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Tuesday, April 21, 2020

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में डीडीएफ अकाउंट के पैसे से होने वाले 'धंधे' का रोटरी के बड़े नेताओं ने संज्ञान तो लिया है, और इस पर अपनी नाराजगी भी दिखाई है - लेकिन विनय भाटिया के 'रास्ते' पर चलने की सुरेश भसीन की 'तैयारी' देख कर लगता नहीं है कि उन्हें किसी का कोई डर है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सुरेश भसीन ने पिछले गवर्नर विनय भाटिया की तर्ज पर डीडीएफ अकाउंट के पैसे 'बेचकर' रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे इकट्ठे करने का रिकॉर्ड बनाने तथा कुछेक मास्टरमाइंड टाइप के रोटेरियंस को जेबें भरने का मौका देने की तैयारी शुरू कर दी है । लोगों के बीच आशंकापूर्ण चर्चा और गंभीर आरोप यह भी है कि इस 'खेल' में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को भी 'कट' मिलता होगा, इसलिए वह इस खेल में 'योजनाबद्ध' तरीके से दिलचस्पी लेते हैं । सुरेश भसीन के मामले में यह चर्चा इसलिए भी जोरों पर है, क्योंकि उन्होंने अपने डीडीएफ का जो आधा हिस्सा डिस्ट्रिक्ट ग्रांट्स में खर्च करना था, वह उन्होंने जानबूझ कर खर्च नहीं किया - और उक्त रकम भी ग्लोबल ग्रांट्स में मैच करवाने के लिए बचा ली है । विनय भाटिया की तरह ही, सुरेश भसीन की भी दिलचस्पी एपीएफ (एनुअल प्रोग्राम फंड) के लिए दान लेने में दिलचस्पी नहीं है, और उनका भी जोर टर्म गिफ्ट के रूप में आने वाले दान पर ही है । रोटरी न्यूज के नए अंक में प्रकाशित तथ्यों के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट 3011 में रोटरी फाउंडेशन के लिए अभी तक दो लाख डॉलर से कम रकम जमा हुई है, जिसमें एपीएफ में जमा रकम करीब 81 हजार डॉलर ही है । पिछले रोटरी वर्ष में भी ऐसा ही दृश्य था, और वर्ष के आखिरी महीने में ताबड़तोड़ पैसे जमा हुए थे, जिसका करीब 80 प्रतिशत हिस्सा टर्म गिफ्ट के रूप में था । टर्म गिफ्ट रोटरी फाउंडेशन को पैसे देने का नहीं, बल्कि रोटरी फाउंडेशन से पैसे लेने का 'माध्यम' है, और इसे कुछेक धंधेबाज रोटेरियंस ने बड़ी होशियारी से डिस्ट्रिक्ट में फिट कर दिया है । डिस्ट्रिक्ट के कुछेक धंधेबाज रोटेरियंस की इस हरकत का रोटरी के बड़े नेताओं ने संज्ञान तो लिया है, और इस पर अपनी नाराजगी भी दिखाई है - लेकिन सुरेश भसीन की 'तैयारी' देख कर लगता नहीं है कि धंधेबाज रोटेरियंस को बड़े नेताओं की नाराजगी का डर है । 
रोटरी फाउंडेशन में एपीएफ अकाउंट को रोटरी का 'लाइफ-ब्लड' (जीवन-शक्ति) कहा/माना गया है, लेकिन रोटरी के धंधेबाज लोगों ने रोटरी को जीवन देने वाले इस खून को ही चूस लेने का इंतजाम कर लिया है । उल्लेखनीय है कि एपीएफ अकाउंट से डीडीएफ के रूप में मिली रकम में से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को आधी रकम डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट्स में खर्च करना होती है । इसके लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रेसीडेंट्स को प्रोत्साहित करते हैं कि वह समाज में लोगों की जरूरतों के हिसाब से प्रोजेक्ट बनाएँ और उसे पूरा करने के लिए कुछ पैसा क्लब  लगाएँ और बाकी पैसा उक्त अकाउंट से लें । सुरेश भसीन ने लेकिन डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट्स में कोई दिलचस्पी नहीं ली । बीच में उन्होंने कुछ योजना बनाई थी, और काम शुरू किया था - लेकिन उसे फिर उन्होंने रोक दिया था । इसके चलते, डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट्स में खर्च की जाने वाली रकम ग्लोबल ग्रांट्स में इस्तेमाल होने के लिए जुड़ गई है ।  आरोपपूर्ण चर्चा है कि इस रकम को ' एक का चार करने' के लिए इस्तेमाल किया जायेगा, और इसके लिए धंधेबाज लोगों ने पूरी तैयारी कर ली है - जिसके तहत अस्पतालों व अन्य संस्थाओं से उनकी जरूरत की मशीनें व दूसरे काम लागत के आधे और या दो-तिहाई कीमत में देने/निकलवाने के ऑफर के साथ सौदेबाजी कर ली गई है । उदाहरण के लिए किसी अस्पताल/संस्था का कोई प्रोजेक्ट एक करोड़ रुपए का है; उसे ऑफर है कि उसका वह प्रोजेक्ट 70 लाख में लगवा देंगे; उससे 70 लाख लिए, उसमें से 40/50 लाख रोटरी फाउंडेशन में जमा करवाए और बाकी अपनी जेब में रख लिए । रोटरी फाउंडेशन को एक करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट दे दिया - उससे मिले एक करोड़ रुपए से अस्पताल/संस्था का प्रोजेक्ट लग जायेगा । इस तरह कई फायदे एक साथ मिल जाते है - रोटरी फाउंडेशन में भी रिकॉर्ड पैसा जमा हो गया, अपनी जेब भी गर्म हो गई, और समाज सेवा का पुण्य भी मिल गया । ऐसे ही 'मौकों' के लिए कहावत बनी होगी - 'हींग लगे न फिटकरी, रंग और स्वाद चोखा ।'   
