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Monday, December 14, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी बॉल के स्थगन के लिए विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने नवदीप चावला और विजय जिंदल को निशाना बनाया

फरीदाबाद/नई दिल्ली । विनय भाटिया और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी के समर्थकों ने रोटरी बॉल की तैयारियों की ढीलमढाल के लिए जिस तरह नवदीप चावला को जिम्मेदार ठहराना शुरू किया, उसका नतीजा यह हुआ कि नवदीप चावला ने बॉल की तैयारी में दिलचस्पी लेना बिलकुल ही छोड़ दिया और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को 20 दिसंबर को आयोजित होने वाले बॉल कार्यक्रम को स्थगित कर देने के लिए मजबूर होना पड़ा है । मजेदार सीन यह है कि बॉल कार्यक्रम के स्थगित होने पर विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक कुछेक पूर्व गवर्नर सुधीर मंगला को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । उनका कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला के नकारापन का यह एक बड़ा सुबूत है कि अपने एक महत्वपूर्ण आयोजन को तय समय पर कर पाने में वह विफल रहे हैं और उसे स्थगित करके उन्हें अपनी इज्जत बचाना पड़ रही है । सुधीर मंगला और उनके नजदीकी बॉल कार्यक्रम के स्थगित होने के लिए फरीदाबाद के रोटेरियन नेताओं के साथ साथ विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । सुधीर मंगला और उनके नजदीकी फरीदाबाद के रोटेरियन नेताओं तथा विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स की बातों में आने तथा उन पर भरोसा करने को अपनी सबसे बड़ी भूल व गलती के रूप में रेखांकित कर रहे हैं । सुधीर मंगला और उनके नजदीकी मान रहे हैं और कह रहे हैं कि वह यदि 'यह गलती' न करते तो उन्हें आज यह दुर्दिन न देखना पड़ता । सुधीर मंगला और उनके नजदीकी इस बात पर भी हैरान हैं कि विनय भाटिया के समर्थक पूर्व गवर्नर्स अपने नकारापन और अपनी असफलता का ठीकरा उनके सिर क्यों फोड़ रहे हैं ?
सुधीर मंगला और उनके नजदीकियों का कहना है कि फरीदाबाद के रोटेरियन नेताओं तथा विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स ने रोटरी डिस्ट्रिक्ट बॉल आयोजन कमेटी का चेयरमैन नवदीप चावला को तथा को-चेयरमैन विजय जिंदल को बनाने के लिए उनपर खासा दबाव बनाया था । सुधीर मंगला को आश्वस्त किया गया था कि बॉल की सारी जिम्मेदारी वह फरीदाबाद के रोटेरियंस को सौंप दें और निश्चिंत हो जाएँ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला को यह ऑफर स्वाभाविक रूप से बहुत ही आकर्षक लगा, लिहाजा उन्होंने इसे स्वीकार करने में जरा भी देर नहीं की और बॉल आयोेजन कमेटी के दोनों बड़े पद फरीदाबाद को सौंप दिए । सुधीर मंगला को हालाँकि कुछेक लोगों ने उस समय यह समझाने का खूब प्रयास किया था कि जिन लोगों की बातों में आकर वह 'यह' रहे हैं, वह फरीदाबाद के नाम पर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं और फरीदाबाद के लोगों के साथ साथ उन्हें भी इस्तेमाल कर रहे हैं - सुधीर मंगला ने लेकिन तब किसी की नहीं सुनी । फरीदाबाद के लोगों के साथ साथ नवदीप चावला को भी धीरे धीरे समझ में आने लगा कि विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक नेता फरीदाबाद के नाम पर उन्हें इस्तेमाल करने तथा उनकी जेब काटने का काम कर रहे हैं । 
