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Wednesday, September 30, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में सीओएल का चुनाव बड़े अंतर से जीतने के बावजूद सुधीर मंगला डिस्ट्रिक्ट में अलग-थलग और अकेले पड़े, तथा इसके लिए उनके मतलबी और घमंडी व्यवहार को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है

नई दिल्ली । सीओएल का चुनाव बड़े अंतर से जीतने वाले पूर्व गवर्नर सुधीर मंगला इस बात को लेकर बुरी तरह परेशान और निराश हैं कि डिस्ट्रिक्ट में उन्हें कोई पूछता ही नहीं है, और वह पूरी तरह अलग-थलग पड़े हुए हैं । विडंबना और मजे की बात यह है कि सत्ता खेमे में तो उन्हें इसलिए तवज्जो नहीं मिल रही है, क्योंकि सीओएल के चुनाव में उन्होंने सत्ता खेमे के उम्मीदवार अमित जैन को खासे बड़े अंतर से हराया और इस तरह सत्ता खेमे के नेताओं की भारी किरकिरी की/करवाई; लेकिन विरोधी खेमे के जिन नेताओं ने सीओएल के चुनाव में उनके लिए दिन/रात एक किया, वह भी उनसे कन्नी काटते हुए दिखाई दे रहे हैं । मजे की बात यह भी है कि सुधीर मंगला यह रोना रोते हुए और शिकायत करते हुए तो सुने गए हैं कि उनके अपने लोगों ने उन्हें अलग-थलग किया हुआ है, लेकिन इस आरोप पर वह चुप्पी साध लेते हैं कि इस स्थिति के लिए खुद वह ही जिम्मेदार हैं । दरअसल, सीओएल का चुनाव जीतने के बाद सुधीर मंगला घमंड से भर गए थे, और कहते/सुनाते तथा दावा करने लगे थे कि सीओएल का चुनाव तो उन्होंने अपने दम पर जीता है, तथा किसी ने उनकी कोई मदद नहीं की ।
सुधीर मंगला की इस तरह की बातों ने उनके साथियों/सहयोगियों को बुरी तरह भड़का दिया, और उन्होंने उनसे दूरी बना ली । सीओएल के चुनाव में सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के पक्ष में वोट जुटाने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर का कहना/बताना रहा कि चुनाव के दौरान तो सुधीर मंगला दिन में आठ/आठ बार फोन करते थे, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्होंने थैंक्यू कहने तक के लिए फोन नहीं किया । सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में लगे रहे अन्य प्रमुख नेताओं का भी आरोप रहा है कि चुनाव के समय तो सुधीर मंगला बड़ी चिकनी-चुपड़ी बातें करते थे, लेकिन जीतने के बाद तो उनके तेवर ही बदल गए । सुधीर मंगला के बदले बदले रवैये से हैरान तथा अपमानित महसूस करने वाले कुछेक साथियों/सहयोगियों को निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन के ताने भी सुनने पड़े कि उन्होंने तो पहले ही कहा था कि सुधीर मंगला बहुत ही मतलबी व्यक्ति हैं; जब तक उन्हें काम निकालना होता है तब तक वह मीठी मीठी बातें करते हैं, लेकिन काम निकलने के बाद फिर उनका रवैया बदल जाता है, इसीलिए उन्होंने सुधीर मंगला का विरोध किया था  ।
सीओएल का चुनाव जीतने के बाद सुधीर मंगला के बदले रवैये को देखते हुए, उनके साथी/सहयोगी रहे लोगों ने उनसे जब किनारा कर लिया - तब सुधीर मंगला डिस्ट्रिक्ट में अलग थलग पड़ गए । सुधीर मंगला के लिए फजीहत की बात यह हुई कि नेताओं ने जब उनसे किनारा कर लिया, तो क्लब्स के पदाधिकारियों ने भी उन्हें तवज्जो देने की जरूरत नहीं समझी । पिछले दिनों जिन भी क्लब्स के कार्यक्रम हुए हैं, उनमें अधिकतर में सुधीर मंगला को कतई पूछा तक नहीं गया । कुछेक मौकों पर सुधीर मंगला की तरफ से यह तक आरोप सुनने को मिले हैं कि नेताओं ने क्लब्स के पदाधिकारियों पर दबाव बनाये हैं कि उन्हें क्लब के कार्यक्रमों में सम्मानपूर्ण तरीके से आमंत्रित न किया जाए । उनके आरोपों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है । लोगों का कहना है कि सुधीर मंगला को जब यह लगता है कि सीओएल की उम्मीदवारी के लिए वोट उन्होंने खुद जुटाये हैं, तो अपने लिए कार्यक्रमों के निमंत्रण भी खुद ही जुटा लें । सीओएल का चुनाव बड़े अंतर से जीतने के बाद सुधीर मंगला ने सोचा तो यह था कि अब उनकी गिनती और पहचान डिस्ट्रिक्ट के एक बड़े नेता के रूप में होगी, लेकिन हुआ ठीक उलटा है । उनके लिए फजीहत की बात यह हुई है कि उनकी इस उलटी दशा के लिए उनके मतलबी और घमंडी व्यवहार को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है ।

Tuesday, June 23, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में बड़ी और एकतरफा जीत पाने वाले सुधीर मंगला ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल के दिशा-निर्देशन में, अमित जैन को नहीं - वास्तव में, उनकी उम्मीदवारी का नामांकन वापस करवाने की कोशिश करने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन तथा अन्य पूर्व गवर्नर्स नेताओं को हराया है

नई दिल्ली । सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में अमित जैन के मुकाबले सुधीर मंगला का पलड़ा भारी तो पहले दिन से ही माना/पहचाना जा रहा था, लेकिन किसी को भी - खुद सुधीर मंगला और उनके समर्थकों को भी - सुधीर मंगला की इतनी बड़ी और एकतरफा जीत की उम्मीद नहीं थी । कुल 156 वोटों में से 119 वोट प्राप्त करके सुधीर मंगला ने जो छप्परफाड़ जीत हासिल की है, वह इसलिए और भी बड़ी जीत है - क्योंकि अमित जैन की उम्मीदवारी के पक्ष में गवर्नर्स की खासी बड़ी फौज समर्थन जुटाने के अभियान में लगी हुई थी । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए तैयारी कर रहे पूर्व गवर्नर विनोद बंसल ने अमित जैन की उम्मीदवारी की कमान संभाली हुई थी, और इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता के लिए विनोद बंसल के उम्मीदवार के उम्मीदवार के रूप में तैयारी कर रहे निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया ने अमित जैन को वोट दिलवाने का जिम्मा लिया हुआ था - और उन्हें रवि चौधरी सहित कुछेक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स के साथ-साथ मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा का सक्रिय समर्थन मिला हुआ था; इतने सारे नेता मिलकर अमित जैन को लेकिन कुल 37 वोट ही दिलवा सके । इस चुनाव में सबसे शर्मनाक भूमिका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन की देखी/सुनी गई । नामांकन वापसी के समय तक सुरेश भसीन ने सुधीर मंगला पर यह कहते हुए नाम वापस लेने के लिए खासा दबाव बनाया कि उनके जीतने की तो कोई उम्मीद नहीं है, इसलिए पराजय की शर्मिंदगी से बचने के लिए अच्छा होगा कि वह अपनी उम्मीदवारी छोड़ दें ।
सुधीर मंगला लेकिन सुरेश भसीन के किसी दबाव में नहीं आए । सुधीर मंगला को कुछेक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स का समर्थन था तो, लेकिन उनके समर्थन में कोई पूर्व गवर्नर सक्रिय नहीं दिख रहा था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल को जरूर उनके समर्थन में सक्रिय सुना जा रहा था । लेकिन अपने पद की गरिमा का ख्याल रखते हुए वह भी पर्दे के पीछे रहते हुए ही काम करते सुने जा रहे थे ।डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों को हालाँकि लगता है कि सुधीर मंगला की उम्मीदवारी की कमान अनूप मित्तल के हाथ में ही थी, और उन्होंने बड़ी होशियारी से सुधीर मंगला के लिए वोट जुटाने का काम किया । सीओएल प्रतिनिधि के चुनावी परिदृश्य में मजे की बात यह थी कि डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच - खासकर प्रेसीडेंट्स के बीच सुधीर मंगला की पहचान और सक्रियता ज्यादा थी, जबकि बड़े नेताओं और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के समर्थन के रूप में 'शोर' अमित जैन का ज्यादा था । ऐसे में अनूप मित्तल और सुधीर मंगला की जोड़ी ने चुपचाप तरीके से काम करने पर ध्यान केंद्रित किया और अपने संपर्कों व समर्थकों से व्यावहारिक काम लिया । अनूप मित्तल ने अपने खेमे के पूर्व गवर्नर्स की गरिमा को बनाये/बचाये रखते हुए उनके समर्थन तथा उनके संपर्कों का फायदा सुधीर मंगला को दिलवाया और साथ-साथ 'कमजोर जगहों' की पहचान करते हुए उन्हें मजबूती देने का काम सुधीर मंगला से करवाया । सुधीर मंगला की इस बड़ी और एकतरफा चुनावी जीत के पीछे अनूप मित्तल की सुनियोजित रणनीति को ही मुख्य रूप से जिम्मेदार माना/समझा जा रहा है ।
दरअसल अनूप मित्तल और सुधीर मंगला की जोड़ी ने पहले ही भाँप लिया था कि अमित जैन को चूँकि सक्रिय गवर्नर्स का समर्थन है, इसलिए 'शोर' उनका ही ज्यादा बनेगा/रहेगा । ऐसे में, अनूप मित्तल और सुधीर मंगला ने 'शोर' की पिच पर खेलने की बजाये एक अलग रणनीति बनाई और चुपचाप काम करने पर जोर दिया - जिसके तहत अनूप मित्तल ने पर्दे के पीछे से मोर्चा संभाला और सुधीर मंगला मैदान में डटे । इन्होंने बड़ी होशियारी से संपर्क, सक्रियता और पहचान के मामले में अमित जैन की कमजोरी को मुद्दा बनाया - अमित जैन के समर्थक नेता इस मुद्दे पर असहाय नजर आये । उन्हें लोगों की इस शिकायत का कोई जबाव ही नहीं सूझा कि अमित जैन तो डिस्ट्रिक्ट और रोटरी की गतिविधियों में कहीं नजर ही नहीं आते हैं, और कई प्रेसीडेंट्स तो अमित जैन को पहचानते भी नहीं हैं । अमित जैन और सुधीर मंगला के बायोडेटाज को देखने/पढ़ने वाले लोगों ने भी देखा/पाया और जाना/समझा कि अमित जैन के मुकाबले सुधीर मंगला की डिस्ट्रिक्ट और रोटरी में कहीं ज्यादा सक्रियता है, और सुधीर मंगला डिस्ट्रिक्ट के साथ-साथ जोन व इंटरनेशनल स्तर के आयोजनों में भी लगातार शामिल होते रहे हैं । अमित जैन के समर्थक नेता इस सच्चाई के सामने निरुत्तर ही रहे और सिर्फ इस बात की कोशिश करते रहे कि लोग उनके कहने से अमित जैन को वोट दे दें । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट तथा पूर्व गवर्नर्स नेताओं की भारी-भरकम फौज अपने कहने पर लेकिन अमित जैन को कुल 37 वोट ही दिलवा सकी । इसी आधार पर डिस्ट्रिक्ट के आम और खास लोगों का मानना और कहना है कि सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में सुधीर मंगला ने अमित जैन को नहीं - वास्तव में, उनकी उम्मीदवारी का नामांकन वापस करवाने की कोशिश करने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन तथा अन्य पूर्व गवर्नर्स नेताओं को हराया है ।

Sunday, June 7, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में वोटिंग का पहला दिन अमित जैन की उम्मीदवारी के लिए खासा झटके वाला रहा है, और इसके लिए अमित जैन की उम्मीदवारी के समर्थकों और शुभचिंतकों ने पूर्व गवर्नर विनय भाटिया तथा अन्य बड़े समर्थक नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है

नई दिल्ली । सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव के लिए वोटिंग शुरू होते ही रोहतक और आसपास की जगहों के क्लब्स के वोट सुधीर मंगला के पक्ष में पड़ने की खबर जिस तेजी से फैली है, उसने अमित जैन के समर्थकों और शुभचिंतकों को चिंतित करने का काम किया है । रोहतक से हालाँकि अमित जैन की उम्मीदवारी के लिए कोई अच्छे संकेत मिल भी नहीं रहे थे । पिछले दिनों जिन भी लोगों ने अमित जैन की उम्मीदवारी को लेकर रोहतक में बात की थी, उन्हें यही जबाव सुनने को मिला था कि अमित जैन तो वर्षों से रोहतक नहीं आये हैं और न ही उन्होंने रोहतक के लोगों में या रोहतक की रोटरी गतिविधियों में कभी कोई रूचि दिखाई है; जबकि सुधीर मंगला लगातार संपर्क बनाये रहे हैं और क्लब्स के आयोजनों में भी शामिल होते रहे हैं । रोहतक के लोगों से नाराजगीभरी प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं के मिलने के बाद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन ने अमित जैन की उम्मीदवारी के पक्ष में मोर्चा संभाला, लेकिन उससे बात बनने की बजाये बिगड़ और गई । दरअसल रोहतक में सुरेश भसीन के प्रति खासी नाराजगी है, और उसी नाराजगी के चलते सुरेश भसीन की वकालत भी अमित जैन को वोट दिलवा सकने में असफल रही । अमित जैन की तरफ से लगातार पड़  रहे दबावों को देखते हुए रोहतक के क्लब्स के पदाधिकारियों ने वोटिंग लाइन खुलते ही सुधीर मंगला के पक्ष में वोट करके अमित जैन के लिए रास्ते ही बंद कर दिए । रोहतक में वोट न मिलने से अमित जैन की उम्मीदवारी को जो नुकसान हुआ, वह तो हुआ ही - डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच इस बात के प्रचार से लेकिन ज्यादा नुकसान हुआ लग रहा है ।
रोहतक से भी बड़ा झटका लेकिन अमित जैन की उम्मीदवारी को फरीदाबाद में लगा सुना जा रहा है । रोहतक में हालात मुश्किल होने का तो पहले से आभास था, किंतु फरीदाबाद में तो अमित जैन को एकतरफा वोट मिलने की उम्मीद की जा रही थी । उसके बावजूद, फरीदाबाद के कुछेक क्लब्स की तरफ से सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के पक्ष में हुई वोटिंग की बात जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट में फैली है, उसने अमित जैन की उम्मीदवारी के समर्थकों और शुभचिंतकों को बुरी तरह से निराश किया है । इसके लिए पूर्व गवर्नर विनय भाटिया को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और उनके प्रति नाराजगी के स्वर भी सुनाई देने लगे हैं । अमित जैन की उम्मीदवारी के एक सक्रिय समर्थक ने इन पंक्तियों के लेखक से बात करते हुए विनय भाटिया पर सीधे सीधे धोखा देने का आरोप तक लगाया है । उनका कहना है कि विनय भाटिया ने फरीदाबाद के क्लब्स के वोट दिलवाने की जिम्मेदारी ली हुई थी, लेकिन उन्हें फीडबैक मिल रहा है कि वह कुछ नहीं कर रहे हैं । फरीदाबाद में अमित जैन के समर्थकों व शुभचिंतकों के रूप में देखे/पहचाने जा रहे कुछेक अन्य लोग भी उतने सक्रिय नहीं हैं, जितने सक्रिय होने की उनसे उम्मीद की जा रही थी । यही कारण रहा कि फरीदाबाद के जिन क्लब्स के वोट अमित जैन को मिलने की उम्मीद की जा रही थी, उनके सुधीर मंगला के पक्ष में पड़ने की सूचनाएँ मिल रही हैं । 
इस तरह, वोटिंग का पहला दिन अमित जैन की उम्मीदवारी के लिए खासा झटके वाला रहा है । अमित जैन की उम्मीदवारी के समर्थकों और शुभचिंतकों को ज्यादा चिंता लेकिन इस बात से हुई है कि जिन लोगों से उन्हें वोट दिलवाने की उम्मीद थी, वह या तो प्रभावी तरीके से काम करते हुए नहीं दिख रहे हैं, और या उनके काम करने का कोई असर नहीं हो रहा है । दरअसल अमित जैन के लिए वोट जुटाने के अभियान में जो लोग जुटे हैं, उन्हें लोगों की इस शिकायत का कोई जबाव नहीं सूझ पाया है कि अमित जैन तो डिस्ट्रिक्ट और रोटरी की गतिविधियों में कहीं नजर ही नहीं आते हैं । कई प्रेसीडेंट्स ने तो साफ साफ कहा भी कि वह तो अमित जैन को पहचानते भी नहीं हैं । संपर्क, सक्रियता और पहचान के मामले में सुधीर मंगला का पलड़ा भारी बैठता है । अमित जैन और सुधीर मंगला के बायोडेटाज को देखने/पढ़ने वाले लोगों ने भी जाना/समझा है और रेखांकित किया है कि अमित जैन के मुकाबले सुधीर मंगला की रोटरी में सक्रियता कहीं ज्यादा है - और हर स्तर पर है । सुधीर मंगला डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों के साथ साथ जोन व इंटरनेशनल स्तर के आयोजनों में भी लगातार शामिल होते रहे हैं, और इसलिए सीओएल प्रतिनिधि पद के लिए ज्यादा उपर्युक्त माने/समझे जा रहे हैं । वोटिंग शुरू होने के पहले दिन, सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों के बीच जैसा जो उत्साह देखा/सुना जा रहा है - देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में उन्हें कैसी/क्या सूचनाएँ मिलती हैं ?   

