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Tuesday, June 13, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में बीएम सिंह के उम्मीदवार के रूप में खुद को प्रमोट करते हुए आरकेएस चौहान के मुकाबले उतरने की अनिल जायसवाल की कोशिशों ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के परिदृश्य को दिलचस्प बनाया

इलाहाबाद । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अनिल जायसवाल की उम्मीदवारी की चर्चा ने आरकेएस चौहान के लिए न सिर्फ गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है, बल्कि डिस्ट्रिक्ट के चुनावी परिदृश्य को भी दिलचस्प बना दिया है । अभी तक अगले लायन वर्ष में होने वाले सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव के लिए आरकेएस चौहान और अजय मेहरोत्रा के नाम चर्चा में थे, और माना जा रहा था कि अजय मेहरोत्रा अंततः अपनी उम्मीदवारी से पीछे हट जायेंगे और आरकेएस चौहान आराम से सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुन लिए जायेंगे । अजय मेहरोत्रा के बारे में लोग मानने और कहने लगे हैं कि यह कई बार उम्मीदवार के रूप में अपना नाम उछाल चुके हैं, लेकिन उम्मीदवारी की डगर पर आगे बढ़ते नहीं हैं - जिस कारण उनकी उम्मीदवारी को अब कोई गंभीरता से लेता नहीं है । इसीलिए उनकी उम्मीदवारी की चर्चा आरकेएस चौहान के लिए रक्षा-कवच का काम कर रही थी - लोग मान/समझ रहे थे कि अजय मेहरोत्रा कुछ दिन अपना नाम उछालते हुए चर्चा में बने रहेंगे, और फिर एक दिन वापस हो लेंगे; उसके बाद आरकेएस चौहान बिना चुनाव के सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन जायेंगे । लेकिन अचानक से सामने आई अनिल जायसवाल की उम्मीदवारी की चर्चा ने बन रहे उक्त माहौल को गड़बड़ा दिया है, जिसमें न सिर्फ आरकेएस चौहान के लिए मामला चुनौतीपूर्ण बन गया है - बल्कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का परिदृश्य भी बदल गया है ।
अनिल जायसवाल यूँ तो सभी गवर्नर्स के साथ अच्छे संबंध बना कर रहे हैं; पुष्पा स्वरूप के गवर्नर-काल में तो वह कैबिनेट सेक्रेटरी रहे थे, जिस कारण डिस्ट्रिक्ट के लोगों के साथ उनके निकट के संबंध बने थे - लेकिन उनके नजदीकियों को ही लगता है कि उम्मीदवार बनने का उचित समय उन्होंने खो दिया है । चार वर्ष पहले जब वह कैबिनेट सेक्रेटरी थे, उसके बाद यदि वह उम्मीदवार बनते - तो लोगों के बीच अपनी सक्रियता और अपने परिचय का फायदा उठा सकते थे; अब लेकिन बहुत देर हो चुकी है । जिन आरकेएस चौहान के साथ उनका चुनावी मुकाबला होने की उम्मीद की जा रही है, वह पिछले लायन वर्ष में प्रकाश अग्रवाल की डिस्ट्रिक्ट टीम में जोन चेयरमैन थे, और मौजूदा लायन वर्ष में अनिल तुलस्यान की डिस्ट्रिक्ट टीम में रीजन चेयरमैन हैं - इस नाते से लोगों के बीच उनका परिचय और उनकी सक्रियता नयी है । इसके अलावा, पिछले दो-तीन वर्षों में डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के समीकरण भी काफी बदल गए हैं - जिसके चलते अनिल जायसवाल ने अभी तक डिस्ट्रिक्ट में और लायनिज्म में जो 'कमाया' है, वह तो उनके काम नहीं आने वाला है; और इसीलिए सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनाव उनके लिए भी आसान नहीं होगा ।
अनिल जायसवाल के लिए एक समस्या और देखी/पहचानी जा रही है - उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट बीएम सिंह के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; लोगों का कहना है कि यह पहचान उन्होंने खुद ही बनाई है, उन्हें लगता है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के उम्मीदवार के रूप में चुनावी मुकाबले में उन्हें फायदा मिलेगा । बीएम सिंह ने लेकिन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रायः सभी नेताओं से अलग अलग कारणों से संबंध बिगाड़े हुए हैं; उनके चुनाव में उनकी उम्मीदवारी की खिलाफत करने वाले नेताओं से तो उनके संबंध बिगड़े हुए थे ही, जिन लोगों ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया था और उन्हें जितवाया था - उनसे भी वह इस कारण नाराज रहे हैं कि उन्होंने चुनाव में उनका बहुत पैसा खर्च करवा दिया । लोगों को लगता है कि बीएम सिंह दरअसल लायन राजनीति के ताने-बाने में अपने आप को फिट नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए वह अलग-थलग से दिखाई पड़ते हैं । ऐसे में, अनिल जायसवाल के लिए उनके भरोसे अपनी उम्मीदवारी को कामयाब बनाना/बनवाना आसान नहीं होगा । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में किसका पलड़ा भारी रहेगा, इस बारे में अभी से तो कुछ नहीं कहा जा सकता है - क्योंकि सारा खेल इस बात पर निर्भर होगा कि कौन उम्मीदवार अपने अभियान को कितनी दमदारी से संयोजित करता है; लेकिन बीएम सिंह के उम्मीदवार के रूप में खुद को प्रमोट करने की अनिल जायसवाल की कोशिशों के चलते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का खेल दिलचस्प जरूर हो उठा है ।

Tuesday, May 30, 2017

लायनिज्म के साथ-साथ मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 को कलंकित करने का जो काम तेजपाल खिल्लन और डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के हारे/फ्रस्ट्रेटेड लोगों के गाली-गलौच भरे हिंसक हंगामे ने किया है, उसकी भरपाई आसान नहीं होगी

नई दिल्ली । मल्टीपल कॉन्फ्रेंस में, अपने अपने डिस्ट्रिक्ट्स में हारे/ठुकराए नेताओं को साथ लेकर तेजपाल खिल्लन ने लायनिज्म को उसके सौवें वर्ष में ऐतिहासिक हंगामे और लफंगेपन की जो सौगात दी है - वह लायनिज्म के इतिहास में मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के माथे पर कलंक की तरह जड़ गई है । डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के जिन लोगों को पिछले दिनों संपन्न हुए डिस्ट्रिक्ट के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, उन्होंने अपनी हार की खीज को मिटाने के लिए - तेजपाल खिल्लन के नेतृत्व में इकट्ठे होकर पूरे मल्टीपल को बंधक बना लिया, जिसमें न सिर्फ गाली-गलौच और मार-पिटाई भरा हंगामा हुआ, बल्कि पुलिस कार्रवाई और अदालती कार्रवाई तक हुई । 25/30 लोगों की हंगामाई गुंडागर्दी के चलते होटल में ठहरे और आने वाले दूसरे नागरिकों को परेशानी हुई, और उन्होंने लायनिज्म के नाम पर हो रही लफंगई को सामने सामने देखा । होटल प्रबंधन ने साफ घोषणा की कि देश-विदेश में उनके पाँच सौ से ज्यादा होटल हैं - और वह सभी को सचेत कर रहे हैं कि वह अपने अपने यहाँ लायनिज्म की गतिविधियों के लिए कोई बुकिंग न करें । और यह सब हुआ सिर्फ इसलिए क्योंकि तेजपाल खिल्लन और उनके साथ जुटे लोगों को किसी भी कीमत पर जीत चाहिए थी - जब उन्हें जीत मिलती हुई नहीं दिखी, तो उन्होंने लायनिज्म के नाम पर जबर्दस्त कीचड़-उछाल कार्यक्रम को अंजाम दिया, जिसके लिए उन्होंने पहले से ही पूरी तैयारी की हुई थी ।
इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अपनी निश्चित पराजय को टालने के लिए तेजपाल खिल्लन की तरफ से अदालती मदद लेने की तैयारी की हुई थी, तो मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के चुनाव को जीतने के लिए उनकी तरफ से दोतरफा तैयारी थी - एक तरफ तो उन्होंने अपने वोटों की तगड़ी पहरेदारी की हुई थी, दूसरी तरफ उनके द्वारा अजय सिंघल और दीपक राज आनंद को खरीदने की कोशिशें की जा रही थीं । विनय गर्ग को चेयरमैन बनवाने के लिए तेजपाल खिल्लन की तरफ से पाँच वोटों का हालाँकि दावा तो किया जा रहा था; लेकिन आनंद साहनी, स्वर्ण सिंह खालसा और संदीप सहगल को लेकर वह आशंकित भी थे - इसलिए इनकी पहरेदारी करने के साथ साथ अजय सिंघल को बीस लाख तथा दीपक राज आनंद को पंद्रह लाख रुपए का ऑफर देकर खरीदने का प्रयास भी किया जा रहा था । तेजपाल खिल्लन को दीपक राज आनंद 'फँसते' हुए नजर भी आए और इसीलिए चुनाव से पिछली रात वह दीपक राज आनंद को एक-डेढ़ घंटे तक घेरे भी रहे । तेजपाल खिल्लन ने उन्हें समझाया कि तुम 'उस' तरफ की बजाए यदि 'इस' तरफ वोट दोगे, तो तुम पर कोई शक भी नहीं करेगा - हम बीएम सिंह को पहले ही इतना बदनाम कर चुके हैं कि हर कोई उन्हें ही धोखेबाज समझेगा । किसी भी कीमत पर विनय गर्ग को मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन चुनवाने/बनवाने में लगे तेजपाल खिल्लन को यह अंदाजा नहीं था कि विनय गर्ग की जीत पर मुसीबत दरअसल कहीं और से आने वाली है ।
मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए तगड़ी लामबंदी के साथ चुनाव की प्रक्रिया जब शुरू हुई - उम्मीदवारों और मतदाताओं के कागज/पत्तर की जब जाँच/पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि विनय गर्ग की उम्मीदवारी के प्रस्तावक और समर्थक के रूप में बीएम शर्मा और संदीप सहगल के क्लब के ड्यूज क्लियर नहीं हैं, और इसलिए वह इस चुनाव में वोट देने के अधिकारी ही नहीं हैं । यह सुन/जान कर विनय गर्ग और उनके साथियों के तो तोते उड़ गए - जिस जीत को वह बहुत आसान समझ रहे थे, वह उनके हाथ से फिसलती हुई दिख रही थी । विनय गर्ग और उनके गवर्नर इलेक्ट इंद्रजीत सिंह डिस्ट्रिक्ट के चुनाव में दोहरी हार का सामना कर चुके थे - डिस्ट्रिक्ट में भी उन्हें जीतने का पक्का भरोसा था, किंतु मिली उन्हें हार थी । मल्टीपल में भी यही हाल होता हुआ दिखा, तो फिर वह आपे से बाहर हो गए । उनकी जिद रही कि ड्यूज/फ्यूज के नियम पर ध्यान न दिया जाए और सभी को वोट देने का अधिकार मिले - यानि जल्दी से विनय गर्ग को विजेता घोषित किया जाए । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के दूसरे उम्मीदवार अनिल तुलस्यान और उनके समर्थकों ने लेकिन साफ कह दिया कि नियमों की अवहेलना करते हुए यदि चुनाव हुआ, तो वह चुनाव में शामिल नहीं होंगे और इस चुनाव को स्वीकार नहीं करेंगे । पर्ची डाल कर और या टॉस करके चुनाव कराने का विकल्प आया - विनय गर्ग और इंद्रजीत सिंह उसके लिए तैयार नहीं हुए । मौके पर मौजूद इंटरनेशनल डायरेक्टर विजय राजु तथा पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स से विचार-विमर्श हुआ, उन सभी का कहना रहा कि चुनाव में नियमों का तो सख्ती से पालन होना ही चाहिए । विनय गर्ग और इंद्रजीत सिंह ने लेकिन उनकी बात भी नहीं सुनी/मानी और वह अपनी जिद पर अड़े रहे । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की चुनावी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए शाम से शुरू हुई में मीटिंग में जब रात ग्यारह/बारह बजे तक यही जिद चलती रही, तो मीटिंग यह कहते हुए स्थगित की गई कि इस मामले में लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों से विचार करने के बाद इस चुनाव को संपन्न किया जाएगा ।
मीटिंग से निकल कर विनय गर्ग और इंद्रजीत सिंह ने तेजपाल खिल्लन को सारा किस्सा सुनाया; तेजपाल खिल्लन ने उन्हें अपने लोगों को इकट्ठा करने को कहा और करीब 25/30 लोगों को साथ लेकर, जिनमें ज्यादातर लोग डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के थे, वह नरेश अग्रवाल के कमरे की तरफ बढ़े और लोगों ने उनके कमरे का दरवाजा बुरी तरफ पीटते हुए उनके खिलाफ गालियाँ और भद्दे शब्द निकालते हुए तांडव शुरू कर दिया । नरेश अग्रवाल ने कमरे से बाहर आकर उनसे  बात करने की कोशिश की, लेकिन बात करने की बजाए वह लगातार नरेश अग्रवाल के खिलाफ भद्दे शब्दों का ही इस्तेमाल करते रहे । होटल स्टॉफ ने दूसरे नागरिकों को हो रही असुविधा का वास्ता देकर तेजपाल खिल्लन तथा उनके साथ के लोगों को रोकने की कोशिश की, लेकिन हंगामाईयों ने उनकी एक न सुनी । यह तमाशा रात करीब दो बजे का है। होटल स्टॉफ ने तब पुलिस बुला ली, और तब तेजपाल खिल्लन तथा उनके साथी तितर-बितर हुए । तेजपाल खिल्लन के साथ हंगामा करने/करवाने वालों में डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के पूर्व गवर्नर्स सुभाष बत्रा, चमन लाल गुप्ता, रमेश नांगिया, अजय गोयल तथा 'इनके' उम्मीदवार के रूप में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में पराजित हुए यशपाल अरोड़ा आगे आगे थे । रमेश नांगिया और चमनलाल गुप्ता डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एंडोर्समेंट लेना चाहते थे, लेकिन रमेश नांगिया तो खुद ही मैदान छोड़ गए थे और चमनलाल गुप्ता को जेपी सिंह के सामने पराजय का सामना करना पड़ा था । इससे समझा जा सकता है कि तेजपाल खिल्लन के साथ दरअसल वह लोग थे, जो अपने डिस्ट्रिक्ट में चुनावी मुकाबले में हार के शिकार हुए थे; और उस हार से पैदा हुई अपनी फ्रस्ट्रेशन से वह न सिर्फ मल्टीपल कॉन्फ्रेंस को खराब कर रहे थे, बल्कि लायनिज्म को भी कलंकित कर रहे थे । अगले दिन, नरेश अग्रवाल के भाषण के बीच में नरेश अग्रवाल के प्रति अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए व्यवधान डालने के काम भी चमनलाल गुप्ता के बेटे ने ही किया, जिसके बाद लोगों के बीच मार-पिटाई हो गई । चमनलाल गुप्ता के बेटे की कारस्तानी को जस्टीफाई करने के लिए तेजपाल खिल्लन और उनके साथियों का तर्क रहा कि नरेश अग्रवाल अपने भाषण में एकतरफा बातें कर रहे थे - यानि नरेश अग्रवाल अपने भाषण में क्या कहें, यह तेजपाल खिल्लन और उनके साथी तय करना चाहते हैं । नरेश अग्रवाल अपने भाषण में लोगों के सामने पिछली शाम/रात का पूरा घटना चक्र बता रहे थे, जिससे तेजपाल खिल्लन और डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के अपने डिस्ट्रिक्ट में हारे हुए लोगों की हरकतों की असलियत सामने आ रही थी, जिससे बौखलाकर चमनलाल गुप्ता के बेटे ने बीच भाषण में ही नरेश अग्रवाल के साथ बदतमीजी शुरू कर दी, और तेजपाल खिल्लन तथा उनके साथियों ने उसका बचाव किया ।
इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में अपनी पराजय को छिपाने के लिए तेजपाल खिल्लन ने अदालती कार्रवाई का सहारा लिया, और मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की चुनावी लड़ाई को जीतने के लिए लफंगई का । लायनिज्म के सौ वर्षों के इतिहास में हार से बचने के लिए ऐसा तमाशा इससे पहले कभी नहीं हुआ । इसीलिए तेजपाल खिल्लन और डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के हारे/फ्रस्ट्रेटेड लोगों के गाली-गलौच भरे हिंसक हंगामे ने मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 तथा लायनिज्म को कलंकित करने का जो काम किया है, उसकी भरपाई होना मुश्किल क्या - असंभव ही है ।

