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Sunday, August 16, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में गुरनाम सिंह की राजनीति के सामने जगदीश अग्रवाल की तमाम कोशिशें अंततः विफल रहीं और फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का चुनाव बीएम श्रीवास्तव ने जीत लिया

लखनऊ । फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए आज पूर्वाह्न दोबारा हुए चुनाव का नतीजा तो वही निकला, जो अपेक्षित था - और जिसके तहत बीएम श्रीवास्तव की जीत हुई; लेकिन चुनावी जीत का अंतर अप्रत्याशित रहा । जीत का श्रेय वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह को दिया जा रहा है, तो जीत के अंतर के कम होने में भी गुरनाम सिंह को लगे झटके के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । आज हुए चुनाव का अप्रत्याशित दृश्य पूर्व गवर्नर नीरज बोरा की उपस्थिति का भी रहा । नीरज बोरा पिछले काफी समय से डिस्ट्रिक्ट की गतिविधियों में नजर नहीं आए हैं, लेकिन इस चुनाव में उन्होंने खासी सक्रियता के साथ जगदीश अग्रवाल का झंडा उठाया - हालाँकि फिर भी जगदीश अग्रवाल चुनाव हार गए । जगदीश अग्रवाल के लिए विडंबना की बात यह रही कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद उन्होंने एक वोट से जीता था - नेगेटिव वोटिंग के कारण उनके फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न बन पाने के कारण दोबारा हुआ चुनाव लेकिन वह एक वोट से हार गए । जगदीश अग्रवाल ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपने घमंडभरे रवैये के लिए प्रत्येक पूर्व गवर्नर से माफी माँगी और भविष्य में वैसा रवैया न दिखाने के लिए उन्हें आश्वस्त किया, लेकिन फिर भी वह वोट डालने वाले 23 गवर्नर्स में से 11 का ही समर्थन जुटा सके और इस तरह 12 वोट पाकर बीएम श्रीवास्तव ने उनसे अपनी हार का बदला ले लिया । 
मजे की बात यह रही कि दोनों उम्मीदवारों को उम्मीद से कम वोट मिलने की शिकायत रही, और इस तरह दोनों ही उम्मीदवारों तथा उनके नेताओं को धोखा खाने का गम हुआ । जगदीश अग्रवाल और उनके समर्थकों को 14 वोट मिलने की उम्मीद थी - लिहाजा चुनावी नतीजा घोषित होने के बाद वह उन तीन गवर्नर्स को 'खोज' रहे हैं, जिन्होंने उन्हें धोखा दिया । बीएम श्रीवास्तव और उनके समर्थकों को 16 वोट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन चुनाव जीत जाने की खुशी व संतुष्टि में वह इस बात को लेकर ज्यादा परेशान नहीं हैं कि किन किन लोगों ने उन्हें धोखा दिया । जगदीश अग्रवाल ने चुनाव जीतने के लिए हर हथकंडा अपनाया । शुरू में लग रहा था कि उन्हें छह/सात से ज्यादा वोट नहीं मिलेंगे, लेकिन तरह तरह के हथकंडों के चलते उन्होंने अपने समर्थन को बढ़ाया । जगदीश अग्रवाल की बड़ी कामयाबी यह रही कि उन्होंने गुरनाम सिंह के सहयोग/समर्थन से गवर्नर बने तथा हाल के दिनों तक उनके खास रहे कई गवर्नर्स का समर्थन प्राप्त कर लिया । लेकिन उनके लिए गुरनाम सिंह की राजनीति से निपट पाना मुश्किल हुआ ।
दरअसल फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए दोबारा हुआ चुनाव जिस तरह से गुरनाम सिंह की राजनीति व प्रतिष्ठा के साथ जुड़ गया था, उसके कारण ही तमाम अनुकूलताओं के बावजूद जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी का भट्टा बैठ गया । जगदीश अग्रवाल की जीत को गुरनाम सिंह के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा था, और इसके चलते जगदीश अग्रवाल के समर्थन में जुटे गुरनाम सिंह के नजदीकियों के बीच भरोसा नहीं बन सका - विशाल सिन्हा को हर समय संजय चोपड़ा व प्रमोद सेठ पर शक रहा, क्योंकि जगदीश अग्रवाल के खिलाफ नेगेटिव वोटिंग करवाने में इनका खासा सहयोग रहा था; तो संजय चोपड़ा व प्रमोद सेठ लगातार जगदीश अग्रवाल को आगाह करते रहे कि विशाल सिन्हा की बदनामी के कारण ही वह फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं बन सके हैं, इसलिए उनसे बच कर रहना । गुरनाम सिंह के नजदीकी रहे यह लोग एचएस सच्चर के समर्थन पर संदेह करते रहे, तो एचएस सच्चर की तरफ से जगदीश अग्रवाल को सावधान किया जाता रहा कि गुरनाम सिंह के लोगों पर भरोसा मत करना । तीन दिन पहले ही मनोज रुहेला ने यह कहते/बताते हुए बीएम श्रीवास्तव और उनके समर्थकों के पसीने ला दिए थे कि इंटरनेशनल डायरेक्टर एंडॉर्सी जितेंद्र चौहान ने उन्हें जगदीश अग्रवाल का समर्थन करने के लिए कहा है । मनोज रुहेला के यह 'बताने' से बीएम श्रीवास्तव तथा उनके नजदीकियों ने मान/समझ लिया था कि मनोज रुहेला भी जगदीश अग्रवाल के साथ जा मिले हैं । कुछेक लोगों को छोड़कर, अधिकतर लोगों में यह कहना/बताना तो कयास लगाना होगा कि किसने किस को वोट दिया है - तथ्य सिर्फ यह है कि गुरनाम सिंह की राजनीति के सामने जगदीश अग्रवाल की तमाम कोशिशें अंततः विफल रहीं और फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का चुनाव बीएम श्रीवास्तव ने जीत लिया है ।            

