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Monday, June 1, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला को लग रहा है कि जितेंद्र चौहान को डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट दिलवाने की उनकी मुहिम को डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह फेल करने में लगे हुए हैं; और गुरनाम सिंह की तमाम सफाइयों के बावजूद मनोज रुहेला उनकी तरफ से संतुष्ट और आश्वस्त नहीं हो पा रहे हैं

लखनऊ । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में जितेंद्र चौहान को डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट दिलवाने के चक्कर में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह से ही भिड़ गए हैं । मनोज रुहेला का आरोप है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी का समर्थन करने का फैसला गुरनाम सिंह की सहमति और भागीदारी से ही लिया/किया गया था, लेकिन गुरनाम सिंह अब इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए दीपक तलवार को वोट दिलवाने का प्रयास कर रहे हैं । गुरनाम सिंह तरह तरह से मनोज रुहेला को समझा रहे हैं कि वह दीपक तलवार को वोट दिलवाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं, लेकिन मनोज रुहेला उन पर विश्वास नहीं कर रहे हैं और इस मामले में अपनी नाराजगी और विरोध जताने/दिखाने गुरनाम सिंह के घर तक जा पहुँचे । गुरनाम सिंह ने कुछेक लोगों की गवाहियाँ दिलवा कर भी मनोज रुहेला को आश्वस्त करने की कोशिश की - लेकिन लगता नहीं है कि मनोज रुहेला उनके द्वारा करवाई गई गवाहियों से संतुष्ट हुए हैं । जितेंद्र चौहान को वोट दिलवाने की मुहिम में मनोज रुहेला को दरअसल अगले महीने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार संभालने वाले कमल शेखर गुप्ता का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है, इसलिए भी उन्हें शक हुआ है कि कमल शेखर गुप्ता ने कहीं गुरनाम सिंह की शह पर ही तो उनके अभियान से दूरी नहीं बनाई हुई है । मनोज रुहेला के लिए विशाल सिन्हा की वह घोषणा भी मुसीबत बनी हुई है, जिसमें दावा किया गया है कि जितेंद्र चौहान इंटरनेशनल डायरेक्टर चुने जाने के बाद जगदीश अग्रवाल को 'न्याय' दिलवायेंगे । विशाल सिन्हा के इस दावे के चलते जगदीश अग्रवाल के खिलाफ वोट करने/करवाने वाले लोग जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी के विरोध में होते सुने जा रहे हैं ।
मनोज रुहेला जिस तरह से इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में लगे हुए हैं, और डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट जितेंद्र चौहान को दिलवाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं - उसके चलते डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा के रूप में गर्म है कि मनोज रुहेला को जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी में इतनी दिलचस्पी आखिर क्यों है ? मनोज रुहेला को अगली मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन का पद मिलने की चर्चा है, और यह पद उन्हें जितेंद्र चौहान की बदौलत ही मिलने की बात सामने आई है - इस नाते लोगों को यह तो लग रहा है कि मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन का पद दिलवाने का अहसान उतारने के लिए ही मनोज रुहेला ने डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट जितेंद्र चौहान को दिलवाने का जिम्मा ले लिया; किंतु फिर भी डिस्ट्रिक्ट के कई लोगों के लिए जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी के प्रति मनोज रुहेला का रवैया काफी पहेली भरा है । इस मामले में जितेंद्र चौहान जिस तरह से गुरनाम सिंह को निशाना बना रहे हैं, उससे उक्त पहेली और उलझती हुई सी लग रही है । गुरनाम सिंह को निशाना बनाने के पीछे मनोज रुहेला के पास असल में एक बड़ी वजह यह है कि वह अच्छी तरह जानते हैं कि दीपक तलवार की उम्मीदवारी के प्रमुख झंडावरदार पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर विनोद खन्ना के साथ गुरनाम सिंह के बहुत खास संबंध हैं, और दोनों ही जरूरत के समय एक-दूसरे के काम आते रहे हैं । ऐसे में, डिस्ट्रिक्ट में जहाँ कहीं मनोज रुहेला को दीपक तलवार के समर्थन के प्रति आवाज सुनाई देती है, उन्हें लगता है कि उस आवाज को गुरनाम सिंह की शह मिल रही है ।
