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Wednesday, July 8, 2020

रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों तथा रोटेरियंस से डोनेशन के रूप में पैसे लेने की कोशिशों पर रोक लगाने की सिफारिशों ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता को जोर का झटका दिया है

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों पर गंभीर आपत्ति प्रकट करते हुए, वास्तव में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता की गर्दन ही पकड़ ली है । शेखर मेहता 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के चेयरमैन हैं, और स्काईलाइन हॉउस के उनके पते पर ही इस फाउंडेशन का मुख्यालय है । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज ने इस फाउंडेशन की गतिविधियों को रोटरी की 'समानांतर गतिविधियों' के रूप में देखा/पहचाना है, और आशंका व्यक्त की है कि इसकी गतिविधियाँ रोटेरियंस के बीच कन्फ्यूजन पैदा करके उन्हें रोटरी से अलग कर सकती हैं तथा इस तरीके से रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन को नुकसान पहुँचाने वाली साबित हो सकती हैं । एक तरह से रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज ने शेखर मेहता के नेतृत्व में चलने वाले 'द रोटरी ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' को रोटरी के लिए खतरे के रूप में देखा/पहचाना है - और इसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की है । शेखर मेहता के लिए बड़े झटके वाली बात यह रही है कि उनके फाउंडेशन की गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए तथा उन पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज करते हुए रोटरी इंटरनेशनल के बोर्ड व रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की जून में जो मीटिंग्स हुईं, उनमें अधिकृत पदाधिकारी होने के बावजूद प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता, डायरेक्टर्स भरत पांड्या व कमल सांघवी तथा फाउंडेशन ट्रस्टी गुलाम वाहनवती को शामिल नहीं किया गया । 
उल्लेखनीय है कि देश के रोटेरियंस के बीच इस फाउंडेशन को शेखर मेहता की 'निजी दुकान' के रूप में ही देखा/पहचाना गया है, जिसे इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी बनने के बाद से वह तेजी से बड़ा बना रहे हैं, तथा सजा/सँवार कर नई चमक के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं । रोटरी इंटरनेशनल की छत्रछाया में 'काम करने का नाम लेकर' यह फाउंडेशन रोटरी क्लब्स, अन्य तरह तरह के एनजीओज तथा सरकारी विभागों के साथ मिल कर गरीबों, बीमारों, अशिक्षितों तथा पिछड़े समुदायों के लिए काम करने की बात कर रहा है; इसने काम करने के लिए प्रायरिटीज एरिया'ज तय किए हैं, और उनके लिए छोटे-बड़े रोटेरियंस को लेकर भारी-भरकम टीमें बनाई हैं - और विभिन्न क्षेत्रों में काम को अंजाम देने के लिए रोटेरियंस से डोनेशन लिए/माँगे हैं । शेखर मेहता ने देश के प्रायः प्रत्येक बड़े रोटेरियन पदाधिकारी व नेता को इस फाउंडेशन में कोई न कोई पद देकर 'जोड़ा' है - और एक तरीके से यह 'दिखाया' हुआ है कि 'द रोटरी ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के लिए काम करने का मतलब रोटरी का काम करना है । कई प्रमुख व वरिष्ठ रोटेरियंस निजी बातचीत में इस फाउंडेशन को शेखर मेहता की निजी महत्त्वाकांक्षा से जोड़ कर देखते/बताते रहे हैं, और शिकायतें करते रहे हैं कि शेखर मेहता इसके जरिये अपना निजी संस्थान बना/खड़ा कर रहे हैं । शेखर मेहता चूँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की राह पर हैं, इसलिए तरह-तरह के स्वार्थों के चलते कोई भी खुलकर अपनी शिकायतों को व्यक्त नहीं कर पाया और शेखर मेहता को अपनी 'निजी दुकान' बढ़ाने का साफ रास्ता मिल गया ।
लेकिन रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की मीटिंग्स में जो बातें हुईं हैं, जो सवाल उठे हैं और जिस तरह के निर्णय हुए हैं - उससे लगता है कि शेखर मेहता के फाउंडेशन को ग्रहण लग गया है, और वह मुसीबत में घिर गया है । बोर्ड सदस्यों व ट्रस्टीज की मीटिंग्स में इस बात पर सवाल उठे हैं कि 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों के लिए रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन से अनुमति क्यों नहीं ली गईं; तथा रोटरी फाउंडेशन को अलग-थलग करके फाउंडेशन के लिए पैसा क्यों और कैसे लिया जा रहा है ? बोर्ड सदस्यों व ट्रस्टीज ने रोटरी इंटरनेशनल के जनरल सेक्रेटरी से अनुरोध किया है कि वह फाउंडेशन के पदाधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहें कि उनकी सभी गतिविधियाँ रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन के अंतर्गत होंगी और उनके प्रति ही जबावदेह व जिम्मेदार होंगी । रोटेरियंस से फाउंडेशन के लिए पैसे देने और जमा करने पर तुरंत रोक लगाने की माँग करते हुए अनुरोध किया गया है कि फाउंडेशन की गतिविधियों को तुरंत से रोका जाये और उन्हें रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन के मॉडल के अनुरूप ही काम करने को कहा जाए । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज के इस रवैये से 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के अस्तित्व को लेकर गंभीर संशय पैदा हो गया है, और इस फाउंडेशन के तहत बनी कमेटियों के पदाधिकारी तथा सदस्य अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं ।

Thursday, December 13, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 और इसके तीन पूर्व गवर्नर्स पर इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा लगाए गए 'चुनावी अपराधी' होने के आरोप को रद्द करने/करवाने में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में सुशील गुप्ता सचमुच कोई प्रयास करेंगे क्या ?

नई दिल्ली । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सुशील गुप्ता रोटरी इंटरनेशनल से जुड़े अदालती मामलों को खत्म करवाने के अभियान में तो सफल हो रहे हैं, लेकिन अपने ही डिस्ट्रिक्ट और उसके तीन पूर्व गवर्नर्स को रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा 'चुनावी अपराधी' घोषित किए जाने के 'आरोप' से मुक्त करवा पाने का मामला उनके लिए भारी चुनौती बना हुआ है । उल्लेखनीय है कि मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम डिस्ट्रिक्ट 3100 से जुड़े जिन अदालती मामलों को वापस करवाने के लिए जी-जान से लगे रहने के बावजूद कामयाब नहीं हो पा रहे थे, उन्हें सुशील गुप्ता ने तत्काल प्रभाव से वापस करवा दिया है । दरअसल सुशील गुप्ता का प्रयास है कि रोटरी इंटरनेशनल में जिस समय वह सर्वोच्च पद पर हों, उस समय उनके अपने देश में रोटरी इंटरनेशनल के लिए फजीहत खड़ी करने वाला कोई काम न हो । इसी प्रयास के तहत सबसे पहले तो उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल को अदालती मामलों में घसीटे जाने की कार्रवाईयों को थामने पर ध्यान दिया, और इस मामले में डिस्ट्रिक्ट 3100 के झगड़े को निपटाने में बड़ी सफलता प्राप्त की । सुशील गुप्ता के इस प्रयास को और इस प्रयास में मिल रही उनकी कामयाबी को देखते हुए उनके अपने डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 3011 में डिस्ट्रिक्ट और उसके तीन पूर्व गवर्नर्स पर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा लगाए गए 'चुनावी अपराधी' के दाग को धोने के लिए भी सक्रिय होने तथा कुछ करने की माँग उठने लगी है । उल्लेखनीय है कि तीन वर्ष पहले डिस्ट्रिक्ट 3011 में हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में दीपक तलवार, सुशील खुराना व विनोद बंसल की मिलीभगत से हुई बेईमानी का संज्ञान लेते हुए रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने बहुत ही सख्त टिप्पणी की थी, और इन तीनों पूर्व गवर्नर्स को 'दोषी' ठहराते हुए चेतावनी दी थी कि लिखित शिकायत न मिलने के कारण बोर्ड अभी तो कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, लेकिन भविष्य में यदि ऐसी कोई घटना हुई और शिकायत मिली तो डिस्ट्रिक्ट को तथा घटना में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जायेगा । उक्त चुनाव में बेईमानी करके मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया को चुनाव जितवाया गया था । 
रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का उक्त फैसला डिस्ट्रिक्ट 3011 पर वास्तव में एक कलंक की तरह है । इंटरनेशनल बोर्ड के उस फैसले को तत्कालीन इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की खुराफाती हरकत के रूप में देखा/पहचाना गया था । याद रखने तथा गौर करने वाली बात यह है कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के उक्त फैसले का विरोध करते हुए डिस्ट्रिक्ट 3011 में काउंसिल ऑफ गवर्नर्स ने तुरंत बुलाई अपनी मीटिंग में एक प्रस्ताव पास किया था, जिसे उस समय भेजा इसलिए नहीं गया था क्योंकि केआर रवींद्रन के प्रेसीडेंट रहते काउंसिल ऑफ गवर्नर्स को न्याय मिलने की उम्मीद नहीं थी । उक्त मीटिंग में इस बात को बाकायदा रेखांकित किया गया कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने डिस्ट्रिक्ट 3011 के खिलाफ जो फैसला दिया है, वह चूँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की खुराफाती सोच का नतीजा है - इसलिए उनके प्रेसीडेंट रहते विरोध प्रस्ताव भेजने का कोई फायदा नहीं होगा, इसलिए विरोध प्रस्ताव भेजने के लिए केआर रवींद्रन का कार्यकाल पूरा हो जाने तक इंतजार किया जाए । 30 जून को केआर रवींद्रन का प्रेसीडेंट-काल तो पूरा गया, लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3011 तथा इसके 'आरोपी' पूर्व गवर्नर्स के लिए मुसीबत की बात यह रही कि केआर रवींद्रन दक्षिण एशिया में रोटरी के झगड़ों/मामलों को देखने के इंचार्ज बना दिए गए । इस कारण डिस्ट्रिक्ट 3011 तथा उसके आरोपी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के लिए मामला जहाँ का तहाँ ही बना रह गया है, और इसके चलते काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में पास हुए विरोध प्रस्ताव को रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय भेजने की बजाए धूल खाने के लिए छोड़ दिया गया । लेकिन अब जब सुशील गुप्ता इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी हो गए हैं, तब डिस्ट्रिक्ट में लोगों को उम्मीद बँधी है कि अब सुशील गुप्ता ही इंटरनेशनल बोर्ड के उस फैसले को रद्द करवायेंगे तथा डिस्ट्रिक्ट व तीनों पूर्व गवर्नर्स को 'चुनावी अपराधी' के कलंक से मुक्ति दिलवायेंगे । इस मामले में सबसे ज्यादा उत्सुक व सक्रिय विनोद बंसल बताए/सुने जा रहे हैं । 
विनोद बंसल दरअसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार बनने की तैयारी कर रहे हैं; जिस कारण उन्हें लगता है कि इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले में दर्ज 'आरोप' कहीं उनके लिए समस्या न खड़ी करे - इसलिए उक्त आरोप से मुक्त हो लेने में ही भलाई है । विनोद बंसल की चूँकि सुशील गुप्ता के साथ अच्छी ट्यूनिंग भी बताई/सुनी जाती है, इसलिए लोगों को लग रहा है कि विनोद बंसल की कोशिश कुछ ज्यादा है कि सुशील गुप्ता उक्त मामले में दिलचस्पी लें - और इंटरनेशनल बोर्ड के उक्त फैसले को रद्द करवाएँ । मजे की बात यह है कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के उक्त फैसले से सबक किसी ने भी नहीं लिया और डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में स्थितियाँ जस की तस जैसी ही बनी रही हैं । हद की बात यह तक रही कि पप्पूजीत सिंह सरना के मामले में इंटरनेशनल बोर्ड के उक्त फैसले का पालन नहीं किया गया । उल्लेखनीय है कि उक्त फैसले में तीन पूर्व गवर्नर्स के अलावा पप्पूजीत सिंह सरना की भूमिका की आलोचना की गई थी, और साफ फैसला सुनाया गया था कि भविष्य में पप्पूजीत सिंह सरना को डिस्ट्रिक्ट में कोई महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी न दी जाए । इसके बावजूद, मौजूदा रोटरी वर्ष में पप्पूजीत सिंह सरना को महत्त्वपूर्ण भूमिका मिली । इसमें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में विनय भाटिया की अहसान चुकाने वाली भूमिका को यदि अनदेखा भी कर दें, तो डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में विनोद बंसल की भूमिका सवालों के घेरे में है - उन्होंने आखिर किस मजबूरी में पप्पूजीत सिंह सरना के मामले में रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले का उल्लंघन होने दिया ? गौर करने वाला तथ्य यह भी है कि इस वर्ष हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में एक प्रेसीडेंट को अपह्यत करके उसका वोट डलवाने का जो किस्सा सामने आया था, उसके 'संयोजक' के रूप में पप्पूजीत सिंह सरना के नाम की ही चर्चा रही है । ऐसे में, यह देखना सचमुच दिलचस्प होगा कि तीन वर्ष पहले के इंटरनेशनल बोर्ड के जिस फैसले से डिस्ट्रिक्ट 3011 में कोई सबक नहीं लिया गया, उस फैसले को रद्द करवा कर डिस्ट्रिक्ट तथा उसके तीन पूर्व गवर्नर्स को 'आरोप'मुक्त करवाने के लिए सुशील गुप्ता क्या करते हैं ?

