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Wednesday, July 8, 2020

रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों तथा रोटेरियंस से डोनेशन के रूप में पैसे लेने की कोशिशों पर रोक लगाने की सिफारिशों ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता को जोर का झटका दिया है

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों पर गंभीर आपत्ति प्रकट करते हुए, वास्तव में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता की गर्दन ही पकड़ ली है । शेखर मेहता 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के चेयरमैन हैं, और स्काईलाइन हॉउस के उनके पते पर ही इस फाउंडेशन का मुख्यालय है । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज ने इस फाउंडेशन की गतिविधियों को रोटरी की 'समानांतर गतिविधियों' के रूप में देखा/पहचाना है, और आशंका व्यक्त की है कि इसकी गतिविधियाँ रोटेरियंस के बीच कन्फ्यूजन पैदा करके उन्हें रोटरी से अलग कर सकती हैं तथा इस तरीके से रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन को नुकसान पहुँचाने वाली साबित हो सकती हैं । एक तरह से रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज ने शेखर मेहता के नेतृत्व में चलने वाले 'द रोटरी ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' को रोटरी के लिए खतरे के रूप में देखा/पहचाना है - और इसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की है । शेखर मेहता के लिए बड़े झटके वाली बात यह रही है कि उनके फाउंडेशन की गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए तथा उन पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज करते हुए रोटरी इंटरनेशनल के बोर्ड व रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की जून में जो मीटिंग्स हुईं, उनमें अधिकृत पदाधिकारी होने के बावजूद प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता, डायरेक्टर्स भरत पांड्या व कमल सांघवी तथा फाउंडेशन ट्रस्टी गुलाम वाहनवती को शामिल नहीं किया गया । 
उल्लेखनीय है कि देश के रोटेरियंस के बीच इस फाउंडेशन को शेखर मेहता की 'निजी दुकान' के रूप में ही देखा/पहचाना गया है, जिसे इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी बनने के बाद से वह तेजी से बड़ा बना रहे हैं, तथा सजा/सँवार कर नई चमक के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं । रोटरी इंटरनेशनल की छत्रछाया में 'काम करने का नाम लेकर' यह फाउंडेशन रोटरी क्लब्स, अन्य तरह तरह के एनजीओज तथा सरकारी विभागों के साथ मिल कर गरीबों, बीमारों, अशिक्षितों तथा पिछड़े समुदायों के लिए काम करने की बात कर रहा है; इसने काम करने के लिए प्रायरिटीज एरिया'ज तय किए हैं, और उनके लिए छोटे-बड़े रोटेरियंस को लेकर भारी-भरकम टीमें बनाई हैं - और विभिन्न क्षेत्रों में काम को अंजाम देने के लिए रोटेरियंस से डोनेशन लिए/माँगे हैं । शेखर मेहता ने देश के प्रायः प्रत्येक बड़े रोटेरियन पदाधिकारी व नेता को इस फाउंडेशन में कोई न कोई पद देकर 'जोड़ा' है - और एक तरीके से यह 'दिखाया' हुआ है कि 'द रोटरी ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के लिए काम करने का मतलब रोटरी का काम करना है । कई प्रमुख व वरिष्ठ रोटेरियंस निजी बातचीत में इस फाउंडेशन को शेखर मेहता की निजी महत्त्वाकांक्षा से जोड़ कर देखते/बताते रहे हैं, और शिकायतें करते रहे हैं कि शेखर मेहता इसके जरिये अपना निजी संस्थान बना/खड़ा कर रहे हैं । शेखर मेहता चूँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की राह पर हैं, इसलिए तरह-तरह के स्वार्थों के चलते कोई भी खुलकर अपनी शिकायतों को व्यक्त नहीं कर पाया और शेखर मेहता को अपनी 'निजी दुकान' बढ़ाने का साफ रास्ता मिल गया ।
लेकिन रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की मीटिंग्स में जो बातें हुईं हैं, जो सवाल उठे हैं और जिस तरह के निर्णय हुए हैं - उससे लगता है कि शेखर मेहता के फाउंडेशन को ग्रहण लग गया है, और वह मुसीबत में घिर गया है । बोर्ड सदस्यों व ट्रस्टीज की मीटिंग्स में इस बात पर सवाल उठे हैं कि 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों के लिए रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन से अनुमति क्यों नहीं ली गईं; तथा रोटरी फाउंडेशन को अलग-थलग करके फाउंडेशन के लिए पैसा क्यों और कैसे लिया जा रहा है ? बोर्ड सदस्यों व ट्रस्टीज ने रोटरी इंटरनेशनल के जनरल सेक्रेटरी से अनुरोध किया है कि वह फाउंडेशन के पदाधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहें कि उनकी सभी गतिविधियाँ रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन के अंतर्गत होंगी और उनके प्रति ही जबावदेह व जिम्मेदार होंगी । रोटेरियंस से फाउंडेशन के लिए पैसे देने और जमा करने पर तुरंत रोक लगाने की माँग करते हुए अनुरोध किया गया है कि फाउंडेशन की गतिविधियों को तुरंत से रोका जाये और उन्हें रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन के मॉडल के अनुरूप ही काम करने को कहा जाए । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज के इस रवैये से 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के अस्तित्व को लेकर गंभीर संशय पैदा हो गया है, और इस फाउंडेशन के तहत बनी कमेटियों के पदाधिकारी तथा सदस्य अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं ।

Friday, November 1, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में शेखर मेहता के सम्मान में होने वाले समारोह की बागडोर रंजन ढींगरा को मिलने से भड़के विनोद बंसल ने समारोह की तैयारी के लिए होने वाली बैठक का बहिष्कार किया; जिसके बाद उनके समारोह को फेल करने की कोशिशों में जुटने की बात फैली

