Showing posts with label ROTARY INTERNATIONAL DISTRICT 3261. Show all posts
Showing posts with label ROTARY INTERNATIONAL DISTRICT 3261. Show all posts

Sunday, October 27, 2013

रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3261 में अरुण गुप्ता और राकेश दवे के बीच होते दिख रहे सीधे मुकाबले की संभावना ने वर्ष 2015-16 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव को दिलचस्प बनाया

जबलपुर/रायपुर । बलदीप सिंह मैनी की उम्मीदवारी के ढीले पड़ने से वर्ष 2015-16 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए होने वाला चुनाव खासा दिलचस्प हो गया है । उल्लेखनीय है कि यह चुनाव पिछले रोटरी वर्ष में ही होना था, लेकिन बलदीप सिंह मैनी की उम्मीदवारी प्रस्तुत करने वाले उनके क्लब ने कोर्ट-कचहरी करके मामले को ऐसा फँसाया कि फिर चुनाव स्थगित ही कर देना पड़ा । लंबी जद्दो-जहद के बावजूद बलदीप सिंह मैनी और उनके क्लब - रोटरी क्लब जबलपुर को कुछ भी हासिल नहीं हुआ; पर उन्होंने जो किया उसके चलते डिस्ट्रिक्ट को इस वर्ष डिस्ट्रिक्ट गवर्नर नॉमिनी नहीं मिला । पिछले वर्ष न हो पाया चुनाव अब जब इस वर्ष होने जा रहा है तो बलदीप सिंह मैनी अपनी उम्मीदवारी को लेकर ढीले-से लग रहे हैं, जिस कारण यह चुनाव अब जबलपुर के अरुण गुप्ता और रायपुर के राकेश दवे के बीच सीधे मुकाबले में बदल गया दिख रहा है ।
वर्ष 2015-16 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए होने वाले चुनाव के बदले समीकरण ने अरुण गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थकों को यह दावा करने का बल दिया है कि बलदीप सिंह मैनी के ढीले पड़ने से अरुण गुप्ता की उम्मीदवारी को फायदा होगा । यह दावा करने के पीछे उनका तर्क है कि जबलपुर और मध्य प्रदेश के जो क्लब बलदीप सिंह मैनी के साथ जा सकते थे, वह अब अरुण गुप्ता का समर्थन करेंगे और इससे अरुण गुप्ता का समर्थन आधार बढ़ेगा । राकेश दवे की उम्मीदवारी के समर्थक लेकिन इस तर्क से सहमत नहीं है और बलदीप सिंह मैनी के रवैये को राकेश दवे के लिए अनुकूल मान रहे हैं । उनका तर्क है कि बलदीप सिंह मैनी अभी भी उम्मीदवार हैं, इसलिए उनके समर्थन में जो क्लब थे वह तो उनके साथ रहेंगे ही - जिसमें उनका खुद का क्लब भी शामिल है; इसलिए अरुण गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थक जिस फायदे की उम्मीद कर रहे हैं, उसका तो कोई सवाल ही नहीं है । बलदीप सिंह मैनी के रवैये में राकेश दवे की उम्मीदवारी के समर्थकों को अपने लिए फायदा इसलिए भी दिख रहा है क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि बलदीप सिंह मैनी को सक्रिय न पाकर उनके समर्थक अरुण गुप्ता की तरफ जाने की बजाये राकेश दवे की तरफ जायेंगे ।
अरुण गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थकों को लगता है कि इस बात का आभास है कि बलदीप सिंह मैनी के ढीले पड़ने से अरुण गुप्ता को फायदा अपने आप नहीं मिलेगा, बल्कि फायदा जुटाने के लिए उन्हें प्रयास करना पड़ेगा । अरुण गुप्ता और उनके समर्थकों ने इस बाबत प्रयास शुरू भी कर दिया है । अपने प्रयास के तहत उन्होंने एक तरफ तो जबलपुर और मध्य प्रदेश में अपने लिए समर्थन संगठित करने का अभियान शुरू किया है तो दूसरी तरफ डिस्ट्रिक्ट के बाकी लोगों को भावनात्मक अपील