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Wednesday, October 28, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के चेयरमैन क्षितिज शर्मा को पूर्व चेयरमैन पारस अग्रवाल के अकाउंट की जाँच रोकने के मामले में लायंस इंटरनेशनल से झटका लगा, और इस प्रकरण में काउंसिल सेक्रेटरी राजीव अग्रवाल की भूमिका की चर्चा ने मामले को और दिलचस्प बनाया  

आगरा । लायंस इंटरनेशनल कार्यालय ने पूर्व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पारस अग्रवाल के अकाउंट में गड़बड़ी के आरोपों की जाँच को रोकने के मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा के फैसले को रद्द करके जाँच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आदेश देकर पारस अग्रवाल की मुश्किलों को एक बार फिर से बढ़ा दिया है । लायंस इंटरनेशनल कार्यालय के फैसले से 'रचनात्मक संकल्प' की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट में व्यक्त की गई आशंका सच साबित हुई है, जिसमें कहा गया था कि जाँच रुकवाने की कोशिश करके पारस अग्रवाल ने अकाउंट में झोलझाल होने के आरोपों को विश्वसनीयता दे दी है, और इस तरह जो काम मधु सिंह लगातार सक्रियता दिखा/बना कर नहीं कर पा रही थीं - उसे खुद पारस अग्रवाल ने एक गलत कदम के जरिये कर दिया है । पारस अग्रवाल ने सोचा तो यह था कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद पर क्षितिज शर्मा नाम की जो एक कठपुतली है, उससे वह जाँच को रुकवा लेंगे; लेकिन उन्हें यह ध्यान नहीं रहा होगा कि ऊपर का कार्यालय जाँच रोकने के फैसले को रद्द भी कर सकता है और तब उनकी ज्यादा फजीहत होगी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में क्षितिज शर्मा ने मनमानी तथा नियमों की अनदेखी करते हुए पारस अग्रवाल के अकाउंट की जाँच को रोक देने का तो फैसला कर लिया था, लेकिन लायंस इंटरनेशनल कार्यालय ने उनके फैसले को रद्द करके जाँच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का जो आदेश दिया है, उसने क्षितिज शर्मा और पारस अग्रवाल के लिए मुसीबतों को और बढ़ा दिया है ।
पारस अग्रवाल दरअसल जाँच से इसलिए डरे हुए हैं, क्योंकि वह यह मान कर चल रहे हैं कि जाँच कमेटी अवश्य ही अकाउंट में फर्जीवाड़ा करने का उन्हें दोषी ठहरायेगी । जाँच कमेटी में अभी अशोक गुप्ता, पारस अग्रवाल के; अशोक कपूर, मधु सिंह के; और संजय चोपड़ा, विशाल सिन्हा के प्रतिनिधि के रूप में हैं - और इन तीनों को कमेटी का चेयरमैन चुनना है, जो मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स केएम गोयल, विनोद खन्ना व जगदीश गुलाटी में से कोई एक होगा । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इस वर्ष जो हो रहा है और इंटरनेशनल डायरेक्टर एंडॉर्सी जितेंद्र चौहान तथा मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा जिस तरह की मनमानी कर रहे हैं, उसके चलते तीनों पूर्व डायरेक्टर्स अपने आप को पूरी तरह उपेक्षित महसूस कर रहे हैं तथा बुरी तरह नाराज हैं । पारस अग्रवाल तथा उनके शुभचिंतकों को डर वास्तव में यही है कि तीनों पूर्व डायरेक्टर्स में से जो भी चेयरमैन बनेगा, वह अकाउंट की कमियों और गलतियों को खोजेगा तथा पारस अग्रवाल को दोषी ठहरायेगा । पारस अग्रवाल और उनके नजदीकी दरअसल इसीलिए चाहते थे कि मधु सिंह ने अकाउंट को लेकर जाँच की जो माँग की हुई है, उस माँग को किसी न किसी बहाने से रद्द किया जाए और जाँच से बचा जाए । लेकिन लायंस इंटरनेशनल कार्यालय ने मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन क्षितिज शर्मा से जाँच को रुकवा तथा रद्द करवा देने की उनकी कोशिश पर पानी फेर दिया है ।
पारस अग्रवाल के अकाउंट के मुद्दे पर मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में जो घमासान मचा हुआ है, उसने मल्टीपल काउंसिल सेक्रेटरी राजीव अग्रवाल के लिए एक अलग तरह की मुसीबत पैदा की है । पारस अग्रवाल और उनके समर्थकों ने राजीव अग्रवाल पर सूचनाओं को लीक करने का आरोप लगाया हुआ है । पारस अग्रवाल और उनके समर्थकों को असल में यह बात हैरान किए हुए है कि उनके बीच की बातें विरोधी खेमे के लोगों तक तुरंत कैसे पहुँच जाती हैं ? इस हैरानी को दूर करने की उनकी कोशिशें राजीव अग्रवाल को संदिग्ध बनाती हैं । दरसअल राजीव अग्रवाल ही मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के ऐसे पदाधिकारी हैं, जिनकी नजदीकियत विरोधी खेमे के नेताओं के साथ भी है । विरोधी खेमे के नेताओं के साथ उनकी नजदीकियत वास्तव में संयोगवश ही है । राजीव अग्रवाल अपने डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री - में जिन नेताओं के साथ और संपर्क में ज्यादा रहते हैं, वह मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में विरोधी खेमे के सक्रिय सदस्यों के रूप में देखे/पहचाने जाते हैं - और इसीलिए पारस अग्रवाल तथा उनके नजदीकियों को लगता है कि उन्हें बचाने के लिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारी जो भी योजना बनाते हैं, वह राजीव अग्रवाल के जरिये विरोधी खेमे के नेताओं तक पहुँच जाती है और विरोधी खेमे के लोग पहले से ही उनकी योजना को फेल करने में जुट जाते हैं । मामले में राजीव अग्रवाल को घसीटे जाने से लग रहा है कि अकाउंट के जरिये पारस अग्रवाल को घेरने/फँसाने तथा बचाने की 'लड़ाई' में अन्य कई लोगों के भी फजीहत का शिकार होने के हालात बन रहे हैं, और इससे मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक समीकरणों में कई तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे ।

Friday, October 9, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में पूर्व चेयरमैन पारस अग्रवाल की अपने अकाउंट में गड़बड़ी के आरोपों की जाँच को रोकने की कोशिश ने उनके अकाउंट को संदेहजनक बनाने का वह काम कर दिया है, जिसे मधु सिंह लगातार सक्रियता के बावजूद भी नहीं कर पा रही थीं  