Sunday, May 31, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में अमित जैन को लोगों के बीच सक्रिय न रहने तथा प्रेसीडेंट्स के उन्हें न पहचानने के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे सुधीर मंगला को विश्वास हो चला है कि उनकी उम्मीदवारी को अवश्य ही लाभ और न्याय मिलेगा

नई दिल्ली । सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में अमित जैन को लाभ पहुँचाने तथा जितवाने के उद्देश्य से की जा रहीं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन की कार्रवाइयाँ उल्टा ही असर करती नजर आ रही हैं, और अमित जैन के शुभचिंतकों को वोटिंग शुरू होने से पहले ही सुरेश भसीन के समर्थन के चलते अमित जैन की उम्मीदवारी का अभियान बढ़ने की बजाये घटता हुआ लग रहा है । अमित जैन की उम्मीदवारी के अभियान से जुड़े वरिष्ठ रोटेरियंस का ही कहना/बताना है कि जो क्लब पहले अमित जैन के प्रति समर्थन 'दिखा' रहे थे - सुरेश भसीन की कार्रवाइयों के सामने आने के बाद पलटते नजर आ रहे हैं । दरअसल, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुरेश भसीन के कार्य-व्यवहार के चलते लोगों के बीच पहले से ही खासी नाराजगी है - जिसे सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव से जुड़ी सुरेश भसीन की कार्रवाइयों ने और बढ़ाने का ही काम किया है । सुरेश भसीन का खुद का क्लब उनके खिलाफ नजर आ रहा है । सुरेश भसीन ने सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में रमन भाटिया की उम्मीदवारी को संभव बनाने के जो प्रयास किए और नामांकन की तारीख को आगे बढ़ाने की हद तक गए, उससे उनके क्लब के पदाधिकारी नाराज हुए, और नतीजा यह रहा कि सुरेश भसीन की तमाम कोशिशों बाद भी रमन भाटिया की उम्मीदवारी को क्लब से हरी झंडी नहीं मिली और उनकी उम्मीदवारी ही प्रस्तुत नहीं हो सकी । उसके बाद, सुरेश भसीन ने सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में अमित जैन की उम्मीदवारी का झंडा उठाया और उन्हें फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से अपनी टीम में कई फेरबदल किए । उनके फेरबदल ने लेकिन अमित जैन की उम्मीदवारी को झटका देने का ही काम किया है । 
अमित जैन को फरीदाबाद के क्लब्स का अच्छा समर्थन मिलने का भरोसा था, लेकिन सुरेश भसीन ने जबसे अमित जोनेजा को डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन चेयर दी है, तब से फरीदाबाद में अमित जैन के समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं । फरीदाबाद के कई वरिष्ठ रोटेरियंस अमित जोनेजा को उक्त चेयर दिए जाने से नाराज हैं, और उनकी नाराजगी अमित जैन की उम्मीदवारी पर निकलती नजर आ रही है । अमित जैन के क्लब के वरिष्ठ सदस्य समीर गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट एडमिन चेयर देने के सुरेश भसीन के फैसले ने दिल्ली के कई रोटेरियंस को नाराज किया है; उनकी शिकायत है कि सुरेश भसीन डिस्ट्रिक्ट के सभी पद अमित जैन और उनके नजदीकियों को ही देंगे/दिलवायेंगे क्या ? समझा जा रहा है कि समीर गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट एडमिन चेयर देने के फैसले के सामने आने के बाद से अमित जैन के लिए दिल्ली के क्लब्स में भी चुनौती बढ़ गई है । अमित जैन के लिए चुनौती इसलिए भी बढ़ी है, क्योंकि उनके प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सुधीर मंगला की क्लब के पदाधिकारियों और वरिष्ठ सदस्यों के बीच खासी सक्रियता रही है । अमित जैन चूँकि ज्यादा सक्रिय नहीं रहते हैं और डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रमों में भी कम ही नजर आते हैं, इसलिए लोगों के बीच उनकी पहचान का संकट भी है । अमित जैन की उम्मीदवारी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स ने क्लब्स के प्रेसीडेंट्स से बात की तो कई प्रेसीडेंट्स से यह सुन कर उन्हें झटका लगा कि वह तो अमित जैन को जानते/पहचानते ही नहीं हैं ।
सुधीर मंगला सीओएल प्रतिनिधि के लिए अपनी दावेदारी पर जोर देते हुए बता रहे हैं कि पिछली बार सीओएल के लिए वह ऑल्टरनेटिव प्रतिनिधि थे और वह इंस्टीट्यूट में हुई ट्रेनिंग में भी शामिल हुए थे; इसलिए इस बार वह सीओएल प्रतिनिधि बनने के अधिकारी हैं । सुधीर मंगला याद दिला रहे हैं कि इसके लिए डिस्ट्रिक्ट के सभी पूर्व गवर्नर्स ने उन्हें आश्वस्त भी किया था । अमित जैन के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि उनको उनके समर्थकों/शुभचिंतकों ने ही बरगला कर रखा, और उन्हें आश्वस्त किए रहे कि वह किसी और को उम्मीदवार बनने ही नहीं देंगे और अमित जैन निर्विरोध ही सीओएल प्रतिनिधि चुन लिए जायेंगे । इस आश्वासन के चलते ही अमित जैन ने क्लब्स के प्रेसीडेंट्स तथा अन्य पदाधिकारियों व प्रमुख सदस्यों को कोई तवज्जो नहीं दी । अमित जैन तथा उनके समर्थक पूर्व गवर्नर विनय अग्रवाल  डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन ने दूसरे संभावित उम्मीदवारों को रास्ते से हटाने के लिए अंत समय तक खूब प्रयास किए । संजय खन्ना को सीओएल प्रतिनिधि की चुनावी दौड़ से बाहर रखने/करने के प्रयास खुद अमित जैन ने किए और वह अपने अभियान में सफल रहे । सुधीर मंगला का 'शिकार' करने के लिए विनय अग्रवाल और सुरेश भसीन ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया; विनय अग्रवाल ने सुधीर मंगला के नजदीकियों और समर्थकों पर इसके लिए दबाव बनाया कि वह सुधीर मंगला की उम्मीदवारी वापस करवाएँ और सुरेश भसीन नामांकन वापस लेने की तारीख तक सुधीर मंगला को उम्मीदवारी वापस लेने के लिए फुसलाते/डराते रहे । सुधीर मंगला को लेकिन विश्वास रहा कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच जो निरंतर सक्रियता बनाये रखी है, और रोटरी के आदर्शों व उद्देश्यों के लिए लगातार जो काम करते रहे हैं, उसके नतीजे के रूप में उनकी उम्मीदवारी को अवश्य ही लाभ और न्याय मिलेगा । सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के बने रहने से अब जब अमित जैन को चुनावी मुकाबले में भिड़ने के लिए मजबूर होना ही पड़ रहा है, तो लोगों के बीच सक्रिय न रहने तथा प्रेसीडेंट्स के उन्हें न पहचानने के कारण उनके लिए चुनाव खासा मुश्किलों भरा हो गया नजर आ रहा है । 

Saturday, May 23, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में सीओएल के चुनावी परिदृश्य में प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद अपनी उम्मीदवारी को लेकर सुधीर मंगला की जिद के चलते, लॉकडाउन के कारण ठंडी का शिकार बने डिस्ट्रिक्ट में गर्मी बढ़ी 

नई दिल्ली । सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव में नामांकन वापस लेने की तारीख नजदीक आ रही है, और डिस्ट्रिक्ट के कई धुरंधर नेता सुधीर मंगला को अपना नामांकन वापस लेने के लिए राजी करने का प्रयास कर कर के थक चुके हैं - लेकिन सुधीर मंगला अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए तैयार ही नहीं हो रहे हैं, और चुनाव लड़ने की जिद पर अड़े हुए हैं । नामांकन वापस लेने के लिए अभी हालाँकि चार दिन का समय बचा हुआ है, लेकिन हर किसी ने मान लिया है कि सीओएल प्रतिनिधि के लिए अमित जैन और सुधीर मंगला के बीच चुनाव होना तय ही है । सुधीर मंगला को इस बात पर बड़ी हैरानी है कि डिस्ट्रिक्ट के अधिकतर नेता और पूर्व गवर्नर्स उन पर ही उम्मीदवारी वापस लेने के लिए दबाव क्यों बना रहे हैं ? सीओएल प्रतिनिधि के पिछले चुनाव में भी, डिस्ट्रिक्ट के अधिकतर लोग उम्मीदवारी वापस करवाने को लेकर उन्हीं के पीछे पड़े थे । हालाँकि पिछली बार भी उन्होंने किसी की एक नहीं सुनी थी, और चुनाव लड़ बैठे थे - लेकिन चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था । सुधीर मंगला को उम्मीद थी कि वह चूँकि पिछली बार हारे हुए उम्मीदवार हैं, इसलिए डिस्ट्रिक्ट के लोग उनके प्रति हमदर्दी दिखाते हुए इस बार उन्हें सर्वसम्मति से सीओएल प्रतिनिधि चुन लेंगे; लेकिन अब उन्हें समझ में आ गया है कि रोटरी की दुनिया के लोग बड़े निष्ठुर लोग हैं, जिनके नजदीक हमदर्दी जैसी तो कोई चीज नहीं फटकती है । इसलिए सुधीर मंगला एक बार फिर सीओएल प्रतिनिधि के लिए चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं ।
सुधीर मंगला का कहना है कि रोटरी में उन्हें आसानी से कुछ नहीं मिला है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवारी पाने के लिए उन्हें अपने क्लब के सदस्यों के साथ ही जूझना पड़ा था, जिसके चलते उन्हें उम्मीदवारी तो नहीं ही मिली थी - बल्कि उन्हें अपना क्लब छोड़ने के लिए मजबूर और होना पड़ा था । उन्होंने नया क्लब बनाया, तब वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार हो सके थे - उम्मीदवार तो वह बन गए, लेकिन चुनाव वह हार गए थे । दूसरी बार फिर जब वह उम्मीदवार बने, तो बड़ी मुश्किल से जीत सके थे । सीओएल प्रतिनिधि के मामले में भी सुधीर मंगला को जितने पापड़ बेलने पड़ रहे हैं, उतने डिस्ट्रिक्ट में इससे पहले शायद किसी ने नहीं बेले हैं । सीओएल प्रतिनिधि के चयन/चुनाव को लेकर डिस्ट्रिक्ट में खींचतान के मौके तो हालाँकि कई बार बने हैं, लेकिन असफल रहने वाले और या चुनावी पराजय का शिकार होने वाले लोगों ने इसे वैसा रंग कभी नहीं दिया - जैसा रंग सुधीर मंगला ने दिया हुआ है । सुधीर मंगला की बदकिस्मती है कि डिस्ट्रिक्ट का कोई नेता खुलकर उनकी उम्मीदवारी की वैसी वकालत करता हुआ भी नहीं दिख रहा है, जैसी वकालत कई नेता अमित जैन की करते हुए सुने जा रहे हैं । सुधीर मंगला का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट के नेता और पूर्व गवर्नर्स भले ही उनके साथ न दिख रहे हों, लेकिन क्लब्स के पदाधिकारियों और प्रेसीडेंट्स का समर्थन उनके साथ है - और उनके समर्थन के भरोसे ही वह अपनी उम्मीदवारी को वापस लेने के लिए राजी नहीं हैं ।
सुधीर मंगला को यह भी विश्वास है कि अभी भले ही कोई पूर्व गवर्नर उनकी उम्मीदवारी के समर्थन में नहीं दिख रहा है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में खेमेबाजी के असर और दबाव के चलते कुछेक पूर्व गवर्नर्स अवश्य ही उनकी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने में जुटेंगे । दूसरी तरफ, अमित जैन की उम्मीदवारी को पूर्व गवर्नर्स का अच्छा खासा समर्थन मिलता नजर आ रहा है - खास बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में परस्पर विरोधी के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले पूर्व गवर्नर्स अमित जैन की उम्मीदवारी का समर्थन करते देखे/सुने जा रहे हैं । दूसरी/तीसरी पंक्ति के नेता के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले कुछेक सक्रिय रोटेरियंस के भी अमित जैन की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने तथा माहौल बनाने के काम में लगे होने की चर्चा है, जबकि सुधीर मंगला को अकेले ही अपनी उम्मीदवारी के लिए काम करते हुए देखा/सुना जा रहा है । सुधीर मंगला के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि जो लोग उनकी उम्मीदवारी के समर्थक हैं भी, और जिनका समर्थन सुधीर मंगला की उम्मीदवारी को मिलने की संभावना थी भी - वह भी उनकी उम्मीदवारी के लिए वास्तव में कुछ करते नजर नहीं आ रहे हैं.। तमाम प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद भी सुधीर मंगला ने लेकिन जिस तरह से अपनी उम्मीदवारी को लेकर जिद पकड़ी हुई है, और उम्मीदवारी वापस लेने के दबावों को वह अनसुना कर रहे हैं - उसके चलते लॉकडाउन के कारण ठंडी का शिकार बने डिस्ट्रिक्ट में सीओएल प्रतिनिधि के चुनाव को लेकर गर्मी तो बढ़ रही है ।

Monday, April 13, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी ब्लड बैंक के अकाउंट से जुड़े झमेले की आँच पर सुधीर मंगला सीओएल के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी का पुलॉव पकने की जो उम्मीद कर रहे हैं, उससे लेकिन उनके नजदीकी ही उत्साहित नहीं हैं

