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Wednesday, April 17, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव अभियान के अंतिम चरण में दिनेश जोशी की उम्मीदवारी का अभियान जिस तरह की मुश्किलों का सामना कर रहा है, उसने उनके लिए चुनावी मुकाबले को खासा चुनौतीपूर्ण व कठिन बना दिया है

नई दिल्ली । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए चुनावी घमासान बढ़ने के साथ-साथ दिनेश जोशी के सामने मुसीबतें भी बढ़ती जा रही हैं, और उनके 'खेमे' के बिखराव की खाई भी और चौड़ी होती जा रही है । पूर्व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन विनय गर्ग की इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एंडोर्समेंट लेने की तैयारी ने दिनेश जोशी की उम्मीदवारी पर उल्टा ही असर डाला है । सोचा तो यह गया था कि विनय गर्ग की उक्त तैयारी दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को ताकत देगी, लेकिन परिस्थितियों का आकलन करते हुए विनय गर्ग और दिनेश जोशी की चुनावी लड़ाई की तैयारी ने जो अलग अलग रास्ता पकड़ा है, उसके कारण दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को तगड़ा झटका लगा है । दरअसल, सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनावी घमासान के नकारात्मक असर से बचने के लिए विनय गर्ग की उम्मीदवारी के अभियान को चूँकि दिनेश जोशी के चुनावी अभियान से अलग कर लिया गया, तो दिनेश जोशी के अभियान से एक और बड़ा नेता बाहर हो गया - और इस कारण नेताओं की कमी से जूझ रहे दिनेश जोशी के चुनावी अभियान को तगड़ा झटका लगा । दिनेश जोशी और उनके समर्थकों के खेल को बिगाड़ने का काम प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार दिनेश बत्रा ने भी किया । असल में, दिनेश जोशी और उनके समर्थकों को विश्वास था कि दिनेश बत्रा चुनावी खर्चा अफोर्ड नहीं कर पायेंगे, और मैदान छोड़ देंगे - लेकिन दिनेश बत्रा लगातार चुनाव में डटे रहने के संकेत दे रहे हैं, और सभी जरूरी खर्चे कर रहे हैं । इसके चलते, दिनेश जोशी और उनके समर्थकों की सारी योजना बुरी तरह 'पिटती' दिख रही है । 
दरअसल दिनेश जोशी और उनके समर्थकों को चुनाव की नौबत आने की उम्मीद ही नहीं थी, और उन्होंने तो सोचा यह था कि दिनेश जोशी के सामने दिनेश बत्रा टिकेंगे ही नहीं - और दिनेश जोशी निर्विरोध ही सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन जायेंगे; इसलिए उनकी तरफ से चुनावी घमासान की स्थिति से निपटने की कोई तैयारी ही नहीं की गई । इसी का नतीजा है कि अब जब चुनाव में बहुत कम दिन बचे हैं, और आरोपों-प्रत्यारोपों का माहौल गर्म है - तब दिनेश जोशी और उनके समर्थक हक्के-बक्के से हैं और उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि लोगों के बीच उठने वाले सवालों का वह कैसे और क्या जबाव दें ? दिनेश जोशी की तरफ से डिस्ट्रिक्ट और लायनिज्म में बहुत कुछ करने के वायदे और दावे किए जा रहे हैं; लेकिन उनके वायदे और दावे इस सवाल के चलते संदेह के घेरे में हैं कि उन्होंने अभी तक क्या किया है ? दिनेश जोशी ने अभी तक जो किया है, उसमें कुछेक संस्थाओं में ट्रस्टी बनना तथा कुछेक कामों में पैसे खर्च करने के ही तथ्य हैं; लोगों के बीच घुल मिल कर काम करने का उनका कोई अनुभव नहीं है - और यही बात उम्मीदवार के रूप में लोगों के साथ उनके जुड़ने में बाधा बन रही है । डिस्ट्रिक्ट में लोगों के बीच प्रचार है कि दिनेश जोशी डिस्ट्रिक्ट और लायनिज्म में अपनी सक्रियता व संलग्नता के चलते उम्मीदवार नहीं बने हैं; उन्हें तो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि मेहरा ने इसलिए उम्मीदवार बना/बनवा दिया, ताकि थाईलैंड में आयोजित किए गए अधिष्ठापन समारोह में हुई बदइंतजामी और लूट-खसोट के झमेले से बचने/बचाने के लिए दिनेश जोशी से तात्कालिक मदद के नाम पर उन्हें जो पैसे मिले थे, उन्हें वह दिनेश जोशी को वापस न करना पड़ें । 
