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Friday, September 14, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में रवि सचदेवा के क्लब के अधिष्ठापन समारोह की सफलता के जरिये रवि सचदेवा और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों में भरा जोश सचमुच डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की गर्मी को बढ़ाते हुए उसे और दिलचस्प बना सकेगा क्या ?

नोएडा । रवि सचदेवा की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों की सक्रियता में अचानक से तेजी आ रही दिख रही है, जिसके चलते वह कल शाम एक मीटिंग कर रहे हैं - जिसमें रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के अभियान को लेकर आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी । दरअसल रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के नए पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में जुटी भीड़ ने रवि सचदेवा और उनकी उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों को खासा उत्साहित किया है, और उन्हें लगने लगा है कि वह यदि अपनी मुहिम को सावधानी से संयोजित करें और चलाएँ, तो रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को अच्छा समर्थन मिल सकेगा । उल्लेखनीय है कि रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस का अधिष्ठापन समारोह कहने को तो क्लब के नए पदाधिकारियों को अधिष्ठापित करने के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन उसे जिस बड़े और खास डिजाईन के साथ आयोजित किया गया था उसे देख कर हर किसी को ठीक ठीक समझ में आ गया कि इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के लिए डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच माहौल बनाना और संदेश पहुँचाना है । इस समारोह के चलते रवि सचदेवा की उम्मीदवारी में यदि एक ऊँची छलाँग देखी/पहचानी गई, तो इसके दो कारण रहे - एक तो इस समारोह में डिस्ट्रिक्ट के कई खास और आम लोगों की उपस्थिति तथा दूसरे पूर्व गवर्नर मुकेश अरनेजा के साथ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट दीपक गुप्ता और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी आलोक गुप्ता की मौजूदगी । सामान्य स्थितियों में इन तीनों की मौजूदगी के कोई ज्यादा मतलब नहीं होते, और इनकी मौजूदगी को सामान्य शिष्टाचार के पर्याय के रूप में ही देखा/पहचाना जाता - लेकिन क्लब में और समारोह में सतीश सिंघल के होने के विवाद के बीच समारोह में इन तीनों की मौजूदगी के कुछ खास अर्थ 'बन' गए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत रवि सचदेवा की उम्मीदवारी ने उन 'अर्थों' को राजनीतिक आयाम भी दे दिया ।
समारोह को मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता की मौजूदगी के चलते राजनीतिक आयाम इसलिए भी मिला - क्योंकि अभी तक डिस्ट्रिक्ट में जो राजनीतिक समीकरण रहे हैं, उसमें सतीश सिंघल, मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता एक खेमा बना कर रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के प्रति रोटरी इंटरनेशनल के कठोर रवैये के सामने आने से - जिसके तहत सतीश सिंघल के खिलाफ कार्रवाई हुई और शरत जैन को चेतावनी मिली - डिस्ट्रिक्ट की राजनीति के समीकरणों में उलट-फेर होने की संभावना तो दिखी, लेकिन अभी तक कोई नया समीकरण बनता हुआ नजर नहीं आया है । पिछले दिनों मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता ने हालाँकि सतीश सिंघल के साथ दूरी बनाने/दिखाने की कोशिश तो की, लेकिन रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के अधिष्ठापन समारोह में एक साथ मौजूदगी दिखा कर - वह फिर 'पुराने घेरे' में वापस लौटते हुए दिखे हैं । जो लोग राजनीति के घुमावदार मोड़ों को जानते/समझते हैं, वह मानते/कहते हैं कि मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता अभी रवि सचदेवा की उम्मीदवारी का झंडा उठाने की जल्दबाजी नहीं करेंगे/दिखायेंगे; यह लोग अभी माहौल भाँपेंगे और यदि रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को दम पकड़ता पायेंगे, तभी आगे आयेंगे । रवि सचदेवा और उनकी उम्मीदवारी के समर्थक व शुभचिंतक भी इस बात को समझ रहे हैं, और इसलिए वह दो स्तरों पर एकसाथ तैयारी करते हुए देखे जा रहे हैं - एक स्तर पर वह मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता को रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में 'दिखाने' का काम कर रहे हैं, और दूसरे स्तर पर वह ऐसा दिखाते हुए रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच स्वीकृति दिलाने का प्रयास कर रहे हैं ।
रवि सचदेवा और उनकी उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों ने रोटरी क्लब नोएडा एक्सेलेंस के अधिष्ठापन समारोह में दिए गए मुकेश अरनेजा, दीपक गुप्ता और आलोक गुप्ता के भाषणों के चुनिंदा अंशों को सोशल मीडिया के जरिये जिस तरह प्रचारित किया है, उसमें इन तीनों को रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के समर्थक के रूप में 'दिखाने' की होशियारी साफ झलकती है । हालाँकि रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के कुछेक समर्थकों का ही मानना/कहना है कि इस तरह की तरकीबों से क्षणिक रूप में तो माहौल में अनुकूलता और गर्मी लाई जा सकती है, किंतु इस अनुकूलता और गर्मी को यदि स्थाई रूप देना है तो इसके लिए जमीनी स्तर पर कुछ ठोस काम करना होगा । यह ठोस काम क्या होगा और इसे कैसे किया जायेगा, लगता है कि इसे तय करने के लिए ही रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के समर्थकों व शुभचिंतकों ने कल की बैठक बुलाई है । क्लब के अधिष्ठापन समारोह के रूप में रवि सचदेवा की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के उद्देश्य से हुए आयोजन के सात/आठ दिन के भीतर ही समर्थकों व शुभचिंतकों की मीटिंग करने की तैयारी से संकेत मिल रहा है कि अधिष्ठापन समारोह की सफलता ने रवि सचदेवा और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों को उत्साहित किया है, तथा वह और जोरशोर के साथ रवि सचदेवा की उम्मीदवारी के अभियान में जुटने की जरूरत समझ रहे हैं । कल शाम होने वाली मीटिंग का एक उद्देश्य समर्थकों व शुभचिंतकों को एकजुट व उत्साहित रखने के साथ-साथ अधिष्ठापन समारोह की सफलता को ज्यादा से ज्यादा भुनाने की कवायद के रूप में भी देखा/पहचाना जा रहा है । माना/समझा जा रहा है कि अधिष्ठापन समारोह की सफलता ने रवि सचदेवा और उनके समर्थकों व शुभचिंतकों में जो जोश भरा है, वह इस वर्ष होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव की गर्मी को और भड़कायेगा तथा उसे और दिलचस्प बनायेगा ।

Sunday, August 30, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेके गौड़ का बुरा हाल करने के उद्देश्य से ही मुकेश अरनेजा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रवीन निगम और दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी को उकसा कर उनका इस्तेमाल करने की चाल चली है क्या ?