नई दिल्ली । रोटरी ब्लड बैंक को लेकर डिस्ट्रिक्ट के नेताओं का जो तमाशा चल रहा है और अभी हाल ही में उसकी जमापूँजी में से बड़े हिस्से को दान करने के मामले में जो रिजल्ट निकला, सीओएल के चुनावी समीकरणों के संदर्भ में सुधीर मंगला उससे गदगद हैं और उसे अपनी उम्मीदवारी के हित में मान/देख रहे हैं । उनके नजदीकियों का कहना/बताना है कि ब्लड बैंक को लेकर पिछले छह/आठ महीनों से जो तमाशा चल रहा है, उसमें सीओएल के चुनावी समीकरणों के संदर्भ में पहले संजय खन्ना फायदे में लग रहे थे - लेकिन ब्लड बैंक की जमापूँजी हल्की करने के मामले में जो बबाल हुआ, उससे स्थितियाँ बदली हैं, और फायदे का संकेत देने वाली सुई संजय खन्ना से हट कर सुधीर मंगला पर आ टिकी है । दरअसल ब्लड बैंक को लेकर पिछले छह/आठ महीनों से जो नाटक चल रहा था, उसने संजय खन्ना को 'हीरो' बनाया हुआ था । लोगों के बीच चर्चा थी कि ब्लड बैंक के ट्रेजरर के रूप में संजय खन्ना ने ही ब्लड बैंक में गुपचुप रूप से होने वाले मनमाने खर्चों का मामला उठाया था, जिसके चलते बात खुली कि ब्लड बैंक की गवर्निंग बॉडी के सदस्य और पदाधिकारी कार्यकाल पूरा होने के बाद भी, बिना चुनाव करवाए अपने अपने पदों पर जमे हुए हैं और कामकाज में मनमानियाँ हो रही हैं । इसके बाद ही, ब्लड बैंक की गवर्निंग बॉडी के सदस्यों और पदाधिकारियों के चुनाव करने/करवाने की बात शुरू हुई और यह प्रमुख फैसला हुआ कि मौजूदा गवर्निंग बॉडी तथा पदाधिकारी बड़े खर्चों वाले किसी काम के बारे में फैसला नहीं करेंगे । ब्लड बैंक में हुए इस डेवलपमेंट को लोगों ने अच्छी भावना से लिया, और इसका श्रेय संजय खन्ना को दिया ।
डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव होने के बाद रोटेरियंस नेता लोग प्रायः 'खाली' हो जाते हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3011 में सीओएल के चुनाव के साथ-साथ ब्लड बैंक के झमेले ने उन्हें सक्रिय बनाये रखा । वैसे तो सीओएल के चुनावी समीकरणों और ब्लड बैंक के झमेले का कोई संबंध नहीं बनता है, लेकिन चूँकि ब्लड बैंक के झमेले के बढ़ने के साथ-साथ सीओएल के चुनाव के दिन नजदीक आते गए - और दोनों जगह संजय खन्ना 'मौजूद' दिखे, तो लोगों के बीच बनने वाली बातों में ब्लड बैंक के झमेले तथा सीओएल के चुनावी समीकरणों में संबंध स्वतः जुड़ गया । इस जुड़े संबंध ने संजय खन्ना की सीओएल की उम्मीदवारी के लिए माहौल अनुकूल बनाया । लेकिन ब्लड बैंक के अकाउंट को हल्का करने के फैसले में शामिल होकर संजय खन्ना ने अपने लिए मुसीबत थोड़ा बढ़ा ली है । उनके नजदीकियों का कहना है कि संजय खन्ना उक्त मामले में दरअसल हालात को भाँप नहीं पाए; उन्हें लगा कि अधिकतर लोग उक्त फैसले के पक्ष में हैं, और फैसला हो ही जायेगा । ब्लड बैंक की गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में सुरेश जैन के स्टैंड के जाहिर होने के बाद हालाँकि संजय खन्ना भी अकाउंट को हल्का करने के फैसले के खिलाफ हो गए, लेकिन माना यही गया कि उन्होंने मजबूरी में पलटी मारी । ब्लड बैंक के अकाउंट को हल्का करने के मामले में मंजीत साहनी ने जिस तरह से काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की भूमिका को शामिल किया, उसमें सुधीर मंगला ने 'बहती गंगा में हाथ धोने' का काम कर लिया । इसी आधार पर सुधीर मंगला को लगता है कि सीओएल के उम्मीदवारों में एक अकेले वही हैं, जिन्होंने ब्लड बैंक के अकाउंट को हल्का करने के प्रयास का विरोध किया - और इसलिए उक्त प्रयास का जिन भी लोगों ने विरोध किया है, उनका समर्थन उन्हें ही मिलेगा ।
सुधीर मंगला यह देख/जान/सुन कर और गदगद हैं कि डिस्ट्रिक्ट में हर कोई ब्लड बैंक के अकाउंट को हल्का करने के प्रयास के विफल हो जाने से खुश हैं । डिस्ट्रिक्ट के लोगों की इस खुशी में उन्हें सीओएल के लिए अपनी उम्मीदवारी की नाव इस बार पार होती दिख रही है । उल्लेखनीय है कि पिछली बार सीओएल के चुनाव में वह हार गए थे । मजे की बात लेकिन यह है कि अपनी उम्मीदवारी को लेकर जैसा भरोसा सुधीर मंगला को है, वैसा भरोसा उनके नजदीकियों को नहीं है - और यही कारण है कि खुद सुधीर मंगला को ही यह शिकायत करते हुए सुना जा रहा है कि उन्हें जिन लोगों से मदद की उम्मीद है, वह उनकी मदद कर नहीं रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लग रहा है कि ब्लड बैंक के अकाउंट से जुड़े ताजा मामले में सही फैसला कर पाने में संजय खन्ना चूक भले ही गए हों, लेकिन उससे सीओएल के चुनाव पर उनकी पकड़ ढीली नहीं पड़ी है । ब्लड बैंक के अकाउंट से जुड़े मामले के कारण काउंसिल ऑफ गवर्नर्स के सदस्यों में जो 'गर्मी' पैदा हुई है, वह यदि कोई नया समीकरण बनाती भी है तो उसका फायदा अमित जैन को मिल सकता है । अमित जैन सीओएल के लिए अपनी उम्मीदवारी का अभियान बड़े चुपचाप तरीके से चलाते 'सुने' जा रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में चलते रहने वाले तमाम झमेलों और विवादों से अमित जैन जिस तरह अपने आप को बचाये रखे हुए हैं, उसे उनकी 'कूल' और कुशल प्रबंधन नीति के नतीजे के रूप में देखा/पहचाना जाता है । चुनावी उठापटक में अमित जैन की इस नीति को कुछेक लोग उनकी कमजोरी के रूप में देखते हैं, तो अन्य कई लोग इसे उनकी ताकत के रूप में पहचानते हैं । सीओएल की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को लगता है कि ब्लड बैंक के अकाउंट से जुड़े जिस झमेले पर सुधीर मंगला उत्साहित हो रहे हैं, उस पर जल्दी ही धूल पड़ जाएगी और तब उम्मीदवारों की वास्तविक पहचान तथा लोगों के बीच उनकी छवि ही निर्णायक भूमिका निभायेगी ।

Tuesday, August 16, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम की अकर्मणता और पक्षपाती रवैये से उत्साहित होकर अजीत जालान ने 'पत्थर' फेंका तो अनूप मित्तल की तरफ, किंतु 'घायल' उन्होंने अपनी पत्नी अंजु जालान को कर लिया

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम के अकर्मणता और या पक्षपाती रवैये के चलते रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट की वित्तीय धांधलियों का मामला डिस्ट्रिक्ट के दो प्रमुख रोटेरियंस - अनूप मित्तल व अजीत जालान के बीच तू तू मैं मैं में तब्दील होता जा रहा है; और इसके चलते यह रोटरी तथा डिस्ट्रिक्ट 3011 के लिए बदनामी भरा सबब बनता जा रहा है । इस मामले में बड़ी खास बात लेकिन यह है कि डॉक्टर सुब्रमणियम को ज्यादा कुछ काम करना भी नहीं है । निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला मामले से जुड़े सारे तथ्य डॉक्टर सुब्रमणियम को सौंप कर उनसे उचित कार्रवाई करने की सिफारिश कर चुके हैं । हो सकता है कि आरोपों को अपनी जाँच पड़ताल में सही पाते हुए सुधीर मंगला ने क्लब को निलंबित करने की जो सिफारिश की है, डॉक्टर सुब्रमणियम उसे उचित न मानते हों - लेकिन वह इस बात को कहते हुए अपना फैसला तो दें, ताकि मामला निपटने की और बढ़े । डॉक्टर सुब्रमणियम लेकिन मामले पर कुंडली मारे बैठे हैं । किसी के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में की धांधलियों पर कार्रवाई करने की सुधीर मंगला की सिफारिश पर डॉक्टर सुब्रमणियम चुप्पी क्यों बनाए हुए हैं ? सुधीर मंगला ने अपनी कार्रवाई - मामले की पड़ताल करने से लेकर डॉक्टर सुब्रमणियम को की गई सिफारिश तक की कार्रवाई - के दस्तावेज चूँकि रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को भी भेजे हुए हैं; जिस कारण रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट की घपलेबाजी का मामला खासा गंभीर हो गया है - जिसकी अनदेखी करना डिस्ट्रिक्ट को खासा महँगा पड़ सकता है । लेकिन डॉक्टर सुब्रमणियम का मामले पर कोई ध्यान नहीं है ।
डॉक्टर सुब्रमणियम के इस रवैये पर कुछेक लोगों का कहना है कि वह फैसला लेने की क्षमता ही नहीं रखते हैं; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वह बन जरूर गए हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की जिम्मेदारी निभा सकने की काबिलियत उनमें नहीं है और इसीलिए वह मामले को लटकाए हुए हैं । अन्य कुछ लोगों को आशंका लेकिन यह है कि डॉक्टर सुब्रमणियम के गवर्नर-काल के अभी तक के खर्चों को लेकर अजीत जालान उन्हें 'ब्लैकमेल' कर रहे हैं, जिस कारण वह सुधीर मंगला की सिफारिश पर कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं; घपलों के सुबूत इतने पुख़्ता हैं कि वह सुधीर मंगला के निष्कर्षों को ख़ारिज भी नहीं कर सकते हैं - इसलिए उन्होंने फैसला न करने वाला रवैया अपना लिया है । समस्या से मुँह चुरा लेने से समस्या हल तो नहीं हो जाती है - बल्कि वह अपने साईड इफेक्ट्स और प्रकट करती है । इस मामले में भी यही हो रहा है । डॉक्टर सुब्रमणियम के चुप्पी साध लेने के बावजूद मामला चूँकि शांत नहीं पड़ा, तो मोर्चा अजीत जालान ने संभाला । अजीत जालान क्लब के प्रमुख सदस्यों में हैं और क्लब में जिन घपलों का आरोप है, उनमें कुछेक में उनकी परोक्ष/अपरोक्ष मिलीभगत के संकेत व सुबूत हैं । अभी तक वह पर्दे के पीछे से मोर्चा सँभाले हुए थे तथा क्लब के खिलाफ हो सकने वाली कार्रवाई को 'रोके' हुए थे; मामले को शांत होता न देख उन्होंने पर्दा हटा दिया और खुल कर सामने आ डटे ।
अजीत जालान ने क्लब की घपलेबाजियों को पर्सनल झगड़े में बदलने का प्रयास करते हुए अनूप मित्तल को निशाना बनाया । डिस्ट्रिक्ट में कई कई पदों पर रहते हुए अनूप मित्तल रोटरी की सेवा करते रहे हैं और कई उल्लेखनीय रिकॉर्ड बनाते रहे हैं । प्रसंगवश एक रिकॉर्ड का यहाँ जिक्र करना मामले को समझने में मदद करेगा : पिछले रोटरी वर्ष में रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट ने रोटरी फाउंडेशन में 1057 अमेरिकी डॉलर दिए थे, जिनमें 1000 अमेरिकी डॉलर अनूप मित्तल के थे । बाकी 57 अमेरिकी डॉलर में रोटरी की बड़ी बड़ी बातें करने वाले अजीत जालान का कितना हिस्सा था, इस रहस्य पर पर्दा पड़ा ही रहे तो ज्यादा अच्छा है । बहरहाल, अजीत जालान ने आरोपों और उनके सुबूतों का सीधा जबाव देने की बजाए अनूप मित्तल को निशाना बनाया । यह सच है कि घपलेबाजियों को सामने लाने का काम अनूप मित्तल ने किया है; किंतु उन्होंने तो हिसाब-किताब को लेकर आरोप लगाए थे; जिनकी जाँच-पड़ताल करने पर निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला ने आरोपों को सही पाया । इससे जाहिर है कि अनूप मित्तल कोई पर्सनल झगड़ा नहीं कर रहे थे; किंतु अजीत जालान ने उन्हें निशाना बना कर मामले को पर्सनल बनाने का प्रयास किया । अजीत जालान के लिए बदकिस्मती की बात यह रही कि वह 'चोट' तो अनूप मित्तल को पहुँचाना चाहते थे, लेकिन अपनी इस हरकत से वह 'घायल' अपनी पत्नी को कर बैठे । रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के घपलेबाजों को बचाने के प्रयासों का साईड इफेक्ट यह हुआ है कि इस मामले में अब अजीत जालान की पत्नी अंजु जालान का नाम भी जुड़ गया है ।
उल्लेखनीय है कि रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के वर्ष 2014-15 के हिसाब-किताब में गड़बड़ी के गंभीर आरोप हैं, और इस आरोप के लिए अजीत जालान पर उस वर्ष क्लब के ट्रेजरार पद का कामकाज संभाले होने का हवाला देते हुए जिम्मेदारी डाली गई है । अनूप मित्तल को निशाना बनाते हुए लिखे पत्र में अजीत जालान ने दावा किया कि वह कभी भी रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के ट्रेजरार नहीं रहे हैं । तकनीकी रूप से अजीत जालान का दावा बिलकुल सच है; लेकिन उन्होंने यह दावा एक 'व्यावहारिक सच' को छिपाने की नीयत से किया, और उनकी यही होशियारी मामले में उनकी पत्नी का नाम आ जाने के कारण उन्हें उल्टी पड़ी । वास्तव में वर्ष 2014-15 में क्लब की ट्रेजरार उनकी पत्नी अंजु जालान थीं । क्लब में जो लोग जालान दंपति को जानते हैं, उनका कहना है कि अंजु जालान एक भली सीधी सादी महिला हैं, जिन्हें अपने राजनीतिक व आर्थिक स्वार्थ में 'इस्तेमाल' करते हुए अजीत जालान ने क्लब का ट्रेजरार बनवा दिया था । तकनीकी रूप से क्लब की ट्रेजरार अंजु जालान थीं, लेकिन ट्रेजरार का काम अजीत जालान ही करते थे । वर्ष 2014-15 का क्लब का हिसाब-किताब क्लब के सदस्यों को यदि अभी तक नहीं मिला है, तो इसका कारण यही माना/समझा जा रहा है कि उस वर्ष के हिसाब-किताब में भारी घपलेबाजी है । उस वर्ष अजीत जालान की पत्नी क्लब की ट्रेजरार थीं, तब अजीत जालान घपलेबाजी के आरोप से इस तर्क से भला कैसे बच सकते हैं कि वह कभी क्लब के ट्रेजरार नहीं रहे ? अपने इस दावे के जरिए अजीत जालान क्या यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि वर्ष 2014-15 की घपलेबाजी के लिए मुझे मत पकड़ो, मेरी पत्नी को पकड़ो ? अजीत जालान को शायद इस बात का आभास नहीं रहा होगा कि आरोपों से बचने की उनकी होशियारी उनके साथ-साथ उनकी पत्नी को भी आरोपों के दलदल में घसीट लेगी ।
इस मामले में और गंद फैले, इससे बचने का एक ही उपाय है कि लंबित पड़े इस मामले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम तुरंत से फैसला करें - जो ठीक समझें, वह फैसला करें; ताकि मामला निर्णायक दिशा में आगे बढ़े । इस मामले में फैसला करने के डॉक्टर सुब्रमणियम के रवैये को लेकर उनके एक नजदीकी ने एक कहानी 'बनाई' है, जिसका 'संदेश' खासा दिलचस्प और प्रासंगिक है । कहानी के अनुसार, अनूप मित्तल एक शाम डॉक्टर सुब्रमणियम से मिले और उन्हें रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के घपलों के बारे में विस्तार से बताया और उचित करवाई करने की माँग की । डॉक्टर सुब्रमणियम ने उनकी पूरी बात बहुत ध्यान से सुनी और कहा : 'अनूप, तुम बिलकुल ठीक कह रहे हो । यू आर राईट । यू आर एब्सोल्यूट्ली राईट ।' अगले दिन शाम को अजीत जालान उनसे मिले और उन्होंने तमाम आरोपों को तरह तरह के तर्क देते हुए झूठा बताया और क्लब के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का उनसे अनुरोध किया । डॉक्टर सुब्रमणियम ने उनकी भी पूरी बात बड़े ध्यान से सुनी और बोले : अजीत, तुम बिलकुल ठीक कह रहे हो । यू आर राईट । यू आर एब्सोल्यूट्ली राईट ।' अजीत जालान जब चले गए, तब डॉक्टर सुब्रमणियम की पत्नी डॉक्टर ललिता उन पर बहुत बिगड़ी कि तुम कैसे व्यक्ति हो; दोनों को राईट और एब्सोल्यूट्ली राईट बता रहे हो; दोनों में से राईट तो कोई एक ही होगा न । डॉक्टर ललिता ने डॉक्टर सुब्रमणियम से कहा कि आपको फैसला करना चाहिए कि दोनों में से कौन सचमुच राईट है । डॉक्टर ललिता ने कहा कि आपको याद रखना चाहिए कि आप डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हो; और आपको किसी एक के पक्ष में फैसला करना चाहिए । डॉक्टर सुब्रमणियम ने अपनी पत्नी की नाराजगी भरी और सलाहपूर्ण बातों को ध्यान से सुना और कहा : 'ललिता, तुम बिलकुल ठीक कह रही हो । यू आर राईट । यू आर एब्सोल्यूट्ली राईट ।' यह सुनकर डॉक्टर ललिता ने अपना सिर पीट लिया ।
कहानी में डॉक्टर ललिता ने अपना सिर पीट लिया; तो डिस्ट्रिक्ट में डॉक्टर सुब्रमणियम के टालू रवैये से उत्साहित होकर अजीत जालान ने अनूप मित्तल की तरफ जो पत्थर फेंका था, उससे अपनी पत्नी को ही घायल कर लिया है । देखना दिलचस्प होगा कि रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट की घपलेबाजियों का मामला और क्या क्या तमाशे दिखवायेगा ?

Wednesday, July 13, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के घपलेबाजों को संरक्षण देते हुए सुधीर मंगला की सिफारिश को अनदेखा करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम की कार्रवाई कहीं डिस्ट्रिक्ट को बड़ी मुसीबत में तो नहीं फँसा देगी ?

