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Friday, August 28, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव राय मेहरा वरिष्ठ पूर्व गवर्नर दीपक तलवार पर लगाए आरोप का सुबूत प्रस्तुत करने की चुनौती से बचने/छिपने के कारण एक बार फिर रोटेरियंस के बीच फजीहत का शिकार हुए 

नई दिल्ली । संजीव राय मेहरा सिर्फ डाँट खाने, लताड़ सुनने और फजीहत झेलने के लिए ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बने हैं क्या ? लोगों के बीच यह सवाल दरअसल इसलिए चर्चा में है, क्योंकि अभी उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार संभाले दो महीने भी नहीं हुए हैं - कि तीन बड़े कांड में उन्हें डाँट खाना पड़ी है और फजीहत झेलना पड़ी है । ताजा प्रकरण में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक तलवार ने उन्हें चुनौती दी है कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड से उन्हें चेतावनी मिलने की जो बात उन्होंने कही/लिखी है, वह उसके सुबूत दें - अन्यथा माफी माँगे । संजीव राय मेहरा अपनी ही कही/लिखी बात का न कोई सुबूत दे रहे हैं, और न माफी माँग रहे हैं - बल्कि मुँह छिपाते फिर रहे हैं । इस प्रकरण पर वरिष्ठ पूर्व गवर्नर विनय अग्रवाल ने मजे लेते हुए संजीव राय मेहरा को बड़ी मीठी मीठी सी 'पिटाई' करते हुए चिट्ठी लिखी है । फजीहत के पिछले मामलों की तरह इस मामले में भी संजीव राय मेहरा ने मुसीबत खुद ही बुलाई और एक बार फिर साबित किया कि उम्र में वह भले ही बड़े हो गए हैं, लेकिन सोच/समझ और व्यवहार में वह बहुत 'छोटे' हैं ।
दीपक तलवार अगले रोटरी वर्ष, यानि वर्ष 2021-22 के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर हैं । इस नाते काम करते हुए उन्होंने क्लब्स के पदाधिकारियों से संपर्क किया । संपर्क करते हुए उन्होंने जो पत्र लिखा, उसमें उन्होंने अपने आप को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर तो लिखा/बताया - लेकिन वर्ष नहीं लिखा/बताया । इस तरह की चूक और या लापरवाही रोटरी में अधिकतर पदाधिकारी करते रहते हैं, और इसे प्रायः अनदेखा किया जाता है । अपनी सोच/समझ व व्यवहार के 'छोटेपन' को दर्शाते हुए संजीव राय मेहरा लेकिन दीपक तलवार की इस चूक और या लापरवाही पर जैसे आगबबूला हो गए, और बात का बतंगड़ बनाते हुए उन्होंने दीपक तलवार को तो बुरा-भला कहते हुई चिट्ठी लिख ही दी - और उससे भी जैसे उनका मन नहीं भरा, तो दीपक तलवार को लिखी अपनी चिट्ठी उन्होंने तमाम छोटे/बड़े पदाधिकारियों को भी भेज दी । संजीव राय मेहरा चाहते तो अपनी, अपने पद की, डिस्ट्रिक्ट की और रोटरी की गरिमा बनाये रखते हुए दीपक तलवार को उनकी चूक और या लापरवाही के प्रति आगाह करते हुए उसमें सुधार करवा सकते थे - लेकिन तब वह अपनी फजीहत का मौका कैसे बनाते ? संजीव राय मेहरा यदि दीपक तलवार को उनकी चूक और या लापरवाही पर ही घेरने तक टिकते, तब भी गनीमत होती और वह फजीहत से बच जाते । संजीव राय मेहरा लेकिन दीपक तलवार पर आरोप लगा बैठे कि वर्ष 2015-16 में डिस्ट्रिक्ट की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने के लिए रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड उन्हें चेतावनी दे चुका है । दीपक तलवार ने इसी बात को मुद्दा बना कर संजीव राय मेहरा पर पलट वार किया है और आरोप लगाया है कि संजीव राय मेहरा झूठे आरोप लगा कर उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की और डिस्ट्रिक्ट की गरिमा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं । दीपक तलवार ने संजीव राय मेहरा को चुनौती दी है कि वह रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा उन्हें चेतावनी देने वाला सुबूत प्रस्तुत करें । सुबूत प्रस्तुत करने की बजाये संजीव राय मेहरा लेकिन मुँह छिपाते फिर रहे हैं ।
