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Sunday, August 16, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में गुरनाम सिंह की राजनीति के सामने जगदीश अग्रवाल की तमाम कोशिशें अंततः विफल रहीं और फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का चुनाव बीएम श्रीवास्तव ने जीत लिया

लखनऊ । फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए आज पूर्वाह्न दोबारा हुए चुनाव का नतीजा तो वही निकला, जो अपेक्षित था - और जिसके तहत बीएम श्रीवास्तव की जीत हुई; लेकिन चुनावी जीत का अंतर अप्रत्याशित रहा । जीत का श्रेय वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह को दिया जा रहा है, तो जीत के अंतर के कम होने में भी गुरनाम सिंह को लगे झटके के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । आज हुए चुनाव का अप्रत्याशित दृश्य पूर्व गवर्नर नीरज बोरा की उपस्थिति का भी रहा । नीरज बोरा पिछले काफी समय से डिस्ट्रिक्ट की गतिविधियों में नजर नहीं आए हैं, लेकिन इस चुनाव में उन्होंने खासी सक्रियता के साथ जगदीश अग्रवाल का झंडा उठाया - हालाँकि फिर भी जगदीश अग्रवाल चुनाव हार गए । जगदीश अग्रवाल के लिए विडंबना की बात यह रही कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद उन्होंने एक वोट से जीता था - नेगेटिव वोटिंग के कारण उनके फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर न बन पाने के कारण दोबारा हुआ चुनाव लेकिन वह एक वोट से हार गए । जगदीश अग्रवाल ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में अपने घमंडभरे रवैये के लिए प्रत्येक पूर्व गवर्नर से माफी माँगी और भविष्य में वैसा रवैया न दिखाने के लिए उन्हें आश्वस्त किया, लेकिन फिर भी वह वोट डालने वाले 23 गवर्नर्स में से 11 का ही समर्थन जुटा सके और इस तरह 12 वोट पाकर बीएम श्रीवास्तव ने उनसे अपनी हार का बदला ले लिया । 
मजे की बात यह रही कि दोनों उम्मीदवारों को उम्मीद से कम वोट मिलने की शिकायत रही, और इस तरह दोनों ही उम्मीदवारों तथा उनके नेताओं को धोखा खाने का गम हुआ । जगदीश अग्रवाल और उनके समर्थकों को 14 वोट मिलने की उम्मीद थी - लिहाजा चुनावी नतीजा घोषित होने के बाद वह उन तीन गवर्नर्स को 'खोज' रहे हैं, जिन्होंने उन्हें धोखा दिया । बीएम श्रीवास्तव और उनके समर्थकों को 16 वोट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन चुनाव जीत जाने की खुशी व संतुष्टि में वह इस बात को लेकर ज्यादा परेशान नहीं हैं कि किन किन लोगों ने उन्हें धोखा दिया । जगदीश अग्रवाल ने चुनाव जीतने के लिए हर हथकंडा अपनाया । शुरू में लग रहा था कि उन्हें छह/सात से ज्यादा वोट नहीं मिलेंगे, लेकिन तरह तरह के हथकंडों के चलते उन्होंने अपने समर्थन को बढ़ाया । जगदीश अग्रवाल की बड़ी कामयाबी यह रही कि उन्होंने गुरनाम सिंह के सहयोग/समर्थन से गवर्नर बने तथा हाल के दिनों तक उनके खास रहे कई गवर्नर्स का समर्थन प्राप्त कर लिया । लेकिन उनके लिए गुरनाम सिंह की राजनीति से निपट पाना मुश्किल हुआ ।
दरअसल फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए दोबारा हुआ चुनाव जिस तरह से गुरनाम सिंह की राजनीति व प्रतिष्ठा के साथ जुड़ गया था, उसके कारण ही तमाम अनुकूलताओं के बावजूद जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी का भट्टा बैठ गया । जगदीश अग्रवाल की जीत को गुरनाम सिंह के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा था, और इसके चलते जगदीश अग्रवाल के समर्थन में जुटे गुरनाम सिंह के नजदीकियों के बीच भरोसा नहीं बन सका - विशाल सिन्हा को हर समय संजय चोपड़ा व प्रमोद सेठ पर शक रहा, क्योंकि जगदीश अग्रवाल के खिलाफ नेगेटिव वोटिंग करवाने में इनका खासा सहयोग रहा था; तो संजय चोपड़ा व प्रमोद सेठ लगातार जगदीश अग्रवाल को आगाह करते रहे कि विशाल सिन्हा की बदनामी के कारण ही वह फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं बन सके हैं, इसलिए उनसे बच कर रहना । गुरनाम सिंह के नजदीकी रहे यह लोग एचएस सच्चर के समर्थन पर संदेह करते रहे, तो एचएस सच्चर की तरफ से जगदीश अग्रवाल को सावधान किया जाता रहा कि गुरनाम सिंह के लोगों पर भरोसा मत करना । तीन दिन पहले ही मनोज रुहेला ने यह कहते/बताते हुए बीएम श्रीवास्तव और उनके समर्थकों के पसीने ला दिए थे कि इंटरनेशनल डायरेक्टर एंडॉर्सी जितेंद्र चौहान ने उन्हें जगदीश अग्रवाल का समर्थन करने के लिए कहा है । मनोज रुहेला के यह 'बताने' से बीएम श्रीवास्तव तथा उनके नजदीकियों ने मान/समझ लिया था कि मनोज रुहेला भी जगदीश अग्रवाल के साथ जा मिले हैं । कुछेक लोगों को छोड़कर, अधिकतर लोगों में यह कहना/बताना तो कयास लगाना होगा कि किसने किस को वोट दिया है - तथ्य सिर्फ यह है कि गुरनाम सिंह की राजनीति के सामने जगदीश अग्रवाल की तमाम कोशिशें अंततः विफल रहीं और फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का चुनाव बीएम श्रीवास्तव ने जीत लिया है ।            

Wednesday, August 5, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए दोबारा होने वाले चुनाव में पूर्व गवर्नर्स एचएस सच्चर, प्रमोद सेठ तथा संजय चोपड़ा की तरफ से जगदीश अग्रवाल को 'धोखा' मिलने का डर क्यों है ?

लखनऊ । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स एचएस सच्चर, प्रमोद सेठ तथा संजय चोपड़ा के लिए जगदीश अग्रवाल के नजदीकियों व शुभचिंतकों को यह विश्वास दिलाना मुश्किल हो रहा है कि फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए दोबारा होने वाले चुनाव में वह सचमुच जगदीश अग्रवाल का सहयोग/समर्थन करेंगे - और ऐन मौके तक उनका साथ देंगे । मजे की, और इन तीनों के लिए मुसीबत की बात यह बनी हुई है कि जगदीश अग्रवाल के समर्थन की स्पष्ट घोषणा करने के बावजूद जगदीश अग्रवाल और उनके नजदीकी व शुभचिंतक लगातार इनके प्रति संदेह बनाये हुए हैं, और वह अलग अलग तरह के बहानों से इनके मन व असली इरादे को पढ़ने तथा जाँचने/परखने की कोशिश करते रहे हैं । ऐसा दरअसल इसलिए है क्योंकि जगदीश अग्रवाल तथा उनके नजदीकी व शुभचिंतक इन तीनों पर यह भरोसा नहीं कर पा रहे हैं, कि अभी उनके समर्थन की बात करने वाले यह पूर्व गवर्नर्स वोटिंग तक उनके समर्थन में बने रहेंगे और पलट नहीं जायेंगे । इन तीनों के प्रति अविश्वास का कारण यह है कि पिछले मौकों पर यह तीनों जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी के विरोध में रह चुके हैं ।
उल्लेखनीय है कि पिछले से पिछले लायन वर्ष में जगदीश अग्रवाल और बीएम श्रीवास्तव के बीच हुए सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में एचएस सच्चर ने बीएम श्रीवास्तव का समर्थन किया था; और पिछले लायन वर्ष में हुए चुनाव में प्रमोद सेठ व संजय चोपड़ा ने जगदीश अग्रवाल के खिलाफ नेगेटिव वोट करवाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी । बात हालाँकि सिर्फ इतनी ही नहीं है - क्योंकि चुनावी राजनीति में समर्थक और विरोधी अदलते/बदलते रहते हैं, और यह किसी को भी हैरान नहीं करता है; असली बात वह तरीका है जो इन्होंने अपनाया । एचएस सच्चर जब बीएम श्रीवास्तव की उम्मीदवारी के समर्थन में थे, तब उन्होंने अपने क्लब के तीन वोट बीएम श्रीवास्तव के पक्ष में डलवाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली थी - और जिसका नतीजा यह रहा कि बीएम श्रीवास्तव एक वोट से चुनाव हार गए थे । इस तरह, बीएम श्रीवास्तव की हार का प्रमुख कारण ऐन मौके पर एचएस सच्चर से गच्चा मिलना रहा । प्रमोद सेठ और संजय चोपड़ा का किस्सा तो और भी गंभीर है । पिछले वर्ष हुए चुनाव में उन्होंने अपने अपने समर्थक क्लब्स के वोट जगदीश अग्रवाल के खिलाफ डलवाये और यह जानकारी उन्होंने तुरंत ही गुरनाम सिंह तथा अन्य कुछेक प्रमुख पदाधिकारियों को दी भी - और बाद में नाटक करते हुए कहते रहे कि जगदीश अग्रवाल के साथ बहुत बुरा हुआ । प्रमोद सेठ व संजय चोपड़ा का रवैया कई मौकों पर 'कहना कुछ और करना कुछ' जैसा रहा है । इसी कारण से, जगदीश अग्रवाल और उनके नजदीकी व शुभचिंतक इन पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं ।
भरोसा नहीं कर पाने का एक कारण और है - तथा वह यह कि तमाम कोशिशों के बावजूद जगदीश अग्रवाल के पक्ष में जीतने लायन समर्थन नहीं जुट पा रहा है । जगदीश अग्रवाल तथा उनके नजदीकियों को डर है कि ऐसे में, उनके समर्थक यह सोच सकते हैं कि जगदीश अग्रवाल को जब जीतना नहीं है - तो उनके समर्थन में रहने का क्या फायदा ? जगदीश अग्रवाल के लिए समर्थन दरअसल इसलिए भी नहीं जुट पा रहा है क्योंकि - फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए दोबारा होने वाले चुनाव में जगदीश अग्रवाल वास्तव में जीतने के लिए नहीं, बल्कि गुरनाम सिंह को 'हराने' के लिए उम्मीदवार बन रहे हैं । उन्होंने और उनके नजदीकियों ने कहा है कि वह दिखाना चाहते हैं कि गुरनाम सिंह के समर्थन के बिना - और उनके विरोध के बावजूद डिस्ट्रिक्ट में चुनाव जीता जा सकता है । डिस्ट्रिक्ट में अधिकतर लोग अलग अलग कारणों से लेकिन गुरनाम सिंह के साथ तथा उनके नजदीक रहना चाहते हैं, इसलिए गुरनाम सिंह को 'हराने' की जगदीश अग्रवाल की कोशिशों को समर्थन नहीं मिल पा रहा है । हालाँकि जगदीश अग्रवाल का समर्थन कर रहे प्रमोद सेठ व संजय चोपड़ा ने लोगों को फार्मूला सुझाया है कि वह गुरनाम सिंह को तो बताएँ/दिखाएँ कि वह जगदीश अग्रवाल के साथ नहीं हैं, और गुपचुप रूप से वोट जगदीश अग्रवाल को दे दें । इस पर लोगों से उन्हें सुनने को मिला है कि इस तरह से धोखा देने का काम वह कर लेते हैं, लेकिन हर कोई नहीं कर सकता है । मजे की बात यह हो रही है कि फार्मूला सुझा कर प्रमोद सेठ और संजय चोपड़ा ने जगदीश अग्रवाल तथा उनके नजदीकियों व शुभचिंतकों के बीच शक/संदेह को और मजबूत कर दिया है । दरअसल, पिछले व्यवहार तथा रवैये के चलते एचएस सच्चर, प्रमोद सेठ व संजय चोपड़ा को लेकर जगदीश अग्रवाल तथा उनके नजदीकियों व शुभचिंतकों के बीच जो शक है, उसने इन तीनों पूर्व गवर्नर्स की स्थिति को विडंबनापूर्ण बना दिया है । 