ग्लोबल ग्रांट्स डिस्ट्रिक्ट 3011 में दरअसल एक बड़ा धंधा बन गई है । यह धंधा होता और भी डिस्ट्रिक्ट्स में है, तथा रोटरी फाउंडेशन की तरफ से कुछेक गवर्नर्स के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है; लेकिन डिस्ट्रिक्ट 3011 में कुछेक तेज दिमाग वाले लोगों ने इसे बड़ा व्यवस्थित रूप दिया हुआ है । पकड़-धकड़ हालाँकि यहाँ भी हुई है; पिछले रोटरी वर्ष में ही, बेईमानी की आशंका के चलते रोटरी क्लब दिल्ली मिडटाऊन द्वारा वापस की गई ग्रांट धोखाधड़ी से रोटरी क्लब दिल्ली सेंट्रल को दिलवाने का मामला पकड़ा ही गया था, लेकिन रोटरी फाउंडेशन की तरफ से चूँकि किसी के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई है, इसलिए धंधेबाजों के हौंसले यहाँ अभी बुलंद हैं । डिस्ट्रिक्ट 3011 में कुछेक बड़े रोटेरियंस की 'होशियारी' से - 'रोटरी फाउंडेशन में पैसा दो, और उसका तीन से चार गुना वापस लो' - फार्मूला बड़ा हिट है । इस फार्मूले ने लालच, स्वार्थ व बेईमानी का रास्ता खोल दिया है, जो रोटरी के लिए ही खतरा बन जा रहा है । दरअसल इस फार्मूले के तहत रोटरी फाउंडेशन में कोई भी 'देता' इसीलिए है, क्योंकि उसे तीन गुना से चार गुना 'लेना' होता है; और जब लेने की भावना प्रबल होती है तो फिर वह किसी भी तरह की बेईमानी करने से नहीं हिचकता है । इस बेईमानी और लूट की कोशिश उन लोगों की भावनाओं को ठगती है, जो सचमुच की जरूरत के लिए रोटरी फाउंडेशन में पैसे देते हैं । उन्हें लगता है कि रोटरी फाउंडेशन को दिया गया उनका पैसा जरूरतमंदों तक पहुँचने की बजाए रोटेरियंस के भेष में बैठे ठगों व लुटेरों की जेबों में चला जाता है । पिछले वर्ष विनय भाटिया की हरकतों के चलते डिस्ट्रिक्ट की जो बदनामी हुई थी, उसे देख कर लगा था कि धंधेबाज रोटेरियंस की हरकतों पर रोक लगेगी - लेकिन सुरेश भसीन की तैयारी देख कर लग रहा है कि पिछले वर्ष जैसा खेल इस वर्ष भी चलेगा ।

Saturday, February 16, 2019

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3054 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल की बूढ़ों, बीमारों, गरीबों और अनपढ़ों के नाम पर ली गई ग्लोबल ग्रांट की रकम को हड़पने के मामले में इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट भरत पांड्या की मदद से बचने की कोशिश सचमुच सफल हो सकेगी क्या ?

जयपुर । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल अग्रवाल को विश्वास है कि उनके गवर्नर-वर्ष की करीब 20 लाख रुपए की एक डिस्ट्रिक्ट ग्रांट में हुई घपलेबाजी के मामले में फँसी उनकी गर्दन को बचाने/निकालने में इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट भरत पांड्या अवश्य ही उनकी मदद करेंगे, और इसी विश्वास के भरोसे अनिल अग्रवाल 'उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे' वाले अंदाज में उक्त ग्लोबल ग्रांट के प्रबंधन को लेकर जाँच करने वाली डिस्ट्रिक्ट कमेटी के साथ पेश आए । अनिल अग्रवाल के गवर्नर-वर्ष में ग्लोबल ग्रांट के रूप में रोटरी फाउंडेशन से डिस्ट्रिक्ट एकाउंट में आए करीब 20 लाख रुपए में हुई घपलेबाजी के आरोप में डिस्ट्रिक्ट के दो क्लब्स को ग्रांट्स के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है, उनके दो पूर्व प्रेसीडेंट्स तथा एक वरिष्ठ रोटेरियंस को रोटरी में किसी भी अवॉर्ड तथा पोजीशन से प्रतिबंधित कर दिया गया है; और सिर्फ इतना ही नहीं - डिस्ट्रिक्ट को उक्त रकम वापस करने के लिए कहा गया है, और जब तक उक्त रकम वापस नहीं की जाती है, तब तक के लिए डिस्ट्रिक्ट को रोटरी फाउंडेशन के कार्यक्रमों में भागीदारी से वंचित कर देने का आदेश हुआ है । रोटरी फाउंडेशन की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अनिल अग्रवाल के गैरजिम्मेदार व बेईमानीभरे रवैये के कारण डिस्ट्रिक्ट 3054 की पहचान और प्रतिष्ठा दाँव पर लग गई है; लेकिन अनिल अग्रवाल मामले में न तो अपनी कोई जिम्मेदारी स्वीकारने/लेने को तैयार हैं, और न मामले को निपटवाने में सहयोग करने के लिए राजी हैं । मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश करते हुए अनिल अग्रवाल का बार बार लगातार यही कहना है कि मामले में उन्हें जानबूझ कर फँसाया जा रहा है और उनकी तरफ से दावा किया जा रहा है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर इलेक्ट भरत पांड्या इस बात को समझ रहे हैं, और उन्होंने उन्हें आश्वस्त किया है कि वह रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों से बात करेंगे और इस मामले में उन्हें फँसाए जाने की कोशिशों को वह सफल नहीं होने देंगे ।