फरीदाबाद के रोटेरियंस का माथा तो दरअसल यह देख/जान कर ठनका कि विनय भाटिया और उनकी उम्मीदवारी के समर्थक नेता अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए हर काम की जिम्मेदारी ले लें, और फिर पैसा देने के लिए उन पर दबाव बनाएँ । पेट्स में यही हुआ । विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने अपना प्रभाव जमाने/दिखाने के लिए पेट्स में दिए जाने वाले गिफ्ट्स का जिम्मा ले लिया और फिर उसके खर्च का बोझ फरीदाबाद से पेट्स में जाने वाले लोगों के सिर मढ़ने का प्रयास किया । फरीदाबाद में इसकी इतनी तीखी प्रतिक्रिया हुई कि कई लोगों ने पेट्स में जाने से ही इंकार कर दिया । फरीदाबाद में लोगों का कहना रहा कि यह सब चूँकि विनय भाटिया की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के लिए किया जा रहा है, इसलिए इसका खर्चा विनय भाटिया को उठाना चाहिए । उस बबाल को बड़ी मुश्किल से संभाला जा सका । विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने लेकिन उस बबाल से कोई सबक नहीं लिया । विनय भाटिया के क्लब के अधिष्ठापन समारोह में फिर यही समस्या पैदा हुई । विनय भाटिया ने चाहा कि उनकी उम्मीदवारी के संदर्भ को देखते हुए उनके क्लब का अधिष्ठापन समारोह जोरशोर से हो और उसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाए । क्लब के पदाधिकारियों व सदस्यों को विनय भाटिया की इस चाहना को पूरा करने को लेकर तो कोई समस्या नहीं थी, किंतु इसके खर्च को लेकर मामला फँस गया । क्लब के पदाधिकारियों व सदस्यों का कहना रहा कि विनय भाटिया की उम्मीदवारी के चक्कर में अधिष्ठापन समारोह में जो अतिरिक्त खर्चा हो रहा है, उसकी भरपाई विनय भाटिया करें; किंतु विनय भाटिया इस चक्कर में रहे कि जो भी खर्चा है, उसे क्लब के लोग मिलजुल कर पूरा करें । इसे लेकर क्लब में खासी हीलहुज्जत हुई और बस जैसे तैसे क्लब का अधिष्ठापन समारोह हुआ । 
डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले तक आते आते फरीदाबाद के लोगों के बीच विनय भाटिया और उनके समर्थकों की पोल-पट्टी पूरी तरह खुल चुकी थी - लेकिन मजे की बात यह रही कि विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने इस सच्चाई से अपनी आँखें पूरी तरह मूंदी रखीं । नतीजा यह रहा कि विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने तो दीवाली मेले के लिए स्पॉन्सरशिप दिलवाने तथा टिकट बिकवाने को लेकर बड़े बड़े दावे किए, किंतु फरीदाबाद के लोगों ने उनके दावों को पूरा करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली । विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने दीवाली मेले के नाम पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को बड़े बड़े सब्ज़बाग दिखाए कि इतने की स्पॉन्सरशिप यहाँ से दिलवायेंगे, उतने की स्पॉन्सरशिप वहाँ से दिलवायेंगे, इतने टिकट बिकवायेंगे - लेकिन जब सचमुच कुछ करने का मौका आया तो विनय भाटिया और उनके समर्थक सुधीर मंगला से मुँह छिपाते फिरे । टिकटों का हिसाब देने का समय आया तो बहुत से टिकटें तो यह कह कर लौटा दीं कि यह बिक नहीं पाई हैं, और बिकी हुई टिकटों का पैसा भी बाद में देने की बात कही गई । सुधीर मंगला दीवाली मेले के तीन लाख से ज्यादा रुपए विनय भाटिया और उनके समर्थकों पर अभी तक बकाया होने का रोना रोते सुने जा रहे हैं - और उन्हें यह तक नहीं बताया जा पा रहा है कि यह बकाया रकम देगा कौन ? विनय भाटिया और उनके समर्थक नेता इसके लिए फरीदाबाद के रोटेरियंस को जिम्मेदार तो ठहरा रहे हैं, लेकिन यह नहीं बता रहे हैं कि यह बकाया रकम मिलेगी कैसे और किससे ?