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम को अजीत जालान से आखिर ऐसा क्या डर है कि वह अजीत जालान के क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में होने वाली वित्तीय धांधलियों के मामले में कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं ? निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला मामले से जुड़े सारे तथ्य डॉक्टर सुब्रमणियम को सौंप कर उनसे उचित कार्रवाई करने की सिफारिश कर चुके हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला ने बहुत मेहनत व धैर्य से रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के पदाधिकारियों तथा कब्जाधारियों द्धारा की जा रही धांधलियों की पड़ताल की थी; क्लब के पदाधिकारियों ने उनकी पड़ताल को बंद करवाने तथा भटकाने की कोशिश तो बहुत की - लेकिन सुधीर मंगला की कार्रवाई धांधलियों के परिस्थितिजन्य सुबूत जुटाने में कामयाब रही । इस कामयाबी तक पहुँचने में हालाँकि उन्हें इतना समय लग गया कि उनका गवर्नर-काल ही पूरा हो गया । इसलिए तथ्यों के सहारे/भरोसे आगे की कार्रवाई पूरी करने की जिम्मेदारी उन्होंने डॉक्टर सुब्रमणियम को सौंप दी । डॉक्टर सुब्रमणियम लेकिन सुधीर मंगला की सिफारिश पर कोई ध्यान देते हुए नहीं दिख रहे हैं । उनका ध्यान न देना लोगों के नोटिस में शायद नहीं भी आता; किंतु रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के लोगों का जोश इस मामले में डॉक्टर सुब्रमणियम की मुसीबत बन गया है । रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के प्रमुख लोग जिस तरह से सुधीर मंगला को कोस रहे हैं और उनके बारे में अभद्र व अशालीन तरीके से बातें कर रहे हैं, उससे डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लग रहा है कि डॉक्टर सुब्रमणियम की शह के कारण ही दिल्ली साऊथ वेस्ट के लोगों की इतनी हिम्मत हो रही है कि उन्होंने हाल ही में पूर्व हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है । सुधीर मंगला के प्रति रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के कुछेक प्रमुख लोगों की नाराजगी का कारण यही है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्होंने क्लब में चल रही धांधलियों के आरोपों को गंभीरता से लिया और आरोपों को सच भी 'साबित' कर दिया तथा नियमों के हवाले से क्लब को निलंबित करने की सिफारिश तक कर दी ।
रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के प्रमुख लोगों की सुधीर मंगला के खिलाफ की जा रही बेहूदा किस्म की बयानबाजी को डॉक्टर सुब्रमणियम की शह होने का डिस्ट्रिक्ट के लोगों का विश्वास इस कारण भी बना है - क्योंकि दिल्ली साऊथ वेस्ट के एक प्रमुख सदस्य अजीत जालान पहले से ही डॉक्टर सुब्रमणियम का नाम लेकर सुधीर मंगला को चुनौती देते रहे हैं । सुधीर मंगला जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दिल्ली साऊथ वेस्ट में हो रही गड़बड़ियों के आरोपों की जाँच-पड़ताल कर रहे थे, और आरोपों को सच पा रहे थे - तब यह अजीत जालान ही थे जो बढ़चढ़ कर दावा कर रहे थे कि डॉक्टर सुब्रमणियम के होते हुए सुधीर मंगला क्लब खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पायेंगे । अजीत जालान की डॉक्टर सुब्रमणियम से निकटता कोई छिपी हुई बात है भी नहीं । डॉक्टर सुब्रमणियम ने उन्हें अपने गवर्नर-वर्ष के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार बनाया है - और यह जानते/बूझते हुए बनाया है कि अजीत जालान पर हिसाब-किताब में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप रहे हैं । पिछले से पिछले रोटरी वर्ष में अजीत जालान अपने क्लब के ट्रेजरार थे; ट्रेजरार के रूप में उनपर हिसाब-किताब में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगे : उनके शुभचिंतकों तक ने उन्हें सलाह दी कि हिसाब-किताब का ब्यौरा सामने रख दो, आरोप अपने आप खारिज हो जायेंगे - लेकिन अजीत जालान ने अपने शुभचिंतकों की भी नहीं सुनी, और हिसाब-किताब नहीं दिया तो नहीं ही दिया । अजीत जालान ने आरोप और बदनामी तो सही, लेकिन हिसाब-किताब नहीं दिया । इस बात का हवाला देते हुए डॉक्टर सुब्रमणियम की टीम बनवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले लोगों ने डॉक्टर सुब्रमणियम को सलाह दी थी कि वह अजीत जालान को और चाहें जो पद दे दें, लेकिन ट्रेजरार का पद न दें । डॉक्टर सुब्रमणियम ने लेकिन किसी की नहीं सुनी; और अजीत जालान को वही पद दिया, जो अजीत जालान अपने लिए चाहते थे । इससे अजीत जालान के साथ डॉक्टर सुब्रमणियम के रिश्ते के 'ताप' को समझा/पहचाना जा सकता है । इस 'ताप' को इस तथ्य से भी समझा/पहचाना जा सकता है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार के रूप में अजीत जालान पर डॉक्टर सुब्रमणियम के पेम/पेट्सअसेम्बली आदि कार्यक्रमों के खर्चों में गोलमाल होने के आरोप भी लगे, लेकिन डॉक्टर सुब्रमणियम ने उन आरोपों पर कोई ध्यान नहीं दिया ।
डिस्ट्रिक्ट में लोगों का कहना है कि इन बातों/तथ्यों को तो फिर भी इग्नोर किया जा सकता है; लेकिन यह बात समझ से कतई परे है कि रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में चल रही धांधलियों पर कार्रवाई करने की सुधीर मंगला की सिफारिश पर डॉक्टर सुब्रमणियम चुप्पी क्यों बनाए हुए हैं ? सुधीर मंगला ने अपनी कार्रवाई - मामले की पड़ताल करने से लेकर डॉक्टर सुब्रमणियम को की गई सिफारिश तक की कार्रवाई - के दस्तावेज रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को भी भेजे हुए हैं; जिस कारण रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट की घपलेबाजी का मामला खासा गंभीर हो गया है - जिसकी अनदेखी करना डिस्ट्रिक्ट को खासा महँगा पड़ सकता है । पिछले रोटरी वर्ष में सुधीर मंगला ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में चुनावी बेईमानी को लेकर जो अनदेखी की थी, उसकी भारी कीमत डिस्ट्रिक्ट के सिर पहले ही पड़ चुकी है । डिस्ट्रिक्ट को लेकर इंटरनेशनल बोर्ड की मीटिंग में की जो प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज है, उसके कारण डिस्ट्रिक्ट पहले से ही मुसीबत में है । पिछले रोटरी वर्ष में जो कुछ भी हुआ, उसे कुछेक लोगों ने तत्कालीन प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की निजी ख़ब्तीबाजी के रूप में देखा/पहचाना था और उम्मीद की थी कि प्रेसीडेंट पद से उनके हटने के बाद मामले को संभाल लिया जायेगा । मुसीबत की बात लेकिन यह हुई कि नए बने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म ने केआर रवींद्रन को एशियाई देशों के मामलों का इंचार्ज बना दिया है । यानि हालात जहाँ थे, वहीं फिर वापस आ गए हैं । डिस्ट्रिक्ट 3011 चूँकि पहले से ही केआर रवींद्रन के 'रडार' पर है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट 3011 के पदाधिकारियों से सावधानी से काम करने की उम्मीद की जाती है । इसी उम्मीद के चलते लोगों को डर है कि रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट की घपलेबाजियों पर कार्रवाई करने की सुधीर मंगला की सिफारिश पर डॉक्टर सुब्रमणियम की चुप्पी डिस्ट्रिक्ट की मुसीबतों को और बढ़ा सकती है ।
रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में चलने वाली घपलेबाजियों के आरोप हैं; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला द्धारा की गई जाँच-पड़ताल में सामने आए साक्ष्य व सुबूत हैं; क्लब के खिलाफ कार्रवाई करने की सुधीर मंगला की सिफारिश है - इसके बावजूद मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम कार्रवाई तो नहीं ही कर रहे हैं; बल्कि घपलेबाजियों के एक मास्टरमाइंड समझे जाने वाले अजीत जालान से निकटता बनाए हुए हैं । इस निकटता का वास्ता देकर अजीत जालान तथा क्लब के अन्य कुछेक प्रमुख लोग निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला के खिलाफ अभद्र व अशालीन किस्म की बातें कर रहे हैं, और दावा कर रहे हैं कि उनपर चाहें जो आरोप हों और उसके चाहें जितने साक्ष्य व सुबूत हों - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे । डॉक्टर सुब्रमणियम के रवैये से अजीत जालान तथा रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के दूसरे कुछेक लोगों द्धारा किया जा रहा दावा यदि सच साबित भी होता नजर आ रहा हो - तब लोगों के बीच यह सवाल तो उठेगा ही कि डॉक्टर सुब्रमणियम आखिर किस मजबूरी में रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के घपलेबाजों को संरक्षण दे रहे हैं और क्लब में की घपलेबाजी को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं - और अपने से पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहे सुधीर मंगला की सिफारिश को अनदेखा कर रहे हैं ?

Wednesday, June 22, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में वित्तीय धांधलियों के खिलाफ अनूप मित्तल द्धारा क्लब के पदाधिकारियों की प्रशासनिक व राजनीतिक स्तर पर की गई दोहरी घेराबंदी ने क्लब के खत्म होने का खतरा पैदा किया

नई दिल्ली । रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के 'सत्ताधारी' नेताओं को क्लब के 'नए' सदस्य अनूप मित्तल से पंगा लेना खासा महँगा पड़ा है, और उनके सामने क्लब को गँवाने तक का गंभीर खतरा पैदा हो गया है । इस स्थिति के लिए क्लब के लोग क्लब के सर्वेसर्वा बनने की कोशिशों में लगे पूर्व प्रेसीडेंट अजीत जालान को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । आरोप है कि अजीत जालान ने अपना स्वार्थ साधने के लिए क्लब के अध्यक्ष भरत शेट्टी को मोहरा बना कर इस्तेमाल किया, और अपनी मनमानियाँ चलाने के लिए मौके बनाने के प्रयास किए और इस चक्कर में क्लब के सदस्यों के साथ धोखाधड़ी की; अनूप मित्तल ने इस धोखाधड़ी का विरोध किया तो उन्हें क्लब से निकालने की कार्रवाई शुरू करवा दी - लेकिन उनकी कोशिशों का अनूप मित्तल ने जो करारा जबाव दिया, उससे मामला उल्टा पड़ गया है और खतरा क्लब के ही सस्पेंड होने का पैदा हो गया है । मुसीबत की बात यह रही कि अजीत जालान जिन कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के भरोसे 'उछल' रहे थे और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला तक से बदतमीजी करने पर उतर आए थे, उन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने भी संकट के मौजूदा समय में हाथ पीछे खींच लिए हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला ने नियमों का हवाला देते हुए क्लब के प्रेसीडेंट भरत शेट्टी को चेतावनी देता हुआ एक बहुत ही कठोर पत्र लिखा है, जिसमें विवादित मामलों पर तथ्यपरक रूप से जबाव देने तथा क्लब के हिसाब-किताब में वित्तीय हेराफेरियों व ट्रस्ट के गठन में की गई बेईमानी के आरोपों का संतोषजनक जबाव देने के लिए कहा गया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला ने यह जबाव देने के लिए 27 जून के सायं पाँच बजे तक का समय निर्धारित किया है; और स्पष्ट चेतावनी दी है कि उक्त समय सीमा में संतोषजनक जबाव न मिलने पर क्लब के पदाधिकारियों तथा क्लब के खिलाफ उचित कार्रवाई की जायेगी ।
रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में बबाल तो शुरू हुआ 'रोटरी साऊथ वेस्ट चैरिटेबिल ट्रस्ट दिल्ली' के गठन को लेकर, लेकिन फिर इस बबाल ने क्लब के फंड्स में की जा रही धांधलियों के मामलों को भी चपेट में ले लिया - और फिर जब यह भेद खुला कि क्लब के कुछेक लोगों ने रोटरी की आड़ में धंधा करने को ही अपना लक्ष्य बनाया हुआ है, तो फिर बात बहुत बढ़ गई और उसमें पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के भी पक्ष-विपक्ष बन गए । चर्चा तो यहाँ तक है कि इस बबाल की गर्मी इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई तक भी पहुँची है, और मनोज देसाई ने कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की इस बात के लिए खिंचाई भी की है कि एक मामूली से विवाद को शह व समर्थन देकर उन्होंने खासे बड़े बबाल में बदल दिया है । मामला सचमुच बहुत मामूली सा ही था : इसी वर्ष 22 जनवरी को हुई क्लब की असेम्बली मीटिंग में एक नए ट्रस्ट के गठन को लेकर चर्चा हुई, जिसमें तय हुआ कि इक्यावन इक्यावन हजार रुपए देने वाले 21 सदस्यों को संस्थापक ट्रस्टी की पहचान देते हुए ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करवाया जाए । इसके बाद, 29 अप्रैल को हुई क्लब की असेम्बली मीटिंग में बताया गया कि पाँच पूर्व प्रेसीडेंट्स को संस्थापक ट्रस्टियों की पहचान देते हुए ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करवा लिया गया है । यह सुनकर और पाँच संस्थापक ट्रस्टियों के नाम सुन/जान कर सदस्यों को हैरानी हुई कि क्लब की असेम्बली मीटिंग में जब 21 संस्थापक ट्रस्टियों की बात हुई थी और संस्थापक ट्रस्टियों को इक्यावन इक्यावन हजार रुपए देने थे, तब संस्थापक ट्रस्टियों की संख्या पाँच ही कैसे रह गई और इन पाँच को भी इक्यावन इक्यावन हजार रुपए लिए बिना ही संस्थापक ट्रस्टी कैसे और क्यों बना दिया गया ? सबसे बड़ी नाइंसाफी तो पूर्व प्रेसीडेंट अनूप मित्तल के साथ हुई - अनूप मित्तल संस्थापक ट्रस्टी बनने की शर्त के अनुसार इक्यावन हजार दे चुके थे, किंतु फिर भी संस्थापक ट्रस्टियों में उनका नाम नहीं था । स्वाभाविक रूप से अनूप मित्तल ने इस पर सवाल उठाते हुए आपत्ति दर्ज की । क्लब के कई अन्य सदस्यों ने भी गुपचुप व मनमाने तरीके से संस्थापक ट्रस्टियों के चयन पर तथा ट्रस्ट के मजमून पर आपत्ति की ।
क्लब के प्रेसीडेंट भरत शेट्टी ने सदस्यों की आपत्तियों पर कोई ध्यान नहीं दिया और ऐसे संकेत दिए कि वह ट्रस्ट को जैसे चाहेंगे वैसे बनायेंगे और चलायेंगे । ट्रस्ट के गठन में मुख्य भूमिका निभाने वाले अजीत जालान, आईएम सिंह, राजन कोचर आदि ने ट्रस्ट को लेकर सवाल उठाने वाले सदस्यों को धमकाना तक शुरू कर दिया कि जिसने भी सवाल उठाए, उसे क्लब से निकाल दिया जायेगा । इस तरह की धमकी ने लेकिन सदस्यों को चुप करने की बजाए और मुखर बना दिया । मुखरता में सदस्यों ने कहना/बताना शुरू कर दिया कि क्लब को कुछेक लोगों ने अपनी बपौती समझ रखा है और क्लब के फंड्स की लूट मचाई हुई है । यह बात भी खुली कि क्लब का एक ट्रस्ट पहले भी बना है, जिसके लिए मोटी रकम इकठ्ठा हुई थी और जिसे काम करने के लिए कई स्रोतों से मोटे पैसे मिले थे - लेकिन किसी को नहीं पता कि उन पैसों का क्या हुआ और ट्रस्ट वास्तव में करता क्या है ? अजीत जालान और संजीव वर्मा 'रोटरी ओर्गेन डोनेशन' नाम से एक ट्रस्ट चलाते हैं, जिसके लिए क्लब से हालाँकि कोई अनुमति और सहमति नहीं ली गई है - लेकिन जब तब जिसके लिए रोटेरियंस से पैसे इकट्ठे किए जाते रहे हैं । उसके हिसाब-किताब का किसी को कुछ अता-पता नहीं है । यह जो तीसरा ट्रस्ट मनमाने षड्यंत्रपूर्ण तरीके से बनाया जा रहा है, उसके पीछे भी अजीत जालान का 'दिमाग' बताया जा रहा है । इन्हीं तथ्यों से क्लब के सदस्यों को लगा और उनका आरोप रहा कि ट्रस्ट की आड़ में अजीत जालान ने धंधे का कोई जुगाड़ किया है । क्लब में पैसों के हिसाब-किताब में अजीत जालान का रिकॉर्ड वैसे भी कुछ अच्छा नहीं रहा है, और उनकी भूमिका संदेहास्पद ही रही है । पिछले रोटरी वर्ष में वह क्लब के ट्रेजरार थे; पिछले रोटरी वर्ष का हिसाब माँगते-माँगते क्लब के सदस्यों के हलक सूख गए हैं, लेकिन उन्हें हिसाब नहीं मिला है । डॉक्टर सुब्रमणियम ने अपने गवर्नर-वर्ष के अभी तक जो प्रोग्राम किए हैं, उनमें हिसाब-किताब की गड़बड़ी और पैसे 'बनाने' के जो आरोप सुने गए हैं, उनके लिए भी अजीत जालान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है : अजीत जालान को डॉक्टर सुब्रमणियम ने अपने गवर्नर-वर्ष के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार बनाया है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच आरोपपूर्ण चर्चा है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार के रूप में अजीत जालान ने डॉक्टर सुब्रमणियम के पेम/पेट्स/असेम्बली आदि कार्यक्रमों में खर्चों का भारी गोलमाल किया है ।
अजीत जालान चूँकि कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के सहयोग/समर्थन के भरोसे अभी तक अपनी मनमानियों को सफलतापूर्वक अंजाम दे पा रहे थे, इसलिए उनके हौंसले काफी बुलंद थे । इन्हीं बुलंद हौंसलों की बदौलत उन्होंने नए ट्रस्ट के संदर्भ में उठने वाले सवालों की परवाह नहीं की तथा सवाल उठाने वाले लोगों को खुद धमकाने तथा अपने समर्थक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स से धमकवाने का काम शुरू कर दिया । क्लब के एकाउंट्स माँगने के 'अपराध' में विनोद साहनी को क्लब से निकलवाने में अजीत जालान सफल भी हुए । सफलता के मद में अजीत जालान और उनके साथियों ने अनूप मित्तल से पंगा ले लिया । बस यही उनसे गलती हो गई । लगा तो उन्हें यह कि अनूप मित्तल विभाजन के बाद अस्तित्व में आए नए डिस्ट्रिक्ट 3011 के क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में ट्रांसफर लेकर अभी करीब एक वर्ष पहले ही आए हैं, और इस हिसाब से अनूप मित्तल क्लब में नए हैं - लिहाजा वह उन्हें धमका लेंगे; लेकिन अनूप मित्तल ने क्लब में वित्तीय गड़बड़ियों का और मनमाने तरीके से ट्रस्ट बनाए जाने के मामले का ऐसा इश्यू बनाया कि क्लब के पदाधिकारियों पर शिकंजा कसता चला गया । अनूप मित्तल ने क्लब के पदाधिकारियों की प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी घेराबंदी की - जिसका नतीजा रहा कि एक तरफ तो क्लब के पदाधिकारियों को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला से फटकार सुननी पड़ी तथा सुधीर मंगला की प्रशासनिक कार्रवाई का शिकार होना पड़ा, तथा दूसरी तरफ दस से ज्यादा लोगों ने क्लब के पदाधिकारियों पर लूटखसोट का आरोप लगाते हुए क्लब की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया । मजेदार बात यह हुई कि क्लब के पदाधिकारी अनूप मित्तल को क्लब से निकालने की धमकी दे रहे थे तथा इस बारे में कार्रवाई शुरू कर ही रहे थे, कि उससे पहले अनूप मित्तल ने ही जाल बिछा कर क्लब के पदाधिकारियों को ही फँसा दिया है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला की तरफ से क्लब के प्रेसीडेंट भरत शेट्टी को शो-कॉज नोटिस मिलने के बाद क्लब के पदाधिकारियों के लिए अपनी इज्जत और क्लब के अस्तित्व को बचाना मुश्किल हो गया है । अजीत जालान हालाँकि क्लब के पदाधिकारियों को आश्वस्त कर रहे हैं कि सुधीर मंगला ने 27/28 जून को क्लब के खिलाफ कोई फैसला यदि लिया भी, तो वह चार दिन बाद गवर्नर बनने वाले डॉक्टर सुब्रमणियम से उस फैसले को पलटवा लेंगे । अजीत जालान का दावा है कि डॉक्टर सुब्रमणियम से उन्होंने बात कर ली है और डॉक्टर सुब्रमणियम ने उनसे वायदा किया है कि वह उनके क्लब को कोई नुकसान नहीं होने देंगे । रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में वित्तीय धांधलियों के खिलाफ मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला के कठोर रवैये और अजीत जालान के दावे के अनुसार डॉक्टर सुब्रमणियम के दिए भरोसे के बीच रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट का मामला सचमुच दिलचस्प हो उठा है ।