नई दिल्ली । विनोद बंसल की नाराजगी और विरोधी तेवरों के चलते 8 नवंबर को होने वाला इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता का सम्मान समारोह मुसीबत में पड़ता/फँसता नजर आ रहा है । विनोद बंसल हालाँकि समारोह की तैयारी कमेटी के चेयरमैन हैं, लेकिन उनकी शिकायत है कि समारोह की तैयारी से उन्हें अलग-थलग कर दिया गया है और तैयारी का सारा काम कन्वेनर रंजन ढींगरा तथा एडवाईजर सुरेश जैन ने हथिया लिया है और सारा प्रोग्राम यही दोनों तय कर रहे हैं । प्रोग्राम तय करने को लेकर तैयारी कमेटी व रिसेप्शन कमेटी के सदस्यों की हाल ही में हुई बैठक में विनोद बंसल इतने तमतमाए कि जोर से 'आय एम् नॉट इंटरेस्टिंग' कहते हुए बैठक को बीच में ही छोड़ कर चले गए । मजे की बात यह रही कि बैठक में शामिल सदस्यों को यही समझ में नहीं आया कि विनोद बंसल आखिर भड़के किस बात पर हैं । किसी ने उनकी नाराजगी का कारण पूछने की कोशिश भी की, लेकिन उन्होंने किसी को बोलने का मौका ही नहीं दिया और जोर जोर से बोलते हुए बैठक छोड़ कर चले गए । बैठक में मौजूद सदस्यों को यह तो समझ में आया कि विनोद बंसल समारोह की तैयारी से अलग-थलग किए जाने की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ कि तैयारी से जुड़ा ऐसा कौन सा काम कर लिया गया, जिसमें विनोद बंसल अपनी भागीदारी चाहते थे - और जिसके न मिलने पर वह इतना भड़क गए कि तैयारी पर बात करने के लिए हो रही बैठक को बीच में ही छोड़ कर - एक तरह से उसका बायकाट करके - निकल गए । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच यह चर्चा भी सुनी गई है कि विनोद बंसल अब उक्त समारोह को विफल करने की तैयारी में जुट गए हैं; और इसके लिए एक तरफ तो उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुरेश भसीन को यह कहते हुए भड़काना शुरू किया है कि वह समारोह में दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं, उन्हें इससे क्या मिलेगा - और दूसरी तरफ निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय भाटिया को उन्होंने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है कि फरीदाबाद से समारोह के लिए ज्यादा रजिस्ट्रेशन न हों । विनोद बंसल को लगता है कि शेखर मेहता के सम्मान समारोह में लोगों की ज्यादा भागीदारी नहीं होगी, तो समारोह विफल माना जायेगा और इससे साबित होगा कि समारोह को सफल करने/बनाने का हुनर तो सिर्फ उनके पास है ।
लोगों के बीच की चर्चाओं के अनुसार, विनोद बंसल एक तरफ तो शेखर मेहता के सम्मान समारोह को विफल करने के प्रयासों में लगे हैं, और दूसरी तरफ समारोह की तैयारी कमेटी के चेयरमैन पद को बचाने का प्रयास भी कर रहे हैं । दरअसल विनोद बंसल जिस तरह से नाराजगी दिखाते हुए तैयारी कमेटी व रिसेप्शन कमेटी की बैठक का बायकाट करके गए, उसे देखते हुए बैठक में विचार आया कि विनोद बंसल जब खुद कह गए हैं कि वह समारोह में 'इंट्रेस्टेड' नहीं हैं, तब फिर उन्हें चेयरमैन बनाये रखने का क्या फायदा - उनकी जगह किसी और को चेयरमैन बनाया जाए । अधिकतर कमेटी सदस्यों ने लेकिन जल्दबाजी में इस तरह का फैसला न करने का सुझाव दिया । विनोद बंसल को जब यह बात पता चली तो उन्होंने कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों से संपर्क साधा । उनकी क्या बातें हुईं, यह तो किसी को नहीं पता चला, लेकिन समझा जाता है कि उन्होंने चेयरमैन पद को बचाने का ही प्रयास किया है । विनोद बंसल के नजदीकियों का कहना है कि विनोद बंसल ने गुस्से में बैठक का बहिष्कार तो कर दिया और तैश में यह बोल आये कि 'आय एम् नॉट इंटरेस्टिंग' - लेकिन चेयरमैन का पद वह नहीं खोना चाहते हैं । समझा जाता है कि विनोद बंसल समारोह की बागडोर पूरी तरह अपने हाथ में रखना चाहते थे, लेकिन जो संभव नहीं हो सका, और इसीलिए वह नाराज हो गए हैं । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में हुए सम्मान समारोह की बागडोर विनोद बंसल के हाथ में थी, और - आरोपों के अनुसार - उन्होंने खूब मनमानी की थी तथा अन्य किसी को कोई तवज्जो नहीं दी थी । पिछले वर्ष के उसी अनुभव को याद रखते हुए डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स इस बार तैयार थे और उन्होंने विनोद बंसल के लिए ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ा कि वह अपनी मनमानी कर सकें । विनोद बंसल दरअसल इसी बात से बुरी तरह बौखलाए हुए हैं । 
विनोद बंसल को सबसे तगड़ा झटका यह लगा कि वह विनय भाटिया को कमेटी में कोई जगह नहीं दिलवा सके । वह विनय भाटिया को को-चेयरमैन या को-कन्वेनर बनवाना चाहते थे । को-कन्वेनर पद पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल की नियुक्ति का उन्होंने खूब विरोध किया । इसके लिए उन्होंने यहाँ तक तर्क दिया कि गवर्नर नॉमिनी के रूप में अनूप मित्तल तो प्रोटोकॉल में ही नहीं आते हैं, इसलिए उन्हें किसी भी कमेटी में कैसे रखा जा सकता है । उनके इस तर्क को लेकिन सुना नहीं गया । शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में होने वाले सम्मान समारोह की बागडोर अपने हाथ में रख कर विनोद बंसल दरअसल यह दिखाना/जताना चाहते थे कि अपने डिस्ट्रिक्ट में उनकी अच्छी धाक है । समारोह की बागडोर लेकिन रंजन ढींगरा को मिल जाने से विनोद बंसल को दोहरा झटका लगा - रोटरी में लोगों के बीच एक संदेश तो यह गया कि अपने ही डिस्ट्रिक्ट में विनोद बंसल को तवज्जो नहीं मिल रही है, और दूसरा संदेश यह गया कि डिस्ट्रिक्ट में उनकी बजाये रंजन ढींगरा को तवज्जो है । रंजन ढींगरा भी चूँकि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की दौड़ में हैं, इसलिए रंजन ढींगरा को तवज्जो मिलना - विनोद बंसल के लिए खासी फजीहत वाली स्थिति है । कोढ़ में खाज वाली बात यह हुई कि समारोह में एमओसी (मास्टर ऑफ सेरेमनी) की जिम्मेदारी भी रंजन ढींगरा को मिल गई है । विनोद बंसल इससे और उखड़ गए । एमओसी पद पर उनकी निगाह थी । समारोह की तैयारी से जुड़े डिस्ट्रिक्ट के लीडर्स लेकिन इस बार पूरी तैयारी से थे और विनोद बंसल को कोई बढ़त नहीं देना चाहते थे । उनकी तरफ से सुना गया है कि विनोद बंसल अति-महत्त्वाकांक्षी हैं और सब कुछ पाना चाहते हैं; वह चेयरमैन पद से संतुष्ट नहीं है - वह वास्तव में मैक्सीमम को मिनिमम ही समझते हैं । विनोद बंसल की 'दशा' पर एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर ने एक किस्सा सुनाया : 
'एक महिला अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर समुद्र के किनारे थी, कि एक तेज लहर आई 
और उसके बच्चे को गोद से छीन कर बहा ले गई । महिला ने रोना-चिल्लाना शुरू किया और 
ईश्वर से गुहार लगाना शुरू किया कि तभी एक और तेज लहर आई 
और उसका बच्चा वापस उसकी गोद में आ गया । महिला खुश हुई और ईश्वर को 
शुक्रिया कहने ही वाली थी कि उसने देखा कि बच्चे के सर पर जो टोपी थी, 
वह नहीं है । तब शुक्रिया कहने की बजाये उसने यह कहते हुए
ईश्वर के प्रति नाराजगी दिखाई कि अच्छा, टोपी तूने मार ली ।' 
किस्सा सुना कर वरिष्ठ पूर्व गवर्नर का कहना है कि किस्से वाली महिला की तरह विनोद बंसल को इस बात की संतुष्टि नहीं है कि वह चेयरमैन बने हैं, वह दूसरी 'चीजें' न मिलने से दुखी और नाराज हैं तथा कमेटी के लोगों को कोस रहे हैं । शेखर मेहता के सम्मान समारोह को फेल करने की विनोद बंसल की तैयारी की बातों ने सम्मान समारोह को लेकिन मुसीबत में फँसा दिया है । 