दीपक तलवार पर झूठा आरोप लगाने के मामले में फजीहत का शिकार हो रहे संजीव राय मेहरा, इससे पहले रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का मजाक बनाते हुए रंजन ढींगरा की जगह विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बनाने के मामले में पहले रोटरी इंटरनेशनल के साउथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों से और फिर इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या से लताड़ खाकर फजीहत करा चुके हैं । उससे भी पहले, रोटरी ब्लड बैंक की एक मीटिंग में एक्स-ऑफिसो सदस्य के रूप में संजीव राय मेहरा को अनाप-शनाप बोलने पर ब्लड बैंक के वरिष्ठ पदाधिकारी रूपक जैन द्वारा लगभग डाँटते/फटकारते हुए चुप कराने का मामला सुना/बताया गया था । इस तरह, अपने दो महीने से भी कम के अभी तक के गवर्नर-काल में संजीव राय मेहरा ने तीन बड़े मामलों में डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स से लेकर रोटरी के बड़े पदाधिकारियों तक से डाँट, लताड़ और फटकार खा ली है - और सभी मामलों में उनका बचकाना रवैया ही जिम्मेदार रहा है । इसी को देखते हुए डिस्ट्रिक्ट में तथा बड़े रोटरी नेताओं के बीच चर्चापूर्ण सवाल है कि संजीव राय मेहरा क्या डाँट, लताड़, फटकार खाने और फजीहत का शिकार बनने के लिए ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बने हैं ?

Tuesday, December 3, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 में विनय कुमार अग्रवाल के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनने के दावे ने सुधीर मंगला की उम्मीदवारी को लोगों के बीच मजाक और मुसीबत का विषय बना दिया है

नई दिल्ली । विनय कुमार अग्रवाल ने सुधीर मंगला के गवर्नर-काल में खुद के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनने का शिगुफा छेड़ कर सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के लिए एक दिलचस्प किस्म का संकट खड़ा कर दिया है । सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के समर्थकों का ही मानना और कहना है कि विनय कुमार अग्रवाल की इस तरह की बातें सुधीर मंगला के चुने जाने की संभावनाओं पर प्रतिकूल असर ही डालेंगी तथा उम्मीदवार के रूप में सुधीर मंगला को नुकसान पहुँचाने का काम करेंगी । ऐसा मानने और कहने वाले लोगों का तर्क है कि रवि भाटिया की उम्मीदवारी के सामने सुधीर मंगला के लिए वैसे भी गंभीर चुनौती है, ऐसे में, सुधीर मंगला के अनुमानित गवर्नर-काल में विनय कुमार अग्रवाल का खुद को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में प्रोजेक्ट करना सुधीर मंगला को चोट पहुँचाने का काम ही करेगा । लोगों ने कहना शुरू भी कर दिया है कि सुधीर मंगला अभी उम्मीदवार ही हैं, लेकिन विनय कुमार अग्रवाल ने उनके कार्य-काल में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनने के सपने देखने शुरू कर दिए हैं ।
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अधिकतर लोग सुधीर मंगला और रवि भाटिया के बीच ही मुकाबला मान/समझ रहे हैं । इन दोनों के व्यक्तित्व और रोटरी के प्रति इनकी संलग्नता व प्रतिबद्धतता के मापदंडों पर तुलना करने वाले लोगों को रवि भाटिया का पलड़ा भारी दिखता है । रवि भाटिया के व्यक्तित्व में पढ़े-लिखे होने का और गंभीरता, शालीनता तथा दूसरों के मान-सम्मान का ख्याल रखने का भाव नजर आता है; सुधीर मंगला भी पढ़े-लिखे और एक स्थापित उद्यमी हैं लेकिन उनके व्यवहार में गंभीरता और दूसरों के मान-सम्मान का ख्याल रखने वाले तत्व का नितांत अभाव डिस्ट्रिक्ट के लोगों ने पाया है । इसी 'अभाव' के चलते तीन वर्ष पहले विनोद बंसल की उम्मीदवारी को पचड़े में डालने के लिए वह इस हद तक चले गए थे कि क्लब में ही झगड़ा हो गया और क्लब दो