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Saturday, August 1, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मुकेश सिंघल की आगामी रोटरी वर्ष की गवर्नर-टीम के पदों के बदले वोट जुटाने तथा डीएन रायजादा को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद का उम्मीदवार बना देने जैसे जुगाड़ों के भरोसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद का चुनाव जीतने की तोमर खेमे की तैयारी सचमुच कामयाब हो सकेगी क्या ?

कानपुर । वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डीएन रायजादा को आईएस तोमर ग्रुप ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार तो 'बना' दिया है, लेकिन उनकी उम्मीदवारी को 'मजबूती' देने के लिए ग्रुप के लोग कोई प्रयास करते हुए नहीं दिख रहे हैं । यहाँ तक कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन/चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए वह अपने बीच से कोई उम्मीदवार तक तय नहीं कर पा रहे हैं । ग्रुप के लोगों के अनुसार, नोमीनेटिंग कमेटी के लिए हालाँकि पूर्व गवर्नर अरुण जैन का नाम लिया जा रहा है, लेकिन अरुण जैन उक्त उम्मीदवारी के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं । दरअसल अरुण जैन भी जान/समझ रहे हैं कि नोमीनेटिंग कमेटी के लिए होने वाले चुनाव में वह जीतेंगे तो नहीं ही, इसलिए फालतू में हार की फजीहत का सामना क्यों करना ? नोमीनेटिंग कमेटी के लिए रवि प्रकाश अग्रवाल खेमे की तरफ से शरत चंद्रा का नाम सुना जा रहा है, जो डिस्ट्रिक्ट मेंबरशिप चेयरमैन हैं । आईएस तोमर ग्रुप की राजनीति के अगुआ बने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट मुकेश सिंघल भी नहीं चाहते हैं कि अरुण जैन नोमीनेटिंग कमेटी की उम्मीदवारी के चक्कर में पड़े । मुकेश सिंघल दरअसल सारा ध्यान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव पर लगाना चाहते हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति में पिछले रोटरी वर्ष में आईएस तोमर ग्रुप की और ग्रुप के सक्रिय सदस्य बने मुकेश सिंघल की जैसी जो किरकिरी हुई थी, उसका वह इस वर्ष बदला लेना चाहते हैं - और इसलिए इस वर्ष वह सिर्फ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव को जीतने पर मेहनत करना चाहते हैं ।
मुकेश सिंघल के नजदीकियों का कहना/बताना है कि अगले रोटरी वर्ष में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के लिए डीएन रायजादा को उम्मीदवार बनाने के पीछे भी वास्तविक कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की तैयारी ही है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट में जब तक आईएस तोमर की राजनीति चली, उन्होंने डीएन रायजादा को आगे नहीं बढ़ने दिया । डीएन रायजादा हालाँकि आईएस तोमर के नजदीकी रहे हैं, और उन्हीं के समर्थन से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बने थे - लेकिन आईएस तोमर को हमेशा यह डर रहा कि डीएन रायजादा को यदि मौका मिला, तो वह उनसे आगे निकल जायेंगे; और इसीलिए उन्होंने डीएन रायजादा की कमान खींच कर रखी और उन्हें अलग-थलग करते/रखते हुए डिस्ट्रिक्ट में तवज्जो नहीं लेने/मिलने दी । डीएन रायजादा ने भी आईएस तोमर द्वारा तय की गई नियति को स्वीकार कर लिया और किनारे लग लिए । लेकिन अब जब आईएस तोमर डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में वापसी करने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं, तब उन्हें डीएन रायजादा की याद आई है । असल में, आईएस तोमर खेमे के लोग कानपुर में अपनी स्थिति को कमजोर पा रहे हैं, और कानपुर में उन्हें कोई ऐसा नेता नहीं मिल पा रहा है - जिसके कंधे पर पैर रख कर वह