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Monday, August 1, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई के वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमाशंकर अग्रवाल को अपमानित करने के कारण इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल की दोहरी पोल खुली और लोगों के बीच उनकी खासी फजीहत हुई

वाराणसी । इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल ने डिस्ट्रिक्ट 321 ई के अधिष्ठापन समारोह में डिस्ट्रिक्ट के एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर रमाशंकर अग्रवाल की जिस तरीके से सार्वजनिक रूप से बेइज्जती की - उससे नरेश अग्रवाल का असली चेहरा लोगों के सामने आया है, जिसे देख कर लोग सचमुच हैरान हैं । अधिष्ठापन समारोह में डिस्ट्रिक्ट के तमाम पदाधिकारियों तथा प्रमुख लोगों के साथ साथ दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारी व अन्य प्रमुख लोग उपस्थित थे - जिनके बीच दिए अपने भाषण में नरेश अग्रवाल ने रमाशंकर अग्रवाल को पूरी निर्लज्जता के साथ अपमानित किया । नरेश अग्रवाल ने न तो इस बात का कोई लिहाज किया कि वह जिस डिस्ट्रिक्ट में मुख्य अतिथि के रूप में आए हैं, रमाशंकर अग्रवाल उस डिस्ट्रिक्ट के एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर हैं - और न रमाशंकर अग्रवाल की उम्र का, उनके वृद्ध होने की उन्होंने कोई परवाह की । नरेश अग्रवाल ने रमाशंकर अग्रवाल का नाम लेकर कहा कि इनके जैसे बूढ़े लोग अब किसी काम के नहीं रह गए हैं और इन्हें तो लायनिज्म से और डिस्ट्रिक्ट से निकाल देना चाहिए । रमाशंकर अग्रवाल का 'अपराध' यह था कि कार्यक्रम शुरू होते समय उन्होंने मंच पर प्रोटोकॉल के हिसाब से पदाधिकारियों को बैठाने की तरफ ध्यान खींचने का प्रयास किया था । उस समय भी नरेश अग्रवाल ने मंच से चिल्लाते हुए रमाशंकर अग्रवाल को चुपचाप बैठने तथा कार्यक्रम को डिस्टर्ब न करने के लिए फटकार लगाई थी । रमाशंकर अग्रवाल भी चुप हो गए थे, और सभी ने मान लिया था कि मामला खत्म हो गया है । इस तरह के 'सीन' किसी भी कार्यक्रम में बन जाते हैं, इसलिए किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि नरेश अग्रवाल जब अपना भाषण करने के लिए खड़े होंगे - तो वह रमाशंकर अग्रवाल को और भी अभद्र व अशालीन तरीके से संबोधित करेंगे । रमाशंकर अग्रवाल वर्ष 1993- 94 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर थे । बढ़ती उम्र के कारण होने वाली शारीरिक व्याधियों के चलते उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होती है, लेकिन फिर भी लायनिज्म के प्रति अपने लगाव के कारण वह व्हीलचेयर पर प्रमुख आयजनों में पहुँचते हैं । इस बात को ध्यान में रखते हुए, रमाशंकर अग्रवाल के प्रति प्रकट किए गए नरेश अग्रवाल के बर्ताव के लिए अधिकतर लोगों ने नरेश अग्रवाल को खूब धिक्कारा भी । लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट के बड़े पदाधिकारियों के प्रति भी नाराजगी देखी/सुनी गई, जो रमाशंकर अग्रवाल के अपमान को चुपचाप बैठे देखते रहे और उन्होंने एक बार भी नरेश अग्रवाल को टोकने/रोकने का प्रयास नहीं किया ।
