Showing posts with label MANJU GUPTA. Show all posts
Showing posts with label MANJU GUPTA. Show all posts

Tuesday, November 10, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की तरफ से राजीव सिंघल से मिले आश्वासन के भरोसे ही सुनील गुप्ता ने मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी की बलि लेकर 'लक्ष्मी जी' की व्यवस्था करके अपनी दीवाली तो अच्छे से मनाने का इंतजाम कर लिया है

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता ने अपनी दीवाली अच्छे से मनाने की व्यवस्था कर ली है । उनके नजदीकियों का ही कहना/बताना है कि राजीव सिंघल की तरफ से 'लक्ष्मी जी' का इंतजाम करने के उद्देश्य से ही सुनील गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए प्रस्तुत मंजु गुप्ता के आवेदन को निरस्त कर दिया है । उल्लेखनीय है कि राजीव सिंघल और उनके समर्थक पहले से ही मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को प्रस्तुत न होने देने के प्रयासों में लगे हुए थे, और उनकी तरफ से सुनील गुप्ता पर मंजु गुप्ता के आवेदन को स्वीकार न करने के लिए भारी दबाव भी था । इसी कारण से राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने मंजु गुप्ता के क्लब में बबाल तक करवा दिया, जिसका मामला रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय तक पहुँचा । रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने लेकिन राजीव सिंघल और उनके समर्थकों की चाल को कामयाब नहीं होने दिया । मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी के संदर्भ में रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय ने जैसा स्पष्ट रुख अपनाया, उसके चलते सुनील गुप्ता चाहते हुए भी राजीव सिंघल और उनके समर्थकों की 'उचित' सेवा नहीं कर सके । राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने लेकिन हार नहीं मानी । दरअसल उन्हें पता था कि जब सारे फार्मूले फेल हो जाएँ तब भी सुनील गुप्ता से काम कराने के लिए एक फार्मूला बचा रह जाता है । सुनील गुप्ता के नजदीकियों के अनुसार, उसी अंतिम फार्मूले को इस्तेमाल करते हुए सुनील गुप्ता से मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को निरस्त करने की कीमत पूछी गई - तो सुनील गुप्ता ने रोटरी इंटरनेशनल के फैसले को अनदेखा करने में देर नहीं लगाई । 
सुनील गुप्ता के बारे में दरअसल हर कोई यह जान गया है कि सुनील गुप्ता 'न बाप बड़ा न मय्या, सबसे बड़ा रुपय्या' फलसफे को मानने वाले व्यक्ति हैं । रोटेरियन और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुनील गुप्ता यह भी समझ गए हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में पैसा बनाने/कमाने के जो मौके अभी उनके पास हैं, वह ज्यादा समय तक नहीं बने/बचे रहेंगे - इसलिए पैसा बनाने/कमाने के चक्कर में हो रही बदनामी की परवाह करना भी उन्होंने छोड़ दिया है । सुनील गुप्ता में हालाँकि थोड़ा सा डर इस बात का जरूर दिखाई दे रहा है कि उनकी कारस्तानियों के चलते उनका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद कहीं न छिन जाए । उनके नजदीकियों का कहना है कि लेकिन इस संदर्भ में वह राजीव सिंघल की तरफ से मिले इस आश्वासन पर भरोसा कर रहे हैं कि उन्होंने इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई से हरी झंडी ले ली है कि सुनील गुप्ता से गवर्नरी नहीं छीनी जाएगी । सुनील गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि सुनील गुप्ता ने इस भरोसे के साथ-साथ अपने आप को इस बात के लिए भी तैयार कर लिया है कि यदि उनकी गवर्नरी छिन जाने का खतरा हो भी, तो भी उन्हें पैसा बनाने/कमाने के मौके नहीं छोड़ने हैं । सुनील गुप्ता ने जब यह तय कर ही लिया कि इज्जत चली जाए, कोई परवाह नहीं; गवर्नरी चली जाए, कोई परवाह नहीं; लेकिन पैसा आने का मौका वापस नहीं लौटना चाहिए - तब राजीव सिंघल को अपना काम कराना मुश्किल नहीं लगा । 
