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Monday, March 4, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स रंजीत भाटिया, प्रमोद विज व रमन अनेजा की तिकड़ी की तरफ से क्लब में मुसीबत खड़ी करने की आशंका के कारण ही नवीन गुलाटी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करने से बच रहे हैं क्या ?

पानीपत । अजय मदान की जोरदार तथा एकतरफा जीत से उत्साहित उनके समर्थकों व नेताओं ने अगले वर्ष होने वाले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के चुनाव के लिए रोटरी क्लब पानीपत मिडटाउन के वरिष्ठ सदस्य नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को जोरशोर से घोषित कर दिया है । मजे की बात हालाँकि यह है कि नवीन गुलाटी अभी हालाँकि अपनी उम्मीदवारी को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं, और उनकी तरफ से उम्मीदवारी को लेकर अभी कोई बात सुनने को नहीं मिली है । नवीन गुलाटी के नजदीकियों का कहना है कि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी को लेकर अपना मन तो बना लिया है, लेकिन चुनाव संबंधी सक्रियताओं की जरूरतों को एक बार वह अच्छे से समझ कर ही फाइनल फैसला करना चाहते हैं - इसलिए उनकी तरफ से अपनी उम्मीदवारी को लेकर सहमति 'घोषित' करने से अभी बचा जा रहा है । दरअसल कुछ समय पहले दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण ज्यादा ट्रैवलिंग कर सकना उनके लिए मुश्किल की बात है, इसलिए उनके लिए अभी से यह समझना बहुत जरूरी है कि पहले उम्मीदवार के रूप में और फिर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें आखिर कितनी ट्रैवलिंग करना पड़ेगी और उतनी ट्रैवलिंग वह सचमुच कर सकेंगे क्या ? इसके अलावा, उम्मीदवार बनने के लिए उन्हें अपने क्लब में भी हरी झंडी लेना है । नवीन गुलाटी के क्लब में रंजीत भाटिया, प्रमोद विज व रमन अनेजा के रूप में तीन तीन पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स हैं - और यह बात नवीन गुलाटी के लिए मुसीबत और चुनौती की इसलिए है, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में बनी खेमेबाजी के नजरिये से यह तीनों नवीन गुलाटी के विरोधी हैं; और कुछेक लोगों को लगता है कि यह तीनों डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद की नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को क्लब की हरी झंडी मिलने में रोड़ा अटकाने का काम कर सकते हैं ।
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति जब आज जैसी/जितनी तल्ख़ और घमासानभरी नहीं थी, तब भी नवीन गुलाटी और रंजीत भाटिया व प्रमोद विज के रास्ते अलग अलग होते थे, और नवीन गुलाटी की इन लोगों से कभी नहीं बनी । करीब चार वर्ष पहले, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी पद के लिए नोमीनेटिंग कमेटी द्वारा अधिकृत उम्मीदवार के रूप में टीके रूबी के चुने जाने के बाद डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में तथा डिस्ट्रिक्ट के माहौल में जो गर्मी पैदा हुई, और जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट दो खेमों में बँटता चला गया - उसमें टीके रूबी खेमे की पानीपत में बागडोर नवीन गुलाटी के हाथ में ही रही और टीके रूबी खेमे के मुख्य कर्ताधर्ताओं में नवीन गुलाटी की गिनती व पहचान होने लगी । दरअसल इसी पहचान के चलते कुछेक लोगों को आशंका है कि रंजीत भाटिया, प्रमोद विज व रमन अनेजा की तिकड़ी नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को क्लब में ही रोकने की कोशिश करेगी । क्लब के कुछेक वरिष्ठ सदस्यों का यद्यपि यह भी कहना है कि खेमेबाजी के लिहाज से रंजीत भाटिया, प्रमोद विज और नवीन गुलाटी के बीच भले ही विरोध के संबंध रहे हों, लेकिन यह विरोध कटुता के स्तर पर पहुँचा हुआ कभी नहीं दिखा - इसलिए इस बात की संभावना दिखती नहीं है कि रंजीत भाटिया व प्रमोद विज की तरफ से नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी के सामने क्लब में कोई मुसीबत खड़ी करने की कोशिश की जाएगी । कुछेक लोगों का कहना है कि तीनों/चारों लोग सयाने लोग हैं, इसलिए लगता तो नहीं है कि नवीन गुलाटी की उम्मीदवारी को क्लब में किसी भी तरह की समस्या और या अड़चन का सामना करना पड़ेगा - बाकी राजनीति तो राजनीति है, कौन दावा कर सकता है कि कल क्या होगा या नहीं होगा ? टीके रूबी को लेकर डिस्ट्रिक्ट में जो तमाशा हुआ, वह जब तक नहीं हुआ  था - तब तक कौन सोच भी सकता था कि ऐसा तमाशा हो सकता है ?