Saturday, July 4, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में बीएम श्रीवास्तव के कैबिनेट सेक्रेटरी बनने में गुरनाम सिंह और केएस लूथरा के बीच राजनीतिक गठजोड़ मजबूत होने के संकेत देखे/पहचाने जा रहे हैं, जिसमें बीएम श्रीवास्तव के साथ तेजेंद्रपाल सिंह की भी 'दाल' गलती हुई नजर आ रही है

लखनऊ । बीएम श्रीवास्तव के कैबिनेट सेक्रेटरी बनने में, उनके फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'चुने' जाने की राह खुलती/बनती हुई नजर आ रही है । माना/समझा जा रहा है कि बीएम श्रीवास्तव को कैबिनेट सेक्रेटरी बनाने का फैसला डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कमल शेखर गुप्ता ने वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह के दबाव में लिया है । बीएम श्रीवास्तव को पूर्व गवर्नर केएस लूथरा के नजदीकी के रूप में देखा/पहचाना जाता है, और इस नाते कमल शेखर गुप्ता उन्हें कैबिनेट सेक्रेटरी बनाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन गुरनाम सिंह के दबाव के सामने उनकी एक न चली और उन्हें बीएम श्रीवास्तव को कैबिनेट सेक्रेटरी बनाने के लिए मजबूर होना ही पड़ा । बीएम श्रीवास्तव को कैबिनेट सेक्रेटरी बनवाने में गुरनाम सिंह ने जिस तरह से दिलचस्पी ली है, उसे देख कर ही समझा जा रहा है कि गुरनाम सिंह ने बीएम श्रीवास्तव को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में 'देखना' शुरू कर दिया है । उल्लेखनीय है कि नेगेटिव वोटिंग के कारण जगदीश अग्रवाल के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुने जाने में असफल रहने के बाद, खाली रह गए फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद के लिए चुनाव/चयन होना है - जिसके लिए बीएम श्रीवास्तव को प्रमुख उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । मजे की बात यह है कि इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट की सत्ता में वह लोग हैं, जो करीब पंद्रह महीने पहले हुए चुनाव में बीएम श्रीवास्तव की उम्मीदवारी के खिलाफ थे, और जिनकी खिलाफत के कारण बीएम श्रीवास्तव चुनाव हार गए थे । लेकिन पिछले पंद्रह महीनों में गोमती में बहुत से पानी बह गया है, और हालात इस कदर बदल गए हैं कि जगदीश अग्रवाल को नेगेटिव वोटिंग के जरिये बाहर कर दिया गया है - और फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी खाली हो गई है ।
मजे की बात यह भी है कि बीएम श्रीवास्तव को भले ही केएस लूथरा के नजदीकी के रूप देखा/पहचाना जाता है, लेकिन पिछले से पिछले लायन वर्ष में हुए चुनाव में बीएम श्रीवास्तव ने केएस लूथरा को अपने चुनाव अभियान से दूर रख कर 'लगभग बेइज्जत' किया था । बीएम श्रीवास्तव का कहना था कि केएस लूथरा उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में यदि सक्रिय 'दिखेंगे' तो उन्हें वोटों का नुकसान पहुँचायेंगे; बीएम श्रीवास्तव की हिदायत थी कि केएस लूथरा उन्हें दूर से ही समर्थन दें, उन्हें चुनाव जितवाने का काम मनोज रुहेला कर लेंगे । मनोज रुहेला उस समय फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर थे, और बीएम श्रीवास्तव की उम्मीदवारी की कमान उनके ही हाथ में थी । उस समय लेकिन बीएम श्रीवास्तव चुनाव हार गए थे - और सिर्फ चुनाव ही नहीं हार गए थे, चुनाव अभियान के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में 'वोटरों को लुभाने का सामान' ले जाने के मामले में पुलिसिया झमेले में भी फँस गए थे । बहरहाल, जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है कि तब से अब तक गोमती में बहुत सा पानी बह चुका है, और डिस्ट्रिक्ट में हालात खासे बदल चुके हैं । डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव गुरनाम सिंह और केएस लूथरा के नजदीक आने के रूप में हुआ है । दरअसल, गुरनाम सिंह का नाम लेकर विशाल सिन्हा ने जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट में अपनी 'दुकान' जमाने/चलाने की कोशिश की, उससे गुरनाम सिंह को खासा तगड़ा झटका लगा । वास्तव में, विशाल सिन्हा की शह पर ही जगदीश अग्रवाल कई पूर्व गवर्नर्स के साथ-साथ गुरनाम सिंह को लेकर भी तरह तरह की बकवासबाजी कर रहे थे । उसके बाद ही, गुरनाम सिंह ने जगदीश अग्रवाल और विशाल सिन्हा से एकसाथ पीछा छुड़ाने की तैयारी की, जिसमें उन्हें केएस लूथरा का पूरा सहयोग मिला । समझा जाता है कि जिन केएस लूथरा को पिछले से पिछले लायन वर्ष में बीएम श्रीवास्तव ने अपने चुनाव अभियान से दूर रखा था, उन्हीं केएस लूथरा की कोशिशों से गुरनाम सिंह नेगेटिव वोटिंग के कारण खाली हुई फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी के लिए बीएम श्रीवास्तव के नाम पर विचार के लिए तैयार हुए हैं ।