फाड़ हो गया । विनोद बंसल के साथ सुधीर मंगला का सिर्फ क्लब और रोटरी का ही संबंध नहीं था, बल्कि प्रोफेशनल संबंध भी था और इस नाते से पारिवारिक रिश्ता भी था । लेकिन विनोद बंसल के उम्मीदवार होने को लेकर उन्हें जब ऐतराज हुआ, तो वह जैसे सारे रिश्ते भूल गए । सुधीर मंगला ने ऐसा ही सुलूक पिछले वर्ष अपने नए बने क्लब के अध्यक्ष अरुण जैन के साथ किया । अरुण जैन क्लब, डिस्ट्रिक्ट और रोटरी के लिए एक बहुत ही उपयोगी रोटेरियन साबित होते, लेकिन सुधीर मंगला के रवैये ने उन्हें अपमानजनक तरीके से क्लब के अध्यक्ष पद से ही हटने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि रोटरी से भी बाहर हो जाने के लिए बाध्य कर दिया । इस तरह की बातें सुधीर मंगला की उम्मीदवारी को कमजोर करती हैं ।
सुधीर मंगला अपने व्यवहार के कारण ही अपनी उम्मीदवारी के समर्थन में अपने क्लब के सदस्यों की मदद नहीं ले पा रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों में सुधीर मंगला के क्लब के किसी भी सदस्य को उनके साथ खड़ा नहीं देखा/पाया गया । इसके विपरीत रवि भाटिया को अपने क्लब के सदस्यों से हर तरह का सहयोग और समर्थन मिलता दिख रहा है और डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों में रवि भाटिया के क्लब के सदस्य उनके साथ खड़े दिखे हैं । इसी तरह की बातों से डिस्ट्रिक्ट के लोगों को लग रहा है कि जिन सुधीर मंगला ने दो वर्ष पहले अपने पुराने क्लब को तुड़वाया, एक वर्ष पहले अपने नए बने क्लब के अध्यक्ष को रोटरी से ही निकलवाया, और अभी भी अपने क्लब के सदस्यों को अपने साथ खड़ा नहीं दिखा पा रहे हैं - वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर यदि बने तो डिस्ट्रिक्ट का क्या हाल होगा ? ऐसे ही आकलन के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच रवि भाटिया का पलड़ा भारी हो जाता है । रवि भाटिया को डिस्ट्रिक्ट के लोगों ने पिछले कई वर्षों से लगातार साल-दर-साल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के साथ काम करते हुए देखा/पाया है, जो रोटरी और डिस्ट्रिक्ट के प्रति उनकी संलग्नता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है । सुधीर मंगला इस तरह की कोई संलग्नता और प्रतिबद्धता को नहीं दिखा सके हैं । इसीलिए जो लोग डिस्ट्रिक्ट और रोटरी का भला चाहते/सोचते हैं - उनके बीच सुधीर मंगला की बजाये रवि भाटिया के प्रति समर्थन का भाव दिखता है ।
सुधीर मंगला व्यक्तित्व और डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के प्रति संलग्नता और प्रतिबद्धता के मामले में रवि भाटिया से भले ही मात खा जा रहे हों - लेकिन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय कुमार अग्रवाल ने सुधीर मंगला को जितवाने का पूरा जिम्मा लिया हुआ है । अपना जिम्मा निभाने के क्रम में ही उन्होंने लोगों से कहना शुरू किया है कि सुधीर मंगला को जितवा दो, ताकि मैं भी डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बन सकूँ । उन्होंने लोगों को बताया है कि सुधीर मंगला ने उनसे वायदा किया है कि वह यदि गवर्नर बने तो उन्हें ही डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनायेंगे । विनय कुमार अग्रवाल के इस दावे को सुधीर मंगला के लिए नुकसानदायक मानने वाले लोगों का कहना है कि विनय कुमार अग्रवाल की डिस्ट्रिक्ट में कोई साख नहीं है और उन्हें एक बदमिजाज व्यक्ति के रूप में ही जाना/पहचाना जाता है, जो अभद्र और अशालीन तरीके से बात करने के लिए बदनाम है; जिसका कोई भी वाक्य माँ/बहनों और शरीर के नाजुक अंगों से जुड़ी गालियों के बिना पूरा ही नहीं होता है । ऐसे व्यक्ति को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बना कर सुधीर मंगला डिस्ट्रिक्ट और रोटरी को कहाँ ले जायेंगे और क्या करेंगे ?