नरेश अग्रवाल का सामने सामने विरोध भले ही किसी न न किया हो, किंतु नरेश अग्रवाल के रवैये पर अधिकतर लोगों ने उनकी थू थू ही की । वाराणसी के कुछेक वरिष्ठ लायन सदस्यों ने याद किया कि नरेश अग्रवाल जब इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार थे, तब वाराणसी में रमाशंकर अग्रवाल की मदद से ही वह लोगों से मिले थे । कई लोगों का कहना रहा कि रमाशंकर अग्रवाल के प्रति नरेश अग्रवाल का जो व्यवहार रहा, वह उनकी अहसानफरामोशी का सुबूत तो है ही, साथ ही इस बात का भी सुबूत है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की 'गर्मी' नरेश अग्रवाल के दिमाग में जा घुसी है । जो हुआ, उससे नरेश अग्रवाल की दरअसल दोहरी पोल खुली । रमाशंकर अग्रवाल ने जो मुद्दा उठाया था, वह प्रोटोकॉल का एक सामान्य सा मामला था, जिसे नरेश अग्रवाल चाहते तो सेकेंड्स में हल कर सकते थे । रमाशंकर अग्रवाल ने कार्यक्रम शुरू होते समय जब निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रकाश जी अग्रवाल को मंच की बजाए दर्शक दीर्घा में बैठे देखा, तो उन्होंने मंच पर बैठे लोगों का ध्यान खींचते हुए प्रोटोकॉल की बात उठाई और प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर बुलाने/बैठाने की माँग की । उनके अलावा, कार्यक्रम में मौजूद डिस्ट्रिक्ट के तथा दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के कई पदाधिकारियों को भी यह देख कर अचरज हुआ था कि प्रकाश जी अग्रवाल मंच की बजाए दर्शक दीर्घा में क्यों बैठे हैं ? लोगों का कहना रहा कि डिस्ट्रिक्ट के आधिकारिक कार्यक्रमों में निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के ठीक बगल में बैठने का अधिकार लायंस इंटरनेशनल द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल देता है । कई लोगों ने प्रकाश जी अग्रवाल से कहा भी कि वह मंच पर क्यों नहीं बैठते ? प्रकाश जी अग्रवाल का कहना होता कि वह अपने आप मंच पर जाकर तो नहीं बैठ सकते हैं, उन्हें बुलाया जायेगा - तो वह जायेंगे । लोगों के लिए हैरानी की बात यह रही कि मंच पर नरेश अग्रवाल के होते हुए भी प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हो रहा है ? रमाशंकर अग्रवाल ने इसी बात की तरफ ध्यान खींचने के लिए दर्शक दीर्घा से सवाल उठाया - लेकिन उनके सवाल पर ध्यान देने व कार्रवाई करने की बजाए नरेश अग्रवाल ने उन्हें बहुत ही बुरी तरह से डपटते हुए चुप करा दिया ।
मजे की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुल्सियान ने डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह की तैयारी शुरू करते समय प्रकाश जी अग्रवाल के लिए मंच पर जगह सुनिश्चित की थी । इसका सुबूत यह है कि मंच पर बैठने वाले पदाधिकारियों के लिए उन्होंने एक ड्रेसकोड तय किया था, और उसके लिए कोट का कपड़ा पहले से ही उन पदाधिकारियों को उपलब्ध करवा दिया था । यह कपड़ा और ड्रेसकोड का विवरण प्रकाश जी अग्रवाल को भी मिला था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुल्सियान से प्राप्त दिशा-निर्देश के अनुसार ही तैयार होकर प्रकाश जी अग्रवाल अधिष्ठापन समारोह में पहुँचे थे, किंतु फिर भी अनिल तुल्सियान ने उन्हें मंच पर जगह देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई । अनिल तुल्सियान के नजदीकियों का कहना है कि पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स दीपक वधावन तथा मंगल सोनी की शह पर अनिल तुल्सियान ने प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर जगह न देने का फैसला किया । अनिल तुल्सियान के नजदीकियों के अनुसार, अनिल तुल्सियान दरअसल पहले से ही प्रकाश जी अग्रवाल से कुछ खिंचे खिंचे से थे । हुआ असल में यह कि अनिल तुल्सियान ने अपनी कैबिनेट के सदस्यों से पदों के बदले में मोटी मोटी 'कीमतें' माँगना शुरू किया, तो लोगों ने उनसे सवाल किया कि प्रकाश जी अग्रवाल जब कैबिनेट सदस्यों से बिना पैसा लिए काम कर सकते हैं, तो उन्हें पैसा क्यों चाहिए ? उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में प्रकाश जी अग्रवाल के कामकाज को लोगों से बहुत ही प्रशंसा मिली है, और लोगों को पहली बार इस बात का पता चला कि कैबिनेट सदस्यों से मनमाने पैसे लिए बिना भी डिस्ट्रिक्ट का काम किया जा सकता है - और अच्छे से किया जा सकता है । लोगों के बीच होने वाली इस तरह की बातों से अनिल तुल्सियान ने अपने आपको प्रकाश जी अग्रवाल के सामने बहुत 'छोटा' पाया । अपने आप को 'बड़ा' साबित करने के लिए वह किसी भी तरह से प्रकाश जी अग्रवाल को अपमानित करना चाहते थे ।
