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Monday, August 17, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में, इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता की तारीफों से रंजन ढींगरा और दीपक तलवार की उम्मीदवारी को जोन तथा डिस्ट्रिक्ट में खासी चर्चा और ऊँची उड़ान मिली

नई दिल्ली । रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के प्रेसीडेंट अरुण जैन तथा उनकी टीम के सदस्यों के अधिष्ठापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट इलेक्ट शेखर मेहता ने वाटर मिशन के कामकाज का उदाहरण देते हुए रंजन ढींगरा की जैसी जोरदार तारीफ की, उससे डिस्ट्रिक्ट और जोन 4 के रोटरी नेताओं के बीच खासी हलचल मची है । शेखर मेहता की उक्त तारीफ के चलते डिस्ट्रिक्ट में दीपक तलवार तथा जोन 4 में रंजन ढींगरा की राजनीतिक स्थिति को उड़ान भरते देखा/पहचाना जा रहा है । यूँ तो किसी क्लब के कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ता का किसी की तारीफ करने का कोई ज्यादा मतलब नहीं होता है, क्योंकि उसे प्रोटोकॉल की औपचारिकता के रूप में देखा/पहचाना जाता है । किसी भी क्लब के कार्यक्रम में वक्ता के सामने क्लब के पदाधिकारियों तथा नेताओं की तारीफ करने की 'मजबूरी' होती ही है, जिसे वह खुशी खुशी निभाता है - इसलिए उस तारीफ का कोई खास अर्थ होता नहीं है । लेकिन रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के कार्यक्रम में शेखर मेहता का रंजन ढींगरा की तारीफ करने को इसलिए महत्त्व दिया जा रहा है, क्योंकि रंजन ढींगरा तो इस क्लब के सदस्य नहीं हैं - और इसलिए मुख्य अतिथि के रूप में शेखर मेहता के सामने रंजन ढींगरा की तारीफ करने की कोई मजबूरी नहीं थी । शेखर मेहता द्वारा की गई तारीफ को सामान्य बात मान कर अनदेखा किया जा सकता था, यदि रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी पूर्व गवर्नर दीपक तलवार का क्लब न होता और दीपक तलवार जोन 4 में होने वाले इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव की नोमीनेटिंग कमेटी के उम्मीदवार न होते - और जोन 4 में बनने वाली नोमीनेटिंग कमेटी के लिए उन्हें इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार रंजन ढींगरा के उम्मीदवार के रूप में न देखा जा रहा होता ।
मजे की बात यह देखने में आई कि दीपक तलवार के क्लब के कार्यक्रम में बोलते हुए शेखर मेहता ने दीपक तलवार की कोई तारीफ नहीं की । इस पूरे वाकये में राजनीति 'देखने'/पहचानने वाले लोगों का कहना है कि शेखर मेहता ने कुशल राजनीतिक की तरह काम किया और कोई बखेड़ा खड़ा होने का मौका छोड़े बिना उन्होंने दीपक तलवार और रंजन ढींगरा को एक साथ 'प्रोमोट' कर दिया । डिस्ट्रिक्ट 3011 में नोमीनेटिंग कमेटी में प्रतिनिधित्व के चुनाव की प्रक्रिया चूँकि शुरू हो चुकी है, और उसके लिए दीपक तलवार की उम्मीदवारी की बात भी चूँकि सभी के संज्ञान में है - इसलिए शेखर मेहता यदि दीपक तलवार के बारे में कुछ कहते, तो चुनावी आचारसंहिता के उल्लंघन के आरोपी बनते । शेखर मेहता ने होशियारी दिखाते हुए दीपक तलवार के बारे में तो कुछ नहीं कहा, लेकिन रंजन ढींगरा की जमकर तारीफ की - और उन्हें दूरदर्शिता व चाकचौबंद योजना के साथ काम करने वाला रोटेरियन बताया । शेखर मेहता ने रेखांकित किया कि केंद्र सरकार जलयोजना को लेकर अब जो रूपरेखा बना रही है, रंजन ढींगरा के नेतृत्व में रोटरी उस रूपरेखा को पहले ही तैयार कर चुकी है तथा सरकारी पदाधिकारियों व जलयोजना के विशेषज्ञों ने रंजन ढींगरा के नेतृत्व में तैयार हुई रोटरी की रूपरेखा को पूरी तरह परफेक्ट पाया है । रंजन ढींगरा की उपलब्धि के बारे में शेखर मेहता ने जिस विस्तार से बातें कीं, उसमें दीपक तलवार का नाम लिए बिना दीपक तलवार के लिए प्रशंसा के भाव छिपे नहीं रह सके - और इसी कारण से शेखर मेहता की बातों को सुनने वाले डिस्ट्रिक्ट के आम और खास रोटेरियंस का ध्यान बार-बार दीपक तलवार की उम्मीदवारी पर जाता रहा ।
