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Saturday, March 14, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अशोक गुप्ता जिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल के समर्थन के बल पर जीतने की उम्मीद कर रहे थे, वही उनकी हार का कारण बने; और दिनेश शर्मा बड़े अंतर से विजयी हुए

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल की हर संभव तिकड़म के बावजूद, अशोक गुप्ता अगले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव दिनेश शर्मा से बड़े अंतर से हार गए हैं । राजीव सिंघल और अशोक गुप्ता की जोड़ी और उनके नजदीकी इस हार के लिए पूर्व गवर्नर राकेश सिंघल को कोस रहे हैं । इनका आरोप है कि राकेश सिंघल वैसे तो अपने आपको मुरादाबाद का बड़ा नेता बताते/समझते हैं, लेकिन मुरादाबाद का वह एक वोट भी अशोक गुप्ता को नहीं दिलवा सके । चर्चा है कि अशोक गुप्ता वोटों की मुँहमाँगी कीमत देने को तैयार थे, और मुरादाबाद में आठ/दस वोट अपने आप को 'तटस्थ' भी बता/दिखा रहे थे - लेकिन दिनेश शर्मा और उनके समर्थकों द्वारा की गई घेराबंदी को तोड़ पाने में वह विफल रहे । अशोक गुप्ता की बदकिस्मती यह रही कि मुरादाबाद में उन्हें अपने घनघोर व दमदार समर्थक राकेश सिंघल के खासमखास लोगों का भी वोट नहीं मिला । दिनेश शर्मा के गृह क्षेत्र बुलंदशहर तक में अशोक गुप्ता ने कुछेक वोट प्राप्त करने का जुगाड़ बैठा लिया, लेकिन मुरादाबाद में उन्हें खाली हाथ ही रहना पड़ा - और यही उनकी हार का प्रमुख कारण बना । मुरादाबाद के क्लब्स ने जिस तरह से दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी के पक्ष में एकतरफा रूप में वोट किया/दिया, वह डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का एक दिलचस्प अध्याय है । मुरादाबाद का कोई उम्मीदवार होता है, तब मुरादाबाद के क्लब्स की ऐसी एकता कभी-कभार ही देखने को मिली है; मुरादाबाद से बाहर के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होने की स्थिति में तो यहाँ के वोट निश्चित रूप से बँटते ही हैं । लेकिन इस बार अनोखा काम हुआ, और दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी के पक्ष में मुरादाबाद के क्लब्स की अप्रत्याशित एकता देखने को मिली ।
डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के कुछेक जानकारों के अनुसार, मुरादाबाद के क्लब्स की यह एकता वास्तव में दिनेश शर्मा के पक्ष में नहीं - बल्कि अशोक गुप्ता के विरोध में बनी; दिनेश शर्मा को तो उसका लाभ भर मिला है । दरसअल अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी की कमान जिस तरह से राजीव सिंघल के हाथों में रही/दिखी; और अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के सहारे राजीव सिंघल जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट का नेता बनने की कोशिश करते नजर आये - उससे डिस्ट्रिक्ट के कई नेता बुरी तरह बिदक गए । राजीव सिंघल के रवैये में डिस्ट्रिक्ट के आम और खास लोगों ने घमंड का भाव देखा और महसूस किया है; राजीव सिंघल की तरफ से, अशोक गुप्ता की जीत के बाद उनके दो/एक नजदीकियों के नाम अगले उम्मीदवारों के रूप में जिस तरह से 'उछले' - उससे भी डिस्ट्रिक्ट के नेताओं के बीच खलबली मची, और वह आपसी मतभेदों को भुला कर एकजुट हुए । डिस्ट्रिक्ट के कई नेताओं के बीच बनी एकजुटता को वरिष्ठ पूर्व गवर्नर जीएस धामा तथा युवा पूर्व गवर्नर संजीव रस्तोगी ने अपने अपने तरीके से न सिर्फ पुख्ता किया, बल्कि अपने अपने समर्थकों के जरिये दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी के पक्ष में ऐसी जबर्दस्त घेराबंदी भी की कि विरोधियों के नजदीक समझे जाने वाले लोगों के वोट भी दिनेश शर्मा की झोली में आ गिरे । उल्लेखनीय है कि दिनेश शर्मा पहली और पिछली बार संजीव रस्तोगी के गवर्नर वर्ष में निर्विरोध चुने गए थे; लेकिन डिस्ट्रिक्ट के नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस में जाने के चलते दिनेश शर्मा की वह कामयाबी खटाई में पड़ गई थी । डिस्ट्रिक्ट को नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस से बाहर लाकर दिनेश शर्मा को 'न्याय' दिलवाने के लिए रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के बीच जीएस धामा ने खासी 'वकालत' की थी, लेकिन उनके वह प्रयास सफल नहीं हो सके थे । इसलिए इस बार के चुनाव में दिनेश शर्मा को जीत की माला और शॉल पहनाने के लिए जीएस धामा और संजीव रस्तोगी ने जैसे कमर कस ली थी, और इस बार वह अपनी कोशिशों में कामयाब हुए ।
अशोक गुप्ता के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता का समर्थन लेना/पाना भी आत्मघाती साबित हुआ । मजे की बात यह रही कि हरि गुप्ता का समर्थन पाने के बाद अशोक गुप्ता व उनके समर्थक और जोश में आ कर अपनी जीत के प्रति आश्वस्त व निश्चिंत हो गए थे । लेकिन हुआ ठीक उल्टा और उनकी उम्मीदवारी का बंटाधार करने में हरि गुप्ता का भी भारी 'सहयोग' रहा । दरअसल, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में हरि गुप्ता का कार्यकाल बहुत ही बुरा रहा है और अधिकतर लोग अलग अलग कारणों से नाराज हुए हैं । रही सही कसर डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की बदइंतजामी ने पूरी कर दी । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में बदइंतजामी का आलम यह रहा कि लोगों को खाना पाने के लिए मशक्कत करना पड़ी और अपमानित तक होना पड़ा । खाना पाने के लिए पहले तो लोगों को लंबी लाइन में लगना पड़ा, जब तक उनका नंबर आया तो पता चला कि प्लेट्स खत्म हो गई हैं; जब तक प्लेट्स लगीं, तब तक रोटियाँ समाप्त हो गईं - लोग रोटियों का इंतजार कर रहे थे, लेकिन सप्लाई में दाल के डोंगे पर डोंगे चले आ रहे थे । इससे लोगों के बीच भारी अफरातफरी फैली । इससे पहले मुख्य अतिथि के रूप में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता कई मुद्दों पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में हरि गुप्ता की कमजोरियों को उद्घाटित कर चुके थे । इस तरह, लोगों ने देखा/पाया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में हरि गुप्ता हर मोर्चे पर फेल रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच चर्चा चल ही रही थी कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में हरि गुप्ता ने अशोक गुप्ता से कई खर्चे स्पॉन्सर करवाए हैं, और हरि गुप्ता का सहयोग/समर्थन पाने के लिए अशोक गुप्ता ने खुशी खुशी उनके खर्चों को उठाया है - इसके चलते, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में फैली बदइंतजामी का शिकार हुए लोगों ने अशोक गुप्ता से बदला लिया । अशोक गुप्ता की बदकिस्मती रही कि उन्हें अपने समर्थकों के रवैये से पैदा हुई नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा है; इस कारण से उनकी 'आगे की राह' को भी मुश्किलों से भरा देखा/पहचाना जा रहा है ।

Friday, February 28, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पिछड़ते दिख रहे अशोक गुप्ता की स्थिति सुधारने की कोशिश में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी के नजदीक आने की अपनी कोशिशों को कहीं नुकसान तो नहीं पहुँचा लेंगे ?