Saturday, May 13, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में तेजपाल खिल्लन के फजीहत का शिकार बनने की स्थिति ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के चुनाव में अनिल तुलस्यान का पलड़ा भारी किया

नई दिल्ली । तेजपाल खिल्लन की राजनीतिक दादागिरी को उनके ही डिस्ट्रिक्ट के एक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेसी वर्मा से ऐसी पटखनी मिलेगी कि तेजपाल खिल्लन के लिए मुँह छिपाना मुश्किल हो जायेगा - यह किसी ने नहीं सोचा था । जेसी वर्मा इस समय मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन हैं, जिन्होंने इंटरनेशनल डायरेक्टर के चुनाव के मामले में तेजपाल खिल्लन की राजनीति की हवा चुपके से ऐसी टाइट की है कि तेजपाल खिल्लन के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि फजीहत से वह बचें तो कैसे ? तेजपाल खिल्लन पिछले कुछ दिनों से वीएस कुकरेजा को इंटरनेशनल डायरेक्टर चुनवाने/बनवाने के अपने अभियान का गुब्बारा फुलाए हुए थे, लेकिन जेसी वर्मा ने सुई चुभा कर उनके गुब्बारे की सारी हवा निकाल दी है । दरअसल हुआ यह है वीएस कुकरेजा की तरफ से इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की उम्मीदवारी के लिए मल्टीपल को साठ दिन पहले नोटिस ऑफ इन्टेंशन नहीं मिला है, जिसके कारण इस वर्ष उनकी उम्मीदवारी मान्य नहीं रह जाती है । वीएस कुकरेजा वैसे तो अपने आप को बड़ा कानूनची समझते हैं, और मौकों पर यह जताने/बताने से भी नहीं चूकते हैं कि लायंस इंटरनेशनल के नियम उनसे ज्यादा कोई नहीं जानता है - पर अपने ही मामले में वह नियम का पालन न करने की बेवकूफी कर बैठे ।
कानूनची व्यक्ति के साथ एक दिक्कत और होती है, और वह यह कि वह अपनी बेवकूफी को स्वीकार नहीं करता है, और कानूनी दाँवपेंचों के सहारे अपनी बेवकूफी को सही साबित करने का प्रयास करता है । वीएस कुकरेजा ने भी यही किया । उन्होंने पाया कि मल्टीपल में जो नियम साठ दिन का है, वह  इंटरनेशनल में 45 दिन का है । इस नियम की आड़ में वीएस कुकरेजा ने अपनी बेवकूफी छिपाने की कोशिश करते हुए लायंस इंटरनेशनल में गुहार लगाई कि उनके द्वारा दिया गया 'नोटिस ऑफ इन्टेंशन' चूँकि 45 दिन वाली शर्त को पूरा करता है, इसलिए उनकी उम्मीदवारी मान्य की/करवाई जाए । लायंस इंटरनेशनल ने लेकिन उन्हें दो-टूक बता दिया है कि चुनाव इंटरनेशनल में नहीं होना है, मल्टीपल में होना है - इसलिए उनके मामले में मल्टीपल का नियम लागू होगा । दीपक तलवार की चेयरमैनी वाली नोमीनेटिंग कमेटी की चूँकि अभी तक मीटिंग नहीं हुई है, इसलिए वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी अभी रिजेक्ट तो नहीं हुई है - लेकिन 'नोटिस ऑफ इन्टेंशन' के मामले में नियम का पालन न होने के कारण वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी स्वीकार होने का कोई कारण नहीं दिख रहा है । वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी के पेपर ही रिजेक्ट हो जाने से होने वाली फजीहत से बचने के लिए तेजपाल खिल्लन सम्मानजनक ढंग से इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी पचड़े से बाहर निकलने के लिए कोई फार्मूला खोज रहे हैं, जिसके लिए दीपक तलवार भी उन्हें मौका दे रहे हैं - और इसीलिए नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग को वह टालते जा रहे हैं ।
तेजपाल खिल्लन के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि इस फजीहत से उन्हें बचाने में उनके  डिस्ट्रिक्ट के पूर्व गवर्नर्स जेसी वर्मा और राजीव मित्तल उनकी मदद कर सकते हैं - लेकिन तेजपाल खिल्लन इन दोनों की ही डिस्ट्रिक्ट में जिस तरह से बेइज्जती करते रहे हैं, उसके कारण इन दोनों को भी मौका मिला है कि यह तेजपाल खिल्लन को मजा चखाएँ । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में जेसी वर्मा चाहें तो वीएस कुकरेजा के 'नोटिस ऑफ इन्टेंशन' को साठ दिन पहले आया हुआ बता सकते हैं; लायन-राजनीति में इस तरह की 'बेईमानियाँ' आम बात है । नोमीनेटिंग कमेटी में को-चेयरमैन के रूप में राजीव मित्तल के पास भी मौका है कि वह वीएस कुकरेजा की उम्मीदवारी को मान्य करवा दें - खुद उनकी तरफ से लोगों के बीच कहा/सुना भी गया है कि इस वर्ष हो रहे इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में नियमों के मामले में लोचा ही लोचा है, इसलिए कई मामलों में नोमीनेटिंग कमेटी को नियमों की अनदेखी करनी ही पड़ेगी; ऐसे में, वीएस कुकरेजा के मामले में भी नियमों की अनदेखी की जा सकती है । किंतु वीएस कुकरेजा और तेजपाल खिल्लन ने अपने अपने रवैये और व्यवहार से जिस तरह लोगों को अपना विरोधी बनाया हुआ है, उसे देखते हुए उम्मीद कम ही है कि कोई भी उनके प्रति रियायत करना चाहेगा । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि अभी कुछ दिन पहले ही तेजपाल खिल्लन की ओछी किस्म की व्यूह-रचना के कारण ही ऐसी स्थिति बनी कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन होने के बावजूद जेसी वर्मा अपने ही डिस्ट्रिक्ट की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हो सके । जेसी वर्मा के नजदीकियों का कहना है कि जेसी वर्मा उस अपमान को भूले नहीं हैं, और अब जब उन्हें मौका मिला है तो वह तेजपाल खिल्लन की फजीहत करने का यह मौका छोड़ेंगे नहीं ।
तेजपाल खिल्लन को इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनावी मैदान में लड़ाई शुरू होने से पहले ही जो तगड़ा वाला झटका लगा है, उसे और विस्तार देने के लिए मल्टीपल के उनके विरोधी नेताओं ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के चुनाव में उन्हें पछाड़ने के लिए भी उनकी घेराबंदी शुरू कर दी है । तेजपाल खिल्लन के उम्मीदवार विनय गर्ग के मुकाबले मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के चुनाव में अनिल तुलस्यान के लिए समर्थन जुटाने के काम में मल्टीपल के कई नेता जिस तरह से सक्रिय हुए हैं, उसके कारण अनिल तुलस्यान का पलड़ा भारी होता हुआ नजर आ रहा है । दरअसल इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई में जेपी सिंह के एक पक्ष होने - और मजबूत व महत्त्वपूर्ण पक्ष होने के कारण मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के रूप में विनय गर्ग को एक बड़े खतरे के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है; इस कारण से विनय गर्ग के खिलाफ कई सेंटीमेंट्स इकट्ठा हो गए हैं : किन्हीं को शिकायत है कि विनय गर्ग बिलकुल भी सक्रिय नहीं रहते हैं और उन्हें उचित तवज्जो नहीं देते हैं; किन्हीं को इस बात से परेशानी है कि विनय गर्ग तो तेजपाल खिल्लन की कठपुतली बन कर ही रहेंगे; किन्हीं को डर है कि विनय गर्ग का तो एकमात्र एजेंडा जेपी सिंह और उनके समर्थकों के साथ बदला लेने का रहेगा; विनय गर्ग के प्रति यह सारी शिकायतें, परेशानियाँ और डर अनिल तुलस्यान के लिए जैसे वरदान बन कर आईं हैं । मजे की बात यह हुई है कि अलग अलग कारणों से लीडरशिप के लोग भी और लीडरशिप के विरोधी रहे लोग भी अनिल तुलस्यान की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के अभियान में लगे नजर आ रहे हैं । दरअसल अलग अलग कारणों से तेजपाल खिल्लन के विरोधियों को लग रहा है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव के मामले में तेजपाल खिल्लन जिस फजीहत का शिकार हो रहे हैं, उसे और विस्तार देने तथा पुख्ता करने के लिए मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के चुनाव में भी उन्हें पछाड़ना जरूरी है - और इसी बात ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के चुनाव में पलड़े को अनिल तुलस्यान की तरफ भारी बनाते हुए झुका दिया है ।

Monday, April 10, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विशाल सिन्हा मक्खनबाजी के जरिए लीडरशिप के नेताओं को खुश करने के चक्कर में नरेश अग्रवाल से लताड़ खाने के बाद, मल्टीपल काउंसिल में कोई भी पद पाने के लिए तेजपाल खिल्लन की शरण में आ गए हैं

