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Thursday, May 14, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में सीओएल के चुनाव में संजीव रस्तोगी की हार को वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जीएस धामा की जीत के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; माना जा रहा है कि लगभग चमत्कारिक रूप से योगेश मोहन गुप्ता को जितवा कर जीएस धामा ने दिखा दिया है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में सफलता के ताले की चाबी अभी उन्हीं के पास है 

मेरठ । सीओएल के चुनाव में संजीव रस्तोगी की पराजय के नतीजे ने उनके नजदीकियों और समर्थकों को ही नहीं, बल्कि उनके विरोधियों को भी हैरान किया है । उनके विरोधियों का ही कहना/बताना है कि वोटिंग के दौरान यह तो दिखने लगा था कि संजीव रस्तोगी को अपने कुछेक नए नए बने 'समर्थकों' की तरफ से धोखा मिल रहा है - लेकिन फिर भी यह उम्मीद किसी को नहीं थी कि वह चुनाव हार जायेंगे । इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि संजीव रस्तोगी की हार को वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जीएस धामा की जीत के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के समीकरणों पर नजर रखने वालों का कहना/बताना है कि सीओएल का चुनाव हो भले ही संजीव रस्तोगी और योगेश मोहन गुप्ता के बीच रहा था - लेकिन जीएस धामा इस चुनाव को डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति पर अपनी पकड़ जमाने और 'दिखाने' के अवसर के रूप में देख रहे थे, और इसके लिए उन्होंने बड़ी होशियारी से तैयारी की - इतनी होशियारी से कि किसी को उसकी भनक तक नहीं लगी । यही कारण रहा कि सीओएल के चुनाव में जीएस धामा को तटस्थ देखा/पहचाना जा रहा था । वोटिंग के दौरान कई मौकों पर यह चर्चा सुनाई तो दी कि जीएस धामा तो योगेश मोहन गुप्ता के पक्ष में वोट जुटाने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जीएस धामा ने होशियारी और सावधानी से काम करते हुए चर्चा को ज्यादा मुखर नहीं होने दिया । अब लेकिन चर्चा है कि अशोक गुप्ता की तरफ से संजीव रस्तोगी को जो धोखा मिला, उसके पीछे जीएस धामा के ही प्रयास थे । समझा जाता है कि अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में समर्थन का भरोसा देकर जीएस धामा ने अशोक गुप्ता के वोट योगेश मोहन गुप्ता को दिलवाए । अपनी संभावित उम्मीदवारी के चक्कर में, विकास गोयल ने भी संजीव रस्तोगी का साथ छोड़ कर अपने वोट योगेश मोहन गुप्ता को दिलवाए ।
बहुत से लोगों के लिए समझना मुश्किल है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में जीएस धामा को सबसे तगड़ा झटका योगेश मोहन गुप्ता ने ही दिया है, जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में जीएस धामा के उम्मीदवार के रूप में संगीता कुमार को योगेश मोहन गुप्ता ने हराया था - आखिर तब फिर जीएस धामा ने सीओएल के चुनाव में योगेश मोहन गुप्ता को जितवाने के लिए काम क्यों किया ? डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति को जानने/समझने वाले लोगों का मानना और कहना है कि वह बात अब पुरानी हो चुकी है - और जीएस धामा की नजर अब मौजूदा परिदृश्य पर है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में पिछले कुछेक वर्षों से जीएस धामा का सिक्का चल रहा है; देखा/पाया गया है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में जिस उम्मीदवार को जीएस धामा का समर्थन मिलता है, वह चुनाव में विजयी होता है । लेकिन इस वर्ष हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में जीत का 'मुकुट' जीएस धामा को संजीव रस्तोगी के साथ 'शेयर' करना पड़ा । दरअसल डीके शर्मा को संजीव रस्तोगी के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जाता है । हालाँकि नॉन डिस्ट्रिक्ट स्टेटस के दौरान डीके शर्मा को रोटरी इंटरनेशनल से 'न्याय' दिलवाने के मामले में भी जीएस धामा ने काफी प्रयास किए थे, और इस वर्ष हुए चुनाव में डीके शर्मा की जीत को सुनिश्चित करने/करवाने में भी जीएस धामा की बड़ी भूमिका थी - लेकिन डीके शर्मा की जीत के मामले में 'नाम' संजीव रस्तोगी का हुआ, जिससे संजीव रस्तोगी डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के नेता बनते हुए दिखे । अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव लड़ने की तैयारी करने वाले अशोक गुप्ता और विकास गोयल को संजीव रस्तोगी के साथ नजदीकी बनाते हुए देखा/पहचाना गया ।