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल की अपने गवर्नर वर्ष की टीम के लिए आवेदन माँगने की कार्रवाई को इस वर्ष हो रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, और इसकी शिकायत डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में आ रहे इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी से करने की तैयारी की जा रही है । कुछेक पूर्व गवर्नर्स राजीव सिंघल की कार्रवाई को लेकर खासे नाराज हैं, और मान रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी के रूप में राजीव सिंघल के जब यह रंग-ढंग हैं, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में तो वह पता नहीं क्या करेंगे ? मजे की बात है कि कुछेक पूर्व गवर्नर्स की नाराजगी को राजीव सिंघल ने कोई तवज्जो नहीं दी है; उनका कहना है कि उन्होंने कोई रोटरी-विरोधी काम नहीं किया है और कुछेक पूर्व गवर्नर्स नाहक ही बात का बतंगड़ बना रहे हैं । राजीव सिंघल कुछेक पूर्व गवर्नर्स की नाराजगी को तवज्जो देते हुए भले ही नहीं दिख रहे हों; लेकिन उनके नजदीकियों के अनुसार, वह इस बात को लेकर चिंतित जरूर हैं कि शेखर मेहता व कमल सांघवी के सामने उनकी कार्रवाई की शिकायत यदि हुई - तो उन दोनों के बीच उन्हें लेकर एक नकारात्मकता जरूर बनेगी, जो उनकी रोटरी की 'आगे की यात्रा' के लिए नुकसानदेह हो सकती है । समझा जाता है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में शेखर मेहता और कमल सांघवी को एक साथ बुलाने की 'व्यवस्था' राजीव सिंघल ने ही की है, और इस व्यवस्था के जरिये राजीव सिंघल ने रोटरी के सेटअप में अपनी पहुँच ऊँची करने की तैयारी दिखाई है । ऐसे में, उन्हें डर है कि शेखर मेहता और कमल सांघवी के सामने यदि यह बात जाहिर हुई कि उनके डिस्ट्रिक्ट के कुछेक पूर्व गवर्नर्स उनकी पक्षपातपूर्ण राजनीतिक कार्रवाईयों से नाराज हैं, तो यह रोटरी के सेटअप में अपनी पहुँच ऊँची करने की उनकी तैयारी को झटका दे सकती है ।
राजीव सिंघल को इस वर्ष हो रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए डीके शर्मा व अशोक गुप्ता के बीच होने वाले चुनाव में अशोक गुप्ता के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । अशोक गुप्ता, राजीव सिंघल के नजदीकी रिश्तेदार हैं । समझा जाता है और डिस्ट्रिक्ट में चर्चा है कि राजीव सिंघल ने ही उन्हें उम्मीदवार बनाया है - अन्यथा अशोक गुप्ता की रोटरी में न तो ज्यादा रुचि रही है और न ज्यादा संलग्नता रही है । अपने क्लब के आयोजनों में ही वह वर्ष में मुश्किल से दो या तीन मौकों पर ही शामिल होते हुए देखे गए हैं । अशोक गुप्ता के नजदीकियों को ही हैरानी है कि रोटरी के आयोजनों में यदा-कदा दिखने वाले अशोक गुप्ता को आखिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की कैसे और क्यों सूझी ? लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि अशोक गुप्ता डिस्ट्रिक्ट में लोगों को जानते/पहचानते तक नहीं हैं, और न ही लोग उन्हें जानते/पहचानते हैं - ऐसे में उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में कूद पड़ने का फैसला भला किसके भरोसे लिया है । हालाँकि यह जल्दी ही स्पष्ट हो गया कि अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी पूरी तरह राजीव सिंघल के भरोसे ही है । राजीव सिंघल ने अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए प्रयत्न तो काफी किए हैं, लेकिन लगता है कि अपने प्रयत्न खुद उन्हें भी नाकाफी लग रहे हैं । राजीव सिंघल को भी लग रहा है कि उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद अशोक गुप्ता की चुनावी स्थिति डीके शर्मा के मुकाबले काफी कमजोर है । आरोप है कि इसीलिए चुनाव शुरू होने से छह दिन पहले राजीव सिंघल ने अपने गवर्नर-वर्ष के पदों के जरिये वोटों को 'खरीदने' का दाँव चला है । 
राजीव सिंघल का यह कहना तो बिलकुल दुरुस्त है कि अपने गवर्नर-वर्ष की टीम के पदों का ऑफर देने का जो पत्र उन्होंने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को भेजा है, वह कोई रोटरी-विरोधी काम नहीं है । लेकिन उक्त पत्र भेजने की जो टाइमिंग है, वह पदों के ऑफर के जरिये डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को प्रभावित करने के आरोप को हवा देती है । मजे की बात यह है कि राजीव सिंघल ने अपने गवर्नर-वर्ष के लिए विजन अभी तय नहीं किया है; रोटरी की व्यवस्था के अनुसार, यह अभी तय हो भी नहीं सकता है; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में राजीव सिंघल जब ट्रेनिंग के लिए जायेंगे, तब इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट उक्त विजन देंगे - जाहिर है कि उसके बाद ही तथा उसके अनुरूप ही उन्हें अपनी टीम के पदों का निर्धारण करना होगा, और उसके बाद ही यह तय कर सकना संभव व उचित होगा कि योग्यतानुसार किसे क्या पद दिया जाए । राजीव सिंघल अपने गवर्नर-वर्ष की टीम के पदाधिकारियों को चुनने की उचित प्रक्रिया को अपनाये बिना जिस तरह से पदों के लिए आवेदन माँग बैठे हैं, उससे साफ संकेत मिला है कि यह कार्रवाई उन्होंने अपने गवर्नर-वर्ष को प्रभावी बनाने के लिए नहीं, बल्कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव को प्रभावित करने के लिए - और अशोक गुप्ता के लिए वोट 'खरीदने' के लिए की है । उनकी इस कार्रवाई के दो दिन बाद ही डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस हो रही है, जिसमें इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता तथा इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी आ रहे हैं - तो डिस्ट्रिक्ट के कुछेक पूर्व गवर्नर्स ने इस मामले को उनके सामने उठाने तथा राजीव सिंघल की शिकायत करने की तैयारी दिखाई है । राजीव सिंघल के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि अभी तक उन्हें पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के नजदीक समझा/पहचाना जाता था; लेकिन राजीव सिंघल अब मनोज देसाई को छोड़ कर कमल सांघवी के नजदीक आने की कोशिश कर रहे हैं - ऐसे में, उनकी चिंता है कि उनके डिस्ट्रिक्ट के कुछेक पूर्व गवर्नर्स उनकी शिकायत करेंगे, तो कमल सांघवी के यहाँ उनकी अनुकूल स्थिति कैसे बनेगी ? राजीव सिंघल के नजदीकियों को डर है कि अशोक गुप्ता की चुनावी स्थिति सुधारने के चक्कर में राजीव सिंघल रोटरी सेटअप में कहीं अपनी स्थिति न खराब कर लें ?

Friday, January 17, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में दिनेश शर्मा के पक्ष में पूर्व गवर्नर जीएस धामा की दिलचस्पी व सक्रियता के चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मनीष शारदा के लिए अशोक गुप्ता का समर्थन करना मुश्किल हुआ

मेरठ । दिनेश शर्मा और अशोक गुप्ता के बीच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए छिड़ी लड़ाई में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मनीष शारदा के लिए हालात इस समय, बकौल मिर्जा ग़ालिब 'ईमां मुझे रोके है, तो खींचे है मुझे कुफ्र' जैसे हो रहे हैं । उनके लिए यह हालात दरअसल पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जीएस धामा के कारण बने हैं । जीएस धामा को दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा/पहचाना जा रहा है । मनीष शारदा चूँकि जीएस धामा के ही क्लब के सदस्य हैं, और क्लब में जीएस धामा का ही प्रभाव है - इसलिए 'ईमां' तो उन्हें दिनेश शर्मा के समर्थन में रहने के लिए मजबूर कर रहा है; लेकिन कई तरह के दबावों व स्वार्थों के चलते 'कुफ्र' उन्हें अशोक गुप्ता की तरफ खींच रहा है । अशोक गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; दोनों नजदीकी रिश्तेदार हैं - और अशोक गुप्ता ने समर्थन जुटाने के लिए ठीक वैसे ही हथकंडे अपनाए हुए हैं, जिनके सहारे/भरोसे राजीव सिंघल ने अपनी चुनावी नैय्या पार लगाई थी । राजीव सिंघल की चुनावी नैय्या पार करवाने में मनीष शारदा का बड़ा योगदान था । उस समय जीएस धामा चूँकि विदेश में थे, इसलिए मनीष शारदा को अपनी मनमानी करने तथा राजनीति चलाने का मौका मिल गया था । अपने चुनाव के समय मनीष शारदा के साथ बनी नजदीकी का राजीव सिंघल अब अशोक गुप्ता के लिए भी फायदा उठाना चाहते हैं । मनीष शारदा उन्हें फायदा देना/पहुँचाना भी चाहते हैं, लेकिन अब की बार उनके लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि जीएस धामा यहीं पर हैं और दिनेश शर्मा की चुनावी नैय्या को पार लगवाने की कुछ छिपी व कुछ खुली कोशिशों में जुटे हुए हैं ।
दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी की कामयाबी जीएस धामा के लिए दो कारणों से बहुत महत्त्व की है । पहला कारण तो यह है कि दिनेश शर्मा को रोटरी इंटरनेशनल के जिस 'अन्याय' का सामना करना पड़ा है, उसमें दिनेश शर्मा को न्याय दिलवाने के लिए जीएस धामा ने रोटरी इंटरनेशनल के बड़े नेताओं के सामने दिनेश शर्मा के पक्ष में खासी वकालत की थी । उनकी वकालत उस समय तो कई कारणों से दिनेश शर्मा के काम नहीं आ सकी थी, लेकिन अब जब दिनेश शर्मा दोबारा से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) पद की चुनावी दौड़ में शामिल हुए हैं, तो जीएस धामा के लिए दिनेश शर्मा को 'न्याय' दिलवाने का मामला जरूरी बन गया है; दरअसल इसके जरिये वह अपनी पिछली असफलता को भी ढक लेना चाहते हैं । दूसरा कारण राजनीतिक है । जीएस धामा के नजदीकियों का कहना है कि पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने के तुरंत बाद राजीव सिंघल जिस तरह से अपने रिश्तेदार अशोक गुप्ता को उम्मीदवार बना बैठे हैं, उसे देख कर जीएस धामा को ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों को भी लग रहा है कि राजीव सिंघल डिस्ट्रिक्ट पर कब्जा करके डिस्ट्रिक्ट के नेता बनना चाहते हैं । जीएस धामा के नजदीकियों का कहना/बताना है कि दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी को सफल बनाने के जरिये जीएस धामा वास्तव में राजीव सिंघल के मंसूबों पर भी पानी फेरना चाहते हैं । 
दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी को लेकर जीएस धामा की सक्रियता ने मनीष शारदा के लिए लेकिन बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है । मेरठ के रोटेरियंस को लगता है कि दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी को जीएस धामा का जैसा समर्थन प्राप्त है, उसे देखते/समझते हुए मनीष शारदा के लिए अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी का समर्थन करना मुश्किल ही होगा । इसके चलते अशोक गुप्ता को सत्ता का एकतरफा समर्थन मिलना मुश्किल ही दिख रहा है ।अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थक अभी तक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मनीष शारदा तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल का समर्थन पाने की उम्मीद पाले बैठे थे - लेकिन मनीष शारदा को 'ईमां' में फँसा देख अशोक गुप्ता के समर्थकों को अपना पक्ष कमजोर पड़ता दिख रहा है । शक उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता के रवैये पर भी है । हालाँकि हरि गुप्ता को अभी तक अशोक गुप्ता के समर्थन में ही देखा/पहचाना जा रहा है; लेकिन अशोक गुप्ता के समर्थक उन सूचनाओं से भी डरे हुए हैं, जिनमें कहा/बताया जा रहा है कि हरि गुप्ता कुछेक प्रमुख लोगों के जरिये दिनेश शर्मा से भी सौदेबाजी करने में लगे हैं । दरअसल अभी तक हरि गुप्ता यदि अशोक गुप्ता के समर्थन में दिख रहे हैं, तो इसे हरि गुप्ता के कई आयोजनों में अशोक गुप्ता द्वारा खुलकर किए गए खर्च के परिणाम के रूप में ही देखा/पहचाना जा रहा है । अशोक गुप्ता के समर्थकों को लेकिन सुनने को अब यह भी मिल रहा है कि दिनेश शर्मा की तरफ से भी हरि गुप्ता को खर्च का ऑफर मिला है । मजे की बात यह है कि अशोक गुप्ता के समर्थक यह भी कहते/बताते रहते हैं कि हरि गुप्ता के पास वोट तो कोई नहीं है, वह अपने क्लब का वोट भी नहीं दिलवा सकते हैं - लेकिन फिर भी वह अशोक गुप्ता के लिए हरि गुप्ता का समर्थन 'बनाये' रखना चाहते हैं, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के समर्थन का एक मनोवैज्ञानिक फायदा तो मिलता ही है । अशोक गुप्ता के समर्थकों को डर है कि मनीष शारदा के बाद यदि हरि गुप्ता का समर्थन भी संशय में पड़ा और गड़बड़ाया - तब तमाम तीन तिकड़म व सौदेबाजियों के बावजूद अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी खतरे में पड़ जा सकती है ।

