Showing posts with label AMRESH VASHISHT. Show all posts
Showing posts with label AMRESH VASHISHT. Show all posts

Monday, October 26, 2015

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की सेंट्रल रीजन में नितिन गुप्ता को अनुज गोयल की चालों में मदद करता देख विनय मित्तल ऐसा भड़के हैं कि अपना चुनाव छोड़ कर उन्होंने नितिन गुप्ता के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है

गाजियाबाद । नितिन गुप्ता के अनुज गोयल से हाथ मिला लेने की खबरें सुन कर विनय मित्तल इतने खफा हुए हैं कि वह सेंट्रल काउंसिल के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने की बात भूल कर रीजनल काउंसिल के लिए प्रस्तुत नितिन गुप्ता की उम्मीदवारी के खिलाफ प्रचार करने में जुट गए हैं । इस 'जुटने' के तहत ही विनय मित्तल जहाँ भी जाते हैं, वहाँ के लोगों को नितिन गुप्ता की धोखेबाजी का किस्सा बताने से नहीं चूकते हैं । किस्सा भी सिर्फ यह कि नितिन गुप्ता ने उनसे उनकी उम्मीदवारी के लिए काम करने का वायदा किया था, लेकिन फिर अचानक से पता नहीं क्या हुआ कि अपने वायदे को भूल कर नितिन गुप्ता खुद ही उम्मीदवार हो गए । विनय मित्तल को लगता है कि उनके चुनाव अभियान को नुकसान पहुँचाने के इरादे से अनुज गोयल ने नितिन गुप्ता को उम्मीदवारी के लिए प्रेरित किया; और अनुज गोयल की बातों में आकर नितिन गुप्ता ने उनके साथ धोखा किया । विनय मित्तल लोगों को यह भी बताते हैं कि नितिन गुप्ता को रीजनल काउंसिल का चुनाव जितवाने का लालच देकर अनुज गोयल ने नितिन गुप्ता को पूरी तरह अपने वश में कर लिया है, तथा नितिन गुप्ता के जरिए उनके समर्थकों को बरगलाने व तोड़ने का काम करते हुए सेंट्रल काउंसिल के लिए प्रस्तुत उनकी उम्मीदवारी को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं । 
उल्लेखनीय है कि नितिन गुप्ता पिछले चुनाव में विनय मित्तल के साथ थे, और पिछली बार रीजनल काउंसिल के लिए प्रस्तुत विनय मित्तल की उम्मीदवारी के पक्ष में उन्होंने जम कर काम किया था । गाजियाबाद में ही नहीं, गाजियाबाद के आसपास की ब्रांचेज में भी लोगों का मानना और कहना रहा है कि पिछली बार रीजनल काउंसिल के चुनाव में विनय मित्तल को जो जीत मिली थी - उसमें नितिन गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका थी । पिछले चुनाव के दौरान लोगों को विनय मित्तल और नितिन गुप्ता के बीच जो केमिस्ट्री देखने को मिली थी, उसके आधार पर ही अनुमान लगाया जा रहा था कि अबकी बार सेंट्रल काउंसिल के लिए प्रस्तुत विनय मित्तल की उम्मीदवारी के अभियान की बागडोर नितिन गुप्ता के हाथ में ही होगी । खुद विनय मित्तल भी नितिन गुप्ता के सहयोग को लेकर आश्वस्त थे । किंतु नितिन गुप्ता ने सभी अनुमानों और आश्वस्तियों को गलत साबित करते हुए सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल के लिए अपनी उम्मीदवारी घोषित कर दी । नितिन गुप्ता की इस घोषणा से विनय मित्तल को तगड़ा वाला झटका तो लगा, तथा दूसरों को भी आश्चर्य तो हुआ - लेकिन यह मान लिया गया कि आखिर नितिन गुप्ता की भी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ हैं और यदि वह उन्हें पूरा करना चाहते हैं, तो किसी को भी उन पर ऊँगली उठाने का हक नहीं है । विनय मित्तल ने भी इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया कि सेंट्रल काउंसिल का चुनाव उन्हें नितिन गुप्ता की मदद के बिना ही लड़ना होगा; तथा इस हकीकत के चलते पैदा हुई स्थितियों से निपटने लिए उन्होंने अपनी उम्मीदवारी के संदर्भ में तैयारी भी कर ली । 