आगरा । पूर्व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पारस अग्रवाल ने अपने अकाउंट को लेकर चल रहे विवाद में लगता है कि खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है, और अपने आपको ज्यादा बड़ी मुसीबत में फँसा लिया है ? पारस अग्रवाल के नजदीकियों और शुभचिंतकों का ही कहना है कि निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधु सिंह की अधिकृत शिकायत पर, लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानून के तहत मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में जाँच कमेटी बनने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद पारस अग्रवाल ने अधिकृत शिकायत को निरस्त करने की माँग करके मामले को पूरी तरह से पलटते हुए लोगों के बीच गड़बड़ी के संदेहों को बढ़ा दिया है, जिसके चलते मधु सिंह के आरोपों को गंभीरता से देखा जाने लगा है और मधु सिंह के आरोपों को जैसे नया जीवन मिल गया है । पारस अग्रवाल की उक्त माँग आने से पहले तक सीन यह बन गया था कि मधु सिंह के आरोपों पर मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के लोगों ने दिलचस्पी खो दी थी, और लोग समझने/मानने लगे थे कि मधु सिंह किसी निजी खुन्नसबाजी में पारस अग्रवाल को परेशान और बदनाम कर रही हैं । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में भी जाँच की जो कार्रवाई होनी थी, उसके 'समीकरण' भी पारस अग्रवाल के हक में थे, और पक्ष-विपक्ष के लोग मान रहे थे कि उक्त जाँच में पारस अग्रवाल को क्लीन चिट मिल जायेगी । लेकिन पारस अग्रवाल ने अधिकृत शिकायत को रद्द करने की माँग करके तथा शुरू हुई जाँच प्रक्रिया को रुकवा कर एक मरते हुए मामले को फिर से जिंदा कर दिया है ।
दरअसल, लोगों के बीच सवाल पैदा हुआ है कि पारस अग्रवाल जाँच को रोकना क्यों चाहते हैं ? इसी से लोगों के बीच संदेह बढ़ा है कि जरूर ही उनके अकाउंट में बड़ा झोलझाल है, और इसीलिए जाँच की प्रक्रिया के शुरू होने ने उन्हें डरा दिया है और वह जाँच को रोकने की कोशिशों में जुट गए हैं । पारस अग्रवाल के लिए फजीहत की बात यह हुई है कि जाँच को रोकने के लिए उन्होंने जो कारण बताया है, वह लोगों को नियमानुसार उचित नहीं लग रहा है और उसे एक बहानेबाजी के रूप में ही देखा/पहचाना जा रहा है । पारस अग्रवाल ने कारण बताया है कि अकाउंट के पास होने के बाद शिकायत करने के लिए जो समयसीमा तय है, मधु सिंह की शिकायत उस समयसीमा के समाप्त होने के बाद आई है, इसलिए उनकी शिकायत को अमान्य किया जाना चाहिए और उसके आधार पर कोई जाँच नहीं होना चाहिए । लेकिन पारस अग्रवाल जिस समयसीमा का वास्ता दे रहे हैं, वह अकाउंट के 'फाइनली' पास होने पर लागू होता है - अकाउंट फाइनली मल्टीपल कन्वेंशन में पास होते हैं, जो अभी हुई ही नहीं है । अभी तो उनके अकाउंट को मल्टीपल बोर्ड ने पास किया है, फाइनली पास तो उन्हें तब माना/कहा जायेगा, जब वह कन्वेंशन में पास होंगे । इसलिए जिस नियम का हवाला देकर पारस अग्रवाल ने बचने की कोशिश की है, वह नियम अभी लागू ही नहीं होता है । लोगों को लगता है कि पारस अग्रवाल ने सोचा होगा कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद पर क्षितिज शर्मा नाम की जो एक कठपुतली है, वह वही करेगी जैसा वह कहेंगे/चाहेंगे - लेकिन पारस अग्रवाल ने यह नहीं सोचा होगा कि जाँच से बचने की उनकी कोशिश उनकी मुश्किलों को कम करने की बजाये और बढ़ाने का ही काम करेगी ।
पारस अग्रवाल के अकाउंट का मामला दरअसल परसेप्शन का मामला है । अकाउंट में झोलझाल यदि साबित भी हो जाता है, तो क्या होगा ? लायंस व्यवस्था में सजा का कोई प्रावधान तो है नहीं ! ऐसे में, मधु सिंह की कोशिश इतनी ही लगती है कि वह पारस अग्रवाल को बदनाम करें, और इसके लिए वह लोगों के बीच संदेह तो पैदा कर ही दें । मधु सिंह ने इसके लिए बहुत प्रयास किए, लेकिन उनके प्रयास सफल नहीं हो रहे थे - और उनके आरोपों में दिलचस्पी व मजे लेने वाले लोग भी निराश हो चले थे । उनकी निराशा मधु सिंह द्वारा मल्टीपल में अधिकृत शिकायत दर्ज करवाने तथा उनकी शिकायत पर जाँच की प्रक्रिया शुरू होने से भी दूर नहीं हुई । हर किसी को लग रहा था कि मल्टीपल में होने वाली जाँच को पारस अग्रवाल 'मैनेज' कर लेंगे, और मधु सिंह की यह कोशिश भी व्यर्थ ही जायेगी । लेकिन पारस अग्रवाल ने मधु सिंह की शिकायत को रद्द करने का आवेदन दे कर अपने अकाउंट को संदेहजनक बना लिया है - और इस तरह जो काम, मधु सिंह लगातार सक्रियता दिखा/बना कर नहीं कर पा रही थीं, उसे खुद पारस अग्रवाल ने एक गलत कदम उठा कर दिया है । पारस अग्रवाल जाँच तो रुकवा लेंगे, लेकिन इससे उन्होंने मल्टीपल के लोगों के बीच यह संदेह और सवाल पैदा कर दिया है कि उनके अकाउंट में यदि कोई झोलझाल नहीं है, तो वह जाँच से डर क्यों रहे हैं ? 

Saturday, September 12, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में पारस अग्रवाल के मल्टीपल अकाउंट्स को लेकर लगे आरोपों की जाँच करने वाली कमेटी के चेयरमैन के चुनाव/चयन में अशोक कपूर के हाथ लगा अवसर, क्या सचमुच पारस अग्रवाल की मुश्किलों को बढ़ाने का काम कर सकेगा ?

आगरा । पूर्व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पारस अग्रवाल के अकाउंट्स को लेकर चल रहे विवाद में निर्णायक भूमिका निभाने का मौका जिस प्रकार पूर्व गवर्नर अशोक कपूर के हाथ में आ गया दिख रहा है, उससे निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मधु सिंह और उनके नजदीकी खुश हो रहे हैं - और उन्हें लग रहा है कि अब पारस अग्रवाल को मुश्किल का सामना करना पड़ेगा । पारस अग्रवाल के अकाउंट्स को लेकर लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानून के तहत मधु सिंह ने मल्टीपल में अधिकृत रूप से शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर कार्रवाई करते हुए जाँच कमेटी बनाने की तैयारी शुरू हुई है । इस तैयारी के तहत शिकायतकर्ता के रूप में मधु सिंह ने अशोक कपूर को; तथा शिकायत में आरोपी बनाये गए पारस अग्रवाल और विशाल सिन्हा ने क्रमशः अशोक गुप्ता तथा संजय चोपड़ा को अपना अपना प्रतिनिधि बनाया है । जाँच कमेटी का चेयरमैन कोई पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर होगा, जिसका चुनाव/चयन तीनों प्रतिनिधियों के वोटों के बहुमत से तय होगा । नियमानुसार व व्यवस्थानुसार, तीनों प्रतिनिधियों को दो दो पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स के नाम देने होंगे, और जिसका नाम सबसे ज्यादा बार लिया गया होगा, वह चेयरमैन बनेगा । खेमेबाजी तथा पसंद/नापसंद के आधार पर जो अनुमान लगाए जा रहे हैं, उनमें अशोक कपूर के द्वारा दिए जाने वाले दो नामों में से एक के चेयरमैन बनने की संभावना देखी जा रही है - और लोगों को लग रहा है कि यह संभावना पारस अग्रवाल के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाली हो सकती है ।
पारस अग्रवाल के अकाउंट्स को लेकर लगे आरोपों की जाँच करने वाली कमेटी के चेयरमैन के चुनाव/चयन में अशोक कपूर के हाथ लगा अवसर दरअसल कई तरह के संयोगों के कारण बना है । माना/समझा जा रहा है कि पारस अग्रवाल और विशाल सिन्हा के प्रतिनिधि के रूप में अशोक गुप्ता तथा संजय चोपड़ा किसी भी हालत में विनोद खन्ना का नाम नहीं देंगे; ऐसे में उनके पास केएम गोयल व जगदीश गुलाटी का नाम देने का ही विकल्प बचा रह जाता है । अशोक कपूर को लेकर लोगों का मानना और कहना है कि वह विनोद खन्ना का नाम तो जरूर देंगे, और दूसरा नाम केएम गोयल तथा जगदीश गुलाटी में से किसी एक का देंगे । ऐसे में अशोक कपूर दूसरा जो भी नाम देंगे, वह सबसे ज्यादा - तीन वोट पाकर चेयरमैन बनने का अधिकारी हो जायेगा । वह चूँकि तीनों प्रतिनिधियों की पसंद होगा, इसलिए कोई उसके चुनाव/चयन पर आपत्ति भी नहीं कर पायेगा । ऐसे में जाहिर है कि अशोक कपूर के सामने यह देखने/समझने का पूरा मौका है कि जाँच कमेटी के चेयरमैन के रूप में केएम गोयल तथा जगदीश गुलाटी में से कौन पारस अग्रवाल के अकाउंट्स पर की जा रही आपत्तियों को सही ठहराने का 'काम' कर सकेगा - और पारस अग्रवाल की मुश्किलों को बढ़ायेगा ?
हालाँकि मल्टीपल के कई एक नेताओं को लगता है कि पारस अग्रवाल के समर्थक व शुभचिंतक अवश्य ही कोई तोड़ निकाल लेंगे और वह अशोक कपूर को मिलते दिख रहे 'अवसर' को आसानी से सफल नहीं होने देंगे । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जितेंद्र चौहान के एंडोर्समेंट को लेकर उड़ी एक बेफालतू की खबर पर बौखलाहट दिखाते हुए मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा ने जैसी जो सक्रियता दिखाई थी, उसे याद/ध्यान करते हुए लोगों को लगता है कि क्षितिज शर्मा जाँच कमेटी का ऐसा कोई स्वरूप तो नहीं 'बनने' देंगे, जो पारस अग्रवाल के लिए मुश्किलें खड़ी कर सके । इसके लिए नरेश अग्रवाल के नाम का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जो पूर्व प्रेसीडेंट होने के साथ-साथ पूर्व डायरेक्टर भी तो हैं - और जिन्हें लेकर भले ही कहा जा रहा हो कि उन्हें इस 'झगड़े' में नहीं खींचना चाहिए । मधु सिंह के नजदीकियों का भी कहना/बताना है कि उन्हें आशंका है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में पारस अग्रवाल के अकाउंट्स को लेकर की गई शिकायत की जाँच को आसानी से नहीं होने दिया जायेगा; लेकिन जो भी होगा - उससे अंततः लोगों के बीच यही संदेश जायेगा कि पारस अग्रवाल और उनके समर्थक व शुभचिंतक निष्पक्ष जाँच नहीं होने देना चाहते हैं; और यह संदेश कुल मिलाकर पारस अग्रवाल के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला ही साबित होगा । इसीलिए माना/समझा जा रहा है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में दर्ज हुई शिकायत पर जाँच की प्रक्रिया को पारस अग्रवाल और उनके समर्थकों ने यदि ठीक से हैंडल नहीं किया, और सारा मामला मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा पर ही छोड़ दिया, तो कहीं जितेंद्र चौहान वाले मामले की तरह लेने के देने न पड़ जाएँ ? 