यह सब देख/जान कर ही जीएस धामा को संजीव रस्तोगी की राजनीतिक उड़ान को 'कट टु साइज' करना जरूरी लगा । उन्हें लगा कि सीओएल के चुनाव में संजीव रस्तोगी यदि जीत गए तो फिर डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में उनका कद और बड़ा हो जायेगा । जीएस धामा को लगा कि योगश मोहन गुप्ता की डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच जिस तरह की बदनामी है, उसके भरोसे योगेश मोहन गुप्ता से तो वह कभी भी निपट लेंगे - फिलहाल उनके लिए संजीव रस्तोगी के बढ़ते कदमों को रोकना जरूरी है । इसलिए ही, योगेश मोहन गुप्ता के पुराने 'गुनाह' को भूलकर जीएस धामा ने बड़ी चतुराई से एक तरफ तो अशोक गुप्ता तथा विकास गोयल जैसे संजीव रस्तोगी के नए नए बने समर्थकों को तोड़ने का काम किया, और दूसरी तरफ मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, चंदौसी आदि के ऐसे लोगों को योगेश मोहन गुप्ता के पक्ष में वोट देने के लिए राजी किया - जो अलग अलग कारणों से योगेश मोहन गुप्ता से नाराज थे । लगभग चमत्कारिक रूप से योगेश मोहन गुप्ता की जीत को सुनिश्चित करवा कर जीएस धामा ने दिखा दिया है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में सफलता के ताले की चाबी अभी उन्हीं के पास है । संजीव रस्तोगी की हैरान करने वाली पराजय ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता पर पनौती का दाग और लगा दिया है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों को कहने का मौका मिला है कि हरि गुप्ता जिसके साथ होते हैं, वह तमाम अनुकूल स्थितियों के बावजूद चुनाव हार जाता है । हरि गुप्ता ने दो चुनावों में दीपा खन्ना की उम्मीदवारी का समर्थन किया, फिर वह अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थक हुए, और सीओएल के चुनाव में संजीव रस्तोगी को उनका समर्थन मिला - और नतीजा पहले जैसा ही रहा ।

Thursday, April 23, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरी गुप्ता ने सदाशयता और बड़प्पन दिखाते हुए योगेश मोहन गुप्ता की उम्मीदवारी को खारिज न करके उनकी 'योजना' पर मिट्टी डाली और उन्हें हार की दलदल में धकेलने का काम किया 

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता की पक्षपात न करते हुए सभी को मौका देने की सोच योगेश मोहन गुप्ता पर खासी भारी पड़ गई है, और सीओएल के चुनाव में उन्हें फजीहत का शिकार बनाने वाली साबित हुई है । दरअसल सीओएल के लिए योगेश मोहन गुप्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए नामांकन में कई तरह की गड़बड़ियाँ हैं, और उम्मीदवार के रूप में वह कई जरूरी शर्तों का पालन नहीं करते हैं । गड़बड़ियों/खामियों को जानते/पहचानते हुए भी योगेश मोहन गुप्ता ने नामांकन प्रस्तुत किया, तो इसलिए ताकि उनका नामांकन रद्द हो जाए । योगेश मोहन गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि योगेश मोहन गुप्ता की योजना थी कि नामांकन रद्द होने पर वह जोरशोर से इस बात को प्रचारित करेंगे कि संजीव रस्तोगी उनकी उम्मीदवारी से डर गए और हार से बचने के लिए संजीव रस्तोगी ने दबाव डाल कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के जरिये उनका नामांकन रद्द करवा दिया - और इस तरह डिस्ट्रिक्ट तथा रोटरी में जोरदार तरीके से पुनर्वापसी करेंगे । योगेश मोहन गुप्ता भी अच्छी तरह जानते हैं कि चुनाव जीतना तो उनके बस की बात नहीं है, इसलिए उन्होंने यह नाटक रचा । योगेश मोहन गुप्ता को विश्वास था कि इस नाटक के जरिये - 'न हींग लगेगी और न फिटकरी, रंग चोखा जम जायेगा ।' लेकिन हरि गुप्ता ने नामांकन रद्द न करके, योगेश मोहन गुप्ता की सारी योजना पर मिट्टी डाल दी है । हरि गुप्ता का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में सभी लोग एक बराबर हैं, और कोई यदि चुनाव लड़ना चाहता है तो तकनीकी गड़बड़ियों/खामियों के आधार पर उससे चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए और उसे चुनाव लड़ने देना चाहिए । हरि गुप्ता की यह सदाशयता और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उनका यह बड़प्पन योगेश मोहन गुप्ता के लिए मुसीबत बन कर उन्हें हार के अपमान व फजीहत की दलदल में धकेलने वाला बन गया है ।
हरि गुप्ता ने योगेश मोहन गुप्ता के नामांकन को स्वीकार करके योगेश मोहन गुप्ता को चुनाव लड़ने के लिए मजबूर कर दिया है - और योगेश मोहन गुप्ता का रचा गया नाटक खुद उन पर भारी पड़ गया है । योगेश मोहन गुप्ता ने चुनाव लड़ने तथा डिस्ट्रिक्ट व रोटरी में पुनर्वापसी के लिए रोटरी क्लब सरधना महान में शरण लेकर अपने लिए मुसीबत को और बढ़ा लिया है । दूसरे शहरों के क्लब के पदाधिकारी योगेश मोहन गुप्ता से पूछ रहे हैं कि वह जब रहते मेरठ में हैं, और उन्होंने रोटरी मेरठ में की है - तब फिर वह मेरठ के किसी क्लब के सदस्य न होकर सरधना महान के सदस्य क्यों बने ? अब बेचारे योगेश मोहन गुप्ता उन्हें क्या और कैसे बतायें कि उन्होंने तो मेरठ के ही किसी भी क्लब की सदस्यता के लिए बहुत कोशिश की थी, लेकिन उनके लिए मेरठ के किसी भी क्लब का दरवाजा नहीं खुला । मेरठ में यह चर्चा आम है कि योगेश मोहन गुप्ता ने सदस्यता के लिए मेरठ के कई क्लब्स के पदाधिकारियों और प्रमुख सदस्यों के दरवाजे खटखटाये थे, लेकिन उनकी हरकतों और कारस्तानियों से परिचित होने के कारण कोई भी उन्हें अपने क्लब में लेने के लिए तैयार नहीं हुआ, और तब योगेश मोहन गुप्ता को रोटरी क्लब सरधना महान में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा । ऐसे में, मेरठ में ही बातें कही/सुनी जा रही हैं कि मेरठ का कोई क्लब जब उन्हें अपने यहाँ सदस्य बनाने के लिए तैयार नहीं हुआ, तो यहाँ उन्हें वोट कौन देगा ? इस स्थिति के चलते, योगेश मोहन गुप्ता के लिए दूसरे शहरों में वोट प्राप्त करने की कोशिश करना तक मुश्किल हो गया है । लगता है कि मेरठ में योगेश मोहन गुप्ता के अलग-थलग पड़ जाने को लेकर, दूसरे शहरों के लोग उन्हें चिढ़ाने और मजे लेने के लिए जानबूझ कर उनसे पूछते हैं कि मेरठ के किसी क्लब में उन्हें सदस्यता क्यों नहीं मिली ?