Thursday, May 16, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में राजीव सिंघल के व्यवहार और रवैये से नाराज डिस्ट्रिक्ट के और खास तौर से मेरठ के लोगों ने अंततः दीपा खन्ना को उम्मीदवारी के लिए राजी किया, जिसके चलते राजीव सिंघल के लिए मुसीबतें अचानक से न सिर्फ पैदा हो गई हैं, बल्कि खासी बढ़ भी गई हैं

मेरठ । दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के प्रस्तुत होने से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी डेजिग्नेट) बनने की राजीव सिंघल की कोशिशों को एक बार फिर ग्रहण लगता दिख रहा है । राजीव सिंघल की बदकिस्मती ही है कि पिछले चार वर्ष से उनके साथ यह तमाशा हो रहा है कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करते हैं, सारी तैयारी और व्यवस्था करके हालात अनुकूल बनाते हैं, लेकिन जैसे ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का पद उनके हाथ में आने को होता है कि कोई न कोई गड़बड़ हो जाती है और उनका किया-कराया सारा जुगाड़ फेल हो जाता है । यहाँ याद करना प्रासंगिक होगा कि चार वर्ष पहले सुनील गुप्ता के गवर्नर-वर्ष में राजीव सिंघल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बनने के लिए 'पक्की' व्यवस्था कर ली थी, जिसके तहत उन्होंने मुख्य प्रतिद्वंद्वी मधु गुप्ता की उम्मीदवारी को षड्यंत्रपूर्वक रद्द करवा दिया था - 'स्टेज' तैयार था और राजीव सिंघल की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की कुर्सी पर बैठने की 'तैयारी' पूरी हो चुकी थी कि अनहोनी घट गई; जिसके तहत सुनील गुप्ता की गवर्नरी ही चली गई । गवर्नर का कार्यभार दीपक बाबु को मिला । राजीव सिंघल ने फिर जोर मारा और दीपक बाबु को भी इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की कुर्सी पर बिठलायेंगे । दीपक बाबु ने राजीव सिंघल की हसरत को पूरा करने के लिए कदम अभी बढ़ाये ही थे कि रोटरी इंटरनेशनल ने उन्हें भी उनके पद से हटा दिया और डिस्ट्रिक्ट को नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस में डाल दिया । उन दिनों की घटनाओं को देखें और याद करें तो यही निष्कर्ष निकलता है कि सारी तैयारी और अनुकूल स्थितियों के बावजूद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) चुने जाने का 'मौका' राजीव सिंघल के हाथ से फिसल गया ।
इस वर्ष भी ऐसा ही होता दिख रहा है । उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021-22 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के लिए होने वाले चुनाव के लिए उम्मीदवारों का टोटा नजर आ रहा था और एक अकेले राजीव सिंघल ही चुनावी मैदान में उतरते दिख रहे थे । इस लिहाज से राजीव सिंघल के लिए हालात पूरी तरह अनुकूल थे और सभी ने मान लिया था कि राजीव सिंघल निर्विरोध ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी डेजिग्नेट हो जायेंगे । डिस्ट्रिक्ट के कुछेक नेता लोग दीपा खन्ना को उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए राजी करने का प्रयास कर तो रहे थे, लेकिन दीपा खन्ना कुछ ही महीनों के भीतर दूसरी बार उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए तैयार होती हुई नहीं दिख रही थीं । दरअसल अभी करीब पाँच महीने पहले ही संपन्न हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में दीपा खन्ना उम्मीदवार थीं, और खासी मेहनत से चुनाव लड़ने के बावजूद वह मामूली अंतर से चुनाव हार गईं थीं । उनका आकलन रहा कि कुछेक लोगों ने सहयोग/समर्थन का वायदा तथा 'दिखावा' करने के बाद भी वास्तव में उनका सहयोग/समर्थन नहीं किया, जिस कारण जीतते लग रहे चुनाव में उन्हें लेकिन पराजय का सामना करना पड़ा । इस 'झटके' के कारण ही इस वर्ष  दोबारा चुनाव में उतरने का उनका मन नहीं था । हालाँकि चुनावी राजनीतिक समीकरणों को देखने/समझने वाले लोगों का मानना/कहना रहा कि पिछले चुनाव के समय के हालात अलग थे, और उस समय के अनुभव के आधार पर अब होने जा रहे चुनाव के हालात का आकलन नहीं किया जा सकता है और दीपा खन्ना को समझना चाहिए कि अब की बार हालात पिछली बार जैसे पेचीदा नहीं हैं । लेकिन किसी भी तर्क से दीपा खन्ना उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए तैयार होती नहीं दिख रही थीं । इस स्थिति ने राजीव सिंघल की संभावनाओं को एकतरफा तरीके से उछाल दे दिया था, और सभी ने मान लिया था कि चुनाव तो सिर्फ औपचारिकता है; हरि गुप्ता और मनीष शारदा के बाद राजीव सिंघल ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार सँभालेंगे । मजे की बात यह देखने में आई कि चुनाव की घोषणा होने से पहले ही खुद राजीव सिंघल ने भी अपने आप को विजेता के रूप में देखना और भावी गवर्नर मानना शुरू कर दिया था । 
लेकिन लगता है कि बदकिस्मती एक बार फिर राजीव सिंघल के दरवाजे आ खड़ी हुई है । जो दीपा खन्ना उम्मीदवारी प्रस्तुत करने से लगातार इंकार कर रही थीं, अप्रत्याशित तरीके से उन्होंने अपनी उम्मीदवारी घोषित कर दी । दरअसल उन्होंने क्या घोषित कर दी, डिस्ट्रिक्ट के कई प्रमुख लोगों ने अपनी उम्मीदवारी घोषित करने के लिए उन्हें मजबूर कर दिया । खास बात यह रही कि दीपा खन्ना के लगातार इंकार करते रहने के बाद भी, मुरादाबाद में पहले तो मुरादाबाद के सभी पूर्व गवर्नर्स ने और फिर मुरादाबाद के क्लब्स के प्रेसीडेंट्स व अन्य प्रमुख लोगों ने मीटिंग करके दीपा खन्ना की उम्मीदवारी को समर्थन देने की घोषणा करके उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए उन पर दबाव बनाया; और फिर डिस्ट्रिक्ट के दूसरे शहरों के नेताओं ने भी दीपा खन्ना की उम्मीदवारी को समर्थन देने का भरोसा दिया - जिसके चलते दीपा खन्ना के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने से इंकार करते रहना संभव नहीं रहा और उन्होंने उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए हामी भर दी । इस स्थिति के लिए राजीव सिंघल को ही जिम्मेदार माना/ठहराया जा रहा है । कई लोगों का मानना और कहना है कि राजीव सिंघल ने अपने व्यवहार और रवैये से आम तौर से डिस्ट्रिक्ट के और खास तौर से मेरठ के लोगों को इतना नाराज किया हुआ है कि अधिकतर लोग उनकी राह में रोड़े डालने में लग गए हैं । नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस के दौरान राजीव सिंघल हालाँकि चार को-ऑर्डीनेटर्स में से एक थे, लेकिन उनके तेवर ऐसे रहते थे, जैसे वह अकेले ही को-ऑर्डिनेटर हैं - इस बात से डिस्ट्रिक्ट के और मेरठ के कई लोग राजीव सिंघल से जले-भुने बैठे हैं और चुनाव में एक एक बात का बदला लेने के लिए तैयार हो रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के और खास तौर से मेरठ के नेताओं व सक्रिय लोगों के बीच राजीव सिंघल के प्रति जिस तरह का नकारात्मक भाव दिख रहा है, और जिसके चलते लगातार इंकार करते रहने के बावजूद दीपा खन्ना उम्मीदवारी के लिए तैयार हो गईं हैं - उससे राजीव सिंघल के लिए मुसीबतें अचानक से न सिर्फ पैदा हो गई हैं, बल्कि खासी बढ़ भी गई हैं ।

Tuesday, March 1, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के भरोसे कॉलिज ऑफ गवर्नर्स का फैसला मानने से बचते दिख रहे दीपक बाबु पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपमानित करने की हद तक जा पहुँचे हैं