Thursday, April 28, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में इंटरनेशनल बोर्ड के निर्देश का पालन करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला की कोशिश पर दीपक तलवार ने 'चोरी और सीनाजोरी' वाला रवैया दिखाया

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले पर अमल करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला की तैयारी पर दिखाए दीपक तलवार के रवैये ने डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक माहौल को न सिर्फ और गर्मा दिया है, बल्कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला की लाचारी व निरीहता को एक बार फिर सामने ला दिया है । उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल बोर्ड की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को निर्देश मिला कि इस वर्ष हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में भूमिका निभाने वाले जिन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को उसके फैसले में नामित किया गया है, उन्हें वह आगे से ऐसा न करने की चेतावनी दें । इस निर्देश का पालन करते हुए सुधीर मंगला ने इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा नामित तीनों पूर्व गवर्नर्स - दीपक तलवार, सुशील खुराना व विनोद बंसल को एक तय दिन/समय पर अपने ऑफिस में पहुँचने के लिए ईमेल लिखा । दीपक तलवार इससे भड़क गए और उन्होंने इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को गलत बताते हुए सुधीर मंगला के ऑफिस पहुँचने से साफ इंकार कर दिया । इस पर सुधीर मंगला ने उन्हें ध्यान दिलाया कि वह जो कर रहे हैं, उसके लिए उन्हें रोटरी इंटरनेशनल से निर्देश मिला है - और एक रोटेरियन के रूप में उन्हें भी जिसका पालन करना चाहिए । इस पर दीपक तलवार ने उन्हें लंबी-चौड़ी मेल लिख मारी, जिसमें इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को ब्यौरेवार तरीके से गलत ठहराते हुए उन्होंने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि वह सुधीर मंगला के ऑफिस नहीं पहुँचेंगे । डिस्ट्रिक्ट में कुछेक लोगों ने दीपक तलवार के इस तर्क को तो सही माना है कि इंटरनेशनल बोर्ड ने उन्हें तथा अन्य पूर्व गवर्नर्स को उचित प्रक्रिया अपनाए बिना जिस तरह से 'अपराधी' घोषित कर दिया है, वह गलत है; लेकिन दूसरे कई लोगों की तरह उनका भी मानना और कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल के निर्देश के अनुसार काम करने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की बात तो दीपक तलवार को सुननी/माननी ही चाहिए । मजे की बात यह है कि सुशील खुराना और विनोद बंसल ने सुधीर मंगला का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है । उनका कहना है कि सुधीर मंगला रोटरी इंटरनेशनल के निर्देश का पालन रहे हैं, जिसे पूरा करने में हमें सहयोग करना ही चाहिए; इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से हमारा जो विरोध है, उसे हम मान्य व उचित तरीके से इंटरनेशनल पदाधिकारियों के सामने रखेंगे ।
सुशील खुराना और विनोद बंसल के सहयोगात्मक रवैये को देखने के बाद तो हर किसी को दीपक तलवार का रवैया 'चोरी और सीनाजोरी' वाला लग रहा है । दीपक तलवार के लेकिन अपने तर्क हैं : उन्होंने इस झगड़े में आशीष घोष को भी लपेट लिया है । उनका कहना है कि सुधीर मंगला इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले की तो सिर्फ आड़ ले रहे हैं, वास्तव में वह आशीष घोष के इशारे पर काम कर रहे हैं । दीपक तलवार का तर्क है कि इंटरनेशनल बोर्ड का फैसला तो सुधीर मंगला के पास सात दिन पहले आ गया था; और उन्होंने तो इस फैसले को छिपा ही लिया था - लेकिन चार दिन बाद आशीष घोष ने जितेंद्र गुप्ता के जरिए इसे 'टॉक ऑफ द टाउन' बना दिया । दीपक तलवार का कहना है कि आशीष घोष ही सुधीर मंगला को भड़का कर उन्हें बेइज्जत कराना चाहते हैं, और वह आशीष घोष की इस योजना को सफल नहीं होने देंगे । आशीष घोष की इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से चूँकि अच्छी ट्यूनिंग बताई/देखी जाती है, इसलिए कुछेक लोगों को लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के बारे में केआर रवींद्रन के पास जो फीडबैक है, वह उन्हें आशीष घोष से ही मिला होगा । दरअसल इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले में जो कुछ भी कहा गया है, वह पूरी पूरी तरह सच है - जो लोग इस फैसले पर सवाल उठा भी रहे हैं, उनका तर्क घूमफिर कर यही है कि जब कोई चुनावी शिकायत दर्ज नहीं हुई, तो फिर उसकी जाँच और सजा क्यों ? कई दूसरे लोग इस तर्क को एक अन्य तर्क से खारिज कर रहे हैं - कि किसी हत्या की यदि एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, तो इस बिना पर क्या हत्यारे को सजा नहीं होना चाहिए ? दरअसल इसी तरह की बातों के चलते डिस्ट्रिक्ट के लोगों को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक तलवार का रवैया 'चोरी और सीनाजोरी' वाला लग रहा है ।
सुशील खुराना और विनोद बंसल के रवैये ने दीपक तलवार की 'सीनाजोरी' को और बेनकाब कर दिया है । सुशील खुराना और विनोद बंसल के रवैये की तारीफ करते हुए लोगों का कहना है कि यह दोनों यदि इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से दुखी और निराश होने के बावजूद रोटरी के दायरे में रहने के लिए तैयार हैं, तो दीपक तलवार अपने आप को रोटरी से ऊपर क्यों समझ रहे हैं ? कुछेक लोगों को हैरानी सुधीर मंगला के रवैये पर भी है : उनका कहना/पूछना है कि सुधीर मंगला आखिर किस मजबूरी में दीपक तलवार को 'सीनाजोरी' करने का मौका दे रहे हैं; और वह भी तब जबकि सुधीर मंगला ने तो रोटरी इंटरनेशनल के निर्देश पर ही उन्हें 'सम्मन' भेजा है । हैरान होने वाले इन लोगों का मानना/कहना है कि दीपक तलवार 'सीनाजोरी' दरअसल कर इसीलिए रहे हैं क्योंकि वह जानते हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला के बस की कुछ करना है ही नहीं - और 'सीनाजोरी' वाले रवैये से वह लोगों को यह भी जता देंगे कि इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ।
दीपक तलवार के रवैये को देखते हुए कुछेक लोग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को 'गर्म' करने के प्रयास भी करने लगे हैं : उनका कहना है कि मौका अच्छा है, इंटरनेशनल प्रेसीडेंट डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति को लेकर बुरी तरह खफा हैं ही - ऐसे में सुधीर मंगला को डिस्ट्रिक्ट में लोगों को दिखा देना चाहिए कि उन्हें 'लल्लूलाल' न समझा जाए और वह कठोर फैसला कर सकते हैं । कठोर फैसले के रूप में इस वर्ष के चुनाव को रद्द कर देने का सुझाव सुधीर मंगला को दिया जा रहा है । यह सुझाव देने वालों का कहना है कि इंटरनेशनल बोर्ड तक ने जब यह मान लिया है कि इस वर्ष के चुनाव में रोटरी नियमों व दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ है और यह उल्लंघन सभी उम्मीदवारों ने किया है, तो इस बिना पर चुनाव रद्द हो ही सकता है । रही बात चुनावी शिकायत के न होने की - तो जब कोई शिकायत न होने के बावजूद इंटरनेशनल बोर्ड मामले पर विचार कर फैसला ले सकता है, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ऐसा क्यों नहीं कर सकता है ? और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पास अब तो इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले का आधार भी है । यह सुझाव देने वाले लोगों का कहना है कि ऐसा फैसला करके सुधीर मंगला जाते जाते डिस्ट्रिक्ट में अपनी धमक भी दिखा/जता देंगे, और दीपक तलवार की 'सीनाजोरी' का भी जबाव दे देंगे । यह सुझाव देने वाले लोगों को उम्मीद हालाँकि कम ही है कि सुधीर मंगला कठोर फैसला करने का साहस सचमुच दिखा पायेंगे, लेकिन फिर भी वह इसलिए प्रयास कर लेना चाहते हैं कि शायद सुधीर मंगला का हरियाणवी जोश निकल आए और वह दीपक तलवार की 'सीनाजोरी' का जबाव देने का मन बना ही लें, और कोई कठोर फैसला कर ही डालें ।
उम्मीद और नाउम्मीदी की इस उहापोह ने डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक माहौल का पारा तो खासा ऊँचा चढ़ा ही दिया है ।

Thursday, February 11, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में सुब्रमनियन के सुझाव तथा समर्थन देने/दिलवाने के बावजूद हरिहरन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अपनी उम्मीदवारी को लेकर असमंजस में

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के बाबत हरिहरन के असमंजस भरे रवैये ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट सुब्रमनियन के लिए खासी समस्या खड़ी कर दी है । डिस्ट्रिक्ट के गवर्नर्स अगले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार पर एक राय बनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इस प्रयास में हरिहरन के कारण सुब्रमनियन अपनी कोई राय ही नहीं दे पा रहे हैं । सुब्रमनियन ने दरअसल हरिहरन को उम्मीदवारी प्रस्तुत करने का सुझाव दिया था, हरिहरन ने जिसे बहुत उत्साह से लिया । सुब्रमनियन ने अपने नजदीकियों को कहा/बताया है कि हरिहरन ने उनके सुझाव को जिस उत्साह से लिया है - उससे उन्होंने अंदाज लगाया है कि हरिहरन के मन में गवर्नर बनने की इच्छा जोर मारने लगी है । हरिहरन के नजदीकियों का भी कहना है कि जब से सुब्रमनियन गवर्नर 'बने' हैं, तब से हरिहरन की बातों में गवर्नर पद के लिए लालसा झलकने/दिखने लगी है । रवि चौधरी और विनय भाटिया को देख कर तो हरिहरन की यह लालसा इसलिए और बढ़ी है, क्योंकि उन्हें लगने लगा है और कुछेक मौकों पर उन्होंने कहा भी है कि जब इनके जैसे लोग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन सकते हैं, तो भला वह क्यों नहीं बन सकते ? सुब्रमनियन के अनुसार, गवर्नर पद के प्रति हरिहरन की बढ़ती दिलचस्पी को भाँप कर ही उन्होंने हरिहरन को उम्मीदवारी प्रस्तुत करने का सुझाव दिया । सुब्रमनियन के लिए यह समझना हालाँकि मुश्किल हो रहा है कि उनके सुझाव पर उत्साह दिखाने के बावजूद हरिहरन आखिर फैसला कर क्यों नहीं रहे हैं ?
सुब्रमनियन को यह भी पता है कि अपनी उम्मीदवारी को लेकर हरिहरन ने अपने क्लब के प्रमुख सदस्यों से बात भी की है और उनके क्लब के सभी प्रमुख सदस्यों ने उन्हें उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित भी किया है । हरिहरन को अनूप मित्तल की तरफ से फच्चर फँसने का डर था । दरअसल अनूप मित्तल को संभावनाशील उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है; सुधीर मंगला के गवर्नर-काल में उनकी जिस तरह की सक्रियता रही और तमाम आयोजनों में उन्होंने जिस तरह से बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया - उसे देख/जान कर कई लोगों को लगा कि अनूप मित्तल कहीं अपनी उम्मीदवारी की तैयारी तो नहीं कर रहे हैं ? इसी बिना पर हरिहरन ने अनूप मित्तल को लेकर आशंका व्यक्त की थी, जिस पर सुब्रमनियन ने उन्हें अनूप मित्तल से बात करने की सलाह दी थी । हरिहरन ने सुब्रमनियन को बता भी दिया कि उनकी अनूप मित्तल से बात हो गई है और अनूप मित्तल ने उन्हें साफ कर दिया है कि वह अभी उम्मीदवार नहीं हो रहे हैं । सभी तरफ से अनुकूल रिपोर्ट मिलने के बाद भी हरिहरन अपनी उम्मीदवारी के मामले में आगे बढ़ते नहीं दिख रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट सुब्रमनियन के लिए समस्या की बात यह है कि हरिहरन अपनी उम्मीदवारी की बात से इंकार भी नहीं कर रहे हैं । 
सुब्रमनियन को इसीलिए गवर्नर्स की मीटिंग में चुप रह जाना पड़ा । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए एक राय पर पहुँचने के लिए हुई मीटिंग में अशोक घोष और विनोद बंसल ने संजीव राय मेहरा का नाम लिया; आशीष घोष और संजय खन्ना ने रवि दयाल की वकालत की; और दमनजीत सिंह ने अशोक कंतूर की बात की । सुशील खुराना और रवि चौधरी ने सुब्रमनियन पर मामला छोड़ दिया - सुब्रमनियन ने कोई साफ बात नहीं की । उन्होंने साफ बात इसलिए ही नहीं की कि हरिहरन की तरफ से उन्हें स्पष्ट रूप से हाँ या ना नहीं की है । हरिहरन की उम्मीदवारी को लेकर परेशान नजर आ रहे सुब्रमनियन को उनके नजदीकियों ने हालाँकि हरिहरन के चक्कर में न पड़ने की सलाह दी है । उनका कहना है कि हरिहरन के बस की उम्मीदवार बनना नहीं है, और इसलिए ही वह तरह-तरह की बहानेबाजियाँ करके अपनी उम्मीदवारी की बात से पीछे हटते रहे हैं । अब की बार हरिहरन अपनी उम्मीदवारी को लेकर हालाँकि ज्यादा उत्साहित लग रहे हैं, किंतु उनका यह उत्साह भी उनमें उम्मीदवार बनने की हिम्मत नहीं पैदा कर पा रहा है । सुब्रमनियन ने उन्हें उम्मीदवार बनने का सुझाव दिया है, और उनकी उम्मीदवारी को दूसरे नेताओं का भी समर्थन दिलवाने का उन्हें भरोसा दिया है - इससे हरिहरन को अपनी उम्मीदवारी के लिए मौका तो अनुकूल लग रहा है, किंतु फिर भी वह अपनी उम्मीदवारी को लेकर सकारात्मक फैसला नहीं कर पा रहे हैं । हालाँकि वह इंकार भी नहीं कर रहे हैं । अपनी उम्मीदवारी को लेकर हरिहरन की इस असमंजसता ने सुब्रमनियन के लिए खासी दुविधा की स्थिति बना दी है ।