गाजियाबाद । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेके गौड़ को रोटरी क्लब नोएडा एक्सीलेंस में अपनी आधिकारिक यात्रा में जिस अपमान का सामना करना पड़ा था, उसकी स्क्रिप्ट मुकेश अरनेजा द्वारा लिखे जाने की जानकारी उन्हें मिली है । जेके गौड़ के नजदीकियों का कहना है कि क्लब के लोगों ने ही जेके गौड़ को यह बात बताई है । रोटरी क्लब नोएडा एक्सीलेंस की जीओवी में जेके गौड़ के साथ जो हुआ, उसके लिए क्लब के पदाधिकारियों ने सीधे-सीधे मुकेश अरनेजा को जिम्मेदार ठहराया है । मुकेश अरनेजा ने यह बात तो कुछेक जगह कही भी है ही कि वह जेके गौड़ का भी वैसा ही हाल करेंगे, जैसा कि उन्होंने अमित जैन का किया था । मुकेश अरनेजा दरअसल जेके गौड़ से बुरी तरह खफा हैं । पहले तो वह जेके गौड़ से इस बात पर खफा थे, कि जेके गौड़ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उनकी बजाए रमेश अग्रवाल को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं; पिछले दिनों उनका पारा लेकिन तबसे और चढ़ गया है, जबसे जेके गौड़ ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के अधिकार-क्षेत्र का अतिक्रमण न करने की हिदायत दी है । उल्लेखनीय है कि जेके गौड़ को यह हिदायत मुकेश अरनेजा को तब देनी पड़ी, जब डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन के रूप में मुकेश अरनेजा ने एक ईमेल पत्र लोगों को लिखा/भेजा । जेके गौड़ ने मुकेश अरनेजा को स्पष्ट बताया कि इस तरह का कोई पत्र लिखने का अधिकार उन्हें नहीं है, और यह अधिकार सिर्फ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को है । जेके गौड़ के नजदीकियों के अनुसार, जेके गौड़ ने मुकेश अरनेजा को स्पष्ट संकेत दे दिए कि इस तरह का पत्र लिखने की उन्होंने यदि दोबारा कोशिश की तो वह उन्हें डिस्ट्रिक्ट रोटरी फाउंडेशन चेयरमैन पद से हटा देंगे । पद छिनने के डर से मुकेश अरनेजा ने दोबारा पत्र लिखने की तो हिम्मत नहीं की, लेकिन जेके गौड़ को सबक सिखाने का फैसला उन्होंने जरूर कर लिया । रोटरी क्लब नोएडा एक्सीलेंस में जेके गौड़ के साथ जो हुआ, उसके जरिए मुकेश अरनेजा ने जेके गौड़ को दरअसल झाँकी दिखाई है - और उनका कहना है कि पूरी पिक्चर तो अभी बाकी है ।
रोटरी क्लब नोएडा एक्सीलेंस की जीओवी में जेके गौड़ को एक के बाद एक दो बड़े झटके लगे । पहला झटका तो उन्हें तब लगा, जब वह तो निर्धारित समय पर मीटिंग स्थल पर पहुँच गए - किंतु मीटिंग के आयोजकों के रूप में नोएडा एक्सीलेंस के पदाधिकारियों का वहाँ कोई अतापता नहीं था । किसी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की ऐसी बेइज्जती शायद ही कहीं/कभी हुई होगी - कि किसी क्लब के पदाधिकारी जीओवी का कार्यक्रम तय करें, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को समय और जगह बताएँ; और समय पर पहुँचे ही नहीं तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को इंतजार करवाएँ । इसमें भी मजा यह रहा कि क्लब के पदाधिकारियों से जब किसी ने इस बारे में बात की तो 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' वाले अंदाज में क्लब के पदाधिकारियों ने जबाव दिया कि गौड़ को समय से पहुँचने की जरूरत क्या थी, उन्हें क्या पता नहीं है कि कार्यक्रमों में आने/पहुँचने में देर हो ही जाती है । इस रवैये के चलते जेके गौड़ को अपमान का घूँट पी कर रह जाना पड़ा । खैर, देर-सवेर जीओवी हुई - जिसमें जेके गौड़ को दूसरा झटका तब लगा जब क्लब के पदाधिकारियों ने रोटरी फाउंडेशन के लिए एक भी पैसा देने से साफ इंकार कर दिया । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जेके गौड़ को ऐसा दो-टूक इंकार किसी भी क्लब में सुनने को नहीं मिला । हर क्लब में, मरे से मरे क्लब में भी रोटरी फाउंडेशन के लिए की गई जेके गौड़ की माँग का सम्मान रखा गया, और कुछ न कुछ रकम अवश्य ही दी गई । किंतु रोटरी क्लब नोएडा एक्सीलेंस की जीओवी में रोटरी फाउंडेशन के लिए इकन्नी देने से भी साफ इंकार कर दिया गया । क्लब के पदाधिकारियों का कहना रहा कि उन्हें जो पैसे खर्च करने हैं, उसे वह रोटरी फाउंडेशन में देने की बजाए अपने प्रोजेक्ट्स में खर्च करेंगे । बाद में, क्लब के अधिष्ठापन समारोह में क्लब के कुछेक बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स घोषित भी किए गए - जिनकी लोगों के बीच भारी प्रशंसा भी हुई । इस प्रशंसा के बीच लेकिन रोटरी फाउंडेशन के प्रति उनके नकारात्मक रवैये को लेकर आलोचना के स्वर भी रहे - और इस आलोचना को इसलिए भी तवज्जो मिली, क्योंकि इसमें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेके गौड़ के अपमान का भाव भी था । 
उल्लेखनीय है कि रोटरी फाउंडेशन को लेकर कई एक रोटेरियंस के बीच नकारात्मक भाव देखने/सुनने को मिलते रहते हैं । कई एक रोटेरियंस इस बात की वकालत करते देखे/सुने जाते रहे हैं कि रोटरी फाउंडेशन में पैसे देने का कोई फायदा नहीं होता है, और उसमें पैसे देने की बजाए उस पैसे को अपने प्रोजेक्ट्स में खर्च करना चाहिए । ऐसी बातें दरअसल इसलिए होती हैं, क्योंकि बहुत से रोटेरियंस के सामने रोटरी फाउंडेशन का कॉन्सेप्ट ही स्पष्ट नहीं होता है, और वह उस कॉन्सेप्ट को जानने/समझने की बजाए अपनी ही मनमानी करना चाहते हैं । ऐसे लोग दरअसल कन्फ्यूज्ड लोग होते हैं । ये रोटरी जैसे इंटरनेशनल ऑर्गेनाजेशन में भी सदस्य बनना चाहेंगे, किंतु उसके कॉन्सेप्ट को भी नहीं अपनायेंगे । ये लोग ऐसे लोग होते हैं जो अपनी पसंद और अपनी ही मर्जी से मिठाई खाने का फैसला करते हैं, और फिर शिकायत करते हैं कि इसमें नमक तो है ही नहीं ! इनकी शिकायत बहुत सही होती है, और नमक खाने की इनकी इच्छा इनका अधिकार भी होता है - बस इनका फैसला गलत होता है । खाने की हर चीज में जिसे नमक चाहिए ही, उसे मिठाई खाने का फैसला करना ही नहीं चाहिए । जो लोग अपने पैसे से अपने प्रोजेक्ट्स करना चाहते हैं, वह कोई गलत सोच नहीं रखते हैं; लेकिन अपनी सोच को क्रियान्वित करने के लिए उन्हें अपना एक एनजीओ खोलना/बनाना चाहिए, या किसी स्थानीय एनजीओ से जुड़ना चाहिए - रोटरी जैसे इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन में उन्हें शामिल ही नहीं होना चाहिए । इसीलिए रोटरी क्लब नोएडा एक्सीलेंस के पदाधिकारियों का रोटरी फाउंडेशन में एक भी पैसा न देने के फैसले को हैरानी और संदेह के साथ देखा गया । हैरानी इसलिए भी हुई क्योंकि इस क्लब के एक वरिष्ठ सदस्य प्रवीन निगम डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की दौड़ में हैं । सवाल यह है कि प्रवीन निगम यदि गवर्नर बन गए, तो क्या तब भी वह रोटरी फाउंडेशन के प्रति वही रवैया रखेंगे/दिखायेंगे - जो अभी उनके क्लब के पदाधिकारी दिखा रहे हैं ?