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि मेहरा के उम्मीदवार के रूप में पहचाने जाने के कारण दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान को और झटका लगा है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में रवि मेहरा के तरह तरह के फैसलों ने डिस्ट्रिक्ट के लोगों को - यहाँ तक कि रवि मेहरा के नजदीक रहे बड़े व प्रमुख लोगों तक को नाराज कर दिया; जिसका खामियाजा दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को भुगतना पड़ रहा है । अपनी हरकतों से रवि मेहरा नए नए विवाद पैदा करते गए हैं और मुसीबतों में फँसते गए हैं, जिनके चलते दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान पर खासा प्रतिकूल असर पड़ा है । समस्या की बात यह है कि रवि मेहरा के कारण दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान को जो झटके पर झटके लगे हैं, उनसे निपटने के लिए दिनेश जोशी के पास कोई तरीके ही नहीं हैं । रवि मेहरा के रवैये के कारण पहले तो निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इंद्रजीत सिंह ने दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान का साथ छोड़ा; फिर खासी बदनामी के चलते रवि मेहरा उनकी उम्मीदवारी के लिए फायदेमंद नहीं रह गए; विनय गर्ग का सहयोग/समर्थन दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को मिलता, लेकिन विनय गर्ग खुद इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के चक्कर में फँस गए । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए विनय गर्ग चूँकि अकेले उम्मीदवार हैं, इसलिए उन्होंने अपने आपको सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव अभियान से दूर कर लिया है - जिसके कारण दिनेश जोशी के चुनाव अभियान को और झटका लगा है । डिस्ट्रिक्ट और लायनिज्म में दिनेश जोशी का 'इतिहास' चूँकि कोई प्रभावी नहीं है, इसलिए उनके अभियान को 'बड़े' नेताओं के सहयोग की खासी जरूरत थी - लेकिन उनके लिए 'कंगाली में आटा गीला' होने वाला मामला हो गया है । अब जब चुनाव अभियान अपने अंतिम चरण में है, तब दिनेश जोशी की उम्मीदवारी का अभियान जिस तरह की मुश्किलों का सामना कर रहा है, उसने उनके लिए चुनावी मुकाबले को खासा चुनौतीपूर्ण व कठिन बना दिया है ।

Tuesday, March 12, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए विनय गर्ग के 'इंटेंशन' देने के चलते छिड़े विवाद ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान को मुसीबत में फँसाया

पानीपत । विनय गर्ग के इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एंडोर्समेंट लेने की 'इंटेंशन' प्रकट करने से डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति तो भड़क ही उठी है, उसकी आँच ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव को भी गर्मी दे दी है । मजे की बात यह है कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए विनय गर्ग का समर्थन प्राप्त कर रहे दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के समर्थक इस बात पर बँटे हुए हैं कि विनय गर्ग की यह इंटेंशन उन्हें फायदा पहुँचायेगी या नुकसान ? दिनेश जोशी के कुछेक समर्थकों को विनय गर्ग की इस इंटेंशन में दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को फायदा पहुँचता 'दिख' रहा है; उनका दावा तो बल्कि यह है कि दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से ही विनय गर्ग ने यह चाल चली है - अन्यथा इस 'इंटेंशन' के लिए अभी किसी भी लिहाज से उचित समय नहीं है; दूसरी तरफ लेकिन दिनेश जोशी के अन्य कुछेक समर्थकों को लगता है और उनका कहना है कि विनय गर्ग की इस घोषणा ने पहले से ही मुसीबत का शिकार बनी दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को और ज्यादा मुसीबत में फँसा दिया है । दरअसल सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के दूसरे उम्मीदवार दिनेश बत्रा के समर्थकों ने यह कहते हुए मामले को भड़काया है कि जिन विनय गर्ग की लायन सदस्यता तक खतरे में है और जो सिर्फ अदालती कार्रवाई के चलते बची हुई है, वह विनय गर्ग इंटरनेशनल डायरेक्टर बनने का सपना क्यों और कैसे देख रहे हैं ? विनय गर्ग को लेकर कही/सुनाई जा रहीं इस तरह की बातें डिस्ट्रिक्ट के लोगों को नकारात्मक रूप में प्रभावित कर ही सकती हैं; और यह चीज दिनेश जोशी की सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने का काम कर सकती है ।
