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Friday, March 4, 2016

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3012 में रोटरी वरदान ब्लड बैंक की आड़ में 45 लाख रुपए से ज्यादा की रकम हड़पने के उद्देश्य से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेके गौड़ तथा ब्लड बैंक से जुड़े लोगों के खुले मुँह तो खुले के खुले ही रह गए हैं, और साथ ही ब्लड बैंक का बन पाना भी खटाई में पड़ता दिख रहा है

गाजियाबाद । रोटरी वरदान ब्लड बैंक के मामले को निपटाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेके गौड़ की तरफ से जो 'प्रयास' हुए हैं, उससे यह बात अब रिकॉर्ड पर आ गई है कि इस ब्लड बैंक की आड़ में जेके गौड़ और उनके संगी-साथियों ने 70 हजार डॉलर, यानि 45 लाख रुपए से अधिक की रकम डकार जाने की पूरी और अच्छी तैयारी की थी । उल्लेखनीय है कि ग्लोबल ग्रांट नंबर 1527923 के तहत रोटरी वरदान ब्लड बैंक के लिए जेके गौड़ की देख-रेख में एक लाख 90 हजार डॉलर से अधिक रकम का एक प्रोजेक्ट तैयार किया था, और इसके लिए रोटरी फाउंडेशन से पैसा लेना था । इस प्रोजेक्ट के लिए 57 हजार 500 डॉलर रोटरी फाउंडेशन से मिलना तय हो चुका था, और इतनी ही रकम पाकिस्तान के रोटेरियंस से मैचिंग ग्रांट के तहत मिलना सुनिश्चित हो चुका था । दस हजार डॉलर डिस्ट्रिक्ट फंड से मिलने थे और 70 हजार डॉलर तीन क्लब्स - रोटरी क्लब साहिबाबाद, रोटरी क्लब गाजियाबाद ग्रेटर व रोटरी क्लब गाजियाबाद इंडस्ट्रियल टाउन ने अपने अपने सदस्यों से इकठ्ठा किए थे । यह सारी रकम रोटरी फाउंडेशन में संबंधित प्रोजेक्ट के नाम से इकठ्ठा हो चुकी थी - और बस मशीनों की खरीद के बिल प्रस्तुत होने का इंतजार किया जा रहा था । मशीनों की खरीद के नाम पर एक लाख 70 हजार डॉलर का जो बिल डीआरएफसी मुकेश अरनेजा की संस्तुति के लिए प्रस्तुत हुआ, उसमें लेकिन भारी लोचा देखा गया ।
'रचनात्मक संकल्प' की पिछली कुछेक रिपोर्ट्स में विस्तार से बताया जा चुका है कि मशीनों की खरीद से संबंधित विवरणों को छिपाया गया तथा मशीनों की सप्लायर कंपनी के पते व फोन नंबर देने से इंकार किया गया; और यहाँ तक कि खरीदी जा रही मशीनों की निर्माता कंपनी का नाम बताने तक से इंकार कर दिया गया । डीआरएफसी के रूप में मुकेश अरनेजा को शक हुआ कि ऐसा मशीनों की असली कीमत को छिपाने के उद्देश्य से किया गया है । उनका यह शक इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों द्वारा इशारों इशारों में यह बताए जाने से और मजबूत हुआ कि मशीनों की कीमतें खूब बढ़ा-चढ़ा कर - किन्हीं मामलों में तो दुगनी तक 'दिखाई' गई हैं । मुकेश अरनेजा ने स्पष्ट कर दिया कि इस तरह की बातों/चर्चाओं के बीच, मशीनों की खरीद से संबंधित पूरे डिटेल्स मिले बिना उनके लिए रकम रिलीज करने का ऑर्डर पास करना संभव नहीं होगा । इसके बाद भी जेके गौड़ और ब्लड बैंक की आड़ में पैसे 'बनाने' की तिकड़म में लगे पदाधिकारियों ने मशीनों की खरीद से जुड़े डिटेल्स नहीं दिए । डीआरएफसी के रूप में मुकेश अरनेजा को मामले से हटाने के लिए जेके गौड़ ने रोटरी फाउंडेशन से चालाकी भरा यह प्रयास जरूर किया कि इस प्रोजेक्ट को डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट की बजाए क्लब प्रोजेक्ट मान/बना दिया जाए । रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने लेकिन उनकी चालाकी को भाँप लिया और उनकी माँग को स्वीकार करने से मना कर दिया ।
