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Saturday, September 24, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में होने जा रहा डिस्ट्रिक्ट पदाधिकारियों का अधिष्ठापन समारोह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विशाल सिन्हा की हरकतों के कारण नरेश अग्रवाल के लिए परीक्षा का मौका होगा क्या ?

लखनऊ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग में कुछेक वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को डिस्ट्रिक्ट अधिष्ठापन समारोह का निमंत्रण न मिलने का संदर्भ देते हुए जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विशाल सिन्हा पर वरिष्ठ पूर्व गवर्नर्स को अपमानित करने के आरोप लगे, उसे देखते हुए इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल के सामने लखनऊ में भी भी वाराणसी जैसे हालात बनते दिख रहे हैं । उल्लेखनीय है कि वाराणसी में आयोजित हुए डिस्ट्रिक्ट 321 ई के अधिष्ठापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए नरेश अग्रवाल को पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपमानित किये जाने की शिकायतें मिलीं थीं, जिन्हें लेकिन नरेश अग्रवाल ने गंभीरता से नहीं लिया था । वाराणसी में नरेश अग्रवाल ने जो रवैया दिखाया था, उसे लेकर मल्टीपल में ही नहीं बल्कि मल्टीपल के बाहर के लायंस पदाधिकारियों के बीच उनकी भारी फजीहत और थू थू हुई थी । नरेश अग्रवाल और दूसरे लोग उस किस्से को अभी पूरी तरह से भूल भी नहीं पाए हैं, कि डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विशाल सिन्हा ने नरेश अग्रवाल के लिए फिर से वैसे ही हालात पैदा कर दिए हैं । नरेश अग्रवाल को 25 सितंबर को लखनऊ में आयोजित हो रहे डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन के अधिष्ठापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने आना/पहुँचना है । विशाल सिन्हा ने उनके स्वागत के लिए अच्छी तैयारी की है; विशाल सिन्हा दरअसल नरेश अग्रवाल को खुश करके लायन व्यवस्था में अपने लिए अच्छी पोजीशन की जुगाड़ में हैं । असल में, विशाल सिन्हा को यह बात बहुत ही अपमानजनक लगती है कि हाल-फिलहाल के वर्षों में उनके आगे-पीछे जो लोग गवर्नर बने हैं, वह तो एक बार में ही गवर्नर बन गए - जबकि उन्हें एक बार पराजित होकर दूसरी बार में गवर्नर बनने का मौका मिल पाया । इस 'कलंक' के दाग को हल्का करने के लिए विशाल सिन्हा को जरूरी लगता है कि वह लायन व्यवस्था में ऐसा कुछ प्राप्त करें, जिससे वह अपने आगे-पीछे गवर्नर बने लोगों के बीच अपना कद ऊँचा कर सकें । यह वह नरेश अग्रवाल की मदद से करना चाहते हैं, और इसीलिए डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह में वह नरेश अग्रवाल के स्वागत-सम्मान में कोई कमी नहीं रहने देना चाहते हैं ।
लेकिन डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह से चार दिन पहले हुई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग में जो हुआ, उसने विशाल सिन्हा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है । मीटिंग में कुछेक वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने शिकायत की कि कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अभी तक भी अधिष्ठापन समारोह के निमंत्रण नहीं मिले हैं । यह शिकायत करते हुए विशाल सिन्हा से पूछा गया कि क्या वह कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अधिष्ठापन समारोह से दूर रखना चाहते हैं ? विशाल सिन्हा ने इस सवाल के पीछे छिपे खतरे को पहचानते हुए तुरंत सफाई दी कि उन्होंने तो सभी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को निमंत्रण भेजे हैं; उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि किन्हीं कारणों से हो सकता है कि कुछेक पूर्व गवर्नर्स तक निमंत्रण न पहुँचा हो, इसलिए इस मीटिंग के माध्यम से वह सभी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स से अधिष्ठापन समारोह में शामिल होने का