से प्रभावित करने का दाँव चला है । इस दाँव से उन्होंने राकेश दवे का 'शिकार' करने का लक्ष्य निर्धारित किया है । अरुण गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थकों का कहना है कि वर्ष 2015-16 में मध्य प्रदेश के क्लब्स को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, क्योंकि डिस्ट्रिक्ट में तय हुई सर्वसम्मत व्यवस्था के तहत यह उनका अधिकार है । उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश, ओडिसा और छत्तीसगढ़ क्षेत्र में फैले डिस्ट्रिक्ट में सर्वसम्मत रूप से यह तय हुआ समझौता है कि तीनों प्रदेशों के क्लब्स को बारी-बारी से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय में प्रतिनिधित्व मिलेगा । इस समझौते के तहत वर्ष 2015-16 में मध्य प्रदेश के क्लब्स का नंबर है । उक्त समझौते का हवाला देकर अरुण गुप्ता की उम्मीदवारी के समर्थकों ने राकेश दवे को घेरने की तैयारी की है ।
राकेश दवे की उम्मीदवारी के समर्थकों ने इस 'हमले' से अपना बचाव करने की तैयारी के तहत अपना जबाव लगता है कि पहले से बना के रखा हुआ है । उनका कहना है कि यह सच है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय में तीनों प्रदेशों के क्लब्स को बारी-बारी से प्रतिनिधित्व देने को लेकर एक अलिखित समझौता है - लेकिन यह समझौता दरअसल एक सुविधा है, कोई अधिकार नहीं है । यह सुविधा देने/लेने के पीछे उद्देश्य यह रहा है कि हर प्रदेश के क्लब्स अपने-अपने यहाँ नेतृत्व को विकसित करें और सक्रिय करें । राकेश दवे की उम्मीदवारी के समर्थकों का कहना है कि वर्ष 2015-16 में मध्य प्रदेश के क्लब्स का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा रखने वाले वाले लोगों ने न तो नेतृत्व विकसित करने को लेकर कोई काम किया और न कोई सक्रियता ही दिखाई । उन्होंने इसका सुबूत यह दिया कि मध्य प्रदेश से दो लोगों ने अपनी अपनी उम्मीदवारी तो प्रस्तुत कर दी, लेकिन उनके क्षेत्र के क्लब्स के ड्यूज समय से जमा हों - इसके लिए उनमें से किसी ने भी कोई प्रयास नहीं किया । यही कारण रहा कि जबलपुर के 12 क्लब्स में से कुल 6 के ही ड्यूज समय से जमा हो सके । यह हाल तब है जब जबलपुर से दो लोग डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने की दौड़ में शामिल हुए । राकेश दवे की उम्मीदवारी के समर्थकों का कहना/पूछना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा और कोशिश करने वाले लोगों को यह भी बताना चाहिए कि नेतृत्व करने की उनकी ऐसी कैसी कोशिश है कि इनके अपने शहर के आधे क्लब्स के ड्यूज ही समय से जमा नहीं हो सके ? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ड्यूज यदि समय से जमा होते तो इन्हें ही तो फायदा होता ।
राकेश दवे की उम्मीदवारी के समर्थकों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर कार्यालय में प्रतिनिधित्व को लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में टकराव पहले भी होता रहा है और दोनों ही तरफ से दूसरे की बारी पर दावा करने के प्रयास होते रहे हैं, इसलिए राकेश दवे यदि मध्य प्रदेश की बारी पर दावा कर रहे हैं, तो इससे उनके खिलाफ लोगों के बीच कोई माहौल नहीं बनता है । क्योंकि लोग यह भी देखेंगे कि राकेश दवे ने ऐसा तब किया जब मध्य प्रदेश से कोई भी उम्मीदवार बनने को तैयार होता हुआ नहीं दिख रहा था ।