Saturday, September 16, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में पप्पूजीत सिंह सरना को डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेटर बनाए जाने के विनय भाटिया के फैसले में रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड की अनदेखी करने का जो आरोप है, उसके घेरे में पूर्व डायरेक्टर सुशील गुप्ता भी फँसे

फरीदाबाद । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के एक फैसले में लताड़ खा चुके और डिस्ट्रिक्ट के महत्त्वपूर्ण व निर्णायक समझे जाने वाले पदों से दूर रखने की हिदायत पा चुके पप्पूजीत सिंह सरना को अपनी टीम में डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेटर का पद देकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट विनय भाटिया ने रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को तो सीधी चुनौती दी ही है, साथ ही वह रोटरी के बड़े नेताओं के निशाने पर भी आ गए हैं । डिस्ट्रिक्ट के ही बड़े पदाधिकारियों और नेताओं का भी कहना है कि पप्पूजीत सिंह सरना जैसे व्यक्ति को डिस्ट्रिक्ट का तीसरा बड़ा महत्त्वपूर्ण पद सौंप कर विनय भाटिया ने यह दिखा/जता दिया है कि रोटरी इंटरनेशनल के फैसलों को मानने की बजाए उनके लिए अपने निजी स्वार्थों को तवज्जो देना ज्यादा जरूरी है । उनके नजदीकियों का हालाँकि यह भी कहना है कि डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेटर के पद के लिए विनय भाटिया ने पहले अमित जोनेजा के नाम का चयन किया था; यह बात जब पप्पूजीत सिंह सरना को पता चली तो उन्होंने विनय भाटिया को जम कर धमकाया और उन्हें साफ चेतावनी दी कि डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेटर यदि उन्हें नहीं बनाया गया, तो वह फरीदाबाद में तो विनय भाटिया को कुछ करने नहीं देंगे - तब मजबूर होकर विनय भाटिया को डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेटर का पद पप्पूजीत सिंह सरना को ही देना पड़ा; अमित जोनेजा के लिए उन्हें डायरेक्टर कोऑर्डीनेटर का नया पद ईजाद करना पड़ा । लोग हालाँकि अभी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेटर के होते हुए डायरेक्टर कोऑर्डीनेटर को डिस्ट्रिक्ट में करने के लिए काम आखिर बचेगा क्या ?
पप्पूजीत सिंह सरना की धमकी के सामने विनय भाटिया के समर्पण कर देने के बावजूद पप्पूजीत सिंह सरना को डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेटर बनाए जाने का विनय भाटिया का निर्णय यदि बड़े विवाद का कारण बना है, तो इसकी वजह केआर रवींद्रन के प्रेसीडेंट-काल में रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा लिया/किया गया वह निर्णय है - जिसके अनुसार पप्पूजीत सिंह सरना को आगे डिस्ट्रिक्ट में कोई महत्त्वपूर्ण भूमिका नहीं देनी है । दरअसल पिछले से पिछले रोटरी वर्ष में हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में विनय भाटिया को चुनाव जितवाने के लिए पप्पूजीत सिंह सरना ने इस हद तक छिछोरपंती की थी, कि उसकी दुर्गंध रोटरी इंटरनेशनल तक पहुँची थी - और रोटरी इंटरनेशनल के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ था कि बिना कोई औपचारिक शिकायत हुए रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने किसी मामले का खुद से संज्ञान लिया हो । जाँच-पड़ताल से निकाले गए निष्कर्षों के आधार पर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने नाम लेकर पप्पूजीत सिंह सरना की भूमिका की भर्त्सना की और हिदायत दी कि पप्पूजीत सिंह सरना को डिस्ट्रिक्ट में आगे कोई महत्त्वपूर्ण पद न दिया जाए । माना/समझा गया था इंटरनेशनल बोर्ड में उक्त मामला तत्कालीन इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के सख्त रवैये के चलते लाया गया था - केआर रवींद्रन भूतपूर्व प्रेसीडेंट भले ही हो गए हों, लेकिन रोटरी में जो अंधेरगर्दियाँ और बेईमानियाँ होती हैं - उनसे निपटने के मामले में उनकी भूमिका अभी भी निर्णायक बनी हुई है । इसके बावजूद, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट विनय भाटिया ने पप्पूजीत सिंह सरना के मामले में रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले की परवाह ही नहीं की है ।
इस मामले में डिस्ट्रिक्ट के कुछेक लोग विनोद बंसल और सुशील गुप्ता को भी घेरने/लपेटने की कोशिश कर रहे हैं । लोगों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर होने के नाते विनोद बंसल को और डिस्ट्रिक्ट के तथा रोटरी के 'लीडर' होने के नाते सुशील गुप्ता को विनय भाटिया को बताना/समझाना चाहिए कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें रोटरी इंटरनेशनल के फैसलों की तथा उन फैसलों के पीछे की सोच व भावना का सम्मान करना चाहिए । जिन पप्पूजीत सिंह सरना की हरकतों के कारण रोटरी की दुनिया में डिस्ट्रिक्ट 3011 की न सिर्फ भारी बदनामी हुई, बल्कि डिस्ट्रिक्ट के सामने अपने अस्तित्व को बचाए/बनाए रखने का खतरा तक पैदा हुआ, उन पप्पूजीत सिंह सरना को अपनी टीम में महत्त्वपूर्ण पद देकर विनय भाटिया आखिर क्या दिखाना या साबित करना चाहते हैं ? ऐसे मामलों में सुशील गुप्ता का व्यवहार बड़ा दिलचस्प हो जाता है । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता रोटरी में और बड़ी 'भूमिका' निभाने की तैयारी में हैं, और इस तैयारी के तहत वह अपनी लीडरशिप क्षमता दिखाने का प्रयास करते रहते हैं - जिसके चलते वह जब/तब सलाह, सुझाव और हिदायतें देते रहते हैं; लेकिन जब किसी मामले में वह फँसते हैं तब वह यह कहते हुए बचने की कोशिश करते हैं कि मेरा इस मामले से क्या मतलब, मेरा इसमें क्या रोल ? लोगों का कहना लेकिन यह है कि सुशील गुप्ता को जब बड़ा लीडर 'बनना' है, तो उन्हें उन मामलों का खुद से संज्ञान लेना ही चाहिए जिनमें रोटरी की बदनामी और फजीहत हो रही हो - लीडर को रोल दिया नहीं जाता है, लीडर को रोल खुद 'लेना' होता है; और मामला यदि उनके खुद के डिस्ट्रिक्ट का हो, तब तो उनकी जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है ।
ऐसे में, डिस्ट्रिक्ट के महत्त्वपूर्ण व निर्णायक समझे जाने वाले पदों से दूर रखने की हिदायत के साथ इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले में लताड़ खा चुके पप्पूजीत सिंह सरना को डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेटर बनाए जाने के विनय भाटिया के फैसले में रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड की अनदेखी करने का जो आरोप है, उसके घेरे से सुशील गुप्ता भी बाहर नहीं हैं । लोगों का कहना है कि सुशील गुप्ता के होते हुए विनय भाटिया रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को मानने/अपनाने से इंकार करते हैं, तो यह सुशील गुप्ता के लिए भी तो चुनौती की और फजीहत की बात होती है ।

Saturday, August 26, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में टीके रूबी को गवर्नर बनाए जाने के फैसले से खफा राजा साबू ने निर्णय लेने की जॉन जर्म की क्षमताओं और नीयत पर सवाल उठा कर खुद को रोटरी से ऊपर और बड़ा दिखाने की कोशिश की है क्या ?

