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Friday, December 15, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में रोटरी इंटरनेशनल के खिलाफ एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अंततः डीके शर्मा को रोटरी में ऐतिहासिक जीत मिली है और उनके लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी तक पहुँचने का रास्ता साफ हुआ है

सिकंदराबाद । रोटरी इंटरनेशनल से लड़ी एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद डीके शर्मा के लिए वह रास्ता आखिरकार खुला, जिस पर चल कर वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी तक पहुँच पायेंगे । पौढ़ी-गढ़वाल की डिस्ट्रिक्ट व सेशन जज की अदालत के फैसले ने डिस्ट्रिक्ट 3100 के नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस को हटाने, डीके शर्मा को गवर्नर पद सौंपने तथा इस बात को रेखांकित करते हुए कि मौजूदा रोटरी वर्ष में अब चूँकि ज्यादा समय नहीं बचा रह गया है, इसलिए अगले रोटरी वर्ष के लिए भी उन्हें गवर्नर पद पर रहने का मौका देने की जो बातें कहीं हैं - वह रोटरी इंटरनेशनल के इतिहास में अनोखा अध्याय जोड़ती हैं । इस फैसले से अगले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए हुआ चुनाव भी निरस्त हो जाता है और जिसके तहत डीके शर्मा के लिए दो रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद पर रहने का एक विलक्षण मौका बनता है । रोटरी इंटरनेशनल के इतिहास में दो रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहने का मौका इससे पहले शायद किसी को नहीं मिला है । इस अदालती फैसले ने डीके शर्मा के नजदीकियों और समर्थकों को ही नहीं, बल्कि डिस्ट्रिक्ट के अन्य लोगों को भी राहत और खुशी पहुँचाई है - जो डिस्ट्रिक्ट को फिर से डिस्ट्रिक्ट बनते देखने का इंतजार कर रहे थे । अधिकतर लोगों का मानना और कहना रहा है कि डीके शर्मा को बिना कोई गुनाह किए ही रोटरी इंटरनेशनल की तरफ से 'सजा' मिल रही है, इसलिए उनके साथ न्याय होना ही चाहिए । इसी भावना के चलते पौढ़ी-गढ़वाल की डिस्ट्रिक्ट व सेशन जज की अदालत में हुए फैसले का डिस्ट्रिक्ट में हर किसी ने स्वागत ही किया है और इसे डिस्ट्रिक्ट 3100 के लिए शुभ लक्षण के रूप में देखा/पहचाना है ।
रोटरी इंटरनेशनल की तरफ से डीके शर्मा के साथ हो रहे 'अन्याय' को लेकर लोगों के बीच इसलिए भी उदासी और नाराजगी थी, क्योंकि हाल-फिलहाल के वर्षों में डीके शर्मा ही अकेले ऐसे चुने हुए गवर्नर हैं, जो बिना किसी विवाद और या शोर-शराबे के गवर्नर चुने गए । संजीव रस्तोगी के गवर्नर-काल में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जितनी शांति और आपसी भाईचारे की भावना के साथ संपन्न हुआ, वैसा उदाहरण डिस्ट्रिक्ट 3100 तो छोड़िए - दूसरे किसी डिस्ट्रिक्ट में भी मुश्किल से ही मिलेगा । डिस्ट्रिक्ट 3100 में और दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में भी, निर्विरोध डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने के उदाहरण तो खूब मिलेंगे - लेकिन उन उदाहरणों की पृष्ठभूमि में सौदेबाजियों और या पक्षपातपूर्ण रूप से डराने/फुसलाने/ललचाने वाली हरकतों की जालसाजियों के किस्से भी अवश्य ही सुनने को मिलेंगे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में संजीव रस्तोगी ने लेकिन अपने कार्यकाल में पारदर्शी तरीके से सभी को विश्वास में लेते हुए ऐसा अनोखा माहौल बनाया था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद को लेकर कोई झमेला ही पैदा नहीं हुआ और सारी कार्रवाई बड़े सामान्य ढंग से संपन्न हुई, जिसमें डीके शर्मा सर्वसहमति से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुने गए । इससे ठीक पहले के वर्ष में दीपक बाबू के चुनाव में चूँकि खासे झगड़े-झंझट हुए थे, इसलिए डीके शर्मा के चुनाव के शांत/सहज भाव से निपट जाने पर सभी ने राहत, संतोष और खुशी की साँस ली थी । संजीव रस्तोगी के डिस्ट्रिक्ट में बनाए गए माहौल को लेकिन उनके बाद गवर्नर बने सुनील गुप्ता बनाए नहीं रख सके, जिस कारण सुनील गुप्ता के गवर्नर-काल में डिस्ट्रिक्ट में खासे बबाल हुए और नतीजे के रूप में सुनील गुप्ता की गवर्नरी पूरी होने से पहले ही वापस ले ली गई और डिस्ट्रिक्ट का स्टेटस भी खत्म कर दिया गया । इससे दीपक बाबू और डीके शर्मा का गवर्नर बनने का मौका भी छिन गया ।
दीपक बाबू ने तो इस स्थिति को स्वीकार कर लिया, किंतु डीके शर्मा ने अपना मौका वापस पाने के लिए प्रयास करना शुरू किया । शुरू से ही उनका तर्क रहा कि एक रोटेरियन और एक उम्मीदवार के रूप में उनके व्यवहार और आचरण पर कभी कोई आरोप नहीं रहा, और उनका चुनाव निर्विरोध ही नहीं बल्कि निर्विवाद रूप से संपन्न हुआ - आखिर तब फिर उनसे गवर्नर बनने का उनका अधिकार क्यों छीना जा रहा है ? डीके शर्मा ने अपनी तरफ से पहले रोटरी के भीतर ही न्याय प्राप्त करने की कोशिश की, और इस कोशिश में उन्होंने रोटरी इंटरनेशनल का हर दरवाजा खटखटाया; कई एक मौकों पर उन्हें तथा उनके साथियों को लगा भी कि रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी उनके साथ अन्याय नहीं होने देंगे और उनका गवर्नर-वर्ष शुरू होने से पहले ही डिस्ट्रिक्ट 3100 से नॉन-डिस्ट्रिक्ट का तमगा हट जाएगा और डीके शर्मा को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद मिल जाएगा । लेकिन समय बीतते बीतते डीके शर्मा और उनके साथियों को समझ में आ गया कि रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी उन्हें उलझाए हुए रख कर झाँसा दे रहे हैं तथा रोटरी में उन्हें न्याय नहीं ही मिलेगा ।
डीके शर्मा को तब मजबूर होकर अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा । अदालती कार्रवाई के दौरान भी डीके शर्मा को रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों की तरफ से कई बार संकेत/संदेश मिले कि वह अदालती कार्रवाई को वापस ले लें, और उसके बदले में रोटरी इंटरनेशनल उन्हें उनका हक दे देगी - लेकिन हर बार डीके शर्मा को अपने ठगे जाने का अहसास हुआ । अदालती कार्रवाई में भी काफी उतार-चढ़ाव रहे, जिसमें कभी डीके शर्मा का तो कभी रोटरी इंटरनेशनल का पलड़ा भारी होता हुआ नजर आया । डीके शर्मा ने रेखांकित किया कि अदालती कार्रवाई में जब जब उनका पलड़ा भारी होता हुआ लगा, तब तब रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों की तरफ से समझौते की बातें हुईं - लेकिन जल्दी ही यह भेद भी खुलता गया कि समझौते की बातों के पीछे उद्देश्य किसी भी तरह से अदालती कार्रवाई को रुकवाना और वापस करवाना ही था । डीके शर्मा रोटरी इंटरनेशनल की इस चाल में नहीं फँसे और बार बार कहते रहे कि रोटरी इंटरनेशनल के साथ कानूनी लड़ाई लड़ना उन्हें अच्छा तो नहीं लग रहा है, लेकिन रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के पक्षपातपूर्ण और चालाकी भरे रवैये के कारण उन्हें यह कानूनी लड़ाई मजबूरी में लड़ना पड़ रही है । मजबूरी में लड़ी इस कानूनी लड़ाई में अंततः डीके शर्मा को जीत मिली है और उनके लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी तक पहुँचने का रास्ता साफ हुआ है । डीके शर्मा के हक में आया कानूनी फैसला डीके शर्मा और डिस्ट्रिक्ट 3100 के साथ-साथ रोटरी के लिए भी खासा महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इस फैसले से रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों द्वारा फैलाए और स्थापित किए गए उस झूठ का पर्दाफाश हुआ है कि रोटरी इंटरनेशनल की मनमानियों को अदालती कार्रवाई के जरिए चुनौती नहीं दी जा सकती है और न्याय नहीं पाया सकता है ।
 पौढ़ी-गढ़वाल की डिस्ट्रिक्ट व सेशन जज की अदालत का फैसला :





Wednesday, April 20, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में दीपक बाबु की मनमानी, स्वार्थपूर्ण व धंधेबाजी से प्रेरित कारस्तानियाँ उनके साथ साथ अंततः डिस्ट्रिक्ट को भी ले डूबीं

मुरादाबाद । डिस्ट्रिक्ट 3100 के लिए कब्र खोदने का काम करने में सुनील गुप्ता को तो आठ महीने का समय लगा था, लेकिन दीपक बाबु ने डिस्ट्रिक्ट को कब्र में दफनाने का काम दो ढाई महीने में ही पूरा कर दिया है । सुनील गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से हटा कर जब दीपक बाबु को डिस्ट्रिक्ट का कार्यभार सौंपा था, तब दीपक बाबु और उनके संगी-साथियों ने इस बात पर जोरशोर से अहंकारभरी खुशी मनाई थी कि दीपक बाबु को तो दो वर्षों के लिए गवर्नरी करने का मौका मिल गया है - उस समय सचमुच कोई नहीं जानता था कि दो वर्षों के लिए मिले मौके को दीपक बाबु अपनी कारस्तानियों से दो महीने में ही खो देंगे । रोटरी के 111 वर्षों के इतिहास में दीपक बाबु संभवतः पहले और अकेले 'गवर्नर' हैं, जिन्हें गवर्नर का पदभार सँभालने से पहले ही गवर्नर पद के कामकाज करने से रोक दिया गया है । दीपक बाबु तो डिस्ट्रिक्ट असेम्बली करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उसके पाँच दिन पहले दिल्ली स्थित रोटरी इंटरनेशनल के साउथ एशिया ऑफिस में बुला कर उन्हें बता दिया गया कि वह यह असेम्बली न करें । इसके साथ ही उन्हें यह भी बता दिया गया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में वह और कोई काम भी न करें । दीपक बाबु ने अपने नजदीकियों को यह भी बताया है कि अनौपचारिक रूप से उन्हें यह भी बता दिया गया है कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने डिस्ट्रिक्ट 3100 को बंद करने का फैसला कर लिया है, जिसके बारे में औपचारिक घोषणा जल्दी ही कर दी जाएगी ।
दीपक बाबु और उनके नजदीकियों ने इस स्थिति के लिए डिस्ट्रिक्ट के उन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को जिम्मेदार बताया/ठहराया है, जो रोटरी इंटरनेशनल में लगातार शिकायतें करते रहे हैं । उनका कहना है कि लगातार की जाने वाली शिकायतों के कारण रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के बीच डिस्ट्रिक्ट की पहचान और छवि खराब हुई, जिसकी परिणति यह हुई है कि डिस्ट्रिक्ट बंद होने के कगार पर आ पहुँचा है । बड़े परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह बात किसी हद तक सच हो सकती है - किंतु पिछले दिनों के घटनाक्रम को देखें तो यह साफ समझ में आ जाता है कि यह दीपक बाबु हैं, जिनकी हरकतें डिस्ट्रिक्ट को इस कगार पर ले आईं हैं । यह बात ध्यान रखने की है कि करीब ढाई महीने पहले रोटरी इंटरनेशनल ने जब सुनील गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से हटा कर दीपक बाबु को गवर्नर पद का कार्यभार सौंपा था, तब तमाम शिकायतों तथा शिकायतों के कारण डिस्ट्रिक्ट की खराब हुई पहचान व छवि के बावजूद रोटरी इंटरनेशनल ने डिस्ट्रिक्ट को बंद करने का फैसला नहीं सुनाया था । शिकायतें और शिकायतों के कारण डिस्ट्रिक्ट की खराब हुई पहचान व छवि डिस्ट्रिक्ट के बंद होने का कारण होतीं - तो रोटरी इंटरनेशनल सुनील गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से हटाने का फैसला करने के साथ ही डिस्ट्रिक्ट को बंद करने का भी फैसला कर लेता । रोटरी इंटरनेशनल ने उस समय यह फैसला नहीं किया था । उसने उम्मीद की थी कि सुनील गुप्ता जिस डिस्ट्रिक्ट को सँभाल नहीं पा रहे हैं, उस डिस्ट्रिक्ट को दीपक बाबु सँभाल लेंगे । लेकिन दीपक बाबु तो सुनील गुप्ता के भी 'गुरू' निकले । सुनील गुप्ता ने अपनी कारस्तानियों से सिर्फ अपने को डुबोया था, लेकिन दीपक बाबु की कारस्तानियाँ ऐसी रहीं कि वह खुद तो डूबे ही - साथ ही डिस्ट्रिक्ट को भी ले डूबे ।
दीपक बाबु दरअसल उस 'संदेश' को पढ़ने में पूरी तरह विफल रहे, जो रोटरी इंटरनेशनल ने सुनील गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से हटा कर दिया था । यह एक बहुत ही कठोर फैसला था । रोटरी के इतिहास में शायद ही कभी इस तरह से किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को उसके पद से हटाया गया हो । जाहिर तौर पर इस फैसले का साफ संदेश था कि डिस्ट्रिक्ट 3100 की घटनाओं को रोटरी इंटरनेशनल गंभीरता से ले रहा है, तमाम घटनाओं के लिए वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को जिम्मेदार मान रहा है और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की हरकतों को वह अनदेखा करने के लिए तैयार नहीं है । दीपक बाबु को इस 'संदेश' को पढ़ना/समझना चाहिए था और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए था - किंतु वह सुनील गुप्ता की ही तरह 'धंधेबाजी' पर उतर आए । बिडंवना की बात यह रही कि रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने जब देखा/पाया कि दीपक बाबु रोटरी इंटरनेशनल के दिए 'संदेश' को नहीं समझ रहे हैं, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव तथा डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की आड़ में राजनीति करने तथा पैसे 'बनाने' की जुगाड़ में लगे हैं - तो उन्होंने दीपक बाबु के 'कान भी उमेठे' थे; किंतु दीपक बाबु ने उससे भी कोई सबक नहीं लिया । उल्लेखनीय है कि सुनील गुप्ता की जगह डिस्ट्रिक्ट का कार्यभार मिलते ही दीपक बाबु ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव तथा डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की आड़ में जो खेल शुरू किया, उसे इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने यह हिदायत देते हुए रोक दिया कि वह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस नहीं करेंगे, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय करवायेगा । इन हिदायतों से दीपक बाबु को समझ लेना चाहिए था कि केआर रवींद्रन की निगाह उनकी हरकतों पर है, और वह उन्हें मनमानी नहीं करने देंगे । दीपक बाबु की समझ पर लेकिन लगता है कि पत्थर पड़ गए थे, और उन्होंने अपने आप को सुनील गुप्ता का 'गुरू' साबित करने की ठान ही ली थी ।
सुनील गुप्ता की तर्ज पर ही दीपक बाबु ने अपने डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स को, उनकी सलाह को और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसले को ठेंगा दिखाने का रवैया अपनाया और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपमानित करने की हद तक जा पहुँचे । इसी का नतीजा था कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट में घटने वाली घटनाओं के कारण डिस्ट्रिक्ट की होने वाली बदनामी का संज्ञान लेते हुए उनसे बचने के लिए जो कुछेक महत्वपूर्ण फैसले किए गए, दीपक बाबु ने उन्हें क्रियान्वित करने में कोई दिलचस्पी ही नहीं ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव कराने की जिम्मेदारी उनसे भले ही छीन ली गई थी, लेकिन उसके बावजूद उस चुनाव की आड़ में 'धंधा' करने का जुगाड़ बनाने का प्रयास दीपक बाबु ने फिर भी नहीं छोड़ा था । दीपक बाबु के इस रवैये पर डिस्ट्रिक्ट में जो तीखी प्रतिक्रिया हुई, उसके बाद सच्चाई की जाँच करने के लिए केआर रवींद्रन ने दो सदस्यीय टीम डिस्ट्रिक्ट भेजी । इस टीम के आने को दीपक बाबु एक खतरे के रूप में देखते/पहचानते तथा डिस्ट्रिक्ट के लोगों को विश्वास में लेकर इस टीम के सामने एक संगठित व सकारात्मक तस्वीर पेश करते तो आज नजारा कुछ और होता; किंतु दीपक बाबु ने इस मौके को अपनी टुच्ची व स्वार्थी राजनीति को सफल बनाने के मौके के रूप में इस्तेमाल किया - लेकिन उनकी चाल उन्हें ही उल्टी पड़ गई । उक्त टीम के सदस्यों ने दीपक बाबु सहित कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स तथा कई अन्य रोटेरियंस से डिस्ट्रिक्ट का हाल-चाल लिया । इस जाँच में जो तथ्य सामने आए, उसने दीपक बाबु का असली चेहरा सामने ला दिया - जिसके बाद रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के सामने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा ।
जाहिर है कि दीपक बाबु को बार बार चेतावनी 'मिली' - जिन्हें पहचान/समझ कर वह संभलने का प्रयास कर सकते थे; और अपने साथ साथ डिस्ट्रिक्ट को भी बचा सकते थे । किंतु अपने मनमाने व स्वार्थपूर्ण फैसलों तथा अहंकारभरे रवैये के चलते दीपक बाबु ने उन मौकों का कोई सदुपयोग नहीं किया - जो उन्हें बार बार मिलते रहे । दीपक बाबु की कारस्तानियाँ उन्हें तो ले ही डूबी हैं, साथ ही डिस्ट्रिक्ट को भी ले डूबी हैं ।

