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Tuesday, June 13, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में बीएम सिंह के उम्मीदवार के रूप में खुद को प्रमोट करते हुए आरकेएस चौहान के मुकाबले उतरने की अनिल जायसवाल की कोशिशों ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के परिदृश्य को दिलचस्प बनाया

इलाहाबाद । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अनिल जायसवाल की उम्मीदवारी की चर्चा ने आरकेएस चौहान के लिए न सिर्फ गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है, बल्कि डिस्ट्रिक्ट के चुनावी परिदृश्य को भी दिलचस्प बना दिया है । अभी तक अगले लायन वर्ष में होने वाले सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव के लिए आरकेएस चौहान और अजय मेहरोत्रा के नाम चर्चा में थे, और माना जा रहा था कि अजय मेहरोत्रा अंततः अपनी उम्मीदवारी से पीछे हट जायेंगे और आरकेएस चौहान आराम से सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुन लिए जायेंगे । अजय मेहरोत्रा के बारे में लोग मानने और कहने लगे हैं कि यह कई बार उम्मीदवार के रूप में अपना नाम उछाल चुके हैं, लेकिन उम्मीदवारी की डगर पर आगे बढ़ते नहीं हैं - जिस कारण उनकी उम्मीदवारी को अब कोई गंभीरता से लेता नहीं है । इसीलिए उनकी उम्मीदवारी की चर्चा आरकेएस चौहान के लिए रक्षा-कवच का काम कर रही थी - लोग मान/समझ रहे थे कि अजय मेहरोत्रा कुछ दिन अपना नाम उछालते हुए चर्चा में बने रहेंगे, और फिर एक दिन वापस हो लेंगे; उसके बाद आरकेएस चौहान बिना चुनाव के सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन जायेंगे । लेकिन अचानक से सामने आई अनिल जायसवाल की उम्मीदवारी की चर्चा ने बन रहे उक्त माहौल को गड़बड़ा दिया है, जिसमें न सिर्फ आरकेएस चौहान के लिए मामला चुनौतीपूर्ण बन गया है - बल्कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का परिदृश्य भी बदल गया है ।
अनिल जायसवाल यूँ तो सभी गवर्नर्स के साथ अच्छे संबंध बना कर रहे हैं; पुष्पा स्वरूप के गवर्नर-काल में तो वह कैबिनेट सेक्रेटरी रहे थे, जिस कारण डिस्ट्रिक्ट के लोगों के साथ उनके निकट के संबंध बने थे - लेकिन उनके नजदीकियों को ही लगता है कि उम्मीदवार बनने का उचित समय उन्होंने खो दिया है । चार वर्ष पहले जब वह कैबिनेट सेक्रेटरी थे, उसके बाद यदि वह उम्मीदवार बनते - तो लोगों के बीच अपनी सक्रियता और अपने परिचय का फायदा उठा सकते थे; अब लेकिन बहुत देर हो चुकी है । जिन आरकेएस चौहान के साथ उनका चुनावी मुकाबला होने की उम्मीद की जा रही है, वह पिछले लायन वर्ष में प्रकाश अग्रवाल की डिस्ट्रिक्ट टीम में जोन चेयरमैन थे, और मौजूदा लायन वर्ष में अनिल तुलस्यान की डिस्ट्रिक्ट टीम में रीजन चेयरमैन हैं - इस नाते से लोगों के बीच उनका परिचय और उनकी सक्रियता नयी है । इसके अलावा, पिछले दो-तीन वर्षों में डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के समीकरण भी काफी बदल गए हैं - जिसके चलते अनिल जायसवाल ने अभी तक डिस्ट्रिक्ट में और लायनिज्म में जो 'कमाया' है, वह तो उनके काम नहीं आने वाला है; और इसीलिए सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनाव उनके लिए भी आसान नहीं होगा ।
अनिल जायसवाल के लिए एक समस्या और देखी/पहचानी जा रही है - उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट बीएम सिंह के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; लोगों का कहना है कि यह पहचान उन्होंने खुद ही बनाई है, उन्हें लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के उम्मीदवार के रूप में चुनावी मुकाबले में उन्हें फायदा मिलेगा । बीएम सिंह ने लेकिन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रायः सभी नेताओं से अलग अलग कारणों से संबंध बिगाड़े हुए हैं; उनके चुनाव में उनकी उम्मीदवारी की खिलाफत करने वाले नेताओं से तो उनके संबंध बिगड़े हुए थे ही, जिन लोगों ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया था और उन्हें जितवाया था - उनसे भी वह इस कारण नाराज रहे हैं कि उन्होंने चुनाव में उनका बहुत पैसा खर्च करवा दिया । लोगों को लगता है कि बीएम सिंह दरअसल लायन राजनीति के ताने-बाने में अपने आप को फिट नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए वह अलग-थलग से दिखाई पड़ते हैं । ऐसे में, अनिल जायसवाल के लिए उनके भरोसे अपनी उम्मीदवारी को कामयाब बनाना/बनवाना आसान नहीं होगा । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में किसका पलड़ा भारी रहेगा, इस बारे में अभी से तो कुछ नहीं कहा जा सकता है - क्योंकि सारा खेल इस बात पर निर्भर होगा कि कौन उम्मीदवार अपने अभियान को कितनी दमदारी से संयोजित करता है; लेकिन बीएम सिंह के उम्मीदवार के रूप में खुद को प्रमोट करने की अनिल जायसवाल की कोशिशों के चलते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का खेल दिलचस्प जरूर हो उठा है ।

Monday, February 13, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में क्षितिज शर्मा की 'लुटने से बचने' की कोशिश सफल हो पायेगी, या अनिल तुलस्यान अपनी 'राजनीति' का खर्चा भी उनके सिर मढ़ देंगे

वाराणसी । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा के जरिए मसूरी में कमरे बुक करा लेने के बाद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान ने विद्ययुत विहार में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की तारीखों का ऐलान करके क्षितिज शर्मा के साथ गठजोड़ करने का संकेत तो दे दिया है, लेकिन अनिल तुलस्यान के रवैये से क्षितिज शर्मा के परेशान और निराश होने की खबरें भी लोगों को सुनने को मिल रही हैं । कुछेक लोगों के बीच क्षितिज शर्मा ने कहा है कि उम्मीदवार होने के नाते वह 'लुटेंगे' नहीं, और डिस्ट्रिक्ट में यदि कोई यह समझ रहा है कि वह उम्मीदवार होने के नाते उनका आर्थिक दोहन कर लेगा - तो वह बहुत गलतफहमी में है । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों का कहना है कि क्षितिज शर्मा इस तरह की बातें कहने/करने वाले व्यक्ति नहीं हैं, वह बहुत दिल खोल कर काम करने वाले व्यक्ति हैं - लेकिन फिर भी वह इस तरह की बात कह रहे हैं तो इसका मतलब है कि अनिल तुलस्यान तथा डिस्ट्रिक्ट के सत्ता खेमे के नेताओं के रवैये से वह बुरी तरह आहत हुए हैं । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों के अनुसार, मसूरी में कमरे बुक कराने से पहले अनिल तुलस्यान ने क्षितिज शर्मा को कमरों का तथा लोगों के टिकट के खर्चे का अनुमान बताया था - जिसे चुकाने के लिए क्षितिज शर्मा ने अपनी सहमति दे दी थी; किंतु फिर अनिल तुलस्यान का मुँह जिस तरह से खुलता गया और उनकी माँग बढ़ती गई, उससे क्षितिज शर्मा को लगा कि उम्मीदवार के रूप में उन्हें जैसे लूटने की तैयारी हो रही है । इसी के बाद क्षितिज शर्मा को कहने के लिए मजबूर होना पड़ा कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में वह लुटेंगे नहीं !
क्षितिज शर्मा के नजदीकियों के अनुसार, दो मामलों में क्षितिज शर्मा उखड़े हुए हैं : एक मामला देहरादून रेलवे स्टेशन से मसूरी तक लोगों के आने-जाने का है, और दूसरा मामला डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में नाच-गाने तथा दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स से आने वाले अतिथियों के इंतजाम का है । क्षितिज शर्मा वाराणसी से और या अपने अपने शहरों से देहरादून जाने वाले लोगों का किराया खर्च करने के लिए तो तैयार हैं, लेकिन अनिल तुलस्यान ने उन्हें देहरादून से मसूरी तक ले जाने और फिर मसूरी से देहरादून वापस लाने के लिए कारों की व्यवस्था का खर्चा और बता दिया है । क्षितिज शर्मा इस काम के लिए बस बुक करना/कराना चाहते हैं, लेकिन अनिल तुलस्यान कारों की बात कर रहे हैं । दूसरा मामला इससे भी ज्यादा गंभीर है : अनिल तुलस्यान ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में डिस्ट्रिक्ट में एक नया अध्याय मनोरंजन का जोड़ा है; वह मनोरंजन प्रिय व्यक्ति हैं, और इस नाते से वह अपने कार्यक्रमों में नाच-गाने की खास व्यवस्था रखते हैं - कुछ लोगों का आरोप है कि इस व्यवस्था की आड़ में वह कुछ दूसरे गुल भी खिलाते हैं । यही व्यवस्था वह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में करना चाहते हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में वह मल्टीपल के दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स से आने वाले अतिथियों, खासतौर से फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के लिए विशेष इंतजाम करना चाहते हैं; समझा जाता है कि अनिल तुलस्यान मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की अपनी संभावित उम्मीदवारी के लिए अपनी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में अच्छा माहौल बनाना चाहते हैं ।