अनिल अग्रवाल यह तर्क देते हुए अपने आपको बचाने की कोशिश कर रहे हैं कि आरोपित ग्रांट वास्तव में क्लब ग्रांट है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उनका उससे कोई लेनादेना नहीं है । लेकिन तथ्य बताते हैं कि रोटरी फाउंडेशन को उक्त ग्रांट के लिए आवेदन डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के नाम से मिला था; स्वीकृत रकम डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में आई और जो उनके हस्ताक्षर से ही अकाउंट से ली जा सकती थी और ली गई । इन तथ्यों पर अनिल अग्रवाल के जबाव बड़े मजेदार हैं - जो यह सवाल भी खड़ा करते हैं कि उनके जैसा व्यक्ति डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कैसे बन गया और रोटरी में आगे भी कोई भी भूमिका पाने/निभाने की उम्मीद आखिर किस आधार पर करता/रखता है । अनिल अग्रवाल का कहना है कि रोटरी फाउंडेशन को दिए गए आवेदन में क्लब ग्रांट की जगह डिस्ट्रिक्ट ग्रांट को चिन्हित करने का काम असावधानीवश हो गया था । यह बात तो मानी जा सकती है; इस तरह की असावधानी हो सकती है - लेकिन इसके बाद की बातों का क्या ? रोटरी फाउंडेशन से ग्रांट का पैसा जब डिस्ट्रिक्ट के अकाउंट में आया, तब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अनिल अग्रवाल ने रोटरी फाउंडेशन को यह सूचित करने की जरूरत क्यों नहीं समझी कि यह ग्रांट डिस्ट्रिक्ट ग्रांट नहीं, बल्कि क्लब ग्रांट है और यह पैसा क्लब के अकाउंट में देना/जाना चाहिए ? इस पर अनिल अग्रवाल का बड़ा मासूम-सा जबाव है कि 'यह उनसे गलती हो गई' । अनिल अग्रवाल की यह 'गलती' बड़ी चालबाजीपूर्ण है - डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वह डिस्ट्रिक्ट ग्रांट के लिए आवेदन करते हैं, ग्रांट की रकम को डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में स्वीकार कर लेते हैं और मनमाने तरीके से उसे खर्च करते रहते हैं - और जब 'चोरी-चकारी' के आरोप में 'पकड़े' जाते हैं - तो यह कहते हुए बचने की कोशिश करने लगते हैं कि उनका तो ग्रांट से कोई लेना-देना ही नहीं है । रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने अनिल अग्रवाल के तर्कों को स्वीकार नहीं किया, तो अनिल अग्रवाल ने उन्हें धौंस दे दी है कि उनसे वह 'निपट' लेंगे । लोगों को लग रहा है कि रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों के लिए यह धौंस उन्होंने भरत पांड्या से मिलने वाले समर्थन के भरोसे ही दी होगी ।
उल्लेखनीय है कि अनिल अग्रवाल के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहते हुए वर्ष 2013-14 में डिस्ट्रिक्ट स्पोंसर्ड ग्लोबल ग्रांट (नंबर 1420550) मंजूर हुई थी, जिसके तहत 32169 अमेरिकी डॉलर की रकम डिस्ट्रिक्ट अकाउंट में आई । इस रकम को एक ओल्ड ऐज होम, एक कम्प्यूटर एजुकेशन सेंटर, एक टेलरिंग ट्रेनिंग सेंटर, एक प्रौढ़ शिक्षा केंद्र तथा प्राकृतिक चिकित्सा सुविधाओं से परिपूर्ण एक आयुर्वेदिक क्लीनिक खोलने में खर्च होना था । इस मामले में पहले तो क्लोजिंग रिपोर्ट भेजने/सौंपने में बहुत देरी की गई और जो भेजी/सौंपी भी - वह आधी-अधूरी थी । रोटरी फाउंडेशन की तरफ से ग्रांट की रकम के इस्तेमाल को लेकर जो सवाल पूछे गए, उनके जबाव कभी नहीं दिए गए । ग्रांट की रकम प्राप्त करने और उसे इस्तेमाल करने वाले लोग चार वर्षों तक रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों को जिस तरह से टरकाते रहे, उसके चलते रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों को ग्रांट की रकम के दुरुपयोग की आशंका हुई तो उन्होंने रोटरी ग्रांट को-ऑर्डिनेटर चंद्रा पामर को जाँच के लिए भेजा, जिन्होंने अपनी जाँच में खासी गड़बड़ियाँ पाईं । उनकी रिपोर्ट के आधार पर रोटरी इंटरनेशनल ने पिछले दिनों डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नीरज सोगानी को डिस्ट्रिक्ट 3054 को डिस्ट्रिक्ट स्पोंसर्ड ग्रांट्स की सुविधाओं से अस्थाई रूप से वंचित करने की जानकारी दी है । यह जानकारी पाकर डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों के होश उड़ गए । डिस्ट्रिक्ट में अनिल अग्रवाल के साथियों/नजदीकियों को ही नहीं, बल्कि उनके विरोधियों को भी आश्चर्य हुआ कि अनिल अग्रवाल बूढ़ों, बीमारों, गरीबों और अनपढ़ों के नाम पर पैसा लेकर उसे हड़प जाने जैसा काम कर सकते हैं । इससे भी ज्यादा हैरत की बात 'चोरी और सीना जोरी' वाले उनके मौजूदा रवैये में दिख रही है । अपने गैरजिम्मेदार व बेईमानीभरे रवैये के कारण डिस्ट्रिक्ट 3054 की पहचान और प्रतिष्ठा को मुसीबत में डालने वाले अनिल अग्रवाल जिस तरह से मामले को निपटवाने में सहयोग करने से भी इंकार कर रहे हैं - उससे लोगों को यह भी लग रहा है कि अनिल अग्रवाल वास्तव में रोटेरियन रहने लायक भी हैं क्या ?