उल्लेखनीय है कि सुनील गुप्ता काफी समय तक मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी के आवेदन को स्वीकार करने से बचते फिर रहे थे । मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी के आवेदन को स्वीकार करने के बाबत रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय से स्पष्ट आदेश न मिला होता, तो सुनील गुप्ता हरगिज हरगिज उनकी उम्मीदवारी का आवेदन स्वीकार न करते; लेकिन रोटरी इंटरनेशनल के फैसले से उनके हाथ बंध गए और वह मनमानी न कर सकें । सुनील गुप्ता के नजदीकियों के अनुसार, मंजु गुप्ता की उम्मीदवारीरूपी काँटे को निकालने लिए राजीव सिंघल की तरफ से सुनील गुप्ता को दीवाली के मौके पर 'लक्ष्मी जी' का स्वागत करने का ऑफर लेकिन जैसे ही मिला - तब फिर सुनील गुप्ता ने रोटरी इंटरनेशनल के फैसले को भी धता बताने में देर नहीं की । 'लक्ष्मी जी' की कृपा के असर में सुनील गुप्ता ने इलेक्शन कमेटी के सदस्यों के रूप में अपने डिस्ट्रिक्ट के रवि भार्गव, ललित मोहन गुप्ता तथा अखिलेश कोठीवाल जैसे पूर्व गवर्नर्स को भी नहीं बख्शा । दरअसल हुआ यह कि इलेक्शन कमेटी की मीटिंग में कमेटी के इन तीनों सदस्यों को सुनील गुप्ता से यह सुनकर हैरानी हुई कि उन्होंने मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी का आवेदन निरस्त कर दिया है । इन तीनों सदस्यों ने इस मामले से संबंधित रिकॉर्ड देखना चाहा तो सुनील गुप्ता ने टालमटोल करके रिकॉर्ड दिखाने से मना कर दिया । सुनील गुप्ता के इस रवैये से यह तीनों निराश और नाराज तो बहुत हैं, लेकिन सुनील गुप्ता को इनकी नाराजगी की परवाह इसलिए नहीं है - क्योंकि वह यह विश्वास कर रहे हैं कि यह तीनों पूर्व गवर्नर्स उनसे नाराज भले ही हों, किंतु उनका कुछ कर नहीं पायेंगे । 
रोटरी को 'बेचने' के मामले में सुनील गुप्ता जो हिम्मत दिखा रहे हैं, उसका सबसे गंभीर पहलू यह है कि उनकी इस हिम्मत के पीछे इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के समर्थन की बात की जा रही है । राजीव सिंघल और उनके समर्थक मनोज देसाई के साथ अपनी नजदीकी का दावा करते हुए सुनील गुप्ता को भरोसा दिलाये हुए हैं कि वह उनकी गवर्नरी को आँच नहीं आने देंगे । राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने मनोज देसाई का नाम लेकर सुनील गुप्ता को एमएस जैन तथा हितेश कुमार शर्मा की तरफ से भी आश्वस्त किया है कि यह दोनों नाराज चाहें जितने हों तथा बातें चाहें जो कर रहे हों - किंतु सचमुच में करेंगे कुछ नहीं । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट के कई गवर्नर्स सुनील गुप्ता की कारस्तानियों के चलते सुनील गुप्ता से खासे नाराज हैं, और उनकी इस नाराजगी के डर से ही सुनील गुप्ता कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने की हिम्मत नहीं कर रहे थे । राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने लेकिन उन्हें आश्वस्त किया है कि मनोज देसाई के नाम पर सभी गवर्नर्स को मैनेज कर लिया गया है और नाराज गवर्नर्स थोड़ा बहुत गाली-गलौच भले कर लें, लेकिन उनकी कमाई/लूट के संदर्भ में उनकी गवर्नरी पर आँच नहीं आने देंगे । यह आश्वासन मिलने के बाद ही सुनील गुप्ता कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलाने के लिए राजी हुए हैं । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में और रोटरी को बेचने की सुनील गुप्ता की कार्रवाई में इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई का नाम जिस धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है - उसने डिस्ट्रिक्ट 3100 में चल रही घटनाओं को खासा महत्वपूर्ण बना दिया है । 
मनोज देसाई की तरफ से राजीव सिंघल से मिले आश्वासन के भरोसे ही सुनील गुप्ता ने मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी की बलि लेकर 'लक्ष्मी जी' की व्यवस्था करके अपनी दीवाली तो अच्छे से मनाने का इंतजाम कर लिया है ।

Monday, October 19, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता की गवर्नरी पर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की चिट्ठी से लटकी तलवार ने राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थकों की हरकतों पर भी रोक लगने की उम्मीद पैदा की है


मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की तरफ से लिखे गए पत्र के मजमून ने उस आशंका को सच साबित कर दिया है, जो रोटरी को बेचने के आरोपों के संदर्भ में 'रचनात्मक संकल्प' की आठ अक्टूबर 2015 की पोस्ट में व्यक्त की गई थी । सुनील गुप्ता पर जो आरोप लगते रहे हैं, उन्हें प्रथम दृष्टया सच मानते हुए इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने उन पर कार्रवाई शुरू कर दी है । कार्रवाई के तहत ही, केआर रवींद्रन ने सुनील गुप्ता को उक्त आरोपों पर अपना जबाव देने के लिए नोटिस भेजा है, जिसमें उन्होंने साफ साफ लिख दिया है कि आरोपों पर उन्होंने यदि संतोषजनक जबाव नहीं दिया तो जनवरी में होने वाली इंटरनेशनल बोर्ड मीटिंग में उनकी गवर्नरी को जारी रखने व मान्य रखने के बारे में फैसला लिया जायेगा । डिस्ट्रिक्ट टीम के सदस्यों को पद बेचने के आरोप पर केआर रवींद्रन ने बहुत ही तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है; साथ ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवारों से पैसे ऐंठने तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की आड़ में मोटा पैसा कमाने की सुनील गुप्ता की कोशिशों को भी केआर रवींद्रन ने खासा गंभीर माना है । उल्लेखनीय है कि रोटरी को बेचने के आरोपों को लेकर सुनील गुप्ता पिछले काफी समय से डिस्ट्रिक्ट में लोगों के निशाने पर रहे हैं । सुनील गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का कभी कोई नोटिस नहीं लिया । दरअसल वह यह सोच कर आश्वस्त रहे कि डिस्ट्रिक्ट के लोग आरोप लगाते रहने से ज्यादा कुछ कर नहीं पायेंगे, और रोटरी के बड़े पदाधिकारी इन आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे । किंतु खुद इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की तरफ से लिखे गए पत्र के प्राप्त होने के बाद से सुनील गुप्ता के लिए मामला गंभीर हो गया है । दरअसल 15 अक्टूबर की आधी रात के बाद आए तथा 16 अक्टूबर की सुबह देखे/पढ़े गए केआर रवींद्रन के पत्र से सुनील गुप्ता की गवर्नरी छिनने की जमीन तैयार होती दिख रही है ।  
सुनील गुप्ता ने अपनी गवर्नरी बचाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की स्थिति को टलवाने का फार्मूला सोचा है, तथा इस पर अपनी तरफ से प्रयास उन्होंने शुरू भी कर दिए हैं । दरअसल केआर रवींद्रन के कोप से बचने को लेकर सुनील गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट के बाहर के कुछेक प्रमुख लोगों से सलाह ली, तो उन्हें समझाया गया कि केआर रवींद्रन का मुख्य एजेंडा वास्तव में यह है कि उनके प्रेसीडेंट-काल में रोटरी में किसी भी स्तर पर कोई चुनाव न हो । वह मानते हैं कि चुनाव के चक्कर में ही रोटरी में तमाम झगड़े-झंझट होते हैं, इसलिए जब चुनाव ही नहीं होंगे तो झगड़े-झंझट स्वतः ही खत्म हो जायेंगे । न रहेगा बाँस, तो न रहेगी बाँसुरी । सुनील गुप्ता को समझाया गया है कि वह यदि अपने डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की संभावना को खत्म कर/करवा दें, तो केआर रवींद्रन उनसे खुश हो जायेंगे - और तब रोटरी को बेच कर मोटा पैसा बनाने के जो आरोप उन पर हैं, उसकी कालिख को भी केआर रवींद्रन अनदेखा कर देंगे । इस तरह उनकी गवर्नरी भी बच जायेगी, तथा रोटरी को बेच कर जो पैसा उन्होंने बनाया/कमाया है वह भी बच जायेगा । यह सलाह मिलने के बाद से सुनील गुप्ता ने मंजु गुप्ता तथा दिवाकर अग्रवाल की उम्मीदवारी को वापस कराने के लिए युद्ध-स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं । इन प्रयासों में सुनील गुप्ता का घृणित रूप यह और सामने आया है कि इस काम के लिए वह अपने बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं । दिवाकर अग्रवाल व मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को वापस कराने के लिए सुनील गुप्ता रोते-धोते हुए अपने बच्चों की कसमें दे कर भावनात्मक दबाव बनाने का काम कर रहे हैं । मंजु गुप्ता शुरू में तो उनके इस नाटक पर पसीजती हुईं सुनी गईं, लेकिन फिर उन्होंने भी सुनील गुप्ता की चाल को समझ/पहचान लिया । 