अनिल तुलस्यान डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में लगता है कि डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह में हुए नुकसान की पूरी भरपाई करना चाहते हैं । उल्लेखनीय है कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में भी व्यवस्था तो अच्छी की थी, लेकिन निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रकाश अग्रवाल के साथ की गई बदतमीजीपूर्ण हरकत के चलते उसमें जो बबाल हुआ - उससे मल्टीपल के दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के लोगों तक उनकी भारी फजीहत हुई थी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की उम्मीद में अनिल तुलस्यान लेकिन अब बहुत सावधानी के साथ कदम बढ़ाना चाहते हैं । पिछले दिनों आयोजित हुई तीसरी कैबिनेट मीटिंग में उन्होंने प्रकाश अग्रवाल को जो तवज्जो दी, उससे भी लोगों को संकेत मिला है कि अब वह किसी को नाराज नहीं रखना/छोड़ना चाहते हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जैसे वह अपने सारे 'पाप' धो लेना चाहते हैं । इसमें समस्या की बात लेकिन यह हो गई है कि इसकी 'कीमत' वह क्षितिज शर्मा से बसूलना चाहते हैं । क्षितिज शर्मा ने अपने नजदीकियों से रोना रोया है कि अनिल तुलस्यान डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में अपने राजनीतिक स्वार्थ में जो इंतजाम करना चाहते हैं, उसके खर्चे का बोझ भी वह उनके सिर पर मढ़ने का प्रयास कर रहे हैं - और इसीलिए क्षितिज शर्मा को कहने की जरूरत पड़ी है कि वह लुटेंगे नहीं ।
अनिल तुलस्यान और क्षितिज शर्मा के बीच 'लूटने' और 'लुटने से बचने' का जो खेल चल रहा है, वह वास्तव में सत्ता खेमे के नेताओं और क्षितिज शर्मा के बीच बने रहने वाले परस्पर अविश्वास का नतीजा भी है । क्षितिज शर्मा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने के लालच में सत्ता खेमे के नेताओं के नजदीक चले तो गए हैं, लेकिन सत्ता खेमे के नेताओं की हरकतें न उन्हें पहले पसंद थीं और न अब हैं; उधर सत्ता खेमे के नेताओं ने एक मालदार उम्मीदवार होने के नाते उन्हें 'स्वीकार' तो कर लिया है, लेकिन साथ-साथ वह यह भी अच्छी तरह समझ रहे हैं कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के बाद क्षितिज शर्मा उनके साथ रहेंगे नहीं । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अशोक सिंह के साथ क्षितिज शर्मा की नजदीकी सत्ता खेमे के नेताओं को और भी आशंकित कर रही है । उल्लेखनीय है कि अशोक सिंह के कारण ही क्षितिज शर्मा को पिछले वर्ष के प्रकाश अग्रवाल के गवर्नर-काल में रीजन चेयरमैन का पद मिला था । प्रकाश अग्रवाल किसी और को रीजन चेयरमैन बना रहे थे, लेकिन अशोक सिंह ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए दखल दिया और क्षितिज शर्मा को रीजन चेयरमैन बनवाया - जिसके कारण क्षितिज शर्मा की लायन-यात्रा तेजी से आगे बढ़ी । मौजूदा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रभात चतुर्वेदी तो घोषित रूप से अशोक सिंह के नजदीक हैं; ऐसे में सत्ता खेमे के नेताओं के सामने सवाल यह भी है कि क्षितिज शर्मा को सफल करवा कर कहीं वह अपने प्रतिद्धंद्धी अशोक सिंह को तो मजबूत नहीं बना रहे हैं ? सत्ता खेमे के नेताओं और क्षितिज शर्मा के बीच पल रहे इसी अविश्वास के बीच 'लूटने' और 'लुटने से बचने' का खेल खासा दिलचस्प हो गया है - और लोगों को लग रहा है कि विद्ययुत विहार में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान द्धारा कॉल निकालने के बाद डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का परिदृश्य अभी और करवट लेगा तथा चुनावी समीकरणों को प्रभावित करेगा ।

Wednesday, October 19, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान को अपनी दूसरी कैबिनेट मीटिंग में ही जो तगड़ा वाला झटका लगा है, उससे वह सबक लेंगे क्या ?

