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Wednesday, December 30, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की संभावित उम्मीदवारी के संदर्भ में इंस्टीट्यूट में अच्छा इंतजाम करना खुद अशोक गुप्ता को भी व्यर्थ ही गया लग रहा है

जयपुर । रोटरी इंस्टीट्यूट 2015 में शामिल होने आए रोटरी के हर आम और खास को खुश खुश वापस भेजने में अशोक गुप्ता भले ही कामयाब रहे हैं, किंतु उनकी यह कामयाबी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की तरफ बढ़ती उनकी राह को आसान बनाएगी - इसका विश्वास उनके नजदीकियों व शुभचिंतकों को भी नहीं है । रोटरी इंस्टीट्यूट 2015 के चेयरमैन के रूप में अशोक गुप्ता ने जो व्यवस्था की और आमंत्रितों की जिस तरह की आवभगत हुई, उसकी चैतरफा तारीफ ही सुनने को मिल रही है । रोटरी इंस्टीट्यूट में शामिल होने गया हर छोटा/बड़ा रोटेरियन अशोक गुप्ता की आयोजन-क्षमता का गुण गाता हुआ ही सुना जा रहा है - किंतु इस उपलब्धि के राजनीतिक लाभ में 'ट्रांसफर' हो सकने का सवाल जब आता है, तब सभी लोग अलग अलग राय सुनाने/बताने लगते हैं । तो क्या अशोक गुप्ता ने जो मेहनत की है, उसका उन्हें कोई राजनीतिक फल नहीं मिलेगा ? इंस्टीट्यूट जयपुर में करने की लॉबीइंग करने से लेकर उसे आयोजित करने में लगा अशोक गुप्ता का श्रम क्या बेकार चला जायेगा ? सभी मानते और कहते हैं कि जयपुर में इंस्टीट्यूट का आयोजन कराने/करने के पीछे अशोक गुप्ता का मुख्य उद्देश्य इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए संभावित अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में माहौल बनाना तथा रोटरी के बड़े नेताओं के बीच अपनी धाक जमाना था । 
अशोक गुप्ता अपनी धाक दिखाने/ज़माने में तो सफल हुए हैं, लेकिन इस सफलता के बावजूद इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए बड़े नेताओं का समर्थन जुटाने की उनकी कोशिश सफल नहीं हो सकी है । अशोक गुप्ता के ही नजदीकियों का कहना है कि अशोक गुप्ता ने अपनी उम्मीदवारी के बाबत इंस्टीट्यूट में जयपुर में इकट्ठा हुए रोटरी के सभी बड़े नेताओं की समर्थन की हामी भरवाने की कोशिश तो खूब की, लेकिन सभी बड़े नेता बड़ी सफाई और चालाकी से हामी भरने से बच निकले । उल्लेखनीय है कि अशोक गुप्ता को कल्याण बनर्जी, सुशील गुप्ता, शेखर मेहता, मनोज देसाई आदि का समर्थन माना/बताया जाता है - लेकिन इनमें से कोई भी अभी तक अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी की खुली वकालत करता हुआ नहीं सुना गया है । अशोक गुप्ता और उनके समर्थकों के लिए यह बात चिंता की इसलिए है क्योंकि अशोक गुप्ता के साथ इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए और कई उम्मीदवारों की उम्मीदवारी भी प्रस्तुत होनी है, ऐसे में यदि उनके समर्थक समझे जाने वाले नेताओं ने ही उनके समर्थन से हाथ खींच लिया - तो फिर उनका तो सारा खेल ही गड़बड़ा जायेगा । अशोक गुप्ता को सबसे ज्यादा मदद पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता से मिलने की उम्मीद रही है, लेकिन अब सुशील गुप्ता के रंग-ढंग ही उन्हें बदले बदले से नजर आ रहे हैं । सुशील गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट से जिस तरह अचानक से रंजन ढींगरा की उम्मीदवारी प्रस्तुत हुई है, उससे अशोक गुप्ता के कान खड़े हुए हैं । जयपुर इंस्टीट्यूट से लौटते ही रंजन ढींगरा ने जिस तरह से अपने क्लब में अपनी उम्मीदवारी का प्रस्ताव पास कराया है, उससे इंस्टीट्यूट को प्रभावी तरीके से आयोजित करने को लेकर मिली प्रशंसा से प्राप्त अशोक गुप्ता का उत्साह हवा हो गया है । रंजन ढींगरा को सुशील गुप्ता के बहुत खास नजदीकी के रूप में देखा/पहचाना जाता है - दरअसल इसीलिए अशोक गुप्ता को सुशील गुप्ता के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं ।