Saturday, December 19, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अतुल देव की शिकायत पर रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय की सक्रियता ने विनय भाटिया की उम्मीदवारी रद्द होने का खतरा पैदा किया

जयपुर/नई दिल्ली । अतुल देव ने विनय भाटिया की जो शिकायत की है, उस पर कार्रवाई टलवाने के लिए विनय भाटिया के समर्थक पूर्व गवर्नर्स ने जयपुर इंस्टीट्यूट में लॉबिंग तो खूब की - लेकिन अपनी लॉबिंग के सफल होने का खुद उन्हें ही कोई भरोसा नहीं मिला है । विनय भाटिया के समर्थक एक पूर्व गवर्नर ने इन पँक्तियों के लेखक से बात करते हुए बताया कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन इस मामले में लगता है कि अपना मन बना चुके हैं, और इसलिए रोटरी के दूसरे नेताओं ने इस मामले से दूर रहने का ही निश्चय किया है - और इस कारण कोई उन्हें मदद का आश्वासन तक देने को तैयार नहीं हुआ है । फरीदाबाद और दिल्ली में बैठे विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थकों को उम्मीद थी कि रोटरी इंस्टीट्यूट में शामिल होने गए उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स उन्हें कोई अच्छी खबर भेजेंगे, किंतु जयपुर में जुगाड़ लगा रहे उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स को अभी तक, जबकि रोटरी इंस्टीट्यूट अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, कोई सफलता हाथ नहीं लगी है । फरीदाबाद और दिल्ली में बैठे विनय भाटिया के कई एक नजदीकियों व समर्थकों को तो जयपुर से सूचना मिली है कि अतुल देव की शिकायत पर विनय भाटिया की उम्मीदवारी का नामांकन रद्द होना निश्चित है । नोमीनेटिंग कमेटी के लिए तय हुए रोटेरियंस के बीच भी यह सूचना चूँकि चली गई है, इसलिए नोमीनेटिंग कमेटी के लिए प्रस्तावित रोटेरियंस में जो लोग विनय भाटिया के पक्ष में जाने का मन बना रहे थे - उन्होंने भी सोचना शुरू कर दिया है कि विनय भाटिया को वोट देकर अपना वोट खराब क्यों करना ? इस माहौल से विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है, और उनके लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी के पक्ष में अभियान चलाते रहना मुश्किल हुआ है । 
दिलचस्प सीन यह बना है कि इस मामले को लेकर विनय भाटिया के समर्थकों के बीच आपस में ही सिर-फुटौव्वल शुरू हो गई है, और उनके समर्थक इस स्थिति के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने लगे हैं । उल्लेखनीय है कि विनय भाटिया की उम्मीदवारी के नजदीकी समर्थकों पर शुरू से ही यह गंभीर आरोप रहा है कि उन्होंने बहुत ही फूहड़ तरीके से हुड़दंगबाजी करके विनय भाटिया की उम्मीदवारी के अभियान को चलाया है, और कई मौकों पर हुड़दंगबाजी में खुद विनय भाटिया भी शामिल हुए/दिखे - जिससे लोगों के बीच विनय भाटिया की उम्मीदवारी को लेकर नकारात्मक प्रभाव ही बना है । डिस्ट्रिक्ट में जब चारों तरफ से आलोचना हुई तो विनय भाटिया और उनके नजदीकी समर्थकों पर लगाम कसी गई; विनय भाटिया को समझाया गया कि रोटरी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनना चाहते हो तो उसके लायक यदि सचमुच बन न सको तो लेकिन कम से कम 'दिखने' की कोशिश तो करो । विनय भाटिया ने भेष बदलने की कोशिश तो खूब की, लेकिन भेष बदल कर असलियत ज्यादा समय तक चूँकि नहीं छिपाई जा सकती, और वह सामने आ ही जाती है - विनय भाटिया खुद अपनी ही सोच और अपने ही व्यवहार का शिकार हो गए । विनय भाटिया और उनके नजदीकी समर्थक अपनी मुसीबत के लिए अब अपने ही समर्थक पूर्व गवर्नर्स को कोस रहे हैं : उनका कहना है कि उनके समर्थक गवर्नर्स उनकी कमियाँ/गलतियाँ ही बताते रहते हैं और जब सचमुच कुछ करने की जरूरत होती है तो बहानेबाजी करने लगते हैं । विनय भाटिया और उनके समर्थकों की आलोचना का शिकार हो रहे उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स का कहना है कि विनय भाटिया और उनके नजदीकी समर्थक सलाह सुनेंगे/मानेंगे नहीं, और जब अपनी ही हरकतों से फँसेंगे तो उम्मीद करेंगे कि अब इन्हें जैसे भी करके बचाओ । विनय भाटिया के समर्थक गवर्नर्स का ही कहना है कि अपनी उम्मीदवारी के नामांकन के निरस्त होने की स्थिति खुद विनय भाटिया ने ही अपने रवैये से पैदा की है ।
मामला गिफ्ट देने का है । उल्लेखनीय है कि रोटरी की चुनावी राजनीति में उम्मीदवार द्वारा पार्टियाँ देने तथा गिफ्ट देने का चलन स्वीकार्यता पा चुका है, और सभी यह मानते और जानते हैं कि समर्थन पाने के लिए उम्मीदवार को यह करना ही होगा । इसके बाद 'देखने' की बात यह रह जाती है कि कौन उम्मीदवार इस काम को अंजाम किस तरह से और कैसे देता है ? उम्मीद की जाती है कि पार्टियाँ और गिफ्ट इस 'अदा' के साथ दिया जाए कि पाने वाले को अच्छा लगे और वह देने वाले के व्यवहार से प्रभावित हो । इस 'अदा' का एक फायदा यह भी होता है कि रोटरी की चुनावी राजनीति में जो रोटेरियंस पार्टियों व गिफ्ट्स के चलन के पक्ष में नहीं भी होते हैं, वह भी व्यवहार से प्रभावित होकर चुप लगा जाते हैं । विनय भाटिया इस बात को समझने/अपनाने में चूक गए - जिसका नतीजा यह रहा कि उम्मीदवार के रूप में उन्होंने जो पार्टियाँ दीं और जो गिफ्ट दिए, वह खासी फूहड़ता के साथ दिए; जिन्हें 'लेते' हुए लोगों ने खुद को खासा अपमानित ही महसूस किया । कुछेक लोगों ने आपसी बातचीत में कहा भी कि विनय भाटिया ने इस अंदाज में गिफ्ट पहुँचाएँ जैसे वह वोट पाने के लिए रिश्वत पहुँचा रहे हों । लोगों के इस अपमान महसूसने को आवाज दी रोटरी क्लब दिल्ली इंद्रप्रस्थ ओखला के वरिष्ठ सदस्य अतुल देव ने । अतुल देव ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को शिकायत लिखी कि नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्य के रूप में उनका वोट पाने के लिए विनय भाटिया ने उन्हें गिफ्ट भेजा है, जो रोटरी के उच्च आदर्शों के तो खिलाफ है ही, साथ ही चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास भी है । अतुल देव ने यह कहते हुए नोमीनेटिंग कमेटी की अपनी सदस्यता भी छोड़ दी कि जहाँ चुनाव को इस तरह मजाक बना दिया जाए वहाँ चुनावी प्रक्रिया में उनके शामिल होने का कोई मतलब नहीं है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला ने अतुल देव के इस आरोप पर विनय भाटिया से जबाव माँगा । विनय भाटिया अब तक अपने आप को विजयी समझने लगे थे, सो उसी 'नशे' में उन्होंने जबाव में अतुल देव को झूठा बता दिया । अतुल देव आर्मी में रहे हैं और इस नाते उनके कामकाज और काम करने के उनके तरीके में एक खास किस्म का अनुशासन रहा है; पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता के साथ उनकी नजदीकियत रही है - उन्हें विनय भाटिया से अपने को झूठा सुनना और बुरा लगा । विनय भाटिया ने सोचा यह था कि वह अतुल देव को झूठा कह देंगे और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला मामले को खत्म/बंद कर देंगे - लेकिन अतुल देव की तरफ से सुधीर मंगला को मामले की जाँच के लिए कमेटी बनाने का सुझाव मिला । अतुल देव का कहना रहा कि जिस पर आरोप लगता है, वह तो आरोप को झूठा बताता ही है, ऐसे में आरोप की सच्चाई की पड़ताल तो तीसरा पक्ष ही कर सकेगा । सुधीर मंगला ने मामले को रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को भेज दिया और सलाह माँगी कि वह क्या करें ? इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने चूँकि रोटरी में चुनाव को लेकर होने वाली धांधलियों और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशों के खिलाफ बड़ा कठोर रवैया अपनाया हुआ है, लिहाजा रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने अतुल देव की शिकायत के मामले को गंभीरता से लिया । अतुल देव की शिकायत को पुख्ता बनाने के उद्देश्य से रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने अतुल देव से एफिडेविट देने को कहा, जो अतुल देव ने तुरंत से दे दिया । इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही विनय भाटिया समर्थकों के बीच खलबली मच गई । अभी तक तो विनय भाटिया और उनके समर्थक आश्वस्त थे कि अतुल देव की शिकायत का कुछ नहीं होगा : उन्हें पक्का भरोसा था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला कुछ करने की हिम्मत नहीं करेंगे, और जब वह हिम्मत नहीं करेंगे तो फिर होगा भी क्या ? 
अतुल देव की तरफ से भी विनय भाटिया और उनके समर्थक आश्वस्त थे कि अतुल देव की रोटरी में कोई खास सक्रियता भी नहीं है, और वह ज्यादा कुछ जानते भी नहीं हैं; सुशील गुप्ता के साथ उनकी जो नजदीकियत है वह भी व्यक्तिगत किस्म की है और सुशील गुप्ता को भी मैनेज कर लिया जायेगा । लेकिन रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने जिस तरह से अतुल देव की शिकायत में दिलचस्पी ली है और जिस तरह से उनसे एफिडेविट लिया है, उससे विनय भाटिया और उनके समर्थकों के बीच खलबली मची है । विनय भाटिया के समर्थक पूर्व गवर्नर्स ने रोटरी इंस्टीट्यूट में जयपुर जाते समय विनय भाटिया को भरोसा तो दिया था कि जयपुर में सभी बड़े नेता मिलेंगे, सो वह कुछ जुगाड़ लगायेंगे । लेकिन जुगाड़ कुछ लगा नहीं है । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के रवैये को देखते हुए रोटरी के बड़े नेताओं ने जयपुर में मौजूद डिस्ट्रिक्ट 3011 के विनय भाटिया के समर्थक पूर्व गवर्नर्स को साफ बता दिया है कि विनय भाटिया की उम्मीदवारी का निलंबन पक्का है, इसलिए इस मामले में अब दिलचस्पी न लो । जयपुर गए अपने समर्थक पूर्व गवर्नर्स से यह सुन/जान कर विनय भाटिया और उनके समर्थकों को गहरा धक्का लगा है और निराशा व हताशा में वह अपने समर्थक पूर्व गवर्नर्स को कोसने में लग गए हैं । 

Monday, December 14, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी बॉल के स्थगन के लिए विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने नवदीप चावला और विजय जिंदल को निशाना बनाया

फरीदाबाद/नई दिल्ली । विनय भाटिया और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी के समर्थकों ने रोटरी बॉल की तैयारियों की ढीलमढाल के लिए जिस तरह नवदीप चावला को जिम्मेदार ठहराना शुरू किया, उसका नतीजा यह हुआ कि नवदीप चावला ने बॉल की तैयारी में दिलचस्पी लेना बिलकुल ही छोड़ दिया और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को 20 दिसंबर को आयोजित होने वाले बॉल कार्यक्रम को स्थगित कर देने के लिए मजबूर होना पड़ा है । मजेदार सीन यह है कि बॉल कार्यक्रम के स्थगित होने पर विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक कुछेक पूर्व गवर्नर सुधीर मंगला को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । उनका कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला के नकारापन का यह एक बड़ा सुबूत है कि अपने एक महत्वपूर्ण आयोजन को तय समय पर कर पाने में वह विफल रहे हैं और उसे स्थगित करके उन्हें अपनी इज्जत बचाना पड़ रही है । सुधीर मंगला और उनके नजदीकी बॉल कार्यक्रम के स्थगित होने के लिए फरीदाबाद के रोटेरियन नेताओं के साथ साथ विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । सुधीर मंगला और उनके नजदीकी फरीदाबाद के रोटेरियन नेताओं तथा विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स की बातों में आने तथा उन पर भरोसा करने को अपनी सबसे बड़ी भूल व गलती के रूप में रेखांकित कर रहे हैं । सुधीर मंगला और उनके नजदीकी मान रहे हैं और कह रहे हैं कि वह यदि 'यह गलती' न करते तो उन्हें आज यह दुर्दिन न देखना पड़ता । सुधीर मंगला और उनके नजदीकी इस बात पर भी हैरान हैं कि विनय भाटिया के समर्थक पूर्व गवर्नर्स अपने नकारापन और अपनी असफलता का ठीकरा उनके सिर क्यों फोड़ रहे हैं ?
सुधीर मंगला और उनके नजदीकियों का कहना है कि फरीदाबाद के रोटेरियन नेताओं तथा विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स ने रोटरी डिस्ट्रिक्ट बॉल आयोजन कमेटी का चेयरमैन नवदीप चावला को तथा को-चेयरमैन विजय जिंदल को बनाने के लिए उनपर खासा दबाव बनाया था । सुधीर मंगला को आश्वस्त किया गया था कि बॉल की सारी जिम्मेदारी वह फरीदाबाद के रोटेरियंस को सौंप दें और निश्चिंत हो जाएँ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला को यह ऑफर स्वाभाविक रूप से बहुत ही आकर्षक लगा, लिहाजा उन्होंने इसे स्वीकार करने में जरा भी देर नहीं की और बॉल आयोेजन कमेटी के दोनों बड़े पद फरीदाबाद को सौंप दिए । सुधीर मंगला को हालाँकि कुछेक लोगों ने उस समय यह समझाने का खूब प्रयास किया था कि जिन लोगों की बातों में आकर वह 'यह' रहे हैं, वह फरीदाबाद के नाम पर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं और फरीदाबाद के लोगों के साथ साथ उन्हें भी इस्तेमाल कर रहे हैं - सुधीर मंगला ने लेकिन तब किसी की नहीं सुनी । फरीदाबाद के लोगों के साथ साथ नवदीप चावला को भी धीरे धीरे समझ में आने लगा कि विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक नेता फरीदाबाद के नाम पर उन्हें इस्तेमाल करने तथा उनकी जेब काटने का काम कर रहे हैं । 
फरीदाबाद के रोटेरियंस का माथा तो दरअसल यह देख/जान कर ठनका कि विनय भाटिया और उनकी उम्मीदवारी के समर्थक नेता अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए हर काम की जिम्मेदारी ले लें, और फिर पैसा देने के लिए उन पर दबाव बनाएँ । पेट्स में यही हुआ । विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने अपना प्रभाव जमाने/दिखाने के लिए पेट्स में दिए जाने वाले गिफ्ट्स का जिम्मा ले लिया और फिर उसके खर्च का बोझ फरीदाबाद से पेट्स में जाने वाले लोगों के सिर मढ़ने का प्रयास किया । फरीदाबाद में इसकी इतनी तीखी प्रतिक्रिया हुई कि कई लोगों ने पेट्स में जाने से ही इंकार कर दिया । फरीदाबाद में लोगों का कहना रहा कि यह सब चूँकि विनय भाटिया की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के लिए किया जा रहा है, इसलिए इसका खर्चा विनय भाटिया को उठाना चाहिए । उस बबाल को बड़ी मुश्किल से संभाला जा सका । विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने लेकिन उस बबाल से कोई सबक नहीं लिया । विनय भाटिया के क्लब के अधिष्ठापन समारोह में फिर यही समस्या पैदा हुई । विनय भाटिया ने चाहा कि उनकी उम्मीदवारी के संदर्भ को देखते हुए उनके क्लब का अधिष्ठापन समारोह जोरशोर से हो और उसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाए । क्लब के पदाधिकारियों व सदस्यों को विनय भाटिया की इस चाहना को पूरा करने को लेकर तो कोई समस्या नहीं थी, किंतु इसके खर्च को लेकर मामला फँस गया । क्लब के पदाधिकारियों व सदस्यों का कहना रहा कि विनय भाटिया की उम्मीदवारी के चक्कर में अधिष्ठापन समारोह में जो अतिरिक्त खर्चा हो रहा है, उसकी भरपाई विनय भाटिया करें; किंतु विनय भाटिया इस चक्कर में रहे कि जो भी खर्चा है, उसे क्लब के लोग मिलजुल कर पूरा करें । इसे लेकर क्लब में खासी हीलहुज्जत हुई और बस जैसे तैसे क्लब का अधिष्ठापन समारोह हुआ । 
डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले तक आते आते फरीदाबाद के लोगों के बीच विनय भाटिया और उनके समर्थकों की पोल-पट्टी पूरी तरह खुल चुकी थी - लेकिन मजे की बात यह रही कि विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने इस सच्चाई से अपनी आँखें पूरी तरह मूंदी रखीं । नतीजा यह रहा कि विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने तो दीवाली मेले के लिए स्पॉन्सरशिप दिलवाने तथा टिकट बिकवाने को लेकर बड़े बड़े दावे किए, किंतु फरीदाबाद के लोगों ने उनके दावों को पूरा करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली । विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने दीवाली मेले के नाम पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को बड़े बड़े सब्ज़बाग दिखाए कि इतने की स्पॉन्सरशिप यहाँ से दिलवायेंगे, उतने की स्पॉन्सरशिप वहाँ से दिलवायेंगे, इतने टिकट बिकवायेंगे - लेकिन जब सचमुच कुछ करने का मौका आया तो विनय भाटिया और उनके समर्थक सुधीर मंगला से मुँह छिपाते फिरे । टिकटों का हिसाब देने का समय आया तो बहुत से टिकटें तो यह कह कर लौटा दीं कि यह बिक नहीं पाई हैं, और बिकी हुई टिकटों का पैसा भी बाद में देने की बात कही गई । सुधीर मंगला दीवाली मेले के तीन लाख से ज्यादा रुपए विनय भाटिया और उनके समर्थकों पर अभी तक बकाया होने का रोना रोते सुने जा रहे हैं - और उन्हें यह तक नहीं बताया जा पा रहा है कि यह बकाया रकम देगा कौन ? विनय भाटिया और उनके समर्थक नेता इसके लिए फरीदाबाद के रोटेरियंस को जिम्मेदार तो ठहरा रहे हैं, लेकिन यह नहीं बता रहे हैं कि यह बकाया रकम मिलेगी कैसे और किससे ?
डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले में फरीदाबाद के लोगों ने जिस तरह से विनय भाटिया और उनके समर्थकों की चालबाजी में फँसने से इंकार किया, उसे देख/जान कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला और बॉल कमेटी के चेयरमैन तथा को-चेयरमैन विजय जिंदल के कान खड़े हुए । नवदीप चावला और विजय जिंदल बॉल के आयोजन से पीछा छुटाते से दिखे तो विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने उन्हें ही लपेटे में लेना शुरू कर दिया । विनय भाटिया और उनके समर्थकों की तरफ से कहा जाने लगा कि नवदीप चावला व विजय जिंदल को पद पाने का तो शौक है, लेकिन पद की जिम्मेदारी निभाने में दिलचस्पी नहीं है - और उनके इस रवैये से फरीदाबाद का नाम तो ख़राब हो ही रहा है, विनय भाटिया की उम्मीदवारी पर भी बुरा असर पड़ रहा है । विनय भाटिया और उनके नजदीकियों की तरफ से नवदीप चावला और विजय जिंदल पर दबाव बनाने के उद्देश्य से कहा जाने लगा कि इनके बस की यदि बॉल को आयोजित करना नहीं है, तो यह अपने अपने पदों से इस्तीफ़ा क्यों नहीं दे देते ? विनय भाटिया और उनके समर्थकों का यह रवैया नवदीप चावला और विजय जिंदल के लिए हैरान करने वाला था - क्योंकि इन्हें बॉल की जिम्मेदारी मिलने से विनय भाटिया और उनके समर्थक खुश ही दिखते रहे हैं । नवदीप चावला व विजय जिंदल के लिए यह समझना मुश्किल हुआ कि अचानक से इन्हें क्या हो गया है, जो यह इनके खिलाफ बातें करने लगे ? विनय भाटिया के नजदीकियों का ही कहना है कि नवदीप चावला और विजय जिंदल के प्रति विनय भाटिया तथा उनके समर्थकों ने विरोधी रवैया इसलिए अपना लिया ताकि बॉल की असफलता से विनय भाटिया की उम्मीदवारी पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े । विनय भाटिया और उनके समर्थकों के इस स्वार्थी रवैये ने नवदीप चावला व विजय जिंदल को खासी तगड़ी चोट पहुँचाई । फरीदाबाद के लोगों के इस तरह आपस में एक दूसरे को नीचा दिखाने की कार्रवाई में लगा देख डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को बॉल के आयोजन को स्थगित कर देने में ही अपनी भलाई नजर आई । फरीदाबाद के रोटेरियन नेताओं की आपसी खींचतान ने पहले दीवाली मेले के आयोजन को घाटा पहुँचाया और अब रोटरी के प्रमुख व प्रतिष्ठित कार्यक्रम को ही लील लिया है । 