Sunday, August 2, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में बहुमत वोटर्स का विश्वास खो चुके तथा उनके द्वारा नकार दिए गए जगदीश अग्रवाल की फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद वापस पाने तथा गुरनाम सिंह से बदला लेने की तैयारी ने डिस्ट्रिक्ट के चुनावी नजारे को खासा दिलचस्प बनाया


लखनऊ । नेगेटिव वोटिंग के कारण फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने से वंचित रह गए जगदीश अग्रवाल ने वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर गुरनाम सिंह से बदला लेने तथा फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद वापस पाने के लिए पुनः कमर कस ली है, और इस कारण डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का पारा अचानक से खासा गर्म हो उठा है । पारा दरअसल इसलिए भी गर्म हो उठा है, क्योंकि इस काम में जगदीश अग्रवाल को गुरनाम सिंह के नजदीकियों और सहयोगियों का ही सहयोग/समर्थन मिल रहा है; और इस तरह डिस्ट्रिक्ट के लोगों को - गुरनाम सिंह को अपने ही नजदीकी व सहयोगी रहे पूर्व गवर्नर्स की राजनीति का निशाना व शिकार बनते देखने का मौका मिल रहा है । अभी तक तो जगदीश अग्रवाल को विशाल सिन्हा व अनुपम बंसल का ही सहयोग/समर्थन मिलता दिख रहा था, लेकिन अब प्रमोद सेठ व संजय चोपड़ा को भी जगदीश अग्रवाल के समर्थन में देखा/पहचाना जा रहा है । प्रमोद सेठ व संजय चोपड़ा असल में इस वर्ष सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए लायंस क्लब शाहजहाँपुर विशाल के वरिष्ठ सदस्य तेजेंद्रपाल सिंह की उम्मीदवारी को समर्थन देने के कारण गुरनाम सिंह से नाराज हुए हैं; उन्होंने बहुत कोशिश की कि तेजेंद्रपाल सिंह की सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उम्मीदवारी को गुरनाम सिंह का समर्थन न मिल सके - लेकिन अपनी कोशिशों को असफल होता देख प्रमोद सेठ व संजय चोपड़ा ने गुरनाम सिंह से बदला लेने की तैयारी कर रहे जगदीश अग्रवाल का सहयोग/समर्थन करने का फैसला कर लिया है ।
विशाल सिन्हा, अनुपम बंसल, प्रमोद सेठ, संजय चोपड़ा का खुल्ला समर्थन मिलने से उत्साहित जगदीश अग्रवाल ने अपने नजदीकियों को कहा/बताया है कि उन्होंने अन्य कुछेक पूर्व गवर्नर्स का भी समर्थन हासिल कर लिया है, जो खाली पड़े फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद को भरने के लिए 16 अगस्त को होने वाली विशेष मीटिंग में उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे - और इस तरह वह न सिर्फ फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद पा लेंगे, बल्कि गुरनाम सिंह से अपना बदला भी ले लेंगे । उल्लेखनीय है कि जगदीश अग्रवाल अपने खिलाफ हुई नेगेटिव वोटिंग के लिए गुरनाम सिंह को ही दोषी ठहराते हैं । नेगेटिव वोटिंग के कारण फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद गवाँ देने के बाद जगदीश अग्रवाल ने हालाँकि गुरनाम सिंह को मनाने के लिए खूब प्रयास किए, लेकिन अपने प्रयासों में असफल रहने के बाद उन्होंने घोषणा की कि वह गुरनाम सिंह के समर्थन के बिना ही फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद वापस लेंगे । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कमल शेखर गुप्ता ने खाली पड़े फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद को भरने के लिए 16 अगस्त को मीटिंग तथा वोटिंग कराने की घोषणा की है, जिसमें गवर्नर्स भाग लेंगे । जगदीश अग्रवाल ने अपने नजदीकियों को आश्वस्त किया है कि उक्त मीटिंग में उनके समर्थक गवर्नर्स उनकी उम्मीदवारी प्रस्तावित करेंगे तथा उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में वोट करेंगे - जिसके बाद वह पुनः मालाएँ पहनेंगे 
जगदीश अग्रवाल के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद पर वापसी करने के दावे ने डिस्ट्रिक्ट में खासी हलचल मचा दी है, और लोगों के बीच यह चर्चा गर्म हो उठी है कि डिस्ट्रिक्ट के बहुमत वोटर्स का विश्वास खो चुके तथा उनके द्वारा नकार दिए गए जगदीश अग्रवाल को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में डिस्ट्रिक्ट पर थोपने का काम पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स सचमुच करेंगे क्या - और इस तरह डिस्ट्रिक्ट के वोटर्स का अपमान करेंगे क्या ? लोगों का कहना है कि जगदीश अग्रवाल ने वोटर्स का विश्वास खो दिया है, जिसके कारण उनके खिलाफ नेगेटिव वोटिंग हुई और उनकी दावेदारी को नकार दिया गया; लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों ने भी डिस्ट्रिक्ट के वोटर्स के फैसले पर मोहर लगाई और साफ फैसला दिया कि वोटर्स का विश्वास खो चुके जगदीश अग्रवाल को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने का अधिकार नहीं है - इसके बाद भी यदि कोई पूर्व गवर्नर्स 16 अगस्त की मीटिंग व वोटिंग में जगदीश अग्रवाल को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनवाते/चुनवाते हैं, तो यह डिस्ट्रिक्ट के वोटर्स के साथ-साथ लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों का भी अपमान होगा । लोगों का कहना है कि जगदीश अग्रवाल के समर्थक पूर्व गवर्नर्स को डिस्ट्रिक्ट के वोटर्स व लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों के फैसले का सम्मान करते हुए, अगले वर्षों में जगदीश अग्रवाल को वोटर्स के बीच ले जाने की तैयारी करना चाहिए और वोटर्स के समर्थन के साथ उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की लाइन में लगवाना चाहिए । 
जगदीश अग्रवाल और उनके समर्थकों ने लेकिन जिस तरह से गुरनाम सिंह, डिस्ट्रिक्ट के वोटर्स तथा लायंस इंटरनेशनल के पदाधिकारियों को एक साथ नीचा दिखाने की तैयारी की है - उससे डिस्ट्रिक्ट का चुनावी नजारा खासा दिलचस्प हो उठा है ।

Saturday, July 4, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में बीएम श्रीवास्तव के कैबिनेट सेक्रेटरी बनने में गुरनाम सिंह और केएस लूथरा के बीच राजनीतिक गठजोड़ मजबूत होने के संकेत देखे/पहचाने जा रहे हैं, जिसमें बीएम श्रीवास्तव के साथ तेजेंद्रपाल सिंह की भी 'दाल' गलती हुई नजर आ रही है

लखनऊ । बीएम श्रीवास्तव के कैबिनेट सेक्रेटरी बनने में, उनके फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'चुने' जाने की राह खुलती/बनती हुई नजर आ रही है । माना/समझा जा रहा है कि बीएम श्रीवास्तव को कैबिनेट सेक्रेटरी बनाने का फैसला डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कमल शेखर गुप्ता ने वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह के दबाव में लिया है । बीएम श्रीवास्तव को पूर्व गवर्नर केएस लूथरा के नजदीकी के रूप में देखा/पहचाना जाता है, और इस नाते कमल शेखर गुप्ता उन्हें कैबिनेट सेक्रेटरी बनाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन गुरनाम सिंह के दबाव के सामने उनकी एक न चली और उन्हें बीएम श्रीवास्तव को कैबिनेट सेक्रेटरी बनाने के लिए मजबूर होना ही पड़ा । बीएम श्रीवास्तव को कैबिनेट सेक्रेटरी बनवाने में गुरनाम सिंह ने जिस तरह से दिलचस्पी ली है, उसे देख कर ही समझा जा रहा है कि गुरनाम सिंह ने बीएम श्रीवास्तव को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में 'देखना' शुरू कर दिया है । उल्लेखनीय है कि नेगेटिव वोटिंग के कारण जगदीश अग्रवाल के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुने जाने में असफल रहने के बाद, खाली रह गए फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद के लिए चुनाव/चयन होना है - जिसके लिए बीएम श्रीवास्तव को प्रमुख उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । मजे की बात यह है कि इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट की सत्ता में वह लोग हैं, जो करीब पंद्रह महीने पहले हुए चुनाव में बीएम श्रीवास्तव की उम्मीदवारी के खिलाफ थे, और जिनकी खिलाफत के कारण बीएम श्रीवास्तव चुनाव हार गए थे । लेकिन पिछले पंद्रह महीनों में गोमती में बहुत से पानी बह गया है, और हालात इस कदर बदल गए हैं कि जगदीश अग्रवाल को नेगेटिव वोटिंग के जरिये बाहर कर दिया गया है - और फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी खाली हो गई है ।
मजे की बात यह भी है कि बीएम श्रीवास्तव को भले ही केएस लूथरा के नजदीकी के रूप देखा/पहचाना जाता है, लेकिन पिछले से पिछले लायन वर्ष में हुए चुनाव में बीएम श्रीवास्तव ने केएस लूथरा को अपने चुनाव अभियान से दूर रख कर 'लगभग बेइज्जत' किया था । बीएम श्रीवास्तव का कहना था कि केएस लूथरा उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में यदि सक्रिय 'दिखेंगे' तो उन्हें वोटों का नुकसान पहुँचायेंगे; बीएम श्रीवास्तव की हिदायत थी कि केएस लूथरा उन्हें दूर से ही समर्थन दें, उन्हें चुनाव जितवाने का काम मनोज रुहेला कर लेंगे । मनोज रुहेला उस समय फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर थे, और बीएम श्रीवास्तव की उम्मीदवारी की कमान उनके ही हाथ में थी । उस समय लेकिन बीएम श्रीवास्तव चुनाव हार गए थे - और सिर्फ चुनाव ही नहीं हार गए थे, चुनाव अभियान के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में 'वोटरों को लुभाने का सामान' ले जाने के मामले में पुलिसिया झमेले में भी फँस गए थे । बहरहाल, जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है कि तब से अब तक गोमती में बहुत सा पानी बह चुका है, और डिस्ट्रिक्ट में हालात खासे बदल चुके हैं । डिस्ट्रिक्ट के राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव गुरनाम सिंह और केएस लूथरा के नजदीक आने के रूप में हुआ है । दरअसल, गुरनाम सिंह का नाम लेकर विशाल सिन्हा ने जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट में अपनी 'दुकान' जमाने/चलाने की कोशिश की, उससे गुरनाम सिंह को खासा तगड़ा झटका लगा । वास्तव में, विशाल सिन्हा की शह पर ही जगदीश अग्रवाल कई पूर्व गवर्नर्स के साथ-साथ गुरनाम सिंह को लेकर भी तरह तरह की बकवासबाजी कर रहे थे । उसके बाद ही, गुरनाम सिंह ने जगदीश अग्रवाल और विशाल सिन्हा से एकसाथ पीछा छुड़ाने की तैयारी की, जिसमें उन्हें केएस लूथरा का पूरा सहयोग मिला । समझा जाता है कि जिन केएस लूथरा को पिछले से पिछले लायन वर्ष में बीएम श्रीवास्तव ने अपने चुनाव अभियान से दूर रखा था, उन्हीं केएस लूथरा की कोशिशों से गुरनाम सिंह नेगेटिव वोटिंग के कारण खाली हुई फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी के लिए बीएम श्रीवास्तव के नाम पर विचार के लिए तैयार हुए हैं ।
केएस लूथरा की सिफारिश पर बीएम श्रीवास्तव के नाम पर तैयार होने के लिए गुरनाम सिंह पर लायंस क्लब शाहजहाँपुर विशाल के वरिष्ठ सदस्य तेजेंद्रपाल सिंह की भी सिफारिश है । तेजेंद्रपाल सिंह इस वर्ष होने वाले सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार होने/बनने की तैयारी में हैं, और उन्हें गुरनाम सिंह के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । उनके साथ-साथ लायंस क्लब काशीपुर ग्रेटर के वरिष्ठ सदस्य अपूर्व मेहरोत्रा को भी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने की तैयारी में देखा/सुना जा रहा है, जिन्हें केएस लूथरा का समर्थन बताया/सुना जा रहा है । तेजेंद्रपाल सिंह के लिए मुसीबत की बात यह है कि शाहजहाँपुर के दोनों पूर्व गवर्नर्स - प्रमोद सेठ और संजय चोपड़ा उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ हैं, और इस कोशिश में हैं कि कैसे भी करके वह उनका खेल बिगाड़े और शाहजहाँपुर में तीसरा गवर्नर न बनने दें । ऐसे में, तेजेंद्रपाल सिंह को केएस लूथरा की मदद की जरूरत है, केएस लूथरा के साथ उनके अच्छे संबंध रहे भी हैं - उन अच्छे संबंधों को अब वह राजनीतिक समीकऱण में बदलना चाहते हैं । तेजेंद्रपाल सिंह के नजदीकियों का कहना/बताना है कि तेजेंद्रपाल सिंह ने गुरनाम सिंह को सलाह दी है कि वह यदि बीएम श्रीवास्तव को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनवा देते हैं, तो इस वर्ष होने वाले सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में केएस लूथरा को समर्थन के लिए राजी किया जा सकेगा - अपूर्व मेहरोत्रा को अगली बार के लिए हरी झंडी दे दी जाएगी । फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की खाली सीट को भरने के लिए गुरनाम सिंह क्या फैसला करेंगे, यह तो जब फैसला होगा तभी पता चलेगा - लेकिन बीएम श्रीवास्तव के कैबिनेट सेक्रेटरी बनने से यह संकेत जरूर मिलता है कि बीएम श्रीवास्तव को लेकर गुरनाम सिंह का रवैया सकारात्मक तो हुआ है ।  

