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Thursday, May 16, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में राजीव सिंघल के व्यवहार और रवैये से नाराज डिस्ट्रिक्ट के और खास तौर से मेरठ के लोगों ने अंततः दीपा खन्ना को उम्मीदवारी के लिए राजी किया, जिसके चलते राजीव सिंघल के लिए मुसीबतें अचानक से न सिर्फ पैदा हो गई हैं, बल्कि खासी बढ़ भी गई हैं

मेरठ । दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के प्रस्तुत होने से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी डेजिग्नेट) बनने की राजीव सिंघल की कोशिशों को एक बार फिर ग्रहण लगता दिख रहा है । राजीव सिंघल की बदकिस्मती ही है कि पिछले चार वर्ष से उनके साथ यह तमाशा हो रहा है कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करते हैं, सारी तैयारी और व्यवस्था करके हालात अनुकूल बनाते हैं, लेकिन जैसे ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी का पद उनके हाथ में आने को होता है कि कोई न कोई गड़बड़ हो जाती है और उनका किया-कराया सारा जुगाड़ फेल हो जाता है । यहाँ याद करना प्रासंगिक होगा कि चार वर्ष पहले सुनील गुप्ता के गवर्नर-वर्ष में राजीव सिंघल ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी बनने के लिए 'पक्की' व्यवस्था कर ली थी, जिसके तहत उन्होंने मुख्य प्रतिद्वंद्वी मधु गुप्ता की उम्मीदवारी को षड्यंत्रपूर्वक रद्द करवा दिया था - 'स्टेज' तैयार था और राजीव सिंघल की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की कुर्सी पर बैठने की 'तैयारी' पूरी हो चुकी थी कि अनहोनी घट गई; जिसके तहत सुनील गुप्ता की गवर्नरी ही चली गई । गवर्नर का कार्यभार दीपक बाबु को मिला । राजीव सिंघल ने फिर जोर मारा और दीपक बाबु को भी इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की कुर्सी पर बिठलायेंगे । दीपक बाबु ने राजीव सिंघल की हसरत को पूरा करने के लिए कदम अभी बढ़ाये ही थे कि रोटरी इंटरनेशनल ने उन्हें भी उनके पद से हटा दिया और डिस्ट्रिक्ट को नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस में डाल दिया । उन दिनों की घटनाओं को देखें और याद करें तो यही निष्कर्ष निकलता है कि सारी तैयारी और अनुकूल स्थितियों के बावजूद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) चुने जाने का 'मौका' राजीव सिंघल के हाथ से फिसल गया ।
इस वर्ष भी ऐसा ही होता दिख रहा है । उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021-22 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के लिए होने वाले चुनाव के लिए उम्मीदवारों का टोटा नजर आ रहा था और एक अकेले राजीव सिंघल ही चुनावी मैदान में उतरते दिख रहे थे । इस लिहाज से राजीव सिंघल के लिए हालात पूरी तरह अनुकूल थे और सभी ने मान लिया था कि राजीव सिंघल निर्विरोध ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी डेजिग्नेट हो जायेंगे । डिस्ट्रिक्ट के कुछेक नेता लोग दीपा खन्ना को उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए राजी करने का प्रयास कर तो रहे थे, लेकिन दीपा खन्ना कुछ ही महीनों के भीतर दूसरी बार उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए तैयार होती हुई नहीं दिख रही थीं । दरअसल अभी करीब पाँच महीने पहले ही संपन्न हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में दीपा खन्ना उम्मीदवार थीं, और खासी मेहनत से चुनाव लड़ने के बावजूद वह मामूली अंतर से चुनाव हार गईं थीं । उनका आकलन रहा कि कुछेक लोगों ने सहयोग/समर्थन का वायदा तथा 'दिखावा' करने के बाद भी वास्तव में उनका सहयोग/समर्थन नहीं किया, जिस कारण जीतते लग रहे चुनाव में उन्हें लेकिन पराजय का सामना करना पड़ा । इस 'झटके' के कारण ही इस वर्ष  दोबारा चुनाव में उतरने का उनका मन नहीं था । हालाँकि चुनावी राजनीतिक समीकरणों को देखने/समझने वाले लोगों का मानना/कहना रहा कि पिछले चुनाव के