केएस लूथरा की सिफारिश पर बीएम श्रीवास्तव के नाम पर तैयार होने के लिए गुरनाम सिंह पर लायंस क्लब शाहजहाँपुर विशाल के वरिष्ठ सदस्य तेजेंद्रपाल सिंह की भी सिफारिश है । तेजेंद्रपाल सिंह इस वर्ष होने वाले सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार होने/बनने की तैयारी में हैं, और उन्हें गुरनाम सिंह के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । उनके साथ-साथ लायंस क्लब काशीपुर ग्रेटर के वरिष्ठ सदस्य अपूर्व मेहरोत्रा को भी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी में देखा/सुना जा रहा है, जिन्हें केएस लूथरा का समर्थन बताया/सुना जा रहा है । तेजेंद्रपाल सिंह के लिए मुसीबत की बात यह है कि शाहजहाँपुर के दोनों पूर्व गवर्नर्स - प्रमोद सेठ और संजय चोपड़ा उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ हैं, और इस कोशिश में हैं कि कैसे भी करके वह उनका खेल बिगाड़े और शाहजहाँपुर में तीसरा गवर्नर न बनने दें । ऐसे में, तेजेंद्रपाल सिंह को केएस लूथरा की मदद की जरूरत है, केएस लूथरा के साथ उनके अच्छे संबंध रहे भी हैं - उन अच्छे संबंधों को अब वह राजनीतिक समीकऱण में बदलना चाहते हैं । तेजेंद्रपाल सिंह के नजदीकियों का कहना/बताना है कि तेजेंद्रपाल सिंह ने गुरनाम सिंह को सलाह दी है कि वह यदि बीएम श्रीवास्तव को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनवा देते हैं, तो इस वर्ष होने वाले सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में केएस लूथरा को समर्थन के लिए राजी किया जा सकेगा - अपूर्व मेहरोत्रा को अगली बार के लिए हरी झंडी दे दी जाएगी । फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की खाली सीट को भरने के लिए गुरनाम सिंह क्या फैसला करेंगे, यह तो जब फैसला होगा तभी पता चलेगा - लेकिन बीएम श्रीवास्तव के कैबिनेट सेक्रेटरी बनने से यह संकेत जरूर मिलता है कि बीएम श्रीवास्तव को लेकर गुरनाम सिंह का रवैया सकारात्मक तो हुआ है ।  

Tuesday, June 23, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में मल्टीपल के नियम-कानूनों का खुल्लमखुल्ला मजाक बनाने वाले डिस्ट्रिक्ट 321 डी के गवर्नर गुरमीत सिंह मक्कड़ के मल्टीपल का वाइस चेयरमैन बनने में संस्था की पहचान व साख के खराब होने का कारण देखा/बताया जा रहा है

गाजियाबाद । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में अगले लायन वर्ष के पदाधिकारियों के चुनाव में डिस्ट्रिक्ट 321 डी के गवर्नर गुरमीत सिंह मक्कड़ यदि सचमुच वाइस चेयरमैन बने, जैसी कि चर्चा है - तो यह मल्टीपल के इतिहास की अनोखी विरोधाभासी घटना होगी, जिसमें कि एक ऐसा गवर्नर मल्टीपल पदाधिकारी बनेगा, जिसने गवर्नर के रूप में मल्टीपल के नियमों का मजाक बनाने का काम किया है । इसे दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना के रूप में ही देखा/पहचाना जा रहा है कि जिन गुरमीत सिंह मक्कड़ ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की चुनावी प्रक्रिया में अभी करीब डेढ़/दो महीने पहले ही मल्टीपल के नियम-कानून को ठेंगा दिखाया था, वह मल्टीपल के पदाधिकारी बनेंगे । उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट 321 डी में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए ऐन मौके पर अचानक से प्रस्तुत हुई बलराज कुमार की उम्मीदवारी को लेकर शिकायत थी, कि नियमानुसार वह उम्मीदवार होने की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं और इसलिए उनके नामांकन को रद्द किया जाना चाहिए । इस मामले में डिस्ट्रिक्ट में सुनवाई न होती देख शिकायतकर्ताओं ने मल्टीपल के पदाधिकारियों तक भी शिकायत पहुँचाई, जहाँ उनकी शिकायत को सही माना/पाया गया ।
मल्टीपल की कॉन्स्टीट्यूशन एंड बॉयलॉज कमेटी के चेयरमैन एमआर शर्मा ने रिकॉर्ड्स देख कर साफ शब्दों में कहा कि मल्टीपल व इंटरनेशनल के नियमों के अनुसार, बलराज कुमार की उम्मीदवारी नहीं बनती है, और यदि उनकी उम्मीदवारी के लिए नामांकन हुआ है तो उसे तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में गुरमीत सिंह मक्कड़ ने लेकिन इतने साफ शब्दों में दिए गए फैसले को रद्दी की टोकरी के हवाले किया और बलराज कुमार की उम्मीदवारी को बना रहने दिया । गुरमीत सिंह मक्कड़ के इस रवैये को रेखांकित करते हुए ही सवाल उठ रहे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जिस व्यक्ति ने मल्टीपल के फैसले का सम्मान करने/रखने की कोई जरूरत नहीं समझी, उसे मल्टीपल का पदाधिकारी क्यों बनाया जाना चाहिए ? गुरमीत सिंह मक्कड़ के खिलाफ पैसों के गड़बड़ी तथा लूट-खसोट के भी कई गंभीर आरोप हैं । चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए ऑनलाइन हुई डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में रजिस्ट्रेशन के नाम पर प्रति प्रतिनिधि 1250 रुपए बसूलने की उनकी कार्रवाई को 'अपनी जेब भरने' की कार्रवाई के रूप में देखा/पहचाना गया है । ड्यूज के नाम पर अन्य गड़बड़झाले करने को लेकर भी गुरमीत सिंह मक्कड़ के खिलाफ गंभीर आरोप हैं ।