Saturday, June 6, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला की हसरतों में, इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई में जितेंद्र चौहान की बड़ी जीत के चलते, आए उछाल ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की अगले लायन वर्ष की चुनावी लड़ाई को खासा मजेदार बना दिया है

लखनऊ । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए जितेंद्र चौहान के भारी मतों से मल्टीपल एंडॉर्सी चुने जाने के 'साइड इफेक्ट्स' दिखने शुरू हो गए हैं, और पहला केस लायंस क्लब शाहजहाँपुर विशाल के वरिष्ठ सदस्य तेजेंद्रपाल सिंह पर हक जताने को लेकर वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मनोज रुहेला के बीच खींचतान बढ़ने के रूप में सामने आया है । तेजेंद्रपाल सिंह को अगले लायन वर्ष में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । वह यूँ तो गुरनाम सिंह के नजदीक हैं; लेकिन अगले वर्ष की अपनी उम्मीदवारी की तैयारी करते हुए उन्होंने इस वर्ष मनोज रुहेला के साथ भी अपनी अच्छी नजदीकियत बना ली है, और इसके लिए उन्होंने इस वर्ष अच्छे-खासे पैसे भी खर्च किए । लेकिन यही बात अब तेजेंद्रपाल सिंह के लिए मुसीबत बन गई है । मनोज रुहेला उन्हें 'अपने उम्मीदवार' के रूप में देखना चाहते हैं, जबकि तेजेंद्रपाल सिंह को भी लगता है कि वह गुरनाम सिंह के उम्मीदवार के रूप में ही कामयाब हो सकते हैं । यह मामला अभी तक दबे-ढके रूप में चल रहा था; लेकिन जितेंद्र चौहान की जीत के चलते मनोज रुहेला का जो राजनीतिक रुतबा बढ़ा है - उसने मामले को बड़ा और गंभीर बना दिया है । असल में, इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के लिए मल्टीपल एंडॉर्सी के चुनाव में मनोज रुहेला तो जितेंद्र चौहान को वोट दिलाने के अभियान में लगे थे, जबकि खुद मनोज रुहेला का ही आरोप था कि गुरनाम सिंह गुपचुप रूप से दीपक तलवार को वोट दिलवाने की व्यवस्था में जुटे थे । उक्त चुनाव में चूँकि जितेंद्र चौहान की भारी मतों से जीत हुई है, इसलिए डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में उसका एक अर्थ यह भी लगाया जा  कि वोट जुटाने के खेल में मनोज रुहेला का पलड़ा भारी हो चला है ।
इसलिए मनोज रुहेला की यह चाहत अब और बढ़ गई है कि डिस्ट्रिक्ट में जिसे चुनाव जीतना हो, उसे उनके उम्मीदवार के रूप में आना/रहना - और 'दिखना' होगा । हालाँकि किसी को विश्वास नहीं है कि डिस्ट्रिक्ट पर अपने नेतृत्व को गुरनाम सिंह आसानी से छोड़ेंगे । जगदीश अग्रवाल वाले मामले में उन्होंने दिखाया ही है कि जो उनके साथ 'टेढ़ा' चलेगा, उसका क्या हाल होगा । ऐसे में, तेजेंद्रपाल सिंह के साथ मुसीबत यह खड़ी हो गई है कि वह किसके उम्मीदवार के रूप में 'दिखें' । उनकी यह मुसीबत इसलिए और बड़ी है, क्योंकि शाहजहाँपुर के दोनों पूर्व गवर्नर्स - प्रमोद सेठ और संजय चोपड़ा उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ हैं । हालाँकि तेजेंद्रपाल सिंह की गुरनाम सिंह के साथ नजदीकियत को जानते/पहचानते हुए वह अभी खिलाफत करते नजर नहीं आ रहे हैं - लेकिन वह इस ताक में जरूर लगते हैं कि तेजेंद्रपाल सिंह का खेल कुछ बिगड़े, तो वह उसे और बिगाड़ने में जुटें । तेजेंद्रपाल सिंह के लिए मुसीबत की बात यह भी है कि गुरनाम सिंह के भरोसे लायंस क्लब काशीपुर सिटी के वरिष्ठ सदस्य सुखविंदर सिंह भी अगले लायन वर्ष में उम्मीदवार होने की इच्छा रखते हैं । लेकिन चूँकि उनके नजदीकियों को ही लगता है कि एक उम्मीदवार के रूप में सक्रियता दिखा पाना उनके लिए मुश्किल होगा, इसलिए उनकी उम्मीदवारी का दावा कमजोर पड़ जाता है ।
गुरनाम सिंह और मनोज रुहेला के बीच तेजेंद्रपाल सिंह की उम्मीदवारी के झंडे पर कब्जे को लेकर जो खींचतान है, उसमें काशीपुर ग्रेटर के वरिष्ठ सदस्य अपूर्व मेहरोत्रा अपने लिए रास्ता बनता देखने लगे हैं, और इस चक्कर में उन्होंने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है । अपूर्व मेहरोत्रा को पूर्व गवर्नर केएस लूथरा के नजदीकी के रूप में देखा/पहचाना जाता है । मनोज रुहेला को भी चूँकि 'बुनियादी रूप से' केएस लूथरा खेमे के सदस्य के रूप में ही जाना/पहचाना जाता है, इसलिए अपूर्व मेहरोत्रा को उम्मीद है कि तेजेंद्रपाल सिंह के साथ मामला गड़बड़ाने पर मनोज रुहेला उनकी उम्मीदवारी का समर्थन कर सकते हैं - और तब उम्मीदवार के रूप में उनका पलड़ा और भारी हो जायेगा । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद की चुनावी लड़ाई में जितेंद्र चौहान की बड़ी जीत, और उनकी इस जीत में मनोज रुहेला की हिस्सेदारी के चलते - मनोज रुहेला डिस्ट्रिक्ट में अब 'बड़ी भूमिका' निभाने के लिए अपने आपको तैयार कर रहे हैं; और इसके लिए डिस्ट्रिक्ट के बड़े नेताओं से भिड़ने के लिए भी तैयार हैं । इसका संकेत उन्होंने इंटरनेशनल डायरेक्टर पद के चुनाव में दीपक तलवार का सहयोग/समर्थन करने के मुद्दे पर गुरनाम सिंह पर दबाव बना कर दे भी दिया है । इंटरनेशनल डायरेक्टर पद पर पहले जितेंद्र चौहान की उम्मीदवारी का समर्थन करने को लेकर - और फिर उनकी बड़ी जीत के बाद मनोज रुहेला की हसरतों में जो उछाल आया है, उसने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की अगले लायन वर्ष की चुनावी लड़ाई को खासा मजेदार बना दिया है ।  

Monday, May 18, 2020

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जगदीश अग्रवाल के उपेक्षापूर्ण रवैये से नाराज गुरनाम सिंह, संजय चोपड़ा और प्रमोद सेठ ने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनके खिलाफ नेगेटिव वोटिंग करवाई  