Sunday, August 26, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3011 में अपने गवर्नर-वर्ष के एकाउंट्स की 'ड्रेसिंग' करने/करवाने में लगे निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी खुद के द्वारा मंजूर करवाई गई ग्लोबल ग्रांट में हिस्सेदारी बसूलने के लिए रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ सेंट्रल में ट्रांसफर लेने की भूमिका बना रहे हैं क्या ?

नई दिल्ली । निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि चौधरी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहते हुए लोगों को बताया था कि रोटरी में और डिस्ट्रिक्ट में जो गंदगी है, उसे नजदीक से देखने के बाद उनकी बेटी ने उनसे पूछा/कहा है कि ऐसी रोटरी में आप क्यों बने हुए हो, और इसलिए गवर्नर-काल पूरा होते ही वह रोटरी छोड़ देंगे । सुनने/देखने में लेकिन यह आ रहा है कि खुद रोटरी छोड़ने की बजाये रवि चौधरी, रोटरी और डिस्ट्रिक्ट में गंदगी देखने वाली अपनी बेटी की माँ को भी रोटरी ज्वाइन करवा रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट में हर किसी के लिए यह बात एक पहेली बनी हुई है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपनी हरकतों और अपनी कारस्तानियों से बार-बार फजीहत का शिकार होते रहे रवि चौधरी को रोटरी में आखिर ऐसा क्या मिला है, जो अब वह अपनी पत्नी को भी रोटेरियन बनवा रहे हैं ? इससे भी बड़ी पहेली की बात यह है कि रवि चौधरी अपनी पत्नी को अपने ही क्लब में नहीं, बल्कि रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ सेंट्रल में सदस्य बनवा रहे हैं । किसी के लिए भी यह समझना मुश्किल हो रहा है कि जिस क्लब ने रवि चौधरी को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने/बनाने का मौका दिया, उस क्लब से रवि चौधरी को आखिर ऐसी क्या नाराजगी है कि वह अपनी पत्नी को अपने ही क्लब का सदस्य नहीं बनवा रहे हैं ? उनके क्लब के लोगों का ही कहना/बताना है कि क्लब में रवि चौधरी की स्थिति बहुत ही खराब हो गई है, और उनका खुद का क्लब में बने रहना मुश्किल हो गया है - इसका बिलकुल नया सुबूत यह है कि रोटरी फाउंडेशन के लिए पैसे इकट्ठे करने के हाल ही में हुए कार्यक्रम में रवि चौधरी के क्लब की तरफ से कोई पैसा सिर्फ इसलिए नहीं दिया गया, क्योंकि उससे रवि चौधरी को नेतागिरी करने का मौका मिल जाता । डिस्ट्रिक्ट के फंडरेजिंग कार्यक्रम में रवि चौधरी के लिए वास्तव में बड़ी शर्मिंदगी की स्थिति बनी कि उनके क्लब से रोटरी फाउंडेशन में इकन्नी भी नहीं दी गई ।
इस तरह रवि चौधरी दूसरे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स पर अपने द्वारा लगाए जाने वाले आरोपों के खुद ही शिकार भी हो गए हैं । उल्लेखनीय है कि रवि चौधरी पूर्व गवर्नर्स पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह रोटरी के लिए कुछ ठोस काम तो करते नहीं हैं, और सिर्फ राजनीति ही करते हैं । उनके ही आरोपों का हवाला देते हुए लोगों का पूछना है कि अब रवि चौधरी खुद क्या कर रहे हैं ? अपने क्लब में उनकी क्या ऐसी भी हैसियत नहीं बची रह गई है कि वह रोटरी के एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम में अपने क्लब से कोई सहयोग दिलवा सकते और अब उनके लिए रोटरी का मतलब सिर्फ राजनीति करना ही रह गया है क्या ? रवि चौधरी पूर्व गवर्नर्स पर हिसाब-किताब में पारदर्शिता न रखने का आरोप भी लगाते रहे हैं और वह बताते रहे हैं कि पूर्व गवर्नर्स विभिन्न तरीकों से पैसों की हेराफेरी करते रहे हैं । रवि चौधरी लेकिन खुद अपने गवर्नर वर्ष के एकाउंट्स देने से बचते और मुँह छिपाते फिर रहे हैं । गवर्नर रहते हुए रवि चौधरी ने कई मौकों पर कहा था कि वह रोटरी इंटरनेशनल द्वारा तय की गई 30 जुलाई की समयावधि तक अपने गवर्नर-वर्ष के एकाउंट्स दे देंगे । 30 जुलाई को बीते एक महीना होने को आ रहा है, लेकिन रवि चौधरी के गवर्नर-वर्ष के एकाउंट्स का अभी कोई अता/पता नहीं है । उनके नजदीकियों को ही शक है कि रवि चौधरी ने अपने गवर्नर-वर्ष में इतनी घपलेबाजियाँ की हैं कि अपने एकाउंट्स की 'ड्रेसिंग' करवाने में ही उनका समय लग रहा है और इसी कारण उन्हें अपने एकाउंट्स देने में देर लग रही है । रवि चौधरी ने पिछले दिनों कोशिश की थी कि उन्हें दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में तथा जोन के कार्यक्रमों में पब्लिक इमेज पर बोलने के लिए बुलाया जाए । रवि चौधरी को लगता है और वह जताते हैं कि इस विषय के वह बहुत ज्ञाता हैं; उनके प्रोफेशन को देखते हुए उन्हें न जानने वाले लोगों को उनके ज्ञानी होने का भ्रम भी हो जाता है; इसी भ्रम के चलते दो/एक जगह उन्हें वक्ता के रूप में बुलाने की बात लगभग तय भी हो गई थी - लेकिन बुलाने वालों को जब रवि चौधरी की इमेज के बारे में पता चला तो फिर वह यह सोच कर पीछे हट गए कि जिस व्यक्ति की खुद की इमेज खराब हो तो वह रोटरी की पब्लिक इमेज पर क्या बात करेगा ?