गुरमीत सिंह मक्कड़ के डिस्ट्रिक्ट - डिस्ट्रिक्ट 321 डी के कई पूर्व गवर्नर्स के साथ-साथ मल्टीपल के अन्य डिस्ट्रिक्ट्स के भी कई लोगों का मानना और कहना है कि मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के पदाधिकारियों का चयन/चुनाव करने वाले वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को कम से कम इतना ध्यान तो रखना ही चाहिए कि लायनिज्म के नाम पर पैसे बनाने तथा नियम-कानूनों की खुली अवहेलना करने वाले लोगों को न चुने - क्योंकि इससे अंततः संस्था की पहचान और साख ही खराब होती है । मजे की बात यह है कि गुरमीत सिंह मक्कड़ का मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन बनना अभी हाल ही में तब तय हुआ, जब इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए गुरमीत सिंह मक्कड़ ने जितेंद्र चौहान को वोट दिलाने की जिम्मेदारी ली । उससे पहले मल्टीपल के वाइस चेयरमैन पद के लिए डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला का नाम चल रहा था । लेकिन इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के चुनाव में जितेंद्र चौहान के लिए ज्यादा फायदेमंद होकर गुरमीत सिंह मक्कड़ ने मल्टीपल काउंसिल के वाइस चेयरमैन का पद मनोज रुहेला से छीन लिया । गुरमीत सिंह मक्कड़ शायद पहले गवर्नर होंगे, जो मल्टीपल के नियम-कानूनों की सीधे-सीधे ऐसीतैसी करने के बावजूद, मल्टीपल के पदाधिकारी बनेंगे !

Sunday, June 21, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में अगले वाइस चेयरमैन पद को लेकर नेताओं के बीच बने असमंजस में मनोज रुहेला की जगह गुरमीत सिंह मक्कड़ का पलड़ा भारी होता हुआ नजर आ रहा है

लखनऊ । मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 321 में अगले लायन वर्ष के वाइस चेयरमैन पद पर डिस्ट्रिक्ट 321 डी के गवर्नर गुरमीत सिंह मक्कड़ की ताजपोशी होने की चर्चाओं से डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के गवर्नर मनोज रुहेला के नजदीकियों और समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है । यह झटका इसलिए लगा है, क्योंकि अभी तक अगले वाइस चेयरमैन के रूप में मनोज रुहेला के नाम की चर्चा सुनी जा रही थी । समझा जा रहा था कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट में जितेंद्र चौहान के नाम को एंडोर्स करवाने के लिए मनोज रुहेला इसीलिए जोरशोर से लगे हुए थे । उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए जितेंद्र चौहान के पक्ष में बिछाई गई चौसर की तैयारी मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के भावी पदाधिकारियों के चयन/चुनाव से ही शुरू हुई थी । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जितेंद्र चौहान की चुनावी व्यूह रचना में डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन को थोड़ा 'टफ' समझा जा रहा था, क्योंकि इस डिस्ट्रिक्ट के दो बड़े नेताओं में एक गुरनाम सिंह को विनोद खन्ना के साथ नजदीकी के चलते दीपक तलवार के तथा दूसरे नेता केएस लूथरा को तेजपाल खिल्लन के समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जा रहा था । ऐसे में, जितेंद्र चौहान की तरफ से इस डिस्ट्रिक्ट में पकड़ बनाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला को 'साधा' गया । समझा जाता है कि साधने की इसी प्रक्रिया के तहत मनोज रुहेला को अगले वाइस चेयरमैन का पद ऑफर हुआ होगा ।
मनोज रुहेला और उनके नजदीकियों व समर्थकों ने जितेंद्र चौहान के लिए कस कर काम किया, और इस चक्कर में मनोज रुहेला को 'गड़बड़ी करते सुने गए' गुरनाम सिंह से भी भिड़ना पड़ा था । जितेंद्र चौहान की बंपर जीत में मनोज रुहेला की भूमिका को उल्लेखनीय माना/पहचाना गया था । दरअसल इसीलिए, मनोज रुहेला के नजदीकियों और समर्थकों को अब जब यह सुनने को मिल रहा है कि वह अगली मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन नहीं बन रहे हैं, तो उन्हें झटका लगा है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट को लेकर मची आपाधापी में व्यस्त रहने के चलते दरअसल मल्टीपल काउंसिल की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले नेताओं को भी इसका पता नहीं चल पाया कि वाइस चेयरमैन पद के लिए कब मनोज रुहेला की जगह गुरमीत सिंह मक्कड़ का नाम आ गया । इस बारे में, नेताओं ने भावी चेयरमैन क्षितिज शर्मा और भावी सेक्रेटरी राजीव अग्रवाल से टोह लेने की भी कोशिश की, लेकिन इन दोनों ने मामले से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए अपने मुँह बंद ही रखे । इन दोनों के इस रवैये से नेताओं को यह अहसास तो हुआ ही है कि 'खेल' ऊपर के लेबल पर हुआ है, जिसकी जानकारी खेल से जुड़े दूसरे खिलाड़ियों को या तो सचमुच है नहीं, या वह अपना मुँह बंद रखने में ही अपनी भलाई देख रहे हैं ।