अनुरोध करते हैं । विशाल सिन्हा में यह बड़ा अच्छा हुनर है कि वह किसी को कितनी भी और कैसी भी गालियाँ दे रहे हों, बुरा-भला कह रहे हों - लेकिन जैसे ही उन्हें आभास होता है कि उनकी यह हरकत उन्हें  नुकसान पहुँचाएगी, वह तुरंत से खुशामद में जुट जायेंगे । विशाल सिन्हा कुछेक पूर्व गवर्नर्स के खिलाफ जमकर गालियाँ बकते हैं, उन्हें लायनिज्म से निकालने तक की बात करते हैं - लेकिन अधिष्ठापन समारोह से ठीक पहले हुई डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ऑनरेरी कमेटी की मीटिंग में जैसे ही उन्हें आभास हुआ कि उनकी हरकत अधिष्ठापन समारोह में बबाल कर सकती है और नरेश अग्रवाल के सामने उनकी फजीहत कर/करा सकती है, वह तुरंत गिरगिट की तरह रंग बदल कर पूर्व गवर्नर्स की खुशामद पर उतर आए ।
विशाल सिन्हा ने मौके की नजाकत को पहचान कर भले ही रंग बदल लिया हो, किंतु विशाल सिन्हा की हरकतों से अपमानित महसूस कर रहे पूर्व गवर्नर्स की नरेश अग्रवाल के सामने उनकी असलियत लाने की कोशिशों का खतरा पूरी तरह टला नहीं है । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद को विशाल सिन्हा ने जिस तरह से पैसा बनाने का जरिया बना लिया है; और इस चक्कर में जिस तरह से गैर लायन सदस्यों तक को न सिर्फ अपनी कैबिनेट का सदस्य बना लिया है बल्कि डिस्ट्रिक्ट लायंस लीडरशिप इंस्टीट्यूट में भी शामिल कर लिया - उसे देख कर पूर्व गवर्नर्स के बीच भारी असंतोष व नाराजगी है । विशाल सिन्हा के मनमाने तरीके से काम करने और पूर्व गवर्नर्स के प्रति गाली-गलौच भरे शब्दों का प्रयोग करने के रवैये के कारण ही वरिष्ठ पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नीरज बोरा ने बीस दिन के भीतर ही डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ऑनरेरी कमेटी के चेयरमैन का पद छोड़ दिया था । दरअसल नीरज बोरा को पता चला था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय में उनके बारे में बहुत ही ख़राब तरीके से बातें होती हैं और उनके लिए गाली-गलौच पूर्ण शब्दों का इस्तेमाल होता है । विशाल सिन्हा ने इस तरह 'सामने कुछ और पीछे कुछ' वाला अपना दो-रंगी रूप दिखाया, तो नीरज बोरा ने व्यस्तता का वास्ता देकर उनके गवर्नर-काल में किसी भी पद पर रहने से तौबा कर ली । किसी डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के व्यवहार व रवैये के कारण डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ऑनरेरी कमेटी का चेयरमैन एक महीने से भी कम समय में अपना पद छोड़ दे, तो यह डिस्ट्रिक्ट और लायनिज्म के लिए बहुत ही अपमानजनक बात है - इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल इस बात को कैसे लेते हैं, यह देखना अभी बाकी है ।
विशाल सिन्हा की हरकतों के कारण ही एक अन्य पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अनुपम बंसल ग्लोबल लीडरशिप टीम (जीएलटी) के डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डीनेटर होने के बावजूद अभी हाल ही संपन्न हुए डिस्ट्रिक्ट लायन लीडरशिप इंस्टीट्यूट में शामिल नहीं हुए । मजे की बात यह है कि नीरज बोरा और अनुपम बंसल - दोनों ही विशाल सिन्हा के या तो बहुत खास हैं और या उनकी राजनीति के खेमे के समर्थक हैं । पिछले वर्ष डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में जो खेमेबाजी थी, उसमें नीरज बोरा उस तरफ थे - जिस तरफ विशाल सिन्हा थे । अनुपम बंसल तो विशाल सिन्हा के 'शाम' के पक्के वाले साथी हैं । इसके बावजूद विशाल सिन्हा ने उनके प्रति कोई रियायत नहीं बरती और उनके साथ ऐसा व्यवहार किया कि उन्होंने विशाल सिन्हा के एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम से दूर रहने में ही अपनी भलाई देखी/पहचानी । इन दो उदाहरणों से समझा जा सकता है कि विशाल सिन्हा अपनी कारस्तानियों से जब अपने ही खास व नजदीकी लोगों के साथ बदतमीजी कर सकते हैं और उन्हें उपेक्षित तथा अपमानित तक कर सकते हैं, तो फिर अपने से असहमत और अपने विरोधियों के प्रति उनका रवैया क्या होता होगा ?