गुरनाम सिंह का कहना है कि विनोद खन्ना से उनकी वर्षों पुरानी दोस्ती है, तो है - उसे वह किसी चुनाव के लिए खत्म थोड़े ही कर देंगे; लेकिन उनकी दोस्ती का हवाला देकर उन पर यह आरोप लगाना उचित नहीं है कि वह विनोद खन्ना के उम्मीदवार दीपक तलवार को वोट दिलवाने के लिए कोई प्रयास कर रहे हैं । गुरनाम सिंह की तमाम सफाइयों के बावजूद मनोज रुहेला उनकी तरफ से संतुष्ट और आश्वस्त नहीं हो पा रहे हैं । उन्हें लगातार यही लग रहा है कि जितेंद्र चौहान को डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट दिलवाने की उनकी मुहिम को गुरनाम सिंह फेल करने में लगे हुए हैं । मनोज रुहेला के नजदीकियों से ही सुनने को मिला है कि मनोज रुहेला लगातार जितेंद्र चौहान के संपर्क में रहते हैं, और उनसे पूछते रहते हैं कि उनके डिस्ट्रिक्ट से उन्हें कहीं से किसी और उम्मीदवार के समर्थन की आवाजें तो सुनाई नहीं दे रही हैं । समझा जाता है कि मनोज रुहेला को कहीं से यह फीडबैक जरूर मिला है कि दीपक तलवार को उनके डिस्ट्रिक्ट में समर्थन और वोट मिल रहा है । इससे मनोज रुहेला को पक्का विश्वास हो गया कि उनके डिस्ट्रिक्ट में दीपक तलवार को जो भी समर्थन और वोट मिलने की संभावना बन रही है, उसके पीछे अवश्य ही गुरनाम सिंह का हाथ है । मनोज रुहेला ने इसे लेकर गुरनाम सिंह के घर जाकर अपनी नाराजगी और शिकायत दर्ज कराई है । देखना दिलचस्प होगा कि गुरनाम सिंह पर दबाव बना कर मनोज रुहेला डिस्ट्रिक्ट में दीपक तलवार को वोट मिलने की संभावना पर सचमुच रोक लगा पाते हैं या नहीं ?     

Tuesday, May 19, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद गवाँ देने वाले जगदीश अग्रवाल तो गुरनाम सिंह की खुशामद में जुटे, लेकिन विशाल सिन्हा ने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के उम्मीदवार जितेंद्र चौहान का नाम लेकर मामले को दिलचस्प बनाया

लखनऊ । सेकेंड से फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की आसान सी कोशिश में जगदीश अग्रवाल के मात खा जाने के बाद से डिस्ट्रिक्ट के चुनावी राजनीति के परिदृश्य के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में भी बड़ी उथल-पुथल के संकेत मिल रहे हैं - और इस उथल पुथल के केंद्र वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर गुरनाम सिंह बन रहे हैं । एक तरफ तो जगदीश अग्रवाल और उनके नजदीकी व शुभचिंतक गुरनाम सिंह को मनाने तथा जगदीश अग्रवाल के प्रति उनकी नाराजगी को दूर करने के प्रयासों में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का कार्यभार संभालने की तैयारी कर रहे कमल शेखर गुप्ता ने अचानक से गुरनाम सिंह के गीत गाना शुरू कर दिया है । कमल शेखर गुप्ता के तेजी से बदले रवैये ने पूर्व गवर्नर विशाल सिन्हा के लिए डिस्ट्रिक्ट की राजनीतिक व प्रशासनिक व्यवस्था में अस्तित्व का संकट पैदा कर दिया है । जगदीश अग्रवाल और उनके नजदीकियों को विश्वास है कि वह जल्दी ही गुरनाम सिंह की नाराजगी दूर कर लेंगे तथा हार जाने के बाद भी सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद हासिल कर लेंगे । जगदीश अग्रवाल और उनके नजदीकियों के प्रयासों और विश्वास को देख/जान कर गुरनाम सिंह के कहने पर नेगेटिव वोट डालने वाले लायंस को चिंता होने लगी है कि गुरनाम सिंह क्या सचमुच जगदीश अग्रवाल को माफ़ कर देंगे और उनके साथ धोखा करेंगे ? गुरनाम सिंह के नजदीकियों के बीच भी इस बात को लेकर मतभेद हैं कि जगदीश अग्रवाल के मामले में गुरनाम सिंह आखिर क्या करेंगे ? कुछेक को लगता है कि गुरनाम सिंह अंततः जगदीश अग्रवाल की खुशामद से मान जायेंगे और उन्हें माफ़ कर देंगे और उन्हें सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनाने के जुगाड़ में लग जायेंगे; लेकिन अन्य कुछेक को लगता है कि गुरनाम सिंह उन लोगों के भरोसे को नहीं तोड़ेंगे, जिन्होंने उन पर भरोसा करके सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए जगदीश अग्रवाल के खिलाफ नेगेटिव वोटिंग की और उन्हें हरवाया ।