डिस्ट्रिक्ट में अभी हाल ही में, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद चुनाव हुआ है, जिसमें डीके शर्मा और अशोक गुप्ता उम्मीदवार थे - यानि क्लब्स के वोट इन्हीं दोनों को मिले थे; सीओएल के चुनाव में यह दोनों संजीव रस्तोगी का समर्थन करते हुए उन्हें वोट दिलवाने के प्रयासों में जुटे हैं । इस एक तथ्य से सीओएल के चुनाव में संजीव रस्तोगी की उम्मीदवारी की मजबूती को समझा जा सकता है । वास्तव में, इसीलिए योगेश मोहन गुप्ता को अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थकों तक का टोटा पड़ गया है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मनीष शारदा ने शुरू में योगेश मोहन गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थन में कुछ सक्रियता दिखाई थी, लेकिन लोगों का मूड भाँप कर जल्दी ही उन्हें समझ में आ गया कि उनके समर्थन के बावजूद योगेश मोहन गुप्ता का तो कोई लाभ नहीं होगा, उलटे उनके लिए मुसीबतें खड़ी हो जायेंगी - लिहाजा मनीष शारदा ने योगेश मोहन गुप्ता के समर्थन से हाथ खींच लिए । योगेश मोहन गुप्ता के नजदीकियों का ही मानना और कहना है कि योगेश मोहन गुप्ता की करतूतें और कारस्तानियाँ ही वास्तव में उनकी दुश्मन हो बैठी हैं । योगेश मोहन गुप्ता ने अपनी हरकतों, अपने व्यवहार और अपनी बातों से बहुतों के साथ दुर्व्यवहार किया है और उन्हें तरह तरह से नीचा दिखाने की कोशिश करते हुए उन्हें अपमानित किया है । सीओएल के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी ने डिस्ट्रिक्ट के बहुत से आम और खास सदस्यों के घावों को फिर से हरा कर दिया है, और वह योगेश मोहन गुप्ता से बदला लेने के लिए सक्रिय हो उठे हैं । वास्तव में इसीलिए योगेश मोहन गुप्ता को मेरठ के किसी क्लब में सदस्यता नहीं मिली और उनकी उम्मीदवारी को समर्थक नहीं मिल रहे हैं । योगेश मोहन गुप्ता को इस स्थिति का अंदाजा तो था, लेकिन उन्होंने इस स्थिति की चिंता नहीं की थी - क्योंकि उन्हें विश्वास था कि नामांकन पत्र की गड़बड़ियों और खामियों के चलते उनका नामांकन रद्द हो जायेगा और वह आरोपों का शोर मचा कर डिस्ट्रिक्ट व रोटरी में जोरशोर के साथ अपनी पुनर्वापसी कर लेंगे; लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता ने उन्हें इसका मौका नहीं दिया ।

Saturday, March 14, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में अशोक गुप्ता जिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल के समर्थन के बल पर जीतने की उम्मीद कर रहे थे, वही उनकी हार का कारण बने; और दिनेश शर्मा बड़े अंतर से विजयी हुए

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल की हर संभव तिकड़म के बावजूद, अशोक गुप्ता अगले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव दिनेश शर्मा से बड़े अंतर से हार गए हैं । राजीव सिंघल और अशोक गुप्ता की जोड़ी और उनके नजदीकी इस हार के लिए पूर्व गवर्नर राकेश सिंघल को कोस रहे हैं । इनका आरोप है कि राकेश सिंघल वैसे तो अपने आपको मुरादाबाद का बड़ा नेता बताते/समझते हैं, लेकिन मुरादाबाद का वह एक वोट भी अशोक गुप्ता को नहीं दिलवा सके । चर्चा है कि अशोक गुप्ता वोटों की मुँहमाँगी कीमत देने को तैयार थे, और मुरादाबाद में आठ/दस वोट अपने आप को 'तटस्थ' भी बता/दिखा रहे थे - लेकिन दिनेश शर्मा और उनके समर्थकों द्वारा की गई घेराबंदी को तोड़ पाने में वह विफल रहे । अशोक गुप्ता की बदकिस्मती यह रही कि मुरादाबाद में उन्हें अपने घनघोर व दमदार समर्थक राकेश सिंघल के खासमखास लोगों का भी वोट नहीं मिला । दिनेश शर्मा के गृह क्षेत्र बुलंदशहर तक में अशोक गुप्ता ने कुछेक वोट प्राप्त करने का जुगाड़ बैठा लिया, लेकिन मुरादाबाद में उन्हें खाली हाथ ही रहना पड़ा - और यही उनकी हार का प्रमुख कारण बना । मुरादाबाद के क्लब्स ने जिस तरह से दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी के पक्ष में एकतरफा रूप में वोट किया/दिया, वह डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का एक दिलचस्प अध्याय है । मुरादाबाद का कोई उम्मीदवार होता है, तब मुरादाबाद के क्लब्स की ऐसी एकता कभी-कभार ही देखने को मिली है; मुरादाबाद से बाहर के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होने की स्थिति में तो यहाँ के वोट निश्चित रूप से बँटते ही हैं । लेकिन इस बार अनोखा काम हुआ, और दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी के पक्ष में मुरादाबाद के क्लब्स की अप्रत्याशित एकता देखने को मिली ।
डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के कुछेक जानकारों के अनुसार, मुरादाबाद के क्लब्स की यह एकता वास्तव में दिनेश शर्मा के पक्ष में नहीं - बल्कि अशोक गुप्ता के विरोध में बनी; दिनेश शर्मा को तो उसका लाभ भर मिला है । दरसअल अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी की कमान जिस तरह से राजीव सिंघल के हाथों में रही/दिखी; और अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के सहारे राजीव सिंघल जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट का नेता बनने की कोशिश करते नजर आये - उससे डिस्ट्रिक्ट के कई नेता बुरी तरह बिदक गए । राजीव सिंघल के रवैये में डिस्ट्रिक्ट के आम और खास लोगों ने घमंड का भाव देखा और महसूस किया है; राजीव सिंघल की तरफ से, अशोक गुप्ता की जीत के बाद उनके दो/एक नजदीकियों के नाम अगले उम्मीदवारों के रूप में जिस तरह से 'उछले' - उससे भी डिस्ट्रिक्ट के नेताओं के बीच खलबली मची, और वह आपसी मतभेदों को भुला कर एकजुट हुए । डिस्ट्रिक्ट के कई नेताओं के बीच बनी एकजुटता को वरिष्ठ पूर्व गवर्नर जीएस धामा तथा युवा पूर्व गवर्नर संजीव रस्तोगी ने अपने अपने तरीके से न सिर्फ पुख्ता किया, बल्कि अपने अपने समर्थकों के जरिये दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी के पक्ष में ऐसी जबर्दस्त घेराबंदी भी की कि विरोधियों के नजदीक समझे जाने वाले लोगों के वोट भी दिनेश शर्मा की झोली में आ गिरे । उल्लेखनीय है कि दिनेश शर्मा पहली और पिछली बार संजीव रस्तोगी के गवर्नर वर्ष में निर्विरोध चुने गए थे; लेकिन डिस्ट्रिक्ट के नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस में जाने के चलते दिनेश शर्मा की वह कामयाबी खटाई में पड़ गई थी । डिस्ट्रिक्ट को नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस से बाहर लाकर दिनेश शर्मा को 'न्याय' दिलवाने के लिए रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के बीच जीएस धामा ने खासी 'वकालत' की थी, लेकिन उनके वह प्रयास सफल नहीं हो सके थे । इसलिए इस बार के चुनाव में दिनेश शर्मा को जीत की माला और शॉल पहनाने के लिए जीएस धामा और संजीव रस्तोगी ने जैसे कमर कस ली थी, और इस बार वह अपनी कोशिशों में कामयाब हुए ।
अशोक गुप्ता के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता का समर्थन लेना/पाना भी आत्मघाती साबित हुआ । मजे की बात यह रही कि हरि गुप्ता का समर्थन पाने के बाद अशोक गुप्ता व उनके समर्थक और जोश में आ कर अपनी जीत के प्रति आश्वस्त व निश्चिंत हो गए थे । लेकिन हुआ ठीक उल्टा और उनकी उम्मीदवारी का बंटाधार करने में हरि गुप्ता का भी भारी 'सहयोग' रहा । दरअसल, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में हरि गुप्ता का कार्यकाल बहुत ही बुरा रहा है और अधिकतर लोग अलग अलग कारणों से नाराज हुए हैं । रही सही कसर डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की बदइंतजामी ने पूरी कर दी । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में बदइंतजामी का आलम यह रहा कि लोगों को खाना पाने के लिए मशक्कत करना पड़ी और अपमानित तक होना पड़ा । खाना पाने के लिए पहले तो लोगों को लंबी लाइन में लगना पड़ा, जब तक उनका नंबर आया तो पता चला कि प्लेट्स खत्म हो गई हैं; जब तक प्लेट्स लगीं, तब तक रोटियाँ समाप्त हो गईं - लोग रोटियों का इंतजार कर रहे थे, लेकिन सप्लाई में दाल के डोंगे पर डोंगे चले आ रहे थे । इससे लोगों के बीच भारी अफरातफरी फैली । इससे पहले मुख्य अतिथि के रूप में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता कई मुद्दों पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में हरि गुप्ता की कमजोरियों को उद्घाटित कर चुके थे । इस तरह, लोगों ने देखा/पाया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में हरि गुप्ता हर मोर्चे पर फेल रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच चर्चा चल ही रही थी कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में हरि गुप्ता ने अशोक गुप्ता से कई खर्चे स्पॉन्सर करवाए हैं, और हरि गुप्ता का सहयोग/समर्थन पाने के लिए अशोक गुप्ता ने खुशी खुशी उनके खर्चों को उठाया है - इसके चलते, डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में फैली बदइंतजामी का शिकार हुए लोगों ने अशोक गुप्ता से बदला लिया । अशोक गुप्ता की बदकिस्मती रही कि उन्हें अपने समर्थकों के रवैये से पैदा हुई नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा है; इस कारण से उनकी 'आगे की राह' को भी मुश्किलों से भरा देखा/पहचाना जा रहा है ।