सुनील गुप्ता ने एक तर्क यह भी दिया कि पिछले रोटरी वर्ष में तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी के कहने पर यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की संभावना समाप्त हो सकती है, तो उनके प्रयासों को समर्थन क्यों नहीं मिल सकता है । उनका यह तर्क वाजिब होते हुए भी इसलिए नहीं चला, क्योंकि उनके प्रयासों में शुरू से ही बेईमानी के तत्व देखे/पहचाने जा रहे हैं ।पिछले रोटरी वर्ष में संजीव रस्तोगी ने जब ऐसा ही प्रयास किया था, तो उनके फार्मूले पर किसी को भी ऊँगली उठाने का मौका नहीं मिला था; वह किसी उम्मीदवार के साथ पक्षपात करते हुए नहीं दिखे थे - और इसीलिए सभी उम्मीदवारों व उनके समर्थक नेताओं ने संजीव रस्तोगी के प्रयासों को सहयोग व समर्थन दिया था । सुनील गुप्ता चाहते तो यह हैं कि उन्हें भी वैसा ही सहयोग व समर्थन मिले, जैसा पिछले रोटरी वर्ष में संजीव रस्तोगी को मिला था; लेकिन संजीव रस्तोगी ने जिस ईमानदारी के साथ प्रयास किया था, वैसी ही ईमानदारी अपनाने को वह तैयार नहीं हैं । इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए जो तीन उम्मीदवार हैं, सुनील गुप्ता उनमें से दो पर ही यह दबाव बना रहे हैं कि वह अपनी अपनी उम्मीदवारी को वापस ले लें तथा राजीव सिंघल को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बन जाने दें । उनका यह प्रयास साबित कर रहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को टलवाने के पीछे उनका उद्देश्य डिस्ट्रिक्ट में सद्भाव बनाना नहीं, बल्कि राजीव सिंघल के लिए रास्ता साफ करवाना है । राजीव सिंघल के लिए रास्ता साफ करवाने के लिए सुनील गुप्ता अपने बच्चों को आगे करके उनकी कसमें देने तक के रास्ते पर क्यों बढ़ गए हैं - इसका जबाव भी उनकी ही बातों में मिल जा रहा है । दिवाकर अग्रवाल व मंजु गुप्ता के समर्थकों से सुनील गुप्ता बता रहे हैं कि राजीव सिंघल तो चुनाव में एक करोड़ रुपये खर्च करेंगे, दिवाकर अग्रवाल व मंजू गुप्ता कैसे उनका मुकाबला करेंगे ? जाहिर है कि सुनील गुप्ता की निगाह इस बात पर है कि वह यदि राजीव सिंघल के लिए रास्ता साफ करवा देते हैं, तो चुनाव के नाम पर राजीव सिंघल द्वारा खर्च होने वाले एक करोड़ रुपयों में से मोटा हिस्सा वह भी ऐंठ सकेंगे । 
मजे की बात यह है कि सुनील गुप्ता के ऊपर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की तरफ से कार्रवाई की यह जो तलवार लटकी है, वह राजीव सिंघल के समर्थक नेताओं के किए-धरे का नतीजा है - लेकिन फिर भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता उन्हीं राजीव सिंघल का काम बनाने के प्रयासों में लगे हुए हैं । इसका कारण सिर्फ यही है कि उन्हें राजीव सिंघल से ही पैसा ऐंठ पाने की उम्मीद है । सुनील गुप्ता को उनके लिए रास्ता साफ करने में लगा देख कर राजीव सिंघल व उनके समर्थक खुश तो बहुत हैं, लेकिन इस सवाल ने उन्हें बहुत डराया हुआ भी है कि सुनील गुप्ता से गवर्नरी छिनने की नौबत यदि आई, तो फिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का काम करने की जिम्मेदारी किसे मिलेगी ? अपनी तरफ से उन्होंने जहाँ जहाँ भी इस सवाल का जबाव तलाशने की कोशिश की, वहाँ वहाँ से उन्हें यही सुनने को मिला है कि तब फिर उक्त जिम्मेदारी निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी को ही मिलेगी । उनके लिए चिंता की बात यह है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन के अनुसार, सुनील गुप्ता के भविष्य का फैसला यदि सचमुच जनवरी में होने वाली इंटरनेशनल बोर्ड मीटिंग में हुआ और उसी मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट का कामकाज चलाने का जिम्मा निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी को सौंप दिया गया, तो डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस तो फिर संजीव रस्तोगी की देखरेख में होगी - और तब राजीव सिंघल व उनके समर्थक नेताओं को मनमानी करने की छूट नहीं मिल सकेगी । इस तरह, सुनील गुप्ता को लिखे/भेजे केआर रवींद्रन के पत्र ने सुनील गुप्ता के लिए ही नहीं, उनके साथ-साथ राजीव सिंघल व उनके समर्थक नेताओं के सामने भी भारी मुश्किल खड़ी कर दी है ।