वाराणसी । प्रकाश मिश्र के बाद राधे मारवाह के हाथों डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान की जो फजीहत हुई, उसका सीधा असर डिस्ट्रिक्ट की दूसरी कैबिनेट मीटिंग पर पड़ा - जिसका अधिकतर कैबिनेट सदस्यों ने बहिष्कार किया । कैबिनेट सदस्यों ने ही नहीं, पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने भी डिस्ट्रिक्ट की दूसरी कैबिनेट मीटिंग से अपनी दूरी बनाई/दिखाई । फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कुँवर बीएम सिंह ने भी कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने की जरूरत नहीं समझी, और सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रभात चतुर्वेदी कैबिनेट मीटिंग में शामिल तो हुए, लेकिन बड़े बेमन से हुए - और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आयोजन के दौरान बड़े उखड़े उखड़े से रहे । उल्लेखनीय है कि अनिल तुलस्यान ने 600/650 सदस्यों की तो भारी भरकम कैबिनेट बनाई हुई है; 250 के करीब पीएसटी होते हैं - लेकिन सिंगरौली के ऑफीसर्स क्लब में आयोजित हुई डिस्ट्रिक्ट की दूसरी कैबिनेट मीटिंग में मुश्किल से सवा सौ लोग ही जुटे, और मीटिंग-स्थल की ज्यादातर कुर्सियाँ खाली ही पड़ी रह गईं । जो लोग मीटिंग में थे भी, उनमें भी बहुतायत आसपास के क्लब्स के लोगों की थी । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स में वीरेंद्र गोयल और निधि कुमार भी - शायद स्थानीय होने के नाते ही मीटिंग में शक्ल दिखाने पहुँचे । जो लोग पिछले लायन वर्ष में भी डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट में थे, और कैबिनेट मीटिंग्स में शामिल होते रहे थे - उन्होंने तुलनात्मक अध्ययन करते हुए बताया कि निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रकाश जी अग्रवाल की चारों कैबिनेट मीटिंग्स उपस्थिति के लिहाज से भी और व्यापक सक्रियता के लिहाज से भी बेहतरीन रही थीं; और उनके मुकाबले मौजूदा लायन वर्ष में अनिल तुलस्यान की दूसरी कैबिनेट मीटिंग ही बुरी तरह पिट गई और फ्लॉप रही ।
डिस्ट्रिक्ट की दूसरी कैबिनेट मीटिंग में अनिल तुलस्यान को डिस्ट्रिक्ट के आम और खास - दोनों तरह के लोगों से जो झटका लगा है, उसके लिए अनिल तुलस्यान के व्यवहार और रवैये को ही जिम्मेदार बताया/ठहराया जा रहा है । लोगों की तरफ से, विशेष कर डिस्ट्रिक्ट के 'खास' लोगों की तरफ से एक आम शिकायत यह रही कि अनिल तुलस्यान ने उन्हें उचित सम्मान के साथ मीटिंग के लिए आमंत्रित ही नहीं किया । इस मामले में बेचारे पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जगदीश गुलाटी के साथ तो बहुत ही बुरी बीती । अनिल तुलस्यान ने उन्हें मीटिंग में उदबोधन देने के लिए राजी कर लिया था । उसी दिन हालाँकि जगदीश गुलाटी के क्लब का भी इलाहबाद में एक कार्यक्रम था, लेकिन फिर भी जगदीश गुलाटी ने अपने क्लब के कार्यक्रम की बजाए डिस्ट्रिक्ट की कैबिनेट मीटिंग को प्रमुखता दी, और अनिल तुलस्यान के निमंत्रण पर अपनी सहमति प्रकट कर दी थी । जगदीश गुलाटी लेकिन यह देख कर हैरान रह गए कि सहमति मिलने के बाद अनिल तुलस्यान ने फिर उनसे न तो कोई बात की, और न मीटिंग को लेकर सलाह/विचार किया । जगदीश गुलाटी मीटिंग में देने वाले उदबोधन का मैटर ड्राफ्ट भी कर चुके थे, लेकिन अनिल तुलस्यान के उपेक्षापूर्ण रवैये से खुद को अपमानित महसूस करते हुए जगदीश गुलाटी ने ऐन मौके पर कैबिनेट मीटिंग में जाने का विचार त्याग दिया । अन्य कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स तथा अन्य प्रमुख लोगों की भी शिकायत रही कि अनिल तुलस्यान ने उन्हें चूँकि उचित तरीके से मीटिंग के लिए निमंत्रित नहीं किया, इसलिए उन्होंने मीटिंग से दूर रहने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी ।