समय के हालात अलग थे, और उस समय के अनुभव के आधार पर अब होने जा रहे चुनाव के हालात का आकलन नहीं किया जा सकता है और दीपा खन्ना को समझना चाहिए कि अब की बार हालात पिछली बार जैसे पेचीदा नहीं हैं । लेकिन किसी भी तर्क से दीपा खन्ना उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए तैयार होती नहीं दिख रही थीं । इस स्थिति ने राजीव सिंघल की संभावनाओं को एकतरफा तरीके से उछाल दे दिया था, और सभी ने मान लिया था कि चुनाव तो सिर्फ औपचारिकता है; हरि गुप्ता और मनीष शारदा के बाद राजीव सिंघल ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार सँभालेंगे । मजे की बात यह देखने में आई कि चुनाव की घोषणा होने से पहले ही खुद राजीव सिंघल ने भी अपने आप को विजेता के रूप में देखना और भावी गवर्नर मानना शुरू कर दिया था । 
लेकिन लगता है कि बदकिस्मती एक बार फिर राजीव सिंघल के दरवाजे आ खड़ी हुई है । जो दीपा खन्ना उम्मीदवारी प्रस्तुत करने से लगातार इंकार कर रही थीं, अप्रत्याशित तरीके से उन्होंने अपनी उम्मीदवारी घोषित कर दी । दरअसल उन्होंने क्या घोषित कर दी, डिस्ट्रिक्ट के कई प्रमुख लोगों ने अपनी उम्मीदवारी घोषित करने के लिए उन्हें मजबूर कर दिया । खास बात यह रही कि दीपा खन्ना के लगातार इंकार करते रहने के बाद भी, मुरादाबाद में पहले तो मुरादाबाद के सभी पूर्व गवर्नर्स ने और फिर मुरादाबाद के क्लब्स के प्रेसीडेंट्स व अन्य प्रमुख लोगों ने मीटिंग करके दीपा खन्ना की उम्मीदवारी को समर्थन देने की घोषणा करके उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए उन पर दबाव बनाया; और फिर डिस्ट्रिक्ट के दूसरे शहरों के नेताओं ने भी दीपा खन्ना की उम्मीदवारी को समर्थन देने का भरोसा दिया - जिसके चलते दीपा खन्ना के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने से इंकार करते रहना संभव नहीं रहा और उन्होंने उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए हामी भर दी । इस स्थिति के लिए राजीव सिंघल को ही जिम्मेदार माना/ठहराया जा रहा है । कई लोगों का मानना और कहना है कि राजीव सिंघल ने अपने व्यवहार और रवैये से आम तौर से डिस्ट्रिक्ट के और खास तौर से मेरठ के लोगों को इतना नाराज किया हुआ है कि अधिकतर लोग उनकी राह में रोड़े डालने में लग गए हैं । नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस के दौरान राजीव सिंघल हालाँकि चार को-ऑर्डीनेटर्स में से एक थे, लेकिन उनके तेवर ऐसे रहते थे, जैसे वह अकेले ही को-ऑर्डिनेटर हैं - इस बात से डिस्ट्रिक्ट के और मेरठ के कई लोग राजीव सिंघल से जले-भुने बैठे हैं और चुनाव में एक एक बात का बदला लेने के लिए तैयार हो रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के और खास तौर से मेरठ के नेताओं व सक्रिय लोगों के बीच राजीव सिंघल के प्रति जिस तरह का नकारात्मक भाव दिख रहा है, और जिसके चलते लगातार इंकार करते रहने के बावजूद दीपा खन्ना उम्मीदवारी के लिए तैयार हो गईं हैं - उससे राजीव सिंघल के लिए मुसीबतें अचानक से न सिर्फ पैदा हो गई हैं, बल्कि खासी बढ़ भी गई हैं ।

Saturday, January 5, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हरि गुप्ता के नजदीकियों की ही 'मदद' से होने वाली मनीष शारदा की जीत हरि गुप्ता के लिए फजीहत का कारण बनी

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में मनीष शारदा की जीत की खबर मिलने के तुरंत बाद पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर योगेश मोहन गुप्ता द्वारा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हरि गुप्ता को लानत-सी देता वाट्स-ऐप संदेश भेजना इस बात की पुष्टि ही करता है कि डिस्ट्रिक्ट के कुछेक नेताओं के लिए मनीष शारदा को चुनाव जितवाना हरि गुप्ता को नीचा दिखाने के लिए जरूरी हो गया था - और उसके लिए उन नेताओं ने हर हथकंडा अपनाया । दरअसल इसीलिए मनीष शारदा की मामूली अंतर से हुई चुनावी जीत को हरि गुप्ता की