सुधीर मंगला गवर्नर बनेंगे या नहीं और यदि बने और उन्होंने विनय कुमार अग्रवाल को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया तो डिस्ट्रिक्ट और रोटरी का क्या होगा - यह तो बाद में पता चलेगा; अभी लेकिन विनय कुमार अग्रवाल के इस दावे ने सुधीर मंगला की उम्मीदवारी को लोगों के बीच मजाक और मुसीबत का विषय जरूर बना दिया है ।

Monday, August 19, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर राजेश बत्रा ने रवि भाटिया की उम्मीदवारी के पक्ष में हवा बनाने के लिए जो तरकीब चली उसने अपना काम किया है

नई दिल्ली/गाजियाबाद । गाजियाबाद में एक क्लब के अधिष्ठापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे राजेश बत्रा ने डिस्ट्रिक्ट के मौजूदा माहौल और डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति को लेकर जो बातें की/कहीं, उनसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार रवि भाटिया की उम्मीदवारी को बड़ा बल मिला और रवि भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थन में माहौल बनता हुआ नजर आया । राजेश बत्रा द्धारा की/कहीं बातों को जिन्होंने सुना, उनमें से कुछ ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया कि राजेश बत्रा ने हालाँकि किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने जो कुछ भी कहा उसे सुनकर वहाँ मौजूद हर किसी ने यही जाना/समझा कि राजेश बत्रा इस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव के संदर्भ में रवि भाटिया का समर्थन करने की जरूरत और अहमियत बता रहे हैं । राजेश बत्रा ने इस 'काम' को जिस सफाई से किया, उसके चलते भी उनकी बातों को सुनने वालों ने न सिर्फ गंभीरता से लिया - बल्कि उसके राजनीतिक आशयों को भी समझा/पहचाना । राजेश बत्रा चूँकि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के पद पर हैं, इसलिए भी उनकी 'बातों' की गंभीरता को पहचाना गया और उनके प्रति सहमति दिखाई/जताई गई ।
राजेश बत्रा ने अनौपचारिक बातचीत में इस बात को न सिर्फ रेखांकित किया बल्कि इस पर चिंता भी व्यक्त की कि कुछ लोगों ने डिस्ट्रिक्ट के माहौल को और चुनावी राजनीति को ऐसा बना दिया है कि कुछ अच्छा करने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए यहाँ बने रहना मुश्किल होने लगा है । राजेश बत्रा ने बताया कि कई लोगों ने उनसे कहा है कि जैसे एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है, वैसे ही थोड़े से लोगों की हरकतों के कारण डिस्ट्रिक्ट की और रोटरी की ऐसी बदनामी हो रही है कि अच्छे, भले और कुछ करने का जज्बा रखने वाले लोग अपने आप को हतोत्साहित महसूस करने लगे हैं और धीरे-धीरे निष्क्रिय हो जा रहे हैं । राजेश बत्रा ने सिर्फ स्थिति का आकलन ही नहीं किया, बल्कि उन्होंने लोगों को इस बात के लिए प्रेरित करने की कोशिश भी की कि जो लोग डिस्ट्रिक्ट को और रोटरी को बचाना चाहते हैं, उन्हें आगे आना होगा और अच्छे व सही लोगों का साथ देना होगा । राजेश बत्रा ने जो कुछ भी कहा, उसमें किसी का भी नाम नहीं लिया - लेकिन फिर भी सभी ने यह समझने/पहचानने में देर नहीं की कि उनके निशाने पर कौन है ?