लखनऊ । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर जगदीश अग्रवाल के खिलाफ नेगेटिव वोट डलवा कर गुरनाम सिंह, संजय चोपड़ा, प्रमोद सेठ आदि पूर्व गवर्नर्स ने जैसे पिछले लायन वर्ष की अपनी 'गलती' को सुधारने का काम किया है । कुल पड़े 251 वोटों में जगदीश अग्रवाल के पक्ष में कुल 107 वोट रहे, जबकि 144 वोट उनके खिलाफ पड़े - और इस तरह जगदीश अग्रवाल फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नहीं चुने जा सके । जगदीश अग्रवाल के नजदीकियों ने इस स्थिति के लिए गुरनाम सिंह, संजय चोपड़ा, प्रमोद सेठ आदि पूर्व गवर्नर्स को जिम्मेदार ठहराया है । मजे की बात यह है कि पिछले लायन वर्ष में इन्हीं पूर्व गवर्नर्स ने जगदीश अग्रवाल को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनवाने/चुनवाने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाया था - और उनकी उम्मीदवारी का नामांकन स्वीकार करवाने से लेकर लायंस इंटरनेशनल कार्यालय तक से उनके चुनाव को मंजूर करवाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी । लेकिन जल्दी ही जगदीश अग्रवाल के इन लोगों के साथ संबंध खराब होने और सुनाई देने लगे । वरिष्ठ पूर्व गवर्नर गुरनाम सिंह के नजदीकियों के अनुसार, लायंस इंटरनेशनल कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद जगदीश अग्रवाल के तेवर बिलकुल बदल गए थे, और उन्होंने गुरनाम सिंह को तवज्जो देना बंद कर दिया था । जगदीश अग्रवाल के इसी रवैये को देख कर गुरनाम सिंह ने उन्हें सबक सिखाने की ठान ली थी । खास बात यह रही कि गुरनाम सिंह ने जगदीश अग्रवाल को सबक सिखाने की योजना बहुत ही गुपचुप रूप से बनाई और अपनी योजना की खबर अपने 'हनुमान' विशाल सिन्हा को भी नहीं लगने दी । अब जो चर्चाएँ सुनने को मिल रही हैं, उनमें बात निकल कर आ रही है कि गुरनाम सिंह ने जगदीश अग्रवाल को सबक सिखाने के लिए एक तरफ तो संजय चोपड़ा और प्रमोद सेठ जैसे अपने खेमे के लोगों का साथ लिया, और दूसरी तरफ केएस लूथरा जैसे विरोधी खेमे के नेता की मदद ली ।
संजय चोपड़ा और प्रमोद सेठ ने जगदीश अग्रवाल के खिलाफ नेगेटिव वोटिंग करवाने के मामले में गुरनाम सिंह की मदद इस कारण से की बताई जा रही है, क्योंकि वह यह देख कर बुरी तरह नाराज रहे कि जगदीश अग्रवाल उन्हें कोई तवज्जो ही नहीं दे रहे हैं - और सिर्फ विशाल सिन्हा को ही नेता मान रहे हैं । कह सकते हैं कि जगदीश अग्रवाल एक तरह से गुरनाम सिंह खेमे के सदस्यों की आपसी लड़ाई के शिकार हो गए हैं - जिसमें एक तरफ विशाल सिन्हा और अनुपम बंसल और कमल शेखर हैं, तथा दूसरी तरफ संजय चोपड़ा और प्रमोद सेठ हैं । पिछले नौ/दस महीनों से देखने में आया कि जगदीश अग्रवाल ने संजय चोपड़ा और प्रमोद सेठ को तो किनारे लगा दिया, और विशाल सिन्हा व अनुपम बंसल के नजदीक रहे । इतने तक तो कोई बात नहीं थी, और जगदीश अग्रवाल के रवैये पर संजय चोपड़ा व प्रमोद सेठ खून का घूँट पीकर रह गए - लेकिन जगदीश अग्रवाल ने जब गुरनाम सिंह की भी अवहेलना शुरू कर दी, तब मामला बिगड़ गया । गुरनाम सिंह को एक तरफ तो जिमखाना क्लब की राजनीति में जगदीश अग्रवाल की तरफ से अपेक्षित सहयोग/समर्थन नहीं मिला, और दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट में भी उन्होंने देखा/पाया कि जगदीश अग्रवाल उन्हें उचित तवज्जो नहीं दे रहे हैं । जगदीश अग्रवाल के रवैये को लेकर संजय चोपड़ा और प्रमोद सेठ की नाराजगी के बारे में गुरनाम सिंह को जानकारी थी ही, सो उन्होंने इन दोनों को साथ लेकर जगदीश अग्रवाल को सबक सिखाने की योजना बना डाली ।
गुरनाम सिंह, संजय चोपड़ा और प्रमोद सेठ ने अपनी योजना को इतने गुपचुप रूप से अंजाम दिया कि जगदीश अग्रवाल और उनके नजदीकियों व समर्थकों को कानों-कान खबर तक नहीं हुई, और इसीलिए जगदीश अग्रवाल के मामले में आये चुनावी नतीजे ने हर किसी को हैरान किया है । दरअसल गुरनाम सिंह, संजय चोपड़ा, प्रमोद सेठ की तिकड़ी को यह डर था कि उनकी योजना की पोल खुली तो विशाल सिन्हा कुछ नाटकबाजी करके उनकी योजना को फेल कर सकते हैं । असल में, लायन राजनीति में नेगेटिव वोटिंग वाले हथकंडे का शोर तो बहुत मचता है, लेकिन यह हथकंडा अमूमन सफल नहीं होता है । इससे पहले, मल्टीपल के डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू में नेगेटिव वोटिंग वाला हथकंडा कामयाब हुआ है, अन्यथा यह हथकंडा आमतौर पर फेल ही होता है । वास्तव में, इसीलिए गुरनाम सिंह, संजय चोपड़ा और प्रमोद सेठ ने इस हथकंडे को चुपचाप तरीके से अमल में लाने की कार्रवाई की । इसके पीछे एक और कारण यह भी रहा कि उनकी योजना यदि फेल हो जाती, तो उनके पास पड़ने वाले नेगेटिव वोटों का ठीकरा विरोधी खेमे नेताओं के सिर फोड़ने का मौका बना रहता । चर्चा है कि गुरनाम सिंह ने अपनी योजना को सफल बनाने के लिए विरोधी खेमे के नेता केएस लूथरा की भी मदद ली, और इन चारों ने इतने गुपचुप तरीके से जगदीश अग्रवाल के खिलाफ करीब 57 प्रतिशत नेगेटिव वोट डलवा दिए कि डिस्ट्रिक्ट के चुनावी परिदृश्य में हड़कंप सा मच गया है  । 

Monday, March 25, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन पद से तथा कमेटी से हटाए जाने की लायंस इंटरनेशनल में शिकायत करते हुए संजय चोपड़ा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह पर सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में पक्षपातपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप लगाया

लखनऊ । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी के नामांकन को लेकर चल रहे विवाद में अब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह भी लपेटे में आ गए हैं, और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उनकी भूमिका को पक्षपातपूर्ण बताते हुए लायंस इंटरनेशनल कार्यालय में शिकायत दर्ज हो गई है । इस शिकायत को देखते/समझते हुए माना/कहा जा रहा है कि एके सिंह ने नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन पद से संजय चोपड़ा को हटा कर अपने लिए बड़ी मुसीबत आमंत्रित कर ली है । संजय चोपड़ा ने नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन पद से हटाये जाने को लायंस इंटरनेशनल में चुनौती दी है । संजय चोपड़ा का आरोप है कि जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी के संदर्भ में नोमीनेटिंग कमेटी के निर्णय को प्रभावित करने के उद्देश्य से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह ने उन्हें कार्रवाई के बीच में ही नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन पद से हटा दिया है, जो न तो न्यायपूर्ण है और न लायंस इंटरनेशनल के नियमों के अनुरूप है । संजय चोपड़ा का कहना है कि नोमीनेटिंग कमेटी ने अपना काम करना शुरू कर दिया है, लेकिन जो अभी पूरा नहीं हुआ है - इसलिए कार्रवाई के बीच में उन्हें तथा बाकी तीन सदस्यों में से दो सदस्यों को हटा देने से उनकी पक्षपातपूर्ण भूमिका का संकेत और सुबूत मिलता है । संजय चोपड़ा का आरोप है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नोमीनेटिंग कमेटी पर जगदीश अग्रवाल के नामांकन पत्र को रिजेक्ट करने के लिए दबाव बना रहे थे, लेकिन चार सदस्यीय नोमीनेटिंग कमेटी के बहुमत सदस्यों ने जब उनके दबाव को मानने से इंकार कर दिया, तो एके सिंह ने चेयरमैन सहित तीन सदस्यों को हटा कर उनकी जगह नए सदस्य बना दिए हैं । 
डिस्ट्रिक्ट में लोगों को लगता है कि नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन के साथ-साथ दो और सदस्यों को हटा कर उनकी जगह नए सदस्यों को नियुक्त करने का कोई कारण न बता कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह ने अपने फैसले को संदेहास्पद व विवादग्रस्त बना लिया है - और इस तरह अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मार ली है । उल्लेखनीय है कि मामले की पृष्ठभूमि में नोमीनेटिंग कमेटी के हटाये जा चुके चेयरमैन संजय चोपड़ा के जो भी किस्से/कहानियाँ चल रहे हों और जो भी आरोप/प्रत्यारोप लग रहे हों, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह ने आधिकारिक रूप से नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन के रूप में संजय चोपड़ा पर कोई आरोप नहीं लगाया है; और संजय चोपड़ा को चेयरमैन पद से हटाए जाने का भी उन्होंने कोई कारण नहीं बताया है । इसी तथ्य का वास्ता देकर संजय चोपड़ा ने लायंस इंटरनेशनल को लिखी/भेजी अपनी शिकायत में एके सिंह ने आरोप लगाया है कि नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन के रूप में वह तथा अन्य दो सदस्य चूँकि जगदीश अग्रवाल की उम्मीदवारी के नामांकन पत्र को रिजेक्ट करने की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह के माँग को पूरा नहीं कर रहे थे, इसलिए बिना कोई कारण बताये उन्हें नोमीनेटिंग कमेटी से बाहर कर दिया गया है ।
संजय चोपड़ा ने लायंस इंटरनेशनल को लिखी/भेजी अपनी शिकायत में यह दावा भी किया है कि एके सिंह ने पहले नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन के रूप में उनके उस अधिकार को मानने/देने से इंकार किया था, जिसके तहत उन्होंने जगदीश अग्रवाल को अपने आधे-अधूरे कागजातों को पूरा करने का मौका दिया था । एके सिंह का कहना था कि नोमीनेटिंग कमेटी को जगदीश अग्रवाल की तरफ से जो कागजात मिले हैं, उनके आधार पर ही उनके नामांकन की स्वीकृति का फैसला करना है; जगदीश अग्रवाल को दोबारा से दूसरे कागजात प्रस्तुत करने का मौका नहीं दिया जा सकता है । संजय चोपड़ा ने लेकिन मल्टीपल काउंसिल द्वारा स्वीकृत किए गए नियमों का हवाला देकर एके सिंह को बताया कि नोमीनेटिंग कमेटी किसी भी उम्मीदवार को अपने कागजात दुरुस्त करने तथा पूरे करने का मौका दे सकती है । संजय चोपड़ा का आरोप है कि एके सिंह को जब लगा कि वह नियमतः वह नोमीनेटिंग कमेटी को जगदीश अग्रवाल का नामांकन रिजेक्ट करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं, तब उन्होंने चेयरमैन सहित चार सदस्यीय कमेटी के तीन सदस्यों को ही हटा दिया और उनकी जगह नए सदस्य नियुक्त कर दिए । इससे लेकिन मामला खत्म होने की बजाये भड़क और गया है, और निशाने पर अब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह खुद आ गए हैं । संजय चोपड़ा की शिकायत ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में एके सिंह की भूमिका को संदेहास्पद व विवादपूर्ण बना दिया है । एके सिंह के लिए मुसीबत व फजीहत की बात यह हो गई है कि उक्त मामले में उनके पक्ष के लोग भी मानने और कहने लगे हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में एके सिंह ने मामले को होशियारी तथा उचित तरीके से हैंडल नहीं किया, जिस कारण मामला उलझ भी गया है और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में एके सिंह के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो गईं हैं । 

Saturday, March 16, 2019

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में जगदीश अग्रवाल के नामांकन को स्वीकार करने के मामले में विशाल सिन्हा द्वारा 'सेट' किए गए इंटरनेशनल डायरेक्टर जेपी सिंह से हरी झंडी मिलने के बाद ही संजय चोपड़ा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह की फजीहत करने वाले हालात बनाये