अशोक गुप्ता के लिए राहत की बात यही है कि प्रतिस्पर्द्धी खेमे में भी अभी तक उम्मीदवार को लेकर एकमतता नहीं बनी है, और वहाँ भी कई उम्मीदवारों के बीच भारी उठा-पटक है । राजेंद्र उर्फ राजा साबू खेमे से यूँ तो भरत पांड्या की उम्मीदवारी सबसे प्रबल है; किंतु दीपक कपूर और सुरेंद्र सेठ भी राजा साबू खेमे के भरोसे ही ताल ठोक रहे हैं । देश में पोलियो अभियान के मुखिया के रूप में काम करते रहे दीपक कपूर की लोगों के बीच पहचान तो खूब है, किंतु इस पहचान को समर्थन में बदलने की कोई कोशिश दीपक कपूर की तरफ से होती हुई नहीं दिखी है - लोगों ने पाया/समझा तो यह है कि इस तरह की किसी कोशिश के लिए दीपक कपूर प्रेरित भी नहीं दिखे हैं । दीपक कपूर को जानने वालों का कहना तो यह है कि एक उम्मीदवार के रूप में 'दिखना' और काम करना उनके बस में शायद है भी नहीं । दीपक कपूर का रोटरी से जो जुड़ाव रहा है, उसमें रोटरी का काम करने की बजाए रोटरी में बिजनेस करने वाला मामला ज्यादा है - इसलिए उनकी उम्मीदवारी के प्रति स्वीकार्यता बनना लोगों को मुश्किल लग रहा है । दीपक कपूर की उम्मीदवारी में 'दम' देखने वाले लोगों का हालाँकि तर्क है कि पोलियो अभियान के मुखिया के रूप में दीपक कपूर ने चूँकि नेताओं को तरह तरह से उपकृत किया है, इसलिए उन उपकारों के बदले में दीपक कपूर अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन की उम्मीद कर सकते हैं । राजा साबू खेमे से दीपक कपूर के उम्मीदवार होने की स्थिति में अशोक गुप्ता के लिए नॉर्थ में समर्थन जुटाना मुश्किल हो जायेगा; जबकि अशोक गुप्ता नॉर्थ के लोगों के भरोसे ही इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने की दौड़/होड़ में हैं । 
अशोक गुप्ता को लेकिन विरोधी खेमे की बजाए अपने खेमे के नेताओं से ही समस्या पैदा होती हुई दिख रही है । उनके खेमे के नेताओं में सुशील गुप्ता तथा शेखर मेहता की निगाह चूँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के पद पर है, इसलिए इन दोनों के राजा साबू के उम्मीदवार के खिलाफ जाने की किसी को भी बहुत उम्मीद नहीं है; और जहाँ तक मनोज देसाई की बात है, उनके लिए ज्यादा कुछ कर सकने के मौके नहीं हैं । पिछली बार राजा साबू खेमे ने उनके इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने में ज्यादा रोड़े नहीं डाले थे, इसका ख्याल रखते हुए उनके लिए भी सीमा से बाहर जाकर अशोक गुप्ता के लिए कुछ कर पाना मुश्किल ही होगा । अशोक गुप्ता अपने समर्थक नेताओं की 'कमजोरियों' को चूँकि जानते/पहचानते हैं, इसलिए ही उन्होंने इंस्टीट्यूट में उन्हें घेरने तथा अपनी उम्मीदवारी के लिए उन्हें समर्थन व्यक्त करने के लिए तैयार करने का प्रयास किया था । नेता लोग लेकिन ज्यादा घाघ निकले - वह अशोक गुप्ता के इंतजामों की तो तारीफ करते रहे, लेकिन उनकी उम्मीदवारी के प्रति समर्थन व्यक्त करने से बचते रहे । 
अशोक गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि रोटरी इंस्टीट्यूट में अशोक गुप्ता ने जो बढ़िया इंतजाम किए थे, वह सिर्फ तारीफ बटोरने के लिए नहीं किए थे - इंतजामों के जरिए उन्होंने वास्तव में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की अपनी संभावित उम्मीदवारी के लिए रोटरी के बड़े नेताओं का समर्थन 'प्राप्त' करने का जुगाड़ बैठाया था । उनका वह जुगाड़ तो काम करता हुआ नहीं दिखा है, और इसलिए ही अशोक गुप्ता का इंस्टीट्यूट में अच्छा इंतजाम करना इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उनकी संभावित उम्मीदवारी के संदर्भ में व्यर्थ ही गया लग रहा है ।

Monday, August 10, 2015

रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के सामने राजा साबू ने जो सफाई दी है, वह क्या राजा साबू को इस बात का अहसास होने का सचमुच संकेत और सुबूत है कि उन्होंने जिस तरह से कुछेक पूर्व गवर्नर्स को छूट दे रखी है तथा उनकी बातों पर वह आँख मूँद कर भरोसा करते रहते हैं, उससे न सिर्फ उनके डिस्ट्रिक्ट व रोटरी की साख का कबाड़ा हो रहा है, बल्कि उनकी खुद की पहचान व प्रतिष्ठा भी कलंकित हो रही है

नई दिल्ली । उदयपुर में रोटरी रिट्रीट में शामिल रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी दिल्ली पहुँचे, तो उनके साथ साथ यह सूचना भी दिल्ली के रोटेरियंस को मिली कि रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू ने मौजूदा प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से इस बात के लिए सॉरी फील किया है कि उनके डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को लेकर जो झमेला हो रहा है, उससे रोटरी तथा केआर रवींद्रन की खासी फजीहत हो रही है । यहाँ इस बात की भी चर्चा रही कि राजा साबू ने केआर रवींद्रन के सामने इस बात पर भी अफसोस प्रकट किया कि इस झमेले में उनका नाम और उनकी संलग्नता भी दिख रही है । इस अफसोस के साथ राजा साबू ने केआर रवींद्रन को यह विश्वास दिलाने का भी भरसक प्रयास किया कि उनके डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संबंध में जो कुछ भी हो रहा है, उसमें किसी भी स्तर पर और किसी भी रूप में उनकी कोई संलग्नता नहीं है । 
केआर रवींद्रन के सामने राजा साबू को यह सब करने/कहने की जरूरत दरअसल इसलिए पड़ी, क्योंकि रोटरी रिट्रीट के तहत उदयपुर के होटल ताज लेक पैलेस में इकट्ठा हुए रोटरी के बड़े पदाधिकारियों के बीच माहौल यह खबर मिलने के बाद कुछ तनावपूर्ण हो गया था कि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में राजा साबू सहित अन्य कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के क्लब्स ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में चेलैंजर उम्मीदवार के लिए कॉन्करेंस जुटा/जुटवा कर अपनी खुली भागीदारी को दिखाया है - और इस तरह प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के चुनावों को हतोत्साहित करने के अभियान की ही फजीहत कर दी है । रिट्रीट में मौजूद पदाधिकारियों के अनुसार, केआर रवींद्रन ने इस खबर पर वहाँ मौजूद राजा साबू और/या यशपाल दास से तो कोई बात नहीं की; किंतु अपने स्तर पर इस खबर की पुष्टि जरूर कराई और इसके सच निकलने पर बहुत दुखी व निराश हुए । 
केआर रवींद्रन के सामने समस्या दरअसल यह आ खड़ी हुई कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के रूप में जगह जगह भाषण देने के लिए उन्होंने जो मुख्य बिंदु तैयार किए हुए हैं, उनमें रोटेरियंस को चुनाव से दूर रहने की नसीहतें प्रमुख हैं । उनकी नसीहतों पर लेकिन जब पूर्व प्रेसीडेंट राजा साबू और पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास और उनके डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स ही ध्यान नहीं देंगे, तब केआर रवींद्रन दूसरों से किस मुँह से इसके लिए उम्मीद करेंगे । राजा साबू के सीनियर होने के नाते और प्रेसीडेंट बनने में मिली उनकी मदद के नाते से केआर रवींद्रन की इस मामले में राजा साबू से सीधी बात करने की तो 'हिम्मत' नहीं हुई, किंतु यह जताने/'दिखाने' में केआर रवींद्रन ने कोई लिहाज भी नहीं किया कि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में पूर्व गवर्नर्स जो तमाशा कर रहे हैं - उससे वह बुरी तरह निराश और नाराज हैं । उनकी निराशा और नाराजगी की भनक राजा साबू को मिली तो उन्होंने केआर रवींद्रन से इस मामले में अकेले में सीधी बात करने की जरूरत समझी । केआर रवींद्रन और राजा साबू के बीच अकेले में जो बात हुई, उसके कंटेंट दूसरों के सामने नहीं भी आते - यदि वह आपस में बात करने के बाद चुप लगा जाते । किंतु आपस में बात करने के बाद चूँकि दोनों ने अपने अपने नजदीकियों के साथ उक्त बातचीत को शेयर किया; और फिर उनके नजदीकियों ने अपने अपने नजदीकियों से उसे बताया .... और फिर जब यह सिलसिला चल गया तो उनके बीच हुई बातचीत और उसके कंटेंट फिर गोपनीय नहीं रह पाए । 
