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Saturday, June 25, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में दीपक बाबु तथा कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की धोखों, गलतबयानियों व तिकड़मों भरी चालबाजियों ने रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि संजय खन्ना की चुनौतियों को और बढ़ाया

मुरादाबाद । रोटरी इंटरनेशनल के विशेष प्रतिनिधि के रूप में संजय खन्ना के 26 जून को पहली बार मुरादाबाद आने के मौके पर डिस्ट्रिक्ट 3100 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने से रह गए दीपक बाबु तथा राजनीतिबाज पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने फिर से अपना अपना पुराना खेल शुरू कर दिया है । दीपक बाबु 26 जून के 'अपने' कार्यक्रम में संजय खन्ना को आने के लिए राजी कर लेने को अपनी बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं, तो कुछेक पूर्व गवर्नर्स संजय खन्ना के आने की आड़ में गलत-सलत सूचनाएँ लोगों के बीच फैला रहे हैं - और इस तरह यह लोग अपना अपना स्वार्थ साधने की कोशिशों में एक बार फिर से जुट गए हैं । इसी तरह की हरकतें यह पहले भी करते रहे हैं और इन हरकतों से इन्हें फायदे की बजाए नुकसान ही होता रहा है; लेकिन इसके बावजूद फिर से इन्होंने अपनी हरकतों को शुरू कर दिया है - जिससे साबित हो रहा है कि इन्होंने बार-बार होने वाली अपनी फजीहतों से कोई सबक नहीं सीखा है । लोगों को सबसे ज्यादा हैरानी दीपक बाबु के रवैये पर है - डिस्ट्रिक्ट 3100 में अभी हाल के दिनों में जो कुछ भी हुआ है, उसका सबसे ज्यादा नुकसान दीपक बाबु को हुआ है; जो हुआ, उसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार भी दीपक बाबु ही रहे - लेकिन फिर भी वह कोई सबक सीखते हुए और मैच्योरिटी दिखाते हुए नहीं नजर आ रहे हैं । पता नहीं क्यों, वह इस सच्चाई को स्वीकार करने को तैयार नहीं हो रहे हैं कि अपनी बेवकूफियों से उन्होंने अपना खुद का ऐसा नुकसान कर लिया है, जिसकी भरपाई अब नहीं हो सकती है । वह नुकसान की 'मात्रा' को कम तो कर सकते हैं, 'इस' नुकसान को वह एक दूसरे तरह के फायदे में तो बदल सकते हैं - किंतु जो नुकसान उन्हें हुआ है, उसे अब वह नहीं बचा सकते हैं : उन तरीकों से तो हरगिज नहीं, जिन तरीकों से उन्होंने नुकसान को आमंत्रित किया है । दीपक बाबु लेकिन अपने 'तरीके' छोड़ने को तैयार नहीं दिख रहे हैं - उन्होंने जिस तरह की हरकतों से अपना खुद का नुकसान किया है, मजे की बात यह है कि उसी तरह की हरकतों से वह नुकसान को पलटने की कोशिश कर रहे हैं । और इसी कोशिश में उन्होंने संजय खन्ना की पहली यात्रा/मीटिंग को इस्तेमाल करने की चाल चली है ।
दीपक बाबु ने क्लब पदाधिकारियों को सम्मानित करने के नाम पर 26 जून को मुरादाबाद में एक कार्यक्रम की योजना बनाई है । इस कार्यक्रम की कोई वैधानिक मान्यता नहीं है, किंतु चूँकि कहीं से तो कोई शुरुआत होनी ही है - इसलिए डिस्ट्रिक्ट में हर किसी ने दीपक बाबू के इस कार्यक्रम को 'स्वीकार' कर लिया । संजय खन्ना के इस कार्यक्रम में आने की सहमति मिलने के बाद इस कार्यक्रम का महत्त्व और बढ़ गया । कार्यक्रम का महत्त्व बढ़ जाने से दीपक बाबु के दिमाग भी चढ़ गए । उन्होंने कार्यक्रम के साथ साथ कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग भी रख ली; और इसके लिए संजय खन्ना की सहमति भी ले ली । कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की पिछली दो मीटिंग्स में चूँकि कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के दीपक बाबु के साथ अच्छे अनुभव नहीं रहे थे, इसलिए उन्होंने संजय खन्ना से कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में शामिल होने से साफ मना कर दिया । उनका कहना रहा कि दीपक बाबु कॉलिज ऑफ गवर्नर्स के फैसलों का सम्मान नहीं करते हैं, अपने स्वार्थपूर्ण मनमाने फैसले थोपने का प्रयास करते हैं, और पक्षपातपूर्ण तरीके से व्यवहार करते हैं - इसलिए उनके साथ कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग करने का कोई मतलब नहीं है । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के इस विरोध के कारण संजय खन्ना ने कॉलिज ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग के दीपक बाबु के प्रस्ताव को खारिज कर दिया; उन्होंने कहा कि 26 जून के औपचारिक कार्यक्रम से पहले वह पूर्व गवर्नर्स से मिलेंगे और स्थितियों को जानेंगे/समझेंगे जरूर - लेकिन उस मुलाकात-बातचीत को किसी मीटिंग के रूप में नहीं देखा जायेगा । संजय खन्ना के इस रवैये से दीपक बाबु की 'योजना' को तगड़ा झटका लगा है । उनके नजदीकियों का कहना है कि दीपक बाबु ने सोचा यह था कि रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में संजय खन्ना के सामने वह सभी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स से कहलवा लेंगे कि डिस्ट्रिक्ट में कोई गड़बड़ नहीं है, सभी के बीच बहुत ही प्रेम-भाव है, एक-दूसरे के प्रति बहुत ही सम्मान-भाव है - और इस आधार पर वह संजय खन्ना से डिस्ट्रिक्ट को नॉन डिस्ट्रिक्ट स्टेटस से बाहर करवाने की संस्तुति करवा लेंगे । दीपक बाबु को लगता है कि इस तरह वह एक जुलाई से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद पा लेंगे ।
दीपक बाबु की इस योजना से परिचित मेरठ के कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स तो इतने जोश में आ गए कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट के बहाल हो जाने की खबरें अखबारों में छपवा भी दीं । मेरठ के कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स में जोश भरने का कारण दरअसल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की एक चिट्ठी भी बनी, जिसके आधार पर बृज भूषण, एमएस जैन और वागीश स्वरूप की तरफ से आरोपमुक्त किए जाने के दावे तक किए जाने लगे । लेकिन इनकी बदकिस्मती रही कि आरोपमुक्त किए जाने के इनके दावों पर डिस्ट्रिक्ट में किसी ने भी विश्वास नहीं किया । रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले को और केआर रवींद्रन की हाल की चिट्ठी को जिसने भी पढ़ा है, उसने पाया है कि केआर रवींद्रन के कहे हुए का मनमाना अर्थ निकालते/बताते हुए आरोपी तीनों पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की तरफ से आरोपमुक्त होने के दावे सरासर झूठे हैं । उल्लेखनीय है कि रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड ने अपनी अप्रैल की मीटिंग में जो फैसला लिया था, उसमें साफ शब्दों में डिस्ट्रिक्ट में आर्थिक व प्रशासनिक गड़बड़ियों में बृजभूषण, एमएस जैन और वागीश स्वरूप को प्रमुख भूमिका निभाने का दोषी घोषित किया था । 