Sunday, August 23, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए हुए एंडोर्समेंट को लेकर उड़ी एक 'फर्जी' खबर पर जितेंद्र चौहान तथा क्षितिज शर्मा द्वारा दिखाई गई बौखलाहट ने एंडोर्समेंट को लोगों के बीच संदेहपूर्ण तथा जितेंद्र चौहान को फजीहत का शिकार बनाया 

नई दिल्ली । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा की ओवर-स्मार्ट बनने/दिखने तथा गैरजरूरी रूप से सक्रियता दिखाने की कोशिश ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के मल्टीपल एंडॉर्सी जितेंद्र चौहान की मल्टीपल के लोगों के बीच ही नहीं, बल्कि देश के लायन नेताओं और पदाधिकारियों के बीच खासी फजीहत कर/करवा दी है । मामला लायंस इंटरनेशनल द्वारा जितेंद्र चौहान को एंडॉर्सी रजिस्टर करने से इंकार करने की तथाकथित खबर को लेकर था । जब एक फर्जी वॉट्सऐप एकाउंट से यह खबर लोगों तक पहुँची, तब अधिकतर लोगों ने इसे झूठी खबर के रूप में ही लिया/पहचाना, और इस पर कोई ध्यान नहीं दिया । हाँ, वॉट्सऐप पर समय बिताने वाले कुछ ठलुए किस्म के लोगों ने इसे इधर-उधर फॉरवर्ड जरूर किया, लेकिन यह खबर लोगों के बीच कोई इश्यू नहीं बन पाई । किंतु मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा ने जिस तत्परता के साथ उक्त खबर का संज्ञान लिया, और इसका 'आधिकारिक खंडन' किया - उसके चलते उक्त खबर अचानक से 'महत्त्वपूर्ण' हो उठी और गंभीर चर्चा के केन्द्र में आ गई । जो लोग उक्त खबर को फर्जी मान रहे थे, क्षितिज शर्मा के 'आधिकारिक खंडन' के बाद उन्हें भी लगने लगा कि दाल में जरूर कुछ काला है । फिर तो हर किसी को लगने लगा कि जितेंद्र चौहान के एंडॉर्सी 'होने' में जरूर कोई लफड़ा है - अन्यथा मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन को एक लंबी चिट्ठी लिखने और खबर का 'आधिकारिक खंडन' करने की कोई जरूरत नहीं थी ।
कई लोगों का यह भी कहना रहा कि क्षितिज शर्मा को उक्त खबर का 'आधिकारिक खंडन' करने का कोई अधिकार ही नहीं है - खबर में चूँकि लायंस इंटरनेशनल का हवाला दिया गया है, इसलिए 'आधिकारिक खंडन' करने का अधिकार तो लायंस इंटरनेशनल कार्यालय में बैठे पदाधिकारियों का है । क्षितिज शर्मा यह कर सकते थे कि उन पदाधिकारियों से खंडन लेकर उसे प्रसारित करते और या ऐसा कोई डॉक्यूमेंट प्रस्तुत करते, जिससे साबित होता कि लायंस इंटरनेशनल ने जितेंद्र चौहान को मल्टीपल एंडॉर्सी रजिस्टर कर लिया है । ऐसा न करके, और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर क्षितिज शर्मा ने जो किया उससे वैसा ही किस्सा बना जिसमें पूछा गया कि 'आप कौन हैं', तो जबाव मिला 'मैं मिस्टर खामखाँ हूँ ।' सिर्फ इतना ही नहीं, क्षितिज शर्मा ने जिस अंदाज में संदेश लिखा उसमें उनकी खीझ, उनका चिड़चिड़ापन और उनकी बौखलाहट भी 'नजर' आई । अपनी खीझ, चिड़चिड़ाहट तथा बौखलाहट में क्षितिज शर्मा लगता है कि इस बात को पूरी तरह से भूले ही रहे कि वह मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन जैसे जिम्मेदार पद पर हैं, और आधिकारिक रूप से उनके लिखे/कहे में तथ्य व गरिमा होना ही चाहिए और उन्हें 'टू द प्वाइंट' बात लिखना/कहना चाहिए । लोगों का यह भी मानना और कहना है कि क्षितिज शर्मा को एक फर्जी अकाउंट से आने वाली झूठी खबर पर रिएक्ट ही नहीं करना चाहिए था, और उसे इग्नोर करना चाहिए था । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में क्षितिज शर्मा ने लेकिन रिएक्ट करके उक्त खबर को न सिर्फ महत्त्वपूर्ण बना दिया बल्कि एक नॉन-इश्यू को इश्यू बना दिया और जितेंद्र चौहान की खासी फजीहत करवा दी है ।
मजे की बात यह है, जैसा कि मल्टीपल में क्षितिज शर्मा के नजदीकियों का कहना है, कि क्षितिज शर्मा पर उक्त खबर का 'आधिकारिक खंडन' करने के लिए जितेंद्र चौहान ने ही दबाव बनाया था । कुछेक लोगों का कहना है कि उक्त फर्जी खबर के प्रसारित होने के बाद जितेंद्र चौहान ही बुरी तरह बौखला गए थे, और कई लोगों को फोन कर बैठे थे । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए मल्टीपल एंडोर्समेंट को लेकर हुए चुनाव में उनके प्रतिद्वंद्वी रहे दीपक तलवार के नजदीकियों का कहना/बताना है कि जितेंद्र चौहान ने बौखलाहट में दीपक तलवार को भी यह पूछते हुए फोन किया कि उक्त खबर उन्होंने तो नहीं दी है । जितेंद्र चौहान की इस फोनबाजी ने तथा उसके बाद सामने आए मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में क्षितिज शर्मा के 'आधिकारिक खंडन' ने एक बेबात की बात को लोगों के बीच मुद्दा बना दिया, और अब तो जितेंद्र चौहान के समर्थकों व शुभचिंतकों को भी लगने लगा है कि जितेंद्र चौहान के मल्टीपल एंडोर्समेंट में अवश्य ही कुछ लोचा है - जिसके चलते जितेंद्र चौहान उक्त खबर के सामने आने के बाद बुरी तरह से बौखला उठे हैं । जितेंद्र चौहान के नजदीकियों का भी मानना और कहना है कि उक्त खबर ने नहीं, बल्कि खबर पर जितेंद्र चौहान तथा क्षितिज शर्मा की तरफ से हुई 'कार्रवाई' ने जितेंद्र चौहान के एंडोर्समेंट को मल्टीपल के लोगों के बीच न सिर्फ संदेहपूर्ण बना दिया है, बल्कि जितेंद्र चौहान को फजीहत का शिकार भी बना दिया है ।  

Monday, June 29, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में विभिन्न कमेटियों के पद पाने और बचाने की कोशिश में दीपक तलवार तथा तेजपाल खिल्लन के नजदीकियों व समर्थकों ने नए बने मल्टीपल चेयरमैन क्षितिज शर्मा से संपर्क तो साधा है, लेकिन उम्मीद नहीं है कि डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के चुनाव को 'गंदा' करने/बनाने वाले लोगों के पद बचेंगे या उन्हें मिलेंगे