Friday, January 17, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में दिनेश शर्मा के पक्ष में पूर्व गवर्नर जीएस धामा की दिलचस्पी व सक्रियता के चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मनीष शारदा के लिए अशोक गुप्ता का समर्थन करना मुश्किल हुआ

मेरठ । दिनेश शर्मा और अशोक गुप्ता के बीच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए छिड़ी लड़ाई में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मनीष शारदा के लिए हालात इस समय, बकौल मिर्जा ग़ालिब 'ईमां मुझे रोके है, तो खींचे है मुझे कुफ्र' जैसे हो रहे हैं । उनके लिए यह हालात दरअसल पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जीएस धामा के कारण बने हैं । जीएस धामा को दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा/पहचाना जा रहा है । मनीष शारदा चूँकि जीएस धामा के ही क्लब के सदस्य हैं, और क्लब में जीएस धामा का ही प्रभाव है - इसलिए 'ईमां' तो उन्हें दिनेश शर्मा के समर्थन में रहने के लिए मजबूर कर रहा है; लेकिन कई तरह के दबावों व स्वार्थों के चलते 'कुफ्र' उन्हें अशोक गुप्ता की तरफ खींच रहा है । अशोक गुप्ता को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; दोनों नजदीकी रिश्तेदार हैं - और अशोक गुप्ता ने समर्थन जुटाने के लिए ठीक वैसे ही हथकंडे अपनाए हुए हैं, जिनके सहारे/भरोसे राजीव सिंघल ने अपनी चुनावी नैय्या पार लगाई थी । राजीव सिंघल की चुनावी नैय्या पार करवाने में मनीष शारदा का बड़ा योगदान था । उस समय जीएस धामा चूँकि विदेश में थे, इसलिए मनीष शारदा को अपनी मनमानी करने तथा राजनीति चलाने का मौका मिल गया था । अपने चुनाव के समय मनीष शारदा के साथ बनी नजदीकी का राजीव सिंघल अब अशोक गुप्ता के लिए भी फायदा उठाना चाहते हैं । मनीष शारदा उन्हें फायदा देना/पहुँचाना भी चाहते हैं, लेकिन अब की बार उनके लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि जीएस धामा यहीं पर हैं और दिनेश शर्मा की चुनावी नैय्या को पार लगवाने की कुछ छिपी व कुछ खुली कोशिशों में जुटे हुए हैं ।
दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी की कामयाबी जीएस धामा के लिए दो कारणों से बहुत महत्त्व की है । पहला कारण तो यह है कि दिनेश शर्मा को रोटरी इंटरनेशनल के जिस 'अन्याय' का सामना करना पड़ा है, उसमें दिनेश शर्मा को न्याय दिलवाने के लिए जीएस धामा ने रोटरी इंटरनेशनल के बड़े नेताओं के सामने दिनेश शर्मा के पक्ष में खासी वकालत की थी । उनकी वकालत उस समय तो कई कारणों से दिनेश शर्मा के काम नहीं आ सकी थी, लेकिन अब जब दिनेश शर्मा दोबारा से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर (नॉमिनी) पद की चुनावी दौड़ में शामिल हुए हैं, तो जीएस धामा के लिए दिनेश शर्मा को 'न्याय' दिलवाने का मामला जरूरी बन गया है; दरअसल इसके जरिये वह अपनी पिछली असफलता को भी ढक लेना चाहते हैं । दूसरा कारण राजनीतिक है । जीएस धामा के नजदीकियों का कहना है कि पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने के तुरंत बाद राजीव सिंघल जिस तरह से अपने रिश्तेदार अशोक गुप्ता को उम्मीदवार बना बैठे हैं, उसे देख कर जीएस धामा को ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों को भी लग रहा है कि राजीव सिंघल डिस्ट्रिक्ट पर कब्जा करके डिस्ट्रिक्ट के नेता बनना चाहते हैं । जीएस धामा के नजदीकियों का कहना/बताना है कि दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी को सफल बनाने के जरिये जीएस धामा वास्तव में राजीव सिंघल के मंसूबों पर भी पानी फेरना चाहते हैं । 
दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी को लेकर जीएस धामा की सक्रियता ने मनीष शारदा के लिए लेकिन बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है । मेरठ के रोटेरियंस को लगता है कि दिनेश शर्मा की उम्मीदवारी को जीएस धामा का जैसा समर्थन प्राप्त है, उसे देखते/समझते हुए मनीष शारदा के लिए अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी का समर्थन करना मुश्किल ही होगा । इसके चलते अशोक गुप्ता को सत्ता का एकतरफा समर्थन मिलना मुश्किल ही दिख रहा है ।अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थक अभी तक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मनीष शारदा तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी राजीव सिंघल का समर्थन पाने की उम्मीद पाले बैठे थे - लेकिन मनीष शारदा को 'ईमां' में फँसा देख अशोक गुप्ता के समर्थकों को अपना पक्ष कमजोर पड़ता दिख रहा है । शक उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरि गुप्ता के रवैये पर भी है । हालाँकि हरि गुप्ता को अभी तक अशोक गुप्ता के समर्थन में ही देखा/पहचाना जा रहा है; लेकिन अशोक गुप्ता के समर्थक उन सूचनाओं से भी डरे हुए हैं, जिनमें कहा/बताया जा रहा है कि हरि गुप्ता कुछेक प्रमुख लोगों के जरिये दिनेश शर्मा से भी सौदेबाजी करने में लगे हैं । दरअसल अभी तक हरि गुप्ता यदि अशोक गुप्ता के समर्थन में दिख रहे हैं, तो इसे हरि गुप्ता के कई आयोजनों में अशोक गुप्ता द्वारा खुलकर किए गए खर्च के परिणाम के रूप में ही देखा/पहचाना जा रहा है । अशोक गुप्ता के समर्थकों को लेकिन सुनने को अब यह भी मिल रहा है कि दिनेश शर्मा की तरफ से भी हरि गुप्ता को खर्च का ऑफर मिला है । मजे की बात यह है कि अशोक गुप्ता के समर्थक यह भी कहते/बताते रहते हैं कि हरि गुप्ता के पास वोट तो कोई नहीं है, वह अपने क्लब का वोट भी नहीं दिलवा सकते हैं - लेकिन फिर भी वह अशोक गुप्ता के लिए हरि गुप्ता का समर्थन 'बनाये' रखना चाहते हैं, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के समर्थन का एक मनोवैज्ञानिक फायदा तो मिलता ही है । अशोक गुप्ता के समर्थकों को डर है कि मनीष शारदा के बाद यदि हरि गुप्ता का समर्थन भी संशय में पड़ा और गड़बड़ाया - तब तमाम तीन तिकड़म व सौदेबाजियों के बावजूद अशोक गुप्ता की उम्मीदवारी खतरे में पड़ जा सकती है ।

Saturday, January 5, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हरि गुप्ता के नजदीकियों की ही 'मदद' से होने वाली मनीष शारदा की जीत हरि गुप्ता के लिए फजीहत का कारण बनी

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में मनीष शारदा की जीत की खबर मिलने के तुरंत बाद पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर योगेश मोहन गुप्ता द्वारा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हरि गुप्ता को लानत-सी देता वाट्स-ऐप संदेश भेजना इस बात की पुष्टि ही करता है कि डिस्ट्रिक्ट के कुछेक नेताओं के लिए मनीष शारदा को चुनाव जितवाना हरि गुप्ता को नीचा दिखाने के लिए जरूरी हो गया था - और उसके लिए उन नेताओं ने हर हथकंडा अपनाया । दरअसल इसीलिए मनीष शारदा की मामूली अंतर से हुई चुनावी जीत को हरि गुप्ता की पराजय के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष दीपक जैन और हरि गुप्ता के बीच हुए चुनाव में मनीष शारदा के क्लब - रोटरी क्लब मेरठ महान - ने दीपक जैन का समर्थन किया था; और तभी से हरि गुप्ता तथा मनीष शारदा के क्लब के बीच तनातनी की चर्चा थी । यह चर्चा पिछले दिनों उस समय पुख्ता हुई जब अगले वर्ष की डिस्ट्रिक्ट टीम में हरि गुप्ता द्वारा शामिल किए गए मनीष शारदा के क्लब के सदस्यों ने इकट्ठे इस्तीफा दे दिया । उनका आरोप रहा कि हरि गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में दीपा खन्ना का समर्थन कर रहे हैं और इस तरह मनीष शारदा की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने का काम कर रहे हैं । हरि गुप्ता ने उनके इस्तीफे तुरंत स्वीकार भी कर लिए । इस प्रसंग से संदेश यह गया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव  जैसे मनीष शारदा और हरि गुप्ता के बीच हो रहा है । इससे अलग अलग कारणों से हरि गुप्ता के विरोधी बने पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स जीएस धामा, योगेश मोहन गुप्ता और राकेश सिंघल ने खुलकर मनीष शारदा की उम्मीदवारी का झंडा उठा लिया, और तब मनीष शारदा की उम्मीदवारी के पक्ष में वोट जुटाने के लिए हर हथकंडा अपनाया गया ।
हरि गुप्ता के लिए बड़े झटके की बात यह रही कि अगले वर्ष की उनकी डिस्ट्रिक्ट टीम के प्रमुख सदस्यों तक के क्लब के वोट मनीष शारदा और उनके समर्थकों के हाथों 'बिक' गए । माना/समझा जा रहा था कि हरि गुप्ता ने जिन प्रमुख रोटेरियंस को अपनी टीम में महत्त्वपूर्ण पद दिए हैं, वह अपने अपने क्लब के वोट निश्चित रूप से दीपा खन्ना को दिलवा देंगे । रोटरी की चुनावी राजनीति का यह एक बड़ा आम फार्मूला है, जिसे प्रायः हर डिस्ट्रिक्ट में हमेशा ही आजमाया जाता है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पास अवॉर्ड का तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के पास पदों का 'खजाना' होता है, जिसके जरिये वह चुनाव को प्रभावित करने का काम करते हैं । लेकिन मनीष शारदा और उनके समर्थकों ने हरि गुप्ता की टीम में जगह पाने वाले प्रमुख रोटेरियंस के क्लब्स के प्रेसीडेंट के सामने