डिस्ट्रिक्ट की इलाहबाद में हुई पहली कैबिनेट मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अनिल तुलस्यान ने कैबिनेट के कई प्रमुख पदाधिकारियों के साथ चूँकि बहुत ही बदतमीजीपूर्ण व्यवहार किया था, और धौंसभरी बातों से उन्हें बुरी तरह अपमानित व जलील किया था - इसलिए कैबिनेट के तमाम प्रमुख पदाधिकारियों ने दूसरी कैबिनेट मीटिंग से दूर रहने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी । लायंस इंटरनेशनल के जो प्रमुख प्रोग्राम व प्रोजेक्ट्स हैं, उनसे जुड़े पदाधिकारी ही जब कैबिनेट मीटिंग में नहीं पहुँचे - तो समझा जा सकता है कि कैबिनेट मीटिंग में फिर क्या काम हुआ होगा ? जाहिर तौर पर कैबिनेट मीटिंग सिर्फ एक औपचारिकता भर बन कर रह गई । डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ लायन सदस्यों का कहना है कि गवर्नरी के चौथे महीने में ही अनिल तुलस्यान की लोगों के बीच जैसी बुरी गत बन गई है, वैसा तो डिस्ट्रिक्ट में इससे पहले किसी भी गवर्नर के साथ नहीं हुआ । मजे की बात यह है कि इस स्थिति के लिए खुद अनिल तुलस्यान को ही जिम्मेदार ठहराया/बताया जा रहा है । आरोप है कि अनिल तुलस्यान अपने आप को लोगों पर जबर्दस्ती थोपते हैं, और अपनी बातें मनवाने के लिए लोगों पर दबाव बनाते/बढ़ाते हैं - लेकिन जब कोई उन्हें उनके दबाव में आने से बचने का प्रयास करता नज़र आता है, तो वह उस पर भड़क उठते हैं तथा उसे अपमानित करने का प्रयास करते हैं । अपने इस रवैये से अनिल तुलस्यान ने डिस्ट्रिक्ट में तमाम लोगों को अपने खिलाफ कर लिया है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अनिल तुलस्यान के इस रवैये के पहले शिकार उनके अपने क्लब के निवर्तमान अध्यक्ष प्रकाश मिश्र बने । उल्लेखनीय है कि प्रकाश मिश्र के साथ उनके वर्षों से अच्छे संबंध रहे हैं; दोनों एक ही क्लब में थे - अनिल तुलस्यान के चुनाव में प्रकाश मिश्र ने तन-मन के साथ-साथ धन से भी सहयोग किया था । प्रकाश मिश्र वाराणसी के जाने-माने पंडित हैं, और इस नाते शहर के लोगों के बीच उनकी अच्छी व प्रभावी पहचान तथा प्रतिष्ठा है । उनकी पहचान व प्रतिष्ठा का अनिल तुलस्यान ने अपने चुनाव में जमकर फायदा उठाया । अनिल तुलस्यान के चुनाव में प्रकाश मिश्र की जो महत्त्वपूर्ण भूमिका रही, उसने दोनों के बीच के संबंधों को और प्रगाढ़ बनाया । इसी प्रगाढ़ता का नतीजा रहा कि पिछले लायन वर्ष में अनिल तुलस्यान ने अपने कुछेक साथियों के साथ मिलकर जब नया क्लब बनाया तो प्रकाश मिश्र भी उनके साथ पुराना क्लब छोड़ कर नए क्लब में आए - प्रकाश मिश्र बल्कि नए क्लब के चार्टर प्रेसीडेंट बने । सिर्फ इतना ही नहीं, अनिल तुलस्यान ने अपनी कैबिनेट बनाई तो उन्होंने प्रकाश मिश्र को जोन चेयरमैन बनाया । एक तरफ तो यह हो रहा था, इसके साथ-साथ दूसरी तरफ लेकिन गवर्नरी की कुर्सी की तरफ बढ़ते हुए अनिल तुलस्यान के दिमाग में 'गर्मी' भी पैदा होने लगी थी - और इस गर्मी के कारण उन्होंने लोगों के साथ बदतमीजियाँ भी करना शुरू कर दिया था । लोगों के लिए हैरानी की बात यह रही कि उनकी गवर्नरी की 'गर्मी' का पहला शिकार प्रकाश मिश्र ही बने । गवर्नरी के दूसरे महीने में ही प्रकाश मिश्र के साथ उनके संबंध इतने विवादपूर्ण हो गए कि उन्होंने प्रकाश मिश्र को जोन चेयरमैन पद से ही हटा दिया । प्रकाश मिश्र का गुनाह सिर्फ इतना रहा कि उन्होंने अनिल तुलस्यान की बदतमीजियों को बर्दाश्त करने से इंकार किया । प्रकाश मिश्र ही नहीं, अभी पिछले दिनों ही अनिल तुलस्यान ने डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ सदस्य राधे मारवाह तक के साथ सार्वजनिक रूप से तू तू मैं मैं की । राधे मारवाह का गुस्सा अभी तक भी शांत नहीं हुआ है, जिसकी अभिव्यक्ति के रूप में दूसरी कैबिनेट मीटिंग में लोगों की कम उपस्थिति पर सोशल मीडिया में उनके द्धारा ली गई चुटकी को देखा/पढ़ा गया ।
डिस्ट्रिक्ट की दूसरी कैबिनेट मीटिंग में ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान को डिस्ट्रिक्ट के आम और खास लोगों की तरफ से जो तगड़ा वाला झटका लगा है, वह अनिल तुलस्यान के लिए सबक भी है, और चुनौती भी है - देखना दिलचस्प होगा कि इससे सबक लेते हुए उनके रवैये व व्यवहार में कोई फर्क पड़ेगा या फिर वह अपनी और फजीहत करवायेंगे ?