केआर रवींद्रन और राजा साबू के बीच हुई बातचीत की गोपनीयता भंग हुई तो यह बात सामने कि राजा साबू ने अपने डिस्ट्रिक्ट में हो रही राजनीति पर सॉरी फील किया । दोनों के बीच हुई बातचीत के जो कंटेंट चर्चा में हैं उनमें बताया जा रहा है कि राजा साबू ने पहले केआर रवींद्रन को अपने डिस्ट्रिक्ट में पिछले छह महीने से चल रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की पृष्ठभूमि बताना शुरू किया । केआर रवींद्रन ने लेकिन उन्हें यह कह कर रोका कि इसमें उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है; उनके लिए चिंता की बात सिर्फ यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में गवर्नर्स लोग खुल कर अपनी भूमिका निभा रहे हैं । केआर रवींद्रन ने संकेतों में यह स्पष्ट कर दिया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में राजा साबू के खुद के एक उम्मीदवार के पक्ष में पार्टी बन जाने से रोटरी की प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ है, तथा उन्हें बुरा लगा है । इन संकेतों को समझ कर राजा साबू ने सारा दोष अपने डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स के सिर मढ़ दिया । राजा साबू ने स्वीकार किया कि उनके डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स ने उन्हें अँधेरे में रखा और उनका नाम लेकर 'अपनी' राजनीति की । राजा साबू ने कहा कि उनके लिए हर बात पर ध्यान देना संभव नहीं होता है, जिसका फायदा उठा कर कई बड़े और छोटे नेता उनका नाम लेकर 'अपने काम' बनाते रहते हैं । केआर रवींद्रन के सामने राजा साबू ने जिस तरह से सफाई दी और अपने डिस्ट्रिक्ट के चुनावी झमेले में अपनी संलग्नता की बात से इंकार किया; और अपनी 'दिख' रही संलग्नता के लिए अपने डिस्ट्रिक्ट के कुछेक पूर्व गवर्नर्स को जिम्मेदार ठहराया - उससे लगा है कि राजा साबू को इस बात का अहसास हुआ है कि उन्होंने जिस तरह से कुछेक पूर्व गवर्नर्स को छूट दे रखी है तथा उनकी बातों पर वह आँख मूँद कर भरोसा करते रहते हैं, उससे न सिर्फ उनके डिस्ट्रिक्ट व रोटरी की साख का कबाड़ा हो रहा है, बल्कि उनकी खुद की पहचान व प्रतिष्ठा भी कलंकित हो रही है ।
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट के कई लोग हालाँकि लगातार यह कहते और दावा करते रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट में बहुत सी ओछी व घटिया हरकतें राजा साबू का नाम लेकर होती रही हैं, उनके बारे में राजा साबू को पता भी नहीं होगा । डिस्ट्रिक्ट में यह एक फैशन बन गया है कि जिसे लोगों के बीच अपनी बात मनवानी होती है वह राजा साबू का हवाला दे देता है - जिससे कि सामने वाले लोग निरुत्तर हो जाते हैं और बात मान लेते हैं । राजा साबू का नाम लेकर काम निकालने वाले लोगों में बड़े नेता ही नहीं, बल्कि क्लब्स के छुटभैये नेता भी शामिल देखे गए हैं । इस बार के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में भी राजा साबू की भूमिका को लेकर डिस्ट्रिक्ट में लोग दो खेमों में बँटे नजर आए - कुछ का कहना रहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में जो मनमानीपूर्ण बेईमानी हो रही है, वह राजा साबू की रजामंदी और उनके ही दिशा-निर्देशन में हो रही है; लेकिन कुछेक अन्य का कहना यह भी रहा है कि जो कुछ भी हो रहा है राजा साबू की उसमें सीधी मिलीभगत नहीं है, और उन्हें अँधेरे में रख कर उनके नजदीकी पूर्व गवर्नर्स अपनी अपनी राजनीतिक 'रोटियाँ सेंक रहे हैं ।' डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अब सच चाहें जो हो - राजा साबू की रजामंदी और उनका दिशा-निर्देशन सचमुच में रहा हो, और या वह इस्तेमाल हुए हों - इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के सामने दी गई अपनी सफाई के बाद अब लेकिन राजा साबू के सामने चुनौती यह आ खड़ी हुई है कि वह लोगों को 'दिखाएँ' कि केआर रवींद्रन से उन्होंने सच कहा है, और इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन को उन्होंने कोई 'गोली' नहीं दी है । 