Saturday, August 17, 2019

रोटरी इंटरनेशनल द्वारा प्रेसीडेंट नॉमिनी 'घोषित' होने से पहले ही गोवा में आयोजित हो रही डीजीएन मीट में शेखर मेहता को प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में प्रस्तुत करने तथा 'दिखाने' की कार्रवाई रोटरी की 'व्यवस्था' का मजाक बनाने की कोशिश नहीं है क्या - और जिसमें खुद शेखर मेहता भी शामिल हैं !

नई दिल्ली । गोवा में आयोजित हो रही डीजीएन (डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी) मीट में शेखर मेहता को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में प्रस्तुत करने, 'दिखाने' और उनका स्वागत करने के मामले ने विवाद का रूप ले लिया है । कई वरिष्ठ रोटेरियंस का मानना/कहना है कि शेखर मेहता बड़े और अनुभवी रोटेरियन हैं, और अब तो वह इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होने जा रहे हैं - इसलिए उनसे उम्मीद की जाती है कि वह रोटरी की 'व्यवस्था' का सम्मान करेंगे और कम से कम अपने नाम पर तथा अपने सामने रोटरी की व्यवस्था का मजाक नहीं बनने देंगे । उल्लेखनीय है कि रोटरी की 'व्यवस्था' के अनुसार, शेखर मेहता अभी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी नहीं घोषित हुए हैं; अभी वह नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा सेलेक्ट हुए हैं - व्यवस्था के अनुसार, एक समय सीमा में उनके इस सेलेक्शन को चुनौती दी जा सकती है, चुनौती मिलने पर चुनाव होगा और उस चुनाव में जीतने पर ही वह प्रेसीडेंट नॉमिनी होंगे; चुनौती न मिलने की स्थिति में उक्त समय सीमा पूरी होने पर उन्हें प्रेसीडेंट नॉमिनी घोषित किया जायेगा । रोटरी की यह 'व्यवस्था' प्रत्येक पद के लिए है - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, इंटरनेशनल डायरेक्टर और इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने वाले को इस व्यवस्था से गुजरना ही होता है । गोवा में 16 से 18 अगस्त के बीच आयोजित हो रही डीजीएन मीट में शामिल होने वाले विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या इसी व्यवस्था से गुजर कर अपने पदों पर पहुँचे हैं, लेकिन लगता है कि 'पूरे कुएँ में ही भाँग पड़ी हुई है', इसलिए किसी ने भी इस बात की न परवाह की और न जरूरत समझी कि उन्हें रोटरी की व्यवस्था का पालन करना चाहिए और उसके प्रति सम्मान दिखाना चाहिए । 'पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं' वाली कहावत को याद करते हुए सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं कि रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी के रूप में जो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अपने पहले ही कार्यक्रम में रोटरी की व्यवस्था का मजाक बना बैठे हों, वह अपने गवर्नर-काल में कैसे कैसे और क्या क्या गुल खिलायेंगे ?
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी तथा इंटरेनशनल डायरेक्टर ने क्या किया, यह तो चलो छोड़ो भी - खुद शेखर मेहता ने रोटरी की व्यवस्था के उल्लंघन होने पर ध्यान नहीं दिया, इस पर वरिष्ठ रोटेरियंस को बड़ी हैरानी है । उन्हें हैरानी इसलिए भी है कि यह 'हरकत' शेखर मेहता के प्रेसीडेंट नॉमिनी बनने की प्रक्रिया में मुसीबत भी खड़ी कर सकती है । रोटरी इंटरनेशनल के इतिहास में एक बार ऐसा हो चुका है कि नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा सेलेक्ट होने के बाद करीब करीब इसी तरह की हरकतों के चलते एक अधिकृत उम्मीदवार को सचमुच प्रेसीडेंट नॉमिनी होने से रोक दिया गया था । उसी मामले का संज्ञान लेते हुए पिछले वर्ष, सुशील गुप्ता के प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होने के बाद बहुत सावधानी रखी गई थी कि व्यवस्था के अनुसार, प्रक्रिया पूरी होने तक सुशील गुप्ता को प्रेसीडेंट नॉमिनी न कहा जाए और उनके चयन पर ज्यादा जोश न दिखाया जाए । लेकिन शेखर मेहता के मामले में वैसी सावधानी नहीं दिखाई जा रही है, और इसलिए उनके प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होते ही तरह तरह के नाटक देखने को मिल रहे हैं । शेखर मेहता के प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होते ही किसी ने दावा करना शुरू कर दिया कि अब शेखर मेहता उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवा/बनवा देंगे; तो किसी ने बताना/दिखाना शुरू किया कि रोटरी फाउंडेशन के पैसों में घपलेबाजी के आरोप में उन्हें जो सजा मिली है, शेखर मेहता उसे माफ करवा देंगे । इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या तथा विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी की देखरेख में होने वाले कार्यक्रम में प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही शेखर मेहता को प्रेसीडेंट नॉमिनी घोषित करने का करतब कर दिया । इस तरह देखने में आ रहा है कि शेखर मेहता के प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होते ही अपने अपने स्वार्थ पूरे करने के लिए बड़े बड़े पदों पर रहने वाले तथा बड़े पदों पर पहुँचने की कोशिश में लगे लोग 'सैंया भये कोतवाल' की 'फील' लेने लगे हैं और उसकी धुन पर नाचने लगे हैं ।
वरिष्ठ रोटेरियंस का मानना और कहना है कि दूसरे लोग क्या कर रहे हैं, इसे यदि जाने भी दें; तो देखने की बात यह है कि खुद शेखर मेहता क्या कर रहे हैं और क्या होने दे रहे हैं ? उन्हें तो कम से कम रोटरी की व्यवस्था का पालन होने/करने पर ध्यान देना चाहिए - तब तो और भी, जबकि अभी प्रेसीडेंट नॉमिनी उन्हें घोषित होना है । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद के लिए देश के रूप में भारत की किस्मत और बदकिस्मती लगता है कि आगे-पीछे ही चल रही हैं - किस्मत की बात रही कि सुशील गुप्ता के रूप में नौ वर्ष बाद भारत को रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद पर प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलना तय हुआ, लेकिन बदकिस्मती ने तेजी से झपट्टा मारा और बीमारी के चलते सुशील गुप्ता को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा और भारत से वह मौका छिन गया; शेखर मेहता के रूप में किस्मत ने एक बार फिर भारत के लिए अनुकूल हालात बनाए हैं । लोगों का मानना और कहना है कि सुशील गुप्ता के मामले में खुशियों ने जितनी जल्दी उदासी का चोला पहन लिया था, उससे सबक लेकर शेखर मेहता को सावधानी बरतने की जरूरत है, और कम से कम इतनी सावधानी रखने की जरूरत तो है ही कि अपनी तरफ से वह बदकिस्मती को दरवाजा खटखटाने का मौका न दें । शेखर मेहता के प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होने की बात कई लोगों को हजम नहीं हो रही है, इसलिए शेखर मेहता को और भी सावधान रहने की जरूरत है - लेकिन गोवा में डीजीएन मीट में जो हुआ है; रोटरी इंटरनेशनल द्वारा प्रेसीडेंट नॉमिनी घोषित होने से पहले ही शेखर मेहता को प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में प्रस्तुत करने तथा 'दिखाने' की जो कार्रवाई हुई है, उसे उनके विरोधियों का मौका देने के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । 