लखनऊ । विशाल सिन्हा को नरेश अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, विनोद खन्ना, जगदीश गुलाटी की चमचागिरी करने पर नरेश अग्रवाल से सार्वजनिक रूप से जो लताड़ सुनने को मिली - और जिसके बाद विशाल सिन्हा ने तेजपाल खिल्लन का दामन पकड़ने की जो कोशिश की है, उसके चलते मल्टीपल काउंसिल की चुनावी राजनीति का परिदृश्य खासा रोचक हो उठा है । उल्लेखनीय है कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के पद के लिए मुख्य रूप से दो नाम चर्चा में हैं - डिस्ट्रिक्ट 321 ई के अनिल तुलस्यान और डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के विनय गर्ग । अनिल तुलस्यान को लीडरशिप के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है, जिसकी बागडोर विनोद खन्ना ने संभाली हुई है; जबकि विनय गर्ग को लीडरशिप से नहीं, बल्कि लीडरशिप के गुर्गे नेताओं से चिढ़ने वाले लोगों का समर्थन देखा/पहचाना जा रहा है - जिनकी बागडोर तेजपाल खिल्लन के हाथ में है । तेजपाल खिल्लन को लीडरशिप के नाम पर इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होने जा रहे नरेश अग्रवाल से समस्या नहीं है, उनको - खुद को नरेश अग्रवाल का प्रतिनिधि मानने/समझने वाले विनोद खन्ना से समस्या है । तेजपाल खिल्लन को विनोद खन्ना से इस हद तक समस्या है कि विनोद खन्ना के नजदीकी होने के 'अपराध' में उन्होंने अपने ही डिस्ट्रिक्ट के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर - पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर केएम गोयल और मौजूदा मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन जेसी वर्मा को डिस्ट्रिक्ट में बर्फ में लगाया हुआ है । मजे की बात यह है कि जेसी वर्मा को मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनवाने में तेजपाल खिल्लन की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी, किंतु जेसी वर्मा बाद में चूँकि विनोद खन्ना के नजदीक हो गए - जिसके नतीजे के रूप में जेसी वर्मा को तेजपाल खिल्लन के विरोध का इस हद तक सामना करना पड़ा कि अपने ही डिस्ट्रिक्ट की हाल ही में संपन्न हुई डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस से उन्हें दूर-दूर रहना पड़ा ।
इस पृष्ठभूमि में, मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन का चुनाव किन्हीं दो उम्मीदवारों के बीच नहीं - बल्कि वास्तव में विनोद खन्ना और तेजपाल खिल्लन के बीच है । विशाल सिन्हा ने लीडरशिप का दामन पकड़ा हुआ था । वह तरह तरह से नरेश अग्रवाल तथा अन्य पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर्स को खुश करने के अभियान में लगे हुए थे । हालाँकि खुद को नरेश अग्रवाल का प्रतिनिधि और प्रवक्ता समझने वाले विनोद खन्ना की दिलचस्पी उनकी बजाए पहले योगेश सोनी में और फिर अनिल तुलस्यान में होती दिखी, तो भी विशाल सिन्हा ने उम्मीद नहीं छोड़ी । उन्हें विश्वास रहा कि खुशामद करने वाले अपने गुण से वह विनोद खन्ना को राजी कर लेंगे । वैसे भी वह विनोद खन्ना के पक्के वाले चेले रहे हैं । विनोद खन्ना को भी उनसे कोई समस्या या शिकायत तो नहीं रही; लेकिन फिर भी विनोद खन्ना ने उन्हें उम्मीदवार के रूप में स्वीकार करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई तो इसका कारण यह रहा कि विनोद खन्ना ने पाया कि एक उम्मीदवार के रूप में विशाल सिन्हा के पास कुछ भी नहीं है - न अपने फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का समर्थन उनके पास है, और न वह उम्मीदवार के रूप में पैसे खर्च करने को तैयार हैं । मल्टीपल काउंसिल की पिछली दो मीटिंग्स में विनोद खन्ना ने विशाल सिन्हा को गिफ्ट बाँटने का सुझाव दिया था, लेकिन विशाल सिन्हा ने गिफ्ट बाँटने की बजाए गिफ्ट लेने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई । अब ऐसे 'फुकरे' उम्मीदवार का विनोद खन्ना भी क्या करते ? यूँ तो अनिल तुलस्यान के पास भी अपने फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का समर्थन नहीं है, लेकिन एक उम्मीदवार के रूप में वह पैसे खर्च करने के लिए तैयार हैं - लिहाजा विनोद खन्ना ने उनके नाम पर हरी झंडी दे दी ।
विशाल सिन्हा ने लेकिन तब भी उम्मीद नहीं छोड़ी और लीडरशिप के नेताओं की खुशामद में वह लगे रहे । उन्हें विश्वास रहा कि लीडरशिप के नेताओं की आरती कर कर के वह उन्हें अपनी उम्मीदवारी के लिए राजी कर लेंगे । लेकिन पिछले दिनों उनसे गड़बड़ यह हो गई कि लीडरशिप के नेताओं की उन्होंने कुछ ज्यादा ही आरती कर दी - जिस पर खुद नरेश अग्रवाल ही भड़क गए और उन्होंने विशाल सिन्हा को नसीहत दे डाली कि कुछ भी कहने से पहले सोच विचार लिया करो । हुआ दरअसल यह कि वर्ष 2022 की इंटरनेशनल कन्वेंशन के लिए दिल्ली को हरी झंडी मिली तो इस अवसर को विशाल सिन्हा ने लीडरशिप के नेताओं को मक्खन लगाने के अवसर के रूप में पहचाना । विशाल सिन्हा की एक बड़ी खूबी यह है कि चाहें मक्खन लगाने का काम करना हो, चाहें गालियाँ देनी हों - वह कंजूसी नहीं करते । उक्त मामले में भी यही हुआ - दिल्ली में इंटरनेशनल कन्वेंशन को हरी झंडी मिलने का श्रेय देने के जोश में विशाल सिन्हा ने सोशल मीडिया में लीडरशिप के नेताओं को कुछ ज्यादा ही मक्खन लगा दिया, जो नरेश अग्रवाल को हजम नहीं हुआ और उन्होंने सोशल मीडिया में ही विशाल सिन्हा को लताड़ लगा दी । विशाल सिन्हा के लिए नमाज़ पढ़ने के चलते रोज़े गले पड़ जाने वाला मामला हो गया । नरेश अग्रवाल के इस रवैए को देख कर विशाल सिन्हा ने समझ लिया कि लीडरशिप मल्टीपल चेयरमैन पद के लिए तो छोड़िए - किसी भी पद के लिए उनके नाम पर विचार नहीं करेगी । लिहाजा उन्होंने तुरंत पैंतरा बदला और वह तेजपाल खिल्लन की शरण में आ गए । विशाल सिन्हा को पता है कि तेजपाल खिल्लन किस बात से खुश होते हैं - सो, तेजपाल खिल्लन के डिस्ट्रिक्ट की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में पहुँच कर तेजपाल खिल्लन के सामने विनोद खन्ना को उन्होंने जी भर कर कोसा । जैसा कि पहले कहा जा चुका है कि न खुशामद करने में और न गालियाँ बकने में - विशाल सिन्हा कोई कंजूसी नहीं करते हैं ।
तेजपाल खिल्लन के सामने विनोद खन्ना को गालियाँ देना विशाल सिन्हा के कितना काम आएगा - यह तो बाद में पता चलेगा; क्योंकि तेजपाल खिल्लन के यहाँ अभी तो विनय गर्ग का पलड़ा भारी दिख रहा है । इसका सबसे जोरदार कारण तो यही है कि विनय गर्ग और विनोद खन्ना के बीच छत्तीस का रिश्ता है - तेजपाल खिल्लन आश्वस्त हैं कि विनय गर्ग उन्हें जेसी वर्मा की तरह से धोखा नहीं देंगे, और किसी भी कीमत पर विनोद खन्ना के साथ नहीं जायेंगे । इसके अलावा, विनय गर्ग अकेले ऐसे उम्मीदवार हैं जिन्हें अपने फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इंद्रजीत सिंह का पूरा और पक्का समर्थन है; साथ ही उम्मीदवार के रूप में विनय गर्ग पैसे खर्च करने के लिए भी तैयार हैं । समझा जाता है कि मल्टीपल की राजनीति में तेजपाल खिल्लन जो कुछ भी करना चाहते हैं - वह जिन भी नेताओं से खासतौर से निपटना चाहते हैं, उसमें मल्टीपल चेयरमैन के रूप में विनय गर्ग ही उनके लिए फिट रहेंगे । इस स्थिति को विशाल सिन्हा भी समझ रहे हैं । इसलिए उन्होंने यह तो समझ लिया है कि चेयरमैन पद के लिए तो उनकी दाल नहीं गल पाएगी - लेकिन फिर भी वह तेजपाल खिल्लन के सामने विनोद खन्ना को गालियाँ दे रहे हैं तो इस उम्मीद में कि इससे खुश होकर तेजपाल खिल्लन उन्हें मल्टीपल काउंसिल में कोई पद तो दिलवा ही देंगे । चमचागिरी के जरिए लीडरशिप के नेताओं को खुश करने की विशाल सिन्हा की चाल के उलटी पड़ने और नरेश अग्रवाल से लताड़ खाने के बाद उनके तेजपाल खिल्लन की शरण में आ जाने से मल्टीपल काउंसिल की चुनावी राजनीति में कुछ रौनक तो आ गई है । 


Thursday, February 23, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में जगदीश गुलाटी को सबक सिखाने की कुँवर बीएम सिंह की कोशिश में मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने की अनिल तुलस्यान की तैयारी फजीहत का शिकार होती नजर आ रही है

वाराणसी । अनिल तुलस्यान की मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने की तैयारी शुरू होते ही दम तोड़ती हुई नजर आ रही है, और अनिल तुलस्यान इसके लिए पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जगदीश गुलाटी तथा फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कुँवर बीएम सिंह को कोसते सुने जा रहे हैं । अनिल तुलस्यान अभी पिछले दिनों ही दो पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के साथ मल्टीपल के कुछेक बड़े नेताओं से उनके घर/शहर जा कर मिले थे, और उन्होंने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने की अपनी मंशा और अपनी रणनीति के बारे में उनसे बात की थी । अनिल तुलस्यान के नजदीकियों के अनुसार, मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद को लेकर अनिल तुलस्यान का रणनीतिक फंडा बड़ा क्लियर है - उनका मानना और कहना है कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने के लिए पाँच फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को 'खरीदना' है, बस ! अनिल तुलस्यान पाँच फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को खरीदने की कीमत देने के लिए तैयार हैं - मल्टीपल की लीडरशिप से वह बस इतनी मदद चाहते हैं कि यह 'खरीद' वह करवाएँ । अनिल तुलस्यान को डर है कि उन्होंने फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की यदि सीधे ही खरीद की, तो कहीं ऐसा न हो कि फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स उनसे पैसे भी ले लें - और फिर उन्हें वोट भी न दें; जैसा कि सहजीव रतन जैन के साथ हुआ था । उल्लेखनीय है कि तीन वर्ष पहले डिस्ट्रिक्ट 321 सी टू के तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सहजीव रतन जैन ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन की सीट पक्की करने के लिए तबके फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को महँगे 'गिफ्ट' दिए थे, लेकिन चुनाव के समय गिफ्ट लेने वाले फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स जब उन्हें धोखा देते दिखे - तो सहजीव रतन जैन ने उन सभी से अपने गिफ्ट वापस ले लिए थे । अनिल तुलस्यान का मानना/कहना है कि सहजीव रतन जैन के साथ धोखा इसलिए हुआ, क्योंकि उन्होंने लीडरशिप के नेताओं को 'सौदेबाजी' में शामिल नहीं किया था ।
अनिल तुलस्यान ने सहजीव रतन जैन वाली गलती से बचने के लिए पहले मल्टीपल की लीडरशिप से बात की । लीडरशिप से बात करना उन्हें इसलिए भी जरूरी लगा, क्योंकि लीडरशिप अभी मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए डिस्ट्रिक्ट 321 एफ के गवर्नर योगेश सोनी के समर्थन में 'सुनी' जा रही है । लीडरशिप को उन्हें यह समझाने की जरूरत महसूस हो रही थी कि योगेश सोनी के लिए फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स का समर्थन 'जुटाना' मुश्किल होगा - और यह 'काम' तो वही कर सकते हैं । लीडरशिप के साथ उनकी बात यूँ तो उत्साहवर्धक रही, लेकिन एक मामले में उनके लिए समस्या खड़ी हो गई । अनिल तुलस्यान के लिए फजीहत की बात यह रही कि मल्टीपल में हर किसी को यह पता है कि उनके अपने डिस्ट्रिक्ट का फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर उनके साथ नहीं है, इसलिए लीडरशिप ने उनसे कहा कि पहले अपने फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का समर्थन पक्का करो । अनिल तुलस्यान ने मल्टीपल के लोगों को तो यह कहते हुए टरकाया/निपटाया कि उनके फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का समर्थन उन्हें दिलवाने का काम जगदीश गुलाटी करेंगे; उन्होंने मल्टीपल के लोगों को आश्वस्त किया कि जगदीश गुलाटी का कहना कुँवर बीएम सिंह हरगिज नहीं टाल पायेंगे, और इस तरह उन्हें अपने डिस्ट्रिक्ट के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का समर्थन मिल ही जायेगा ।
कुँवर बीएम सिंह के समर्थन को लेकर अनिल तुलस्यान ने मल्टीपल के लोगों को तो जगदीश गुलाटी का नाम लेकर आश्वस्त कर दिया - किंतु वह खुद कुँवर बीएम सिंह के समर्थन को लेकर आश्वस्त नहीं हो सके हैं । कुँवर बीएम सिंह ने यह कहते हुए उनकी चिंता/परेशानी को और बढ़ा दिया है कि अनिल तुलस्यान ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की उम्मीदवारी को लेकर पहले कभी कोई बात ही नहीं की, इसलिए उन्होंने दूसरे संभावित उम्मीदवारों से कमिट कर लिया है - जिन्हें अब वह धोखा नहीं दे सकेंगे । अनिल तुलस्यान का कहना है कि यह तर्क कुँवर बीएम सिंह का सिर्फ एक बहाना है; वह उन्हें मल्टीपल के लोगों के बीच नीचा दिखाना चाहते हैं और उन्हें मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन नहीं बनने देना चाहते हैं - इसीलिए वह इस तरह की बहानेबाजी कर रहे हैं । कुँवर बीएम सिंह से भी ज्यादा नाराज अनिल तुलस्यान, जगदीश गुलाटी से हैं । अनिल तुलस्यान का कहना है कि जगदीश गुलाटी उन्हें पहले तो मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करते रहे और आश्वस्त करते रहे कि कुँवर बीएम सिंह के समर्थन को लेकर चिंता मत करो - उनका समर्थन 'मैं दिलवाऊँगा', किंतु अब जब समय और जरूरत आन पड़ी है, तो वह पीछे हटते नजर आ रहे हैं ।
जगदीश गुलाटी की समस्या दूसरी है - वह तो कुँवर बीएम सिंह को अनिल तुलस्यान के समर्थन के लिए राजी करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, समस्या वास्तव में यह है कि कुँवर बीएम सिंह उनकी बात मान नहीं रहे हैं । इलाहाबाद के प्रमुख लायंस सदस्यों का कहना/बताना है कि डिस्ट्रिक्ट में और मल्टीपल में कुँवर बीएम सिंह को भले ही जगदीश गुलाटी के 'आदमी' के रूप देखा/पहचाना जाता हो, लेकिन कुँवर बीएम सिंह उनसे खुश नहीं हैं । उनकी नाराजगी का कारण यह है कि उन्हें लगता है कि उन्हें सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का उम्मीदवार बनवा कर जगदीश गुलाटी ने अपना राजनीतिक उल्लू सीधा किया था, और उनका मोटा पैसा खर्च करवा दिया था । कुँवर बीएम सिंह को लगता है कि जगदीश गुलाटी की लड़ाई अशोक सिंह से थी, जिसमें जगदीश गुलाटी ने उन्हें मोहरा बनाया और इस्तेमाल किया । इलाहाबाद के प्रमुख लोगों का मानना और कहना है कि कुँवर बीएम सिंह को अनिल तुलस्यान से कोई ज्यादा शिकायत नहीं है; वह तो जगदीश गुलाटी की राजनीति को फेल करने के लिए अनिल तुलस्यान का समर्थन न करने की जिद पर अड़े हुए हैं । कुँवर बीएम सिंह को लगता है कि अनिल तुलस्यान मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद को लेकर कभी भी उत्सुक नहीं थे; जगदीश गुलाटी ने अपनी राजनीति के चक्कर में उन्हें उकसा कर उम्मीदवार बना/बनवा दिया है - और अब जगदीश गुलाटी उन्हें भी 'अपना' आदमी दिखा/जता कर अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करने की जुगाड़ में हैं । अनिल तुलस्यान को समर्थन न देकर कुँवर बीएम सिंह वास्तव में अनिल तुलस्यान को नहीं - बल्कि जगदीश गुलाटी को सबक सिखाना चाहते हैं ।
जगदीश गुलाटी से निपटने की कुँवर बीएम सिंह की इस कोशिश में अनिल तुलस्यान को लेकिन अपनी फजीहत होती नजर आ रही है ।

Monday, February 13, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में क्षितिज शर्मा की 'लुटने से बचने' की कोशिश सफल हो पायेगी, या अनिल तुलस्यान अपनी 'राजनीति' का खर्चा भी उनके सिर मढ़ देंगे