यह देखना सचमुच दिलचस्प होगा कि रोटरी रिट्रीट के तहत उदयपुर के होटल ताज लेक पैलेस में मौजूदा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से आमना-सामना होने पर पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू अपने डिस्ट्रिक्ट में हो रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अपनी संलग्नता को लेकर जो सफाई देने के लिए मजबूर हुए - अपनी उस सफाई पर वह वास्तव में टिके भी रहते हैं और केआर रवींद्रन की चुनाव संबंधी नसीहतों पर अमल करने के लिए वह सचमुच में कोई प्रयास करते भी हैं ? राजा साबू, यशपाल दास तथा डिस्ट्रिक्ट के दूसरे पूर्व गवर्नर्स की समस्या यह है कि करीब चार महीने बाद, 18 से 20 दिसंबर 2015 को जयपुर में होने वाले रोटरी इंस्टीट्यूट में जब उनका आमना-सामना केआर रवींद्रन से होगा - तब वह अपना कौन सा मुँह लेकर उनके सामने जाना पसंद करेंगे; क्योंकि तब तक उनकी मिलीभगत के कारण खासा विवादित हो चुका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव तो संभवतः हो चुका होगा और उसका नतीजा भी आ चुका होगा; लेकिन जरूरी नहीं है कि इस चुनाव के चक्कर में डिस्ट्रिक्ट में जो राजनीतिक आग भड़की है, वह भी बुझ चुकी होगी ? 

Saturday, May 9, 2015

रोटरी इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर का पद प्राप्त करने के चलते इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति में रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3010 के विनोद बंसल की संभावित उपस्थिति क्या सचमुच में खासी वजनदार बन गई है ?

नई दिल्ली । विनोद बंसल के रोटरी इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर बनने की खबर से रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के लिए सज रहे 'बहादुरों' तथा दूसरे खिलाड़ियों के बीच हड़कंप मच गया है । दरअसल रोटरी की चुनावी राजनीति में रोटरी इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर के पद को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद तक पहुँचने की सीढ़ी के रूप में देखा/पहचाना जाता है । इंटरनेशनल कन्वेंशन में करीब साढ़े पाँच सौ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को ट्रेंड करने के लिए विभिन्न देशों से करीब चालीस पूर्व गवर्नर्स को ट्रेनिंग लीडर के रूप में चुना जाता है । भारत से दो पूर्व गवर्नर्स को इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर के रूप में चुना जाता है - एक दक्षिण भारत से और दूसरा गैर दक्षिण भारत से । माना/समझा जाता है कि रोटरी राजनीति के बड़े खिलाड़ी ऐसे पूर्व गवर्नर्स को ही इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर चुनते हैं, जिन्हें वह आगे बढ़ाना चाहते हैं । इसीलिए विनोद बंसल के इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर चुने जाने पर इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के संभावित उम्मीदवारों की नींद उड़ जाना स्वाभाविक ही है । यह नींद उड़ना इसलिए भी स्वाभाविक है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अभी जो लोग दौड़ लगाते दिख रहे हैं, उनमें विनोद बंसल को तो काफी पीछे माना/समझा जा रहा है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी दौड़ में आगे दिखने वाले लोगों में भरत पांड्या, अशोक गुप्ता, दीपक कपूर, सुरेंद्र सेठ आदि का नाम लिया जा रहा है; तो इनके बाद के लोगों में जेटी व्यास, गुलाम वाहनवती, आलोक बिलौरे, विनय कुलकर्णी, राजीव प्रधान आदि का नाम लिया/सुना जा रहा है । विनोद बंसल का नाम तो इनके बाद कहा/बताया जाता है । कुछेक लोग तो यहाँ तक कहते/मानते हैं कि विनोद बंसल तो वास्तव में अगली से अगली बार के लिए उम्मीदवार बनने की तैयारी कर रहे हैं । 