उस समय तो बात सिर्फ हैरानी तक सिमट कर रह गई, लेकिन अब भेद खुला कि यह सब मुकेश अरनेजा की पढ़ाई/सिखाई का नतीजा था । क्लब के पदाधिकारियों ने ही जेके गौड़ को बताया है कि मुकेश अरनेजा ने ही उन्हें सलाह दी थी कि जीओेवी में देर से पहुँचोगे और जेके गौड़ को इंतजार करवाओगे । मुकेश अरनेजा का तर्क था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जेके गौड़ क्लब के लोगों को कुछ समझ ही नहीं रहा है, और क्लब के लोगों को उपेक्षित कर रहा है - इसलिए उसे क्लब की ताकत दिखाने/बताने की जरूरत है । रोटरी फाउंडेशन को लेकर मुकेश अरनेजा ने उन्हें समझाया था कि रोटरी फाउंडेशन के लिए ज्यादा से ज्यादा पैसे इकट्ठे करके जेके गौड़ अपना रिकॉर्ड बनाना चाहता है, इसलिए उसमें पैसे देने से क्लब को कोई फायदा नहीं होगा और क्लब को रोटरी फाउंडेशन में एक पैसा देने की भी जरूरत नहीं है । मुकेश अरनेजा ने उन्हें पूरी पट्टी पढ़ाई कि रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे लेने खातिर जेके गौड़ उन्हें तरह तरह के लालच देगा और तरह तरह की बातें बनायेगा, लेकिन उसकी बातों में मत आना और बस एक ही तर्क देना कि हमें जो पैसे खर्च करने हैं, उन्हें हम अपने ही प्रोजेक्ट्स में करेंगे । मुकेश अरनेजा की इस पढ़ाई/सिखाई का एक ही मकसद था और वह यह कि वह जेके गौड़ को अपमानित करवाना चाहते थे । 
मुकेश अरनेजा ने जब दीपक गुप्ता से रोटरी फाउंडेशन में पैसे दिलवाए थे, तब भी जेके गौड़ को नीचा दिखाने का काम किया था । जेके गौड़ ने अलग अलग जगहों पर कई बार यह शिकायत की है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर मनोज देसाई को रोटरी फाउंडेशन के लिए ड्रॉफ्ट सौंपते समय दीपक गुप्ता ने उन्हें बिलकुल अलग-थलग और अँधेरे में रखा । जेके गौड़ ने इसे अपने अपमान के रूप में देखा/पहचाना है । लोगों के बीच की चर्चाओं में इसे मुकेश अरनेजा की खुराफात के रूप में समझा गया है । इस खुराफात के जरिए मुकेश अरनेजा ने जेके गौड़ को अपमानित करने का सुख भले ही प्राप्त कर लिया हो, किंतु दीपक गुप्ता और प्रवीन निगम के लिए तो मुसीबत पैदा कर दी है । मुकेश अरनेजा की करनी के चलते जेके गौड़ इन दोनों की उम्मीदवारी के प्रति दुश्मनी का भाव रखने लगे हैं । रोटरी की चुनावी राजनीति में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर यदि किसी उम्मीदवारी के प्रति दुश्मनी का भाव अपना ले, तो फिर उसे तो कदम कदम पर मुसीबतें ही खड़ी मिलती हैं । प्रवीन निगम और दीपक गुप्ता इन मुसीबतों का सामना कर भी रहे हैं । इनकी मुसीबतों का रोचक परिदृश्य यह है कि यह जिन मुकेश अरनेजा को अपनी अपनी उम्मीदवारी का खैवनहार समझ रहे हैं, वही मुकेश अरनेजा इनकी मुसीबतों के वास्तविक कारण हैं । इससे यह और साफ हुआ है कि प्रवीन निगम और दीपक गुप्ता की उम्मीदवारी को उकसा कर मुकेश अरनेजा वास्तव में अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं; इनकी उम्मीदवारी के पक्ष में समर्थन बढ़े इसके लिए प्रयास करने की बजाए मुकेश अरनेजा इनकी उम्मीदवारी को सीढ़ी बना कर अपने ही काम बनाने/निकालने में लगे हुए हैं और इस बात की भी परवाह करते हुए नहीं दिख रहे हैं कि उनकी कारगुजारियों से इनकी उम्मीदवारी के समर्थकों की बजाए विरोधी बढ़ रहे हैं । ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह दोनों मुकेश अरनेजा के झाँसे में कब तक फँसे रहते हैं ।

Sunday, August 23, 2015

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रवीन निगम की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के उद्देश्य से आयोजित हो रहे क्लब के अधिष्ठापन समारोह में मुकेश अरनेजा को जाने से रोकने की कोशिशें सफल होंगी क्या ?