विनय मित्तल लेकिन यह देख/जान कर भड़क गए हैं कि नितिन गुप्ता ने अनुज गोयल से नजदीकी बना ली है । रीजनल काउंसिल के चुनाव के संदर्भ में अनुज गोयल को पहले हालाँकि मुकेश बंसल के समर्थन में देखा/पहचाना जा रहा था, और अनुज गोयल कुछेक जगह मुकेश बंसल की उम्मीदवारी को समर्थन दिलाने के प्रयास करते देखे/सुने भी गए थे; किंतु अभी उन्हें नितिन गुप्ता के साथ देखा जाने लगा है । लोगों के बीच चर्चा है कि अनुज गोयल ने मुकेश बंसल का साथ छोड़ कर अब नितिन गुप्ता की उम्मीदवारी का झंडा उठा लिया है । यह तो कोई ऐसी बात नहीं है, जिस पर विनय मित्तल भड़कें - लेकिन उनके भड़कने का कारण अनुज गोयल का नितिन गुप्ता को उनके खिलाफ इस्तेमाल करना बना । नितिन गुप्ता का अनुज गोयल के हाथों इस्तेमाल होने के लिए तैयार जाने ने उनके 'भड़कने' को और ज्यादा भड़काने का काम किया । दरअसल देखा/पाया यह गया कि अनुज गोयल ने नितिन गुप्ता की मदद से विनय मित्तल की जड़ें खोदने का काम शुरू किया है, और चुन चुन कर विनय मित्तल के समर्थकों व शुभचिंतकों को 'तोड़ने' व विनय मित्तल से दूर करने का प्रयास कर रहे हैं । नितिन गुप्ता चूँकि विनय मित्तल के समर्थकों व शुभचिंतकों को अच्छे से जानते/पहचानते हैं, इसलिए नितिन गुप्ता की मदद अनुज गोयल के खूब काम आ रही है । नितिन गुप्ता की मदद से अनुज गोयल सिर्फ विनय मित्तल के नजदीकियों को पहचानने का ही काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि नितिन गुप्ता की मदद से वह विनय मित्तल के खिलाफ नकारात्मक अभियान भी चला रहे हैं । अनुज गोयल जो कर रहे हैं, या करना चाहते हैं - वह तो अपनी जगह है ही; विनय मित्तल के लिए झटके की बात यह है कि नितिन गुप्ता इस काम में बढ़चढ़ कर अनुज गोयल की मदद कर रहे हैं । 
अनुज गोयल दरअसल नहीं चाहते हैं कि सेंट्रल काउंसिल में उनके द्वारा खाली की गई सीट पर विनय मित्तल काबिज हों । इसके लिए उन्होंने अपने भाई जितेंद्र गोयल को भी बलि का बकरा बना दिया, लेकिन जल्दी ही उन्हें समझ में आ गया कि जितेंद्र गोयल के जरिए वह विनय मित्तल को शायद न रोक सकें । जितेंद्र गोयल को समर्थन दिलाने की अनुज गोयल ने जितनी जो कोशिशें  की हैं, उनसे फायदा होना तो दूर की बात - रीजन में उनकी फजीहत और हुई है । लोग खुलेआम कहने भी लगे हैं कि चुनाव में जितेंद्र गोयल की हालत तो अमरेश वशिष्ट से भी बुरी होनी है । जितेंद्र गोयल के जरिए विनय मित्तल को 'रोकने' में असफलता मिलती देख कर ही अनुज गोयल ने नितिन गुप्ता के मार्फत विनय मित्तल का शिकार करने की योजना बनाई । नितिन गुप्ता को अपनी तरफ मिलाना अनुज गोयल के लिए इसलिए भी आसान हुआ, क्योंकि खुद नितिन गुप्ता अपनी उम्मीदवारी के संदर्भ में विनय मित्तल के रवैये से आहत थे । असल में, नितिन गुप्ता को विश्वास था कि विनय मित्तल के साथ पीछे