इस मामले में मजेदार बात यह हुई कि निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया की तरफ से सफाई सुनी गई कि इस मामले में उन्हें नाहक ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रवि चौधरी ने दिखाई थी । रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन के उक्त प्रोजेक्ट को लेकर शुरु से ही विवाद था, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रवि चौधरी ने किसी की नहीं सुनी थी और आनन-फानन में उन्होंने उक्त प्रोजेक्ट को क्लियर कर दिया था । प्रोजेक्ट को आनन-फानन में क्लियर करवाने में उस वर्ष डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटर रहे अशोक कंतूर तथा रवि चौधरी के समर्थन के भरोसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव लड़ रहे संजीव राय मेहरा की भी अहम् भूमिका थी । विनय भाटिया रोटरी फाउंडेशन के 50/60 लाख रुपयों की लूट के मामले में सारा दोष भले ही रवि चौधरी, संजीव राय मेहरा व अशोक कंतूर पर डालने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन लोगों का कहना है कि उस समय डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में विनय भाटिया उन्हीं के बड़े खास हुआ करते थे और बाद में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में विनय भाटिया को जब 'बहती गंगा' में हाथ धोने का मौका मिला तो उन्होंने भी पूरी बेशर्मी के साथ बेईमानीभरे उक्त प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का काम किया । 
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन ने अपने संदेश में उक्त प्रोजेक्ट के रद्द होने की सूचना देते हुए दावा किया है कि प्रोजेक्ट को रद्द करने की कार्रवाई डिस्ट्रिक्ट 3011 के कामकाज में पारदर्शिता बने रहने की प्रतिबद्धता का एक उदाहरण है । सुरेश भसीन के इस दावे को झूठ के पुलिंदे के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है और कहा जा रहा है कि डिस्ट्रिक्ट के कामकाज में यदि सचमुच पारदर्शिता होती तो उक्त प्रोजेक्ट क्लियर ही नहीं होता और यदि हो भी गया था तो रोटरी क्लब दिल्ली सेंट्रल को ट्रांसफर न हो पाता । लोगों का कहना है कि रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन के प्रेसीडेंट सुरेश गुप्ता यदि मामले को न उठाते और 'रचनात्मक संकल्प' में उक्त मामले की रिपोर्ट यदि प्रकाशित न होती तो पारदर्शिता की ऐसीतैसी करते हुए कुछेक गवर्नर्स ने रोटरी फाउंडेशन के 50/60 लाख रुपए हजम करने की पूरी 'व्यवस्था' कर ली थी । कुछेक लोगों का कहना है कि सुरेश भसीन डिस्ट्रिक्ट के कामकाज में पारदर्शिता यदि सचमुच बनाना चाहते हैं तो उन्हें तुरंत काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाना चाहिए और उस मीटिंग में उक्त प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने से लेकर उसे बनाये रखने की कोशिशें करने वाले और उन्हें समर्थन देने वाले गवर्नर्स की भूमिका की निंदा का प्रस्ताव पास कराना चाहिए तथा और कुछ नहीं तो कम-से-कम उन्हें चेतावनी तो देना ही चाहिए । ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि आगे इस तरह की जालसाजी न हो सके। ऐसा करना इसलिए और भी जरूरी है, क्योंकि उक्त प्रोजेक्ट के जरिये रोटरी फाउंडेशन के पैसों को हड़पने की योजना में शामिल लोग किसी न किसी रूप में सत्ता में आने वाले हैं या आने के प्रयासों में लगे हैं । रवि चौधरी व संजीव राय मेहरा की जो जोड़ी उक्त प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने के लिए जिम्मेदार ठहराई जा रही है, वही जोड़ी अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में फिर से इसी तरह के मौके बना सकती है; अशोक कंतूर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) बनने के लिए तैयार घूम रहे हैं, और विनय भाटिया इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का चुनाव/चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी करते हुए सुने/बताए जा रहे हैं । 
बेईमानीपूर्ण इरादों से सुसज्जित उक्त प्रोजेक्ट के रद्द हो जाने से यह बात भी साबित हुई है और सबक मिला है कि आम रोटेरियंस यदि चाहें और कोशिश करें, तो गवर्नर्स की बेईमानियों को रोका जा सकता है । रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन के पिछले वर्ष के पदाधिकारियों तथा मौजूदा प्रेसीडेंट सुरेश गुप्ता ने इस मामले में जिस तरह की दिलचस्पी दिखाई, और मामले को लगातार उठाते रहे - उसके कारण बेईमान गवर्नर्स तथा पीछे से उन्हें समर्थन व हौंसला देने वाले गवर्नर्स की हिम्मत भी जबाव दे गई और उन्होंने प्रोजेक्ट को बनाये रखने की कोशिशों से हाथ खींच लिए । कुछेक लोगों का हालाँकि मानना/कहना है कि इस मामले में बेईमानों को मिली हार से ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है; क्योंकि यह मामला इस बात का भी सुबूत है कि बेईमान गवर्नर्स के हौंसले इस हद तक बुलंद हैं कि वह रोटरी फाउंडेशन के पैसों पर सीधे सीधे 'डकैती' डालने से भी नहीं हिचकिचाए - इसलिए उन्हें तात्कालिक झटका भले ही लगा हो, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज तो नहीं ही आयेंगे । यह मामला कितना बड़ा था, और इसके चलते डिस्ट्रिक्ट की साख व पहचान किस हद तक दाँव पर लग गई थी - इसका अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रोजेक्ट के रद्द होने की जानकारी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को देने की जरूरत पड़ी । इससे पहले शायद ही कभी किसी डिस्ट्रिक्ट में ऐसा हुआ हो कि किसी प्रोजेक्ट के मिलने और या रद्द होने की जानकारी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने लोगों को दी हो । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन इस प्रोजेक्ट के रद्द होने को भले ही डिस्ट्रिक्ट के कामकाज में पारदर्शिता बने रहने के उदाहरण के रूप में देख/बता रहे हों, लेकिन डिस्ट्रिक्ट के ही कई लोगों को लगता है कि कुछेक गवर्नर्स की हरकतों पर यदि निगाह नहीं रखी गई, तो फिर वह रोटरी के पैसों को लूटने की अपनी हरकतों से बाज नहीं आयेंगे ।