Thursday, August 8, 2019

रोटरी इंटरनेशनल के प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए सेलेक्ट हुए शेखर मेहता के दाएँ और बाएँ खड़े होकर डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व गवर्नर अनिल अग्रवाल की रोटरी इंटरनेशनल से 'लूटे' गए करीब 20 लाख रुपयों को वापस किये बिना ही सजा मुक्त होने की तरकीब सफल हो सकेगी क्या ?

जयपुर । शेखर मेहता को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद की कुर्सी अभी मिली नहीं है, लेकिन स्वार्थी व अवसरवादी रोटेरियंस ने उन्हें घेरना, उनके नजदीक 'दिखने' और उनसे फायदा उठाने के प्रयास तेज कर दिए हैं । नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने के बाद अपने घर - कोलकाता लौटे शेखर मेहता का हवाई अड्डे पर स्वागत करने वालों, तथा उनके नजदीक खड़े होकर फोटो खिंचवाने वाले लोगों में डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल को अतिरिक्त रूप से सक्रिय देख कर लोगों को लगने लगा है कि शेखर मेहता  और उनके नजदीकी यदि सावधान नहीं रहे तो रोटरी के स्वार्थी, बेईमान और रोटरी के पैसों में घपलेबाजी करने वाले लोग उनके चारों तरफ दिखेंगे और यह बात खुद शेखर मेहता तथा उनकी साख के लिए बहुत ही घातक होगी । कई लोगों को शेखर मेहता को इस्तेमाल करने की चालबाजी के अनिल अग्रवाल के 'साहस' पर भी हैरानी हुई; उनका कहना है कि रोटरी फाउंडेशन के करीब 20 लाख रुपयों में घपलेबाजी करने की हरकत के उजागर होने तथा उसके लिए रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाने - और उसके बाद भी रोटरी फाउंडेशन के पैसों को वापस करने में तरह तरह की बहानेबाजी के साथ आनाकानी करने के बावजूद अनिल अग्रवाल की आखिर हिम्मत कैसे हुई कि वह शेखर मेहता का स्वागत करने वालों में शामिल हों, और आगे बढ़ बढ़ कर कभी उनके दाएँ खड़े होकर तो कभी बाएँ खड़े होकर फोटो खिंचवाएँ ?
यह प्रकरण लेकिन अनिल अग्रवाल की हिम्मत से ज्यादा चालाकी को 'दिखाता' है । हिम्मत तो अनिल अग्रवाल रोटरी फाउंडेशन का करीब 20 लाख रुपया हड़प कर पहले ही दिखा चुके हैं । और यह भी उनकी हिम्मत का ही सुबूत है कि पकड़े जाने और सजा पाने के बाद भी, रोटरी के बड़े पदाधिकारियों व नेताओं से लगातार झूठ पर झूठ बोलते हुए और उन्हें तरह तरह से झाँसा देते हुए वह यह कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें इकन्नी भी वापस न करना पड़े और उनकी सजा भी माफ हो जाए । दरअसल इसी कोशिश में उन्होंने चालाकी यह दिखाई है कि वह अपने आप को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के नजदीक 'दिखाएँ', ताकि रोटरी इंटरनेशनल से सजायाफ्ता होने से होने वाले 'नुकसान' से बच सकें । कोलकाता हवाई अड्डे पर शेखर मेहता का स्वागत होने के मौके पर शेखर मेहता के कभी दाएँ तो कभी बाएँ खड़े होकर खिंचवाई गई तस्वीरों को अपने नजदीकियों को भेज/दिखा कर अनिल अग्रवाल ने दावा किया है कि बस अब शेखर मेहता प्रेसीडेंट होंगे और उनका मामला निपट जायेगा तथा उन्हें क्लीन चिट मिल जाएगी । उनके नजदीकी तथा दूसरे लोग सिर्फ तस्वीरों से ही उनके दावे पर यकीन न करें, इसलिए अनिल अग्रवाल ने इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी का नाम भी लिया और बताया कि कमल सांघवी ने ही उन्हें फोन करके कोलकाता हवाई अड्डे के कार्यक्रम के बारे में बताया था और मौके पर उपस्थित होने/रहने की सलाह दी थी । 
कमल सांघवी का नाम लेकर अनिल अग्रवाल ने दरअसल अपने नजदीकियों को विश्वास दिलाने का प्रयास किया है कि शेखर मेहता के खासमखास कमल सांघवी उनके बड़े खास हैं और कमल सांघवी के कारण ही वह कोलकाता हवाई अड्डे पर शेखर मेहता का स्वागत करने पहुँचे और कमल सांघवी ही शेखर मेहता से उनका काम करवायेंगे । अनिल अग्रवाल के नजदीकियों का इन पंक्तियों के लेखक से कहना/बताना लेकिन यह है कि अनिल अग्रवाल दो दिवसीय कोलकाता फैशन एक्सपो 2019 में 'केडी' के स्टॉल पर उपस्थित रहने के लिए कोलकाता में थे, और उसी दौरान उन्हें शेखर मेहता के कोलकाता लौटने का प्रोग्राम पता चला तो उन्होंने 'बहती गंगा में हाथ धोने' का जुगाड़ कर लिया । अनिल अग्रवाल असल में रोटरी फाउंडेशन के पैसों की घपलेबाजी के मामले में कुछेक बड़े पदाधिकारियों व नेताओं की सिफारिश पर 'सख्त' सजा पाने से बच गए हैं; इसलिए उन्हें लगता है कि उन्हें अब यदि कोई तगड़ी सिफारिश मिल जाए तो जो सजा उन्हें मिली भी है, उससे भी वह बच सकते हैं । शेखर मेहता के रूप में उन्हें वह 'बड़ी सिफारिश' नजर आ रही है । रोटरी के कुछेक बड़े पदाधिकारियों व नेताओं ने उन्हें समझाया है कि वह यदि रोटरी फाउंडेशन के लूटे हुए 20 लाख रुपए लौटा दें, तो उनकी सजा माफ करवाई जा सकती है । अनिल अग्रवाल लेकिन इस जुगाड़ में हैं कि उन्हें रोटरी फाउंडेशन के पैसे भी न लौटाने पड़ें, और उनकी सजा भी माफ हो जाए । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होकर लौटे शेखर मेहता के दोनों तरफ खड़े होकर फोटो खिंचवा कर और लोगों को उसे दिखा कर अनिल अग्रवाल ने वास्तव में यह दिखाने/जताने की कोशिश की है कि रोटरी फाउंडेशन को पैसे वापस किए बिना ही, शेखर मेहता जल्दी ही उनकी सजा माफ करवा देंगे ।
मजे की बात यह है कि दो दिन पहले ही, शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होने की जानकारी मिलते ही वर्ष 2013-14 में अनिल अग्रवाल के फेलो गवर्नर रहे विनोद बंसल की तरफ से घोषणा सुनी गई थी कि शेखर मेहता अब उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने का काम करेंगे । इस तरह, लगता है कि शेखर मेहता को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होते ही दो काम तो तुरंत से असाइन हो गए हैं - एक तो उन्हें डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व गवर्नर विनोद बंसल को इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाना/बनवाना है, और दूसरा रोटरी फाउंडेशन के पैसों की लूट के मामले में रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाए डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व गवर्नर अनिल अग्रवाल को बरी करवाना है । देखना दिलचस्प होगा कि शेखर मेहता को अभी और क्या क्या काम मिलते हैं ?

Tuesday, August 6, 2019

रोटरी इंटरनेशनल के वर्ष 2021-22 के प्रेसीडेंट पद पर शेखर मेहता के चुने जाने में विनोद बंसल को अपना इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना 'पक्का' लग रहा है; उन्हें विश्वास है कि दूसरे बड़े नेताओं की तरह शेखर मेहता उन्हें धोखा नहीं देंगे और उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने की जिम्मेदारी निभायेंगे