वाराणसी । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा के जरिए मसूरी में कमरे बुक करा लेने के बाद डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान ने विद्ययुत विहार में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की तारीखों का ऐलान करके क्षितिज शर्मा के साथ गठजोड़ करने का संकेत तो दे दिया है, लेकिन अनिल तुलस्यान के रवैये से क्षितिज शर्मा के परेशान और निराश होने की खबरें भी लोगों को सुनने को मिल रही हैं । कुछेक लोगों के बीच क्षितिज शर्मा ने कहा है कि उम्मीदवार होने के नाते वह 'लुटेंगे' नहीं, और डिस्ट्रिक्ट में यदि कोई यह समझ रहा है कि वह उम्मीदवार होने के नाते उनका आर्थिक दोहन कर लेगा - तो वह बहुत गलतफहमी में है । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों का कहना है कि क्षितिज शर्मा इस तरह की बातें कहने/करने वाले व्यक्ति नहीं हैं, वह बहुत दिल खोल कर काम करने वाले व्यक्ति हैं - लेकिन फिर भी वह इस तरह की बात कह रहे हैं तो इसका मतलब है कि अनिल तुलस्यान तथा डिस्ट्रिक्ट के सत्ता खेमे के नेताओं के रवैये से वह बुरी तरह आहत हुए हैं । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों के अनुसार, मसूरी में कमरे बुक कराने से पहले अनिल तुलस्यान ने क्षितिज शर्मा को कमरों का तथा लोगों के टिकट के खर्चे का अनुमान बताया था - जिसे चुकाने के लिए क्षितिज शर्मा ने अपनी सहमति दे दी थी; किंतु फिर अनिल तुलस्यान का मुँह जिस तरह से खुलता गया और उनकी माँग बढ़ती गई, उससे क्षितिज शर्मा को लगा कि उम्मीदवार के रूप में उन्हें जैसे लूटने की तैयारी हो रही है । इसी के बाद क्षितिज शर्मा को कहने के लिए मजबूर होना पड़ा कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में वह लुटेंगे नहीं !
क्षितिज शर्मा के नजदीकियों के अनुसार, दो मामलों में क्षितिज शर्मा उखड़े हुए हैं : एक मामला देहरादून रेलवे स्टेशन से मसूरी तक लोगों के आने-जाने का है, और दूसरा मामला डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में नाच-गाने तथा दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स से आने वाले अतिथियों के इंतजाम का है । क्षितिज शर्मा वाराणसी से और या अपने अपने शहरों से देहरादून जाने वाले लोगों का किराया खर्च करने के लिए तो तैयार हैं, लेकिन अनिल तुलस्यान ने उन्हें देहरादून से मसूरी तक ले जाने और फिर मसूरी से देहरादून वापस लाने के लिए कारों की व्यवस्था का खर्चा और बता दिया है । क्षितिज शर्मा इस काम के लिए बस बुक करना/कराना चाहते हैं, लेकिन अनिल तुलस्यान कारों की बात कर रहे हैं । दूसरा मामला इससे भी ज्यादा गंभीर है : अनिल तुलस्यान ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में डिस्ट्रिक्ट में एक नया अध्याय मनोरंजन का जोड़ा है; वह मनोरंजन प्रिय व्यक्ति हैं, और इस नाते से वह अपने कार्यक्रमों में नाच-गाने की खास व्यवस्था रखते हैं - कुछ लोगों का आरोप है कि इस व्यवस्था की आड़ में वह कुछ दूसरे गुल भी खिलाते हैं । यही व्यवस्था वह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में करना चाहते हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में वह मल्टीपल के दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स से आने वाले अतिथियों, खासतौर से फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के लिए विशेष इंतजाम करना चाहते हैं; समझा जाता है कि अनिल तुलस्यान मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की अपनी संभावित उम्मीदवारी के लिए अपनी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में अच्छा माहौल बनाना चाहते हैं ।
अनिल तुलस्यान डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में लगता है कि डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह में हुए नुकसान की पूरी भरपाई करना चाहते हैं । उल्लेखनीय है कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में भी व्यवस्था तो अच्छी की थी, लेकिन निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रकाश अग्रवाल के साथ की गई बदतमीजीपूर्ण हरकत के चलते उसमें जो बबाल हुआ - उससे मल्टीपल के दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के लोगों तक उनकी भारी फजीहत हुई थी । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की उम्मीद में अनिल तुलस्यान लेकिन अब बहुत सावधानी के साथ कदम बढ़ाना चाहते हैं । पिछले दिनों आयोजित हुई तीसरी कैबिनेट मीटिंग में उन्होंने प्रकाश अग्रवाल को जो तवज्जो दी, उससे भी लोगों को संकेत मिला है कि अब वह किसी को नाराज नहीं रखना/छोड़ना चाहते हैं । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जैसे वह अपने सारे 'पाप' धो लेना चाहते हैं । इसमें समस्या की बात लेकिन यह हो गई है कि इसकी 'कीमत' वह क्षितिज शर्मा से बसूलना चाहते हैं । क्षितिज शर्मा ने अपने नजदीकियों से रोना रोया है कि अनिल तुलस्यान डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में अपने राजनीतिक स्वार्थ में जो इंतजाम करना चाहते हैं, उसके खर्चे का बोझ भी वह उनके सिर पर मढ़ने का प्रयास कर रहे हैं - और इसीलिए क्षितिज शर्मा को कहने की जरूरत पड़ी है कि वह लुटेंगे नहीं ।
अनिल तुलस्यान और क्षितिज शर्मा के बीच 'लूटने' और 'लुटने से बचने' का जो खेल चल रहा है, वह वास्तव में सत्ता खेमे के नेताओं और क्षितिज शर्मा के बीच बने रहने वाले परस्पर अविश्वास का नतीजा भी है । क्षितिज शर्मा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने के लालच में सत्ता खेमे के नेताओं के नजदीक चले तो गए हैं, लेकिन सत्ता खेमे के नेताओं की हरकतें न उन्हें पहले पसंद थीं और न अब हैं; उधर सत्ता खेमे के नेताओं ने एक मालदार उम्मीदवार होने के नाते उन्हें 'स्वीकार' तो कर लिया है, लेकिन साथ-साथ वह यह भी अच्छी तरह समझ रहे हैं कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के बाद क्षितिज शर्मा उनके साथ रहेंगे नहीं । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अशोक सिंह के साथ क्षितिज शर्मा की नजदीकी सत्ता खेमे के नेताओं को और भी आशंकित कर रही है । उल्लेखनीय है कि अशोक सिंह के कारण ही क्षितिज शर्मा को पिछले वर्ष के प्रकाश अग्रवाल के गवर्नर-काल में रीजन चेयरमैन का पद मिला था । प्रकाश अग्रवाल किसी और को रीजन चेयरमैन बना रहे थे, लेकिन अशोक सिंह ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए दखल दिया और क्षितिज शर्मा को रीजन चेयरमैन बनवाया - जिसके कारण क्षितिज शर्मा की लायन-यात्रा तेजी से आगे बढ़ी । मौजूदा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रभात चतुर्वेदी तो घोषित रूप से अशोक सिंह के नजदीक हैं; ऐसे में सत्ता खेमे के नेताओं के सामने सवाल यह भी है कि क्षितिज शर्मा को सफल करवा कर कहीं वह अपने प्रतिद्धंद्धी अशोक सिंह को तो मजबूत नहीं बना रहे हैं ? सत्ता खेमे के नेताओं और क्षितिज शर्मा के बीच पल रहे इसी अविश्वास के बीच 'लूटने' और 'लुटने से बचने' का खेल खासा दिलचस्प हो गया है - और लोगों को लग रहा है कि विद्ययुत विहार में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान द्धारा कॉल निकालने के बाद डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का परिदृश्य अभी और करवट लेगा तथा चुनावी समीकरणों को प्रभावित करेगा ।

Tuesday, January 31, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में क्षितिज शर्मा पर भरोसा न करने के कारण ही, क्षितिज शर्मा के पूरी तरह समर्पण करने के बावजूद सत्ता खेमे के नेता सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए मुकेश पाठक को भी हवा दे रहे हैं

वाराणसी । डिस्ट्रिक्ट की तीसरी कैबिनेट मीटिंग में क्षितिज शर्मा को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान तथा उनके खेमे के बड़े नेताओं के 'निर्देश' के अनुसार जोश के साथ 'काम' करता देख लोगों को भारी आश्चर्य हुआ । आश्चर्य का कारण दरअसल यह रहा कि क्षितिज शर्मा लगातार यह कहते/बताते रहे हैं कि वह एक उम्मीदवार की सारी 'जिम्मेदारियों' का तो पालन करेंगे किंतु सत्ता खेमे के नेताओं के इशारे पर नहीं चलेंगे । लेकिन तीसरी कैबिनेट मीटिंग में क्षितिज शर्मा का रवैया पूरी तरह सत्ता खेमे के नेताओं के इशारों पर चलने जैसा था । क्षितिज शर्मा के नजदीकियों से ही मिली एक जानकारी का हवाला देते हुए कुछेक लोगों ने मीटिंग में क्षितिज शर्मा का मजाक भी बनाया । उनके नजदीकियों ने ही लोगों को बताया था कि क्षितिज शर्मा अपने स्टॉल पर शराब का कोई और ब्रांड रखवा रहे थे, लेकिन सत्ता खेमे के नेताओं ने उन पर दबाव बनाया कि उन्हें मीटिंग में लोगों को और अच्छे ब्रांड की शराब पिलवानी चाहिए । सत्ता खेमे के नेताओं की और अच्छे ब्रांड की शराब की माँग से क्षितिज शर्मा खुश तो नहीं थे, किंतु अंततः माँग मान लेने में ही उन्होंने अपनी भलाई देखी/पहचानी । क्षितिज शर्मा के कुछेक नजदीकी यह देख कर तो बुरी तरह चौंके कि सत्ता खेमे के जिन नेताओं की पहले वह बहुत बुराई किया करते थे, अब अचानक से उनकी बड़ी तारीफ करने लगे हैं । क्षितिज शर्मा के इस बदले बदले रवैये से उनके नजदीकियों ने तथा नजदीकियों से मिलने/सुनने वाली बातों से डिस्ट्रिक्ट के दूसरे लोगों ने भी समझ लिया है कि क्षितिज शर्मा ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए सत्ता खेमे के बदनाम व आलोच्य नेताओं के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है ।
मजे की बात लेकिन यह दिख रही है कि क्षितिज शर्मा के पूरी तरह समर्पण करने के बावजूद सत्ता खेमे के नेताओं के बीच क्षितिज शर्मा की उम्मीदवारी के प्रति समर्थन को लेकर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है । इसीलिए सत्ता खेमे के नेताओं की तरफ से मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को भी हवा दी जा रही है । तीसरी कैबिनेट मीटिंग में मुकेश पाठक द्धारा स्टॉल न लगाए जाने को लेकर सत्ता खेमे के ही एक नेता ने इन पँक्तियों के लेखक से कहा/बताया कि उन्होंने ही मुकेश पाठक को समझाया था कि इस तरह की बातों में नाहक ही पैसा क्यों बर्बाद करते हो, तुम अच्छे से जानते/समझते हो कि शराब पिला कर और गिफ्ट बाँटकर ही चुनाव नहीं जीते जाते हैं । सत्ता खेमे के नेताओं की राजनीति से परिचित कई लोगों को लगता है कि सत्ता खेमे के नेता क्षितिज शर्मा पर दबाव बनाए रखने के उद्देश्य से मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को हवा दे रहे हैं; मुकेश पाठक के नजदीकियों के अनुसार, उन्होंने मुकेश पाठक को समझाया है कि उक्त हवा 'लेते' रहो - हो सकता है कि आगे चल कर क्षितिज शर्मा की सत्ता खेमे के नेताओं से खटक जाए और तब मुकेश पाठक का काम बन जाए । डिस्ट्रिक्ट में यह कहने वाले लोगों की भी कमी तो नहीं ही है कि लगता है कि क्षितिज शर्मा ने मान लिया है कि लोगों को महँगी शराब पिला कर और गिफ्ट बाँटकर वह (सेकेंड वाइस) डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन जायेंगे । हालाँकि पिछले वर्षों में, कई बार ऐसा हुआ है जबकि यह हथकंडा अपनाने वालों की दाल नहीं गली है । गौर करने वाली बात यह भी है कि कई बार सत्ता खेमे के नेताओं ने ही लोगों को शराब और गिफ्ट तो किसी और उम्मीदवार से दिलवा दिए, और चुनाव लेकिन दूसरे उम्मीदवार को जितवा दिया । इन संदर्भों को ध्यान में रखते हुए सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को हवा देने की सत्ता खेमे के नेताओं की कार्रवाई ने क्षितिज शर्मा को डराया हुआ भी है ।
क्षितिज शर्मा और उनके नजदीकियों का यह डर इसलिए भी है क्योंकि सत्ता खेमे के नेता पहले प्रकाश टंडन को उम्मीदवार बनने के लिए तैयार कर रहे थे । पारिवारिक व्यस्तता के कारण जब उनके लिए उम्मीदवार बनना संभव नहीं हुआ, तब वह मुकेश पाठक की उम्मीदवारी के पीछे लगे । क्षितिज शर्मा और उनके नजदीकियों के लिए चिंता और परेशानी की बात यह है कि अब जब वह सत्ता खेमे के नेताओं के इशारे पर चलने और 'काम' करने के लिए तैयार हो गए हैं, तब फिर सत्ता खेमे के नेता मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को हवा देने में दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं ? सत्ता खेमे के नेताओं का कहना है कि वह क्षितिज शर्मा पर भरोसा नहीं कर सकते हैं; उन्हें लगता है कि क्षितिज शर्मा को जिस दिन अपनी 'जीत' का भरोसा हो गया, उसी दिन वह उनके हाथ से निकल जायेंगे और फिर उनकी नहीं सुनेंगे/मानेंगे । सत्ता खेमे के कुछेक नेता कुँवर बीएम सिंह के चुनाव में निभाई गई भूमिका के कारण भी क्षितिज शर्मा से खफा हैं । उक्त चुनाव में क्षितिज शर्मा ने प्रभात चतुर्वेदी का समर्थन किया था । कुँवर बीएम सिंह के साथी/समर्थक उस अनुभव को याद करते हुए कहते/बताते हैं कि क्षितिज शर्मा आसानी से तो उनका समर्थन प्राप्त नहीं कर पायेंगे । इस तरह की बातों से एक तरफ जहाँ सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को बल मिल रहा है, तो दूसरी तरफ सत्ता खेमे का समर्थन जुटाने में क्षितिज शर्मा की मुश्किलें बढ़ रही हैं ।
क्षितिज शर्मा के लिए परेशानी और चुनौती की बात यह भी है कि सत्ता खेमे के नेताओं के इशारे पर चलने के जरिए उनके साथ दोस्ती गाँठने की उनकी कोशिशें उन्हें 'अपने' लोगों से दूर करने का काम कर रही हैं । क्षितिज शर्मा अपने लोगों के बीच नैतिकता और आदर्श की बड़ी ऊँची ऊँची बातें करते रहे हैं, और लोगों को बताते रहे हैं कि एक उम्मीदवार से लोगों को जो जो 'अपेक्षाएँ' होती हैं, उन्हें पूरा करने से तो वह बिलकुल भी पीछे नहीं हटेंगे - लेकिन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के बदनाम नेताओं की 'नाजायज' माँगों के आगे वह बिलकुल भी नहीं झुकेंगे । अपनी इस तरह की बातों के जरिये क्षितिज शर्मा ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच अपनी अच्छी साख और पहचान बनाई है - लेकिन डिस्ट्रिक्ट की तीसरी कैबिनेट मीटिंग में लोगों ने उन्हें जब डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के उन्हीं बदनाम नेताओं के आगे-पीछे मँडराते देखा और शराब के ब्रांड पर उन्हीं की सलाह को मानते हुए 'सुना' तो उनकी साख और पहचान सवालों के घेरे में आती हुई नजर आई । क्षितिज शर्मा के लिए मुसीबत और चुनौती की बात यही है कि दो दिशाओं से आती कॉल्स को सुनने के लिए दो कान तो उनके पास हैं - लेकिन वह मानें किसकी, जिसमें कि वह अपनी साख और पहचान भी बचा सकें और अपनी जीत को भी सुनिश्चित कर सकें ।