जितनी जो जानकारी मिली है, उसे जोड़कर देखने से अनुमान लगाया जा रहा है कि यह खेल इंटरेनशनल डायरेक्टर पद के एंडोर्समेंट के लिए हुई वोटिंग से आठ/दस दिन पहले के दिनों का है । दरअसल डिस्ट्रिक्ट 321 डी के पूर्व गवर्नर और पूर्व मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन एसएल कपूर को दीपक तलवार के समर्थन में अचानक से सक्रिय हुआ देख कर जितेंद्र चौहान और उनके नजदीकियों का माथा ठनका था । एसएल कपूर को चूँकि पूर्व प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल के खास नजदीकी के रूप में देखा/पहचाना जाता है, इसलिए एसएल कपूर की सक्रियता के पीछे नरेश अग्रवाल की किसी 'योजना' की आशंका का डर बना । इस डर से निपटने के लिए जितेंद्र चौहान की तरफ से डिस्ट्रिक्ट 321 डी के गवर्नर गुरमीत सिंह मक्कड़ की मदद ली गई । समझा जाता है कि उसी मदद के चक्कर में अगली मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन के पद से मनोज रुहेला की छुट्टी होने का मौका बन गया था । मनोज रुहेला के कुछेक नजदीकियों और समर्थकों को हालाँकि अभी भी उम्मीद है कि अगली मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन मनोज रुहेला ही बनेंगे, लेकिन मल्टीपल की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के बीच जोरदार चर्चा गुरमीत सिंह मक्कड़ के वाइस चेयरमैन बनने की ही है । 

Tuesday, June 16, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में हुए चुनाव के खिलाफ पिटीशन दायर करने के बाद जगदीश अग्रवाल द्वारा फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद पर बहाली के लिए पूर्व गवर्नर्स की तरफ से ज्ञापन भिजवाने को लेकर शुरू किया गया तमाशा, विशाल सिन्हा की ठगी का कोई नया जुगाड़ है क्या ?

लखनऊ । नेगेटिव वोट के चलते फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न चुने जा सके जगदीश अग्रवाल के लिए विडंबना यह बनी है कि जिन विशाल सिन्हा को उनकी 'दुर्गति' के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जगदीश अग्रवाल ने उन्हीं विशाल सिन्हा को अपनी स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी सौंप दी है । विशाल सिन्हा ने मौके का फायदा उठाते हुए जगदीश अग्रवाल को बरगलाना शुरू कर दिया है, जिसे देख कर डिस्ट्रिक्ट में लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि जगदीश अग्रवाल एक बार फिर विशाल सिन्हा से ठगे जायेंगे - और पायेंगे कुछ नहीं । विशाल सिन्हा ने पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की तरफ से लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों को संबोधित एक ज्ञापन भिजवाये जाने की तैयारी करने का एक नया तमाशा शुरू किया है, जिसमें जगदीश अग्रवाल को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'बनाने' का अनुरोध किया जायेगा । विशाल सिन्हा ने जगदीश अग्रवाल को आश्वस्त किया है कि पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की तरफ से जैसे ही यह ज्ञापन लायंस इंटरनेशनल कार्यालय पहुँचेगा, कार्यालय के पदाधिकारी तुरंत से जगदीश अग्रवाल को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर घोषित कर देंगे । विशाल सिन्हा ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला तथा अन्य दो-चार पूर्व गवर्नर्स से उक्त ज्ञापन पर वह हस्ताक्षर करवा देंगे । विशाल सिन्हा के झाँसे में आकर बेचारे जगदीश अग्रवाल ने पूर्व गवर्नर्स से मिलना/जुलना शुरू कर दिया है, ताकि इंटरनेशनल कार्यालय भेजे जाने वाले ज्ञापन पर उनके हस्ताक्षर लिए जा सकें । कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने लेकिन इस बात को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' के रूप में देखा/समझा है । उनका कहना है कि पूर्व गवर्नर्स के कहने से फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनाने का लायंस इंटरनेशनल में कोई प्रावधान नहीं है; और ऐसा बता/समझा कर विशाल सिन्हा वास्तव में जगदीश अग्रवाल को ठगने की ही तैयारी कर रहे हैं ।