चंडीगढ़ । टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर घोषित करने के निवर्तमान इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म के फैसले को चुनौती देते हुए राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स द्वारा लिखे/ भेजे गए पत्र को आज ठीक एक महीना हो गया है, लेकिन रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय में किसी ने उसका कोई संज्ञान तक नहीं लिया है - इससे साबित है कि रोटरी इंटरनेशनल में राजा साबू का सारा 'राजा-पना' पूरी तरह झड़ चुका है । राजा साबू का राजा-पना तो हालाँकि जून माह के तीसरे सप्ताह में तभी झड़ गया था, जब इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के रूप में जॉन जर्म ने डिस्ट्रिक्ट 3080 के वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए टीके रूबी के नाम की घोषणा की थी । रोटरी इंटरनेशनल के मौजूदा सत्ता-समीकरणों को जानने/पहचानने वाले वरिष्ठ रोटेरियंस का कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल में राजा साबू की यदि जरा सी भी - जरा सी भी 'इज्जत' बची होती, तो टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुनने का फैसला न हुआ होता । यह फैसला राजा साबू की खासी फजीहत करने वाला फैसला था । रोटरी के अधिकतर बड़े नेताओं को जॉन जर्म के इस फैसले में 'भिगो कर जूता मारने' वाली कहावत चरितार्थ होते हुए दिखी । कुछेक लोगों ने इस फैसले को 'पोएटिक जस्टिस' के नायाब उदाहरण के रूप में भी देखा/पहचाना । टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर घोषित करने के जॉन जर्म के फैसले में राजा साबू के लिए जो 'संदेश' था, उसे दूसरों के साथ-साथ राजा साबू ने भी 'पढ़' लिया था - और यही कारण रहा कि वह समझ ही नहीं पाए कि अपनी इस सार्वजनिक दुर्गति पर कैसे रिएक्ट करें ?
दीये में जब तेल खत्म हो रहा होता है और लौ बुझने को होती है, तब लौ बड़ी तेजी से भभकती है और यह आभास देने की कोशिश करती है कि वह बुझ नहीं रही है बल्कि और तेजी से चमकेगी - लेकिन भभकते भभकते ही वह बुझ जाती है । रोटेरियन और रोटरी लीडर के रूप में राजा साबू की भी यही दशा हो रही है - टीके रूबी को लेकर फरवरी 2015 से शुरू हुए घटना चक्र के अभी तक के 30 महीनों में घटी घटनाओं को देखें, तो राजा साबू को डिस्ट्रिक्ट से लेकर इंटरनेशनल बोर्ड तक में हर जगह लगातार मात पर मात मिली है; जॉन जर्म के फैसले से उनकी मात पर अंतिम मुहर भी लग गई है - लेकिन राजा साबू फिर भी भभक भभक उठ रहे हैं । मजे की बात है कि राजा साबू ने हाल ही में क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को लिखे पत्र में नसीहत दी है कि रोटरी को 'गुरु' के तथा एक टीचर के रूप में देखना चाहिए और रोटरी की वैल्यूज पर विश्वास करना चाहिए - पर इस नसीहत पर वह खुद अमल करते हुए नहीं दिखते हैं । 'कहना कुछ और करना कुछ' की तर्ज पर राजा साबू के व्यक्तित्व और व्यवहार का दोगलापन लोग हालाँकि पहले से देखते रहे हैं, लेकिन ज्यादा मुखर होकर यह अब रेखांकित हुआ है । क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को रोटरी की वैल्यूज पर विश्वास रखने की नसीहत देने वाले राजा साबू ने रोटरी की यह 'वैल्यू' कहाँ और कब सीखी कि एक पूर्व प्रेसीडेंट के रूप में वह मौजूदा प्रेसीडेंट और इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले पर ऊँगली उठाएँ ?
रोटरी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि एक पूर्व प्रेसीडेंट रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड और प्रेसीडेंट के फैसले की आलोचना कर रहा है । उल्लेखनीय है कि किसी भी समाज और संगठन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह जरूरी माना जाता है कि सबसे बड़ी इकाई (बॉडी) द्वारा लिए गए फैसले को स्वीकार करना ही होता है । सुप्रीम कोर्ट का फैसला किसी को भले ही न्याय करता हुआ न लगे, लेकिन फिर भी उसे मानना ही होता है । जिम्मेदार लोगों से उम्मीद की जाती है कि वह उस फैसले को शिष्टता और गरिमा के साथ स्वीकार करें । रोटरी में सर्वोच्च इकाई इंटरनेशनल बोर्ड है और सर्वोच्च पद प्रेसीडेंट है । रोटरी की तमाम वैल्यूज में एक यह भी है कि इनके फैसले को चेलैंज नहीं किया जा सकता है । डीसी बंसल ने इनके फैसले को चेलैंज किया तो उन्हें रोटरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है । रोटरी की वैल्यूज डीसी बंसल के लिए और राजा साबू के लिए अलग अलग हैं क्या ? कोई तर्क दे सकता है कि इंटरनेशनल बोर्ड और प्रेसीडेंट के फैसले के खिलाफ डीसी बंसल 'रोटरी के बाहर' गए, इसलिए उन्हें रोटरी से बाहर कर दिया गया है; राजा साबू तो रोटरी के भीतर ही अपनी बात कह रहे हैं । यह तर्क लेकिन इस तथ्य की अनदेखी करता है कि रोटरी में ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है, जिसमें इंटरनेशनल बोर्ड और प्रेसीडेंट के फैसले के खिलाफ कुछ किया/कहा जा सके । इस व्यवस्था के अभाव के कारण ही डीसी बंसल को रोटरी के बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा । डीसी बंसल का मुख्य गुनाह यह है कि इंटरनेशनल बोर्ड और प्रेसीडेंट के जिस अंतिम फैसले को सम्मान और गरिमा के साथ स्वीकार करने की 'वैल्यू' का पालन करने की उम्मीद की जाती है, वह उसमें फेल हुए । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स भी इस 'वैल्यू' का पालन नहीं कर रहे हैं - तो उनका गुनाह कम कैसे हो गया ?
रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड और प्रेसीडेंट के अंतिम फैसले को डीसी बंसल स्वीकार नहीं कर सके, यह बात तो फिर भी समझ में आती है; लेकिन उस फैसले से राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को 'आहत' क्यों होना चाहिए - वह उस अंतिम फैसले को सम्मान और गरिमा के साथ क्यों स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं ? क्या यह इस बात का सुबूत नहीं है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स अपने आप को रोटरी से ऊपर समझ रहे हैं, और उन्हें यह बात हजम नहीं हो रही है कि फरवरी 2015 में हुए चुनाव में टीके रूबी को मिली जीत को तरह तरह की प्रपंचबाजी से हार में बदलने की उनकी सारी कोशिशें आखिर फेल कैसे हो गईं और उनके न चाहने के बावजूद टीके रूबी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कैसे बन गए ? इंटरनेशनल प्रेसीडेंट को संबोधित राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स द्वारा लिखे/भेजे गए पत्र को देखने/पढ़ने वाले लोगों में से जिस किसी से भी इन पँक्तियों के लेखक की बात हो सकी है, उन सभी ने माना और कहा है कि पत्र में इस्तेमाल हुए शब्द, पत्र की भाषा और भाषा का तेवर राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के फ्रस्ट्रेशन और उनके अहंकार को प्रदर्शित करता है । यह पत्र न केवल निवर्तमान प्रेसीडेंट जॉन जर्म की क्षमताओं तथा उनकी नीयत के प्रति संदेह जताता है, बल्कि मौजूदा प्रेसीडेंट ईयान रिसले के प्रति भी किंचित अभद्रता  प्रकट करता है । राजा साबू के इस रवैये ने लोगों को हैरान किया है । इससे पहले किसी पूर्व प्रेसीडेंट ने मौजूदा प्रेसीडेंट के साथ/प्रति इस तरह की हरकत नहीं की है । इसे राजा साबू के राजा-पने के भभकने के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । रोटरी में राजा साबू के राजा-पने की क्या हैसियत रह गई है, यह इससे भी साबित है कि 27 जुलाई के उक्त पत्र को लिखे/भेजे आज ठीक एक महीना हो गया है - लेकिन रोटरी इंटरनेशनल में उसका किसी ने संज्ञान तक नहीं लिया है । राजा साबू से हमदर्दी रखने वाले लोगों को राजा साबू की इस दशा पर दया भी आ रही है; उनका कहना है कि राजा साबू को समझ लेना चाहिए कि पहले की तरह अब उनकी मनमानियाँ नहीं चल सकेंगी । कुछेक लोगों का तो कहना है कि अपने भाषणों और अपने पत्रों में राजा साबू दूसरों को जो नसीहतें देते रहते हैं, उन पर कभी खुद भी अमल कर लिया करें; और रोटरी की वैल्यूज पर खुद भी विश्वास करना सीखें !

Thursday, April 20, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में राजा साबू गिरोह को फूट और फजीहत में फँसाती डीसी बंसल की अदालती कार्रवाई में मधुकर मल्होत्रा को प्रवीन चंद्र गोयल तथा राजा साबू से एकसाथ निपटने का मौका मिलता दिखा है