इस तरह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से हटने के बाद भी बदनामी और फजीहत रवि चौधरी का पीछा नहीं छोड़ रही हैं । अपनी पत्नी को रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ सेंट्रल का सदस्य बनवा देने के कारण वह और विवाद में फँस गए हैं । बताया जा रहा है कि रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ सेंट्रल को दो आईसीयू यूनिट के साथ 20 डायलिसिस मशीन लगाने के लिए करीब पौने दो लाख अमेरिकी डॉलर की ग्लोबल ग्रांट मिली है ।  इसके अलावा, क्लब को करीब सवा लाख अमेरिकी डॉलर की एक और ग्लोबल ग्रांट मिलना है । आरोप है कि उक्त ग्रांट्स की बंदरबाँट में अपना हिस्सा बसूलने के लिए ही रवि चौधरी ने अपनी पत्नी को रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ सेंट्रल का सदस्य बनवाया है । उक्त दोनों ग्रांट्स संभव करवाने में रवि चौधरी चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपनी भूमिका को निर्णायक मानते हैं, इसलिए एक होशियार 'सौदेबाज' के रूप में वह अपनी भूमिका की उचित कीमत बसूलना चाहते हैं । मजे की बात यह है कि रवि चौधरी पूर्व गवर्नर्स पर ग्लोबल तथा अन्य ग्रांट्स में हेराफेरी करने का आरोप भी खूब लगाते रहे हैं । इस मामले में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल के क्लब की एक ग्रांट का हवाला देकर वह विनोद बंसल को लगातार निशाने पर लेते रहे हैं । आरोप है कि अब वह खुद इस जुगाड़ में हैं कि विभिन्न ग्रांट्स में कैसे पैसे बनाये जाएँ ? रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ सेंट्रल के निवर्त्तमान प्रेसीडेंट मुकेश अग्रवाल को उन्होंने बेस्ट प्रेसीडेंट का (आधा) अवॉर्ड दिया ही है, और उन्हें करीब तीन लाख अमेरिकी डॉलर की ग्लोबल ग्रांट दिलवाने में भूमिका निभाई है - इसलिए उन्हें लगता है कि मुकेश अग्रवाल के सहारे वह उक्त ग्रांट्स में अपनी हिस्सेदारी निकाल सकेंगे । 'बाहर' से यह कर पाना उनके लिए मुश्किल क्या, असंभव ही होता; आरोपपूर्ण चर्चा के अनुसार, अपनी पत्नी को रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ सेंट्रल का सदस्य बनवा कर रवि चौधरी ने वास्तव में क्लब को मिली ग्रांट में सेंध लगाने का मौका बनाया है । आरोपपूर्ण चर्चा में तर्क दिया जा रहा है कि अन्यथा कोई कारण नहीं है, कि जो रवि चौधरी खुद रोटरी छोड़ देने की बात कर रहे हों, वह रवि चौधरी अपनी पत्नी को भी रोटेरियन बनवा दें, और वह भी अपने क्लब में नहीं । कुछेक लोगों को तो शक है कि रवि चौधरी हो सकता है कि कुछ दिनों में खुद भी रोटरी क्लब दिल्ली साऊथ सेंट्रल में ट्रांसफर ले लें । 

Friday, July 27, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 के ग्लोबल ग्रांट प्रोजेक्ट को जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना ही मंजूर करवाने के पीछे राजा साबू की इमरजेंसी आखिर क्या है; और मुट्ठी भर रोटेरियंस के भ्रष्ट आचरण का रोना रोने वाले गुलाम वहनवती इस मामले में मजबूर क्यों हो गए हैं ?