अभी हाल ही में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने इन तीनों को संबोधित जो पत्र लिखा है उसमें उन्होंने स्पष्ट कहा है कि बोर्ड के फैसले में जो कहा गया है वह डिस्ट्रिक्ट के लीडर्स के रूप में उनकी कार्रवाइयों के संबंध में कहा गया है । केआर रवींद्रन ने अपने पत्र में कहीं भी यह नहीं कहा है कि बोर्ड का जो फैसला है वह गलत है और या वह बोर्ड के फैसले को वापस लेते हैं - जाहिर है कि बोर्ड का जो फैसला है वह अपनी जगह अभी भी कायम है । 
केआर रवींद्रन ने यह जरूर स्पष्ट किया है कि बोर्ड के फैसले का यह मतलब नहीं है कि इन तीनों ने कोई फ्रॉड किया है और या अपनी जेबें भरी हैं । इस स्पष्टीकरण के बावजूद, रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के फैसले में लगाया गया आरोप अभी भी मौजूद है और जो कम गंभीर नहीं है ।
दीपक बाबु और कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के इस रवैये ने दिखाया/जताया है कि पिछले अनुभवों के नतीजों से उन्होंने कुछ नहीं सीखा है; और वह अभी भी धोखों, गलतबयानियों व तिकड़मों के सहारे अपने स्वार्थ पूरे करने के मौके बनाने में लगे हैं । उनका यह रवैया इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की उस उम्मीद के खिलाफ है, जिसमें इन लोगों से सकारात्मक रवैया अपनाने की अपेक्षा की गई है । दीपक बाबु और कुछेक पूर्व गवर्नर्स के इस व्यवहार ने कई अन्य पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स व डिस्ट्रिक्ट के लोगों को जिस तरह से भड़का दिया है, उससे डिस्ट्रिक्ट का झगड़ा एक बार फिर सतह पर आता नजर आ रहा है । डिस्ट्रिक्ट के लिए बदकिस्मती की बात यह है कि यह सब ऐसे मौके पर हो रहा है, जबकि रोटरी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि के रूप में संजय खन्ना पहली बार डिस्ट्रिक्ट में आ रहे हैं । जाहिर तौर पर ऐसे में संजय खन्ना के लिए चुनौती और बढ़ जाती है । हर किसी की निगाह इसी बात पर है कि अलग अलग 'उद्देश्यों' व ग्रुपों में बँटे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स व डिस्ट्रिक्ट के अन्य सदस्य 26 जून के कार्यक्रम में संजय खन्ना के सामने क्या सीन 'बनाते' हैं और संजय खन्ना डिस्ट्रिक्ट की अपनी पहली यात्रा के क्या अनुभव लेकर मुरादाबाद से लौटते हैं ?

Saturday, February 7, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में सीओएल के लिए ललित मोहन गुप्ता की जीत के साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी ने मुश्किलों और चौतरफा घेराबंदियों के बावजूद डिस्ट्रिक्ट में सौहार्द बनाने तथा पिछले रोटरी वर्ष में मिली बदनामी के दाग को धोने/पोंछने में सफलता प्राप्त की

मेरठ । सीओएल के लिए दोबारा हुए चुनाव में ललित मोहन गुप्ता की जीत के बाद - मजेदार सीन यह बना है कि लोग बधाई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी को दे रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में लोग इस बात से ज्यादा खुश दिख रहे हैं कि संजीव रस्तोगी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में डिस्ट्रिक्ट में सौहार्द बनाने का प्रयास किया और उसमें कामयाब रहे । संजीव रस्तोगी के प्रयासों का ही नतीजा है कि डिस्ट्रिक्ट में इस वर्ष चुनावी बदमजगी जरा भी नहीं फैली तथा जो भी चुनाव - और चुनावी झगड़े थे, वह सब बिना किसी हील-हुज्जत के निपट गए हैं । संजीव रस्तोगी की यह उपलब्धि इसलिए और बड़ी है, क्योंकि उन्हें अपने गवर्नर-काल के झगड़ों-टंटों से तो निपटना ही था, साथ ही उन्हें विरासत में पिछले रोटरी