Tuesday, March 1, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के भरोसे कॉलिज ऑफ गवर्नर्स का फैसला मानने से बचते दिख रहे दीपक बाबु पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपमानित करने की हद तक जा पहुँचे हैं

मुरादाबाद । दीपक बाबु जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स को छका रहे हैं और उनकी बात को अनसुना कर रहे हैं, उससे जाहिर है कि उन्होंने सुनील गुप्ता के साथ हुए प्रकरण से कुछ नहीं सीखा है और उन्होंने भी डिस्ट्रिक्ट व रोटरी का मजाक बनाने का फैसला कर लिया है । दीपक बाबु हालाँकि अभी थोड़े से भाग्यशाली दिख रहे हैं कि उनकी हरकतों से खिन्न और नाराज पूर्व गवर्नर्स अभी उनके पीछे उस तरह से नहीं पड़े हैं, जैसे कि सुनील गुप्ता से नाराज पूर्व गवर्नर्स उनके पीछे पड़ गए थे । किंतु दीपक बाबु अपनी बातों और अपनी हरकतों से जिस तरह से पूर्व गवर्नर्स को चिढ़ा रहे हैं, और उन्हें लगातार अपमानित महसूस करा रहे हैं - उससे लगता नहीं है कि अपने डिस्ट्रिक्ट में दीपक बाबु का 'हनीमून पीरियड' ज्यादा दिन चल पायेगा । दीपक बाबु के लिए मुसीबत की बात दरअसल यह हो गई है कि सुनील गुप्ता के खिलाफ हुई कार्रवाई ने लोगों को आश्वस्त किया है तथा भरोसा दिया है कि उनके द्वारा की गई शिकायतों पर रोटरी इंटरनेशनल ध्यान देता है तथा कार्रवाई करता है - इस बात से लोगों को शिकायत करने का बल मिला है, और जाहिर तौर पर इसका खामियाजा दीपक बाबु को ही भुगतना पड़ेगा । दीपक बाबु हालाँकि इस बात की कोई परवाह करते हुए अभी नहीं देखे जा रहे हैं । उनके नजदीकियों का कहना है कि दीपक बाबु का मानना और कहना है कि सुनील गुप्ता तो मौजूदा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की सनक का शिकार हो गए हैं, और इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद पर केआर रवींद्रन के दिन अब ज्यादा नहीं बचे हैं - इसलिए उनकी परवाह करने की जरूरत नहीं है । उनके बाद इंटरनेशनल प्रेसीडेंट का पदभार सँभालने वाले जॉन जर्म उनके जैसे बिलकुल नहीं हैं, और वह शिकायतों पर कोई तवज्जो नहीं देंगे । रही बात इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की - तो उनके बारे में दीपक बाबु का मानना/कहना है कि मनोज देसाई बड़े सज्जन पुरुष हैं, उनकी बस खुशामद करते रहो, और बाकी फिर चाहे जो करो - उन्हें कोई परवाह नहीं है ।  रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों के इस आकलन के भरोसे ही दीपक बाबु ने अपने डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स को, उनकी सलाह को और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसले को ठेंगा दिखाया हुआ है ।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने के शुरू में कॉलिज ऑफ गवर्नर्स ने अपनी मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट में घटने वाली घटनाओं के कारण डिस्ट्रिक्ट की होने वाली बदनामी का संज्ञान लेते हुए कुछेक महत्वपूर्ण फैसले किए थे । गहन विचार-विमर्श के बाद कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के बीच जिन बातों पर सहमति बनी, वह इस प्रकार थे : डिस्ट्रिक्ट में किसी को व्यवस्था संबंधी कोई शिकायत है तो वह सीधे रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत नहीं करेगा; रोटरी इंटरनेशनल से अनुरोध किया जायेगा कि उसे कोई शिकायत मिले तो उसे वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को भेजे, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर उसे डिस्ट्रिक्ट आर्बिट्रेशन कमेटी के हवाले करे; पाँच सदस्यीय डिस्ट्रिक्ट आर्बिट्रेशन कमेटी का गठन किया जाए, जिसमें वरिष्ठता क्रम के अनुसार हर वर्ष दो वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स हों; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के मौजूदा दोनों उम्मीदवार अपनी अपनी उम्मीदवारी से इस्तीफा दें, तथा कॉलिज ऑफ गवर्नर्स जोन-अनुसार उनकी उम्मीदवारी के बारे में फैसला करें; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए डिस्ट्रिक्ट को तीन जोन में बाँटा जाए, जहाँ से बारी बारी से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार आएँ; आदि-इत्यादि । मीटिंग में इन मुद्दों पर पूर्व गवर्नर्स के बीच हालाँकि परस्पर विरोधी विचार भी थे, और कुछेक मौकों पर उनके बीच गर्मा-गर्मी भी हुई - लेकिन अंततः डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के हित में इन मुद्दों पर उनके बीच सहमति बनी । रोटरी इंटरनेशनल के एक विशेष फैसले के आधार पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार सँभाल रहे दीपक बाबु ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में घोषणा की कि वह तीन-चार दिन में इस मीटिंग के मिनिट्स डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच सार्वजनिक कर देंगे, जिससे कि इन फैसलों को लागू करने के लेकर डिस्ट्रिक्ट के लोगों की भी सहमति बनाई जा सके और मीटिंग के फैसलों को क्रियान्वित करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सके । यह घोषणा किए हुए दीपक बाबु को करीब करीब तीन सप्ताह से ऊपर का समय हो चुका है, लेकिन उन्होंने अभी तक उक्त मीटिंग के मिनिट्स सार्वजनिक करने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है । इस बीच जिन पूर्व गवर्नर्स ने उनसे इस बारे में बात की, उन्हें उन्होंने अलग अलग तरह की बहानेबाजी करके टरका दिया है । मजे की बात यह है कि दीपक बाबु के नजदीकियों से लोगों को सुनने को मिल रहा है कि दीपक बाबु न तो आर्बिट्रेशन कमेटी बनाने के पक्ष में हैं, और न डिस्ट्रिक्ट को तीन जोन में विभक्त करने के लिए राजी हैं, और न डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को हतोत्साहित करने के लिए तैयार हैं - और इसीलिए वह कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में सर्वसम्मति से हुए फैसलों को क्रियान्वित करने को लेकर टाल-मटोल वाला रवैया अपना रहे हैं ।
वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन केजी अग्रवाल को तो इस मामले में चुनौती सी देते हुए दीपक बाबु ने अपमानित तक कर दिया । इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए केजी अग्रवाल ने दीपक बाबु को फोन करके यह जानना चाहा कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में लिए गए फैसलों को क्रियान्वित कराने के लिए वह क्या कदम उठा रहे हैं; दीपक बाबु ने उनकी बात का जबाव देने की बजाए उन्हें चुनौती सी दे डाली कि आप दोनों उम्मीदवारों से इस्तीफा ले लें और जो उचित समझें वह फैसला करें । दीपक बाबु यह कहते हुए यह भूल गए कि डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के हित में उचित फैसला करने की जिम्मेदारी केजी अग्रवाल की नहीं, बल्कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार सँभालने के कारण उनकी है । भूले शायद वह कुछ नहीं, वह वास्तव में केजी अग्रवाल को अपमानित करते हुए यह जता/बता रहे थे कि मुझे कुछ नहीं करना है - अब तुमसे जो सकता हो वह कर लो । इकत्तीस वर्ष पहले गवर्नर रहे केजी अग्रवाल को मनमसोस कर रह जाना पड़ा । दीपक बाबु के नजदीकियों की मानें तो दीपक बाबु कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में हुए फैसलों पर धूल पड़ने देंगे, जिससे कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनाव हो और उन्हें अपनी चौधराहट दिखाने/जताने का तथा पैसे बनाने का मौका मिले । दिवाकर अग्रवाल से बदला लेने के लिए भी दीपक बाबु को कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग के फैसले को ठंडे बस्ते में डालना जरूरी लग रहा है । दीपक बाबु को लगता है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में लिए गए फैसले यदि लागू हो गए तो दिवाकर अग्रवाल इस वर्ष नहीं, तो अगले वर्ष आराम से गवर्नर बन जायेंगे । दीपक बाबु ऐसा नहीं होने देना चाहते हैं और इसके लिए वह अपने ही डिस्ट्रिक्ट के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपमानित करने की हद तक जाने के लिए तैयार हैं ।
दीपक बाबु के इस रवैये ने राजीव सिंघल और उनके नजदीकियों को भी डराना शुरू कर दिया है । उनकी चिंता यह है कि दीपक बाबु ने अपने रवैये से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को ज्यादा नाराज कर दिया, तो कहीं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी मुसीबत में न पड़ जाए । राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थक और शुभचिंतक हालाँकि जोरशोर से यह दावा करने में लगे हुए हैं कि दिल्ली स्थित रोटरी इंटरनेशनल के साउथ एशिया कार्यालय के पदाधिकारियों की देखरेख में चुनाव होने से उनकी जीत 'और पक्की' हो गई है; किंतु राजीव सिंघल और उनके नजदीकियों को डर यह सता रहा है कि सुनील गुप्ता की तरह कहीं उनके साथ भी धोखा हो गया तो क्या होगा ? उल्लेखनीय है कि सुनील गुप्ता को भी आश्वस्त किया गया था - और इस काम में राजीव सिंघल खुद भी आगे आगे थे - कि मनोज देसाई के होते हुए उन्हें डरने की चिंता नहीं करना चाहिए । पर यह आश्वासन सुनील गुप्ता के काम नहीं आया । राजीव सिंघल के कुछेक नजदीकियों का मानना और कहना है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में लिए गए फैसले से उनका गवर्नर बनने का रास्ता आसान हो गया है; अब उन्हें कोशिश सिर्फ यह करनी है कि जोन-अनुसार गवर्नर बनने की जो बात हो रही है उसमें उन्हें पहला नंबर मिल जाए - उन्हें लग रहा है कि इस कोशिश को सफल करना/बनाना कोई ज्यादा मुश्किल नहीं है । इसीलिए दीपक बाबु का रवैया उन्हें डरा रहा है और उन्हें लग रहा है कि दीपक बाबु की कारस्तानी कहीं उन्हें न ले डूबे - चुनाव आखिर चुनाव है, नतीजे का ऊँठ न जाने किस करवट बैठे ? राजीव सिंघल के कुछेक नजदीकी कहने भी लगे हैं कि दीपक बाबु और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसले को न मानने में उनका साथ दे रहे लोग दरअसल अपना स्वार्थ देख रहे हैं, और उनके स्वार्थ के चक्कर में कहीं राजीव सिंघल का बंटाधार न हो जाए । राजीव सिंघल के जो नजदीकी ज्योतिष में विश्वास करते हैं, उनका तो और भी मजेदार आकलन है : उनका कहना है कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के जो जो लोग घनघोर समर्थक रहे - जैसे योगेश मोहन गुप्ता, बृजभूषण और सुनील गुप्ता; वह सब एक एक करके सीन से गायब होते गए हैं; अब दीपक बाबु उनकी उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में उभरे हैं, तो उनको भी मुश्किलों ने घेरना शुरू कर दिया है । राजीव सिंघल के लिए यह कोई अच्छे संकेत नहीं हैं - इसलिए उनके और उनके समर्थकों के लिए अच्छा यही होगा कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसले ने जो एक मौका बनाया है, उससे वह फायदा उठाएँ । दीपक बाबु के रवैये ने लेकिन उन्हें असमंजस में डाला हुआ है; और राजीव सिंघल व उनके नजदीकियों के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि दीपक बाबु की कारस्तानियाँ उनका काम बनायेंगी या बिगाड़ेंगी ?

Monday, February 15, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर गजेंद्र सिंह धामा की राजनीति दीपक बाबु के लिए सचमुच मुसीबत बनेगी क्या ?