पराजय के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष दीपक जैन और हरि गुप्ता के बीच हुए चुनाव में मनीष शारदा के क्लब - रोटरी क्लब मेरठ महान - ने दीपक जैन का समर्थन किया था; और तभी से हरि गुप्ता तथा मनीष शारदा के क्लब के बीच तनातनी की चर्चा थी । यह चर्चा पिछले दिनों उस समय पुख्ता हुई जब अगले वर्ष की डिस्ट्रिक्ट टीम में हरि गुप्ता द्वारा शामिल किए गए मनीष शारदा के क्लब के सदस्यों ने इकट्ठे इस्तीफा दे दिया । उनका आरोप रहा कि हरि गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में दीपा खन्ना का समर्थन कर रहे हैं और इस तरह मनीष शारदा की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने का काम कर रहे हैं । हरि गुप्ता ने उनके इस्तीफे तुरंत स्वीकार भी कर लिए । इस प्रसंग से संदेश यह गया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव  जैसे मनीष शारदा और हरि गुप्ता के बीच हो रहा है । इससे अलग अलग कारणों से हरि गुप्ता के विरोधी बने पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स जीएस धामा, योगेश मोहन गुप्ता और राकेश सिंघल ने खुलकर मनीष शारदा की उम्मीदवारी का झंडा उठा लिया, और तब मनीष शारदा की उम्मीदवारी के पक्ष में वोट जुटाने के लिए हर हथकंडा अपनाया गया ।
हरि गुप्ता के लिए बड़े झटके की बात यह रही कि अगले वर्ष की उनकी डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख सदस्यों तक के क्लब के वोट मनीष शारदा और उनके समर्थकों के हाथों 'बिक' गए । माना/समझा जा रहा था कि हरि गुप्ता ने जिन प्रमुख रोटेरियंस को अपनी टीम में महत्त्वपूर्ण पद दिए हैं, वह अपने अपने क्लब के वोट निश्चित रूप से दीपा खन्ना को दिलवा देंगे । रोटरी की चुनावी राजनीति का यह एक बड़ा आम फार्मूला है, जिसे प्रायः हर डिस्ट्रिक्ट में हमेशा ही आजमाया जाता है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पास अवॉर्ड का तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के पास पदों का 'खजाना' होता है, जिसके जरिये वह चुनाव को प्रभावित करने का काम करते हैं । लेकिन मनीष शारदा और उनके समर्थकों ने हरि गुप्ता की टीम में जगह पाने वाले प्रमुख रोटेरियंस के क्लब्स के प्रेसीडेंट के सामने ऐसी-ऐसी पेशकशें कीं कि प्रेसीडेंट्स ने अपने क्लब के नेताओं की बात मानने से इंकार कर दिया और हरि गुप्ता की टीम में जगह पाने वाले क्लब्स के नेताओं के लिए हरि गुप्ता से आँख मिला पाना मुश्किल हुआ । इस उलट-फेर के कारणों का आकलन करने वाले लोगों को यह भी लगता है कि हरि गुप्ता के अति-आत्मविश्वास में रहने के चलते भी यह हुआ । चुनाव से पहले हरि गुप्ता को कुछेक क्लब्स के प्रेसीडेंट के बदलते दिख रहे रवैये के प्रति आगाह किया गया था, लेकिन हरि गुप्ता ने उसकी परवाह नहीं की और आश्वस्त रहे कि उन्हें धोखा नहीं मिलेगा । हरि गुप्ता का यह अति-आत्मविश्वास ही दीपा खन्ना की हार का कारण बना । हरि गुप्ता के लिए समस्या की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पराजय दीपा खन्ना की हुई है, लेकिन फजीहत हरि गुप्ता की हो रही है ।
डिस्ट्रिक्ट में कुछेक लोगों को लगता है कि हरि गुप्ता की फजीहत इसलिए भी हो रही है, क्योंकि वह हर किसी को साथ लेकर चलना चाहते हैं, और डिस्ट्रिक्ट में सौहार्द बनाने का प्रयास कर रहे हैं । इसी प्रयास के तहत उन्होंने मनीष शारदा के क्लब के कई सदस्यों को अपनी गवर्नर-टीम में जगह दी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में वह दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थन में थे - इसका प्रचार तो बहुत था, लेकिन दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के पक्ष में कुछ करते हुए उन्हें देखा किसी ने नहीं । वास्तव में उनके रवैये को देखते हुए उनके ऊपर आरोप चस्पाँ हुआ कि वह दोनों नावों में पैर रखे रहना चाहते हैं । हरि गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि वह स्पष्ट