संभवतः इसीलिए अपनी उम्मीदवारी को घोषित करना और या उसे जताना/दिखाना नवीन गुलाटी ने टाला हुआ हो । वह पहले अपने क्लब में अपनी उम्मीदवारी को लेकर एक राय बना लेना चाहते होंगे और क्लब के सभी सदस्यों का समर्थन ले लेना चाहते होंगे - और उसके बाद ही एक उम्मीदवार के रूप में सामने आना चाहते होंगे । इसके साथ ही, नवीन गुलाटी अगले रोटरी वर्ष के संभावित राजनीतिक माहौल का भी आकलन कर लेना चाहते होंगे । इस वर्ष अजय मदान को जैसी धमाकेदार जीत मिली है, उसे देख कर अगले रोटरी वर्ष में दूसरे खेमे की तरफ से कोई चुनौती मिलने का डर या खतरा किसी को नहीं है । कपिल गुप्ता को लेकर भी लोगों को लग रहा है कि इस बार मिली करारी हार से कपिल गुप्ता ने सबक ले लिया होगा कि उनका जो रवैया है, उसके चलते और उसके कारण उनका डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुना जा पाना मुश्किल क्या, असंभव ही है । अजय मदान की भारी-भरकम जीत के बाद तो 'उस' तरफ जो थोड़े बहुत लोग बचे रह भी गए हैं, उनमें से कईयों के 'इस' तरफ आने के संकेत मिल रहे हैं; और यह सब देख कर माना जा रहा है कि 'इस' तरफ के उम्मीदवार को अगली बार तो अजय मदान से भी बड़ी जीत मिलेगी । इस कारण से, नवीन गुलाटी के नजदीकियों व शुभचिंतकों को लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी चुने जाने के संदर्भ में अगला वर्ष नवीन गुलाटी के लिए सुनहरा मौका है, और उन्हें इस मौके का फायदा उठा लेना चाहिए । नवीन गुलाटी के नजदीकियों तथा उनके समर्थक व शुभचिंतक नेताओं के दावों पर यकीन करें, तो अगले रोटरी वर्ष में नवीन गुलाटी निश्चित ही उम्मीदवार हो रहे हैं - और खुद नवीन गुलाटी ही/भी जल्दी ही इस संबंध में घोषणा कर देंगे ।

Tuesday, July 3, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर का पद मिलने से पहले ही भरत पांड्या पद का रौब दिखा कर डिस्ट्रिक्ट 3080 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा को मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करके राजा साबू गिरोह की 'सेवा' करेंगे क्या ?

चंडीगढ़ । भरत पांड्या को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की कुर्सी तो अभी करीब एक वर्ष बाद मिलेगी, लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3080 से जुड़ी मुसीबतों ने उन्हें अभी से घेरना शुरू कर दिया है । पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने भरत पांड्या पर दबाव डालना शुरू किया है कि वह रोटरी फाउंडेशन से संबद्ध डिस्ट्रिक्ट क़्वालीफिकेशन मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा के हस्ताक्षर करवाएँ । भरत पांड्या चूँकि जितेंद्र ढींगरा के डायरेक्टर होंगे, इसलिए राजा साबू और उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स को यकीन है कि भरत पांड्या दबाव डालेंगे, तो जितेंद्र ढींगरा उक्त मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करने से बच नहीं सकेंगे । उल्लेखनीय है कि उक्त मेमोरेंडम के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट्स में रोटरी फाउंडेशन से जुड़े खर्चों की निगरानी की जिम्मेदारी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट तथा डीआरएफसी की होती है; इसलिए रोटरी फाउंडेशन को उक्त मेमोरेंडम पर डिस्ट्रिक्ट के इन तीनों पदाधिकारियों के हस्ताक्षर चाहिए होते हैं । डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा उक्त मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करने से पहले यह जानना चाहते हैं कि रोटरी फाउंडेशन से मिलने वाली रकम का किन प्रोजेक्ट्स में कैसे और कितना कितना इस्तेमाल होगा ? डीआरएफसी के रूप में शाजु पीटर का कहना है कि यह सब जानकार वह क्या करेंगे, वह तो बस चुपचाप उक्त मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर कर दें - जैसे कि अभी तक के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट्स करते आ रहे हैं । शाजु पीटर का कहना है कि यह सब तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल ने भी उनसे नहीं पूछा या कहा है और उन्होंने चुपचाप वहाँ हस्ताक्षर कर दिए, जहाँ उनसे हस्ताक्षर करने को कहा गया - जितेंद्र ढींगरा तो अभी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट हैं, वह यह सब आखिर क्यों जानना चाह रहे हैं ?
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 3080 में रोटरी फाउंडेशन सहित दूसरे फंड्स के मामले में जिस फार्मूले को अपनाया जाता है, वह है - 'खाता न बही, जो राजा साबू कहें वही सही ।' डिस्ट्रिक्ट के कई एकाउंट्स पर राजा साबू और उनके चहेते कुंडली मारे बैठे हैं, और उनमें काला-सफेद करते रहते हैं । इसी कारण निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के बावजूद डिस्ट्रिक्ट से जुड़े कई एकाउंट्स के हिसाब-किताब देखने को नहीं मिले; जिसके चलते रोटरी के सौ वर्षों से अधिक के इतिहास में पहली बार एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को यह निवेदन करते हुए इंटरनेशनल बोर्ड में पिटीशन दायर करना पड़ी कि उन्हें उनके डिस्ट्रिक्ट से जुड़े एकाउंट्स के हिसाब-किताब उपलब्ध करवाए जाएँ । राजा साबू रोटरी इंटरनेशनल में यह जुगाड़ कर लेने में सफल हुए कि टीके रूबी की पिटीशन पर इंटरनेशनल बोर्ड टीके रूबी को हिसाब-किताब उपलब्ध करवाने का आदेश न जारी कर दे; रोटरी इंटरनेशनल बोर्ड के सामने यह मजबूरी भी थी कि वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर से यह भी नहीं कह सकता था कि भई, तुम क्यों हिसाब-किताब माँग रहे हो, राजा साबू और उनके साथी जो काला-सफेद कर रहे हैं वह उन्हें करते रहने दो ! लिहाजा रोटरी इंटरनेशनल ने बीच का रास्ता निकाला और उसने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को लिखा कि यह आपके डिस्ट्रिक्ट का अंदरूनी मामला है, इसे आप डिस्ट्रिक्ट में ही आपस में मिल-बैठ कर हल करो - और हमें माफ करो । इस तरह, रोटरी इंटरनेशनल में पिटीशन दायर करने के बाद भी टीके रूबी को डिस्ट्रिक्ट से जुड़े हिसाब-किताब देखने को नहीं मिल सके । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर और रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी सुशील गुप्ता की सहमति तथा रोटरी इंटरनेशनल की रीजनल ग्रांट्स ऑफिसर चंद्रा पामर के आदेश के बावजूद डिस्ट्रिक्ट ग्रांट 1860814 को स्वीकृति देने के मामले में लगातार इंकार करते हुए और फिर अपने इंकार से पलटते हुए डीआरएफसी के रूप में शाजु पीटर ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी को कितना और कैसे कैसे परेशान किया, उसे 'रचनात्मक संकल्प' की 17 जून की रिपोर्ट में पढ़ा जा सकता है ।
राजा साबू तथा उनके गिरोह के पूर्व गवर्नर्स, खासकर डीआरएफसी के रूप में शाजु पीटर के रवैये को देखते हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा ने साफ कह दिया है कि जब उन्हें यह बताया ही नहीं जा रहा है कि रोटरी फाउंडेशन से मिलने वाली रकम कहाँ और कैसे खर्च होगी, तब फिर वह उसकी निगरानी की जिम्मेदारी कैसे ले सकते हैं । समझा जाता है कि राजा साबू गिरोह के लोग रोटरी फाउंडेशन के पैसे पर किसी दूसरे देश एक मेडिकल मिशन पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा से छिपाया जा रहा है । उल्लेखनीय है कि अभी करीब तीन-चार महीने पहले ही पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रंजीत भाटिया तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी के साथ धोखाधड़ी करके एक मेडीकल मिशन ले गए थे । दरअसल रंजीत भाटिया को जब टीके रूबी उक्त मेडीकल मिशन में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हुए नजर आए, तो रंजीत भाटिया ने उन्हें मेडीकल मिशन पर जाने का कार्यक्रम रद्द कर देने की सूचना दी और उक्त मिशन के लिए डीडीएफ से मिली रकम को भी वापस कर दिया; लेकिन बाद में पता चला कि टीके रूबी - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी से छिपा कर एक दूसरे डिस्ट्रिक्ट से डीडीएफ की रकम लेकर उक्त मिशन पर जाने का कार्यक्रम पूरा कर लिया गया । जितेंद्र ढींगरा का कहना है कि जिस तरह से टीके रूबी को धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया, उस तरह से वह शिकार नहीं बनेंगे । रोटरी फाउंडेशन से मिली रकम के एक एक पैसे का हिसाब यदि उन्हें जानने/देखने को नहीं मिलेगा, तो वह संदर्भित मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे । राजा साबू गिरोह के पूर्व गवर्नर्स ने अभी तक जिन जिन लोगों से जितेंद्र ढींगरा पर हस्ताक्षर करवाने के लिए दबाव डलवाया है, उनसे जितेंद्र ढींगरा ने एक ही बात कही है कि क्या आप गारंटी लेते हो कि रोटरी फाउंडेशन के पैसे का दुरूपयोग नहीं होगा; यदि आप गारंटी लो, तो मैं अभी हस्ताक्षर कर देता हूँ । लेकिन मजेदार दृश्य यह बना है कि कोई भी इस बात की गारंटी लेने को तैयार ही नहीं हो रहा है कि राजा साबू गिरोह के लोग रोटरी फाउंडेशन के पैसे में घपला नहीं करेंगे ।
राजा साबू गिरोह ने संदर्भित मेमोरेंडम पर जितेंद्र ढींगरा के हस्ताक्षर करवाने के लिए अब अगले रोटरी वर्ष में इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने वाले भरत पांड्या पर दबाव बनाना शुरू किया है । गिरोह के ही एक सदस्य ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया है कि भरत पांड्या का कहना टालना जितेंद्र ढींगरा के लिए मुश्किल होगा, और इस तरह भरत पांड्या के दबाव में जितेंद्र ढींगरा मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर हो जायेंगे । भरत पांड्या के लिए मुसीबत की बात लेकिन यह है कि जितेंद्र ढींगरा रोटरी फाउंडेशन से जुड़े हिसाब-किताब में पारदर्शिता रखने की जो माँग कर रहे हैं, उसे वह न तो ठुकरा सकते हैं - और न ही राजा साबू गिरोह के लोगों को उसके लिए राजी कर सकते हैं । भरत पांड्या को बताया गया है कि रोटरी के पैसों के इस्तेमाल को लेकर राजा साबू दोहरा रवैया दिखाते हैं : वरिष्ठ होने के नाते उनसे जब कहा जाता है कि वह मामलों को देखें और उन्हें दुरुस्त करवाएँ, तो राजा साबू यह कहते हुए बच निकलते हैं कि मुझे बीच में मत डालो, मुझसे कोई मतलब नहीं है; लेकिन जब मलाई बँट रही होती है तो राजा साबू लाइन में सबसे आगे खड़े नजर आते हैं । ऐसे में भरत पांड्या के सामने समस्या है कि कैसे वह मेमोरेंडम पर जितेंद्र ढींगरा के हस्ताक्षर करवाने की राजा साबू गिरोह की कोशिशों को सफल करें/करवाए ? देखना दिलचस्प होगा कि भरत पांड्या इंटरनेशनल डायरेक्टर का पद मिलने से पहले ही अपने पद का रौब दिखा कर अपने डायरेक्टर-काल के एक गवर्नर को कैसे मजबूर करके राजा साबू गिरोह की सेवा करते हैं ?