नई दिल्ली । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में विभिन्न पदों के पदाधिकारियों को बड़े उलटफेर की आशंका लग रही है, और कुछेक पदाधिकारियों को पद छिनने का डर सताने लगा है; इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए हुए चुनाव में दीपक तलवार की उम्मीदवारी का समर्थन करने वालों को पद छिनने/खोने और न मिलने का सबसे ज्यादा डर लग रहा है - इस डर को दूर करने के लिए उन्होंने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा से तार जोड़ने शुरू तो किए हैं, लेकिन खुद उन्हें ही विश्वास नहीं है कि क्षितिज शर्मा कोई फैसला कर सकेंगे । दीपक तलवार के नजदीकियों और समर्थकों को लग रहा है कि दीपक तलवार की उम्मीदवारी के कारण जितेंद्र चौहान और उनके समर्थकों को जो मुश्किलें उठानी पड़ी हैं, उसका बदला अब दीपक तलवार के नजदीकियों और समर्थकों से लिया जायेगा, और उन्हें मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में पद नहीं दिए जायेंगे - जिनके पास पद हैं, उनसे ले लिए जायेंगे । हालाँकि, यदि सचमुच ऐसा होता है तो यह कोई हैरानी की और या कोई अनोखी बात नहीं होगी - क्योंकि हर सत्ताधारी यह कोशिश करता ही है कि वह अपने 'अधीन' पदों को अपने नजदीकियों और समर्थकों को सौंपे । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पद देने/बाँटने/सौंपने का अवसर यदि जितेंद्र चौहान को मिला है, तो यह बहुत स्वाभाविक ही है कि वह उनकी उम्मीदवारी को समर्थन दिलवाने वाले लोगों को उक्त पद दें/दिलवाएँ । उनके प्रतिद्वंद्वी रहे दीपक तलवार तथा तेजपाल खिल्लन के नजदीकियों और समर्थकों को यह उम्मीद करना भी भला क्यों चाहिए कि जितेंद्र चौहान उन्हें पद दिलवायेंगे । यह कोई अच्छी और आदर्श स्थिति नहीं है, लेकिन सच्चाई यही है - और विडंबना यह है कि हर किसी ने इस स्थिति को स्वीकार कर लिया है । ऐसे में, दीपक तलवार के नजदीकियों व समर्थकों का पद छिनने और न मिलने को लेकर आशंकित होने का कोई कारण समझ में नहीं आता है ।
हालाँकि मामला इतना सीधा व सरल भी नहीं है । पदों को देने/दिलवाने में खेमेबाजी होने के बावजूद, कुछेक लोगों के लिए खेमेबाजी दीवार नहीं बनती है, लेकिन इस बार खेमेबाजी से ऊपर देखे जाने वाले लोग भी खेमेबाजी का 'शिकार' होते देखे/सुने जा रहे हैं - लेकिन इसके लिए भी 'उन्हें' ही दोषी ठहराया/माना जा रहा है । लोगों का सीधा आरोप है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए हुए इस बार के चुनाव में दीपक तलवार की तरफ से खासी 'गंदगी' हुई, और उस गंदगी के लिए कीचड़ तैयार करने में उन लोगों ने भी बढ़-चढ़ कर भाग लिया, जो मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में पदाधिकारी हैं तथा लोगों के बीच जिनकी साफ-सुथरी इमेज रही है । दीपक तलवार का कैम्पेन पूरी तरह नकारात्मकता पर केंद्रित रहा, जिसमें दीपक तलवार की खूबियों की बात कम थी - जितेंद्र चौहान पर व्यक्तिगत छींटाकशी ज्यादा थी । शुरू में जरूर दीपक तलवार की खूबियों की बात हुई - जिसमें उनके पढ़े-लिखे होने और अंग्रेजी बोल सकने की क्षमता पर जोर था, उनकी बढ़ी उम्र का भी जिक्र था, और लायन लीडर्स के साथ काम करने के उनके अनुभव की बात थी; लेकिन जल्दी ही दीपक तलवार और उनके समर्थकों को समझ में आ गया कि इन खूबियों के भरोसे वोट नहीं मिल सकेंगे । इन बातों को लेकर दीपक तलवार का बल्कि मजाक और बना । लोगों ने कहा/पूछा कि डायरेक्टर बनने के लिए दीपक तलवार ने अपनी उम्र बढ़ने का इंतजार क्यों किया, वह पहले उम्मीदवार क्यों नहीं बने ? पीछे जो लोग डायरेक्टर बने, वह क्या दीपक तलवार से ज्यादा पढ़े-लिखे हैं, उनसे अच्छी अंग्रेजी बोल लेते हैं - दीपक तलवार इसलिए उनके सामने उम्मीदवार नहीं बने थे क्या ?
लोगों के बीच इस तरह की बातों के होने से दीपक तलवार की तरफ से उनकी खूबियों की बात होना बंद हो गया, और उनकी तरफ का कैम्पेन पूरी तरफ नकारात्मक हो गया । दीपक तलवार और उनके समर्थकों का सारा जोर जितेंद्र चौहान का मजाक बनाने पर, उनकी उम्मीदवारी के नामांकन में कमिया खोजने तथा किसी भी तरह से चुनाव को रद्द करवाने पर आ टिका । मजे की बात यह रही कि चुनाव-अभियान के गंदा होने की आशंका तेजपाल खिल्लन की तरफ से थी, लेकिन तेजपाल खिल्लन ने चुनाव बड़ी गरिमा के साथ लड़ा और चुनावी नतीजे को भी बड़े बड़प्पन के साथ स्वीकार किया । दीपक तलवार के समर्थकों ने लेकिन चुनाव को गटर-छाप बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी - और विडंबना यह रही कि ऐसा करने में उन लोगों की भी खासी सक्रिय भूमिका रही, जिन्हें भले व्यक्ति के रूप में देखा/पहचाना जाता रहा है । दरअसल इसीलिए, मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पदों पर होने वाली नियुक्ति के मामले में जितेंद्र चौहान और उनके नजदीकी उन लोगों के प्रति कोई रियायत बरतने को तैयार नहीं हैं, जिन्होंने चुनाव को गंदा करने/बनाने में भूमिका निभाई है । दीपक तलवार और तेजपाल खिल्लन की उम्मीदवारी के कुछेक समर्थकों ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन क्षितिज शर्मा पर पदों के लिए दबाव बनाने का काम तो शुरू किया है, लेकिन लगता नहीं है कि जितेंद्र चौहान से विचार-विमर्श किए बिना क्षितिज शर्मा पदों को लेकर कोई फैसला करेंगे ।

Thursday, August 22, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के अधिकतर संभावित उम्मीदवारों के अलग अलग तरह की मुसीबतों में घिरे होने के कारण डिस्ट्रिक्ट 321 ई के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर क्षितिज शर्मा को अपनी उम्मीदवारी को सफल बनाना आसान दिखने लगा है