चंडीगढ़ राजेंद्र उर्फ राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद को लेकर मनमानी करने के मामले में पहले तो टीके रूबी के हाथों फजीहत झेलना पड़ी, और अब डीसी बंसल ने उन्हें दिन में तारे दिखा दिए हैं राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की कारस्तानियों के चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन चंद्र गोयल और मुसीबत में फँस गए हैं । उन्हें न सिर्फ 21 से 23 अप्रैल के बीच होने वाले प्रेसीडेंट्स इलेक्ट ट्रेनिंग सेमीनार और सेक्रेटरीज इलेक्ट ट्रेनिंग सेमीनार जैसे अपने महत्त्वपूर्ण आयोजन को स्थगित कर देना पड़ा है - बल्कि उनकी डिस्ट्रिक्ट गवर्नरी और खतरे में पड़ गई है । उल्लेखनीय है कि प्रवीन चंद्र गोयल बेचारे अच्छे-भले वर्ष 2018-19 के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुने गए थे, लेकिन राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने अपनी मनमानी चलाते हुए उन्हें झगड़े में पड़ी वर्ष 2017-18 की गवर्नरी पर ट्रांसफर करवा दिया । प्रवीन चंद्र गोयल ने वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में काम करना शुरू भी कर दिया था - और इसी प्रक्रिया में प्रेसीडेंट्स इलेक्ट व सेक्रेटरीज इलेक्ट के ट्रेनिंग प्रोग्राम की तैयारी की गई थी; लेकिन डीसी बंसल द्वारा शुरू की गई अदालती कार्रवाई के कारण उनके रंग में भंग पड़ गया है - और ठीक एक दिन पहले प्रवीन चंद्र गोयल को उक्त प्रोग्राम को स्थगित कर देना पड़ा है । डीसी बंसल ने वर्ष 2017-18 के गवर्नर पद पर अपना दावा करते हुए जो अदालती कार्रवाई की है, उसके चलते प्रवीन चंद्र गोयल की गवर्नरी पर खतरा और मंडराने लगा है डिस्ट्रिक्ट में दिलचस्प नजारा यह बना है कि राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने पिछले दो वर्षों से जिन लोगों को तरह तरह की अपनी हरकतों से परेशान किया हुआ था - वह यह तमाशा देख रहे हैं और मजे ले रहे हैं कि राजा साबू और उनके गिरोह के लोग कैसे अपने ही बिछाए जाल में खुद फँस गए हैं ।
राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के लिए रोटरी इंटरनेशनल के प्रमुख पदाधिकारियों के सामने शर्मिंदगी की स्थिति इसलिए और बनी है कि पिछले दो वर्षों से वह उनके सामने जिन डीसी बंसल की पैरोकारी कर रहे थे, उन्हीं डीसी बंसल द्वारा शुरू की गई अदालती कार्रवाई के चलते रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म तथा रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों सहित अन्य पदाधिकारियों को अदालती सम्मन जारी हुआ है । उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद को लेकर की जा रही अपनी मनमानी को सही साबित करने के लिए राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने रोटरी इंटरनेशनल के उच्च पदाधिकारियों को यह बताने/समझाने के लिए पूरा जोर लगाया हुआ था कि टीके रूबी तो डिस्ट्रिक्ट और रोटरी के लिए सही व्यक्ति नहीं हैं, जबकि डीसी बंसल डिस्ट्रिक्ट और रोटरी के आदर्शों और नियम-कानूनों और उसके फैसलों को लागू करने का काम जेनुइनली करने वाले व्यक्ति हैं । ऐसे में, राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के लिए रोटरी इंटरनेशनल के उच्च पदाधिकारियों को अब यह बताना/समझाना मुश्किल और शर्मिंदगीभरा काम होगा कि वह जिन टीके रूबी की बुराई किया करते थे, उन टीके रूबी ने तो रोटरी इंटरनेशनल के फैसले को सम्मान देते हुए स्वीकार कर लिया;  लेकिन वह जिन डीसी बंसल की वकालत कर रहे थे, उन डीसी बंसल ने रोटरी इंटरनेशनल के फैसले को अदालत में चुनौती देने का कदम क्यों उठाया है और क्यों पूरी रोटरी को ही अदालत में घसीट लिया है ?
डीसी बंसल ने रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत वर्ष 2017-18 के लिए हुए चुनाव में उन्हें विजयी घोषित किए गए तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन के फैसले को रद्द कर दिया गया है । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने के डीसी बंसल के फैसले को राजा साबू के रवैये के प्रति उनकी नाराजगी की अभिव्यक्ति के रूप में भी देखा/पहचाना जा रहा है डीसी बंसल के नजदीकियों का कहना है कि डीसी बंसल बहुत ही शांतिप्रिय और रोटरी के आदर्शों का पालन करने वाले व्यक्ति हैं; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की लड़ाई में वह इतने गहरे तक नहीं धँसना चाहते थे - लेकिन राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने अपनी बेशर्म और निर्लज्ज किस्म की हरकतों के चलते उन्हें सब्ज़बाग दिखाए और उन्हें इस्तेमाल करते हुए उक्त लड़ाई को बढ़ाते गए - और जब सब कुछ हार बैठे, तब उन्होंने डीसी बंसल को अकेला छोड़ दिया । डीसी बंसल के नजदीकियों का कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का जब फैसला आया था, तब कई लोगों ने अदालती कार्रवाई के लिए उन्हें उकसाया था, लेकिन उस समय डीसी बंसल ने और ज्यादा उकसावे में आने के प्रति दिलचस्पी नहीं दिखाई थी । उसके बाद के दिनों में राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की जो हरकतें रहीं, उससे डीसी बंसल ने लेकिन अपने आप को 'अपने ही लोगों द्वारा' ठगा हुआ महसूस किया । उल्लेखनीय है कि पिछले करीब दो वर्षों में जो तमाशा चला, उसमें डीसी बंसल और टीके रूबी - दोनों ने ही बहुत कुछ खोया और बहुत मानसिक प्रताड़ना झेली और अंततः दोनों को ही कुछ भी हासिल नहीं हुआ । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का फैसला आने के बाद लेकिन डिस्ट्रिक्ट में जो घटना-चक्र चला उसमें टीके रूबी तो डिस्ट्रिक्ट की व्यवस्था और राजनीति में पुनः जगह पाते/बनाते नजर आए, लेकिन डीसी बंसल एक भूले-बिसरे अध्याय बनते हुए दिखे । यह ठीक है कि वर्ष 2019-20 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद पर हुई जितेंद्र ढींगरा की चुनावी जीत के कारण टीके रूबी को जल्दी से सक्रिय होने और केंद्रीय भूमिका में आने का अवसर मिला, लेकिन डीसी बंसल के लिए भी मौकों की कोई कमी नहीं थी - प्रवीन चंद्र गोयल की गवर्नरी के साथ उन्हें सम्मानजनक स्थान दिया जा सकता था । राजा साबू और उनके गिरोह के गवर्नर्स ने लेकिन उनके साथ 'यूज एंड थ्रो' वाला रवैया अपनाया, और उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी - लिहाजा डीसी बंसल ने भी बगावती तेवर अपना लिए, और वह अदालत की शरण में जा पहुँचे हैं
डीसी बंसल की इस अदालती कार्रवाई से डिस्ट्रिक्ट के सत्ता खेमे में नए समीकरण बनने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है । डीसी बंसल की इस कार्रवाई से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधुकर मल्होत्रा की बाँछे खिल गई हैं - और उन्हें प्रवीन चंद्र गोयल तथा राजा साबू से एक साथ निपटने का मौका मिल गया है । मधुकर मल्होत्रा यूँ तो राजा साबू की आँख का तारा रहे हैं, और पिछले दो वर्षों में जो तमाशा हुआ - उसे राजा साबू के दिशा निर्देशन में उन्होंने ही संयोजित किया हुआ था; जितेंद्र ढींगरा की चुनावी सफलता के साथ भी वह वही खेल खेलना चाहते थे - जो उन्होंने टीके रूबी की चुनावी सफलता के साथ खेला, लेकिन राजा साबू की तरफ से हरी झंडी न मिलने के कारण ऐन मौके पर उन्हें पीछे हटना पड़ा इससे भी बड़ा झटका मधुकर मल्होत्रा को प्रवीन चंद्र गोयल द्वारा डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर नहीं बनाए जाने के कारण लगा - और इसके लिए वह राजा साबू को जिम्मेदार मानते/ठहराते हैं । राजा साबू, मधुकर मल्होत्रा और प्रवीन चंद्र गोयल चूँकि एक ही क्लब में हैं - इसलिए प्रवीन चंद्र गोयल के गवर्नर-काल के डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर पद पर मधुकर मल्होत्रा अपना स्वाभाविक हक मान रहे थे, लेकिन डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर का पद मिल गया जेपीएस सिबिया को । इसके चलते डिस्ट्रिक्ट में मधुकर मल्होत्रा की खासी किरकिरी हुई और लोगों के बीच संदेश गया कि राजा साबू के दरबार में मधुकर मल्होत्रा के नंबर घट गए हैं डीसी बंसल की अदालती कार्रवाई से प्रवीन चंद्र गोयल की गवर्नरी पर जो संकट आया है, उसने तो मधुकर मल्होत्रा को प्रफुल्लित किया ही है, साथ ही मधुकर मल्होत्रा को इस उम्मीद से भी भर दिया है कि इस नई बनी परिस्थिति से निपटने के लिए राजा साबू उन्हें फिर से अपने दरबार में पहले जैसी ही हैसियत देने के लिए मजबूर होंगे डीसी बंसल की अदालती कार्रवाई से मधुकर मल्होत्रा की छिपाए न छिप पा रही खुशी को देखते/समझते हुए राजा साबू गिरोह के ही दूसरे कुछेक पूर्व गवर्नर्स तथा अन्य लोगों को तो यह भी शक हो रहा है कि डीसी बंसल की अदालती कार्रवाई के पीछे कहीं मधुकर मल्होत्रा ही तो नहीं हैं ?
इस तरह डीसी बंसल की अदालती कार्रवाई ने राजा साबू गिरोह के बीच ही न सिर्फ बबाल पैदा कर दिया है, बल्कि राजा साबू सहित गिरोह के दूसरे पूर्व गवर्नर्स के लिए भारी फजीहत की स्थिति पैदा कर दी है । यह स्थिति क्या मोड़ और स्वरूप लेगी, यह तो अभी कुछ दिन बाद ही स्पष्ट हो सकेगा - अभी लेकिन यह बात तो साफ हो गई है कि डीसी बंसल की इस कार्रवाई से राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स उसी गड्ढे में खुद गिर पड़े हैं, जिसे उन्होंने दूसरों के लिए खोदा था

Monday, January 30, 2017

रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3080 - यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप की इंटरनेशनल बोर्ड द्धारा की गई भर्त्सना के लिए मनोज देसाई को निशाना बनाने/बनवाने की यशपाल दास की 'कार्रवाई' ने तमाशा और बढ़ाया