Thursday, September 10, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में पूर्व गवर्नर हितेश कुमार शर्मा के फर्जी पत्र मामले में मनोज देसाई के रवैये से उत्साहित राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने जिस षड्यंत्रपूर्ण तरीके से मंजु गुप्ता को रास्ते से हटाने की कोशिश की है, उससे राजीव सिंघल की उम्मीदवारी की कमजोरी ही साबित हुई है

मेरठ । राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं ने इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के नाम पर डिस्ट्रिक्ट में जो गंदगी फैलाई हुई है, उस पर चुप्पी साध कर मनोज देसाई ने अपनी फजीहत और कराई हुई है । मनोज देसाई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हितेश कुमार शर्मा के पत्र पर जिस तरह कुंडली मार कर बैठ गए हैं, उससे राजीव सिंघल तथा उनके समर्थक नेताओं के हौंसले और बुलंद हुए हैं । इस बुलंद हौंसले की बदौलत ही राजीव सिंघल तथा उनके समर्थक नेताओं ने रोटरी क्लब मेरठ डायमण्ड में फर्जी तरीके से अधिकांश सदस्यों को ड्रॉप कर/करवा दिया है, ताकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए राजीव सिंघल को मंजु गुप्ता से मिल रही चुनौती को खत्म किया जा सके । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए राजीव सिंघल और उनके समर्थकों ने जब मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को मिल रहे समर्थन के सामने अपने आपको कमजोर पाया, तो उन्होंने षड्यंत्र करके मंजु गुप्ता को रोटरी से ही 'बाहर' कर/करवा दिया है । राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेता इस मामले में अब सीधे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता को चुनौती दे रहे हैं कि वह मंजु गुप्ता तथा अन्य सदस्यों की सदस्यता बचा कर दिखाएँ । दरअसल रोटरी क्लब मेरठ डायमण्ड के अध्यक्ष तन्मय शर्मा ने जिस षड्यंत्रपूर्ण तरीके से मंजु गुप्ता तथा क्लब के अन्य सदस्यों को क्लब से बाहर कर दिया है, उसे अमान्य बताते हुए रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित कार्यालय के पदाधिकारियों ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता से कार्रवाई करने के लिए कहा है । राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं का कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल के इस स्पष्ट निर्देश के बाद सुनील गुप्ता ने क्लब के अध्यक्ष तन्मय शर्मा के साथ मीटिंग व बातचीत तो कर ली है, किंतु कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता अपने ही डिस्ट्रिक्ट के एक क्लब के अध्यक्ष के सामने अपने आपको जिस तरह से असहाय पा रहे हैं - उसे राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेता अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं; और अपनी इस 'जीत' का श्रेय मनोज देसाई को दे रहे हैं । 
मनोज देसाई लेकिन राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं की इससे भी बड़ी मदद हितेश कुमार शर्मा के फर्जी पत्र के मामले में कर रहे हैं । मनोज देसाई जिस दिन यह मदद करना बंद कर देंगे, उस दिन राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं में से कोई एक बड़ी मुसीबत में फँस जायेगा । दरअसल हुआ यह कि डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर हितेश कुमार शर्मा की तरफ से निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी तथा मौजूदा गवर्नर सुनील गुप्ता के खिलाफ आरोप लगाते हुए एक पत्र निवर्तमान इंटरनेशनल डायरेक्टर पीटी प्रभाकर को भेजा गया, जिसकी प्रति मनोज देसाई को भी संलग्न की गई । इंटरनेशनल डायरेक्टर होने के नाते मनोज देसाई ने इस पत्र का संज्ञान लिया, और हितेश कुमार शर्मा से कुछ स्पष्टीकरण माँगे । इस पर हितेश कुमार शर्मा का माथा चकराया । उन्होंने मनोज देसाई से कहा कि यह पत्र उन्होंने न तो लिखा है, और न ही भेजा है । हितेश कुमार शर्मा का एक बड़ा तर्क रहा कि उन्होंने अपना समस्त पत्र व्यवहार हिंदी में ही किया है; यहाँ तक कि जब वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर थे, तब भी उन्होंने हिंदी में ही