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Wednesday, March 30, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 एफ में एचजेएस खेड़ा के शिकार रहे लोगों के समर्थन के बूते प्रेसीडेंशियल अवॉर्डी हरीश दुआ ने जिस तरह से पवन आहुजा की उम्मीदवारी के पक्ष में काम करना शुरू किया है, उससे डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का सारा नजारा बदलता नजर आ रहा है

लुधियाना । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए प्रस्तुत पवन आहुजा की उम्मीदवारी के लिए समर्थन जुटाने के काम में पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरीश दुआ ने हाल के दिनों में जिस तरह की सक्रियता दिखाई है, उससे डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति से जुड़े कुछेक ऐसे प्रसंग लोगों को याद आ रहे हैं - जो मौजूदा चुनावी लड़ाई में पवन आहुजा की उम्मीदवारी को मनोवैज्ञानिक लाभ पहुँचाने का काम कर रहे हैं । इस संदर्भ में सबसे मजेदार तथ्य यह है कि पवन आहुजा की तरह खुद हरीश दुआ भी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की कॉल निकलने के बाद अचानक तरीके से उम्मीदवार बने थे, और कैम्पेन के लिए कम समय मिलने के बावजूद चुनाव जीते थे । यानि कैम्पेन के लिए कम समय मिलने के बावजूद चुनावी लड़ाई को कैसे जीता जा सकता है, इसका हरीश दुआ को सत्यापित किया गया व्यावहारिक अनुभव है, जिसका फायदा स्वाभाविक रूप से पवन आहुजा को मिलेगा ही । उल्लेखनीय है कि छह वर्ष पहले हरीश दुआ का चुनाव मौजूदा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल से हुआ था - रनवीर उप्पल लायन वर्ष के शुरू से ही उम्मीदवार बने हुए थे, और एक समय ऐसा लगता था कि वह निर्विरोध ही चुन लिए जायेंगे; किंतु चुनाव के दिन नजदीक आते आते डिस्ट्रिक्ट में ऐसा माहौल बना कि हरीश दुआ नाटकीय तरीके से उम्मीदवार बने और चुनाव भी जीत गए । छह वर्ष पहले का घटना चक्र इस वर्ष जिस तरह से दोहराया जाता नजर आ रहा है, उसमें बिरिंदर सिंह सोहल के लिए बदकिस्मती की बात यह है कि उन्हें रनवीर उप्पल से यह सीखने को भी नहीं मिल रहा है कि अचानक से जब आपके रास्ते में कोई आ जाता है, तो उससे निपटने के लिए क्या क्या गलतियाँ नहीं करना चाहिए ? बिरिंदर सिंह सोहल की इससे बड़ी बदकिस्मती और क्या होगी कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में जो रनवीर उप्पल लायन वर्ष के शुरू से उनके साथ थे, और हर संभव तरीके से उनकी उम्मीदवारी की मदद कर रहे थे - चुनाव से ठीक पहले उनके खिलाफ हो गए हैं ।
बिरिंदर सिंह सोहल के लिए मुसीबत की बात यह रही कि उनकी उम्मीदवारी की राह में काँटे बोने का काम खुद उनके पिता केएस सोहल तथा उनके राजनीतिक गुरू एचजेएस खेड़ा ने किया है । उनके विरोधियों का ही नहीं, उनके शुभचिंतकों का भी मानना और कहना है कि बिरिंदर सिंह सोहल तो व्यावहारिक बुद्धि रखते हैं और सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं, किंतु अपने पिता और अपने राजनीतिक गुरू की हरकतों के चलते उम्मीदवार के रूप में वह डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच शर्मिंदगी वाली स्थिति में पहुँच/फँस गए हैं । कहने को तो बिरिंदर सिंह सोहल मौजूदा लायन वर्ष के शुरू से ही उम्मीदवार हैं, लेकिन एक उम्मीदवार के रूप में वह कभी भी लोगों के बीच नहीं गए और न ही वह लोगों से मिले ही । क्लब्स के लोगों की बात तो जाने दीजिए, कई एक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स तक का कहना है कि सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में बिरिंदर सिंह सोहल न तो कभी उनसे मिले, और न ही उन्हें कभी फोन तक किया । दरअसल वह पूरी तरह आश्वस्त रहे कि उनके पिता और उनके राजनीतिक गुरू ही उनकी नैय्या पार लगवा देंगे, और उन्हें कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी । उनके पिता और उनके राजनीतिक गुरू ने लेकिन लोगों को जोड़ने की बजाए लोगों को अपने से दूर करने का काम किया । पिता और गुरू के भरोसे रहने के कारण ही बिरिंदर सिंह सोहल का क्लब्स के लोगों व पदाधिकारियों के प्रति तो उपेक्षापूर्ण रवैया था ही, पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स तक को वह अपमानित करने से नहीं चूके । इसका प्रमाण तब मुखर रूप में सामने आया जब बिरिंदर सिंह सोहल की तरफ से कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को तो महँगे गिफ्ट मिले, जबकि अधिकतर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को सस्ते किस्म के गिफ्ट देकर टरका दिया गया । पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को इस तरह से अपमानित करने को लेकर जब बिरिंदर सिंह सोहल से सवाल पूछे गए तो उनकी तरफ से यही सुनने को मिला कि उन्होंने तो वही किया, जो करने के लिए उनसे कहा गया ।
बिरिंदर सिंह सोहल की उम्मीदवारी का परिवारवाद का वास्ता देकर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रीत कँवल सिंह ने जब विरोध किया था, तब केएस सोहल ने सिख होने का वास्ता देकर प्रीत कँवल सिंह को मनाने का प्रयास किया था । उनके प्रयास पर प्रीत कँवल सिंह ने लेकिन भारी बबाल मचा दिया था और उन्होंने सवाल उठाया था कि लायनिज्म में हम परिवारवाद और सिखवाद चलायेंगे क्या ? इस मुद्दे पर प्रीत कँवल सिंह को लोगों के बीच जब अच्छी शाबाशी व प्रशंसा मिली और केएस सोहल की फजीहत हुई, तो केएस सोहल लोगों से माफी माँगने के लिए मजबूर हुए । यहाँ इस बात को याद करना प्रासंगिक होगा कि केएस सोहल तीन बार हारने/असफल रहने के बाद, चौथी बार में कामयाब हो सके थे - जो इस बात का प्रमाण है कि केएस सोहल को लोगों के बीच अपने लिए सम्मान और समर्थन जुटाने की कला नहीं आती है । बिरिंदर सिंह सोहल के शुभचिंतकों का कहना है कि बिरिंदर सिंह सोहल को अपने पिता की इस कमजोरी का पता होना चाहिए था, और गवर्नरी के चुनाव में उनके साथ जो हुआ था उससे सबक लेकर अपनी उम्मीदवारी की बागडोर पूरी तरह से अपने पिता को नहीं सौंपना चाहिए था । बिरिंदर सिंह सोहल के लिए बदकिस्मती की बात लेकिन यह है कि उन्हें पिता तो पिता, गुरू भी अपनी उम्मीदवारी के दुश्मन ही मिले । उनके राजनीतिक गुरु एचजेएस खेड़ा उनकी उम्मीदवारी को दाँव पर लगा कर अपने जुगाड़ में लग गए - उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल पर पहले तो दबाव बनाया कि वह उन्हें कन्वेंशन चेयरमैन बनाए; रनवीर उप्पल ने जब उन्हें बताया कि कन्वेंशन चेयरमैन तो वह बना चुके हैं, तो एचजेएस खेड़ा ने खुद को एमओसी बनाने की माँग रख दी - रनवीर उप्पल जब इसके लिए भी राजी नहीं हुए तो एचजेएस खेड़ा ने उन्हें धमकी दे दी कि बिरिंदर सिंह सोहल की तरफ से डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जो सहयोग करने का वायदा किया गया है, वह पूरा नहीं किया जायेगा और डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को खराब कर दिया जायेगा । इससे साफ हुआ कि बिरिंदर सिंह सोहल डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में जो पैसे खर्च करने वाले थे, उनके बदले में एचजेएस खेड़ा अपने लिए पद जुगाड़ने में लगे थे - और उसमें असफल रहने पर उन्होंने ऐसा माहौल पैदा कर दिया, जिससे कि बिरिंदर सिंह सोहल की बसी-बसाई 'दुनिया' उजड़ गई ।