फैसला करने से हिचकते/बचते हैं, और इसलिए उनके विरोधी उन्हें गंभीरता से नहीं लेते हैं । लोगों का कहना है कि हरि गुप्ता की सदाशयता और भलमनसाहत को उनके विरोधी उनकी कमजोरी समझते हैं, और उनके साथ मनमाना व्यवहार करते हैं - हरि गुप्ता लेकिन उससे कोई सबक नहीं लेते हैं । रोटरी क्लब मेरठ महान से धोखा खाने के बाद भी हरि गुप्ता उसके कई सदस्यों को अपनी टीम में प्रमुख पद देते हैं; वह सदस्य लेकिन हरि गुप्ता की इस भलमनसाहत का सम्मान नहीं करते हैं और उन्हें नीचा दिखाने के उद्देश्य से सामूहिक इस्तीफे दे देते हैं । हरि गुप्ता उन इस्तीफों के पीछे छिपी षड्यंत्रकारी राजनीति को समझने/पहचानने में भी चूक कर जाते हैं, और सावधान होने की बजाये अति-आत्मविश्वास का शिकार बने रहते हैं - जिसका नतीजा हरि गुप्ता के नजदीकियों की ही 'मदद' से होने वाली मनीष शारदा की जीत के रूप में सामने आता है ।

Sunday, December 16, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हरि गुप्ता की टीम से मनीष शारदा के क्लब के सदस्यों द्वारा इस्तीफे देने की घटना के चलते क्लब की हो रही बदनामी मनीष शारदा की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाती तथा दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के लिए वरदान बनती दिख रही है

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हरि गुप्ता द्वारा अपने गवर्नर-वर्ष के लिए बनाई जा रही डिस्ट्रिक्ट टीम में पद पाने वाले रोटरी क्लब मेरठ महान के सदस्यों के अपने अपने पदों से इस्तीफा देने की कार्रवाई ने क्लब की तरफ से बने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार मनीष शारदा के लिए मुसीबतें बढ़ाने का ही काम किया है । समझा जाता है कि मनीष शारदा की उम्मीदवारी को चूँकि हरि गुप्ता से सहयोग और समर्थन नहीं मिल रहा था, इसलिए हरि गुप्ता को 'सबक' सिखाने तथा उन्हें दबाव में लेने के उद्देश्य से हरि गुप्ता की प्रस्तावित टीम में जगह पाने वाले क्लब के सदस्यों ने उक्त कदम उठाया है । मनीष शारदा और इस योजना के रणनीतिकारों को लेकिन पहला झटका यह देख/जान कर लगा कि हरि गुप्ता ने तुरंत ही इस्तीफे स्वीकार कर लिए । मनीष शारदा और इस योजना के रणनीतिकारों को उम्मीद थी कि एकसाथ कई इस्तीफे पा कर हरि गुप्ता घबरा जायेंगे और इस्तीफा न देने के लिए मान-मनौव्वल करेंगे और तब वह हरि गुप्ता से मनीष शारदा की उम्मीदवारी के लिए सौदेबाजी कर लेंगे । लेकिन हरि गुप्ता के रवैये ने उनकी योजना व उम्मीदों पर पानी डाल दिया है । रोटरी क्लब मेरठ महान की इस कार्रवाई से मनीष शारदा की उम्मीदवारी को दूसरा बड़ा झटका यह लगा है कि इस कार्रवाई को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच मनीष शारदा की उम्मीदवारी की कमजोरी के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों का मानना और कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से साफ हो गया है कि मनीष शारदा और उनके समर्थकों ने चुनाव होने से पहले ही अपनी हार स्वीकार कर ली है, और इसी निराशा व बौखलाहट में मनीष शारदा और उनके समर्थक डिस्ट्रिक्ट के बड़े पदाधिकारियों को 'ब्लैकमेल' करने पर उतर आए हैं ।
हरि गुप्ता को दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जाता है, जो रोटरी क्लब मुरादाबाद ब्राइट की तरफ से उम्मीदवार हैं । मुरादाबाद से अकेली उम्मीदवार होने के कारण दीपा खन्ना को मुरादाबाद तथा उसके आसपास के क्लब्स का तो लगभग एकतरफा समर्थन प्राप्त है ही; हरि गुप्ता के समर्थन के चलते खास तौर से मेरठ के और आम तौर से डिस्ट्रिक्ट के अन्य शहरों के क्लब्स का भी समर्थन मिलता दिख रहा है - जिस कारण डिस्ट्रिक्ट के चुनावी खिलाड़ियों को दीपा खन्ना की उम्मीदवारी खासी बढ़त बनाए नजर आ रही है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में आमतौर पर उस उम्मीदवार का पलड़ा भारी हो ही जाता है, जिसके साथ आने वाले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का