कानपुर में अपनी राजनीति जमा सकें । डीएन रायजादा को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उन्होंने उम्मीदवार दरअसल इसी उम्मीद में बनाया है कि इससे डीएन रायजादा में करंट पैदा होगा, और वह कानपुर में आईएस तोमर खेमे के लिए जगह बनाने का काम करेंगे । आईएस तोमर खेमे के लोगों को अच्छी तरह पता है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में डीएन रायजादा का कुछ होना/हवाना तो है नहीं, और उन्हें उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में कुछ करना भी नहीं है - वह तो बस डीएन रायजादा को 'झाड़' पर चढ़ा कर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में फायदा लेना चाहते हैं ।
आईएस तोमर खेमे की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अभी तक रोटरी क्लब झाँसी रानी की पूर्व अध्यक्ष देवप्रिया उक्सा का नाम है, जबकि रवि प्रकाश अग्रवाल खेमे की तरफ से रोटरी क्लब कानपुर इंडस्ट्रियल के पूर्व अध्यक्ष विवेक गर्ग तैयारी करते देखे/सुने जा रहे हैं । सक्रियता के लिहाज से देवप्रिया उक्सा का पलड़ा भारी देखा/बताया जा रहा है; विवेक गर्ग को लेकर आरोप सुने जा रहे हैं कि उन्होंने तो अपने आप को जीता हुआ मान लिया है - और इसलिए वह सक्रिय होने की तथा लोगों से संपर्क करने की कोई जरूरत नहीं समझ रहे हैं । उम्मीदवार के रूप में विवेक गर्ग के प्रति बनने वाली नाराजगी का लेकिन देवप्रिया उक्सा राजनीतिक फायदा उठाने का कोई 'मैकेनिज्म' बनाती नहीं दिख रही हैं - और उनका चुनाव पूरी तरह आईएस तोमर खेमे के नेताओं, खासकर मुकेश सिंघल पर निर्भर नजर आ रहा है । मुकेश सिंघल को लग रहा है कि आगामी रोटरी वर्ष की अपनी गवर्नर-टीम के पदों का ऑफर देकर वह वोट जुटा लेंगे, लेकिन सिर्फ इसी जुगाड़ के भरोसे चुनाव जीतने की उनकी तैयारी उनके काम आती नहीं दिख रही है । असल में, पिछले रोटरी वर्ष में आईएस तोमर खेमे के नेताओं की तरह तरह की जुगाड़बाजियों को जिस तरह की मात मिली है, उसने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में उनकी हालत पतली की हुई है - जिससे उबरने के लिए वह योजनाएँ तो खूब बना रहे हैं, लेकिन उनकी योजनाएँ अभी तो काम करती नजर नहीं आ रही हैं ।

Thursday, November 28, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल ने शेखर मेहता के सम्मान समारोह के जरिये डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट जमाने/बनाने की जो योजना तैयार की है, उसके कारण वह प्रोटोकॉल का मजाक बनाने के साथ -साथ पैसे बनाने के आरोपों में भी फँसते जा रहे हैं  

अलीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल ने इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी शेखर मेहता के नाम पर डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट जमाने की जो तैयारी की थी, वह उन्हें उल्टी पड़ गई है और उनके लिए फजीहत का कारण बन रही है । शेखर मेहता के सम्मान समारोह के लिए मुकेश सिंघल ने डिस्ट्रिक्ट के दूसरे पदाधिकारियों तथा वरिष्ठ सदस्यों/नेताओं से विचार-विमर्श किए बिना 19 दिसंबर की तारीख तो तय कर ली है, लेकिन अब वह रोना रो रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट के दूसरे पदाधिकारी और नेता उक्त कार्यक्रम के लिए सहयोग नहीं कर रहे हैं । दरअसल मुकेश सिंघल ने शेखर मेहता के सम्मान समारोह के नाम पर जो भारी-भरकम रकम इकट्ठा करने की जो तैयारी दिखाई है, उसके कारण लोगों को शक हुआ है कि मुकेश सिंघल इस समारोह के सहारे सिर्फ राजनीति ही नहीं करना चाह रहे हैं, बल्कि पैसा बनाने की कोशिश में भी हैं - और इस कारण से दूसरे पदाधिकारियों तथा नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी बना ली है । मुकेश सिंघल मुसीबत व फजीहत से बचने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू के सामने समर्पण करने के लिए मजबूर तो हुए हैं, लेकिन खुद कन्वेनर बन कर किशोर कातरू को चेयरमैन बना कर प्रोटोकॉल का मजाक बनाने को लेकर विवाद में और गहरे धँस गए हैं । खुद उनके पक्ष के लोगों का कहना है कि मुकेश सिंघल को इतनी अक्ल तो होना ही चाहिए कि प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी होने के नाते उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के 'ऊपर' नहीं 'बैठना' चाहिए और अपने ही पक्ष के किसी पूर्व गवर्नर को कन्वेनर बनाना चाहिए था ।
मुकेश सिंघल के नजदीकियों का कहना है कि मुकेश सिंघल पहले पूर्व गवर्नर अरुण जैन को कन्वेनर बना रहे थे, लेकिन फिर अचानक से पता नहीं क्या हुआ कि उन्होंने अपना इरादा बदल लिया और खुद ही कन्वेनर बन गए । कुछ अन्य लोगों को लगता है और उनका कहना है कि मुकेश सिंघल को दरअसल डर हुआ कि वह यदि कन्वेनर और चेयरमैन में से कुछ भी नहीं बनेंगे, तो फिर कार्यक्रम में अपनी चौधराहट कैसे दिखा पायेंगे ? शेखर मेहता के सम्मान समारोह के बहाने मुकेश सिंघल असल में डिस्ट्रिक्ट के तथा बाहर के रोटेरियंस को दिखाना चाहते हैं कि डिस्ट्रिक्ट के नए चौधरी अब वह हैं - और इसीलिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी होने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर से ऊपर बैठ कर प्रोटोकॉल का मजाक बनाते हुए वह खुद ही कन्वेनर बन गए हैं । मुकेश सिंघल को लगता है कि इस तरह से उन्होंने कोलकाता में हुई अपनी उपेक्षा का 'बदला' ले लिया है । उल्लेखनीय है कि कोलकाता में हुए शेखर मेहता के सम्मान समारोह में देशभर के खास रोटेरियंस के बीच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू को खासी तवज्जो मिली थी और मुकेश सिंघल की पूरी तरह से उपेक्षा हुई थी । अपने नजदीकियों के बीच मुकेश सिंघल ने इस स्थिति के लिए इंटरनेशनल डायरेक्टर कमल सांघवी को जिम्मेदार ठहराया था । कोलकाता में जो हुआ था, उसका बदला लेने के लिए ही मुकेश सिंघल ने शेखर मेहता का सम्मान समारोह अपने डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट में करने की योजना बनाई; और डिस्ट्रिक्ट 3011 में हुए सम्मान समारोह में शेखर मेहता जब दिल्ली पहुँचे हुए थे, तब उन्होंने 19 दिसंबर की तारीख अपने डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट नॉमिनी के रूप में उनके सम्मान समारोह के लिए तय करवा ली ।
मुकेश सिंघल ने शेखर मेहता से तारीख तो ले ली और कार्यक्रम की तैयारी भी शुरू कर दी; लेकिन तैयारियाँ शुरू करने के साथ ही वह मुसीबत में फँसते जा रहे हैं । उनके नजदीकियों के अनुसार ही, पहले उन्होंने पूर्व गवर्नर आईएस तोमर के साथ मिलकर कार्यक्रम करने की योजना बनाई थी, और उन्हें कार्यक्रम का मुख्य संरक्षक बना लिया; किंतु जल्दी ही उन्हें समझ में आ गया कि आईएस तोमर को ज्यादा तवज्जो देने से डिस्ट्रिक्ट के दूसरे, खासकर सत्ताधारी पूर्व गवर्नर्स का सहयोग उन्हें नहीं मिलेगा । इसलिए, जैसा कि निमंत्रण पत्र में दिख रहा है, मुख्य संरक्षक होने के बावजूद आईएस तोमर का नाम उन्होंने फिलिसिटेशन कमेटी के सदस्यों की सूची में डाल दिया । मुकेश सिंघल को यह भी समझ में आया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को इग्नोर करके उनके लिए कार्यक्रम कर पाना संभव नहीं होगा, और तब वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के सामने समर्पण करने तथा कार्यक्रम में उन्हें शामिल करने के लिए मजबूर हुए । दोनों ही मामलों में प्रोटोकॉल की ऐसीतैसी करने के लिए उन्हें अपनों और परायों की जोरदार आलोचना सुननी/सहनी पड़ रही है । मुकेश सिंघल की इससे