विनय गर्ग पिछले वर्ष मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन थे । चेयरमैन के रूप में उनके कुछेक फैसले और रवैये पर लायंस इंटरनेशनल के साथ उनका कुछ खटराग हुआ, जिसके चलते लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारी उनकी लायन सदस्यता के ही दुश्मन बन बैठे । लायंस इंटरनेशनल के मनमाने व तानाशाहीपूर्ण फैसले के खिलाफ विनय गर्ग ने अदालत की शरण ली, जिसके चलते लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों की मनमानी पर अमल करने की रोक तो लग गई - लेकिन विनय गर्ग की सदस्यता पर लटकी तलवार अभी भी लटकी हुई ही है । लायंस इंटरनेशनल की तरफ से लायंस को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इंडिया एसोसिएशन द्वारा भारत के लायन लीडर्स की जो डायरेक्टरी प्रकाशित है, उसमें विनय गर्ग की जहाँ फोटो छपना चाहिए थी, वहाँ इस आशय की जानकारी प्रकाशित की गई है । ऐसे में, इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए दी गई उनकी 'इंटेंशन' ने उनके विरोधियों को उनके खिलाफ बयानबाजी करने का मौका दिया है, और इस मौके के इस्तेमाल के चलते डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में गर्मी पैदा हो गई है । इस गर्मी ने लेकिन सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए विनय गर्ग के समर्थित उम्मीदवार दिनेश जोशी को मुसीबत में डाल दिया है । उनके लिए लोगों के इस सवाल का जबाव देना कई कारणों से मुश्किल बना हुआ है कि जब विनय गर्ग की लायन सदस्यता ही संकट में फँसी हुई है, तब विनय गर्ग आखिर किस बिना पर इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए एंडोर्समेंट लेने की सोच रहे हैं ?
विनय गर्ग के इस नए विवाद में फँस जाने से दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान पर भी प्रतिकूल असर पड़ने का डर पैदा हुआ है । दरअसल दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के दो ही बड़े समर्थक सक्रिय रहे हैं - एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि मेहरा और दूसरे पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व निवर्त्तमान मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन विनय गर्ग; डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि मेहरा थाईलैंड में हुए अधिष्ठापन समारोह में हुई बदइंतजामी और लूट-खसोट के झमेले से अभी तक उबर नहीं पाए हैं, इसलिए ले-दे कर एक अकेले विनय गर्ग ही दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के एक बड़े समर्थक बचे रह गए थे - लेकिन अब उनके भी खामख्वाह एक विवाद को आमंत्रित कर लेने से दिनेश जोशी के लिए मुसीबत की स्थिति बन गई है । दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के साथ यूँ तो सब कुछ अच्छा ही अच्छा है; दिनेश बत्रा के मुकाबले हर तुलना में दिनेश जोशी का पलड़ा भारी है, लेकिन फिर भी उनकी उम्मीदवारी की वैसी हवा नहीं बन पा रही है, जैसी कि बनना चाहिए थी - तो इसका एक ही कारण दिखता है और वह यह कि उनकी उम्मीदवारी के साथ चुनावी नजरिये से कोई बड़ा नाम सक्रिय नहीं है । दिनेश जोशी की उम्मीदवारी का सारा बोझ एक अकेले सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन गुप्ता के कंधे पर डला/पड़ा हुआ है । विनय गर्ग तथा खेमे के अन्य पूर्व गवर्नर्स की छत्रछाया में रमन गुप्ता अच्छे से दिनेश जोशी की उम्मीदवारी की कमान सँभाले हुए थे भी - लेकिन इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए विनय गर्ग के 'इंटेंशन' देने के चलते छिड़े विवाद ने दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान में अलग तरह की समस्या पैदा कर दी है ।