Monday, August 1, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई के वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमाशंकर अग्रवाल को अपमानित करने के कारण इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल की दोहरी पोल खुली और लोगों के बीच उनकी खासी फजीहत हुई

वाराणसी । इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल ने डिस्ट्रिक्ट 321 ई के अधिष्ठापन समारोह में डिस्ट्रिक्ट के एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर रमाशंकर अग्रवाल की जिस तरीके से सार्वजनिक रूप से बेइज्जती की - उससे नरेश अग्रवाल का असली चेहरा लोगों के सामने आया है, जिसे देख कर लोग सचमुच हैरान हैं । अधिष्ठापन समारोह में डिस्ट्रिक्ट के तमाम पदाधिकारियों तथा प्रमुख लोगों के साथ साथ दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारी व अन्य प्रमुख लोग उपस्थित थे - जिनके बीच दिए अपने भाषण में नरेश अग्रवाल ने रमाशंकर अग्रवाल को पूरी निर्लज्जता के साथ अपमानित किया । नरेश अग्रवाल ने न तो इस बात का कोई लिहाज किया कि वह जिस डिस्ट्रिक्ट में मुख्य अतिथि के रूप में आए हैं, रमाशंकर अग्रवाल उस डिस्ट्रिक्ट के एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर हैं - और न रमाशंकर अग्रवाल की उम्र का, उनके वृद्ध होने की उन्होंने कोई परवाह की । नरेश अग्रवाल ने रमाशंकर अग्रवाल का नाम लेकर कहा कि इनके जैसे बूढ़े लोग अब किसी काम के नहीं रह गए हैं और इन्हें तो लायनिज्म से और डिस्ट्रिक्ट से निकाल देना चाहिए । रमाशंकर अग्रवाल का 'अपराध' यह था कि कार्यक्रम शुरू होते समय उन्होंने मंच पर प्रोटोकॉल के हिसाब से पदाधिकारियों को बैठाने की तरफ ध्यान खींचने का प्रयास किया था । उस समय भी नरेश अग्रवाल ने मंच से चिल्लाते हुए रमाशंकर अग्रवाल को चुपचाप बैठने तथा कार्यक्रम को डिस्टर्ब न करने के लिए फटकार लगाई थी । रमाशंकर अग्रवाल भी चुप हो गए थे, और सभी ने मान लिया था कि मामला खत्म हो गया है । इस तरह के 'सीन' किसी भी कार्यक्रम में बन जाते हैं, इसलिए किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि नरेश अग्रवाल जब अपना भाषण करने के लिए खड़े होंगे - तो वह रमाशंकर अग्रवाल को और भी अभद्र व अशालीन तरीके से संबोधित करेंगे । रमाशंकर अग्रवाल वर्ष 1993- 94 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर थे । बढ़ती उम्र के कारण होने वाली शारीरिक व्याधियों के चलते उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होती है, लेकिन फिर भी लायनिज्म के प्रति अपने लगाव के कारण वह व्हीलचेयर पर प्रमुख आयजनों में पहुँचते हैं । इस बात को ध्यान में रखते हुए, रमाशंकर अग्रवाल के प्रति प्रकट किए गए नरेश अग्रवाल के बर्ताव के लिए अधिकतर लोगों ने नरेश अग्रवाल को खूब धिक्कारा भी । लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट के बड़े पदाधिकारियों के प्रति भी नाराजगी देखी/सुनी गई, जो रमाशंकर अग्रवाल के अपमान को चुपचाप बैठे देखते रहे और उन्होंने एक बार भी नरेश अग्रवाल को टोकने/रोकने का प्रयास नहीं किया ।
नरेश अग्रवाल का सामने सामने विरोध भले ही किसी न न किया हो, किंतु नरेश अग्रवाल के रवैये पर अधिकतर लोगों ने उनकी थू थू ही की । वाराणसी के कुछेक वरिष्ठ लायन सदस्यों ने याद किया कि नरेश अग्रवाल जब इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार थे, तब वाराणसी में रमाशंकर अग्रवाल की मदद से ही वह लोगों से मिले थे । कई लोगों का कहना रहा कि रमाशंकर अग्रवाल के प्रति नरेश अग्रवाल का जो व्यवहार रहा, वह उनकी अहसानफरामोशी का सुबूत तो है ही, साथ ही इस बात का भी सुबूत है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की 'गर्मी' नरेश अग्रवाल के दिमाग में जा घुसी है । जो हुआ, उससे नरेश अग्रवाल की दरअसल