डिस्ट्रिक्ट दीवाली मेले में फरीदाबाद के लोगों ने जिस तरह से विनय भाटिया और उनके समर्थकों की चालबाजी में फँसने से इंकार किया, उसे देख/जान कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला और बॉल कमेटी के चेयरमैन तथा को-चेयरमैन विजय जिंदल के कान खड़े हुए । नवदीप चावला और विजय जिंदल बॉल के आयोजन से पीछा छुटाते से दिखे तो विनय भाटिया और उनके समर्थकों ने उन्हें ही लपेटे में लेना शुरू कर दिया । विनय भाटिया और उनके समर्थकों की तरफ से कहा जाने लगा कि नवदीप चावला व विजय जिंदल को पद पाने का तो शौक है, लेकिन पद की जिम्मेदारी निभाने में दिलचस्पी नहीं है - और उनके इस रवैये से फरीदाबाद का नाम तो ख़राब हो ही रहा है, विनय भाटिया की उम्मीदवारी पर भी बुरा असर पड़ रहा है । विनय भाटिया और उनके नजदीकियों की तरफ से नवदीप चावला और विजय जिंदल पर दबाव बनाने के उद्देश्य से कहा जाने लगा कि इनके बस की यदि बॉल को आयोजित करना नहीं है, तो यह अपने अपने पदों से इस्तीफ़ा क्यों नहीं दे देते ? विनय भाटिया और उनके समर्थकों का यह रवैया नवदीप चावला और विजय जिंदल के लिए हैरान करने वाला था - क्योंकि इन्हें बॉल की जिम्मेदारी मिलने से विनय भाटिया और उनके समर्थक खुश ही दिखते रहे हैं । नवदीप चावला व विजय जिंदल के लिए यह समझना मुश्किल हुआ कि अचानक से इन्हें क्या हो गया है, जो यह इनके खिलाफ बातें करने लगे ? विनय भाटिया के नजदीकियों का ही कहना है कि नवदीप चावला और विजय जिंदल के प्रति विनय भाटिया तथा उनके समर्थकों ने विरोधी रवैया इसलिए अपना लिया ताकि बॉल की असफलता से विनय भाटिया की उम्मीदवारी पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े । विनय भाटिया और उनके समर्थकों के इस स्वार्थी रवैये ने नवदीप चावला व विजय जिंदल को खासी तगड़ी चोट पहुँचाई । फरीदाबाद के लोगों के इस तरह आपस में एक दूसरे को नीचा दिखाने की कार्रवाई में लगा देख डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को बॉल के आयोजन को स्थगित कर देने में ही अपनी भलाई नजर आई । फरीदाबाद के रोटेरियन नेताओं की आपसी खींचतान ने पहले दीवाली मेले के आयोजन को घाटा पहुँचाया और अब रोटरी के प्रमुख व प्रतिष्ठित कार्यक्रम को ही लील लिया है । 

Tuesday, December 8, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी बॉल की तैयारियों की ढीलमढाल के लिए विनय भाटिया और उनके नजदीकियों ने जिस तरह से नवदीप चावला को जिम्मेदार ठहराना शुरू किया है, उसे देख/सुन कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को बॉल कार्यक्रम पिटता हुआ नजर आ रहा है

फरीदाबाद । फरीदाबाद के रोटेरियंस नेताओं के बीच तालमेल की कमी के चलते रोटरी फाउंडेशन के बॉल कार्यक्रम की तैयारियाँ ढीली पड़ी हुई हैं, जिसे देख/जान कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला यह सोच सोच कर पसीने पसीने हो रहे हैं कि बॉल कार्यक्रम सफल हो पायेगा या नहीं ? 20 दिसंबर को आयोजित होने वाले बॉल कार्यक्रम के आयोजन स्थल को लेकर ही असमंजस अब जाकर खत्म हुआ है । पहले यह आयोजन महरौली स्थित झंकार बैंक्वेट में आयोजित होने की बात हो रही थी, लेकिन उसे लेकर कई तरह की शिकायतें/समस्याएँ थीं - लिहाजा फैसला नहीं हो पा रहा था । डिस्ट्रिक्ट के प्रमुख पदाधिकारियों को बॉल आयोजन कमेटी के चेयरमैन नवदीप चावला तथा को-चेयरमैन विजय जिंदल का रवैया काम पूरा करने की बजाए, काम को लटकाए रखने वाला 'दिखा' है । सुधीर मंगला ने सख्ती दिखाई