मुरादाबाद । दीपक बाबु को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से जो हिदायतें मिली हैं, उनका पालन करने में गजेंद्र सिंह धामा जिस तरह रोड़ा बनते दिख रहे हैं - उससे दीपक बाबु के सामने खासी दुविधा पैदा हो गई है । उल्लेखनीय है कि केआर रवींद्रन अभी पिछले दिनों डिस्ट्रिक्ट 3012 के आयोजनों के सिलसिले में दो दिन दिल्ली में थे, जहाँ उन्होंने दीपक बाबु को बुलाया । दीपक बाबु उनसे मिलने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वाली 'अदा' के साथ गए - केआर रवींद्रन ने लेकिन उनकी अदा की सारी हवा निकाल दी । दीपक बाबु भारी तैयारी के साथ गए थे, कि वह कई विषयों पर उनसे बात करेंगे; केआर रवींद्रन ने लेकिन उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी और न किसी विषय पर बात करने में उन्होंने कोई दिलचस्पी ही दिखाई - उन्होंने दीपक बाबु को कुछेक हिदायतें दीं और आठवाँ मिनट पूरा होते होते उन्हें चलता कर दिया । केआर रवींद्रन ने दीपक बाबु से जो कहा, उनमें प्रमुख बातें रहीं : दीपक बाबु इस रोटरी वर्ष के बाकी बचे महीनों के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं हैं, वह सिर्फ केयरटेकर हैं; वह क्लब्स की ऑफिसियल विजिट नहीं करेंगे और डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस नहीं करेंगे; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय करवायेगा । केआर रवींद्रन ने दीपक बाबु को एक बड़ा काम यह सौंपा कि जो पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ज्यादा राजनीति करते दिखें, उनके नाम मुझे भेजो । दीपक बाबु को केआर रवींद्रन से जो हिदायतें मिलीं, और जो 'व्यवहार' मिला - उसने उनके कान गर्म कर दिए हैं और मौजूदा रोटरी वर्ष के बाकी बचे महीनों में गवर्नरी करने के उनके जोश और उनकी तैयारी पर पानी बिखेर दिया है । दिल्ली में केआर रवींद्रन के सामने बिताए गए करीब आठ मिनट के समय ने दीपक बाबु को यह बात अच्छे से समझा दी है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने डिस्ट्रिक्ट 3100 को अपनी कड़ी निगरानी में रखा हुआ है, और जिस कारण उनकी जरा सी चूक उन्हें सुनील गुप्ता वाली दशा में पहुँचा सकती है । 
दीपक बाबु के लिए मुसीबत की बात यह है कि जिन गजेंद्र सिंह धामा को उन्होंने अपने अधिकृत गवर्नर-काल के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर बनाया है, वही गजेंद्र सिंह धामा डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी लेते देखे जा रहे हैं - और इस तरह उन्हें सुनील गुप्ता की राह पर धकेलते दिख रहे हैं । दरअसल दीपक बाबु जिस दिन केआर रवींद्रन के कठोर व्यवहार का सामना करके लौटे, उसके बाद डिस्ट्रिक्ट में तेजी से घटनाचक्र चला । पहले गजेंद्र सिंह धामा ने मेरठ के पूर्व गवर्नर्स की मीटिंग बुलाई, जिसमें उन्होंने राजीव सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाने की जरूरत बताते हुए रणनीति बनाने की बात की । उनकी बात पर मीटिंग में मौजूद लोगों ने कोई उत्साह तो नहीं दिखाया, लेकिन चूँकि किसी ने कोई विरोध भी नहीं किया - तो गजेंद्र सिंह धामा ने इसे अपनी बात के चल निकलने के रूप में देखा/पहचाना । इसके बाद नीरज अग्रवाल ने मुरादाबाद के पूर्व गवर्नर्स की मीटिंग बुलाई, जिसमें उन्होंने बड़ी सोच व बड़ी चिंता को प्रदर्शित किया - और डिस्ट्रिक्ट की मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श को आमंत्रित किया । विचार-विमर्श में आमराय यह बनी कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के कारण डिस्ट्रिक्ट में झगड़े होते हैं और डिस्ट्रिक्ट की बदनामी होती है । नीरज अग्रवाल ने कुछेक डिस्ट्रिक्ट में बनी व्यवस्था का हवाला देते हुए सुझाव रखा कि डिस्ट्रिक्ट को यदि तीन जोन में बाँट दिया जाए और वहाँ बारी बारी से गवर्नर चुने जाएँ, तो चुनावी झगड़ों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है । नीरज अग्रवाल का यह सुझाव मीटिंग में उपस्थित सभी को पसंद आया और सभी ने इसे अपनाने की वकालत की । 
इसके बाद कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग हुई - और उस मीटिंग में नीरज अग्रवाल ने मुरादाबाद के पूर्व गवर्नर्स की तरफ से तीन जोन वाले फार्मूले को रखा; उन्होंने दीपक बाबु को संबोधित करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव न होने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को अच्छे से किया जा सकता है । इस संदर्भ में उन्होंने अपने और संजीव रस्तोगी के गवर्नर-काल की कॉन्फ्रेंस का उदाहरण दिया । ऐसा लगा कि दीपक बाबु भी बात समझ रहे हैं । नीरज अग्रवाल की बातों पर सभी को सहमत होता देख गजेंद्र सिंह धामा को अपना खेल बिगड़ता हुआ दिखा, तो उन्होंने तीन जोन वाले फार्मूले को पटरी से उतारने की कोशिश तो बहुत की - लेकिन उनकी चली नहीं । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में अभी कोई अंतिम फैसला तो नहीं हुआ है, लेकिन एक मोटा-मोटी सहमति यह बनी है कि तीन जोन वाले फार्मूले को अमल में लाने की तैयारी की जाए - और इसके तहत दोनों उम्मीदवारों, राजीव सिंघल व दिवाकर अग्रवाल को राजी किया जाए तथा उम्मीदवारी से उनके इस्तीफे लिए जाएँ । दिवाकर अग्रवाल की तरफ से कॉलिज ऑफ गवर्नर्स को संदेश दे दिया गया है कि रोटरी व डिस्ट्रिक्ट के भले के लिए उनसे जो भी कुछ करने के लिए कहा जायेगा, वह करेंगे । राजीव सिंघल की तरफ से संदेश दिया गया है कि इस बारे में वह अपने समर्थकों/शुभचिंतकों से सलाह करके फैसला करेंगे । राजीव सिंघल के नजदीकियों का ही कहना है कि गजेंद्र सिंह धामा ने राजीव सिंघल को समझाया है कि उन्हें किसी फार्मूले के तहत इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है । 
गजेंद्र सिंह धामा की तरफ से सुनने को मिला है कि रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस द्वारा चुनाव कराने की स्थिति में तो राजीव सिंघल की जीत और भी पक्की है । गजेंद्र सिंह धामा के अनुसार, रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया के पदाधिकारी भी जानते हैं कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई का समर्थन है, इसलिए वह राजीव सिंघल को ही चुनाव जितवायेंगे । गजेंद्र सिंह धामा की इस तरह की बातें दीपक बाबु के लिए मुसीबत का सबब बनी हैं । केआर रवींद्रन ने दीपक बाबु को राजनीति करने वाले पूर्व गवर्नर का नाम भेजने का जो काम सौंपा है, उसे करने के तहत उन्हें गजेंद्र सिंह धामा का नाम भेजना चाहिए; पर कैसे भेजें - गजेंद्र सिंह धामा उनके बड़े खास हैं, उनके डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर हैं । नहीं भेजते हैं, तो डर यह है कि केआर रवींद्रन तक जानकारी पहुँच तो जाएगी ही - और तब केआर रवींद्रन के गुस्से का शिकार उन्हें होना पड़ेगा । राजीव सिंघल व गजेंद्र सिंह धामा की तरफ से दीपक बाबु को आश्वस्त किया जा रहा है कि उनके इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई से बड़े अच्छे संबंध हैं, इसलिए उन्हें फिक्र करने की जरा भी जरूरत नहीं है । इनकी तरफ से यही आश्वासन सुनील गुप्ता को भी था । इनके चक्कर में बेचारे सुनील गुप्ता की जो फजीहत हुई, उसे देखते हुए दीपक बाबु के लिए इनके आश्वासन पर भरोसा करना मुश्किल हो रहा है । दीपक बाबु के कुछेक शुभचिंतक उन्हें समझा भी रहे हैं कि राजीव सिंघल और गजेंद्र सिंह धामा जैसे उनके समर्थकों के चक्कर में पड़ोगे, तो सुनील गुप्ता की दशा को प्राप्त होगे । राजीव सिंघल के नजदीकियों का हालाँकि कहना है कि राजीव सिंघल और गजेंद्र सिंह धामा को पूरा पूरा भरोसा है कि दीपक बाबु पूरी तरह से उनकी 'पकड़' में हैं, और वही करेंगे - जो करने के लिए उनसे कहा  जायेगा । 
इस तरह के भरोसों व दावों के बीच दीपक बाबु के लिए सबसे बड़ी समस्या यही है कि वह डिस्ट्रिक्ट को झगड़ों से मुक्ति दिलाने के लिए सुझाए गए डिस्ट्रिक्ट को तीन जोन में बाँटने के सुझाव पर आगे बढ़ें या गजेंद्र सिंह धामा का कहना मानें और चुनाव की तरफ बढ़ें ? 

Thursday, February 4, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में सुनील गुप्ता के गवर्नर-काल के आखिरी कुछ महीने पाने वाले दीपक बाबु, सुनील गुप्ता के साथ जो हुआ उससे सबक भी लेंगे क्या ?

मेरठ । जाते जाते बचते दिख रहे सुनील गुप्ता को आखिरकार जाना ही पड़ा । उनके लिए फजीहत की बात सिर्फ यही नहीं रही कि अपना गवर्नर-काल पूरा किए बिना, अपने गवर्नर-काल की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस किए बिना ही उन्हें अपनी गवर्नरी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा - इससे भी ज्यादा बुरी बात उनके लिए यह रही कि इस बिदाई-बेला में वह पूरी तरह अकेले ही नजर आ रहे हैं, और इतने बड़े डिस्ट्रिक्ट में कोई भी उनके साथ हमदर्दी दिखाता नहीं नजर आ रहा है । अपनी कारस्तानियों से सुनील गुप्ता ने रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों को ही अपने खिलाफ नहीं कर लिया था, बल्कि अपने संगी-साथियों को भी अपने से दूर कर लिया था - जिसका नतीजा यह है कि आज वह डिस्ट्रिक्ट में इतने अकेले पड़ गए कि उन्हें सच्चे हमदर्द का भी टोटा पड़ गया है । सबसे हैरान कर देने वाला रवैया राजीव सिंघल और उनके संगी-साथियों का देखने/सुनने को मिला है । राजीव सिंघल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार हैं, और सुनील गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहने के क्षण तक उनके परम भक्त थे । राजीव सिंघल दरअसल सुनील गुप्ता की 'मदद' से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद पाने की जुगाड़ में थे और इसलिए वह सुनील गुप्ता को 'राम' मानकर उनके सुग्रीव बने हुए थे । लेकिन सुनील गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न रहने के बाद वह सबसे ज्यादा प्रसन्न दिख और सुने जा रहे हैं । उनकी प्रसन्नता का कारण हालाँकि यह है कि सुनील गुप्ता से छिनी गवर्नरी दीपक बाबु को मिल गई है । दीपक बाबु की गवर्नरी में राजीव सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का पद अपने और पास आता दिख रहा है । उन्हें विश्वास है कि दिवाकर अग्रवाल के प्रति दीपक बाबु के मन में जो खुन्नस है, उसके चलते दीपक बाबु उन्हें ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुनवाने/बनवाने का हर संभव प्रयास करेंगे - और इसी उम्मीद में राजीव सिंघल अब सुनील गुप्ता को भूल/छोड़ कर दीपक बाबु के सुग्रीव 'बनने' की तैयारी में जुट गए हैं । 
सुनील गुप्ता के गवर्नर-काल के बाकी बचे जो महीने दीपक बाबु को मिले हैं, उससे दीपक बाबु और उनके समर्थक तो बल्ले-बल्ले वाले मूड में हैं - लेकिन डिस्ट्रिक्ट के कई लोगों को रोटरी इंटरनेशनल का यह फैसला 'आसमान से गिरे और खजूर में अटके' वाली फीलिंग दे रहा है । ऐसे लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में इस समय जो संकट है और लोगों के बीच परस्पर विश्वास का जो अभाव है - उसे देखते हुए सुनील गुप्ता के गवर्नर-काल के बचे महीनों का चार्ज किसी अनुभवी व सुलझे व्यवहार व विवादों से दूर रहे पूर्व गवर्नर को देना चाहिए था । ऐसे लोगों का मानना और कहना है कि समझ, व्यवहार, नीयत व तौर-तरीकों के मामले में दीपक बाबु चूँकि सुनील गुप्ता के 'मौसेरे' भाई जैसे ही हैं - इसलिए मौजूदा संकटपूर्ण स्थिति को संभाल पाने की उनसे उम्मीद करना उनके साथ 'अन्याय' करने जैसा मामला भी हो जायेगा । सुनील गुप्ता की बरबादी का एक बड़ा कारण राजीव सिंघल भी रहे हैं; जिन राजीव सिंघल के जाल में फँसने से सुनील गुप्ता खुद को रोक नहीं पाए - और गवर्नरी से हाथ धो बैठे हैं; उन्हीं राजीव सिंघल ने दीपक बाबु के लिए भी जाल बिछाने की तैयारी कर ली है - और राजीव सिंघल के समर्थकों को पूरा पूरा विश्वास है कि दीपक बाबु भी उनके जाल में फँसने से बच नहीं पायेंगे । प्रतीकों का यदि कोई महत्व होता है तो यह तथ्य ध्यान रखने योग्य है कि मात्र ढाई-तीन वर्ष पहले ही डिस्ट्रिक्ट ने दीपक बाबु की बजाए सुनील गुप्ता को तवज्जो दी थी, जिसके चलते सुनील गुप्ता के सामने दीपक बाबु को पीछे हटना पड़ा था । जो डिस्ट्रिक्ट ढाई-तीन वर्ष पहले दीपक बाबु की बजाए सुनील गुप्ता को तवज्जो दे रहा था, वही डिस्ट्रिक्ट आज सुनील गुप्ता के खिलाफ खड़ा दिख रहा है - तो इसमें दीपक बाबु के लिए यही संदेश है कि स्थितियाँ किसी समय यदि आपको तवज्जो देती हैं, तो स्थितियाँ आपको जमीन पर पटकने में भी जरा सी भी देर नहीं लगाती हैं । 
दीपक बाबु को जानने वाले कुछेक लोगों का हालाँकि यह भी कहना है कि बहुत सी नकारात्मक बातों के मामले में दीपक बाबु भले ही सुनील गुप्ता जैसे ही हों, किंतु सुनील गुप्ता के मुकाबले व्यावहारिकता उनमें ज्यादा है - जिसका उपयोग करेंगे 'तो' वह सुनील गुप्ता जैसी दशा को प्राप्त होने से बच सकेंगे । यहाँ 'तो' बहुत महत्वपूर्ण है । लोगों को यह भी लगता है कि सुनील गुप्ता की हुई दशा को देख कर भी दीपक बाबु सबक लेंगे और ऐसे कोई काम करने से बचेंगे, जो उन्हें सुनील गुप्ता के रास्ते पर ले जाएँ । दीपक बाबु का रास्ता इसलिए और भी ज्यादा काँटों भरा हो गया है, क्योंकि सुनील गुप्ता के हुए हाल से डिस्ट्रिक्ट के लोगों में खासा जोश भर गया है - उन्हें विश्वास हो चला है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की मनमानियों का विरोध करके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को जमीन सुँघाई जा सकती है । डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच पैदा हुए इस विश्वास ने दीपक बाबु के काम को खासा चुनौतीपूर्ण बना दिया है । दीपक बाबु अपने से पहले के दोनों गवर्नर्स - संजीव रस्तोगी तथा सुनील गुप्ता के अनुभव से सीख ले सकते हैं : संजीव रस्तोगी के सामने भी मुश्किलें कम नहीं थीं; किंतु अपने विवेकपूर्ण व्यवहार से अपने कामकाज में संतुलन बना कर उन्होंने डिस्ट्रिक्ट में सौहार्द बनाने का जो लक्ष्य पूरा किया - उसके लिए संपूर्ण रोटरी समाज से उन्हें प्रशंसा मिली; जबकि दूसरी तरफ सुनील गुप्ता के लिए अपने गवर्नर-काल को पूरा कर पाना ही संभव नहीं हो सका । यह देखना दिलचस्प होगा कि दीपक बाबु, संजीव रस्तोगी की राह पर चलते हैं और या अपने आप को सुनील गुप्ता का 'मौसेरा' भाई ही साबित करते हैं ? 