लखनऊ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह को अंततः पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स - संजय चोपड़ा, विशाल सिन्हा, अनुपम बंसल की तिकड़ी के सामने झुकने/दबने के लिए मजबूर होना पड़ा है, और सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए फर्जी और अधूरे तथ्यों पर आधारित जगदीश अग्रवाल का नामांकन स्वीकार हो गया है । जगदीश अग्रवाल इसके लिए खुलकर नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन संजय चोपड़ा का आभार व्यक्त कर रहे हैं, और लोगों को बता रहे हैं कि एके सिंह की तरफ से मिलने वाली धमकियों की परवाह न करते हुए संजय चोपड़ा ने उनके नामांकन को स्वीकार करने का साहसिक फैसला किया है । जगदीश अग्रवाल बता रहे हैं कि एके सिंह की तरफ से लगातार यह संदेश दिया जा रहा था कि संजय चोपड़ा ने यदि जगदीश अग्रवाल का नामांकन स्वीकार किया तो वह संजय चोपड़ा को नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन पद से हटा देंगे; संजय चोपड़ा ने लेकिन इस संदेश की परवाह नहीं की और उनके नामांकन को हरी झंडी दे दी । जगदीश अग्रवाल अपने नामांकन के नियमविरुद्ध होने के बावजूद स्वीकृत होने के लिए संजय चोपड़ा के साथ-साथ विशाल सिन्हा को भी श्रेय देते हैं । लोगों को उन्होंने बताया है कि इस मामले में संजय चोपड़ा से लेकर दिल्ली में बैठे इंटरनेशनल डायरेक्टर जेपी सिंह तक को 'साधने' का काम विशाल सिन्हा ने ही किया है । विशाल सिन्हा ने ही जेपी सिंह से यह आश्वासन लिया है कि नामांकन स्वीकार करने में हुई 'बेईमानी' को लेकर लायंस इंटरनेशनल में यदि शिकायत होती है, तो जेपी सिंह वहाँ मामला 'संभाल' लेंगे । जेपी सिंह से यह आश्वासन मिलने के बाद ही संजय चोपड़ा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह की धमकी को अनसुना करते हुए जगदीश अग्रवाल के नामांकन को स्वीकार कर लिया । जगदीश अग्रवाल द्वारा बताई जा रही बातों में यह बात लेकिन और भी खासी गंभीर है कि अपनी उम्मीदवारी का नामांकन स्वीकार करवाने के लिए उन्हें बड़ी मोटी रकम खर्च करना पड़ी है - जो लखनऊ व शाहजहाँपुर से लेकर दिल्ली तक के मुख्य पात्रों के बीच बँटी बताई/सुनी जा रही है । 
जगदीश अग्रवाल के नामांकन के मामले में हुआ दरअसल यह है कि उम्मीदवार होने के लिए नियमानुसार जिन शर्तों का पालन करना जरूरी था, जगदीश अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत किए गए कागज उन शर्तों को पूरा नहीं करते थे, जिसके चलते नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग में उनका नामांकन रद्द हो जाना चाहिए था; किंतु विशाल सिन्हा और अनुपम बंसल द्वारा दिए गए 'ऑफर' के दबाव के चलते नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन के रूप में संजय चोपड़ा ने जगदीश अग्रवाल को दूसरे कागज प्रस्तुत करने के लिए समय दे दिया । लायंस इंटरनेशनल के नियमों में हालाँकि इस तरह की कोई व्यवस्था ही नहीं है कि किसी उम्मीदवार के पेपर यदि आधे-अधूरे हैं, तो उसे 'सही' पेपर प्रस्तुत करने के लिए समय दिया जाए । वास्तव में, उम्मीदवारी के पेपर तैयार करने की प्रक्रिया ही ऐसी है कि उसमें नए पेपर देने/लेने का कोई मौका ही नहीं बनता है । लेकिन अपने बड़े 'लालच' को पूरा करने के ऐवज में संजय चोपड़ा ने नियम और प्रक्रिया को ही अनदेखा कर दिया । संजय चोपड़ा के फैसले को पक्षपातपूर्ण माना गया और इसमें 'सौदेबाजी' होने की आशंका देखी/पहचानी गई है । संजय चोपड़ा की यह कार्रवाई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह को उचित नहीं लगी और उन्होंने संजय चोपड़ा को बहुत समझाने की कोशिश की कि उन्हें यह नियमविरुद्ध काम नहीं करना चाहिए, अन्यथा उनके साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट की भी बहुत बदनामी होगी । एके सिंह ने यह संकेत भी दिए कि संजय चोपड़ा ने यदि नियमों का पालन नहीं किया, तो वह उन्हें नोमीनेटिंग कमेटी के चेयरमैन पद से हटा देंगे । लोगों के बीच चर्चा है कि जगदीश अग्रवाल और विशाल सिन्हा की तरफ से नामांकन स्वीकार करने के बदले में उन्हें इतना जोरदार और उनकी 'पसंद' का ऑफर था कि संजय चोपड़ा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह की समझाइस व धमकी तक की परवाह नहीं की ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह के लिए फजीहत की बात यह रही कि उनके द्वारा नियुक्त किए गए नोमीनेटिंग कमेटी चेयरमैन संजय चोपड़ा ने तो नियमविरुद्ध कार्रवाई करके 'बेईमानी' की ही, इंटरनेशनल डायरेक्टर जेपी सिंह तक ने संजय चोपड़ा की इस बेईमानी को हरी झंडी दी । इस मामले को 'देखने' वाले मल्टीपल के बड़े और लायंस इंटरनेशनल के नियमों को अच्छे से समझने वाले लोगों का मानना और कहना है कि इंटरनेशनल डायरेक्टर जेपी सिंह से हरी झंडी मिले बिना संजय चोपड़ा उक्त फैसला करने का साहस नहीं कर सकते थे । इस मामले में दिलचस्प पहलू यह भी है कि पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर विनोद खन्ना पहले ही यह स्पष्ट कर चुके थे कि नियमानुसार जगदीश अग्रवाल का नामांकन स्वीकार नहीं हो सकता है । दरअसल लखनऊ में हुई नोमीनेटिंग कमेटी की मीटिंग में जगदीश अग्रवाल के पेपर्स को जब आधा-अधूरा देखा/पाया गया था, तब विनोद खन्ना से ही सलाह ली गई थी कि नियमानुसार क्या किया जाना चाहिए । विनोद खन्ना का साफ कहना था कि जगदीश अग्रवाल की तरफ से जो पेपर दिए गए हैं, उनके आधार पर तो उनका नामांकन स्वीकार नहीं हो सकता है । विशाल सिन्हा और संजय चोपड़ा ने तब विनोद खन्ना को छोड़ कर जेपी सिंह का दामन पकड़ा और जेपी सिंह की तरफ से हरी झंडी मिलते ही संजय चोपड़ा ने जगदीश अग्रवाल द्वारा मुहैय्या कराये गए नए पेपर्स के आधार पर उनकी उम्मीदवारी को स्वीकार कर लिया - और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एके सिंह के लिए फजीहत वाली स्थिति बना दी ।

Monday, December 21, 2015

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में अपनी पहचान और प्रासंगिकता बनाएँ रखने खातिर पीएस जग्गी को उम्मीदवार बनाने की केएस लूथरा की कोशिश सचमुच सफल होगी क्या ?

लखनऊ । पीएस जग्गी की असमंजसता ने केएस लूथरा को न सिर्फ बुरी तरह फँसा दिया है, बल्कि उनकी राजनीति को भी दाँव पर लगा दिया है । केएस लूथरा उन्हें इस वर्ष सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार बनाना चाहते हैं, लेकिन वह न तो हाँ कह रहे हैं और न इंकार कर रहे हैं । हाँ और न के बीच झूलती पीएस जग्गी की मनोदशा ने केएस लूथरा को फँसा दिया है - क्योंकि ऐसे में केएस लूथरा के लिए अपने समर्थकों व नजदीकियों को यह बता पाना मुश्किल हो रहा है कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की इस वर्ष की राजनीति के संदर्भ में वह क्या स्टैंड लें ? उनकी इस मजबूरी का फायदा शिव कुमार गुप्ता और एके सिंह उठा रहे हैं - यह लोगों को कनविंस करने सफल हो रहे हैं कि इस बार सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए चुनाव की कोई संभावना नहीं है, और एके सिंह को सभी लोगों का समर्थन मिलेगा तथा वह निर्विरोध सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनेंगे । डिस्ट्रिक्ट में लोग इस बात पर यकीन करने भी लगे हैं और इसी यकीन के चलते लोगों ने एके सिंह को भावी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में देखना/पहचानना शुरू भी कर दिया है । केएस लूथरा के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि उनके कई एक समर्थकों ने भी एके सिंह को भावी गवर्नर के रूप में देखते हुए उनके साथ नजदीकी बनाना शुरू कर दिया है । इससे केएस लूथरा को अपना समर्थन-आधार कमजोर पड़ता नजर आ रहा है । अपने समर्थन-आधार को बनाए/बचाए रखने के लिए केएस लूथरा को एक उम्मीदवार की जरूरत है - पर पीएस जग्गी इस जरूरत को उलझाए हुए हैं । पीएस जग्गी यदि उम्मीदवार बनने से इंकार कर दें, तो केएस लूथरा किसी दूसरे को उम्मीदवार बना लें; किंतु पीएस जग्गी न तो इंकार कर रहे हैं और न अपनी उम्मीदवारी के साथ आगे आ रहे हैं । 
केएस लूथरा के नजदीकियों का कहना है कि पीएस जग्गी ने उम्मीदवारी के लिए हरी झंडी तो दे दी है, लेकिन वह अभी उम्मीदवार के रूप में लोगों के बीच नहीं आना चाहते हैं और यह बात उन्होंने केएस लूथरा को भी बता दी है - इसीलिए केएस लूथरा न तो पीएस जग्गी की उम्मीदवारी की बात कर रहे हैं, और न उन्हें छोड़ कर किसी और उम्मीदवार की तलाश कर रहे हैं । पीएस जग्गी अभी अपनी उम्मीदवारी घोषित नहीं करना चाहते हैं, तो केएस लूथरा के नजदीकियों के अनुसार इसका कारण यह है कि अभी से उन्हें खर्चा शुरू कर देना पड़ेगा । पीएस जग्गी ने केएस लूथरा को समझा दिया है कि चुनाव में अभी बहुत समय है, इसलिए अभी से उम्मीदवार 'बनने' की क्या जरूरत है; जब कॉल निकलेगी, तब उम्मीदवार 'बन' जायेंगे । केएस लूथरा के लिए पीएस जग्गी को यह समझाना तो मुश्किल हो रहा है कि जब तक उम्मीदवार 'बनोगे' तब तक तो एके सिंह लोगों के बीच अपनी पैठ बना लेंगे और तब अपनी उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाना मुश्किल होगा; लेकिन वह पीएस जग्गी पर अभी से उम्मीदवार बनने के लिए दबाव भी नहीं डाल सकते हैं । पीएस जग्गी तथा उनके नजदीकियों का तर्क है कि शिव कुमार गुप्ता भी तो चुनाव से दो महीना पहले उम्मीदवार बने थे और समर्थन जुटा कर कामयाब हुए थे । पीएस जग्गी इस बात को नहीं समझ रहे हैं, लेकिन केएस लूथरा समझ रहे हैं कि उस समय हालात बिलकुल अलग थे और आज स्थिति अलग है - उस समय जो हुआ, उसे इस बार दोहरापाना मुश्किल ही होगा । 
केएस लूथरा डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के सारे गणित का लेखा-जोखा जेब में रख कर घूम रहे हैं और जब भी मौका मिलता है, उसे जेब से निकाल कर लोगों को दिखाते हैं और यह बताते तथा साबित करते हैं कि चुनावी जीत का आँकड़ा उनके पास है । केएस लूथरा जिस तरह अपने वोटों का कागज जेब में रखे घूम रहे हैं, और जब तब लोगों को दिखाते फिर रहे हैं - उससे लोगों ने एक यह बात तो समझ ली है कि केएस लूथरा इस बार चुनाव तो अवश्य ही करवायेंगे और हर संभव तरीके से एके सिंह का रास्ता रोकने का प्रयास करेंगे । दरअसल पिछले वर्ष संजय चोपड़ा और इस वर्ष शिव कुमार गुप्ता के साथ उनका जो अनुभव रहा, उसके बाद उनके लिए डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में प्रासंगिक बने रहने के लिए चुनाव लड़वाना और जितवाना जरूरी बन गया है । उल्लेखनीय है कि संजय चोपड़ा उनके ही 'आदमी' थे और शिव कुमार गुप्ता यदि आज गवर्नर हैं तो सिर्फ और सिर्फ केएस लूथरा की बदौलत हैं - इसके बावजूद संजय चोपड़ा और शिव कुमार गुप्ता ने गवर्नर के रूप में केएस लूथरा को पर्याप्त तवज्जो नहीं दी; और केएस लूथरा को इनसे बड़ी शिकायत रही । केएस लूथरा को लगता है और अपने नजदीकियों से उन्होंने यह कहा भी है कि जब संजय चोपड़ा और शिव कुमार गुप्ता ने उन्हें खास अहमियत नहीं दी, तो संदीप सहगल और एके सिंह से वह क्या उम्मीद करें ? ऐसे में, डिस्ट्रिक्ट में अपनी अहमियत बनाए रखने तथा उसे 'दिखाने' के लिए केएस लूथरा को  जरूरी लगता है कि वह अपने उम्मीदवार मैदान में उतारें और उन्हें जितवाएँ । एके सिंह को चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर शिव कुमार गुप्ता के उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है, इसलिए केएस लूथरा को उनके खिलाफ उम्मीदवार लाना जरूरी लग रहा है । 
केएस लूथरा के लिए मुसीबत की बात लेकिन यह है कि जीत का आँकड़ा जेब में रखे रहने के बावजूद उन्हें कोई दमदार उम्मीदवार नहीं मिल रहा, जो एके सिंह से चुनाव लड़ने को तैयार हो जाए । एक जिन पीएस जग्गी पर उनकी उम्मीद और दूसरों की निगाहें टिकी हुई हैं, उनकी उम्मीदवारी को लेकर वास्तव में कोई भी आश्वस्त नहीं है । पीएस जग्गी को जानने वालों का कहना है कि उनमें गवर्नर बनने की इच्छा तो है, पर चुनाव लड़ने के झंझट को झेलने की उतनी हिम्मत नहीं है - जितनी हिम्मत चाहिए होती है । इसीलिए डिस्ट्रिक्ट के बहुत लोगों को शक है कि पीएस जग्गी सचमुच में उम्मीदवार बनेंगे ? केएस लूथरा अपनी तरफ से हालाँकि उन्हें हिम्मत तो बँधा रहे हैं, और जेब से कागज निकाल निकाल कर जीत का गणित समझा रहे हैं - किंतु पीएस जग्गी को उनके गणित पर कितना भरोसा हो रहा है, यह आगे आने वाले दिनों में पता चलेगा । पीएस जग्गी यदि उम्मीदवार नहीं होते/बनते हैं, तब केएस लूथरा क्या करेंगे - यह एक ऐसा सवाल लोगों के बीच चर्चा में है, जिसका कोई साफ जबाव किसी के पास नहीं है । हर किसी को यह तो लगता है कि केएस लूथरा कुछ भी करके किसी न किसी को तो उम्मीदवार जरूर ही बनायेंगे, और एके सिंह का रास्ता रोकने का प्रयास अवश्य ही करेंगे । केएस लूथरा के नजदीकियों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट में अपनी पहचान और प्रासंगिकता बनाएँ रखने के लिए, केएस लूथरा के लिए ऐसा करना मजबूरी भी है । मजबूरी के बावजूद केएस लूथरा ऐसा करने में सचमुच कामयाब हो सकेंगे या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा । 

