Showing posts with label KAMAL SANGHVI. Show all posts
Showing posts with label KAMAL SANGHVI. Show all posts

Tuesday, November 3, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में जितेंद्र ढींगरा के नेतृत्व वाले मौजूदा सत्ताधारियों ने अपने विरोधियों को चुप करने तथा बदनाम करने के लिए राजा साबू के नेतृत्व वाले पिछले सत्ताधारियों जैसे हथकंडे अपना कर विडंबना, ट्रैजिडी और कॉमेडी का नजारा पेश किया हुआ है

कुरुक्षेत्र । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई में सत्ता खेमे की पक्षपातपूर्ण मनमानियों और बेईमानियों को लेकर होने वाली शिकायतें रोटरी इंटरनेशनल के बड़े और प्रमुख पदाधिकारियों तक जा पहुँची हैं, और इस तरफ डिस्ट्रिक्ट की चुनावी लड़ाई एक बड़ा मुद्दा बन गया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार पंकज डडवाल के क्लब - रोटरी क्लब शिमला मिडटाऊन के प्रेसीडेंट अनिल सूद ने पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमेश बजाज को पत्र लिख कर पक्षपातपूर्ण मनमानियों और बेईमानियों पर लगाम लगाने का अनुरोध किया था; लेकिन अपने अनुरोध पर उन्हें जब कोई कार्रवाई होते हुए नहीं दिखी तो उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों से लेकर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर्स भरत पांड्या व  कमल सांघवी को अपनी शिकायतों से अवगत कराते हुए पत्र लिखे/भेजे और उनसे उचित कार्रवाई का अनुरोध किया । इस घटना ने डिस्ट्रिक्ट में इतिहास को ट्रैजिक रूप में दोहराने का काम किया है । अभी कोई चार/पाँच वर्ष पहले ही, आज के सत्ताधारी तब के सत्ताधारियों की मनमानियों व बेईमानियों की शिकायत किया करते थे; राजा साबू के नेतृत्व वाले तब के सत्ताधारी बड़े अहंकार के साथ दावा किया करते थे कि रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों तक उनकी चूँकि सीधी पहुँच है, इसलिए उनके खिलाफ होने वाली शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी; विडंबना और ट्रैजिडी यह है कि आज के सत्ताधारी भी वही 'भाषा' बोल रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि पंकज डडवाल के समर्थक रोटरी इंटरनेशनल के किसी भी पदाधिकारी से चाहें जो शिकायत कर लें, उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी ।
इसी दावे के भरोसे, निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा ने घोषणा की है कि अभी वह अपने बेटे की शादी के आयोजन में व्यस्त थे, लेकिन अब वह जल्दी ही 'बिग गेट टुगेदर' आयोजित करेंगे । उनकी इस घोषणा पर उनके उम्मीदवार अरुण मोंगिया खुशी जता रहे हैं । पिछले दिनों पहले सहारनपुर में और फिर अंबाला में अरुण मोंगिया की उम्मीदवारी के समर्थन में वोट जुटाने के उद्देश्य से मीटिंग/पार्टी की गई, जिसमें जितेंद्र ढींगरा के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अजय मदान और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी नवीन गुलाटी भी शामिल हुए । किसी ने इसे लेकर आपत्ति की, तो उसे जबाव दिया गया कि जितेंद्र ढींगरा अपने बेटे की शादी में भीड़भाड़ से बचने के लिए लोगों को बुला नहीं सके थे, इसलिए वह अब लोगों को पार्टी दे रहे हैं । इस पर लोगों के बीच सुनने को मिला कि अपने बेटे की शादी की पार्टी लोगों को अपने घर बुला कर दी जाती है, जितेंद्र ढींगरा ने अलग रिवाज शुरू किया है, वह लोगों के घर जाकर पार्टी दे रहे हैं । जाहिर है कि उनके तर्क को डिस्ट्रिक्ट में लोग हजम नहीं कर पा रहे हैं, और इसे लोगों की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश के रूप में ही देखा/पहचाना जा रहा है ।
डिस्ट्रिक्ट में इतिहास अपने आप को सिर्फ ट्रैजिक रूप में ही नहीं दोहरा रहा है, बल्कि कुछेक मामलों में वह कॉमेडी भी बन गया है । लोगों को याद है कि डेविड हिल्टन के गवर्नर-वर्ष में टीके रूबी के पक्ष में आयोजित की गई मीटिंग में शामिल होने के 'अपराध' में डिस्ट्रिक्ट टीम के 12 प्रमुख सदस्यों को टीम से निलंबित कर दिया गया था, उसी तरह की 'मानसिकता' को प्रकट करते हुए पंकज डडवाल की उम्मीदवारी के एक समर्थक - रोटरी क्लब सोलन सिटी के पूर्व प्रेसीडेंट वीरेंद्र अग्रवाल को वाट्स-ऐप ग्रुपों से निकाल दिया गया है । वीरेंद्र अग्रवाल का 'अपराध' ठीक वही है, जो डेविड हिल्टन के गवर्नर-वर्ष में टीके रूबी और उन 12 सदस्यों का था - सत्ताधारियों की पक्षपातपूर्ण मनमानियों व बेईमानियों का विरोध करना । डेविड हिल्टन की डिस्ट्रिक्ट टीम से 12 सदस्यों को निकालने का कोई कारण नहीं बताया गया था, वीरेंद्र अग्रवाल को वाट्स-ऐप ग्रुपों से निकालने का भी कोई कारण नहीं बताया गया है । एक ग्रुप में एक सदस्य ने जितेंद्र ढींगरा से कारण पूछा तो जितेंद्र ढींगरा ने उन्हें जबाव दिया कि वह फोन पर उन्हें कारण बताते हैं । फोन पर क्यों ? वीरेंद्र अग्रवाल को आपने ग्रुपों से निकाला, यह बात सभी को पता है - तो कारण भी सभी को पता होना चाहिए ! कारण आप किसी के कान में क्यों बतायेंगे ? इस रवैये पर हर किसी को हैरानी है, और आरोप सुने जा रहे हैं कि कारण सार्वजनिक रूप से बताएंगे, तो हो सकता है कि वह झूठे साबित हों !
वीरेंद्र अग्रवाल, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अजय मदान के एक 'झूठे' बताये जा रहे आरोप के पहले भी शिकार हो चुके हैं । अजय मदान ने कई लोगों को अलग अलग बताया है कि वीरेंद्र अग्रवाल ने शेखर मेहता वाले कार्यक्रम में उनकी पत्नी के साथ बदतमीजी की थी । कुछेक लोगों के जरिये यह बात जब वीरेंद्र अग्रवाल के सामने पहुँची, तो उन्होंने पूरी घटना बताते हुए हैरानी प्रकट की कि एक सामान्य सी बात को बदतमीजी घोषित कर अजय मदान उन्हें बदनाम करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं ? वीरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, हुआ यह था कि कुरुक्षेत्र में आयोजित शेखर मेहता के सम्मान समारोह का आयोजन देर रात तक चलता रहा था । रात 12 बजे के करीब, कई लोगों को जब भूख सताने लगी और उन्होंने घर लौटने के बारे में भी सोचना शुरू किया, तो वह खाने के स्टॉल की तरफ बढ़े और खाना खाने की तैयारी करने लगे । तभी अजय मदान की पत्नी ने वहाँ आकर कहा कि अभी कार्यक्रम चल रहा है, इसलिए अभी खाना शुरू नहीं किया जाना चाहिए । इस पर कुछेक अन्य लोगों के साथ-साथ वीरेंद्र अग्रवाल ने भी कहा कि रात के 12 बज रहे हैं, लोगों को भूख लग रही है और वह घर लौटना चाहते हैं; जिन लोगों की कार्यक्रम में रुचि हो, वह रुकें - और जिन लोगों की रुचि न हो, उन्हें खाना खाकर घर जाने दिया जाए । वीरेंद्र अग्रवाल के इन तर्कों से दूसरे लोगों को भी बल मिला, और तब अजय मदान की पत्नी की खाना रोकने की कोशिश सफल नहीं हो सकी । अजय मदान इस घटना को अपनी पत्नी के साथ बदतमीजी करना कह/बता रहे हैं । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि तीन-चार वर्ष पहले तब के सत्ताधारी अपने विरोधियों को इसी तरह की बहानेबाजियों से बदनाम किया करते थे; विडंबना, ट्रैजिडी और कॉमेडी यह है कि तब के विरोधियों ने आज सत्ताधारी बन कर अपने विरोधियों से निपटने के लिए वैसे ही हथकंडे अपना लिए हैं ।

Monday, August 3, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में जोन्स निर्धारण के मामले को मुद्दा बना कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिनेश शुक्ला को दबाव में लेने की कोशिश में फजीहत का शिकार बनने से, आईएस तोमर खेमे के नेताओं ने वास्तव में अपनी ही कमजोरी को साबित किया है और अपनी मुश्किलों को बढ़ा लिया है

बरेली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन/चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए जोन्स के निर्धारण को लेकर अपनी शिकायत इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी तक पहुँचा कर आईएस तोमर खेमे के नेताओं ने अपनी अच्छी फजीहत करवा ली है - और इस तरह उक्त मामले में बबाल मचाना उनके लिए न सिर्फ निरर्थक साबित हुआ, बल्कि उनके गले की फाँस और बन गया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिनेश शुक्ला ने त्वरित गति से काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुला कर तथा उस मीटिंग में कमल सांघवी को भी आमंत्रित करके आईएस तोमर खेमे की मुहिम का बीच रास्ते में ही जिस तरह से दम निकाल दिया, उससे आईएस तोमर खेमे को खासा तगड़ा झटका लगा है । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का कहना है कि आईएस तोमर खेमे के लिए सारा मामला 'खाया-पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना' टाइप का रहा है । इस पूरे मामले से आईएस तोमर खेमे की बौखलाहट और हताशा का भी डिस्ट्रिक्ट के आम और खास लोगों को आभास मिला है, तथा डिस्ट्रिक्ट में उनके विरोधियों को कहने का मौका मिला है कि यह पूरा प्रसंग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई में आईएस तोमर खेमे का अभी से अपनी हार स्वीकारने जैसा बन  गया है ।
उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिनेश शुक्ला ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन/चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए जोन्स निर्धारित किए । आईएस तोमर खेमे के नेता लोग तुरंत सक्रिय हुए और उन्होंने घोषित निर्धारण को डिस्ट्रिक्ट बायलॉज के नियमों का उल्लंघन बताते हुए बबाल मचाना शुरू कर दिया और धड़ाधड़ जहाँ/तहाँ ईमेल लिखना/भेजना शुरू कर दिया । मामले को बड़ा बनाने के उद्देश्य से उन्होंने शिकायती ईमेल की कॉपी शेखर मेहता और कमल सांघवी को भी भेज दी । उन्हें उम्मीद थी कि शिकायत मिलते ही शेखर मेहता और कमल सांघवी तुरंत से दिनेश शुक्ला के कान उमेठेंगे और उनके द्वारा घोषित किए गए निर्धारण को रद्द करवा देंगे । दिनेश शुक्ला लेकिन तुरंत एक्शन में आ गए, और उन्होंने काउंसिल ऑफ गवर्नर्स की जूम मीटिंग बुला ली, और मीटिंग में कमल सांघवी को भी शामिल होने के लिए राजी कर लिया । कमल सांघवी ने सभी की बातें सुन कर अपना पक्ष दिया कि पूर्व गवर्नर्स का काम सुझाव/सलाह देना है, और फैसला डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को ही करना है - पूर्व गवर्नर्स अपनी कोई बात डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पर थोप नहीं सकते हैं । कमल सांघवी के यह कहने के साथ ही, आईएस तोमर खेमे की दिनेश शुक्ला को दबाव में लेने तथा जोन्स के निर्धारण की घोषणा को रद्द करवाने की सारी तैयारी की हवा निकल गई ।
इस मामले में दरअसल आईएस तोमर खेमे के नेताओं की बदनामी ने अहम् रोल निभाया । उल्लेखनीय है कि शेखर मेहता और कमल सांघवी कई मौकों पर डिस्ट्रिक्ट के नेताओं को 'सिर्फ और सिर्फ राजनीति करने के लिए' लताड़ चुके हैं । वास्तव में इसीलिए जोन्स के निर्धारण को लेकर आईएस तोमर खेमे के नेताओं की शिकायत को न शेखर मेहता ने कोई तवज्जो दी, और न कमल सांघवी ने उसे गंभीरता से लिया । आईएस तोमर खेमे के ही कुछेक वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि मामले में जिस तरह का उतावलापन तथा आक्रामकता दिखाई गई, उससे मामला बिगड़ गया - और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दिनेश शुक्ला ने जिस तत्परता व होशियारी से मामले को अपने पक्ष में कर लिया, उससे लगता है कि उन्हें जोन्स निर्धारण के मामले में आईएस तोमर खेमे द्वारा बबाल करने का आभास था और उन्होंने उनके बबाल से निपटने के तरीके के बारे में पहले से सोचा हुआ था । पूरे प्रकरण से यह साबित हुआ कि आईएस तोमर खेमे के नेताओं के पास डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की राजनीति को लेकर कोई सुनियोजित योजना नहीं है, और वह सिर्फ शोरगुल मचा कर ही चुनाव जीतने की उम्मीद में हैं । मजे की बात यह है की कि खेमे के ही कुछेक नेताओं को लगता है कि इस वर्ष उनके लिए मौका अच्छा है - उनके उम्मीदवार के रूप में देवप्रिया उक्सा का पलड़ा सत्ता खेमे के उम्मीदवार विवेक गर्ग के मुकाबले भारी देखा/पहचाना जा रहा है, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट  के रूप में मुकेश सिंघल अपने गवर्नर वर्ष के पद बाँट कर वोट जुटाने की स्थिति में भी हैं; लेकिन एक व्यवस्थित रणनीति के अभाव में आईएस तोमर खेमे के सक्रिय नेता अनुकूल स्थितियों का लाभ उठा पाने में सक्षम नहीं दिख रहे हैं । जोन्स निर्धारण के मामले में, अपने ही बिछाये जाल में खुद ही फँस कर खेमे के नेताओं ने अपनी जो फजीहत करवाई है, उससे वास्तव में उन्होंने अपनी ही कमजोरी को जाहिर किया है ।

Saturday, July 25, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 के निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता सदस्यता वृद्धि तथा फाउंडेशन की जमा राशि के मामले में उलटे नतीजे देकर, डिस्ट्रिक्ट और रोटरी को पीछे घसीटने पर शर्मिंदा होने की बजाये, अपनी उपलब्धियों का ढोल पीटने तथा खुद ही खुद को शाबासी देने में क्यों लगे हुए हैं ?