केएस सोहल और एचजेएस खेड़ा ने बिरिंदर सिंह सोहल के लिए जो मुसीबत खड़ी की, उससे उबरने के लिए बिरिंदर सिंह सोहल को अब लोगों से मिलने-जुलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है - उनकी इस मजबूरी की लोग लेकिन खिल्ली उड़ा रहे हैं । वह जहाँ कहीं जाते हैं, और या किसी को फोन करते हैं तो कई जगह उन्हें सुनने को मिलता है कि 'अब हमारी याद आई है' या 'अब क्यों बात रहे हो' या 'अब क्या लेने आए हो' आदि-इत्यादि ।
एचजेएस खेड़ा के रवैये से बिरिंदर सिंह सोहल के लिए जो मुसीबत खड़ी हुई है, उसमें पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरीश दुआ की सक्रियता से और इजाफा हुआ है । एचजेएस खेड़ा के रवैये से दरअसल डिस्ट्रिक्ट के कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स बुरी तरह खफा हैं, क्योंकि एचजेएस खेड़ा समय समय पर उन्हें तरह तरह से अपमानित करते रहे हैं; बिरिंदर सिंह सोहल की उम्मीदवारी के अभियान में भी कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को अपमानित होना पड़ा है - इसलिए उन सभी को अब एचजेएस खेड़ा से बदला लेने का मौका नजर आ रहा है । हरीश दुआ की चूँकि मल्टीपल में और उससे भी ऊपर की लायन-राजनीति में पकड़ व पहचान बनी हुई है, इसलिए एचजेएस खेड़ा से निपटने की इच्छा रखने वाले लोगों ने हरीश दुआ को समर्थन देकर उनके हाथ मजबूत किए हुए हैं । उल्लेखनीय है कि प्रेसीडेंशियल अवॉर्ड प्राप्त हरीश दुआ मल्टीपल लॉयन क्वेस्ट चेयरमैन हैं, जो पहले एचजेएस खेड़ा होते थे । इसके अलावा वह मल्टीपल काउंसिल के इस वर्ष के चुनाव में नोमीनेशन कमेटी के चेयरमैन बनाए गए हैं । तीन वर्ष पहले, उनके गवर्नर-काल में डिस्ट्रिक्ट ब्लड बैंक को लेकर जो काम हुआ था, जिसके उद्घाटन समारोह में नरेश अग्रवाल तथा अरुणा ओसवाल जैसे बड़े नेताओं व पदाधिकारियों की उपस्थिति संभव हुई थी - उसके चलते हरीश दुआ को डिस्ट्रिक्ट व मल्टीपल के लायन सदस्यों के बीच ही नहीं, बल्कि उससे भी ऊपर के लायन नेताओं व पदाधिकारियों की प्रशंसा मिली है । प्रेसीडेंशियल अवॉर्ड इसी प्रशंसा का प्रतिफल व सुबूत है । हरीश दुआ की यह प्रशंसा व सफलता लेकिन चूँकि एचजेएस खेड़ा को पसंद नहीं आई, इसलिए उन्होंने हरीश दुआ को डिस्ट्रिक्ट में अलग-थलग करने/रखने का प्रयास किया और उनके खिलाफ षड्यंत्र करते रहे । एचजेएस खेड़ा के एक बड़े शिकार रहे हरीश दुआ को पवन आहुजा की उम्मीदवारी की बागडोर, एचजेएस खेड़ा से निपटने की इच्छा रखने वाले लोगों ने यही सोच कर सौंपी है कि हरीश दुआ ही इस चुनावी लड़ाई को प्रभावी व निर्णायक तरीके से संयोजित कर सकते हैं । कुछेक लोगों को शुरू में हालाँकि शक था कि अपने बिजनेस की व्यस्तताओं के बीच हरीश दुआ के लिए चुनावी लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा सकना सचमुच संभव होगा क्या; किंतु हरीश दुआ ने जिस तरह से पवन आहुजा की उम्मीदवारी के पक्ष में काम करना शुरू किया है, उससे डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति का सारा नजारा बदल गया है ।

Saturday, March 26, 2016

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 एफ में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में पवन आहुजा के रूप में मुसीबत और चुनौती को आमंत्रित करने का काम क्या सचमुच खुद बिरिंदर सिंह सोहल ने ही किया है ?