अरुण गुप्ता और राकेश दवे के बीच होते दिख रहे चुनावी मुकाबले में दोनों तरफ से जिस तरह की तैयारी और जिस तरह के तर्क देखे/सुने जा रहे हैं उससे वर्ष 2015-16 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए होने वाला चुनावी मुकाबला रोमांचपूर्ण होता जान पड़ रहा है । यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुकाबले में और कौन-कौन से मोड़ आते हैं ।

Tuesday, August 20, 2013

रोटरी क्लब जबलपुर के कार्यक्रम में उपस्थित होकर पूर्व इंटरनेशनल प्रेसीडेंट राजा साबू और कल्याण बनर्जी ने अपनी फजीहत करा ली है

नई दिल्ली/जबलपुर । राजेंद्र उर्फ़ राजा साबू और कल्याण बनर्जी रोटरी क्लब जबलपुर के डायमंड जुबली कार्यक्रम में शामिल होकर गंभीर विवाद में फँस गए हैं । इन दोनों पर गंभीर आरोप यह लगा है कि इन्होंने निजी और अपने कारोबारी फायदे के लिए रोटरी इंटरनेशनल के एक प्रमुख नियम का मजाक बना दिया और ये रोटरी को बदनाम करने वाले लोगों के साथ जा खड़े हुए हैं । रोटरी इंटरनेशनल के नियम का मजाक दरअसल रोटरी क्लब जबलपुर ने बनाया है । उल्लेखनीय है कि रोटरी में की अपनी शिकायतों को लेकर कोर्ट-कचहरी करने वाले लोगों पर अंकुश लगाने के लिए रोटरी इंटरनेशनल ने एक नियम यह बनाया है कि कोर्ट-कचहरी करने से पहले शिकायतकर्ता को रोटरी के फोरम में न्याय पाने की कोशिश करनी होगी; जो रोटेरियन रोटरी के फोरम का इस्तेमाल किये बिना कोर्ट-कचहरी करेंगे - उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और उन्हें रोटरी से बाहर कर दिया जायेगा । इस 'सजा' को तय करने के पीछे तर्क यही रहा कि जिन लोगों को रोटरी में न्याय का विश्वास ही नहीं है, उन्हें रोटरी में रहना/रखना ही नहीं चाहिए । इन नियम को बनाने के पीछे उद्देश्य भी यही बताया गया कि कोर्ट-कचहरी की कार्रवाइयों में रोटरी का चूँकि बहुत सा पैसा, बहुत सा समय और एनर्जी ऐसे लोगों के साथ निपटने में खर्च होता है, इसलिए जिनकी रोटरी में और रोटरी की न्याय व्यवस्था में कोई आस्था ही नहीं है उन्हें यहाँ क्यों रहना/रखना चाहिए ?
रोटरी क्लब जबलपुर ने रोटरी इंटरनेशनल के इस नियम का खुला उल्लंघन पिछले दिनों तब किया जब अपनी शिकायत को रोटरी फोरम में दर्ज कराये बिना उसने कोर्ट-कचहरी का रास्ता पकड़ा और रोटरी के बड़े पदाधिकारियों के साथ-साथ रोटरी इंटरनेशनल कार्यालय को भी पार्टी बना लिया । रोटरी इंटरनेशनल के नियम का पालन करते हुए रोटरी क्लब जबलपुर को भंग किया जाना चाहिए था, और कोर्ट-कचहरी करने वाले क्लब के सदस्यों की सदस्यता को निरस्त किया जाना चाहिए था - लेकिन ऐसा कुछ होना तो दूर की बात रही, राजा साबू और कल्याण बनर्जी ने रोटरी क्लब जबलपुर के आयोजन में शामिल होकर जता दिया कि उनके लिए रोटरी इंटरनेशनल के उक्त नियम का कोई मतलब नहीं है । राजा साबू और कल्याण बनर्जी रोटरी इंटरनेशनल के प्रेसीडेंट पद पर रह चुके हैं - इस कारण से रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों का पालन करने की उनसे उम्मीद की जाती है; उनसे उम्मीद की जाती है कि रोटरी इंटरनेशनल के नियम-कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने/करवाने का वह प्रयास करेंगे । लेकिन जब वही रोटरी के नियम-कानूनों का मजाक बनाने पर उतर आयें, तो फिर किससे उम्मीद की जाये ?