Tuesday, February 2, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता की बचती दिख रही कुर्सी ने इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की 'सक्रियता' पर सवाल खड़े किए; उनके अधिकार क्षेत्र व उनकी 'हैसियत' को चुनौती तो सुनील गुप्ता से ही मिल रही है

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता ने इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई को रोटरी इंटरनेशनल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की धमकी देकर अपनी कुर्सी क्या सचमुच बचा ली है ? सुनील गुप्ता तो अपने नजदीकियों के बीच यही दावा कर रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में तमाम लोग जहाँ इस बात को लेकर प्रश्नाकुल व परेशान हैं कि सुनील गुप्ता के खिलाफ शिकायत पर रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने आखिर फैसला क्या किया है; वहाँ सुनील गुप्ता अपने नजदीकियों को बता रहे हैं कि रोटरी के बड़े नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने तथा उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से हटाने की तैयारी तो पूरी कर ली थी, लेकिन मैंने जब रोटरी के बड़े नेताओं को दो-टूक शब्दों में बता दिया कि मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और मुझे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से हटाया तो मैं रोटरी इंटरनेशनल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूँगा - तब रोटरी के बड़े नेताओं ने मेरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल देने में ही अपनी भलाई समझी । सुनील गुप्ता अपने मामले में मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई तथा पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता के रवैये से खासे नाराज हैं; और आरोप लगा रहे हैं कि इन दोनों ने अपनी अपनी राजनीति चमकाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाने का षड्यंत्र किया - और धोखे से उनका 'शिकार' करने की कोशिश की । सुनील गुप्ता का अपने नजदीकियों के बीच कहना है कि ईश्वर की कृपा से वह मनोज देसाई तथा सुशील गुप्ता की बातों में नहीं आए - और इसलिए अभी भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न सिर्फ बने हुए हैं, बल्कि उनके विरोधियों को भी विश्वास हो चला है कि रोटरी इंटरनेशनल उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने नहीं जा रहा है । 
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 3100 में पिछले करीब दस दिन से चर्चा गर्म है कि सुनील गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से अब गए कि तब गए; लोगों के बीच बहस इस बात पर रही कि सुनील गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से सस्पेंड होंगे या टर्मिनेट होंगे । सुनील गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से सस्पेंड/टर्मिनेट होने की संभावना इतनी प्रबल रही कि कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने तो उनकी जगह 'लेने' के लिए लॉबीइंग भी शुरू कर दी । सुनील गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से सस्पेंड/टर्मिनेट होने की संभावना के प्रबल होने का कारण मनोज देसाई ने उपलब्ध कराया । उल्लेखनीय है कि कुछेक लोगों को रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस से पता चला तो कुछेक लोगों को खुद सुनील गुप्ता ने बताया कि रोटरी इंटरनेशनल की बोर्ड मीटिंग शुरू होने से ठीक पहले मनोज देसाई ने सुनील गुप्ता को फोन करके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से इस्तीफा देने का सुझाव दिया है । मनोज देसाई ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में बताया कि उनके खिलाफ जो शिकायतें हैं, उन्हें इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने बहुत गंभीरता से लिया है और वह सख्त कार्रवाई करने के पक्ष में हैं; केआर रवींद्रन की बातों से लगता है कि वह तुम्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से तो टर्मिनेट कर ही देंगे, संभव है कि तुम्हारे डिस्ट्रिक्ट को भी खत्म कर दें । यह बताते हुए मनोज देसाई ने सुनील गुप्ता को सुझाव दिया कि टर्मिनेट होने की बदनामी से बचने के लिए तथा अपने डिस्ट्रिक्ट को खत्म होने से बचाने के लिए अच्छा होगा कि तुम पहले ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से इस्तीफा दे दो । मनोज देसाई की तरफ से यह प्रयास भी होता हुआ सुना गया कि डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स सुनील गुप्ता को इस्तीफे के लिए राजी करें ।  
मनोज देसाई से अपने खिलाफ कार्रवाई होने की बात सुनकर सुनील गुप्ता को कोई आश्चर्य नहीं हुआ । दरअसल अपनी कारस्तानियों से सुनील गुप्ता ने रोटरी में इतनी बदनामी कमा ली है कि उनके खिलाफ कार्रवाई की जमीन तैयार होने लगी थी । इस तैयारी को भाँप कर सुनील गुप्ता ने पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता से मदद की गुहार भी लगाई थी, और सुशील गुप्ता ने उन्हें मदद का भरोसा भी दिया था । किंतु कुछ ही दिन पहले सुशील गुप्ता ने सुनील गुप्ता को बता दिया था कि तुम्हारा मामला इतना खराब है कि मेरे लिए कुछ कर पाना संभव नहीं होगा । सुशील गुप्ता के मदद करने के आश्वासन से पलटने के बाद सुनील गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद पर अपने दिन गिनना शुरू कर दिया था । इसीलिए इंटरनेशनल बोर्ड की मीटिंग से पहले जब मनोज देसाई ने उन्हें हालात का हवाला देते हुए इस्तीफा देने का सुझाव दिया, तो सुनील गुप्ता को कोई आश्चर्य नहीं हुआ । वह बल्कि इस स्थिति का सामना करने की तैयारी कर चुके थे । उन्होंने खुद ही लोगों को बताया कि मनोज देसाई ने जब उन्हें इस्तीफ़ा देने का सुझाव दिया, तो उन्होंने उनसे पूछा कि इस्तीफा देने के बाद उन्हें पीडीजी (पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर) की पहचान और उसके अधिकार मिलेंगे क्या ? मनोज देसाई ने इससे इंकार किया, जिसे सुनकर - सुनील गुप्ता ने खुद लोगों को बताया कि उन्हें पता नहीं कहाँ से और कैसे हिम्मत मिली कि उन्होंने मनोज देसाई से साफ कह दिया कि रोटरी इंटरनेशनल को जो करना हो करे, वह इस्तीफा नहीं देंगे । सुनील गुप्ता ने साथ ही साथ मनोज देसाई को स्पष्ट शब्दों में यह बता भी बता दिया कि उन्हें यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से हटाया गया, तो वह रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे । 
सुनील गुप्ता के जरिए लोगों को जब मनोज देसाई के साथ उनकी हुई इस बातचीत के बारे में पता चला - तो हर किसी ने मान लिया कि इंटरनेशनल बोर्ड मीटिंग खत्म होते होते सुनील गुप्ता की गवर्नरी गई । हर किसी को अब सिर्फ आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार था । लोगों के बीच सवाल सिर्फ यह था कि सुनील गुप्ता अकेले जायेंगे, या अपने साथ डिस्ट्रिक्ट को भी ले जायेंगे । यहाँ तक कि खुद सुनील गुप्ता ने भी अपनी 'जाने की' तैयारी कर ली थी - उस समय जिस किसी से भी उनकी बात हो रही थी, उनसे वह यही कह रहे थे : गवर्नरी ही तो ले रहे हैं, जान थोड़े ही ले रहे हैं । जाहिर है कि सब तैयार थे : सुनील गुप्ता जाने के लिए तैयार थे, दूसरे लोग उन्हें जाता हुआ देखने के लिए तैयार थे; सभी को रोटरी इंटरनेशनल की तरफ से आधिकारिक सूचना मिलने का इंतजार था । लेकिन इंतज़ार है कि ख़त्म होने में ही नहीं आ रहा है । इंटरनेशनल बोर्ड मीटिंग को संपन्न हुए छह-सात दिन हो चुके हैं; दूसरे डिस्ट्रिक्ट के मामलों में उक्त मीटिंग में जो फैसले हुए हैं, वह सार्वजनिक हो चुके हैं - लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3100 और उसके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता के मामले में जो फैसला होने की बात की जा रही थी, उस पर पूरी तरह से चुप्पीभरा सन्नाटा है । डिस्ट्रिक्ट में हर कोई अपने अपने सोर्सेज से - कोई रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस से तो कोई इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई से तो कोई किसी और अथॉरिटी से पता करने का प्रयास कर रहा है कि आखिर फैसला हुआ क्या है - लेकिन किसी को कहीं से भी कोई जबाव नहीं मिल रहा है । मजे की बात यह है कि रोटरी इंटरनेशनल के किसी जिम्मेदार अधिकारी की तरफ से यह भी नहीं कहा/बताया जा रहा है कि डिस्ट्रिक्ट 3100 और उसके गवर्नर सुनील गुप्ता के खिलाफ कोई मामला था ही नहीं, तो आप किस फैसले की बात कर रहे हो ?
रोटरी इंटरनेशनल की तरफ से बरती जा रही इस चुप्पी ने सुनील गुप्ता में विश्वास भरने का काम किया है, और उन्हें अपनी हिलती/गिरती नजर आ रही कुर्सी अब मजबूती से जमी रहती दिखने लगी है - और इसी विश्वास के चलते उन्होंने सुशील गुप्ता व मनोज देसाई तथा रोटरी इंटरनेशनल के खिलाफ अपनी नाराजगी जताना/दिखाना शुरू कर दिया है । सुनील गुप्ता को लग रहा है कि इन दोनों ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के नाम पर उन्हें डरा कर अपना कोई छिपा मकसद पूरा करने की चाल चली थी; किंतु अपनी होशियारी व अपनी हिम्मत से वह उनकी चाल में नहीं फँसे । मनोज देसाई के रवैये को लेकर तो सुनील गुप्ता बहुत ही खफा हैं । उनका आरोप है कि मनोज देसाई ने उन्हें जिस तरह डरा कर उनका इस्तीफा कराने का प्रयास किया, उससे उनका मानसिक उत्पीड़न हुआ है । जो हुआ, उससे सुनील गुप्ता ने एक निष्कर्ष यह और निकाला है कि मनोज देसाई आदि के बस की कुछ है नहीं - और यह झूठ बोल कर तथा डरा-धमका कर रोटेरियंस के बीच अपनी चौधराहट ज़माने की कोशिश करते हैं तथा अपने स्वार्थ पूरा करते हैं । सुनील गुप्ता का कहना है कि मनोज देसाई खुद फोन करके उनका इस्तीफा माँग रहे थे तथा डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स को उनके खिलाफ इकट्ठा कर रहे थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने कानूनी कार्रवाई की बात कही - उसके बाद से मनोज देसाई की उनके खिलाफ या उनके डिस्ट्रिक्ट के खिलाफ कोई बात कहने की हिम्मत नहीं हुई है । 
सुनील गुप्ता की धमकी से डर कर ही मनोज देसाई उनके खिलाफ कार्रवाई करने से पीछे हटे हैं, या सुनील गुप्ता को 'माफ़ करने' के पीछे कोई और बजह है - यह तो मनोज देसाई ही बता सकते हैं; लेकिन मनोज देसाई की सक्रियता के बावजूद सुनील गुप्ता की कुर्सी जिस तरह बचती हुई नजर आ रही है - उससे कुल मिलाकर फजीहत मनोज देसाई की ही हो रही है । मनोज देसाई के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि खुद सुनील गुप्ता उनके अधिकार क्षेत्र व उनकी हैसियत को चुनौती दे रहे हैं । 

Tuesday, November 10, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की तरफ से राजीव सिंघल से मिले आश्वासन के भरोसे ही सुनील गुप्ता ने मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी की बलि लेकर 'लक्ष्मी जी' की व्यवस्था करके अपनी दीवाली तो अच्छे से मनाने का इंतजाम कर लिया है