पत्र लिखे थे - लिहाजा अब यदि उन्हें कोई पत्र लिखना ही होता, तो वह अंग्रेजी में क्यों लिखते ? हितेश कुमार शर्मा ने कहा कि उनके नाम का इस्तेमाल करते हुए किसी ने अपनी राजनीति साधने के लिए यह ओछा काम किया है । हितेश कुमार शर्मा ने मनोज देसाई से अनुरोध किया कि उनके नाम से भेजे गए इस फर्जी पत्र को जिस ईमेल से भेजा गया है, उस ईमेल का विवरण वह उन्हें उपलब्ध करवाएँ, जिससे कि वह यह ओछी हरकत करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकें । मनोज देसाई ने लेकिन हितेश कुमार शर्मा को उक्त ईमेल का विवरण उपलब्ध नहीं करवाया है । हितेश कुमार शर्मा के फर्जी पत्र पर कार्रवाई करने में मनोज देसाई ने जो तत्परता दिखाई, वैसी तत्परता चूँकि वह उक्त फर्जी ईमेल का विवरण उपलब्ध करवाने में नहीं कर रहे हैं - इसलिए इस मामले में उनकी भूमिका संदेहास्पद हो गई है । 
हितेश कुमार शर्मा के नाम से लिखे/भेजे गए फर्जी पत्र में जो बातें और आरोप हैं, वह कमोवेश वही हैं जो राजीव सिंघल के एक समर्थक नेता पूर्व गवर्नर एमएस जैन द्वारा पहले लिखे/भेजे गए पत्र में हैं - इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि हितेश कुमार शर्मा के नाम से फर्जी पत्र भेजने के पीछे राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं में से ही किसी का हाथ है । मजे की बात यह है कि एमएस जैन द्वारा लिखे गए पत्र पर डिस्ट्रिक्ट में जब बबाल मचा था, तब एमएस जैन ने यह कह कर पीछा छुड़ाया था कि उक्त पत्र उन्होंने नहीं लिखा/भेजा था; उनकी ईमेल आईडी किसी ने हैक करके यह शरारत की है । इस पर उनसे कहा गया था कि ईमेल आईडी हैक होने की रिपोर्ट उन्हें पुलिस में करना चाहिए ताकि हैकर को पकड़वा कर उसे सजा दिलवाई जा सके । एमएस जैन ने लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की - जिससे साबित हुआ कि ईमेल आईडी हैक होने की उनकी बात उनका सिर्फ एक बहाना है और उक्त शिकायती मेल उन्होंने ही किया था । उक्त ईमेल को लेकर एमएस जैन की लोगों के बीच बहुत ही थू थू हुई और उन्हें भारी शर्मिंदगी से गुजरना पड़ा । समझा जाता है कि एमएस जैन की हुई फजीहत से सबक लेकर ही राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं ने निवर्तमान व मौजूदा गवर्नर तथा अन्य कुछेक वरिष्ठ रोटेरियंस को झूठे आरोपों में बदनाम करने के लिए फर्जी तरीके अपनाने की राह चुनी - और इसके लिए हितेश कुमार शर्मा के नाम का इस्तेमाल किया । किसी के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि गवर्नर्स तथा वरिष्ठ रोटेरियंस को झूठी बातों के सहारे बदनाम करने तथा इस तरह रोटरी को कलंकित करने वालों को प्रश्रय देकर और उन्हें बचाने का प्रयास करके मनोज देसाई आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं ?
राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं ने सिर्फ डिस्ट्रिक्ट के लोगों को ही नहीं, बल्कि अपनी हरकतों से रोटरी के बड़े नेताओं तक को चुनौती दी हुई है । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने रोटरी में राजनीति को हतोत्साहित करने का आह्वान किया हुआ है और स्पष्ट चेतावनी दी हुई है कि जो कोई भी राजनीति करता हुआ पाया जायेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की इस स्पष्ट चेतावनी के बावजूद पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एमएस जैन, गजेंद्र सिंह धामा, योगेश मोहन गुप्ता खुलेआम राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थन में अभियान चलाए हुए हैं । केआर रवींद्रन के आह्वान और उनकी चेतावनी की याद दिलाए जाने पर इनकी तरफ से प्रायः यही सुनने को मिलता है कि - हम तो जो कर रहे हैं, खुलेआम कर रहे हैं; हम भी देखेंगे कि रवींद्रन क्या करते हैं ? रोटरी को कलंकित करने के मामले में इनके हौंसले इस कदर ऊँचे हैं कि रोटरी क्लब मुरादाबाद नॉर्थ के एक कार्यक्रम में पूर्व गवर्नर योगेश मोहन गुप्ता रोटरी फाउंडेशन में पैसे न देने के लिए यह कहते हुए आह्वान करते हैं कि रोटरी फाउंडेशन का पैसा रोटरी के बड़े पदाधिकारियों और नेताओं की मौजमस्ती में इस्तेमाल होता है, इसलिए उसमें पैसे देने से क्या फायदा ? यही लोग राजीव सिंघल की उम्मीदवारी का झंडा उठाए हुए हैं । 