चंडीगढ़ । रोटरी फाउंडेशन ने जरूरी शर्तों को अनदेखा करते हुए डिस्ट्रिक्ट 3080 के रोटरी ग्लोबल ग्रांट जीजी 1875158 के आवेदन को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 97 हजार अमेरिकी डॉलर, यानि करीब 67 लाख रुपए दिए जायेंगे । यह पैसा यूगांडा के मसाका शहर के हॉस्पिटल के मरीजों के ईलाज में तथा हॉस्पिटल के मेडीकल स्टाफ को आँख, नाक, कान, गले, दाँत की देखभाल व उनके ईलाज के लिए प्रशिक्षण देने पर खर्च किया जायेगा । इसके लिए डॉक्टरों तथा वॉलिंटियर्स की एक टीम चंडीगढ़ से मसाका जाएगी । मसाका, चंडीगढ़ से करीब साढ़े पाँच हजार किलोमीटर दूर है । मसाका की आबादी एक लाख से भी कम है । मरीज कहीं के भी हों, उनके ईलाज की व्यवस्था होनी ही चाहिए, और यह व्यवस्था कोई भी कहीं से भी कर सकता है । रोटरी इंटरनेशनल और रोटेरियंस ने मरीजों की देखभाल और उनके ईलाज पर विशेष ध्यान केंद्रित किया हुआ है, और इसके लिए खासी तत्परता के साथ काफी पैसा खर्च किया जाता है । हालाँकि पैसा कड़ी जाँच-पड़ताल के तहत ही खर्च किया जाता है, खासकर भारत के डिस्ट्रिक्ट्स की तरफ से जाने वाले आवेदनों की तो कड़ी जाँच-पड़ताल की जाती है । पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर सुशील गुप्ता के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 3011 में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनोद बंसल के क्लब के एक बड़े ग्रांट-प्रोजेक्ट की तीन बार ऑडिट करने की जरूरत पड़ी, जिसके चलते विनोद बंसल तथा क्लब के अन्य पदाधिकारियों के लिए शर्मिंदगी की स्थिति बनी । वित्तीय घपलेबाजी के आरोपों के चलते ही डिस्ट्रिक्ट 3012 में सतीश सिंघल डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्त हुए और डिस्ट्रिक्ट 3030 के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर निखिल किबे को रोटरी से ही बाहर होना पड़ा । रोटरी फाउंडेशन के ट्रस्टी गुलाम वहनवती पिछले दिनों कई मौकों पर इस शर्मनाक तथ्य को बता चुके हैं कि भारत के कुछेक मुट्ठी भर रोटेरियंस के भ्रष्ट आचरण की वजह से रोटरी इंटरनेशनल में भारत की छवि कलुषित हो रही है; इस तथ्य पर गंभीर चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने बार-बार इसे बेहद शर्मनाक बताया है ।
इसके बावजूद, डिस्ट्रिक्ट 3080 के एक ग्रांट-आवेदन को जरूरी शर्तों को अनदेखा करते हुए मंजूर कर लिया जाता है । ऐसा इसलिए हो जाता है, क्योंकि इसके लिए पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ राजा साबू की जोरदार सिफारिश होती है । जाहिर है कि यह सुविधा हर किसी को नहीं मिलेगी । किसी के लिए भी यह समझना मुश्किल है कि मसाका जैसे एक छोटे से शहर में लोगों के नाक, कान, आँख, गले के ईलाज में ऐसी क्या इमरजेंसी आ गई कि राजा साबू को जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना अपने ग्रांट-आवेदन को मंजूर करने के लिए कहना पड़ा, और रोटरी फाउंडेशन के चेयरमैन को उनकी बात मानने के लिए मजबूर भी होना पड़ा ? आरोपपूर्ण चर्चाओं के अनुसार, मामला इमरजेंसी ईलाज का नहीं है, इमरजेंसी तो राजा साबू और उनके नजदीकियों के मौज-मजे की है । उल्लेखनीय है कि मसाका, अफ्रीका की एक साफ पानी की अत्यंत सुंदर व मशहूर झील, लेक विक्टोरिया के पश्चिम किनारे पर बसा शहर है और अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना/पहचाना जाता है । वहाँ घूमने/फिरने के लिहाज से जुलाई/अगस्त के महीने को ही उपयुक्त देखा/माना जाता है । राजा साबू ने जुलाई महीने में ही वहाँ के मरीजों के ईलाज की तैयारी की थी । मूल रूप में यह राजा साबू के क्लब का ही प्रोजेक्ट था । लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा ने प्रोजेक्ट को पूरा ब्यौरा जाने बिना प्रोजेक्ट के आवेदन पर हस्ताक्षर करने से चूँकि मना कर दिया था, इसलिए राजा साबू का यह प्रोजेक्ट खटाई में पड़ता दिख रहा था । ज्यादा देर होती तो मरीजों के ईलाज के बहाने जुलाई/अगस्त के सुहाने मौसम में मसाका घूमने जाने का मौका राजा साबू और उनके साथियों से छिन जाता । इसलिए अपने पूर्व प्रेसीडेंट होने के कारण बने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए राजा साबू ने जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना ही रोटरी फाउंडेशन से ग्रांट मंजूर करवा ली है ।