समर्थन होता है । हरि गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में तो दीपा खन्ना की उम्मीदवारी को लाभ पहुँचाते हुए दिख ही रहे हैं; मेरठ के होने कारण भी उनके समर्थन को दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के लिए महत्त्वपूर्ण माना/समझा जा रहा है । हरि गुप्ता - यानि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट - यदि मेरठ के न होते तो मेरठ के क्लब्स का दीपा खन्ना को वैसा समर्थन न दिलवा पाते जैसा मेरठ के होने के नाते वह अब दिलवा सकते हैं । मनीष शारदा के लिए मुसीबत की बात दरअसल यह हुई कि मेरठ से ही प्रस्तुत शशिकांत गोयल की उम्मीदवारी मेरठ में ही उनके समर्थन आधार को नुकसान पहुँचा रही है । डिस्ट्रिक्ट में हर जगह मनीष शारदा और उनके समर्थकों को सुनने को मिला है कि उनकी उम्मीदवारी को जब मेरठ में ही समर्थन नहीं मिल रहा है, तो दूसरी जगह वह समर्थन की कैसे, क्या और क्यों उम्मीद कर रहे हैं ? मनीष शारदा के लिए फजीहत की बात यह भी बनी हुई है कि मेरठ में चूँकि पहले शशिकांत गोयल की उम्मीदवारी प्रस्तुत हुई थी; इसलिए मेरठ में ही लोगों का कहना/पूछना है कि मेरठ की एकता को तोड़ने का काम मनीष शारदा और उनके क्लब ने ही जब बार बार और जोरशोर से किया है - तब फिर अब वह किस मुँह से मेरठ में अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं ?
उल्लेखनीय है कि हरि गुप्ता के पहले चुनाव में भी मनीष शारदा के क्लब पर हरि गुप्ता की उम्मीदवारी को धोखा देने का आरोप रहा है । पिछले रोटरी वर्ष की ही उस बात को याद करते हुए मेरठ के लोगों का कहना है कि हाल फिलहाल के समय में मनीष शारदा के क्लब ने मेरठ के 'हितों' के खिलाफ ही काम किया है, इसलिए मेरठ के लोगों के बीच उनके प्रति गहरी नाराजगी है और इसी कारण से मेरठ में ही मनीष शारदा की उम्मीदवारी को कोई समर्थन मिलता हुआ नहीं दिख रहा है । उल्लेखनीय है कि मनीष शारदा के क्लब से विरोध सहने और धोखा खाने के बाद भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हरि गुप्ता ने क्लब के कई वरिष्ठ सदस्यों को अपनी प्रस्तावित टीम में प्रमुख जगहें दीं - लेकिन क्लब के लोगों को अपना यह सम्मान भी लगता है कि हजम नहीं हुआ, और उन्होंने हरि गुप्ता की तरफ से हुई एक अच्छी पहल को ही नकार दिया है । मनीष शारदा के क्लब के सदस्यों द्वारा हरि गुप्ता की टीम से इस्तीफे देने की घटना को लेकर डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच जिस तरह की तीखी प्रतिक्रिया हुई है, और लोग जिस एकजुटता के साथ हरि गुप्ता के साथ खड़े नजर आ रहे हैं - उससे मनीष शारदा की उम्मीदवारी को और झटका लगा है । मनीष शारदा और उनके साथियों की इस हरकत के चलते वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जीएस धामा की भी किरकिरी हो रही है । जीएस धामा क्लब के वरिष्ठ सदस्य हैं, और पूर्व गवर्नर के रूप में उनकी अच्छी पहचान है और इसी पहचान के चलते रोटरी क्लब मेरठ महान को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच 'उनके क्लब' के रूप में ही जाना/पहचाना जाता है । लोगों को हैरानी है कि जीएस धामा के होते हुए उनके क्लब की तरफ से आखिर ऐसी हरकतें क्यों हो रही हैं, जिससे क्लब की भी बदनामी हो रही है और मनीष शारदा की उम्मीदवारी को भी खासा नुकसान हो रहा है । मनीष शारदा की उम्मीदवारी को होने वाला यह नुकसान दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के लिए वरदान बनता दिख रहा है । 

Saturday, October 20, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में चुनाव करवाने की रट लगाए जा रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक जैन ने अचानक से वर्ष 2020-21 के गवर्नर के चुनाव की प्रक्रिया को शुरु करके मनीष शारदा को खासा तगड़ा झटका दिया