डिस्ट्रिक्ट के अधिष्ठापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आने वाले इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल के सामने कुछेक लोग विशाल सिन्हा के इस रवैये को रखने की तैयारी कर रहे हैं । उनका कहना है कि वह नरेश अग्रवाल को बताना चाहेंगे कि विशाल सिन्हा को किसी भी तरह की तवज्जो देकर वह सिर्फ लायनिज्म को ही बदनाम नहीं करवायेंगे, बल्कि अपनी छवि को भी कलंकित करेंगे । विशाल सिन्हा हालाँकि आश्वस्त हैं; उनका कहना है कि नरेश अग्रवाल को उनके बारे में अच्छी तरह पता है और वह गुरनाम सिंह के साथ उनके रिश्ते को जानते/पहचानते हैं, इसके अलावा वह लखनऊ में नरेश अग्रवाल की सेवा में कोई कमी नहीं रहने देंगे - इसलिए उनकी शिकायत करने वालों की दाल नरेश अग्रवाल के सामने नहीं गलेगी । नरेश अग्रवाल यूँ भी घटिया लोगों को प्रश्रय देने के मामले में खासे बदनाम हैं, और इस चक्कर में अपनी छीछालेदर भी कराते रहते हैं । हालाँकि कुछेक लोगों को लगता है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की तरफ बढ़ रहे नरेश अग्रवाल अब शायद थोड़ा सावधान हों, और लायनिज्म की नहीं तो कम से कम अपनी छवि की तो फ़िक्र करेंगे - और इस फ़िक्र में विशाल सिन्हा के मंसूबों को पूरा करने में सहायक नहीं बनेंगे । इस पृष्ठभूमि में, लखनऊ में होने जा रहा अधिष्ठापन समारोह विशाल सिन्हा के लिए ही नहीं - बल्कि नरेश अग्रवाल के लिए भी परीक्षा की घड़ी है ।

Thursday, August 11, 2016

लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानूनों का उल्लंघन करने व मजाक बनाने वाले छुट्भैय्यों तक के सामने आत्मसमर्पण करते रहे नरेश अग्रवाल, लेकिन क्या अब अपनी जिम्मेदारी समझेंगे और डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय गर्ग को 'पटरी' पर लाने के बारे में सोचेंगे ?