Monday, March 9, 2015

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में लखनऊ में अशोक अग्रवाल से पिछड़ रहे संदीप सहगल के समर्थकों ने नीरज बोरा, भूपेश बंसल और शिव कुमार गुप्ता को जिम्मेदार ठहराना शुरू किया

लखनऊ । नीरज बोरा, भूपेश बंसल और शिव कुमार गुप्ता से अपेक्षित मदद न मिलने के कारण संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थकों के बीच निराशा पैदा हो रही है, और उनके बीच शिकायतें सुनी जा रही हैं कि इन लोगों को जितनी सक्रियता दिखानी चाहिए ये लोग उतनी सक्रियता दिखा नहीं रहे हैं । संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थकों का कहना है कि इन तीनों के ढीले-ढाले रवैये के कारण लखनऊ में संदीप सहगल की उम्मीदवारी के पक्ष में उतना समर्थन भी नहीं जुटाया जा पा रहा है, जितना कि आसानी से जुटाया जा सकता है ।
संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थकों को यह शिकायत इसलिए भी करनी पड़ रही है क्योंकि वह देख रहे हैं कि उनके प्रतिद्धंद्धी उम्मीदवार अशोक अग्रवाल के समर्थन में गुरनाम सिंह के साथ-साथ संजय चोपड़ा, विशाल सिन्हा और अनुपम बंसल ने भी जी-तोड़ प्रयास जारी रखे हुए हैं, जिसके चलते लखनऊ में अशोक अग्रवाल का पलड़ा काफी भारी होता जा रहा है । उल्लेखनीय है कि संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थक बड़े नेता भी लगातार यह मानते और कहते रहे हैं कि लखनऊ में संदीप सहगल के मुकाबले अशोक अग्रवाल को बढ़त है । यह स्वीकार करने के साथ साथ वह हालाँकि यह दावा भी करते रहे हैं कि अशोक अग्रवाल की जो बढ़त है, उसे वह कम कर लेंगे । अशोक अग्रवाल की बढ़त को कम करने के लिए संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थक नीरज बोरा, भूपेश बंसल और शिव कुमार गुप्ता पर निर्भर थे । उन्हें भरोसा था कि इन लोगों की सक्रियता से वह लखनऊ में संदीप सहगल को अशोक अग्रवाल से ज्यादा पीछे नहीं रहने देंगे । किंतु चुनाव का समय जैसे जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे संदीप सहगल के समर्थकों को यह देख कर निराशा हो रही है कि ये तीनों लोग अपेक्षित मदद नहीं कर रहे हैं ।
संदीप सहगल के समर्थकों को पिछले दिनों असल में उस समय बड़ा झटका लगा जब उन्हें पता चला कि लखनऊ के एक क्लब के कार्यक्रम का निमंत्रण प्राप्त करने की कोशिश करने के बाद भी संदीप सहगल को निमंत्रण नहीं मिला । इस जानकारी का लखनऊ से बाहर के, तराई क्षेत्र के लोगों के बीच नकारात्मक संदेश गया; और वहाँ लोगों को यह कहते हुए सुना गया कि संदीप सहगल के लखनऊ के समर्थक नेता यदि उन्हें किसी क्लब के कार्यक्रम का निमंत्रण भी नहीं दिलवा सकते हैं, तो फिर वोट कैसे दिलवायेंगे ? संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थकों ने हालाँकि यह तर्क देकर लोगों को कनविंस करने की कोशिश तो की कि केएस लूथरा के साथ अपने विरोध के चलते उक्त क्लब के पदाधिकारी संदीप सहगल को निमंत्रण देने के लिए तैयार नहीं हुए; लेकिन लोगों के बीच सवाल फिर भी बना रहा कि उक्त क्लब के पदाधिकारियों का विरोध यदि केएस लूथरा के साथ है भी तो नीरज बोरा, भूपेश बंसल और शिव कुमार गुप्ता तो निमंत्रण दिलाने के लिए प्रयास कर सकते थे ? इन्होंने प्रयास क्यों नहीं किया ? शिव कुमार गुप्ता तो फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं, तीन-चार महीने बाद वह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होंगे - वह यदि सचमुच चाहते और कोशिश करते तो संदीप सहगल को निमंत्रण तो मिल ही जाता और डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच नकारात्मक संदेश नहीं जाता ।
संदीप सहगल की उम्मीदवारी के अभियान में दरअसल झंझट इस कारण भी बना दिख रहा है कि सारा बोझ एक अकेले केएस लूथरा के सिर आ पड़ा है, और दूसरे समर्थक नेताओं का उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है । ले दे कर एक एचएस सच्चर और संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थन में सक्रिय हैं, लेकिन वह चुनावी राजनीति की वास्तविकताओं और जुगाड़ों की व्यवस्था से इस कदर अनजान हैं कि उनका काम भी केएस लूथरा को ही करना पड़ रहा है । संदीप सहगल की उम्मीदवारी के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए पहले यह व्यवस्था बनाई गई थी कि तराई क्षेत्र का काम एचएस सच्चर देखेंगे और लखनऊ का जिम्मा केएस लूथरा सँभालेंगे । लेकिन जब 'सचमुच का काम' करने का समय आया तो पता चला कि एचएस सच्चर को न तो ज्यादा कुछ पता है और न ही उनके लिए लोगों का साधना संभव होगा । तब केएस लूथरा को आगे आकर उनकी जिम्मेदारी सँभालनी पड़ी । तराई क्षेत्र के क्लब्स में केएस लूथरा का अच्छा परिचय और प्रभाव भी है; वहाँ वही स्थितियों को नियंत्रित भी कर सकते हैं । केएस लूथरा ने तराई क्षेत्र में जिम्मेदारी सँभाली तो लखनऊ का काम पिछड़ गया । कहने को तो लखनऊ में नीरज बोरा, भूपेश बंसल और शिव कुमार गुप्ता को संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थन में देखा/पहचाना जाता है । लेकिन नीरज बोरा और भूपेश बंसल चूँकि चुनावी राजनीति की जरूरत के हिसाब से सक्रिय होने का मिजाज नहीं रखते हैं, इसलिए उनके केएस लूथरा के पूरक बनने की किसी ने उम्मीद भी नहीं की; शिव कुमार गुप्ता फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के नाते खुल कर ज्यादा कुछ करने से बचते हुए दिखे हैं ।
संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थकों की शिकायत यही है कि अशोक अग्रवाल को तो अपने समर्थक नेताओं - गुरनाम सिंह, अनुपम बंसल, संजय चोपड़ा, विशाल सिन्हा आदि का खुला और सक्रिय समर्थन मिल रहा है; जबकि संदीप सहगल एक अकेले केएस लूथरा के भरोसे छोड़ दिए गए हैं तथा उनके बाकी समर्थक नेता 'इस' कारण से या 'उस' कारण से या तो चुप बैठे हैं और या उतने सक्रिय नहीं हैं जितना सक्रिय उनको होना चाहिए । शिव कुमार गुप्ता को तो संदीप सहगल की उम्मीदवारी के बड़े घनघोर समर्थक के रूप में देखा/पहचाना जाता है; इसलिए उनको भी ज्यादा सक्रिय न होता देख संदीप सहगल के समर्थकों के बीच असमंजस बना है । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए अशोक अग्रवाल और संदीप सहगल के बीच होने वाले चुनाव में लखनऊ का खास रोल है, जहाँ कि अशोक अग्रवाल का पलड़ा पहले से ही भारी देखा/पहचाना जा रहा है । ऐसे में, संदीप सहगल को जिन लोगों से मदद की उम्मीद है उन लोगों से अपेक्षित मदद न मिलती देख कर संदीप सहगल के समर्थकों का निराश होना स्वाभाविक ही है । संदीप सहगल के कुछेक समर्थकों ने इसके लिए नीरज बोरा, भूपेश बंसल और शिव कुमार गुप्ता को जिस तरह से निशाने पर लेना शुरू कर दिया है, उससे सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनाव खासा दिलचस्प हो गया है ।

Sunday, September 28, 2014

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में नीरज बोरा से अधिष्ठापन कराने से नाराज गुरनाम सिंह द्धारा लायंस क्लब काशीपुर सिटी के सुखविंदर सिंह के कंधे पर बंदूक रखकर संदीप सहगल का 'शिकार' करने की योजना के विफल हो जाने के बाद, गुरनाम सिंह अब क्या करेंगे ?