वर्ष के झगड़ों को निपटाने का काम भी मिला था । पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में राकेश सिंघल ने जिस तरह डिस्ट्रिक्ट को तथा रोटरी को शर्मसार किया था, और जिनकी कारस्तानियों के चलते न सिर्फ डिस्ट्रिक्ट का माहौल खराब हुआ बल्कि रोटरी समुदाय में डिस्ट्रिक्ट 3100 की भारी बदनामी हुई - उसके बाद डिस्ट्रिक्ट को पटरी पर लाना संजीव रस्तोगी के लिए बड़ी चुनौती थी । सीओएल के चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से निपटा कर संजीव रस्तोगी ने उक्त चुनौती को सफलता पूर्वक अंजाम तक पहुँचाया है - और इसीलिए लोगों को ललित मोहन गुप्ता की जीत के मुकाबले संजीव रस्तोगी की 'जीत' ज्यादा बड़ी लग रही है ।
सीओएल का चुनाव कराना संजीव रस्तोगी के लिए भारी मुसीबत बना हुआ था । यह चुनाव कराने की मुसीबत उन्हें विरासत में मिली थी । सीओएल का यह चुनाव दरअसल पिछले रोटरी वर्ष में, राकेश सिंघल की गवर्नरी में हुआ था और राकेश सिंघल ने इसमें बेईमानीपूर्ण तरीके से योगेश मोहन गुप्ता को जितवा दिया था । ललित मोहन गुप्ता ने रोटरी इंटरनेशनल में राकेश सिंघल और योगेश मोहन गुप्ता की कारस्तानियों की शिकायत की, जिसे रोटरी इंटरनेशनल ने सही पाया और योगेश मोहन गुप्ता की जीत को निरस्त कर दिया । सिर्फ इतना ही नहीं, योगेश मोहन गुप्ता के लिए ऐसा माहौल बना दिया गया कि उन्होंने सीओएल के लिए दोबारा होने वाले चुनाव से बाहर रहने में ही अपनी भलाई समझी । योगेश मोहन गुप्ता के मुकाबले से बाहर होने से ललित मोहन गुप्ता को जो राहत मिली, वह राहत लेकिन वागीश स्वरूप ने छीन ली । सीओएल के लिए अचानक से प्रकट हुई अखिलेश सरन कोठीवाल की उम्मीदवारी ने ललित मोहन गुप्ता की मुश्किलों को और बढ़ा दिया ।
ललित मोहन गुप्ता से भी ज्यादा लेकिन संजीव रस्तोगी की मुश्किलें बढ़ीं । सीओएल के चुनाव के चक्कर में हालात धीरे धीरे पिछले वर्ष जैसी स्थितियों में पहुँचते दिख रहे थे । दरअसल सीओएल के चुनाव की आड़ में बृज भूषण और योगेश मोहन गुप्ता जैसे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी से बदला लेने की फिराक में जुट गए थे, तो कुछेक अन्य लोगों को भी सीओएल का चुनाव संजीव रस्तोगी से निपटने के मौके के रूप में दिख रहा था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में संजीव रस्तोगी ने गर्मी-सर्दी दिखा कर जो सहमति बनाई और जिसके कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट सुनील गुप्ता को संजय अग्रवाल की उम्मीदवारी के समर्थन से पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा, उसकी प्रतिक्रिया में सुनील गुप्ता भी उन लोगों के साथ खड़े दिखाई देने लगे जो संजीव रस्तोगी को फँसाना और बदनाम करने/कराने के खेल में लगे हुए थे । कई लोग इस बात से भी चिढ़े बैठे थे कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए संजीव रस्तोगी ने आम सहमति बना लेने में सफलता प्राप्त कर ली थी और इस सफलता से डिस्ट्रिक्ट में और रोटरी में अपना कद ऊँचा कर लिया था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव में तो संजीव रस्तोगी ने अपने प्रयत्नों से आम सहमति बना ली थी, लेकिन सीओएल के चुनाव में आम सहमति बनाना उनके लिए मेढ़कों को तोलने जैसा मुसीबतभरा काम साबित हो रहा था ।