डिस्ट्रिक्ट के लोगों के लिए हैरानी की बात यह है कि राजा साबू को अपने डिस्ट्रिक्ट के भौगिलिक क्षेत्र - यानि चंडीगढ़, यमुनानगर, देहरादून, सहारनपुर, रुड़की, अंबाला, पानीपत तथा इनके आसपास के क्षेत्रों में नाक, कान, आँख, गले के मरीज दिखाई नहीं देते हैं क्या ? यह क्षेत्र, और खासकर उत्तराखंड का क्षेत्र इस समय बारिश और बाढ़ की भारी तबाही का शिकार है, और वहाँ राहत-कार्यों की तत्काल जरूरत है - राजा साबू और उनके साथी, पूर्व गवर्नर शाजु पीटर व मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीन गोयल, उनकी तबाही पर ध्यान न देते हुए लेकिन मसाका जाने की तैयारी कर रहे हैं या करवा रहे हैं । इस ग्रांट के लिए जिस खुफिया तरीके से तैयारी की गई है, वही ग्रांट के नाम पर होने वाली घपलेबाजी के संदेह खड़ा करती है । रोटरी फाउंडेशन के नियमानुसार, डिस्ट्रिक्ट में ग्लोबल ग्रांट के आवेदन पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के भी हस्ताक्षर होना जब जरूरी हैं, तब सवाल यही है कि राजा साबू, शाजु पीटर और प्रवीन गोयल की तिकड़ी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट जितेंद्र ढींगरा से तथ्यों को छिपा क्यों रही है; और क्यों जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना ग्लोबल ग्रांट को मंजूर करवाया गया है ? रोटरी फाउंडेशन में ट्रस्टी के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे गुलाम वहनवती, जो भारत के कुछेक मुट्ठी भर रोटेरियंस के भ्रष्ट आचरण के कारण रोटरी इंटरनेशनल में भारत के लिए बनने वाली शर्मनाक स्थिति का रोना रोते रहते हैं, इस मामले में आश्चर्यजनक रूप से चुप हैं । कुछेक लोगों का तो आरोप है कि शर्तों को पूरा किए बिना राजा साबू की ग्लोबल ग्रांट  मंजूर करवाने का काम गुलाम वहनवती ने ही किया है । देखना दिलचस्प होगा कि इसके बाद भी रोटरी के कार्यक्रमों में गुलाम वहनवती भारत के कुछेक मुट्ठी भर रोटेरियंस के भ्रष्ट आचरण के कारण रोटरी इंटरनेशनल में भारत के लिए बनने वाली शर्मनाक स्थिति की बात पर घड़ियाली आँसू बहाना जारी रखते हैं, या इस मामले को छोड़ देते हैं ।


Tuesday, January 2, 2018

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3080 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल द्वारा ग्लोबल ग्रांट के प्रस्ताव लेने की हड़बड़ी के पीछे राजा साबू की छत्रछाया में ग्लोबल ग्रांट हड़पने की योजना को पूरा करने की तरकीब को देखा/पहचाना जा रहा है

चंडीगढ़ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल की अगले रोटरी वर्ष की टीम का 'परिचय' शीर्षक से हो रहा पहला कार्यक्रम ग्लोबल ग्रांट के लिए प्रस्ताव माँगने तथा निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा का मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी से पैसे ऐंठने की कोशिश के चलते विवाद में पड़ गया है । प्रवीन गोयल ने अपने पहले कार्यक्रम का निमंत्रण देते हुए प्रेसीडेंट्स इलेक्ट को संबोधित जो पत्र लिखा है, उसमें ग्लोबल ग्रांट के लिए आवेदन देने पर जिस तरह से जोर दिया है - उससे आभास मिला है कि डिस्ट्रिक्ट में ग्लोबल ग्रांट्स के बल-बूते राजनीति, धंधा और मौज-मजा करने वाले गिरोह ने प्रवीन गोयल को अपनी गिरफ्त में ले लिया है और प्रवीन गोयल ने उनके 'एजेंडे' पर अमल करना शुरू कर दिया है । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 3080 में पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू की छत्रछाया में ग्लोबल ग्रांट्स 'हड़पने' के काम को संगठित रूप दे दिया गया है । इसके तहत ग्लोबल ग्रांट 'बटोरने' और मनमाने तरीके से उसका इस्तेमाल अपनी राजनीति करने में, अपने धंधे को बढ़ाने में और अपना मौज-मजा करने में किया जाता रहा है । पिछले दिनों राजा साबू की छत्रछाया में चलने वाले इस संगठित 'धंधे' के जो कुछ तथ्य सामने आये हैं, वह हैरान करने वाले हैं - और जो ग्लोबल ग्रांट जैसे रोटरी इंटरनेशनल की महत्त्वपूर्ण योजना को रोटरी इंटरनेशनल के ही एक पूर्व प्रेसीडेंट द्वारा मजाक और 'लूट' का जरिया बना देने के उदाहरण और सुबूत पेश करते हैं । राजा साबू की छत्रछाया में चलने वाले इस संगठित धंधे में यह कमाल भी हुआ कि खुद राजा साबू के क्लब में कई कई ग्लोबल ग्रांट्स ली गईं, जिनके पैसों पर खुद राजा साबू दूसरे देशों में बाज उड़ाते और मधुकर मल्होत्रा अपनी पत्नी के साथ दूसरे देशों में सैरसपाटा करते देखे/पाए गए । कुछेक ग्लोबल ग्रांट्स में तो यहाँ तक हुआ कि क्लब की तरफ से बिना इकन्नी दिए ही ग्रांट हड़प ली गई । यानि राजा साबू की छत्रछाया में ग्लोबल ग्रांट के बलबूते 'हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा' का पूरा इंतजाम कर लिया गया । इस सब की पोल खुलने के बाद उम्मीद की गई थी कि राजा साबू की छत्रछाया में चलने वाले इस संगठित धंधे पर रोक लगेगी और ग्लोबल ग्रांट्स का नियमानुसार बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल ने लेकिन अपने पहले ही कार्यक्रम में जिस तरह से ग्लोबल ग्रांट के लिए प्रस्ताव माँगे हैं, उससे संकेत मिले हैं कि राजा साबू की छत्रछाया में ग्लोबल ग्रांट हड़पने का खेल अभी बंद नहीं हुआ है - बल्कि प्रवीन गोयल के जरिए ग्लोबल ग्रांट को हड़पने के खेल को तेज और कर दिया