तो सुना गया है कि अब सूरजकुंड रोड पर स्थित होटल राजहंस को आयोजन-स्थल के रूप में फाइनल किया गया है । बॉल-आयोजन के लिए अभी तक स्पॉन्सरशिप आदि की भी कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिसके कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला का मन अनिष्ट की आशंका में बड़ा घबराया घबराया सा हो रहा है । बॉल-आयोजन की तैयारियों की लेटलतीफी के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीम की तरफ से नवदीप चावला को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, तो नवदीप चावला इसके लिए फरीदाबाद के दूसरे रोटेरियंस नेताओं को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । नवदीप चावला का कहना है कि फरीदाबाद के रोटेरियंस नेताओं ने उन्हें चेयरमैन तो बना/बनवा दिया है, लेकिन अब उन्हें अकेला छोड़ दिया है और कोई भी उनकी मदद नहीं कर रहा है । फरीदाबाद के दूसरे रोटेरियंस नेताओं का कहना है कि नवदीप चावला चेयरमैन बने हैं, तो जो कुछ भी होना/करना है वह करने की पहल उन्हें ही करनी है और उन्हें ही दूसरों से मदद लेनी है । फरीदाबाद में कुछेक लोग यह कहते हुए भी सुने गए हैं कि नवदीप चावला को चेयरमैन बनने का शौक तो रहा, लेकिन यह समझने में उनसे चूक हो गई है कि चेयरमैन के रूप में उनकी कुछेक जिम्मेदारियाँ भी हैं - जिन्हें उन्हें निभाना है । 
बॉल की तैयारियों की लेटलतीफी को लेकर फरीदाबाद में नवदीप चावला तथा दूसरे रोटेरियंस नेताओं के बीच जो आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं, उनका ठीकरा विनय भाटिया के सिर फूट रहा है । दरअसल हर कोई विनय भाटिया को अपना गवाह बनाना चाहता है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का उम्मीदवार होने के नाते विनय भाटिया इस पचड़े से दूर रहना चाहते हैं । किंतु चूँकि यह सारा झमेला हो उन्हीं के लिए रहा है, इसलिए ले दे कर बात उनके ही सिर आ जाती है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत विनय भाटिया की उम्मीदवारी के कारण ही फरीदाबाद के रोटेरियंस ने हर मामले में आगे से आगे रहने/दिखने का प्रयास किया है । प्रयास तो उन्होंने किया, लेकिन 'डिलीवरी' करने के मामले में हर प्रयास हमेशा ही फजीहत का शिकार हुआ । दरअसल फरीदाबाद के रोटेरियंस बातें तो बड़ी बड़ी करते हैं, लेकिन सचमुच कुछ करने की बारी आती है तो ठन-ठन गोपाल साबित होते हैं । अभी पिछले दिनों ही दीवाली मेले में भी फरीदाबाद के रोटेरियंस अपने कमिटमेंट्स पूरे करने में विफल रहे । दीवाली मेले के टिकट लेने/बिकवाने को लेकर फरीदाबाद के रोटेरियंस ने पहले तो लंबे-चौड़े वायदे किए, लेकिन जब टिकटों का भुगतान करने का मौका आया तो मुँह छिपाते/बचते नजर आए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला फरीदाबाद के रोटेरियंस पर दीवाली मेले के करीब तीन लाख रुपए बकाया रहने का रोना रोते कई जगह सुने गए हैं । वास्तव में इसीलिए सुधीर मंगला को रोटरी बॉल का डर सता रहा है । उन्हें डर है कि फरीदाबाद के रोटेरियंस ने जिस तरह दीवाली मेले में उन्हें धोखा दिया है, वैसा धोखा कहीं रोटरी बॉल को लेकर भी तो नहीं देंगे ? यह डर उन्हें इसलिए भी है क्योंकि रोटरी बॉल की सारी जिम्मेदारी फरीदाबाद के रोटेरियंस ने ली तो हुई है, लेकिन वह कुछ करते हुए दिख नहीं रहे हैं; और कुछ न हो पाने के लिए एक दूसरे को ही जिम्मेदार ठहराने में लगे हुए हैं । 