वाराणसी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए राजीव अग्रवाल तथा गुरचरण सिंह भोला की दावेदारी के कमजोर पड़ने के साथ ही डिस्ट्रिक्ट 321 ई के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर क्षितिज शर्मा का दावा मजबूत होता नजर आने लगा है । उनके नजदीकियों का भी कहना/बताना है कि क्षितिज शर्मा ने पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जगदीश गुलाटी के जरिये लीडरशिप के नेताओं को भी अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में लेने/करने का काम शुरू कर दिया है । क्षितिज शर्मा की उम्मीदवारी को हालाँकि डिस्ट्रिक्ट 321 एफ के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर गोपाल कृष्ण शर्मा से चुनौती मिलने की उम्मीद की जा रही है, लेकिन क्षितिज शर्मा को विश्वास है कि फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में पिछले वर्ष गोपाल कृष्ण शर्मा की जैसी जो राजनीति रही, उससे लीडरशिप के नेता उनसे नाराज हैं, और इसके चलते गोपाल कृष्ण शर्मा की उम्मीदवारी की तरफ से मिल सकने वाली चुनौती से निपटना उनके लिए आसान होगा । उल्लेखनीय है कि पिछले लायन वर्ष में बिरिंदर सिंह सोहल के खिलाफ गोपाल कृष्ण शर्मा की जैसी जो जिद रही थी, उसके चलते बिरिंदर सिंह सोहल की राजनीति तो खराब हुई ही, लीडरशिप को भी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा । क्षितिज शर्मा मान रहे हैं कि लीडरशिप इसका बदला गोपाल कृष्ण शर्मा से अवश्य ही लेगी, और इसके चलते मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की तरफ उनकी राह आसान हो जाएगी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए क्षितिज शर्मा का पलड़ा इसलिए भी भारी लग रहा है क्योंकि उनके अलावा बाकी जो संभावित उम्मीदवार हैं, उनमें से किसी के पास कोई उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में बात करने के लिए कोई 'वकील' नहीं है - एक अकेले क्षितिज शर्मा ही हैं, जिनकी उम्मीदवारी की वकालत के लिए जगदीश गुलाटी मुस्तैद हैं ।
'वकील' न होने के कारण ही डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजीव अग्रवाल की स्थिति में भारी उलटफेर हो गया है । उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले तक मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए उनकी स्थिति को सबसे मजबूत माना/पहचाना जा रहा था । लीडरशिप के साथ उनकी जैसी निकटता है, वैसी किसी की नहीं है; चुनावी राजनीति के खिलाड़ियों को साधने का 'हुनर' भी उनमें खूब है । लेकिन उनके डिस्ट्रिक्ट के झगड़ों ने उनके लिए मुसीबतें खड़ी कर दी हैं; डिस्ट्रिक्ट के नेताओं के बीच के झगड़ों ने उनके लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नरी करना मुश्किल बना दिया है - और ऐसे में लीडरशिप के नेताओं का समर्थन मिलने की उम्मीद भी कमजोर पड़ गई है । डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के गवर्नर गुरचरण सिंह भोला लीडरशिप के नेताओं के समर्थन के भरोसे मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने की उम्मीद में थे, लेकिन अपने डिस्ट्रिक्ट के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन गुप्ता का समर्थन जुटाना मुश्किल होने के कारण उन्हें अपनी दाल गलना मुश्किल ही लग रहा है । लीडरशिप के नेताओं ने पिछले वर्ष बिरिंदर सिंह सोहल के चक्कर में अपनी जैसी फजीहत करवाई है, उसे वह इस वर्ष गुरचरण सिंह भोला के चक्कर में दोहराना नहीं चाहेंगे । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के पद को लेकर डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला तथा डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बलविंदर सिंह सैनी ने भी अपनी अपनी उत्सुकता दिखाई है, लेकिन अभी तक इनकी उम्मीदवारी को किसी ने भी गंभीरता से लिया/देखा नहीं है । मनोज रुहेला ने हालाँकि विरोधी खेमे के नेताओं के साथ 'दोस्ती' करने के प्रयास तो खूब किए हैं, लेकिन पिछले वर्ष वाइस चेयरमैन पद के लिए एके सिंह का समर्थन करने के कारण विरोधी खेमे के मुखिया गुरनाम सिंह ने उन्हें धमकी दी थी कि वह देखेंगे कि मनोज रुहेला गवर्नरी कैसे करते हैं । ऐसे में, मनोज रुहेला के लिए अपने डिस्ट्रिक्ट के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कमल गुप्ता का समर्थन पाना ही मुश्किल होगा । 
मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के अधिकतर संभावित उम्मीदवारों के अलग अलग तरह की मुसीबतों में घिरे होने के कारण क्षितिज शर्मा को अपनी उम्मीदवारी को सफल बनाना आसान दिखने लगा है । हालाँकि मल्टीपल काउंसिल की चुनावी राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख नेताओं ने अभी अपने अपने इरादे जाहिर नहीं किए हैं, इसलिए मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद को लेकर बनने वाले समीकरण अभी अस्पष्ट हैं - और अभी कोई भी दावे के साथ नहीं कह सकता है कि मल्टीपल की चुनावी राजनीति में प्रभावी समीकरण का ऊँट किस करवट बैठेगा ? मल्टीपल काउंसिल की राजनीति को प्रभावित कर सकने वाले नेता लोग अभी जिस तरह से चुप्पी साधे बैठे हैं, और हालात की टोह ले रहे हैं - उससे यह आभास भी लग रहा है कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के पद को लेकर बनने वाले समीकरणों में खासा उलटफेर हो सकता है । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों का हालाँकि कहना है कि नेताओं का रवैया अभी स्पष्ट न होने का कारण ही यह है कि नेता लोग किसी अन्य उम्मीदवार में ऐसा दम ही नहीं देख रहे हैं, जिस पर वह दाँव लगाने की हिम्मत कर सकें; इसलिए नेता लोग अंततः क्षितिज शर्मा के समर्थन में आ जायेंगे । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों व समर्थकों का कहना/बताना है कि अभी क्षितिज शर्मा ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए अपनी उम्मीदवारी को लेकर गंभीरता से काम करना वास्तव में शुरू भी नहीं किया है, लेकिन फिर भी अभी से उन्हें सबसे मजबूत व काफी बढ़त बनाते हुए देखा/पहचाना जा रहा है - ऐसे में सोचने की बात यही है कि जब वह सचमुच अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने निकलेंगे, तब फिर दूसरे उम्मीदवार और नेता उनके सामने कहाँ और कैसे टिकेंगे ?

Monday, February 13, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में क्षितिज शर्मा की 'लुटने से बचने' की कोशिश सफल हो पायेगी, या अनिल तुलस्यान अपनी 'राजनीति' का खर्चा भी उनके सिर मढ़ देंगे

वाराणसी । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा के जरिए मसूरी में कमरे बुक करा लेने के बाद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान ने विद्ययुत विहार में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की तारीखों का ऐलान करके क्षितिज शर्मा के साथ गठजोड़ करने का संकेत तो दे दिया है, लेकिन अनिल तुलस्यान के रवैये से क्षितिज शर्मा के परेशान और निराश होने की खबरें भी लोगों को सुनने को मिल रही हैं । कुछेक लोगों के बीच क्षितिज शर्मा ने कहा है कि उम्मीदवार होने के नाते वह 'लुटेंगे' नहीं, और डिस्ट्रिक्ट में यदि कोई यह समझ रहा है कि वह उम्मीदवार होने के नाते उनका आर्थिक दोहन कर लेगा - तो वह बहुत गलतफहमी में है । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों का कहना है कि क्षितिज शर्मा इस तरह की बातें कहने/करने वाले व्यक्ति नहीं हैं, वह बहुत दिल खोल कर काम करने वाले व्यक्ति हैं - लेकिन फिर भी वह इस तरह की बात कह रहे हैं तो इसका मतलब है कि अनिल तुलस्यान तथा डिस्ट्रिक्ट के सत्ता खेमे के नेताओं के रवैये से वह बुरी तरह आहत हुए हैं । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों के अनुसार, मसूरी में कमरे बुक कराने से पहले अनिल तुलस्यान ने क्षितिज शर्मा को कमरों का तथा लोगों के टिकट के खर्चे का अनुमान बताया था - जिसे चुकाने के लिए क्षितिज शर्मा ने अपनी सहमति दे दी थी; किंतु फिर अनिल तुलस्यान का मुँह जिस तरह से खुलता गया और उनकी माँग बढ़ती गई, उससे क्षितिज शर्मा को लगा कि उम्मीदवार के रूप में उन्हें जैसे लूटने की तैयारी हो रही है । इसी के बाद क्षितिज शर्मा को कहने के लिए मजबूर होना पड़ा कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में वह लुटेंगे नहीं !
क्षितिज शर्मा के नजदीकियों के अनुसार, दो मामलों में क्षितिज शर्मा उखड़े हुए हैं : एक मामला देहरादून रेलवे स्टेशन से मसूरी तक लोगों के आने-जाने का है, और दूसरा मामला डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में नाच-गाने तथा दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स से आने वाले अतिथियों के इंतजाम का है । क्षितिज शर्मा वाराणसी से और या अपने अपने शहरों से देहरादून जाने वाले लोगों का किराया खर्च करने के लिए तो तैयार हैं, लेकिन अनिल तुलस्यान ने उन्हें देहरादून से मसूरी तक ले जाने और फिर मसूरी से देहरादून वापस लाने के लिए कारों की व्यवस्था का खर्चा और बता दिया है । क्षितिज शर्मा इस काम के लिए बस बुक करना/कराना चाहते हैं, लेकिन अनिल तुलस्यान कारों की बात कर रहे हैं । दूसरा मामला इससे भी ज्यादा गंभीर है : अनिल तुलस्यान ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में डिस्ट्रिक्ट में एक नया अध्याय मनोरंजन का जोड़ा है; वह मनोरंजन प्रिय व्यक्ति हैं, और इस नाते से वह अपने कार्यक्रमों में नाच-गाने की खास व्यवस्था रखते हैं - कुछ लोगों का आरोप है कि इस व्यवस्था की आड़ में वह कुछ दूसरे गुल भी खिलाते हैं । यही व्यवस्था वह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में करना चाहते हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में वह मल्टीपल के दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स से आने वाले अतिथियों, खासतौर से फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के लिए विशेष इंतजाम करना चाहते हैं; समझा जाता है कि अनिल तुलस्यान मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की अपनी संभावित उम्मीदवारी के लिए अपनी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में अच्छा माहौल बनाना चाहते हैं ।
अनिल तुलस्यान डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में लगता है कि डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह में हुए नुकसान की पूरी भरपाई करना चाहते हैं । उल्लेखनीय है कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में भी व्यवस्था तो अच्छी की थी, लेकिन निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रकाश अग्रवाल के साथ की गई बदतमीजीपूर्ण हरकत के चलते उसमें जो बबाल हुआ - उससे मल्टीपल के दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के लोगों तक उनकी भारी फजीहत हुई थी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की उम्मीद में अनिल तुलस्यान लेकिन अब बहुत सावधानी के साथ कदम बढ़ाना चाहते हैं । पिछले दिनों आयोजित हुई तीसरी कैबिनेट मीटिंग में उन्होंने प्रकाश अग्रवाल को जो तवज्जो दी, उससे भी लोगों को संकेत मिला है कि अब वह किसी को नाराज नहीं रखना/छोड़ना चाहते हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जैसे वह अपने सारे 'पाप' धो लेना चाहते हैं । इसमें समस्या की बात लेकिन यह हो गई है कि इसकी 'कीमत' वह क्षितिज शर्मा से बसूलना चाहते हैं । क्षितिज शर्मा ने अपने नजदीकियों से रोना रोया है कि अनिल तुलस्यान डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में अपने राजनीतिक स्वार्थ में जो इंतजाम करना चाहते हैं, उसके खर्चे का बोझ भी वह उनके सिर पर मढ़ने का प्रयास कर रहे हैं - और इसीलिए क्षितिज शर्मा को कहने की जरूरत पड़ी है कि वह लुटेंगे नहीं ।
अनिल तुलस्यान और क्षितिज शर्मा के बीच 'लूटने' और 'लुटने से बचने' का जो खेल चल रहा है, वह वास्तव में सत्ता खेमे के नेताओं और क्षितिज शर्मा के बीच बने रहने वाले परस्पर अविश्वास का नतीजा भी है । क्षितिज शर्मा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने के लालच में सत्ता खेमे के नेताओं के नजदीक चले तो गए हैं, लेकिन सत्ता खेमे के नेताओं की हरकतें न उन्हें पहले पसंद थीं और न अब हैं; उधर सत्ता खेमे के नेताओं ने एक मालदार उम्मीदवार होने के नाते उन्हें 'स्वीकार' तो कर लिया है, लेकिन साथ-साथ वह यह भी अच्छी तरह समझ रहे हैं कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के बाद क्षितिज शर्मा उनके साथ रहेंगे नहीं । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अशोक सिंह के साथ क्षितिज शर्मा की नजदीकी सत्ता खेमे के नेताओं को और भी आशंकित कर रही है । उल्लेखनीय है कि अशोक सिंह के कारण ही क्षितिज शर्मा को पिछले वर्ष के प्रकाश अग्रवाल के गवर्नर-काल में रीजन चेयरमैन का पद मिला था । प्रकाश अग्रवाल किसी और को रीजन चेयरमैन बना रहे थे, लेकिन अशोक सिंह ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए दखल दिया और क्षितिज शर्मा को रीजन चेयरमैन बनवाया - जिसके कारण क्षितिज शर्मा की लायन-यात्रा तेजी से आगे बढ़ी । मौजूदा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रभात चतुर्वेदी तो घोषित रूप से अशोक सिंह के नजदीक हैं; ऐसे में सत्ता खेमे के नेताओं के सामने सवाल यह भी है कि क्षितिज शर्मा को सफल करवा कर कहीं वह अपने प्रतिद्धंद्धी अशोक सिंह को तो मजबूत नहीं बना रहे हैं ? सत्ता खेमे के नेताओं और क्षितिज शर्मा के बीच पल रहे इसी अविश्वास के बीच 'लूटने' और 'लुटने से बचने' का खेल खासा दिलचस्प हो गया है - और लोगों को लग रहा है कि विद्ययुत विहार में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान द्धारा कॉल निकालने के बाद डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का परिदृश्य अभी और करवट लेगा तथा चुनावी समीकरणों को प्रभावित करेगा ।