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल के वर्ष 2021-22 के प्रेसीडेंट पद के लिए शेखर मेहता के अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने की जानकारी मिलने के बाद से विनोद बंसल ने दावा करना शुरू कर दिया है कि अब उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर चुने जाने से कोई नहीं रोक सकता है । विनोद बंसल ने अपने नजदीकियों से कहना शुरू कर दिया है कि अब कोई चाहें कुछ भी करे या कहे, उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने से नहीं रोक पायेगा । विनोद बंसल का कहना है कि शेखर मेहता के साथ उनके जैसे संबंध हैं, उसके चलते उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने/बनवाने की जिम्मेदारी अब वह खुद लेंगे -  और जब इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में शेखर मेहता उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने/बनवाने की जिम्मेदारी लेंगे, तो फिर कौन उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने से रोक सकेगा ? विनोद बंसल ने अपने नजदीकियों को बताया है कि शेखर मेहता से उनकी उस समय से दोस्ती है, जब वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी थे और शेखर मेहता इंटरनेशनल डायरेक्टर थे । वर्ष 2011 में शेखर मेहता ने कोलकाता में जो रोटरी इंस्टीट्यूट करवाया था, उसके लिए उन्होंने मोटी रकम की स्पॉन्सरशिप दिलवाई थी; जिसके चलते शेखर मेहता उनसे काफी प्रभावित हुए थे और फिर दोनों के संबंध मजबूत होते गए । विनोद बंसल ने अपने नजदीकियों को बताया है कि शेखर मेहता जब भी पारिवारिक कारणों से और या रोटरी के काम से दिल्ली आते हैं, तो उनसे जरूर मिलते हैं । ऐसे में, स्वाभाविक ही है कि शेखर मेहता इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में विनोद बंसल की इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उम्मीदवारी का झंडा उठा लें और उन्हें चुनवा/बनवा कर ही मानें ।
विनोद बंसल का कहना/बताना है कि शेखर मेहता ने जिस तरह से कमल सांघवी को इंटरनेशनल डायरेक्टर बनवाया/चुनवाया है, वैसे ही वह उन्हें भी चुनवाएँगे/बनवाएँगे । उल्लेखनीय है कि यूँ तो विनोद बंसल के रोटरी के हर बड़े नेता/पदाधिकारी के साथ अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन उनके लिए मुसीबत की बात यह रही कि मौकों पर तथा जरूरत पड़ने पर कोई भी उनके काम नहीं आया । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर पीटी प्रभाकर के साथ उनके बड़े नजदीकी संबंध रहे हैं; पीटी प्रभाकर के रोटरी इंस्टीट्यूट को स्पॉन्सर करने की जिम्मेदारी लेने को वह तैयार थे, और बदले में वह इंस्टीट्यूट के चेयरमैन बनना चाहते थे । पीटी प्रभाकर दिल्ली में इंस्टीट्यूट करने के लिए तैयार भी हो गए थे, लेकिन विनोद बंसल के डिस्ट्रिक्ट के गवर्नर्स ने अड़ंगा डाल दिया कि विनोद बंसल यदि चेयरमैन होंगे तो वह इंस्टीट्यूट से नहीं 'जुड़ेंगे' - विनोद बंसल ने पीटी प्रभाकर को बहुत समझाया कि उन्हें किसी के सहयोग/समर्थन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, वह अकेले ही सब संभाल लेंगे, लेकिन पीटी प्रभाकर ने उनकी एक नहीं सुनी और सिर्फ इतना ही नहीं कि वह इंस्टीट्यूट चेन्नई ले गए, उन्होंने विनोद बंसल को चेयरमैन भी नहीं बनाया । इसके बाद, गुलाम वाहनवती के रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी बनने से खाली हुई आरआरएफसी (रीजनल रोटरी फाउंडेशन को-ऑर्डिनेटर) की कुर्सी पाने के लिए विनोद बंसल ने पीटी प्रभाकर, बासकर चॉकलिंगम, मनोज देसाई, शेखर मेहता से लेकर सुशील गुप्ता तक की मदद लेने की कोशिश लेकिन उनकी दाल गली नहीं । पिछले कुछ समय में वह सुशील गुप्ता के काफी नजदीक पहुँचे, लेकिन यहाँ भी उन्होंने पाया कि खासी नजदीकियत के बावजूद सुशील गुप्ता जब कुछ देने/दिलवाने की 'हैसियत' में आते हैं, तो उन्हें भूल जाते हैं और तब वह या तो अशोक गुप्ता को याद करते हैं और या रंजन ढींगरा को । सुशील गुप्ता की तरफ से निराश होने के बाद विनोद बंसल ने पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से तार जोड़े, लेकिन वहाँ भी उन्होंने केआर रवींद्रन को उनकी बजाए आशीष घोष को ज्यादा तवज्जो देते हुए देखा/पाया ।
हर तरफ से धोखा खाए विनोद बंसल को यकीन है कि शेखर मेहता उनके साथ दूसरों की तरह धोखा नहीं करेंगे । ऐसा भी नहीं है कि दूसरों ने विनोद बंसल को कुछ नहीं दिलवाया; विनोद बंसल को बहुत कुछ मिला भी है - विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में आरआई रिप्रेजेंटेटिव बनने का उन्हें अवसर मिला; लेकिन यह अवसर तो किसी को भी मिल जाता है, इसलिए विनोद बंसल इससे संतुष्ट नहीं हुए । इंटरनेशनल में उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी भी मिली है, लेकिन वह जिम्मेदारी ऐसी है कि रोटेरियंस को उसके बारे में कुछ पता ही नहीं है; उन्होंने कई बार लोगों को बताने की कोशिश भी की, लेकिन लोगों की समझ में कुछ आया नहीं । उन्हें इस बात का बड़ा अफसोस रहा कि उन्हें रोटरी इंटरनेशनल में इतना बड़ा पद मिला, और किसी ने उन्हें बधाई भी नहीं दी । उन्हें रीजनल लीडर्स ग्रुप में शामिल होने का मौका भी मिला, जहाँ उन्हें एंडाउमेंट एडवाइजर का पद मिला है । यह पद तो उन्होंने ले लिया, ताकि इसके बहाने से देश के डिस्ट्रिक्ट्स के डायरेक्टरी में नाम/फोटो छपने का जुगाड़ हो जाए, लेकिन इस पद की जिम्मेदारी निभाने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है । हद की, मजाक की और विडंबना की बात यह है कि विनोद बंसल के क्लब ने रोटरी फाउंडेशन में यूँ तो करीब सवा दो लाख डॉलर दिए हैं, लेकिन एंडाउमेंट फंड में इकन्नी भी नहीं दी है । समझा जा सकता है कि एडवाइजर के रूप में विनोद बंसल जब अपने ही क्लब को, और इस तरह जब अपने आप को ही एडवाइज नहीं करना चाहते हैं, तो फिर दूसरों को वह क्या और क्यों करेंगे ? विनोद बंसल को दरअसल रोटरी में ऐसा पद चाहिए, रोटेरियंस के बीच जिसका 'भौकाल' बने - और इसीलिए उन्होंने मिली जिम्मेदारियों को निभाने की बजाये अपना सारा ध्यान इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में लगाया हुआ है । यहाँ लेकिन उन्हें अपने ही डिस्ट्रिक्ट में मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है । लेकिन शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी बनने में उन्हें अपनी सारी मुसीबतें दूर होती हुई नजर आ रही हैं । इसीलिए उन्होंने अपने नजदीकियों को आश्वस्त किया है कि अब फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है, शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी बनने के बाद अब उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने से कोई नहीं रोक सकेगा । 

Monday, August 5, 2019

रोटरी इंटरनेशनल के वर्ष 2021-22 के प्रेसीडेंट पद पर शेखर मेहता के चुने जाने की पटकथा, भारत विरोधी व सुशील गुप्ता विरोधी के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले एक पूर्व प्रेसीडेंट की सुशील गुप्ता के साथ जुलाई के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में हुई एक गुपचुप मुलाकात में ही लिख दी गई थी क्या ?