इस सारे झमेले में मुसीबत लेकिन विनय भाटिया की हो रही है । दरअसल हर कोई अपनी समस्या हल करने/करवाने के लिए विनय भाटिया को पकड़ता । हर कोई यही मानता है कि फरीदाबाद के रोटेरियंस ने जो जिम्मेदारी ली है, वह चूँकि विनय भाटिया की उम्मीदवारी को मजबूती देने/दिलाने के लिए ली है - इसलिए हर समस्या को हल करवाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है । विनय भाटिया लेकिन हर जिम्मेदारी से बचते हुए नजर आए - उन्होंने समझा तो यह कि बचने की कोशिश करके वह सचमुच बच जायेंगे, किंतु हुआ उल्टा और बचने की कोशिश में वह फँसते ज्यादा जा रहे हैं । विनय भाटिया के रवैये से फरीदाबाद के रोटेरियंस विनय भाटिया की उम्मीदवारी को बोझ समझने लगे हैं । वहाँ लोगों को लगने लगा है कि विनय भाटिया डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तो बनना चाहते हैं, लेकिन जिम्मेदारी कुछ लेना नहीं चाहते हैं; जिम्मेदारियों का टोकरा वह दूसरों के सिर टिका देने की जुगाड़ में लगे रहते हैं । शुरू में तो फरीदाबाद के रोटेरियंस विनय भाटिया तथा उनकी उम्मीदवारी का झंडा उठाए नेताओं की बातों में आ गए और खासे उत्साह के साथ उन्होंने अपनी अपनी जेबें ढीली कीं; लेकिन जल्दी ही लोगों को समझ में आ गया कि विनय भाटिया और उनकी उम्मीदवारी का झंडा उठाए रखने वाले नेताओं ने उन्हें 'शिकारपुर का' समझ लिया है । इसके बाद से फरीदाबाद के लोगों ने उनके झाँसे में फँसने से बचना शुरू कर दिया है । फरीदाबाद के रोटेरियंस के इस बचने की कार्रवाई के कारण ही विनय भाटिया और उनके समर्थक दीवाली मेले के कमिटमेंट को पूरा करने में असफल रहे हैं - और इसी आधार पर बॉल का कार्यक्रम भी पिटता हुआ नजर आ रहा है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला के समस्या यह आ खड़ी हुई है कि वह विनय भाटिया और उनके समर्थकों से दीवाली मेले का बकाया बसूल करें, और या बॉल को सफल करवाने की उम्मीद करें ? बॉल की तैयारियों की ढीलमढाल को लेकर विनय भाटिया और उनके नजदीकी जिस तरह नवदीप चावला को जिम्मेदार ठहराने लगे हैं, उसके कारण मामला और भी गंभीर हो गया है । 

Friday, April 17, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी के अभियान का उत्साह जिस तरह उन्माद में बदल कर लोगों के बीच बदनामी प्राप्त कर रहा है, उसे देख/जान कर विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों को भी चिंता होने लगी है

फरीदाबाद । विनय भाटिया की जगह नवदीप चावला को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवार बनाये जाने के 'सुझाव' सुने जाने से विनय भाटिया की उम्मीदवारी पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं । खतरे के यह बादल इसलिए और भी घने हैं क्योंकि यह 'सुझाव' ऐसे लोगों की तरफ से आ रहे हैं, जिन्हें विनय भाटिया की उम्मीदवारी के पक्के समर्थकों के रूप में देखा/पहचाना जाता है । विनय भाटिया की उम्मीदवारी के एक बड़े समर्थक नेता ने इन पँक्तियों के लेखक से बात करते हुए स्वीकार किया कि अगले रोटरी वर्ष के लिए जो चुनावी परिदृश्य बनता हुआ दिख रहा है, उसमें विनय भाटिया फिट नहीं लग रहे हैं; और इसलिए फरीदाबाद के लोग यदि सचमुच चाहते हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर फरीदाबाद से हो तो उन्हें नवदीप चावला को उम्मीदवार बनाना चाहिए । नवदीप चावला की उम्मीदवारी हालाँकि दूर की कौड़ी लाने वाली बात है । नवदीप चावला के नजदीकियों का ही मानना और कहना है कि नवदीप चावला की इच्छा तो है, लेकिन अभी वह जल्दी में नहीं हैं । फरीदाबाद की रोटरी में अभी जो हुड़दंग है, उसके कारण भी वह अभी अपनी उम्मीदवारी लाने का जोखिम नहीं लेना चाहेंगे । वह जान/समझ रहे हैं कि अभी उम्मीदवारी लायेंगे तो यहाँ अभी जो हुड़दंगी किस्म के लोग सक्रिय हैं, वह उनके सिर पर बैठने की कोशिश करेंगे; इसलिए उम्मीदवारी के पचड़े से अभी दूर रहने में ही वह अपनी भलाई देख रहे हैं । नवदीप चावला की इस सोच के कारण विनय भाटिया की उम्मीदवारी के लिए कोई सीधा खतरा तो नहीं है, किंतु नवदीप चावला की उम्मीदवारी का 'सुझाव' जिस कारण से सामने आया है, वह कारण विनय भाटिया की उम्मीदवारी के लिए चुनौती जरूर है ।
दरअसल विनय भाटिया की उम्मीदवारी का उत्साह जिस तरह उन्माद में बदलता दिख रहा है, उसने विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों को भी चिंता में डाल दिया है । विनय भाटिया की उम्मीदवारी के अभियान में अभी तक फरीदाबाद की एकता का शोर-शराबा ज्यादा सुनाई पड़ रहा है - और यह शोर-शराबा उत्साह की सीमारेखा को तोड़ कर उन्माद की तरफ जाता हुआ दिख रहा है । पेट्स में इस उन्माद को देखते हुए यह सवाल उठे कि विनय भाटिया और उनके समर्थक रोटरी जैसे संगठन को अंतर्राष्ट्रीय से आंचलिक बना देने पर क्यों आमादा हैं ? और ऐसा करके वह रोटरी का व डिस्ट्रिक्ट का भला कैसे भला कर पायेंगे ? यह ठीक है कि चुनावी राजनीति में कोई भी उम्मीदवार शुरुआत जातिवाद व क्षेत्रवाद का सहारा लेकर करता है - लेकिन कामयाब होने के लिए फिर वह इसकी सीमाओं को भेद कर आगे बढ़ता है । विनय भाटिया भी अपनी उम्मीदवारी की शुरुआत यदि फरीदाबाद-फरीदाबाद की रट से करते हैं, तो इसमें कोई बुरी बात नहीं है - लेकिन यह रट यदि स्थाई टेक ही बन गई तो फिर मुसीबत हो सकती है । विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों को लगता है कि विनय भाटिया और उनका झंडा उठाये उनके साथ चल रहे लोग जिस तरह फरीदाबाद-फरीदाबाद पर अटक गए हैं, ऐसा न हो कि फिर वहीं अटके रह जाये । इस बात का दो तरह से नुकसान हो रहा है : एक तरफ तो फरीदाबाद के लोगों को डर हुआ है कि विनय भाटिया की यह राजनीति उन्हें एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन का नहीं, बल्कि एक आँचलिक संगठन का सदस्य बना देगी; दूसरी तरफ खतरा यह पैदा हुआ है कि फरीदाबाद-फरीदाबाद के जबाव में कहीं दिल्ली-दिल्ली का नारा लग गया, तो विनय भाटिया की उम्मीदवारी का क्या होगा ? केवल फरीदाबाद के भरोसे तो उनकी उम्मीदवारी की नैय्या पार नहीं लग पायेगी न । इस तरह की हरकतों से विनय भाटिया की उम्मीदवारी के कुछेक समर्थकों को उनके अभियान में मैच्योरिटी का अभाव दिख रहा है, और वह उनके समर्थन से हाथ खींचते दिख रहे हैं ।
रवि चौधरी के मामले से इस संबंध में सबक लिया जा सकता है । उल्लेखनीय है कि रवि चौधरी जब पहली बार उम्मीदवार बने थे, तब वह काली-काली जुल्फों के मालिक हुआ करते थे । उस समय कुछेक लोगों ने उन्हें सलाह भी दी थी कि उनकी जुल्फें उनकी उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचायेंगी, इसलिए इन्हें कटवा लो । रवि चौधरी को तब लेकिन यह लगा था कि पिछला गवर्नर उनके साथ है, मौजूदा गवर्नर उनके साथ है, आने वाले तीन गवर्नर उनके साथ हैं, और सबसे बड़ी बात यह कि सड़क पर खड़े रिक्शेवाले को भी गवर्नर चुनवा/बनवा देने का दावा करने वाले मुकेश अरनेजा उनके साथ हैं - तो भला उनकी जुल्फें उन्हें क्या नुकसान पहुँचायेंगी । तमाम चौधरियों के समर्थन के बावजूद उस चुनाव में हुई उनकी हार में उनकी जुल्फों का कितना/क्या योगदान था, इसका तो पता नहीं; लेकिन सच यह देखने में आया कि इस बार रवि चौधरी जब दोबारा से उम्मीदवार बने तो अपनी जुल्फों को कटवा कर और बालों को रंगना छोड़ कर बने । इस बार मिली जीत में उनके बालों में दिखती सफेदी का योगदान हो या न हो लेकिन मॉरल ऑफ द स्टोरी तो यह है ही कि खुद रवि चौधरी भी स्वीकार करते नजर आये कि एक उम्मीदवार को मैच्योर 'दिखना' तो चाहिए ही ।