Tuesday, January 31, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में क्षितिज शर्मा पर भरोसा न करने के कारण ही, क्षितिज शर्मा के पूरी तरह समर्पण करने के बावजूद सत्ता खेमे के नेता सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए मुकेश पाठक को भी हवा दे रहे हैं

वाराणसी । डिस्ट्रिक्ट की तीसरी कैबिनेट मीटिंग में क्षितिज शर्मा को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान तथा उनके खेमे के बड़े नेताओं के 'निर्देश' के अनुसार जोश के साथ 'काम' करता देख लोगों को भारी आश्चर्य हुआ । आश्चर्य का कारण दरअसल यह रहा कि क्षितिज शर्मा लगातार यह कहते/बताते रहे हैं कि वह एक उम्मीदवार की सारी 'जिम्मेदारियों' का तो पालन करेंगे किंतु सत्ता खेमे के नेताओं के इशारे पर नहीं चलेंगे । लेकिन तीसरी कैबिनेट मीटिंग में क्षितिज शर्मा का रवैया पूरी तरह सत्ता खेमे के नेताओं के इशारों पर चलने जैसा था । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों से ही मिली एक जानकारी का हवाला देते हुए कुछेक लोगों ने मीटिंग में क्षितिज शर्मा का मजाक भी बनाया । उनके नजदीकियों ने ही लोगों को बताया था कि क्षितिज शर्मा अपने स्टॉल पर शराब का कोई और ब्रांड रखवा रहे थे, लेकिन सत्ता खेमे के नेताओं ने उन पर दबाव बनाया कि उन्हें मीटिंग में लोगों को और अच्छे ब्रांड की शराब पिलवानी चाहिए । सत्ता खेमे के नेताओं की और अच्छे ब्रांड की शराब की माँग से क्षितिज शर्मा खुश तो नहीं थे, किंतु अंततः माँग मान लेने में ही उन्होंने अपनी भलाई देखी/पहचानी । क्षितिज शर्मा के कुछेक नजदीकी यह देख कर तो बुरी तरह चौंके कि सत्ता खेमे के जिन नेताओं की पहले वह बहुत बुराई किया करते थे, अब अचानक से उनकी बड़ी तारीफ करने लगे हैं । क्षितिज शर्मा के इस बदले बदले रवैये से उनके नजदीकियों ने तथा नजदीकियों से मिलने/सुनने वाली बातों से डिस्ट्रिक्ट के दूसरे लोगों ने भी समझ लिया है कि क्षितिज शर्मा ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए सत्ता खेमे के बदनाम व आलोच्य नेताओं के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है ।
मजे की बात लेकिन यह दिख रही है कि क्षितिज शर्मा के पूरी तरह समर्पण करने के बावजूद सत्ता खेमे के नेताओं के बीच क्षितिज शर्मा की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन को लेकर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है । इसीलिए सत्ता खेमे के नेताओं की तरफ से मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को भी हवा दी जा रही है । तीसरी कैबिनेट मीटिंग में मुकेश पाठक द्धारा स्टॉल न लगाए जाने को लेकर सत्ता खेमे के ही एक नेता ने इन पँक्तियों के लेखक से कहा/बताया कि उन्होंने ही मुकेश पाठक को समझाया था कि इस तरह की बातों में नाहक ही पैसा क्यों बर्बाद करते हो, तुम अच्छे से जानते/समझते हो कि शराब पिला कर और गिफ्ट बाँटकर ही चुनाव नहीं जीते जाते हैं । सत्ता खेमे के नेताओं की राजनीति से परिचित कई लोगों को लगता है कि सत्ता खेमे के नेता क्षितिज शर्मा पर दबाव बनाए रखने के उद्देश्य से मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को हवा दे रहे हैं; मुकेश पाठक के नजदीकियों के अनुसार, उन्होंने मुकेश पाठक को समझाया है कि उक्त हवा 'लेते' रहो - हो सकता है कि आगे चल कर क्षितिज शर्मा की सत्ता खेमे के नेताओं से खटक जाए और तब मुकेश पाठक का काम बन जाए । डिस्ट्रिक्ट में यह कहने वाले लोगों की भी कमी तो नहीं ही है कि लगता है कि क्षितिज शर्मा ने मान लिया है कि लोगों को महँगी शराब पिला कर और गिफ्ट बाँटकर वह (सेकेंड वाइस) डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन जायेंगे । हालाँकि पिछले वर्षों में, कई बार ऐसा हुआ है जबकि यह हथकंडा अपनाने वालों की दाल नहीं गली है । गौर करने वाली बात यह भी है कि कई बार सत्ता खेमे के नेताओं ने ही लोगों को शराब और गिफ्ट तो किसी और उम्मीदवार से दिलवा दिए, और चुनाव लेकिन दूसरे उम्मीदवार को जितवा दिया । इन संदर्भों को ध्यान में रखते हुए सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को हवा देने की सत्ता खेमे के नेताओं की कार्रवाई ने क्षितिज शर्मा को डराया हुआ भी है ।
क्षितिज शर्मा और उनके नजदीकियों का यह डर इसलिए भी है क्योंकि सत्ता खेमे के नेता पहले प्रकाश टंडन को उम्मीदवार बनने के लिए तैयार कर रहे थे । पारिवारिक व्यस्तता के कारण जब उनके लिए उम्मीदवार बनना संभव नहीं हुआ, तब वह मुकेश पाठक की उम्मीदवारी के पीछे लगे । क्षितिज शर्मा और उनके नजदीकियों के लिए चिंता और परेशानी की बात यह है कि अब जब वह सत्ता खेमे के नेताओं के इशारे पर चलने और 'काम' करने के लिए तैयार हो गए हैं, तब फिर सत्ता खेमे के नेता मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को हवा देने में दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं ? सत्ता खेमे के नेताओं का कहना है कि वह क्षितिज शर्मा पर भरोसा नहीं कर सकते हैं; उन्हें लगता है कि क्षितिज शर्मा को जिस दिन अपनी 'जीत' का भरोसा हो गया, उसी दिन वह उनके हाथ से निकल जायेंगे और फिर उनकी नहीं सुनेंगे/मानेंगे । सत्ता खेमे के कुछेक नेता कुँवर बीएम सिंह के चुनाव में निभाई गई भूमिका के कारण भी क्षितिज शर्मा से खफा हैं । उक्त चुनाव में क्षितिज शर्मा ने प्रभात चतुर्वेदी का समर्थन किया था । कुँवर बीएम सिंह के साथी/समर्थक उस अनुभव को याद करते हुए कहते/बताते हैं कि क्षितिज शर्मा आसानी से तो उनका समर्थन प्राप्त नहीं कर पायेंगे । इस तरह की बातों से एक तरफ जहाँ सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को बल मिल रहा है, तो दूसरी तरफ सत्ता खेमे का समर्थन जुटाने में क्षितिज शर्मा की मुश्किलें बढ़ रही हैं ।
क्षितिज शर्मा के लिए परेशानी और चुनौती की बात यह भी है कि सत्ता खेमे के नेताओं के इशारे पर चलने के जरिए उनके साथ दोस्ती गाँठने की उनकी कोशिशें उन्हें 'अपने' लोगों से दूर करने का काम कर रही हैं । क्षितिज शर्मा अपने लोगों के बीच नैतिकता और आदर्श की बड़ी ऊँची ऊँची बातें करते रहे हैं, और लोगों को बताते रहे हैं कि एक उम्मीदवार से लोगों को जो जो 'अपेक्षाएँ' होती हैं, उन्हें पूरा करने से तो वह बिलकुल भी पीछे नहीं हटेंगे - लेकिन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के बदनाम नेताओं की 'नाजायज' माँगों के आगे वह बिलकुल भी नहीं झुकेंगे । अपनी इस तरह की बातों के जरिये क्षितिज शर्मा ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच अपनी अच्छी साख और पहचान बनाई है - लेकिन डिस्ट्रिक्ट की तीसरी कैबिनेट मीटिंग में लोगों ने उन्हें जब डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के उन्हीं बदनाम नेताओं के आगे-पीछे मँडराते देखा और शराब के ब्रांड पर उन्हीं की सलाह को मानते हुए 'सुना' तो उनकी साख और पहचान सवालों के घेरे में आती हुई नजर आई । क्षितिज शर्मा के लिए मुसीबत और चुनौती की बात यही है कि दो दिशाओं से आती कॉल्स को सुनने के लिए दो कान तो उनके पास हैं - लेकिन वह मानें किसकी, जिसमें कि वह अपनी साख और पहचान भी बचा सकें और अपनी जीत को भी सुनिश्चित कर सकें ।