Friday, January 27, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान के मुकुंद लाल टंडन के प्रति 'दुश्मनी' तथा क्षितिज शर्मा के प्रति 'दोस्ती' वाले रवैये ने लोगों को हैरान किया है

वाराणसी । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान की तरफ से हाल के दिनों में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मुकुंद लाल टंडन को डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच बदनाम करने तथा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा को अपनी तरफ करने के लिए जो प्रयास किए गए हैं, उन्हें देखने/जानने वाले डिस्ट्रिक्ट के लायंस सदस्यों को डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति एक नई करवट लेती दिख रही है । मुकुंद लाल टंडन को ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग करने या न करने के मामले में जिस तरह से बदनाम किया जा रहा है, वह अपने आप में खासा दिलचस्प मामला बन गया है - जो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अनिल तुलस्यान की कार्यप्रणाली की पोल खोलता है । मुकुंद लाल टंडन यूँ तो उसी 'गिरोह' के सदस्य हैं, जिसके प्रतिनिधि के रूप में अनिल तुलस्यान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर हैं - और इसी 'रिश्ते' से वह ऑनरेरी कमेटी के चेयरमैन बने हुए हैं; लेकिन फिर भी वह अनिल तुलस्यान की चालबाजियों का शिकार बनने से नहीं बच सके हैं । मजे की बात यह है कि अनिल तुलस्यान खुद ही तो ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग करने से बच रहे हैं, ताकि उन्हें अपनी कारस्तानियों को लेकर उठने वाले सवालों का सामना न करना पड़े; लेकिन इसका ठीकरा वह मुकुंद लाल टंडन के सिर यह आरोप लगाते हुए फोड़ रहे हैं कि मीटिंग के खर्चे से बचने के लिए मुकुंद लाल टंडन ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं ।
उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट में कैबिनेट मीटिंग से पहले ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग होने की एक गौरवशाली परंपरा बनी हुई है । पिछले कई वर्षों से इस परंपरा का निर्वाह होता रहा है, और चार नहीं तो तीन कैबिनेट मीटिंग से पहले तो ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग होती ही रही है । अनिल तुलस्यान दूसरी कैबिनेट मीटिंग से पहले ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग नहीं करवा सके थे; इसलिए उम्मीद की जा रही थी कि डिस्ट्रिक्ट की तीसरी कैबिनेट मीटिंग से पहले तो ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग अवश्य ही होगी । तीसरी कैबिनेट मीटिंग में अब सिर्फ दो दिन बचे हैं, लेकिन उससे पहले ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग होने को लेकर किसी को कोई जानकारी नहीं है । जिस किसी ने इसके बारे में अनिल तुलस्यान से पूछा, उसे यही जबाव सुनने को मिला कि ऑनरेरी कमेटी के चेयरमैन मुकुंद लाल टंडन मीटिंग करने को लेकर इच्छुक नहीं हैं । अनिल तुलस्यान पूछने वाले को यह बताने से भी नहीं चूक रहे हैं कि मुकुंद लाल टंडन ने ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग का खर्चा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा से करवाने का जुगाड़ बैठाने का प्रयास किया/करवाया था, जिसमें असफल रहने के बाद उन्होंने उक्त मीटिंग को लेकर बात करना ही छोड़ दिया । यहाँ यह याद करना प्रासंगिक होगा कि ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग का खर्चा करने की जिम्मेदारी कमेटी के चेयरमैन की होती है, और वही यह जिम्मेदारी निभाता है; चेयरमैन 'होशियार' होता है तो वह यह खर्चा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार से भी करवा लेता है । हालाँकि जो लोग मुकुंद लाल टंडन को जानते हैं, उन्हें अनिल तुलस्यान की इस बात पर भरोसा है नहीं कि मुकुंद लाल टंडन खर्चे से बचने की कोशिश करेंगे ।
अब पर्दे के पीछे की सच्चाई चाहे जो हो, पर्दे के सामने का सच यह है कि तीसरी कैबिनेट मीटिंग से पहले ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग होने को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है - और लोगों के लिए हैरानी की बात है कि ऑनरेरी कमेटी के चेयरमैन मुकुंद लाल टंडन उक्त मीटिंग को लेकर अनिल तुलस्यान पर निर्भर तथा उनके सामने मजबूर आखिर क्यों हैं ? अनिल तुलस्यान ने मुकुंद लाल टंडन को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच बदनाम करने के मामले में ही नहीं, बल्कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा को अपनी तरफ करने के प्रयासों के मामले में भी लोगों को हैरान किया हुआ है । लोगों के लिए हैरानी का कारण यह है कि जो अनिल तुलस्यान और लायनिज्म में उनके गुरू पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वीरेंद्र गोयल अभी कुछ दिन पहले तक सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए मुकेश पाठक को अपनी पसंद बताने का संकेत दे रहे थे - अब अचानक से क्षितिज शर्मा की उम्मीदवारी की तरफ झुकते हुए से क्यों दिख रहे हैं ? समझा जा रहा है कि अनिल तुलस्यान की डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के तथा अन्य खर्चों की पूर्ति के लिए क्षितिज शर्मा की जेब पर निगाह पड़ गई है और इसलिए उन्होंने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार क्षितिज शर्मा को पटाने का काम करना शुरू किया है ।
अनिल तुलस्यान की बातों से अब यह पोल भी खुल रही है कि पहले उनकी तरफ से मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को समर्थन देने के जो संकेत दिए जा रहे थे, उसके पीछे उनकी वास्तव में क्षितिज शर्मा को अपनी तरफ खींचने की चाल थी । यूँ तो क्षितिज शर्मा को वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी की तरफ होने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन चूँकि क्षितिज शर्मा ने पूरी तरह उनके कहे में चलने में दिलचस्पी नहीं ली है - इसलिए बात कभी बनती तो कभी बिगड़ती से रही है । क्षितिज शर्मा की तरफ से उन्हें बता दिया गया है कि वह जरूरी खर्चे करने के लिए तो तैयार हैं, लेकिन 'लुटने' के लिए तैयार नहीं हैं । क्षितिज शर्मा को पूरी तरह अपने कब्जे में लेने के लिए ही वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी ने मुकेश पाठक की उम्मीदवारी की बात करना और उन्हें अपने उम्मीदवार के रूप में 'दिखाने' का काम शुरू किया । वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी को लगा कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए क्षितिज शर्मा के अलावा चूँकि कोई और उम्मीदवार नहीं है, इसलिए क्षितिज शर्मा उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहे हैं । मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को हवा देकर उन्होंने वास्तव में क्षितिज शर्मा को संदेश देने की कोशिश की कि वह यदि पूरी तरह से उनके कहने में नहीं चले, तो फिर उन्हें कड़े चुनावी मुकाबले का सामना करना पड़ेगा । क्षितिज शर्मा ने चूँकि तब भी परवाह नहीं की, और वह वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी के सामने समर्पण के लिए तैयार नहीं हुए - तब अनिल तुलस्यान को डर हुआ कि ज्यादा लालच के चक्कर में कहीं ऐसा न हो कि वह घर/घाट कहीं के न रहें, सो उन्होंने क्षितिज शर्मा के प्रति अपने रवैये को थोड़ा लचीला बनाया है । इससे पहले लेकिन अनिल तुलस्यान तथा उनके साथियों ने जो किया, उससे मुकेश पाठक की उम्मीदवारी को भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण बना दिया है । इस कारण सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के संदर्भ में डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक समीकरण एक नई करवट लेते नजर आ रहे हैं ।

Tuesday, January 10, 2017

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के मुख्य सलाहकार डॉक्टर क्षितिज शर्मा को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने से रोकने के लिए मुकेश पाठक को आगे करने की वीरेंद्र गोयल एंड पार्टी की तैयारी सवालों के घेरे में

वाराणसी । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए डॉक्टर क्षितिज शर्मा की उम्मीदवारी में रोड़े अटकाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान तथा पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वीरेंद्र गोयल और उनके ग्रुप के दूसरे पूर्व गवर्नर्स ने जिस तरह की तैयारी शुरू की है, उसे देख/सुन कर डिस्ट्रिक्ट के लोग खासे हैरान हैं । क्षितिज शर्मा के खिलाफ मुकेश पाठक को उम्मीदवार बनाने की इनकी कोशिश ने तो खुद इनके ग्रुप के लायन सदस्यों को भी हैरान और निराश किया है । उल्लेखनीय है कि मुकेश पाठक पहले भी दो-तीन बार उम्मीदवार बन चुके हैं, लेकिन डिस्ट्रिक्ट के लोगों का समर्थन पाने में बुरी तरह असफल रहे हैं । मुकेश पाठक के क्लब - लायंस क्लब वाराणसी शिवगंगा में गिनती के सदस्य हैं; और वह भी ड्यूज जमा न होने के कारण सस्पेंड है और उस पर लायंस इंटरनेशनल के ड्यूज के करीब 60/70 हजार रुपए बकाया बताए/सुने जा रहे हैं । लोगों के बीच सवाल यही चर्चा में है कि जो मुकेश पाठक अपना क्लब तक नहीं चला पा रहे हैं, और लायंस इंटरनेशनल के ड्यूज तक चुकाने से बचते रहे हैं - वीरेंद्र गोयल एंड पार्टी उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर आखिर क्यों बनाना चाहती है ? खुद इनके नजदीकियों व साथियों का कहना है कि खेमेबाजी की राजनीति के चलते वीरेंद्र गोयल एंड पार्टी को अपना कोई उम्मीदवार यदि लाना ही है - तो पर्सनलिटी, कामकाज और ख्याति में कम से कम डॉक्टर क्षितिज शर्मा की टक्कर का तो लाएँ । लायनिज्म में मुकेश पाठक की सक्रियता से परिचित लोगों का भी मानना और कहना है कि मुकेश पाठक एक अच्छे कार्यकर्त्ता तो हो सकते हैं, पर लीडर बनने की क्षमता उनमें नहीं है - उनके अपने क्लब की हालत से भी यह स्पष्ट है । यह सब जानते बूझते हुए भी वीरेंद्र गोयल एंड पार्टी उन्हें डिस्ट्रिक्ट और डिस्ट्रिक्ट के सदस्यों पर जबर्दस्ती थोपने के लिए भला क्यों तत्पर है ?
डिस्ट्रिक्ट में जिन भी लोगों ने डॉक्टर क्षितिज शर्मा को जाना/पहचाना है, उन्होंने माना और कहा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में डॉक्टर क्षितिज शर्मा निश्चित ही एक बेहतर च्वाइस हैं; और उनके गवर्नर होने से डिस्ट्रिक्ट का मान/सम्मान शर्तिया रूप से बढ़ेगा ही । डॉक्टर क्षितिज शर्मा बच्चों के हृदय रोग के विशेषज्ञ और प्रतिष्ठित फिजिशियन हैं । मेडीकल की पढ़ाई उन्होंने बंगलौर व मणिपाल की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज और दिल्ली व चेन्नई के प्रमुख संस्थानों से की है । उनके पिता भी डॉक्टर थे और उनकी माँ व पत्नी भी डॉक्टर हैं - इस नाते से मेडीकल प्रोफेशन में उनका अच्छा नाम और सम्मान है । डॉक्टर क्षितिज शर्मा की सामाजिक सक्रियता भी खासी उल्लेखनीय रही है - लायनिज्म के साथ-साथ वह इंडियन मेडीकल एसोसिएशन तथा बच्चों के डॉक्टर्स की एसोसिएशन में भी सक्रिय तथा पदाधिकारी रहे हैं । लायनिज्म में उनकी सक्रियता तथा उपलब्धियों को खासी ऊँची पहचान मिली है - क्लब के प्रेसीडेंट, जोन चेयरमैन तथा रीजन चेयरमैन के रूप में उन्हें लायंस इंटरनेशनल के एक्सीलेंस अवॉर्ड तो मिले ही हैं; लायनिज्म के प्रति उनकी सोच तथा उनकी व्यापक संलग्नता को देखते हुए मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान ने उन्हें अपना - यानि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का मुख्य सलाहकार बनाया हुआ है । अब जो व्यक्ति डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का मुख्य सलाहकार बन/बनाया जा सकता है, वह यदि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनना चाहता है - तो उसकी राह में रोड़े अटकाने का भला क्या औचित्य हो सकता है ?
निस्संदेह मुकेश पाठक ने भी डिस्ट्रिक्ट में महत्त्वपूर्ण पदों पर काम किया है, और कुछेक लायन वर्षों में वह लोगों के बीच बहुत सक्रिय भी रहे हैं और एक अच्छे कार्यकर्त्ता होने का सुबूत देने में भी वह सफल रहे हैं । लेकिन, जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि, अपनी सक्रियता को वह 'राजनीतिक उपलब्धि' में बदल पाने में वह हमेशा ही असफल साबित हुए हैं । वह चूँकि कई बार गवर्नर पद की परीक्षा में बैठ चुके हैं, और हर बार बुरी तरह फेल हुए हैं - इससे साबित है कि डिस्ट्रिक्ट में लोग उन्हें गवर्नर के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं । लोगों के इतने स्पष्ट रवैये के बावजूद वीरेंद्र गोयल एंड पार्टी मुकेश पाठक को क्यों डिस्ट्रिक्ट पर जबर्दस्ती थोपना चाहती है - यह डिस्ट्रिक्ट के लोगों की समझ में नहीं आ रहा है ।
वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी के लोगों से ही यह भी सुनने को मिल रहा है कि मुकेश पाठक को चुनाव लड़वाने का खर्चा भी डिस्ट्रिक्ट के लोगों से ही बसूल किये जाने की तैयारी की जा रही है; और इस तैयारी के तहत डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान पर दबाव बनाया जा रहा है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के लिए रजिस्ट्रेशन फीस वह पिछले वर्षों के मुकाबले तिगुनी-चौगुनी बढ़ा कर बसूल करें । बढ़ी रजिस्ट्रेशन फीस से जो रकम इकट्ठा होगी, उससे मुकेश पाठक को एक बार फिर चुनाव लड़वाया जायेगा । मुकेश पाठक उम्मीदवार बनने के 'योग्य' हो सकें, इसके लिए पहले तो उनके क्लब के ड्यूज जमा करवा कर उनके क्लब को सस्पेंशन से बाहर निकलवाने की जरूरत है - और इस जरूरत को पूरा करने के लिए पैसे चाहिए होंगे; क्लब की स्थिति ऐसी है नहीं कि वह बकाया ड्यूज जमा करवा सके - होती, तो यह नौबत आती ही क्यों ? लिहाजा, अलग अलग तरीकों से लोगों से पैसे ऐंठ कर ही मुकेश पाठक के क्लब को 'जिंदा' करके उन्हें उम्मीदवार बनाने/बनवाने की तरकीबें लगाई/भिड़ाई जा रही हैं । इस स्थिति ने डिस्ट्रिक्ट में सभी को हैरान किया हुआ है - और वीरेंद्र गोयल एंड कंपनी की मंशा सवालों के घेरे में आ फँसी हैं ।