भी बड़ी फजीहत तब हुई जब शेखर मेहता के सम्मान समारोह के लिए उन्होंने प्रत्येक क्लब से 50/50 हजार रुपए सहयोग राशि के रूप में माँगे । अलीगढ़ में आयोजित हुए रोटरी डिस्ट्रिक्ट फाउंडेशन सेमीनार में मुकेश सिंघल द्वारा की गई इस माँग पर लोगों के बीच तीखी प्रतिक्रिया हुई; और लोगों के बीच आवाजें सुनी गईं कि शेखर मेहता के सम्मान समारोह के बहाने मुकेश सिंघल ने क्या अपनी जेब भरने की भी तैयारी कर ली है ? कई क्लब्स के पदाधिकारी कहते सुने गए हैं कि शेखर मेहता के सम्मान समारोह के नाम पर मुकेश सिंघल जो कर रहे हैं, वह संदेहास्पद है और इसलिए वह तो 50 हजार रुपए नहीं देंगे । शेखर मेहता के सम्मान समारोह को लेकर मुकेश सिंघल जिस तरह से चौतरफा मुसीबतों में घिर गए हैं तथा फजीहत का शिकार हो रहे हैं, उसे देखते हुए उनके नजदीकियों को ही लग रहा है कि मुकेश सिंघल ने शेखर मेहता के सम्मान समारोह के जरिये डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट जमाने/बनाने की जो योजना तैयार की थी, वह तो धूल में मिलती नजर आ रही है ।

Thursday, September 26, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3110 में आईएस तोमर की चौधराहट को बचाने के लिए शैलेंद्र कुमार राजु तथा अरुण जैन की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल को इस्तेमाल करने की रणनीति के चलते डिस्ट्रिक्ट में खासी घमासान वाली स्थिति बन गई है

अलीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का चयन/चुनाव करने वाली नोमीनेटिंग कमेटी में अपने अपने सदस्यों को 'भेजने' के लिए दोनों खेमों के नेताओं की जोरआजमाइश ने क्लब्स में 'जूता-लात' चलने जैसे माहौल बना दिए हैं । नोमीनेटिंग कमेटी के लिए होने वाले चुनाव के चक्कर में कई क्लब्स में झगड़े हो गए हैं, और वह टूटने के कगार पर पहुँच गए हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए चुनाव तो पवन अग्रवाल तथा सतीश जायसवाल के बीच होना है; लेकिन वास्तव में यह चुनाव पूर्व गवर्नर्स रवि अग्रवाल व आईएस तोमर के बीच प्रतिष्ठा व चौधराहट की लड़ाई बन गई है - कोढ़ में खाज वाली बात यह हुई है कि पवन अग्रवाल/रवि अग्रवाल की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू तथा सतीश जायसवाल/आईएस तोमर की तरफ से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल ने मोर्चा संभाला हुआ है । यानि चुनाव पवन अग्रवाल व सतीश जायसवाल के बीच है, लेकिन मुकाबला रवि अग्रवाल व आईएस तोमर का है - और जो किशोर कातरू व मुकेश सिंघल की लड़ाई बन गया है । मुकेश सिंघल को निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अरुण जैन व पूर्व गवर्नर शैलेंद्र कुमार राजु का समर्थन है । चर्चा और आरोप है कि रोटरी क्लब बरेली मैग्नेट सिटी में धोखे व फर्जी तरीके से प्रेसीडेंट की ईमेल आईडी इस्तेमाल करके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू व पूर्व गवर्नर रवि अग्रवाल को बदनाम करने की जो कोशिश हुई थी, उसके पीछे वास्तव में मुकेश सिंघल, अरुण जैन व शैलेंद्र कुमार राजु का ही हाथ था । 
डिस्ट्रिक्ट में चर्चा और आरोप हैं कि डिस्ट्रिक्ट में आईएस तोमर की चौधराहट को बचाने की जिम्मेदारी इन्हीं तीनों - मुकेश सिंघल, अरुण जैन व शैलेंद्र कुमार राजु ने ले ली है । मजे की बात यह है कि इससे पहले डिस्ट्रिक्ट में आईएस तोमर की चौधराहट को बनाने तथा बनाये रखने की जिम्मेदारी रवि अग्रवाल ने ले रखी थी; उन्हीं रवि अग्रवाल ने - जो अब आईएस तोमर के लिए चुनौती बने हुए हैं । रवि अग्रवाल को कई लोगों ने बार बार समझाया था कि आईएस तोमर उन्हें खिलौने की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, और उन्हें एक खिलौने से ज्यादा कुछ नहीं समझते