गाजियाबाद । निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता सच्चाई को छिपाते तथा तथ्यों से खिलवाड़ करते हुए डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच झूठी वाहवाही लेने की कोशिश भले ही कर रहे हों, लेकिन रोटरी जगत में यही माना/पहचाना जा रहा है कि उनके गवर्नर वर्ष में डिस्ट्रिक्ट 3012 तथा रोटरी को नुकसान ही हुआ है - तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट व रोटरी को पीछे ही ले गए हैं । सदस्य-संख्या के मामले में तो दीपक गुप्ता गोलमोल बातें बनाते हुए अपनी उपलब्धि का झूठा ही श्रेय लेने की कोशिश करते हुए 'रंगे हाथ' पकड़े गए हैं । उल्लेखनीय है कि वह जोरशोर से यह तो बता रहे हैं कि उनके गवर्नर वर्ष में 12 नए क्लब बने तथा 500 से अधिक नए सदस्य रोटरी से जुड़े - लेकिन यह बताते हुए वह धूर्तता यह दिखा रहे हैं कि वह यह नहीं बता रहे हैं कि उनके गवर्नर रहते हुए डिस्ट्रिक्ट की सदस्य संख्या क्या से क्या हुई है ? दरअसल वह यह इसलिए नहीं बता रहे हैं कि यह बात सामने आते ही उनकी पोल खुल जायेगी और लोगों को पता चल जायेगा कि उनके गवर्नर रहते हुए डिस्ट्रिक्ट व रोटरी को फायदा नहीं - बल्कि घाटा हुआ है । रोटरी इंटरनेशनल के रिकॉर्ड के अनुसार, एक जुलाई 2019 को जब दीपक गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार संभाला था, तब डिस्ट्रिक्ट की सदस्य-संख्या 3709 थी - लेकिन 30 जून 2020 को जब दीपक गुप्ता गवर्नर की कुर्सी से उतरे, तब सदस्य-संख्या घटकर 3695 रह गई । क्लब्स की औसत सदस्यता के संदर्भ में तो यह घाटा और भी बड़ा है, क्योंकि इस दौरान क्लब्स की संख्या 95 से बढ़कर 105 हुई है । सिर्फ इतना ही नहीं, रोटरी इंटरनेशनल के महिलाओं की सदस्यता को प्रोत्साहित करने के अभियान को पूरा करने के मामले में भी दीपक गुप्ता बुरी तरह असफल रहे हैं । उनके गवर्नर वर्ष में महिला सदस्यों की हिस्सेदारी 25.96 प्रतिशत से घटकर 23.57 प्रतिशत रह गई है ।
रोटरी फाउंडेशन के लिए जमा हुई रकम को लेकर भी दीपक गुप्ता तथ्यों से खिलवाड़ कर रहे हैं, और पूरी सच्चाई बताये बिना अपने आपको शाबासी दिए जा रहे हैं - जबकि सच्चाई यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्होंने रोटरी फाउंडेशन का अकाउंट भरने का नहीं, बल्कि खाली करने का काम किया है । दीपक गुप्ता रोटरी फाउंडेशन के लिए 10 लाख डॉलर से अधिक की रकम जमा होने की बात तो बता रहे हैं, लेकिन इस तथ्य को बहुत ही चालाकी से छिपा ले रहे हैं कि इसमें पाँच लाख डॉलर से अधिक की रकम तो टर्म गिफ्ट के रूप में है, जिसके बदले में तीन से चार गुना रकम ग्लोबल ग्रांट के रूप में रोटरी फाउंडेशन से ली जायेगी - यानि उक्त रकम दान नहीं है, बल्कि इन्वेस्टमेंट है; और यह रकम रोटरी फाउंडेशन के अकाउंट में जमा रकम को बढ़ाने का नहीं, उलटे घटाने का काम करेगी । इस तरह, दीपक गुप्ता ने रोटरी फाउंडेशन को चूना लगाने का ही काम नहीं किया है - बल्कि उनकी असफलता इस मामले में भी है कि टर्म गिफ्ट के नाम पर भी वह कुल करीब छह/आठ क्लब्स से ही पैसे जुटा पाए हैं और डिस्ट्रिक्ट के अधिकतर क्लब्स की तरफ से उन्हें ठेंगा ही मिला है ।
उल्लेखनीय है कि रोटरी का विकास सदस्यता वृद्धि तथा फाउंडेशन की जमा राशि पर ही निर्भर करता है, और इसीलिए रोटरी इंटरनेशनल इन दोनों क्षेत्रों में अधिक से अधिक ध्यान देने पर जोर देता है - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक गुप्ता ने लेकिन दोनों ही क्षेत्रों में उलटे नतीजे देकर वास्तव में रोटरी को आगे बढ़ाने की बजाये, पीछे घसीटने का ही काम किया है । हद की बात यह है कि अपनी असफलता पर शर्मिंदा होने की बजाये वह आधी-अधूरी बातें बता कर दोनों ही क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों का ढोल पीट रहे हैं और खुद ही खुद को शाबासी देने में लगे हुए हैं । 

Wednesday, July 8, 2020

रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों तथा रोटेरियंस से डोनेशन के रूप में पैसे लेने की कोशिशों पर रोक लगाने की सिफारिशों ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता को जोर का झटका दिया है

नई दिल्ली । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों पर गंभीर आपत्ति प्रकट करते हुए, वास्तव में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता की गर्दन ही पकड़ ली है । शेखर मेहता 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के चेयरमैन हैं, और स्काईलाइन हॉउस के उनके पते पर ही इस फाउंडेशन का मुख्यालय है । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज ने इस फाउंडेशन की गतिविधियों को रोटरी की 'समानांतर गतिविधियों' के रूप में देखा/पहचाना है, और आशंका व्यक्त की है कि इसकी गतिविधियाँ रोटेरियंस के बीच कन्फ्यूजन पैदा करके उन्हें रोटरी से अलग कर सकती हैं तथा इस तरीके से रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन को नुकसान पहुँचाने वाली साबित हो सकती हैं । एक तरह से रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज ने शेखर मेहता के नेतृत्व में चलने वाले 'द रोटरी ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' को रोटरी के लिए खतरे के रूप में देखा/पहचाना है - और इसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की है । शेखर मेहता के लिए बड़े झटके वाली बात यह रही है कि उनके फाउंडेशन की गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए तथा उन पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज करते हुए रोटरी इंटरनेशनल के बोर्ड व रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की जून में जो मीटिंग्स हुईं, उनमें अधिकृत पदाधिकारी होने के बावजूद प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता, डायरेक्टर्स भरत पांड्या व कमल सांघवी तथा फाउंडेशन ट्रस्टी गुलाम वाहनवती को शामिल नहीं किया गया । 
उल्लेखनीय है कि देश के रोटेरियंस के बीच इस फाउंडेशन को शेखर मेहता की 'निजी दुकान' के रूप में ही देखा/पहचाना गया है, जिसे इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी बनने के बाद से वह तेजी से बड़ा बना रहे हैं, तथा सजा/सँवार कर नई चमक के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं । रोटरी इंटरनेशनल की छत्रछाया में 'काम करने का नाम लेकर' यह फाउंडेशन रोटरी क्लब्स, अन्य तरह तरह के एनजीओज तथा सरकारी विभागों के साथ मिल कर गरीबों, बीमारों, अशिक्षितों तथा पिछड़े समुदायों के लिए काम करने की बात कर रहा है; इसने काम करने के लिए प्रायरिटीज एरिया'ज तय किए हैं, और उनके लिए छोटे-बड़े रोटेरियंस को लेकर भारी-भरकम टीमें बनाई हैं - और विभिन्न क्षेत्रों में काम को अंजाम देने के लिए रोटेरियंस से डोनेशन लिए/माँगे हैं । शेखर मेहता ने देश के प्रायः प्रत्येक बड़े रोटेरियन पदाधिकारी व नेता को इस फाउंडेशन में कोई न कोई पद देकर 'जोड़ा' है - और एक तरीके से यह 'दिखाया' हुआ है कि 'द रोटरी ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के लिए काम करने का मतलब रोटरी का काम करना है । कई प्रमुख व वरिष्ठ रोटेरियंस निजी बातचीत में इस फाउंडेशन को शेखर मेहता की निजी महत्त्वाकांक्षा से जोड़ कर देखते/बताते रहे हैं, और शिकायतें करते रहे हैं कि शेखर मेहता इसके जरिये अपना निजी संस्थान बना/खड़ा कर रहे हैं । शेखर मेहता चूँकि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की राह पर हैं, इसलिए तरह-तरह के स्वार्थों के चलते कोई भी खुलकर अपनी शिकायतों को व्यक्त नहीं कर पाया और शेखर मेहता को अपनी 'निजी दुकान' बढ़ाने का साफ रास्ता मिल गया ।
लेकिन रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड तथा रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज की मीटिंग्स में जो बातें हुईं हैं, जो सवाल उठे हैं और जिस तरह के निर्णय हुए हैं - उससे लगता है कि शेखर मेहता के फाउंडेशन को ग्रहण लग गया है, और वह मुसीबत में घिर गया है । बोर्ड सदस्यों व ट्रस्टीज की मीटिंग्स में इस बात पर सवाल उठे हैं कि 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' की गतिविधियों के लिए रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन से अनुमति क्यों नहीं ली गईं; तथा रोटरी फाउंडेशन को अलग-थलग करके फाउंडेशन के लिए पैसा क्यों और कैसे लिया जा रहा है ? बोर्ड सदस्यों व ट्रस्टीज ने रोटरी इंटरनेशनल के जनरल सेक्रेटरी से अनुरोध किया है कि वह फाउंडेशन के पदाधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहें कि उनकी सभी गतिविधियाँ रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन के अंतर्गत होंगी और उनके प्रति ही जबावदेह व जिम्मेदार होंगी । रोटेरियंस से फाउंडेशन के लिए पैसे देने और जमा करने पर तुरंत रोक लगाने की माँग करते हुए अनुरोध किया गया है कि फाउंडेशन की गतिविधियों को तुरंत से रोका जाये और उन्हें रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी फाउंडेशन के मॉडल के अनुरूप ही काम करने को कहा जाए । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्यों और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टीज के इस रवैये से 'द रोटरी इंडिया ह्यूमैनिटी फाउंडेशन' के अस्तित्व को लेकर गंभीर संशय पैदा हो गया है, और इस फाउंडेशन के तहत बनी कमेटियों के पदाधिकारी तथा सदस्य अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं ।

Sunday, June 28, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी के खुले सहयोग व समर्थन के बावजूद, जोन 7 में डायरेक्टर पद का चुनाव जीते रवि वदलमानी, पराजित हुए उम्मीदवार सैम मोव्वा की तरफ से हुई चुनावी शिकायत का शिकार होने से नहीं बच सके और जीता-जिताया इंटरनेशनल डायरेक्टर का पद खो बैठे

नई दिल्ली । सैम मोव्वा (के क्लब) की शिकायत ने इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट रवि वदलमानी को तो 'डुबोया' ही, खुद सैम मोव्वा को भी ले डूबी - और इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी को भी बदनामी के छींटों से भिगो बैठी । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने जोन 7 में हुए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव और उसके नतीजे को रद्द कर दिया है, और फिर से चुनाव करवाने का फैसला सुनाया है । उक्त चुनाव में पराजित हुए सैम मोव्वा के क्लब की तरफ से रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत की गई थी कि चुनाव जीतने के लिए रवि वदलमानी ने कैम्पेन चलाया, और इस तरह रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का उल्लंघन किया है । रोटरी इंटरनेशनल की तरफ से एक जाँच-टीम बनाई गई, जिसने अपनी जाँच-पड़ताल में पाया कि उम्मीदवार के रूप में न सिर्फ रवि वदलमानी ने - बल्कि सैम मोव्वा ने भी कैम्पेन किया था । इस रिपोर्ट के आधार पर, रोटरी इंटरनेशनल ने उक्त चुनाव को तथा उसके नतीजे को अमान्य घोषित कर दिया - तथा दोबारा चुनाव करवाने का फैसला सुनाया । रवि वदलमानी तथा सैम मोव्वा के लिए बदकिस्मती की बात यह रही कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने दोबारा होने वाले चुनाव में इन दोनों के उम्मीदवार बनने पर रोक लगा दी है । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का यह फैसला इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी के लिए इसलिए झटके वाला माना/समझा जा रहा है, क्योंकि रवि वदलमानी के कैम्पेन में कमल सांघवी ने खूब बढ़चढ़ कर भाग लिया था - कमल सांघवी चूँकि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सदस्य हैं, इसलिए माना/समझा जा रहा था कि सैम मोव्वा (के क्लब) की शिकायत पर बोर्ड में रवि वदलमानी को नुकसान पहुँचाने वाला फैसला नहीं हो सकेगा । दरअसल इसीलिए, रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड का फैसला इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी के लिए भी झटके वाला साबित हुआ है ।
इस फैसले के पीछे रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व प्रेसीडेंट केआर रविंद्रन को देखा/पहचाना जा रहा है, और माना जा रहा है कि रवि वदलमानी रोटरी लीडरशिप की खेमेबाजी की 'लड़ाई' के शिकार बन गए हैं । उल्लेखनीय है कि सैम मोव्वा को पूर्व प्रेसीडेंट केआर रविंद्रन के तथा रवि वदलमानी को भावी प्रेसीडेंट शेखर मेहता के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था - और इस तरह से, उक्त चुनाव के जरिये वास्तव में केआर रविंद्रन व शेखर मेहता की राजनीतिक 'ताकत' को आँकने की तैयारी हो रही थी । चुनावी प्रक्रिया के पहले चरण में, नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा सैम मोव्वा को अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने से केआर रविंद्रन का पलड़ा भारी साबित हुआ; लेकिन रवि वदलमानी से चेलैंज करवा कर शेखर मेहता खेमे ने पहले चरण में हारी हुई बाजी को दूसरे चरण में जीतने की तैयारी की । रवि वदलमानी की जीत को सुनिश्चित करने के लिए ही शेखर मेहता खेमे की तरफ कमल सांघवी ने रवि वदलमानी की उम्मीदवारी की कमान संभाली । समझा जाता है कि इसी बात से चिढ़ कर केआर रविंद्रन खेमे के नेताओं ने, चुनाव में विजयी हुए रवि वदलमानी की जीत पर ग्रहण लगाने के उद्देश्य से सैम मोव्वा (के क्लब) की तरफ से शिकायत दर्ज करवाई गई । रवि वदलमानी और उनके समर्थकों ने उक्त शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया; उन्हें विश्वास रहा कि कमल सांघवी ने जैसे उनके कैम्पेन को संभाला, वैसे ही इंटरनेशनल बोर्ड में शिकायत को भी 'संभाल' लेंगे । लोगों के बीच की चर्चाओं के अनुसार, वह इसलिए भी निश्चिंत रहे, क्योंकि उन्हें यकीन रहा कि यह मामला अगले रोटरी वर्ष में होने वाली मीटिंग में आयेगा - जब शेखर मेहता भी बोर्ड में होंगे, और तब रवि वदलमानी के खिलाफ कोई फैसला नहीं हो सकेगा । रवि वदलमानी और उनके छोटे-बड़े समर्थकों को यह उम्मीद बिलकुल भी नहीं थी कि उक्त मामला मौजूदा रोटरी वर्ष में ही रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड की कार्रवाई में आ जायेगा, और उनकी चुनावी जीत के लिए मुसीबत बन जायेगा ।
रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से झटका खाए रवि वदलमानी और उनके समर्थकों के लिए राहत की बात यही है कि 'सजा' यदि रवि वदलमानी को मिली है, तो सैम मोव्वा भी अपनी ही शिकायत के शिकार हुए हैं; और इस तरह इंटरनेशनल डायरेक्टर पद यदि रवि वदलमानी से छिना है, तो सैम मोव्वा के लिए भी उक्त पद पाने की संभावना समाप्त हुई है । इस फैसले के सामने आने के बाद से, मजे की बात यह देखने/सुनने को मिल रही है कि कमल सांघवी के नजदीकी यह बताने/जताने/दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि कमल सांघवी यदि रवि वदलमानी का डायरेक्टर पद नहीं बचा सके हैं, तो उन्होंने सैम मोव्वा के लिए भी डायरेक्टर पद की कुर्सी पाने की संभावना नहीं बची रहने दी है - और इस तरह, मामले को 'बराबर' का बना दिया है । इस बताने/जताने/दिखाने को कमल सांघवी की तरफ से 'डैमेज कंट्रोल' की कोशिश के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । कमल सांघवी के नजदीकियों का कहना है कि उनकी कोशिश है कि जोन 7 में हुए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को लेकर हुई उठापटक उनकी 'स्थिति' पर प्रतिकूल प्रभाव न डाले, और रोटेरियंस उन्हें 'कमजोर' न समझने लगें । वैसे, रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के इस फैसले ने अधिकतर रोटेरियंस को हैरान ही किया है - क्योंकि वह तो हर चुनाव में उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को कैम्पेन करते हुए 'देखते' और सुनते हैं । रोटरी में होने वाले छोटे से छोटे चुनाव में बड़े बड़े नेताओं और पदाधिकारियों को कैम्पेन करते हुए देखा और सुना जाता है - उसकी शिकायतें भी होती हैं, लेकिन कार्रवाई होते हुए कभी-कभार ही देखा गया है । ऐसे में, रोटेरियंस को यही लग रहा है कि कैम्पेन करने जैसी शिकायतों पर कार्रवाई तभी होती है - जब बड़े नेताओं और पदाधिकारियों को अपने 'स्कोर सेटल' करने होते हैं ।  