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक जैन ने वर्ष 2020-21 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव की प्रक्रिया अचानक से शुरू करके मनीष शारदा की उम्मीदों को खासा तगड़ा झटका दिया है । मनीष शारदा की उम्मीद और कोशिश थी कि उक्त चुनाव मार्च में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में हों, ताकि वह अच्छे से तैयारी कर लें और लोगों के बीच अपनी पैठ बना लें । अभी तक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक जैन का रवैया भी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में ही उक्त चुनाव करवाने का था, जिसके चलते मनीष शारदा निश्चिंत बैठे थे । पिछले दिनों सुना गया था कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी सुशील गुप्ता के कहने पर रोटरी इंटरनेशनल के दिल्ली स्थित साऊथ एशिया ऑफिस के पदाधिकारी जितेंद्र सिंह ने दीपक जैन से उक्त चुनाव करवाने को लेकर बात की थी, लेकिन दीपक जैन के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी । सुशील गुप्ता का कहना दरअसल यह था कि प्रत्येक डिस्ट्रिक्ट में वर्ष 2020-21 के गवर्नर हैं, और उनकी ट्रेनिंग हो रही है - इसलिए डिस्ट्रिक्ट 3100 में भी वर्ष 2020-21 का गवर्नर हो जाना चाहिए, ताकि वह भी अपने समकालीन गवर्नर्स के साथ अभी से परिचित और प्रशिक्षित हो सके । जितेंद्र सिंह ने इसी तर्क के साथ दीपक जैन को उक्त चुनाव जल्दी करवाने के लिए राजी करने का प्रयास किया । दीपक जैन ने लेकिन बहानेबाजी करके उनकी बात को अनसुना कर दिया । दीपक जैन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की जिम्मेदारियों को अभी तक भले ही न समझे हों, लेकिन यह बात वह अच्छे से समझ गए हैं कि रोटरी इंटरनेशनल का बड़े से बड़ा पदाधिकारी उन्हें चुनाव करवाने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है - और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें यह अधिकार है कि वह जब चाहें तब चुनाव करवाएँ । इसीलिए वह वर्ष 2020-21 के गवर्नर के चुनाव को लेकर डिस्ट्रिक्ट में तथा रोटरी के बड़े पदाधिकारियों की तरफ से उठ रही माँग को लगातार अनसुना करते आ रहे थे ।
दीपक जैन की तरफ से कहा/सुना जा रहा था कि वह उक्त चुनाव यदि जल्दी करवा लेंगे तो डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की रौनक खत्म हो जाएगी; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वह चाहेंगे कि उनकी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस अच्छे से हो - इसलिए उक्त चुनाव वह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के दौरान और या उसके बाद ही करवायेंगे । दीपक जैन को अपने गवर्नर-काल में वर्ष 2021-22 के गवर्नर का भी चुनाव करवाना है, जिसकी आड़ में अपनी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को अच्छे से करवा सकने का मौका उनके पास है ही, लेकिन फिर भी वह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को अच्छे से करने/करवाने की आड़ में वर्ष 2020-21 के गवर्नर के चुनाव को टालते रहे - जिसके चलते लोगों को लगा कि यह सब वह मनीष शारदा को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से कर रहे हैं । लोगों का यह लगना स्वाभाविक भी माना/समझा गया, क्योंकि मनीष शारदा की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं की पिछले वर्ष दीपक जैन को चुनाव जितवाने में महत्त्वपूर्ण व निर्णायक भूमिका थी, इसलिए हर किसी को लग रहा था कि मनीष शारदा की सुविधानुसार दीपक जैन वर्ष 2020-21 के गवर्नर के चुनाव को टाल कर मनीष शारदा की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं के अहसान का बदला चुका रहे हैं । लेकिन अचानक तरीके से वर्ष 2020-21 के गवर्नर के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करके दीपक जैन ने तमाम कयासों और आलोचनाओं का मुँह बंद कर दिया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक जैन द्वारा अचानक से शुरू की गई चुनाव की प्रक्रिया ने दूसरों को तो हैरान किया है, लेकिन मनीष शारदा को खासा तगड़ा झटका दिया है । 
