Showing posts with label ROTARY INSTITUTE JAIPUR. Show all posts
Showing posts with label ROTARY INSTITUTE JAIPUR. Show all posts

Wednesday, December 30, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की संभावित उम्मीदवारी के संदर्भ में इंस्टीट्यूट में अच्छा इंतजाम करना खुद अशोक गुप्ता को भी व्यर्थ ही गया लग रहा है

जयपुर । रोटरी इंस्टीट्यूट 2015 में शामिल होने आए रोटरी के हर आम और खास को खुश खुश वापस भेजने में अशोक गुप्ता भले ही कामयाब रहे हैं, किंतु उनकी यह कामयाबी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की तरफ बढ़ती उनकी राह को आसान बनाएगी - इसका विश्वास उनके नजदीकियों व शुभचिंतकों को भी नहीं है । रोटरी इंस्टीट्यूट 2015 के चेयरमैन के रूप में अशोक गुप्ता ने जो व्यवस्था की और आमंत्रितों की जिस तरह की आवभगत हुई, उसकी चैतरफा तारीफ ही सुनने को मिल रही है । रोटरी इंस्टीट्यूट में शामिल होने गया हर छोटा/बड़ा रोटेरियन अशोक गुप्ता की आयोजन-क्षमता का गुण गाता हुआ ही सुना जा रहा है - किंतु इस उपलब्धि के राजनीतिक लाभ में 'ट्रांसफर' हो सकने का सवाल जब आता है, तब सभी लोग अलग अलग राय सुनाने/बताने लगते हैं । तो क्या अशोक गुप्ता ने जो मेहनत की है, उसका उन्हें कोई राजनीतिक फल नहीं मिलेगा ? इंस्टीट्यूट जयपुर में करने की लॉबीइंग करने से लेकर उसे आयोजित करने में लगा अशोक गुप्ता का श्रम क्या बेकार चला जायेगा ? सभी मानते और कहते हैं कि जयपुर में इंस्टीट्यूट का आयोजन कराने/करने के पीछे अशोक गुप्ता का मुख्य उद्देश्य इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए संभावित अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में माहौल बनाना तथा रोटरी के बड़े नेताओं के बीच अपनी धाक जमाना था । 
अशोक गुप्ता अपनी धाक दिखाने/ज़माने में तो सफल हुए हैं, लेकिन इस सफलता के बावजूद इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए बड़े नेताओं का समर्थन जुटाने की उनकी कोशिश सफल नहीं हो सकी है । अशोक गुप्ता के ही नजदीकियों का कहना है कि अशोक गुप्ता ने अपनी उम्मीदवारी के बाबत इंस्टीट्यूट में जयपुर में इकट्ठा हुए रोटरी के सभी बड़े नेताओं की समर्थन की हामी भरवाने की कोशिश तो खूब की, लेकिन सभी बड़े नेता बड़ी सफाई और चालाकी से हामी भरने से बच निकले । उल्लेखनीय है कि अशोक गुप्ता को कल्याण बनर्जी, सुशील गुप्ता, शेखर मेहता, मनोज देसाई आदि का समर्थन माना/बताया जाता है - लेकिन इनमें से कोई भी अभी तक अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी की खुली वकालत करता हुआ नहीं सुना गया है । अशोक गुप्ता और उनके समर्थकों के लिए यह बात चिंता की इसलिए है क्योंकि अशोक गुप्ता के साथ इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए और कई उम्मीदवारों की उम्मीदवारी भी प्रस्तुत होनी है, ऐसे में यदि उनके समर्थक समझे जाने वाले नेताओं ने ही उनके समर्थन से हाथ खींच लिया - तो फिर उनका तो सारा खेल ही गड़बड़ा जायेगा । अशोक गुप्ता को सबसे ज्यादा मदद पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता से मिलने की उम्मीद रही