Thursday, February 7, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू में कैथल में होने वाले लायंस विचार मंच के 10 फरवरी के कार्यक्रम के स्थगित होने पर बबाल मचा और इस बबाल में विनय गर्ग और रमन गुप्ता के दिनेश जोशी को मिल रहे समर्थन को संदिग्ध बनाने की कोशिश भी की जा रही है

नई दिल्ली । कैथल में होने वाले लायंस विचार मंच के कार्यक्रम के रद्द हो जाने से दिनेश बत्रा के नजदीकियों और समर्थकों को दिनेश जोशी और उनके समर्थकों पर हमला बोलने का अच्छा मौका मिल गया है, और इस हमले में उन्होंने पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन विनय गर्ग तथा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रमन गुप्ता को भी चपेटे में ले लिया है । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनावी मुकाबले में विनय गर्ग और रमन गुप्ता को दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के बड़े और प्रमुख समर्थकों के रूप में देखा/पहचाना जाता है । माना/समझा जाता है कि इन दोनों के प्रभाव तथा इनकी सक्रियता के चलते हरियाणा में दिनेश जोशी को एक तरफा समर्थन मिल सकता है । इसी संदर्भ में, कैथल में घोषित किए गए 10 फरवरी के लायंस विचार मंच के कार्यक्रम के रद्द हो जाने पर दिनेश बत्रा के समर्थकों ने कहना/बताना शुरू किया है कि विनय गर्ग और रमन गुप्ता के दिलचस्पी न लेने से ही यह कार्यक्रम रद्द हुआ है, और इससे दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को इन दोनों का समर्थन जारी रहने को लेकर संदेह पैदा हो गया है । दिनेश जोशी की उम्मीदवारी का समर्थन करने से निवर्त्तमान डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इंद्रजीत सिंह और वरिष्ठ लायन अनिल गोयल ने पहले ही हाथ खींचा हुआ है । इंद्रजीत सिंह ने तो पाला बदल कर दिनेश बत्रा की उम्मीदवारी का झंडा उठाया हुआ है । ऐसे में, कैथल में लायंस विचार मंच के 10 फरवरी के आयोजन के घोषित होने के बाद रद्द होने की आड़ में - विनय गर्ग और रमन गुप्ता के ढीले पड़ने की चर्चा चला कर दिनेश बत्रा के समर्थकों ने दिनेश जोशी की उम्मीदवारी की हवा को कमजोर करने का प्रयास किया है ।
दिनेश बत्रा के समर्थकों की चाल को समझते हुए दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के समर्थक भी सक्रिय हुए और उनकी तरफ से सफाई दी गई कि कैथल का कार्यक्रम रद्द नहीं हुआ है, बल्कि स्थगित हुआ है और जल्दी ही कार्यक्रम की नई तारीख की घोषणा की जाएगी । कार्यक्रम के आयोजकों की तरफ से बताया गया है कि कैथल के कुछेक साथियों की अन्य व्यस्तताओं तथा किसी और दिन कार्यक्रम कर लेने के उनके अनुरोध को देखते हुए 10 फरवरी का कार्यक्रम स्थगित किया गया है । आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम लायंस सदस्यों के लिए ही आयोजित किया जाना है, इसलिए उनकी सुविधा और उनके अनुरोध का सम्मान तो होना ही चाहिए - और इसी सम्मान को प्रकट करते हुए 10 फरवरी का कार्यक्रम स्थगित किया गया है । दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के समर्थकों का कहना है कि कैथल के कार्यक्रम के स्थगित होने पर विरोधी पक्ष के लोगों की तरफ से जो खुशी व्यक्त की जा रही है, वह इस बात का सुबूत है कि लायंस विचार मंच की कामयाबी से वह कितना डरे हुए हैं । दावा किया जा रहा है कि कैथल के कार्यक्रम के स्थगित होने पर व्यक्त की जा रही विरोधी खेमे की खुशी लेकिन ज्यादा समय टिकी/बनी नहीं रह पायेगी, क्योंकि जल्दी ही कैथल में कार्यक्रम होगा - और उसे दिल्ली के कार्यक्रम जैसी ही सफलता मिलेगी । दिनेश जोशी के समर्थकों की तरफ से यह दावा भी किया/सुना गया है कि विनय गर्ग और रमन गुप्ता का दिनेश जोशी की सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी को पहले जैसा ही समर्थन प्राप्त है और इस समर्थन को बनाए रख कर यह दोनों विरोधी खेमे के लोगों को खुश होने का मौका नहीं देंगे ।
आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच सच्चाई का और वास्तविक स्थिति का पता तो अगले कुछ ही दिनों में मिल ही जायेगा; लेकिन चुनावी राजनीति के नाजुक समीकरणों को देखते हुए कई लोगों को लगता है कि दिनेश जोशी के समर्थकों को कैथल में जैसी चूक हुई है, वैसी चूक नहीं करना चाहिए - अन्यथा उनके लिए आसान  दिख रहा चुनावी मुकाबला मुश्किल में पड़ जा सकता है । लायंस विचार मंच का अगला कार्यक्रम कैथल में करने को लेकर काफी दिनों से तैयारी की जा रही थी, ऐसे में तारीख तय करने के मामले में इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हो गई कि कार्यक्रम स्थगित करने की नौबत आ पड़ी ? दिनेश जोशी के शुभचिंतकों का मानना और कहना है कि कैथल के कार्यक्रम के स्थगित होने का विरोधी खेमे के लोगों ने फायदा उठाने का जो प्रयास किया है, उससे तो निपट लिया जा सकता है - लेकिन अपनी ही तैयारियों की खामियों के कारण कार्यक्रम स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़े और उस विवाद में विनय गर्ग और रमन गुप्ता जैसे बड़े व प्रमुख नेताओं की भूमिका संदिग्ध हो उठे, तो सावधान होने की जरूरत है । कैथल में 10 फरवरी के घोषित कार्यक्रम के स्थगित होने से हुआ बबाल तो संभव है कि कुछेक दिनों में थम जाए, लेकिन इस बबाल ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के परिदृश्य को थोड़ा गर्म तो कर ही दिया है ।

Thursday, January 3, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए दिनेश जोशी और दिनेश बत्रा के बीच होते दिख रहे चुनावी मुकाबले में लायंस ब्लड बैंक के कामकाज के मुद्दा बनने से डिस्ट्रिक्ट में माहौल गर्म हुआ

नई दिल्ली । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रवि मेहरा और लायंस ब्लड बैंक के प्रेसीडेंट राजेंद्र अग्रवाल द्वारा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को शह देने की कार्रवाई उनके अपने ग्रुप के अन्य नेताओं को पसंद नहीं आ रही है, और इस स्थिति ने सत्ता खेमे के लोगों को असमंजस में फँसा दिया है । रवि मेहरा तथा राजेंद्र अग्रवाल लेकिन दिनेश जोशी तथा अन्य लोगों को आश्वस्त कर रहे हैं कि ग्रुप के जो नेता अभी उनके फैसले का समर्थन नहीं कर रहे हैं, देर/सवेर उनके फैसले का समर्थन करने लगेंगे । उनका तर्क है कि ग्रुप के उन नेताओं के लिए विरोधी ग्रुप के उम्मीदवार दिनेश बत्रा का समर्थन करना तो संभव नहीं ही होगा; और इसलिए उन्हें दिनेश जोशी की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए मजबूर होना ही पड़ेगा । मजे की बात यह है कि दिनेश बत्रा की भी जेपी सिंह के नेतृत्व वाले ग्रुप में पूरी स्वीकार्यता नहीं है - वहाँ भी ग्रुप के कई नेताओं को लगता है कि दिनेश बत्रा चुनाव को 'अफोर्ड' नहीं कर पायेंगे और मदन बत्रा की तरह ग्रुप की फजीहत ही करवायेंगे । इस वर्ष यदि सचमुच दिनेश जोशी और दिनेश बत्रा के बीच ही चुनावी जंग होती है, तो चुनावी वातावरण तो कुछ बदला बदला सा ही होगा - लेकिन चुनाव को प्रभावित करने वाला फैक्टर कमोवेश पिछले दो वर्षों जैसा ही होगा; पिछले दो वर्षों का अनुभव 'बताता' है कि चुनाव का नतीजा उस उम्मीदवार के हक में गया, जिसने दमदारी से चुनाव लड़ा - खेमे की मजबूती तथा नेताओं की भीड़ व उनका समर्थन निर्णायक भूमिका में नहीं रहा । पिछले से पिछले वर्ष यशपाल अरोड़ा का खेमा खासा मजबूत दिख रहा था, और उनके प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार गुरचरन सिंह भोला को नया/नवेला तथा अनुभवहीन माना/देखा जा रहा था - लेकिन फिर भी नतीजा गुरचरन सिंह भोला के पक्ष में रहा, तो इसका कारण सिर्फ यही था कि गुरचरन सिंह भोला ने चुनाव पूरी दमदारी से लड़ा था । पिछले वर्ष भी यही कहानी दोहराई गई - लायनिज्म में संलग्नता की अवधि और अनुभव के आधार पर मदन बत्रा का पलड़ा भारी समझा/माना जा रहा था, लेकिन उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने का अभियान चलाने के मामले में रमन गुप्ता ने उन्हें पछाड़ दिया और जीत प्राप्त की ।