मुरादाबाद । दीपक बाबु जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स को छका रहे हैं और उनकी बात को अनसुना कर रहे हैं, उससे जाहिर है कि उन्होंने सुनील गुप्ता के साथ हुए प्रकरण से कुछ नहीं सीखा है और उन्होंने भी डिस्ट्रिक्ट व रोटरी का मजाक बनाने का फैसला कर लिया है । दीपक बाबु हालाँकि अभी थोड़े से भाग्यशाली दिख रहे हैं कि उनकी हरकतों से खिन्न और नाराज पूर्व गवर्नर्स अभी उनके पीछे उस तरह से नहीं पड़े हैं, जैसे कि सुनील गुप्ता से नाराज पूर्व गवर्नर्स उनके पीछे पड़ गए थे । किंतु दीपक बाबु अपनी बातों और अपनी हरकतों से जिस तरह से पूर्व गवर्नर्स को चिढ़ा रहे हैं, और उन्हें लगातार अपमानित महसूस करा रहे हैं - उससे लगता नहीं है कि अपने डिस्ट्रिक्ट में दीपक बाबु का 'हनीमून पीरियड' ज्यादा दिन चल पायेगा । दीपक बाबु के लिए मुसीबत की बात दरअसल यह हो गई है कि सुनील गुप्ता के खिलाफ हुई कार्रवाई ने लोगों को आश्वस्त किया है तथा भरोसा दिया है कि उनके द्वारा की गई शिकायतों पर रोटरी इंटरनेशनल ध्यान देता है तथा कार्रवाई करता है - इस बात से लोगों को शिकायत करने का बल मिला है, और जाहिर तौर पर इसका खामियाजा दीपक बाबु को ही भुगतना पड़ेगा । दीपक बाबु हालाँकि इस बात की कोई परवाह करते हुए अभी नहीं देखे जा रहे हैं । उनके नजदीकियों का कहना है कि दीपक बाबु का मानना और कहना है कि सुनील गुप्ता तो मौजूदा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की सनक का शिकार हो गए हैं, और इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद पर केआर रवींद्रन के दिन अब ज्यादा नहीं बचे हैं - इसलिए उनकी परवाह करने की जरूरत नहीं है । उनके बाद इंटरनेशनल प्रेसीडेंट का पदभार सँभालने वाले जॉन जर्म उनके जैसे बिलकुल नहीं हैं, और वह शिकायतों पर कोई तवज्जो नहीं देंगे । रही बात इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की - तो उनके बारे में दीपक बाबु का मानना/कहना है कि मनोज देसाई बड़े सज्जन पुरुष हैं, उनकी बस खुशामद करते रहो, और बाकी फिर चाहे जो करो - उन्हें कोई परवाह नहीं है ।  रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों के इस आकलन के भरोसे ही दीपक बाबु ने अपने डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स को, उनकी सलाह को और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसले को ठेंगा दिखाया हुआ है ।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने के शुरू में कॉलिज ऑफ गवर्नर्स ने अपनी मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट में घटने वाली घटनाओं के कारण डिस्ट्रिक्ट की होने वाली बदनामी का संज्ञान लेते हुए कुछेक महत्वपूर्ण फैसले किए थे । गहन विचार-विमर्श के बाद कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के बीच जिन बातों पर सहमति बनी, वह इस प्रकार थे : डिस्ट्रिक्ट में किसी को व्यवस्था संबंधी कोई शिकायत है तो वह सीधे रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत नहीं करेगा; रोटरी इंटरनेशनल से अनुरोध किया जायेगा कि उसे कोई शिकायत मिले तो उसे वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को भेजे, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर उसे डिस्ट्रिक्ट आर्बिट्रेशन कमेटी के हवाले करे; पाँच सदस्यीय डिस्ट्रिक्ट आर्बिट्रेशन कमेटी का गठन किया जाए, जिसमें वरिष्ठता क्रम के अनुसार हर वर्ष दो वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स हों; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के मौजूदा दोनों उम्मीदवार अपनी अपनी उम्मीदवारी से इस्तीफा दें, तथा कॉलिज ऑफ गवर्नर्स जोन-अनुसार उनकी उम्मीदवारी के बारे में फैसला करें; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए डिस्ट्रिक्ट को तीन जोन में बाँटा जाए, जहाँ से बारी बारी से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार आएँ; आदि-इत्यादि । मीटिंग में इन मुद्दों पर पूर्व गवर्नर्स के बीच हालाँकि परस्पर विरोधी विचार भी थे, और कुछेक मौकों पर उनके बीच गर्मा-गर्मी भी हुई - लेकिन अंततः डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के हित में इन मुद्दों पर उनके बीच सहमति बनी । रोटरी इंटरनेशनल के एक विशेष फैसले के आधार पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार सँभाल रहे दीपक बाबु ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में घोषणा की कि वह तीन-चार दिन में इस मीटिंग के मिनिट्स डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच सार्वजनिक कर देंगे, जिससे कि इन फैसलों को लागू करने के लेकर डिस्ट्रिक्ट के लोगों की भी सहमति बनाई जा सके और मीटिंग के फैसलों को क्रियान्वित करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सके । यह घोषणा किए हुए दीपक बाबु को करीब करीब तीन सप्ताह से ऊपर का समय हो चुका है, लेकिन उन्होंने अभी तक उक्त मीटिंग के मिनिट्स सार्वजनिक करने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है । इस बीच जिन पूर्व गवर्नर्स ने उनसे इस बारे में बात की, उन्हें उन्होंने अलग अलग तरह की बहानेबाजी करके टरका दिया है । मजे की बात यह है कि दीपक बाबु के नजदीकियों से लोगों को सुनने को मिल रहा है कि दीपक बाबु न तो आर्बिट्रेशन कमेटी बनाने के पक्ष में हैं, और न डिस्ट्रिक्ट को तीन जोन में विभक्त करने के लिए राजी हैं, और न डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को हतोत्साहित करने के लिए तैयार हैं - और इसीलिए वह कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में सर्वसम्मति से हुए फैसलों को क्रियान्वित करने को लेकर टाल-मटोल वाला रवैया अपना रहे हैं ।
वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन केजी अग्रवाल को तो इस मामले में चुनौती सी देते हुए दीपक बाबु ने अपमानित तक कर दिया । इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए केजी अग्रवाल ने दीपक बाबु को फोन करके यह जानना चाहा कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में लिए गए फैसलों को क्रियान्वित कराने के लिए वह क्या कदम उठा रहे हैं; दीपक बाबु ने उनकी बात का जबाव देने की बजाए उन्हें चुनौती सी दे डाली कि आप दोनों उम्मीदवारों से इस्तीफा ले लें और जो उचित समझें वह फैसला करें । दीपक बाबु यह कहते हुए यह भूल गए कि डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के हित में उचित फैसला करने की जिम्मेदारी केजी अग्रवाल की नहीं, बल्कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार सँभालने के कारण उनकी है । भूले शायद वह कुछ नहीं, वह वास्तव में केजी अग्रवाल को अपमानित करते हुए यह जता/बता रहे थे कि मुझे कुछ नहीं करना है - अब तुमसे जो सकता हो वह कर लो । इकत्तीस वर्ष पहले गवर्नर रहे केजी अग्रवाल को मनमसोस कर रह जाना पड़ा । दीपक बाबु के नजदीकियों की मानें तो दीपक बाबु कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में हुए फैसलों पर धूल पड़ने देंगे, जिससे कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनाव हो और उन्हें अपनी चौधराहट दिखाने/जताने का तथा पैसे बनाने का मौका मिले । दिवाकर अग्रवाल से बदला लेने के लिए भी दीपक बाबु को कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग के फैसले को ठंडे बस्ते में डालना जरूरी लग रहा है । दीपक बाबु को लगता है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में लिए गए फैसले यदि लागू हो गए तो दिवाकर अग्रवाल इस वर्ष नहीं, तो अगले वर्ष आराम से गवर्नर बन जायेंगे । दीपक बाबु ऐसा नहीं होने देना चाहते हैं और इसके लिए वह अपने ही डिस्ट्रिक्ट के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपमानित करने की हद तक जाने के लिए तैयार हैं ।
दीपक बाबु के इस रवैये ने राजीव सिंघल और उनके नजदीकियों को भी डराना शुरू कर दिया है । उनकी चिंता यह है कि दीपक बाबु ने अपने रवैये से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को ज्यादा नाराज कर दिया, तो कहीं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी मुसीबत में न पड़ जाए । राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थक और शुभचिंतक हालाँकि जोरशोर से यह दावा करने में लगे हुए हैं कि दिल्ली स्थित रोटरी इंटरनेशनल के साउथ एशिया कार्यालय के पदाधिकारियों की देखरेख में चुनाव होने से उनकी जीत 'और पक्की' हो गई है; किंतु राजीव सिंघल और उनके नजदीकियों को डर यह सता रहा है कि सुनील गुप्ता की तरह कहीं उनके साथ भी धोखा हो गया तो क्या होगा ? उल्लेखनीय है कि सुनील गुप्ता को भी आश्वस्त किया गया था - और इस काम में राजीव सिंघल खुद भी आगे आगे थे - कि मनोज देसाई के होते हुए उन्हें डरने की चिंता नहीं करना चाहिए । पर यह आश्वासन सुनील गुप्ता के काम नहीं आया । राजीव सिंघल के कुछेक नजदीकियों का मानना और कहना है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में लिए गए फैसले से उनका गवर्नर बनने का रास्ता आसान हो गया है; अब उन्हें कोशिश सिर्फ यह करनी है कि जोन-अनुसार गवर्नर बनने की जो बात हो रही है उसमें उन्हें पहला नंबर मिल जाए - उन्हें लग रहा है कि इस कोशिश को सफल करना/बनाना कोई ज्यादा मुश्किल नहीं है । इसीलिए दीपक बाबु का रवैया उन्हें डरा रहा है और उन्हें लग रहा है कि दीपक बाबु की कारस्तानी कहीं उन्हें न ले डूबे - चुनाव आखिर चुनाव है, नतीजे का ऊँठ न जाने किस करवट बैठे ? राजीव सिंघल के कुछेक नजदीकी कहने भी लगे हैं कि दीपक बाबु और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसले को न मानने में उनका साथ दे रहे लोग दरअसल अपना स्वार्थ देख रहे हैं, और उनके स्वार्थ के चक्कर में कहीं राजीव सिंघल का बंटाधार न हो जाए । राजीव सिंघल के जो नजदीकी ज्योतिष में विश्वास करते हैं, उनका तो और भी मजेदार आकलन है : उनका कहना है कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के जो जो लोग घनघोर समर्थक रहे - जैसे योगेश मोहन गुप्ता, बृजभूषण और सुनील गुप्ता; वह सब एक एक करके सीन से गायब होते गए हैं; अब दीपक बाबु उनकी उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में उभरे हैं, तो उनको भी मुश्किलों ने घेरना शुरू कर दिया है । राजीव सिंघल के लिए यह कोई अच्छे संकेत नहीं हैं - इसलिए उनके और उनके समर्थकों के लिए अच्छा यही होगा कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसले ने जो एक मौका बनाया है, उससे वह फायदा उठाएँ । दीपक बाबु के रवैये ने लेकिन उन्हें असमंजस में डाला हुआ है; और राजीव सिंघल व उनके नजदीकियों के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि दीपक बाबु की कारस्तानियाँ उनका काम बनायेंगी या बिगाड़ेंगी ?

Monday, February 15, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर गजेंद्र सिंह धामा की राजनीति दीपक बाबु के लिए सचमुच मुसीबत बनेगी क्या ?