Monday, June 5, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में अपने ही क्लब के प्रेसीडेंट को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के अकाउंट देने से बचने की कोशिश में रमन अनेजा ने रमेश बजाज और जितेंद्र ढींगरा का नाम लेकर मामले को राजनीतिक रंग दिया

पानीपत । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के हिसाब-किताब को लेकर रोटरी क्लब पानीपत मिडटाउन में एक दिलचस्प किस्म का घमासान छिड़ गया है - जिसमें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा सहित दो पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रंजीत भाटिया और प्रमोद विज अपने ही क्लब के अध्यक्ष विनोद धमीजा पर टूट पड़े हैं । विनोद धमीजा का कुसूर सिर्फ यह है कि उन्होंने इन तीनों से 18/19 फरवरी को होटल नूर महल में आयोजित हुई डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का वित्तीय हिसाब-किताब पूछ लिया । रंजीत भाटिया डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन थे, और प्रमोद विज एडवाइजर थे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के नाते रमन अनेजा तो सर्वेसर्वा ही थे । यह तीनों रोटरी क्लब पानीपत मिडटाउन के सदस्य हैं । रोटरी क्लब पानीपत मिडटाउन के अध्यक्ष विनोद धमीजा को अपने कार्यकाल के क्लब के अकाउंट्स बनाने हैं, इसलिए उन्होंने डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का वित्तीय ब्यौरा जानने की कोशिश की - जिस पर तीनों गवर्नर भड़क गए हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का हिसाब-किताब देने की बजाए यह तीनों विनोद धमीजा को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास करते हुए उनसे ही क्लब के खर्चों का हिसाब-किताब पूछने लगे हैं, जिस पर विनोद धमीजा का कहना है कि क्लब का हिसाब-किताब तैयार करने के लिए ही तो वह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के खर्चों का ब्यौरा माँग रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का हिसाब-किताब माँगने पर डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के आयोजन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारी जिस तरह से भड़क उठे हैं, उससे डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के खर्चों में घपलेबाजी के आरोपों को और बल मिला है । अभी तक तो लोग दबे स्वर में ही घपलेबाजी की बात करते थे, लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा के क्लब में ही डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के खर्चों को लेकर बबाल मचने के बाद लोग अब मुखर रूप में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के खर्चों में घपलेबाजी की बात करने लगे हैं ।
डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के खर्चों में घपलेबाजी का आरोप दरअसल पिछले दिनों तब और जोरशोर से उठा, जब रोटरी फाउंडेशन के सेमीनार में दस हजार रुपए के टिकिट में से चार हजार रुपए सेमीनार के खर्च के नाम पर बसूले गए । सेमीनार के खर्च के नाम पर चार हजार रुपए लोगों को बहुत ज्यादा लगे, और तब लोगों के बीच चर्चा छिड़ी कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमन अनेजा ने अपने प्रत्येक कार्यक्रम को पैसा बनाने का अवसर बनाया है । इसी चर्चा ने डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की घपलेबाजी की बातों को हवा दी, जो रोटरी क्लब पानीपत मिडटाउन में मचे घमासान से और भड़क उठी है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को आयोजित करने की जिम्मेदारी रोटरी क्लब पानीपत मिडटाउन की ही थी, इसलिए उसके वित्तीय ब्यौरे को क्लब की बैलेंस-शीट में शामिल करने की जरूरत समझते हुए विनोद धमीजा ने डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस का हिसाब माँग लिया । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 3080 में जब/तब यह देखने को मिल जाता है कि जिस किसी पदाधिकारी से हिसाब पूछ लो, तो वह बुरी तरह नाराज हो जाता है । रमन अनेजा से पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहे डेविड हिल्टन और दिलीप पटनायक पर हिसाब-किताब में गड़बड़ियों को लेकर गंभीर आरोप रहे । दिलीप पटनायक तो बेचारे ऐसे 'पकड़े' गए कि उन्हें दूसरी बैलेंसशीट तैयार करवाना पड़ी । रमन अनेजा भी लगता है कि उन्हीं के 'रास्ते' पर हैं । रमन अनेजा की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को लेकर रंजीत भाटिया और प्रमोद विज भी घिर गए हैं । रणजीत भाटिया और प्रमोद विज इस बबाल का ठीकरा रमेश बजाज और जितेंद्र ढींगरा के सिर फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं । इनकी तरफ से कहा/बताया जा रहा है कि रमेश बजाज और जितेंद्र ढींगरा राजनीतिक बदला लेने के लिए उनके क्लब के अध्यक्ष विनोद धमीजा को भड़का रहे हैं, और उन्हें बदनाम करने/करवाने का प्रयास कर रहे हैं ।