नई दिल्ली । प्रवीन निगम के क्लब के अधिष्ठापन समारोह में विशेष आमंत्रित के रूप में शामिल होना स्वीकार करके मुकेश अरनेजा ने प्रवीन निगम के समर्थकों द्वारा किए गए उस दावे को विश्वसनीय बनाने का काम किया है, जिसमें प्रवीन निगम की उम्मीदवारी को मुकेश अरनेजा के समर्थन की बात कही गई है । मजे की बात यह है कि मुकेश अरनेजा के समर्थन का दावा अशोक गर्ग और दीपक गुप्ता भी कर रहे हैं । मुकेश अरनेजा का समर्थन सचमुच किसके साथ है, इसे खुद मुकेश अरनेजा स्पष्ट कर सकते हैं - और उनके स्पष्ट कर देने से सारा कन्फ्यूजन खुद-ब-खुद दूर हो जायेगा । मुकेश अरनेजा लेकिन कन्फ्यूजन दूर करने की बजाए कन्फ्यूजन बनाए रखने में दिलचस्पी ले रहे हैं - इसलिए सारा मामला और भी ज्यादा संदेहास्पद हो गया है । अशोक गर्ग तथा दीपक गुप्ता के शुभचिंतकों ने अपने अपने तरीके से मुकेश अरनेजा को प्रवीन निगम के क्लब के अधिष्ठापन समारोह से 'दूर' रहने का सुझाव दिया है, जिससे कि प्रवीन निगम के समर्थकों के उस दावे को झूठा ठहराया जा सके - जिसमें प्रवीन निगम की उम्मीदवारी को मुकेश अरनेजा के समर्थन की बातें की गई हैं । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए प्रस्तुत प्रवीन निगम की उम्मीदवारी के समर्थकों ने पिछले दिनों तो यहाँ तक दावा किया कि प्रवीन निगम के क्लब के अधिष्ठापन समारोह के जोरशोर से होने के पीछे का 'आईडिया' मुकेश अरनेजा की खोपड़ी में ही उपजा था । मुकेश अरनेजा की खोपड़ी वास्तव में बड़ी उपजाऊ किस्म की खोपड़ी है, जिसमें तीन-तिकड़मों के नए नए फार्मूले निरंतर पैदा होते रहते हैं और कुलबुलाते रहते हैं । यह बात चूँकि जगजाहिर है, इसलिए हर किसी ने प्रवीन निगम के समर्थकों के इस दावे पर सहज ही विश्वास कर लिया । 
दरअसल प्रवीन निगम की उम्मीदवारी चूँकि लोगों के बीच अपनी कोई स्वीकार्यता बना पाते हुए नहीं नजर आ रही है, इसलिए लोगों को उनकी हर कार्रवाई एक फिजूल की कसरत जैसी लगती रही है । लोगों को भले ही उनकी हर कार्रवाई फिजूल की कसरत लगती रही हो, किंतु उम्मीदवारी को लेकर उनके और उनके समर्थकों के जोश में कोई फर्क नहीं देखा/पाया गया - जिससे इस प्रश्नवाचक चर्चा को बल मिला कि प्रवीन निगम व उनके समर्थकों को अपनी उम्मीदवारी के प्रति जोश दिखाने लिए खाद-पानी आखिर कहाँ से मिल रहा है ? इसी प्रक्रिया में प्रवीन निगम के क्लब के अधिष्ठापन समारोह के खासे जोरशोर से होने की चर्चा सुनी गई, तो लोगों के बीच सुगबुगाहट फिर तेज हुई कि प्रवीन निगम को अपने क्लब का अधिष्ठापन समारोह भव्य तरीके से करवाने के लिए आखिर सलाह/सुझाव कहाँ से मिला है ? लोगों को इस पर ज्यादा माथापच्ची नहीं करना पड़ी, क्योंकि प्रवीन निगम के समर्थकों ने खुद से ही इसका जबाव दे दिया और मुकेश अरनेजा का नाम लिया । उनका कहना रहा कि यह मुकेश अरनेजा का ही सुझाव रहा कि क्लब का अधिष्ठापन धूमधाम से करोगे, तो उम्मीदवारी की हवा बनेगी । अधिष्ठापन समारोह को कंट्री इन में करने का सुझाव भी मुकेश अरनेजा का ही है, अन्यथा प्रवीन निगम और उनके क्लब के सदस्य तो यह समारोह नोएडा के किसी होटल में करना चाहते थे - किंतु मुकेश अरनेजा ने उन्हें समझाया कि यह समारोह उन्हें गाजियाबाद में करना चाहिए और ऐसी जगह करना चाहिए, जहाँ गाजियाबाद के साथ साथ दिल्ली के लोगों के लिए भी पहुँचना आसान हो । उनके अनुसार तो अधिष्ठापन समारोह के निमंत्रण पत्र का मैटर भी मुकेश अरनेजा ने ही तैयार करवाया । धूमधाम से अधिष्ठापन समारोह करने के मुकेश अरनेजा के आईडिया ने वास्तव में 'काम' किया और प्रवीन निगम की उम्मीदवारी अचानक से महत्वपूर्ण हो उठी है ।