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता ने अपनी दीवाली अच्छे से मनाने की व्यवस्था कर ली है । उनके नजदीकियों का ही कहना/बताना है कि राजीव सिंघल की तरफ से 'लक्ष्मी जी' का इंतजाम करने के उद्देश्य से ही सुनील गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए प्रस्तुत मंजु गुप्ता के आवेदन को निरस्त कर दिया है । उल्लेखनीय है कि राजीव सिंघल और उनके समर्थक पहले से ही मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को प्रस्तुत न होने देने के प्रयासों में लगे हुए थे, और उनकी तरफ से सुनील गुप्ता पर मंजु गुप्ता के आवेदन को स्वीकार न करने के लिए भारी दबाव भी था । इसी कारण से राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने मंजु गुप्ता के क्लब में बबाल तक करवा दिया, जिसका मामला रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय तक पहुँचा । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने लेकिन राजीव सिंघल और उनके समर्थकों की चाल को कामयाब नहीं होने दिया । मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी के संदर्भ में रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने जैसा स्पष्ट रुख अपनाया, उसके चलते सुनील गुप्ता चाहते हुए भी राजीव सिंघल और उनके समर्थकों की 'उचित' सेवा नहीं कर सके । राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने लेकिन हार नहीं मानी । दरअसल उन्हें पता था कि जब सारे फार्मूले फेल हो जाएँ तब भी सुनील गुप्ता से काम कराने के लिए एक फार्मूला बचा रह जाता है । सुनील गुप्ता के नजदीकियों के अनुसार, उसी अंतिम फार्मूले को इस्तेमाल करते हुए सुनील गुप्ता से मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को निरस्त करने की कीमत पूछी गई - तो सुनील गुप्ता ने रोटरी इंटरनेशनल के फैसले को अनदेखा करने में देर नहीं लगाई । 
सुनील गुप्ता के बारे में दरअसल हर कोई यह जान गया है कि सुनील गुप्ता 'न बाप बड़ा न मय्या, सबसे बड़ा रुपय्या' फलसफे को मानने वाले व्यक्ति हैं । रोटेरियन और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुनील गुप्ता यह भी समझ गए हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में पैसा बनाने/कमाने के जो मौके अभी उनके पास हैं, वह ज्यादा समय तक नहीं बने/बचे रहेंगे - इसलिए पैसा बनाने/कमाने के चक्कर में हो रही बदनामी की परवाह करना भी उन्होंने छोड़ दिया है । सुनील गुप्ता में हालाँकि थोड़ा सा डर इस बात का जरूर दिखाई दे रहा है कि उनकी कारस्तानियों के चलते उनका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद कहीं न छिन जाए । उनके नजदीकियों का कहना है कि लेकिन इस संदर्भ में वह राजीव सिंघल की तरफ से मिले इस आश्वासन पर भरोसा कर रहे हैं कि उन्होंने इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई से हरी झंडी ले ली है कि सुनील गुप्ता से गवर्नरी नहीं छीनी जाएगी । सुनील गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि सुनील गुप्ता ने इस भरोसे के साथ-साथ अपने आप को इस बात के लिए भी तैयार कर लिया है कि यदि उनकी गवर्नरी छिन जाने का खतरा हो भी, तो भी उन्हें पैसा बनाने/कमाने के मौके नहीं छोड़ने हैं । सुनील गुप्ता ने जब यह तय कर ही लिया कि इज्जत चली जाए, कोई परवाह नहीं; गवर्नरी चली जाए, कोई परवाह नहीं; लेकिन पैसा आने का मौका वापस नहीं लौटना चाहिए - तब राजीव सिंघल को अपना काम कराना मुश्किल नहीं लगा । 
उल्लेखनीय है कि सुनील गुप्ता काफी समय तक मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी के आवेदन को स्वीकार करने से बचते फिर रहे थे । मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी के आवेदन को स्वीकार करने के बाबत रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय से स्पष्ट आदेश न मिला होता, तो सुनील गुप्ता हरगिज हरगिज उनकी उम्मीदवारी का आवेदन स्वीकार न करते; लेकिन रोटरी इंटरनेशनल के फैसले से उनके हाथ बंध गए और वह मनमानी न कर सकें । सुनील गुप्ता के नजदीकियों के अनुसार, मंजु गुप्ता की उम्मीदवारीरूपी काँटे को निकालने लिए राजीव सिंघल की तरफ से सुनील गुप्ता को दीवाली के मौके पर 'लक्ष्मी जी' का स्वागत करने का ऑफर लेकिन जैसे ही मिला - तब फिर सुनील गुप्ता ने रोटरी इंटरनेशनल के फैसले को भी धता बताने में देर नहीं की । 'लक्ष्मी जी' की कृपा के असर में सुनील गुप्ता ने इलेक्शन कमेटी के सदस्यों के रूप में अपने डिस्ट्रिक्ट के रवि भार्गव, ललित मोहन गुप्ता तथा अखिलेश कोठीवाल जैसे पूर्व गवर्नर्स को भी नहीं बख्शा । दरअसल हुआ यह कि इलेक्शन कमेटी की मीटिंग में कमेटी के इन तीनों सदस्यों को सुनील गुप्ता से यह सुनकर हैरानी हुई कि उन्होंने मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी का आवेदन निरस्त कर दिया है । इन तीनों सदस्यों ने इस मामले से संबंधित रिकॉर्ड देखना चाहा तो सुनील गुप्ता ने टालमटोल करके रिकॉर्ड दिखाने से मना कर दिया । सुनील गुप्ता के इस रवैये से यह तीनों निराश और नाराज तो बहुत हैं, लेकिन सुनील गुप्ता को इनकी नाराजगी की परवाह इसलिए नहीं है - क्योंकि वह यह विश्वास कर रहे हैं कि यह तीनों पूर्व गवर्नर्स उनसे नाराज भले ही हों, किंतु उनका कुछ कर नहीं पायेंगे । 
रोटरी को 'बेचने' के मामले में सुनील गुप्ता जो हिम्मत दिखा रहे हैं, उसका सबसे गंभीर पहलू यह है कि उनकी इस हिम्मत के पीछे इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के समर्थन की बात की जा रही है । राजीव सिंघल और उनके समर्थक मनोज देसाई के साथ अपनी नजदीकी का दावा करते हुए सुनील गुप्ता को भरोसा दिलाये हुए हैं कि वह उनकी गवर्नरी को आँच नहीं आने देंगे । राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने मनोज देसाई का नाम लेकर सुनील गुप्ता को एमएस जैन तथा हितेश कुमार शर्मा की तरफ से भी आश्वस्त किया है कि यह दोनों नाराज चाहें जितने हों तथा बातें चाहें जो कर रहे हों - किंतु सचमुच में करेंगे कुछ नहीं । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट के कई गवर्नर्स सुनील गुप्ता की कारस्तानियों के चलते सुनील गुप्ता से खासे नाराज हैं, और उनकी इस नाराजगी के डर से ही सुनील गुप्ता कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने की हिम्मत नहीं कर रहे थे । राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने लेकिन उन्हें आश्वस्त किया है कि मनोज देसाई के नाम पर सभी गवर्नर्स को मैनेज कर लिया गया है और नाराज गवर्नर्स थोड़ा बहुत गाली-गलौच भले कर लें, लेकिन उनकी कमाई/लूट के संदर्भ में उनकी गवर्नरी पर आँच नहीं आने देंगे । यह आश्वासन मिलने के बाद ही सुनील गुप्ता कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने के लिए राजी हुए हैं । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में और रोटरी को बेचने की सुनील गुप्ता की कार्रवाई में इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई का नाम जिस धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है - उसने डिस्ट्रिक्ट 3100 में चल रही घटनाओं को खासा महत्वपूर्ण बना दिया है । 
मनोज देसाई की तरफ से राजीव सिंघल से मिले आश्वासन के भरोसे ही सुनील गुप्ता ने मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी की बलि लेकर 'लक्ष्मी जी' की व्यवस्था करके अपनी दीवाली तो अच्छे से मनाने का इंतजाम कर लिया है ।

Sunday, October 25, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थक पूर्व गवर्नर्स की 'ठुकाई'/'बजाई' से बचने लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग का विचार छोड़ने में ही अपनी भलाई देखी है

मेरठ । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स पर भरोसा न कर पाने के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने को लेकर असमंजस में फँस गए हैं । मजे की बात यह हुई है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन से मिले चेतावनी पत्र की मार से बचने के लिए सुनील गुप्ता ने पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के यहाँ शरण खोजने की जो कोशिश की, उसका उन्हें बड़ा उत्साहजनक जबाव मिला और प्रायः हर पूर्व गवर्नर ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने के उनके प्रस्ताव का हाथों-हाथ समर्थन किया - किंतु फिर भी कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने का वह कोई फैसला नहीं कर पा रहे हैं । दरअसल राजीव सिंघल व उनके समर्थकों ने सुनील गुप्ता को आगाह किया है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने के उनके प्रस्ताव पर पूर्व गवर्नर्स ने जो उत्साह दिखाया है, वह उनकी मदद करने के संदर्भ में नहीं दिखाया है - बल्कि उनकी 'ठोकने'/'बजाने' का मौका बनाने/पाने के संदर्भ में दिखाया है । राजीव सिंघल व उनके समर्थकों ने सुनील गुप्ता को कहा/बताया है कि कुछेक पूर्व गवर्नर्स तो कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग को लेकर इसलिए उत्साहित हैं क्योंकि उसमें 'उन्हें' उन्हें 'धोने' का मौका मिलेगा, और बाकी कई फ्री का तमाशा देखने की उम्मीद में कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग करवा लेना चाहते हैं । सुनील गुप्ता के नजदीकियों के अनुसार ही, यह कहते/बताते हुए राजीव सिंघल ने सुनील गुप्ता को आश्वस्त किया है कि इन पूर्व गवर्नर्स के चक्कर में मत पड़ो - मैं इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई से कह कर तुम्हें बचवाऊँगा । 
राजीव सिंघल से यह आश्वासन मिलने के बाद ही सुनील गुप्ता ने दो काम एक साथ किए - एक तरफ तो उन्होंने यह कहते हुए अपना 'दम' दिखाना शुरू किया कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की चिट्ठी से क्या होता है, देखना मैं सब मैनेज कर लूँगा; और दूसरी तरफ उन्होंने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग के विचार से पीछे हटने के संकेत देने शुरू कर दिए । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग से उन्हें पीछे हटता पाकर कुछेक पूर्व गवर्नर्स ने अपने आप को ठगा हुआ महसूस किया है । उनका कहना है कि सुनील गुप्ता ही तो उनके पास आया था; रोते-धोते हुए और अपने बच्चों की कसमें देते हुए खुद को बचाने की गुहार लगाते हुए उनके पैरों में बैठ गया था; खुद ही कह/बता रहा था कि अब पूर्व गवर्नर्स ही मुझे बचा सकते हैं; उसके रोने-धोने को देखते हुए उन्होंने आपस में विचार-विमर्श भी किया तथा उसकी मदद करने को लेकर सक्रिय भी हुए - अब सुना है कि सुनील गुप्ता लोगों के बीच कह रहे हैं कि उन्हें पूर्व गवर्नर्स पर भरोसा ही नहीं है । मजे की बात यह हुई है कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को समर्थन देने के चक्कर में सुनील गुप्ता ने जिन बृज भूषण व योगेश मोहन गुप्ता को तवज्जो दी, वही दोनों सुनील गुप्ता के हाथों उपेक्षित होने की शिकायत करते सुने गए हैं । उनकी शिकायतों की सुनील गुप्ता हालाँकि कोई परवाह करते हुए भी नहीं देखे जा रहे हैं । कहीं कहीं तो सुनील गुप्ता यह तक कहते सुने गए हैं कि बृज भूषण और योगेश मोहन गुप्ता ने ज्यादा शिकायतबाजी की, तो उनका हाल भी एमएस जैन जैसा कर दिया जायेगा । एमएस जैन भी राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के बड़े समर्थक हैं, जिनकी सुनील गुप्ता ने खासी दुर्गति करते हुए उन्हें उनके क्लब से निकलवा दिया हुआ है । 
कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग कराने से पीछे हटने के पीछे सुनील गुप्ता का एक बड़ा डर दरअसल एमएस जैन वाला किस्सा भी है । राजीव सिंघल की तरफ से सुनील गुप्ता को स्पष्ट बता दिया गया है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग यदि हुई तो एमएस जैन तथा दूसरे गवर्नर्स उनकी ऐसी हालत करेंगे, जैसी उन्होंने सोची भी नहीं होगी । सुनील गुप्ता ने अपनी हरकतों और बातों से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को इतना अपमानित किया हुआ है, कि कई पूर्व गवर्नर्स बदला लेने की ताक में ही बैठे हुए हैं । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को सुनील गुप्ता से बदला लेने का अच्छा मौका उपलब्ध करवा सकती है । राजीव सिंघल के समर्थक पूर्व गवर्नर्स की तरफ से बन रहे इस खतरे को भाँप कर ही सुनील गुप्ता कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग करने/कराने से बच रहे हैं ।    
इस तरह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार राजीव सिंघल के संबंध एक पहेली की तरह बन गए हैं - जिसमें हर किसी के लिए फिलहाल यह समझना मुश्किल हो रहा है कि कौन किसको इस्तेमाल कर रहा है ? सुनील गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में राजीव सिंघल की हर संभव मदद कर रहे हैं और करने के प्रयासों में लगे हैं, किंतु दूसरी तरफ राजीव सिंघल के समर्थक नेता सुनील गुप्ता की पूरी तरह ऐसी-तैसी करने में लगे हैं । डिस्ट्रिक्ट में हर किसी के लिए हैरानी की बात यह है कि राजीव सिंघल के समर्थक नेता जब सुनील गुप्ता की गवर्नरी खराब करने के साथ-साथ 'छीनने' की भी कोशिश कर रहे हैं, तब सुनील गुप्ता आखिर किस 'लालच' में   राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थन में अपना तन-मन लगाए हुए हैं ? राजीव सिंघल के नजदीकियों की तरफ से हालाँकि इसका कारण यह बताया गया है कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी का समर्थन करने के बदले में उनसे मोटी रकम ऐंठ लेने की उम्मीद में सुनील गुप्ता उनके समर्थक नेताओं से प्रताड़ित व अपमानित होने के बावजूद उनकी उम्मीदवारी का काम करने में लगे हुए हैं । राजीव सिंघल ने इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के नाम का इस्तेमाल करते हुए सुनील गुप्ता को उनकी गवर्नरी बचाने का आश्वासन देकर अपनी तरफ और खींच लिया है । 
डिस्ट्रिक्ट में लोगों का कहना/पूछना लेकिन यह है कि राजीव सिंघल के मनोज देसाई के साथ यदि सचमुच नजदीकी संबंध हैं, और उन संबंधों के चलते वह वास्तव में सुनील गुप्ता की गवर्नरी को बचा लेंगे - तो उन्होंने सुनील गुप्ता की गवर्नरी को मुसीबत में फँसने ही क्यों दिया ? उल्लेखनीय है कि सुनील गुप्ता की गवर्नरी पर जो आफत है, उसके प्रमुख सूत्रधार के रूप में मनोज देसाई को ही देखा/पहचाना जा रहा है । मनोज देसाई यदि चाहते तो सुनील गुप्ता के खिलाफ हुई शिकायतों को बीच में ही दफ़्न कर सकते थे । उन्होंने ऐसा नहीं किया, उससे जाहिर है कि राजीव सिंघल ने उनसे सुनील गुप्ता की वकालत या तो की नहीं और या उनकी सुनी नहीं गई । यह इस बात का सुबूत है कि मनोज देसाई का नाम लेकर राजीव सिंघल वास्तव में डिस्ट्रिक्ट के लोगों को तथा सुनील गुप्ता को उल्लू ही बना रहे हैं । सुनील गुप्ता इसलिए खुशी खुशी बन भी रहे हैं, क्योंकि दूसरी बातों की बजाए उनकी निगाह राजीव सिंघल से रकम ऐंठने पर ज्यादा है । 

Monday, October 19, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता की गवर्नरी पर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की चिट्ठी से लटकी तलवार ने राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों की हरकतों पर भी रोक लगने की उम्मीद पैदा की है


मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की तरफ से लिखे गए पत्र के मजमून ने उस आशंका को सच साबित कर दिया है, जो रोटरी को बेचने के आरोपों के संदर्भ में 'रचनात्मक संकल्प' की आठ अक्टूबर 2015 की पोस्ट में व्यक्त की गई थी । सुनील गुप्ता पर जो आरोप लगते रहे हैं, उन्हें प्रथम दृष्टया सच मानते हुए इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने उन पर कार्रवाई शुरू कर दी है । कार्रवाई के तहत ही, केआर रवींद्रन ने सुनील गुप्ता को उक्त आरोपों पर अपना जबाव देने के लिए नोटिस भेजा है, जिसमें उन्होंने साफ साफ लिख दिया है कि आरोपों पर उन्होंने यदि संतोषजनक जबाव नहीं दिया तो जनवरी में होने वाली इंटरनेशनल बोर्ड मीटिंग में उनकी गवर्नरी को जारी रखने व मान्य रखने के बारे में फैसला लिया जायेगा । डिस्ट्रिक्ट टीम के सदस्यों को पद बेचने के आरोप पर केआर रवींद्रन ने बहुत ही तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है; साथ ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवारों से पैसे ऐंठने तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की आड़ में मोटा पैसा कमाने की सुनील गुप्ता की कोशिशों को भी केआर रवींद्रन ने खासा गंभीर माना है । उल्लेखनीय है कि रोटरी को बेचने के आरोपों को लेकर सुनील गुप्ता पिछले काफी समय से डिस्ट्रिक्ट में लोगों के निशाने पर रहे हैं । सुनील गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का कभी कोई नोटिस नहीं लिया । दरअसल वह यह सोच कर आश्वस्त रहे कि डिस्ट्रिक्ट के लोग आरोप लगाते रहने से ज्यादा कुछ कर नहीं पायेंगे, और रोटरी के बड़े पदाधिकारी इन आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे । किंतु खुद इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की तरफ से लिखे गए पत्र के प्राप्त होने के बाद से सुनील गुप्ता के लिए मामला गंभीर हो गया है । दरअसल 15 अक्टूबर की आधी रात के बाद आए तथा 16 अक्टूबर की सुबह देखे/पढ़े गए केआर रवींद्रन के पत्र से सुनील गुप्ता की गवर्नरी छिनने की जमीन तैयार होती दिख रही है ।  
सुनील गुप्ता ने अपनी गवर्नरी बचाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की स्थिति को टलवाने का फार्मूला सोचा है, तथा इस पर अपनी तरफ से प्रयास उन्होंने शुरू भी कर दिए हैं । दरअसल केआर रवींद्रन के कोप से बचने को लेकर सुनील गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट के बाहर के कुछेक प्रमुख लोगों से सलाह ली, तो उन्हें समझाया गया कि केआर रवींद्रन का मुख्य एजेंडा वास्तव में यह है कि उनके प्रेसीडेंट-काल में रोटरी में किसी भी स्तर पर कोई चुनाव न हो । वह मानते हैं कि चुनाव के चक्कर में ही रोटरी में तमाम झगड़े-झंझट होते हैं, इसलिए जब चुनाव ही नहीं होंगे तो झगड़े-झंझट स्वतः ही खत्म हो जायेंगे । न रहेगा बाँस, तो न रहेगी बाँसुरी । सुनील गुप्ता को समझाया गया है कि वह यदि अपने डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की संभावना को खत्म कर/करवा दें, तो केआर रवींद्रन उनसे खुश हो जायेंगे - और तब रोटरी को बेच कर मोटा पैसा बनाने के जो आरोप उन पर हैं, उसकी कालिख को भी केआर रवींद्रन अनदेखा कर देंगे । इस तरह उनकी गवर्नरी भी बच जायेगी, तथा रोटरी को बेच कर जो पैसा उन्होंने बनाया/कमाया है वह भी बच जायेगा । यह सलाह मिलने के बाद से सुनील गुप्ता ने मंजु गुप्ता तथा दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी को वापस कराने के लिए युद्ध-स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं । इन प्रयासों में सुनील गुप्ता का घृणित रूप यह और सामने आया है कि इस काम के लिए वह अपने बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं । दिवाकर अग्रवाल व मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को वापस कराने के लिए सुनील गुप्ता रोते-धोते हुए अपने बच्चों की कसमें दे कर भावनात्मक दबाव बनाने का काम कर रहे हैं । मंजु गुप्ता शुरू में तो उनके इस नाटक पर पसीजती हुईं सुनी गईं, लेकिन फिर उन्होंने भी सुनील गुप्ता की चाल को समझ/पहचान लिया । 
सुनील गुप्ता ने एक तर्क यह भी दिया कि पिछले रोटरी वर्ष में तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी के कहने पर यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की संभावना समाप्त हो सकती है, तो उनके प्रयासों को समर्थन क्यों नहीं मिल सकता है । उनका यह तर्क वाजिब होते हुए भी इसलिए नहीं चला, क्योंकि उनके प्रयासों में शुरू से ही बेईमानी के तत्व देखे/पहचाने जा रहे हैं ।पिछले रोटरी वर्ष में संजीव रस्तोगी ने जब ऐसा ही प्रयास किया था, तो उनके फार्मूले पर किसी को भी ऊँगली उठाने का मौका नहीं मिला था; वह किसी उम्मीदवार के साथ पक्षपात करते हुए नहीं दिखे थे - और इसीलिए सभी उम्मीदवारों व उनके समर्थक नेताओं ने संजीव रस्तोगी के प्रयासों को सहयोग व समर्थन दिया था । सुनील गुप्ता चाहते तो यह हैं कि उन्हें भी वैसा ही सहयोग व समर्थन मिले, जैसा पिछले रोटरी वर्ष में संजीव रस्तोगी को मिला था; लेकिन संजीव रस्तोगी ने जिस ईमानदारी के साथ प्रयास किया था, वैसी ही ईमानदारी अपनाने को वह तैयार नहीं हैं । इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए जो तीन उम्मीदवार हैं, सुनील गुप्ता उनमें से दो पर ही यह दबाव बना रहे हैं कि वह अपनी अपनी उम्मीदवारी को वापस ले लें तथा राजीव सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बन जाने दें । उनका यह प्रयास साबित कर रहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को टलवाने के पीछे उनका उद्देश्य डिस्ट्रिक्ट में सद्भाव बनाना नहीं, बल्कि राजीव सिंघल के लिए रास्ता साफ करवाना है । राजीव सिंघल के लिए रास्ता साफ करवाने के लिए सुनील गुप्ता अपने बच्चों को आगे करके उनकी कसमें देने तक के रास्ते पर क्यों बढ़ गए हैं - इसका जबाव भी उनकी ही बातों में मिल जा रहा है । दिवाकर अग्रवाल व मंजु गुप्ता के समर्थकों से सुनील गुप्ता बता रहे हैं कि राजीव सिंघल तो चुनाव में एक करोड़ रुपये खर्च करेंगे, दिवाकर अग्रवाल व मंजू गुप्ता कैसे उनका मुकाबला करेंगे ? जाहिर है कि सुनील गुप्ता की निगाह इस बात पर है कि वह यदि राजीव सिंघल के लिए रास्ता साफ करवा देते हैं, तो चुनाव के नाम पर राजीव सिंघल द्वारा खर्च होने वाले एक करोड़ रुपयों में से मोटा हिस्सा वह भी ऐंठ सकेंगे । 
मजे की बात यह है कि सुनील गुप्ता के ऊपर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की तरफ से कार्रवाई की यह जो तलवार लटकी है, वह राजीव सिंघल के समर्थक नेताओं के किए-धरे का नतीजा है - लेकिन फिर भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता उन्हीं राजीव सिंघल का काम बनाने के प्रयासों में लगे हुए हैं । इसका कारण सिर्फ यही है कि उन्हें राजीव सिंघल से ही पैसा ऐंठ पाने की उम्मीद है । सुनील गुप्ता को उनके लिए रास्ता साफ करने में लगा देख कर राजीव सिंघल व उनके समर्थक खुश तो बहुत हैं, लेकिन इस सवाल ने उन्हें बहुत डराया हुआ भी है कि सुनील गुप्ता से गवर्नरी छिनने की नौबत यदि आई, तो फिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का काम करने की जिम्मेदारी किसे मिलेगी ? अपनी तरफ से उन्होंने जहाँ जहाँ भी इस सवाल का जबाव तलाशने की कोशिश की, वहाँ वहाँ से उन्हें यही सुनने को मिला है कि तब फिर उक्त जिम्मेदारी निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी को ही मिलेगी । उनके लिए चिंता की बात यह है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के अनुसार, सुनील गुप्ता के भविष्य का फैसला यदि सचमुच जनवरी में होने वाली इंटरनेशनल बोर्ड मीटिंग में हुआ और उसी मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट का कामकाज चलाने का जिम्मा निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी को सौंप दिया गया, तो डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस तो फिर संजीव रस्तोगी की देखरेख में होगी - और तब राजीव सिंघल व उनके समर्थक नेताओं को मनमानी करने की छूट नहीं मिल सकेगी । इस तरह, सुनील गुप्ता को लिखे/भेजे केआर रवींद्रन के पत्र ने सुनील गुप्ता के लिए ही नहीं, उनके साथ-साथ राजीव सिंघल व उनके समर्थक नेताओं के सामने भी भारी मुश्किल खड़ी कर दी है ।

Thursday, October 8, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में रोटरी को 'बेचने' के आरोपों में घिरे सुनील गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रोटरी इंटरनेशनल से मिलने वाला भुगतान रुक सकता है क्या ?

मेरठ । सुनील गुप्ता को उन सूचनाओं ने बुरी तरह परेशान कर दिया है, जिनमें रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में खर्चे-पानी के लिए मिलने वाली रकम की उनकी दूसरी किस्त को रोक लेने की बात की/कही जा रही है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुनील गुप्ता ने जिस तरह से जो कमाई की है, उसके तथ्य रोटरी के बड़े पदाधिकारियों व बड़े नेताओं तक जा पहुँचे हैं - और उन तथ्यों के आलोक में सुनील गुप्ता पर रोटरी को 'बेचने' का आरोप सुबूतों सहित पुख्ता हुआ है । मजे की बात यह हुई है कि सुनील गुप्ता से बार बार यह माँग हुई है कि इकट्ठा की गई रकम तथा विभिन्न मदों में हुए खर्चे का हिसाब वह सार्वजनिक करें, किंतु सुनील गुप्ता ने इस माँग पर कोई ध्यान नहीं दिया है । रोटरी को 'बेच' कर रकम इकट्ठा करने के जिस तरह के आरोप सुनील गुप्ता पर हैं, उन्हें देखते हुए उम्मीद की गई थी कि सुनील गुप्ता अपने कार्यकाल का सारा हिसाब-किताब सबके सामने रख देंगे - ताकि उनकी फजीहत न हो । सुनील गुप्ता ने लेकिन हिसाब-किताब को छिपा कर रखने की जो कोशिश की, उससे उनके खिलाफ लगने वाले आरोप सच 'दिखने' लगे - और इसके चलते रोटरी के बड़े नेताओं व पदाधिकारियों को कोई न कोई कार्रवाई करना जरूरी लगा है । रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साउथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारियों का कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय कभी भी इस बात पर ध्यान नहीं देता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स अपने कार्यकाल के खर्चों को पूरा करने के लिए कैसे और कितनी रकम इकट्ठा करते हैं; किंतु सुनील गुप्ता का मामला तो बहुत ही अलग है । तमाम घटनाओं के हवाले से लोगों को लगा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुनील गुप्ता का सारा ध्यान सिर्फ इस बात पर है कि वह कैसे और कहाँ कहाँ से पैसे इकट्ठा कर लें, और कहाँ खर्चा बचा लें - ताकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वह अच्छी कमाई कर लें । 
सुनील गुप्ता द्वारा रोटरी को 'बेचने' की शिकायतें समय समय पर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन, इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई तथा पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर पीटी प्रभाकर को की गईं । मनोज देसाई ने आरोपों को देखा/परखा तथा अपने स्रोतों से मामले को समझने का प्रयास किया, तो प्रथम दृष्टया आरोपों को सच माना/पाया । मनोज देसाई ने मामले को और स्पष्टता से समझने तथा आवश्यक कार्रवाई का जिम्मा पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता को सौंप दिया । सुना/बताया गया कि सुशील गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट 3100 के दो वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स ओम प्रकाश सपरा व विष्णु सरन भार्गव से इस बारे में बात की । इन दोनों ने उन्हें क्या कहा/बताया, इसकी जानकारी तो नहीं मिली - किंतु सुशील गुप्ता से इनकी हुई बातचीत के बाद रोटरी को 'बेचने' के मामले में सुनील गुप्ता के फँसने और उनके खिलाफ कार्रवाई होने की चर्चा ने जोर जरूर पकड़ लिया । इससे समझा यही गया है कि ओम प्रकाश सपरा व विष्णु सरन भार्गव ने सुनील गुप्ता के खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि ही की होगी । दरअसल सुनील गुप्ता ने रोटरी को 'बेचने' का जो उपक्रम किया है, वह इतना स्पष्ट है कि उसे छिपा पाना असंभव ही है । डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में 70 से अधिक पृष्ठों में विज्ञापन प्रकाशित हुए हैं - उनकी कीमत को ही यदि जोड़ लिया जाए, तो वह अच्छी-खासी रकम बनती है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुनील गुप्ता ने अपनी टीम का सदस्य बनाने के लिए लोगों से मोटी मोटी जो रकम बसूली और इंटरसिटी जैसे विभिन्न कार्यक्रमों में रजिस्ट्रेशन व स्पॉन्सरशिप के जरिए जो उगाही की, उसका हिसाब अलग है ।
सुनील गुप्ता का दुस्साहस यह रहा कि रोटरी को 'बेचने' के आरोप उन पर लगते रहे, लेकिन वह फिर भी बसूली करते रहे । दरअसल उन्होंने माना यह था कि डिस्ट्रिक्ट के लोग शोर मचाने तथा शिकायत करने के अलावा और करेंगे क्या, तथा रोटरी के बड़े नेता व पदाधिकारी इस मामले में चाहेंगे तो भी कार्रवाई कर नहीं पायेंगे । उल्लेखनीय है कि रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के पास इस तरह के कोई अधिकार ही नहीं हैं, कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पर इस तरह का कोई अंकुश लगा सके कि वह अपने गवर्नर-काल में कैसे और कितनी रकम इकट्ठा करे और क्या/कैसे/कहाँ खर्च करे ? इस बात का सुनील गुप्ता ने पूरा फायदा उठाया, और रोटरी को 'बेचने' के आरोपों की कोई परवाह नहीं की । शुरू शुरू में उन्हें बदनामी का डर जरूर हुआ था, किंतु फिर उन्होंने अपने आप को जैसे समझा लिया कि बदनामी होगी तो क्या हुआ, पैसे तो मिलेंगे ! इसके बाद तो फिर वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में लिए जाने वाले हर फैसले को पैसे के तराजू पर ही तौलने लगे । अपनी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन को चुनने के मामले में उन्होंने खुद ही लोगों को बताया कि कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन पद के लिए वह किसी ऐसे पैसे वाले व्यक्ति को खोज रहे हैं, जो उनकी हर बात माने । लंबी सौदेबाजीभरी तलाश के बाद कॉन्फ्रेंस चेयरमैन पद के लिए उन्होंने जब रोटरी क्लब मेरठ के सत्य प्रकाश बंसल को चुनने की घोषणा की, तो लोगों को यह समझने में देर नहीं लगी कि सुनील गुप्ता जो करने की ठान लेते हैं, तो फिर उसे कर ही लेते हैं । 
डिस्ट्रिक्ट के लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच सुनील गुप्ता रोटरी को 'बेचते' हुए मोटी रकम बना लेने में भले कामयाब हो गए हों, लेकिन रोटरी इंटरनेशनल के बड़े नेताओं व पदाधिकारियों की नजर में आ जाने से वह मुश्किल में फँसते हुए दिख रहे हैं । रोटरी इंटरनेशनल के बड़े नेताओं व पदाधिकारियों का कहना है कि यह ठीक है कि रोटरी इंटरनेशनल के पास पैसों की हेराफेरी करने वाले रोटरी पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकार नहीं हैं; किंतु ऐसा भी नहीं है कि पैसों की हेराफेरी को रोटरी इंटरनेशनल चुपचाप बैठा देखता रहेगा । उनका कहना है कि इस संबंध में जब जब गंभीर आरोप सामने आए हैं, रोटरी इंटरनेशनल ने उचित कार्रवाई की है - और तरह की कार्रवाई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के खिलाफ ही नहीं, इंटरनेशनल प्रेसीडेंट तक के खिलाफ हुई है । इस तरह की कार्रवाइयों में रोटरी इंटरनेशनल से होने वाले भुगतान को रोकना एक कारगर तरीका रहा है । इसी बिना पर चर्चा सुनी जा रही है कि रोटरी इंटरनेशनल से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को खर्चे-पानी के लिए जो भुगतान होता है, सुनील गुप्ता को उसकी दूसरी किस्त भेजने से रोटरी इंटरनेशनल इंकार कर सकता है । इस चर्चा से सुनील गुप्ता की नींद उड़ गई है । उन्हें डर हुआ है कि यदि ऐसा हुआ, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्होंने जितना पैसा 'कमाने' का लक्ष्य निर्धारित किया था - उसे पूरा कर पाना उनके लिए मुश्किल ही हो जायेगा ।

Thursday, September 10, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में पूर्व गवर्नर हितेश कुमार शर्मा के फर्जी पत्र मामले में मनोज देसाई के रवैये से उत्साहित राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने जिस षड्यंत्रपूर्ण तरीके से मंजु गुप्ता को रास्ते से हटाने की कोशिश की है, उससे राजीव सिंघल की उम्मीदवारी की कमजोरी ही साबित हुई है