है, लेकिन अब सुशील गुप्ता के रंग-ढंग ही उन्हें बदले बदले से नजर आ रहे हैं । सुशील गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट से जिस तरह अचानक से रंजन ढींगरा की उम्मीदवारी प्रस्तुत हुई है, उससे अशोक गुप्ता के कान खड़े हुए हैं । जयपुर इंस्टीट्यूट से लौटते ही रंजन ढींगरा ने जिस तरह से अपने क्लब में अपनी उम्मीदवारी का प्रस्ताव पास कराया है, उससे इंस्टीट्यूट को प्रभावी तरीके से आयोजित करने को लेकर मिली प्रशंसा से प्राप्त अशोक गुप्ता का उत्साह हवा हो गया है । रंजन ढींगरा को सुशील गुप्ता के बहुत खास नजदीकी के रूप में देखा/पहचाना जाता है - दरअसल इसीलिए अशोक गुप्ता को सुशील गुप्ता के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं ।
अशोक गुप्ता के लिए राहत की बात यही है कि प्रतिस्पर्द्धी खेमे में भी अभी तक उम्मीदवार को लेकर एकमतता नहीं बनी है, और वहाँ भी कई उम्मीदवारों के बीच भारी उठा-पटक है । राजेंद्र उर्फ राजा साबू खेमे से यूँ तो भरत पांड्या की उम्मीदवारी सबसे प्रबल है; किंतु दीपक कपूर और सुरेंद्र सेठ भी राजा साबू खेमे के भरोसे ही ताल ठोक रहे हैं । देश में पोलियो अभियान के मुखिया के रूप में काम करते रहे दीपक कपूर की लोगों के बीच पहचान तो खूब है, किंतु इस पहचान को समर्थन में बदलने की कोई कोशिश दीपक कपूर की तरफ से होती हुई नहीं दिखी है - लोगों ने पाया/समझा तो यह है कि इस तरह की किसी कोशिश के लिए दीपक कपूर प्रेरित भी नहीं दिखे हैं । दीपक कपूर को जानने वालों का कहना तो यह है कि एक उम्मीदवार के रूप में 'दिखना' और काम करना उनके बस में शायद है भी नहीं । दीपक कपूर का रोटरी से जो जुड़ाव रहा है, उसमें रोटरी का काम करने की बजाए रोटरी में बिजनेस करने वाला मामला ज्यादा है - इसलिए उनकी उम्मीदवारी के प्रति स्वीकार्यता बनना लोगों को मुश्किल लग रहा है । दीपक कपूर की उम्मीदवारी में 'दम' देखने वाले लोगों का हालाँकि तर्क है कि पोलियो अभियान के मुखिया के रूप में दीपक कपूर ने चूँकि नेताओं को तरह तरह से उपकृत किया है, इसलिए उन उपकारों के बदले में दीपक कपूर अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन की उम्मीद कर सकते हैं । राजा साबू खेमे से दीपक कपूर के उम्मीदवार होने की स्थिति में अशोक गुप्ता के लिए नॉर्थ में समर्थन जुटाना मुश्किल हो जायेगा; जबकि अशोक गुप्ता नॉर्थ के लोगों के भरोसे ही इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने की दौड़/होड़ में हैं । 
अशोक गुप्ता को लेकिन विरोधी खेमे की बजाए अपने खेमे के नेताओं से ही समस्या पैदा होती हुई दिख रही है । उनके खेमे के नेताओं में सुशील गुप्ता तथा शेखर मेहता की निगाह चूँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के पद पर है, इसलिए इन दोनों के राजा साबू के उम्मीदवार के खिलाफ जाने की किसी को भी बहुत उम्मीद नहीं है; और जहाँ तक मनोज देसाई की बात है, उनके लिए ज्यादा कुछ कर सकने के मौके नहीं हैं । पिछली बार राजा साबू खेमे ने उनके इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने में ज्यादा रोड़े नहीं डाले थे, इसका ख्याल रखते हुए उनके लिए