Tuesday, December 8, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी बॉल की तैयारियों की ढीलमढाल के लिए विनय भाटिया और उनके नजदीकियों ने जिस तरह से नवदीप चावला को जिम्मेदार ठहराना शुरू किया है, उसे देख/सुन कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को बॉल कार्यक्रम पिटता हुआ नजर आ रहा है

फरीदाबाद । फरीदाबाद के रोटेरियंस नेताओं के बीच तालमेल की कमी के चलते रोटरी फाउंडेशन के बॉल कार्यक्रम की तैयारियाँ ढीली पड़ी हुई हैं, जिसे देख/जान कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला यह सोच सोच कर पसीने पसीने हो रहे हैं कि बॉल कार्यक्रम सफल हो पायेगा या नहीं ? 20 दिसंबर को आयोजित होने वाले बॉल कार्यक्रम के आयोजन स्थल को लेकर ही असमंजस अब जाकर खत्म हुआ है । पहले यह आयोजन महरौली स्थित झंकार बैंक्वेट में आयोजित होने की बात हो रही थी, लेकिन उसे लेकर कई तरह की शिकायतें/समस्याएँ थीं - लिहाजा फैसला नहीं हो पा रहा था । डिस्ट्रिक्ट के प्रमुख पदाधिकारियों को बॉल आयोजन कमेटी के चेयरमैन नवदीप चावला तथा को-चेयरमैन विजय जिंदल का रवैया काम पूरा करने की बजाए, काम को लटकाए रखने वाला 'दिखा' है । सुधीर मंगला ने सख्ती दिखाई तो सुना गया है कि अब सूरजकुंड रोड पर स्थित होटल राजहंस को आयोजन-स्थल के रूप में फाइनल किया गया है । बॉल-आयोजन के लिए अभी तक स्पॉन्सरशिप आदि की भी कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिसके कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला का मन अनिष्ट की आशंका में बड़ा घबराया घबराया सा हो रहा है । बॉल-आयोजन की तैयारियों की लेटलतीफी के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीम की तरफ से नवदीप चावला को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, तो नवदीप चावला इसके लिए फरीदाबाद के दूसरे रोटेरियंस नेताओं को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । नवदीप चावला का कहना है कि फरीदाबाद के रोटेरियंस नेताओं ने उन्हें चेयरमैन तो बना/बनवा दिया है, लेकिन अब उन्हें अकेला छोड़ दिया है और कोई भी उनकी मदद नहीं कर रहा है । फरीदाबाद के दूसरे रोटेरियंस नेताओं का कहना है कि नवदीप चावला चेयरमैन बने हैं, तो जो कुछ भी होना/करना है वह करने की पहल उन्हें ही करनी है और उन्हें ही दूसरों से मदद लेनी है । फरीदाबाद में कुछेक लोग यह कहते हुए भी सुने गए हैं कि नवदीप चावला को चेयरमैन बनने का शौक तो रहा, लेकिन यह समझने में उनसे चूक हो गई है कि चेयरमैन के रूप में उनकी कुछेक जिम्मेदारियाँ भी हैं - जिन्हें उन्हें निभाना है । 
बॉल की तैयारियों की लेटलतीफी को लेकर फरीदाबाद में नवदीप चावला तथा दूसरे रोटेरियंस नेताओं के बीच जो आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं, उनका ठीकरा विनय भाटिया के सिर फूट रहा है । दरअसल हर कोई विनय भाटिया को अपना गवाह बनाना चाहता है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का उम्मीदवार होने के नाते विनय भाटिया इस पचड़े से दूर रहना चाहते हैं । किंतु चूँकि यह सारा झमेला हो उन्हीं के लिए रहा है, इसलिए ले दे कर बात उनके ही सिर आ जाती है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत विनय भाटिया की उम्मीदवारी के कारण ही फरीदाबाद के रोटेरियंस ने हर मामले में आगे से आगे रहने/दिखने का प्रयास किया है । प्रयास तो उन्होंने किया, लेकिन 'डिलीवरी' करने के मामले में हर प्रयास हमेशा ही फजीहत का शिकार हुआ । दरअसल फरीदाबाद के रोटेरियंस बातें तो बड़ी बड़ी करते हैं, लेकिन सचमुच कुछ करने की बारी आती है तो ठन-ठन गोपाल साबित होते हैं । अभी पिछले दिनों ही दीवाली मेले में भी फरीदाबाद के रोटेरियंस अपने कमिटमेंट्स पूरे करने में विफल रहे । दीवाली मेले के टिकट लेने/बिकवाने को लेकर फरीदाबाद के रोटेरियंस ने पहले तो लंबे-चौड़े वायदे किए, लेकिन जब टिकटों का भुगतान करने का मौका आया तो मुँह छिपाते/बचते नजर आए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला फरीदाबाद के रोटेरियंस पर दीवाली मेले के करीब तीन लाख रुपए बकाया रहने का रोना रोते कई जगह सुने गए हैं । वास्तव में इसीलिए सुधीर मंगला को रोटरी बॉल का डर सता रहा है । उन्हें डर है कि फरीदाबाद के रोटेरियंस ने जिस तरह दीवाली मेले में उन्हें धोखा दिया है, वैसा धोखा कहीं रोटरी बॉल को लेकर भी तो नहीं देंगे ? यह डर उन्हें इसलिए भी है क्योंकि रोटरी बॉल की सारी जिम्मेदारी फरीदाबाद के रोटेरियंस ने ली तो हुई है, लेकिन वह कुछ करते हुए दिख नहीं रहे हैं; और कुछ न हो पाने के लिए एक दूसरे को ही जिम्मेदार ठहराने में लगे हुए हैं । 
इस सारे झमेले में मुसीबत लेकिन विनय भाटिया की हो रही है । दरअसल हर कोई अपनी समस्या हल करने/करवाने के लिए विनय भाटिया को पकड़ता । हर कोई यही मानता है कि फरीदाबाद के रोटेरियंस ने जो जिम्मेदारी ली है, वह चूँकि विनय भाटिया की उम्मीदवारी को मजबूती देने/दिलाने के लिए ली है - इसलिए हर समस्या को हल करवाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है । विनय भाटिया लेकिन हर जिम्मेदारी से बचते हुए नजर आए - उन्होंने समझा तो यह कि बचने की कोशिश करके वह सचमुच बच जायेंगे, किंतु हुआ उल्टा और बचने की कोशिश में वह फँसते ज्यादा जा रहे हैं । विनय भाटिया के रवैये से फरीदाबाद के रोटेरियंस विनय भाटिया की उम्मीदवारी को बोझ समझने लगे हैं । वहाँ लोगों को लगने लगा है कि विनय भाटिया डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तो बनना चाहते हैं, लेकिन जिम्मेदारी कुछ लेना नहीं चाहते हैं; जिम्मेदारियों का टोकरा वह दूसरों के सिर टिका देने की जुगाड़ में लगे रहते हैं । शुरू में तो फरीदाबाद के रोटेरियंस विनय भाटिया तथा उनकी उम्मीदवारी का झंडा उठाए नेताओं की बातों में आ गए और खासे उत्साह के साथ उन्होंने अपनी अपनी जेबें ढीली कीं; लेकिन जल्दी ही लोगों को समझ में आ गया कि विनय भाटिया और उनकी उम्मीदवारी का झंडा उठाए रखने वाले नेताओं ने उन्हें 'शिकारपुर का' समझ लिया है । इसके बाद से फरीदाबाद के लोगों ने उनके झाँसे में फँसने से बचना शुरू कर दिया है । फरीदाबाद के रोटेरियंस के इस बचने की कार्रवाई के कारण ही विनय भाटिया और उनके समर्थक दीवाली मेले के कमिटमेंट को पूरा करने में असफल रहे हैं - और इसी आधार पर बॉल का कार्यक्रम भी पिटता हुआ नजर आ रहा है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला के समस्या यह आ खड़ी हुई है कि वह विनय भाटिया और उनके समर्थकों से दीवाली मेले का बकाया बसूल करें, और या बॉल को सफल करवाने की उम्मीद करें ? बॉल की तैयारियों की ढीलमढाल को लेकर विनय भाटिया और उनके नजदीकी जिस तरह नवदीप चावला को जिम्मेदार ठहराने लगे हैं, उसके कारण मामला और भी गंभीर हो गया है । 

Thursday, September 3, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में मुकेश अरनेजा की अपनी अहमियत दिखाने की कोशिशों ने दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के उद्देश्य से बहुत मेहनत करके आयोजित किए गए कार्यक्रम पर पानी फेरा