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में राजीव सिंघल की समस्या यह है कि उनके समर्थक नेता नकारात्मक और ओछी किस्म की हरकतें करने के कारण डिस्ट्रिक्ट में खासे बदनाम हैं; जिस कारण लोगों के बीच उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई सकारात्मक सोच बन ही नहीं पा रही है । राजीव सिंघल के लिए मेरठ में ही समर्थन जुटाना मुश्किल हो रहा है । मेरठ में लोगों के बीच उनसे ज्यादा स्वीकार्यता मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए बनती नजर आ रही है । मंजु गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट में ही नहीं, डिस्ट्रिक्ट के बाहर भी - बल्कि दूसरे देशों तक में अपनी सक्रियता व संलग्नता से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है । इस पहचान के चलते ही मेरठ में उनके लिए अच्छा समर्थन है । राजीव सिंघल के कुछेक समर्थकों ने उन्हें 'मेरठ के उम्मीदवार' के रूप में प्रमोट करने का प्रयास किया, किंतु मेरठ के कई प्रमुख रोटेरियंस ने उन्हें साफ बता दिया कि यदि सचमुच चाहते हो कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मेरठ का चुना जाए, तो राजीव सिंघल को छोड़ कर मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी का समर्थन करो । मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी से मिल रही चुनौती से निपटना राजीव सिंघल और उनके समर्थकों को जब मुश्किल और असंभव लगा, तो उन्होंने षड्यंत्रपूर्वक मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी को समाप्त करने का दुष्चक्र रचा । उनकी बदकिस्मती रही कि उनके दुष्चक्र की पोल जल्दी ही खुल गई, और मंजु गुप्ता तथा उनके समर्थकों ने समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर ली । मनोज देसाई के रवैये के कारण अनिश्चय में फँसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुनील गुप्ता अभी भले ही मंजु गुप्ता को न्याय देने में ढील-ढाल कर रहे हैं, लेकिन इस मामले में रोटरी इंटरनेशनल के दिशा-निर्देश इतने स्पष्ट हैं कि देर-सबेर सुनील गुप्ता को मंजु गुप्ता को न्याय देना/दिलवाना ही होगा । मंजु गुप्ता की उम्मीदवारी से निपटने के लिए राजीव सिंघल और उनके समर्थक नेताओं ने जिस तरह की कायराना हरकत की, उससे राजीव सिंघल की उम्मीदवारी की कमजोरी ही साबित हुई है - और इसके चलते लोगों के बीच राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन और कमजोर हो गया है । 

Wednesday, May 6, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट सुनील गुप्ता से समर्पण करवा कर योगेश मोहन गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट में और रोटरी में अपनी स्थिति सुधारने की जो कोशिश शुरू की है; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए मनोज जैन को सुनील गुप्ता का उम्मीदवार बनवा कर उसी कोशिश को उन्होंने और ऊँचे मुकाम पर पहुँचाने का दाँव चला है

मेरठ । रोटरी क्लब मेरठ के मनोज जैन की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने डिस्ट्रिक्ट की ठंडी पड़ी चुनावी राजनीति में गर्मी तो पैदा कर दी है । यह गर्मी इसलिए पैदा हुई है, क्योंकि मनोज जैन को अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने जा रहे सुनील गुप्ता के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । उल्लेखनीय है कि अगले रोटरी वर्ष में होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अभी तक रोटरी क्लब मेरठ डायमण्ड की मंजु गुप्ता तथा रोटरी क्लब मुरादाबाद ब्राइट की दीपा खन्ना का नाम ही लोगों के बीच चर्चा में था । इन दोनों की रोटरी में अच्छी संलग्नता और सक्रियता रही है, तथा रोटरी के प्रति इनके उत्साहपूर्ण लगाव से प्रायः सभी परिचित रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के अधिकतर लोगों का मानना और कहना रहा है कि मंजु गुप्ता और दीपा खन्ना की ही उम्मीदवारी यदि रहती है तो चुनाव साफ-सुथरे तरीके से और एक-दूसरे के समर्थकों को बिना बेइज्जत किए संपन्न हो सकेगा तथा डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के लिए यह एक शुभअवसर होगा । हालाँकि कुछेक लोगों को पूरा पूरा भरोसा था कि डिस्ट्रिक्ट में चुनावी राजनीति के कुछेक खिलाड़ियों को यह स्थिति रास नहीं आयेगी, तथा वह कुछ न कुछ अवश्य ऐसा करेंगे जिससे चुनाव में 'रौनक' पैदा हो । रोटरी में दरअसल एक ऐसा तबका संगठित हो गया है, जो चुनाव को मेले-ठेले से ज्यादा महत्त्व नहीं देता है और चुनाव को गला गीला करने के एक वार्षिक उत्सव के रूप में देखता है । 