विनय भाटिया की उम्मीदवारी का अभियान अभी तक जिस तरह चल रहा है, उसमें हाय-हल्ला और शोर-शराबा ज्यादा नजर आ रहा है; और इस कारण उसमें मैच्योरिटी का अभाव दिख रहा है । इससे हो यह रहा है कि फरीदाबाद में ही लोग नाराज होने लगे हैं । अभी कोई खुल कर तो कुछ नहीं कह रहा है, लेकिन भीतर ही भीतर फैल रही नाराजगी को यदि समय रहते नहीं पहचाना गया और उसे नियंत्रित करने का प्रयास नहीं किया गया, तो यह नाराजगी महँगी पड़ सकती है । पेट्स के गिफ्ट स्पॉन्सर करने के मामले में विनय भाटिया और उनके सलाहकारों द्धारा तैयार की गई योजना की जैसी फजीहत हुई और फिर जिस तरह उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा था, उससे भी उन्होंने कोई सबक नहीं लिया है । इन्हीं कारणों से विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थक नेता उनकी जगह दूसरे किसी को उम्मीदवार बनाने का सुझाव देने लगे हैं, तो यह स्थिति विनय भाटिया के रास्ते को मुश्किल तो बनाती ही है ।

Wednesday, March 25, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए फरीदाबाद का पूरा पूरा समर्थन पाने के लिए विनय भाटिया के सामने केसी लखानी और नवदीप चावला के साथ साथ फरीदाबाद के दूसरे नेताओं को भी बराबर बराबर तवज्जो देने की चुनौती

फरीदाबाद । विनय भाटिया की अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत होने वाली उम्मीदवारी के समर्थन के संदर्भ में फरीदाबाद की एकता में सेंध लगने की आहट ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के खिलाड़ियों को चौकन्ना कर दिया है । नवदीप चावला के पिता विश्वनाथ चावला के निधन का शोक मनाने जुटे फरीदाबाद के रोटेरियंस के बीच होने वाली चर्चाओं में शामिल रहे लोगों ने पाया कि विनय भाटिया फरीदाबाद में अपनी उम्मीदवारी का झंडा जिस तरह केसी लखानी को सौंपते हुए नजर आ रहे हैं, उससे कुछेक लोग अपने को उपेक्षित महसूस करने लगे हैं और विनय भाटिया की उम्मीदवारी के प्रति उनके स्वर व तेवर बदले बदले से 'दिखने' लगे हैं । फरीदाबाद की चुनावी राजनीति को नजदीक से देखने/समझने वाले लोगों का कहना है कि फरीदाबाद में रोटरी - और रोटरी की राजनीति एक नई शक्ल लेने/बनाने की प्रक्रिया में है; और प्रक्रिया में होने के चलते वह बड़े नाजुक दौर में है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी इस नाजुकता को और नाजुक बना देती है । इसलिए लोगों को लगता है कि एक उम्मीदवार के रूप में विनय भाटिया को बहुत सावधानी के साथ अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने का अभियान चलाना होगा ।