मजे की बात यह है कि जगदीश अग्रवाल ने अपनी चुनावी पराजय को लेकर लायंस इंटरनेशनल में पिटीशन भी डाला हुआ है, और चुनावी प्रक्रिया पर आरोप लगाते हुए चुनाव में बेईमानी होने की शिकायत की हुई है । उस पिटीशन के पीछे भी विशाल सिन्हा की सलाह को ही देखा/पहचाना जा रहा है । पूर्व गवर्नर्स का कहना है कि जगदीश अग्रवाल ने जब पिटीशन डाली हुई है, तब उन्हें लायंस इंटरनेशनल के फैसले का इंतजार करना चाहिए - और उस फैसले का सम्मान करने के लिए तैयार रहना चाहिए । पूर्व गवर्नर्स का कहना है कि उन्हें हैरानी है कि पिटीशन करने के बाद - फैसले का इंतजार करने की बजाये, जगदीश अग्रवाल ने पूर्व गवर्नर्स की तरफ से ज्ञापन भिजवाने का यह तमाशा क्यों शुरू कर दिया है ? जगदीश अग्रवाल की तरफ से ही लोगों को पता चला है कि पिटीशन और इस नए तमाशे के पीछे विशाल सिन्हा ही हैं । दरअसल विशाल सिन्हा को पता है कि जगदीश अग्रवाल की पिटीशन में कोई दम नहीं है, और उसे रिजेक्ट ही होना है - इसलिए पिटीशन पर होने वाले फैसले का इंतजार करने की बजाये विशाल सिन्हा ने जगदीश अग्रवाल को पूर्व गवर्नर्स से मिलने और उन्हें ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी करने के काम में लगा दिया है । इसके चलते, जगदीश अग्रवाल को उन पूर्व गवर्नर्स से भी मिलना पड़ रहा है, जो उनकी उम्मीदवारी के समर्थक नहीं थे - और इस कारण सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जगदीश अग्रवाल ने उनसे मिलना तो दूर, उनसे बात करना भी जरूरी नहीं समझा था । ऐसे में, अब जरूरत पड़ने पर जगदीश अग्रवाल के मिलने से वह पूर्व गवर्नर्स फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर जगदीश अग्रवाल को बहाल करने की मांग वाले ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे - इसमें संदेह है । इसलिए यह तमाशा भी फ्लॉप होना निश्चित ही है ।
जगदीश अग्रवाल को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद पर बहाल करने की मांग वाले ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने से कई पूर्व गवर्नर्स इसलिए भी बचना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि उनके हस्ताक्षर कर देने के बाद जगदीश अग्रवाल और विशाल सिन्हा डिस्ट्रिक्ट में प्रचारित करेंगे कि उन्होंने पैसे लेकर हस्ताक्षर किए हैं । दरअसल जगदीश अग्रवाल और विशाल सिन्हा ने इसी तरह की हरकत से डिस्ट्रिक्ट में आम और खास लोगों को अपने खिलाफ कर लिया है, जिसके नतीजे में जगदीश अग्रवाल के खिलाफ नेगेटिव वोटिंग हुई और जगदीश अग्रवाल फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं बन सके । लोगों के आरोप तो यहाँ तक हैं कि विशाल सिन्हा ने कई लोगों के नाम पर जगदीश अग्रवाल से पैसे ले लिए, और लोगों को सिर्फ बदनामी मिली । इसलिए ही, जगदीश अग्रवाल के नजदीकियों ने जगदीश अग्रवाल को बार-बार विशाल सिन्हा से सावधान रहने के लिए चेताया है - लेकिन जगदीश अग्रवाल की बदकिस्मती ऐसी है कि वह बेचारे विशाल सिन्हा के साथ ही जा फँसे हैं । विशाल सिन्हा ने जगदीश अग्रवाल को 'दिखाने' के लिए इन दिनों गुरनाम सिंह और मनोज रुहेला के चक्कर लगाने पर जोर दिया हुआ है, जिसके जरिये वह इन दोनों को जगदीश अग्रवाल के पक्ष में राजी कर लेने का भरोसा जगदीश अग्रवाल और उनके नजदीकियों को देने की कोशिश कर रहे हैं । दूसरों को लेकिन लग रहा है कि गुरनाम सिंह और मनोज रुहेला के चक्कर लगाने के जरिये विशाल सिन्हा वास्तव में जगदीश अग्रवाल का नहीं, बल्कि अपना 'काम' बनाने के जुगाड़ में लगे हुए हैं - जिसके चलते जगदीश अग्रवाल का ठगा जाना निश्चित ही है ।

Saturday, June 6, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला की हसरतों में, इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई में जितेंद्र चौहान की बड़ी जीत के चलते, आए उछाल ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की अगले लायन वर्ष की चुनावी लड़ाई को खासा मजेदार बना दिया है

लखनऊ । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जितेंद्र चौहान के भारी मतों से मल्टीपल एंडॉर्सी चुने जाने के 'साइड इफेक्ट्स' दिखने शुरू हो गए हैं, और पहला केस लायंस क्लब शाहजहाँपुर विशाल के वरिष्ठ सदस्य तेजेंद्रपाल सिंह पर हक जताने को लेकर वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला के बीच खींचतान बढ़ने के रूप में सामने आया है । तेजेंद्रपाल सिंह को अगले लायन वर्ष में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । वह यूँ तो गुरनाम सिंह के नजदीक हैं; लेकिन अगले वर्ष की अपनी उम्मीदवारी की तैयारी करते हुए उन्होंने इस वर्ष मनोज रुहेला के साथ भी अपनी अच्छी नजदीकियत बना ली है, और इसके लिए उन्होंने इस वर्ष अच्छे-खासे पैसे भी खर्च किए । लेकिन यही बात अब तेजेंद्रपाल सिंह के लिए मुसीबत बन गई है । मनोज रुहेला उन्हें 'अपने उम्मीदवार' के रूप में देखना चाहते हैं, जबकि तेजेंद्रपाल सिंह को भी लगता है कि वह गुरनाम सिंह के उम्मीदवार के रूप में ही कामयाब हो सकते हैं । यह मामला अभी तक दबे-ढके रूप में चल रहा था; लेकिन जितेंद्र चौहान की जीत के चलते मनोज रुहेला का जो राजनीतिक रुतबा बढ़ा है - उसने मामले को बड़ा और गंभीर बना दिया है । असल में, इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए मल्टीपल एंडॉर्सी के चुनाव में मनोज रुहेला तो जितेंद्र चौहान को वोट दिलाने के अभियान में लगे थे, जबकि खुद मनोज रुहेला का ही आरोप था कि गुरनाम सिंह गुपचुप रूप से दीपक तलवार को वोट दिलवाने की व्यवस्था में जुटे थे । उक्त चुनाव में चूँकि जितेंद्र चौहान की भारी मतों से जीत हुई है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में उसका एक अर्थ यह भी लगाया जा  कि वोट जुटाने के खेल में मनोज रुहेला का पलड़ा भारी हो चला है ।