शेखर मेहता यदि खुलकर रंजन ढींगरा की तारीफ कर रहे हैं, तो उसमें स्वाभाविक रूप से रंजन ढींगरा के नोमीनेटिंग उम्मीदवार दीपक तलवार की तारीफ के भाव हैं ही - जिन्हें पहचानने/पकड़ने में डिस्ट्रिक्ट 3011 ही नहीं, जोन 4 के अन्य डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों व नेताओं ने कोई चूक नहीं की । इस संदर्भ में, रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के सदस्य और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट अनूप मित्तल की कुछेक मौकों पर शेखर मेहता द्वारा की गई तारीफ का भी लोगों ने खासा नोटिस लिया । नोटिस लेने वाले लोगों का ही कहना/बताना है कि शेखर मेहता द्वारा की गई अनूप मित्तल की तारीफ को यदि औपचारिकता मान/समझ भी लें, तो भी अनूप मित्तल की तारीफ के लिए शेखर मेहता ने जिन मौकों को 'चुना' और रंजन ढींगरा के काम के साथ उन्हें जिस तरह से 'दिखाया' - उसके राजनीतिक संकेत बहुत साफ हैं । शेखर मेहता के भाषण में रंजन ढींगरा की तारीफ का जोन 4 के रोटेरियंस के बीच जो ढिंढोरा पिटा और उसके जो राजनीतिक अर्थ निकाले गए, उसका एक बड़ा कारण यह भी रहा कि रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के पदाधिकारियों के अधिष्ठापन कार्यक्रम में भारी संख्या में विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारी और नेता जुटे - और सिर्फ जुटे ही नहीं, बल्कि कार्यक्रम में 'शामिल' भी हुए/रहे । ऑनलाइन कार्यक्रमों में शामिल हुए लोगों को कार्यक्रम में 'बनाये' रखना एक बड़ी चुनौती होती है; उक्त चुनौती से निपटने के लिए रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के कार्यक्रम के आयोजकों ने कार्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया कि वह सभी के लिए आकर्षक बना । आकर्षक प्रस्तुति के कारण विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों तथा पूर्व गवर्नर्स नेताओं की उपस्थिति में निरंतरता बनी, और इसके चलते प्रत्यक्ष रूप से रंजन ढींगरा की और अप्रत्यक्ष रूप से दीपक तलवार की शेखर मेहता द्वारा की गई तारीफ के 'राजनीतिक उद्देश्यों' को रोटेरियंस के बीच चर्चा मिली ।

Tuesday, December 4, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अनूप मित्तल के स्वागत समारोह के बहाने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति जो नई करवट लेती हुई दिखी है, उसमें अशोक कंतूर तथा अजीत जालान की उम्मीदवारी की तैयारी मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है

नई दिल्ली । रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी द्वारा आयोजित अनूप मित्तल के सम्मान-समारोह में अशोक कंतूर तथा अजीत जालान की अनुपस्थिति को उन दोनों के लिए बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । अशोक कंतूर इस वर्ष अनूप मित्तल से चुनाव हारने के बाद अगले रोटरी वर्ष में फिर से अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की घोषणा कर चुके हैं, तो अजीत जालान बहुत पहले से ही अगले रोटरी वर्ष में उम्मीदवार होने/बनने का ऐलान करते आ रहे हैं । ऐसे में उन्हें डिस्ट्रिक्ट में होने वाले हर छोटे/बड़े आयोजन में 'दिखना' चाहिए - रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के एक बड़े आयोजन में लेकिन दोनों ही नहीं दिखे - खुद उनकी तरफ से बताया गया है कि उन्हें 'उचित' तरीके से समारोह में निमंत्रित ही नहीं किया गया ।सामान्य स्थिति होती, तो उनकी अनुपस्थिति और या उचित तरीके से उन्हें निमंत्रित न किए जाने की बात का कोई विशेष मतलब नहीं होता; डिस्ट्रिक्ट लेकिन चूँकि इस समय राजनीतिक रूप से एक असामान्य स्थिति में है - इसलिए यह बात अशोक कंतूर और अजीत जालान के लिए खासी अहम् है और मुसीबत का संकेत है । उक्त समारोह हालाँकि था तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने के उपलक्ष्य में अनूप मित्तल के स्वागत-सम्मान में; लेकिन एक तरह से इसे अनूप मित्तल की उम्मीदवारी का समर्थन करने वाले खेमे के शक्ति-प्रदर्शन के रूप में देखा/पहचाना गया; उपस्थितों/अनुपस्थितों की पहचान करते हुए साफ पहचाना जा सकता है कि उक्त आयोजन को खास उद्देश्य के साथ डिजाईन किया गया था और यह विजेता उम्मीदवार द्वारा दी गई पार्टी ही नहीं थी - कई लोगों को लगता है कि उक्त आयोजन वास्तव में डिस्ट्रिक्ट की भविष्य की चुनावी राजनीति का संकेत देता है, और संकेत देने का काम जैसे जानबूझ कर किया गया है । अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए संभावित उम्मीदवारों के रूप में देखे/पहचाने जा रहे महेश त्रिखा तथा रवि गुगनानी की उपस्थिति ने मामले को और स्पष्ट कर दिया है ।