प्रवीन निगम की उम्मीदवारी के महत्वपूर्ण हो उठने से मुकेश अरनेजा के भरोसे उम्मीदवार बने अशोक गर्ग तथा दीपक गुप्ता के समर्थकों के बीच खलबली मचना स्वाभाविक ही था, और वह मची भी । इन दोनों के समर्थकों ने अपने अपने तरीके से मुकेश अरनेजा पर दबाव बनाया है कि वह प्रवीन निगम के क्लब के अधिष्ठापन समारोह में न जाएँ । इनका तर्क है कि प्रवीन निगम की उम्मीदवारी को मुकेश अरनेजा का सहयोग व समर्थन मिलने की बातों से लोगों के बीच बहुत कन्फ्यूजन पैदा हो रहा है; इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए जरूरी है कि मुकेश अरनेजा कोई भी बहानेबाजी करके प्रवीन निगम के क्लब के अधिष्ठापन समारोह में न पहुँचे - जिससे कि प्रवीन निगम की उम्मीदवारी के समर्थकों द्वारा मुकेश अरनेजा का सहयोग व समर्थन मिलने के बाबत किए जा रहे दावे लोगों के बीच विश्वसनीयता प्राप्त न कर सकें । इस सब स्थिति में मजेदार सीन यह बना हुआ है कि एक तरफ तो प्रवीन निगम की उम्मीदवारी के समर्थकों की तरफ से दावा किया जा रहा है कि मुकेश अरनेजा को उनके क्लब के अधिष्ठापन समारोह में आने/पहुँचने से रोकने की कोशिशें सफल नहीं होंगी, और मुकेश अरनेजा अवश्य ही उनके क्लब के अधिष्ठापन समारोह में पहुँचेंगे; जबकि दूसरी तरफ अशोक गर्ग व दीपक गुप्ता के समर्थकों की तरफ से बताया जा रहा है कि मुकेश अरनेजा ने उन्हें आश्वस्त किया है कि वह कोई अच्छा सा बहाना सोच/खोज रहे हैं, जिसे वह समारोह में न पहुँचने के लिए ऐन मौके पर इस्तेमाल कर सकें । यह देखना सचमुच दिलचस्प होगा कि इन दोनों तरफ के दावों में से किसका दावा सच साबित होगा । 
यूँ तो किसी उम्मीदवार के समारोह में कौन नेता जाता है, या नहीं जाता है - इसका कोई खास मतलब होता नहीं है, और न मतलब को लेकर किसी तरह का कोई विवाद ही होता है । जैसे, प्रवीन निगम के क्लब के अधिष्ठापन समारोह में मुकेश अरनेजा के साथ रमेश अग्रवाल का नाम भी विशेष आमंत्रितों वाली कैटेगरी में है; लेकिन रमेश अग्रवाल की पक्षधरता को लेकर कोई विवाद ही नहीं है । उल्लेखनीय है कि लोगों के बीच रमेश अग्रवाल को सुभाष जैन की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा/पहचाना जाता है, किंतु न तो सुभाष जैन की उम्मीदवारी के समर्थकों को ही इस बात पर आपत्ति करते हुए सुना गया है कि प्रवीन निगम के क्लब के समारोह में रमेश अग्रवाल क्यों जा रहे हैं, और न ही प्रवीन निगम के समर्थकों की तरफ से रमेश अग्रवाल से सहयोग व समर्थन मिलने की बातें कही/सुनी जा रही हैं । यह सारा झमेला मुकेश अरनेजा को लेकर ही है । दरअसल राजनीति में धोखेबाजी करने को लेकर मुकेश अरनेजा का ज्यादा 'नाम' है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के संदर्भ में मुकेश अरनेजा का नाम यदि तीन तीन उम्मीदवारों के साथ जुड़ रहा है, तो यह वास्तव में मुकेश अरनेजा की करनी का ही तो नतीजा है ! मुकेश अरनेजा ने तीन तीन लोगों को सहयोग व समर्थन देने का झाँसा देकर उम्मीदवारी के लिए जिस तरह से उकसाया हुआ है -  उसके चलते ही उनकी भूमिका संदेहास्पद बनी हुई है । प्रवीन निगम की उम्मीदवारी को प्रमोट करने के इरादे से हो रहे उनके क्लब के अधिष्ठापन समारोह में मुकेश अरनेजा की संलग्नता की बातों ने उनकी भूमिका को लेकर जन्मे संदेहों को पुख्ता बनाने का ही काम किया है ।