उधर विशाल सिन्हा ने जगदीश अग्रवाल के खिलाफ हुई नेगेटिव वोटिंग के सफल होने के बाद बने माहौल में इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के सबसे मजबूत समझे जाने वाले उम्मीदवार जितेंद्र चौहान को घसीट कर मामले को और दिलचस्प बना दिया है । अपने आप को जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी के एक सक्रिय समर्थक के रूप में दिखा/जता रहे विशाल सिन्हा ने जितेंद्र चौहान के साथ अपनी नजदीकियत का वास्ता देते हुए कुछेक लोगों के बीच दावा किया है कि जितेंद्र चौहान इंटरनेशनल पद का चुनाव जीतने के बाद जगदीश अग्रवाल के मामले को निपटवायेंगे और लायंस इंटरनेशनल कार्यालय से जगदीश अग्रवाल को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की कुर्सी दिलवायेंगे । दरअसल जगदीश अग्रवाल की मौजूदा मुसीबत के लिए विशाल सिन्हा को ही जिम्मेदार माना/ठहराया जा रहा है । डिस्ट्रिक्ट में हर किसी का मानना और कहना है कि विशाल सिन्हा की राजनीति ही जगदीश अग्रवाल को ले डूबी है । असल में पहले कमल शेखर गुप्ता और फिर जगदीश अग्रवाल की चुनावी जीत को विशाल सिन्हा अपनी जीत के रूप में देखने/समझने लगे थे, और अपने आप को गुरनाम सिंह से भी बड़ा नेता मानने/जताने लगे थे । समझा जाता है कि विशाल सिन्हा की शह पर ही जगदीश अग्रवाल ने गुरनाम सिंह को तवज्जो देना बंद कर दिया था, और उनके बारे में बकवासबाजी करने लगे थे । विशाल सिन्हा के उकसावे पर जगदीश अग्रवाल का रवैया हर किसी के प्रति उपेक्षापूर्ण और अपमानजनक हो गया था, तथा वह अन्य किसी को तवज्जो देने से कतराने लगे थे । विशाल सिन्हा के चक्कर में जगदीश अग्रवाल ने बहुत से लोगों को अपना दुश्मन बना लिया था । चूँकि हर कोई जगदीश अग्रवाल की मौजूदा मुसीबत के लिए विशाल सिन्हा को जिम्मेदार ठहरा रहा है, इसलिए विशाल सिन्हा ने जितेंद्र चौहान का नाम लेकर जगदीश अग्रवाल को 'बचाने' की बात करना शुरू किया है ।
विशाल सिन्हा की बदकिस्मती लेकिन यह है कि डिस्ट्रिक्ट में हर कोई उनकी चाल को समझ रहा है और मान रहा है कि जितेंद्र चौहान का नाम लेकर विशाल सिन्हा - जगदीश अग्रवाल को नहीं, बल्कि अपने आप को 'बचाने' की कोशिश कर रहे हैं । विशाल सिन्हा यह दिखाने/जताने का प्रयास कर रहे हैं कि गुरनाम  सिंह ने भले ही जगदीश अग्रवाल को मुसीबत में डाल दिया है, लेकिन जितेंद्र चौहान की मदद से वह जगदीश अग्रवाल को बचायेंगे । इस तरह के दावे के जरिये, विशाल सिन्हा वास्तव में डिस्ट्रिक्ट की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में अपना अस्तित्व बचाने का प्रयास कर रहे हैं । विशाल सिन्हा दरअसल यह देख कर हक्के-बक्के हुए हैं कि जगदीश अग्रवाल के चुनाव का नतीजा आने के बाद से कमल शेखर गुप्ता ने जोरशोर से गुरनाम सिंह के गीत गाना शुरू कर दिया है, और यह दिखाना/जताना शुरू किया है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वह वही और वैसा ही करेंगे, जैसा गुरनाम सिंह कहेंगे । कमल शेखर गुप्ता हालाँकि पहले से भी गुरनाम सिंह की गुडबुक में रहने की कोशिश कर रहे थे, और उनसे सलाह/सुझाव ले रहे थे - लेकिन ज्यादा नजदीक वह विशाल सिन्हा के ही थे । माना/समझा जा रहा था कि कमल शेखर गुप्ता के गवर्नर-वर्ष में 'असली गवर्नर' विशाल सिन्हा ही रहेंगे - लेकिन जगदीश अग्रवाल की हुई हालत देख कर कमल शेखर गुप्ता ने जिस तरह से पलटी मारी है, उसके चलते विशाल सिन्हा को डिस्ट्रिक्ट की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था से अपना पत्ता कटता नजर आ रहा है । डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि गुरनाम सिंह यदि जगदीश अग्रवाल की खुशामद से मान जाते हैं, और लायंस इंटरनेशनल कार्यालय से जगदीश अग्रवाल को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनवाने का कोई जुगाड़ लगा लेते हैं - तो विशाल सिन्हा उसे अपनी 'जीत' के रूप में प्रचारित करके उसका श्रेय लेने की कोशिश करेंगे; और इसीलिए उन्होंने जितेंद्र चौहान का नाम लेकर जगदीश अग्रवाल की मदद करने/करवाने का राग छेड़ दिया है ।