ऐसी-ऐसी पेशकशें कीं कि प्रेसीडेंट्स ने अपने क्लब के नेताओं की बात मानने से इंकार कर दिया और हरि गुप्ता की टीम में जगह पाने वाले क्लब्स के नेताओं के लिए हरि गुप्ता से आँख मिला पाना मुश्किल हुआ । इस उलट-फेर के कारणों का आकलन करने वाले लोगों को यह भी लगता है कि हरि गुप्ता के अति-आत्मविश्वास में रहने के चलते भी यह हुआ । चुनाव से पहले हरि गुप्ता को कुछेक क्लब्स के प्रेसीडेंट के बदलते दिख रहे रवैये के प्रति आगाह किया गया था, लेकिन हरि गुप्ता ने उसकी परवाह नहीं की और आश्वस्त रहे कि उन्हें धोखा नहीं मिलेगा । हरि गुप्ता का यह अति-आत्मविश्वास ही दीपा खन्ना की हार का कारण बना । हरि गुप्ता के लिए समस्या की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में पराजय दीपा खन्ना की हुई है, लेकिन फजीहत हरि गुप्ता की हो रही है ।
डिस्ट्रिक्ट में कुछेक लोगों को लगता है कि हरि गुप्ता की फजीहत इसलिए भी हो रही है, क्योंकि वह हर किसी को साथ लेकर चलना चाहते हैं, और डिस्ट्रिक्ट में सौहार्द बनाने का प्रयास कर रहे हैं । इसी प्रयास के तहत उन्होंने मनीष शारदा के क्लब के कई सदस्यों को अपनी गवर्नर-टीम में जगह दी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में वह दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थन में थे - इसका प्रचार तो बहुत था, लेकिन दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के पक्ष में कुछ करते हुए उन्हें देखा किसी ने नहीं । वास्तव में उनके रवैये को देखते हुए उनके ऊपर आरोप चस्पाँ हुआ कि वह दोनों नावों में पैर रखे रहना चाहते हैं । हरि गुप्ता के नजदीकियों का कहना है कि वह स्पष्ट फैसला करने से हिचकते/बचते हैं, और इसलिए उनके विरोधी उन्हें गंभीरता से नहीं लेते हैं । लोगों का कहना है कि हरि गुप्ता की सदाशयता और भलमनसाहत को उनके विरोधी उनकी कमजोरी समझते हैं, और उनके साथ मनमाना व्यवहार करते हैं - हरि गुप्ता लेकिन उससे कोई सबक नहीं लेते हैं । रोटरी क्लब मेरठ महान से धोखा खाने के बाद भी हरि गुप्ता उसके कई सदस्यों को अपनी टीम में प्रमुख पद देते हैं; वह सदस्य लेकिन हरि गुप्ता की इस भलमनसाहत का सम्मान नहीं करते हैं और उन्हें नीचा दिखाने के उद्देश्य से सामूहिक इस्तीफे दे देते हैं । हरि गुप्ता उन इस्तीफों के पीछे छिपी षड्यंत्रकारी राजनीति को समझने/पहचानने में भी चूक कर जाते हैं, और सावधान होने की बजाये अति-आत्मविश्वास का शिकार बने रहते हैं - जिसका नतीजा हरि गुप्ता के नजदीकियों की ही 'मदद' से होने वाली मनीष शारदा की जीत के रूप में सामने आता है ।

Sunday, December 16, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हरि गुप्ता की टीम से मनीष शारदा के क्लब के सदस्यों द्वारा इस्तीफे देने की घटना के चलते क्लब की हो रही बदनामी मनीष शारदा की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाती तथा दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के लिए वरदान बनती दिख रही है

मेरठ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हरि गुप्ता द्वारा अपने गवर्नर-वर्ष के लिए बनाई जा रही डिस्ट्रिक्ट टीम में पद पाने वाले रोटरी क्लब मेरठ महान के सदस्यों के अपने अपने पदों से इस्तीफा देने की कार्रवाई ने क्लब की तरफ से बने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार मनीष शारदा के लिए मुसीबतें बढ़ाने का ही काम किया है । समझा जाता है कि मनीष शारदा की उम्मीदवारी को चूँकि हरि गुप्ता से सहयोग और समर्थन नहीं मिल रहा था, इसलिए हरि गुप्ता को 'सबक' सिखाने तथा उन्हें दबाव में लेने के उद्देश्य से हरि गुप्ता की प्रस्तावित टीम में जगह पाने वाले क्लब के सदस्यों ने उक्त कदम उठाया है । मनीष शारदा और इस योजना के रणनीतिकारों को लेकिन पहला झटका यह देख/जान कर लगा कि हरि गुप्ता ने तुरंत ही इस्तीफे स्वीकार कर लिए । मनीष शारदा और इस योजना के रणनीतिकारों को उम्मीद थी कि एकसाथ कई इस्तीफे पा कर हरि गुप्ता घबरा जायेंगे और इस्तीफा न देने के लिए मान-मनौव्वल करेंगे और तब वह हरि गुप्ता से मनीष शारदा की उम्मीदवारी के लिए सौदेबाजी कर लेंगे । लेकिन हरि गुप्ता के रवैये ने उनकी योजना व उम्मीदों पर पानी डाल दिया है । रोटरी क्लब मेरठ महान की इस कार्रवाई से मनीष शारदा की उम्मीदवारी को दूसरा बड़ा झटका यह लगा है कि इस कार्रवाई को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच मनीष शारदा की उम्मीदवारी की कमजोरी के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों का मानना और कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से साफ हो गया है कि मनीष शारदा और उनके समर्थकों ने चुनाव होने से पहले ही अपनी हार स्वीकार कर ली है, और इसी निराशा व बौखलाहट में मनीष शारदा और उनके समर्थक डिस्ट्रिक्ट के बड़े पदाधिकारियों को 'ब्लैकमेल' करने पर उतर आए हैं ।