मुरादाबाद । दीपक बाबु को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से जो हिदायतें मिली हैं, उनका पालन करने में गजेंद्र सिंह धामा जिस तरह रोड़ा बनते दिख रहे हैं - उससे दीपक बाबु के सामने खासी दुविधा पैदा हो गई है । उल्लेखनीय है कि केआर रवींद्रन अभी पिछले दिनों डिस्ट्रिक्ट 3012 के आयोजनों के सिलसिले में दो दिन दिल्ली में थे, जहाँ उन्होंने दीपक बाबु को बुलाया । दीपक बाबु उनसे मिलने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वाली 'अदा' के साथ गए - केआर रवींद्रन ने लेकिन उनकी अदा की सारी हवा निकाल दी । दीपक बाबु भारी तैयारी के साथ गए थे, कि वह कई विषयों पर उनसे बात करेंगे; केआर रवींद्रन ने लेकिन उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी और न किसी विषय पर बात करने में उन्होंने कोई दिलचस्पी ही दिखाई - उन्होंने दीपक बाबु को कुछेक हिदायतें दीं और आठवाँ मिनट पूरा होते होते उन्हें चलता कर दिया । केआर रवींद्रन ने दीपक बाबु से जो कहा, उनमें प्रमुख बातें रहीं : दीपक बाबु इस रोटरी वर्ष के बाकी बचे महीनों के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं हैं, वह सिर्फ केयरटेकर हैं; वह क्लब्स की ऑफिसियल विजिट नहीं करेंगे और डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस नहीं करेंगे; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय करवायेगा । केआर रवींद्रन ने दीपक बाबु को एक बड़ा काम यह सौंपा कि जो पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ज्यादा राजनीति करते दिखें, उनके नाम मुझे भेजो । दीपक बाबु को केआर रवींद्रन से जो हिदायतें मिलीं, और जो 'व्यवहार' मिला - उसने उनके कान गर्म कर दिए हैं और मौजूदा रोटरी वर्ष के बाकी बचे महीनों में गवर्नरी करने के उनके जोश और उनकी तैयारी पर पानी बिखेर दिया है । दिल्ली में केआर रवींद्रन के सामने बिताए गए करीब आठ मिनट के समय ने दीपक बाबु को यह बात अच्छे से समझा दी है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने डिस्ट्रिक्ट 3100 को अपनी कड़ी निगरानी में रखा हुआ है, और जिस कारण उनकी जरा सी चूक उन्हें सुनील गुप्ता वाली दशा में पहुँचा सकती है । 
दीपक बाबु के लिए मुसीबत की बात यह है कि जिन गजेंद्र सिंह धामा को उन्होंने अपने अधिकृत गवर्नर-काल के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया है, वही गजेंद्र सिंह धामा डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी लेते देखे जा रहे हैं - और इस तरह उन्हें सुनील गुप्ता की राह पर धकेलते दिख रहे हैं । दरअसल दीपक बाबु जिस दिन केआर रवींद्रन के कठोर व्यवहार का सामना करके लौटे, उसके बाद डिस्ट्रिक्ट में तेजी से घटनाचक्र चला । पहले गजेंद्र सिंह धामा ने मेरठ के पूर्व गवर्नर्स की मीटिंग बुलाई, जिसमें उन्होंने राजीव सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाने की जरूरत बताते हुए रणनीति बनाने की बात की । उनकी बात पर मीटिंग में मौजूद लोगों ने कोई उत्साह तो नहीं दिखाया, लेकिन चूँकि किसी ने कोई विरोध भी नहीं किया - तो गजेंद्र सिंह धामा ने इसे अपनी बात के चल निकलने के रूप में देखा/पहचाना । इसके बाद नीरज अग्रवाल ने मुरादाबाद के पूर्व गवर्नर्स की मीटिंग बुलाई, जिसमें उन्होंने बड़ी सोच व बड़ी चिंता को प्रदर्शित किया - और डिस्ट्रिक्ट की मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श को आमंत्रित किया । विचार-विमर्श में आमराय यह बनी कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के कारण डिस्ट्रिक्ट में झगड़े होते हैं और डिस्ट्रिक्ट की बदनामी होती है । नीरज अग्रवाल ने कुछेक डिस्ट्रिक्ट में बनी व्यवस्था का हवाला देते हुए सुझाव रखा कि डिस्ट्रिक्ट को यदि तीन जोन में बाँट दिया जाए और वहाँ बारी बारी से गवर्नर चुने जाएँ, तो चुनावी झगड़ों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है । नीरज अग्रवाल का यह सुझाव मीटिंग में उपस्थित सभी को पसंद आया और सभी ने इसे अपनाने की वकालत की । 
इसके बाद कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग हुई - और उस मीटिंग में नीरज अग्रवाल ने मुरादाबाद के पूर्व गवर्नर्स की तरफ से तीन जोन वाले फार्मूले को रखा; उन्होंने दीपक बाबु को संबोधित करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव न होने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को अच्छे से किया जा सकता है । इस संदर्भ में उन्होंने अपने और संजीव रस्तोगी के गवर्नर-काल की कॉन्फ्रेंस का उदाहरण दिया । ऐसा लगा कि दीपक बाबु भी बात समझ रहे हैं । नीरज अग्रवाल की बातों पर सभी को सहमत होता देख गजेंद्र सिंह धामा को अपना खेल बिगड़ता हुआ दिखा, तो उन्होंने तीन जोन वाले फार्मूले को पटरी से उतारने की कोशिश तो बहुत की - लेकिन उनकी चली नहीं । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में अभी कोई अंतिम फैसला तो नहीं हुआ है, लेकिन एक मोटा-मोटी सहमति यह बनी है कि तीन जोन वाले फार्मूले को अमल में लाने की तैयारी की जाए - और इसके तहत दोनों उम्मीदवारों, राजीव सिंघल व दिवाकर अग्रवाल को राजी किया जाए तथा उम्मीदवारी से उनके इस्तीफे लिए जाएँ । दिवाकर अग्रवाल की तरफ से कॉलिज ऑफ गवर्नर्स को संदेश दे दिया गया है कि रोटरी व डिस्ट्रिक्ट के भले के लिए उनसे जो भी कुछ करने के लिए कहा जायेगा, वह करेंगे । राजीव सिंघल की तरफ से संदेश दिया गया है कि इस बारे में वह अपने समर्थकों/शुभचिंतकों से सलाह करके फैसला करेंगे । राजीव सिंघल के नजदीकियों का ही कहना है कि गजेंद्र सिंह धामा ने राजीव सिंघल को समझाया है कि उन्हें किसी फार्मूले के तहत इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है । 
गजेंद्र सिंह धामा की तरफ से सुनने को मिला है कि रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस द्वारा चुनाव कराने की स्थिति में तो राजीव सिंघल की जीत और भी पक्की है । गजेंद्र सिंह धामा के अनुसार, रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया के पदाधिकारी भी जानते हैं कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई का समर्थन है, इसलिए वह राजीव सिंघल को ही चुनाव जितवायेंगे । गजेंद्र सिंह धामा की इस तरह की बातें दीपक बाबु के लिए मुसीबत का सबब बनी हैं । केआर रवींद्रन ने दीपक बाबु को राजनीति करने वाले पूर्व गवर्नर का नाम भेजने का जो काम सौंपा है, उसे करने के तहत उन्हें गजेंद्र सिंह धामा का नाम भेजना चाहिए; पर कैसे भेजें - गजेंद्र सिंह धामा उनके बड़े खास हैं, उनके डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर हैं । नहीं भेजते हैं, तो डर यह है कि केआर रवींद्रन तक जानकारी पहुँच तो जाएगी ही - और तब केआर रवींद्रन के गुस्से का शिकार उन्हें होना पड़ेगा । राजीव सिंघल व गजेंद्र सिंह धामा की तरफ से दीपक बाबु को आश्वस्त किया जा रहा है कि उनके इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई से बड़े अच्छे संबंध हैं, इसलिए उन्हें फिक्र करने की जरा भी जरूरत नहीं है । इनकी तरफ से यही आश्वासन सुनील गुप्ता को भी था । इनके चक्कर में बेचारे सुनील गुप्ता की जो फजीहत हुई, उसे देखते हुए दीपक बाबु के लिए इनके आश्वासन पर भरोसा करना मुश्किल हो रहा है । दीपक बाबु के कुछेक शुभचिंतक उन्हें समझा भी रहे हैं कि राजीव सिंघल और गजेंद्र सिंह धामा जैसे उनके समर्थकों के चक्कर में पड़ोगे, तो सुनील गुप्ता की दशा को प्राप्त होगे । राजीव सिंघल के नजदीकियों का हालाँकि कहना है कि राजीव सिंघल और गजेंद्र सिंह धामा को पूरा पूरा भरोसा है कि दीपक बाबु पूरी तरह से उनकी 'पकड़' में हैं, और वही करेंगे - जो करने के लिए उनसे कहा  जायेगा । 
इस तरह के भरोसों व दावों के बीच दीपक बाबु के लिए सबसे बड़ी समस्या यही है कि वह डिस्ट्रिक्ट को झगड़ों से मुक्ति दिलाने के लिए सुझाए गए डिस्ट्रिक्ट को तीन जोन में बाँटने के सुझाव पर आगे बढ़ें या गजेंद्र सिंह धामा का कहना मानें और चुनाव की तरफ बढ़ें ? 

Sunday, October 25, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स की 'ठुकाई'/'बजाई' से बचने लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग का विचार छोड़ने में ही अपनी भलाई देखी है