अंबाला । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास के क्लब के प्रमुख सदस्य और यशपाल दास के नजदीकी नैन कँवर द्धारा वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के हुए चुनाव को रद्द करने के फैसले को लेकर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड की - की गई कड़ी आलोचना ने डिस्ट्रिक्ट में एक नया तमाशा खड़ा कर दिया है । इंटरनेशनल बोर्ड के प्रति नैन कँवर की नाराजगी को दरअसल यशपाल दास की नाराजगी के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है, और इसीलिए लोगों को हैरानी इस बात पर है कि राजा साबू गिरोह के दूसरे लोग तो इस फैसले पर जब खुशी व्यक्त कर रहे हैं - तब यशपाल दास इस फैसले पर दुखी क्यों हैं, और अपने लोगों के जरिए इंटरनेशनल बोर्ड को इस फैसले के लिए लानत क्यों भेज/भिजवा रहे हैं ? इंटरनेशनल बोर्ड के प्रति नैन कँवर के गुस्से का आलम यह है कि फैसले को लेकर बोर्ड सदस्यों की समझदारी और नीयत के साथ-साथ उनके 'अधिकारों' पर ही सवाल उठाते हुए उन्होंने इस फैसले को पक्षपातपूर्ण भी करार दिया है, और घोषणा की है कि वह इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों को बेनकाब करेंगे तथा बोर्ड सदस्यों का रवैया यदि नहीं बदला तो वह रोटरी ही छोड़ देंगे । उन्होंने आह्वान किया कि दूसरे रोटेरियंस इस काम में उनकी मदद करें । समझा जा रहा है कि नैन कँवर ने इशारों ही इशारों में इंटरनेशनल बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई को निशाना बनाया है । कई लोगों को लगता है कि नैन कँवर तो सिर्फ जरिया हैं, मनोज देसाई पर यह निशाना वास्तव में यशपाल दास ने लगाया/लगवाया है ।
राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट के वर्ष 2017-18 के लिए हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के चुनाव को रद्द कर देने के इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से वास्तव में यशपाल दास को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है । राजा साबू सहित डिस्ट्रिक्ट के दूसरे पूर्व गवर्नर्स की तरह यशपाल दास की भी फजीहत तो हुई ही है, उनका तो लेकिन रोटरी कैरियर ही खतरे में पड़ गया है । दरअसल संदर्भित चुनाव में यशपाल दास की सक्रिय पक्षपाती भूमिका को साबित करता हुआ उनका एक ईमेल संदेश खासी चर्चा में रहा है, जिसने रोटरी जगत में उनकी काफी बदनामी की/करवाई हुई है । उक्त ईमेल के सार्वजनीकरण के लिए भी यशपाल दास ने मनोज देसाई को जिम्मेदार ठहराया हुआ है । वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव के चलते राजा साबू एंड कंपनी को जो भी प्रतिकूल स्थितियों तथा फजीहतों का सामना करना पड़ा है, उसके लिए यशपाल दास और मधुकर मल्होत्रा लगातार पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता और मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई को कोसते सुने गए हैं । यशपाल दास का साफ आरोप रहा है कि रोटरी समुदाय में उन्हें बदनाम करने तथा अलग-थलग करने के लिए सुशील गुप्ता और मनोज देसाई ने ही षड्यंत्र रचा, और उनके डिस्ट्रिक्ट के एक चुनावी विवाद के बहाने उनकी फजीहत की/कराई है ।
वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के चुनाव को लेकर चले झगड़े में राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों के बीच इस बात पर जब-तब चर्चा तो होती ही रहती है कि यह झगड़ा करके उन्हें आखिर मिला क्या ? गिरोह के कुछेक लोगों को लगता है कि इस झगड़े की शुरुआत इस लक्ष्य को पाने के लिए हुई थी कि राजा साबू एंड कंपनी टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं बनने देगी, और अंततः इस लक्ष्य को चूँकि पा लिया गया है - इसलिए यह राजा साबू एंड कंपनी की जीत है । गिरोह/कंपनी के ही कई लोगों को लेकिन यह भी लगता है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए डिस्ट्रिक्ट को बदनामी व फजीहत के रूप में चूँकि भारी कीमत चुकानी पड़ी है - इसलिए यह तथाकथित 'जीत' वास्तव में बड़ी हार है । रोटरी जगत में इससे ज्यादा शर्म की बात भला क्या होगी कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने अपने फैसले में राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट की पूरी लीडरशिप की इस बात के लिए भर्त्सना की है कि वह चुनावी प्रक्रिया में 4-वे-टेस्ट तथा रोटरी के अन्य महान आदर्शों व परंपराओं का पालन करने में फेल रही है । रोटरी जगत में इससे यही संदेश गया है कि राजा साबू दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में जाकर जो बड़ी बड़ी बातें करते हैं, वह उनकी थोथी बातें ही हैं; उनका असली चेहरा देखना हो तो उनके अपने डिस्ट्रिक्ट में उनकी कारगुजारियों को देखो ! राजा साबू को जानने वालों का कहना है कि पोल खुलने के बाद भी राजा साबू लोगों के बीच बड़ी बड़ी हाँकने से बाज तो नहीं ही आयेंगे, और पूरी बेशर्मी से रोटरी के आदर्शों को लेकर बड़ी बड़ी बातें करते रहेंगे- लेकिन इंटरनेशनल बोर्ड द्धारा की गई टिप्पणियों को जानने वाले लोगों को तो उनकी बड़ी बड़ी बातों के पीछे छिपे नकलीपन को पहचानने में कोई समस्या नहीं होगी । इसीलिए कई लोगों को लगता है कि टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने से रोकने के चक्कर में राजा साबू ने रोटरी में अपने जीवन की सारी 'कमाई' गँवा दी है ।
रोटरी जगत के कई बड़े नेताओं का भी मानना और कहना है कि टीके रूबी को हराने की जिद में राजा साबू ने वास्तव में अपने डिस्ट्रिक्ट को तथा रोटरी को ही हरा दिया है । मजे की बात यह नजर आ रही है कि संदर्भित मामले में डिस्ट्रिक्ट और डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप की जो फजीहत हुई है, उसने राजा साबू गिरोह के दूसरे प्रमुख सदस्यों को ज्यादा निराश और परेशान किया हुआ है । दरअसल गिरोह के जिन सदस्यों को डिस्ट्रिक्ट से ऊपर जाना/पाना नहीं है, उन्हें तो डिस्ट्रिक्ट की और अपनी फजीहत से कोई फर्क पड़ता नहीं है; लेकिन यशपाल दास, मधुकर मल्होत्रा, शाजु पीटर जैसे सदस्यों को इस बदनामी और फजीहत में अपनी महत्वाकाँक्षा के पंख टूटते दिख रहे हैं । इन लोगों को यह भी लग रहा है कि फजीहत और बदनामी से राजा साबू को तो कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन इनके लिए तो आगे का रास्ता ही बंद हो गया है । मधुकर मल्होत्रा और शाजु पीटर को इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना है; यशपाल दास की इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की इच्छा है - लेकिन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी बेईमानी में इनकी मिलीभगत और हरकतों की रोटरी जगत में जो चर्चा हुई है, उसके कारण इनके आगे के सफ़र पर ब्रेक लग गया है । इनकी समस्या यह है कि डिस्ट्रिक्ट में इनकी ही हरकतों के चलते जो हालात बन गए हैं, उसके कारण इनके लिए अपने ऊपर लगे धब्बों को जल्दी से धो पाना भी संभव नहीं होगा । इस स्थिति ने इन्हें बुरी तरह निराश और परेशान कर दिया है ।
इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को लेकर यशपाल दास के नजदीकी नैन कँवर की जो नाराजगी फूटी है, वह वास्तव में यशपाल दास की निराशा और परेशानी की ही अभिव्यक्ति है । समझा जाता है कि यशपाल दास चूँकि खुद तो इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले की खुली आलोचना कर नहीं सकते हैं, इसलिए उन्होंने अपने क्लब के वरिष्ठ सदस्य और अपने नजदीकी नैन कँवर को 'काम' पर लगाया है । लोगों का मानना और कहना है कि यशपाल दास की शह और सहमति नहीं होती, तो नैन कँवर को इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले पर कुछ कहने की जरूरत भला क्यों और क्या होती ? इस तरह की बातों ने डिस्ट्रिक्ट में एक नया तमाशा खड़ा कर दिया है । यशपाल दास के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपनी नाराजगी के लिए नैन कँवर ने लोगों से जो समर्थन माँगा, वह उन्हें नहीं मिला । इससे यही नतीजा निकाला जा रहा है कि इंटरनेशनल बोर्ड ने राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप की जो भर्त्सना की है, डिस्ट्रिक्ट के लोग उससे सहमत हैं और उसे उचित मानते हैं ।
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Tuesday, August 9, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में केआर रवींद्रन की खुराफाती सोच के चलते 'चुनावी अपराधी' घोषित हुए दीपक तलवार, सुशील खुराना और विनोद बंसल की चुनावी सक्रियता डिस्ट्रिक्ट के लिए खतरा तो नहीं बनेगी ?

नई दिल्ली । दीपक तलवार, सुशील खुराना और विनोद बंसल ने इंटरनेशनल डायरेक्टर का चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता तथा सीओएल के लिए अपनी अपनी उम्मीदवारी को लेकर जो तैयारियाँ शुरू की हैं, उनमें डिस्ट्रिक्ट के लिए - और खुद इनके लिए भी एक बड़े खतरे को देखा/पहचाना जा रहा है । दरअसल यह तीनों पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड द्धारा 'चुनावी अपराधी' के रूप में 'पकड़े' जा चुके हैं, और इसके लिए इनकी फटकार के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को निर्देशित किया जा चुका है । चुनावी राजनीति में इनकी सक्रियता चूँकि रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों की निगरानी में है, इसलिए उम्मीद की गई थी कि कुछ समय यह तीनों चुनावी राजनीति के पचड़े से दूर रहेंगे । चुनावी राजनीति से दूर रहने की बात तो दूर - यह तीनों तो चुनावी राजनीति में सीधे सीधे कूदने की तैयारी करते देखे/सुने जा रहे हैं । यूँ रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का जो फैसला है, वह इन तीनों के चुनावी राजनीति में उतरने पर तकनीकी रूप से कोई रोक नहीं लगाता है; लेकिन उस फैसले का एक नैतिक व व्यावहारिक रूप भी है - जिसका पालन करने की इन तीनों से उम्मीद की गई थी - लेकिन जो अब ध्वस्त होती दिख रही है । सामाजिक जीवन में रिकॉर्डेड आरोप का एक नैतिक व व्यावहारिक रूप भी होता है, जिसका पालन भी किया ही जाता है : सामाजिक/राजनीतिक संस्थाएँ आरोपी व्यक्ति के साथ दूरी बनाने और 'दिखाने' का काम करती ही हैं; सुनते हैं कि अपराधी गिरोह भी ऐसे लोगों को गिरोह में रखने से बचते हैं जो पहले से ही पुलिस की निगाह में चढ़े होते हैं । इसी तरह की बातों के चलते उम्मीद की गई थी कि दीपक तलवार, सुशील खुराना और विनोद बंसल चूँकि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड की निगाह में 'चुनावी अपराधी' के रूप में चढ़े हुए हैं - इसलिए कुछ समय तो यह चुनावी राजनीति के पचड़े से दूर रहेंगे । इनके ऐसा न करने के कारण आशंका यह व्यक्त की जा रही है कि इन्होंने अपने आप को तो खतरे में डाला ही है, साथ ही डिस्ट्रिक्ट को भी मुसीबत में फँसा दिया है । डर है कि इनकी राजनीति के चलते कहीं डिस्ट्रिक्ट 3011 का हाल भी डिस्ट्रिक्ट 3100 जैसा न हो जाए ?
इस डर का बड़ा ठोस आधार यह है कि पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट 3011 के - और खासकर इस डिस्ट्रिक्ट के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के रूप में दीपक तलवार, सुशील खुराना व विनोद बंसल के - मुसीबत में फँसने व आरोपी बनने के लिए जिन केआर रवींद्रन को जिम्मेदार माना गया था, वही केआर रवींद्रन अभी भी निर्णायक हैसियत में हैं; और इस कारण से उक्त फैसले की तलवार डिस्ट्रिक्ट 3011 पर अभी भी लटकी हुई है । उल्लेखनीय है कि सोचा यह गया था कि केआर रवींद्रन के प्रेसीडेंट-काल के पूरा हो जाने पर उनसे छुटकारा मिल जायेगा, और फिर मनमानी करने का अधिकार भी मिल जायेगा । गौर करने वाला तथ्य यह है कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के उक्त फैसले का विरोध करते हुए पिछले रोटरी वर्ष में काउंसिल ऑफ गवर्नर्स ने अपनी अंतिम मीटिंग में एक प्रस्ताव पास किया था; प्रस्ताव पास करते हुए काउंसिल ने यह भी तय किया था कि इस विरोध प्रस्ताव को एक जुलाई के बाद रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को भेजा जायेगा - क्योंकि तब केआर रवींद्रन की बिदाई हो चुकी होगी । उक्त मीटिंग में इस बात को बाकायदा रेखांकित किया गया कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने डिस्ट्रिक्ट 3011 के खिलाफ जो फैसला दिया है, वह चूँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की खुराफाती सोच का नतीजा है - इसलिए उनके प्रेसीडेंट रहते विरोध प्रस्ताव भेजने का कोई फायदा नहीं होगा, इसलिए विरोध प्रस्ताव भेजने के लिए केआर रवींद्रन का कार्यकाल पूरा हो जाने तक इंतजार किया जाए । 30 जून को केआर रवींद्रन का प्रेसीडेंट-काल तो पूरा गया, लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3011 तथा इसके आरोपी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के लिए मुसीबत की बात यह रही कि केआर रवींद्रन दक्षिण एशिया में रोटरी के झगड़ों/मामलों को देखने के इंचार्ज बना दिए गए । इस कारण डिस्ट्रिक्ट 3011 तथा उसके आरोपी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के लिए मामला जहाँ का तहाँ ही बना रह गया है, और इसके चलते पिछले रोटरी वर्ष की अंतिम काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में पास हुए विरोध प्रस्ताव को भी रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय भेजने की बजाए धूल खाने के लिए छोड़ दिया गया ।
ऐसी स्थिति में यह और भी जरूरी हो जाता है कि डिस्ट्रिक्ट 3011 की चुनावी राजनीति के चिन्हित 'अपराधी' चुनावी राजनीति के पचड़े से दूर रहें । पिछले रोटरी वर्ष में रोटरी इंटरनेशनल की तरफ से जो कार्रवाई हुई, उसे पर्दे के पीछे हुए किसी बड़े खेल के नतीजे के रूप में देखा/पहचाना गया था - जिसमें डिस्ट्रिक्ट के कई लोगों की अलग-अलग स्तर पर निभाई गई भूमिकाओं को लेकर बहुत सारे कयास और संदेह अभी भी लगातार बने हुए हैं । इन कयासों व संदेहों के कारण डिस्ट्रिक्ट में कई एक लोगों के बीच के संबंध और ज्यादा तनावपूर्ण हुए हैं । इस बात ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के परिदृश्य को और भी ज्यादा बारूदी बना दिया है, जहाँ एक छोटी से चिंगारी भी डिस्ट्रिक्ट के लिए घातक साबित हो सकती है । सोचने की बात है कि जब काउंसिल ऑफ गवर्नर्स के सदस्य ही यह विश्वास करते हैं कि केआर रवींद्रन के होते हुए उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और वह अपने ही एक विरोध प्रस्ताव को धूल खाने के लिए छोड़ देते हैं, तब केआर रवींद्रन चुनावी राजनीति करने के लिए 'अपराधी' घोषित किए गए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को खुल्लम-खुल्ला राजनीति करते कैसे देखेंगे और बर्दाश्त करेंगे ? इसीलिए उम्मीद की गई थी कि दीपक तलवार, सुशील खुराना और विनोद बंसल कुछ समय तक तो - कम से कम केआर रवींद्रन के प्रभावी व निर्णायक हैसियत में रहने तक तो - चुनावी झमेलों से दूर रहेंगे; किंतु इन्हें सीओएल व इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता के लिए कमर कसते देख कई लोगों को डिस्ट्रिक्ट के और खुद इनके भी भविष्य के प्रति खतरा पैदा हो रहा नजर आ रहा है ।