लुधियाना । पवन आहुजा की नाटकीय तरीके से अचानक प्रस्तुत हुई उम्मीदवारी ने सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में न सिर्फ गर्मी ला दी है, बल्कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल को भी विवाद के घेरे में ला दिया है । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के दूसरे - और पुराने उम्मीदवार बिरिंदर सिंह सोहल के समर्थकों का आरोप है कि उन्होंने चूँकि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल तथा उनके साथी पूर्व गवर्नर्स व अन्य कई खास लोगों की कमरों तथा खाने-पीने की नाजायज माँगों को पूरा करने के लिए सहमति नहीं दी, इसलिए रनवीर उप्पल तथा उनके साथी पूर्व गवर्नर्स ने न केवल डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की जगह व तारीख बदल दी, बल्कि पवन आहुजा को जबरदस्ती का उम्मीदवार भी बना दिया है । उल्लेखनीय है कि पहले डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस दो-तीन अप्रैल को मनाली में होने की घोषणा की गई थी । किंतु पिछले दिनों अचानक से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल ने इमरजेंसी मीटिंग बुला कर डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की तारीख 24 अप्रैल तथा जगह चंडीगढ़ कर दी । डिस्ट्रिक्ट के लोग जब तक यह समझने की कोशिश करते कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल को यह सब करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी, तब तक एक दूसरी अप्रत्याशित घटना यह घटी कि पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हरीश दुआ के क्लब के पवन आहुजा सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में कूद पड़े । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के लिए नाटकीय तरीके से प्रस्तुत हुई पवन आहुजा की उम्मीदवारी पर लोगों को आश्चर्य दरअसल इसलिए हुआ, क्योंकि इससे पहले उनकी उम्मीदवारी की कोई चर्चा तक नहीं थी - और बिरिंदर सिंह सोहल की उम्मीदवारी को डिस्ट्रिक्ट में सभी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स का समर्थन मिलता दिख रहा था तथा बिरिंदर सिंह सोहल सर्वसम्मति से सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर घोषित होते हुए नजर आ रहे थे ।
किंतु बिरिंदर सिंह सोहल कामयाबी तक जब पहुँचने ही वाले थे कि उनके लिए हालात नाटकीय तरीके से बदल गए और उन्होंने अपने आपको चारों तरफ से घिरा हुआ पाया । कल तक जो लोग उनके समर्थक, सहयोगी और दोस्त बने हुए थे - उनमें से कई उनके विरोधी बन गए; और पवन आहुजा के रूप में सीधी चुनौती उनके सामने आ खड़ी हुई । सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद को लेकर होने वाली जो राजनीति अभी तक ठंडी-ठंडी पड़ी थी, उसमें बदली परिस्थितियों के चलते खासी गर्मी पैदा हो गई । इस गर्मी को और गर्म करने का काम किया बिरिंदर सिंह सोहल के समर्थकों ने - जिनका आरोप रहा कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल और उनके साथी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स अपने लिए तथा अपने कुछेक खास लोगों के लिए मनाली के खास होटलों में ठहरने व खाने-पीने का विशेष इंतजाम करने की जिम्मेदारी बिरिंदर सिंह सोहल पर थोप रहे थे, जिसे पूरा करने से बिरिंदर सिंह सोहल ने इंकार कर दिया, तो बदला लेने के लिए उन्होंने बिरिंदर सिंह सोहल के समर्थन हाथ खींच लिया । बिरिंदर सिंह सोहल के समर्थकों का आरोप है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल तथा उनके साथी पूर्व गवर्नर्स ने पवन आहुजा से पूरे खर्चे-पानी का हिसाब फिक्स करके उन्हें सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद के चुनाव में जितवाने का आश्वासन देकर उम्मीदवार बना दिया है ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल तथा उनके साथी पूर्व गवर्नर्स की तरफ से बिरिंदर सिंह सोहल के समर्थकों के आरोपों का करारा जबाव सुनने को मिला - जिसमें कहा/बताया गया कि सर्वसम्मत समर्थन मिलने से बिरिंदर सिंह सोहल