दिलीप पटनायक और डेविड हिल्टन को वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में जिस फजीहत का सामना करना पड़ा था - उम्मीद बनी थी कि उससे सबक लेकर रमन अनेजा सावधान रहेंगे और ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिसके कारण उन्हें भी दिलीप पटनायक और डेविड हिल्टन की तरह आरोपों से जूझना पड़े । लेकिन लगता है कि रमन अनेजा तो उनसे भी चार कदम आगे हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रोटरी क्लब चंडीगढ़ सिटी ब्यूटीफुल के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व प्रेसीडेंट एमपी गुप्ता डिस्ट्रिक्ट अकाउंट को लेकर सवाल पूछना चाहते थे, लेकिन किन्हीं नियमों का हवाला देते हुए उन्हें सवाल पूछने से ही रोक दिया गया । एमपी गुप्ता उसके बाद से रमन अनेजा को पत्र लिख लिख कर पूछ रहे हैं कि उन्हें आखिर किस नियम के तहत डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछने से रोका गया, लेकिन रमन अनेजा की तरफ से उन्हें इसका कोई जबाव ही नहीं मिल रहा है । अपने एक पत्र में एमपी गुप्ता ने दुबई में आयोजित हुए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ट्रेनिंग सेमीनार के वीडियो का हवाला देते हुए बताया है कि निवर्तमान इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन ने उक्त सेमीनार में साफ कहा है कि डिस्ट्रिक्ट अकाउंट से संबंधित सवालों का जबाव देना डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की जिम्मेदारी है । रमन अनेजा इसके बावजूद एमपी गुप्ता के सवाल का जबाव नहीं दे रहे हैं ।
रमन अनेजा के इसी रवैये के चलते डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के अकाउंट को लेकर अब उनके अपने क्लब में बबाल मच गया है । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के होस्ट क्लब - अपने ही क्लब के प्रेसीडेंट को डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के अकाउंट देने से बचने की कोशिश में रमन अनेजा और रंजीत भाटिया व प्रमोद विज जिस तरह से इस मामले में रमेश बजाज और जितेंद्र ढींगरा को घसीट रहे हैं, उससे यह मामला राजनीतिक रंग और लेता जा रहा है । इससे लगता है कि इस मामले में अभी और तमाशे देखने को मिलेंगे ।

Friday, March 17, 2017

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 - यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में अपने प्रतिद्धंद्धियों के मुकाबले 'वजनदार' दिख रहे कपिल गुप्ता को अचानक से प्रस्तुत हुई रमेश बजाज की उम्मीदवारी से झटका लगा

पानीपत । रमेश बजाज ने वर्ष 2018-19 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करके डिस्ट्रिक्ट 3080 की चुनावी राजनीति में भारी उठा-पटक की स्थितियाँ पैदा कर दी हैं । रमेश बजाज को अभी हाल ही में चुने गए वर्ष 2019-20 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जितेंद्र ढींगरा के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; दरअसल इसीलिए हर किसी को रमेश बजाज की उम्मीदवारी के प्रस्तुत होने पर हैरानी हुई है - क्योंकि दो दिन पहले तक जितेंद्र ढींगरा का समर्थन कपिल गुप्ता को मिलने की चर्चा की जा रही थी । रोटरी क्लब यमुनानगर के कपिल गुप्ता को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सतीश सलूजा के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है - और सतीश सलूजा अपने उम्मीदवार के रूप में कपिल गुप्ता के लिए समर्थन जुटाने को लेकर चंडीगढ़ के कुछेक 'बड़े' नेताओं की आलोचना का शिकार भी हो चुके हैं । माना जा रहा था कि जितेंद्र ढींगरा की अगुआई में डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में जो विरोधी खेमा बना है, वह कपिल गुप्ता को समर्थन देकर राजा साबू के नेतृत्व वाले खेमे में फूट की प्रक्रिया को तेज और बड़ा करेगा । जितेंद्र ढींगरा यूँ भी सतीश सलूजा के नजदीक रहे हैं । कपिल गुप्ता ने उम्मीदवारी प्रस्तुत करने से पहले स्थितियों की चूँकि खासी 'पड़ताल' कर ली थी; और जितेंद्र ढींगरा भी 'टकराव' की बजाए 'शांति' के मार्ग पर चलने के संकेत दे रहे थे - इसलिए कपिल गुप्ता को जितेंद्र ढींगरा की अगुआई वाले खेमे का समर्थन मिलना पक्का माना जा रहा था । लेकिन अचानक से प्रस्तुत हुई रमेश बजाज की उम्मीदवारी ने वर्ष 2018-19 के गवर्नर के लिए बनने वाले समीकरणों को छिन्न-भिन्न कर दिया है । 
रमेश बजाज की उम्मीदवारी ने कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी के लिए तो समस्या खड़ी की ही है, साथ ही जितेंद्र ढींगरा के लिए भी चुनौती पैदा कर दी है । पानीपत में रमेश बजाज के नजदीकियों का ही कहना है कि अचानक से प्रस्तुत हुई रमेश बजाज की उम्मीदवारी से जितेंद्र ढींगरा खुश नहीं हैं; जितेंद्र ढींगरा ने उनसे कहा है कि वह अभी यह नहीं चाहते हैं कि उनके साथ नजदीकी से जुड़े लोग उम्मीदवार बनें - क्योंकि इससे डिस्ट्रिक्ट में टकराव बढ़ेगा । रमेश बजाज के इन्हीं नजदीकियों का कहना है कि वह जितेंद्र ढींगरा के इस तर्क से सहमत तो हैं, लेकिन कपिल गुप्ता ने पानीपत में जिस तरह से पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स - प्रमोद विज और रंजीत भाटिया के साथ नजदीकी बनाने और 'दिखाने' की कोशिश की है, उसके विरोध स्वरूप ही रमेश बजाज अपनी उम्मीदवारी के साथ आगे आए हैं । रमेश बजाज के नजदीकियों को भरोसा है कि रमेश बजाज यदि अपनी उम्मीदवारी पर बने/टिके रहे तो जितेंद्र ढींगरा अंततः उनका समर्थन करने के लिए मजबूर हो जायेंगे । रमेश बजाज के कुछेक नजदीकियों का यह भी कहना है कि कपिल गुप्ता पानीपत में यदि प्रमोद विज और रंजीत भाटिया से 'दूर' रहें, तो रमेश बजाज अपनी उम्मीदवारी पर पुनर्विचार करते हुए पीछे भी हट सकते हैं ।  