Thursday, May 28, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन पद पर अपनी मनमानी से नियुक्ति करने के मामले में रोटरी इंटरनेशनल के साऊथ एशिया ऑफिस से 'बड़े बेआबरू होकर निकले'

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव राय मेहरा ने अपने गवर्नर-वर्ष में विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बनाने के लिए जो अभियान छेड़ा हुआ है, उसे रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस से तगड़ा झटका लगा है । साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों ने उन्हें दो-टूक शब्दों में बता दिया है कि रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार उक्त पद पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी की सहमति से ही कोई नियुक्ति हो सकती है । साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों ने हालाँकि उन्हें यह सुझाव देते हुए एक मौका दे दिया है कि इसके बावजूद वह जो करना चाहते हैं, उसके लिए वह इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या से बात कर लें । संजीव राय मेहरा अब इस कोशिश में जुटे हैं कि रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का मजाक बनाने वाले अपने फैसले को हरी झंडी देने के लिए वह कैसे भरत पांड्या को राजी कर लें । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 3011 में गवर्नर, गवर्नर इलेक्ट तथा गवर्नर नॉमिनी की सहमति से डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद पर इस वर्ष रंजन ढींगरा की नियुक्ति हुई थी । रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के तहत यह नियुक्ति तीन वर्षों के लिए होती है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में संजीव राय मेहरा ने भी रंजन ढींगरा के नाम पर अपनी सहमति दी थी । दस महीने बीतने के बाद संजीव राय मेहरा को 'ज्ञान' प्राप्त हुआ कि उक्त पद पर रंजन ढींगरा की नियुक्ति गलत हो गई है । कुछेक आरोप, जिनमें कुछ मनगढंत हैं और कुछ बाल की खाल निकालने वाली प्रकृति के हैं, लगाते हुए संजीव राय मेहरा ने घोषणा कर दी कि अपने गवर्नर वर्ष में डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद पर वह रंजन ढींगरा को हटा कर विनय भाटिया को नियुक्त कर रहे हैं ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी अनूप मित्तल ने उनके फैसले का विरोध किया । अनूप मित्तल का कहना रहा कि संजीव राय मेहरा जो कर रहे हैं, वह रोटरी इंटरेनशनल के नियमों का सरासर उल्लंघन है, और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए । अनूप मित्तल का सुझाव रहा कि संजीव राय मेहरा डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद की नियुक्ति में यदि कोई बदलाव करना चाहते हैं, तो उन्हें रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का पालन करते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के साथ विचार विमर्श करना चाहिए । संजीव राय मेहरा लेकिन अपनी जिद पर अड़े रहे और यह 'दिखाते' रहे तथा घोषणा कर बैठे कि डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन की नई नियुक्ति वह अकेले ही करेंगे और उन्हें किसी से पूछने/बताने की जरूरत नहीं है । इस मामले में संजीव राय मेहरा ने रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थिति साऊथ एशिया ऑफिस से मिले दिशा-निर्देशों को भी स्वीकार करने से इंकार कर दिया । इसके बाद, मामला गंभीर हो गया और साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों को उन्हें स्पष्ट रूप से बताना पड़ा कि रोटरी इंटरनेशनल के नियम उन्हें अकेले वह करने की अनुमति नहीं देते हैं, जो डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन की नई नियुक्ति के मामले में वह कर रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में हर किसी को हैरानी है कि संजीव राय मेहरा रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का मजाक बनाने तथा ऐसा करते हुए रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थिति साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों से भी टकराने का काम वह आखिर किसकी शह पर कर रहे हैं ? डिस्ट्रिक्ट में अधिकतर लोग संजीव राय मेहरा के इस मनमाने कार्यक्रम को विनोद बंसल द्वारा स्पॉन्सर्ड कार्यक्रम के रूप में देख/पहचान रहे हैं, और इसे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई के शुरुआती अध्याय के रूप में पढ़/समझ रहे हैं ।
उल्लेखनीय है कि रंजन ढींगरा और विनोद बंसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार के रूप में तैयारी करते सुने जा रहे हैं । विनोद बंसल को पिछले दिनों डिस्ट्रिक्ट के महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट रोटरी ब्लड बैंक के प्रेसीडेंट पद से जिस तरह जबर्दस्ती हटाया गया है, उससे विनोद बंसल की भारी फजीहत हुई है और डिस्ट्रिक्ट में उन्हें पूरी तरह अलग-थलग पड़ा देखा/पहचाना गया है; दूसरी तरफ रोटरी इंडिया वाटर मिशन के मुखिया के तौर पर रंजन ढींगरा को अपने डिस्ट्रिक्ट के साथ-साथ दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में भी खासी तवज्जो मिलती दिख रही है । इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी ने कोच्ची इंस्टीट्यूट के कन्वेनर के रूप में रंजन ढींगरा को इंस्टीट्यूट के ट्रेजरर पद की जिम्मेदारी दी है । यह जिक्र आ ही चुका है कि डिस्ट्रिक्ट के तीन वर्षों के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने आपसी सहमति से रंजन ढींगरा को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन चुना है । इन उपलब्धियों के साथ, रंजन ढींगरा रोटरी समुदाय में अपनी बड़ी पहचान और स्वीकार्यता बनाते नजर आ रहे हैं, तथा विनोद बंसल खुद को उनके मुकाबले बुरी तरह पिछड़ता देख रहे हैं । दुनिया और समाज में यह एक आम समझ है कि जब कोई अपने आप को 'बड़ा' नहीं बना पाता है, तो वह अपने प्रतिद्धंद्धी को नीचे गिराने की कोशिशें शुरू कर देता है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लग रहा है कि रंजन ढींगरा को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन के पद से हटवाने की कार्रवाई के रूप में संजीव राय मेहरा के जरिये विनोद बंसल ने वही खेल शुरू किया है । विनोद बंसल और संजीव राय मेहरा चार्टर्ड एकाउंटेंट्स हैं; आरोपपूर्ण चर्चाएँ हैं कि विनोद बंसल से प्रोफेशनल फायदे लेने की उम्मीद में संजीव राय मेहरा उनके खेल का हिस्सा बन गए हैं, और इसके लिए रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का मजाक बनाने की हद तक जा पहुँचे हैं । बताते चलें कि रंजन ढींगरा की जगह जिन विनय भाटिया को दिलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं, वह विनय भाटिया इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की सदस्यता के लिए विनोद बंसल के उम्मीदवार के रूप में तैयारी कर रहे हैं । विनोद बंसल को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन बन जाने पर विनय भाटिया की उक्त उम्मीदवारी को फायदा मिलेगा ।
रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस से विनय भाटिया को डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन का पद दिलवाने की कोशिश को भले ही झटका लगा हो, लेकिन विनोद बंसल ने संजीव राय मेहरा तथा विनय भाटिया को आश्वस्त किया है कि उक्त मामले में भले ही रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का उल्लंघन हो रहा हो, किंतु वह भरत पांड्या से संजीव राय मेहरा के फैसले को हरी झंडी दिलवा देंगे । 

Wednesday, May 27, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी की, आयोजन की तारीख को आगे बढ़ा कर तथा 'विशेष नियुक्ति' के तहत सुभाष जैन को वाइस चेयरमैन बना कर कोच्ची इंस्टीट्यूट को कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाने की, कोशिश काम करेगी क्या ? 


नई दिल्ली । पहले कोच्ची इंस्टीट्यूट के आयोजन की तारीख को आगे बढ़ा कर और फिर आयोजन कमेटी में 'विशेष नियुक्ति' के तहत सुभाष जैन को वाइस चेयरमैन बना कर इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी ने कोरोना वायरस के प्रकोप से पैदा हुए हालात की काली छाया से इंस्टीट्यूट को बचाने की कार्रवाई तो शुरू कर दी है, लेकिन उनके नजदीकियों और शुभचिंतकों को भी लग रहा है कि कोच्ची इंस्टीट्यूट को लेकर कमल सांघवी ने जैसे जो सपने बुन रखे थे - उन पर ग्रहण तो लग ही चुका है । नजदीकियों और शुभचिंतकों का ही मानना और कहना है कि कमल सांघवी अब ज्यादा से ज्यादा यही कोशिश कर सकते हैं कि वह डैमेज को किसी भी तरह से कंट्रोल करें और इंस्टीट्यूट को अपने सपनों के अनुरूप न सही - उसके आसपास के स्तर का तो बना ही लें । कमल सांघवी कोच्ची इंस्टीट्यूट के कन्वेनर हैं और उन्हें रोटरी में 'शो-मैन' के रूप में देखा/पहचाना जाता है । इसीलिए लोगों को उम्मीद है कि कोच्ची इंस्टीट्यूट को 'बचाने' के लिए वह हर संभव कोशिश करेंगे । हाल ही में लिए गए अपने फैसलों के जरिये कमल सांघवी ने यह संकेत देने की ही कोशिश की है कि वह अपनी तरफ से कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे और कोच्ची इंस्टीट्यूट को अपनी योजनानुसार ही आयोजित करने का प्रयास करेंगे । कमल सांघवी के नजदीकियों के अनुसार, इंस्टीट्यूट की तैयारी कमेटी में वह अभी कुछेक लोगों को और शामिल कर सकते हैं ।
उल्लेखनीय है कि कोच्ची इंस्टीट्यूट के आयोजन को लेकर कमल सांघवी ने अपने जोश और उत्साह का नजारा इंदौर इंस्टीट्यूट में ही दिखा दिया था । वहाँ कोच्ची इंस्टीट्यूट बूथ बनाया गया था, जिसमें केरल की परंपरागत नाव को प्रदर्शित किया गया था, जिसे केरल के विभिन्न मसालों और नारियल से सजाया गया था । इस बूथ का उद्घाटन इंटरनेशनल प्रेसीडेंट मार्क मलोनी ने किया था । कोच्ची इंस्टीट्यूट को प्रमोट करने के लिए वहाँ केरल की पोशाक पहन कर रोटरी के बड़े पदाधिकारियों ने अपनी अपनी जीवनसंगिनि के साथ एक मलयालम गीत पर नृत्य भी प्रस्तुत किया था । इस तरह की प्रस्तुतियों के जरिये कमल सांघवी ने दरअसल दिखाया/जताया था कि कोच्ची इंस्टीट्यूट कितना रंग-भरा, उमंग-भरा और भव्य होगा । किसी इंस्टीट्यूट में अगले इंस्टीट्यूट के नजारे का ऐसा संकेत इससे पहले शायद ही कभी दिखा या दिखाया गया हो । कमल सांघवी ने इंदौर इंस्टीट्यूट में कोच्ची इंस्टीट्यूट की तैयारियों का खाका भी प्रस्तुत कर दिया था और अपनी टीम के प्रमुख पदाधिकारियों के नाम की घोषणा भी कर दी थी । कोरोना वायरस के प्रकोप से बने हालात ने लेकिन उनकी योजना पर ग्रहण लगा दिया ।
कोच्ची इंस्टीट्यूट को कोरोना वायरस के ग्रहण से बचाने के लिए कमल सांघवी ने पहले तो इंस्टीट्यूट के आयोजन की तारीख को आगे बढ़ाया । 26 से 28 नवंबर 2020 को होने वाले कोच्ची इंस्टीट्यूट को आगे बढ़ा कर, 15 से 17 जनवरी 2021 को करने की घोषणा की गई है । इस घोषणा के कुछ ही दिन बाद उन्होंने डिस्ट्रिक्ट 3012 के निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुभाष जैन को इंस्टीट्यूट की कमेटी में दूसरा वाइस चेयरमैन बनाने की घोषणा की है । अभी तक कमेटी में एक ही वाइस चेयरमैन थे, और वह थे अनुरुद्ध रॉय चौधरी । सुभाष जैन की नियुक्ति को उन्होंने 'विशेष नियुक्ति' कहा है और विश्वास व्यक्त किया है कि सुभाष जैन की सक्रियता कोच्ची इंस्टीट्यूट के आयोजन को सफल बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायेगी । कमल सांघवी की कोच्ची इंस्टीट्यूट की टीम में सुभाष जैन ही सबसे 'युवा गवर्नर' हैं - वह अभी पिछले वर्ष ही गवर्नर थे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुभाष जैन द्वारा आयोजित किए गए कार्यक्रमों ने भव्यता, रोमांच और लोगों की भागीदारी को लेकर जिस तरह के रिकॉर्ड बनाये - संभवतः उनकी ख्याति ने ही उन्हें इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन के पद पर 'जल्दी से' पहुँचाने का काम किया है । दरअसल अपने कार्यक्रमों की प्रशंसा की बदौलत ही सुभाष जैन को उत्तर भारत के डिस्ट्रिक्ट्स में हाल के वर्षों में सामने आने वाली लीडरशिप में सबसे ऊर्जावान लीडर के रूप में देखा/पहचाना गया है । देखना दिलचस्प होगा कि कोच्ची इंस्टीट्यूट को कोरोना वायरस के प्रकोप से बने हालात का शिकार बनने से बचाने के लिए कमल सांघवी और क्या क्या उपाये करते हैं, तथा उनका क्या नतीजा निकलता है ?