भी सीमा से बाहर जाकर अशोक गुप्ता के लिए कुछ कर पाना मुश्किल ही होगा । अशोक गुप्ता अपने समर्थक नेताओं की 'कमजोरियों' को चूँकि जानते/पहचानते हैं, इसलिए ही उन्होंने इंस्टीट्यूट में उन्हें घेरने तथा अपनी उम्मीदवारी के लिए उन्हें समर्थन व्यक्त करने के लिए तैयार करने का प्रयास किया था । नेता लोग लेकिन ज्यादा घाघ निकले - वह अशोक गुप्ता के इंतजामों की तो तारीफ करते रहे, लेकिन उनकी उम्मीदवारी के प्रति समर्थन व्यक्त करने से बचते रहे । 
अशोक गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि रोटरी इंस्टीट्यूट में अशोक गुप्ता ने जो बढ़िया इंतजाम किए थे, वह सिर्फ तारीफ बटोरने के लिए नहीं किए थे - इंतजामों के जरिए उन्होंने वास्तव में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की अपनी संभावित उम्मीदवारी के लिए रोटरी के बड़े नेताओं का समर्थन 'प्राप्त' करने का जुगाड़ बैठाया था । उनका वह जुगाड़ तो काम करता हुआ नहीं दिखा है, और इसलिए ही अशोक गुप्ता का इंस्टीट्यूट में अच्छा इंतजाम करना इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उनकी संभावित उम्मीदवारी के संदर्भ में व्यर्थ ही गया लग रहा है ।

Saturday, December 19, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अतुल देव की शिकायत पर रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय की सक्रियता ने विनय भाटिया की उम्मीदवारी रद्द होने का खतरा पैदा किया

जयपुर/नई दिल्ली । अतुल देव ने विनय भाटिया की जो शिकायत की है, उस पर कार्रवाई टलवाने के लिए विनय भाटिया के समर्थक पूर्व गवर्नर्स ने जयपुर इंस्टीट्यूट में लॉबिंग तो खूब की - लेकिन अपनी लॉबिंग के सफल होने का खुद उन्हें ही कोई भरोसा नहीं मिला है । विनय भाटिया के समर्थक एक पूर्व गवर्नर ने इन पँक्तियों के लेखक से बात करते हुए बताया कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन इस मामले में लगता है कि अपना मन बना चुके हैं, और इसलिए रोटरी के दूसरे नेताओं ने इस मामले से दूर रहने का ही निश्चय किया है - और इस कारण कोई उन्हें मदद का आश्वासन तक देने को तैयार नहीं हुआ है । फरीदाबाद और दिल्ली में बैठे विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थकों को उम्मीद थी कि रोटरी इंस्टीट्यूट में शामिल होने गए उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स उन्हें कोई अच्छी खबर भेजेंगे, किंतु जयपुर में जुगाड़ लगा रहे उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स को अभी तक, जबकि रोटरी इंस्टीट्यूट अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, कोई सफलता हाथ नहीं लगी है । फरीदाबाद और दिल्ली में बैठे विनय भाटिया के कई एक नजदीकियों व समर्थकों को तो जयपुर से सूचना मिली है कि अतुल देव की शिकायत पर विनय भाटिया की उम्मीदवारी का नामांकन रद्द होना निश्चित है । नोमीनेटिंग कमेटी के लिए तय हुए रोटेरियंस के बीच भी यह सूचना चूँकि चली गई है, इसलिए नोमीनेटिंग कमेटी के लिए प्रस्तावित रोटेरियंस में जो लोग विनय भाटिया के पक्ष में जाने का मन बना रहे थे - उन्होंने भी सोचना शुरू कर दिया है कि विनय भाटिया को वोट देकर अपना वोट खराब क्यों करना ? इस माहौल से विनय भाटिया की उम्मीदवारी के समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है, और उनके लिए विनय भाटिया की उम्मीदवारी के पक्ष में अभियान चलाते रहना मुश्किल हुआ है । 
