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Sunday, June 17, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में टीके रूबी को लेकर 'डाउन सिंड्रोम' के शिकार राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स के रवैये को एक बार फिर जाहिर करते हुए शाजु पीटर ने टीके रूबी के डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के आवेदन को चालाकी दिखाते हुए खारिज किया और कई क्लब्स का हक मारा

चंडीगढ़ । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी सुशील गुप्ता की सहमति तथा रोटरी इंटरनेशनल की रीजनल ग्रांट्स ऑफिसर चंद्रा पामर के आदेश के बावजूद डीआरएफसी के रूप में शाजु पीटर ने डिस्ट्रिक्ट ग्रांट 1860814 को स्वीकृति देने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी की माँग को खारिज करके एक बार फिर साबित कर दिया है कि रस्सी जल गई है, पर राजा साबू गिरोह के लोगों का बल अभी भी नहीं गया है - और डिस्ट्रिक्ट में मनमानी लूट-खसोट करने की कोशिशों से वह अभी भी बाज नहीं आ रहे हैं । पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन हाल ही में संपन्न हुए डिस्ट्रिक्ट असेम्बली कार्यक्रम में 'जोर का झटका धीरे से' वाले अंदाज में बता गए हैं कि रोटरी में राजा साबू और उनके डिस्ट्रिक्ट की अब पहले जैसी साख नहीं रह गई है; राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने इस बात को कैसे लिया, यह तो वही जानें, लेकिन शाजु पीटर की कार्रवाई 'बताती' है कि उन्होंने केआर रवींद्रन की 'चेतावनी' भरे तथ्य की परवाह करने की जरूरत नहीं समझी है । अभी हाल ही में, रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने डिस्ट्रिक्ट 3080 के गवर्नर्स को 'सलाह' दी है कि जिन मुद्दों पर उनके बीच मतभेद उभरते हैं, उन्हें आपस में विचार-विमर्श करके स्वयं ही हल करें - लेकिन लगता है कि टीके रूबी को लेकर राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने जिस तरह से अपना मुँह खुद ही नोच नोच कर कर लहुलुहान कर लिया है, उससे उनका मन अभी भी भरा नहीं है और वह अभी अपनी और फजीहत करवाने पर तुले हुए हैं ।
डिस्ट्रिक्ट ग्रांट 1860814 के मामले में शाजु पीटर ने जो रवैया 'दिखाया', उससे एक बार फिर लोगों को यह नजारा देखने को मिला कि टीके रूबी के मामले में राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स में 'डाउन सिंड्रोम' जैसी बीमारी के लक्षण न सिर्फ बने हुए हैं, बल्कि वह बढ़ते ही जा रहे हैं । इस बीमारी के शिकार लोगों में जो मानसिक विकार पैदा होता है, उसमें हालाँकि 'उचित देखभाल' से सुधार किया जा सकता है; लेकिन टीके रूबी को लेकर राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स में जो मानसिक विकार पैदा हुआ है, उसे रोटरी इंटरनेशनल के विभिन्न पदाधिकारियों के द्वारा किये गए 'उपचार' के बावजूद सुधारा नहीं जा सका है । इस बीमारी के शिकार राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने निवर्त्तमान इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म तक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, क्योंकि उन्होंने टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर घोषित कर दिया था । डिस्ट्रिक्ट 3080 में ही नहीं, शायद किसी भी डिस्ट्रिक्ट में पहली बार यह देखने को मिला कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में इंटरनेशनल डायरेक्टर को शामिल होना पड़ा हो, ताकि गवर्नर्स के बीच विचार-विमर्श के जरिये मामलों को हल करने की 'सोच' बन सके । लेकिन बासकर चॉकलिंगम के जरिये रोटरी इंटरनेशनल पदाधिकारियों द्वारा किया गया यह प्रयास भी राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की बीमारी दूर नहीं कर सका । एक सर्वमान्य समझ है कि व्यक्ति ठोकरें खाकर भी सबक सीखता है; टीके रूबी के मामले में राजा साबू और उनके साथी ठोकरों पर ठोकरें खाते रहे हैं लेकिन मजाल है कि उन्होंने कोई सबक सीखा हो । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ने टीके रूबी को 'गिराने' के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से डिस्ट्रिक्ट में तिकड़में कीं, रोटरी इंटरनेशनल में शिकायतें कीं, थाना-कचहरी तक किया - लेकिन इतने सब के बाद भी वह टीके रूबी का कुछ नहीं बिगाड़ पाए हैं । इस असफलता ने लगता है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स की बीमारी को और बढ़ा दिया है, जिसका असर डिस्ट्रिक्ट ग्रांट 1860814 के मामले में शाजु पीटर द्वारा अपनाए गए रवैये में दिखता है ।
शाजु पीटर को उक्त 'बीमारी' ने किस कदर जकड़ा हुआ है, यह इसी से साबित है कि चंद्रा पामर को संबोधित पत्र में शाजु पीटर यह झूठ बोलने में भी नहीं हिचकिचाये कि उक्त ग्रांट का पूरा लाभ टीके रूबी के क्लब को मिलेगा । शाजु पीटर ने अपने इस पत्र में यह जताने का प्रयास किया है कि जैसे वह बहुत नियम-कानून से काम करने वाले व्यक्ति हैं; पर यदि वह सचमुच नियम-कानून से काम करते होते तो वर्ष 2015-16 की जो डिस्ट्रिक्ट ग्रांट उन्होंने अब बंद की है, वह जून 2016 में बंद हो गई होती । जून 2016 में बंद हो जाने वाली डिस्ट्रिक्ट ग्रांट को शाजु पीटर ने यदि दो वर्ष तक खोले रखा है, तो इसमें पीछे उनका वास्तवविक उद्देश्य डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के पैसे को ग्लोबल ग्रांट में ट्रांसफर करवाने की तिकड़म के रूप में देखा गया है । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स ग्लोबल ग्रांट को हड़प कर उससे अपने घूमने/फिरने और अपने संबंध बनाने का काम करने का जुगाड़ बनाये रखने में दिलचस्पी लेते हैं । शाजु पीटर ने जो डिस्ट्रिक्ट ग्रांट अब बंद की है, वह यदि जून 2016 में बंद हो गई होती, तो उसके बाद के दो वर्षों में मंजूर होने वाली डिस्ट्रिक्ट ग्रांट का पैसा क्लब्स को मिलता; लेकिन शाजु पीटर के बेईमानीपूर्ण रवैये से रमन अनेजा और टीके रूबी के गवर्नर-काल में डिस्ट्रिक्ट ग्रांट का पैसा ग्लोबल ग्रांट में ट्रांसफर हो गया है, जो प्रोजेक्ट्स के नाम पर राजा साबू व उनके साथी गवर्नर्स के घूमने/फिरने व संबंध बनाने के काम आयेगा । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी ने एक प्रोजेक्ट के जरिये डिस्ट्रिक्ट ग्रांट का पैसा कुछेक क्लब्स के प्रोजेक्ट्स को दिलवाने का प्रयास किया था, जिसे लेकिन शाजु पीटर ने नियमों का हवाला देकर सफल नहीं होने दिया ।
खास बात यह रही कि शाजु पीटर की आपत्ति को लेकर टीके रूबी ने रोटरी इंटरनेशनल की रीजनल ग्रांट्स ऑफिसर चंद्रा पामर से भी बात की और चंद्रा पामर ने भी माना और कहा कि टीके रूबी की माँग को पूरा किया जा सकता है; पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी सुशील गुप्ता ने भी टीके रूबी के दावे को उचित माना और उसके लिए समर्थन घोषित किया - लेकिन फिर भी शाजु पीटर ने टीके रूबी के आवेदन को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है । ऐसा करते हुए शाजु पीटर को यह भी लगता है कि जैसे उन्होंने टीके रूबी को भी चोट पहुँचाई है । आरोपपूर्ण चर्चा यही है कि शाजु पीटर ने ऐसा इसलिए भी किया है कि टीके रूबी की कोशिशों के चलते डिस्ट्रिक्ट ग्रांट का पैसा यदि क्लब्स को मिल गया तो ग्लोबल ग्रांट के जरिये राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को मिलने वाला पैसा कम पड़ जाता; राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को ग्लोबल ग्रांट में पैसे की कमी न पड़ जाये, इसलिए शाजु पीटर ने चालाकी दिखाते हुए क्लब्स को मिल सकने वाली ग्रांट का पैसा मार लिया है ।

Wednesday, November 1, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में ग्लोबल ग्रांट को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से रमेश अग्रवाल के क्लब के 'पहले' प्रोजेक्ट के दूसरी बार हो रहे उद्घाटन में सुशील गुप्ता की मिलीभगत ने 'वॉश इन स्कूल' प्रोग्राम को ही संदेहास्पद बना दिया है

नई दिल्ली । रमेश अग्रवाल ने अपने क्लब के पहले वॉश इन स्कूल प्रोजेक्ट के तीन नबंवर को होने वाले उद्घाटन का जो निमंत्रण लोगों को दिया है, वह 'वॉश इन स्कूल' प्रोजेक्ट के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी का बड़ा दिलचस्प और गंभीर उदाहरण बन गया है । इस उदाहरण में पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता की मिलीभगत ने मामले को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया है । सुशील गुप्ता और रमेश अग्रवाल चूँकि 'रोटरी इंडिया वॉश इन स्कूल प्रोग्राम' के क्रमशः चेयरमैन और सेक्रेटरी हैं, इसलिए रमेश अग्रवाल के क्लब द्वारा की जा रही धोखाधड़ी ने पूरे प्रोग्राम को ही संदेहास्पद बना दिया है । उल्लेखनीय है कि रमेश अग्रवाल ने अपने क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली अशोका के पहले वॉश इन स्कूल प्रोजेक्ट के उद्घाटन के नाम पर नोएडा के सेक्टर 93 स्थित गेझा गाँव के स्कूल में तीन नबंवर के जिस कार्यक्रम का निमंत्रण लोगों को दिया है, उस प्रोजेक्ट का उद्घाटन तो दो वर्ष पहले, 7 अगस्त 2015 को तत्कालीन इंटरनेशनल प्रेसीडेंट और तत्कालीन इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई कर चुके हैं । निवर्त्तमान इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जोन जर्म जब प्रेसीडेंट इलेक्ट थे, तब रमेश अग्रवाल उन्हें भी इस स्कूल में किए गए अपने क्लब के 'पहले' प्रोजेक्ट का अवलोकन करा चुके हैं । मजे की बात यह है कि गेझा गाँव के स्कूल में रमेश अग्रवाल के क्लब के 'पहले' प्रोजेक्ट का अवलोकन करते जोन जर्म की तस्वीर रमेश अग्रवाल के संपादन में प्रकाशित हो रहे 'रोटरी इंडिया वॉश इन स्कूल प्रोग्राम' के बुलेटिन 'विंस टाइम्स' के मई 2016 के अंक में प्रकाशित भी हो चुकी है ।
दो वर्ष पहले उद्घाटित हो चुके अपने क्लब के 'पहले' वॉश इन स्कूल प्रोजेक्ट का दोबारा उद्घाटन करवाने की जरूरत रमेश अग्रवाल को आखिर क्यों पड़ी ? इस बारे में क्लब के पदाधिकारियों के बीच जो चर्चा है, वह और भी ज्यादा चौंकाने वाली है । क्लब के पदाधिकारियों का ही मानना और कहना है कि दोबारा उद्घाटन का यह नाटक रमेश अग्रवाल को ऑस्ट्रेलियाई डिस्ट्रिक्ट 9810 के क्लब - रोटरी क्लब बॉक्स हिल सेंट्रल के सहयोग से मिली ग्लोबल ग्रांट को ठिकाने लगाने के लिए करना पड़ रहा है । दरअसल ग्लोबल ग्रांट को जस्टिफाई करने के लिए प्रोजेक्ट को वर्ष 2016-17 में पूरा हुआ दिखाना था; लिहाजा रमेश अग्रवाल ने 7 अगस्त 2015 को उद्घाटित हुए प्रोजेक्ट में ही लीपापोती करके उसे और डेकोरेट कर उसे दोबारा उद्घाटन के लिए तैयार कर दिया । मजे की बात यह है कि क्लब के पदाधिकारियों को लेकिन इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि ग्लोबल ग्रांट के तहत इस प्रोजेक्ट के नाम पर कितना पैसा आया है, और वह कहाँ कैसे खर्च हुआ है ? उल्लेखनीय है कि मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम ने निर्देश दिया हुआ है कि डिस्ट्रिक्ट्स में रोटरी के नाम पर चल रहे प्रोजेक्ट्स के हिसाब-किताब की जानकारी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय को दी जानी चाहिए, रमेश अग्रवाल ने लेकिन ग्लोबल ग्रांट के हिसाब-किताब की जानकारी अपने क्लब के पदाधिकारियों तक को नहीं दी है । क्लब के पदाधिकारी इस बात पर भी खफा हैं कि प्रोजेक्ट जब क्लब का है, तो उसके उद्घाटन कार्यक्रम का निमंत्रण उनकी तरफ से जाना चाहिए था, लेकिन रमेश अग्रवाल ने अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए निमंत्रण अपने नाम से भेजा है ।
रमेश अग्रवाल द्वारा अपने क्लब के 'पहले' वॉश इन स्कूल प्रोजेक्ट के दूसरी बार करवाए जा रहे उद्घाटन के मामले में पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता की मिलीभगत ने मामले को और गंभीर बना दिया है । केआर रवींद्रन और मनोज देसाई द्वारा 7 अगस्त 2015 को किए गए उद्घाटन कार्यक्रम में तथा उसके बाद जोन जर्म द्वारा किए गए अवलोकन कार्यक्रम में सुशील गुप्ता भी शामिल तो हुए ही होंगे; न भी हुए हों, तो उन कार्यक्रमों की जानकारी तो उन्हें निश्चित ही होगी; 'विंस टाइम्स' में प्रकाशित तस्वीर भी उन्होंने देखी होगी - उसके बाद भी वह उसी प्रोजेक्ट को दोबारा उद्घाटित करने के लिए आखिर कैसे तैयार हो गए हैं ? गेझा गाँव के स्कूल में रमेश अग्रवाल के क्लब के 'पहले' प्रोजेक्ट का दूसरी बार उद्घाटन करने के लिए सुशील गुप्ता के साथ केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा भी आ रहे हैं । महेश शर्मा को तो रमेश अग्रवाल की इस धोखाधड़ी का पता नहीं होगा, सुशील गुप्ता से तो उम्मीद की जाती है कि उन्हें तो यह पता होना ही चाहिए कि वह जिस प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने के लिए तैयार हो गए हैं, वह दो वर्ष पहले ही उद्घाटित हो चुका है । रोटरी इंडिया विंस प्रोग्राम घपलेबाजियों के आरोपों के घेरे में पहले से ही रहा है; उसके बावजूद लेकिन कोई सपने में भी नहीं सोच सकता था कि प्रोग्राम के सेक्रेटरी रमेश अग्रवाल अपने ही क्लब के प्रोजेक्ट में हेराफेरी के साथ-साथ धोखाधड़ी भी कर लेंगे, और प्रोग्राम के चेयरमैन सुशील गुप्ता आँखें बंद कर उनकी इस धोखाधड़ी में उनका साथ देंगे ।