इस मामले में गंभीर तथ्य यह है कि रोटरी इंटरनेशनल के उक्त नियम के बनने के बावजूद चूँकि कोर्ट-कचहरी करने की प्रवृत्ति पर ज्यादा रोक लगती नहीं दिख रही थी, इसलिए इसी जुलाई को उक्त नियम को सख्ती से लागू करने का निश्चय किया गया था । उक्त नियम को सख्ती से लागू करने का निश्चय करने के तुरंत बाद लेकिन राजा साबू और कल्याण बनर्जी ने रोटरी क्लब जबलपुर के कार्यक्रम में शामिल होकर दिखा दिया कि उक्त नियम के लागू होने/करने को लेकर वह कितने 'गंभीर' हैं ।
राजा साबू और कल्याण बनर्जी के सामने आखिर ऐसी क्या 'मजबूरी' रही कि रोटरी इंटरनेशनल के नियम का उल्लंघन करने वाले रोटरी क्लब जबलपुर के खिलाफ कार्रवाई करना/करवाना तो दूर, उसके कार्यक्रम में शामिल होना उन्हें जरूरी लगा ? जबलपुर और डिस्ट्रिक्ट 3261 के रोटेरियंस के बीच जारी चर्चाओं के अनुसार राजा साबू और कल्याण बनर्जी रोटरी क्लब जबलपुर के कुछेक प्रमुख सदस्यों से निजी और कारोबारी स्तर पर 'दबे' हुए हैं इसलिए उनकी 'हिम्मत' नहीं है कि वह रोटरी क्लब जबलपुर के खिलाफ कार्रवाई कर/करवा सकें और या उनके कार्यक्रम का निमंत्रण ठुकरा सकें । रोटरी क्लब जबलपुर के कुछेक सदस्य ऊँची पहुँच वाले हैं; लोगों के बीच जारी चर्चाओं के अनुसार राजा साबू और कल्याण बनर्जी उनसे निजी और कारोबारी फायदे लेते रहे हैं और आगे भी उन्हें उनसे काम पड़ने की उम्मीदें हैं - इसलिए ही रोटरी क्लब जबलपुर के खिलाफ कार्रवाई को लेकर इन दोनों ने अपनी-अपनी आँखें बंद रखी हैं । कोई और क्लब होता, जिसके सदस्यों से इन्हें कोई निजी या कारोबारी फायदा नहीं मिला होता, तो उस पर निश्चित ही कार्रवाई हो चुकी होती । तो क्या रोटरी इंटरनेशनल के नियम सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए हैं जो रोटरी के बड़े नेताओं को कोई निजी या कारोबारी फायदा नहीं दे सकते ? रोटरी क्लब जबलपुर के डायमंड जुबली कार्यक्रम से पहले जब राजा साबू और कल्याण बनर्जी के उसमें आने की चर्चा थी, तो जबलपुर के तथा डिस्ट्रिक्ट 3261 के कई रोटेरियंस का कहना था कि रोटरी क्लब जबलपुर ने जो किया है उसे देखते हुए ये दोनों उसके कार्यक्रम में नहीं आयेंगे; लेकिन रोटरी क्लब जबलपुर के सदस्यों का दावा था कि 'देखिएगा, ये दोनों जरूर आयेंगे ।' कार्यक्रम में सभी ने देखा कि रोटरी क्लब जबलपुर के सदस्यों का दावा सच साबित हुआ ।
रोटरी क्लब जबलपुर के कार्यक्रम में राजा साबू और कल्याण बनर्जी की उपस्थिति को लेकर साफ-साफ कुछ कहने से बचने की कोशिश करते और उनका बचाव करने का प्रयास करते हुए रोटरी के दूसरे बड़े नेताओं का तर्क है कि ये दोनों रोटरी क्लब जबलपुर के कार्यक्रम में इसलिए गए ताकि क्लब को मुकदमा वापिस लेने के लिए राजी किया जा सके । उनका कहना है कि इन दोनों का प्रयास रहता है कि रोटरी में लोगों को जोड़ कर रखा जाये, न कि उन्हें 'बाहर' का रास्ता दिखाया जाये । अगर यह बात सच है तो पूछा जाना चाहिए कि फिर इन्होंने एक ऐसे नियम के बनने का विरोध क्यों नहीं किया जो लोगों को 'बाहर' का रास्ता दिखाने की बात करता है; और हाल के दिनों में जिन लोगों को 'बाहर' का रास्ता दिखाया गया है, उनके प्रति इन दोनों ने अपना वैसा 'रहम' क्यों नहीं दिखाया जैसा कि रोटरी क्लब जबलपुर के प्रति इन्होंने दिखाया - क्या इसलिए क्योंकि वे लोग इन्हें फायदा पहुँचाने वाली स्थिति में नहीं हैं ? जबलपुर में और डिस्ट्रिक्ट 3261 में राजा साबू और कल्याण बनर्जी को लेकर जिस तरह की बातें हो रही हैं, उससे साफ लग रहा है कि रोटरी क्लब जबलपुर के कार्यक्रम में उपस्थित होकर इन दोनों ने अपनी काफी फजीहत करा ली है ।