नई दिल्ली । अधिष्ठापन समारोह के नाम पर डिस्ट्रिक्ट 321 ए टू के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विनय गर्ग द्धारा करवाए जा रहे दुबई दौरे के महँगे पैकेज का मामला अब नरेश अग्रवाल की 'अदालत' में पहुँच गया है । अपने आप को डिस्ट्रिक्ट का वरिष्ठ लायन बताते हुए शिवशंकर अग्रवाल ने इस संबंध में नरेश अग्रवाल को एक पत्र लिखा है, जिसकी एक प्रति 'रचनात्मक संकल्प' को भी मिली है । अपने पत्र में शिवशंकर अग्रवाल ने विनय गर्ग की कैबिनेट पर ही सवाल उठाते हुए नरेश अग्रवाल से पूछा है कि विनय गर्ग ने जो तीन सौ से अधिक लोगों की कैबिनेट बनाई है, वह क्या लायंस इंटरनेशनल के नियमानुसार है ? शिवशंकर अग्रवाल का कहना है कि विनय गर्ग ने फर्जी तरीके से कैबिनेट के पदों को गढ़ा है, जिन्हें न तो लायंस इंटरनेशनल से कोई मान्यता प्राप्त है और वास्तव में न जिनका कोई काम है - इन्हें सिर्फ पैसे बटोरने के लिए गढ़ा है; और इनसे चार-चार हजार, आठ-आठ हजार और ग्यारह-ग्यारह हजार रुपए तक लिए गए हैं । शिवशंकर अग्रवाल का कहना है कि विनय गर्ग बातें तो ऊँची ऊँची करते हैं और दावा करते हैं कि उन्होंने लायनिज्म के लिए यह किया है-वह किया है-न जाने क्या क्या किया है; आखिर तब फिर उन्हें अपनी कैबिनेट में फर्जी पद गढ़ने और उन पदों की 'कीमतें' बसूलने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी ? नरेश अग्रवाल को लिखे पत्र में शिवशंकर अग्रवाल ने लिखा है कि इसके बाद, विनय गर्ग डिस्ट्रिक्ट पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह को दुबई में करके - और उसे खासा महँगा बना कर - पदाधिकारियों को अधिष्ठापित होने का मौका भी नहीं दे रहे हैं; क्योंकि अधिकतर पदाधिकारी दुबई जाने के विनय गर्ग के पैकेज को महँगा पा कर वहाँ नहीं जा रहे हैं ।
शिवशंकर अग्रवाल ने अनुमान लगाया है कि विनय गर्ग ने दुबई के लिए करीब ढाई सौ लोगों का जो लक्ष्य तय किया है, उसमें आधे से ज्यादा तो 'बेटर हाफ' और बच्चे होंगे । कई ऐसे लायन होंगे, जो कैबिनेट पदाधिकारी नहीं होंगे - यानि ढाई सौ की संख्या में कैबिनेट पदाधिकारी तो मुश्किल से अस्सी से सौ के बीच ही होंगे; जबकि विनय गर्ग ने कैबिनेट में पदाधिकारी तो तीन सौ से ज्यादा बनाए हैं । इससे लगता है कि विनय गर्ग दुबई में कैबिनेट पदाधिकारियों का अधिष्ठापन करने/करवाने नहीं जा रहे हैं, बल्कि तफरीह करने/करवाने जा रहे हैं । इससे लगता है कि विनय गर्ग को इस बात का बिलकुल भी अहसास नहीं है कि लायनिज्म में अधिष्ठापन की क्या महत्ता है; और उन्होंने लायनिज्म को तफरीह करने का एक अड्डा भर समझा हुआ है । शिवशंकर अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा है कि विनय गर्ग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तो बन गए हैं, लेकिन लगता है कि उन्हें लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानून तथा लायनिज्म की महान परंपरा व उसके आदर्शों के बारे में कोई ज्ञान नहीं है; यदि है, तो उनकी परवाह नहीं है; यदि होती तो वह अधिष्ठापन कार्यक्रम को तफरीह का मौका बना कर इस तरह मजाक का विषय नहीं बना देते । शिवशंकर अग्रवाल ने अपने पत्र में नरेश अग्रवाल से अनुरोध किया है कि वह विनय गर्ग को - तथा उनके जैसे दूसरे अन्य लोगों को भी - लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानूनों से परिचित होने के लिए कहें तथा उनका पालन करने के लिए प्रेरित करें ।