इसलिए मनोज रुहेला की यह चाहत अब और बढ़ गई है कि डिस्ट्रिक्ट में जिसे चुनाव जीतना हो, उसे उनके उम्मीदवार के रूप में आना/रहना - और 'दिखना' होगा । हालाँकि किसी को विश्वास नहीं है कि डिस्ट्रिक्ट पर अपने नेतृत्व को गुरनाम सिंह आसानी से छोड़ेंगे । जगदीश अग्रवाल वाले मामले में उन्होंने दिखाया ही है कि जो उनके साथ 'टेढ़ा' चलेगा, उसका क्या हाल होगा । ऐसे में, तेजेंद्रपाल सिंह के साथ मुसीबत यह खड़ी हो गई है कि वह किसके उम्मीदवार के रूप में 'दिखें' । उनकी यह मुसीबत इसलिए और बड़ी है, क्योंकि शाहजहाँपुर के दोनों पूर्व गवर्नर्स - प्रमोद सेठ और संजय चोपड़ा उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ हैं । हालाँकि तेजेंद्रपाल सिंह की गुरनाम सिंह के साथ नजदीकियत को जानते/पहचानते हुए वह अभी खिलाफत करते नजर नहीं आ रहे हैं - लेकिन वह इस ताक में जरूर लगते हैं कि तेजेंद्रपाल सिंह का खेल कुछ बिगड़े, तो वह उसे और बिगाड़ने में जुटें । तेजेंद्रपाल सिंह के लिए मुसीबत की बात यह भी है कि गुरनाम सिंह के भरोसे लायंस क्लब काशीपुर सिटी के वरिष्ठ सदस्य सुखविंदर सिंह भी अगले लायन वर्ष में उम्मीदवार होने की इच्छा रखते हैं । लेकिन चूँकि उनके नजदीकियों को ही लगता है कि एक उम्मीदवार के रूप में सक्रियता दिखा पाना उनके लिए मुश्किल होगा, इसलिए उनकी उम्मीदवारी का दावा कमजोर पड़ जाता है ।
गुरनाम सिंह और मनोज रुहेला के बीच तेजेंद्रपाल सिंह की उम्मीदवारी के झंडे पर कब्जे को लेकर जो खींचतान है, उसमें काशीपुर ग्रेटर के वरिष्ठ सदस्य अपूर्व मेहरोत्रा अपने लिए रास्ता बनता देखने लगे हैं, और इस चक्कर में उन्होंने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है । अपूर्व मेहरोत्रा को पूर्व गवर्नर केएस लूथरा के नजदीकी के रूप में देखा/पहचाना जाता है । मनोज रुहेला को भी चूँकि 'बुनियादी रूप से' केएस लूथरा खेमे के सदस्य के रूप में ही जाना/पहचाना जाता है, इसलिए अपूर्व मेहरोत्रा को उम्मीद है कि तेजेंद्रपाल सिंह के साथ मामला गड़बड़ाने पर मनोज रुहेला उनकी उम्मीदवारी का समर्थन कर सकते हैं - और तब उम्मीदवार के रूप में उनका पलड़ा और भारी हो जायेगा । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई में जितेंद्र चौहान की बड़ी जीत, और उनकी इस जीत में मनोज रुहेला की हिस्सेदारी के चलते - मनोज रुहेला डिस्ट्रिक्ट में अब 'बड़ी भूमिका' निभाने के लिए अपने आपको तैयार कर रहे हैं; और इसके लिए डिस्ट्रिक्ट के बड़े नेताओं से भिड़ने के लिए भी तैयार हैं । इसका संकेत उन्होंने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में दीपक तलवार का सहयोग/समर्थन करने के मुद्दे पर गुरनाम सिंह पर दबाव बना कर दे भी दिया है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद पर पहले जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी का समर्थन करने को लेकर - और फिर उनकी बड़ी जीत के बाद मनोज रुहेला की हसरतों में जो उछाल आया है, उसने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की अगले लायन वर्ष की चुनावी लड़ाई को खासा मजेदार बना दिया है ।  

Monday, June 1, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला को लग रहा है कि जितेंद्र चौहान को डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट दिलवाने की उनकी मुहिम को डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह फेल करने में लगे हुए हैं; और गुरनाम सिंह की तमाम सफाइयों के बावजूद मनोज रुहेला उनकी तरफ से संतुष्ट और आश्वस्त नहीं हो पा रहे हैं