हैं, इसलिए उनके चक्कर में ज्यादा न पड़ो/रहो - लेकिन रवि अग्रवाल को तब किसी की बात समझ में नहीं आती थी । बाद में लेकिन उन्होंने महसूस किया और पाया कि लोग उनसे ठीक ही कहते थे, उन्होंने ही आईएस तोमर को समझने व पहचानने में देर कर दी । यही कहानी अब मुकेश सिंघल, अरुण जैन व शैलेंद्र कुमार राजु के साथ घट रही है । इन तीनों में भी मुकेश सिंघल की स्थिति ज्यादा पेचीदा है । डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी होने के नाते मुकेश सिंघल को इतना खुल कर एक पक्ष नहीं बनना चाहिए; इससे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें परेशानी उठाना पड़ेगी और फजीहत का शिकार होना पड़ेगा । लेकिन मुकेश सिंघल पर अभी इस समझाइस का असर पड़ता नहीं दिख रहा है ।
डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लग रहा है और वह कह रहे हैं कि मुकेश सिंघल तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की चुनावी राजनीति में ज्यादा नहीं पड़ना/फँसना चाहते हैं, लेकिन शैलेंद्र कुमार राजु तथा अरुण जैन ने मुकेश सिंघल को जबरन फाँसा हुआ है - और वह इनके दबाव में मजबूर बने हुए हैं । शैलेंद्र कुमार राजु तथा अरुण जैन ने मुकेश सिंघल को जबरन इसलिए फाँसा/फँसाया हुआ है क्योंकि वह जान/समझ रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू के क्लब्स पदाधिकारियों के बीच बने प्रभाव से निपटने के लिए उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल की मदद की जरूरत होगी ही; मुकेश सिंघल के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की धौंस देकर ही वह क्लब्स के लोगों को प्रभावित कर सकते हैं तथा उन्हें अपने साथ आने के लिए लालायित कर सकते हैं । मुकेश सिंघल के गवर्नर वर्ष में पद देने का लालच देकर ही यह तिकड़ी क्लब्स के लोगों को बहला/फुसला/भड़का रही है, जिस कारण से क्लब्स में झगड़े पैदा हो रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के जरिये डिस्ट्रिक्ट में आईएस तोमर की चौधराहट को बचाने व बनाये रखने के लिए शैलेंद्र कुमार राजु तथा अरुण जैन की मुकेश सिंघल को इस्तेमाल करने की रणनीति के चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किशोर कातरू तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी मुकेश सिंघल के बीच जो टकराव खड़ा हो गया है, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट में खासी घमासान वाली स्थिति बन गई है ।

Wednesday, June 27, 2012

'गंदी राजनीति' और 'षड्यंत्र' का शिकार बने अरुण जैन, सुधीर मंगला की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी के लिए मुसीबत बने

नई दिल्ली | अरुण जैन को अध्यक्ष पद से हटाये जाने का मामला सुधीर मंगला के लिए आफत बनता दिख रहा है | सुधीर मंगला के लिए राहत की बात यही है कि अरुण जैन को क्लब में कोई समर्थन नहीं मिला और अरुण जैन अलग-थलग ही नज़र आये हैं | लेकिन अरुण जैन को अध्यक्ष पद से हटाये जाने को लेकर जिस तरह की चिट्ठी-पत्री शुरू हो गई है और उसमें जिस तरह से सुधीर मंगला को सीधा निशाना बनाया जा रहा है - उससे सुधीर मंगला के लिए मुसीबत खड़ी हो गई दिख रही है | 'रचनात्मक संकल्प' को एक बेनामी चिट्ठी मिली है जिसमें अरुण जैन को अध्यक्ष पद से हटाये जाने के लिए सुधीर मंगला को जिम्मेदार बताया गया है | इस बेनामी चिट्ठी में सुधीर मंगला पर गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि सुधीर मंगला ही रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी में हुए विभाजन के लिए जिम्मेदार थे और अब उनकी राजनीति रोटरी क्लब दिल्ली लुटियन को भी 'लुटाने' को तैयार है | सुधीर मंगला और क्लब के दूसरे सदस्य इस चिट्ठी के पीछे अरुण जैन को 