ऐसे में उन्हें दीपक वधावन और मंगल सोनी से सुझाव मिला कि वह अधिष्ठापन समारोह में प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर जगह न दें । दीपक वधावन की प्रकाश जी अग्रवाल के साथ पुरानी खुन्नस है : दीपक वधावन के गवर्नर-काल में प्रकाश जी अग्रवाल उम्मीदवार बने थे; डिस्ट्रिक्ट के 'रिवाज' के अनुसार डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के कुछेक खर्चों के लिए उन्होंने दीपक वधावन को मोटी रकम दी थी । किंतु कॉन्फ्रेंस से कुछ ही दिन पहले दीपक वधावन के रवैये से परेशान व निराश होकर उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी । प्रकाश जी अग्रवाल चूँकि उम्मीदवार के रूप में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के लिए दी गई अपनी रकम वापस माँग रहे हैं, इसलिए रकम वापस करना तो दूर की बात - दीपक वधावन उनसे खुन्नस और रखने लगे । कई बार लोगों ने उनसे कहा भी कि भई, खुन्नस रखो तो रखो - प्रकाश जी अग्रवाल के पैसे तो वापस कर दो; पर दीपक वधावन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा । मंगल सोनी की नाराजगी का कारण बिलकुल नया है । मंगल सोनी अभी पिछले दिनों अपनी हरकतों के चलते वाराणसी की प्रतिष्ठित संस्था - प्रभुनारायण यूनियन क्लब के पद से हटा दिए गए हैं । मंगल सोनी इस बात को पहले से जानते हैं कि उक्त क्लब के प्रमुख लोगों के साथ प्रकाश जी अग्रवाल के अच्छे संबंध हैं - सो, मंगल सोनी इस बात पर खफा हैं कि प्रकाश जी अग्रवाल ने उक्त क्लब में उनका पद बचवाने में कोई दिलचस्पी क्यों नहीं ली ? इन्हीं अलग अलग कारणों से मंगल सोनी, दीपक वधावन व अनिल तुल्सियान ने प्रकाश जी अग्रवाल को डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह में मंच न देने का फैसला किया । अनिल तुल्सियान के नजदीकियों के अनुसार, पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जगदीश गुलाटी ने अनिल तुल्सियान को समझाने की बहुत कोशिश की, कि निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को मंच पर जगह नहीं दोगे - तो यह लायंस इंटरनेशनल के प्रोटोकॉल का तो उल्लंघन होगा ही, साथ ही मल्टीपल में बहुत बदनामी भरा काम भी होगा । लेकिन अनिल तुल्सियान ने जगदीश गुलाटी की भी नहीं सुनी और वह प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर जगह देने के लिए तैयार नहीं हुए ।
प्रकाश जी अग्रवाल को अपमानित करके लोगों की निगाह में प्रकाश जी अग्रवाल से 'बड़ा' बनने/दिखने की कोशिश में अनिल तुल्सियान ने जगदीश गुलाटी को तो धता बता दी, किंतु उन्हें नरेश अग्रवाल की तरफ से डर था - उन्हें लगता था कि नरेश अग्रवाल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की राह पर हैं, वह कम से कम अपने सामने तो लायंस इंटरनेशनल के प्रोटोकॉल व परंपरा का उल्लंघन नहीं होने देंगे और प्रकाश जी अग्रवाल मंच पर बुलवा ही लेंगे । अनिल तुल्सियान के डर को दूर किया मंगल सोनी ने । मंगल सोनी ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह नरेश अग्रवाल की एक ऐसी कमजोरी जानते हैं, कि उसके डर से नरेश अग्रवाल वही करेंगे - जैसे हम चाहेंगे । मंगल सोनी को भरोसा था, किंतु दूसरे लोगों को नहीं था - डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमाशंकर अग्रवाल को तो बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि नरेश अग्रवाल अपने सामने लायंस इंटरनेशनल के प्रोटोकॉल को तथा लायनिज्म की परंपरा को भंग होने देंगे । इसीलिए उन्होंने नरेश अग्रवाल का ध्यान खींचने का प्रयास किया - किंतु अपने इस प्रयास में उन्हें नरेश अग्रवाल के हाथों जिस तरह अपमानित होना पड़ा, उससे साबित हुआ कि नरेश अग्रवाल सचमुच ही मंगल सोनी व अनिल तुल्सियान के हाथों इस कदर मजबूर हुए कि अपनी हरकत के चलते लोगों की आलोचना का और उनकी थू थू का शिकार बने ।

Wednesday, April 16, 2014

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के लोगों को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा ने तो गौरवान्वित होने का अवसर उपलब्ध करवाया है; लेकिन फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नरेश गुप्ता की कारस्तानी के कारण डिस्ट्रिक्ट के लोगों को शर्मसार होना पड़ रहा है

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा और फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नरेश गुप्ता आजकल खूब चर्चा में हैं - लेकिन उनके चर्चा में होने के कारण बिलकुल अलग-अलग हैं । कारण सिर्फ अलग-अलग ही नहीं हैं, बल्कि विपरीत ध्रुवों पर भी खड़े हैं । विजय शिरोहा के चर्चा में होने का कारण है, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में किये गए उनके कामों और प्राप्त की गईं उनकी उपलब्धियों के लिए लायंस इंटरनेशनल द्धारा ड्रीम अचीवर अवार्ड्स गोल्ड पिन तथा फर्स्ट स्टार जैसे अंतर्राष्ट्रीय सम्मान से उन्हें नवाजा जाना; जबकि नरेश गुप्ता के चर्चा में होने का कारण है, एक फर्जी क्लब के कार्यक्रम का उद्घाटन करने को लेकर उठे सवालों का जबाव देने के लिए नरेश गुप्ता द्धारा एक फर्जी किस्म के नाम का सहारा लेना । जैसे एक झूठ को छिपाने के लिए फिर सौ झूठ बोलने पड़ते हैं; ठीक वैसे ही एक फर्जी काम पर पर्दा डालने के लिए नरेश गुप्ता को फर्जी लोगों का सहारा लेना पड़ रहा है और फर्जी हथकंडे अपनाने पड़ रहे हैं । इस तरह विजय शिरोहा के जरिये डिस्ट्रिक्ट के लोगों को डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री की अपनी सदस्यता पर गर्व करने का मौका मिला है, तो नरेश गुप्ता की कारस्तानी ने उन्हें शर्मसार किया हुआ है ।
उल्लेखनीय है कि विजय शिरोहा को इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी पाल्मर ने पत्र लिख कर ड्रीम अचीवर अवार्ड्स गोल्ड पिन तथा फर्स्ट स्टार के लिए उनके चुने जाने की सूचना दी है । बैरी पाल्मार ने अपने पत्र में यह जानकारी भी दी है कि विजय शिरोहा का नाम 'ड्रीम अचीवर वेबसाइट' पर दिखाया जायेगा, जिससे कि दुनिया भर के लोग विजय शिरोहा के काम से और उनकी उपलब्धियों से परिचित हो सकें । विजय शिरोहा की यह उपलब्धि सिर्फ विजय शिरोहा के लिए ही नहीं, डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के सदस्यों के लिए भी गौरव की बात है कि उनके डिस्ट्रिक्ट और उनके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का नाम लायंस इंटरनेशनल की एक वेबसाइट पर होगा और दुनिया भर के लोग उनके डिस्ट्रिक्ट में हुए काम और उनके डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की उपलब्धियों के बारे में जानेंगे । हालाँकि डिस्ट्रिक्ट में कुछ जलफुक्नु टाइप के लोग हैं जिनके दिल काले हैं - जो अपने डिस्ट्रिक्ट और अपने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की इस उपलब्धि पर 'धुँआ छोड़ने' का काम अवश्य ही करेंगे; लेकिन फिर भी सच तो सच ही है और वह सच ही रहेगा । उल्लेखनीय बात यह हुई है कि विजय शिरोहा को लायंस इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी पाल्मर की तरफ से तारीफ और सम्मान की यह सूचना ऐसे समय मिली है, जबकि फर्जी किस्म की मेलों के जरिये उनपर बेसिरपैर के आरोप लगाये जा रहे हैं । लायंस इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी पाल्मर का पत्र वास्तव में विजय शिरोहा पर बेसिरपैर के आरोप लगाने वाले खुले और 'छिपे' लोगों के मुँह पर एक करारा तमाचा है । हालाँकि डिस्ट्रिक्ट के लोगों का मानना और कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा पर बेसिरपैर के आरोप लगाने वाले खुले और 'छिपे' लोग इतने बेशर्म किस्म के लोग हैं कि लायंस इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बैरी पाल्मर के पत्र से और विजय शिरोहा को लायंस इंटरनेशनल से मिले सम्मान से भी कोई सबक नहीं लेंगे ।
डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के लोगों के सामने सचमुच एक मजेदार नजारा है - उनके सामने एक तरफ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा हैं, जिन्हें लायंस इंटरनेशनल प्रेसीडेंट अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित होने की सूचना देकर उन्हें तथा डिस्ट्रिक्ट के दूसरे लोगों को गौरव महसूस करने का मौका दे रहे हैं । डिस्ट्रिक्ट के लोगों के सामने लेकिन दूसरी तरफ फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नरेश गुप्ता हैं, जो 'लायंस क्लब नई दिल्ली कीर्ति' नाम के एक फर्जी क्लब के एक तथाकथित प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने के गंभीर आरोप में घिरे हैं और लायंस इंटरनेशनल के जो भी पदाधिकारी इस बारे में सुन रहे हैं वह नरेश गुप्ता के नाम पर थू-थू ही कर रहे हैं । हर किसी का मानना और कहना है कि लायंस इंटरनेशनल तथा डिस्ट्रिक्ट के एक पदाधिकारी होने के नाते नरेश गुप्ता को एक फर्जी क्लब के कार्यक्रम का उद्घाटन करना तो दूर, कार्यक्रम में जाना भी नहीं चाहिए था । इससे भी ज्यादा बुरी बात यह हुई है कि एक फर्जी काम करते हुए 'रंगे हाथ' पकड़े जाने के बाद नरेश गुप्ता खुद जबाव देने की बजाये एक फर्जी नाम से यह कह कर बचने की कोशिश कर रहे हैं कि यह खबर फलाँ-फलाँ द्धारा फैलाई जा रही है । एक चोर की चोरी का अपराध क्या इस तर्क से ख़ारिज किया जा सकता है कि उसकी शिकायत तो फलाँ ने की है । चोरी हुई है और चोर रंगे हाथ पकड़ा गया है, तो उसका अपराध तो बनता ही है । इसी तर्क के आधार पर डिस्ट्रिक्ट के लोगों का कहना है कि अवैध तरीके से लायंस इंटरनेशनल के नाम और लोगो का इस्तेमाल करते हुए एक फर्जी क्लब के कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए नरेश गुप्ता 'रंगे हाथ' पकड़े गए हैं इसलिए इसके लिए उन्हें माफी तो माँगनी ही चाहिए । नरेश गुप्ता इसकी बजाये बचने के लिए एक फर्जी नाम का सहारा ले रहे हैं ।
नरेश गुप्ता की यह कारस्तानी आज मल्टीपल के दूसरे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच ही नहीं, लायंस इंटरनेशनल के अन्य बड़े पदाधिकारियों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है । हर किसी के सामने यही सवाल पैदा हुआ है कि नरेश गुप्ता हर काम फर्जी-फर्जी तरीके से ही करेंगे क्या ? डिस्ट्रिक्ट 321 ए थ्री के लोगों के सामने सचमुच विरोधाभासी स्थितियाँ बनी हैं : एक तरफ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विजय शिरोहा ने उन्हें गौरवान्वित होने का अवसर उपलब्ध करवाया है; तो दूसरी तरह फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नरेश गुप्ता की कारस्तानी के कारण उन्हें शर्मसार होना पड़ रहा है ।