Monday, April 27, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में हैंड क्राफ्ट ज्वैलरी का ऑक्शन करके डब्ल्यूजीमील के तहत रोटरी फाउंडेशन के पोलियो फंड के लिए रकम जुटाने के उपक्रम के जरिये आभा झा चौधरी ने रोटरी में तो एक नई इबारत लिखी ही है, डिस्ट्रिक्ट 3011 को भी एक विशिष्ट पहचान दी है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट 3011 से बहुत समय बाद एक अच्छी खबर सुनने को मिली, जिसकी वाहक बनीं वरिष्ठ रोटेरियन आभा झा चौधरी । आभा झा चौधरी के अपने अकेले के प्रयत्नों से रोटरी फाउंडेशन के पोलियो फंड में एक ही दिन में करीब 45 हजार अमेरिकी डॉलर की रकम जुटी । आभा झा चौधरी ने खुद तैयार की हैंड क्राफ्टेड ज्वैलरी का ऑक्शन करके उक्त रकम इकट्ठा की - वास्तव में रकम उन्होंने अपने पास इकट्ठा भी नहीं की; उन्होंने तो अपने द्वारा तैयार की हैंड क्राफ्टेड ज्वैलरी को दिखाया और उसे खरीदने वाले को उसकी कीमत सीधे रोटरी फाउंडेशन को भेजने को कहा । रोटरी फाउंडेशन के पोलियो फंड के लिए पैसा इकट्ठा करने के प्रयासों में सक्रिय रहने वाली संस्था डब्ल्यूजीमील (वर्ल्ड ग्रेटेस्ट मील) की कंट्री कोऑर्डीनेटर के रूप में आभा झा चौधरी ने इस तरह अपने काम को एक नई ऊँचाई दी है । ऐसे समय में, जबकि डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर और बड़े पदाधिकारी रोटरी फाउंडेशन को टर्म गिफ्ट के रूप में 'दान' देने की वकालत करने में लगे हुए हैं, एक पूर्व प्रेसीडेंट आभा झा चौधरी ने पोलियो फंड के लिए रकम जुटाने के लिए अपनी सोच, अपनी प्रतिभा, अपने समय और अपनी मेहनत को न सिर्फ इस्तेमाल किया - बल्कि कामयाबी भी हासिल की, और कामयाबी के जरिये फंड इकट्ठा करने के प्रयासों को एक नई दिशा भी दी । आभा झा चौधरी ने जो किया, वह इस बात का भी सुबूत है कि रोटरी में एक व्यक्ति के प्रयासों को भी फलने-फूलने का मौका मिल सकता है; और यहाँ कोई भी अपनी प्रतिभा तथा अपनी कोशिशों से बड़ा काम कर सकता है । आभा झा चौधरी ने जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, उसमें दो इंग्रेडिऐंट की खासी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही - एक उनका हुनर और दूसरा रोटरी के लिए कुछ करने का जज़्बा । 
आभा झा चौधरी ने जो किया, उसका आधार बस इन्हीं दो इंग्रेडिऐंट से ही बन गया । लॉकडाउन के चलते अन्य लोगों की तरह आभा झा चौधरी को भी जब घर की चारदीवारी में कैद हो जाना पड़ा, तो समय का सदुपयोग करने के लिए उन्होंने हैंड क्राफ्ट ज्वैलरी बनाने के बारे में सोचा । खास बात यह रही कि इससे पहले उन्होंने कभी ऐसी ज्वैलरी नहीं बनाई थी और उन्हें इसका कोई अनुभव भी नहीं था । इसके बावजूद, उन्हें यह आईडिया इसलिए आया क्योंकि अलग अलग जरूरतों के चलते घर में आया कुछ ऐसा सामान बचा पड़ा था, जिसे देख कर उनकी क्रिएटिव प्रतिभा ने उनसे ज्वैलरी तैयार करने के बारे में सोचा । अब सोचा, तो काम शुरू हुआ । काम शुरू हुआ, तो ज्वैलरी के डिजाईन तैयार करने से लेकर उन्हें क्रियान्वित करने तक के काम में आभा झा चौधरी को अपनी दोनों बेटियों का भी सहयोग मिला । समय का सदुपयोग करने के उद्देश्य से शुरू हुआ ज्वैलरी तैयार करने का काम चल रहा था, तो साथ-साथ रोटरी के लिए कुछ करने का कीड़ा भी कुलबुला रहा था - और ऐसे ही किसी क्षण आभा झा चौधरी को सूझा कि वह हैंड क्राफ्ट ज्वैलरी का ऑक्शन करके क्यों न डब्ल्यूजीमील के तहत रोटरी फाउंडेशन के पोलियो फंड के लिए रकम जुटाने का प्रयास करें - और इस तरह समय का सदुपयोग करने के उद्देश्य से किए गए काम को और सार्थक रूप दें ।
आभा झा चौधरी ने अपने इस विचार को विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स में डब्ल्यूजीमील के अपने सहयोगियों के साथ साझा किया, तो उन्हें उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया मिली । डब्ल्यूजीमील की अन्तर्राष्ट्रीय प्रमुख सुजेन रेआ ने भी उन्हें उनके विचार को अमल में लाने के लिए प्रोत्साहित किया । चारों तरफ से मिले उत्साहवर्धन से आभा झा चौधरी का विश्वास बढ़ा, तो उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों - इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता, इंटरनेशनल डायरेक्टर्स भरत पांड्या और कमल सांघवी, रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वाहनवती आदि के साथ-साथ अन्य कई प्रमुख रोटेरियंस से अपनी योजना के बारे में बात की; उनकी खुशकिस्मती रही कि सभी ने उनकी योजना की तारीफ तो की ही - ऑक्शन में शामिल होने के लिए भी अपनी स्वीकृति दी, और इस तरह हैंड क्राफ्ट ज्वैलरी के ऑक्शन के लिए एक बड़ा मजबूत आधार तैयार हुआ । लॉकडाउन के समय का सदुपयोग करने के इरादे से शुरू हुआ उपक्रम आभा झा चौधरी की प्रतिभा तथा रोटरी के लिए कुछ करने के जज़्बे के साथ जुड़ कर एक बड़ा आयोजन बन गया, जो 26 अप्रैल को रोटरी के बड़े पदाधिकारियों तथा अन्य प्रमुख रोटेरियंस की उपस्थिति में आयोजित हुआ । इस आयोजन की कामयाबी के जरिये आभा झा चौधरी ने रोटरी में तो एक नई इबारत लिखी ही है, डिस्ट्रिक्ट 3011 को भी एक विशिष्ट पहचान दी है । 

Wednesday, April 15, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में रोटरी क्लब दिल्ली अनंता ने कोरोना-काल में सेवा-कार्यों के जरिये दूसरों को प्रेरित करने के साथ साथ डिस्ट्रिक्ट की इज्जत बचाई, तो प्रियतोष गुप्ता ने रोटरी के सेवा-धर्म के अभियान को नागरिक-समाज में और विश्वसनीय व प्रतिष्ठित करने की लीडरशिप खूबी को दिखाया

गाजियाबाद । कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते बने हालात में परेशानी का शिकार बन रहे लोगों की मदद के लिए आगे आकर रोटरी क्लब दिल्ली अनंता, रोटरी क्लब दिल्ली शाहदरा, रोटरी क्लब दिल्ली अशोका, रोटरी क्लब इंदिरापुरम परिवार, रोटरी क्लब गाजियाबाद मेट्रो, रोट्रेक्टर्स आदि ने मानवता की सेवा का रोटरी धर्म तो निभाया ही है, साथ ही साथ डिस्ट्रिक्ट की इज्जत बचाने का काम भी किया है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक गुप्ता ने कोरोना वायरस के प्रकोप से बने हालात के पीड़ितों के लिए किसी भी तरह के सहायता कार्यक्रम चलाने से इंकार कर दिया था । कुछेक रोटेरियंस ने उन्हें सहायता कार्यक्रम चलाने के लिए कहा था, तो उन्होंने उन्हें सिविल डिफेंस के साथ मिल कर सहायता कार्यक्रम करने/चलाने की सलाह देकर अपनी जिम्मेदारी से हाथ झाड़ लिया था । दीपक गुप्ता के गैरजिम्मेदारी से भरे इस रवैये से निराश होकर कुछेक क्लब्स ने अपनी अपनी पहल से पीड़ितों की मदद के लिए सक्रियता दिखाई । इस मामले में रोटरी क्लब दिल्ली अनंता डिस्ट्रिक्ट के दूसरे क्लब्स तथा रोटेरियंस के लिए प्रेरणास्रोत बना । इस क्लब ने रोटरी इंडिया ह्यूमेनिटी फाउंडेशन में मोटी रकम तो दान में दी ही, परेशान और पीड़ित लोगों की मदद करने तथा उनके लिए खाने की व्यवस्था करने को लेकर भी निरंतर सक्रियता दिखाई । रोटरी क्लब दिल्ली अनंता की सक्रियता के क्षेत्र दिल्ली की बस्तियाँ रहीं, तो गाजियाबाद क्षेत्र में परेशान व पीड़ितों की तरफ रोटरी क्लब गाजियाबाद मेट्रो के पदाधिकारियों व सदस्यों ने मदद का हाथ बढ़ाया । दीपक गुप्ता ने खासा अवसरवादी रवैया दिखाया - पहले तो वह कोई सहायता कार्यक्रम चलाने/करने के पक्ष में ही नहीं थे, लेकिन उनके द्वारा हतोत्साहित किए जाने के बाद भी कुछेक क्लब्स ने जब अपने अपने स्तर पर काम शुरू किए, तो उन कामों का श्रेय जबर्दस्ती लेने के लिए वह आगे आ गए; और शेखर मेहता, भरत पांड्या, कमल सांघवी आदि को यह 'दिखाने' लगे जैसे कि यह सब काम वही कर/करवा रहे हैं ।
अच्छी बात यह रही कि दीपक गुप्ता की इस हरकत पर काम करने वाले क्लब्स के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कोई ध्यान नहीं दिया, और इसलिए नाहक कोई विवाद पैदा नहीं हुआ । क्लब्स के पदाधिकारियों और सदस्यों ने अपने अपने काम पर ध्यान दिया, और अपनी अपनी सामर्थ्यानुसार पीड़ितों व परेशान लोगों की मदद के लिए काम किया । रोटरी क्लब दिल्ली अनंता ने अपने स्तर पर तो मदद की ही, रिलायंस फाउंडेशन के साथ तालमेल बना कर भी मदद की व्यवस्था की । रोटरी क्लब दिल्ली अनंता की सक्रियता दूसरे कुछेक क्लब्स के लिए भी प्रेरणा बनी और इस तरह डिस्ट्रिक्ट में रोटरी के सेवा-धर्म के संदर्भ में माहौल बना । रोटरी क्लब गाजियाबाद मेट्रो के पदाधिकारियों और सदस्यों ने गाजियाबाद क्षेत्र में दिल्ली अनंता की तर्ज पर काम किया । गाजियाबाद मेट्रो के पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रेरित व सक्रिय करने का काम क्लब के वरिष्ठ सदस्य प्रियतोष गुप्ता ने किया । प्रियतोष गुप्ता अगले रोटरी वर्ष की आलोक गुप्ता की डिस्ट्रिक्ट टीम के एक प्रमुख पदाधिकारी भी हैं, और इस नाते उन्हें आलोक गुप्ता द्वारा आयोजित की जाने वाली कई जूम मीटिंग्स में भी शामिल होना पड़ा - और अपने पद की जरूरत के अनुसार, उसके लिए आवश्यक तैयारी करने में भी व्यस्त होना पड़ा । उल्लेखनीय है कि आलोक गुप्ता ने हाल ही के दिनों में रोटरी के बड़े पदाधिकारियों से लेकर अगले वर्ष के अपने गवर्नर-काल के क्लब-प्रेसीडेंट्स तथा अपनी डिस्ट्रिक्ट टीम के सदस्यों साथ अलग अलग ग्रुप्स में जूम मीटिंग्स की हैं; जिनके चलते आलोक गुप्ता की डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख पदाधिकारी होने के नाते प्रियतोष गुप्ता को उक्त मीटिंग्स की तैयारी करने से लेकर अपने पद की जिम्मेदारी निभाने की तैयारी तक में जुटना और व्यस्त रहना पड़ा ।
प्रियतोष गुप्ता ने आलोक गुप्ता के कार्यक्रमों में जिम्मेदारी निभाने से लेकर समाज में पैदा हुई विपदा में रोटरी का सेवा-धर्म निभाने के संदर्भ में अपनी सक्रियता और व्यस्तता को जिस प्रभावी तरीके से संभव किया और दिखाया, उसके जरिये डिस्ट्रिक्ट में लोगों को प्रियतोष गुप्ता की लीडरशिप खूबियों से परिचित होने का मौका मिला । प्रियतोष गुप्ता चूँकि अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए उनकी लीडरशिप खूबियों से परिचित होने का डिस्ट्रिक्ट के लोगों को मिले मौके का राजनीतिक अर्थ और महत्त्व भी है । रोटरी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति में उम्मीदवारों को रोटेरियंस से अलग नागरिक-समाज की मदद करते हुए कम ही देखा गया है । इस लिहाज से, कोरोना प्रकोप के चलते बने हालात में जरूरतमंदों की मदद को लेकर दिखाई गई प्रियतोष गुप्ता की सक्रियता ने वास्तव में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है । प्रियतोष गुप्ता ने अपने क्लब के पदाधिकारियों व सदस्यों को तो जरूरतमंदों की मदद के लिए तो प्रेरित किया ही, शहर की अन्य कुछेक सामाजिक संस्थाओं के साथ भी तालमेल बनाया - और इस तरह न सिर्फ जरूरतमंदों को पहुँचाई जाने वाली मदद को व्यापक बनाने का काम किया, बल्कि अन्य सामाजिक संस्थाओं के साथ तालमेल बनाने के 'रास्ते' भी खोजे और खोले । प्रियतोष गुप्ता की इन कार्रवाईयों को रोटरी के सेवा-धर्म के अभियान को नागरिक-समाज में और विश्वसनीय व प्रतिष्ठित करने की लीडरशिप खूबी के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है ।  

Friday, February 28, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पिछड़ते दिख रहे अशोक गुप्ता की स्थिति सुधारने की कोशिश में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी के नजदीक आने की अपनी कोशिशों को कहीं नुकसान तो नहीं पहुँचा लेंगे ?

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल की अपने गवर्नर वर्ष की टीम के लिए आवेदन माँगने की कार्रवाई को इस वर्ष हो रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, और इसकी शिकायत डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में आ रहे इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी से करने की तैयारी की जा रही है । कुछेक पूर्व गवर्नर्स राजीव सिंघल की कार्रवाई को लेकर खासे नाराज हैं, और मान रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के रूप में राजीव सिंघल के जब यह रंग-ढंग हैं, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में तो वह पता नहीं क्या करेंगे ? मजे की बात है कि कुछेक पूर्व गवर्नर्स की नाराजगी को राजीव सिंघल ने कोई तवज्जो नहीं दी है; उनका कहना है कि उन्होंने कोई रोटरी-विरोधी काम नहीं किया है और कुछेक पूर्व गवर्नर्स नाहक ही बात का बतंगड़ बना रहे हैं । राजीव सिंघल कुछेक पूर्व गवर्नर्स की नाराजगी को तवज्जो देते हुए भले ही नहीं दिख रहे हों; लेकिन उनके नजदीकियों के अनुसार, वह इस बात को लेकर चिंतित जरूर हैं कि शेखर मेहता व कमल सांघवी के सामने उनकी कार्रवाई की शिकायत यदि हुई - तो उन दोनों के बीच उन्हें लेकर एक नकारात्मकता जरूर बनेगी, जो उनकी रोटरी की 'आगे की यात्रा' के लिए नुकसानदेह हो सकती है । समझा जाता है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में शेखर मेहता और कमल सांघवी को एक साथ बुलाने की 'व्यवस्था' राजीव सिंघल ने ही की है, और इस व्यवस्था के जरिये राजीव सिंघल ने रोटरी के सेटअप में अपनी पहुँच ऊँची करने की तैयारी दिखाई है । ऐसे में, उन्हें डर है कि शेखर मेहता और कमल सांघवी के सामने यदि यह बात जाहिर हुई कि उनके डिस्ट्रिक्ट के कुछेक पूर्व गवर्नर्स उनकी पक्षपातपूर्ण राजनीतिक कार्रवाईयों से नाराज हैं, तो यह रोटरी के सेटअप में अपनी पहुँच ऊँची करने की उनकी तैयारी को झटका दे सकती है ।
राजीव सिंघल को इस वर्ष हो रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए डीके शर्मा व अशोक गुप्ता के बीच होने वाले चुनाव में अशोक गुप्ता के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । अशोक गुप्ता, राजीव सिंघल के नजदीकी रिश्तेदार हैं । समझा जाता है और डिस्ट्रिक्ट में चर्चा है कि राजीव सिंघल ने ही उन्हें उम्मीदवार बनाया है - अन्यथा अशोक गुप्ता की रोटरी में न तो ज्यादा रुचि रही है और न ज्यादा संलग्नता रही है । अपने क्लब के आयोजनों में ही वह वर्ष में मुश्किल से दो या तीन मौकों पर ही शामिल होते हुए देखे गए हैं । अशोक गुप्ता के नजदीकियों को ही हैरानी है कि रोटरी के आयोजनों में यदा-कदा दिखने वाले अशोक गुप्ता को आखिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की कैसे और क्यों सूझी ? लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि अशोक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट में लोगों को जानते/पहचानते तक नहीं हैं, और न ही लोग उन्हें जानते/पहचानते हैं - ऐसे में उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में कूद पड़ने का फैसला भला किसके भरोसे लिया है । हालाँकि यह जल्दी ही स्पष्ट हो गया कि अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी पूरी तरह राजीव सिंघल के भरोसे ही है । राजीव सिंघल ने अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए प्रयत्न तो काफी किए हैं, लेकिन लगता है कि अपने प्रयत्न खुद उन्हें भी नाकाफी लग रहे हैं । राजीव सिंघल को भी लग रहा है कि उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद अशोक गुप्ता की चुनावी स्थिति डीके शर्मा के मुकाबले काफी कमजोर है । आरोप है कि इसीलिए चुनाव शुरू होने से छह दिन पहले राजीव सिंघल ने अपने गवर्नर-वर्ष के पदों के जरिये वोटों को 'खरीदने' का दाँव चला है । 
राजीव सिंघल का यह कहना तो बिलकुल दुरुस्त है कि अपने गवर्नर-वर्ष की टीम के पदों का ऑफर देने का जो पत्र उन्होंने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को भेजा है, वह कोई रोटरी-विरोधी काम नहीं है । लेकिन उक्त पत्र भेजने की जो टाइमिंग है, वह पदों के ऑफर के जरिये डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को प्रभावित करने के आरोप को हवा देती है । मजे की बात यह है कि राजीव सिंघल ने अपने गवर्नर-वर्ष के लिए विजन अभी तय नहीं किया है; रोटरी की व्यवस्था के अनुसार, यह अभी तय हो भी नहीं सकता है; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में राजीव सिंघल जब ट्रेनिंग के लिए जायेंगे, तब इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट उक्त विजन देंगे - जाहिर है कि उसके बाद ही तथा उसके अनुरूप ही उन्हें अपनी टीम के पदों का निर्धारण करना होगा, और उसके बाद ही यह तय कर सकना संभव व उचित होगा कि योग्यतानुसार किसे क्या पद दिया जाए । राजीव सिंघल अपने गवर्नर-वर्ष की टीम के पदाधिकारियों को चुनने की उचित प्रक्रिया को अपनाये बिना जिस तरह से पदों के लिए आवेदन माँग बैठे हैं, उससे साफ संकेत मिला है कि यह कार्रवाई उन्होंने अपने गवर्नर-वर्ष को प्रभावी बनाने के लिए नहीं, बल्कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव को प्रभावित करने के लिए - और अशोक गुप्ता के लिए वोट 'खरीदने' के लिए की है । उनकी इस कार्रवाई के दो दिन बाद ही डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस हो रही है, जिसमें इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी आ रहे हैं - तो डिस्ट्रिक्ट के कुछेक पूर्व गवर्नर्स ने इस मामले को उनके सामने उठाने तथा राजीव सिंघल की शिकायत करने की तैयारी दिखाई है । राजीव सिंघल के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि अभी तक उन्हें पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के नजदीक समझा/पहचाना जाता था; लेकिन राजीव सिंघल अब मनोज देसाई को छोड़ कर कमल सांघवी के नजदीक आने की कोशिश कर रहे हैं - ऐसे में, उनकी चिंता है कि उनके डिस्ट्रिक्ट के कुछेक पूर्व गवर्नर्स उनकी शिकायत करेंगे, तो कमल सांघवी के यहाँ उनकी अनुकूल स्थिति कैसे बनेगी ? राजीव सिंघल के नजदीकियों को डर है कि अशोक गुप्ता की चुनावी स्थिति सुधारने के चक्कर में राजीव सिंघल रोटरी सेटअप में कहीं अपनी स्थिति न खराब कर लें ?