मनीष शारदा दरअसल आराम से बैठे थे और मान कर चल रहे थे कि उक्त चुनाव मार्च में और या उसके बाद होंगे, इसलिए अभी से ज्यादा कुछ करने की जरूरत भला क्या है ? वर्ष 2020-21 के गवर्नर पद के लिए अपनी इच्छा दिखाने वाले उम्मीदवारों में एक अकेली दीपा खन्ना ही लगातार सक्रिय बनी हुईं थीं, और लगातार डिस्ट्रिक्ट में लोगों से मिलजुल रही थीं तथा अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के प्रयासों में लगीं हुईं थीं । इसलिए अचानक शुरू हुई चुनावी प्रक्रिया से एक अकेले दीपा खन्ना और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों की तरफ से परेशानी होने की बात नहीं सुनी गई है, बल्कि उनकी तरफ से तो चुनावी प्रक्रिया शुरू होने का स्वागत होने की बात ही सुनी गई है । इसके विपरीत, मनीष शारदा और शशिकांत गोयल के खेमे में चुनावी प्रक्रिया शुरू होने की घोषणा से निराशा और हताशा के स्वर सुनाई दे रहे हैं । इन दोनों खेमों में इस बात पर भी हैरानी प्रकट की जा रही है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में चुनाव करवाने की लगातार रट लगाए जा रहे दीपक जैन का अचानक से हृदय परिवर्तन कैसे और क्यों हो गया कि आनन-फानन में उन्होंने चुनाव की प्रक्रिया ही शुरू कर दी है ? बिना चुनावी तैयारी के 'पकड़े' गए मनीष शारदा और शशिकांत गोयल के सामने मुसीबत की बात यह भी है कि दोनों ही मेरठ के होने के नाते चुनाव में एक-दूसरे को ही नुकसान पहुँचाते नजर आ रहे हैं । दोनों के समर्थक नेता हालाँकि चाह तो रहे थे कि दोनों के बीच ऐसा कोई समझौता हो जाये - जिसके तहत एक पहले और दूसरा उसके बाद उम्मीदवार बन जाए; लेकिन इस समझौते के लिए बातचीत अभी यह सोच कर शुरू नहीं की गई थी कि चुनाव तो अभी दूर हैं; दोनों ही लोग इस उम्मीद में थे कि हो सकता है कि चुनाव होने तक दूसरा थक-हार कर खुद ही मैदान छोड़ दे, इसलिए अभी बात क्या और क्यों करना ? लेकिन अचानक से शुरू हुई चुनावी प्रक्रिया ने मेरठ के दोनों उम्मीदवारों को मुसीबत में फँसा दिया है और उनके समर्थक व शुभचिंतक ही दोनों को दीपा खन्ना के सामने कमजोर पा/समझ रहे हैं ।

Wednesday, May 6, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट सुनील गुप्ता से समर्पण करवा कर योगेश मोहन गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट में और रोटरी में अपनी स्थिति सुधारने की जो कोशिश शुरू की है; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए मनोज जैन को सुनील गुप्ता का उम्मीदवार बनवा कर उसी कोशिश को उन्होंने और ऊँचे मुकाम पर पहुँचाने का दाँव चला है

मेरठ । रोटरी क्लब मेरठ के मनोज जैन की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने डिस्ट्रिक्ट की ठंडी पड़ी चुनावी राजनीति में गर्मी तो पैदा कर दी है । यह गर्मी इसलिए पैदा हुई है, क्योंकि मनोज जैन को अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने जा रहे सुनील गुप्ता के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । उल्लेखनीय है कि अगले रोटरी वर्ष में होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में अभी तक रोटरी क्लब मेरठ डायमण्ड की मंजु गुप्ता तथा रोटरी क्लब मुरादाबाद ब्राइट की दीपा खन्ना का नाम ही लोगों के बीच चर्चा में था । इन दोनों की रोटरी में अच्छी संलग्नता और सक्रियता रही है, तथा रोटरी के प्रति इनके उत्साहपूर्ण लगाव से प्रायः सभी परिचित रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के अधिकतर लोगों का मानना और कहना रहा है कि मंजु गुप्ता और दीपा खन्ना की ही उम्मीदवारी यदि रहती है तो चुनाव साफ-सुथरे तरीके से और एक-दूसरे के समर्थकों को बिना बेइज्जत किए संपन्न हो सकेगा तथा डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के लिए यह एक शुभअवसर होगा । हालाँकि कुछेक लोगों को पूरा पूरा भरोसा था कि डिस्ट्रिक्ट में चुनावी राजनीति के कुछेक खिलाड़ियों को यह स्थिति रास नहीं आयेगी, तथा वह कुछ न कुछ अवश्य ऐसा करेंगे जिससे चुनाव में 'रौनक' पैदा हो । रोटरी में दरअसल एक ऐसा तबका संगठित हो गया है, जो चुनाव को मेले-ठेले से ज्यादा महत्त्व नहीं देता है और चुनाव को गला गीला करने के एक वार्षिक उत्सव के रूप में देखता है । 