Friday, January 27, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान के मुकुंद लाल टंडन के प्रति 'दुश्मनी' तथा क्षितिज शर्मा के प्रति 'दोस्ती' वाले रवैये ने लोगों को हैरान किया है

वाराणसी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान की तरफ से हाल के दिनों में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मुकुंद लाल टंडन को डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच बदनाम करने तथा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा को अपनी तरफ करने के लिए जो प्रयास किए गए हैं, उन्हें देखने/जानने वाले डिस्ट्रिक्ट के लायंस सदस्यों को डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति एक नई करवट लेती दिख रही है । मुकुंद लाल टंडन को ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग करने या न करने के मामले में जिस तरह से बदनाम किया जा रहा है, वह अपने आप में खासा दिलचस्प मामला बन गया है - जो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अनिल तुलस्यान की कार्यप्रणाली की पोल खोलता है । मुकुंद लाल टंडन यूँ तो उसी 'गिरोह' के सदस्य हैं, जिसके प्रतिनिधि के रूप में अनिल तुलस्यान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर हैं - और इसी 'रिश्ते' से वह ऑनरेरी कमेटी के चेयरमैन बने हुए हैं; लेकिन फिर भी वह अनिल तुलस्यान की चालबाजियों का शिकार बनने से नहीं बच सके हैं । मजे की बात यह है कि अनिल तुलस्यान खुद ही तो ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग करने से बच रहे हैं, ताकि उन्हें अपनी कारस्तानियों को लेकर उठने वाले सवालों का सामना न करना पड़े; लेकिन इसका ठीकरा वह मुकुंद लाल टंडन के सिर यह आरोप लगाते हुए फोड़ रहे हैं कि मीटिंग के खर्चे से बचने के लिए मुकुंद लाल टंडन ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं ।
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट में कैबिनेट मीटिंग से पहले ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग होने की एक गौरवशाली परंपरा बनी हुई है । पिछले कई वर्षों से इस परंपरा का निर्वाह होता रहा है, और चार नहीं तो तीन कैबिनेट मीटिंग से पहले तो ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग होती ही रही है । अनिल तुलस्यान दूसरी कैबिनेट मीटिंग से पहले ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग नहीं करवा सके थे; इसलिए उम्मीद की जा रही थी कि डिस्ट्रिक्ट की तीसरी कैबिनेट मीटिंग से पहले तो ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग अवश्य ही होगी । तीसरी कैबिनेट मीटिंग में अब सिर्फ दो दिन बचे हैं, लेकिन उससे पहले ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग होने को लेकर किसी को कोई जानकारी नहीं है । जिस किसी ने इसके बारे में अनिल तुलस्यान से पूछा, उसे यही जबाव सुनने को मिला कि ऑनरेरी कमेटी के चेयरमैन मुकुंद लाल टंडन मीटिंग करने को लेकर इच्छुक नहीं हैं । अनिल तुलस्यान पूछने वाले को यह बताने से भी नहीं चूक रहे हैं कि मुकुंद लाल टंडन ने ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग का खर्चा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा से करवाने का जुगाड़ बैठाने का प्रयास किया/करवाया था, जिसमें असफल रहने के बाद उन्होंने उक्त मीटिंग को लेकर बात करना ही छोड़ दिया । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग का खर्चा करने की जिम्मेदारी कमेटी के चेयरमैन की होती है, और वही यह जिम्मेदारी निभाता है; चेयरमैन 'होशियार' होता है तो वह यह खर्चा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार से भी करवा लेता है । हालाँकि जो लोग मुकुंद लाल टंडन को जानते हैं, उन्हें अनिल तुलस्यान की इस बात पर भरोसा है नहीं कि मुकुंद लाल टंडन खर्चे से बचने की कोशिश करेंगे ।
अब पर्दे के पीछे की सच्चाई चाहे जो हो, पर्दे के सामने का सच यह है कि तीसरी कैबिनेट मीटिंग से पहले ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग होने को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है - और लोगों के लिए हैरानी की बात है कि ऑनरेरी कमेटी के चेयरमैन मुकुंद लाल टंडन उक्त मीटिंग को लेकर अनिल तुलस्यान पर निर्भर तथा उनके सामने मजबूर आखिर क्यों हैं ? अनिल तुलस्यान ने मुकुंद लाल टंडन को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच बदनाम करने के मामले में ही नहीं, बल्कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा को अपनी तरफ करने के प्रयासों के मामले में भी लोगों को हैरान किया हुआ है । लोगों के लिए हैरानी का कारण यह है कि जो अनिल तुलस्यान और लायनिज्म में उनके गुरू पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वीरेंद्र गोयल अभी कुछ दिन पहले तक सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए मुकेश पाठक को अपनी पसंद बताने का संकेत दे रहे थे - अब अचानक से क्षितिज शर्मा की उम्मीदवारी की तरफ झुकते हुए से क्यों दिख रहे हैं ? समझा जा रहा है कि अनिल तुलस्यान की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के तथा अन्य खर्चों की पूर्ति के लिए क्षितिज शर्मा की जेब पर निगाह पड़ गई है और इसलिए उन्होंने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा को पटाने का काम करना शुरू किया है ।
अनिल तुलस्यान की बातों से अब यह पोल भी खुल रही है कि पहले उनकी तरफ से मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को समर्थन देने के जो संकेत दिए जा रहे थे, उसके पीछे उनकी वास्तव में क्षितिज शर्मा को अपनी तरफ खींचने की चाल थी । यूँ तो क्षितिज शर्मा को वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी की तरफ होने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन चूँकि क्षितिज शर्मा ने पूरी तरह उनके कहे में चलने में दिलचस्पी नहीं ली है - इसलिए बात कभी बनती तो कभी बिगड़ती से रही है । क्षितिज शर्मा की तरफ से उन्हें बता दिया गया है कि वह जरूरी खर्चे करने के लिए तो तैयार हैं, लेकिन 'लुटने' के लिए तैयार नहीं हैं । क्षितिज शर्मा को पूरी तरह अपने कब्जे में लेने के लिए ही वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी ने मुकेश पाठक की उम्मीदवारी की बात करना और उन्हें अपने उम्मीदवार के रूप में 'दिखाने' का काम शुरू किया । वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी को लगा कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए क्षितिज शर्मा के अलावा चूँकि कोई और उम्मीदवार नहीं है, इसलिए क्षितिज शर्मा उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहे हैं । मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को हवा देकर उन्होंने वास्तव में क्षितिज शर्मा को संदेश देने की कोशिश की कि वह यदि पूरी तरह से उनके कहने में नहीं चले, तो फिर उन्हें कड़े चुनावी मुकाबले का सामना करना पड़ेगा । क्षितिज शर्मा ने चूँकि तब भी परवाह नहीं की, और वह वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी के सामने समर्पण के लिए तैयार नहीं हुए - तब अनिल तुलस्यान को डर हुआ कि ज्यादा लालच के चक्कर में कहीं ऐसा न हो कि वह घर/घाट कहीं के न रहें, सो उन्होंने क्षितिज शर्मा के प्रति अपने रवैये को थोड़ा लचीला बनाया है । इससे पहले लेकिन अनिल तुलस्यान तथा उनके साथियों ने जो किया, उससे मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण बना दिया है । इस कारण सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के संदर्भ में डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक समीकरण एक नई करवट लेते नजर आ रहे हैं ।