Saturday, June 25, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में दीपक बाबु तथा कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की धोखों, गलतबयानियों व तिकड़मों भरी चालबाजियों ने रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि संजय खन्ना की चुनौतियों को और बढ़ाया

मुरादाबाद । रोटरी इंटरनेशनल के विशेष प्रतिनिधि के रूप में संजय खन्ना के 26 जून को पहली बार मुरादाबाद आने के मौके पर डिस्ट्रिक्ट 3100 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने से रह गए दीपक बाबु तथा राजनीतिबाज पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने फिर से अपना अपना पुराना खेल शुरू कर दिया है । दीपक बाबु 26 जून के 'अपने' कार्यक्रम में संजय खन्ना को आने के लिए राजी कर लेने को अपनी बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं, तो कुछेक पूर्व गवर्नर्स संजय खन्ना के आने की आड़ में गलत-सलत सूचनाएँ लोगों के बीच फैला रहे हैं - और इस तरह यह लोग अपना अपना स्वार्थ साधने की कोशिशों में एक बार फिर से जुट गए हैं । इसी तरह की हरकतें यह पहले भी करते रहे हैं और इन हरकतों से इन्हें फायदे की बजाए नुकसान ही होता रहा है; लेकिन इसके बावजूद फिर से इन्होंने अपनी हरकतों को शुरू कर दिया है - जिससे साबित हो रहा है कि इन्होंने बार-बार होने वाली अपनी फजीहतों से कोई सबक नहीं सीखा है । लोगों को सबसे ज्यादा हैरानी दीपक बाबु के रवैये पर है - डिस्ट्रिक्ट 3100 में अभी हाल के दिनों में जो कुछ भी हुआ है, उसका सबसे ज्यादा नुकसान दीपक बाबु को हुआ है; जो हुआ, उसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार भी दीपक बाबु ही रहे - लेकिन फिर भी वह कोई सबक सीखते हुए और मैच्योरिटी दिखाते हुए नहीं नजर आ रहे हैं । पता नहीं क्यों, वह इस सच्चाई को स्वीकार करने को तैयार नहीं हो रहे हैं कि अपनी बेवकूफियों से उन्होंने अपना खुद का ऐसा नुकसान कर लिया है, जिसकी भरपाई अब नहीं हो सकती है । वह नुकसान की 'मात्रा' को कम तो कर सकते हैं, 'इस' नुकसान को वह एक दूसरे तरह के फायदे में तो बदल सकते हैं - किंतु जो नुकसान उन्हें हुआ है, उसे अब वह नहीं बचा सकते हैं : उन तरीकों से तो हरगिज नहीं, जिन तरीकों से उन्होंने नुकसान को आमंत्रित किया है । दीपक बाबु लेकिन अपने 'तरीके' छोड़ने को तैयार नहीं दिख रहे हैं - उन्होंने जिस तरह की हरकतों से अपना खुद का नुकसान किया है, मजे की बात यह है कि उसी तरह की हरकतों से वह नुकसान को पलटने की कोशिश कर रहे हैं । और इसी कोशिश में उन्होंने संजय खन्ना की पहली यात्रा/मीटिंग को इस्तेमाल करने की चाल चली है ।
दीपक बाबु ने क्लब पदाधिकारियों को सम्मानित करने के नाम पर 26 जून को मुरादाबाद में एक कार्यक्रम की योजना बनाई है । इस कार्यक्रम की कोई वैधानिक मान्यता नहीं है, किंतु चूँकि कहीं से तो कोई शुरुआत होनी ही है - इसलिए डिस्ट्रिक्ट में हर किसी ने दीपक बाबू के इस कार्यक्रम को 'स्वीकार' कर लिया । संजय खन्ना के इस कार्यक्रम में आने की सहमति मिलने के बाद इस कार्यक्रम का महत्त्व और बढ़ गया । कार्यक्रम का महत्त्व बढ़ जाने से दीपक बाबु के दिमाग भी चढ़ गए । उन्होंने कार्यक्रम के साथ साथ कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग भी रख ली; और इसके लिए संजय खन्ना की सहमति भी ले ली । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की पिछली दो मीटिंग्स में चूँकि कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के दीपक बाबु के साथ अच्छे अनुभव नहीं रहे थे, इसलिए उन्होंने संजय खन्ना से कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में शामिल होने से साफ मना कर दिया । उनका कहना रहा कि दीपक बाबु कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसलों का सम्मान नहीं करते हैं, अपने स्वार्थपूर्ण मनमाने फैसले थोपने का प्रयास करते हैं, और पक्षपातपूर्ण तरीके से व्यवहार करते हैं - इसलिए उनके साथ कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग करने का कोई मतलब नहीं है । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के इस विरोध के कारण संजय खन्ना ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग के दीपक बाबु के प्रस्ताव को खारिज कर दिया; उन्होंने कहा कि 26 जून के औपचारिक कार्यक्रम से पहले वह पूर्व गवर्नर्स से मिलेंगे और स्थितियों को जानेंगे/समझेंगे जरूर - लेकिन उस मुलाकात-बातचीत को किसी मीटिंग के रूप में नहीं देखा जायेगा । संजय खन्ना के इस रवैये से दीपक बाबु की 'योजना' को तगड़ा झटका लगा है । उनके नजदीकियों का कहना है कि दीपक बाबु ने सोचा यह था कि रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में संजय खन्ना के सामने वह सभी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स से कहलवा लेंगे कि डिस्ट्रिक्ट में कोई गड़बड़ नहीं है, सभी के बीच बहुत ही प्रेम-भाव है, एक-दूसरे के प्रति बहुत ही सम्मान-भाव है - और इस आधार पर वह संजय खन्ना से डिस्ट्रिक्ट को नॉन डिस्ट्रिक्ट स्टेटस से बाहर करवाने की संस्तुति करवा लेंगे । दीपक बाबु को लगता है कि इस तरह वह एक जुलाई से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद पा लेंगे ।
दीपक बाबु की इस योजना से परिचित मेरठ के कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स तो इतने जोश में आ गए कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट के बहाल हो जाने की खबरें अखबारों में छपवा भी दीं । मेरठ के कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स में जोश भरने का कारण दरअसल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की एक चिट्ठी भी बनी, जिसके आधार पर बृज भूषण, एमएस जैन और वागीश स्वरूप की तरफ से आरोपमुक्त किए जाने के दावे तक किए जाने लगे । लेकिन इनकी बदकिस्मती रही कि आरोपमुक्त किए जाने के इनके दावों पर डिस्ट्रिक्ट में किसी ने भी विश्वास नहीं किया । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को और केआर रवींद्रन की हाल की चिट्ठी को जिसने भी पढ़ा है, उसने पाया है कि केआर रवींद्रन के कहे हुए का मनमाना अर्थ निकालते/बताते हुए आरोपी तीनों पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की तरफ से आरोपमुक्त होने के दावे सरासर झूठे हैं । उल्लेखनीय है कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने अपनी अप्रैल की मीटिंग में जो फैसला लिया था, उसमें साफ शब्दों में डिस्ट्रिक्ट में आर्थिक व प्रशासनिक गड़बड़ियों में बृजभूषण, एमएस जैन और वागीश स्वरूप को प्रमुख भूमिका निभाने का दोषी घोषित किया था । 
अभी हाल ही में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने इन तीनों को संबोधित जो पत्र लिखा है उसमें उन्होंने स्पष्ट कहा है कि बोर्ड के फैसले में जो कहा गया है वह डिस्ट्रिक्ट के लीडर्स के रूप में उनकी कार्रवाइयों के संबंध में कहा गया है । केआर रवींद्रन ने अपने पत्र में कहीं भी यह नहीं कहा है कि बोर्ड का जो फैसला है वह गलत है और या वह बोर्ड के फैसले को वापस लेते हैं - जाहिर है कि बोर्ड का जो फैसला है वह अपनी जगह अभी भी कायम है । 
केआर रवींद्रन ने यह जरूर स्पष्ट किया है कि बोर्ड के फैसले का यह मतलब नहीं है कि इन तीनों ने कोई फ्रॉड किया है और या अपनी जेबें भरी हैं । इस स्पष्टीकरण के बावजूद, रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले में लगाया गया आरोप अभी भी मौजूद है और जो कम गंभीर नहीं है ।
दीपक बाबु और कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के इस रवैये ने दिखाया/जताया है कि पिछले अनुभवों के नतीजों से उन्होंने कुछ नहीं सीखा है; और वह अभी भी धोखों, गलतबयानियों व तिकड़मों के सहारे अपने स्वार्थ पूरे करने के मौके बनाने में लगे हैं । उनका यह रवैया इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की उस उम्मीद के खिलाफ है, जिसमें इन लोगों से सकारात्मक रवैया अपनाने की अपेक्षा की गई है । दीपक बाबु और कुछेक पूर्व गवर्नर्स के इस व्यवहार ने कई अन्य पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स व डिस्ट्रिक्ट के लोगों को जिस तरह से भड़का दिया है, उससे डिस्ट्रिक्ट का झगड़ा एक बार फिर सतह पर आता नजर आ रहा है । डिस्ट्रिक्ट के लिए बदकिस्मती की बात यह है कि यह सब ऐसे मौके पर हो रहा है, जबकि रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में संजय खन्ना पहली बार डिस्ट्रिक्ट में आ रहे हैं । जाहिर तौर पर ऐसे में संजय खन्ना के लिए चुनौती और बढ़ जाती है । हर किसी की निगाह इसी बात पर है कि अलग अलग 'उद्देश्यों' व ग्रुपों में बँटे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स व डिस्ट्रिक्ट के अन्य सदस्य 26 जून के कार्यक्रम में संजय खन्ना के सामने क्या सीन 'बनाते' हैं और संजय खन्ना डिस्ट्रिक्ट की अपनी पहली यात्रा के क्या अनुभव लेकर मुरादाबाद से लौटते हैं ?