दरअसल, एक अकेले राजेश बत्रा ही नहीं, बल्कि कई लोग क्लब्स के और या डिस्ट्रिक्ट के आधिकारिक आयोजनों के पहले और बाद में होने वाली अनौपचारिक बातचीतों के स्तर को लेकर अपनी अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं । अनौपचारिक बातचीतों के स्तर को गंदला करने का काम पहले मुकेश अरनेजा और असित मित्तल आदि ही करते थे, पर अब इनके भी 'गुरु' विनय कुमार अग्रवाल ने मोर्चा संभाला हुआ है । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय कुमार अग्रवाल की खूबी यह है कि यह बिना अश्लील शब्दों के अपनी बात कह ही नहीं पाते हैं । इनके निशाने पर चाहे कोई वरिष्ठ रोटेरियन हो और या आम रोटेरियन हो - यह उसके लिए ऐसी-ऐसी भद्दी और अश्लील किस्म की गलियाँ इस्तेमाल करते हैं कि दूसरों के लिए उन्हें दोहराना भी संभव नहीं होता । मनुष्य की चूँकि यह एक बड़ी स्वाभाविक-सी कमजोरी है कि उसके विरोधी के खिलाफ यदि कुछ कहा जा रहा है, तो उसका मन बड़ा प्रसन्न महसूस करता है - इसके चलते कभी-कभी कुछ लोग विनय कुमार अग्रवाल की गालियों में मजा भी लेते हैं, जाहिर है कि इससे उनके हौंसले और बुलंद हुए हैं और इस कारण से उनके गाली-गलौच कार्यक्रम में और तेजी आई है । विनय कुमार अग्रवाल की गालियों के स्वर तेज होने का एक कारण यह भी है कि मुकेश अरनेजा उन्हें इस्तेमाल करने लगे हैं । किसी भी सभा/संगठन में नॉनसेंस लोगों की जो एक 'वैल्यू' होती है - विनय कुमार अग्रवाल की उस वैल्यू को पहचान कर मुकेश अरनेजा उन्हें इस्तेमाल करने लगे हैं । विनय कुमार अग्रवाल की यह वैल्यू इसलिए और 'महत्वपूर्ण' हो गई है क्योंकि विनय कुमार अग्रवाल ने सुधीर मंगला की उम्मीदवारी का झंडा उठा लिया है । उल्लेखनीय है कि पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स में यदि कोई सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के समर्थन में घोषित रूप से है तो वह अकेले विनय कुमार अग्रवाल हैं ।
विनय कुमार अग्रवाल के घोषित समर्थन ने लेकिन सुधीर मंगला की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने का ही काम किया है । विनय कुमार अग्रवाल अपनी गाली-गलौचपूर्ण बातों से मजमा तो जोड़ लेते हैं, लेकिन वह मजमा फिर जल्दी ही उजड़ भी जाता है । सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के प्रति सहानुभूति का भाव रखने वाले, मुकेश अरनेजा की अश्लील और अशालीन किस्म की फिकरेबाजियों का शिकार रहे एक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को हाल-फ़िलहाल में जब मुकेश अरनेजा और विनय कुमार अग्रवाल की बातों में रस लेते हुए देखा/पाया गया तो उन्हें सफाई देनी पड़ी की कि जहाँ ये दोनों होते हैं, वहाँ मैं ज्यादा देर रुकता ही नहीं हूँ । सुधीर मंगला की उम्मीदवारी की बागडोर विनय कुमार अग्रवाल के हाथ में आने के बाद सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन का भाव रखने वाले कई लोगों ने ऐसी ही प्रतिक्रिया दी है । इसी नज़ारे को देख कर सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के जेनुइन किस्म के शुभचिंतकों ने चिंता व्यक्त की है कि विनय कुमार अग्रवाल के कारण सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के