शिवशंकर अग्रवाल ने अपने पत्र में नरेश अग्रवाल का ध्यान इस तथ्य की तरफ खींचा है कि वह इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट हैं, और अगले लायन वर्ष में इंटरनेशनल प्रेसीडेंट होंगे - इसलिए दुनिया भर के लायन सदस्यों व पदाधिकारियों की नजर इस बात पर होगी कि उनके अपने देश और खासकर उनके अपने मल्टीपल ड्रिस्ट्रिक्ट में लायनिज्म के नाम पर हो क्या रहा है; और ऐसे में जब उन्हें अधिष्ठापन कार्यक्रम के नाम पर किए जा रहे विनय गर्ग के तफरीह भरे तमाशे की जानकारी मिलेगी तो यह - नरेश जी, आपके लिए भी फजीहत की बात होगी । इसी आधार पर, शिवशंकर अग्रवाल ने नरेश अग्रवाल से मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हुए माँग की है कि वह विनय गर्ग से कहें कि तफरीह करने/करवाने के लिए वह दुबई जाना तथा लोगों को ले जाना चाहें - तो जरूर जाएँ/ले जाएँ; किंतु अधिष्ठापन कार्यक्रम ऐसी जगह करें, जहाँ कैबिनेट के सभी पदाधिकारी आसानी से पहुँच सकें । उन्होंने नरेश अग्रवाल से कहा है कि वह विनय गर्ग को लायनिज्म में अधिष्ठापन का जो महत्त्व है, उसके बारे में बताएँ और अधिष्ठापन कार्यक्रम को इस तरह से करने के लिए कहें, जिससे कि उक्त महत्त्व को वास्तव में हासिल किया जा सके । शिवशंकर अग्रवाल ने अपने पत्र में लिखा है कि विनय गर्ग को लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानूनों से तथा लायनिज्म की महान परंपरा व उसके उच्च आदर्शों से परिचित करवाना जरूरी है, अन्यथा वह इसी तरह से लायनिज्म का मजाक बनाते/बनवाते रहेंगे ।
यह देखना सचमुच दिलचस्प होगा कि शिवशंकर अग्रवाल ने विनय गर्ग के मामले में इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल से जो उम्मीद की है, उस पर नरेश अग्रवाल कोई ध्यान देते भी हैं - या उनकी बातों को हवा में उड़ा देते हैं । उल्लेखनीय है कि नरेश अग्रवाल का अपना ट्रैक रिकॉर्ड कोई बहुत अच्छा नहीं है; वह लायनिज्म का मजाक बनाने वाली हरकतों का अक्सर सहयोग और समर्थन करते हुए देखे गए हैं; इसलिए बहुत उम्मीद नहीं है कि वह विनय गर्ग को लायनिज्म की 'पटरी' पर लाने के लिए सचमुच में कोई प्रयास करेंगे । पिछले दिनों की कई घटनाओं का हवाला देते हुए लोग देखते, मानते और कहते रहे हैं कि तीन-तिकड़म से नरेश अग्रवाल इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने की लाइन में तो लग गए हैं; किंतु अपनी लीडरशिप क्वालिटी को दिखाने/जताने का नैतिक बल और हौंसला उनमें नहीं है - जिस कारण लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानूनों का उल्लंघन करने व मजाक बनाने वाले छुट्भैय्यों तक के सामने वह आत्मसमर्पण करते नजर आते रहे हैं । हालाँकि कुछेक लोगों को यह भी लगता है, जैसा कि शिवशंकर अग्रवाल ने अपने पत्र में लिखा है कि इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने जा रहे नरेश अग्रवाल को कम से कम अब तो मैच्योरिटी और गंभीरता के साथ अपनी 'जिम्मेदारी' निभानी चाहिए और जानते-बूझते हुए कोई ऐसा काम नहीं होने देना चाहिए - जिससे लायनिज्म का मजाक बनता हो और लायनिज्म की बदनामी होती हो । दरअसल इसीलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि शिवशंकर अग्रवाल द्धारा उठाए गए मुद्दों का इंटरनेशनल प्रेसीडेंट बनने जा रहे नरेश अग्रवाल कोई संज्ञान लेते भी हैं, या लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानूनों तथा उसके उच्च आदर्शों का मजाक बनता चुपचाप देखते रहते हैं ?