Monday, October 2, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 के गवर्नर के रूप में टीके रूबी को 'बेस्ट क़्वालीफाइड' घोषित करते हुए रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने पूर्व प्रेसीडेंट राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के जले पर जैसे नमक ही रगड़ दिया है

चंडीगढ़ । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अरुण होनी और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी जितेंद्र ढींगरा के बीच रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को लेकर सोशल मीडिया में चले संक्षिप्त वाक्-युद्ध ने रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के मुँह पर पड़े झन्नाटेदार 'थप्पड़' से पैदा हुए फ्रस्ट्रेशन को सामने लाने का काम किया है । राजा साबू गिरोह के एक सक्रिय सदस्य के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले अरुण होनी ने रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के एक फैसले से परिचित कराते इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इआन रिसले के पत्र को सोशल मीडिया में शेयर करने के जितेंद्र ढींगरा के कदम पर ऐतराज करते हुए टिप्पणी की कि डिस्ट्रिक्ट के आने वाले पदाधिकारी को ऐसा नहीं करना चाहिए । जितेंद्र ढींगरा ने उनकी टिप्पणी के जबाव में उन्हें बताया कि उक्त पत्र को पहले तो आपके ही लोगों ने सोशल मीडिया में शेयर किया है । जितेंद्र ढींगरा के इस जबाव से बेचारे अरुण होनी तो चुप हो गए - लेकिन लोगों के बीच यह सवाल जरूर पैदा हो गया कि राजा साबू गिरोह के 'बड़े लोग' रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को डिस्ट्रिक्ट के लोगों से छिपाना क्यों चाहते हैं ? राजा साबू गिरोह के बड़े नेताओं के लिए बदकिस्मती की बात यह रही कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इआन रिसले के जिस पत्र को वह डिस्ट्रिक्ट के लोगों से छिपाना चाहते थे, उसे उनके ही 'कार्यकर्ताओं' ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुँचा दिया । वैसे इसमें कार्यकर्ताओं की भी कोई गलती नहीं थी - बड़े नेताओं ने अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच इस बात का दावा किया कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने टीके रूबी से अंडरटेकिंग ली है और इस तरह उनके खिलाफ फैसला दिया है; कार्यकर्ता बेचारे मासूमियत से भरे मूर्ख किस्म के लोग हैं; उन्होंने अपने बड़े नेताओं की 'बात' पर भरोसा किया और जोश में आकर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इआन रिसले के पत्र को सोशल मीडिया में चिपका दिया । जितेंद्र ढींगरा ने जब देखा कि उक्त पत्र को चिपकाने की गंगा बह ही रही है, तो उन्होंने भी उसमें हाथ 'धो' लिए ।
राजा साबू गिरोह के गवर्नर्स के लिए उक्त पत्र सार्वजनिक होने से समस्या की बात यह हुई है कि टीके रूबी से अंडरटेकिंग लिए जाने की बात को लेकर गवर्नर्स के लिए मनमाना झूठ बोलने का मौका अब नहीं बचा है । इआन रिसले के पत्र के अनुसार, टीके रूबी ने इंटरनेशनल बोर्ड को लिख कर दिया है कि वह डिस्ट्रिक्ट में सभी को लेकर काम करेंगे और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग बुलायेंगे तथा उसमें इंटरनेशनल डायरेक्टर बासकर चॉकलिंगम को भी आमंत्रित करेंगे । इसमें भला ऐसी  क्या बात है जो टीके रूबी अभी तक नहीं कर रहे थे, या जिसे करने से वह इंकार कर रहे थे ? उल्लेखनीय है कि गवर्नर के रूप में काम करना शुरू करते ही टीके रूबी ने सबसे पहले पूर्व गवर्नर्स से विभिन्न जिम्मेदारियों में शामिल होने के लिए अनुरोध किया - लेकिन किसी ने उनके अनुरोध का जबाव तक नहीं दिया, और किसी ने बहानेबाजी से अनुरोध स्वीकार करने से इंकार कर दिया । राजा साबू के क्लब के पदाधिकारी तो अभी तक डिस्ट्रिक्ट के किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए हैं, और इस कारण से क्लब के पदाधिकारी के रूप में अधिकृत रूप से मान्य नहीं हैं । टीके रूबी ने पिछले वर्षों में डिस्ट्रिक्ट तथा अन्य प्रोजेक्ट्स में हिसाब-किताब में गड़बड़ी के आरोपों के चलते हुई डिस्ट्रिक्ट और रोटरी की बदनामी को देखते हुए हिसाब-किताब दुरुस्त करने के प्रयास शुरू किए -  तो राजा साबू से लेकर यशपाल दास, मधुकर मल्होत्रा, रमन अनेजा तक उनके प्रयासों को सफल करने में सहयोग करने की बजाए विफल करने में जुट गए और लोगों को बरगलाने वाली बयानबाजी करने लगे । ऐसे में, इआन रिसले के पत्र के अनुसार टीके रूबी को जो काम सौंपे गए हैं, या जिन कामों को करने के लिए टीके रूबी ने अंडरटेकिंग दी है - उससे तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में टीके रूबी के ही हाथ मजबूत हुए हैं, और उनके लिए बेईमान गवर्नर्स की गर्दन दबोचना और आसान हो गया है ।
गौर करने की बात यह है कि निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा के नेतृत्व में राजा साबू सहित पूर्व गवर्नर्स ने तथा छह क्लब्स के प्रेसीडेंट्स ने रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड को जो पत्र भेजा था, उसमें निवर्त्तमान इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जोन जर्म द्वारा टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गयी थी । इन्हीं लोगों द्वारा पिछले दिनों डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच इस बात को जोरशोर से प्रचारित किया गया कि टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नियुक्त करके जोन जर्म ने रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा पहले लिए गए फैसले का उल्लंघन किया है, इसलिए अपनी शिकायत में उन्होंने इसी तथ्य को मुद्दा बनाया है - और लोगों को बताया कि देखियेगा, इंटरनेशनल बोर्ड जोन जर्म के फैसले को पलट देगा, यानि टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से हटा देगा । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने लेकिन जो फैसला दिया है, वह वास्तव में राजा साबू तथा उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के मुँह पर ऐसा झन्नाटेदार तमाचा है जिसकी गूँज सिर्फ डिस्ट्रिक्ट 3080 के लोगों के बीच ही नहीं, बल्कि पूरे रोटरी जगत में सुनी गई है । रोटरी के कई बड़े नेताओं ने इन पँक्तियों के लेखक से बात करते हुए कहा है कि टीके रूबी के मामले में इंटरनेशनल बोर्ड की तरफ से इस बार राजा साबू की जैसी फजीहत हुई है, इससे पहले किसी पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट की नहीं हुई है ।
मजे की बात यह हुई है कि राजा साबू गिरोह की तरफ से की गई शिकायत पर इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले से अवगत करवाते हुए दो पत्र सामने आये हैं - 29 सितंबर के पत्र में तो शिकायतकर्ताओं के जले पर नमक रगड़ते हुए बताया है कि जोन जर्म ने टीके रूबी के रूप में एक 'बेस्ट क़्वालीफाइड' व्यक्ति को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनाया है । समझा जाता है कि पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होने का वास्ता देकर राजा साबू ने जले पर नमक रगड़ते उक्त पत्र पर  रोना-धोना मचाया होगा, जिसके बाद 30 सितंबर को दूसरा संशोधित पत्र सामने आया - जिसमें लीपापोती-सी करते हुए राजा साबू और उनके गिरोह के सदस्यों को थोड़ी राहत देने की कोशिश तो की गई है, लेकिन इस कोशिश ने वास्तव में टीके रूबी को राजा साबू गिरोह के गवर्नर्स की गर्दन और ज्यादा सख्ती से दबोचने का मौका दे दिया है । राजा साबू और उनके गिरोह के गवर्नर्स के लिए मुसीबत को लगातार बढ़ाने वाली बात यह हुई है कि वह जितना ही टीके रूबी को दबाने की कोशिश करते हैं, टीके रूबी उतने ही और ज्यादा ताकतवर 'बन' जाते हैं । सोशल मीडिया में इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को लेकर पूर्व गवर्नर अरुण होनी को एक घुड़की में ही जितेंद्र ढींगरा ने जिस तरह से चुप कर दिया, उससे राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की बेचारगी को पहचाना जा सकता है ।

Saturday, August 26, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में टीके रूबी को गवर्नर बनाए जाने के फैसले से खफा राजा साबू ने निर्णय लेने की जॉन जर्म की क्षमताओं और नीयत पर सवाल उठा कर खुद को रोटरी से ऊपर और बड़ा दिखाने की कोशिश की है क्या ?