दिलचस्प सीन यह बना है कि इस मामले को लेकर विनय भाटिया के समर्थकों के बीच आपस में ही सिर-फुटौव्वल शुरू हो गई है, और उनके समर्थक इस स्थिति के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने लगे हैं । उल्लेखनीय है कि विनय भाटिया की उम्मीदवारी के नजदीकी समर्थकों पर शुरू से ही यह गंभीर आरोप रहा है कि उन्होंने बहुत ही फूहड़ तरीके से हुड़दंगबाजी करके विनय भाटिया की उम्मीदवारी के अभियान को चलाया है, और कई मौकों पर हुड़दंगबाजी में खुद विनय भाटिया भी शामिल हुए/दिखे - जिससे लोगों के बीच विनय भाटिया की उम्मीदवारी को लेकर नकारात्मक प्रभाव ही बना है । डिस्ट्रिक्ट में जब चारों तरफ से आलोचना हुई तो विनय भाटिया और उनके नजदीकी समर्थकों पर लगाम कसी गई; विनय भाटिया को समझाया गया कि रोटरी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनना चाहते हो तो उसके लायक यदि सचमुच बन न सको तो लेकिन कम से कम 'दिखने' की कोशिश तो करो । विनय भाटिया ने भेष बदलने की कोशिश तो खूब की, लेकिन भेष बदल कर असलियत ज्यादा समय तक चूँकि नहीं छिपाई जा सकती, और वह सामने आ ही जाती है - विनय भाटिया खुद अपनी ही सोच और अपने ही व्यवहार का शिकार हो गए । विनय भाटिया और उनके नजदीकी समर्थक अपनी मुसीबत के लिए अब अपने ही समर्थक पूर्व गवर्नर्स को कोस रहे हैं : उनका कहना है कि उनके समर्थक गवर्नर्स उनकी कमियाँ/गलतियाँ ही बताते रहते हैं और जब सचमुच कुछ करने की जरूरत होती है तो बहानेबाजी करने लगते हैं । विनय भाटिया और उनके समर्थकों की आलोचना का शिकार हो रहे उनके समर्थक पूर्व गवर्नर्स का कहना है कि विनय भाटिया और उनके नजदीकी समर्थक सलाह सुनेंगे/मानेंगे नहीं, और जब अपनी ही हरकतों से फँसेंगे तो उम्मीद करेंगे कि अब इन्हें जैसे भी करके बचाओ । विनय भाटिया के समर्थक गवर्नर्स का ही कहना है कि अपनी उम्मीदवारी के नामांकन के निरस्त होने की स्थिति खुद विनय भाटिया ने ही अपने रवैये से पैदा की है ।
मामला गिफ्ट देने का है । उल्लेखनीय है कि रोटरी की चुनावी राजनीति में उम्मीदवार द्वारा पार्टियाँ देने तथा गिफ्ट देने का चलन स्वीकार्यता पा चुका है, और सभी यह मानते और जानते हैं कि समर्थन पाने के लिए उम्मीदवार को यह करना ही होगा । इसके बाद 'देखने' की बात यह रह जाती है कि कौन उम्मीदवार इस काम को अंजाम किस तरह से और कैसे देता है ? उम्मीद की जाती है कि पार्टियाँ और गिफ्ट इस 'अदा' के साथ दिया जाए कि पाने वाले को अच्छा लगे और वह देने वाले के व्यवहार से प्रभावित हो । इस 'अदा' का एक फायदा यह भी होता है कि रोटरी की चुनावी राजनीति में जो रोटेरियंस पार्टियों व गिफ्ट्स के चलन के पक्ष में नहीं भी होते हैं, वह भी व्यवहार से प्रभावित होकर चुप लगा जाते हैं । विनय भाटिया इस बात को समझने/अपनाने में चूक गए - जिसका नतीजा यह रहा कि उम्मीदवार के रूप में उन्होंने जो पार्टियाँ दीं और जो गिफ्ट दिए, वह खासी फूहड़ता के साथ दिए; जिन्हें 'लेते' हुए लोगों ने खुद को खासा अपमानित ही महसूस किया । कुछेक लोगों ने आपसी बातचीत में कहा भी कि विनय भाटिया ने इस अंदाज में गिफ्ट पहुँचाएँ जैसे वह वोट पाने के लिए रिश्वत पहुँचा रहे हों । लोगों के इस अपमान महसूसने को आवाज दी रोटरी क्लब दिल्ली इंद्रप्रस्थ ओखला के वरिष्ठ सदस्य अतुल देव ने । अतुल देव ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को शिकायत लिखी कि नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्य के रूप में उनका वोट पाने के लिए विनय भाटिया ने उन्हें गिफ्ट भेजा है, जो रोटरी के उच्च आदर्शों के तो खिलाफ है ही, साथ ही चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास भी है । अतुल देव ने यह कहते हुए नोमीनेटिंग कमेटी की अपनी सदस्यता भी छोड़ दी कि जहाँ चुनाव को इस तरह मजाक बना दिया जाए वहाँ चुनावी प्रक्रिया में उनके शामिल होने का कोई मतलब नहीं है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला ने अतुल देव के इस आरोप पर विनय भाटिया से जबाव माँगा । विनय भाटिया अब तक अपने आप को विजयी समझने लगे थे, सो उसी 'नशे' में उन्होंने जबाव में अतुल देव को झूठा बता दिया । अतुल देव आर्मी में रहे हैं और इस नाते उनके कामकाज और काम करने के उनके तरीके में एक खास किस्म का अनुशासन रहा है; पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता के साथ उनकी नजदीकियत रही है - उन्हें विनय भाटिया से अपने को झूठा सुनना और बुरा लगा । विनय भाटिया ने सोचा यह था कि वह अतुल देव को झूठा कह देंगे और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला मामले को खत्म/बंद कर देंगे - लेकिन अतुल देव की तरफ से सुधीर मंगला को मामले की जाँच के लिए कमेटी बनाने का सुझाव मिला । अतुल देव का कहना रहा कि जिस पर आरोप लगता है, वह तो आरोप को झूठा बताता ही है, ऐसे में आरोप की सच्चाई की पड़ताल तो तीसरा पक्ष ही कर सकेगा । सुधीर मंगला ने मामले को रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को भेज दिया और सलाह माँगी कि वह क्या करें ? इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने चूँकि रोटरी में चुनाव को लेकर होने वाली धांधलियों और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशों के खिलाफ बड़ा कठोर रवैया अपनाया हुआ है, लिहाजा रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने अतुल देव की शिकायत के मामले को गंभीरता से लिया । अतुल देव की शिकायत को पुख्ता बनाने के उद्देश्य से रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने अतुल देव से एफिडेविट देने को कहा, जो अतुल देव ने तुरंत से दे दिया । इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही विनय भाटिया समर्थकों के बीच खलबली मच गई । अभी तक तो विनय भाटिया और उनके समर्थक आश्वस्त थे कि अतुल देव की शिकायत का कुछ नहीं होगा : उन्हें पक्का भरोसा था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला कुछ करने की हिम्मत नहीं करेंगे, और जब वह हिम्मत नहीं करेंगे तो फिर होगा भी क्या ? 