लखनऊ । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में जितेंद्र चौहान को डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट दिलवाने के चक्कर में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह से ही भिड़ गए हैं । मनोज रुहेला का आरोप है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी का समर्थन करने का फैसला गुरनाम सिंह की सहमति और भागीदारी से ही लिया/किया गया था, लेकिन गुरनाम सिंह अब इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए दीपक तलवार को वोट दिलवाने का प्रयास कर रहे हैं । गुरनाम सिंह तरह तरह से मनोज रुहेला को समझा रहे हैं कि वह दीपक तलवार को वोट दिलवाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं, लेकिन मनोज रुहेला उन पर विश्वास नहीं कर रहे हैं और इस मामले में अपनी नाराजगी और विरोध जताने/दिखाने गुरनाम सिंह के घर तक जा पहुँचे । गुरनाम सिंह ने कुछेक लोगों की गवाहियाँ दिलवा कर भी मनोज रुहेला को आश्वस्त करने की कोशिश की - लेकिन लगता नहीं है कि मनोज रुहेला उनके द्वारा करवाई गई गवाहियों से संतुष्ट हुए हैं । जितेंद्र चौहान को वोट दिलवाने की मुहिम में मनोज रुहेला को दरअसल अगले महीने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पदभार संभालने वाले कमल शेखर गुप्ता का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है, इसलिए भी उन्हें शक हुआ है कि कमल शेखर गुप्ता ने कहीं गुरनाम सिंह की शह पर ही तो उनके अभियान से दूरी नहीं बनाई हुई है । मनोज रुहेला के लिए विशाल सिन्हा की वह घोषणा भी मुसीबत बनी हुई है, जिसमें दावा किया गया है कि जितेंद्र चौहान इंटरनेशनल डायरेक्टर चुने जाने के बाद जगदीश अग्रवाल को 'न्याय' दिलवायेंगे । विशाल सिन्हा के इस दावे के चलते जगदीश अग्रवाल के खिलाफ वोट करने/करवाने वाले लोग जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी के विरोध में होते सुने जा रहे हैं ।
मनोज रुहेला जिस तरह से इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में लगे हुए हैं, और डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट जितेंद्र चौहान को दिलवाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं - उसके चलते डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा के रूप में गर्म है कि मनोज रुहेला को जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी में इतनी दिलचस्पी आखिर क्यों है ? मनोज रुहेला को अगली मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन का पद मिलने की चर्चा है, और यह पद उन्हें जितेंद्र चौहान की बदौलत ही मिलने की बात सामने आई है - इस नाते लोगों को यह तो लग रहा है कि मल्टीपल काउंसिल में वाइस चेयरमैन का पद दिलवाने का अहसान उतारने के लिए ही मनोज रुहेला ने डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट जितेंद्र चौहान को दिलवाने का जिम्मा ले लिया; किंतु फिर भी डिस्ट्रिक्ट के कई लोगों के लिए जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी के प्रति मनोज रुहेला का रवैया काफी पहेली भरा है । इस मामले में जितेंद्र चौहान जिस तरह से गुरनाम सिंह को निशाना बना रहे हैं, उससे उक्त पहेली और उलझती हुई सी लग रही है । गुरनाम सिंह को निशाना बनाने के पीछे मनोज रुहेला के पास असल में एक बड़ी वजह यह है कि वह अच्छी तरह जानते हैं कि दीपक तलवार की उम्मीदवारी के प्रमुख झंडावरदार पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर विनोद खन्ना के साथ गुरनाम सिंह के बहुत खास संबंध हैं, और दोनों ही जरूरत के समय एक-दूसरे के काम आते रहे हैं । ऐसे में, डिस्ट्रिक्ट में जहाँ कहीं मनोज रुहेला को दीपक तलवार के समर्थन के प्रति आवाज सुनाई देती है, उन्हें लगता है कि उस आवाज को गुरनाम सिंह की शह मिल रही है ।
गुरनाम सिंह का कहना है कि विनोद खन्ना से उनकी वर्षों पुरानी दोस्ती है, तो है - उसे वह किसी चुनाव के लिए खत्म थोड़े ही कर देंगे; लेकिन उनकी दोस्ती का हवाला देकर उन पर यह आरोप लगाना उचित नहीं है कि वह विनोद खन्ना के उम्मीदवार दीपक तलवार को वोट दिलवाने के लिए कोई प्रयास कर रहे हैं । गुरनाम सिंह की तमाम सफाइयों के बावजूद मनोज रुहेला उनकी तरफ से संतुष्ट और आश्वस्त नहीं हो पा रहे हैं । उन्हें लगातार यही लग रहा है कि जितेंद्र चौहान को डिस्ट्रिक्ट के सारे वोट दिलवाने की उनकी मुहिम को गुरनाम सिंह फेल करने में लगे हुए हैं । मनोज रुहेला के नजदीकियों से ही सुनने को मिला है कि मनोज रुहेला लगातार जितेंद्र चौहान के संपर्क में रहते हैं, और उनसे पूछते रहते हैं कि उनके डिस्ट्रिक्ट से उन्हें कहीं से किसी और उम्मीदवार के समर्थन की आवाजें तो सुनाई नहीं दे रही हैं । समझा जाता है कि मनोज रुहेला को कहीं से यह फीडबैक जरूर मिला है कि दीपक तलवार को उनके डिस्ट्रिक्ट में समर्थन और वोट मिल रहा है । इससे मनोज रुहेला को पक्का विश्वास हो गया कि उनके डिस्ट्रिक्ट में दीपक तलवार को जो भी समर्थन और वोट मिलने की संभावना बन रही है, उसके पीछे अवश्य ही गुरनाम सिंह का हाथ है । मनोज रुहेला ने इसे लेकर गुरनाम सिंह के घर जाकर अपनी नाराजगी और शिकायत दर्ज कराई है । देखना दिलचस्प होगा कि गुरनाम सिंह पर दबाव बना कर मनोज रुहेला डिस्ट्रिक्ट में दीपक तलवार को वोट मिलने की संभावना पर सचमुच रोक लगा पाते हैं या नहीं ?