तथा उनके नजदीकी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स इतने अहंकार में आ गए थे कि उन्होंने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल पर हावी होने की तथा डिस्ट्रिक्ट को अपनी मर्जी से चलाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं; उनके रवैये को चूँकि किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता था, इसलिए बिरिंदर सिंह सोहल की उम्मीदवारी पर बनी सर्वसम्मति को भंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल तथा कुछेक अन्य पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की तरफ से कहा/बताया गया है कि बिरिंदर सिंह सोहल की उम्मीदवारी पर बनी आम सहमति को बिरिंदर सिंह सोहल तथा उनके नजदीकी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स ने डिस्ट्रिक्ट पर अपनी मनमानी थोपने तथा डिस्ट्रिक्ट कार्यक्रमों को अपनी मनमर्जी से चलाने के लाइसेंस के रूप में समझ लिया; बिरिंदर सिंह सोहल ने तो अपने आपको डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ही समझ लिया था - जिसे देख कर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स के बीच काफी तीखी प्रतिक्रिया हुई । कई पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स को लगा कि बिरिंदर सिंह सोहल के जब 'अभी' यह तेवर हैं, तो चुने जाने के बाद तो वह किसी को कुछ समझेंगे ही नहीं । दबे स्वर में हालाँकि बिरिंदर सिंह सोहल और उनके समर्थकों के आरोपों को भी कुछ हद तक स्वीकार किया गया और माना गया कि इंतजाम संबंधी मामलों में भी बिरिंदर सिंह सोहल का रवैया सहयोगात्मक नहीं रहा ।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रनवीर उप्पल के नजदीकियों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के आयोजन से जुड़े कुछेक खर्चों को पूरा करने की जिम्मेदारी उम्मीदवार के रूप में बिरिंदर सिंह सोहल ने पहले तो ले ली थी, किंतु जब उन जिम्मेदारियों को निभाने का समय आया - तो वह तरह तरह की बहानेबाजी करके उन जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करने लगे । उनके इस रवैये के कारण मनाली में डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस कर पाना संभव नहीं रह गया, और डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को चंडीगढ़ लाना/करना मजबूरी हो गया । मजे की बात यह है कि बिरिंदर सिंह सोहल के कुछेक समर्थकों का ही कहना है कि अपने व्यवहार और कुछ पैसे बचाने के चक्कर में बिरिंदर सिंह सोहल ने अपने ही पैरों पर अपने आप कुल्हाड़ी मार ली है, और पास आती गवर्नरी को अपने से दूर कर लिया है । उनके साथ हमदर्दी रखने/दिखाने वाले लोगों का ही कहना है कि बिरिंदर सिंह सोहल के पिता केएस सोहल भी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहे हैं और तीसरी/चौथी बार में वह सफल हो पाए थे - इस नाते से उन्हें तो गवर्नरी की राजनीति के अच्छे-बुरे पक्षों की जानकारी व पहचान होनी ही चाहिए थी और सावधान रहना चाहिए था । बिरिंदर सिंह सोहल के समर्थकों व शुभचिंतकों का ही कहना है कि बिरिंदर सिंह सोहल पता नहीं क्यों, यह समझने में फेल हो गए कि लायन राजनीति का जो ट्रेंड बना हुआ है, उसे आप चाहें पसंद करें या न करें - एक उम्मीदवार के रूप में आपको उनका पालन करना ही होगा ! बिरिंदर सिंह सोहल के लिए मुसीबत की बात यह हुई है कि उनके विरोधी तो विरोधी, उनके समर्थक व शुभचिंतक भी उनके मुसीबत में फँसने के लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं ।
पवन आहुजा ने इस बीच लोगों से संपर्क साधने तथा उनके बीच अपने लिए समर्थन पैदा करने के जो प्रयास किए हैं, और उसके उन्हें जो सकारात्मक नतीजे मिलते दिख रहे हैं - उसने बिरिंदर सिंह सोहल के लिए हालात खासे चुनौतीपूर्ण बना दिए हैं । बिरिंदर सिंह सोहल और पवन आहुजा के बीच बिछी चुनावी बिसात ने डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में गर्मी तो पैदा कर ही दी है, साथ ही साथ नए राजनीतिक समीकरण बनने/बनाने की संभावनाएँ भी पैदा कर दी हैं ।