अतुल देव की तरफ से भी विनय भाटिया और उनके समर्थक आश्वस्त थे कि अतुल देव की रोटरी में कोई खास सक्रियता भी नहीं है, और वह ज्यादा कुछ जानते भी नहीं हैं; सुशील गुप्ता के साथ उनकी जो नजदीकियत है वह भी व्यक्तिगत किस्म की है और सुशील गुप्ता को भी मैनेज कर लिया जायेगा । लेकिन रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने जिस तरह से अतुल देव की शिकायत में दिलचस्पी ली है और जिस तरह से उनसे एफिडेविट लिया है, उससे विनय भाटिया और उनके समर्थकों के बीच खलबली मची है । विनय भाटिया के समर्थक पूर्व गवर्नर्स ने रोटरी इंस्टीट्यूट में जयपुर जाते समय विनय भाटिया को भरोसा तो दिया था कि जयपुर में सभी बड़े नेता मिलेंगे, सो वह कुछ जुगाड़ लगायेंगे । लेकिन जुगाड़ कुछ लगा नहीं है । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के रवैये को देखते हुए रोटरी के बड़े नेताओं ने जयपुर में मौजूद डिस्ट्रिक्ट 3011 के विनय भाटिया के समर्थक पूर्व गवर्नर्स को साफ बता दिया है कि विनय भाटिया की उम्मीदवारी का निलंबन पक्का है, इसलिए इस मामले में अब दिलचस्पी न लो । जयपुर गए अपने समर्थक पूर्व गवर्नर्स से यह सुन/जान कर विनय भाटिया और उनके समर्थकों को गहरा धक्का लगा है और निराशा व हताशा में वह अपने समर्थक पूर्व गवर्नर्स को कोसने में लग गए हैं । 

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में कॉन्करेंस जुटाने से जुड़ी अपनी कारस्तानियों को लेकर मुकेश अरनेजा को रोटरी इंस्टीट्यूट में भारी छीछालेदर का सामना करना पड़ा है

जयपुर/नई दिल्ली । जयपुर स्थित बीएम बिड़ला ऑडीटोरियम में रोटरी इंस्टीट्यूट में शामिल होने आए रोटरी के बड़े नेताओं तथा विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों के बीच डिस्ट्रिक्ट 3012 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अपनी भूमिका को लेकर मुकेश अरनेजा को जिस लानत-मलानत का शिकार होना पड़ा, उसका वहाँ मौजूद दूसरे रोटेरियंस के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट 3012 व डिस्ट्रिक्ट 3011 के रोटेरियंस नेताओं ने खूब मजा लिया । मुकेश अरनेजा के लिए मुसीबत की बात यह रही कि वहाँ उनके बचाव में कोई आगे नहीं आया, और जिनसे उन्हें सहयोग व समर्थन मिलने की उम्मीद भी थी - वह लोग भी उनकी उड़ती खिल्ली में मजे लेते देखे गए । मुकेश अरनेजा के लिए आफत यह रही कि इंस्टीट्यूट के उद्घाटन अवसर पर जुटे रोटरी नेताओं के बीच खड़े रहना, उनके लिए अपनी फजीहत को निमंत्रण देने जैसा रहा । प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मुकेश अरनेजा जिस किसी के पास खड़े हो जाते - वही उनसे डिस्ट्रिक्ट 3012 के चुनाव में उनकी भूमिका का जिक्र छेड़ देता और कहने लगता कि एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर के रूप में उन्हें वह सब नहीं करना चाहिए जो उन्होंने किया है या कर रहे हैं । किसी किसी ने तो मुकेश अरनेजा को साफ साफ कहा कि उनकी हरकतों से दूसरे रोटेरियंस को भी शर्मिंदा होना पड़ता है, और रोटरी की बदनामी होती है । अधिकतर मौकों पर होता यह कि यह बात शुरू होती तो आसपास खड़े दूसरे लोग भी इस बातचीत में शामिल हो जाते और फिर सब मिल कर मुकेश अरनेजा की लानत-मलानत करते - और मुकेश अरनेजा के लिए उससे बच निकलना मुश्किल होता । 