Thursday, February 20, 2020

रोटरी इंडिया सेन्टेंनियल समिट में शेखर मेहता के साथ कमल सांघवी जिस तरह से जुड़े रहे, और किसी तीसरे को इस समिट में तवज्जो मिलती नहीं दिखी - उससे मनोज देसाई की रोटरी में 'आगे की यात्रा' में रोड़े पड़ते देखे/पहचाने जा रहे हैं

नई दिल्ली । रोटरी इंडिया सेन्टेंनियल समिट में हर मौके पर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता और इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी की जैसी छाप रही, उसे पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की 'भावी योजना' को तगड़ी चोट पहुँचने के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । माना/समझा जा रहा है कि इस समिट का घोषित उद्देश्य चाहें जो रहा हो, लेकिन इसका अघोषित उद्देश्य भारत से अगले इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद के लिए कमल सांघवी को प्रमोट करना था - और शेखर मेहता व कमल सांघवी ने इस अघोषित उद्देश्य को बहुत ही प्रभावी तरीके से अंजाम दिया । इसके लिए शेखर मेहता व कमल सांघवी की जोड़ी ने दो बातों का खास ख्याल रखा - एक तो यह कि इन्होंने अपने अलावा किसी तीसरे को पूरे आयोजन में कोई तवज्जो नहीं मिलने दी; और दूसरे उन्होंने खेमेबाजी की दीवारों को तोड़ने की कोशिश की ताकि कोई भी नाराज न हो । विरोधी समझे जाने वाले खेमे के लोगों को छोटे छोटे मौकों पर जिम्मेदारियाँ देकर संदेश देने की कोशिश की गई कि यह सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते है । प्रेसीडेंट नॉमिनी डिनर की जिम्मेदारी राजु सुब्रमणियन को सौंपे जाने के फैसले पर हर किसी को हैरानी हुई । राजु सुब्रमणियन को पूर्व प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के नजदीक समझा/पहचाना जाता है, इसलिए उन्हें जिम्मेदारी सौंपने के फैसले को शेखर मेहता व कमल सांघवी की जोड़ी की बड़ी चाल के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है ।
शेखर मेहता व कमल सांघवी की इस चाल को मनोज देसाई की आगे की राजनीति के लिए खतरे की घंटी के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । उल्लेखनीय है कि भारत से अगले इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद के लिए मनोज देसाई की उम्मीदवारी की चर्चा रही है । सुशील गुप्ता जब प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने गए थे, तभी यह चर्चा थी कि उनके बाद प्रेसीडेंट पद के लिए शेखर मेहता व मनोज देसाई के बीच मुकाबला होगा । दोनों ही सुशील गुप्ता की आँखों के तारे रहे हैं; हालाँकि सुशील गुप्ता के नजदीकियों को लगता था कि सुशील गुप्ता पहले शेखर मेहता को और फिर मनोज देसाई को प्रेसीडेंट का पद दिलवाने का प्रयास करेंगे । अप्रत्याशित रूप से सुशील गुप्ता के प्रेसीडेंट पद तक पहुँचने के रास्ते से हट जाने के बाद, शेखर मेहता 'उम्मीद से पहले' ही प्रेसीडेंट पद के नजदीक हो गए । सुशील गुप्ता के सीन से हटने के बाद उनका खेमा नेतृत्वविहीन हो गया है । अलग अलग कारणों से चूँकि कल्याण बनर्जी और राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू की हैसियत भी 'डेकोरेटिव आईटम' जैसी हो गई है, जिससे देश की रोटरी राजनीति में नेतृत्व का वैक्यूम पैदा हो गया है । प्रेसीडेंट (नॉमिनी) होने के कारण शेखर मेहता के पास इस वैक्यूम को भरने का एक बढ़िया मौका है, और वह इस मौके का पूरा पूरा फायदा उठाते हुए दिख भी रहे हैं - लेकिन फायदा उठाने के उनके मौके में कमल सांघवी की मौजूदगी लोगों के बीच बेचैनी व हलचल भी पैदा कर रही है ।
रोटरी इंडिया सेन्टेंनियल समिट में शेखर मेहता के साथ कमल सांघवी जिस तरह से जुड़े रहे, और किसी तीसरे को इस समिट में तवज्जो मिलती नहीं दिखी - उससे लोगों के बीच कई सवाल पैदा हुए हैं । समिट में सबसे बुरी बीती भरत पांड्या और विनोद बंसल के साथ । भरत पांड्या इंटरनेशनल डायरेक्टर हैं, और विनोद बंसल समिट की तैयारी समिति के प्रेसीडेंट थे - इसके बावजूद दोनों को खास तवज्जो नहीं मिली, और दूसरे लोगों की तरह यह दोनों भी शेखर मेहता व कमल सांघवी के दिशा-निर्देशों पर ही 'काम' करते हुए देखे गए । दरअसल समिट के पूरे आयोजन में, महत्त्वपूर्ण पदों पर होने के बावजूद भरत पांड्या और विनोद बंसल की जैसी जो उपेक्षा हुई, उसे देख कर ही लोगों का ध्यान इस बात की तरफ गया कि पूरा आयोजन तो वास्तव में शेखर मेहता व कमल सांघवी की गिरफ्त में है । पूरे आयोजन का 'डिजाईन' खासी होशियारी से तैयार किया गया था, जिसमें ऐसे लोगों को तो छोटे छोटे मौकों पर जिम्मेदारियाँ दी गईं और अलग अलग कारणों से तथा रूपों में मंच पर आने का मौका दिया गया - जो शेखर मेहता व कमल सांघवी के लिए कोई खतरा और या चुनौती नहीं बनते हैं; लेकिन उनके लिए खतरा और या चुनौती बन सकने वाले बड़े नेताओं को 'किनारे' लगा दिया गया । शेखर मेहता व कमल सांघवी की इसी होशियारी में मनोज देसाई की रोटरी में 'आगे की यात्रा' में रोड़े पड़ते देखे/पहचाने जा रहे हैं । 

Tuesday, December 10, 2019

रोटरी इंस्टीट्यूट 2020 के ट्रेजरर पद पर रंजन ढींगरा की नियुक्ति के जरिये कमल सांघवी ने उनके साथ अपनी नजदीकी के किस्से सुना सुना कर लोगों को प्रभावित करने के विनोद बंसल के जुगाड़ को फेल किया और उनकी मुसीबतें बढ़ाईं 

नई दिल्ली । रंजन ढींगरा को अगले रोटरी वर्ष में कोच्चि में होने वाले रोटरी इंस्टीट्यूट का ट्रेजरर बना कर इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी ने विनोद बंसल को जोर का झटका दिया है । विनोद बंसल को उम्मीद थी और अपनी इस उम्मीद को कई मौकों पर उन्होंने दावे के साथ बताया/जताया भी है कि वर्ष 2020 के इंस्टीट्यूट के मुखिया के रूप में कमल सांघवी उन्हें खासी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी देंगे । दरअसल कमल सांघवी से मिलने वाली महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी को विनोद बंसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए कमल सांघवी और शेखर मेहता के समर्थन के संकेत के रूप में 'दिखाने' की कोशिश करते रहे हैं । उल्लेखनीय है कि शेखर मेहता जब से इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी बने हैं, तभी से विनोद बंसल लोगों को बताने/जताने का उपक्रम कर रहे हैं कि शेखर मेहता इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में उनका समर्थन करेंगे और इस कारण से उनका इंटरनेशनल डायरेक्टर बनना पक्का है । कमल सांघवी को चूँकि शेखर मेहता के सबसे नजदीकी व विश्वासपात्र रोटेरियन के रूप में देखा/पहचाना जाता है, इसलिए कमल सांघवी के साथ अपने नजदीकी संबंधों को विनोद बंसल अपनी 'अतिरिक्त योग्यता' बताते रहे हैं और दावा करते रहे हैं कि शेखर मेहता के साथ-साथ चूँकि कमल सांघवी के साथ भी उनके खास संबंध रहे हैं, और वह चूँकि दोनों के काम आते रहे हैं, इसलिए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के मामले में उन्हें दोनों का ही समर्थन मिलेगा ।
शेखर मेहता और कमल सांघवी के नजदीकी तथा इन दोनों के नेतृत्व में होने वाली मीटिंग्स में शामिल रहे लोगों का कहना हालाँकि यह रहा है कि किसी भी मौके पर इन दोनों की तरफ से विनोद बंसल को कोई विशेष तवज्जो मिलती हुई नहीं दिखी है; बल्कि कुछेक मौकों पर तो ज्यादा ही स्मार्ट बनने/दिखने की विनोद बंसल की कोशिशों पर शेखर मेहता व कमल सांघवी को खिन्न होते तथा विनोद बंसल को झिड़कते हुए भी देखा गया है । विनोद बंसल के दावों के विपरीत, लोगों ने बल्कि कुछेक मौकों पर शेखर मेहता की तरफ से रंजन ढींगरा को खास महत्त्व मिलते देखा है । बातें बनाने और बातों को बढ़ा-चढ़ा कर बताने के मामले में रंजन ढींगरा चूँकि फिसड्डी हैं, और विनोद बंसल एक्सपर्ट हैं - इसलिए विनोद बंसल तरह तरह से लोगों को यह बताने/जताने में लगे रहे हैं कि शेखर मेहता तथा कमल सांघवी की उन पर विशेष कृपा है । इस विशेष कृपा को साबित करने के लिए ही विनोद बंसल लगातार दावा करते रहे हैं कि कमल सांघवी के नेतृत्व में होने वाले वर्ष 2020 के इंस्टीट्यूट में उन्हें अवश्य ही महत्त्वपूर्ण पद मिलेगा । कमल सांघवी ने लेकिन इंस्टीट्यूट के चार महत्त्वपूर्ण पदों में से एक पद रंजन ढींगरा को दे कर विनोद बंसल की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया है और उन्हें जोर का झटका दिया है ।
विनोद बंसल के लिए झटके की बात यह नहीं है कि कमल सांघवी ने उन्हें महत्त्वपूर्ण पद नहीं दिया है; उनके लिए झटके की बात यह है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एक अन्य उम्मीदवार के रूप में रंजन ढींगरा को महत्त्वपूर्ण पद मिल गया है । इसके चलते विनोद बंसल के लिए शेखर मेहता तथा कमल सांघवी के साथ अपनी नजदीकी के किस्से सुना सुना कर लोगों को प्रभावित करने का मौका छिन गया है । इस कारण से विनोद बंसल के लिए इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अपने पक्ष में अभियान चलाना मुश्किल हो गया है । उनके लिए मुसीबत व फजीहत की बात यह है कि अभी तक वह जिस 'आधार' पर विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों तथा प्रमुख लोगों को प्रभावित करने का जुगाड़ बनाये हुए थे, वह 'आधार' ही खिसक गया है और इसलिए अब उन्हें कोई नया जुगाड़ खोजना पड़ेगा । विनोद बंसल ने शेखर मेहता तथा कमल सांघवी के साथ अपनी नजदीकी में सहारा दरअसल इसलिए खोजा/बनाया था, क्योंकि उन्हें अपने डिस्ट्रिक्ट में अपने साथी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स का कोई समर्थन नहीं है और उन्हें उनके संगठित विरोध व उपेक्षा का लगातार सामना करना पड़ रहा है । उनके डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 3011 के राजनीतिक समीकरणों को जानने/पहचानने वाले लोगों को लग रहा है कि रंजन ढींगरा को इंस्टीट्यूट का ट्रेजरर बनाए जाने से डिस्ट्रिक्ट में रंजन ढींगरा के लिए समर्थन और बढ़ेगा तथा ऐसे में डिस्ट्रिक्ट में विनोद बंसल अपने डिस्ट्रिक्ट में और अलग-थलग पड़ेंगे; और तब विनोद बंसल के लिए मुसीबतें और बढ़ेंगी ।

Thursday, November 28, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल ने शेखर मेहता के सम्मान समारोह के जरिये डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट जमाने/बनाने की जो योजना तैयार की है, उसके कारण वह प्रोटोकॉल का मजाक बनाने के साथ -साथ पैसे बनाने के आरोपों में भी फँसते जा रहे हैं  

अलीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के नाम पर डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट जमाने की जो तैयारी की थी, वह उन्हें उल्टी पड़ गई है और उनके लिए फजीहत का कारण बन रही है । शेखर मेहता के सम्मान समारोह के लिए मुकेश सिंघल ने डिस्ट्रिक्ट के दूसरे पदाधिकारियों तथा वरिष्ठ सदस्यों/नेताओं से विचार-विमर्श किए बिना 19 दिसंबर की तारीख तो तय कर ली है, लेकिन अब वह रोना रो रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट के दूसरे पदाधिकारी और नेता उक्त कार्यक्रम के लिए सहयोग नहीं कर रहे हैं । दरअसल मुकेश सिंघल ने शेखर मेहता के सम्मान समारोह के नाम पर जो भारी-भरकम रकम इकट्ठा करने की जो तैयारी दिखाई है, उसके कारण लोगों को शक हुआ है कि मुकेश सिंघल इस समारोह के सहारे सिर्फ राजनीति ही नहीं करना चाह रहे हैं, बल्कि पैसा बनाने की कोशिश में भी हैं - और इस कारण से दूसरे पदाधिकारियों तथा नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी बना ली है । मुकेश सिंघल मुसीबत व फजीहत से बचने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू के सामने समर्पण करने के लिए मजबूर तो हुए हैं, लेकिन खुद कन्वेनर बन कर किशोर कातरू को चेयरमैन बना कर प्रोटोकॉल का मजाक बनाने को लेकर विवाद में और गहरे धँस गए हैं । खुद उनके पक्ष के लोगों का कहना है कि मुकेश सिंघल को इतनी अक्ल तो होना ही चाहिए कि प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी होने के नाते उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के 'ऊपर' नहीं 'बैठना' चाहिए और अपने ही पक्ष के किसी पूर्व गवर्नर को कन्वेनर बनाना चाहिए था ।
मुकेश सिंघल के नजदीकियों का कहना है कि मुकेश सिंघल पहले पूर्व गवर्नर अरुण जैन को कन्वेनर बना रहे थे, लेकिन फिर अचानक से पता नहीं क्या हुआ कि उन्होंने अपना इरादा बदल लिया और खुद ही कन्वेनर बन गए । कुछ अन्य लोगों को लगता है और उनका कहना है कि मुकेश सिंघल को दरअसल डर हुआ कि वह यदि कन्वेनर और चेयरमैन में से कुछ भी नहीं बनेंगे, तो फिर कार्यक्रम में अपनी चौधराहट कैसे दिखा पायेंगे ? शेखर मेहता के सम्मान समारोह के बहाने मुकेश सिंघल असल में डिस्ट्रिक्ट के तथा बाहर के रोटेरियंस को दिखाना चाहते हैं कि डिस्ट्रिक्ट के नए चौधरी अब वह हैं - और इसीलिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी होने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर से ऊपर बैठ कर प्रोटोकॉल का मजाक बनाते हुए वह खुद ही कन्वेनर बन गए हैं । मुकेश सिंघल को लगता है कि इस तरह से उन्होंने कोलकाता में हुई अपनी उपेक्षा का 'बदला' ले लिया है । उल्लेखनीय है कि कोलकाता में हुए शेखर मेहता के सम्मान समारोह में देशभर के खास रोटेरियंस के बीच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू को खासी तवज्जो मिली थी और मुकेश सिंघल की पूरी तरह से उपेक्षा हुई थी । अपने नजदीकियों के बीच मुकेश सिंघल ने इस स्थिति के लिए इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी को जिम्मेदार ठहराया था । कोलकाता में जो हुआ था, उसका बदला लेने के लिए ही मुकेश सिंघल ने शेखर मेहता का सम्मान समारोह अपने डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट में करने की योजना बनाई; और डिस्ट्रिक्ट 3011 में हुए सम्मान समारोह में शेखर मेहता जब दिल्ली पहुँचे हुए थे, तब उन्होंने 19 दिसंबर की तारीख अपने डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में उनके सम्मान समारोह के लिए तय करवा ली ।
मुकेश सिंघल ने शेखर मेहता से तारीख तो ले ली और कार्यक्रम की तैयारी भी शुरू कर दी; लेकिन तैयारियाँ शुरू करने के साथ ही वह मुसीबत में फँसते जा रहे हैं । उनके नजदीकियों के अनुसार ही, पहले उन्होंने पूर्व गवर्नर आईएस तोमर के साथ मिलकर कार्यक्रम करने की योजना बनाई थी, और उन्हें कार्यक्रम का मुख्य संरक्षक बना लिया; किंतु जल्दी ही उन्हें समझ में आ गया कि आईएस तोमर को ज्यादा तवज्जो देने से डिस्ट्रिक्ट के दूसरे, खासकर सत्ताधारी पूर्व गवर्नर्स का सहयोग उन्हें नहीं मिलेगा । इसलिए, जैसा कि निमंत्रण पत्र में दिख रहा है, मुख्य संरक्षक होने के बावजूद आईएस तोमर का नाम उन्होंने फिलिसिटेशन कमेटी के सदस्यों की सूची में डाल दिया । मुकेश सिंघल को यह भी समझ में आया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को इग्नोर करके उनके लिए कार्यक्रम कर पाना संभव नहीं होगा, और तब वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के सामने समर्पण करने तथा कार्यक्रम में उन्हें शामिल करने के लिए मजबूर हुए । दोनों ही मामलों में प्रोटोकॉल की ऐसीतैसी करने के लिए उन्हें अपनों और परायों की जोरदार आलोचना सुननी/सहनी पड़ रही है । मुकेश सिंघल की इससे भी बड़ी फजीहत तब हुई जब शेखर मेहता के सम्मान समारोह के लिए उन्होंने प्रत्येक क्लब से 50/50 हजार रुपए सहयोग राशि के रूप में माँगे । अलीगढ़ में आयोजित हुए रोटरी डिस्ट्रिक्ट फाउंडेशन सेमीनार में मुकेश सिंघल द्वारा की गई इस माँग पर लोगों के बीच तीखी प्रतिक्रिया हुई; और लोगों के बीच आवाजें सुनी गईं कि शेखर मेहता के सम्मान समारोह के बहाने मुकेश सिंघल ने क्या अपनी जेब भरने की भी तैयारी कर ली है ? कई क्लब्स के पदाधिकारी कहते सुने गए हैं कि शेखर मेहता के सम्मान समारोह के नाम पर मुकेश सिंघल जो कर रहे हैं, वह संदेहास्पद है और इसलिए वह तो 50 हजार रुपए नहीं देंगे । शेखर मेहता के सम्मान समारोह को लेकर मुकेश सिंघल जिस तरह से चौतरफा मुसीबतों में घिर गए हैं तथा फजीहत का शिकार हो रहे हैं, उसे देखते हुए उनके नजदीकियों को ही लग रहा है कि मुकेश सिंघल ने शेखर मेहता के सम्मान समारोह के जरिये डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट जमाने/बनाने की जो योजना तैयार की थी, वह तो धूल में मिलती नजर आ रही है ।

Monday, November 25, 2019

रोटरी इंडिया सेन्टेंनियल समिट की ऑर्गेनाइजिंग कमेटी में अनिरुद्ध राय चौधरी को ज्वाइंट चेयरमैन तथा मुकेश अरनेजा को वाइस चेयरमैन बना कर शेखर मेहता व कमल सांघवी ने विनोद बंसल को 'कट डाउन टू साइज' करने का काम किया है क्या ?

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट 3012 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मुकेश अरनेजा को फरवरी में होने जा रहे रोटरी इंडिया सेन्टेंनियल समिट की ऑर्गेनाइजिंग कमेटी में वाइस चेयरमैन का पद देकर कन्वेनर कमल सांघवी ने कमेटी के चेयरमैन विनोद बंसल के 'पर कतरने' की व्यवस्था की है क्या ? उल्लेखनीय है कि कमेटी में कई वाइस चेयरमैन पहले से ही नियुक्त हैं; लोगों के बीच चर्चा यह है कि कमल सांघवी यदि सचमुच मुकेश अरनेजा की क्षमताओं से परिचित और प्रभावित हैं, तो उन्हें सबसे पहले मुकेश अरनेजा को ही वाइस चेयरमैन बनाना चाहिए था - लेकिन कमेटी का काम काफी आगे बढ़ जाने के बाद उन्हें जिस तरह 'अचानक' से मुकेश अरनेजा को वाइस चेयरमैन बनाने का ख्याल आया है, उससे लगता है कि मुकेश अरनेजा को वाइस चेयरमैन बनाने के पीछे उनका उद्देश्य 'कुछ और' है । इस 'कुछ और' में विनोद बंसल के पर कतरने को देखा/पहचाना जा रहा है । यह इसलिए भी देखा/पहचाना जा रहा है, क्योंकि मुकेश अरनेजा को वाइस चेयरमैन पद पर नियुक्ति का पत्र रिलीज करने से पहले कोलकाता में हुई कमेटी की मीटिंग में विनोद बंसल ने जब कुछ ज्यादा 'चेयरमैनी' दिखाने की कोशिश की थी, तब कमल सांघवी ने उन्हें हड़काया था और उनके व्यवहार पर आपत्ति की थी । उसी मीटिंग में, रजिस्ट्रेशन बढ़वाने के विनोद बंसल के प्रयासों को भी कमल सांघवी ने सफल नहीं होने दिया था । यहाँ यह ध्यान रखना भी प्रासंगिक होगा कि विनोद बंसल और मुकेश अरनेजा के बीच राजनीतिक बैर की बात रोटेरियंस पदाधिकारियों व नेताओं के लिए कोई दबी-छिपी बात नहीं है ।
दरअसल विनोद बंसल की स्थिति उस दूल्हे की तरह की हो गई है, जिसे सजा-धजा कर और मुकुट पहना कर बग्घी पर तो बैठा दिया जाता है, लेकिन बारात में उसकी परवाह कोई नहीं करता और वह बेचारा सबसे पीछे अकेला बारात के आगे बढ़ने का इंतजार करता रहता है । अभी हाल ही में, उनके अपने डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के हुए स्वागत-सम्मान समारोह की ऑगेनाइजिंग कमेटी के वह चेयरमैन तो बना दिए गए थे, लेकिन समारोह की तैयारी से तथा उसके आयोजन से उन्हें अलग-थलग ही रखा गया था - जिस पर उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी भी व्यक्त की थी । फरवरी में कोलकाता में होने जा रहे रोटरी इंडिया सेन्टेंनियल समिट की तैयारी में भी उनके साथ वैसा ही मजाक हो रहा है । समिट की ऑगेनाइजिंग कमेटी के वह चेयरमैन तो बना दिए गए हैं, लेकिन नियुक्तियों से लेकर समिट की व्यवस्था के सभी फैसले कमल सांघवी ही कर रहे हैं, और इसलिए ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के बाकी पदाधिकारी भी उन्हें कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं । विनोद बंसल को जोर का झटका यह भी लगा है कि डिस्ट्रिक्ट 3291 के पूर्व गवर्नर अनिरुद्ध राय चौधरी को कोलकाता में होने जा रहे रोटरी इंडिया सेन्टेंनियल समिट की तैयारी में पहले को-चेयरमैन बनाया गया था, लेकिन उन्हें प्रोमोट करके अब ज्वाइंट चेयरमैन बना दिया गया है और इस तरह उन्हें अब विनोद बंसल के 'नीचे' नहीं, बल्कि 'बराबर' में बैठा दिया गया है ।
रोटरी इंडिया सेन्टेंनियल समिट के चेयरमैन के रूप में विनोद बंसल के साथ यह जो 'खेल' हो रहा है, उसे उनकी फजीहत के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; और इसे देख/पहचान कर उनके शुभचिंतकों को लग रहा है कि इस तरह से फजीहत करवाने से अच्छा है कि विनोद बंसल चेयरमैन से इस्तीफा दे दें । उल्लेखनीय है कि विनोद बंसल और उनके शुभचिंतकों ने सोचा तो यह था कि सेन्टेंनियल समिट के चेयरमैन के रूप में उन्हें अपने आपको शेखर मेहता का सबसे करीबी दिखाने का मौका मिलेगा, लेकिन हो उल्टा रहा है और दिख यह रहा है कि जैसे शेखर मेहता ने कमल सांघवी को हरी झंडी दे दी है कि वह जैसे चाहें वैसे विनोद बंसल का तमाशा बनाएँ । उल्लेखनीय है कि सेन्टेंनियल समिट का कार्यक्रम शेखर मेहता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पिछले वर्ष तब बना था, जब सुशील गुप्ता इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी थे । स्थिति वही होती, तो इस आयोजन का ज्यादा जलवा नहीं होता और यह एक सामान्य कार्यक्रम ही होता । इसीलिए इस कार्यक्रम में तब किसी की दिलचस्पी नहीं थी । सुशील गुप्ता ने तब विनोद बंसल को जबर्दस्ती इसका चेयरमैन बना दिया था । विनोद बंसल ने भी बेमन से इसे स्वीकार कर लिया था । लेकिन स्थिति बदली तो कार्यक्रम का महत्त्व भी बढ़ गया और विनोद बंसल भी चेयरमैन के रूप में बम बम करने लगे । लोगों को लग रहा है कि यह देख कर शेखर मेहता व कमल सांघवी को विनोद बंसल को 'कट डाउन टू साइज' करना जरूरी लगा है, और तरह तरह से उन्हें नीचा दिखाने और उनकी फजीहत करने का खेल शुरू हो गया ।
यह खेल मुकेश अरनेजा को अचानक से वाइस चेयरमैन बनाने की कार्रवाई से और गंभीर हो गया है । मुकेश अरनेजा के नजदीकी ही लोगों को बता रहे हैं कि चेयरमैन के रूप में विनोद बंसल ने जिस गुपचुप तरीके से अपने डिस्ट्रिक्ट के अपने नजदीकी पूर्व गवर्नर विनय भाटिया को ट्रेजरर बना लिया है, उससे उनकी भूमिका संदेहास्पद हो गई है और उनकी भूमिका पर निगाह रखने के लिए ही मुकेश अरनेजा को वाइस चेयरमैन बनाया गया है । मुकेश अरनेजा के नजदीकी लोगों को ध्यान दिला रहे हैं कि विनय भाटिया पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में हिसाब-किताब में गड़बड़ी करने के आरोप रहे हैं, जिन पर डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर होने के बावजूद विनोद बंसल चुप बने रहे थे; इसके अलावा, विनोद बंसल पर रवि चौधरी के गवर्नर वर्ष के हिसाब-किताब की गड़बड़ियों पर भी पर्दा डालने के आरोप रहे हैं । मुकेश अरनेजा के नजदीकियों का कहना है कि उन्हीं आरोपों को देखते हुए विनोद बंसल व विनय भाटिया की जोड़ी को मनमानी न करने देने के उद्देश्य से मुकेश अरनेजा को वाइस चेयरमैन बनाया गया है । मुकेश अरनेजा के नजदीकियों का ऐसा कहना यदि सच है तो माना जा रहा है कि रोटरी इंडिया सेन्टेंनियल समिट के मामले में अभी और दिलचस्प नज़ारे देखने को मिलेंगे ।

Thursday, October 17, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू को कोलकाता में हुए शेखर मेहता के सम्मान समारोह में जो तवज्जो मिली और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल की जो उपेक्षा हुई, उसे डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में तोमर खेमे के लिए बड़े झटके/खतरे का संकेत माना/देखा जा रहा है