Thursday, October 27, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू में अपनी फजीहत का बदला लेने की तैयारी में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेपी सिंह ने इंद्रजीत सिंह को 'बागी' बना कर मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए विनय गर्ग की मुसीबत बढ़ाई

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय गर्ग को अपने ही डिस्ट्रिक्ट के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इंद्रजीत सिंह की सक्रियता में मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने की अपनी योजना और तैयारी खटाई में पड़ती नजर आ रही है । डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू में तथा मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में चर्चा सुनने को मिल रही है कि विनय गर्ग के पटाखे को फुस्स करने का काम जेपी सिंह ने किया है । विनय गर्ग के नजदीकियों के अनुसार, विनय गर्ग को दरअसल दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के लोगों से ही सुनने को मिला है कि इंद्रजीत सिंह अपने कलीग फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को सलाह दे रहे हैं कि उन्हें अभी मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए किसी भी उम्मीदवार से 'वायदा' नहीं कर लेना चाहिए और अभी 'देखो और इंतजार करो' की नीति का पालन करना चाहिए । मजे की बात है कि फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स से यही बात तेजपाल खिल्लन भी कहते फिर रहे हैं - जो हालाँकि हैं तो डिस्ट्रिक्ट 321 ए वन के सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, लेकिन वह खुद को मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के 'ख़ुदा' से कम नहीं समझते - और इसीलिए वह हर डिस्ट्रिक्ट में अपनी नाक या टाँग घुसाने की कोशिश करते रहते हैं । लोग उन्हें 'सत्ता' के यानि नरेश अग्रवाल एंड कंपनी के एक एजेंट के रूप में देखते हैं । विनय गर्ग ने तेजपाल खिल्लन की बातों की तो परवाह नहीं की; उनका कहना रहा कि उनकी पहुँच जब सीधी नरेश अग्रवाल तक है, तब उन्हें तेजपाल खिल्लन की बातों की परवाह करने की जरूरत क्या है ? लेकिन इंद्रजीत सिंह को भी तेजपाल खिल्लन की 'भाषा' बोलते सुन कर विनय गर्ग का माथा ठनका है और मल्टीपल चेयरमैन बनने की अपनी योजना और तैयारी उन्हें मुसीबत में पड़ती दिख रही है ।
इंद्रजीत सिंह के रवैये में दरअसल अगले लायन वर्ष में खुद मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने की महत्त्वाकाँक्षा को देखा/पहचाना जा रहा है । मल्टीपल के विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की जिस तरह की सक्रियताएँ हैं, उनमें उनकी इच्छाओं को पढ़ने/देखने वालों का मानना और कहना है कि इंद्रजीत सिंह अगले लायन वर्ष में सिर्फ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की ही नहीं, बल्कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने की भी तैयारी कर रहे हैं । उनके नजदीकियों का कहना है कि उनमें मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन का बीज जेपी सिंह ने रोपा है, जो सत्ता के यानि नरेश अग्रवाल एंड कंपनी के एक दूसरे एजेंट के रूप में देखे/पहचाने जाते हैं । जेपी सिंह ने जो बीज रोपा है, वह अच्छी तरह से खिल सके और उसकी जड़ें मजबूत हों - इसके लिए जेपी सिंह ने 'सिंचाई' की पक्की व्यवस्था की और इंद्रजीत सिंह को समझाया कि विनय गर्ग यदि इस वर्ष मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बन गए, तो फिर अगले वर्ष मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने का सपना देखना बंद ही कर दो - क्योंकि हर वर्ष एक ही डिस्ट्रिक्ट से चेयरमैन थोड़े ही बनेगा । समझा जाता है कि जेपी सिंह से राजनीति का यह महत्त्वपूर्ण पाठ सीख कर ही इंद्रजीत सिंह ने तेजपाल खिल्लन वाली लाइन पकड़ ली है । इसका नतीजा यह हुआ कि दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स में समर्थन के लिए जुगाड़ लगाने वाले विनय गर्ग को सुनने को मिल रहा है कि पहले अपने डिस्ट्रिक्ट में अपने फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का समर्थन तो पक्का करो ।
विनय गर्ग के पटाखे को फुस्स करने की योजना को क्रियान्वित करने के जरिए जेपी सिंह ने वास्तव में एक तीर से दो शिकार करने की चाल चली है : इससे, एक तरफ तो उन्हें विनय गर्ग से बदला लेने का मौका मिला है, और दूसरी तरफ इससे उन्हें इंद्रजीत सिंह को पुनः अपने नजदीक लाने का अवसर मिला है । जेपी सिंह को पिछले लायन वर्ष में अपने ही डिस्ट्रिक्ट में जिस भारी फजीहत का सामना करना पड़ा था, उसके लिए जिम्मेदार 'आरोपियों' की उनके द्धारा बनाई गई सूची में विनय गर्ग का नाम भी है; जेपी सिंह को विनय गर्ग से बदला लेने का चूँकि अच्छा मौका मिल रहा है, इसलिए वह इस मौके को चूकना नहीं चाहते हैं । इस मौके में उन्हें इंद्रजीत सिंह को पुनः अपने नजदीक लाने का जो अवसर दिखाई दे रहा है, उसके चलते तो उक्त मौका उनके लिए दोहरे फायदे का सबब बना है । उल्लेखनीय है कि इंद्रजीत सिंह पहले जेपी सिंह के 'आदमी' के रूप में ही देखे/पहचाने जाते थे; किंतु कुछ जेपी सिंह की हरकतों के चलते और कुछ डिस्ट्रिक्ट की राजनीति में जेपी सिंह को कमजोर पड़ता देख कर इंद्रजीत सिंह ने उनके 'आदमी' का तमगा उतार फेंका था । जेपी सिंह को विश्वास है कि अब जब वह इंद्रजीत सिंह को अगले लायन वर्ष में मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनवाने का जिम्मा संभालेंगे, तो इंद्रजीत सिंह उनके 'आदमी' वाली टोपी फिर से पहन लेंगे ।
जेपी सिंह ने इंद्रजीत सिंह को 'बागी' बना कर मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने की विनय गर्ग की योजना व तैयारी को झटका तो जोर का दिया है, लेकिन विनय गर्ग ने उम्मीद अभी पूरी तरह से छोड़ी नहीं है । मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए डिस्ट्रिक्ट 321 ई के अनिल तुलस्यान व डिस्ट्रिक्ट 321 एफ के योगेश सोनी के साथ उनका मुकाबला होने की जो उम्मीद की जा रही है, उनके फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपने साथ करने के उन्होंने गंभीर प्रयास किए हैं । विनय गर्ग के नजदीकियों का कहना है कि जिस 'राजनीति' के तहत इंद्रजीत सिंह को विनय गर्ग के खिलाफ कर दिया गया है, उसी 'राजनीति' का इस्तेमाल करते हुए विनय गर्ग ने डिस्ट्रिक्ट 321 सी वन के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अजय सिंघल के साथ तार जोड़ने का प्रयास किया है । दरअसल अजय सिंघल भी अगले लायन वर्ष में मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन बनने के इच्छुक बताए/देखे जा रहे हैं, और उनका मुकाबला इंद्रजीत सिंह से होना माना जा रहा है । ऐसे में, अजय सिंघल को समझाया जा रहा है कि वह इस वर्ष यदि विनय गर्ग को मल्टीपल चेयरमैन बनवाते हैं - तो अगले वर्ष में उनका 'काम' तो अपने आप आसान हो जायेगा ।
मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद को लेकर बनते/बिगड़ते समीकरणों के बीच सत्ताधारी नेताओं - यानि नरेश अग्रवाल और उनके सहारे लायनिज्म में कुछ पा लेने की कोशिशों में लगे बड़े नेताओं का रवैया चूँकि अभी स्पष्ट नहीं है; इसलिए मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की राजनीति का ऊँठ किस करवट बैठेगा, इस बारे में अभी कोई पक्का अनुमान लगाना संभव नहीं है । लेकिन जेपी सिंह की शह पर इंद्रजीत सिंह ने जो तेवर दिखाना शुरू किया है, उसके कारण विनय गर्ग के लिए मामला खासा मुश्किल जरूर हो गया है ।

Wednesday, October 19, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान को अपनी दूसरी कैबिनेट मीटिंग में ही जो तगड़ा वाला झटका लगा है, उससे वह सबक लेंगे क्या ?

वाराणसी । प्रकाश मिश्र के बाद राधे मारवाह के हाथों डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान की जो फजीहत हुई, उसका सीधा असर डिस्ट्रिक्ट की दूसरी कैबिनेट मीटिंग पर पड़ा - जिसका अधिकतर कैबिनेट सदस्यों ने बहिष्कार किया । कैबिनेट सदस्यों ने ही नहीं, पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने भी डिस्ट्रिक्ट की दूसरी कैबिनेट मीटिंग से अपनी दूरी बनाई/दिखाई । फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कुँवर बीएम सिंह ने भी कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने की जरूरत नहीं समझी, और सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रभात चतुर्वेदी कैबिनेट मीटिंग में शामिल तो हुए, लेकिन बड़े बेमन से हुए - और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आयोजन के दौरान बड़े उखड़े उखड़े से रहे । उल्लेखनीय है कि अनिल तुलस्यान ने 600/650 सदस्यों की तो भारी भरकम कैबिनेट बनाई हुई है; 250 के करीब पीएसटी होते हैं - लेकिन सिंगरौली के ऑफीसर्स क्लब में आयोजित हुई डिस्ट्रिक्ट की दूसरी कैबिनेट मीटिंग में मुश्किल से सवा सौ लोग ही जुटे, और मीटिंग-स्थल की ज्यादातर कुर्सियाँ खाली ही पड़ी रह गईं । जो लोग मीटिंग में थे भी, उनमें भी बहुतायत आसपास के क्लब्स के लोगों की थी । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स में वीरेंद्र गोयल और निधि कुमार भी - शायद स्थानीय होने के नाते ही मीटिंग में शक्ल दिखाने पहुँचे । जो लोग पिछले लायन वर्ष में भी डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट में थे, और कैबिनेट मीटिंग्स में शामिल होते रहे थे - उन्होंने तुलनात्मक अध्ययन करते हुए बताया कि निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रकाश जी अग्रवाल की चारों कैबिनेट मीटिंग्स उपस्थिति के लिहाज से भी और व्यापक सक्रियता के लिहाज से भी बेहतरीन रही थीं; और उनके मुकाबले मौजूदा लायन वर्ष में अनिल तुलस्यान की दूसरी कैबिनेट मीटिंग ही बुरी तरह पिट गई और फ्लॉप रही ।
डिस्ट्रिक्ट की दूसरी कैबिनेट मीटिंग में अनिल तुलस्यान को डिस्ट्रिक्ट के आम और खास - दोनों तरह के लोगों से जो झटका लगा है, उसके लिए अनिल तुलस्यान के व्यवहार और रवैये को ही जिम्मेदार बताया/ठहराया जा रहा है । लोगों की तरफ से, विशेष कर डिस्ट्रिक्ट के 'खास' लोगों की तरफ से एक आम शिकायत यह रही कि अनिल तुलस्यान ने उन्हें उचित सम्मान के साथ मीटिंग के लिए आमंत्रित ही नहीं किया । इस मामले में बेचारे पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जगदीश गुलाटी के साथ तो बहुत ही बुरी बीती । अनिल तुलस्यान ने उन्हें मीटिंग में उदबोधन देने के लिए राजी कर लिया था । उसी दिन हालाँकि जगदीश गुलाटी के क्लब का भी इलाहबाद में एक कार्यक्रम था, लेकिन फिर भी जगदीश गुलाटी ने अपने क्लब के कार्यक्रम की बजाए डिस्ट्रिक्ट की कैबिनेट मीटिंग को प्रमुखता दी, और अनिल तुलस्यान के निमंत्रण पर अपनी सहमति प्रकट कर दी थी । जगदीश गुलाटी लेकिन यह देख कर हैरान रह गए कि सहमति मिलने के बाद अनिल तुलस्यान ने फिर उनसे न तो कोई बात की, और न मीटिंग को लेकर सलाह/विचार किया । जगदीश गुलाटी मीटिंग में देने वाले उदबोधन का मैटर ड्राफ्ट भी कर चुके थे, लेकिन अनिल तुलस्यान के उपेक्षापूर्ण रवैये से खुद को अपमानित महसूस करते हुए जगदीश गुलाटी ने ऐन मौके पर कैबिनेट मीटिंग में जाने का विचार त्याग दिया । अन्य कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स तथा अन्य प्रमुख लोगों की भी शिकायत रही कि अनिल तुलस्यान ने उन्हें चूँकि उचित तरीके से मीटिंग के लिए निमंत्रित नहीं किया, इसलिए उन्होंने मीटिंग से दूर रहने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी ।
डिस्ट्रिक्ट की इलाहबाद में हुई पहली कैबिनेट मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अनिल तुलस्यान ने कैबिनेट के कई प्रमुख पदाधिकारियों के साथ चूँकि बहुत ही बदतमीजीपूर्ण व्यवहार किया था, और धौंसभरी बातों से उन्हें बुरी तरह अपमानित व जलील किया था - इसलिए कैबिनेट के तमाम प्रमुख पदाधिकारियों ने दूसरी कैबिनेट मीटिंग से दूर रहने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी । लायंस इंटरनेशनल के जो प्रमुख प्रोग्राम व प्रोजेक्ट्स हैं, उनसे जुड़े पदाधिकारी ही जब कैबिनेट मीटिंग में नहीं पहुँचे - तो समझा जा सकता है कि कैबिनेट मीटिंग में फिर क्या काम हुआ होगा ? जाहिर तौर पर कैबिनेट मीटिंग सिर्फ एक औपचारिकता भर बन कर रह गई । डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ लायन सदस्यों का कहना है कि गवर्नरी के चौथे महीने में ही अनिल तुलस्यान की लोगों के बीच जैसी बुरी गत बन गई है, वैसा तो डिस्ट्रिक्ट में इससे पहले किसी भी गवर्नर के साथ नहीं हुआ । मजे की बात यह है कि इस स्थिति के लिए खुद अनिल तुलस्यान को ही जिम्मेदार ठहराया/बताया जा रहा है । आरोप है कि अनिल तुलस्यान अपने आप को लोगों पर जबर्दस्ती थोपते हैं, और अपनी बातें मनवाने के लिए लोगों पर दबाव बनाते/बढ़ाते हैं - लेकिन जब कोई उन्हें उनके दबाव में आने से बचने का प्रयास करता नज़र आता है, तो वह उस पर भड़क उठते हैं तथा उसे अपमानित करने का प्रयास करते हैं । अपने इस रवैये से अनिल तुलस्यान ने डिस्ट्रिक्ट में तमाम लोगों को अपने खिलाफ कर लिया है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अनिल तुलस्यान के इस रवैये के पहले शिकार उनके अपने क्लब के निवर्तमान अध्यक्ष प्रकाश मिश्र बने । उल्लेखनीय है कि प्रकाश मिश्र के साथ उनके वर्षों से अच्छे संबंध रहे हैं; दोनों एक ही क्लब में थे - अनिल तुलस्यान के चुनाव में प्रकाश मिश्र ने तन-मन के साथ-साथ धन से भी सहयोग किया था । प्रकाश मिश्र वाराणसी के जाने-माने पंडित हैं, और इस नाते शहर के लोगों के बीच उनकी अच्छी व प्रभावी पहचान तथा प्रतिष्ठा है । उनकी पहचान व प्रतिष्ठा का अनिल तुलस्यान ने अपने चुनाव में जमकर फायदा उठाया । अनिल तुलस्यान के चुनाव में प्रकाश मिश्र की जो महत्त्वपूर्ण भूमिका रही, उसने दोनों के बीच के संबंधों को और प्रगाढ़ बनाया । इसी प्रगाढ़ता का नतीजा रहा कि पिछले लायन वर्ष में अनिल तुलस्यान ने अपने कुछेक साथियों के साथ मिलकर जब नया क्लब बनाया तो प्रकाश मिश्र भी उनके साथ पुराना क्लब छोड़ कर नए क्लब में आए - प्रकाश मिश्र बल्कि नए क्लब के चार्टर प्रेसीडेंट बने । सिर्फ इतना ही नहीं, अनिल तुलस्यान ने अपनी कैबिनेट बनाई तो उन्होंने प्रकाश मिश्र को जोन चेयरमैन बनाया । एक तरफ तो यह हो रहा था, इसके साथ-साथ दूसरी तरफ लेकिन गवर्नरी की कुर्सी की तरफ बढ़ते हुए अनिल तुलस्यान के दिमाग में 'गर्मी' भी पैदा होने लगी थी - और इस गर्मी के कारण उन्होंने लोगों के साथ बदतमीजियाँ भी करना शुरू कर दिया था । लोगों के लिए हैरानी की बात यह रही कि उनकी गवर्नरी की 'गर्मी' का पहला शिकार प्रकाश मिश्र ही बने । गवर्नरी के दूसरे महीने में ही प्रकाश मिश्र के साथ उनके संबंध इतने विवादपूर्ण हो गए कि उन्होंने प्रकाश मिश्र को जोन चेयरमैन पद से ही हटा दिया । प्रकाश मिश्र का गुनाह सिर्फ इतना रहा कि उन्होंने अनिल तुलस्यान की बदतमीजियों को बर्दाश्त करने से इंकार किया । प्रकाश मिश्र ही नहीं, अभी पिछले दिनों ही अनिल तुलस्यान ने डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ सदस्य राधे मारवाह तक के साथ सार्वजनिक रूप से तू तू मैं मैं की । राधे मारवाह का गुस्सा अभी तक भी शांत नहीं हुआ है, जिसकी अभिव्यक्ति के रूप में दूसरी कैबिनेट मीटिंग में लोगों की कम उपस्थिति पर सोशल मीडिया में उनके द्धारा ली गई चुटकी को देखा/पढ़ा गया ।
डिस्ट्रिक्ट की दूसरी कैबिनेट मीटिंग में ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुलस्यान को डिस्ट्रिक्ट के आम और खास लोगों की तरफ से जो तगड़ा वाला झटका लगा है, वह अनिल तुलस्यान के लिए सबक भी है, और चुनौती भी है - देखना दिलचस्प होगा कि इससे सबक लेते हुए उनके रवैये व व्यवहार में कोई फर्क पड़ेगा या फिर वह अपनी और फजीहत करवायेंगे ?