'देखते' हैं, लेकिन अरुण जैन इस चिट्ठी के पीछे किसी भी रूप में होने से इंकार करते हैं | अरुण जैन लेकिन अपनी अध्यक्षी जाने का जो जो कारण बताते हैं, कमोवेश वही कुछ इस चिट्ठी में कहा/लिखा गया है | अरुण जैन क्लब के पदाधिकारियों के इस दावे को बिलकुल झूठा बताते हैं कि उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिया है | उल्लेखनीय है कि बबाल से और डिस्ट्रिक्ट के लोगों के सवालों से बचने के लिए क्लब के पदाधिकारियों ने दावा किया कि समय की कमी के चलते अरुण जैन ने खुद ही अध्यक्ष पद से हटने की पेशकश की थी और उन्होंने अपनी इच्छा से ही अध्यक्ष पद छोड़ा है | अरुण जैन का कहना है कि अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाने के लिए उनके पास समय की कोई कमी नहीं है और उन्होंने न कभी अध्यक्ष पद छोड़ने की बात कही और न इस्तीफ़ा दिया | अरुण जैन का कहना है कि उन्हें गंदी राजनीति का शिकार बनाया गया और नियमों को ठेंगा दिखा कर षड्यंत्रपूर्ण तरीके से अध्यक्ष पद से हटाया गया है | किसने 'गंदी राजनीति' या 'षड्यंत्र' किया, अरुण जैन आपसी बातचीत में यह नहीं बताते | वह यही कह कर किसी का नाम लेने से बचते हैं कि 'आप सब जानते हैं |' लेकिन उनका पक्ष लेते हुए जो चिट्ठी सामने आई है उसमें - जो हुआ, उसके लिए सुधीर मंगला को जिम्मेदार ठहराया गया है | चिट्ठी में कहा गया है कि अरुण जैन तो पूरी मेहनत से न सिर्फ अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे, बल्कि सुधीर मंगला की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए भी प्रयास कर रहे थे | चिट्ठी में कहा गया है कि क्लब के कुछेक सदस्य अरुण जैन को सहयोग तो नहीं ही कर रहे थे, तरह-तरह की बातों को फैला कर उन्हें बदनाम और कर रहे थे | अरुण जैन को यह देख/जान कर और बुरा लगा कि क्लब के ऐसे सदस्यों को सुधीर मंगला भी शह और समर्थन दे रहे हैं | अरुण जैन ने कई बार सुधीर मंगला को आगाह किया कि क्लब के कुछेक सदस्यों का जो रवैया और तरीका है, उसके चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी मुश्किल में पड़ जा सकती है, लेकिन सुधीर मंगला ने कभी भी उनकी बातों को तवज्जो नहीं दी; बल्कि अरुण जैन को ही ऐसी-ऐसी बातों के लिए जिम्मेदार ठहराया जिनके लिए अरुण जैन किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं थे | अरुण जैन को सुधीर मंगला से इस बात की गंभीर शिकायत रही कि सुधीर मंगला क्लब के उन लोगों के ज्यादा नज़दीक रहे जो अरुण जैन को न तो सहयोग करने को तैयार थे, और न अरुण जैन को काम करने दे रहे थे | अरुण जैन के हर फैसले पर ऊँगली उठाना और ऐतराज करना जिन्होंने अपना धर्म बना लिया था; तरह-तरह की बातें फैला कर जो लगातार अरुण जैन को बदनाम कर रहे थे | यह बात तो खुद सुधीर मंगला ने कही/बताई कि अरुण जैन अक्सर उनसे कहते थे कि क्लब में कुछेक लोग उन्हें काम नहीं करने दे रहे हैं | सुधीर मंगला का कहना लेकिन यह रहा कि अरुण जैन जब भी उनसे यह बात कहते, वह उनसे पूछते कि कौन उन्हें काम नहीं करने दे रहा है; अरुण जैन ने लेकिन उन्हें कभी किसी का नाम नहीं बताया | सुधीर मंगला का कहना है कि ऐसे में वह क्या कर सकते थे | सुधीर मंगला को हैरानी है कि अरुण जैन अपनी दशा के लिए उन्हें क्यों जिम्मेदार ठहरा रहे हैं | सुधीर मंगला को भले ही हैरानी हो, लेकिन अरुण जैन की तरफ से उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है | रोटरी क्लब दिल्ली राजधानी में हुए विभाजन के लिए सुधीर मंगला को जिम्मेदार ठहरा कर तथा सुधीर मंगला पर 'गंदी राजनीति' व 'षड्यंत्र' करने का आरोप मढ़ कर यह जता दिया गया है कि अरुण जैन को अध्यक्ष पद से हटा देने की कार्रवाई सुधीर मंगला के लिए मुसीबत बन गई है |