मुकेश अरनेजा के लिए हालत यह बनी कि रोटरी इंस्टीट्यूट में उनसे पहले उनकी कारस्तानियों की खबरें पहुँची हुई थीं, और इसीलिए हो यह रहा था कि मुकेश अरनेजा जिससे भी मिलते वह उनसे हालचाल पूछने की बजाए उनकी कारस्तानियों की बात छेड़ देता । रोटरी इंस्टीट्यूट में मौजूद लोगों के बीच मुकेश अरनेजा की बदनामी के चर्चे सुन/देख कर बड़े रोटरी नेताओं ने मुकेश अरनेजा को तवज्जो नहीं दी, और उन्हें अपने पास ज्यादा देर बैठने/खड़े होने नहीं दिया । कुछेक बड़े नेताओं के साथ और उनके बीच तस्वीरें खिंचवाने के लिए मुकेश अरनेजा को खासी मशक्कत करना पड़ी - कुछेक मौकों पर वह इसमें सफल भी हुए । रोटरी इंस्टीट्यूट के उद्घाटन के मौके पर मुकेश अरनेजा ने रोटरी के बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवाने पर खास ध्यान दिया, ताकि सोशल साइट्स पर उन्हें पेस्ट करके वह लोगों को 'दिखा' सकें कि तमाम बदनामी और फजीहत के बावजूद रोटरी के बड़े नेताओं के बीच उनकी अच्छी पैठ है । रोटरी के बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवाना मुकेश अरनेजा के लिए कभी भी इतना मुश्किल नहीं हुआ, जितना इस बार रोटरी इंस्टीट्यूट के उद्घाटन मौके पर हुआ । रोटरी इंस्टीट्यूट के जयपुर में हुए उद्घाटन अवसर पर रोटरी के बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए मुकेश अरनेजा बेशर्मी पर उतरे, तब जाकर वह कुछेक बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवा सकने में सफल हो सके । 
रोटरी नेताओं के बीच मुकेश अरनेजा की सबसे ज्यादा छीछालेदर डिस्ट्रिक्ट 3012 के रोटरी क्लब वैशाली के संदर्भ में हुई । रोटरी क्लब वैशाली में सदस्यों की सदस्यता को लेकर रोटरी इंटरनेशनल की वेबसाइट के साथ जिस तरह की छेड़छाड़ की गई, उसे रोटरी नेताओं ने बहुत ही 'संगीन अपराध' के रूप में देखा/पहचाना है - और इस 'अपराध' के प्रेरणा स्रोत के रूप में मुकेश अरनेजा को जिम्मेदार पाया/ठहराया । जिन्हें भी इस किस्से की जानकारी रही, उन्होंने माना/समझा कि वैशाली क्लब की कॉन्करेंस जुटाने के लिए मुकेश अरनेजा ने क्लब में झगड़ा पैदा करने का जो काम किया, उसे अंजाम तक पहुँचाने के लिए मुकेश अरनेजा ने ही क्लब के प्रेसीडेंट मनोज भदोला को रोटरी इंटरनेशनल के रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करने का रास्ता दिखाया/सुझाया - और इसके बाद जो हुआ उससे रोटरी इंटरनेशनल की सदस्यता का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था मजाक बन कर रह गई । मजे की बात यह रही कि मुकेश अरनेजा के दिखाए रास्ते पर चल कर जिन मनोज भदोला ने इस खेल की शुरुआत की, वही मनोज भदोला आज क्लब से बाहर कर दिए गए हैं । दरअसल वैशाली क्लब की कॉन्करेंस का जुगाड़ बैठा रहे मुकेश अरनेजा को क्लब के प्रेसीडेंट मनोज भदोला ने बताया कि क्लब के वरिष्ठ सदस्य प्रसून चौधरी कॉन्करेंस देने का विरोध कर सकते हैं और चूँकि क्लब में प्रसून चौधरी की अच्छी पकड़ है, इसलिए उनके विरोध के चलते क्लब के बाकी सदस्यों को कॉन्करेंस के लिए राजी करना असंभव होगा । उल्लेखनीय है कि प्रसून चौधरी पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार थे - नोमीनेटिंग कमेटी में