अन्य कुछेक लोगों का यह भी मानना और कहना था कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के कुछेक खिलाड़ी घोर पुरुषवादी सोच के हैं और वह किसी महिला को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न बनने देने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं । यहाँ संगीता कुमार और योगेश मोहन गुप्ता के बीच हुए चुनाव को याद करना प्रासंगिक होगा । यूँ तो डिस्ट्रिक्ट के हर चुनाव में गंदगी हुई ही है, किंतु उस चुनाव में योगेश मोहन गुप्ता के सौजन्य से गंदगी के जिन मुकामों को छुआ गया, वह घटियापने के शर्मनाक उदाहरण के रूप में दर्ज हैं । उस चुनाव में सारा चुनावी समीकरण संगीता कुमार की उम्मीदवारी के पक्ष में था, लेकिन फिर भी वह चुनाव हार गईं थीं तो उसका एक बड़ा कारण यही था कि पुरुषवादी सोच के घटियापने का मुकाबला करने की वह कोई तैयारी नहीं कर पाई थीं । हो सकता है कि उस चुनाव में संगीता कुमार के साथ जो हुआ था, उसी को ध्यान में रखते हुए कुछेक लोगों को लगा हो कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के कुछेक खिलाड़ी अगले रोटरी वर्ष के चुनावी मुकाबले को मंजु गुप्ता और दीपा खन्ना के बीच ही सीमित न रहने दें तथा उसमें कुछ तड़का डालने का प्रयास करेंगे । मनोज जैन की उम्मीदवारी की चर्चा के साथ यह आशंका सच साबित हो गई है । एक मजेदार संयोग यह बना है कि मनोज जैन की जो एकमात्र खूबी डिस्ट्रिक्ट के लोगों की जुबान पर अभी है और उनके बीच चर्चा में है, वह यह कि वह योगेश मोहन गुप्ता के गवर्नर-काल के अध्यक्ष हैं तथा योगेश मोहन गुप्ता के बड़े चहेते अध्यक्ष होते थे ।
तो क्या मनोज जैन, योगेश मोहन गुप्ता के ही नए संस्करण साबित होंगे, और उन्हीं की तर्ज पर चुनाव लड़ेंगे ? इसका तो पता बाद में चलेगा, किंतु मनोज जैन की उम्मीदवारी की चर्चा से सुनील गुप्ता की बाँछे जरूर खिल गई हैं; और अब उन्हें पक्का विश्वास हो चला है कि उनका गवर्नर-काल पूरा हिट रहेगा । मेरठ में सुनील गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि मनोज जैन की उम्मीदवारी सुनील गुप्ता से विचार विमर्श करने के बाद ही चर्चा में आई है; और मनोज जैन पूरी तरह सुनील गुप्ता के भरोसे ही चुनावी मैदान में उतरने के लिए राजी हुए हैं । मनोज जैन की उम्मीदवारी के जरिए सुनील गुप्ता को अपना गवर्नर-काल रौनकपूर्ण हो जाने का विश्वास है, तो योगेश मोहन गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में अपनी वापसी करने की उम्मीद है । पिछले दिनों डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ललित मोहन गुप्ता के कारण योगेश मोहन गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट में और रोटरी में भारी फजीहत का शिकार होना पड़ा तथा बहुत ही बुरे दिन देखने पड़े हैं । सुनील गुप्ता के साथ भी योगेश मोहन गुप्ता के अच्छे संबंध नहीं थे, पिछले दिनों तो वह और भी खराब हो गए थे; लेकिन पता नहीं सुनील गुप्ता  के साथ उनकी फिर क्या सौदेबाजी हुई कि सुनील गुप्ता ने उनके सामने समर्पण कर दिया । सुनील गुप्ता से समर्पण करवा कर योगेश मोहन गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट में और रोटरी में अपनी स्थिति सुधारने की जो कोशिश शुरू की है; मनोज जैन को सुनील गुप्ता का उम्मीदवार बनवा कर उसी कोशिश को और ऊँचे मुकाम पर पहुँचाने का दाँव उन्होंने चला है । इस दाँव की कामयाबी हालाँकि इस बात पर निर्भर करेगी कि मनोज जैन अपनी उम्मीदवारी के अभियान को कैसे आगे बढ़ाते हैं और सुनील गुप्ता का समर्थन उन्हें वास्तव में फायदा पहुँचाता भी है या नहीं ।