अन्य कुछेक लोगों का यह भी मानना और कहना था कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के कुछेक खिलाड़ी घोर पुरुषवादी सोच के हैं और वह किसी महिला को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न बनने देने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं । यहाँ संगीता कुमार और योगेश मोहन गुप्ता के बीच हुए चुनाव को याद करना प्रासंगिक होगा । यूँ तो डिस्ट्रिक्ट के हर चुनाव में गंदगी हुई ही है, किंतु उस चुनाव में योगेश मोहन गुप्ता के सौजन्य से गंदगी के जिन मुकामों को छुआ गया, वह घटियापने के शर्मनाक उदाहरण के रूप में दर्ज हैं । उस चुनाव में सारा चुनावी समीकरण संगीता कुमार की उम्मीदवारी के पक्ष में था, लेकिन फिर भी वह चुनाव हार गईं थीं तो उसका एक बड़ा कारण यही था कि पुरुषवादी सोच के घटियापने का मुकाबला करने की वह कोई तैयारी नहीं कर पाई थीं । हो सकता है कि उस चुनाव में संगीता कुमार के साथ जो हुआ था, उसी को ध्यान में रखते हुए कुछेक लोगों को लगा हो कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के कुछेक खिलाड़ी अगले रोटरी वर्ष के चुनावी मुकाबले को मंजु गुप्ता और दीपा खन्ना के बीच ही सीमित न रहने दें तथा उसमें कुछ तड़का डालने का प्रयास करेंगे । मनोज जैन की उम्मीदवारी की चर्चा के साथ यह आशंका सच साबित हो गई है । एक मजेदार संयोग यह बना है कि मनोज जैन की जो एकमात्र खूबी डिस्ट्रिक्ट के लोगों की जुबान पर अभी है और उनके बीच चर्चा में है, वह यह कि वह योगेश मोहन गुप्ता के गवर्नर-काल के अध्यक्ष हैं तथा योगेश मोहन गुप्ता के बड़े चहेते अध्यक्ष होते थे ।
तो क्या मनोज जैन, योगेश मोहन गुप्ता के ही नए संस्करण साबित होंगे, और उन्हीं की तर्ज पर चुनाव लड़ेंगे ? इसका तो पता बाद में चलेगा, किंतु मनोज जैन की उम्मीदवारी की चर्चा से सुनील गुप्ता की बाँछे जरूर खिल गई हैं; और अब उन्हें पक्का विश्वास हो चला है कि उनका गवर्नर-काल पूरा हिट रहेगा । मेरठ में सुनील गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि मनोज जैन की उम्मीदवारी सुनील गुप्ता से विचार विमर्श करने के बाद ही चर्चा में आई है; और मनोज जैन पूरी तरह सुनील गुप्ता के भरोसे ही चुनावी मैदान में उतरने के लिए राजी हुए हैं । मनोज जैन की उम्मीदवारी के जरिए सुनील गुप्ता को अपना गवर्नर-काल रौनकपूर्ण हो जाने का विश्वास है, तो योगेश मोहन गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में अपनी वापसी करने की उम्मीद है । पिछले दिनों डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी और पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ललित मोहन गुप्ता के कारण योगेश मोहन गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट में और रोटरी में भारी फजीहत का शिकार होना पड़ा तथा बहुत ही बुरे दिन देखने पड़े हैं । सुनील गुप्ता के साथ भी योगेश मोहन गुप्ता के अच्छे संबंध नहीं थे, पिछले दिनों तो वह और भी खराब हो गए थे; लेकिन पता नहीं सुनील गुप्ता  के साथ उनकी फिर क्या सौदेबाजी हुई कि सुनील गुप्ता ने उनके सामने समर्पण कर दिया । सुनील गुप्ता से समर्पण करवा कर योगेश मोहन गुप्ता ने डिस्ट्रिक्ट में और रोटरी में अपनी स्थिति सुधारने की जो कोशिश शुरू की है; मनोज जैन को सुनील गुप्ता का उम्मीदवार बनवा कर उसी कोशिश को और ऊँचे मुकाम पर पहुँचाने का दाँव उन्होंने चला है । इस दाँव की कामयाबी हालाँकि इस बात पर निर्भर करेगी कि मनोज जैन अपनी उम्मीदवारी के अभियान को कैसे आगे बढ़ाते हैं और सुनील गुप्ता का समर्थन उन्हें वास्तव में फायदा पहुँचाता भी है या नहीं ।