रोटरी वरदान ब्लड बैंक की आड़ में कमाई करने की तैयारी कर चुके जेके गौड़ और उनके साथियों ने जब अपने आप को चारों तरफ से घिरा पाया, तो उन्होंने समर्पण करने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी । डीआरएफसी के रूप में मुकेश अरनेजा को मशीनों की खरीद से संबंधित जेके गौड़ की तरफ से जो संशोधित बिल मिला - इन पँक्तियों को पढ़ने वालों, यह जानने से पहले अपने अपने दिल थाम लेना कि उसमें मशीनों की कीमत एक लाख 70 हजार डॉलर से घटा कर मात्र एक लाख डॉलर कर दी गई । जेके गौड़ और इस प्रोजेक्ट से जुड़े दूसरे लोग यह बताने को तैयार नहीं हैं कि ब्लड बैंक के लिए आवश्यक जो मशीनें पहले एक लाख 70 हजार डॉलर में 'खरीदी' जा रही थीं, वह अब सिर्फ एक लाख डॉलर में कैसे मिल रही हैं ? आरोपपूर्ण आशंका है कि मशीनों की खरीद के नाम पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जेके गौड़ और इस प्रोजेक्ट से जुड़े कर्ता-धर्ताओं ने 70 हजार डॉलर, यानि 45 लाख रुपए से अधिक की रकम डकार जाने का 'इंतजाम' कर लिया था - और इसके तहत ही पहले मशीनों की कीमत को 70 हजार डॉलर बढ़ा कर दिखाया गया था; मुकेश अरनेजा के सख्त रवैये के चलते लेकिन जो कामयाब नहीं हो सका । जेके गौड़ और उनके साथियों की बदकिस्मती रही कि अपने 'इंतजाम' को सफल बनाने के लिए उन्होंने चालबाजी दिखाते हुए रोटरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों की जो 'मदद' लेने की कोशिश की, वह भी सफल नहीं हो सकी ।
जेके गौड़ और रोटरी वरदान ब्लड बैंक के दूसरे कर्ता-धर्ता इस तरह 70 हजार डॉलर की रकम की हेराफेरी करने के मामले में जब 'रंगे-हाथ' पकड़े गए, तो उन्होंने लीपापोती करने के अंदाज में एक होशियारी और दिखाई - बाद में उन्होंने 70 हजार डॉलर के खर्चे दिखाते/बताते हुए एक बिल डीआरएफसी मुकेश अरनेजा को और भेज दिया । रोटरी वरदान ब्लड बैंक को लेकर शुरू से ही बेवकूफी पर बेवकूफी करते जाने तथा रकम हड़पने के आरोपों में गहरे से गहरे धँसते जाने से बचने के लिए चला गया यह दाँव भी जेके गौड़ और ब्लड बैंक के कामकाज से जुड़े लोगों को उल्टा पड़ा है । डीआरएफसी मुकेश अरनेजा ने अभी हाल ही में जेके गौड़ को लिखा है कि ब्लड बैंक के लिए खरीदी जाने वाली मशीनों के लिए जो तीन-तीन तरफ के बिल दिए गए हैं, उससे मशीनों पर आने वाले खर्च का तथ्य स्पष्ट नहीं हो पा रहा है - इसलिए वह उचित तरीके से बनाया गया और ऑडिट किया हुआ बिल प्रस्तुत करें । समस्या की बात यह है कि उचित तरीके से बनाया गया बिल यदि वास्तव में प्रस्तुत किया जा सकता होता, तो फिर बिल व खर्चे को लेकर जेके गौड़ तथा ब्लड बैंक से जुड़े लोगों को बार-बार कलाबाजियाँ क्यों खानी पड़तीं तथा क्यों उन्हें फजीहत झेलनी पड़ती । मामला जहाँ आकर फँसा है - वहाँ का नजारा देखकर अभी तो यही लग रहा है कि ब्लड बैंक की आड़ में 45 लाख रुपए से ज्यादा की रकम हड़पने के उद्देश्य से जेके गौड़ तथा ब्लड बैंक से जुड़े लोगों के जो मुँह खुले थे, वह खुले के खुले ही रह गए हैं - और साथ ही ब्लड बैंक का बन पाना भी खटाई में पड़ता दिख रहा है ।