Saturday, September 3, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 एफ में अधिष्ठापन समारोह के प्रभावी तरीके से हो जाने के कारण योगेश सोनी की बनी धाक ने मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की चुनावी लड़ाई में विनय गर्ग और अनिल तुल्सियान के सामने मुश्किल खड़ी की

लुधियाना । डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह में जिस तरह से लायंस पदाधिकारियों तथा आम सदस्यों की भीड़ जुटी और समारोह में उपस्थित हुए लोगों ने समारोह की व्यवस्था की जैसी भूरि भूरि प्रशंसा की - उसके चलते डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में योगेश सोनी को अपने डिस्ट्रिक्ट में भी और दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के लोगों से भी काफी तारीफ सुनने को मिली है । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 के विभिन्न डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारियों के बीच तथा उनके जरिए योगेश सोनी को मिल रही इस तारीफ ने लेकिन मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की चुनावी लड़ाई की अभी तक दबी-छुपी सी सुलग रही आग को भड़काने का काम किया है । डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह को गरिमापूर्ण तथा प्रभावी तरीके से संपन्न कर लेने के कारण योगेश सोनी को मल्टीपल के प्रमुख लोगों के बीच जो तारीफ मिल रही है, उसके कारण मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए उनके 'भाव' अचानक से बढ़े हुए 'दिखने' लगे हैं । यह सीन 'बनने' का कारण दरअसल यह रहा कि मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए अन्य जिन दो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर - विनय गर्ग और अनिल तुल्सियान का नाम सुना जा रहा है, उन दोनों को अपने अपने डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह के कारण भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है । उल्लेखनीय है कि लायनिज्म में डिस्ट्रिक्ट का अधिष्ठापन समारोह पहला ऐसा कार्यक्रम होता है, जिसमें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की लीडरशिप क्वालिटी और संगठन क्षमता की परीक्षा होती है; ऐसे में डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह की सफलता/असफलता से ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की 'काबिलियत' का संकेत मिलता है । काबिलियत दिखाने के इस मौके का 'वह' डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अच्छे से फायदा उठाते हैं, जो मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की दौड़ में अपने आप को 'दिखाना' चाहते हैं । मौजूद लायन वर्ष में मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद के लिए अभी तक विनय गर्ग, अनिल तुल्सियान और योगेश सोनी के नाम चर्चा में हैं - इसलिए मल्टीपल के लोगों की इनके डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोहों पर खास निगाह रही है ।
डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय गर्ग के लिए मुसीबत की बात यह हुई कि उनके डिस्ट्रिक्ट का अधिष्ठापन समारोह - होने से पहले ही विवादों व आरोपों के घेरे में फँस गया । विनय गर्ग के नजदीकियों का ही कहना है कि डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह को दुबई में करने का फैसला करके विनय गर्ग ने खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली । दुबई में अधिष्ठापन समारोह की तैयारी करने के कारण विनय गर्ग को लायनिज्म में अधिष्ठापन समारोह के महत्त्व तथा उसके बुनियादी उद्देश्य की ही ऐसीतैसी करने के आरोप का सामना करना पड़ा । दुबई के तुलनात्मक रूप से महँगे दिखने वाले पैकेज के कारण उन पर पैसे बनाने के आरोप लगे; कोढ़ में खाज वाली बात यह हुई कि दुबई की बुकिंग के लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन पर सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार यशपाल अरोड़ा सहित अन्य कुछेक लोगों पर दबाव बनाने के आरोप लगे । इतने गंभीर आरोपों के चलते पैदा हुए विवाद में डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह को लेकर बनने वाला उत्साह ख़त्म सा ही हो गया है, और उसमें अब सिर्फ तमाशेबाजों की तथा लायनिज्म को तफ़रीह का अड्डा समझने वालों की ही दिलचस्पी बची रह गई नजर आ रही है । डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम की इस फजीहत के लिए विनय गर्ग को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है । उनके नजदीकियों का ही मानना और कहना है कि विनय गर्ग लायनिज्म जैसे महत्त्वपूर्ण अभियान को जिस हल्केपन से ले रहे हैं, उसका ही नतीजा है कि उनके डिस्ट्रिक्ट का अधिष्ठापन समारोह सबसे ज्यादा महँगा/खर्चीला और - अगर माना जाए तो - ग्लैमरस होने के बावजूद सबसे ज्यादा फजीहत का शिकार हुआ है; और यह विनय गर्ग की लीडरशिप क्वालिटी को संदेहास्पद बनाता है ।
डिस्ट्रिक्ट 321 ई के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुल्सियान की कहानी और भी विचित्र है : हालाँकि अपने डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह को बहुत ही प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने वास्तव में कल्पनाशील और रचनात्मक दिमाग लगाया था । इसे साबित करने के लिए एक ही उदाहरण देना काफी होगा : और वह यह कि उन्होंने महीनों पहले ही अधिष्ठापन समारोह की मंच सज्जा की रूपरेखा तैयार कर ली थी, मंच पर बैठने वाले लोगों के लिए ड्रेस कोड सोच लिया था और ड्रेस कोड का कपड़ा अपनी तरफ से मंच के लोगों को उपलब्ध करवा दिया था - ताकि वह समय रहते अपनी नाप की ड्रेस सिलवा लें । इस एक उदाहरण से जाहिर है कि डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह को लेकर अनिल तुल्सियान की सोच, योजना और तैयारी कितनी परफेक्ट थी । लेकिन अधिष्ठापन समारोह का दिन नजदीक आते-आते पता नहीं उनका दिमाग खुद पलटा और या उन्हें किसी ने उकसाया - कि निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रकाश जी अग्रवाल को नीचा दिखाने को ही उन्होंने अपना मुख्य उद्देश्य बना लिया । इसके चलते जो हालात बने, वह अधिष्ठापन समारोह में मुख्य अतिथि नरेश अग्रवाल के वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपमानित करने वाले रवैये में प्रकट हुए - और अधिष्ठापन समारोह की सारी तैयारी तथा भव्यता बर्बाद हो गई । वाराणसी में नरेश अग्रवाल का जो रवैया लोगों को देखने को मिला, उसने लायनिज्म की महान परंपरा और प्रतिष्ठा को तो तार-तार किया ही, नरेश अग्रवाल का भी वास्तविक रूप लोगों को 'दिखाया' - और अनिल तुल्सियान के कार्यक्रम पर जो कालिख पोती, वह अलग । अनिल तुल्सियान और उनके नजदीकियों ने अधिष्ठापन समारोह को कीचड़ बना देने के लिए फर्स्ट इंटरनेशनल वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन अधिकतर लोगों का मानना और कहना यही रहा कि निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रकाश जी अग्रवाल के प्रति निजी खुन्नसबाजी में अनिल तुल्सियान ने अपने ही अधिष्ठापन समारोह को फजीहत का शिकार बना दिया । जो हुआ, उससे लोगों को यही संदेश मिला है कि बेशक अनिल तुल्सियान में काम अच्छे से कर लेने की तैयारी करने का हुनर है - लेकिन साथ साथ बनते हुए काम को अपनी ही हरकत से बिगाड़ लेने की अनोखी काबिलियत भी उनमें है; जिसके चलते उन पर भरोसा करना आत्मघाती भी हो सकता है ।
डिस्ट्रिक्ट 321 एफ में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर योगेश सोनी के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हैं । पिछले लायन वर्ष में उनके डिस्ट्रिक्ट में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए खासा घमासानभरा चुनाव हुआ है, और इस वर्ष के लिए भी चुनावी रणभेरी बज चुकी है । जाहिर है कि डिस्ट्रिक्ट में जबर्दस्त खेमेबाजी है । स्वाभाविक रूप से योगेश सोनी को भी एक खेमे के सदस्य के रूप में देखा/पहचाना जाता है । इसी बिना पर उनके डिस्ट्रिक्ट में अधिष्ठापन समारोह पर संकट के गहरे बादलों को मंडराते/गरजते 'देखा' जा रहा था । उनके नजदीकियों व शुभचिंतकों के साथ-साथ, डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ लायन सदस्यों को भी डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह को लेकर चिंता थी । उनकी चिंता यह देख/जान कर और बढ़ी थी कि इस वर्ष मल्टीपल के जिन भी डिस्ट्रिक्ट में अधिष्ठापन समारोह हुए हैं, सभी किसी न किसी कारण से आरोपों व विवादों के घेरे में रहे हैं : कहीं अव्यवस्था का प्रदर्शन था; कहीं डिस्ट्रिक्ट की खेमेबाज़ी अपना रंग दिखा रही थी; कहीं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की अपनी खुन्नस और या प्रदर्शनप्रियता बबाल काटे/कटवाए हुए थी । डिस्ट्रिक्ट 321 एफ में तो बबाल होने के स्पष्ट कारण थे । लेकिन यहाँ अधिष्ठापन समारोह जिस शालीनता, लोगों की संलग्नता और भव्यता के साथ संपन्न हुआ - उसने हर किसी को वास्तव में चौंकाया । इस सफलता के लिए हर किसी ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर योगेश सोनी को जिम्मेदार बताया । दरअसल योगेश सोनी ने अपने आप को किसी एक खेमे के नेता के तौर पर नहीं, बल्कि डिस्ट्रिक्ट के गवर्नर के तौर पर लोगों के बीच प्रस्तुत किया - और हर किसी को उचित सम्मान और तवज्जो दी । अधिष्ठापन समारोह में ज्यादा से ज्यादा लोगों की शिरकत को संभव बनाने के लिए योगेश सोनी ने खुद प्रयत्न किए । इसका उन्हें सुफल मिला - डिस्ट्रिक्ट के लोगों ने खेमेबाजी की हदों को तोड़ कर और पिछले लड़ाई-झगड़ों को भूल कर भारी रिकॉर्ड संख्या में अधिष्ठापन समारोह में अपनी अपनी भागीदारी को और अपनी संलग्नता को जाहिर किया । डिस्ट्रिक्ट 321 एफ में अधिष्ठापन समारोह अच्छे से संपन्न हो सका - इसमें यूँ तो बहुत से लोगों की भूमिका रही; किंतु लोगों की भूमिका को संभव करने तथा व्यवस्थित करने का श्रेय डिस्ट्रिक्ट गवर्नर योगेश सोनी को ही मिला ।
अधिष्ठापन समारोह को अच्छे से संपन्न कर/करा लेने के कारण मल्टीपल के पदाधिकारियों व नेताओं के बीच योगेश सोनी को जो प्रशंसा मिल रही है, और उनकी लीडरशिप क्षमता का लोहा जिस तरह से माना जा रहा है - उसके बावजूद मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन पद की तरफ के रास्ते विनय गर्ग और अनिल तुल्सियान के लिए एकदम से बंद नहीं हो गए हैं । मल्टीपल की राजनीति में दखल रखने वाले नेताओं का कहना है कि इन दोनों में ही अच्छी एनर्जी है, और यह अभी हुए नुकसान की भरपाई कर सकते हैं - लेकिन इसके लिए इन्हें अपनी गलतियों से सबक सीखना होगा और आगे की अपनी योजनाओं को किंचित होशियारी के साथ लागू करना होगा । विनय गर्ग और अनिल तुल्सियान ऐसा कर पायेंगे या नहीं, और योगेश सोनी द्धारा प्रस्तुत की गई चुनौती से निपट सकेंगे या नहीं - यह देखना दिलचस्प होगा ।