उनके जैसे सहयोगात्मक संबंध रहे हैं, उसके कारण विनय मित्तल उनकी मदद करेंगे । लेकिन मदद करना तो दूर की बात, विनय मित्तल ने उनकी उम्मीदवारी के प्रति दुश्मनी जैसा भाव रखा । इसीलिए अनुज गोयल ने जैसे ही उनकी तरफ सहयोग का हाथ बढ़ाया, तो उन्होंने हाथ पकड़ने में देर नहीं लगाई - और फिर वह विनय मित्तल को उखाड़ने के लिए चली जा रही अनुज गोयल की चालों में भी मदद करते हुए दिखने लगे । यह देख/जान कर विनय मित्तल ने नितिन गुप्ता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है । लोगों का कहना है कि विनय मित्तल सेंट्रल काउंसिल के लिए प्रस्तुत अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने की बजाए नितिन गुप्ता की रीजनल काउंसिल के लिए प्रस्तुत उम्मीदवारी के खिलाफ काम करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं । 

Saturday, January 24, 2015

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की सेंट्रल काउंसिल के लिए कभी चुनाव न लड़ने का ऐलान करने के बावजूद चुनावी तैयारी करते दिख रहे अमरेश वशिष्ठ सेंट्रल इंडिया रीजन में अपनी उम्मीदवारी को सचमुच प्रस्तुत करेंगे या समर्थकों की सलाह को मानते हुए चुनाव से दूर रहेंगे

मेरठ । अमरेश वशिष्ठ द्धारा इंस्टीट्यूट की सेंट्रल काउंसिल के लिए अपनी संभावित उम्मीदवारी को लेकर सस्पेंस बनाये रखने के कारण उनके नजदीकियों व शुभचिंतकों के लिए खासी दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है । अपनी उम्मीदवारी को लेकर असमंजसता में चल रहे अमरेश वशिष्ठ के नजदीकियों व शुभचिंतकों के लिए समस्या की बात यह हुई है कि सेंट्रल इंडिया रीजन क्षेत्र से सेंट्रल काउंसिल के लिए उम्मीदवारी प्रस्तुत करने वाले दूसरे उम्मीदवार उनसे अपने साथ जुड़ने के लिए संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उनके लिए उन्हें जबाव देना मुश्किल हो रहा है । नजदीकियों व शुभचिंतकों का कहना है कि अमरेश वशिष्ठ को यदि उम्मीदवार नहीं होना है, तो साफ साफ कहें ताकि वह दूसरे उम्मीदवारों के साथ जुड़ सकें । अमरेश वशिष्ठ के असमंजस के चक्कर में उनके नजदीकी और शुभचिंतक खुद को फँसा हुआ पा रहे हैं । नजदीकियों व शुभचिंतकों का कहना है कि अमरेश वशिष्ठ अपनी उम्मीदवारी को लेकर किसी से 'हाँ' तो किसी से 'अभी देखते हैं' जैसे जबाव देते हैं ।
अमरेश वशिष्ठ के कुछेक नजदीकियों का हालाँकि कहना है कि अमरेश वशिष्ठ ने लगता है कि अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने का मन बना लिया है; और इसीलिए अपनी हर छोटी-बड़ी गतिविधियों की तस्वीरें फेसबुक पर लगाते रहते हैं और प्रत्येक शुभ अवसर पर लोगों को शुभकामनाएँ बाँटते रहते हैं । उनका कहना है कि अमरेश वशिष्ठ जब लोहिड़ी, वसंत पंचमी जैसे मौकों पर लोगों को शुभकामनाएँ दे रहे हों, तो लोगों को उम्मीद करना चाहिए कि वह जल्दी ही सेंट्रल काउंसिल के लिए वोट माँगने आ रहे हैं । इस तर्क में दम तो है, लेकिन फिर सवाल यह है कि अमरेश वशिष्ठ तब अपनी उम्मीदवारी के लिए साफ घोषणा करने से बच क्यों रहे हैं ? उनके नजदीकियों के पास इसका भी बड़ा कन्विन्सिंग जबाव है । उनका कहना है कि अमरेश वशिष्ठ ने खुद तो उम्मीदवारी प्रस्तुत करने का मन बना लिया है, लेकिन इसके लिए अपने समर्थकों को वह राजी नहीं कर पाए हैं । नजदीकियों का दावा है कि उनके कई समर्थक उन्हें चुनावी पचड़े से दूर रहने की ही सलाह दे रहे हैं । अमरेश वशिष्ठ अपने ऐसे समर्थकों को राजी कर लेने के बाद ही अपनी उम्मीदवारी की विधिवत घोषणा करना चाहते हैं ।