संजीव रस्तोगी ने लेकिन अपने प्रयासों में कोई ढील नहीं छोड़ी । सीओएल के लिए आम सहमति बनाने के लिए एक तरफ तो उन्होंने पूर्व गवर्नर्स की गरिमा और प्रतिष्ठा का वास्ता दिया, और दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपनी कड़क व्यवस्था का संकेत देते हुए स्पष्ट कर दिया कि कोई भी उम्मीदवार कैम्पेन करता हुआ पाया गया तो वह उसकी उम्मीदवारी को निरस्त कर देंगे । संजीव रस्तोगी का सुझाव रहा कि सीओएल का चुनाव कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में ही हो जाना चाहिए और यहाँ हुए फैसले को सभी को स्वीकार कर लेना चाहिए । कभी गर्म तो कभी नर्म तेवर दिखा कर संजीव रस्तोगी ने सीओएल के चुनाव को कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में करवा लेने पर सभी उम्मीदवारों को अंततः राजी कर लिया । इस राजीनामे के बावजूद सीओएल के चुनाव में जो घमासान मचा, उसे देख कर कई बार यह आशंका भी उठी कि उक्त राजीनामा बना भी रह सकेगा या नहीं ? किंतु डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के 'रूप' में संजीव रस्तोगी ने पहले से ही ऐसी पक्की व्यवस्था कर ली कि उक्त राजीनामा किसी भी तरह से बाधित न हो सके ।
सीओएल के लिए दोबारा हुए चुनाव में कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में जो घमासान मचा, वह पहले कभी देखने में नहीं आया । जो पूर्व गवर्नर पिछले कई कई वर्षों से लोगों को नहीं दिखे हैं, वह भी इस चुनाव में वोट डालने आये । विष्णु सरन भार्गव घायल होने तथा उठने-बैठने की मुश्किलों के बावजूद वोट देने आये । वागीश स्वरूप ने अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में अच्छी फील्डिंग सजाई थी और उनके कुछेक समर्थक खासे आक्रामक तरीके से उनका कैम्पेन चलाये हुए थे । दूसरी तरफ, ललित मोहन गुप्ता ने बड़ा काम यह किया कि पिछले दिनों दीपक बाबू के साथ निकटता दिखाने के चक्कर में दिवाकर अग्रवाल के समर्थकों के साथ उनकी जो खटपट हो गई थी, उन्होंने उसे दूर कर लिया - जिसके बाद उनकी तरफ से मोर्चाबंदी सँभाली नीरज अग्रवाल ने । नीरज अग्रवाल का वागीश स्वरूप के साथ कुछ पुराना लफड़ा है, जिसका हिसाब नीरज अग्रवाल ने इस चुनाव में चुकता किया । यह चुनाव सिर्फ वागीश स्वरूप और ललित मोहन गुप्ता के बीच ही नहीं हो रहा था; जैसा कि पहले कहा गया है कि इस चुनाव के जरिये कुछेक लोग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजीव रस्तोगी से निपटने की फिराक में थे और इस कारण से भी वागीश स्वरूप और ललित मोहन गुप्ता के समर्थकों व विरोधियों के बीच अदला-बदली हुई और नए नए समीकरण बने । खासी अनिश्चितता से परिपूर्ण घमासान तरीके से हुए इस चुनाव में ललित मोहन गुप्ता को एक वोट से जीत मिली तो अधिकतर लोगों ने संतोष व्यक्त किया कि ललित मोहन गुप्ता ने इस चुनाव को लेकर पिछले वर्ष से लगातार जो मेहनत की और जो मुश्किल लड़ाई लड़ी अंततः उन्हें उसका फल मिला ।
ललित मोहन गुप्ता को तो फल मिला ही, संजीव रस्तोगी को ज्यादा बड़ा फल मिला । दो दिन पहले तक कोई भी उम्मीद नहीं कर रहा था कि सीओएल का चुनाव आराम से हो सकेगा । संजीव रस्तोगी के इसी वर्ष अभी हाल तक बने 'दुश्मन' सीओएल के चुनाव के जरिये संजीव रस्तोगी को लपेटने की कोशिश कर रहे थे । संजीव रस्तोगी ने लेकिन दृढ़ता से और खासी होशियारी से काम किया और एक मुश्किल दिख रहे काम को अंततः अंजाम तक पहुँचा दिया । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में संजीव रस्तोगी का कार्यकाल खासा चुनौतीपूर्ण रहा है । योगेश मोहन गुप्ता, बृज भूषण, राकेश रस्तोगी आदि जिन लोगों के भरोसे उन्होंने अपने गवर्नर-काल को चलाने की तैयारी की थी, उनकी तरफ से मदद मिलने की बजाये उन्हें कदम कदम पर काँटे ही बिछे मिले - जिस कारण से बारी बारी से उन्हें इन लोगों को पदमुक्त करना पड़ा । बृज भूषण के साथ तो उनकी खासी गर्मागर्मी भी हुई । इस सबके चलते कई बार ऐसा लगा/दिखा जैसे कि डिस्ट्रिक्ट में संजीव रस्तोगी अकेले पड़ गए हैं । इतनी सब मुश्किलों और घेराबंदियों के बावजूद संजीव रस्तोगी ने डिस्ट्रिक्ट में जिस तरह से सौहार्द बनाने में सफलता प्राप्त की तथा पिछले रोटरी वर्ष में मिली बदनामी के दाग को धोने/पोंछने का जो काम किया है, उससे डिस्ट्रिक्ट में और रोटरी समुदाय में वह बधाई के पात्र बने हैं ।

Saturday, October 12, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3100 में सीओएल के लिए बृज भूषण और योगेश मोहन गुप्ता के बीच छिड़ी लड़ाई में ललित मोहन गुप्ता और वागीश स्वरूप ने अपने लिए मौका देखा

मेरठ । योगेश मोहन गुप्ता ने सीओएल (काउंसिल ऑन लेजिसलेशन) के लिए अपनी उम्मीदवारी को प्रस्तुत करने के साथ-साथ ही जिस तरह से अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने का अभियान शुरू कर दिया है, उससे डिस्ट्रिक्ट 3100 की चुनावी राजनीति में खासी गर्मी पैदा हो गई है । योगेश मोहन गुप्ता चूँकि मानते और कहते हैं कि वह चुनाव में यदि खड़े हुए हैं तो सिर्फ लड़ने के लिए नहीं बल्कि 'जीतने' के लिए खड़े हुए हैं - इसलिए वह हर हथकंडा आजमाना अपना अधिकार और कर्तव्य समझते हैं । योगेश मोहन गुप्ता ने चूँकि इसी तर्ज पर सीओएल के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने का अभियान शुरू किया है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में गर्मी पैदा होना स्वाभाविक भी है । इस गर्मी का तापमान तब और बढ़ा जब मुरादाबाद के दौरे में योगेश मोहन गुप्ता के साथ ऐसे लोगों को देखा गया जो संजीव रस्तोगी के नजदीकी समझे जाते हैं । संजीव रस्तोगी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हैं और सीओएल की राजनीति में बृज भूषण अग्रवाल के समर्थन में समझे जाते हैं । उल्लेखनीय है कि सीओएल के लिए इस बार बृज भूषण अग्रवाल को शुरू से ही मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था, किंतु मेरठ से एक उम्मीदवार लाने के नाम पर जो कसरत हुई उसने बृज भूषण अग्रवाल के लिए हालात को मुश्किल बना दिया है ।
दरअसल, सीओएल के लिए योगेश मोहन गुप्ता ने इस बार - लगातार दूसरी बार जब एक बार फिर अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की सुगबुगाहट दिखाई तो मेरठ को 'एक' करने/रखने वाले लोगों ने लाटरी के जरिये बृज भूषण अग्रवाल और योगेश मोहन गुप्ता में से किसी एक की उम्मीदवारी तय करने का प्रस्ताव रखा । सभी की सहमति के बाद लाटरी खुली तो बाजी योगेश मोहन गुप्ता के हाथ लगी । बृज भूषण अग्रवाल ने लेकिन इस फैसले को स्वीकार करने से इंकार कर दिया । बृज भूषण अग्रवाल चूँकि दो बार सीओएल में जा चुके हैं, इसलिए कई लोग इस बार फिर प्रस्तुत होने वाली उनकी उम्मीदवारी के विरोध में कमर कस रहे थे । लाटरी से निकले फैसले को स्वीकार करने से इंकार करके बृज भूषण अग्रवाल ने अपने विरोधियों की संख्या को बढ़ाने का ही काम किया है । बृज भूषण अग्रवाल और उनके नजदीकियों को लेकिन इस विरोध की परवाह नहीं है । उन्हें अपनी राजनीतिक ताकत और अपने रणनीतिक कौशल पर भरोसा है । दूसरे लोगों को भी लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव रस्तोगी का समर्थन उन्हें ताकत दे रहा है, जिसके भरोसे वह मेरठ में बनी कोर-टीम के फैसले को भी न मानने का दम दिखा रहे हैं । लाटरी से निकले फैसले ने योगश मोहन गुप्ता की उम्मीदवारी को यदि ताकत दी है, तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट संजीव रस्तोगी के रवैये ने उनकी ताकत के गुब्बारे की हवा भी कम की हुई है ।