मेरठ । राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं ने इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के नाम पर डिस्ट्रिक्ट में जो गंदगी फैलाई हुई है, उस पर चुप्पी साध कर मनोज देसाई ने अपनी फजीहत और कराई हुई है । मनोज देसाई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हितेश कुमार शर्मा के पत्र पर जिस तरह कुंडली मार कर बैठ गए हैं, उससे राजीव सिंघल तथा उनके समर्थक नेताओं के हौंसले और बुलंद हुए हैं । इस बुलंद हौंसले की बदौलत ही राजीव सिंघल तथा उनके समर्थक नेताओं ने रोटरी क्लब मेरठ डायमण्ड में फर्जी तरीके से अधिकांश सदस्यों को ड्रॉप कर/करवा दिया है, ताकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए राजीव सिंघल को मंजु गुप्ता से मिल रही चुनौती को खत्म किया जा सके । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने जब मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को मिल रहे समर्थन के सामने अपने आपको कमजोर पाया, तो उन्होंने षड्यंत्र करके मंजु गुप्ता को रोटरी से ही 'बाहर' कर/करवा दिया है । राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेता इस मामले में अब सीधे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता को चुनौती दे रहे हैं कि वह मंजु गुप्ता तथा अन्य सदस्यों की सदस्यता बचा कर दिखाएँ । दरअसल रोटरी क्लब मेरठ डायमण्ड के अध्यक्ष तन्मय शर्मा ने जिस षड्यंत्रपूर्ण तरीके से मंजु गुप्ता तथा क्लब के अन्य सदस्यों को क्लब से बाहर कर दिया है, उसे अमान्य बताते हुए रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित कार्यालय के पदाधिकारियों ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता से कार्रवाई करने के लिए कहा है । राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं का कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल के इस स्पष्ट निर्देश के बाद सुनील गुप्ता ने क्लब के अध्यक्ष तन्मय शर्मा के साथ मीटिंग व बातचीत तो कर ली है, किंतु कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता अपने ही डिस्ट्रिक्ट के एक क्लब के अध्यक्ष के सामने अपने आपको जिस तरह से असहाय पा रहे हैं - उसे राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेता अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं; और अपनी इस 'जीत' का श्रेय मनोज देसाई को दे रहे हैं । 
मनोज देसाई लेकिन राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं की इससे भी बड़ी मदद हितेश कुमार शर्मा के फर्जी पत्र के मामले में कर रहे हैं । मनोज देसाई जिस दिन यह मदद करना बंद कर देंगे, उस दिन राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं में से कोई एक बड़ी मुसीबत में फँस जायेगा । दरअसल हुआ यह कि डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर हितेश कुमार शर्मा की तरफ से निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी तथा मौजूदा गवर्नर सुनील गुप्ता के खिलाफ आरोप लगाते हुए एक पत्र निवर्तमान इंटरनेशनल डायरेक्टर पीटी प्रभाकर को भेजा गया, जिसकी प्रति मनोज देसाई को भी संलग्न की गई । इंटरनेशनल डायरेक्टर होने के नाते मनोज देसाई ने इस पत्र का संज्ञान लिया, और हितेश कुमार शर्मा से कुछ स्पष्टीकरण माँगे । इस पर हितेश कुमार शर्मा का माथा चकराया । उन्होंने मनोज देसाई से कहा कि यह पत्र उन्होंने न तो लिखा है, और न ही भेजा है । हितेश कुमार शर्मा का एक बड़ा तर्क रहा कि उन्होंने अपना समस्त पत्र व्यवहार हिंदी में ही किया है; यहाँ तक कि जब वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर थे, तब भी उन्होंने हिंदी में ही पत्र लिखे थे - लिहाजा अब यदि उन्हें कोई पत्र लिखना ही होता, तो वह अंग्रेजी में क्यों लिखते ? हितेश कुमार शर्मा ने कहा कि उनके नाम का इस्तेमाल करते हुए किसी ने अपनी राजनीति साधने के लिए यह ओछा काम किया है । हितेश कुमार शर्मा ने मनोज देसाई से अनुरोध किया कि उनके नाम से भेजे गए इस फर्जी पत्र को जिस ईमेल से भेजा गया है, उस ईमेल का विवरण वह उन्हें उपलब्ध करवाएँ, जिससे कि वह यह ओछी हरकत करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकें । मनोज देसाई ने लेकिन हितेश कुमार शर्मा को उक्त ईमेल का विवरण उपलब्ध नहीं करवाया है । हितेश कुमार शर्मा के फर्जी पत्र पर कार्रवाई करने में मनोज देसाई ने जो तत्परता दिखाई, वैसी तत्परता चूँकि वह उक्त फर्जी ईमेल का विवरण उपलब्ध करवाने में नहीं कर रहे हैं - इसलिए इस मामले में उनकी भूमिका संदेहास्पद हो गई है । 
हितेश कुमार शर्मा के नाम से लिखे/भेजे गए फर्जी पत्र में जो बातें और आरोप हैं, वह कमोवेश वही हैं जो राजीव सिंघल के एक समर्थक नेता पूर्व गवर्नर एमएस जैन द्वारा पहले लिखे/भेजे गए पत्र में हैं - इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि हितेश कुमार शर्मा के नाम से फर्जी पत्र भेजने के पीछे राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं में से ही किसी का हाथ है । मजे की बात यह है कि एमएस जैन द्वारा लिखे गए पत्र पर डिस्ट्रिक्ट में जब बबाल मचा था, तब एमएस जैन ने यह कह कर पीछा छुड़ाया था कि उक्त पत्र उन्होंने नहीं लिखा/भेजा था; उनकी ईमेल आईडी किसी ने हैक करके यह शरारत की है । इस पर उनसे कहा गया था कि ईमेल आईडी हैक होने की रिपोर्ट उन्हें पुलिस में करना चाहिए ताकि हैकर को पकड़वा कर उसे सजा दिलवाई जा सके । एमएस जैन ने लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की - जिससे साबित हुआ कि ईमेल आईडी हैक होने की उनकी बात उनका सिर्फ एक बहाना है और उक्त शिकायती मेल उन्होंने ही किया था । उक्त ईमेल को लेकर एमएस जैन की लोगों के बीच बहुत ही थू थू हुई और उन्हें भारी शर्मिंदगी से गुजरना पड़ा । समझा जाता है कि एमएस जैन की हुई फजीहत से सबक लेकर ही राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं ने निवर्तमान व मौजूदा गवर्नर तथा अन्य कुछेक वरिष्ठ रोटेरियंस को झूठे आरोपों में बदनाम करने के लिए फर्जी तरीके अपनाने की राह चुनी - और इसके लिए हितेश कुमार शर्मा के नाम का इस्तेमाल किया । किसी के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि गवर्नर्स तथा वरिष्ठ रोटेरियंस को झूठी बातों के सहारे बदनाम करने तथा इस तरह रोटरी को कलंकित करने वालों को प्रश्रय देकर और उन्हें बचाने का प्रयास करके मनोज देसाई आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं ?
राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं ने सिर्फ डिस्ट्रिक्ट के लोगों को ही नहीं, बल्कि अपनी हरकतों से रोटरी के बड़े नेताओं तक को चुनौती दी हुई है । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने रोटरी में राजनीति को हतोत्साहित करने का आह्वान किया हुआ है और स्पष्ट चेतावनी दी हुई है कि जो कोई भी राजनीति करता हुआ पाया जायेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की इस स्पष्ट चेतावनी के बावजूद पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एमएस जैन, गजेंद्र सिंह धामा, योगेश मोहन गुप्ता खुलेआम राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थन में अभियान चलाए हुए हैं । केआर रवींद्रन के आह्वान और उनकी चेतावनी की याद दिलाए जाने पर इनकी तरफ से प्रायः यही सुनने को मिलता है कि - हम तो जो कर रहे हैं, खुलेआम कर रहे हैं; हम भी देखेंगे कि रवींद्रन क्या करते हैं ? रोटरी को कलंकित करने के मामले में इनके हौंसले इस कदर ऊँचे हैं कि रोटरी क्लब मुरादाबाद नॉर्थ के एक कार्यक्रम में पूर्व गवर्नर योगेश मोहन गुप्ता रोटरी फाउंडेशन में पैसे न देने के लिए यह कहते हुए आह्वान करते हैं कि रोटरी फाउंडेशन का पैसा रोटरी के बड़े पदाधिकारियों और नेताओं की मौजमस्ती में इस्तेमाल होता है, इसलिए उसमें पैसे देने से क्या फायदा ? यही लोग राजीव सिंघल की उम्मीदवारी का झंडा उठाए हुए हैं । 
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में राजीव सिंघल की समस्या यह है कि उनके समर्थक नेता नकारात्मक और ओछी किस्म की हरकतें करने के कारण डिस्ट्रिक्ट में खासे बदनाम हैं; जिस कारण लोगों के बीच उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई सकारात्मक सोच बन ही नहीं पा रही है । राजीव सिंघल के लिए मेरठ में ही समर्थन जुटाना मुश्किल हो रहा है । मेरठ में लोगों के बीच उनसे ज्यादा स्वीकार्यता मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए बनती नजर आ रही है । मंजु गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट में ही नहीं, डिस्ट्रिक्ट के बाहर भी - बल्कि दूसरे देशों तक में अपनी सक्रियता व संलग्नता से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है । इस पहचान के चलते ही मेरठ में उनके लिए अच्छा समर्थन है । राजीव सिंघल के कुछेक समर्थकों ने उन्हें 'मेरठ के उम्मीदवार' के रूप में प्रमोट करने का प्रयास किया, किंतु मेरठ के कई प्रमुख रोटेरियंस ने उन्हें साफ बता दिया कि यदि सचमुच चाहते हो कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मेरठ का चुना जाए, तो राजीव सिंघल को छोड़ कर मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी का समर्थन करो । मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी से मिल रही चुनौती से निपटना राजीव सिंघल और उनके समर्थकों को जब मुश्किल और असंभव लगा, तो उन्होंने षड्यंत्रपूर्वक मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को समाप्त करने का दुष्चक्र रचा । उनकी बदकिस्मती रही कि उनके दुष्चक्र की पोल जल्दी ही खुल गई, और मंजु गुप्ता तथा उनके समर्थकों ने समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर ली । मनोज देसाई के रवैये के कारण अनिश्चय में फँसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता अभी भले ही मंजु गुप्ता को न्याय देने में ढील-ढाल कर रहे हैं, लेकिन इस मामले में रोटरी इंटरनेशनल के दिशा-निर्देश इतने स्पष्ट हैं कि देर-सबेर सुनील गुप्ता को मंजु गुप्ता को न्याय देना/दिलवाना ही होगा । मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी से निपटने के लिए राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं ने जिस तरह की कायराना हरकत की, उससे राजीव सिंघल की उम्मीदवारी की कमजोरी ही साबित हुई है - और इसके चलते लोगों के बीच राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन और कमजोर हो गया है । 

Wednesday, July 29, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तथा सीओएल सदस्य रह चुके योगेश मोहन गुप्ता ने रोटरी के बड़े पदाधिकारियों पर रोटरी फाउंडेशन के पैसे पर अय्याशी करने का आरोप लगाते हुए रोटरी फाउंडेशन में पैसे न देने का आह्वान करके रोटरी को ही चुनौती दी