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल के वर्ष 2021-22 के प्रेसीडेंट पद के लिए शेखर मेहता के अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने से सुशील गुप्ता विरोधी रोटेरियंस को खासा तगड़ा झटका लगा है, और 26 अप्रैल को सुशील गुप्ता के इस्तीफे के बाद फूला हुआ उनका जोश का गुब्बारा एक बार फिर से पिचक गया है । शेखर मेहता को सुशील गुप्ता के खेमे का 'आदमी' तो माना ही जाता है, इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद पर शेखर मेहता की जीत को सुशील गुप्ता के ऑरा (आभामंडल) की जीत के रूप में भी देखा/पहचाना जा रहा है । इससे पहले सुशील गुप्ता के इस्तीफा देने से खाली हुआ वर्ष 2020-21 का प्रेसीडेंट पद होल्गर नेक को मिल जाने में भी सुशील गुप्ता की भूमिका को देखा/पहचाना गया था । उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद की चुनावी दौड़ में होल्गर नेक व शेखर मेहता अभी कहीं नजर नहीं आ रहे थे । होल्गर नेक को पर्याप्त समर्थन नहीं था, और शेखर मेहता के लिए सुशील गुप्ता के 'पूर्व प्रेसीडेंट' हो जाने तक इस बारे में सोचना भी असंभव था । शेखर मेहता तो अभी करीब तीन महीने पहले, सुशील गुप्ता का इस्तीफा होने के बाद उम्मीदवार बने थे । तीन महीने पहले कोई अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करे, और प्रेसीडेंट चुन लिया जाए - रोटरी इंटरनेशनल के 114 वर्षों के इतिहास में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ । शेखर मेहता ने यह एक नया इतिहास रचा है, तो इसके पीछे रोटरी इंटरनेशनल में बने सुशील गुप्ता के ऑरा को ही देखा/पहचाना जा रहा है - और इस बात ने सुशील गुप्ता के विरोधियों और अवसरवादियों की 'खुशियों' पर जैसे ताला जड़ दिया है ।
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य कारणों से सुशील गुप्ता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद से इस्तीफा देने के बाद सुशील गुप्ता के विरोधी नेताओं के मन बड़े गदगद थे । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने के बाद सुशील गुप्ता से नजदीकियाँ बनाने और 'दिखाने' वाले महत्त्वाकांक्षी नेताओं ने - जिनमें उनके डिस्ट्रिक्ट के महत्त्वाकांक्षी नेता भी हैं - उनके इस्तीफा देते ही रंग बदलना शुरू कर दिया था । सुशील गुप्ता के विरोधियों और अवसरवादी नेताओं ने मान/समझ लिया था कि रोटरी इंटरनेशनल की 'व्यवस्था' तथा उसकी राजनीति में सुशील गुप्ता का प्रभाव खत्म हो गया है, और इसलिए उन्हें सुशील गुप्ता की परवाह करने की जरूरत नहीं है । लेकिन पहले होल्गर नेक और अब शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट चुने जाने ने उनकी 'समझ' पर पत्थर गिरा दिए हैं । होल्गर नेक के बाद शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट चुने जाने ने सुशील गुप्ता के विरोधियों और अवसरवादी नेताओं को तगड़ा करंट दिया है; दरअसल सुशील गुप्ता के प्रभाव को खत्म हुआ मान कर उन्होंने रोटरी में अपने जो जो मंसूबे बनाए थे, वह सब उन्हें फेल होते हुए दिख रहे हैं । होल्गर नेक के बाद शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट चुने जाने से उन्हें यह मुश्किल लग रहा है कि सुशील गुप्ता की 'अनुपस्थिति' का वह कोई फायदा उठा सकेंगे । इससे दरअसल साबित हुआ है कि सुशील गुप्ता भले ही बीमार हों, और बीमारी के चलते वह प्रेसीडेंट नॉमिनी का पद छोड़ने के लिए मजबूर हुए हों - लेकिन रोटरी में उनका प्रभाव पहले जैसा ही बना हुआ है; और यह बात रोटरी में उनके विरोधियों तथा अवसरवादी महत्त्वाकांक्षी नेताओं के लिए काफी मुसीबतभरी है ।
शेखर मेहता की जीत और उसमें सुशील गुप्ता के 'असर' के एक प्रमुख कारण के रूप में रोटरी इंटरनेशनल में भारत के बढ़ते दबदबे को भी देखा/पहचाना जा रहा है । रोटरी इंटरनेशनल की सदस्यता तथा रोटरी फाउंडेशन में हिस्सेदारी के मामले में भारत की हैसियत जिस तरह से बढ़ रही है, उसे देखते हुए रोटरी इंटरनेशनल को 'नियंत्रित' करने वाले लोगों के लिए भारत के नेताओं की उपेक्षा करना और उन्हें अलग-थलग रखना अब मुश्किल होता जा रहा है । दक्षिण एशिया के जिन रोटरी नेताओं व पूर्व प्रेसीडेंट्स को भारत विरोधी व सुशील गुप्ता विरोधी के रूप में देखा/पहचाना जाता रहा है, उन्होंने भी वस्तुस्थिति को समझा/पहचाना है और अपने विरोध के स्वर को नीचा किया है । इसी संदर्भ में भारत विरोधी व सुशील गुप्ता विरोधी के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले एक पूर्व प्रेसीडेंट की जुलाई के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में हुई एक गुपचुप मुलाकात को महत्त्वपूर्ण घटनाचक्र के रूप में देखा/पहचाना गया । सुशील गुप्ता के नजदीकियों का दावा है कि उस गुपचुप मुलाकात में ही शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट चुने जाने की पटकथा लिख दी गई थी ।

Sunday, August 4, 2019

रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद के लिए देर से उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के चलते शेखर मेहता के लिए 5 अगस्त को होने वाला चुनाव आसान तो नहीं है, लेकिन सुशील गुप्ता के इस्तीफे से बनी हमदर्दीपूर्ण स्थिति उनका काम बना भी सकती है