यह सारा झंझट वास्तव में इसलिए भी खड़ा हुआ है, क्योंकि जितेंद्र ढींगरा की अगुआई वाले खेमे के लोगों में आगे की रणनीति को लेकर गंभीर मतभेद हैं : जितेंद्र ढींगरा कुछ समय 'शांत' रहना चाहते हैं और राजा साबू के नेतृत्व वाले सत्ता खेमे के बँटने का इंतजार करना तथा बँटवारे को तेज करने में मदद करना चाहते हैं; अन्य कुछ लोग लेकिन जितेंद्र ढींगरा की जोरदार जीत से उत्साहित हैं और चाहते हैं कि सत्ता खेमे के साथ उन्हें अपनी 'लड़ाई' जारी रखनी चाहिए । जितेंद्र ढींगरा को 'शांति के मार्ग' पर बढ़ता देख उनके अपने लोगों को भी लगता है कि जितेंद्र ढींगरा की शायद सत्ता खेमे के कुछेक नेताओं से साठगाँठ है; जितेंद्र ढींगरा ने पिछले दो वर्ष जो लड़ाई लड़ी है और जीती है, उसमें सत्ता खेमे के लोगों की दबी-छिपी साठगाँठ का 'सहयोग' भी देखा/पहचाना गया है; जितेंद्र ढींगरा खुद सत्ता खेमे के हिस्सा रहे ही हैं - इन्हीं सब तथ्यों के आलोक में समझा जाता है कि जितेंद्र ढींगरा सत्ता खेमे के ही एक ग्रुप के साथ मिल कर अपनी आगे की 'यात्रा' जारी रखना चाहते हैं; और इसीलिए वह चाहते हैं कि पिछले दो वर्षों की लड़ाई में जो लोग घोषित रूप से उनके साथ थे, वह सब अपनी अपनी तलवारें अब म्यानों में वापस रख लें - लेकिन उनके साथ रहे लोग जीत से इतने उत्साहित हैं कि वह तलवारें चमकाते हुए अभी और 'मारकाट' मचाना चाहते हैं । इस नजारे को नजदीक से देख/पहचान रहे लोगों का कहना है कि जितेंद्र ढींगरा के साथी तो जोश के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन जितेंद्र ढींगरा जोश के साथ होश भी बनाए रखना चाहते हैं । जीत के जोश से भरे अपने ही साथियों को 'नियंत्रण' में रखना जितेंद्र ढींगरा की आगे की राजनीति के लिए गंभीर चुनौती है ।
रमेश बजाज के नजदीकियों का ही कहना/बताना है कि जितेंद्र ढींगरा ने रमेश बजाज की उम्मीदवारी को लेकर नाखुशी इसी कारण से प्रकट की है, क्योंकि इससे राजा साबू की छत्रछाया में चल रहे सत्ता खेमे को अपनी एकजुटता बनाए रखने में मदद मिलेगी । रमेश बजाज की उम्मीदवारी से निपटने के लिए, अभी चंडीगढ़ और उत्तराखंड के जो नेता कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी को हजम नहीं कर पा रहे हैं - वह सभी कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए मजबूर हो जायेंगे । दरअसल वर्ष 2018-19 के गवर्नर पद के लिए बाकी जो नाम चर्चा में हैं, जो पिछले वर्षों में भी उम्मीदवार रहे हैं, उनमें ज्यादा एनर्जी नहीं देखी/पहचानी जा रही है - उनके मुकाबले कपिल गुप्ता का 'वजन' ज्यादा देखा/पहचाना जा रहा है । कपिल गुप्ता को अभी चंडीगढ़ और उत्तराखंड के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की जिस नापसंदगी तथा विरोध का सामना करना पड़ रहा है, उसका कारण खेमे के लोगों के बीच की आपसी ईर्ष्या व प्रतिस्पर्धा है; चंडीगढ़ व उत्तराखंड के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को यह बात हजम करना मुश्किल हो रहा है कि वह जिन उम्मीदवारों को पिछले दो दो और चार चार वर्षों से ढो रहे हैं, उन्हें दस दिन पहले उम्मीदवार बने कपिल गुप्ता किनारे धकेल कर आगे आ जाएँ । समझा जाता है कि जितेंद्र ढींगरा सत्ता खेमे की इसी 'लड़ाई' का फायदा उठाने की कोशिश के चलते कपिल गुप्ता की उम्मीदवारी का समर्थन करने की तैयारी कर रहे थे, जिसे लेकिन रमेश बजाज की अचानक से प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने फेल कर दिया है ।
रमेश बजाज की उम्मीदवारी को एक स्थानीय 'झगड़े' की प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा/पहचाना जा रहा है, और इसलिए अभी उनकी उम्मीदवारी को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है । दरअसल पिछले दो वर्षों की 'लड़ाई' ने जगह जगह के स्थानीय झगड़ों को मुखर बनाने का काम किया है, जिसकी सबसे तीखी प्रतिक्रिया पानीपत में देखने को मिल रही है । यहाँ रंजीत भाटिया और प्रमोद विज से नाराज रहने वालों की एक बड़ी संख्या है, जो जितेंद्र ढींगरा की जीत से खासे उत्साहित हैं - और जो रंजीत भाटिया व प्रमोद विज को किनारे लगाने/रखने का काम जारी रखना चाहते हैं । कपिल गुप्ता पानीपत के लोगों के इस मूड को भाँपने में लगता है कि चूक गए और रंजीत भाटिया व प्रमोद विज के साथ अपनी नजदीकी बनाने/दिखाने में लग गए । रमेश बजाज के नजदीकियों का ही कहना है कि रमेश बजाज की उम्मीदवारी कपिल गुप्ता के इसी व्यवहार के प्रति नाराजगी का प्रकटीकरण भी है । इसी कारण से उनकी उम्मीदवारी के बने रहने को लेकर लोगों के बीच सवाल है । रमेश बजाज की उम्मीदवारी बनी रहेगी या नहीं, यह तो अगले कुछ दिनों में साफ हो जायेगा; अभी लेकिन उनकी उम्मीदवारी ने कपिल गुप्ता के लिए मुसीबत यह तो बढ़ाई है कि अब उन्हें चंडीगढ़ व उत्तराखंड के रूठे हुए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को मनाने में जुटना पड़ेगा, और जितेंद्र ढींगरा के लिए चुनौती यह पैदा की है कि उनकी जोरदार जीत ने लोगों के बीच उनसे राजनीतिक किस्म की जो उम्मीदें लगाई हैं, उन पर वह कैसे खरे उतरें ?

Sunday, April 24, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080, यानि राजा साबू के डिस्ट्रिक्ट में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रमोद विज के हाथों हो रही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन की 'धुलाई' को 'राजा' व उसके दुर्योधन/दुःशासन मजे ले ले कर जिस तरह से देख रहे हैं, वह डिस्ट्रिक्ट के लिए शर्मनाक स्थिति नहीं है क्या ?