दोहरी पोल खुली । रमाशंकर अग्रवाल ने जो मुद्दा उठाया था, वह प्रोटोकॉल का एक सामान्य सा मामला था, जिसे नरेश अग्रवाल चाहते तो सेकेंड्स में हल कर सकते थे । रमाशंकर अग्रवाल ने कार्यक्रम शुरू होते समय जब निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रकाश जी अग्रवाल को मंच की बजाए दर्शक दीर्घा में बैठे देखा, तो उन्होंने मंच पर बैठे लोगों का ध्यान खींचते हुए प्रोटोकॉल की बात उठाई और प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर बुलाने/बैठाने की माँग की । उनके अलावा, कार्यक्रम में मौजूद डिस्ट्रिक्ट के तथा दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के कई पदाधिकारियों को भी यह देख कर अचरज हुआ था कि प्रकाश जी अग्रवाल मंच की बजाए दर्शक दीर्घा में क्यों बैठे हैं ? लोगों का कहना रहा कि डिस्ट्रिक्ट के आधिकारिक कार्यक्रमों में निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के ठीक बगल में बैठने का अधिकार लायंस इंटरनेशनल द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल देता है । कई लोगों ने प्रकाश जी अग्रवाल से कहा भी कि वह मंच पर क्यों नहीं बैठते ? प्रकाश जी अग्रवाल का कहना होता कि वह अपने आप मंच पर जाकर तो नहीं बैठ सकते हैं, उन्हें बुलाया जायेगा - तो वह जायेंगे । लोगों के लिए हैरानी की बात यह रही कि मंच पर नरेश अग्रवाल के होते हुए भी प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हो रहा है ? रमाशंकर अग्रवाल ने इसी बात की तरफ ध्यान खींचने के लिए दर्शक दीर्घा से सवाल उठाया - लेकिन उनके सवाल पर ध्यान देने व कार्रवाई करने की बजाए नरेश अग्रवाल ने उन्हें बहुत ही बुरी तरह से डपटते हुए चुप करा दिया ।
मजे की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुल्सियान ने डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह की तैयारी शुरू करते समय प्रकाश जी अग्रवाल के लिए मंच पर जगह सुनिश्चित की थी । इसका सुबूत यह है कि मंच पर बैठने वाले पदाधिकारियों के लिए उन्होंने एक ड्रेसकोड तय किया था, और उसके लिए कोट का कपड़ा पहले से ही उन पदाधिकारियों को उपलब्ध करवा दिया था । यह कपड़ा और ड्रेसकोड का विवरण प्रकाश जी अग्रवाल को भी मिला था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुल्सियान से प्राप्त दिशा-निर्देश के अनुसार ही तैयार होकर प्रकाश जी अग्रवाल अधिष्ठापन समारोह में पहुँचे थे, किंतु फिर भी अनिल तुल्सियान ने उन्हें मंच पर जगह देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई । अनिल तुल्सियान के नजदीकियों का कहना है कि पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स दीपक वधावन तथा मंगल सोनी की शह पर अनिल तुल्सियान ने प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर जगह न देने का फैसला किया । अनिल तुल्सियान के नजदीकियों के अनुसार, अनिल तुल्सियान दरअसल पहले से ही प्रकाश जी अग्रवाल से कुछ खिंचे खिंचे से थे । हुआ असल में यह कि अनिल तुल्सियान ने अपनी कैबिनेट के सदस्यों से पदों के बदले में मोटी मोटी 'कीमतें' माँगना शुरू किया, तो लोगों ने उनसे सवाल किया कि प्रकाश जी अग्रवाल जब कैबिनेट सदस्यों से बिना पैसा लिए काम कर सकते हैं, तो उन्हें पैसा क्यों चाहिए ? उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में प्रकाश जी अग्रवाल के कामकाज को लोगों से बहुत ही प्रशंसा मिली है, और लोगों को पहली बार इस बात का पता चला कि कैबिनेट सदस्यों से मनमाने पैसे लिए बिना भी डिस्ट्रिक्ट का काम किया जा सकता है - और अच्छे से किया जा सकता है । लोगों के बीच होने वाली इस तरह की बातों से अनिल तुल्सियान ने अपने आपको प्रकाश जी अग्रवाल के सामने बहुत 'छोटा' पाया । अपने आप को 'बड़ा' साबित करने के लिए वह किसी भी तरह से प्रकाश जी अग्रवाल को अपमानित करना चाहते थे ।
