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Monday, February 4, 2013

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के वाइस प्रेसीडेंट पद की राह में संजीव माहेश्वरी रूपी काँटे को मनोज फडनिस पहचान तो रहे हैं और 'इस' काँटे को निकालने की तरकीबें भी भिड़ा रहे हैं

नई दिल्ली । मनोज फडनिस को इस बार अपनी 'लॉटरी' लगने का पूरा भरोसा है । इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के (वाइस) प्रेसीडेंट चुने जाने को मनोज फडनिस लॉटरी लगने जैसा ही मानते और बताते रहे हैं । हालाँकि इस बार वह पूरी तैयारी के साथ जुटे नज़र आ रहे हैं और 'लॉटरी' को अपने पक्ष में कर लेने का हर संभव उपाय आजमा रहे हैं । मनोज फडनिस कई वर्षों से सेंट्रल काउंसिल में हैं और इस नाते वाइस प्रेसीडेंट के कई चुनावों के बनते-बिगड़ते, बनते-बनते बिगड़ते और अचानक से बनते समीकरणों को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा/पहचाना है । वाइस प्रेसीडेंट चुनने वाले 'वोटर' किस किस तरह झांसा देते हैं - मनोज फडनिस इसे भी अच्छी तरह जानते/समझते हैं । देखी/पहचानी/जानी/समझी स्थितियों के बीच मनोज फडनिस ने इस बार मैदान मार लेने की लेकिन अच्छी तैयारी की है । सेंट्रल काउंसिल में उनके साथ रहे सदस्य बताते हैं कि यह 'तैयारी' वह पिछले तीन वर्षों से सुनियोजित तरीके से कर रहे हैं ।
मनोज फडनिस के साथ रहे दूसरे काउंसिल सदस्यों के अनुसार, पिछले वर्षों में मनोज फडनिस ने बिग फोर खेमे में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है । इंस्टीट्यूट की विभिन्न कमेटियों के सदस्य-पदाधिकारियों के रूप में उन्होंने इस तरह की गतिविधियाँ संयोजित कीं जिससे कि बिग फोर खेमे में उन्हें स्वीकार्यता मिले । हालाँकि सेंट्रल काउंसिल में बिग फोर खेमे की नुमाइंदगी करने वाले अपने 'लोग' भी रहे हैं और उनमें से कुछ लगातार वाइस प्रेसीडेंट बनने की लाइन में भी लगे रहे हैं - जाहिर है कि वाइस प्रेसीडेंट पद के लिए मनोज फडनिस का उनसे सीधा मुकाबला रहा और रहेगा; लेकिन फिर भी मनोज फडनिस ने बिग फोर खेमे में अपनी स्वीकार्यता बनाने की कोशिश की तो इसका कारण उनका यह मानना रहा कि बिग फोर खेमे का समर्थन उन्हें यदि निचली प्राथमिकताओं पर भी मिला तो हो सकता है कि उनका काम बन जाये ।
मनोज फडनिस की इस रणनीति को हालाँकि इस बार के चुनावों ने तगड़ा झटका दिया है । इस बार के चुनावी नतीजों ने सेंट्रल काउंसिल में बिग फोर की आधिकारिक ताकत को घटा दिया है । इससे बिग फोर से मदद मिलने की मनोज फडनिस की उम्मीद की 'मात्रा' काफी घट गई है; लेकिन फिर भी मनोज फडनिस के लिए सौदा कोई बुरा नहीं हुआ है । उन्हें उम्मीद है कि बिग फोर खेमा यदि अपने आधिकारिक प्रतिनिधि को वाइस प्रेसीडेंट चुनवाने की स्थिति में नहीं होता है तो उसका समर्थन उन्हें मिल सकेगा । मनोज फडनिस को विश्वास है कि बिग फोर के बीच अपनी स्वीकार्यता को बनाने के उन्होंने जो प्रयास लगातार किये हैं, उसका सुफल उन्हें अवश्य ही मिलेगा ।
मनोज फडनिस को इंस्टीट्यूट के मौजूदा वाइस प्रेसीडेंट सुबोध कुमार अग्रवाल की मदद मिलने की भी उम्मीद है । मनोज फडनिस एकेडमीकली स्ट्रांग माने/समझे जाते हैं - जिसे सुबोध कुमार अग्रवाल की बड़ी कमजोरी के रूप में देखा/पहचाना जाता है । सुबोध कुमार अग्रवाल राजनीतिक रूप से तो बहुत पहुँच वाले और तिकड़मी माने जाते हैं, लेकिन एकेडमीकली उनका हाथ जरा तंग माना/समझा जाता है । इसके चलते समझा जाता है कि प्रेसीडेंट के रूप में वह एक ऐसा वाइस प्रेसीडेंट चाहेंगे जो उनकी एकेडमिक कमजोरी को ढँक सके । मनोज फडनिस को लगता है कि यह 'काम' उनसे अच्छा कोई और नहीं कर सकेगा और इसी कारण से उन्हें उम्मीद है कि सुबोध कुमार अग्रवाल वाइस प्रेसीडेंट चुनवाने में उनकी मदद करेंगे ।
सुबोध कुमार अग्रवाल के भरोसे लेकिन वेस्टर्न रीजन के संजीव माहेश्वरी भी हैं । संजीव माहेश्वरी और सुबोध कुमार अग्रवाल के बीच पिछले वर्षों में काफी नजदीकी देखी गई है और दोनों के बीच कई मामलों में अच्छी ट्यूनिंग रही है । संजीव माहेश्वरी को वाइस प्रेसीडेंट पद के एक गंभीर उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है, तो इसका एक बड़ा कारण सुबोध कुमार अग्रवाल के साथ उनकी नजदीकी भी है । संजीव माहेश्वरी रूपी काँटे को मनोज फडनिस पहचान भी रहे हैं और 'इस' काँटे को निकालने की तरकीबें भी भिड़ा रहे हैं - क्योंकि मनोज फडनिस इस बार के मौके को अपने लिए बहुत अनुकूल पा रहे हैं ।