देहरादून । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रमोद विज ने नए बने रोटरी क्लब पानीपत क्लासिक को लेकर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन के 'भीड़ भरे चौराहे पर कपड़े उतारने' की जो कार्रवाई की है, वह डिस्ट्रिक्ट 3080 की दशा का एक उदाहरण तो पेश करती ही है - साथ ही यह भी बताती है कि डिस्ट्रिक्ट का जो मौजूदा हाल है, उसमें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जैसे गरिमापूर्ण पद की हैसियत 'गुंडों के बीच फँसी रजिया' जैसी हो गई है । डेविड हिल्टन बेचारे शिक्षा जगत में काम करने वाले एक भले व्यक्ति रहे हैं । भारतीय शिक्षा जगत में उनके योगदान को बहुत ही सम्मान से देखा/पहचाना जाता है । एक शिक्षक के रूप में अपने योगदान के लिए वह देश के राष्ट्रपति द्वारा शिक्षकों के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजे जा चुके हैं । इसके अलावा भी वह देश के शिक्षा क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित पुरस्कार De Rozio से भी पुरस्कृत हो चुके हैं । शिक्षा संबंधी स्थानीय व राज्यस्तरीय कमेटियों में ही नहीं - कई एक राष्ट्रीय कमेटियों में भी उनकी महत्वपूर्ण सक्रिय संलग्नता रही है - और इसी नाते से देश के शिक्षा क्षेत्र में डेविड हिल्टन का नाम खासा जाना/पहचाना है और प्रतिष्ठित है । इस प्रतिष्ठा के साथ डेविड हिल्टन जब रोटरी में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बने, तो लोगों को उम्मीद बनी थी कि वह डिस्ट्रिक्ट में सदाचार व न्याय के पक्षधर बनेंगे और शिक्षा जगत में जिन वैल्यूज के समर्थक होने के नाते उन्होंने नाम कमाया है, उन्हीं वैल्यूज को वह रोटरी व डिस्ट्रिक्ट में भी स्थापित करेंगे । लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उनकी बिलकुल उल्टी चाल ही देखने को मिली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में डेविड हिल्टन ने जिस तरह से अपने आप को डिस्ट्रिक्ट के कुछेक प्रमुख पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की कठपुतली बना लिया, उससे उन्होंने डिस्ट्रिक्ट व रोटरी को तो कलंकित किया ही - साथ ही साथ अपनी साख व प्रतिष्ठा को भी धूल में मिला लिया है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में डेविड हिल्टन ने खुद ही - पता नहीं किस लालच या भय के कारण - अपनी ऐसी दशा बना ली है कि कोई भी उन्हें 'धो' देता है । रोटरी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों से लेकर डिस्ट्रिक्ट के आम रोटेरियंस तक विभिन्न मौकों पर उन्हें लताड़ते रहे हैं तथा उनके कान उमेठते रहे हैं; और अब पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रमोद विज ने उनकी जो दशा की है - उसके चलते तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में डेविड हिल्टन के लिए बहुत ही शर्मनाक स्थिति पैदा हो गई है । प्रमोद विज दरअसल एक नए बने रोटरी क्लब पानीपत क्लासिक को लेकर उखड़े हुए हैं । रोटरी क्लब पानीपत मिडटाउन द्वारा स्पॉन्सर्ड इस नए क्लब को अभी दो सप्ताह पहले ही रोटरी इंटरनेशनल से चार्टर मंजूर हुआ है तथा इसके लिए नए बने क्लब के पदाधिकारियों व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट केआर रवींद्रन की तरफ से प्रशंसा पत्र भी प्राप्त हो चुका है । जाहिर है कि नए बने क्लब को लेकर हर कोई खुश है, लेकिन एक अकेले प्रमोद विज को इसे लेकर भारी मिर्ची लगी है । उनकी शिकायत है कि इस नए क्लब को बनाने को लेकर रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों का पालन नहीं हुआ है । इसके लिए प्रमोद विज ने डिस्ट्रिक्ट एक्सटेंशन चेयरमैन सुरेश गुगलानी तथा नए बने क्लब के जीएसआर एसएन गुप्ता को भी कोसा है । प्रमोद विज ने माँग की है कि डेविड हिल्टन नए क्लब का चार्टर रद्द करवाएँ । प्रमोद विज का कहना है कि डेविड हिल्टन ने यदि उनकी माँग के अनुरूप कदम नहीं उठाया, तो वह इस मामले को कॉलिज ऑफ गवर्नर्स में उठायेंगे तथा जरूरत पड़ी तो रोटरी इंटरनेशनल में भी इसकी शिकायत करेंगे । प्रमोद विज का रवैया देख कर हर कोई यह सोचने पर मजबूर हुआ है कि एक नए बने क्लब में नियमों का ऐसा कौन सा उल्लंघन हो गया है, जिस पर न तो नया क्लब बनाने के काम से जुड़े डिस्ट्रिक्ट पदाधिकारियों का ध्यान गया - और न रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय के पदाधिकारियों ने ही गौर किया । लोगों को लग रहा है कि प्रमोद विज बात का बतंगड़ बना रहे हैं; प्रमोद विज चूँकि स्पॉन्सरिंग क्लब के सदस्य हैं, इसलिए वह इस बात से चिढ़े हुए हैं कि एक नए क्लब को स्पॉन्सर करने के लिए क्लब के पदाधिकारियों से उनसे अनुमति क्यों नहीं ली - और इसीलिए नए बने क्लब के खिलाफ बबाल मचाए हुए हैं तथा इस मामले की आड़ में डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट दिखाने/जताने का प्रयास कर रहे हैं ।