योगेश मोहन गुप्ता ने इसीलिये मुरादाबाद के दौरे में सुनियोजित तरीके से ऐसे लोगों को अपने साथ रखा जो संजीव रस्तोगी के नजदीक समझे जाते हैं । इस तरीके से उन्होंने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को एक तरफ तो यह दिखाने/बताने की कोशिश की है कि संजीव रस्तोगी उस तरह से बृज भूषण अग्रवाल के साथ नहीं हैं जैसे कि बृज भूषण अग्रवाल और उनके लोग बता/जता रहे हैं और दूसरी तरफ उन्होंने यह संदेश देने का काम किया है कि संजीव रस्तोगी के नजदीकियों को अपनी तरफ कर लेना उनके लिए मुश्किल नहीं होगा । योगेश मोहन गुप्ता की इस चाल के सामने आने के बाद बृज भूषण अग्रवाल और संजीव रस्तोगी की तरफ से जो सफाईयाँ आईं हैं उसने ही दरअसल गर्मी का अहसास कराया है ।
सीओएल की चुनावी लड़ाई में मेरठ को बँटा देख कर ललित मोहन गुप्ता को बल मिला है और इसी बल के चलते उन्होंने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है । उनका सीधा सा तर्क है कि बृज भूषण अग्रवाल दो बार और योगेश मोहन गुप्ता एक बार चूँकि सीओएल में रह चुके हैं इसलिए अब डिस्ट्रिक्ट के दूसरे लोगों को मौका मिलना चाहिए । उल्लेखनीय है कि ललित मोहन गुप्ता ने सीओएल के पिछले चुनाव में भी अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की थी, लेकिन एक बड़ी दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो जाने के कारण उनकी उम्मीदवारी खुद-ब-खुद ही समाप्त हो गई थी । इस बार, ललित मोहन गुप्ता जिस तर्क के साथ अपनी उम्मीदवारी को प्रमोट कर रहे हैं वह तर्क तो लोगों के बीच अपनी स्वीकार्यता बना रहा है, लेकिन इस स्वीकार्यता को समर्थन में बदलने के जिस मैकेनिज्म की जरूरत होती है उस पर ललित मोहन गुप्ता के लिए अभी बहुत काम करना बाकी है ।  
सीओएल के लिए वागीश स्वरूप ने भी हालाँकि अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की हुई है, लेकिन उनकी उम्मीदवारी में अपनी जीत से ज्यादा बृज भूषण को हराने का ताव ज्यादा है । उन्होंने ऐलान भी किया हुआ है कि बृज भूषण को हराने का माद्दा यदि किसी और में उन्हें दिखाई दिया तो वह अपनी उम्मीदवारी छोड़ कर उसका समर्थन करेंगे । वागीश स्वरूप अभी तक हालाँकि यह तय नहीं कर पाए हैं कि बृज भूषण अग्रवाल को हराने का माद्दा किस में है । मुजफ्फरनगर में अभी हाल ही में हुई इंटरसिटी के दौरान योगेश मोहन गुप्ता ने वागीश स्वरूप को यह विश्वास दिलाने का भरसक प्रयास किया कि वह बृज भूषण अग्रवाल को हरा सकते हैं । वागीश स्वरूप लेकिन अभी योगेश मोहन गुप्ता के इस दावे पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं । योगेश मोहन गुप्ता के तौर-तरीके भी वागीश स्वरूप को पसंद नहीं हैं इसलिए उम्मीद की जा रही है कि वागीश स्वरूप का समर्थन योगेश मोहन गुप्ता को तो शायद नहीं ही मिलेगा ।
इसी तरह की स्थितियों के चलते सीओएल को लेकर डिस्ट्रिक्ट 3100 में छिड़ी चुनावी लड़ाई दिलचस्प हो उठी है ।