Monday, May 23, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में दीपक बाबु रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन को अपनी धमकियों से डरा कर अपनी गवर्नरी को वापस पा लेने में सचमुच कामयाब होंगे क्या ?

मुरादाबाद । दीपक बाबु रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन को 'धमका' कर अपनी गवर्नरी वापस पाने की जो कोशिश कर रहे हैं, उसने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को बुरी तरह डरा दिया है । लोगों के बीच डर यह पैदा हुआ है कि दीपक बाबु की मनमानी, स्वार्थपूर्ण व बेवकूफीभरी हरकतों से डिस्ट्रिक्ट पहले से ही मुसीबत में फँसा हुआ है - अब जो वह नया कारनामा करने जा रहे हैं, उससे पता नहीं डिस्ट्रिक्ट का और क्या हाल हो ? उल्लेखनीय है कि दीपक बाबु ने कल कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाई थी, जिसमें उन्होंने अपनी तरफ से सुझाव रखा कि रोटरी इंटरनेशनल को एक कर्रा सा पत्र लिखा जाए कि वह यदि डिस्ट्रिक्ट 3100 को नॉन डिस्ट्रिक्ट स्टेटस से बाहर नहीं निकालता है, तो डिस्ट्रिक्ट के रोटेरियंस कोई इंटरनेशनल ड्यूज नहीं देंगे और रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी यदि फिर भी नहीं माने तो डिस्ट्रिक्ट के सभी रोटेरियंस रोटरी छोड़ देंगे । दीपक बाबु ने दावा किया कि इस तरह का पत्र रोटरी इंटरनेशल कार्यालय जायेगा, तो रोटरी इंटरनेशल कार्यालय अवश्य ही संज्ञान लेगा और तुरंत से डिस्ट्रिक्ट को बहाल कर देगा । दीपक बाबु की बातें सुनकर मीटिंग में मौजूद कुछेक पूर्व गवर्नर्स ने कहा भी कि रोटरी इंटरनेशनल के फैसले को पलटवाने के लिए प्रयास करने का अभी उचित समय नहीं है, और अभी हमें ईमानदारी से अपनी गलतियों की पहचान करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि हमसे आखिर क्या क्या गलतियाँ हुईं हैं - जो हमें इस मुकाम पर ला खड़ा करने के लिए जिम्मेदार हैं । दीपक बाबु ने लेकिन इन बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और वह रोटरी इंटरनेशनल को धमकीभरा पत्र लिखने की बात करते रहे । मीटिंग में मौजूद पूर्व गवर्नर्स ने जब देखा कि दीपक बाबु किसी की सुन ही नहीं रहे हैं, और अपनी ही हाँके जा रहे हैं - तो वह चुप लगा गए । पूर्व गवर्नर्स की चुप को दीपक बाबु ने उनकी सहमति माना और उन्होंने घोषणा कर दी कि वह दो एक दिन में रोटरी इंटरनेशनल को धमकीभरा पत्र लिख भेजेंगे ।
दीपक बाबु की इस घोषणा ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को बुरी तरह डरा दिया है । लोगों को लग रहा है कि दीपक बाबु अपनी स्वार्थपूर्ण मूर्खता में डिस्ट्रिक्ट का और बेड़ा गर्क करेंगे । लोगों को लग रहा है कि दरअसल दीपक बाबु चाहते हैं कि किसी भी तरह से कुछ भी करके एक जुलाई से उन्हें गवर्नरी मिल जाए; और पता नहीं क्यों उन्हें यह लगता है कि धमकी देकर वह रोटरी इंटरनेशनल को एक जुलाई से उन्हें गवर्नरी सौंप देने के लिए मजबूर कर देंगे ? रोटरी इंटरनेशनल की व्यवस्था से परिचित लोग जानते हैं कि ऐसा हो पाना असंभव है । इसकी उम्मीद तो एक बार को फिर भी की जा सकती है कि अगला रोटरी वर्ष शुरू होने के बाद डिस्ट्रिक्ट के लोग आपसी एकजुटता व सकारात्मक सोच/व्यवहार का परिचय दें, तो दो-चार महीने में रोटरी इंटरनेशनल अपने फैसले पर पुनर्विचार कर ले - और हो सकता है कि छह/आठ महीने के लिए दीपक बाबु को गवर्नरी मिल जाए । लेकिन दीपक बाबु का जो व्यवहार कल की कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में देखने को मिला, उससे लगता नहीं है कि दीपक बाबु अपनी हरकतों से हालात को सुधरने देंगे । मीटिंग में नीरज अग्रवाल तथा बृज भूषण से लताड़ सुनने के बाद कहने को तो उन्होंने 'अभी तक की' अपनी गलतियों के लिए माफी माँगी, लेकिन माफी माँगने के उनके अंदाज़ तथा उनकी बातों व उनके रवैये से किसी को भी लगा नहीं कि उन्होंने अपनी गलतियों को वास्तव में पहचाना/समझा भी है ?
डिस्ट्रिक्ट के लोगों के अनुसार, दीपक बाबु की दो बड़ी गलतियाँ रहीं : एक तो उन्होंने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में हुए फैसले को नहीं माना - इसलिए नहीं माना क्योंकि पूर्व गवर्नर्स के प्रति उनके मन में कोई सम्मान ही नहीं था, जिसके चलते कई एक पूर्व गवर्नर्स को उन्होंने अलग अलग तरह से अपमानित तक किया; दूसरी गलती उनकी यह रही कि रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय तथा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की तरफ से समय समय पर जो संकेत उन्हें मिले, उन्होंने न तो उन्हें समझने की कोशिश की और न उनसे सबक लेने का प्रयास किया । इसका नतीजा जो निकला, वह अब जगजाहिर है ।
दीपक बाबु ने कल की कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में भी इन्हीं गलतियों को दोहराने वाले तेवर दिखाए । 'अभी तक की' अपनी गलतियों के लिए माफी माँगने के बावजूद, एक बार फिर वह पूर्व गवर्नर्स की बातों की अनसुनी करने तथा कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में सर्वानुमति बनाने का प्रयास करने की बजाए अपनी ही बात थोपते हुए नजर आए । उनके इस रवैये को देखते हुए ही पूर्व गवर्नर्स ने चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी, क्योंकि उन्हें डर रहा कि उनके कुछ कहने पर दीपक बाबु उन्हें अपमानित न कर दें । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय तथा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन को लेकर भी दीपक बाबु के रवैये में मूर्खता की उपस्थित को देखा/पहचाना गया । दीपक बाबु के प्रति तथा डिस्ट्रिक्ट 3100 के प्रति केआर रवींद्रन के रवैये को देखते/समझते हुए थोड़ी सी भी कॉमन सेंस रखने वाला व्यक्ति समझ लेगा कि धमकी देने से तो बात और बिगड़ेगी ही - लेकिन अपनी कुर्सी वापस पाने की फिराक में लगे दीपक बाबु को लगता है कि वह धमकी देकर केआर रवींद्रन से फैसला पलटवा लेंगे ।
दीपक बाबु सहित जिन भी लोगों को ऐसा लगता है, उन्हें डिस्ट्रिक्ट 3011 के एक घटना-प्रसंग से सबक लेना चाहिए : डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व गवर्नर्स केआर रवींद्रन की पहल से रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा लिए गए एक फैसले से बुरी तरह खफा हैं, जिसे पलटवाने के लिए उन्होंने अपने डिस्ट्रिक्ट की काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में एक प्रस्ताव पास किया । गौर करने वाली बात यह है कि इस प्रस्ताव को पास करने के बावजूद उन्होंने अभी इसे इंटरनेशनल कार्यालय नहीं भेजने का फैसला किया - क्योंकि उन्होंने इस बात को समझा कि केआर रवींद्रन के प्रेसीडेंट रहते हुए इंटरनेशनल बोर्ड के उक्त फैसले को पलटवाना संभव नहीं होगा; उन्होंने फैसला किया कि वह अपने प्रस्ताव को जुलाई में इंटरनेशनल कार्यालय भेजेंगे । किंतु उनके बीच भी कोई दीपक बाबु जैसी सोच रखने वाला व्यक्ति था - उसने केआर रवींद्रन को लिख दिया कि इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले के खिलाफ हमारे यहाँ काफी रोष है और अपनी एकजुटता के जरिए हमने उस फैसले का विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पास किया है । जबाव में केआर रवींद्रन का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को संबोधित फड़फड़ाता पत्र मिला, जिसमें साफ चेताया गया कि बदमाशी भी करोगे और उसके खिलाफ होने वाली कार्रवाई का विरोध भी करोगे, मैं कोशिश करूँगा कि आपके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई हो । केआर रवींद्रन के इस पत्र ने डिस्ट्रिक्ट 3011 के गवर्नर्स के बीच हड़कंप मचा दिया । अलग अलग तरीकों से केआर रवींद्रन को संदेश भेजा गया व उन्हें समझाया गया कि जो प्रस्ताव पास हुआ है, वह लोगों की भावनाओं का इज़हार भर है, और उसे आधिकारिक रूप से रोटरी इंटरनेशनल को नहीं भेजा गया है - इसलिए रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय उसका संज्ञान नहीं ले सकता है । इसके बाद कहीं जाकर डिस्ट्रिक्ट 3010 के लोगों की जान छूटी । इस प्रसंग से सहज ही समझा जा सकता है कि डिस्ट्रिक्ट 3100 की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक बाबु यदि आधिकारिक रूप से रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को धमकी भरा पत्र लिखे/भेजेंगे, तो फिर केआर रवींद्रन क्या हाल करेंगे ?
इसीलिए रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन को 'धमका' कर अपनी गवर्नरी वापस पाने का दीपक बाबु ने जो फार्मूला सोचा है, उसने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को बेचैन कर दिया है, और उन्हें फ़िक्र होने लगी है कि दीपक बाबु की हरकतें आगे न जाने और क्या गुल खिलाएँ ? कुछेक लोगों को हालाँकि दीपक बाबु से हमदर्दी भी है : उन्हें लगता है कि बेचारे दीपक बाबु ने बड़े झंझटों-झगड़ों-आफ़तों के बाद तो चुनाव जीता था, अब जब उस जीत का फल खाने का मौका आया - तो फल उनसे छीन लिया गया है । ऐसे लोगों का मानना और कहना है कि दीपक बाबु के लिए रास्ता अभी भी हालाँकि पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है, किंतु रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए उनके लिए सबसे पहली जरूरत यह है कि वह कोई अच्छे सलाहकार खोजें - जो उन्हें मामले की व स्थितियों की नाजुकता व गंभीरता से परिचित कराएँ तथा उन्हें नकारात्मक सोच व घेरेबंदी से बाहर निकालने में मदद करें । दीपक बाबु के प्रति हमदर्दी रखने वाले लोगों का कहना है कि दीपक बाबु की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्होंने अपने रवैये व व्यवहार से अपने तमाम तरह के दुश्मन बनाए हुए हैं, और तमाम लोगों के बीच अपनी एक नकारात्मक पहचान बना ली है; वह यदि ईमानदारी से व सोच-समझ कर थोड़ा सा भी प्रयास करें तो अपने दुश्मनों की संख्या को भी कम कर सकेंगे तथा अपनी पहचान की नकारात्मकता के गाढ़ेपन को भी कुछ पनीला कर लेंगे । कल की मीटिंग में उन्होंने जिस तरह से 'अभी तक की' गलतियों के लिए माफी माँगी, उससे ऐसा तो लगता है कि वह अपनी ऐंठ से जैसे बाहर निकलने का प्रयास तो कर रहे हैं, लेकिन उनके यह प्रयास अभी भी नकलीपन लिए हुए नजर आ रहे हैं -  इसीलिए अपने मामले को सँभालने की बजाए वह बिगाड़ते हुए ज्यादा दिख रहे हैं । और इसी कारण से उनके प्रयासों में हालात और खराब होने का खतरा देखा/पहचाना जा रहा है ।