विनय भाटिया की उम्मीदवारी के संदर्भ में फरीदाबाद में उथल-पुथल का संकेत पाने वाले एक वरिष्ट रोटेरियन ने भारतीय परिवारों में रिश्तों में होने वाली उथल-पुथल का उदाहरण देकर मामले को समझने/समझाने का प्रयास किया । उनका कहना रहा कि परिवार में सभी रिश्तेदार आपसे तब तक खुश बने रहते हैं जब तक आप अपने बेटे की शादी नहीं करते हैं । बेटे की शादी में कई रिश्तेदार यह शिकायत करने लगते हैं कि उनका उचित सम्मान नहीं हुआ - और इस शिकायत के साथ वह नाराज हो जाते हैं । फूफा किस्म के रिश्तेदार शिकायत करने और नाराज होने वाले लोगों में सबसे ज्यादा तथा सबसे आगे होते हैं । विनय भाटिया अभी तक एक कार्यकर्ता थे, सभी के साथ मिलकर काम कर रहे थे - इसमें किसी के शिकायत करने और नाराज होने का कोई मौका ही नहीं था; मौका तो अब आया है जब वह उम्मीदवार बने हैं । रोटरी के 'फूफा' लोग अब यह देखेंगे कि एक उम्मीदवार के रूप में विनय भाटिया उन्हें कितनी अहमियत दे रहे हैं । फूफा लोगों का नाटक यह भी रहता है कि उन्हें चाहें जितनी भी अहमियत दो, लेकिन फिर भी उन्हें शिकायत बनी ही रहती है ।
विनय भाटिया के लिए समस्या की बात इसलिए हुई है कि फरीदाबाद में रोटरी की राजनीति में केसी लखानी के रूप में एक नए 'फूफा' का अवतार हुआ है । केसी लखानी चाहते हैं कि उन्हें बड़ा फूफा माना जाए - उनकी इस चाहत को फरीदाबाद में लोगों ने पूरा भी कर दिया । इससे हालाँकि जो कुछेक लोग फरीदाबाद में रोटरी की राजनीति के फूफा बनने की लाइन में थे, उन्हें झटका लगा - किंतु इस झटके को उन्होंने झेल लिया । समस्या तब शुरू हुई जब केसी लखानी की ऊँगली पकड़ कर दूसरे लोग आगे आ गए तथा पहले वाले लोगों को उनके लिए जगह बनाने के लिए और पीछे हटना पड़ा । उल्लेखनीय है कि अभी करीब दो वर्ष पहले तक फरीदाबाद में रोटरी की राजनीति में जीतेंद्र गुप्ता और पप्पुजीत सिंह सरना का नाम आता था । धीरज भूटानी, मनमोहन गुप्ता, अमित अरोड़ा, तीरथराज अरोड़ा, सुधीर आर्य, सुमंत अवस्थी, जतिंदर सिंह छाबड़ा, सतीश गुसाईं, संदीप गोयल, आशीष गुप्ता, संतगोपाल गुप्ता, सुनील गुप्ता, विजय जिंदल, कृष्ण कौशिक, अमरजीत सिंह लाम्बा, जयप्रकाश मल्होत्रा, तजिंदर मलिक, राजेश मैंदीरत्ता, मनोहर पुनिआनी, दिनेश रघुवंशी, जगदीश सहदेव, सुरजीत सिंह सैनी आदि को भी बड़ी भूमिका निभाने के लिए तथा अपने अपने लिए जगह बनाने के प्रयासों में सक्रिय होता देखा जा रहा था । नवदीप चावला ने लेकिन अचानक से प्रकट होकर इन सब को पीछे धकेल दिया । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में विनोद बंसल ने नवदीप चावला को जो तवज्जो दी, तो फिर दूसरे लोग पीछे हो गए ।
नवदीप चावला ने छलाँग तो ऊँची लगाई, हालाँकि फिर भी राजनीतिक रूप से पप्पुजीत सिंह सरना और जीतेंद्र गुप्ता को माइनस करने में वह सफल नहीं हो पाए थे । इसका मौका उन्हें केसी लखानी के सक्रिय होने से मिला । प्रोफेशनल कारणों से नवदीप चावला को केसी लखानी के यहाँ दूसरों के मुकाबले ज्यादा तवज्जो मिली । इसका नतीजा यह हुआ कि केसी लखानी फरीदाबाद में रोटरी की राजनीति में जब सबसे बड़े फूफा बने तो नवदीप चावला को छोटे फूफा का दर्जा मिला और बाकी लोग उनकी हाँ में हाँ मिलाने की भूमिका निभाने वाले बन कर रह गए । अपनी अपनी भूमिकाओं और अपनी अपनी महत्वाकांक्षाओं से पीछे धकेल दिए गए इन लोगों को अपने समर्थन में बनाये रखना डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में विनय भाटिया के लिए वास्तव में गंभीर चुनौती होगी । नवदीप चावला के पिता विश्वनाथ चावला के निधन का शोक मनाने के लिए जुटे फरीदाबाद के रोटेरियंस के बीच जिस तरह की जो बातें हुईं उनमें विनय भाटिया के लिए यही चेतावनी छिपी महसूस की गई कि विनय भाटिया ने यदि केसी लखानी और नवदीप चावला पर भरोसा करने के साथ साथ दूसरे लोगों को इग्नोर करने का काम किया, तो उनकी उम्मीदवारी के संदर्भ में फरीदाबाद की एकता को वह दाँव पर लगाने का खतरा मोल लेंगे ।