बरेली । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में शेखर मेहता के कोलकाता में हुए सम्मान समारोह में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू को जो और जैसी तवज्जो मिली, उसे डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में तोमर खेमे के लिए खतरे/झटके की घंटी के रूप में सुना/देखा जा रहा है । तोमर खेमे के नेताओं को भी समझ में आने लगा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के बहाने जिस लड़ाई को वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू व डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर रवि प्रकाश अग्रवाल के खिलाफ समझ रहे हैं, उनकी वह लड़ाई वास्तव में इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी के साथ है । कोलकाता में हुए कार्यक्रम की तैयारी व उसके 'डिजाइन' के पीछे चूँकि कमल सांघवी ही थे; इसलिए किशोर कातरू को वहाँ जो और जैसी तवज्जो मिली, उसके पीछे कमल सांघवी की सोची-समझी रणनीति को ही देखा/पहचाना जा रहा है और माना जा रहा है कि इसके जरिये डिस्ट्रिक्ट के नेताओं को 'संदेश' दिया जा रहा है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल के लिए इस 'संदेश' को खासा महत्वपूर्ण समझा जा रहा है । दरअसल मुकेश सिंघल ही तोमर खेमे की तरफ से अत्यंत सक्रिय हैं; कई लोगों का कहना है कि मुकेश सिंघल को डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में इस होशियारी के साथ काम करना सीखना चाहिए कि वह अपना काम भी कर लें, और बदनामी से भी बच जाएँ - अभी लेकिन उल्टा हो रहा है, वह कुछ कर भी नहीं पा रहे हैं और बदनाम ज्यादा हो रहे हैं । यह भी एक कारण रहा कि कोलकाता में हुए इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के सम्मान समारोह में उन्हें कोई तवज्जो नहीं मिली ।
उल्लेखनीय है कि मुकेश सिंघल जिस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होंगे, शेखर मेहता उसी वर्ष इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होंगे - तब तक कमल सांघवी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद से तो भूतपूर्व तो हो चुके होंगे, लेकिन शेखर मेहता के सबसे ज्यादा विश्वासपात्र होने के कारण रोटरी में उनका जलवा इंटरनेशनल डायरेक्टर से ज्यादा ही होगा । ऐसे में, माना/समझा जा रहा है कि कोलकाता में मिले 'संदेशों' को पढ़ने/समझने में मुकेश सिंघल ने यदि कोई चूक की, तो अपने गवर्नर-वर्ष में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का मानना/कहना है कि मुकेश सिंघल को चुप करा कर दरअसल तोमर खेमे की राजनीति को कमजोर करने की चाल चली जा रही है । रोटरी की चुनावी राजनीति में चूँकि सत्ताधारियों की विशेष भूमिका होती है, इसलिए तोमर खेमे के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के रूप में मुकेश सिंघल की सक्रियता की खासी अहमियत है; उनके बीच डर है कि चुनावी मोर्चेबंदी में मुकेश सिंघल यदि सक्रिय नहीं रहे तो उनकी स्थिति और कमजोर हो जाएगी । मुकेश सिंघल के नजदीकियों का कहना/बताना है कि मुकेश सिंघल खुद यह रोना रोते हैं कि वह डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के झंझट में ज्यादा नहीं पड़ना चाहते हैं, लेकिन तोमर खेमे के नेता उन्हें जबर्दस्ती खींच लेते हैं - वह फिर बच नहीं पाते हैं और फँस जाते हैं ।
नोमीनेटिंग कमेटी के चुनाव में जो हुआ, उससे यह बात साबित हो गई है कि तोमर खेमे के नेता जिन तरकीबों से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की लड़ाई जीतना चाहते हैं, उनसे तो वह नहीं जीत पायेंगे । नोमीनेटिंग कमेटी में जो हुआ, अपनी आपत्तियों/शिकायतों के अनसुना रहने के उनके जो आरोप रहे; और अब कोलकाता में जो हुआ - उसे देख कर तोमर खेमे के नेताओं को इस बात को साफ तौर पर समझ लेना चाहिए कि अभी तक दिखाए गए उनके तौर-तरीके कामयाबी दिलवाने के मामले में कमजोर ही साबित रहने हैं, और अब उन्हें ज्यादा व्यावहारिक व व्यवस्थित तरीके अपनाने पड़ेंगे । तोमर खेमे के नेताओं के सामने एक और समस्या यह आ पड़ी है कि नोमीनेटिंग कमेटी के चुनाव में जो हुआ, और अब कोलकाता में जो होने की खबरें सामने आ रही हैं, उनके चलते - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उनके उम्मीदवार सतीश जायसवाल का हौंसला/भरोसा भी टूटता सुना जा रहा है । सतीश जायसवाल के कुछेक समर्थक व शुभचिंतक उन्हें समझाने लगे हैं कि पवन अग्रवाल के अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने के बाद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई का समीकरण अब बदल चुका है और उनके लिए अब ज्यादा मौका नहीं बचा है । ऐसे में तोमर खेमे के नेताओं को डर हो चला है कि इस तरह की बातों से सतीश जायसवाल का हौंसला व भरोसा यदि सचमुच ही टूट गया तो फिर वह तो बिना लड़े ही चुनावी मैदान से बाहर हो जायेंगे । ऐसे में, तोमर खेमे के नेताओं के सामने यह चुनौती भी पैदा हो गई है कि वह सतीश जायसवाल को भी तथा डिस्ट्रिक्ट के लोगों को भी यह भरोसा व हौंसला दें/दिलवाए कि नोमीनेटिंग कमेटी में तो बेईमानी के जरिये उन्हें हरा दिया गया है, लेकिन कोई जरूरी नहीं है कि सत्ता खेमे की बेईमानी आगे भी चल सके और कामयाबी पा सके । आगे क्या होगा, यह तो आगे पता चलेगा; अभी लेकिन नोमीनेटिंग कमेटी के चुनाव के बाद कोलकाता में किशोर कातरू को तवज्जो मिलने तथा मुकेश सिंघल की उपेक्षा होने के चलते बने परिदृश्य में डिस्ट्रिक्ट के चुनावी माहौल में तोमर खेमा दबाव में तो आ गया है ।

Thursday, October 3, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में नोमीनेटिंग कमेटी के चुनाव में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू द्वारा की गई मनमानी व नियमों की अनदेखी के आरोपों के चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की पवन अग्रवाल की उम्मीदवारी मुसीबत में फँसेगी क्या ?

बरेली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनावी झमेले में रोटरी के प्रमुख कामों तथा उसके नियम-कानूनों की अनदेखी तथा ऐसीतैसी करने के कारण रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों और नेताओं की 'निगाह' में आ गए हैं, जिसे उनके और डिस्ट्रिक्ट के लिए अच्छा नहीं समझा जा रहा है । दिल्ली में अभी हाल ही में आयोजित हुए नेशनल लेबल के पोलियो कार्यक्रम में उपस्थित रहना जरूरी समझने की बजाये डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में सक्रिय रहने को तरजीह देने के कारण किशोर कातरू रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों व नेताओं के बीच आलोचना का शिकार बन रहे हैं । किशोर कातरू की इस हरकत के चलते इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी को भी नीचा देखना पड़ा है । चर्चा रही कि कमल सांघवी के जोन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पोलियो कार्यक्रम की महत्ता नहीं समझ रहे हैं । उक्त कार्यक्रम में देशभर के रोटरी डिस्ट्रिक्ट्स के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स तथा रोटरी के बड़े पदाधिकारी व नेता उपस्थित हुए थे । इस कार्यक्रम में किशोर कातरू की अनुपस्थिति ने उनकी और डिस्ट्रिक्ट 3110 की छवि खराब करने का काम किया । दरअसल कुछेक पदाधिकारियों और नेताओं को डिस्ट्रिक्ट के लोगों की तरफ से बता दिया गया है कि किशोर कातरू को जिस समय पोलियो के कार्यक्रम में शामिल होना था, उस समय वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार पवन अग्रवाल को लेकर अलीगढ़ के क्लब्स में राजनीतिक प्रचार में जुटे हुए थे । दिल्ली में हुए नेशनल लेबल के पोलियो कार्यक्रम में किशोर कातरू की अनुपस्थिति दरअसल इसलिए तुरंत से नोटिस में आ गई, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उनके मनमाने व नियम-विरुद्ध कार्य-व्यवहार को लेकर ढेरों शिकायतें रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों व नेताओं के पास पहले से ही पहुँची हुई हैं ।
नोमीनेटिंग कमेटी के लिए चलने वाली चुनावी प्रक्रिया को लेकर रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों व बड़े नेताओं के पास किशोर कातरू की बहुत सी शिकायतें पहुँची हुई हैं । आरोप हैं कि उक्त चुनावी प्रक्रिया में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में किशोर कातरू ने जी भर कर मनमानियाँ की हैं और रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों का तरह तरह से खूब उल्लंघन किया है । नोमीनेटिंग कमेटी में प्रतिनिधित्व के लिए जोन में आने वाले क्लब्स का निर्धारण गुपचुप तरीके से किया गया और इस बात को डिस्ट्रिक्ट के लोगों से छिपाया गया । आरोपों के अनुसार, चुनाव से दो दिन पहले तक क्लब्स को जोन में जोड़ने/घटाने काम किया गया । नए बने छह क्लब्स को मनमाने तरीके से जोन्स में शामिल किया गया और इस काम में भी कोई पारदर्शिता नहीं रखी गई तथा जानकारी माँगने वालों को जबाव तक नहीं दिए गए । कई क्लब्स के पदाधिकारियों को तो ऐन मौके पर ही पता चला कि वह किस जोन में हैं, और नोमीनेटिंग कमेटी के लिए उनके उम्मीदवार कौन हैं । आरोप है कि किशोर कातरू ने यह सब 'अपने' उम्मीदवारों की जीत को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया, ताकि वह नोमीनेटिंग कमेटी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए पवन अग्रवाल को अधिकृत उम्मीदवार चुनवा सकें ।
किशोर कातरू को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मनमानियाँ करने का हौंसला इसलिए भी मिला, क्योंकि उनकी कारगुजारियों की शिकायतों पर रोटरी इंटरनेशनल की तरफ से कोई कार्रवाई होती हुई नहीं दिखी । मजे की बात यह रही कि शिकायत करने वालों को रोटरी इंटरनेशनल की तरफ से इस बात की भी जानकारी नहीं मिली कि उन्हें कोई शिकायत मिली भी है । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के इस व्यवहार को किशोर कातरू को इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी के समर्थन के रूप में देखा/पहचाना गया है । लोगों का कहना है कि कमल सांघवी की तरफ से शह मिलने के कारण ही किशोर कातरू के हौंसले खासे बुलंद हुए और चुनाव संबंधी नियम-कानूनों का मजाक बना देने में उन्होंने कोई संकोच नहीं किया । किशोर कातरू के लिए मुसीबत व फजीहत की बात यह हो गई है कि पवन अग्रवाल के कई समर्थकों व शुभचिंतकों को डर हो गया है कि किशोर कातरू की मनमानियाँ कहीं पवन अग्रवाल की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने का काम न करें । दरअसल नोमीनेटिंग कमेटी के लिए हुए चुनाव में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में किशोर कातरू ने जो और जिस तरह की मनमानियाँ की हैं, उसके कारण कई क्लब्स के प्रेसीडेंट्स व पदाधिकारियों ने अपने आपको अपमानित महसूस किया है । कई क्लब्स के प्रेसीडेंट्स व अन्य पदाधिकारियों को लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में किशोर कातरू उन पर अपने फैसले थोपने की कोशिश कर रहे हैं, और उन्हें मनमाने तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं । क्लब्स के पदाधिकारियों की तरफ से किशोर कातरू के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करने वाली बातों को सुन कर ही पवन अग्रवाल की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों को आशंका हो चली है कि किशोर कातरू की मनमानियाँ और उनके कारण होने वाली उनकी बदनामी कहीं पवन अग्रवाल की उम्मीदवारी के अभियान की कहीं हवा न निकाल दे ? 

Tuesday, September 17, 2019

रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता की संस्था रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के आयोजन में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार विनय कुलकर्णी की मौजूदगी ने आयोजन तथा शेखर मेहता की भूमिका को विवादास्पद बनाया

नई दिल्ली । कोलकाता में हो रहे रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विनय कुलकर्णी की उपस्थिति ने जोन 7 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को विवाद में घसीट लिया है । रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस को मिली/भेजी गई कुछेक शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि यह कार्यक्रम विनय कुलकर्णी की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है, और रोटरी इंटरनेशनल को इसका संज्ञान लेना चाहिए तथा इस बारे में उचित कार्रवाई करना चाहिए । शिकायतों में कहा गया है कि यह बहुत ही अफसोस की बात है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने के लिए होने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग से ठीक पहले रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन की उक्त मीटिंग की - और उसमें विनय कुलकर्णी की उपस्थिति से परहेज भी नहीं किया । उल्लेखनीय है कि जोन 7 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में विनय कुलकर्णी भी उम्मीदवार हैं, और उन्हें शेखर मेहता खेमे के उम्मीदवार के रूप में ही देखा/पहचाना जाता है । उल्लेखनीय यह भी है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन करने के लिए तीन दिन बाद ही - 21 सितंबर को नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग होनी है ।
गौरतलब है कि रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के पीछे शेखर मेहता का ही दिमाग और उनकी मेहनत है । 2011 में श्रीलंका में आयोजित हुई रोटरी साऊथ एशिया कॉन्फ्रेंस में शेखर मेहता की प्रेरणा व पहल से श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल, मालदीव्स तथा भारत के रोटेरियंस ने क्षेत्र में अन्य कई विषयों के साथ-साथ शिक्षा व स्वास्थ्य को लेकर काम करने के लिए रोटरी साऊथ एशिया सोसायटी फॉर डेवेलपमेंट एंड को-ऑपरेशन का गठन किया था । पिछले वर्ष इसका ही नाम बदल कर रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन किया गया है । मजे की बात यह है कि इसके तहत काम भले ही शिक्षा व स्वास्थ्य को लेकर किए गए हैं, लेकिन इसके गठन तथा इसके कामों के पीछे असली उद्देश्य राजनीतिक ही देखा/पहचाना गया है । इसी कारण से बासकर चॉकलिंगम ने इंटरनेशनल डायरेक्टर के अपने कार्यकाल में रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन को तथा उसके कार्यक्रमों को कोई तवज्जो नहीं दी; और उनके इंटरनेशनल डायरेक्टर के कार्यकाल में इसकी सक्रियता भी कम रही और जो रही भी वह दबी-छिपी रही । रोटेरियंस के बीच माना जाता रहा है कि शेखर मेहता ने लंबी राजनीतिक छलाँग लगाने के लिए ही इसका गठन किया है । रोटरी में बहुत से लोग मानते और कहते हैं कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट (नॉमिनी) के पद पर पहुँचने में रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के जरिए किए गए 'कामों' ने शेखर मेहता की काफी मदद की है ।
सिर्फ समझा ही नहीं जा रहा है, बल्कि कहा भी जा रहा है कि रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन ने अब विनय कुलकर्णी को इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने का बीड़ा उठा लिया है । रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस को भेजी गई शिकायतों में कहा गया है कि रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन के कोलकाता में हो रहे कार्यक्रम में शेखर मेहता तथा मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर भरत पांड्या व कमल सांघवी की उपस्थिति में विनय कुलकर्णी की जिस तरह की मौजूदगी रही और 'दिखाई' गई है, वह जोन 7 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है और चुनावी आचार-संहिता का खुला उल्लंघन है । कहा गया है कि डिस्ट्रिक्ट्स में होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में आचार-संहिता के नाम पर उम्मीदवारों पर तरह तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं, लेकिन इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर्स की मौजूदगी में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार को खुल्लमखुल्ला तवज्जो दी जा रही है । बिडंवना और निराशा की बात यह भी है कि रोटरी इंटरनेशनल को भेजी गई शिकायतों के संबंध में संबद्ध रोटेरियंस का यह भी कहना है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के सान्निध्य में ही जब चुनावी आचार-संहिता का उल्लंघन किया जा रहा हो और मजाक बनाया जा रहा हो, तो न्याय मिलने की उम्मीद भी घट जाती है । इसी कारण से जोन 7 में इंटरनेशनल डायरेक्टर का चयन करने के लिए होने वाली नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग से चार दिन पहले, 16 सितंबर को कोलकाता में शुरू हुए दो दिवसीय रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन का आयोजन गहरे विवाद में फँस गया है ।

Wednesday, August 28, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल के जरिये राजनीतिक प्रभुत्व जमाने की पूर्व गवर्नर आईएस तोमर की तैयारी ने डिस्ट्रिक्ट में जो उथल-पुथल मचाई है, उसमें सतीश जायसवाल की उम्मीदवारी उनके लिए बड़ी चुनौती बनी; कमल सांघवी की बढ़ी राजनीतिक हैसियत ने भी उनकी मुश्किलों को बढ़ाया