हरि गुप्ता को दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जाता है, जो रोटरी क्लब मुरादाबाद ब्राइट की तरफ से उम्मीदवार हैं । मुरादाबाद से अकेली उम्मीदवार होने के कारण दीपा खन्ना को मुरादाबाद तथा उसके आसपास के क्लब्स का तो लगभग एकतरफा समर्थन प्राप्त है ही; हरि गुप्ता के समर्थन के चलते खास तौर से मेरठ के और आम तौर से डिस्ट्रिक्ट के अन्य शहरों के क्लब्स का भी समर्थन मिलता दिख रहा है - जिस कारण डिस्ट्रिक्ट के चुनावी खिलाड़ियों को दीपा खन्ना की उम्मीदवारी खासी बढ़त बनाए नजर आ रही है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में आमतौर पर उस उम्मीदवार का पलड़ा भारी हो ही जाता है, जिसके साथ आने वाले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का समर्थन होता है । हरि गुप्ता डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में तो दीपा खन्ना की उम्मीदवारी को लाभ पहुँचाते हुए दिख ही रहे हैं; मेरठ के होने कारण भी उनके समर्थन को दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के लिए महत्त्वपूर्ण माना/समझा जा रहा है । हरि गुप्ता - यानि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट - यदि मेरठ के न होते तो मेरठ के क्लब्स का दीपा खन्ना को वैसा समर्थन न दिलवा पाते जैसा मेरठ के होने के नाते वह अब दिलवा सकते हैं । मनीष शारदा के लिए मुसीबत की बात दरअसल यह हुई कि मेरठ से ही प्रस्तुत शशिकांत गोयल की उम्मीदवारी मेरठ में ही उनके समर्थन आधार को नुकसान पहुँचा रही है । डिस्ट्रिक्ट में हर जगह मनीष शारदा और उनके समर्थकों को सुनने को मिला है कि उनकी उम्मीदवारी को जब मेरठ में ही समर्थन नहीं मिल रहा है, तो दूसरी जगह वह समर्थन की कैसे, क्या और क्यों उम्मीद कर रहे हैं ? मनीष शारदा के लिए फजीहत की बात यह भी बनी हुई है कि मेरठ में चूँकि पहले शशिकांत गोयल की उम्मीदवारी प्रस्तुत हुई थी; इसलिए मेरठ में ही लोगों का कहना/पूछना है कि मेरठ की एकता को तोड़ने का काम मनीष शारदा और उनके क्लब ने ही जब बार बार और जोरशोर से किया है - तब फिर अब वह किस मुँह से मेरठ में अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं ?
उल्लेखनीय है कि हरि गुप्ता के पहले चुनाव में भी मनीष शारदा के क्लब पर हरि गुप्ता की उम्मीदवारी को धोखा देने का आरोप रहा है । पिछले रोटरी वर्ष की ही उस बात को याद करते हुए मेरठ के लोगों का कहना है कि हाल फिलहाल के समय में मनीष शारदा के क्लब ने मेरठ के 'हितों' के खिलाफ ही काम किया है, इसलिए मेरठ के लोगों के बीच उनके प्रति गहरी नाराजगी है और इसी कारण से मेरठ में ही मनीष शारदा की उम्मीदवारी को कोई समर्थन मिलता हुआ नहीं दिख रहा है । उल्लेखनीय है कि मनीष शारदा के क्लब से विरोध सहने और धोखा खाने के बाद भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हरि गुप्ता ने क्लब के कई वरिष्ठ सदस्यों को अपनी प्रस्तावित टीम में प्रमुख जगहें दीं - लेकिन क्लब के लोगों को अपना यह सम्मान भी लगता है कि हजम नहीं हुआ, और उन्होंने हरि गुप्ता की तरफ से हुई एक अच्छी पहल को ही नकार दिया है । मनीष शारदा के क्लब के सदस्यों द्वारा हरि गुप्ता की टीम से इस्तीफे देने की घटना को लेकर डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच जिस तरह की तीखी प्रतिक्रिया हुई है, और लोग जिस एकजुटता के साथ हरि गुप्ता के साथ खड़े नजर आ रहे हैं - उससे मनीष शारदा की उम्मीदवारी को और झटका लगा है । मनीष शारदा और उनके साथियों की इस हरकत के चलते वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जीएस धामा की भी किरकिरी हो रही है । जीएस धामा क्लब के वरिष्ठ सदस्य हैं, और पूर्व गवर्नर के रूप में उनकी अच्छी पहचान है और इसी पहचान के चलते रोटरी क्लब मेरठ महान को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच 'उनके क्लब' के रूप में ही जाना/पहचाना जाता है । लोगों को हैरानी है कि जीएस धामा के होते हुए उनके क्लब की तरफ से आखिर ऐसी हरकतें क्यों हो रही हैं, जिससे क्लब की भी बदनामी हो रही है और मनीष शारदा की उम्मीदवारी को भी खासा नुकसान हो रहा है । मनीष शारदा की उम्मीदवारी को होने वाला यह नुकसान दीपा खन्ना की उम्मीदवारी के लिए वरदान बनता दिख रहा है ।