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल के वर्ष 2021-22 के प्रेसीडेंट पद के लिए नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग में शेखर मेहता की कामयाबी के लिए उनके समर्थकों व शुभचिंतकों ने भले ही फिंगर्स क्रॉस कर ली हों, लेकिन समर्थक व शुभचिंतक भी जानते हैं कि यह चुनाव कोई आसान चुनाव नहीं है । वर्ष 2021-22 के प्रेसीडेंट पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन/चुनाव करने के लिए 17 सदस्यीय नोमीनेटिंग कमेटी की कल, यानि 5 अगस्त को बैठक हो रही है । वर्ष 2021-22 के प्रेसीडेंट पद के लिए आए नामांकनों में से ग्यारह नाम चुने गए हैं, जिनमें शेखर मेहता का नाम भी है । शेखर मेहता को अन्य दस उम्मीदवारों के साथ कल नोमीनेटिंग कमेटी के सदस्यों के सामने साक्षात्कार के लिए उपस्थित होना है । नोमीनेटिंग कमेटी के 17 सदस्यों में पीटी प्रभाकर तथा एमके पांडुरंगा सेट्टी के रूप में दो सदस्य भारत के हैं । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष सुशील गुप्ता को वर्ष 2020-21 के प्रेसीडेंट के रूप में चुनने वाली नोमीनेटिंग कमेटी में शेखर मेहता खुद थे, और इस नाते उम्मीद की जाती है कि नोमीनेटिंग कमेटी में फैसले पर कैसे पहुँचा जाता है, उसके मैकेनिज्म से शेखर मेहता परिचित होंगे ही - और उसका फायदा वह अपनी उम्मीदवारी के लिए उठा सकते हैं । शेखर मेहता के समर्थकों व शुभचिंतकों को यह भी उम्मीद है कि सुशील गुप्ता के इस्तीफा देने के चलते इंटरनेशनल प्रेसीडेंट का चुनाव करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं के बीच सुशील गुप्ता और भारत के प्रति जो हमदर्दी बनी होगी, उसका फायदा भी शेखर मेहता को मिल सकता है ।
हालाँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के चयन/चुनाव में होने वाली राजनीति से परिचित बड़े नेताओं का मानना/कहना यह भी है कि हालात तो शेखर मेहता की उम्मीदवारी के अनुकूल हैं, लेकिन समस्या की बात सिर्फ यह है कि अनुकूल हालात का लाभ उठाने के लिए जिस तरह की 'तैयारी' की जरूरत होती है, शेखर मेहता को उसके लिए पर्याप्त समय ही नहीं मिला - और इसलिए उनकी तैयारी थोड़ा कमजोर 'दिखती' है । दरअसल, किसी और को क्या - खुद शेखर मेहता को यह पता नहीं था कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद की चुनावी दौड़ में उन्हें इतना जल्दी कूदना पड़ जायेगा । अभी अगले रोटरी वर्ष में तो सुशील गुप्ता को प्रेसीडेंट बनना था; उसके तीन-चार वर्ष बाद भारत के उम्मीदवारों को अपने प्रयास शुरू करने थे । वह तो 26 अप्रैल को अचानक व अप्रत्याशित रूप से सुशील गुप्ता के इस्तीफा दे देने के बाद बनी स्थिति में शेखर मेहता को अभी ही अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए आनन-फानन में तैयार होना पड़ा । ऐसे में स्वाभाविक ही है कि जो उम्मीदवार आठ/नौ महीने पहले से अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में समीकरण/गठजोड़ बना रहे थे, उनकी तुलना में शेखर मेहता की तैयारी कमजोर ही होगी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में देर से अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने वाले उम्मीदवार को जैसी/जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, ठीक वैसी ही चुनौतियाँ इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद के चुनाव के संदर्भ में शेखर मेहता के सामने हैं - और ऐसे में जाहिर है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के लिए चुने जाने का मामला उनके लिए आसान नहीं है ।
शेखर मेहता के कुछेक नजदीकियों का इन पंक्तियों के लेखक से कहना/बताना यह भी है कि शेखर मेहता ने अपनी तैयारी को दो स्तरों पर केंद्रित किया हुआ है, और वह चुनावी खिलाड़ियों को नाराज करने की हद तक जा कर इस बार ही कामयाब होने के लिए अपनी कोशिशें नहीं करेंगे । पिछले रोटरी वर्ष में सुशील गुप्ता को अधिकृत उम्मीदवार चुनवाने के लिए नोमीनेटिंग कमेटी में जिस तरह की धींगामुश्ती हुई थी, शेखर मेहता अपनी उम्मीदवारी को लेकर उस स्तर पर जाने की कोशिश नहीं करेंगे; उनका प्रयास होगा कि इस बार यदि उनका काम आसानी से नहीं बनता है, तो वह अगले वर्ष के लिए अपना मौका बनाएँ । इसी बार कामयाब होने के लिए शेखर मेहता ऐसा कोई काम नहीं करना चाहेंगे, जिससे खिलाड़ी नेता खफा हों - और उनके लिए आगे का रास्ता मुश्किल बने । दरअसल माना/समझा यह जा रहा है कि शेखर मेहता की पहली कोशिश तो यह है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट का चुनाव करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं की गुडबुक में वह शामिल हों, ताकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के गंभीर उम्मीदवारों में उनकी पहचान व गिनती होने लगे - और उसके चलते इस बार नहीं तो अगली बार उनके लिए इंटरनेशनल प्रेसीडेंट चुने जाने का मौका बन सके । शेखर मेहता के नजदीकियों का यह भी कहना/बताना है कि इस बार के चुनाव में सुशील गुप्ता की भी भूमिका होनी थी, और इस बार के चुनावी समीकरणों में उनकी भूमिका का भी महत्त्वपूर्ण हस्तक्षेप था - जो उनके इस्तीफा दे देने से गड़बड़ा तो गया है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है । इसलिए एक संभावना यह भी है कि सुशील गुप्ता के सक्रिय न रहने के बावजूद उनका जो प्रभाव इस बार के चुनावी समीकरणों पर है, उसका फायदा हो सकता है कि शेखर मेहता को मिल जाए । क्या होगा, यह तो भारतीय समयानुसार 6 अगस्त की सुबह को ही पता चलेगा; लेकिन शेखर मेहता की उम्मीदवारी के चलते इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद का चुनाव भारतीय रोटेरियंस के लिए दिलचस्पी का विषय जरूर बन गया है ।