चंडीगढ़ । टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर घोषित करने के निवर्तमान इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म के फैसले को चुनौती देते हुए राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स द्वारा लिखे/ भेजे गए पत्र को आज ठीक एक महीना हो गया है, लेकिन रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय में किसी ने उसका कोई संज्ञान तक नहीं लिया है - इससे साबित है कि रोटरी इंटरनेशनल में राजा साबू का सारा 'राजा-पना' पूरी तरह झड़ चुका है । राजा साबू का राजा-पना तो हालाँकि जून माह के तीसरे सप्ताह में तभी झड़ गया था, जब इंटरनेशनल प्रेसीडेंट के रूप में जॉन जर्म ने डिस्ट्रिक्ट 3080 के वर्ष 2017-18 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए टीके रूबी के नाम की घोषणा की थी । रोटरी इंटरनेशनल के मौजूदा सत्ता-समीकरणों को जानने/पहचानने वाले वरिष्ठ रोटेरियंस का कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल में राजा साबू की यदि जरा सी भी - जरा सी भी 'इज्जत' बची होती, तो टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुनने का फैसला न हुआ होता । यह फैसला राजा साबू की खासी फजीहत करने वाला फैसला था । रोटरी के अधिकतर बड़े नेताओं को जॉन जर्म के इस फैसले में 'भिगो कर जूता मारने' वाली कहावत चरितार्थ होते हुए दिखी । कुछेक लोगों ने इस फैसले को 'पोएटिक जस्टिस' के नायाब उदाहरण के रूप में भी देखा/पहचाना । टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर घोषित करने के जॉन जर्म के फैसले में राजा साबू के लिए जो 'संदेश' था, उसे दूसरों के साथ-साथ राजा साबू ने भी 'पढ़' लिया था - और यही कारण रहा कि वह समझ ही नहीं पाए कि अपनी इस सार्वजनिक दुर्गति पर कैसे रिएक्ट करें ?
दीये में जब तेल खत्म हो रहा होता है और लौ बुझने को होती है, तब लौ बड़ी तेजी से भभकती है और यह आभास देने की कोशिश करती है कि वह बुझ नहीं रही है बल्कि और तेजी से चमकेगी - लेकिन भभकते भभकते ही वह बुझ जाती है । रोटेरियन और रोटरी लीडर के रूप में राजा साबू की भी यही दशा हो रही है - टीके रूबी को लेकर फरवरी 2015 से शुरू हुए घटना चक्र के अभी तक के 30 महीनों में घटी घटनाओं को देखें, तो राजा साबू को डिस्ट्रिक्ट से लेकर इंटरनेशनल बोर्ड तक में हर जगह लगातार मात पर मात मिली है; जॉन जर्म के फैसले से उनकी मात पर अंतिम मुहर भी लग गई है - लेकिन राजा साबू फिर भी भभक भभक उठ रहे हैं । मजे की बात है कि राजा साबू ने हाल ही में क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को लिखे पत्र में नसीहत दी है कि रोटरी को 'गुरु' के तथा एक टीचर के रूप में देखना चाहिए और रोटरी की वैल्यूज पर विश्वास करना चाहिए - पर इस नसीहत पर वह खुद अमल करते हुए नहीं दिखते हैं । 'कहना कुछ और करना कुछ' की तर्ज पर राजा साबू के व्यक्तित्व और व्यवहार का दोगलापन लोग हालाँकि पहले से देखते रहे हैं, लेकिन ज्यादा मुखर होकर यह अब रेखांकित हुआ है । क्लब्स के प्रेसीडेंट्स को रोटरी की वैल्यूज पर विश्वास रखने की नसीहत देने वाले राजा साबू ने रोटरी की यह 'वैल्यू' कहाँ और कब सीखी कि एक पूर्व प्रेसीडेंट के रूप में वह मौजूदा प्रेसीडेंट और इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले पर ऊँगली उठाएँ ?
रोटरी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि एक पूर्व प्रेसीडेंट रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड और प्रेसीडेंट के फैसले की आलोचना कर रहा है । उल्लेखनीय है कि किसी भी समाज और संगठन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह जरूरी माना जाता है कि सबसे बड़ी इकाई (बॉडी) द्वारा लिए गए फैसले को स्वीकार करना ही होता है । सुप्रीम कोर्ट का फैसला किसी को भले ही न्याय करता हुआ न लगे, लेकिन फिर भी उसे मानना ही होता है । जिम्मेदार लोगों से उम्मीद की जाती है कि वह उस फैसले को शिष्टता और गरिमा के साथ स्वीकार करें । रोटरी में सर्वोच्च इकाई इंटरनेशनल बोर्ड है और सर्वोच्च पद प्रेसीडेंट है । रोटरी की तमाम वैल्यूज में एक यह भी है कि इनके फैसले को चेलैंज नहीं किया जा सकता है । डीसी बंसल ने इनके फैसले को चेलैंज किया तो उन्हें रोटरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है । रोटरी की वैल्यूज डीसी बंसल के लिए और राजा साबू के लिए अलग अलग हैं क्या ? कोई तर्क दे सकता है कि इंटरनेशनल बोर्ड और प्रेसीडेंट के फैसले के खिलाफ डीसी बंसल 'रोटरी के बाहर' गए, इसलिए उन्हें रोटरी से बाहर कर दिया गया है; राजा साबू तो रोटरी के भीतर ही अपनी बात कह रहे हैं । यह तर्क लेकिन इस तथ्य की अनदेखी करता है कि रोटरी में ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है, जिसमें इंटरनेशनल बोर्ड और प्रेसीडेंट के फैसले के खिलाफ कुछ किया/कहा जा सके । इस व्यवस्था के अभाव के कारण ही डीसी बंसल को रोटरी के बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा । डीसी बंसल का मुख्य गुनाह यह है कि इंटरनेशनल बोर्ड और प्रेसीडेंट के जिस अंतिम फैसले को सम्मान और गरिमा के साथ स्वीकार करने की 'वैल्यू' का पालन करने की उम्मीद की जाती है, वह उसमें फेल हुए । राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स भी इस 'वैल्यू' का पालन नहीं कर रहे हैं - तो उनका गुनाह कम कैसे हो गया ?
रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड और प्रेसीडेंट के अंतिम फैसले को डीसी बंसल स्वीकार नहीं कर सके, यह बात तो फिर भी समझ में आती है; लेकिन उस फैसले से राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स को 'आहत' क्यों होना चाहिए - वह उस अंतिम फैसले को सम्मान और गरिमा के साथ क्यों स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं ? क्या यह इस बात का सुबूत नहीं है कि राजा साबू और उनके साथी गवर्नर्स अपने आप को रोटरी से ऊपर समझ रहे हैं, और उन्हें यह बात हजम नहीं हो रही है कि फरवरी 2015 में हुए चुनाव में टीके रूबी को मिली जीत को तरह तरह की प्रपंचबाजी से हार में बदलने की उनकी सारी कोशिशें आखिर फेल कैसे हो गईं और उनके न चाहने के बावजूद टीके रूबी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कैसे बन गए ? इंटरनेशनल प्रेसीडेंट को संबोधित राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स द्वारा लिखे/भेजे गए पत्र को देखने/पढ़ने वाले लोगों में से जिस किसी से भी इन पँक्तियों के लेखक की बात हो सकी है, उन सभी ने माना और कहा है कि पत्र में इस्तेमाल हुए शब्द, पत्र की भाषा और भाषा का तेवर राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स के फ्रस्ट्रेशन और उनके अहंकार को प्रदर्शित करता है । यह पत्र न केवल निवर्तमान प्रेसीडेंट जॉन जर्म की क्षमताओं तथा उनकी नीयत के प्रति संदेह जताता है, बल्कि मौजूदा प्रेसीडेंट ईयान रिसले के प्रति भी किंचित अभद्रता  प्रकट करता है । राजा साबू के इस रवैये ने लोगों को हैरान किया है । इससे पहले किसी पूर्व प्रेसीडेंट ने मौजूदा प्रेसीडेंट के साथ/प्रति इस तरह की हरकत नहीं की है । इसे राजा साबू के राजा-पने के भभकने के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । रोटरी में राजा साबू के राजा-पने की क्या हैसियत रह गई है, यह इससे भी साबित है कि 27 जुलाई के उक्त पत्र को लिखे/भेजे आज ठीक एक महीना हो गया है - लेकिन रोटरी इंटरनेशनल में उसका किसी ने संज्ञान तक नहीं लिया है । राजा साबू से हमदर्दी रखने वाले लोगों को राजा साबू की इस दशा पर दया भी आ रही है; उनका कहना है कि राजा साबू को समझ लेना चाहिए कि पहले की तरह अब उनकी मनमानियाँ नहीं चल सकेंगी । कुछेक लोगों का तो कहना है कि अपने भाषणों और अपने पत्रों में राजा साबू दूसरों को जो नसीहतें देते रहते हैं, उन पर कभी खुद भी अमल कर लिया करें; और रोटरी की वैल्यूज पर खुद भी विश्वास करना सीखें !

Friday, June 30, 2017

रोटरी इंटरनेशनल के बड़े नेताओं को डॉक्टरेट की 'टोपी' पहना पहना कर रोटरी में ऊँचा उठने का अशोक गुप्ता का फार्मूला, इंटरनेशनल डायरेक्टर के चुनाव में भी उनके काम आएगा क्या ?

जयपुर । राजेंद्र उर्फ राजा साबू को अपने ही डिस्ट्रिक्ट के मामले में रोटरी इंटरनेशनल पदाधिकारियों से जो झटका लगा है, उससे अशोक गुप्ता को इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने की अपनी राजनीति आसान होती हुई दिख रही है । उल्लेखनीय है कि जोन 4 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए होने वाले चुनाव में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू का समर्थन भरत पांड्या को मिलने की चर्चा है, और यही चर्चा अशोक गुप्ता के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है । अशोक गुप्ता को पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता के समर्थन की बात सुनी/कही तो जाती है, लेकिन सुशील गुप्ता के बहुत ही खासमखास के रूप में देखे/पहचाने जाने वाले रंजन ढींगरा की उम्मीदवारी अशोक गुप्ता को सुशील गुप्ता का समर्थन मिल सकने की बात को संदेहास्पद बनाती है । किसी भी बड़े नेता के साफ समर्थन के अभाव में अशोक गुप्ता को इंटरनेशनल डायरेक्टर के चुनाव में सिर्फ इस कारण से उम्मीद है कि पिछले वर्षों में उन्होंने रोटरी के जिन बड़े नेताओं को 'टोपी' पहनाई है, वह उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने में उनकी मदद करेंगे । ध्यातव्य है कि अशोक गुप्ता ने रोटरी में ऊँचा उठने के लिए एक बहुत आसान रास्ता अपनाया हुआ है - जिसमें वह रोटरी के बड़े नेताओं को अपनी यूनिवर्सिटी में डॉक्टरेट की 'टोपी' पहना देते हैं । उनका यह फार्मूला हिट भी है - रोटरी का जो बड़ा नेता उनकी टोपी पहन लेता है, वह तो उनका अहसान उतारने की कोशिश में उनके काम आता ही है; दूसरे बड़े नेता भी उनको इस उम्मीद में तवज्जो देने लगते हैं कि उनकी तवज्जो से खुश होकर अशोक गुप्ता किसी वर्ष उनके सिर को भी डॉक्टरेट की टोपी पहना देंगे ! टोपीबाजी से अशोक गुप्ता रोटरी में कुछेक असाइनमेंट पाने में चूँकि सफल रहे हैं, इसलिए उन्हें उम्मीद रही है कि टोपीबाजी के इसी खेल से वह इंटरनेशनल डायरेक्टर भी बन जायेंगे ।
किंतु राजा साबू उनकी इस उम्मीद को ध्वस्त करते दिखे हैं । बेचारे अशोक गुप्ता ने तो उन्हें भी डॉक्टरेट की टोपी पहनाई हुई है, लेकिन अशोक गुप्ता ने पाया/देखा है कि राजा साबू ने उनकी पहनाई टोपी की लाज नहीं रखी है - और इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में वह उनकी बजाए भरत पांड्या के समर्थन में दिख रहे हैं । राजा साबू की तरफ से दिखी इस अहसानफरामोशी ने अशोक गुप्ता को बुरी तरह आहत और क्रोधित किया हुआ था । दरअसल इसीलिए राजा साबू को अपने ही डिस्ट्रिक्ट के मामले में रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों से झटका मिलने की खबर ने अशोक गुप्ता को उत्साहित किया है । उल्लेखनीय है कि राजा साबू को पहले तो यह जानकार झटका लगा कि रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय उनके डिस्ट्रिक्ट में वर्ष 2017-18 के गवर्नर पद पर टीके रूबी को नियुक्त कर रहा है; राजा साबू ने इस फैसले को बदलवाने के लिए अपना सारा जोर लगा दिया - लेकिन यह देख कर उनकी सारी 'हवा' निकल गयी कि उनके डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तय करने के मामले में उनकी राय/सलाह को किसी ने भी तवज्जो नहीं दी । अशोक गुप्ता को लगता है कि राजा साबू को अपने ही डिस्ट्रिक्ट के मामले में यह जो जोर का झटका लगा है, उसका असर इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में उनकी भूमिका पर भी पड़ेगा - और राजा साबू अब भरत पांड्या के लिए कुछ कर नहीं पायेंगे । अशोक गुप्ता के नजदीकियों का मानना और कहना है कि राजा साबू जब अपना 'जरूरी' काम नहीं करवा सके, तो वह भरत पांड्या के लिए क्या कर/करवा सकेंगे ?
अशोक गुप्ता के नजदीकियों के अनुसार, अशोक गुप्ता इस संयोग पर भी खुश हैं और इसे अपने लिए एक शुभ-संकेत के रूप में देख रहे हैं कि राजा साबू की फजीहत करने/करवाने में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म को भी पिछले दिनों उन्होंने डॉक्टरेट की टोपी पहना/पहनवा दी थी । हालांकि रोटरी के जोन 4 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में जॉन जर्म की कोई सीधी भागीदारी और या भूमिका नहीं है, लेकिन उनके हाथों राजा साबू की जो फजीहत हुई है - उसके चलते वह राजा साबू के विरोधियों के भावनात्मक 'सहयोगी' तो बन ही गए हैं । अशोक गुप्ता को उम्मीद बनी है कि जॉन जर्म को डॉक्टरेट की टोपी पहनाने के चलते - जॉन जर्म के भावनात्मक सहयोगी बने राजा साबू विरोधी लोग इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में उनके मददगार बनेंगे । कई लोगों को लेकिन यह भी लगता है कि अपने डिस्ट्रिक्ट के मामले में राजा साबू को भले ही तगड़ा वाला झटका लगा हो, लेकिन रोटरी की चुनावी राजनीति से उन्हें पूरी तरह बाहर हुआ नहीं मान लेना चाहिए; जोन 4 के डिस्ट्रिक्ट्स में राजा साबू के भक्तों की अभी भी कमी नहीं है - और इसलिए जोन 4 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में उनकी भूमिका को कम नहीं आँकना चाहिए ।
जोन 4 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में राजा साबू की भूमिका कितनी क्या रहती है, यह तो आने वाले दिनों में पता चल ही जायेगा - लेकिन इससे भी ज्यादा यह देखना दिलचस्प होगा कि अशोक गुप्ता ने रोटरी के बड़े नेताओं को डॉक्टरेट की टोपी पहना पहना कर रोटरी में ऊँचा उठने का जो फार्मूला अपनाया है, वह इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने में उनके काम आता है या नहीं ?
अशोक गुप्ता की डॉक्टरेट की 'टोपी' पहने हुए राजा साबू, कल्याण बनर्जी तथा एक अन्य पूर्व प्रेसीडेंट :

Wednesday, June 21, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में अगले रोटरी वर्ष की कमान टीके रूबी को सौंप कर रोटरी इंटरनेशनल ने राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स को सीधा झटका दिया है क्या ?