Monday, July 25, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी वन में पैसा बटोरने के उद्देश्य से लंबी-चौड़ी कैबिनेट बनाने और उसमें गैर-लायन सदस्यों को भी पदाधिकारी बनाने की विशाल सिन्हा की हरकत के प्रति विरोध व्यक्त करते हुए नीरज बोरा ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ऑनरेरी कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया

लखनऊ । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विशाल सिन्हा ने एक ऐसे व्यक्ति को डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट का पदाधिकारी बनाने का 'ऐतिहासिक' काम किया है, जो लायन सदस्य ही नहीं है । लायंस इंटरनेशनल के सौंवे वर्ष में विशाल सिन्हा की तरफ से यह एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया गया है । सौ वर्षों के होने जा रहे लायंस इंटरनेशनल के इतिहास में इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है । विशाल सिन्हा ने अपनी कैबिनेट में डॉक्टर गुरचरण सिंह को चेयरमैन परमानेंट प्रोजेक्ट्स बनाया है । डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टरी में उनके नाम/पते और पद के साथ उन्हें लायंस क्लब लखनऊ प्रीमियर का सदस्य बताया गया है । लखनऊ प्रीमियर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर गुरनाम सिंह का क्लब है । 'रचनात्मक संकल्प' के पास लायंस क्लब लखनऊ प्रीमियर के आज/अभी - इन पँक्तियों के लिखे जाने तक के 37 सदस्यों की जो सूची है, उसमें लेकिन डॉक्टर गुरचरण सिंह का नाम नहीं है । जाहिर है कि डॉक्टर गुरचरण सिंह को कैबिनेट में लेने के लिए विशाल सिन्हा को झूठ बोलना पड़ा है, और लायंस इंटरनेशनल के साथ धोखा करना पड़ा है । अपने पाठकों को हम बता दें कि डॉक्टर गुरचरण सिंह करीब दो वर्ष पहले लखनऊ प्रीमियर के सदस्य थे; दो वर्ष पहले क्लब में झगड़ों/विवादों से परेशान होकर लेकिन उन्होंने लायंस क्लब लखनऊ में ट्रांसफर ले लिया था । ट्रांसफर तो उन्होंने ले लिया था, किंतु लायनिज्म से उनका ऐसा मोहभंग हुआ कि तीन-चार महीने में ही उन्होंने वह क्लब भी और लायनिज्म को भी छोड़ दिया । तकनीकी रूप से वह पिछले करीब एक वर्ष से लायनिज्म में नहीं हैं, और किसी भी क्लब के सदस्य नहीं हैं । इस नाते, लायंस इंटरनेशनल के नियमों/कानूनों तथा व्यवस्था के अनुसार वह डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट के पदाधिकारी या सदस्य नहीं बन सकते हैं । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर विशाल सिन्हा ने लेकिन लायंस इंटरनेशनल के नियमों/कानूनों को तथा उसकी व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए डॉक्टर गुरचरण सिंह को कैबिनेट में पदाधिकारी बना दिया है ।
विशाल सिन्हा ने लायंस इंटरनेशनल विरोधी यह काम आखिर क्यों किया ? उन्हें भी आभास तो होगा ही कि उनकी यह हरकत उनकी और डिस्ट्रिक्ट की ही बदनामी का सबब नहीं बनेगी, बल्कि इंटरनेशनल फर्स्ट वाइस प्रेसीडेंट नरेश अग्रवाल को भी बदनामी दिलवायेगी । डिस्ट्रिक्ट के लोगों का ही कहना है कि नरेश अग्रवाल को लोगों से सुनना पड़ सकता है कि उनके अपने मल्टीपल में कैसे कैसे गवर्नर हैं, जो लायंस इंटरनेशनल के नियम/कानून तो नहीं ही मानते हैं, उसके साथ साथ धोखाधड़ी और करते हैं ? इसीलिए लोगों के बीच सवाल चर्चा में है कि विशाल सिन्हा ने डॉक्टर गुरचरण सिंह को लायन सदस्य न होते हुए भी डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट में पदाधिकारी आखिर क्यों बनाया, और क्यों उनके क्लब की झूठी पहचान को दर्ज किया है ? डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय में ही बैठने/उठने वाले लोगों का कहना है कि डॉक्टर गुरुचरण सिंह से साढ़े तीन हजार रुपए ऐंठने के चक्कर में विशाल सिन्हा ने लायन इंटरनेशनल से यह धोखाधड़ी की है । विशाल सिन्हा प्रत्येक कैबिनेट पदाधिकारी से साढ़े तीन हजार रुपए बसूल रहे हैं । वह ज्यादा से ज्यादा पैसा इकट्ठा कर सकें, इसके लिए उन्होंने बहुत भारी-भरकम कैबिनेट बना ली है, और ऐसे ऐसे लोगों को कैबिनेट में पदाधिकारी बना दिया है - जो पदाधिकारी होने की पात्रता भी नहीं रखते हैं । विशाल सिन्हा ने इस सिद्धांत पर काम किया कि उद्देश्य जब पैसा इकट्ठा करना हो, तो फिर पात्रता भला क्या और क्यों देखना ?