लखनऊ । नीरज बोरा द्धारा अधिष्ठापित संदीप सहगल की चेयरमैनशिप में आयोजित क्लब्स के सामूहिक अधिष्ठापन समारोह को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच इतनी चर्चा शायद न मिलती, यदि इस समारोह की सफलता से बौखलाए गुरनाम सिंह की बौखलाहट लोगों के सामने न आई होती । गुरनाम सिंह को यह जानकर दरअसल बुरा लगा कि संदीप सहगल लखनऊ में कुछेक क्लब्स का सामूहिक अधिष्ठापन करवा रहे हैं और अधिष्ठापन का काम उनसे सलाह किए बिना नीरज बोरा से करवा रहे हैं । इसीलिए गुरनाम सिंह ने पहले तो इस समारोह में अड़चन डालने का प्रयास किया, किंतु उसमें विफल होने के बाद उन्होंने संदीप सहगल को निशाना बनाना शुरू कर दिया और लायंस क्लब काशीपुर सिटी के सुखविंदर सिंह का नाम लेकर काशीपुर के लायन सदस्यों में फूट डालने तथा संदीप सहगल का काम बिगाड़ने के काम में लग गए हैं । गुरनाम सिंह की इस कार्रवाई ने संदीप सहगल को और उनकी चेयरमैनशिप में लखनऊ में आयोजित हुए अधिष्ठापन समारोह को डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच गंभीर चर्चा में ला दिया है । लोगों को लग रहा है कि संदीप सहगल की सक्रियता से यदि गुरनाम सिंह बौखला गए हैं तो इसका मतलब है कि संदीप सहगल की सक्रियता को अप्रत्याशित कामयाबी मिल रही है - जो गुरनाम सिंह को हजम नहीं हो पा रही है ।
डिस्ट्रिक्ट में लोगों का मानना और कहना है कि गुरनाम सिंह की शाश्वत समस्या दरअसल यह है कि वह डिस्ट्रिक्ट में हर फैसला खुद लेना चाहते हैं और इस बात को बिलकुल भी पसंद नहीं करते हैं कि कोई भी उनकी 'गुलामी' करने से जरा भी इंकार करे - कोई अपना भी यदि उन्हें ऐसा करता हुआ लगता है, तो फिर वह उसके दुश्मन हो जाते हैं । उनके इस रवैये का निकट भविष्य में जो शिकार बना, वह हैं केएस लूथरा । केएस लूथरा जैसा 'भक्त' गुरनाम सिंह को शायद ही मिला होगा, लेकिन वह केएस लूथरा को भी बर्दाश्त नहीं कर सके । फिर, केएस लूथरा के हाथों ही गुरनाम सिंह ने अपनी जो फजीहत करवाई, वह भी अपनी तरह का एक उदाहरण है । पिछले लायन वर्ष में केएस लूथरा की खुशामद करके गुरनाम सिंह ने जिस तरह विशाल सिन्हा को सुरक्षित निकलवाया उससे लोगों को लगा था कि गुरनाम सिंह लोगों के बदलते मूड को पहचान/समझ रहे हैं और अपने रवैये को बदल रहे हैं । मौजूदा लायन वर्ष में चुनावी राजनीति की जब चर्चा चली और अधिकतर लायन नेताओं ने यह मत व्यक्त किया कि इस बार चूँकि तराई क्षेत्र के क्लब्स का नंबर है, इसलिए वहाँ के लोगों को राजनीति तय कर लेने का मौका देना चाहिए - तो गुरनाम सिंह ने इस पर सहमति ही व्यक्त की थी और साफ कहा था कि इस बार जो भी उम्मीदवार हैं, उनमें से कोई भी उनका 'अपना' उम्मीदवार नहीं है । इससे भी लोगों के बीच विश्वास बना कि गुरनाम सिंह सचमुच बदल रहे हैं और चौधराहट ज़माने के लिए अपने-पराये का खेल खेलने से दूरी बना रहे हैं ।
लेकिन संदीप सहगल की चेयरमैनशिप में आयोजित क्लब्स के सामूहिक अधिष्ठापन समारोह को लेकर गुरनाम सिंह ने जो रवैया दिखाया, उससे साबित हुआ कि गुरनाम सिंह जरा भी नहीं बदले हैं और पिछले दिनों वह बदलते हुए जो दिखे थे, वह लोगों को भरमाने के लिए दरअसल उनका नाटक भर था । गुरनाम सिंह ने जिस तरह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजय चोपड़ा को इस्तेमाल करते हुए उक्त समारोह को न होने देने की चाल चली, उससे दिख गया कि गुरनाम सिंह अपने पुराने रंग में लौट आये हैं । संजय चोपड़ा ने उक्त समारोह के लिए टाइम देने में जिस तरह से काफी आनाकानी की, उससे समारोह के आयोजकों ने समझ लिया कि गुरनाम सिंह उनमें चाबी भर रहे हैं । समारोह के आयोजकों ने भी ठान लिया था कि संजय चोपड़ा जब टाइम देंगे, वह समारोह तभी कर लेंगे । ऐसे में, संजय चोपड़ा भी कब तक बचते ? उन्हें टाइम देना ही पड़ा और संदीप सहगल की चेयरमैनशिप में शानदार तरीके से समारोह संपन्न हुआ ।
संदीप सहगल की चेयरमैनशिप में आयोजित समारोह से गुरनाम सिंह के नाराज होने का प्रमुख कारण उनके नजदीकियों ने ही नीरज बोरा से अधिष्ठापन कराना बताया । पिछले लायन वर्ष में विशाल सिन्हा को सुरक्षित निकलवाने के लिए तो गुरनाम सिंह ने नीरज बोरा से बहुत नजदीकियाँ बनाई/दिखाईं, लेकिन अपना काम निकल जाने के बाद अब उन्हें यह बात बिलकुल भी पसंद नहीं आ रही है कि नीरज बोरा से क्लब्स के सामूहिक अधिष्ठापन समारोह में अधिष्ठापन कराया जाये । इस अधिष्ठापन समारोह को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए प्रस्तुत संदीप सहगल की उम्मीदवारी के प्रमोशन के रूप में देखा जा रहा था; और इस समारोह में वही लोग जुटते हुए देखे जा रहे थे जिन्होंने विशाल सिन्हा के खिलाफ शिव कुमार गुप्ता की जीत का करिश्मा संभव कर दिखाया था । इसलिए भी गुरनाम सिंह को इस समारोह को फेल करना जरूरी लगा - लेकिन अपनी तमाम कोशिशों के बाद भी उसे फेल करना तो दूर, वह उसे शानदार तरीके से आयोजित होने से भी नहीं रोक सके ।
गुरनाम सिंह आसानी से हार मानने वाले व्यक्ति नहीं हैं । लखनऊ में मात खाने के बाद उन्होंने संदीप सहगल को काशीपुर में घेरने की चाल चली । काशीपुर के लायन सदस्यों में फूट डाल कर कुछेक सदस्यों को संदीप सहगल के खिलाफ करने के मामले में भी गुरनाम सिंह को जब अपनी दाल गलती हुई नहीं दिखी तो उन्होंने लायंस क्लब काशीपुर सिटी के सुखविंदर सिंह के कंधे पर बंदूक रखकर संदीप सहगल का 'शिकार' करने की योजना बनाई । गुरनाम सिंह ने काशीपुर के लायन सदस्यों को यह कहकर भड़काया कि उन्हें काशीपुर से ही गवर्नर बनवाना है, तो सुखविंदर सिंह को बनवाओ । काशीपुर के लायन सदस्यों ने उनकी इस चाल को भी यह कहकर विफल कर दिया कि उन्होंने तो पहले ही सुखविंदर सिंह से उम्मीदवार बनने के लिए कहा था, लेकिन सुखविंदर सिंह ने अपनी उम्मीदवारी से इंकार करते हुए संदीप सहगल को उम्मीदवार बनाने का सुझाव दिया था ।
संदीप सहगल का 'शिकार' करने में गुरनाम सिंह अभी भले ही असफल हुए हों, किंतु वह चुप बैठने वाले लोगों में नहीं हैं । यह पहले ही कहा जा चुका है कि गुरनाम सिंह आसानी से हार मानने वाले व्यक्ति नहीं हैं । लखनऊ में संदीप सहगल ने जिस तरह का आयोजन किया और उसमें जिस तरह के लोग जुटे, उसे देख कर तो गुरनाम सिंह के लिए कुछ न कुछ करना जरूरी हो गया है । यह देखना दिलचस्प होगा कि गुरनाम सिंह की अगली चाल अब क्या होगी ?

Thursday, July 24, 2014

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में अनुपम बंसल ने जिस फार्मूले से विशाल सिन्हा की नकेल कसी थी, संजय चोपड़ा ने भी चुनावी राजनीति में अपनी अहमियत जताने/दिखाने के लिए प्रतुल गर्ग की उम्मीदवारी के जरिये उसी 'फार्मूले' का सहारा लिया है क्या ?

शाहजहाँपुर । संजय चोपड़ा ने प्रतुल गर्ग को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए उम्मीदवार 'बनवा' कर डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के समीकरणों को उलट-पलट दिया है । उल्लेखनीय है कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए जब तक संदीप सहगल और अशोक अग्रवाल के नाम चर्चा में थे तब तक चुनावी राजनीति परंपरागत रूप से दो खेमों में ही बंटी दिख रही थी और संजय चोपड़ा परिदृश्य से बाहर दिख रहे थे । संदीप सहगल की उम्मीदवारी को हरजीत सिंह सच्चर, ब्रजेश अग्रवाल और विनय भारद्धाज जैसे पूर्व गवर्नरों के समर्थन की चर्चा सुनी जा रही थी, तो अशोक अग्रवाल के पीछे प्रमोद चंद्र सेठ को देखा/पहचाना जा रहा था । माना जा रहा था कि संदीप सहगल को लखनऊ के उन नेताओं का समर्थन मिल जायेगा जो पिछले से पिछले लायन वर्ष में शिव कुमार गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थन में थे; और अशोक अग्रवाल के लिए प्रमोद चंद्र सेठ कुछ न कुछ करके गुरनाम सिंह का समर्थन जुटा लेंगे । गुरनाम सिंह यद्यपि अभी उम्मीदवारों की गहराई नाप रहे हैं और अपना फरमान सुनाने से बच रहे हैं । इस पूरे खेल में बेचारे संजय चोपड़ा के लिए कहीं कोई जगह नहीं बनती हुई दिख रही थी - हालाँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के नाते सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में उनकी भूमिका ही महत्वपूर्ण होनी है, लेकिन सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की चुनावी राजनीति की बिछाई जा रही बिसात में उन्हें ही कोई भूमिका नहीं मिल रही थी । इसी पृष्ठभूमि में प्रतुल गर्ग की उम्मीदवारी के जरिए संजय चोपड़ा ने डिस्ट्रिक्ट के चुनावी खिलाड़ियों को 'धोबीपाट' दे दिया ।
जैसे सभी गवर्नर दावा करते हैं, संजय चोपड़ा भी दावा तो वैसा ही कर रहे हैं कि उनकी कोई राजनीति नहीं है और वह किसी उम्मीदवार को फायदा पहुँचाने का काम नहीं करेंगे । अभी तक कोई ऐसा तथ्य भी सामने नहीं आया है जिससे यह लगे कि वह अतिरिक्त दिलचस्पी लेकर प्रतुल गर्ग को प्रमोट कर रहे हैं - लेकिन फिर भी, उनके क्लब के प्रतुल गर्ग की उम्मीदवारी जिस अचानक तरीके से प्रकट हुई उसे देख/जान कर हर किसी को लगता है कि प्रतुल गर्ग की उम्मीदवारी के पीछे संजय चोपड़ा की शह ही है । ऐसा लगने का एक कारण और है । डिस्ट्रिक्ट के खिलाड़ियों ने दरअसल संजय चोपड़ा को कम करके आँका हुआ था और समझा हुआ था कि वह संजय चोपड़ा को जैसे 'कच्चा ही चबा जायेंगे' । इस गलतफहमी में उनके दोस्त लोग भी थे । इसी गलतफहमी में केएस लूथरा ने दुबई में डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन कार्यक्रम के उनके प्रस्ताव पर भारी बबाल किया, लेकिन संजय चोपड़ा ने बड़ी होशियारी से 'अपने पत्ते चलते हुए' केएस लूथरा के सारे अभियान की हवा निकाल दी । मजे की बात यह भी रही कि इस मामले में केएस लूथरा ने भले ही आक्रामकता दिखाई हो किंतु संजय चोपड़ा ने विनम्रता के साथ चुपचाप 'अपना काम' किया । इस प्रकरण से संजय चोपड़ा ने साबित किया कि उन्हें काम निकालना आता है और प्रतिकूल स्थितियों को भी अनुकूल बनाने का हुनर उनमें है । यहाँ इस तथ्य पर गौर करना प्रासंगिक होगा कि प्रतुल गर्ग की उम्मीदवारी से संजय चोपड़ा के 'भावों' में एकदम से तेज उछाल आया है, जो उससे पहले बिलकुल नीचे गिरे हुए थे । एक उम्मीदवार के रूप में प्रतुल गर्ग का क्या होगा, यह तो आगे पता चलेगा; अभी लेकिन डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में संजय चोपड़ा का रुतबा जरूर बढ़ है ।
दरअसल अशोक अग्रवाल और संदीप सहगल उम्मीदवार के रूप में संजय चोपड़ा को कोई तवज्जो ही नहीं दे रहे थे । अशोक अग्रवाल को विश्वास था कि प्रमोद चंद्र सेठ उनकी उम्मीदवारी की नैय्या को गुरनाम सिंह का समर्थन दिलवा कर पार लगवा देंगे; तो संदीप सहगल को कई पूर्व गवर्नरों के समर्थन के चलते अपने लिए भरोसा था - संजय चोपड़ा की अहमियत कोई भी नहीं समझ रहा था । समझा जाता है कि तब संजय चोपड़ा ने अनुपम बंसल वाला फार्मूला अपनाया । उल्लेखनीय है कि पिछले लायन वर्ष में जब विशाल सिन्हा के सामने किसी उम्मीदवार के आने की संभावना नहीं थी, तब तक विशाल सिन्हा किसी को कुछ समझ ही नहीं रहे थे और 'सुपर गवर्नर' की तरह व्यवहार कर रहे थे । अनुपम बंसल ने उनका 'ईलाज' करने के लिए ही चुपचाप से एके सिंह को हवा दी । एके सिंह को हवा मिली तब विशाल सिन्हा की हवा निकलना शुरू हुई और फिर वह उन लोगों की खुशामद में जुटे, जिन्हें वह पहले गालियाँ दे रहे थे । विशाल सिन्हा समझ रहे थे कि एके सिंह से यदि चुनाव की स्थिति बनी तो वह फिर हारेंगे - इसलिए 'सुपर गवर्नर' का अपना व्यवहार छोड़ कर वह सचमुच में 'उम्मीदवार' बने और किसी तरह से सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बने । अनुपम बंसल जिस चतुराई से विशाल सिन्हा को जमीन पर लाए - समझा जाता है कि चुनावी राजनीति में अपनी अहमियत जताने/दिखाने के लिए संजय चोपड़ा ने भी उसी 'चतुराई' का सहारा लिया है ।
डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति के खिलाड़ी तीनों उम्मीदवारों में प्रतुल गर्ग को सबसे कमजोर उम्मीदवार रूप में भले ही देख रहे हों, लेकिन उनमें से कइयों का यह भी मानना और कहना है कि तीनों में सबसे ज्यादा प्रतुल गर्ग ही ऊर्जावान हैं । यह देखने की बात होगी कि अपनी ऊर्जा को वह कैसे संयोजित करते हैं । संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थकों को अशोक अग्रवाल की उम्मीदवारी से तो ज्यादा चिंता नहीं थी, लेकिन प्रतुल गर्ग की उम्मीदवारी के प्रकट होने के बाद उन्हें चुनावी मुकाबले के मुश्किल होने की आशंका हुई है । संदीप सहगल की उम्मीदवारी के समर्थकों ने संदीप सहगल के पक्ष में समर्थन जुटाने के प्रयास में एक बड़ा भावुक-सा तर्क दिया है कि बार-बार शाहजहाँपुर से ही गवर्नर क्यों बनना चाहिए, दूसरे छोटे शहरों के लोगों भी मौका मिलना चाहिए । प्रतुल गर्ग की उम्मीदवारी के समर्थकों ने इसका जबाव देते हुए रेखांकित किया है कि लखनऊ से अनुपम बंसल, शिव कुमार गुप्ता और विशाल सिन्हा जो अभी के गवर्नर हैं वह एक ही कॉलोनी - निराला नगर क्षेत्र के ही हैं; तब क्यों नहीं कहा गया कि एक ही कॉलोनी के लोग ही गवर्नर बनेंगे क्या और क्यों नहीं गोमती नगर या चौक के किसी लायन को गवर्नर बनाने की कवायद हुई ? हल्द्वानी के बृजेश अग्रवाल जब उम्मीदवार थे तब उन्होंने विनय भारद्धाज के लिए रास्ता क्यों नहीं छोड़ा था, क्योंकि हल्द्वानी से तो हरजीत सिंह सच्चर गवर्नर बन ही चुके थे और काशीपुर को नंबर मिलना चाहिए था । प्रतुल गर्ग की उम्मीदवारी के समर्थकों का कहना है कि चुनावी राजनीति में कोई किसी के लिए मौका छोड़ता नहीं है; यहाँ सभी को अपना मौका अपनी सक्रियता और अपने काम के भरोसे बनाना/पाना होता है । प्रतुल गर्ग की उम्मीदवारी के समर्थकों के इन तेवरों को देखते हुए और प्रतुल गर्ग के संजय चोपड़ा के क्लब के होने के चलते सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद का चुनाव गंभीर हो गया है ।