Monday, August 1, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ई के वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमाशंकर अग्रवाल को अपमानित करने के कारण इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल की दोहरी पोल खुली और लोगों के बीच उनकी खासी फजीहत हुई

वाराणसी । इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल ने डिस्ट्रिक्ट 321 ई के अधिष्ठापन समारोह में डिस्ट्रिक्ट के एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर रमाशंकर अग्रवाल की जिस तरीके से सार्वजनिक रूप से बेइज्जती की - उससे नरेश अग्रवाल का असली चेहरा लोगों के सामने आया है, जिसे देख कर लोग सचमुच हैरान हैं । अधिष्ठापन समारोह में डिस्ट्रिक्ट के तमाम पदाधिकारियों तथा प्रमुख लोगों के साथ साथ दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के पदाधिकारी व अन्य प्रमुख लोग उपस्थित थे - जिनके बीच दिए अपने भाषण में नरेश अग्रवाल ने रमाशंकर अग्रवाल को पूरी निर्लज्जता के साथ अपमानित किया । नरेश अग्रवाल ने न तो इस बात का कोई लिहाज किया कि वह जिस डिस्ट्रिक्ट में मुख्य अतिथि के रूप में आए हैं, रमाशंकर अग्रवाल उस डिस्ट्रिक्ट के एक वरिष्ठ पूर्व गवर्नर हैं - और न रमाशंकर अग्रवाल की उम्र का, उनके वृद्ध होने की उन्होंने कोई परवाह की । नरेश अग्रवाल ने रमाशंकर अग्रवाल का नाम लेकर कहा कि इनके जैसे बूढ़े लोग अब किसी काम के नहीं रह गए हैं और इन्हें तो लायनिज्म से और डिस्ट्रिक्ट से निकाल देना चाहिए । रमाशंकर अग्रवाल का 'अपराध' यह था कि कार्यक्रम शुरू होते समय उन्होंने मंच पर प्रोटोकॉल के हिसाब से पदाधिकारियों को बैठाने की तरफ ध्यान खींचने का प्रयास किया था । उस समय भी नरेश अग्रवाल ने मंच से चिल्लाते हुए रमाशंकर अग्रवाल को चुपचाप बैठने तथा कार्यक्रम को डिस्टर्ब न करने के लिए फटकार लगाई थी । रमाशंकर अग्रवाल भी चुप हो गए थे, और सभी ने मान लिया था कि मामला खत्म हो गया है । इस तरह के 'सीन' किसी भी कार्यक्रम में बन जाते हैं, इसलिए किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि नरेश अग्रवाल जब अपना भाषण करने के लिए खड़े होंगे - तो वह रमाशंकर अग्रवाल को और भी अभद्र व अशालीन तरीके से संबोधित करेंगे । रमाशंकर अग्रवाल वर्ष 1993- 94 में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर थे । बढ़ती उम्र के कारण होने वाली शारीरिक व्याधियों के चलते उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होती है, लेकिन फिर भी लायनिज्म के प्रति अपने लगाव के कारण वह व्हीलचेयर पर प्रमुख आयजनों में पहुँचते हैं । इस बात को ध्यान में रखते हुए, रमाशंकर अग्रवाल के प्रति प्रकट किए गए नरेश अग्रवाल के बर्ताव के लिए अधिकतर लोगों ने नरेश अग्रवाल को खूब धिक्कारा भी । लोगों के बीच डिस्ट्रिक्ट के बड़े पदाधिकारियों के प्रति भी नाराजगी देखी/सुनी गई, जो रमाशंकर अग्रवाल के अपमान को चुपचाप बैठे देखते रहे और उन्होंने एक बार भी नरेश अग्रवाल को टोकने/रोकने का प्रयास नहीं किया ।
नरेश अग्रवाल का सामने सामने विरोध भले ही किसी न न किया हो, किंतु नरेश अग्रवाल के रवैये पर अधिकतर लोगों ने उनकी थू थू ही की । वाराणसी के कुछेक वरिष्ठ लायन सदस्यों ने याद किया कि नरेश अग्रवाल जब इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए उम्मीदवार थे, तब वाराणसी में रमाशंकर अग्रवाल की मदद से ही वह लोगों से मिले थे । कई लोगों का कहना रहा कि रमाशंकर अग्रवाल के प्रति नरेश अग्रवाल का जो व्यवहार रहा, वह उनकी अहसानफरामोशी का सुबूत तो है ही, साथ ही इस बात का भी सुबूत है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की 'गर्मी' नरेश अग्रवाल के दिमाग में जा घुसी है । जो हुआ, उससे नरेश अग्रवाल की दरअसल दोहरी पोल खुली । रमाशंकर अग्रवाल ने जो मुद्दा उठाया था, वह प्रोटोकॉल का एक सामान्य सा मामला था, जिसे नरेश अग्रवाल चाहते तो सेकेंड्स में हल कर सकते थे । रमाशंकर अग्रवाल ने कार्यक्रम शुरू होते समय जब निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रकाश जी अग्रवाल को मंच की बजाए दर्शक दीर्घा में बैठे देखा, तो उन्होंने मंच पर बैठे लोगों का ध्यान खींचते हुए प्रोटोकॉल की बात उठाई और प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर बुलाने/बैठाने की माँग की । उनके अलावा, कार्यक्रम में मौजूद डिस्ट्रिक्ट के तथा दूसरे डिस्ट्रिक्ट्स के कई पदाधिकारियों को भी यह देख कर अचरज हुआ था कि प्रकाश जी अग्रवाल मंच की बजाए दर्शक दीर्घा में क्यों बैठे हैं ? लोगों का कहना रहा कि डिस्ट्रिक्ट के आधिकारिक कार्यक्रमों में निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के ठीक बगल में बैठने का अधिकार लायंस इंटरनेशनल द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल देता है । कई लोगों ने प्रकाश जी अग्रवाल से कहा भी कि वह मंच पर क्यों नहीं बैठते ? प्रकाश जी अग्रवाल का कहना होता कि वह अपने आप मंच पर जाकर तो नहीं बैठ सकते हैं, उन्हें बुलाया जायेगा - तो वह जायेंगे । लोगों के लिए हैरानी की बात यह रही कि मंच पर नरेश अग्रवाल के होते हुए भी प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हो रहा है ? रमाशंकर अग्रवाल ने इसी बात की तरफ ध्यान खींचने के लिए दर्शक दीर्घा से सवाल उठाया - लेकिन उनके सवाल पर ध्यान देने व कार्रवाई करने की बजाए नरेश अग्रवाल ने उन्हें बहुत ही बुरी तरह से डपटते हुए चुप करा दिया ।
मजे की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुल्सियान ने डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह की तैयारी शुरू करते समय प्रकाश जी अग्रवाल के लिए मंच पर जगह सुनिश्चित की थी । इसका सुबूत यह है कि मंच पर बैठने वाले पदाधिकारियों के लिए उन्होंने एक ड्रेसकोड तय किया था, और उसके लिए कोट का कपड़ा पहले से ही उन पदाधिकारियों को उपलब्ध करवा दिया था । यह कपड़ा और ड्रेसकोड का विवरण प्रकाश जी अग्रवाल को भी मिला था । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनिल तुल्सियान से प्राप्त दिशा-निर्देश के अनुसार ही तैयार होकर प्रकाश जी अग्रवाल अधिष्ठापन समारोह में पहुँचे थे, किंतु फिर भी अनिल तुल्सियान ने उन्हें मंच पर जगह देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई । अनिल तुल्सियान के नजदीकियों का कहना है कि पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स दीपक वधावन तथा मंगल सोनी की शह पर अनिल तुल्सियान ने प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर जगह न देने का फैसला किया । अनिल तुल्सियान के नजदीकियों के अनुसार, अनिल तुल्सियान दरअसल पहले से ही प्रकाश जी अग्रवाल से कुछ खिंचे खिंचे से थे । हुआ असल में यह कि अनिल तुल्सियान ने अपनी कैबिनेट के सदस्यों से पदों के बदले में मोटी मोटी 'कीमतें' माँगना शुरू किया, तो लोगों ने उनसे सवाल किया कि प्रकाश जी अग्रवाल जब कैबिनेट सदस्यों से बिना पैसा लिए काम कर सकते हैं, तो उन्हें पैसा क्यों चाहिए ? उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में प्रकाश जी अग्रवाल के कामकाज को लोगों से बहुत ही प्रशंसा मिली है, और लोगों को पहली बार इस बात का पता चला कि कैबिनेट सदस्यों से मनमाने पैसे लिए बिना भी डिस्ट्रिक्ट का काम किया जा सकता है - और अच्छे से किया जा सकता है । लोगों के बीच होने वाली इस तरह की बातों से अनिल तुल्सियान ने अपने आपको प्रकाश जी अग्रवाल के सामने बहुत 'छोटा' पाया । अपने आप को 'बड़ा' साबित करने के लिए वह किसी भी तरह से प्रकाश जी अग्रवाल को अपमानित करना चाहते थे ।
ऐसे में उन्हें दीपक वधावन और मंगल सोनी से सुझाव मिला कि वह अधिष्ठापन समारोह में प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर जगह न दें । दीपक वधावन की प्रकाश जी अग्रवाल के साथ पुरानी खुन्नस है : दीपक वधावन के गवर्नर-काल में प्रकाश जी अग्रवाल उम्मीदवार बने थे; डिस्ट्रिक्ट के 'रिवाज' के अनुसार डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के कुछेक खर्चों के लिए उन्होंने दीपक वधावन को मोटी रकम दी थी । किंतु कॉन्फ्रेंस से कुछ ही दिन पहले दीपक वधावन के रवैये से परेशान व निराश होकर उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी । प्रकाश जी अग्रवाल चूँकि उम्मीदवार के रूप में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के लिए दी गई अपनी रकम वापस माँग रहे हैं, इसलिए रकम वापस करना तो दूर की बात - दीपक वधावन उनसे खुन्नस और रखने लगे । कई बार लोगों ने उनसे कहा भी कि भई, खुन्नस रखो तो रखो - प्रकाश जी अग्रवाल के पैसे तो वापस कर दो; पर दीपक वधावन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा । मंगल सोनी की नाराजगी का कारण बिलकुल नया है । मंगल सोनी अभी पिछले दिनों अपनी हरकतों के चलते वाराणसी की प्रतिष्ठित संस्था - प्रभुनारायण यूनियन क्लब के पद से हटा दिए गए हैं । मंगल सोनी इस बात को पहले से जानते हैं कि उक्त क्लब के प्रमुख लोगों के साथ प्रकाश जी अग्रवाल के अच्छे संबंध हैं - सो, मंगल सोनी इस बात पर खफा हैं कि प्रकाश जी अग्रवाल ने उक्त क्लब में उनका पद बचवाने में कोई दिलचस्पी क्यों नहीं ली ? इन्हीं अलग अलग कारणों से मंगल सोनी, दीपक वधावन व अनिल तुल्सियान ने प्रकाश जी अग्रवाल को डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह में मंच न देने का फैसला किया । अनिल तुल्सियान के नजदीकियों के अनुसार, पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जगदीश गुलाटी ने अनिल तुल्सियान को समझाने की बहुत कोशिश की, कि निवर्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को मंच पर जगह नहीं दोगे - तो यह लायंस इंटरनेशनल के प्रोटोकॉल का तो उल्लंघन होगा ही, साथ ही मल्टीपल में बहुत बदनामी भरा काम भी होगा । लेकिन अनिल तुल्सियान ने जगदीश गुलाटी की भी नहीं सुनी और वह प्रकाश जी अग्रवाल को मंच पर जगह देने के लिए तैयार नहीं हुए ।
प्रकाश जी अग्रवाल को अपमानित करके लोगों की निगाह में प्रकाश जी अग्रवाल से 'बड़ा' बनने/दिखने की कोशिश में अनिल तुल्सियान ने जगदीश गुलाटी को तो धता बता दी, किंतु उन्हें नरेश अग्रवाल की तरफ से डर था - उन्हें लगता था कि नरेश अग्रवाल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की राह पर हैं, वह कम से कम अपने सामने तो लायंस इंटरनेशनल के प्रोटोकॉल व परंपरा का उल्लंघन नहीं होने देंगे और प्रकाश जी अग्रवाल मंच पर बुलवा ही लेंगे । अनिल तुल्सियान के डर को दूर किया मंगल सोनी ने । मंगल सोनी ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह नरेश अग्रवाल की एक ऐसी कमजोरी जानते हैं, कि उसके डर से नरेश अग्रवाल वही करेंगे - जैसे हम चाहेंगे । मंगल सोनी को भरोसा था, किंतु दूसरे लोगों को नहीं था - डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमाशंकर अग्रवाल को तो बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि नरेश अग्रवाल अपने सामने लायंस इंटरनेशनल के प्रोटोकॉल को तथा लायनिज्म की परंपरा को भंग होने देंगे । इसीलिए उन्होंने नरेश अग्रवाल का ध्यान खींचने का प्रयास किया - किंतु अपने इस प्रयास में उन्हें नरेश अग्रवाल के हाथों जिस तरह अपमानित होना पड़ा, उससे साबित हुआ कि नरेश अग्रवाल सचमुच ही मंगल सोनी व अनिल तुल्सियान के हाथों इस कदर मजबूर हुए कि अपनी हरकत के चलते लोगों की आलोचना का और उनकी थू थू का शिकार बने ।