गाजियाबाद । रोटरी क्लब गाजियाबाद के चार्टर दिवस कार्यक्रम में गैर-जरूरी भूमिका निभा कर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मुकेश अरनेजा ने न सिर्फ क्लब के लोगों को नाराज किया, बल्कि कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों को झिकाया भी - और मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में पधारे पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता से खुद फटकार भी सुनी । कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों के रिएक्शन में एक यह बात प्रमुखता से रेखांकित हुई है कि बहुत मेहनत और तैयारी से आयोजित किए गए कार्यक्रम का मुकेश अरनेजा ने अपनी टुच्ची कारस्तानियों से नाश मार दिया । उल्लेखनीय है कि अन्य कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के साथ मुकेश अरनेजा भी अतिथि के रूप में कार्यक्रम में आमंत्रित थे, और उनके अलावा अन्य बहुत से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स भी कार्यक्रम में मौजूद थे - लेकिन एक अकेले मुकेश अरनेजा ही थे जो बार-बार अपनी कुर्सी से उठ खड़े होकर कभी एमओसी को तो कभी क्लब के दूसरे पदाधिकारियों को हिदायतें दे रहे थे; और अपनी इस हरकत से कार्यक्रम को वास्तव में डिस्टर्ब ही कर रहे थे । मुकेश अरनेजा की इस हरकत से खीझ रहे लोग तरह तरह की टिप्पणियाँ भी कर रहे थे - किसी को कहते सुना गया कि 'इसकी कुर्सी में चीटियाँ तो नहीं है जिनके काटने से यह कुर्सी से बार-बार उठ रहा है'; तो किसी ने फब्ती कसी कि 'इसने क्या रोटरी क्लब गाजियाबाद ज्वाइन कर लिया है' । मुकेश अरनेजा की हरकत से खीझ कर एक मौके पर तो मुख्य अतिथि की भूमिका निभा रहे पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता तक ने मुकेश अरनेजा को फटकारा कि 'तुम मत बोलो, क्लब के पदाधिकारियों को जबाव देने दो ।' लेकिन अपनी बेशर्मी के लिए (कु)ख्यात मुकेश अरनेजा पर लोगों की फब्तियों और सुशील गुप्ता की फटकार का कोई असर नहीं पड़ा ।
मुकेश अरनेजा की हरकतों से रोटरी क्लब गाजियाबाद के पदाधिकारियों ने तो अपने आप को बहुत अपमानित तक महसूस किया । खासकर कार्यक्रम में एमओसी की भूमिका निभा रहे सचिन वत्स ने ! मुकेश अरनेजा द्वारा बार बार टोके जाने से क्षुब्ध और अपमानित महसूस कर रहे सचिन वत्स ने एक मौके पर तो क्लब के पदाधिकारियों से यहाँ तक कह दिया कि यह काम किसी और से करा लो - तब क्लब के वरिष्ठ सदस्य अनिल अग्रवाल ने हस्तक्षेप करके मामले को संभाला । दरअसल एमओसी के रूप में सचिन वत्स जो कुछ कह/कर रहे थे, उसमें कमियाँ/खामियाँ निकालते हुए मुकेश अरनेजा उनके कहे/किए को बार बार संशोधित कर रहे थे - और लोगों के सामने ऐसा जता/दिखा रहे थे कि सचिन वत्स को तो कुछ पता ही नहीं है और वह जो कुछ भी कह/कर रहे हैं, वह सब गलत-सलत है । मुकेश अरनेजा द्वारा बार-बार टोके जाने से अपमानित महसूस करते हुए सचिन वत्स ने एमओसी की जिम्मेदारी छोड़ देने की बात की, तो अनिल अग्रवाल आगे आए और उन्होंने लोगों को बताया कि सचिन वत्स की बातों में जो गलतियां हो रही हैं, वह वास्तव में स्क्रिप्ट का हिस्सा हैं - यानि यह गलतियाँ जानबूझ कर की जा रही हैं, ताकि कार्यक्रम में लोगों की दिलचस्पी और संलग्नता को बनाए रखा जा सके । इस पर रोटरी क्लब गाजियाबाद के ही कुछेक लोगों को अनिल अग्रवाल से कहते हुए सुना गया कि यह बात मुकेश अरनेजा को बताओ और उससे कहो कि जैसे दूसरे लोग चुपचाप बैठे कार्रवाई देख/सुन रहे हैं, वैसे ही वह भी देखे/सुने और कार्यक्रम में बंदर की तरह उछल-कूद न करे ।
मुकेश अरनेजा ने बदतमीजी की हद तो लेकिन तब पार की जब चार्टर दिवस के मौके पर क्लब की उपलब्धियों व भावी योजनाओं को लेकर हो रही बातों में सवालों के जबाव देने से उन्होंने क्लब के पदाधिकारियों को रोका और खुद जबाव देने लगे । यह देख कर सुशील गुप्ता ने उन्हें कस कर फटकारा और कहा कि क्लब से जुड़े मामलों में क्लब के पदाधिकारियों को बोलने दो । इस फटकार का मुकेश अरनेजा पर थोड़ी देर के लिए तो असर दिखा, लेकिन जल्दी ही फिर वह अपनी 'औकात' पर आ गए । मुकेश अरनेजा की हरकतों से माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया था कि सुशील गुप्ता का जब बोलने का नंबर आया तो अपनी बात उन्होंने यह कहते हुए शुरू की कि मैं तो इस तरह के कार्यक्रमों में आता ही नहीं हूँ, क्योंकि अपने अनुभव से मैं जानता हूँ कि इस तरह के कार्यक्रमों में माहौल काम की कोई बात करने का होता ही नहीं है । सुशील गुप्ता ने चार्टर दिवस के कार्यक्रम को चुनावी मीटिंग बना देने के आईडिया की भी आलोचना की । कार्यक्रम का मुख्य अतिथि यदि इस तरह की बात करे, तो समझा जा सकता है कि कार्यक्रम का माहौल क्या बना/रहा होगा । कार्यक्रम में मौजूद रहे लोगों ने अच्छे भले और खासी मेहनत से तैयार किए गए कार्यक्रम को बर्बाद करने के लिए मुकेश अरनेजा को जिम्मेदार ठहराया है । मुकेश अरनेजा की जिन हरकतों ने कार्यक्रम को बर्बाद किया, वह हरकतें उन्होंने कोई बड़ा लक्ष्य पाने के लिए नहीं की - बल्कि अपने आप को ज्यादा 'होशियार' दिखाने तथा रोटरी क्लब गाजियाबाद के ज्यादा नजदीक 'दिखाने' के लिए कीं; और उनकी हरकतों ने रोटरी क्लब गाजियाबाद के पदाधिकारियों को ही अपमानित किया तथा उनके कार्यक्रम को बर्बाद किया ।
रोटरी क्लब गाजियाबाद के इस कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य क्लब के वरिष्ठ सदस्य दीपक गुप्ता की अचानक से प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी का प्रमोशन भी था - इस तरह मुकेश अरनेजा की हरकतों ने कार्यक्रम को ही बर्बाद नहीं किया, दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी के प्रमोशन में ही पलीता लगा दिया । यह हाल तब हुआ, जबकि दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी को उकसाने में मुकेश अरनेजा का ही हाथ सुना/बताया जाता है । अधिकतर लोगों का शुरू से ही मानना और कहना रहा है कि मुकेश अरनेजा को दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी से कोई मतलब नहीं हैं; उन्होंने तो अपनी राजनीति के लिए मौका 'बनाने' खातिर दीपक गुप्ता को उम्मीदवारी के लिए उकसाया है और उनके मददगार होने का दिखावा कर रहे हैं । इस कार्यक्रम को मुकेश अरनेजा ने अपनी चालबाजी से कैसे बर्बाद किया, इसका एक उदाहरण तो क्लब के पदाधिकारियों ने ही दिया - उनके अनुसार, कार्यक्रम की तैयारी मुकेश अरनेजा के निर्देशन में ही तैयार हुई और आमंत्रितों की सूची मुकेश अरनेजा ने ही तैयार करवाई । सूची के हिसाब से ही हॉल चुना गया । मुकेश अरनेजा किंतु ऐन मौके तक सूची में आमंत्रितों के नाम जोड़ते गए और सूची बढ़वाते गए । इसका नतीजा यह हुआ कि जितने लोगों के लिए इंतजाम किया गया था, लोग उससे ज्यादा आ गए और कार्यक्रम में अव्यवस्था फैली । कार्यक्रम की जगह छोटी पड़ी, और आमंत्रितों को बैठने तक के लिए जगह नहीं मिली । कई लोगों ने खाना न मिलने की शिकायत की और बिना खाना खाए लौटने को लेकर अपना असंतोष व्यक्त किया । इससे क्लब की तो बदनामी हुई ही, दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी के प्रमोशन की भी बुरी गत बनी । कुछ लोगों का कहना है कि मुकेश अरनेजा ने आमंत्रितों की संख्या बढ़ाने का काम जानबूझ कर किया, जिससे कि अव्यवस्था फैले और दीपक गुप्ता की मेहनत पर पानी फिरे ।
मुकेश अरनेजा ने एक और 'बदमाशी' की - उन्होंने कार्यक्रम की तैयारी करते हुए ऐसे हालात बनाए कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेके गौड़ और डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर रमेश अग्रवाल ने अपने आप को इस कार्यक्रम से अलग-थलग रखा और इसमें शामिल नहीं हुए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट शरत जैन भी मुकेश अरनेजा के रवैये से इतने क्षुब्ध थे कि कार्यक्रम में अनमने से ही रहे । एक मौके पर उनकी उपस्थिति दिखाने के लिए उनका नाम पुकारा गया, किंतु वह दाएँ-बाएँ हो गए और मौके पर पहुँचे ही नहीं । डिस्ट्रिक्ट 3011 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला तथा कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यक्रम में खूब सक्रिय दिखे - जिस पर कई लोगों ने मुकेश अरनेजा से यह पूछ कर चुस्की भी ली कि 'दीपक को क्या डिस्ट्रिक्ट 3011 में चुनाव लड़वा रहे हो ?' दूसरे डिस्ट्रिक्ट के लोगों की उपस्थिति को संभव बनवा कर मुकेश अरनेजा अपना 'जलवा' दिखलाने में तो कामयाब रहे - किंतु दीपक गुप्ता को इससे क्या फायदा हुआ ? जाहिर है कि दीपक गुप्ता की 'कीमत' पर मुकेश अरनेजा ने खुद को प्रमोट करने का अवसर पा लिया है । इस तरह यह आरोप एक बार फिर सच साबित होता हुआ दिखा है कि दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी को उन्होंने अपना 'दूसरा' मकसद साधने के लिए उकसाया है और वह नहीं चाहते हैं कि दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी सचमुच में लोगों के बीच अपनी कोई जगह बनाए । अन्य कुछेक लोगों का कहना लेकिन यह भी है कि मुकेश अरनेजा दरअसल बहुत ही कन्फ्यूज किस्म का व्यक्ति है - वह कोई काम करता तो यह सोच कर है कि वह बड़ी अक्लमंदी कर रहा है, किंतु अंततः वह उसकी मूर्खता साबित होता है । ऐसा कहने वालों का तर्क है कि जो मुकेश अरनेजा अपनी तमाम तिकड़मों से अपना खुद का भला नहीं कर सका - और अपने क्लब में तथा अपने पारिवारिक बिजनेस में 'पिटा', वह भला दूसरे किसी का क्या फायदा करवा सकेगा ? रोटरी क्लब गाजियाबाद का कार्यक्रम क्लब के पदाधिकारियों की तमाम मेहनत के बावजूद - मुकेश अरनेजा की चालबाजी का शिकार बना, या उनकी मूर्खता का; इस पर बहस करके रोटरी क्लब गाजियाबाद व दीपक गुप्ता के हुए नुकसान की भरपाई तो नहीं की जा सकती - लेकिन इस बहस के चलते लोगों के बीच एक नसीहत जरूर चर्चा में आई है, और वह यह कि दीपक गुप्ता जितनी जल्दी मुकेश अरनेजा के चँगुल से बाहर निकलेंगे, उतना ही अपना खुद का भला करेंगे ।

Thursday, July 23, 2015

रोटरी कोऑर्डिनेटर विजय जालान के रवैये से निराश और नाराज होने के बाद मुकेश अरनेजा ने असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डिनेटर के रूप में निमंत्रण और मान-सम्मान पाने के लिए इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई से मदद की जो गुहार लगाई है, उसने मनोज देसाई को मुसीबत में डाला

नई दिल्ली । मुकेश अरनेजा की एक गुहार ने इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई को अजीब से संकट में फँसा दिया है । मुकेश अरनेजा ने मनोज देसाई से उन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को डांट लगाने की गुहार लगाई है, जो उन्हें असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डिनेटर के उनके पद के अनुरूप काम और सम्मान नहीं दे रहे हैं । मनोज देसाई से की गई अपनी शिकायत में मुकेश अरनेजा ने अपने इमीडियेट बॉस - रोटरी कोऑर्डिनेटर विजय जालान को भी लपेट लिया है । मुकेश अरनेजा की शिकायत है कि असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डिनेटर के रूप में उन्हें जिन डिस्ट्रिक्ट्स का चार्ज मिला है, उनके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अपने अपने डिस्ट्रिक्ट में उन्हें बुला ही नहीं रहे हैं; बुलाए जाने के लिए उन्होंने खुद अपनी तरफ से पहल भी की, किंतु अलग अलग तरह की बहानेबाजी करके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने उन्हें टाल दिया है । मुकेश अरनेजा का कहना है कि इस बारे में पहले उन्होंने विजय जालान से शिकायत की थी, विजय जालान ने लेकिन इस बारे में आवश्यक कार्रवाई करना तो दूर - उलटे उन्हें ही बदनाम करना शुरू कर दिया है । मुकेश अरनेजा के अनुसार, विजय जालान जहाँ-तहाँ लोगों को बताते फिर रहे हैं कि मुकेश अरनेजा की रोटरी में इतनी बदनामी है कि कोई गवर्नर उन्हें अपने यहाँ आमंत्रित ही नहीं करना चाहता है । जोन 4 तथा जोन 6ए के रोटरी कोऑर्डिनेटर विजय जालान के रवैये से निराश और नाराज होने के बाद मुकेश अरनेजा ने अब मनोज देसाई से गुहार लगाई है कि वह उन्हें संदर्भित डिस्ट्रिक्ट्स में असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डिनेटर के रूप में निमंत्रण दिलवाएँ ।
मनोज देसाई की समस्या यह है कि मुकेश अरनेजा को असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डिनेटर का पद देने के कारण वह पहले से ही रोटेरियंस की आलोचना के निशाने पर हैं । मुकेश अरनेजा जैसे बदनाम व्यक्ति को इतना महत्वपूर्ण पद देकर मनोज देसाई ने अपनी समझदारी और अपने विवेक को सवालों के घेरे में तो ला ही दिया है - रही/सही कसर मुकेश अरनेजा ने लोगों को बार बार यह बता कर पूरी कर दी कि मनोज देसाई को इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने में नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्य के रूप में उन्होंने जो मदद की थी, उसके धन्यवाद के रूप में मनोज देसाई ने उन्हें यह पद दिया है । दरअसल पिछले दिनों मुकेश अरनेजा की हरकतों के कारण उन्हें जब उनके क्लब से निकाल दिया गया था, तब यह सवाल उठा था कि इस बिना पर क्या मनोज देसाई उनसे असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डिनेटर का पद वापस ले लेंगे ? इस सवाल के जबाव में ही मुकेश अरनेजा ने लोगों के बीच दावा किया था कि उन्होंने ही मनोज देसाई को इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाया था, और इसी बात को याद रखते हुए मनोज देसाई ने उन्हें यह पद दिया है - इसलिए यह पद वापस लेने के बारे में मनोज देसाई सोच भी नहीं पायेंगे । मुकेश अरनेजा को हर बात का - खासतौर से हर किसी को चुनाव जितवाने का श्रेय लेने का बहुत शौक है; उनके अपने डिस्ट्रिक्ट में उनका एक जुमला बड़ा मशहूर है कि 'मैं चाहूँ तो सड़क से एक रिक्शेवाले को पकड़ कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुनवा दूँ'; लेकिन मनोज देसाई के बारे में किए गए उनके इस तरह के दावे ने मनोज देसाई के लिए असहज स्थिति पैदा की । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की जिम्मेदारी सँभाल रहे मनोज देसाई इस स्थिति को तो किसी तरह झेल रहे थे, लेकिन मुकेश अरनेजा की नई गुहार ने उनके लिए एक अजीब तरह की समस्या खड़ी कर दी है । 
मनोज देसाई के लिए समस्या की बात यह है कि उनके द्वारा नियुक्त एक असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डिनेटर को यदि संदर्भित डिस्ट्रिक्ट्स में आमंत्रित करने लायक नहीं समझा जा रहा है, तो यह उनके 'फैसले' पर भी एक कठोर टिप्पणी है - मुकेश अरनेजा दरअसल इसी तर्क का सहारा लेकर मनोज देसाई को उकसा रहे हैं, और उन्हें संदर्भित डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं । मनोज देसाई के लिए किंतु समस्या यह है कि वह क्या कार्रवाई करें और किस आधार पर करें ? वह यदि कोई कार्रवाई करते भी हैं तो अपनी ही फजीहत करवायेंगे । रोटरी कोऑर्डिनेटर विजय जालान के अनुभव ने उनके लिए यह संभावना और बढ़ा भी दी है । मुकेश अरनेजा की शिकायत पर विजय जालान ने अपने तरीके से मामले को हल करने का प्रयास किया तो था, किंतु संदर्भित डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने जब उन्हें साफ बता दिया कि मुकेश अरनेजा जैसे बदनाम व्यक्ति को तवज्जो देने के लिए उनके डिस्ट्रिक्ट में कोई भी राजी नहीं है, तब फिर वह कैसे उन्हें अपने यहाँ आमंत्रित कर सकते हैं ? संदर्भित डिस्ट्रिक्ट्स में मुकेश अरनेजा के प्रति बने इस माहौल में असिस्टेंट रोटरी कोऑर्डिनेटर मुकेश अरनेजा के लिए कुछ करने में मनोज देसाई को खतरा ही खतरा नजर आ रहा है । 
मनोज देसाई इसीलिए चाहते हैं कि इस मामले को मुकेश अरनेजा खुद ही हल करें । मुकेश अरनेजा लेकिन रमेश अग्रवाल के साथ हुए 'हादसे' से डरे हुए हैं । उल्लेखनीय है कि अभी कुछ ही दिन पहले रमेश अग्रवाल को डिस्ट्रिक्ट 3011 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला से अपने यहाँ के कार्यक्रमों में आमंत्रित न करने की शिकायत करने पर कई प्रमुख लोगों की उपस्थिति में भारी फटकार सुनने को मिली थी । रमेश अग्रवाल रोटरी इंडिया विन्स कमेटी के जोनल कोऑर्डिनेटर हैं और इस बात से बड़े परेशान रहते हैं कि उनके पास जो पद है, उसके अनुरूप उन्हें निमंत्रण और सम्मान नहीं मिलता । मुकेश अरनेजा के पहले चेले रहे और फिर साथी बने किंतु अब मुकाबलेबाज बने रमेश अग्रवाल के रंग-ढंग मुकेश अरनेजा जैसे ही हैं; और बदनामी 'कमाने' में भी उनके साथ होड़ में रहते हैं । तीन-तिकड़म से यह दोनों अपने लिए पदों का जुगाड़ तो कर लेते हैं, लेकिन पद के साथ जो मान-सम्मान मिलना चाहिए - उसके न मिलने पर परेशान रहते हैं । ये यह समझने में विफल रहे हैं कि पद तो तीन-तिकड़म से और जुगाड़ से मिल जाते हैं; किंतु मान-सम्मान तो व्यवहार और आचरण से ही मिलता है । इस बात को भूल कर एक कार्यक्रम में रमेश अग्रवाल ने जब डिस्ट्रिक्ट 3011 के गवर्नर सुधीर मंगला से शिकायत की, तो सुधीर मंगला ने उन्हें तबीयत से ऐसी झाड़ पिलाई कि उनके लिए बचना मुश्किल हो गया । मौके पर मौजूद पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता ने किसी तरह सुधीर मंगला को शांत करके रमेश अग्रवाल को बचाया । रमेश अग्रवाल के साथ यह जो बीती, उससे सबक लेते हुए मुकेश अरनेजा ने आमंत्रण न मिलने को लेकर संदर्भित डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स से बात करने का साहस नहीं किया और पहले विजय जालान से मदद की गुहार लगाई, और अब मनोज देसाई से शिकायत की है । उन्हें उम्मीद है कि मनोज देसाई अवश्य ही उनकी मदद करेंगे । यह देखना दिलचस्प होगा कि मुकेश अरनेजा को संदर्भित डिस्ट्रिक्ट्स से निमंत्रण और वहाँ मान-सम्मान दिलवाने के लिए इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई क्या करते हैं ?