नए बने क्लब को लेकर प्रमोद विज के आरोप यदि सचमुच 'बहुत ही' गंभीर हैं, तो यह एक ऐसे डिस्ट्रिक्ट में कामकाज होने के तरीके की भी पोल खोलते हैं - जिसमें एक 'राजा' भी है, जो बातें बड़ी ऊँची-ऊँची करता है । प्रमोद विज के आरोप यदि सचमुच बहुत गंभीर हैं, तो क्या इससे यह साबित नहीं होता कि ऊँची ऊँची बातें करने वाले 'राजा' ने अपनी आँखों पर पट्टी बाँध कर धृतराष्ट्र वाली भूमिका ले ली है, और डिस्ट्रिक्ट को दुर्योधनों व दुःशासनो को सौंप दिया है - जिनकी दिलचस्पी डिस्ट्रिक्ट को अपनी जाँघ पर बैठाने/बैठाये रखने तक ही सीमित हो चली है, जिसे पूरा करने के लिए वह जब तब 'रोटरी' की साड़ी खींच कर उसे नंगा करते रहते हैं । डिस्ट्रिक्ट के दुर्योधनों व दुःशासनो के ग्रुप में शामिल होने के बावजूद प्रमोद विज को चूँकि ज्यादा मौका नहीं मिल रहा था, इसलिए उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन के ही 'कपड़े उतारने' की तैयारी कर ली । डेविड हिल्टन ने चूँकि अपनी ही मर्जी से अपनी ऐसी स्थिति बना ली है कि कोई भी उन्हें दुत्कार देता है, सो प्रमोद विज को वह एक आसान शिकार भी लगे । कुछ लोगों का कहना है कि प्रमोद विज को हो सकता है कि यह भी लगा हो कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डेविड हिल्टन का 'शिकार' करके वह अपने आप को 'राजा' का असली दुर्योधन साबित कर लेंगे, इसलिए उन्होंने सीधे डेविड हिल्टन पर हाथ डाल दिया । प्रमोद विज की इस कार्रवाई से डिस्ट्रिक्ट के दूसरे दुर्योधनों व दुःशासनो में हलचल मच गई है । प्रमोद विज की कार्रवाई को वह 'नौटंकी' करार दे रहे हैं और इसके पीछे एक दूसरी कहानी बताते हैं ।
उनके अनुसार, प्रमोद विज दरअसल इस बात से बुरी तरह चिढ़े हुए हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट रमन अनेजा अपने कार्यक्रमों में रंजीत भाटिया को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं, और उन्हें बिलकुल पूछ ही नहीं रहे हैं । प्रमोद विज दरअसल अपने आपको रंजीत भाटिया से बड़ा नेता समझते हैं, बड़ा इसलिए क्योंकि वह मानते/समझते हैं कि रंजीत भाटिया का समय तो निकल चुका है और आने वाला समय उनका है - इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि रमन अनेजा उन्हें ज्यादा तवज्जो देंगे, किंतु हो उल्टा रहा है । रमन अनेजा ने अभी तक के अपने कार्यक्रमों में प्रमोद विज को तो किनारे लगाए रखा, जबकि रंजीत भाटिया को उन्होंने हर जगह आगे आगे रखा । रमन अनेजा की इस हरकत ने प्रमोद विज के तन-बदन में आग तो लगा दी है, लेकिन प्रमोद विज अभी रमन अनेजा से सीधे भिड़ने को तैयार नहीं हैं । उन्हें डर है कि सीधे भिड़ने के कारण रमन अनेजा से उनकी दूरी और बढ़ जाएगी और तब उन्हें बिलकुल ही अलग-थलग कर दिया जायेगा । प्रमोद विज को लेकिन रमन अनेजा को डराना भी जरूरी लगा है, और 'इसी' जरूरत को पूरा करने के लिए उन्होंने डेविड हिल्टन को निशाने पर ले लिया है । दुर्योधन व दुःशासन ही एक दूसरे की 'राजनीति' की तिकड़मों को अच्छे से समझ सकते हैं, इसलिए उनका ही मानना और कहना है कि प्रमोद विज ने वास्तव में रमन अनेजा को डराने व सावधान करने के लिए ही डेविड हिल्टन पर हमला बोला है । प्रमोद विज के डेविड हिल्टन पर किए गए इस हमले से रमन अनेजा सचमुच डरेंगे या नहीं, यह तो बाद में पता चलेगा - अभी लेकिन इस प्रकरण से डेविड हिल्टन व खुद प्रमोद विज की कलई खुल गई है ।
नए बने रोटरी क्लब पानीपत क्लासिक के मामले में नियम-कानूनों की दुहाई देने वाले प्रमोद विज से लोगों का पूछना है कि रोटरी इंटरनेशनल के नियमों के पालन होने की उन्हें यदि सचमुच कोई चिंता है, तो उन्हें बताना चाहिए की डिस्ट्रिक्ट में इससे पहले जब जब रोटरी इंटरनेशनल के नियमों का उल्लंघन हुआ है, और अक्सर ही हुआ है - तब तब उन्होंने आवाज कभी उठाई क्या ? डेविड हिल्टन की जब तब होने वाली फजीहत से दुखी होने वाले लोगों का कहना है कि डेविड हिल्टन को पता नहीं क्यों यह बात समझ नहीं आ रही है कि उन्होंने अपने आप को जिस तरह से आँखों पर पट्टी बाँधे 'राजा' तथा उसकी कौरव सेना की कठपुतली बना लिया है, उसके कारण अपनी इज्जत को उन्होंने खुद ही गँवा लिया है - तथा इसी का नतीजा है कि कोई भी उन्हें जैसे चाहें वैसे 'धो' देता है; और डिस्ट्रिक्ट में कोई उनके साथ हमदर्दी तक नहीं दिखाता है । प्रमोद विज ने रोटरी क्लब पानीपत क्लासिक के मामले में जैसे उन्हें धोया हुआ है, और जैसे वह 'धुल' भी रहे हैं; और जिस धोने/धुलने को 'राजा' व उसके दुर्योधन/दुःशासन मजे ले ले कर देख रहे हैं - वह किसी भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के लिए बहुत ही शर्मनाक स्थिति है ।
डिस्ट्रिक्ट में बहुत से लोगों को हैरानी है कि डेविड हिल्टन आखिर किस मजबूरी या किस स्वार्थ में अपनी इस शर्मनाक स्थिति को स्वीकार किए चले जा रहे हैं ?