दिनेश बत्रा के लिए मुसीबत की बात यही है कि उन्हें समर्थन देने वाले ग्रुप के ही कई लोग उन्हें यशपाल अरोड़ा व मदन बत्रा वाली 'स्थिति' में देख/रख रहे हैं, और अभी से मान कर चल रहे हैं कि दिनेश बत्रा चुनावी अभियान की जरूरतों और चुनौतियों का सामना नहीं कर पायेंगे । अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के लिए दिनेश बत्रा के पास ले दे कर एक यही तर्क है कि डिस्ट्रिक्ट और लायनिज्म में उनकी खासी सक्रियता रही है और वह एक पुराने लायन हैं - लेकिन इसी तर्क के भरोसे चुनाव जीतने की यशपाल अरोड़ा व मदन बत्रा की कोशिशों का क्या हश्र हुआ, यह सभी ने देखा ही है । दिनेश बत्रा और उनके समर्थकों के लिए राहत की बात यही है कि दिनेश जोशी की उम्मीदवारी को लेकर सत्ता खेमे में मतभेद हैं, और सत्ता खेमे के कुछेक नेता अपनी अपनी 'मुसीबतों' में फँसे/उलझे पड़े हैं - इस कारण दिनेश जोशी की उम्मीदवारी के अभियान में वैसी 'गर्मी' नहीं दिखाई दे रही है, जैसी पिछले वर्ष रमन गुप्ता के अभियान में थी । इसका कारण दोनों के व्यक्तित्व में भी देखा/पहचाना जा रहा है; खेमे के लोगों का ही कहना/बताना है कि रमन गुप्ता ने आगे बढ़ कर अलग-अलग मिजाज के नेताओं को एकजुट व सक्रिय करने का काम किया था, लेकिन दिनेश जोशी ऐसा करने में कोई दिलचस्पी ही नहीं ले रहे हैं - और पूरी तरह से रवि मेहरा व राजेंद्र अग्रवाल पर ही निर्भर हैं । दिनेश जोशी को अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के मामले में रवि मेहरा व राजेंद्र अग्रवाल पर ही निर्भर देख कर खेमे के दूसरे नेता और भड़के हुए हैं ।
दिनेश बत्रा और उनके समर्थक दिनेश जोशी को घेरने के लिए लायंस ब्लड बैंक के साथ उनके व्यापारिक संबंधों को मुद्दा बनाते और हवा देते हुए भी लग रहे हैं, जिससे आभास हो रहा है कि इस बार के चुनावों में आरोपों/प्रत्यारोपों का आक्रामक नजारा देखने/ को मिलेगा । दिनेश बत्रा और उनके समर्थकों की तरफ से कहा/बताया जा रहा है कि लायंस ब्लड बैंक के प्रेसीडेंट राजेंद्र अग्रवाल ब्लड बैंक के कामकाज में दिनेश जोशी के साथ मिलकर कुछ गड़बड़ कर रहे हैं, जिसे और 'मजबूत' करने के लिए ही राजेंद्र अग्रवाल ने दिनेश जोशी को उम्मीदवार बना/बनवा दिया है । खेमे के लोगों का कहना/बताना रहा है कि राजेंद्र अग्रवाल खुद उम्मीदवार होना चाहते थे, लेकिन उन्हें स्पष्ट कर दिया गया कि वह यदि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार होते हैं, तो उन्हें ब्लड बैंक का प्रेसीडेंट पद छोड़ना होगा । राजेंद्र अग्रवाल ब्लड बैंक का प्रेसीडेंट पद छोड़ने को तैयार नहीं हुए, और सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी से पीछे हटने के लिए मजबूर हो गए । डिस्ट्रिक्ट में चर्चा है कि तब राजेंद्र अग्रवाल को आईडिया सूझा कि वह क्यों न दिनेश जोशी को गवर्नर की लाईन में लगवा दें, ताकि ब्लड बैंक में उन्हें अपनी मनमानी करने का मौका मिलता रहे और दूसरे नेताओं के मुँह बंद रहें । गौर करने वाली बात यह है कि लायंस ब्लड बैंक के कामकाज को लेकर सत्ता खेमे के ही कुछेक बड़े नेताओं ने सवाल उठाए हुए हैं, जिन्हें लगातार अनसुना किया जा रहा है । दिनेश बत्रा और उनके समर्थकों को लग रहा है कि ब्लड बैंक के कामकाज और उसमें दिनेश जोशी की संलग्नता को मुद्दा बना कर वह दिनेश जोशी को घेर लेंगे और अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटा लेंगे । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में लायंस ब्लड बैंक के कामकाज के मुद्दा बनने से क्या नजारा बनेगा, यह देखना दिलचस्प होगा ।