अनूप मित्तल के स्वागत-सम्मान समारोह में कुछेक विरोधियों को जिस तरह से दूर रखा गया तथा कुछेक को शामिल होने का मौका मिला, उससे डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति एक नई करवट लेती हुई दिख रही है । इस नई करवट में ही अशोक कंतूर तथा अजीत जालान के लिए मुश्किलों के संकेत नजर आ रहे हैं । दरअसल डिस्ट्रिक्ट में चुनावी राजनीति का जो सीन बनता हुआ दिख रहा है, उसमें यह बात साफ जाहिर होती हुई नजर आ रही है कि अशोक कंतूर को अगली बार उन लोगों का समर्थन मिलना ही मुश्किल क्या, असंभव ही होगा जिन्होंने इस बार उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया था और जिनके समर्थन के बावजूद वह जीत नहीं पाए थे । उल्लेखनीय है कि रोटरी की चुनावी राजनीति में हर कहीं प्रायः देखा जाता है कि चुनाव हारने वाले के साथ उसके विरोधी रहे लोगों के बीच भी हमदर्दी पैदा हो जाती है, जिसका फायदा उसे अगली बार मिल जाता है; लेकिन अशोक कंतूर के मामले में ऐसा होता हुआ नजर नहीं आ रहा है । ऐसा दरअसल निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी के कारण हो रहा है । रवि चौधरी ने अपनी हरकतों और कारस्तानियों से तमाम लोगों को अपना विरोधी बनाया हुआ है; उधर अशोक कंतूर पर रवि चौधरी की ऐसी गहरी छाप लगी हुई है कि जिन लोगों को अशोक कंतूर से हमदर्दी है भी, वह भी रवि चौधरी की छाप देख कर उनसे दूर हट जाते हैं । अशोक कंतूर के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि इस बार के चुनाव में कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ देने वाले अजीत जालान अगले वर्ष उम्मीदवार बनने की तैयारी करने लगे हैं । अजीत जालान हालाँकि पहले से ही अगले वर्ष उम्मीदवार होने की बात कर रहे थे, लेकिन यह तब की बात है जब वह और उनके गॉडफादर्स अशोक कंतूर की जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त थे । अशोक कंतूर का कहना है कि इस बार चूँकि उन्हें कामयाबी नहीं मिली है, इसलिए उनके समर्थक रहे लोगों को उन्हें और मौका देना चाहिए; अजीत जालान और उनके समर्थक नेता फिलहाल लेकिन अशोक कंतूर को एक और मौका देने के लिए राजी नहीं दिख रहे हैं ।
अशोक कंतूर और अजीत जालान के लिए मुसीबत की बात लेकिन यह भी है कि इनमें से जो भी पीछे हटा, उसके लिए आगे भी रास्ते बंद ही हो जायेंगे और फिर इन्हें गवर्नर बनने की अपनी इच्छा को दफ्न ही करना होगा । इन दोनों के साथ समस्या वास्तव में यह देखी/पहचानी जा रही है कि इनका अपना कोई 'जज़्बा' नहीं है; लोगों को लगता है कि अशोक कंतूर ने रवि चौधरी की ऊँगली पकड़ी हुई है, जिसका हश्र उन्होंने इस बार देख लिया है, जबकि अजीत जालान को विनोद बंसल से उम्मीद है - लेकिन लगता नहीं है कि विनोद बंसल अपने कंधे पर अजीत जालान को बैठा कर चुनावी वैतरणी पार करवाने में ज्यादा दिलचस्पी लेंगे । ऐसे में, इनमें से जो भी अपनी उम्मीदवारी से पीछे हटेगा, वह लोगों के बीच चर्चित बात को ही सही साबित करेगा और फिर कभी दूसरी पहचान नहीं बना सकेगा । यानि इनके लिए आगे खाई है तो पीछे कुआँ । गौर करने की बात यह है कि संभावित उम्मीदवारों के रूप में जिन महेश त्रिखा व रवि गुगनानी के नाम अभी चर्चा में हैं, उनकी डिस्ट्रिक्ट में अभी कोई खास पहचान या सक्रियता नहीं है और इस नाते यह दोनों ही अशोक कंतूर और/या अजीत जालान के लिए कोई खास चुनौती नहीं हैं - लेकिन अशोक कंतूर और अजीत जालान जब पहले से ही हार माने बैठे हों, तो फिर दूसरा कोई क्या कर सकता है ? अशोक कंतूर और अजीत जालान डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच जिस 'परसेप्शन' में फँसे हैं, उससे निकलने/उबरने का भी वह चूँकि कोई प्रयास करते हुए नहीं नजर आ रहे हैं इसलिए वह अपनी स्थिति को और कमजोर बना रहे हैं । इसी पृष्ठभूमि में, रोटरी क्लब दिल्ली चाणक्यपुरी के आयोजन में जिस तरह से उन्हें उपेक्षित किया गया और डिस्ट्रिक्ट में अलग-थलग करने का प्रयास किया गया - उसके कारण अगले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की उम्मीदवारी के लिए की जा रही उनकी तैयारी मुसीबतों में घिर गई है ।