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ऑनरेरी कमेटी के चेयरमैन नीरज बोरा ने विशाल सिन्हा को आगाह भी किया था कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जिस तरह से उन्होंने सिर्फ पैसे बटोरने को अपना उद्देश्य बना लिया है, और लायंस इंटरनेशनल के नियम/कानूनों व व्यवस्था का उल्लंघन करके कैबिनेट के पदाधिकारी बना रहे हो - उससे डिस्ट्रिक्ट की और खुद उनकी भी बदनामी होगी । विशाल सिन्हा ने लेकिन नीरज बोरा की बात पर ध्यान नहीं दिया । विशाल सिन्हा को मनमानी करता तथा लायंस इंटरनेशनल के नियमों/कानूनों व व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करता देख नीरज बोरा ने अंततः डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ऑनरेरी कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे देने में ही अपनी भलाई समझी । नीरज बोरा ने स्पष्ट कर दिया कि विशाल सिन्हा की कारस्तानियों के कारण होने वाली बदनामी का वह हिस्सा नहीं बनना चाहेंगे । नीरज बोरा के इस्तीफे से होने वाली फजीहत से भी विशाल सिन्हा ने लेकिन कोई सबक नहीं सीखा । किसी भी लायंस डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ऑनरेरी कमेटी का चेयरमैन पहले ही महीने में अपने पद से इस्तीफा दे दे, यह किसी भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के लिए बहुत ही शर्म की बात है ।
उल्लेखनीय है कि पिछले लायन वर्ष तक डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट में करीब करीब तीन सौ पदाधिकारी रहते/होते रहे हैं; विशाल सिन्हा ने लेकिन डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट के पदाधिकारियों की संख्या को करीब छह सौ तक पहुँचा दिया है । उनके नजदीकियों तक का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा पैसा इकट्ठा करने के लिए विशाल सिन्हा को यही तरीका समझ में आया कि वह कैबिनेट पदाधिकारियों की संख्या अनाप-शनाप तरीके से बढ़ा दें । ऐसा करते हुए विशाल सिन्हा ने ऐसे ऐसे लोगों को भी डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट में पदाधिकारी बना दिया है, जो अभी हाल-फिलहाल में ही लायन सदस्य बने हैं, तथा अभी क्लब में भी पदाधिकारी नहीं बने हैं । समझा जा सकता है कि ऐसे लोग डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट के पदाधिकारी के रूप में क्या करेंगे ? विशाल सिन्हा के लिए वास्तव में चिंता की बात यह है भी नहीं कि ऐसे लोग डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट के पदाधिकारी के रूप में करेंगे क्या ? विशाल सिन्हा ने तो बस यह किया कि साढ़े तीन हजार के हिसाब से पैसे बसूलते हुए लोगों को कैबिनेट पदाधिकारी का पद 'बेच' दिया । कैबिनेट पद बेचने के काम में विशाल सिन्हा इतने रफ़्तार में रहे कि डॉक्टर गुरचरण सिंह जैसे गैर-लायन को भी पद बेच बैठे । लायंस इंटरनेशनल के सौंवे वर्ष में विशाल सिन्हा का यह कारनामा - डिस्ट्रिक्ट के लोगों के अनुसार ही, लायनिज्म को कलंकित करने वाला ही है ।