चंडीगढ़ । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म ने डिस्ट्रिक्ट 3080 में अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की जिम्मेदारी सँभालने के लिए टीके रूबी को चुन कर पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू सहित डिस्ट्रिक्ट के अन्य पूर्व गवर्नर्स के लिए खासी फजीहत की स्थिति पैदा कर दी है । डिस्ट्रिक्ट में ही नहीं, डिस्ट्रिक्ट के बाहर के कई रोटरी नेताओं का भी कहना है कि जॉन जर्म के इस फैसले में उन्हें 'भिगो कर जूता मारने' वाली कहावत चरितार्थ होते दिखी है । कुछेक लोग इस फैसले को 'पोएटिक जस्टिस' के नायाब उदाहरण के रूप में भी देख रहे हैं । गौरतलब है कि फरवरी 2015 में हुए फैसले में राजा साबू के दिशा-निर्देश पर अड़ंगा डालने की कोशिश नहीं हुई होती, तो अगले रोटरी वर्ष में टीके रूबी ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनते । टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने से रोकने के लिए राजा साबू के नेतृत्व में पूर्व गवर्नर्स ने पिछले दो वर्षों में लगातार जिस तरह का 'नंगा नाच' किया, उसके बावजूद अगले रोटरी वर्ष में टीके रूबी के ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की घोषणा ने उनके लिए बहुत ही शर्मनाक स्थिति पैदा कर दी है ।
मजे की बात यह है कि टीके रूबी को अगले रोटरी वर्ष का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'चुनने' के जॉन जर्म के फैसले ने जितना हैरान डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स तथा उनके नजदीकियों को किया है, उतना ही चकित टीके रूबी के समर्थकों व शुभचिंतकों को भी किया हुआ है । किसी के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि यह आखिर हुआ क्या और कैसे ? यह बात सचमुच किसी चमत्कार से कम नहीं है कि अगले रोटरी वर्ष की गवर्नरी तो प्रवीन चंद्र गोयल को एक वर्ष पहले 'खींच' कर सौंप दी गयी थी, और उनकी स्कूलिंग भी करवा दी गयी थी; उससे अगले वर्ष के गवर्नर के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, जिसमें टीके रूबी के उम्मीदवार बनने पर भी रोक लगा दी गयी थी - किंतु अब फैसला यह हुआ है कि टीके रूबी अगले रोटरी वर्ष में गवर्नर होंगे । डिस्ट्रिक्ट के लोगों के लिए यह चमत्कार भले ही एक पहेली बना हुआ हो, किंतु रोटरी के बड़े नेताओं के अनुसार - रोटरी इंटरनेशनल के मौजूदा पदाधिकारी राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स की लगातार चलने वाली चालबाजियों से इतने परेशान हो उठे थे कि उन्होंने उन्हें उनकी औकात दिखाने की योजना बना ली, जिसके तहत उन्होंने टीके रूबी रूपी छड़ी से ही राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को 'पीटने' का निश्चय कर लिया ।
देश के वरिष्ठ रोटरी नेताओं के हवाले से सुनने को मिला है कि फरवरी 2015 में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में टीके रूबी की जीत के हुए फैसले को उलटवाने के लिए करीब दो वर्षों तक चले घटनाचक्र में ही नहीं, उसके बाद भी राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों ने जिस तरह की कारस्तानियाँ कीं और रोटरी इंटरनेशनल की व्यवस्थाओं तथा उसके फैसलों का मजाक बनाने की जिस तरह की कोशिश की - उससे इंटरनेशनल पदाधिकारी बुरी तरह आजिज़ आ चुके थे । उल्लेखनीय है कि रोटरी इंटरनेशनल ने डिस्ट्रिक्ट 3080 के झगड़े को खत्म करने के लिए टीके रूबी और डीसी बंसल, दोनों को ही 'सजा' दे दी; और अगले रोटरी वर्ष के गवर्नर पद के लिए फैसला करने का अधिकार डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप - यानि राजा साबू पर छोड़ दिया । यह डिस्ट्रिक्ट की लीडरशिप का ही फैसला था, जिसके तहत प्रवीन चंद्र गोयल एक वर्ष पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'बन' रहे थे; और वह जिस वर्ष के गवर्नर चुने गए थे, उस वर्ष के गवर्नर के लिए चुनाव घोषित हो गए थे । तीसरे वर्ष के गवर्नर पद के लिए जितेंद्र ढींगरा की चुनावी जीत को राजा साबू ने 'स्वीकार' कर लिया था । इससे लगा था कि डिस्ट्रिक्ट पटरी पर लौट रहा है; लेकिन फिर अचानक से डीसी बंसल न्याय पाने के लिए अदालत चले गए, जिससे डिस्ट्रिक्ट में पुनः उथल-पुथल मच गयी ।
डीसी बंसल के अदालत जाने के चलते जो उथल-पुथल मची, उसके चलते प्रवीन चंद्र गोयल ने पुनः 'अपने' ही वर्ष में गवर्नरी करने की अर्जी लगा दी । प्रवीन चंद्र गोयल की इस उछल-कूद को इंटरनेशनल पदाधिकारियों ने गंभीरता से लिया और माना कि प्रवीन चंद्र गोयल और उनके आकाओं ने रोटरी को मजाक समझ लिया है और मनमानी करने के लिए वह कभी कुछ तो कभी कुछ कहते/करते हैं । रोटरी नेताओं ने उनकी इस हरकत से माना/समझा कि डीसी बंसल की अदालती कार्रवाई के पीछे राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों का ही हाथ है; राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को अच्छी तरह पता था कि अदालती कार्रवाई से डीसी बंसल को तो कुछ नहीं मिलेगा, लेकिन उससे जो उथल-पुथल मचेगी - उसमें उन्हें अगले दो वर्ष डिस्ट्रिक्ट पर राज करने के लिए मिल जायेंगे । राजा साबू और उनके गिरोह के लोगों को विश्वास था कि प्रवीन चंद्र गोयल को उनके 'असली' वर्ष में शिफ्ट करवा कर, अगले रोटरी वर्ष में वह अपने किसी मनपसंद व्यक्ति को गवर्नर 'बनवा' लेंगे - और इस तरह अगले दो वर्ष वही डिस्ट्रिक्ट को चलायेंगे, और इन दो वर्षों में वह जितेंद्र ढींगरा को भी अपने रंग में रंग लेंगे । राजा साबू के नजदीकियों के अनुसार, राजा साबू को जितेंद्र ढींगरा अपने नजदीक आते हुए 'दिखे' भी । समझा जाता है कि डीसी बंसल की अदालती कार्रवाई और प्रवीन चंद्र गोयल की कभी 'इस' वर्ष तो कभी 'उस' वर्ष गवर्नरी करने के बदलते फैसलों ने इंटरनेशनल पदाधिकारियों को ऐसा फैसला लेने के लिए मजबूर कर दिया, जो राजा साबू और उनके साथी पूर्व गवर्नर्स की नाक में नकेल डालने वाला 'लगे' - और ऐसे ही फैसले में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म को अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट 3080 की कमान टीके रूबी को सौंपना उचित लगा ।
अगले रोटरी वर्ष के लिए डिस्ट्रिक्ट की कमान टीके रूबी को सौंपने के जॉन जर्म के फैसले से यह बात बहुत ही साफ तौर पर साबित हुई है कि रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी राजा साबू की हरकतों से बुरी तरह से परेशान हैं । अगले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को लेकर पिछले 28 महीनों से चले आ रहे झंझट में रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारी राजा साबू को हालाँकि झटका भी दे रहे थे, लेकिन उन्हें और उनके सम्मान को बचाने का प्रयास भी कर रहे थे; राजा साबू लेकिन इस संकेत को समझने/पहचानने में चूक गए और उन्होंने अपनी हरकतों को लगातार जारी रखा । राजा साबू का रवैया और व्यवहार इंटरनेशनल पदाधिकारियों के लिए जब असहनीय हो गया, तो उन्होंने राजा साबू को सीधा झटका देने का निश्चय किया - और उनके इसी निश्चय की परिणति टीके रूबी को अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट की कमान सौंपने की घोषणा में हुई है ।

Wednesday, November 16, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 के 'गवर्नर इलेक्ट' दिनेश शर्मा को सबक सिखाने की कोशिश में इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई क्या सचमुच मामले को सुलझने नहीं देंगे ?

सिकंदराबाद । दिनेश शर्मा के प्रति इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के रवैये के कारण डिस्ट्रिक्ट 3100 का संकट मौजूदा रोटरी वर्ष में हल होता हुआ नहीं दिख रहा है । हालाँकि यूँ तो डिस्ट्रिक्ट 3100 में परिस्थितियाँ पटरी पर लौटती नजर आ रही हैं - रोटरी इंटरनेशनल के विशेष प्रतिनिधि संजय खन्ना की कोशिशों से अधिकतर क्लब्स के ड्यूज जमा हो गए हैं, मैचिंग ग्रांट्स पर लगी बंदिश रोटरी इंटरनेशनल द्धारा हटा ली गई है, रोटरी इंटरनेशनल के खिलाफ किए गए मुकदमे को वापस ले लिया गया है, डिस्ट्रिक्ट को बबाल-मुक्त बनाने के लिए डिस्ट्रिक्ट के नियम-कानूनों में आवश्यक सुधार व फेरबदल करने को लेकर पूर्व गवर्नर्स के बीच सहमति बन गई है, आदि-इत्यादि । इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म से डिस्ट्रिक्ट 3100 से जुड़े मामलों को लेकर जब भी कोई बात पूछी/बताई जाती है, तो उनकी तरफ से तुरंत जबाव या प्रतिक्रिया मिलती है - जिससे 'पता' चलता है कि डिस्ट्रिक्ट 3100 के मामले को उन्होंने अपनी प्राथमिकता में रखा हुआ है । इन बातों व तथ्यों को सकारात्मक रूप से लिया जा रहा है, और इनके आधार पर उम्मीद की जा रही है कि इस वर्ष के अंत तक डिस्ट्रिक्ट को नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस से बाहर निकाल दिया जायेगा - और डिस्ट्रिक्ट पुनः पहले की तरह से अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ काम शुरू कर सकेगा ।
मनोज देसाई के रवैये ने लेकिन इस उम्मीद पर ग्रहण लगाया हुआ है । मनोज देसाई के रवैये ने दरअसल इस सवाल पर विवाद खड़ा कर दिया है कि नॉन डिस्ट्रिक्ट स्टेटस से बाहर आने के बाद अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट का गवर्नर कौन होगा ? उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट में यदि बबाल पैदा नहीं हुआ होता, तो दिनेश शर्मा इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के पद पर होते - और इस नाते से वह स्वाभाविक रूप से अपने आप को अगले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में देखते हैं । डिस्ट्रिक्ट 3100 के दूसरे लोग भी इस वर्ष के अंत तक संकट हल हो जाने की स्थिति में अगले रोटरी वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दिनेश शर्मा को ही 'देख' रहे हैं । वास्तव में किसी को भी दिनेश शर्मा के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने को लेकर शक नहीं है । किंतु मनोज देसाई के रवैये ने यह शक पैदा कर दिया है । बात यह नहीं है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर तथा दुबई में हो रहे रोटरी जोन इंस्टीट्यूट के कन्वेनर के रूप में मनोज देसाई ने दिनेश शर्मा को आधिकारिक रूप से शामिल होने की अनुमति नहीं दी है - मनोज देसाई को यह अनुमति देने का अधिकार है भी नहीं । तकनीकी आधार पर जब डिस्ट्रिक्ट ही 'डिस्ट्रिक्ट' नहीं है, तो दिनेश शर्मा भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट नहीं हैं - और इस नाते से वह आधिकारिक रूप से इंस्टीट्यूट में शामिल होने के अधिकारी नहीं हैं । इस बात को लेकर किसी को भी न तो कोई शक है, और न शिकायत है । लेकिन इस सामान्य सी नियमपूर्ण बात को मनोज देसाई ने यह कहते हुए काफी पेचीदा बना दिया है कि गवर्नर इलेक्ट के लिए होने वाले ट्रेनिंग सेमीनार में शामिल हुए बिना दिनेश शर्मा गवर्नर आखिर कैसे बन सकेंगे ?
मनोज देसाई ने एक सामान्य सी बात को पेचीदा बना देने की जो कोशिश की है, उसके कारण डिस्ट्रिक्ट 3100 में सामान्य होती स्थितियों को ग्रहण लग गया है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट के नॉन-डिस्ट्रिक्ट स्टेटस से बाहर आने के बाद यदि दिनेश शर्मा गवर्नर नहीं बने, तो डिस्ट्रिक्ट एक बार फिर से बबाल में फँसेगा । डिस्ट्रिक्ट में जो लोग मनोज देसाई के नजदीक हैं या जिनकी इन दिनों उनसे बातें हो रही हैं, उनके हवाले से सुनने को मिल रहा है कि मनोज देसाई दरअसल दिनेश शर्मा से बहुत ही बुरी तरह से नाराज हैं । दिनेश शर्मा ने पिछले दिनों मनोज देसाई के खिलाफ काफी कुछ बातें कहीं, जो लगता है कि मनोज देसाई तक जा पहुँची हैं - और समझा जाता है कि उन्हीं बातों के चलते मनोज देसाई ने दिनेश शर्मा को सबक सिखाने की ठान ली है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 3100 के मामले में मनोज देसाई की भूमिका शुरू से ही आरोपों के घेरे में रही है और यहाँ के झगड़ों को हवा देकर भड़काने में उनकी भूमिका को पिछले रोटरी वर्ष के शुरू से ही चिन्हित किया जाता रहा है । कई लोगों का मानना और कहना है कि मनोज देसाई के इंटरनेशनल डायरेक्टर के पद पर रहते हुए डिस्ट्रिक्ट 3100 का मामला हल हो ही नहीं पायेगा ।
मनोज देसाई के रवैये की शिकायत सुनने वाले रोटरी इंटरनेशनल के दूसरे बड़े (भूतपूर्व) पदाधिकारियों ने हालाँकि डिस्ट्रिक्ट 3100 के लोगों को आश्वस्त करते हुए समझाया है कि डिस्ट्रिक्ट के भविष्य का फैसला मनोज देसाई को नहीं करना है, इसलिए मनोज देसाई चाहते हुए भी कोई अड़ंगा नहीं डाल पायेंगे । इन पदाधिकारियों का यह भी मानना और कहना है कि मामला इस वर्ष ही हल हो जाने की स्थिति में अगले वर्ष के गवर्नर दिनेश शर्मा ही होंगे, भले ही उनकी ट्रेनिंग न हो पाए; और इस संबंध में मनोज देसाई अपनी मनमानी नहीं चला पायेंगे । डिस्ट्रिक्ट के लोगों को यह भी बताया/समझाया गया है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद से मनोज देसाई की अब चलाचली की बेला है, तथा सी बासकर की भूमिका अब महत्त्वपूर्ण होगी - और इस कारण से मनोज देसाई के लिए अब मनमानी कर पाना संभव नहीं होगा । कुछेक बड़े नेताओं का हालाँकि यह भी कहना है कि दिनेश शर्मा को अपनी जुबान पर थोड़ा काबू रखना चाहिए और मनोज देसाई के खिलाफ अशालीन किस्म की बातें नहीं करना चाहिए; दिनेश शर्मा को समझना चाहिए कि मनोज देसाई अभी इंटरनेशनल डायरेक्टर के पद पर हैं और उनका 'काम' बिगाड़ तो सकते ही हैं । मनोज देसाई के रवैये से भी यही दिख रहा है कि वह दिनेश शर्मा को आसानी से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद तक नहीं पहुँचने देंगे - और उनके इस रवैये में डिस्ट्रिक्ट 3100 का मामला सुलझने की तरफ बढ़ते बढ़ते उलझता ज्यादा नजर आ रहा है ।