Tuesday, February 11, 2014

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में केएस लूथरा ने संजय चोपड़ा के गवर्नर-काल में चौधराहट जमाने की जो तैयारी की थी, गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी ने उस पर पानी फेर दिया है

लखनऊ । गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी ने केएस लूथरा से संजय चोपड़ा को छीन कर, उन्हें विशाल सिन्हा की उम्मीदवारी का समर्थन करने का 'ईनाम' दे दिया है । केएस लूथरा को फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संजय चोपड़ा के साथ अपनी दोस्ती पर बड़ा नाज़ रहा है और वह गाहे-बगाहे अपने इस नाज़ का बखान भी करते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से केएस लूथरा और संजय चोपड़ा के बीच बातचीत वाले संबंध भी नहीं रह गए हैं । केएस लूथरा ने अपने कुछेक नजदीकियों से शिकायत भी की है कि संजय चोपड़ा अब उनकी सुनते ही नहीं हैं । दूसरे लोगों ने भी महसूस किया है कि संजय चोपड़ा अब केएस लूथरा की नहीं - बल्कि गुरनाम सिंह की, प्रमोद चंद्र सेठ की, अनुपम बंसल की, विशाल सिन्हा की सुन रहे हैं । गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी ने दरअसल बड़ी होशियारी से संजय चोपड़ा को केएस लूथरा से छीन लिया है और केएस लूथरा हाथ मलते ही रह गए हैं ।
केएस लूथरा और संजय चोपड़ा के बीच अगले लायन वर्ष में - संजय चोपड़ा के गवर्नर-काल में - होने वाले अधिष्ठापन कार्यक्रम के स्थान को लेकर जो मतभेद पैदा हुआ, उसे गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी ने अपने लिए एक मौके के रूप में पहचाना और संजय चोपड़ा को उकसा कर उन्हें केएस लूथरा से दूर कर दिया । हुआ यह कि संजय चोपड़ा ने अपने गवर्नर-काल में होने वाले डिस्ट्रिक्ट अधिष्ठापन कार्यक्रम को दुबई में करने की योजना का जिक्र किया, तो केएस लूथरा ने इसका विरोध किया । केएस लूथरा का तर्क रहा कि दुबई में होने से डिस्ट्रिक्ट अधिष्ठापन कार्यक्रम में ज्यादा लोगों की भागीदारी नहीं हो पायेगी और वह एक पिकनिक कार्यक्रम भर बन कर रह जायेगा । इससे डिस्ट्रिक्ट अधिष्ठापन के मूल उद्देश्य को भी प्राप्त नहीं किया जा सकेगा । केएस लूथरा ने उदाहरण सहित तर्क भी दिया कि जिन भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने विदेश में और/या पिकनिक स्थलों पर डिस्ट्रिक्ट के कार्यक्रम किये हैं, उन्हें लोगों की भारी आलोचना का ही शिकार होना पड़ा है और कुछ भी हासिल नहीं हुआ । केएस लूथरा ने संजय चोपड़ा को सलाह दी कि डिस्ट्रिक्ट अधिष्ठापन का कार्यक्रम उन्हें शाहजहाँपुर या लखनऊ में ही करना चाहिए । केएस लूथरा की इन बातों से संजय चोपड़ा को झटका तो लगा, लेकिन यह कोई ऐसी बात नहीं थी जिससे कि उनके और केएस लूथरा के बीच दूरियाँ बन जाएँ ।
लेकिन गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी के लोगों को जैसे ही पता चला कि दुबई में डिस्ट्रिक्ट अधिष्ठापन करने की संजय चोपड़ा की तैयारी पर केएस लूथरा पानी फेरने की कोशिश कर रहे हैं - वह संजय चोपड़ा की मदद करने के लिए कूद पड़े । सबसे पहले प्रमोद चंद्र सेठ ने संजय चोपड़ा का हौंसला बढ़ाया - उन्होंने संजय चोपड़ा से कहा कि वह जहाँ कहीं भी डिस्ट्रिक्ट अधिष्ठापन का आयोजन करना चाहें करें । प्रमोद चंद्र सेठ उनसे यह कहना भी नहीं भूले कि वह जहाँ कहीं भी अधिष्ठापन कार्यक्रम करेंगे, उनका और उनके क्लब का पूरा पूरा सहयोग और समर्थन उन्हें मिलेगा । संजय चोपड़ा को प्रमोद चंद्र सेठ का समर्थन मिला, तो फिर समर्थन और सहयोग के ऑफर की लाइन लग गई । अनुपम बंसल ने, गुरनाम सिंह ने और विशाल सिन्हा ने भी दुबई में डिस्ट्रिक्ट अधिष्ठापन कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर संजय चोपड़ा की पीठ थपथपाई । इतने 'महान' नेताओं से समर्थन और सहयोग का आश्वासन मिला, तो संजय चोपड़ा को केएस लूथरा की समझाइश बकवास लगने लगी और उन्होंने केएस लूथरा के साथ बात करना कम क्या, बंद ही कर दिया । गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी के लोगों की रणनीति कामयाब रही ।
संजय चोपड़ा को केएस लूथरा से छीन कर गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी ने केएस लूथरा से बदला भी ले लिया और उन्हें अकेला भी कर दिया । केएस लूथरा ने संजय चोपड़ा के गवर्नर-काल में चौधराहट जमाने की जो तैयारी की थी, गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी ने उस पर पानी फेर दिया है । गुरनाम सिंह एंड कंपनी के प्रमुख सदस्य प्रमोद चंद्र सेठ ने संजय चोपड़ा को पटा कर अपनी पत्नी मीरा सेठ के लिए सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की राह को आसान बनाने का काम भी किया है । मीरा सेठ को अगले लायन वर्ष में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । मीरा सेठ की उम्मीदवारी के संदर्भ में प्रमोद चंद्र सेठ को केएस लूथरा और संजय चोपड़ा की दोस्ती से खतरा था । केएस लूथरा के साथ प्रमोद चंद्र सेठ का पीछे जो झंझट रहा है, उसके कारण प्रमोद चंद्र सेठ को डर था कि केएस लूथरा कुछ भी करके मीरा सेठ की उम्मीदवारी में फच्चर फँसा सकते हैं । प्रमोद चंद्र सेठ के क्लब के अशोक अग्रवाल के साथ केएस लूथरा पिछले कुछ समय से जिस तरह से 'दिख' रहे हैं, उसमें प्रमोद चंद्र सेठ को मीरा सेठ की उम्मीदवारी के लिए खतरा दिख रहा था । अशोक अग्रवाल को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा/पहचाना जा रहा है । प्रमोद चंद्र सेठ को डर हुआ था कि संजय चोपड़ा के साथ मिल कर केएस लूथरा ने यदि अशोक अग्रवाल को उम्मीदवार बनवा दिया - तो मीरा सेठ की उम्मीदवारी की संभावना तो ख़त्म हो ही जायेगी, साथ ही शाहजहाँपुर में उनकी अपनी स्थिति कमजोर हो जायेगी । संजय चोपड़ा को केएस लूथरा से अलग करके प्रमोद चंद्र सेठ ने अपने उक्त डर को खत्म कर लिया है ।
केएस लूथरा ने पिछले लायन वर्ष में गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी को नाको चने चबवा दिए थे । इस बार गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी ने उन्हें घेरघार कर अपने साथ कर तो लिया था, लेकिन साथ ही उन्हें यह डर भी था कि संजय चोपड़ा के साथ मिल कर अगले लायन वर्ष में केएस लूथरा फिर से उन्हें परेशान कर सकते हैं । इसी का ध्यान करके उन्होंने संजय चोपड़ा का शिकार कर लिया और केएस लूथरा को अकेला कर दिया है । कई लोगों को लगता है कि इस बार गुरनाम सिंह एण्ड कंपनी की बातों में आकर केएस लूथरा ने खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली - उन्हें जैसे उसी का ईनाम मिला है ।