बरेली । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति को पिछले कई वर्षों से अपने नियंत्रण में रखे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर आईएस तोमर अपने नियंत्रण को बनाए रखने के लिए अब उन्हीं लोगों को पुचकारने/मनाने में लगे हैं, जिन्हें खुद उन्होंने खुड्डे-लाइन लगा दिया था । पवन अग्रवाल को गच्चा देकर आईएस तोमर ने सतीश जायसवाल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अपना उम्मीदवार तो बना लिया है, लेकिन सतीश जायसवाल की चुनावी नाव कहीं बीच मँझधार में ही न डूब जाए - आईएस तोमर को इसकी चिंता सताने लगी है । दरअसल हाल-फिलहाल के वर्षों में डिस्ट्रिक्ट में सक्रिय हुए तथा प्रभावी बने रोटेरियंस के बीच आईएस तोमर का या तो 'परिचय' नहीं है और परिचय है तो पैठ नहीं है; कई रोटेरियंस तो बल्कि अलग अलग कारणों से आईएस तोमर को सबक सिखाने के चक्कर में हैं । कई लोगों को आईएस तोमर ने अपने व्यवहार व रवैये से अपना 'दुश्मन' बना लिया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल के जरिये डीआरएफसी (डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन) पद को लेकर आईएस तोमर ने जो राजनीति की, उसमें भी उन्हें बदनामी के अलावा और कुछ नहीं मिला है । आईएस तोमर को यह भी लगता है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी उनके डिस्ट्रिक्ट में लोगों को उनके खिलाफ भड़काने का काम कर रहे हैं, और शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी चुने जाने से कमल सांघवी की 'ताकत' व हैसियत और बढ़ गई है । उल्लेखनीय है कि मुकेश सिंघल उसी वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होंगे, जिस वर्ष शेखर मेहता इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होंगे - ऐसे में आईएस तोमर के साथ मिलकर डीआरएफसी पद को लेकर किए गए उनके तमाशे की उन्हें 'भारी' कीमत चुकानी पड़ सकती है । इन्हीं सब स्थितियों के चलते आईएस तोमर के लिए डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट को बचाये/बनाये रखना तथा मनमानी करते रहना एक बड़ी चुनौती है ।
यह चुनौती इसलिए भी है, क्योंकि आईएस तोमर को पिछले कुछ समय से लगातार झटके पर झटके लग रहे हैं । उल्लेखनीय है कि आईएस तोमर पहले तो बरेली के मेयर के चुनाव में बड़े अंतर से पराजित हुए । फिर रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में उन्हें कमल सांघवी से बड़ी हार मिली । यहाँ यदि सिर्फ हार मिलती तो भी कोई बड़ी बात नहीं होती - रोटरी की राजनीति में एक बार की हार को अगली बार की जीत में बदलने में देर नहीं लगती है; लेकिन आईएस तोमर ने जिस तरह से चुनाव को थोपा और चुनावी मुकाबले को वह जिस निम्न-स्तर पर ले गए, उससे उनकी साख व पहचान को खासी चोट पहुँची । इसके बाद, और ज्यादा बुरी स्थिति उनकी अपने डिस्ट्रिक्ट में डीआरएफसी पद को लेकर बनी, जहाँ उनकी 'होशियारी' ही उन पर भारी पड़ी - डीआरएफसी पद को लेकर की गई उनकी राजनीति ने ही उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की राजनीति में फँसा दिया है । डीआरएफसी पद के मामले में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू के रवैये से आईएस तोमर को जोर का जो झटका लगा है, उसकी उन्होंने वास्तव में कल्पना भी नहीं की थी । किशोर कातरू के साथ उनके वर्षों के संबंध हैं; वह दावा करते हैं और बहुत से लोग उनके दावे को सही भी मानते हैं कि उन्होंने ही किशोर कातरू को रोटरी में आगे बढ़ाया है तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनाया/बनवाया है । 12 वर्षों तक डीआरएफसी रहे आईएस तोमर को उम्मीद थी कि अगले डीआरएफसी को तय करते समय किशोर कातरू उनसे सलाह करेंगे और या तो उन्हें ही पद पर बने रहने के लिए राजी करने का प्रयास करेंगे और या उनसे पूछ कर डीआरएफसी चुनेंगे । किशोर कातरू ने इस मामले में लेकिन उन्हें कोई तवज्जो ही नहीं दी और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दिनेश शुक्ला व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल के साथ मिल कर पूर्व गवर्नर शरत चंद्रा को डीआरएफसी चुन लिया । डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच चर्चा है कि आईएस तोमर को डीआरएफसी पद के संदर्भ में लिया/किया गया यह फैसला और फैसला करने का 'तरीका' पसंद नहीं आया, और उन्होंने मुकेश सिंघल के जरिये शरत चंद्रा को डीआरएफसी पद से - बैठने से पहले ही 'उतरवा' दिया ।
मजे की और बिडंवना की बात यह है कि पूर्व गवर्नर देवेंद्र अग्रवाल का डीआरएफसी बनना भी आईएस तोमर को पसंद नहीं है, लेकिन पसंद का डीआरएफसी बनाने/बनवाने का खेल उनके हाथ से निकल चुका है - इसलिए मन-मार कर उन्हें यह फैसला मंजूर करना ही पड़ा । डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लगता है कि देवेंद्र अग्रवाल से 'बदला' लेने के लिए ही आईएस तोमर ने पवन अग्रवाल की उम्मीदवारी का साथ छोड़ा है । आईएस तोमर ने पहले पवन अग्रवाल की उम्मीदवारी का समर्थन करने की घोषणा की थी, लेकिन फिर उन्हें लगा कि पवन अग्रवाल तो देवेंद्र अग्रवाल के ज्यादा नजदीक हैं - इसलिए उन्होंने पवन अग्रवाल का साथ छोड़ कर सतीश जायसवाल को जबर्दस्ती उम्मीदवार बना/बनवा दिया । उम्मीदवार बनते ही सतीश जायसवाल ने हालाँकि मेहनत तो काफी की है, और लोगों के बीच तेजी से संपर्क-अभियान चलाया है; लेकिन उनके समर्थकों को भी लग रहा है कि पवन अग्रवाल की डिस्ट्रिक्ट में पहले से जो एक अच्छी व सकारात्मक पहचान है, उन्हें रोटरी के लिए काम करने वाले रोटेरियन के रूप में देखा/पहचाना जाता रहा है - उसके कारण पवन अग्रवाल से मुकाबला करना सतीश जायसवाल के लिए खासा चुनौतीपूर्ण होगा । असल में सतीश जायसवाल जिस तरह अचानक से उम्मीदवार बने हैं, उसके चलते लोगों के बीच उनकी उम्मीदवारी को लेकर एक नकारात्मक सोच बनी है । लोगों को लग रहा है कि आईएस तोमर ने अपनी खुन्नस व अपनी राजनीति के चक्कर में सतीश जायसवाल की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट पर जबर्दस्ती थोप दिया है । आईएस तोमर को भी लगता है कि आभास हो रहा है कि उन्होंने सतीश जायसवाल को उम्मीदवार तो बना/बनवा दिया है, लेकिन उनकी उम्मीदवारी को समर्थन दिलवाना मुश्किल तो होगा ही । मुश्किल को दूर करने के लिए ही आईएस तोमर ने अब उन लोगों को फोन खड़खड़ाना शुरू किया है, जो पहले उनके साथ होते थे, लेकिन जो कई वर्षों से गुम हुए पड़े हैं । खास बात यह है कि अधिकतर लोग ऐसे ही हैं, जिन्हें खुद आईएस तोमर ने ही 'बेकार' समझ/मान कर अपने से दूर छिटक दिया था । दरअसल डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों की पहचान आईएस तोमर के भरोसे/सहारे ही थी; आईएस तोमर ने जब तक उन्हें उपयोगी समझा/पाया, उन्हें अपने साथ रखा और फिर छोड़ दिया; वह भी गुमनामी में जा पड़े - लेकिन अब आईएस तोमर को लगता है कि वह गुमनामी के अँधेरे में पड़े उन लोगों की मदद से सतीश जायसवाल की चुनावी नाव को पार लगवा देंगे । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में इस समय बदलाव को लेकर जो उथल-पुथल चल रही है, उससे लगता है कि आगे अभी और दिलचस्प नजारे देखने को मिलेंगे ।

Thursday, August 8, 2019

रोटरी इंटरनेशनल के प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए सेलेक्ट हुए शेखर मेहता के दाएँ और बाएँ खड़े होकर डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व गवर्नर अनिल अग्रवाल की रोटरी इंटरनेशनल से 'लूटे' गए करीब 20 लाख रुपयों को वापस किये बिना ही सजा मुक्त होने की तरकीब सफल हो सकेगी क्या ?

जयपुर । शेखर मेहता को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद की कुर्सी अभी मिली नहीं है, लेकिन स्वार्थी व अवसरवादी रोटेरियंस ने उन्हें घेरना, उनके नजदीक 'दिखने' और उनसे फायदा उठाने के प्रयास तेज कर दिए हैं । नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार चुने जाने के बाद अपने घर - कोलकाता लौटे शेखर मेहता का हवाई अड्डे पर स्वागत करने वालों, तथा उनके नजदीक खड़े होकर फोटो खिंचवाने वाले लोगों में डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल को अतिरिक्त रूप से सक्रिय देख कर लोगों को लगने लगा है कि शेखर मेहता  और उनके नजदीकी यदि सावधान नहीं रहे तो रोटरी के स्वार्थी, बेईमान और रोटरी के पैसों में घपलेबाजी करने वाले लोग उनके चारों तरफ दिखेंगे और यह बात खुद शेखर मेहता तथा उनकी साख के लिए बहुत ही घातक होगी । कई लोगों को शेखर मेहता को इस्तेमाल करने की चालबाजी के अनिल अग्रवाल के 'साहस' पर भी हैरानी हुई; उनका कहना है कि रोटरी फाउंडेशन के करीब 20 लाख रुपयों में घपलेबाजी करने की हरकत के उजागर होने तथा उसके लिए रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाने - और उसके बाद भी रोटरी फाउंडेशन के पैसों को वापस करने में तरह तरह की बहानेबाजी के साथ आनाकानी करने के बावजूद अनिल अग्रवाल की आखिर हिम्मत कैसे हुई कि वह शेखर मेहता का स्वागत करने वालों में शामिल हों, और आगे बढ़ बढ़ कर कभी उनके दाएँ खड़े होकर तो कभी बाएँ खड़े होकर फोटो खिंचवाएँ ?
यह प्रकरण लेकिन अनिल अग्रवाल की हिम्मत से ज्यादा चालाकी को 'दिखाता' है । हिम्मत तो अनिल अग्रवाल रोटरी फाउंडेशन का करीब 20 लाख रुपया हड़प कर पहले ही दिखा चुके हैं । और यह भी उनकी हिम्मत का ही सुबूत है कि पकड़े जाने और सजा पाने के बाद भी, रोटरी के बड़े पदाधिकारियों व नेताओं से लगातार झूठ पर झूठ बोलते हुए और उन्हें तरह तरह से झाँसा देते हुए वह यह कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें इकन्नी भी वापस न करना पड़े और उनकी सजा भी माफ हो जाए । दरअसल इसी कोशिश में उन्होंने चालाकी यह दिखाई है कि वह अपने आप को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के नजदीक 'दिखाएँ', ताकि रोटरी इंटरनेशनल से सजायाफ्ता होने से होने वाले 'नुकसान' से बच सकें । कोलकाता हवाई अड्डे पर शेखर मेहता का स्वागत होने के मौके पर शेखर मेहता के कभी दाएँ तो कभी बाएँ खड़े होकर खिंचवाई गई तस्वीरों को अपने नजदीकियों को भेज/दिखा कर अनिल अग्रवाल ने दावा किया है कि बस अब शेखर मेहता प्रेसीडेंट होंगे और उनका मामला निपट जायेगा तथा उन्हें क्लीन चिट मिल जाएगी । उनके नजदीकी तथा दूसरे लोग सिर्फ तस्वीरों से ही उनके दावे पर यकीन न करें, इसलिए अनिल अग्रवाल ने इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी का नाम भी लिया और बताया कि कमल सांघवी ने ही उन्हें फोन करके कोलकाता हवाई अड्डे के कार्यक्रम के बारे में बताया था और मौके पर उपस्थित होने/रहने की सलाह दी थी । 
कमल सांघवी का नाम लेकर अनिल अग्रवाल ने दरअसल अपने नजदीकियों को विश्वास दिलाने का प्रयास किया है कि शेखर मेहता के खासमखास कमल सांघवी उनके बड़े खास हैं और कमल सांघवी के कारण ही वह कोलकाता हवाई अड्डे पर शेखर मेहता का स्वागत करने पहुँचे और कमल सांघवी ही शेखर मेहता से उनका काम करवायेंगे । अनिल अग्रवाल के नजदीकियों का इन पंक्तियों के लेखक से कहना/बताना लेकिन यह है कि अनिल अग्रवाल दो दिवसीय कोलकाता फैशन एक्सपो 2019 में 'केडी' के स्टॉल पर उपस्थित रहने के लिए कोलकाता में थे, और उसी दौरान उन्हें शेखर मेहता के कोलकाता लौटने का प्रोग्राम पता चला तो उन्होंने 'बहती गंगा में हाथ धोने' का जुगाड़ कर लिया । अनिल अग्रवाल असल में रोटरी फाउंडेशन के पैसों की घपलेबाजी के मामले में कुछेक बड़े पदाधिकारियों व नेताओं की सिफारिश पर 'सख्त' सजा पाने से बच गए हैं; इसलिए उन्हें लगता है कि उन्हें अब यदि कोई तगड़ी सिफारिश मिल जाए तो जो सजा उन्हें मिली भी है, उससे भी वह बच सकते हैं । शेखर मेहता के रूप में उन्हें वह 'बड़ी सिफारिश' नजर आ रही है । रोटरी के कुछेक बड़े पदाधिकारियों व नेताओं ने उन्हें समझाया है कि वह यदि रोटरी फाउंडेशन के लूटे हुए 20 लाख रुपए लौटा दें, तो उनकी सजा माफ करवाई जा सकती है । अनिल अग्रवाल लेकिन इस जुगाड़ में हैं कि उन्हें रोटरी फाउंडेशन के पैसे भी न लौटाने पड़ें, और उनकी सजा भी माफ हो जाए । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होकर लौटे शेखर मेहता के दोनों तरफ खड़े होकर फोटो खिंचवा कर और लोगों को उसे दिखा कर अनिल अग्रवाल ने वास्तव में यह दिखाने/जताने की कोशिश की है कि रोटरी फाउंडेशन को पैसे वापस किए बिना ही, शेखर मेहता जल्दी ही उनकी सजा माफ करवा देंगे ।
मजे की बात यह है कि दो दिन पहले ही, शेखर मेहता के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होने की जानकारी मिलते ही वर्ष 2013-14 में अनिल अग्रवाल के फेलो गवर्नर रहे विनोद बंसल की तरफ से घोषणा सुनी गई थी कि शेखर मेहता अब उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने का काम करेंगे । इस तरह, लगता है कि शेखर मेहता को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सेलेक्ट होते ही दो काम तो तुरंत से असाइन हो गए हैं - एक तो उन्हें डिस्ट्रिक्ट 3011 के पूर्व गवर्नर विनोद बंसल को इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाना/बनवाना है, और दूसरा रोटरी फाउंडेशन के पैसों की लूट के मामले में रोटरी इंटरनेशनल से सजा पाए डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व गवर्नर अनिल अग्रवाल को बरी करवाना है । देखना दिलचस्प होगा कि शेखर मेहता को अभी और क्या क्या काम मिलते हैं ?