ऐसे में उन्हें दीपक वधावन और मंगल सोनी से सुझाव मिला कि वह अधिष्ठापन समारोह में प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर जगह न दें । दीपक वधावन की प्रकाश जी अग्रवाल के साथ पुरानी खुन्नस है : दीपक वधावन के गवर्नर-काल में प्रकाश जी अग्रवाल उम्मीदवार बने थे; डिस्ट्रिक्ट के 'रिवाज' के अनुसार डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के कुछेक खर्चों के लिए उन्होंने दीपक वधावन को मोटी रकम दी थी । किंतु कॉन्फ्रेंस से कुछ ही दिन पहले दीपक वधावन के रवैये से परेशान व निराश होकर उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी । प्रकाश जी अग्रवाल चूँकि उम्मीदवार के रूप में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के लिए दी गई अपनी रकम वापस माँग रहे हैं, इसलिए रकम वापस करना तो दूर की बात - दीपक वधावन उनसे खुन्नस और रखने लगे । कई बार लोगों ने उनसे कहा भी कि भई, खुन्नस रखो तो रखो - प्रकाश जी अग्रवाल के पैसे तो वापस कर दो; पर दीपक वधावन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा । मंगल सोनी की नाराजगी का कारण बिलकुल नया है । मंगल सोनी अभी पिछले दिनों अपनी हरकतों के चलते वाराणसी की प्रतिष्ठित संस्था - प्रभुनारायण यूनियन क्लब के पद से हटा दिए गए हैं । मंगल सोनी इस बात को पहले से जानते हैं कि उक्त क्लब के प्रमुख लोगों के साथ प्रकाश जी अग्रवाल के अच्छे संबंध हैं - सो, मंगल सोनी इस बात पर खफा हैं कि प्रकाश जी अग्रवाल ने उक्त क्लब में उनका पद बचवाने में कोई दिलचस्पी क्यों नहीं ली ? इन्हीं अलग अलग कारणों से मंगल सोनी, दीपक वधावन व अनिल तुल्सियान ने प्रकाश जी अग्रवाल को डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह में मंच न देने का फैसला किया । अनिल तुल्सियान के नजदीकियों के अनुसार, पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जगदीश गुलाटी ने अनिल तुल्सियान को समझाने की बहुत कोशिश की, कि निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को मंच पर जगह नहीं दोगे - तो यह लायंस इंटरनेशनल के प्रोटोकॉल का तो उल्लंघन होगा ही, साथ ही मल्टीपल में बहुत बदनामी भरा काम भी होगा । लेकिन अनिल तुल्सियान ने जगदीश गुलाटी की भी नहीं सुनी और वह प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर जगह देने के लिए तैयार नहीं हुए ।
प्रकाश जी अग्रवाल को अपमानित करके लोगों की निगाह में प्रकाश जी अग्रवाल से 'बड़ा' बनने/दिखने की कोशिश में अनिल तुल्सियान ने जगदीश गुलाटी को तो धता बता दी, किंतु उन्हें नरेश अग्रवाल की तरफ से डर था - उन्हें लगता था कि नरेश अग्रवाल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की राह पर हैं, वह कम से कम अपने सामने तो लायंस इंटरनेशनल के प्रोटोकॉल व परंपरा का उल्लंघन नहीं होने देंगे और प्रकाश जी अग्रवाल मंच पर बुलवा ही लेंगे । अनिल तुल्सियान के डर को दूर किया मंगल सोनी ने । मंगल सोनी ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह नरेश अग्रवाल की एक ऐसी कमजोरी जानते हैं, कि उसके डर से नरेश अग्रवाल वही करेंगे - जैसे हम चाहेंगे । मंगल सोनी को भरोसा था, किंतु दूसरे लोगों को नहीं था - डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमाशंकर अग्रवाल को तो बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि नरेश अग्रवाल अपने सामने लायंस इंटरनेशनल के प्रोटोकॉल को तथा लायनिज्म की परंपरा को भंग होने देंगे । इसीलिए उन्होंने नरेश अग्रवाल का ध्यान खींचने का प्रयास किया - किंतु अपने इस प्रयास में उन्हें नरेश अग्रवाल के हाथों जिस तरह अपमानित होना पड़ा, उससे साबित हुआ कि नरेश अग्रवाल सचमुच ही मंगल सोनी व अनिल तुल्सियान के हाथों इस कदर मजबूर हुए कि अपनी हरकत के चलते लोगों की आलोचना का और उनकी थू थू का शिकार बने ।