Thursday, August 18, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080, यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास के मामले में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म को एक रोटेरियन का खुला पत्र

श्री जॉन जर्म जी,
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा को लिखा आपका पत्र पढ़ने का मौका मिला, तो यह जानकर वास्तव में अच्छा लगा कि आपने प्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट्स का संज्ञान लिया और अपनी तरफ से पहल करके एक मामले में स्पष्टीकरण दिया । आप शायद पहले इंटरनेशनल प्रेसीडेंट हैं, जिन्होंने अपनी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद प्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट्स का संज्ञान लिया । मुझे लगता है कि यह किया जाना चाहिए, क्योंकि प्रेस रिपोर्ट्स ही हैं - जो हमें आईना दिखाती हैं और हमें सच्चाई के सामने ला खड़ा करती हैं : हो सकता है कि कई प्रेस रिपोर्ट्स बात को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करती हों; हो सकता है कि कई प्रेस रिपोर्ट्स कुछ सच और कुछ झूठ का घालमेल करती हों; यह भी हो सकता है कि कई प्रेस रिपोर्ट्स बिलकुल झूठ बात ही कहती हों - लेकिन फिर भी यह प्रेस रिपोर्ट्स ही हैं, जो हमें सच्चाई की तरफ जाने के लिए प्रेरित करती हैं या मजबूर करती हैं । अन्यथा आप तो जानते ही हैं कि हम रोटेरियंस पीठ पीछे तो एक दूसरे की बुराई करते हैं और सामने पड़ने पर चापलूसी करते हैं । प्रेस के प्रति भी हमारा रवैया धूर्ततापूर्ण व पाखंडभरा है - हम यह प्रयास तो खूब करते हैं कि प्रेस हमारे कामकाज को और हमारी तस्वीरों को अच्छे से छापे; इसके लिए हम प्रेस के लोगों को अपनी मीटिंग्स में बुलाते हैं, उन्हें खिलाते-पिलाते हैं, उन्हें गिफ्ट्स देते हैं; लेकिन प्रेस के जो लोग हमारी गलतियों, हमारी कमजोरियों, हमारी बेईमानियों की बात करते हैं, हमें हमारी असलियत बताने/दिखाने की कोशिश करते हैं - उन्हें हम अपना दुश्मन मान लेते हैं । हम इस सच्चाई को समझने व स्वीकार करने से बचते/छिपते हैं कि प्रेस का काम हमारी तारीफ करना और या हमारा प्रचार करना नहीं है; प्रेस का काम सच सामने लाने का है - यदि हम कभी पाते हैं कि किन्हीं प्रेस रिपोर्ट्स में सच की बजाए झूठ कहा/लिखा जा रहा है, तो हमें उनसे संवाद करना चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि सच वह नहीं है जो लिखा/छापा जा रहा है, बल्कि सच 'यह' है । पर, लगता है कि हम चाहते ही नहीं हैं कि सच सामने आए -  और इसीलिए हमारी गलतियों, हमारी कमजोरियों व हमारी बेईमानियों की बात करने वाली प्रेस को हम 'दुश्मन' घोषित कर देते हैं और समझ लेते हैं कि ऐसा करके हम सच्चाई पर पर्दा डाल देंगे ।
श्रीमान जॉन जर्म, इसीलिए मुझे यह 'देख' कर अच्छा लगा कि प्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट्स का आपने संज्ञान लिया और एक मामले में उसका स्पष्टीकरण दिया ।
श्री जॉन जर्म, अब आपके स्पष्टीकरण पर दो बात करना चाहूँगा । आपका कहना है कि रोटरी इंटरनेशनल की इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता तथा उसके चेयरमैन पद से हटने का फैसला यशपाल दास का अपना फैसला है; और आपने या अन्य किसी ने उन्हें हटने के लिए नहीं कहा था । यह बताते हुए आपने लेकिन एक बात स्पष्ट नहीं की कि यशपाल दास यदि उक्त कमेटी से खुद नहीं हटते तो क्या वह उक्त कमेटी के सदस्य और चेयरमैन बने रहते ? रोटरी के अपने करीब बीस वर्षों के जीवन में अर्जित किए ज्ञान और समझ के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि रोटरी इंटरनेशनल यशपाल दास को उस कमेटी का सदस्य और चेयरमैन नहीं बने रहने देता, जिस कमेटी को यशपाल दास की मिलीभगत के आरोप लगाने वाली उनके डिस्ट्रिक्ट की चुनावी शिकायत पर विचार और कार्रवाई करना है । मेरा विश्वास है कि रोटरी इंटरनेशनल नैसर्गिक न्याय की इस माँग का पुरजोर समर्थन करता है कि आरोपी को ही जज नहीं बनाया जा सकता है । इस आधार पर यशपाल दास को उक्त कमेटी से हटना ही था । ऐसे में, यदि आपकी बात को सच भी मान लें कि यशपाल दास अपने आप उक्त कमेटी से हटे हैं - तो यह बात उनके 'हाई करैक्टर' को कैसे दर्शाती है ? एक अपराधी अपराध करने के बाद पकड़े जाने से बचने की कोशिश में छिपता/भागता है, लेकिन यह समझ लेने के बाद कि वह ज्यादा दिन तक छिप/भाग नहीं सकेगा और कभी भी पकड़ा जायेगा - वह सरेंडर कर देता है; तो उसका सरेंडर करना उसके 'हाई करैक्टर' का सुबूत कैसे हो सकता है ?
श्री जॉन जर्म, अपने करीब बीस वर्षों के रोटरी जीवन में मैं यह जानने/समझने में सर्वथा असमर्थ रहा हूँ कि इलेक्शन रिव्यू कमेटी और या अन्य कमेटियों के लिए सदस्य व पदाधिकारी चुनने के मापदंड या पैमाने आखिर हैं क्या ? बीस वर्षों में मुझे जो बात समझ में आई वह यह कि इन कमेटियों में सदस्यता और पद फैसला करने वाले बड़े पदाधिकारियों के परिचय के चलते होने वाली सिफारिश, उनकी चापलूसी और तिकड़मों से मिलते हैं । यशपाल दास को भी इनमें से ही किसी कारण से इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता व चेयरमैन का पद मिला होगा; मैंने सुना है कि इस कमेटी में जगह पाने वाले की रोटरी में राजनीति बहुत चमकती है और उसके सामने पैसे बनाने के मौके भी होते हैं, इसलिए इस कमेटी में जगह पाने के लिए रोटेरियंस के बीच बड़ी मारामारी रहती है । ऐसे में, यह सहज समझा जा सकता है कि इस कमेटी में जगह पाने के लिए यशपाल दास ने पता नहीं किस किस की सिफारिश जुटाई होगी, किस किस की चापलूसी की होगी और न जानें कैसी कैसी तिकड़में की होंगी ? लेकिन उनके अपने ही डिस्ट्रिक्ट के रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस मनसा देवी की तरफ से रोटरी इंटरनेशनल में दर्ज हुई चुनावी शिकायत ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया । स्वाभाविक सी बात है कि अपनी मेहनत पर पानी पड़ता देख उन्होंने अपनी मेहनत की 'कमाई' को बचाने की कोशिश की होगी । कोई भी ऐसा करेगा ही । कौन होगा जो अपनी मेहनत को पानी में बहते जाते हुए चुपचाप देखता रहेगा ? हर कोई अपनी तरफ से अपनी मेहनत की 'कमाई' को बचाने की हर संभव कोशिश करेगा ही ।
श्री जॉन जर्म, आप चाहते हैं कि सभी लोग लेकिन आपकी इस बात पर विश्वास कर लें कि यशपाल दास ने अपनी मेहनत की कमाई को बचाने की कोई कोशिश नहीं की; और अपना 'हाई करैक्टर' दिखाते हुए खुशी खुशी अपनी 'कमाई' छोड़ दी । चलिए, आप कहते हैं तो मान लेते हैं; लेकिन कृपया इतना तो बता दीजिए कि अपना 'हाई करैक्टर' दिखाने में यशपाल दास को खासा लंबा समय क्यों लगा और उन्होंने 22 जून को चुनावी शिकायत दर्ज होते ही इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता व चेयरमैनी क्यों नहीं छोड़ दी थी ? 20 जुलाई तक किसी को यह नहीं पता था कि यशपाल दास उक्त कमेटी के सदस्य और चेयरमैन नहीं हैं । खुद यशपाल दास ने, या आपने या अन्य किसी ने यह जानकारी देने की जरूरत आखिर क्यों नहीं समझी ? 20 जुलाई तक भी रोटरी इंटरनेशनल की बेवसाइट यशपाल दास को ही उक्त कमेटी का चेयरमैन क्यों दिखा रही थी ? संभवतः इसी आधार पर टीके रूबी ने आपको ईमेल लिखा होगा; और जैसा कि आपने अपने पत्र में बताया है कि 20 जुलाई के टीके रूबी के ईमेल का जबाव में आपने उन्हें बताया - और पहली बार यह बात सामने आई कि यशपाल दास उक्त कमेटी छोड़ चुके हैं । यह बात यदि पहले से लोगों को पता होती, तो टीके रूबी को आपको उक्त मेल लिखने की जरूरत ही नहीं पड़ती । दरअसल इन्हीं बातों के चलते लोगों के बीच संदेह है कि आप जितना बता रहे हैं, उससे ज्यादा छिपा रहे हैं - और इस कारण से लोगों के बीच यशपाल दास की और भी ज्यादा फजीहत हो रही है, जिसके लपेटे में आप भी आते जा रहे हैं । यशपाल दास के चक्कर में आप अपनी फजीहत क्यों करवा रहे हैं, यह आप ही बेहतर बता सकते हैं ।
श्री जॉन जर्म, दो बातों लिए मैं आपसे माफी भी माँगना चाहूँगा । पहली बात तो यह कि अपना यह पत्र मैं आपको प्रेस के जरिये भेज रहा हूँ । इसका कारण यह है कि इस पत्र में मैंने जो बातें की हैं, वह कोई मेरे और आपके बीच का मामला तो है नहीं; यह तो रोटेरियंस के बीच का मामला है - इसलिए यह बातें लोगों के बीच आनी चाहिएँ । आप इंटरनेशनल प्रेसीडेंट हैं, आप डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा से कह सकते हैं कि वह लोगों के सामने आपके पत्र में कहीं गईं बातें लाएँ; मेरी तो ऐसी हैसियत है नहीं, लिहाजा मुझे प्रेस की ही मदद लेनी पड़ेगी । दूसरी बात यह है कि मैं अपनी पहचान छिपाते हुए यह पत्र लिख रहा हूँ । आप तो जानते ही हैं कि मेरे डिस्ट्रिक्ट में बड़े पॉवरफुल रोटरी नेता हैं, जो सिर्फ चापलूसों को पसंद करते हैं और वह जिसे पसंद नहीं करते हैं उसका रोटरी कैरियर तबाह कर देते हैं । मुझे अभी रोटरी में और डिस्ट्रिक्ट में रहना है, इसलिए मुझे उनकी चापलूसी ही करनी है और इस पत्र के लेखक के रूप में उनकी नजरों में आने की मेरी हिम्मत नहीं है । उम्मीद है कि आप मेरी मजबूरी समझेंगे ।
रोटरी अभिवादन सहित
आपका
एक रोटेरियन 
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रमन अनेजा को संबोधित जॉन जर्म का पत्र :