Tuesday, January 10, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के मुख्य सलाहकार डॉक्टर क्षितिज शर्मा को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने से रोकने के लिए मुकेश पाठक को आगे करने की वीरेंद्र गोयल एंड पार्टी की तैयारी सवालों के घेरे में

वाराणसी । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए डॉक्टर क्षितिज शर्मा की उम्मीदवारी में रोड़े अटकाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान तथा पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वीरेंद्र गोयल और उनके ग्रुप के दूसरे पूर्व गवर्नर्स ने जिस तरह की तैयारी शुरू की है, उसे देख/सुन कर डिस्ट्रिक्ट के लोग खासे हैरान हैं । क्षितिज शर्मा के खिलाफ मुकेश पाठक को उम्मीदवार बनाने की इनकी कोशिश ने तो खुद इनके ग्रुप के लायन सदस्यों को भी हैरान और निराश किया है । उल्लेखनीय है कि मुकेश पाठक पहले भी दो-तीन बार उम्मीदवार बन चुके हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट के लोगों का समर्थन पाने में बुरी तरह असफल रहे हैं । मुकेश पाठक के क्लब - लायंस क्लब वाराणसी शिवगंगा में गिनती के सदस्य हैं; और वह भी ड्यूज जमा न होने के कारण सस्पेंड है और उस पर लायंस इंटरनेशनल के ड्यूज के करीब 60/70 हजार रुपए बकाया बताए/सुने जा रहे हैं । लोगों के बीच सवाल यही चर्चा में है कि जो मुकेश पाठक अपना क्लब तक नहीं चला पा रहे हैं, और लायंस इंटरनेशनल के ड्यूज तक चुकाने से बचते रहे हैं - वीरेंद्र गोयल एंड पार्टी उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर आखिर क्यों बनाना चाहती है ? खुद इनके नजदीकियों व साथियों का कहना है कि खेमेबाजी की राजनीति के चलते वीरेंद्र गोयल एंड पार्टी को अपना कोई उम्मीदवार यदि लाना ही है - तो पर्सनलिटी, कामकाज और ख्याति में कम से कम डॉक्टर क्षितिज शर्मा की टक्कर का तो लाएँ । लायनिज्म में मुकेश पाठक की सक्रियता से परिचित लोगों का भी मानना और कहना है कि मुकेश पाठक एक अच्छे कार्यकर्त्ता तो हो सकते हैं, पर लीडर बनने की क्षमता उनमें नहीं है - उनके अपने क्लब की हालत से भी यह स्पष्ट है । यह सब जानते बूझते हुए भी वीरेंद्र गोयल एंड पार्टी उन्हें डिस्ट्रिक्ट और डिस्ट्रिक्ट के सदस्यों पर जबर्दस्ती थोपने के लिए भला क्यों तत्पर है ?
डिस्ट्रिक्ट में जिन भी लोगों ने डॉक्टर क्षितिज शर्मा को जाना/पहचाना है, उन्होंने माना और कहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में डॉक्टर क्षितिज शर्मा निश्चित ही एक बेहतर च्वाइस हैं; और उनके गवर्नर होने से डिस्ट्रिक्ट का मान/सम्मान शर्तिया रूप से बढ़ेगा ही । डॉक्टर क्षितिज शर्मा बच्चों के हृदय रोग के विशेषज्ञ और प्रतिष्ठित फिजिशियन हैं । मेडीकल की पढ़ाई उन्होंने बंगलौर व मणिपाल की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज और दिल्ली व चेन्नई के प्रमुख संस्थानों से की है । उनके पिता भी डॉक्टर थे और उनकी माँ व पत्नी भी डॉक्टर हैं - इस नाते से मेडीकल प्रोफेशन में उनका अच्छा नाम और सम्मान है । डॉक्टर क्षितिज शर्मा की सामाजिक सक्रियता भी खासी उल्लेखनीय रही है - लायनिज्म के साथ-साथ वह इंडियन मेडीकल एसोसिएशन तथा बच्चों के डॉक्टर्स की एसोसिएशन में भी सक्रिय तथा पदाधिकारी रहे हैं । लायनिज्म में उनकी सक्रियता तथा उपलब्धियों को खासी ऊँची पहचान मिली है - क्लब के प्रेसीडेंट, जोन चेयरमैन तथा रीजन चेयरमैन के रूप में उन्हें लायंस इंटरनेशनल के एक्सीलेंस अवॉर्ड तो मिले ही हैं; लायनिज्म के प्रति उनकी सोच तथा उनकी व्यापक संलग्नता को देखते हुए मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान ने उन्हें अपना - यानि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का मुख्य सलाहकार बनाया हुआ है । अब जो व्यक्ति डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का मुख्य सलाहकार बन/बनाया जा सकता है, वह यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनना चाहता है - तो उसकी राह में रोड़े अटकाने का भला क्या औचित्य हो सकता है ?
निस्संदेह मुकेश पाठक ने भी डिस्ट्रिक्ट में महत्त्वपूर्ण पदों पर काम किया है, और कुछेक लायन वर्षों में वह लोगों के बीच बहुत सक्रिय भी रहे हैं और एक अच्छे कार्यकर्त्ता होने का सुबूत देने में भी वह सफल रहे हैं । लेकिन, जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि, अपनी सक्रियता को वह 'राजनीतिक उपलब्धि' में बदल पाने में वह हमेशा ही असफल साबित हुए हैं । वह चूँकि कई बार गवर्नर पद की परीक्षा में बैठ चुके हैं, और हर बार बुरी तरह फेल हुए हैं - इससे साबित है कि डिस्ट्रिक्ट में लोग उन्हें गवर्नर के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं । लोगों के इतने स्पष्ट रवैये के बावजूद वीरेंद्र गोयल एंड पार्टी मुकेश पाठक को क्यों डिस्ट्रिक्ट पर जबर्दस्ती थोपना चाहती है - यह डिस्ट्रिक्ट के लोगों की समझ में नहीं आ रहा है ।
वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी के लोगों से ही यह भी सुनने को मिल रहा है कि मुकेश पाठक को चुनाव लड़वाने का खर्चा भी डिस्ट्रिक्ट के लोगों से ही बसूल किये जाने की तैयारी की जा रही है; और इस तैयारी के तहत डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान पर दबाव बनाया जा रहा है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के लिए रजिस्ट्रेशन फीस वह पिछले वर्षों के मुकाबले तिगुनी-चौगुनी बढ़ा कर बसूल करें । बढ़ी रजिस्ट्रेशन फीस से जो रकम इकट्ठा होगी, उससे मुकेश पाठक को एक बार फिर चुनाव लड़वाया जायेगा । मुकेश पाठक उम्मीदवार बनने के 'योग्य' हो सकें, इसके लिए पहले तो उनके क्लब के ड्यूज जमा करवा कर उनके क्लब को सस्पेंशन से बाहर निकलवाने की जरूरत है - और इस जरूरत को पूरा करने के लिए पैसे चाहिए होंगे; क्लब की स्थिति ऐसी है नहीं कि वह बकाया ड्यूज जमा करवा सके - होती, तो यह नौबत आती ही क्यों ? लिहाजा, अलग अलग तरीकों से लोगों से पैसे ऐंठ कर ही मुकेश पाठक के क्लब को 'जिंदा' करके उन्हें उम्मीदवार बनाने/बनवाने की तरकीबें लगाई/भिड़ाई जा रही हैं । इस स्थिति ने डिस्ट्रिक्ट में सभी को हैरान किया हुआ है - और वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी की मंशा सवालों के घेरे में आ फँसी हैं ।