मेरठ । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स पर भरोसा न कर पाने के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने को लेकर असमंजस में फँस गए हैं । मजे की बात यह हुई है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से मिले चेतावनी पत्र की मार से बचने के लिए सुनील गुप्ता ने पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के यहाँ शरण खोजने की जो कोशिश की, उसका उन्हें बड़ा उत्साहजनक जबाव मिला और प्रायः हर पूर्व गवर्नर ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने के उनके प्रस्ताव का हाथों-हाथ समर्थन किया - किंतु फिर भी कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने का वह कोई फैसला नहीं कर पा रहे हैं । दरअसल राजीव सिंघल व उनके समर्थकों ने सुनील गुप्ता को आगाह किया है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने के उनके प्रस्ताव पर पूर्व गवर्नर्स ने जो उत्साह दिखाया है, वह उनकी मदद करने के संदर्भ में नहीं दिखाया है - बल्कि उनकी 'ठोकने'/'बजाने' का मौका बनाने/पाने के संदर्भ में दिखाया है । राजीव सिंघल व उनके समर्थकों ने सुनील गुप्ता को कहा/बताया है कि कुछेक पूर्व गवर्नर्स तो कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग को लेकर इसलिए उत्साहित हैं क्योंकि उसमें 'उन्हें' उन्हें 'धोने' का मौका मिलेगा, और बाकी कई फ्री का तमाशा देखने की उम्मीद में कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग करवा लेना चाहते हैं । सुनील गुप्ता के नजदीकियों के अनुसार ही, यह कहते/बताते हुए राजीव सिंघल ने सुनील गुप्ता को आश्वस्त किया है कि इन पूर्व गवर्नर्स के चक्कर में मत पड़ो - मैं इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई से कह कर तुम्हें बचवाऊँगा । 
राजीव सिंघल से यह आश्वासन मिलने के बाद ही सुनील गुप्ता ने दो काम एक साथ किए - एक तरफ तो उन्होंने यह कहते हुए अपना 'दम' दिखाना शुरू किया कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की चिट्ठी से क्या होता है, देखना मैं सब मैनेज कर लूँगा; और दूसरी तरफ उन्होंने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग के विचार से पीछे हटने के संकेत देने शुरू कर दिए । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग से उन्हें पीछे हटता पाकर कुछेक पूर्व गवर्नर्स ने अपने आप को ठगा हुआ महसूस किया है । उनका कहना है कि सुनील गुप्ता ही तो उनके पास आया था; रोते-धोते हुए और अपने बच्चों की कसमें देते हुए खुद को बचाने की गुहार लगाते हुए उनके पैरों में बैठ गया था; खुद ही कह/बता रहा था कि अब पूर्व गवर्नर्स ही मुझे बचा सकते हैं; उसके रोने-धोने को देखते हुए उन्होंने आपस में विचार-विमर्श भी किया तथा उसकी मदद करने को लेकर सक्रिय भी हुए - अब सुना है कि सुनील गुप्ता लोगों के बीच कह रहे हैं कि उन्हें पूर्व गवर्नर्स पर भरोसा ही नहीं है । मजे की बात यह हुई है कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को समर्थन देने के चक्कर में सुनील गुप्ता ने जिन बृज भूषण व योगेश मोहन गुप्ता को तवज्जो दी, वही दोनों सुनील गुप्ता के हाथों उपेक्षित होने की शिकायत करते सुने गए हैं । उनकी शिकायतों की सुनील गुप्ता हालाँकि कोई परवाह करते हुए भी नहीं देखे जा रहे हैं । कहीं कहीं तो सुनील गुप्ता यह तक कहते सुने गए हैं कि बृज भूषण और योगेश मोहन गुप्ता ने ज्यादा शिकायतबाजी की, तो उनका हाल भी एमएस जैन जैसा कर दिया जायेगा । एमएस जैन भी राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के बड़े समर्थक हैं, जिनकी सुनील गुप्ता ने खासी दुर्गति करते हुए उन्हें उनके क्लब से निकलवा दिया हुआ है । 
कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग कराने से पीछे हटने के पीछे सुनील गुप्ता का एक बड़ा डर दरअसल एमएस जैन वाला किस्सा भी है । राजीव सिंघल की तरफ से सुनील गुप्ता को स्पष्ट बता दिया गया है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग यदि हुई तो एमएस जैन तथा दूसरे गवर्नर्स उनकी ऐसी हालत करेंगे, जैसी उन्होंने सोची भी नहीं होगी । सुनील गुप्ता ने अपनी हरकतों और बातों से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को इतना अपमानित किया हुआ है, कि कई पूर्व गवर्नर्स बदला लेने की ताक में ही बैठे हुए हैं । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को सुनील गुप्ता से बदला लेने का अच्छा मौका उपलब्ध करवा सकती है । राजीव सिंघल के समर्थक पूर्व गवर्नर्स की तरफ से बन रहे इस खतरे को भाँप कर ही सुनील गुप्ता कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग करने/कराने से बच रहे हैं ।    
इस तरह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार राजीव सिंघल के संबंध एक पहेली की तरह बन गए हैं - जिसमें हर किसी के लिए फिलहाल यह समझना मुश्किल हो रहा है कि कौन किसको इस्तेमाल कर रहा है ? सुनील गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में राजीव सिंघल की हर संभव मदद कर रहे हैं और करने के प्रयासों में लगे हैं, किंतु दूसरी तरफ राजीव सिंघल के समर्थक नेता सुनील गुप्ता की पूरी तरह ऐसी-तैसी करने में लगे हैं । डिस्ट्रिक्ट में हर किसी के लिए हैरानी की बात यह है कि राजीव सिंघल के समर्थक नेता जब सुनील गुप्ता की गवर्नरी खराब करने के साथ-साथ 'छीनने' की भी कोशिश कर रहे हैं, तब सुनील गुप्ता आखिर किस 'लालच' में   राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थन में अपना तन-मन लगाए हुए हैं ? राजीव सिंघल के नजदीकियों की तरफ से हालाँकि इसका कारण यह बताया गया है कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी का समर्थन करने के बदले में उनसे मोटी रकम ऐंठ लेने की उम्मीद में सुनील गुप्ता उनके समर्थक नेताओं से प्रताड़ित व अपमानित होने के बावजूद उनकी उम्मीदवारी का काम करने में लगे हुए हैं । राजीव सिंघल ने इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के नाम का इस्तेमाल करते हुए सुनील गुप्ता को उनकी गवर्नरी बचाने का आश्वासन देकर अपनी तरफ और खींच लिया है । 
डिस्ट्रिक्ट में लोगों का कहना/पूछना लेकिन यह है कि राजीव सिंघल के मनोज देसाई के साथ यदि सचमुच नजदीकी संबंध हैं, और उन संबंधों के चलते वह वास्तव में सुनील गुप्ता की गवर्नरी को बचा लेंगे - तो उन्होंने सुनील गुप्ता की गवर्नरी को मुसीबत में फँसने ही क्यों दिया ? उल्लेखनीय है कि सुनील गुप्ता की गवर्नरी पर जो आफत है, उसके प्रमुख सूत्रधार के रूप में मनोज देसाई को ही देखा/पहचाना जा रहा है । मनोज देसाई यदि चाहते तो सुनील गुप्ता के खिलाफ हुई शिकायतों को बीच में ही दफ़्न कर सकते थे । उन्होंने ऐसा नहीं किया, उससे जाहिर है कि राजीव सिंघल ने उनसे सुनील गुप्ता की वकालत या तो की नहीं और या उनकी सुनी नहीं गई । यह इस बात का सुबूत है कि मनोज देसाई का नाम लेकर राजीव सिंघल वास्तव में डिस्ट्रिक्ट के लोगों को तथा सुनील गुप्ता को उल्लू ही बना रहे हैं । सुनील गुप्ता इसलिए खुशी खुशी बन भी रहे हैं, क्योंकि दूसरी बातों की बजाए उनकी निगाह राजीव सिंघल से रकम ऐंठने पर ज्यादा है । 

Monday, October 19, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता की गवर्नरी पर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की चिट्ठी से लटकी तलवार ने राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों की हरकतों पर भी रोक लगने की उम्मीद पैदा की है


मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की तरफ से लिखे गए पत्र के मजमून ने उस आशंका को सच साबित कर दिया है, जो रोटरी को बेचने के आरोपों के संदर्भ में 'रचनात्मक संकल्प' की आठ अक्टूबर 2015 की पोस्ट में व्यक्त की गई थी । सुनील गुप्ता पर जो आरोप लगते रहे हैं, उन्हें प्रथम दृष्टया सच मानते हुए इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने उन पर कार्रवाई शुरू कर दी है । कार्रवाई के तहत ही, केआर रवींद्रन ने सुनील गुप्ता को उक्त आरोपों पर अपना जबाव देने के लिए नोटिस भेजा है, जिसमें उन्होंने साफ साफ लिख दिया है कि आरोपों पर उन्होंने यदि संतोषजनक जबाव नहीं दिया तो जनवरी में होने वाली इंटरनेशनल बोर्ड मीटिंग में उनकी गवर्नरी को जारी रखने व मान्य रखने के बारे में फैसला लिया जायेगा । डिस्ट्रिक्ट टीम के सदस्यों को पद बेचने के आरोप पर केआर रवींद्रन ने बहुत ही तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है; साथ ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवारों से पैसे ऐंठने तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की आड़ में मोटा पैसा कमाने की सुनील गुप्ता की कोशिशों को भी केआर रवींद्रन ने खासा गंभीर माना है । उल्लेखनीय है कि रोटरी को बेचने के आरोपों को लेकर सुनील गुप्ता पिछले काफी समय से डिस्ट्रिक्ट में लोगों के निशाने पर रहे हैं । सुनील गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का कभी कोई नोटिस नहीं लिया । दरअसल वह यह सोच कर आश्वस्त रहे कि डिस्ट्रिक्ट के लोग आरोप लगाते रहने से ज्यादा कुछ कर नहीं पायेंगे, और रोटरी के बड़े पदाधिकारी इन आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे । किंतु खुद इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की तरफ से लिखे गए पत्र के प्राप्त होने के बाद से सुनील गुप्ता के लिए मामला गंभीर हो गया है । दरअसल 15 अक्टूबर की आधी रात के बाद आए तथा 16 अक्टूबर की सुबह देखे/पढ़े गए केआर रवींद्रन के पत्र से सुनील गुप्ता की गवर्नरी छिनने की जमीन तैयार होती दिख रही है ।  
सुनील गुप्ता ने अपनी गवर्नरी बचाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की स्थिति को टलवाने का फार्मूला सोचा है, तथा इस पर अपनी तरफ से प्रयास उन्होंने शुरू भी कर दिए हैं । दरअसल केआर रवींद्रन के कोप से बचने को लेकर सुनील गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट के बाहर के कुछेक प्रमुख लोगों से सलाह ली, तो उन्हें समझाया गया कि केआर रवींद्रन का मुख्य एजेंडा वास्तव में यह है कि उनके प्रेसीडेंट-काल में रोटरी में किसी भी स्तर पर कोई चुनाव न हो । वह मानते हैं कि चुनाव के चक्कर में ही रोटरी में तमाम झगड़े-झंझट होते हैं, इसलिए जब चुनाव ही नहीं होंगे तो झगड़े-झंझट स्वतः ही खत्म हो जायेंगे । न रहेगा बाँस, तो न रहेगी बाँसुरी । सुनील गुप्ता को समझाया गया है कि वह यदि अपने डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की संभावना को खत्म कर/करवा दें, तो केआर रवींद्रन उनसे खुश हो जायेंगे - और तब रोटरी को बेच कर मोटा पैसा बनाने के जो आरोप उन पर हैं, उसकी कालिख को भी केआर रवींद्रन अनदेखा कर देंगे । इस तरह उनकी गवर्नरी भी बच जायेगी, तथा रोटरी को बेच कर जो पैसा उन्होंने बनाया/कमाया है वह भी बच जायेगा । यह सलाह मिलने के बाद से सुनील गुप्ता ने मंजु गुप्ता तथा दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी को वापस कराने के लिए युद्ध-स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं । इन प्रयासों में सुनील गुप्ता का घृणित रूप यह और सामने आया है कि इस काम के लिए वह अपने बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं । दिवाकर अग्रवाल व मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को वापस कराने के लिए सुनील गुप्ता रोते-धोते हुए अपने बच्चों की कसमें दे कर भावनात्मक दबाव बनाने का काम कर रहे हैं । मंजु गुप्ता शुरू में तो उनके इस नाटक पर पसीजती हुईं सुनी गईं, लेकिन फिर उन्होंने भी सुनील गुप्ता की चाल को समझ/पहचान लिया । 
सुनील गुप्ता ने एक तर्क यह भी दिया कि पिछले रोटरी वर्ष में तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी के कहने पर यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की संभावना समाप्त हो सकती है, तो उनके प्रयासों को समर्थन क्यों नहीं मिल सकता है । उनका यह तर्क वाजिब होते हुए भी इसलिए नहीं चला, क्योंकि उनके प्रयासों में शुरू से ही बेईमानी के तत्व देखे/पहचाने जा रहे हैं ।पिछले रोटरी वर्ष में संजीव रस्तोगी ने जब ऐसा ही प्रयास किया था, तो उनके फार्मूले पर किसी को भी ऊँगली उठाने का मौका नहीं मिला था; वह किसी उम्मीदवार के साथ पक्षपात करते हुए नहीं दिखे थे - और इसीलिए सभी उम्मीदवारों व उनके समर्थक नेताओं ने संजीव रस्तोगी के प्रयासों को सहयोग व समर्थन दिया था । सुनील गुप्ता चाहते तो यह हैं कि उन्हें भी वैसा ही सहयोग व समर्थन मिले, जैसा पिछले रोटरी वर्ष में संजीव रस्तोगी को मिला था; लेकिन संजीव रस्तोगी ने जिस ईमानदारी के साथ प्रयास किया था, वैसी ही ईमानदारी अपनाने को वह तैयार नहीं हैं । इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए जो तीन उम्मीदवार हैं, सुनील गुप्ता उनमें से दो पर ही यह दबाव बना रहे हैं कि वह अपनी अपनी उम्मीदवारी को वापस ले लें तथा राजीव सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बन जाने दें । उनका यह प्रयास साबित कर रहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को टलवाने के पीछे उनका उद्देश्य डिस्ट्रिक्ट में सद्भाव बनाना नहीं, बल्कि राजीव सिंघल के लिए रास्ता साफ करवाना है । राजीव सिंघल के लिए रास्ता साफ करवाने के लिए सुनील गुप्ता अपने बच्चों को आगे करके उनकी कसमें देने तक के रास्ते पर क्यों बढ़ गए हैं - इसका जबाव भी उनकी ही बातों में मिल जा रहा है । दिवाकर अग्रवाल व मंजु गुप्ता के समर्थकों से सुनील गुप्ता बता रहे हैं कि राजीव सिंघल तो चुनाव में एक करोड़ रुपये खर्च करेंगे, दिवाकर अग्रवाल व मंजू गुप्ता कैसे उनका मुकाबला करेंगे ? जाहिर है कि सुनील गुप्ता की निगाह इस बात पर है कि वह यदि राजीव सिंघल के लिए रास्ता साफ करवा देते हैं, तो चुनाव के नाम पर राजीव सिंघल द्वारा खर्च होने वाले एक करोड़ रुपयों में से मोटा हिस्सा वह भी ऐंठ सकेंगे । 
मजे की बात यह है कि सुनील गुप्ता के ऊपर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की तरफ से कार्रवाई की यह जो तलवार लटकी है, वह राजीव सिंघल के समर्थक नेताओं के किए-धरे का नतीजा है - लेकिन फिर भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता उन्हीं राजीव सिंघल का काम बनाने के प्रयासों में लगे हुए हैं । इसका कारण सिर्फ यही है कि उन्हें राजीव सिंघल से ही पैसा ऐंठ पाने की उम्मीद है । सुनील गुप्ता को उनके लिए रास्ता साफ करने में लगा देख कर राजीव सिंघल व उनके समर्थक खुश तो बहुत हैं, लेकिन इस सवाल ने उन्हें बहुत डराया हुआ भी है कि सुनील गुप्ता से गवर्नरी छिनने की नौबत यदि आई, तो फिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का काम करने की जिम्मेदारी किसे मिलेगी ? अपनी तरफ से उन्होंने जहाँ जहाँ भी इस सवाल का जबाव तलाशने की कोशिश की, वहाँ वहाँ से उन्हें यही सुनने को मिला है कि तब फिर उक्त जिम्मेदारी निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी को ही मिलेगी । उनके लिए चिंता की बात यह है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के अनुसार, सुनील गुप्ता के भविष्य का फैसला यदि सचमुच जनवरी में होने वाली इंटरनेशनल बोर्ड मीटिंग में हुआ और उसी मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट का कामकाज चलाने का जिम्मा निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी को सौंप दिया गया, तो डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस तो फिर संजीव रस्तोगी की देखरेख में होगी - और तब राजीव सिंघल व उनके समर्थक नेताओं को मनमानी करने की छूट नहीं मिल सकेगी । इस तरह, सुनील गुप्ता को लिखे/भेजे केआर रवींद्रन के पत्र ने सुनील गुप्ता के लिए ही नहीं, उनके साथ-साथ राजीव सिंघल व उनके समर्थक नेताओं के सामने भी भारी मुश्किल खड़ी कर दी है ।

Wednesday, June 3, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के पक्ष में हवा बनाने के लिए योगेश मोहन गुप्ता, बृजभूषण और सुनील गुप्ता की तिकड़ी ने भावी इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के नाम का जो इस्तेमाल करना शुरू किया है; उससे राजीव सिंघल को सचमुच में फायदा होगा क्या ?

मेरठ । राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के बहाने डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में मनोज देसाई एक प्रमुख मुद्दा बनते हुए दिख रहे हैं । रोटरी क्लब मेरठ साकेत के राजीव सिंघल को अगले रोटरी वर्ष की डिस्ट्रिक्ट की सत्ताधारी तिकड़ी - सुनील गुप्ता, बृजभूषण और योगेश मोहन गुप्ता - के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; और इन तीनों की तरफ से फिलर्स दिए जा रहे हैं कि राजीव सिंघल चूँकि अगले दो वर्षों के लिए इंटरनेशनल डायरेक्टर होने जा रहे मनोज देसाई के 'आदमी' हैं, इसलिए डिस्ट्रिक्ट के दूसरे पूर्व गवर्नर्स भी राजीव सिंघल की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए मजबूर होंगे । उल्लेखनीय है कि इस तिकड़ी ने पहले रोटरी क्लब मेरठ के मनोज जैन को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का उम्मीदवार बनाने का प्रयास किया था - मनोज जैन उम्मीदवार बनने के लिए तैयार होते हुए भी 'दिखे' थे, लेकिन फिर जल्दी ही वह पीछे हट गए । उनके नजदीकियों का कहना रहा कि मनोज जैन अपने को उम्मीदवार बनाये जाने के पीछे छिपे 'इरादों' को पहचान गए और इसलिए फिर उन्होंने उम्मीदवार न बनने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी । मनोज जैन के पीछे हटने के बाद तिकड़ी फिर एक नए उम्मीदवार की तलाश में जुटी और राजीव सिंघल उनकी 'पकड़' में आ गए । राजीव सिंघल की उम्मीदवारी अलग-अलग कारणों से तिकड़ी के नेताओं को अपने अपने लिए फायदे का सौदा लग रही है, और इसलिए ही तिकड़ी के तीनों सदस्यों ने अपने अपने तरीके से राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को प्रमोट करना शुरू कर दिया है । 
योगेश मोहन गुप्ता को लगता है कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के जरिए वह रोटरी में अपने 'बुरे दिनों' से छुटकारा पा सकेंगे, और अपने लिए 'अच्छे दिन' ला सकेंगे । उल्लेखनीय है कि सीओएल चुनाव जीतने के चक्कर में उनकी जो फजीहत हुई, जिसके चलते न सिर्फ जीती-जिताई बाजी उन्हें हार जानी पड़ी, बल्कि सीओएल की चुनावी दौड़ से भी बाहर हो जाना पड़ा - और जिसके कारण वह रोटरी में पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए थे । हर तरफ से ठोकर खाए योगेश मोहन गुप्ता को पता नहीं किस सौदेबाजी के चलते सुनील गुप्ता ने 'सहारा' दिया और योगेश मोहन गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट व रोटरी में पुनर्स्थापित होने का मौका मिला । राजीव सिंघल की उम्मीदवारी की उँगली पकड़ कर योगेश मोहन गुप्ता को विश्वास है कि वह मनोज देसाई का 'पहुँचा' पकड़ लेंगे - और इस तरह से वह रोटरी में एक ऊँची छलाँग लगा लेंगे । बृजभूषण को - राजीव सिंघल का शिक्षा-तंत्र से जो 'रिश्ता' है, उससे लाभ उठाने का मौका दिख रहा है । सुनील गुप्ता की 'जरूरतें' दूसरी हैं । वह एक ऐसा उम्मीदवार चाहते हैं जो पूरी तरह से उनके कहे में रहे, उनके 'खर्चे' उठाए और जिसकी आड़ लेकर वह दूसरे उम्मीदवारों को अपने सामने झुका सकें । राजीव सिंघल के जरिए उन्हें अपनी यह जरूरतें पूरी होने का भरोसा है । हालाँकि कई लोगों का मानना और कहना है कि राजीव सिंघल होशियार व्यक्ति हैं और इन तीनों को अच्छी तरह 'पहचानते' हैं और इसलिए इनके जरिए इस्तेमाल नहीं हो सकेंगे । अन्य कुछेक लोगों का कहना लेकिन यह है कि राजीव सिंघल चाहें कितने ही होशियार हों, किंतु यदि उन्हें गवर्नर बनना हैं तो इनका सहारा उन्हें लेना ही पड़ेगा और ऐसे में इनके हाथों इस्तेमाल होना उनकी मजबूरी भी/ही होगी । 
योगेश मोहन गुप्ता, बृजभूषण और सुनील गुप्ता की तिकड़ी ने राजीव सिंघल को फाँसने तथा अपने साथ फँसाएँ रखने के लिए ही मनोज देसाई के नाम का इस्तेमाल करना शुरू किया है । इन्हें उम्मीद है कि मनोज देसाई के नाम का 'बोझ' रहेगा, तो राजीव सिंघल जल्दी से मैदान छोड़ेंगे नहीं । उल्लेखनीय है कि राजीव सिंघल ने इस वर्ष भी अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की थी, लेकिन चुनावी जोड़तोड़ का खेल शुरू हुआ तो उसका दबाव वह नहीं झेल सके और बिना लड़े ही वह मुकाबले से बाहर हो गए थे । राजीव सिंघल को जानने/पहचानने का दावा करने वाले लोगों का कहना है कि राजीव सिंघल यूँ तो बढ़िया कर्मठ व्यक्ति हैं और रोटरी को तथा रोटरी की राजनीति के समीकरणों को अच्छे से समझते/पहचानते हैं; समस्या किंतु यह है कि चुनावी राजनीति की उठापटक में जो दबाव बनते हैं - उन्हें झेल पाने और उन्हें हल कर पाने का धैर्य वह नहीं रख/दिखा पाते हैं । इसीलिए अधिकतर लोगों के लिए यह विश्वास कर पाना मुश्किल हो रहा है कि राजीव सिंघल चुनावी घमासान में सचमुच बने/टिके रह पायेंगे ? तिकड़ी के जो तीन लोग उनकी उम्मीदवारी का झंडा उठाए दिख रहे हैं, वह भी चूँकि उन्हें गवर्नर चुनवाने/बनवाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपने अपने स्वार्थों को पूरा करने के इरादे से उनकी उम्मीदवारी का झंडा उठाए हुए हैं - इसलिए भी राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को लेकर लोगों के बीच संदेह बना हुआ है । इस सच्चाई को समझने के कारण ही तिकड़ी के नेताओं ने मनोज देसाई के नाम का जाप किया हुआ है । उन्हें उम्मीद और विश्वास है कि मनोज देसाई का नाम राजीव सिंघल को चुनावी मैदान में टिके/डटे/बने रहने के लिए ताकत देगा । 
मजे की बात यह है कि अधिकतर लोगों को विश्वासपूर्वक यह भी नहीं पता है कि राजीव सिंघल का मनोज देसाई के साथ आखिर संबंध है क्या ? कुछेक लोगों का कहना है कि दो-तीन वर्ष पहले मनोज देसाई जब एक कार्यक्रम के सिलसिले में मेरठ आए थे तो रात में वह राजीव सिंघल के घर ठहरे थे और उस दौरान उनकी राजीव सिंघल के साथ घनिष्ठता हो गई थी । क्या इस तरह बनी घनिष्ठता के आधार पर मनोज देसाई डिस्ट्रिक्ट 3100 में होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पार्टी बनेंगे और राजीव सिंघल के लिए 'काम' करेंगे ? सुनील गुप्ता, योगेश मोहन गुप्ता, बृजभूषण की तिकड़ी ने अपने स्वार्थ में मनोज देसाई जैसे बड़े नेता का इस्तेमाल करने का यह जो तरीका अपनाया है, उसने डिस्ट्रिक्ट में एक बड़ी मजेदार बहस छेड़ दी है । तिकड़ी के इन तीन सदस्यों और उनके नजदीकियों का कहना है कि मनोज देसाई का नाम ही काफी है राजीव सिंघल को चुनवाने/जितवाने के लिए; दूसरे लोगों का कहना लेकिन यह है कि तिकड़ी के लोग अपने स्वार्थ में मनोज देसाई का नाम लेकर अभी भले ही लोगों को धोखा दे लें, लेकिन जल्दी ही पोल खुल जायेगी कि अपना अपना काम निकालने/बनाने के लिए इन्होंने मनोज देसाई जैसे बड़े पदाधिकारी के नाम का इस्तेमाल करने में भी हिचक महसूस नहीं की । राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थन में सुनील गुप्ता, बृजभूषण और योगेश मोहन गुप्ता की तिकड़ी ने भावी इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के नाम का जो गुब्बारा फुलाया है, उसमें हवा सचमुच में भरी रह पायेगी या वह जल्दी ही फूटेगा - यह जानने की दिलचस्पी सभी को है । 