अमरेश वशिष्ठ के जो समर्थक उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ हैं, उनका कहना है कि पिछली बार के चुनाव में मिली हार के बाद अमरेश वशिष्ठ ने आगे चुनाव न लड़ने की सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी - ऐसे में अब वह किस मुँह से अपनी उम्मीदवारी लेकर लोगों के पास जायेंगे । इसके अलावा भी, उनके समर्थकों का कहना है कि पिछले दो चुनावों में अमरेश वशिष्ठ ने उम्मीदवार बन कर नतीजा देख लिया है - दोनों ही चुनावों में उनकी खासी बुरी गत बनी । समर्थकों का कहना है कि अगले चुनाव में भी उन्हें किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं करना चाहिए और इसलिए चुनाव के झमेले से दूर ही रहना चाहिए । उल्लेखनीय है कि अमरेश वशिष्ठ ने वर्ष 2009 और वर्ष 2012 में सेंट्रल काउंसिल का चुनाव लड़ा था और दोनों ही बार वह जीत से बहुत दूर ही रहे थे । वर्ष 2009 में सेंट्रल काउंसिल के लिए सेंट्रल इंडिया रीजन में चार सीटों के लिए चुनाव हुआ था, जिसमें 13 उम्मीदवार थे । अमरेश वशिष्ठ उस चुनाव में 10वें नंबर पर रहे थे । वर्ष 2012 में सेंट्रल काउंसिल के लिए सेंट्रल इंडिया रीजन में पाँच सीटों के लिए चुनाव हुआ था, जिसमें 14 उम्मीदवार थे । इस बार अमरेश वशिष्ठ को पिछली बार की तुलना में वोट तो कुछ ज्यादा मिले थे, लेकिन पोजीशन उनकी इस बार भी 10वीं ही थी । इस नतीजे से अमरेश वशिष्ठ को ऐसा झटका लगा था कि उन्होंने भविष्य में कभी चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया था ।
लेकिन जैसे जैसे चुनाव पास आ रहे हैं, अमरेश वशिष्ठ के 'चुनावी कीटाणु' जोर मारते हुए दिख रहे हैं । उनके नजदीकियों का यह कहना उचित ही जान पड़ता है कि यह 'चुनावी कीटाणुओं' का ही असर है कि अमरेश वशिष्ठ लोहड़ी, वसंत पंचमी आदि की भी शुभकामनाएँ लोगों को दे रहे हैं और लोगों की नजरों में बने रहने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं । जो समर्थक उन्हें चुनाव से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं, उन्हें अमरेश वशिष्ठ यह कह कर समझाने/राजी करने का प्रयास कर रहे हैं कि इस बार सेंट्रल इंडिया रीजन में दो सीटें खाली हो रही हैं और इस कारण से उनके लिए सफल होने का अच्छा मौका है । समर्थकों का कहना लेकिन यही है कि मौका तो पिछली बार भी अच्छा था, जब यहाँ एक सीट बढ़ी थी - किंतु अमरेश वशिष्ठ उसका फायदा नहीं उठा पाए थे । पिछले नतीजों को देखते हुए अब की बार भी उनके सफल होने की कोई संभावना नहीं दिखती है । समर्थकों को संभावना भले ही न दिख रही हो, अमरेश वशिष्ठ को जरूर दिख रही है और इसीलिए वह अपनी उम्मीदवारी को प्रस्तुत करने की तैयारी करते नजर आ रहे हैं । वह अपनी उम्मीदवारी को सचमुच प्रस्तुत करेंगे या समर्थकों की सलाह को मानते हुए चुनाव से दूर रहेंगे - यह लेकिन अगले कुछ दिनों में साफ होगा ।