Thursday, July 21, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080, यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट से दर्ज हुई चुनावी शिकायत में आरोपी बनाए जाने के कारण इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म ने पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास की इलेक्शन रिव्यू कमेटी से छुट्टी की

अंबाला । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास को मौजूदा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म ने जोर का झटका जोर से देते हुए रोटरी इंटरनेशनल की इलेक्शन रिव्यू कमेटी के न सिर्फ चेयरमैन पद से हटा दिया है, बल्कि कमेटी से ही बाहर कर दिया है । इस कारण हुई अपनी फजीहत के असर को कम करने के लिए यशपाल दास हालाँकि लोगों को बता रहे हैं कि उन्हें हटाया नहीं गया है, चेयरमैन पद से और कमेटी से उन्होंने खुद ही इस्तीफा दिया है । तकनीकी रूप से यशपाल दास का कहना सही है और रिकॉर्ड पर दर्ज यही है कि उन्होंने इस्तीफा दिया है । किंतु यह रोटरी इंटरनेशनल की 'व्यवस्था' की व्यावहारिक प्रैक्टिस के तहत हुआ है - रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को जब किसी पदाधिकारी को उसके पद से हटाना होता है, तो वह उसे इस्तीफा देने का सुझाव देता है, ताकि उसे लोगों के बीच ज्यादा बेइज्जती न महसूस हो । यशपाल दास के साथ भी यही प्रकिया अपनाई गई, और इस प्रक्रिया के तहत इस्तीफा 'देकर' यशपाल दास ने अपनी इज्ज़त/फजीहत बचाने की कोशिश की है । किंतु फजीहत तो उनकी हो ही चुकी है । दरअसल इंटरनेशनल इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता और फिर चेयरमैनी पाने के लिए यशपाल दास ने पिछले रोटरी वर्ष में जोरदार लॉबिंग की थी और कई तरह की तिकड़में लगाने के बाद उन्हें यह पोजीशन मिली थी । इलेक्शन रिव्यू कमेटी के चैयरमैन के रूप में यशपाल दास ने जो 'जलवा' दिखाने की योजनाएँ बनाई थीं, रोटरी इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म ने उन सब पर पानी फेर दिया है ।
यशपाल दास की इस फजीहत से सबसे ज्यादा खुश मुकेश अरनेजा हैं । डिस्ट्रिक्ट 3012 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मुकेश अरनेजा भी दरअसल इलेक्शन रिव्यू कमेटी के सदस्य होने के लिए प्रयास कर रहे थे और मौजूदा इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के समर्थन के भरोसे उन्हें पूरी पूरी उम्मीद थी कि उक्त कमेटी की सदस्यता उन्हें मिल ही जाएगी । मनोज देसाई ने इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता मुकेश अरनेजा को दिलवाने के लिए उचित तरीके से प्रयास नहीं किया और मुकेश अरनेजा को भ्रम में रखने के लिए उन्हें 'गोली' देते रहे, या मनोज देसाई की चली नहीं - यह तो किसी को नहीं पता, लेकिन यह सभी को पता है कि यशपाल दास के सामने मुकेश अरनेजा की दाल नहीं गली । हालाँकि इसके लिए मुकेश अरनेजा की बेवकूफीभरी अति महत्वाकांक्षा को भी जिम्मेदार माना/ठहराया गया । उल्लेखनीय है कि रोटरी इंटरनेशनल ने एक जुलाई 2015 को वर्ष 2016-17 के लिए नौ कमेटियों के लिए नाम आमंत्रित किए थे, जिसके जबाव में कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने अपनी अपनी पसंददीदा कमेटी की सदस्यता के लिए आवेदन किया था । आम तौर पर एक पूर्व गवर्नर ने किसी भी एक कमेटी की सदस्यता के लिए आवेदन किया, किंतु मुकेश अरनेजा ने हद यह की कि उन्होंने एक साथ चार कमेटियों का नाम दे दिया । उनका रवैया ऐसा था, जैसे वह कह रहे हों कि बस दे दो, चाहे कुछ भी दे दो । कुछ भी हड़प लेने की ताक में होने के बावजूद मुकेश अरनेजा ने इलेक्शन रिव्यू कमेटी के लिए सारा जोर लगाया हुआ था । इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता का रोटरी में ज्यादा 'ग्लैमर' है, और चर्चा सुनी जाती है कि इसमें बैठे-बैठाए 'कमाई' भी हो जाती है । तमाम कोशिशों के बावजूद लेकिन मुकेश अरनेजा का काम नहीं बना, और बाजी यशपाल दास के हाथ लगी । इसीलिए अब जब यशपाल दास से उक्त कमेटी की सदस्यता छीन ली गई है, तो स्वाभाविक रूप से मुकेश अरनेजा के दिल को तसल्ली मिली है - और मुकेश अरनेजा की यह खास खूबी है कि वह अपनी खुशी को छिपा कर नहीं रख पाते हैं और धूमधाम से उसे लोगों के बीच 'बाँटते' हैं ।
जानकारों के बीच की चर्चाओं के अनुसार, यशपाल दास से इलेक्शन रिव्यू कमेटी की चेयरमैनी तथा सदस्यता छिनने का कारण उनके अपने डिस्ट्रिक्ट से दर्ज हुई चुनावी शिकायत रही । यशपाल दास के लिए मुसीबत की बात सिर्फ यही नहीं हुई कि उनके अपने डिस्ट्रिक्ट से चुनावी शिकायत दर्ज हुई; मुसीबत की बात यह भी हुई कि चुनावी शिकायत में खुद यशपाल दास के खिलाफ गंभीर आरोप हैं । नैसर्गिक न्याय की माँग कहती है कि आरोपी ही जज नहीं हो सकता है - और इस नाते से यशपाल दास को खुद ही उक्त कमेटी को छोड़ देना चाहिए था । यशपाल दास ने लेकिन कमेटी में बने रहने की कोशिशें और तिकड़में कीं - उन्होंने यहाँ तक तर्क किया कि जिस मीटिंग में उनके अपने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी शिकायत पर चर्चा होगी, वह उस मीटिंग का हिस्सा नहीं बनेंगे । उल्लेखनीय है कि यशपाल दास के डिस्ट्रिक्ट के रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस मनसा देवी की तरफ से रोटरी इंटरनेशनल में 22 जून को चुनावी शिकायत दर्ज हुई । यशपाल दास में यदि जरा सी भी नैतिकता होती और रोटरी की साख व प्रतिष्ठा के प्रति उनके मन में जरा सा भी सम्मान होता, तो वह उसी समय इलेक्शन रिव्यू कमेटी के लिए दिए गए अपने आवेदन को वापस ले लेते । उस समय नहीं लिया, तो जून के आखिरी सप्ताह में जब उनका नाम इलेक्शन रिव्यू कमेटी के सदस्य और चेयरमैन के रूप में घोषित हुआ, तब तुरंत उन्हें उक्त पद को स्वीकार करने से इंकार कर देना चाहिए था । यशपाल दास ने लेकिन ऐसा करने की बजाए डिस्ट्रिक्ट में लोगों को यह बताना/कहना और शुरू कर दिया कि इलेक्शन रिव्यू कमेटी का चेयरमैन जब मैं ही हूँ, तो रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस मनसादेवी की चुनावी शिकायत का क्या होगा - समझ लो ! रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस मनसादेवी की चुनावी शिकायत का क्या होगा, यह तो बाद में पता चलेगा; अभी लेकिन यह हुआ है कि पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर यशपाल दास को उक्त कमेटी से ही चलता कर दिया गया है ।
जाहिर है कि यशपाल दास अपनी ही हरकतों के कारण इस फजीहत का शिकार हुए हैं । इलेक्शन रिव्यू कमेटी का चेयरमैन बनने के बाद उन्होंने रोटरी क्लब हिमालयन रेंजेस मनसादेवी के खिलाफ जिस तरह की आक्रामकता का इज़हार किया, उसके कारण ही कमेटी से उनके हटने को लेकर ज्यादा चर्चा हुई है - और उन्हें अपने डिस्ट्रिक्ट के साथ-साथ दूसरे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच भी फजीहत का शिकार होना पड़ा है । यशपाल दास के लिए और भी ज्यादा फजीहत की बात यह हुई है कि कमेटियाँ गठित करने को लेकर रोटरी इंटरनेशनल ने पिछले रोटरी वर्ष से जो प्रक्रिया शुरू की, जिसके तहत यशपाल दास इलेक्शन रिव्यू कमेटी की सदस्यता व चेयरमैनी पाने की तिकड़म में सफल हुए - उसे लेकर डिस्ट्रिक्ट के ही एक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर शाजु पीटर पिछले रोटरी वर्ष में ही गंभीर संदेह व सवाल खड़े कर चुके थे । यशपाल दास के साथ जो हुआ, उसे शाजु पीटर के लिखे हुए को पढ़ते हुए 'देखें' - तो यशपाल दास का खासा भद्दा मजाक बना नजर आता है । रोटरी में लोगों को कहने का मौका मिला है कि यशपाल दास से होशियार तो शाजु पीटर साबित हुए हैं ।

Wednesday, July 13, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के घपलेबाजों को संरक्षण देते हुए सुधीर मंगला की सिफारिश को अनदेखा करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम की कार्रवाई कहीं डिस्ट्रिक्ट को बड़ी मुसीबत में तो नहीं फँसा देगी ?