गया है । यहाँ ध्यान में रखने की बात यह है कि प्रवीन गोयल, राजा साबू के क्लब के ही सदस्य हैं । अपने पहले कार्यक्रम का निमंत्रण देते हुए, प्रेसीडेंट्स इलेक्ट को संबोधित पत्र में प्रवीन गोयल ने कहा है कि वह 14 जनवरी को इंटरनेशनल असेंबली के लिए रवाना हो रहे हैं, इसलिए 'जरूरी' है कि ग्लोबल ग्रांट के लिए प्रस्ताव 6 जनवरी के उक्त कार्यक्रम में सौंप दिए जाएँ । अपने पत्र में प्रवीन गोयल का यह कहना इस बात का सुबूत है कि ग्लोबल ग्रांट के लिए अप्लाई करने की प्रक्रिया का खुद उन्हें भी कोई ज्ञान नहीं है, और वह 'किसी और के' निर्देश पर ग्लोबल ग्रांट के प्रस्ताव लेने की खानापूरी करने की हड़बड़ी में हैं ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट प्रवीन गोयल ग्लोबल ग्रांट के लिए अप्लाई करने की प्रक्रिया का यदि प्रारंभिक ज्ञान भी प्राप्त कर लेते तो उन्हें इतना तो पता हो ही जाता कि इंटरनेशनल असेंबली में शामिल होने जा रहे डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट को अपने साथ ग्लोबल ग्रांट्स के प्रस्ताव ले जाना कतई 'जरूरी' नहीं है । दो व्यावहारिक बातें भी हैं : पहली यह कि अभी खुद प्रवीन गोयल की और 'उनके' प्रेसीडेंट्स की ट्रेनिंग होनी है, प्रेसीडेंट इलेक्ट से यह उम्मीद करना कि वह अपने 'परिचय' कार्यक्रम में ग्लोबल ग्रांट का प्रस्ताव तैयार करके ले आएगा - बताता/दिखाता है कि प्रवीन गोयल को अभी बहुत ट्रेनिंग की जरूरत है; दूसरी बात यह कि रोटरी की व्यवस्था और नियमों के अनुसार किसी भी वर्ष रोटरी का अधिकृत काम उस वर्ष के क्लब-प्रेसीडेंट तथा उस वर्ष के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के मार्फ़त ही हो सकता है, प्रवीन गोयल लेकिन दोनों को ही किनारे करके ग्लोबल ग्रांट के प्रस्ताव माँगने को जिस तरह जरूरी बता रहे हैं उससे साबित कर रहे हैं कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार संभालने के लिए तैयारी भले ही शुरू कर दी है - लेकिन वह रोटरी का बुनियादी ज्ञान और समझ अभी तक भी प्राप्त नहीं कर सके हैं । रोटरी इंटरनेशनल की व्यवस्था और उसके नियमों की अनदेखी करते हुए प्रवीन गोयल ने प्रेसीडेंट्स इलेक्ट के लिए 6 जनवरी के कार्यक्रम में ग्लोबल ग्रांट के प्रस्ताव देने को जिस हड़बड़ी के साथ 'जरूरी' करार दिया है, उसके पीछे राजा साबू की छत्रछाया में ग्लोबल ग्रांट हड़पने की संगठित योजना को पूरा करने की तरकीब को छिपा देखा/पहचाना जा रहा है ।
प्रवीन गोयल के 6 जनवरी के कार्यक्रम की आड़ में निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा ने मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी से करीब 80 हजार रुपए ऐंठने की जो कोशिश की है, वह और भी मजेदार किस्सा है । उल्लेखनीय है डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रमन अनेजा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में टीके रूबी द्वारा किए गए पेट्स के आयोजन में तो एक नए पैसे का सहयोग नहीं दिया - डिस्ट्रिक्ट की व्यवस्था के अनुसार जो उन्हें देना चाहिए था, लेकिन अब रमन अनेजा माँग कर रहे हैं कि प्रवीन गोयल के कार्यक्रम के लिए दिया जाने वाला पैसा टीके रूबी उन्हें दे दें । टीके रूबी का कहना रहा है कि जिस तरह से उन्होंने अपने खर्चे स्वयं वहन किए हैं, उसी तरह से प्रवीन गोयल को भी अपने खर्चे स्वयं करने चाहिएँ - प्रवीन गोयल ने 1300 रुपए और 2250 रुपए का रजिस्ट्रेशन चार्ज बसूल करके अपने कार्यक्रम के खर्चे की व्यवस्था कर भी ली है, लेकिन रमन अनेजा को फिर भी टीके रूबी से करीब 80 हजार रुपए चाहिए हीं । दरअसल रमन अनेजा ने पिछले रोटरी वर्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में प्रवीन गोयल द्वारा किए गए कार्यक्रम के खर्च के लिए कुछ पैसे खर्च किए थे, लेकिन डिस्ट्रिक्ट में हुए उलटफेर के चलते फिर वह कार्यक्रम हुआ ही नहीं, जिसके चलते रमन अनेजा के करीब 80 हजार रुपए फँसे । रमन अनेजा को वह रकम प्रवीन गोयल से माँगनी चाहिए, जो अपने कार्यक्रम का खर्च पूरा करने के लिए रजिस्ट्रेशन चार्ज बसूल रहे हैं - और लोगों के कहे अनुसार ज्यादा ही बसूल रहे हैं; रमन अनेजा उक्त रकम लेकिन टीके रूबी से झटकने की कोशिश कर रहे हैं ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट के रूप में प्रवीन गोयल द्वारा ग्लोबल ग्रांट के प्रस्ताव सौंपने को जरूरी बताने तथा निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन अनेजा द्वारा मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर टीके रूबी से रकम ऐंठने की कोशिश ने प्रवीन गोयल के पहले ही कार्यक्रम को विवादस्पद बना दिया है । इन बातों से लगता है कि प्रवीन गोयल के गवर्नर-काल में रोटरी की व्यवस्थाओं और नियम-कानूनों का मजाक बनना देखने के मजेदार मौके मिलते रहेंगे ।