विनोद बंसल को लेकिन लंबी छलांग के खिलाड़ी के रूप में भी देखा/पहचाना जाता है । बहुत सी पोजिशंस उन्होंने बहुत ही जल्दी प्राप्त की हैं । जिन पोजिशंस को प्राप्त करने में दूसरों को लंबा इंतजार करना पड़ा है तथा काफी एड़ियाँ रगड़नी पड़ी हैं, उन्हें विनोद बंसल ने चमत्कारिक तरीके से बहुत ही कम समय में हासिल किया है । रोटरी के बड़े पदाधिकारियों तथा नेताओं के साथ नजदीक व विश्वास के संबंध बनाने में विनोद बंसल ने जो कामयाबी हासिल की है, उसके चलते तो वह कई लोगों के बीच ईर्ष्या के पात्र भी बन गए हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होते हुए ही विनोद बंसल को दिल्ली में प्रस्तावित रोटरी इंस्टीट्यूट के चेयरमैन बनने का जो मौका मिल रहा था, उसकी आहट से उनके अपने डिस्ट्रिक्ट के कुछेक पूर्व गवर्नर्स तो इतना जल-भुन गए थे कि उन्होंने दिल्ली में इंस्टीट्यूट होने की संभावना में ही मट्ठा डाल दिया था । दिल्ली की बजाये चेन्नई में हुए इंस्टीट्यूट में विनोद बंसल को हालाँकि वाइस चेयरमैन के पद से ही संतोष करना पड़ा था, लेकिन दूसरे वाइस चेयरमैनों की तुलना में वह काफी 'जूनियर' ही थे । बहुत ही कम समय में तथा तेज रफ्तार के साथ विनोद बंसल ने रोटरी में जो कुछ पाया है, उसे देखते/जानते हुए रोटरी की राजनीति में वह बहुतों के लिए चुनौती बन गए हैं - कईयों को तो उन्होंने पीछे धकेल दिया है । 
रोटरी इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर बन कर विनोद बंसल ने अपने डिस्ट्रिक्ट - जो अभी डिस्ट्रिक्ट 3010 ही है, डिस्ट्रिक्ट 3011 तो एक जुलाई से होगा  - के ही कई तुर्रमखाओं को जैसे जमीन सुँघा दी है । डिस्ट्रिक्ट 3010 में अभी तक सुशील गुप्ता, राजेश बत्रा, रंजन ढींगरा ही इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर बने हैं । विनोद बंसल के रूप में डिस्ट्रिक्ट 3010 को कई वर्षों के बाद इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर का पद मिला है । दूसरे महत्वाकांक्षी व आगे बढ़ने के लिए तिकड़में और जुगाड़ लगाते रहने वाले, तथा खुद को डिस्ट्रिक्ट का 'चौधरी' समझने/बताने वाले नेताओं को विनोद बंसल की इस उपलब्धि से खासा तगड़ा झटका लगा है । उन्हें झटका इस कारण से भी लगा है, क्योंकि वह भी जान/समझ रहे हैं कि इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर के रूप में विनोद बंसल को अगले रोटरी वर्ष में जयपुर में होने जा रहे रोटरी इंस्टीट्यूट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को ट्रेनिंग देने का मौका मिलेगा और इस वजह से रोटरी इंस्टीट्यूट में उन्हें खासी अहमियत मिलेगी । डिस्ट्रिक्ट के कुछेक चौधरियों की नींद लेकिन यह जान/देख कर और भी ज्यादा उड़ी हुई है कि इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर का पद प्राप्त करने के चलते इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी राजनीति में विनोद बंसल की संभावित उपस्थिति खासी वजनदार बन गई है ।  
रोटरी इंटरनेशनल ट्रेनिंग लीडर बन कर विनोद बंसल ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी दौड़ में शामिल नेताओं के बीच जिस तरह से खलबली मचाई है, उसके कारण रोटरी की चुनावी राजनीति खासी दिलचस्प भी हो गई है ।