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम को अजीत जालान से आखिर ऐसा क्या डर है कि वह अजीत जालान के क्लब - रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में होने वाली वित्तीय धांधलियों के मामले में कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं ? निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला मामले से जुड़े सारे तथ्य डॉक्टर सुब्रमणियम को सौंप कर उनसे उचित कार्रवाई करने की सिफारिश कर चुके हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला ने बहुत मेहनत व धैर्य से रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के पदाधिकारियों तथा कब्जाधारियों द्धारा की जा रही धांधलियों की पड़ताल की थी; क्लब के पदाधिकारियों ने उनकी पड़ताल को बंद करवाने तथा भटकाने की कोशिश तो बहुत की - लेकिन सुधीर मंगला की कार्रवाई धांधलियों के परिस्थितिजन्य सुबूत जुटाने में कामयाब रही । इस कामयाबी तक पहुँचने में हालाँकि उन्हें इतना समय लग गया कि उनका गवर्नर-काल ही पूरा हो गया । इसलिए तथ्यों के सहारे/भरोसे आगे की कार्रवाई पूरी करने की जिम्मेदारी उन्होंने डॉक्टर सुब्रमणियम को सौंप दी । डॉक्टर सुब्रमणियम लेकिन सुधीर मंगला की सिफारिश पर कोई ध्यान देते हुए नहीं दिख रहे हैं । उनका ध्यान न देना लोगों के नोटिस में शायद नहीं भी आता; किंतु रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के लोगों का जोश इस मामले में डॉक्टर सुब्रमणियम की मुसीबत बन गया है । रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के प्रमुख लोग जिस तरह से सुधीर मंगला को कोस रहे हैं और उनके बारे में अभद्र व अशालीन तरीके से बातें कर रहे हैं, उससे डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लग रहा है कि डॉक्टर सुब्रमणियम की शह के कारण ही दिल्ली साऊथ वेस्ट के लोगों की इतनी हिम्मत हो रही है कि उन्होंने हाल ही में पूर्व हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है । सुधीर मंगला के प्रति रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के कुछेक प्रमुख लोगों की नाराजगी का कारण यही है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्होंने क्लब में चल रही धांधलियों के आरोपों को गंभीरता से लिया और आरोपों को सच भी 'साबित' कर दिया तथा नियमों के हवाले से क्लब को निलंबित करने की सिफारिश तक कर दी ।
रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के प्रमुख लोगों की सुधीर मंगला के खिलाफ की जा रही बेहूदा किस्म की बयानबाजी को डॉक्टर सुब्रमणियम की शह होने का डिस्ट्रिक्ट के लोगों का विश्वास इस कारण भी बना है - क्योंकि दिल्ली साऊथ वेस्ट के एक प्रमुख सदस्य अजीत जालान पहले से ही डॉक्टर सुब्रमणियम का नाम लेकर सुधीर मंगला को चुनौती देते रहे हैं । सुधीर मंगला जब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दिल्ली साऊथ वेस्ट में हो रही गड़बड़ियों के आरोपों की जाँच-पड़ताल कर रहे थे, और आरोपों को सच पा रहे थे - तब यह अजीत जालान ही थे जो बढ़चढ़ कर दावा कर रहे थे कि डॉक्टर सुब्रमणियम के होते हुए सुधीर मंगला क्लब खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पायेंगे । अजीत जालान की डॉक्टर सुब्रमणियम से निकटता कोई छिपी हुई बात है भी नहीं । डॉक्टर सुब्रमणियम ने उन्हें अपने गवर्नर-वर्ष के लिए डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार बनाया है - और यह जानते/बूझते हुए बनाया है कि अजीत जालान पर हिसाब-किताब में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप रहे हैं । पिछले से पिछले रोटरी वर्ष में अजीत जालान अपने क्लब के ट्रेजरार थे; ट्रेजरार के रूप में उनपर हिसाब-किताब में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगे : उनके शुभचिंतकों तक ने उन्हें सलाह दी कि हिसाब-किताब का ब्यौरा सामने रख दो, आरोप अपने आप खारिज हो जायेंगे - लेकिन अजीत जालान ने अपने शुभचिंतकों की भी नहीं सुनी, और हिसाब-किताब नहीं दिया तो नहीं ही दिया । अजीत जालान ने आरोप और बदनामी तो सही, लेकिन हिसाब-किताब नहीं दिया । इस बात का हवाला देते हुए डॉक्टर सुब्रमणियम की टीम बनवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले लोगों ने डॉक्टर सुब्रमणियम को सलाह दी थी कि वह अजीत जालान को और चाहें जो पद दे दें, लेकिन ट्रेजरार का पद न दें । डॉक्टर सुब्रमणियम ने लेकिन किसी की नहीं सुनी; और अजीत जालान को वही पद दिया, जो अजीत जालान अपने लिए चाहते थे । इससे अजीत जालान के साथ डॉक्टर सुब्रमणियम के रिश्ते के 'ताप' को समझा/पहचाना जा सकता है । इस 'ताप' को इस तथ्य से भी समझा/पहचाना जा सकता है कि डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरार के रूप में अजीत जालान पर डॉक्टर सुब्रमणियम के पेम/पेट्सअसेम्बली आदि कार्यक्रमों के खर्चों में गोलमाल होने के आरोप भी लगे, लेकिन डॉक्टर सुब्रमणियम ने उन आरोपों पर कोई ध्यान नहीं दिया ।
डिस्ट्रिक्ट में लोगों का कहना है कि इन बातों/तथ्यों को तो फिर भी इग्नोर किया जा सकता है; लेकिन यह बात समझ से कतई परे है कि रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में चल रही धांधलियों पर कार्रवाई करने की सुधीर मंगला की सिफारिश पर डॉक्टर सुब्रमणियम चुप्पी क्यों बनाए हुए हैं ? सुधीर मंगला ने अपनी कार्रवाई - मामले की पड़ताल करने से लेकर डॉक्टर सुब्रमणियम को की गई सिफारिश तक की कार्रवाई - के दस्तावेज रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को भी भेजे हुए हैं; जिस कारण रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट की घपलेबाजी का मामला खासा गंभीर हो गया है - जिसकी अनदेखी करना डिस्ट्रिक्ट को खासा महँगा पड़ सकता है । पिछले रोटरी वर्ष में सुधीर मंगला ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में चुनावी बेईमानी को लेकर जो अनदेखी की थी, उसकी भारी कीमत डिस्ट्रिक्ट के सिर पहले ही पड़ चुकी है । डिस्ट्रिक्ट को लेकर इंटरनेशनल बोर्ड की मीटिंग में की जो प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज है, उसके कारण डिस्ट्रिक्ट पहले से ही मुसीबत में है । पिछले रोटरी वर्ष में जो कुछ भी हुआ, उसे कुछेक लोगों ने तत्कालीन प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की निजी ख़ब्तीबाजी के रूप में देखा/पहचाना था और उम्मीद की थी कि प्रेसीडेंट पद से उनके हटने के बाद मामले को संभाल लिया जायेगा । मुसीबत की बात लेकिन यह हुई कि नए बने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म ने केआर रवींद्रन को एशियाई देशों के मामलों का इंचार्ज बना दिया है । यानि हालात जहाँ थे, वहीं फिर वापस आ गए हैं । डिस्ट्रिक्ट 3011 चूँकि पहले से ही केआर रवींद्रन के 'रडार' पर है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट 3011 के पदाधिकारियों से सावधानी से काम करने की उम्मीद की जाती है । इसी उम्मीद के चलते लोगों को डर है कि रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट की घपलेबाजियों पर कार्रवाई करने की सुधीर मंगला की सिफारिश पर डॉक्टर सुब्रमणियम की चुप्पी डिस्ट्रिक्ट की मुसीबतों को और बढ़ा सकती है ।
रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट में चलने वाली घपलेबाजियों के आरोप हैं; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुधीर मंगला द्धारा की गई जाँच-पड़ताल में सामने आए साक्ष्य व सुबूत हैं; क्लब के खिलाफ कार्रवाई करने की सुधीर मंगला की सिफारिश है - इसके बावजूद मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम कार्रवाई तो नहीं ही कर रहे हैं; बल्कि घपलेबाजियों के एक मास्टरमाइंड समझे जाने वाले अजीत जालान से निकटता बनाए हुए हैं । इस निकटता का वास्ता देकर अजीत जालान तथा क्लब के अन्य कुछेक प्रमुख लोग निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सुधीर मंगला के खिलाफ अभद्र व अशालीन किस्म की बातें कर रहे हैं, और दावा कर रहे हैं कि उनपर चाहें जो आरोप हों और उसके चाहें जितने साक्ष्य व सुबूत हों - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डॉक्टर सुब्रमणियम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे । डॉक्टर सुब्रमणियम के रवैये से अजीत जालान तथा रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के दूसरे कुछेक लोगों द्धारा किया जा रहा दावा यदि सच साबित भी होता नजर आ रहा हो - तब लोगों के बीच यह सवाल तो उठेगा ही कि डॉक्टर सुब्रमणियम आखिर किस मजबूरी में रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ वेस्ट के घपलेबाजों को संरक्षण दे रहे हैं और क्लब में की घपलेबाजी को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं - और अपने से पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहे सुधीर मंगला की सिफारिश को अनदेखा कर रहे हैं ?

Tuesday, July 12, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की कार्रवाई को इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की शह होने की चर्चाओं ने मामले को दिलचस्प और महत्वपूर्ण बनाया

मुरादाबाद । डिस्ट्रिक्ट 3100 के मामले के कोर्ट-कचहरी पहुँचने के पीछे इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की शह होने की चर्चाओं ने मामले को खासा रोमांचक बना दिया है । समझा जाता है कि केआर रवींद्रन को एशियाई मामलों का इंचार्ज बना देने के इंटरनेशनल प्रेसीडेंट जॉन जर्म के फैसले से आहत मनोज देसाई ने डिस्ट्रिक्ट 3100 के नाराज व असंतोषी लोगों को कोर्ट-कचहरी करने के लिए उकसाया है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 3100 को लेकर रोटरी इंटरनेशनल पदाधिकारियों तथा बोर्ड ने पिछले महीनों में जब जब फैसले लिए, तब तब कोर्ट-कचहरी होने/करने की चर्चाएँ सुनी गईं थीं; इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले के चलते जब दीपक बाबु के गवर्नर की कुर्सी तक पहुँचने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था - तब तो यह चर्चा पूरे जोरों पर थी कि दीपक बाबु रोटरी इंटरनेशनल के फैसले के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं । लेकिन फिर सुनने को मिला कि मनोज देसाई ने उन्हें कोर्ट न जाने के लिए मना लिया है । इससे पहले, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से इस्तीफा देने के लिए सुनील गुप्ता को मनोज देसाई द्वारा राजी करने की बातें लोगों के बीच जब चर्चा में थीं, तब तो खुद सुनील गुप्ता लोगों को बता रहे थे कि उन्होंने मनोज देसाई से साफ साफ कह दिया है कि रोटरी इंटरनेशनल ने उन्हें यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से हटाया, तो वह कोर्ट चले जायेंगे । उस समय सुनील गुप्ता को घेरने/फँसाने तथा मामले को शांतिपूर्ण तरीके से निपटा देने में मनोज देसाई ने ही तिकड़में लगाई थीं । मनोज देसाई ने सुनील गुप्ता को ही नहीं; डिस्ट्रिक्ट में प्रशासनिक व आर्थिक घपलों के लिए जिम्मेदार ठहराए गए तीन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के 'गुस्से' को शांत करने में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी; दीपक बाबु व दिनेश शर्मा को भी चुप कराने में मनोज देसाई सफल रहे थे । किंतु दीपक बाबु व दिनेश शर्मा को जल्दी ही समझ में आ गया कि मनोज देसाई ने उन्हें 'पोपट' बना दिया है । राजीव सिंघल के कोऑर्डीनेटर बनने के बाद तो दीपक बाबु व दिनेश शर्मा ने पक्के तौर पर समझ लिया कि इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई ने उन्हें इस्तेमाल किया है, और राजनीतिक रूप से उन्हें ठगा है । दूसरे लोग मनोज देसाई के हाथों 'पोपट' बनने के बाद चूँकि चुप रह गए, इसलिए मनोज देसाई की 'रणनीति' की तारीफ हुई; लेकिन दीपक बाबु और दिनेश शर्मा ने चुप रहने की बजाए मनोज देसाई को सार्वजनिक रूप से कोसना जारी किया - तो मनोज देसाई को डेमेज कंट्रोल की जरूरत पड़ी ।
रोटरी इंटरनेशनल के नए बने प्रेसीडेंट जॉन जर्म के एक फैसले ने मनोज देसाई को अपनी 'पोजीशन' बदलने के लिए डेमेज कंट्रोल की आड़ लेने का अच्छा बहाना भी दे दिया । जॉन जर्म ने निवर्तमान प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन को एशियाई देशों के मामलों का इंचार्ज बना कर दरअसल मनोज देसाई के पर पूरी तरह से कतर दिए हैं । उल्लेखनीय है कि केआर रवींद्रन के प्रेसीडेंट रहते हुए मनोज देसाई की ज्यादा चल नहीं पा रही थी । वह उम्मीद में थे कि केआर रवींद्रन के प्रेसीडेंट पद से हटने के बाद वह पूरी तरह से अपनी चला सकेंगे - लेकिन जॉन जर्म ने केआर रवींद्रन को उनके सिर पर बैठा कर उनकी उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया है । इस स्थिति ने मनोज देसाई को डिस्ट्रिक्ट 3100 के नाराज व असंतोषी लोगों को यह बताने/समझाने का अवसर दिया कि केआर रवींद्रन के होते हुए मैं कुछ नहीं कर पाउँगा, इसलिए मेरे भरोसे मत रहना और जो उचित समझो करो । इस तरह मनोज देसाई ने एक तीर से दो निशाने लगा दिए हैं : एक तरफ तो उन्होंने उन्हें कोसने वाले दीपक बाबु व दिनेश शर्मा जैसे लोगों के ज़ख्मों पर मरहम लगाया, और उनके सामने जताने की कोशिश की कि वह तो उनके लिए कुछ करना चाहते थे - किंतु केआर रवींद्रन के कारण अब वह कुछ नहीं कर पायेंगे; दूसरी तरफ मनोज देसाई ने जॉन जर्म और केआर रवींद्रन को कोर्ट-कचहरी की मुसीबत में फँसवा दिया है । मामले में हालाँकि मनोज देसाई को भी पार्टी बनाया गया है, किंतु कोर्ट-कचहरी के मामले में ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी तो जॉन जर्म व केआर रवींद्रन की ही बनेगी ।
डिस्ट्रिक्ट 3100 में झगड़ों को हवा देने में मनोज देसाई की भूमिका को पिछले रोटरी वर्ष के शुरू से ही चिन्हित किया जाता रहा है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार के रूप में राजीव सिंघल खुलकर मनोज देसाई के समर्थन का दावा करते रहे हैं । राजीव सिंघल की उम्मीदवारी का रास्ता आसान बनाने के लिए मंजू गुप्ता की उम्मीदवारी को वापस कराने के उद्देश्य से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के स्तर से लेकर दिल्ली स्थित रोटरी इंटरनेशनल के साऊथ एशिया ऑफिस तक में जो 'खेल' हुआ, उसमें मनोज देसाई की भूमिका को देखा/पहचाना गया और उसकी भारी आलोचना हुई । डिस्ट्रिक्ट में पिछले रोटरी वर्ष में घटी घटनाओं को नजदीक से देखने वाले लोगों को लगता है, और उन्होंने दूसरे लोगों के बीच इसे कहा भी है कि मनोज देसाई ने पहले सुनील गुप्ता को और फिर दीपक बाबु को इस्तेमाल किया - और ऐसे इस्तेमाल किया कि दोनों बर्बादी की दशा को प्राप्त हुए । कुछेक लोगों को तो शक है कि मनोज देसाई ने जानबूझ कर डिस्ट्रिक्ट 3100 में झगड़ों को हवा दी, ताकि डिस्ट्रिक्ट को बर्बाद किया/करवाया जा सके । यह शक करने वालों का तर्क है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की मनोज देसाई की उम्मीदवारी को चूँकि नोमीनेटिंग कमेटी में डिस्ट्रिक्ट 3100 का समर्थन नहीं मिला था, इसलिए उसी की खुन्नस में उन्होंने डिस्ट्रिक्ट 3100 से बदला लिया है ।
इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार के रूप में मनोज देसाई ने हालाँकि डिस्ट्रिक्ट 3100 के पूर्व गवर्नर्स के बीच अच्छा काम किया था । नोमीनेटिंग कमेटी के लिए चुने गए राजीव रस्तोगी का समर्थन जुटाने के लिए मनोज देसाई ने उनकी परफेक्ट घेराबंदी की थी, जिसके चलते उन्हें विश्वास था कि नोमीनेटिंग कमेटी में राजीव रस्तोगी उनका ही समर्थन करेंगे । नोमीनेटिंग कमेटी में लेकिन राजीव रस्तोगी ने भरत पांड्या का समर्थन किया । बाद में पता चला कि राजीव रस्तोगी का मन बदलने में जयपुर वाले अशोक गुप्ता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । राजीव रस्तोगी का समर्थन न मिलने के बावजूद मनोज देसाई नोमीनेटिंग कमेटी में अधिकृत उम्मीदवार तो बन गए, किंतु अब लग रहा है कि डिस्ट्रिक्ट 3100 के प्रति उनके मन में नाराजगी ने जैसे गहरी पैठ बना ली थी - और उसी नाराजगी के चलते बहुत योजनाबद्ध तरीके से उन्होंने डिस्ट्रिक्ट 3100 को बर्बादी के कगार पर पहुँचा दिया है ।
रोटरी इंटरनेशनल और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ कोर्ट-कचहरी करने का क्या नतीजा निकलेगा - यह तो बाद में पता चलेगा; अभी लेकिन कई लोगों को लगता है कि इस 'काम' में पर्दे के आगे और पीछे जो लोग हैं, उन्हें तो शायद ही कोई फायदा होगा - डिस्ट्रिक्ट के लिए मुसीबतें हो सकता है कि और बढ़ जाएँ । डिस्ट्रिक्ट के लोग कोर्ट-कचहरी करें, यह शायद कोई बड़ा मुद्दा न होता; इस कोर्ट-कचहरी के पीछे लेकिन इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की शह होने की चर्चाओं ने मामले को दिलचस्प और महत्वपूर्ण बना दिया है ।