Saturday, November 15, 2014

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में रोटरी इंटरनेशनल से हरी झंडी मिलने के फलस्वरूप डिस्ट्रिक्ट गवर्नर द्धारा स्वीकार किए जाने के बाद भी दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी जिस तरह से निरस्त हुई है, उससे योगेश मोहन गुप्ता द्धारा समर्थित राजीव सिंघल की उम्मीदवारी आशंका में घिर गई है

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत रोटरी क्लब मेरठ साकेत के राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को लेकर उठे विवाद ने डिस्ट्रिक्ट को एक बार फिर पिछले रोटरी वर्ष जैसी स्थितियों में पहुँचा दिया है । उल्लेखनीय है कि पिछले रोटरी वर्ष में दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि पायलट प्रोजेक्ट के नियम का उल्लंघन करते हुए वह गवर्नर टीम का हिस्सा बने और उनका नाम-पता-फोटो डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में छपा । ठीक इसी तर्क से, इस वर्ष राजीव सिंघल की उम्मीदवारी सवालों के घेरे में है । पिछले वर्ष डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में दिवाकर अग्रवाल का नाम-पता-फोटो तो एक जगह ही छपा था; इस वर्ष की डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में राजीव सिंघल का नाम-पता-फोटो तो दो जगह छपा है । राजीव सिंघल का कहना है कि उनका मामला दिवाकर अग्रवाल के मामले से बिलकुल अलग है; और दूसरी बात यह कि उनकी उम्मीदवारी को रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने स्वीकार्यता दे दी है तथा उस स्वीकार्यता के बाद ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने उनकी उम्मीदवारी को मंजूर कर लिया है ।
चूँकि हर मामला अपने आप में अलग ही होता है, इसलिए दिवाकर अग्रवाल और राजीव सिंघल के मामले में भी बहुत कुछ अलग अलग होगा ही - किंतु दोनों मामलों में एक बात समान है और वह यह कि पिछले रोटरी वर्ष में भी दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी को स्वीकार करने से पहले तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय से सलाह माँगी थी और वहाँ से हरी झंडी मिलने के बाद ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने उनकी उम्मीदवारी को स्वीकार किया था । इस बार भी ऐसा ही हुआ है । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद स्वीकार होने के बावजूद दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी जिस तरह सवालों के घेरे में बनी रही थी, उसी तरह राजीव सिंघल की उम्मीदवारी भी सवालों के घेरे में हैं । दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी रोटरी इंटरनेशनल से हरी झंडी मिलने - और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर द्धारा स्वीकार किए जाने के बाद भी फजीहत में फँसी रही और फिर रोटरी इंटरनेशनल द्धारा ही जिस तरह से निरस्त हुई - उससे राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को लेकर आशंका बनी हुई है ।
यह आशंका इसलिए और बलवती है क्योंकि देखा/माना यह जा रहा है कि दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी को रोटरी इंटरनेशनल ने दूसरी बार के अपने फैसले में तथ्यों को मद्देनजर रखते हुए नहीं, बल्कि 'न्याय' में बैलेंस बनाने/दिखाने के लिए निरस्त किया । सीओएल के चुनाव वाले मामले में ललित मोहन गुप्ता के साथ भी इसी तरह का बैलेंस बनाने/दिखाने के चक्कर में नाइंसाफी हुई है । इसलिए ही रोटरी इंटरनेशनल से फ़िलहाल हरी झंडी मिलने के बाद भी राजीव सिंघल की उम्मीदवारी पर तलवार को लटकी हुई ही देखा/पहचाना जा रहा है । ऐसा इसलिए भी है क्योंकि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के पीछे योगेश मोहन गुप्ता को देखा/पहचाना जा रहा है - रोटरी इंटरनेशनल के बड़े नेताओं बीच जिनकी बड़ी बदनामी है । इसीलिए राजीव सिंघल से हमदर्दी रखने वाले लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में नाम-पता-फोटो प्रकाशित होने का जो झमेला है, उसके चलते राजीव सिंघल को इस वर्ष अपनी उम्मीदवारी को छोड़ ही देना चाहिए - अन्यथा हो सकता है कि पाते पाते भी उन्हें कुछ न मिले ।
राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को पचड़े में फँसा पाकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के बाकी उम्मीदवार अपनी अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिशों में जुट गए हैं - हालाँकि उनके सामने भी समस्याएँ और मुसीबतें कम नहीं हैं । रोटरी क्लब मुरादाबाद मिडटाउन के मनोज कुमार को मुरादाबाद से अकेले उम्मीदवार होने का फायदा मिल सकता था, लेकिन उन्हें चूँकि दीपक बाबू के कैम्प का आदमी माना जाता है और दीपक बाबू के कैम्प की हालत इन दिनों चूँकि खासी पतली है इसलिए मनोज कुमार के लिए ज्यादा मौका दिख नहीं रहा है । रोटरी क्लब मेरठ कॉसमॉस के संजय अग्रवाल की बदकिस्मती यह है कि उन्हें 'अपनों' का ही साथ/समर्थन मिलता हुआ नहीं दिख रहा है । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एमएस जैन हालाँकि उन्हीं के क्लब के हैं, लेकिन उन्हें संजय अग्रवाल की बजाये रोटरी क्लब सिकंदराबाद के दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा/पहचाना जा रहा है । संजय अग्रवाल को इससे भी तगड़ा झटका मिला है डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट सुनील गुप्ता से । सुनील गुप्ता के चुनाव में संजय अग्रवाल ने काफी काम किया था, जिस नाते संजय अग्रवाल को उम्मीद थी कि उनकी उम्मीदवारी को सुनील गुप्ता का सहयोग/समर्थन मिलेगा - लेकिन सुनील गुप्ता उनकी उम्मीदवारी की किसी भी तरह से मदद करते हुए नजर नहीं आ रहे हैं । सुनील गुप्ता ने यह कहते हुए उनकी उम्मीदवारी से अपने आप को दूर कर लिया है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट पद पर होने के कारण उनके लिए किसी उम्मीदवार का सहयोग/समर्थन करना उचित नहीं होगा । दिनेश शर्मा को अभी तक किसी भी तरह के विवादों से दूर होने के कारण बेहतर स्थिति में माना/समझा जा रहा था; लेकिन अभी हाल ही में उन्हें निशाने पर लेते हुए जो पर्चेबाजी शुरू हुई है उससे लोगों को यह आभास तो हो ही गया है कि कुछेक लोग उनके पीछे लग गए हैं । इन सब स्थितियों में वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के लिए होने वाले चुनाव का परिदृश्य दिलचस्प तो हो ही उठा है ।