अभियान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है । इसके बावजूद विनय कुमार अग्रवाल को रोका नहीं जा रहा है तो इसका कारण सुधीर मंगला के नजदीकियों के अनुसार यह है कि मुकेश अरनेजा ने सुधीर मंगला को समझाया है कि विनय कुमार अग्रवाल की बातों से दिल्ली में कुछ क्लब्स तो छिटकेंगे, लेकिन उत्तर प्रदेश और हरियाणा के क्लब्स जुड़ेंगे । ऐसा लगता है कि मुकेश अरनेजा मानते/समझते हैं कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में लोग लफंगई ही पसंद करते हैं । शायद ऐसा ही सोचकर मुकेश अरनेजा और असित मित्तल ने रवि चौधरी की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने हेतु गाजियाबाद में नाच-गाना करवाया था, जिसमें फिर मार-पिटाई हो गई थी । लगता है कि मुकेश अरनेजा उसी फार्मूले को सुधीर मंगला के लिए भी आजमाना चाहते हैं । मुकेश अरनेजा का उक्त फार्मूला लेकिन जब रवि चौधरी के काम नहीं आया था, तो वह सुधीर मंगला के काम कैसे और क्यों आयेगा ?
डिस्ट्रिक्ट में लफंगई को प्रोत्साहित करने की कुछेक लोगों की कोशिश को राजेश बत्रा ने गाजियाबाद में ही मुद्दा बनाया - तो यह उनकी सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट को और रोटरी को बदनाम करने वाली बातों के खिलाफ राजेश बत्रा पहले भी आवाज उठाते रहे हैं । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि असित मित्तल के बिजनेस संबंधी लफड़ों के कारण राजेश बत्रा ने उनके खिलाफ खुला अभियान छेड़ा था और असित मित्तल से सावधान रहने को लेकर लोगों को आगाह किया था । विनय कुमार अग्रवाल की हरकतों को देखते हुए राजेश बत्रा लगता है कि एक बार फिर उसी तेवर को अपनाने जा रहे हैं । राजेश बत्रा ने हालाँकि अभी किसी का नाम नहीं लिया है लेकिन उन्होंने जिस तरह से रोटरी को और डिस्ट्रिक्ट को भले लोगों की, काम करने वाले लोगों की, परिवार सहित शामिल होने की इच्छा रखने वाले लोगों की जगह बनाने और बनाये रखने की जरूरत को रेखांकित किया है - उससे हर किसी को यह साफ समझ में आ रहा है कि उनके निशाने पर इस बार विनय कुमार अग्रवाल हैं । राजेश बत्रा के निशाने पर होंगे भले ही विनय कुमार अग्रवाल, लेकिन उससे पैदा होने वाली चोट पड़ रही है सुधीर मंगला की उम्मीदवारी पर । राजेश बत्रा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन जब उन्होंने यह कहा कि डिस्ट्रिक्ट और रोटरी की भलाई इसमें है कि भले, शरीफ और ईमानदारी से रोटरी का काम करते रहे और आगे भी करते रहने की इच्छा रखने वाले लोगों का साथ दिया जाये तो मौके पर मौजूद लोगों ने यह समझने में न तो देर की और न कोई गलती की कि वह रवि भाटिया की उम्मीदवारी का समर्थन करने का अनुरोध कर रहे हैं । राजेश बत्रा लोगों के बीच यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि सुधीर मंगला की उम्मीदवारी की बागडोर ऐसे लोगों के हाथ में है जो रोटरी को और डिस्ट्रिक्ट को बदनाम करने का ही काम करेंगे । राजेश बत्रा की बातों को सुनने वालों की जो प्रतिक्रिया रही और जो बाद तक भी जाहिर होती रही है, उससे साफ है कि राजेश बत्रा ने रवि भाटिया की उम्मीदवारी के पक्ष में हवा बनाने के लिए जो तरकीब चली उसने अपना काम किया है ।