फैसला लेकिन उनके अनुकूल नहीं रहा था; डिस्ट्रिक्ट में कई नेताओं व लोगों का उन पर दबाव रहा कि उन्हें अधिकृत उम्मीदवार को चेलैंज करना चाहिए, लेकिन प्रसून चौधरी ने साफ कह दिया कि अधिकृत उम्मीदवार को चेलैंज करने के काम में जो गंदगी होती है उसे वह रोटरी के हित में नहीं देखते हैं और इसलिए वह चेलैंज नहीं करेंगे । प्रसून चौधरी ने अधिकृत उम्मीदवार को चेलैंज न करने की लाइन ली, उससे रोटरी में और डिस्ट्रिक्ट में उनका कद और बढ़ा । इसी कारण से मुकेश अरनेजा और उनके जाल में फँसे क्लब प्रेसीडेंट मनोज भदोला को लगा कि प्रसून चौधरी कॉन्करेंस में रोड़ा बनेंगे । 
मुकेश अरनेजा ने मनोज भदोला को प्रसून चौधरी रूपी रोड़े को हटाने का उपाय बताया कि क्लब में फर्जी किस्म की ग्राउंड तैयार करो और उसका बहाना लेकर प्रसून चौधरी को क्लब से ही बाहर कर दो । मनोज भदोला ने मुकेश अरनेजा की आज्ञा का पालन किया । किंतु मामला उल्टा पड़ गया । प्रसून चौधरी की क्लब में जो साख है, उसके चलते फर्जी तरीके से क्लब से उन्हें निकालने की कार्रवाई पर क्लब में बबाल हो गया । इस बबाल को थामने तथा क्लब के लोगों के विरोध को नियंत्रित करने के लिए मनोज भदोला ने अपने गिने-चुने साथियों के साथ मिलकर चालबाजियाँ तो खूब चलीं, लेकिन उनकी चालबाजियाँ उनके काम आई नहीं और कुल नतीजा यह है कि प्रसून चौधरी को क्लब से निकाले जाने के फैसले को रद्द कर दिया गया है, और प्रेसीडेंट मनोज भदोला को क्लब से निकाल दिया गया है । रोटरी क्लब वैशाली का मामला वैसे तो एक क्लब का मामला भर है, जिस पर रोटरी के बड़े नेताओं का ध्यान शायद ही जाता - किंतु इस मामले में मुकेश अरनेजा की संलग्नता और रोटरी इंटरनेशनल की वेबसाइट के साथ हुई छेड़छाड़ ने इसे एक बड़ा मामला बना दिया है । 
रोटरी इंस्टीट्यूट के उद्घाटन अवसर पर मौजूद रोटेरियंस के बीच मुकेश अरनेजा की इस बात के लिए भी खासी छीछालेदर हुई कि कॉन्करेंस जुटाने के लिए उन्होंने अपने डीआरएफसी होने का बेजा इस्तेमाल किया और मैचिंग ग्रांट के नाम पर क्लब्स के पदाधिकारियों को ब्लैकमेल किया । उल्लेखनीय है कि कुछेक क्लब्स के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि मुकेश अरनेजा ने उन्हें धमकी दी कि उन्होंने यदि कॉन्करेंस नहीं दी तो वह मैचिंग ग्रांट के उनके आवेदनों पर साइन नहीं करेंगे । अधिकृत उम्मीदवार सुभाष जैन के खिलाफ कॉन्करेंस जुटाने में मुकेश अरनेजा ने अपने पद की गरिमा के साथ साथ रोटरी को भी जिस तरह से लज्जित किया है, उसकी हर किसी ने तीखी आलोचना ही की है । मुकेश अरनेजा के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि क्लब्स में झगड़े करवा कर तथा अपनी भारी फजीहत करवा कर उन्होंने जो कॉन्करेंस इकठ्ठा की/करवाई हैं, उनके फर्जी होने की पोल खुलने लगी है । कुछेक क्लब्स के पदाधिकारियों तथा सदस्यों ने अपने अपने क्लब की कॉन्करेंस को फर्जी करार देते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेके गौड़ को पत्र लिखे हैं । इससे कई क्लब्स की कॉन्करेंस निरस्त हो जाने की संभावना बन रही है । सचमुच यदि ऐसा हुआ तो मुकेश अरनेजा के लिए तो 'जूते भी खाने और प्याज भी खाने' वाला मामला हो जायेगा - यानि रोटरी भर में बदनामी भी मिली और काम भी नहीं हुआ ।