Tuesday, March 1, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई के भरोसे कॉलिज ऑफ गवर्नर्स का फैसला मानने से बचते दिख रहे दीपक बाबु पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपमानित करने की हद तक जा पहुँचे हैं

मुरादाबाद । दीपक बाबु जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स को छका रहे हैं और उनकी बात को अनसुना कर रहे हैं, उससे जाहिर है कि उन्होंने सुनील गुप्ता के साथ हुए प्रकरण से कुछ नहीं सीखा है और उन्होंने भी डिस्ट्रिक्ट व रोटरी का मजाक बनाने का फैसला कर लिया है । दीपक बाबु हालाँकि अभी थोड़े से भाग्यशाली दिख रहे हैं कि उनकी हरकतों से खिन्न और नाराज पूर्व गवर्नर्स अभी उनके पीछे उस तरह से नहीं पड़े हैं, जैसे कि सुनील गुप्ता से नाराज पूर्व गवर्नर्स उनके पीछे पड़ गए थे । किंतु दीपक बाबु अपनी बातों और अपनी हरकतों से जिस तरह से पूर्व गवर्नर्स को चिढ़ा रहे हैं, और उन्हें लगातार अपमानित महसूस करा रहे हैं - उससे लगता नहीं है कि अपने डिस्ट्रिक्ट में दीपक बाबु का 'हनीमून पीरियड' ज्यादा दिन चल पायेगा । दीपक बाबु के लिए मुसीबत की बात दरअसल यह हो गई है कि सुनील गुप्ता के खिलाफ हुई कार्रवाई ने लोगों को आश्वस्त किया है तथा भरोसा दिया है कि उनके द्वारा की गई शिकायतों पर रोटरी इंटरनेशनल ध्यान देता है तथा कार्रवाई करता है - इस बात से लोगों को शिकायत करने का बल मिला है, और जाहिर तौर पर इसका खामियाजा दीपक बाबु को ही भुगतना पड़ेगा । दीपक बाबु हालाँकि इस बात की कोई परवाह करते हुए अभी नहीं देखे जा रहे हैं । उनके नजदीकियों का कहना है कि दीपक बाबु का मानना और कहना है कि सुनील गुप्ता तो मौजूदा इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की सनक का शिकार हो गए हैं, और इंटरनेशनल प्रेसीडेंट पद पर केआर रवींद्रन के दिन अब ज्यादा नहीं बचे हैं - इसलिए उनकी परवाह करने की जरूरत नहीं है । उनके बाद इंटरनेशनल प्रेसीडेंट का पदभार सँभालने वाले जॉन जर्म उनके जैसे बिलकुल नहीं हैं, और वह शिकायतों पर कोई तवज्जो नहीं देंगे । रही बात इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई की - तो उनके बारे में दीपक बाबु का मानना/कहना है कि मनोज देसाई बड़े सज्जन पुरुष हैं, उनकी बस खुशामद करते रहो, और बाकी फिर चाहे जो करो - उन्हें कोई परवाह नहीं है ।  रोटरी इंटरनेशनल के बड़े पदाधिकारियों के इस आकलन के भरोसे ही दीपक बाबु ने अपने डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स को, उनकी सलाह को और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसले को ठेंगा दिखाया हुआ है ।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने के शुरू में कॉलिज ऑफ गवर्नर्स ने अपनी मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट में घटने वाली घटनाओं के कारण डिस्ट्रिक्ट की होने वाली बदनामी का संज्ञान लेते हुए कुछेक महत्वपूर्ण फैसले किए थे । गहन विचार-विमर्श के बाद कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के बीच जिन बातों पर सहमति बनी, वह इस प्रकार थे : डिस्ट्रिक्ट में किसी को व्यवस्था संबंधी कोई शिकायत है तो वह सीधे रोटरी इंटरनेशनल में शिकायत नहीं करेगा; रोटरी इंटरनेशनल से अनुरोध किया जायेगा कि उसे कोई शिकायत मिले तो उसे वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को भेजे, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर उसे डिस्ट्रिक्ट आर्बिट्रेशन कमेटी के हवाले करे; पाँच सदस्यीय डिस्ट्रिक्ट आर्बिट्रेशन कमेटी का गठन किया जाए, जिसमें वरिष्ठता क्रम के अनुसार हर वर्ष दो वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स हों; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के मौजूदा दोनों उम्मीदवार अपनी अपनी उम्मीदवारी से इस्तीफा दें, तथा कॉलिज ऑफ गवर्नर्स जोन-अनुसार उनकी उम्मीदवारी के बारे में फैसला करें; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए डिस्ट्रिक्ट को तीन जोन में बाँटा जाए, जहाँ से बारी बारी से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के उम्मीदवार आएँ; आदि-इत्यादि । मीटिंग में इन मुद्दों पर पूर्व गवर्नर्स के बीच हालाँकि परस्पर विरोधी विचार भी थे, और कुछेक मौकों पर उनके बीच गर्मा-गर्मी भी हुई - लेकिन अंततः डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के हित में इन मुद्दों पर उनके बीच सहमति बनी । रोटरी इंटरनेशनल के एक विशेष फैसले के आधार पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार सँभाल रहे दीपक बाबु ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में घोषणा की कि वह तीन-चार दिन में इस मीटिंग के मिनिट्स डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच सार्वजनिक कर देंगे, जिससे कि इन फैसलों को लागू करने के लेकर डिस्ट्रिक्ट के लोगों की भी सहमति बनाई जा सके और मीटिंग के फैसलों को क्रियान्वित करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सके । यह घोषणा किए हुए दीपक बाबु को करीब करीब तीन सप्ताह से ऊपर का समय हो चुका है, लेकिन उन्होंने अभी तक उक्त मीटिंग के मिनिट्स सार्वजनिक करने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है । इस बीच जिन पूर्व गवर्नर्स ने उनसे इस बारे में बात की, उन्हें उन्होंने अलग अलग तरह की बहानेबाजी करके टरका दिया है । मजे की बात यह है कि दीपक बाबु के नजदीकियों से लोगों को सुनने को मिल रहा है कि दीपक बाबु न तो आर्बिट्रेशन कमेटी बनाने के पक्ष में हैं, और न डिस्ट्रिक्ट को तीन जोन में विभक्त करने के लिए राजी हैं, और न डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को हतोत्साहित करने के लिए तैयार हैं - और इसीलिए वह कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में सर्वसम्मति से हुए फैसलों को क्रियान्वित करने को लेकर टाल-मटोल वाला रवैया अपना रहे हैं ।
वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन केजी अग्रवाल को तो इस मामले में चुनौती सी देते हुए दीपक बाबु ने अपमानित तक कर दिया । इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए केजी अग्रवाल ने दीपक बाबु को फोन करके यह जानना चाहा कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में लिए गए फैसलों को क्रियान्वित कराने के लिए वह क्या कदम उठा रहे हैं; दीपक बाबु ने उनकी बात का जबाव देने की बजाए उन्हें चुनौती सी दे डाली कि आप दोनों उम्मीदवारों से इस्तीफा ले लें और जो उचित समझें वह फैसला करें । दीपक बाबु यह कहते हुए यह भूल गए कि डिस्ट्रिक्ट व रोटरी के हित में उचित फैसला करने की जिम्मेदारी केजी अग्रवाल की नहीं, बल्कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार सँभालने के कारण उनकी है । भूले शायद वह कुछ नहीं, वह वास्तव में केजी अग्रवाल को अपमानित करते हुए यह जता/बता रहे थे कि मुझे कुछ नहीं करना है - अब तुमसे जो सकता हो वह कर लो । इकत्तीस वर्ष पहले गवर्नर रहे केजी अग्रवाल को मनमसोस कर रह जाना पड़ा । दीपक बाबु के नजदीकियों की मानें तो दीपक बाबु कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में हुए फैसलों पर धूल पड़ने देंगे, जिससे कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनाव हो और उन्हें अपनी चौधराहट दिखाने/जताने का तथा पैसे बनाने का मौका मिले । दिवाकर अग्रवाल से बदला लेने के लिए भी दीपक बाबु को कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग के फैसले को ठंडे बस्ते में डालना जरूरी लग रहा है । दीपक बाबु को लगता है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में लिए गए फैसले यदि लागू हो गए तो दिवाकर अग्रवाल इस वर्ष नहीं, तो अगले वर्ष आराम से गवर्नर बन जायेंगे । दीपक बाबु ऐसा नहीं होने देना चाहते हैं और इसके लिए वह अपने ही डिस्ट्रिक्ट के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपमानित करने की हद तक जाने के लिए तैयार हैं ।
दीपक बाबु के इस रवैये ने राजीव सिंघल और उनके नजदीकियों को भी डराना शुरू कर दिया है । उनकी चिंता यह है कि दीपक बाबु ने अपने रवैये से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को ज्यादा नाराज कर दिया, तो कहीं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी मुसीबत में न पड़ जाए । राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के समर्थक और शुभचिंतक हालाँकि जोरशोर से यह दावा करने में लगे हुए हैं कि दिल्ली स्थित रोटरी इंटरनेशनल के साउथ एशिया कार्यालय के पदाधिकारियों की देखरेख में चुनाव होने से उनकी जीत 'और पक्की' हो गई है; किंतु राजीव सिंघल और उनके नजदीकियों को डर यह सता रहा है कि सुनील गुप्ता की तरह कहीं उनके साथ भी धोखा हो गया तो क्या होगा ? उल्लेखनीय है कि सुनील गुप्ता को भी आश्वस्त किया गया था - और इस काम में राजीव सिंघल खुद भी आगे आगे थे - कि मनोज देसाई के होते हुए उन्हें डरने की चिंता नहीं करना चाहिए । पर यह आश्वासन सुनील गुप्ता के काम नहीं आया । राजीव सिंघल के कुछेक नजदीकियों का मानना और कहना है कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में लिए गए फैसले से उनका गवर्नर बनने का रास्ता आसान हो गया है; अब उन्हें कोशिश सिर्फ यह करनी है कि जोन-अनुसार गवर्नर बनने की जो बात हो रही है उसमें उन्हें पहला नंबर मिल जाए - उन्हें लग रहा है कि इस कोशिश को सफल करना/बनाना कोई ज्यादा मुश्किल नहीं है । इसीलिए दीपक बाबु का रवैया उन्हें डरा रहा है और उन्हें लग रहा है कि दीपक बाबु की कारस्तानी कहीं उन्हें न ले डूबे - चुनाव आखिर चुनाव है, नतीजे का ऊँठ न जाने किस करवट बैठे ? राजीव सिंघल के कुछेक नजदीकी कहने भी लगे हैं कि दीपक बाबु और कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसले को न मानने में उनका साथ दे रहे लोग दरअसल अपना स्वार्थ देख रहे हैं, और उनके स्वार्थ के चक्कर में कहीं राजीव सिंघल का बंटाधार न हो जाए । राजीव सिंघल के जो नजदीकी ज्योतिष में विश्वास करते हैं, उनका तो और भी मजेदार आकलन है : उनका कहना है कि राजीव सिंघल की उम्मीदवारी के जो जो लोग घनघोर समर्थक रहे - जैसे योगेश मोहन गुप्ता, बृजभूषण और सुनील गुप्ता; वह सब एक एक करके सीन से गायब होते गए हैं; अब दीपक बाबु उनकी उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में उभरे हैं, तो उनको भी मुश्किलों ने घेरना शुरू कर दिया है । राजीव सिंघल के लिए यह कोई अच्छे संकेत नहीं हैं - इसलिए उनके और उनके समर्थकों के लिए अच्छा यही होगा कि कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसले ने जो एक मौका बनाया है, उससे वह फायदा उठाएँ । दीपक बाबु के रवैये ने लेकिन उन्हें असमंजस में डाला हुआ है; और राजीव सिंघल व उनके नजदीकियों के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि दीपक बाबु की कारस्तानियाँ उनका काम बनायेंगी या बिगाड़ेंगी ?