Thursday, April 28, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में इंटरनेशनल बोर्ड के निर्देश का पालन करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला की कोशिश पर दीपक तलवार ने 'चोरी और सीनाजोरी' वाला रवैया दिखाया

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले पर अमल करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला की तैयारी पर दिखाए दीपक तलवार के रवैये ने डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक माहौल को न सिर्फ और गर्मा दिया है, बल्कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला की लाचारी व निरीहता को एक बार फिर सामने ला दिया है । उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल बोर्ड की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को निर्देश मिला कि इस वर्ष हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में भूमिका निभाने वाले जिन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को उसके फैसले में नामित किया गया है, उन्हें वह आगे से ऐसा न करने की चेतावनी दें । इस निर्देश का पालन करते हुए सुधीर मंगला ने इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा नामित तीनों पूर्व गवर्नर्स - दीपक तलवार, सुशील खुराना व विनोद बंसल को एक तय दिन/समय पर अपने ऑफिस में पहुँचने के लिए ईमेल लिखा । दीपक तलवार इससे भड़क गए और उन्होंने इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को गलत बताते हुए सुधीर मंगला के ऑफिस पहुँचने से साफ इंकार कर दिया । इस पर सुधीर मंगला ने उन्हें ध्यान दिलाया कि वह जो कर रहे हैं, उसके लिए उन्हें रोटरी इंटरनेशनल से निर्देश मिला है - और एक रोटेरियन के रूप में उन्हें भी जिसका पालन करना चाहिए । इस पर दीपक तलवार ने उन्हें लंबी-चौड़ी मेल लिख मारी, जिसमें इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को ब्यौरेवार तरीके से गलत ठहराते हुए उन्होंने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि वह सुधीर मंगला के ऑफिस नहीं पहुँचेंगे । डिस्ट्रिक्ट में कुछेक लोगों ने दीपक तलवार के इस तर्क को तो सही माना है कि इंटरनेशनल बोर्ड ने उन्हें तथा अन्य पूर्व गवर्नर्स को उचित प्रक्रिया अपनाए बिना जिस तरह से 'अपराधी' घोषित कर दिया है, वह गलत है; लेकिन दूसरे कई लोगों की तरह उनका भी मानना और कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल के निर्देश के अनुसार काम करने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की बात तो दीपक तलवार को सुननी/माननी ही चाहिए । मजे की बात यह है कि सुशील खुराना और विनोद बंसल ने सुधीर मंगला का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है । उनका कहना है कि सुधीर मंगला रोटरी इंटरनेशनल के निर्देश का पालन रहे हैं, जिसे पूरा करने में हमें सहयोग करना ही चाहिए; इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से हमारा जो विरोध है, उसे हम मान्य व उचित तरीके से इंटरनेशनल पदाधिकारियों के सामने रखेंगे ।
सुशील खुराना और विनोद बंसल के सहयोगात्मक रवैये को देखने के बाद तो हर किसी को दीपक तलवार का रवैया 'चोरी और सीनाजोरी' वाला लग रहा है । दीपक तलवार के लेकिन अपने तर्क हैं : उन्होंने इस झगड़े में आशीष घोष को भी लपेट लिया है । उनका कहना है कि सुधीर मंगला इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले की तो सिर्फ आड़ ले रहे हैं, वास्तव में वह आशीष घोष के इशारे पर काम कर रहे हैं । दीपक तलवार का तर्क है कि इंटरनेशनल बोर्ड का फैसला तो सुधीर मंगला के पास सात दिन पहले आ गया था; और उन्होंने तो इस फैसले को छिपा ही लिया था - लेकिन चार दिन बाद आशीष घोष ने जितेंद्र गुप्ता के जरिए इसे 'टॉक ऑफ द टाउन' बना दिया । दीपक तलवार का कहना है कि आशीष घोष ही सुधीर मंगला को भड़का कर उन्हें बेइज्जत कराना चाहते हैं, और वह आशीष घोष की इस योजना को सफल नहीं होने देंगे । आशीष घोष की इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से चूँकि अच्छी ट्यूनिंग बताई/देखी जाती है, इसलिए कुछेक लोगों को लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के बारे में केआर रवींद्रन के पास जो फीडबैक है, वह उन्हें आशीष घोष से ही मिला होगा । दरअसल इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले में जो कुछ भी कहा गया है, वह पूरी पूरी तरह सच है - जो लोग इस फैसले पर सवाल उठा भी रहे हैं, उनका तर्क घूमफिर कर यही है कि जब कोई चुनावी शिकायत दर्ज नहीं हुई, तो फिर उसकी जाँच और सजा क्यों ? कई दूसरे लोग इस तर्क को एक अन्य तर्क से खारिज कर रहे हैं - कि किसी हत्या की यदि एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, तो इस बिना पर क्या हत्यारे को सजा नहीं होना चाहिए ? दरअसल इसी तरह की बातों के चलते डिस्ट्रिक्ट के लोगों को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक तलवार का रवैया 'चोरी और सीनाजोरी' वाला लग रहा है ।
सुशील खुराना और विनोद बंसल के रवैये ने दीपक तलवार की 'सीनाजोरी' को और बेनकाब कर दिया है । सुशील खुराना और विनोद बंसल के रवैये की तारीफ करते हुए लोगों का कहना है कि यह दोनों यदि इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से दुखी और निराश होने के बावजूद रोटरी के दायरे में रहने के लिए तैयार हैं, तो दीपक तलवार अपने आप को रोटरी से ऊपर क्यों समझ रहे हैं ? कुछेक लोगों को हैरानी सुधीर मंगला के रवैये पर भी है : उनका कहना/पूछना है कि सुधीर मंगला आखिर किस मजबूरी में दीपक तलवार को 'सीनाजोरी' करने का मौका दे रहे हैं; और वह भी तब जबकि सुधीर मंगला ने तो रोटरी इंटरनेशनल के निर्देश पर ही उन्हें 'सम्मन' भेजा है । हैरान होने वाले इन लोगों का मानना/कहना है कि दीपक तलवार 'सीनाजोरी' दरअसल कर इसीलिए रहे हैं क्योंकि वह जानते हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला के बस की कुछ करना है ही नहीं - और 'सीनाजोरी' वाले रवैये से वह लोगों को यह भी जता देंगे कि इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ।
दीपक तलवार के रवैये को देखते हुए कुछेक लोग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला को 'गर्म' करने के प्रयास भी करने लगे हैं : उनका कहना है कि मौका अच्छा है, इंटरनेशनल प्रेसीडेंट डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति को लेकर बुरी तरह खफा हैं ही - ऐसे में सुधीर मंगला को डिस्ट्रिक्ट में लोगों को दिखा देना चाहिए कि उन्हें 'लल्लूलाल' न समझा जाए और वह कठोर फैसला कर सकते हैं । कठोर फैसले के रूप में इस वर्ष के चुनाव को रद्द कर देने का सुझाव सुधीर मंगला को दिया जा रहा है । यह सुझाव देने वालों का कहना है कि इंटरनेशनल बोर्ड तक ने जब यह मान लिया है कि इस वर्ष के चुनाव में रोटरी नियमों व दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ है और यह उल्लंघन सभी उम्मीदवारों ने किया है, तो इस बिना पर चुनाव रद्द हो ही सकता है । रही बात चुनावी शिकायत के न होने की - तो जब कोई शिकायत न होने के बावजूद इंटरनेशनल बोर्ड मामले पर विचार कर फैसला ले सकता है, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ऐसा क्यों नहीं कर सकता है ? और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पास अब तो इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले का आधार भी है । यह सुझाव देने वाले लोगों का कहना है कि ऐसा फैसला करके सुधीर मंगला जाते जाते डिस्ट्रिक्ट में अपनी धमक भी दिखा/जता देंगे, और दीपक तलवार की 'सीनाजोरी' का भी जबाव दे देंगे । यह सुझाव देने वाले लोगों को उम्मीद हालाँकि कम ही है कि सुधीर मंगला कठोर फैसला करने का साहस सचमुच दिखा पायेंगे, लेकिन फिर भी वह इसलिए प्रयास कर लेना चाहते हैं कि शायद सुधीर मंगला का हरियाणवी जोश निकल आए और वह दीपक तलवार की 'सीनाजोरी' का जबाव देने का मन बना ही लें, और कोई कठोर फैसला कर ही डालें ।
उम्मीद और नाउम्मीदी की इस उहापोह ने डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक माहौल का पारा तो खासा ऊँचा चढ़ा ही दिया है ।