मेरठ । योगेश मोहन गुप्ता ने रोटरी क्लब मुरादाबाद नॉर्थ की एक मीटिंग में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए रोटरी के बड़े पदाधिकारियों पर रोटरी फाउंडेशन के पैसे से अय्याशी करने का आरोप लगाते हुए रोटरी फाउंडेशन में पैसे न देने का जो आह्वान किया है, उसने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार राजीव सिंघल के लिए भारी मुसीबत खड़ी कर दी है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों का कहना है कि योगेश मोहन गुप्ता ने उक्त मीटिंग में जो कुछ भी कहा है, वह पूरी तरह से रोटरी विरोधी है; और इसलिए सुनील गुप्ता को उन्हें तुरंत प्रभाव से डिस्ट्रिक्ट काउंसलर पद से हटा देना चाहिए । सुनील गुप्ता चूँकि योगेश मोहन गुप्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई करते हुए नहीं नजर आ रहे हैं, इसलिए लोगों की नाराजगी के निशाने पर योगेश मोहन गुप्ता के साथ साथ अब सुनील गुप्ता भी आ गए हैं । लोगों का कहना है कि यह रोटरी और डिस्ट्रिक्ट का बड़ा दुर्भाग्य है कि सुनील गुप्ता जैसा कमजोर व्यक्ति डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन गया है, जो रोटरी व रोटरी के बड़े पदाधिकारियों को खुलेआम निशाना बनाये जाते हुए चुपचाप देख रहा है, और निशाना बना रहे व्यक्ति को बड़े पद पर बनाए हुए है । राजीव सिंघल की मुसीबत यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उनकी उम्मीदवारी को योगेश मोहन गुप्ता का जो खुला समर्थन है, वह समर्थन ही अब उनके लिए बोझ बन गया है । उनके लिए एक तरफ तो लोगों को यह जबाव देना मुश्किल हो रहा है कि रोटरी के खिलाफ विषवमन करने वाले योगेश मोहन गुप्ता का समर्थन वह कैसे लेते रह सकते हैं, और दूसरी तरफ योगेश मोहन गुप्ता के प्रति लोगों के बीच पैदा हुई नाराजगी को उन्हें झेलना पड़ रहा है । योगेश मोहन गुप्ता की कारस्तानी पर न डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता से कुछ कहते बन रहा है और न डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की इच्छा रखने वाले राजीव सिंघल ही मुँह खोल पा रहे हैं ।
योगेश मोहन गुप्ता ने रोटरी क्लब मुरादाबाद नॉर्थ की मीटिंग में जो कुछ भी कहा, वह इसलिए ध्यान देने और कार्रवाई करने योग्य है क्योंकि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर रहने के साथ साथ सीओएल में भी रह चुके हैं । ऐसे में, उन्होंने रोटरी के विरोध में और या रोटरी को बदनाम करने वाली कोई बात कही है तो उसका तुरंत से संज्ञान लेने की जरूरत है । योगेश मोहन गुप्ता यदि किसी रोटेरियन विशेष पर बेईमानी और या अय्याशी करने का आरोप लगाते, तो भी यह समझा जा सकता था कि वह रोटरी में घुसपैठ कर चुके बेईमान लोगों की खिलाफत कर रहे हैं और इस तरह रोटरी को 'बचाने' का प्रयास कर रहे हैं; किंतु उन्होंने तो पूरी रोटरी व सभी रोटरी नेताओं को निशाने पर ले लिया और रोटरी फाउंडेशन के खिलाफ ही फतवा दे डाला । अपने इसी उद्बोधन में उन्होंने एक गंभीर आरोप यह भी लगाया कि किसी डिस्ट्रिक्ट की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के प्रतिनिधि अधिकारी के रूप में अधिकृत कराने के लिए उनसे दो करोड़ रुपए माँगे गए थे । डिस्ट्रिक्ट और रोटरी के लिए सौभाग्य की बात हालाँकि यह है कि किसी ने भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया है; और सभी का मानना और कहना है कि योगेश मोहन गुप्ता इस तरह की बातें दरअसल कुंठा और फ्रस्ट्रेशन में कह रहे हैं । लोगों का कहना है कि योगेश मोहन गुप्ता रोटरी में खुद निर्लज्य किस्म की हरकतें करते रहे हैं, और अब जब उनकी हरकतों के चलते रोटरी में उनकी कोई साख नहीं बची रह गई है तो वह रोटरी को ही निशाना बनाने लगे  हैं । लोगों का यह भी कहना है कि यदि रोटरी में सिर्फ अय्याशी ही होती है, तो फिर वह इसमें बने क्यों हैं - और क्यों यहाँ पद पाने की कोशिशों में लगे रहते हैं ?
योगेश मोहन गुप्ता दरअसल रोटरी के बड़े नेताओं से बुरी तरह खफा हैं - क्योंकि रोटरी के बड़े नेताओं ने पिछले वर्ष सीओएल में दोबारा जाने के उनके बेईंमानीभरे प्रयास को विफल कर दिया था, जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट और रोटरी में उनकी भारी फजीहत हुई । उल्लेखनीय है कि पिछले से पिछले वर्ष हुए सीओएल के चुनाव में उन्होंने अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की थी । उन्हें बहुत समझाया गया था कि वह एक बार सीओएल में जा चुके हैं, इसलिए अब उन्हें इस होड़ में शामिल नहीं होना चाहिए और दूसरों के लिए मौका छोड़ देना चाहिए । लेकिन अहंकार में चूर योगेश मोहन गुप्ता ने किसी की नहीं सुनी और अपनी बेईमानीपूर्ण कारस्तानियों के बल पर वह चुनाव में कामयाब भी हो गए - लेकिन ललित मोहन गुप्ता ने उनकी बेईमानियों की पोल खोली तो रोटरी इंटरनेशनल ने न सिर्फ योगेश मोहन गुप्ता की चुनावी जीत को निरस्त कर दिया, बल्कि सीओएल के लिए दोबारा होने वाले चुनाव में उनके उम्मीदवार न हो सकने के संकेत भी जारी कर दिए । योगेश मोहन गुप्ता ने हालाँकि बहुत हाथ-पैर मारे कि रोटरी इंटरनेशनल उन्हें इस कदर जलील न करे कि वह डिस्ट्रिक्ट में मुँह दिखाने लायक भी न रहें - इस पर रोटरी इंटरनेशनल ने उनके खिलाफ कोई सीधा कठोर फैसला 'सुनाया' तो नहीं, किंतु उन्हें यह जरूर स्पष्ट कर दिया कि वह सीओएल के चुनाव से दूर ही रहें - अन्यथा उन्हें रोटरी से बाहर कर दिया जायेगा । इस 'संदेश' के कारण ही - सीओएल में दोबारा जाने की जिद पर अड़े तथा उसके लिए हर संभव तिकड़म करने वाले योगेश मोहन गुप्ता को सीओएल के लिए दोबारा हुए चुनाव से अपने आप को दूर रखने के लिए मजबूर होना पड़ा । रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों और नेताओं के इस रवैये ने योगेश मोहन गुप्ता को बुरी तरह निराश किया है - उन्होंने समझ लिया है कि रोटरी में उनकी जैसी जो बदनामी हो गई है, उसके कारण यहाँ अब उन्हें कोई तवज्जो मिलने वाली नहीं है । 
राजीव सिंघल की उम्मीदवारी ने हालाँकि योगेश मोहन गुप्ता में एक नई उम्मीद का संचार किया । राजीव सिंघल के बारे में दरअसल बड़े सुनियोजित तरीके से डिस्ट्रिक्ट में एक प्रचार यह हुआ है कि उनकी इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के साथ बड़ी निकटता है । योगेश मोहन गुप्ता को लगा कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी की डोर पकड़ कर वह मनोज देसाई तक अपनी पहुँच बना लेंगे; लेकिन जल्दी ही उन्हें समझ में आ गया कि यह बड़ी दूर की कौड़ी है । समस्या उन्हें राजीव सिंघल के रवैये से भी हुई - उन्होंने पाया कि उम्मीदवार के रूप में राजीव सिंघल उनसे फायदा तो उठाना चाहते हैं, किंतु उनके साथ खुले तौर पर जुड़े दिखने से बचते हैं । इसके अलावा, दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी के सामने आने के बाद राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के लिए चुनावी गणित पूरी तरह से पलट गया दिख रहा है । राजीव सिंघल का चुनाव जब तक मधु गुप्ता से होता दिख रहा था, तब तक राजीव सिंघल और उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि वह मुकाबले में भारी पड़ेंगे - किंतु दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी ने उनकी उम्मीद की हवा निकाल दी है । राजीव सिंघल तीसरे स्थान पर 'दिख' रहे हैं, और चुनावी मुकाबला दिवाकर अग्रवाल व मधु गुप्ता के बीच होता नजर आ रहा है । राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों ने पीछे कोशिश की थी कि मेरठ की एकता का वास्ता देकर वह मधु गुप्ता को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए राजी कर लें; किंतु मधु गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थकों ने उन्हें समझा दिया कि डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच पहचान, साख व प्रतिष्ठा के मामले में राजीव सिंघल के मुकाबले मधु गुप्ता का पलड़ा भारी है - इसलिए यदि वास्तव में मेरठ की एकता और प्रतिष्ठा का ख्याल करना है, तो राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को वापस ले लेना चाहिए । मधु गुप्ता की उम्मीदवारी को वापस कराने में मिली असफलता से राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों के हौंसले बुरी तरह टूट गए हैं । 
एमएस जैन की इंटरनेशनल प्रेसीडेंट को लिखी चिट्ठी और योगेश मोहन गुप्ता का रोटरी क्लब मुरादाबाद नॉर्थ की मीटिंग में किया गया प्रलाप दरअसल इसी टूटे हौंसले से पैदा हुई निराशा का नतीजा है । उल्लेखनीय है कि इन दोनों को राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के बड़े समर्थकों के रूप में देखा/पहचाना जाता है; किंतु यह दोनों अपनी अपनी हरकतों से जिस तरह रोटरी और डिस्ट्रिक्ट को कलंकित कर रहे हैं - उससे राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के लिए मुसीबतें और बढ़ती ही जा रही हैं । मुसीबत डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता की भी बढ़ रही है, जो रोटरी व डिस्ट्रिक्ट को कलंकित होते हुए चुपचाप देख रहे हैं । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि पिछले वर्ष के गवर्नर संजीव रस्तोगी की टीम में प्रमुख पद पर रहते हुए योगेश मोहन गुप्ता ने जब हरकत की थी, तब संजीव रस्तोगी ने उन्हें उनके पद से हटाने जरा भी देर नहीं की थी - किंतु अब योगेश मोहन गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई करने के मामले में सुनील गुप्ता मुँह छिपाते और बहानेबाजी करते देखे जा रहे हैं । सुनील गुप्ता कई मौकों पर अपनी यह 'इच्छा' जाहिर कर चुके हैं कि रोटरी में और डिस्ट्रिक्ट में जैसा सम्मान उनके पूर्ववर्ती गवर्नर संजीव रस्तोगी को मिला है, उन्हें उससे भी ज्यादा मिले - लेकिन 'काम' करने के मामले में वह संजीव रस्तोगी का मुकाबला ही नहीं कर पा रहे हैं और लगातार फिसड्डी साबित होते जा रहे हैं । योगेश मोहन गुप्ता ने रोटरी क्लब मुरादाबाद नॉर्थ की मीटिंग में रोटरी को जिस तरह से लांछित किया है, उससे उन्होंने सिर्फ अपना 'चरित्र' ही नहीं प्रकट किया है, बल्कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता की भी पोल खोल दी है ।

Friday, July 17, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से लिखी एमएस जैन की चिट्ठी के चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता को तो लोगों से मुँह छिपाना पड़ रहा है; और राजीव सिंघल की उम्मीदवारी का बाजा बजता सुनाई दे रहा है

मेरठ । सुनील गुप्ता पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में तरह तरह से पैसे जुटाने/बसूलने के गंभीर आरोपों को लेकर 'रचनात्मक संकल्प' ने पीछे जो रिपोर्ट प्रकाशित की थी, उसे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एमएस जैन द्वारा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन को लिखी चिट्ठी में दिए गए विवरणों ने न केवल सही साबित कर दिया है, बल्कि सुनील गुप्ता द्वारा मचाई गई लूट-खसोट के मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है । एमएस जैन ने अपनी चिट्ठी में जिस विस्तार के साथ डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी तथा रोटरी के विभिन्न कार्यक्रमों की आड़ में सुनील गुप्ता द्वारा पैसा बनाने के तथ्यों का हवाला दिया है, उसने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुनील गुप्ता की सरेआम फजीहत कर दी है - लोगों को लग रहा है कि एमएस जैन ने सुनील गुप्ता को जैसे भरे बाजार रंगे हाथ पकड़ लिया है । मजे की बात यह हुई है कि एमएस जैन ने अपनी इसी चिट्ठी में निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी पर भी अपने अवार्ड फंक्शन को एक उम्मीदवार से स्पॉन्सर कराने का आरोप लगाया, किंतु संजीव रस्तोगी ने तुरंत से इस आरोप का प्रतिवाद किया और ऐलान किया कि इस आरोप को एमएस जैन यदि साबित कर दें तो वह कोई भी सजा भुगतने के लिए तैयार हैं - जिसके बाद एमएस जैन, संजीव रस्तोगी से माफी माँगने के 'मोड' में आ गए । संजीव रस्तोगी ने तो अपने ऊपर लगे आरोप का तत्परता से जबाव दिया और सुबूत प्रस्तुत करने की चुनौती दी, लेकिन सुनील गुप्ता ने एमएस जैन के आरोपों पर पूरी तरह चुप्पी साध ली है । दरअसल सुनील गुप्ता जानते हैं कि वह संजीव रस्तोगी जैसा न तो साहस दिखा सकते हैं और न साफगोई अपना सकते हैं - क्योंकि उनपर जो आरोप लगे हैं, वह पूरी तरह सच हैं । 
एमएस जैन की चिट्ठी ने और इस चिट्ठी में लिखी बातों ने सुनील गुप्ता की इतनी फजीहत नहीं की है, जितनी एमएस जैन के आरोपों पर सुनील गुप्ता द्वारा अपनाई गई चुप्पी ने और आरोपों पर मिट्टी डालने की उनकी कोशिश ने की है । सुनील गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि एमएस जैन की चिट्ठी पर रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों ने जिस तरह से कार्रवाई की, उसे डिस्ट्रिक्ट के लोगों से छिपा कर सुनील गुप्ता ने मामले को दबा देने का पक्का इंतजाम कर लिया था - किंतु संजीव रस्तोगी ने उनके सारे इंतजाम पर पानी फेर दिया । उल्लेखनीय है कि केआर रवींद्रन को संबोधित चिट्ठी की कॉपी एमएस जैन ने इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई को भी भेज दी थी । मनोज देसाई ने उनकी चिट्ठी संजीव रस्तोगी तथा सुनील गुप्ता को भेज कर दोनों से जबाव देने को लिखा/कहा । सुनील गुप्ता का इरादा और प्रयास था कि मनोज देसाई को जबाव दे दिया जाए और इस बात को डिस्ट्रिक्ट के लोगों से छिपा लिया जाए । संजीव रस्तोगी ने लेकिन इस बात को मंजूर नहीं किया और डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच झूठे आरोप लगाने के लिए एमएस जैन की लानत-मलानत की, और एमएस जैन को माफी माँगने पर मजबूर किया । सुनील गुप्ता ऐसा नहीं कर सके, क्योंकि वह जानते हैं कि एमएस जैन ने उनपर जो आरोप लगाए हैं उनके सुबूत तो जगजाहिर हैं । 
मजे की बात यह हुई है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन को संबोधित एमएस जैन की चिट्ठी जिसने भी देखी/पढ़ी है, वह इस बात पर हैरान हुआ है कि एमएस जैन को यह चिट्ठी लिखने की जरूरत आखिर पड़ी क्यों, और इस चिट्ठी से वह वास्तव में हासिल क्या करना चाहते हैं ? इस चिट्ठी में जो कुछ भी झूठ-सच कहा गया है, उसे पढ़कर साफ पता चलता है कि एमएस जैन ने यह चिट्ठी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए इस वर्ष होने वाले चुनाव को प्रभावित करने के इरादे से लिखी है - और इसमें दिवाकर अग्रवाल को लपेटने का तथा राजीव सिंघल के लिए स्थितियाँ अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है । इस 'उद्देश्य' के चलते किंतु फिर उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता को निशाना क्यों बनाया, क्योंकि सुनील गुप्ता तो राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के घनघोर समर्थक हैं ? एमएस जैन के नजदीकियों के अनुसार, इसके दो कारण हैं : एक तो यह कि उन्हें पता चला कि सुनील गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में मदद करने के नाम पर राजीव सिंघल से मोटी रकम ऐंठने की तिकड़म लगा रहा है; और दूसरा यह कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी की बागडोर सँभाले एमएस जैन को लग यह रहा है कि सुनील गुप्ता पहले तो राजीव सिंघल से पैसे ऐंठ लेगा, और फिर और रकम बटोरने के उद्देश्य से दिवाकर अग्रवाल से जा मिलेगा तथा राजीव सिंघल को धोखा देगा । इसलिए ही, एमएस जैन को सुनील गुप्ता को अभी ही बेनकाब करना जरूरी लगा, जिससे कि सुनील गुप्ता की गर्दन को पकड़े रखा जा सके । राजीव सिंघल के कुछेक समर्थकों ने एमएस जैन से कहा भी कि इस तरह से तो सुनील गुप्ता बिदक जायेगा और वह अभी से राजीव सिंघल के खिलाफ हो जायेगा; लेकिन एमएस जैन ने उन्हें यह कर चुप कर दिया कि वह सुनील गुप्ता को अच्छे से जानते हैं, वह पैसे का लालची है और अभी राजीव सिंघल के खिलाफ जाने की हिम्मत बिलकुल भी नहीं करेगा । 
सुनील गुप्ता हिम्मत करेंगे या नहीं; और सरे आम 'जूते मारने' वाले लोगों के साथ ही बने रहेंगे या उनका साथ छोड़ेंगे - यह तो आगे पता चलेगा; लेकिन एक बात साफ है कि एमएस जैन की इस चिट्ठी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी लड़ाई में राजीव सिंघल के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है । मेरठ के दो गवर्नर्स - संजीव रस्तोगी और सुनील गुप्ता पर एमएस जैन ने झूठे/सच्चे आरोपों के साथ जो हमला बोला है, उसके कारण मेरठ में राजीव सिंघल के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है । एमएस जैन की इस चिट्ठी को बदनीयतीभरा माना/देखा गया है, और कहा जा रहा है कि दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट में मिलते दिख रहे समर्थन से राजीव सिंघल के समर्थक नेता इस कदर हताश/निराश होकर बौखला गए हैं कि 'अपनों' को ही निशाना बनाने लगे हैं । राजीव सिंघल के ही समर्थकों ने कहना शुरू कर दिया है कि एमएस जैन जैसे समर्थकों के होते हुए राजीव सिंघल को दुश्मनों की जरूरत नहीं पड़ेगी; और एमएस जैन जैसे समर्थक ही राजीव सिंघल की उम्मीदवारी का बाजा बजा देंगे । एमएस जैन ने चिट्ठी लिखी तो थी दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने के लिए, किंतु उनकी चिट्ठी पर डिस्ट्रिक्ट में जो तमाशा हुआ - झूठे आरोपों के कारण उन्हें संजीव रस्तोगी से माफी माँगने के लिए मजबूर होना पड़ा, तथा सच्चे आरोपों के कारण सुनील गुप्ता को लोगों से मुँह छिपाना पड़ रहा है - उससे नुकसान राजीव सिंघल की उम्मीदवारी को होता दिखा है । एमएस जैन की इस चिट्ठी से दरअसल राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों की फूट सामने आई है और उनमें आपस में एक-दूसरे को नीचा दिखाने की तथा एक-दूसरे पर हावी होने की होड़ लोगों के बीच प्रकट हुई है । इससे राजीव सिंघल की उम्मीदवारी ही संकट में फँसी नजर आने लगी है ।