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Sunday, September 9, 2018

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू में अजय डैंग को लेकर नियमों का पालन करने की नसीहत मिलने पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वंदना निगम ने पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर विनोद खन्ना के साथ-साथ अपने डिस्ट्रिक्ट के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बलविंदर सैनी को भी निशाने पर लिया

कानपुर । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वंदना निगम अपने स्वार्थी और मतलबपरस्ती भरे व्यवहार के कारण एक बार फिर लीडरशिप के निशाने पर आती दिख रही हैं । लखनऊ में आयोजित हुई पहली मल्टीपल काउंसिल की मीटिंग में पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर विनोद खन्ना ने वंदना निगम को आगाह किया कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें अजय डैंग से दूरी बना कर रखना चाहिए और उन्हें डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों में प्रमुखता देने से बचना चाहिए । विनोद खन्ना का तर्क रहा कि अजय डैंग ने चूँकि लायंस इंटरनेशनल और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की हुई है, और नियमानुसार ऐसे लोगों को लायनिज्म में कोई तवज्जो नहीं मिल सकती है - इसलिए वंदना निगम से उम्मीद की जाती है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वह लायंस इंटरनेशनल के नियमों का पालन करेंगी । मजे की बात यह हुई है कि विनोद खन्ना की बात/सलाह को समझने की कोशिश करने की बजाये वंदना निगम ने इस मामले में फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बलविंदर सैनी को लपेट लिया है । उन्होंने आरोप लगाया है कि बलविंदर सैनी ही विनोद खन्ना तथा लीडरशिप के दूसरे नेताओं को उनके खिलाफ भड़का रहे हैं । वंदना निगम के साथ बड़ी समस्या यह है कि वह अपनी मनमानी पर सवाल उठने से तुरंत भड़क उठती हैं और मामले की गंभीरता पर कतई गौर नहीं करती हैं । पिछले लायन वर्ष में डिस्ट्रिक्ट में जो तमाशा हुआ, उसके लिए यूँ तो कई लोग जिम्मेदार हैं - लेकिन उस तमाशे की मास्टरमाइंड वंदना निगम ही थीं । कुछेक लोगों का हालाँकि कहना है कि मास्टरमाइंड उनके पति श्याम निगम थे, और वह तो बस 'पत्नी-धर्म' निभा रही थीं । मास्टरमाइंड कौन था, इसे लेकर भले ही विवाद हो - लेकिन एक बात सभी स्वीकार करते हैं कि जो हुआ उसमें फजीहत वंदना निगम की ही हुई ।
दिलचस्प नजारा यह है कि पिछले लायन वर्ष में जो तमाशा हुआ, उसके केंद्र/कारण के रूप में अजय डैंग थे - और इस वर्ष अजय डैंग के कारण ही वंदना निगम एक बार फिर विवाद और फजीहत में फँसती नजर आ रही हैं । विनोद खन्ना का कहना है कि पद-भार सँभालने से पहले डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की जो ट्रेनिंग होती है, उसमें सबसे महत्त्वपूर्ण और जरूरी पाठ यह पढ़ाया जाता है कि लायनिज्म और लायंस इंटरनेशनल की पहचान और प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए क्या क्या नियम हैं । इन्हीं नियमों में एक बड़ा खास नियम यह है कि लायंस इंटरनेशनल और उसके पदाधिकारियों को कानूनी मामलों में फँसाने वाले लोगों को किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल नहीं किया जायेगा । विनोद खन्ना का कहना/मानना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के नाते वंदना निगम को इस नियम की जानकारी होगी ही, और उनसे उम्मीद की जाती है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वह लायंस इंटरनेशनल के उक्त नियम का पालन करेंगी । देखने में लेकिन यह आ रहा है कि लायंस इंटरनेशनल तथा उसके पदाधिकारियों के खिलाफ कोर्ट-कचहरी करने वाले अजय डैंग को वंदना निगम डिस्ट्रिक्ट के आधिकारिक आयोजनों में खासी तवज्जो दे/दिला रही हैं । विनोद खन्ना ने इसी हरकत के लिए मल्टीपल काउंसिल की मीटिंग में वंदना निगम को आगाह किया । डिस्ट्रिक्ट के लोगों का ही कहना/बताना है कि वंदना निगम ने विनोद खन्ना से सामने सामने तो कुछ नहीं कहा, लेकिन डिस्ट्रिक्ट में अपने नजदीकियों के बीच वह सवाल उठा रही हैं कि विनोद खन्ना किस हैसियत से उन्हें आगाह कर रहे हैं या सलाह दे रहे हैं; उनका कहना है कि विनोद खन्ना उनके डिस्ट्रिक्ट के मामलों में नाहक ही दिलचस्पी ले रहे हैं और हस्तक्षेप कर रहे हैं । विनोद खन्ना के साथ-साथ वंदना निगम अपने डिस्ट्रिक्ट के फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बलविंदर सैनी को भी निशाना बना रही हैं । उनका कहना है कि बलविंदर सैनी लीडरशिप के बीच उन्हें बदनाम कर रहे हैं और अपनी नेतागिरी करने/जमाने का प्रयास कर रहे हैं ।
डिस्ट्रिक्ट में लोगों का मानना/कहना है कि वंदना निगम और बलविंदर सैनी को आगे करके डिस्ट्रिक्ट के नेता लोग इस वर्ष की चुनावी राजनीति को साधने का उपक्रम कर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि इस वर्ष दो वर्षों के गवर्नर चुने जाने हैं । पिछले वर्ष के तमाशे और उसके नतीजे के चलते वंदना निगम और उनके समर्थक नेता दबाव में हैं, और इसलिए बलविंदर सैनी व उनके समर्थक नेता इस कोशिश में हैं कि दोनों वर्षों पर वह 'अपने' उम्मीदवार 'चुनवा' लें । वंदना निगम और उनके समर्थक नेताओं की डिस्ट्रिक्ट में हालत ऐसी पतली है कि उनके भरोसे कोई उम्मीदवार बनने को तैयार नहीं हो रहा है । ऐसे में वंदना निगम ने अजय डैंग के सहारे/भरोसे ही चुनावी राजनीति में बने/टिके रहने की कोशिश शुरू की है; और इस कोशिश के चलते ही उन्होंने अजय डैंग को डिस्ट्रिक्ट के आयोजनों में आगे आगे रखना/रखवाना शुरू किया है । उन्होंने अजय डैंग को आश्वस्त किया है कि दो वर्षों के लिए गवर्नर चुनने की जब स्थिति आयेगी तब सौदेबाजी के जरिये वह एक वर्ष के लिए अजय डैंग को 'चुनवा' देंगी । कुछेक लोगों को लगता है और उनका कहना है कि इस तरह से वंदना निगम ने वास्तव में अजय डैंग से और पैसे ऐंठने तथा उनके संसाधनों का उपयोग कर लेने का मौका बनाया है । डिस्ट्रिक्ट में कई लोगों को लगता है कि अजय डैंग लायनिज्म और लायंस इंटरनेशनल के साथ दोहरा खेल नहीं खेल सकते हैं - एक तरफ तो वह लायंस इंटरनेशनल के साथ कोर्ट-कचहरी कर रहे हैं, और दूसरी तरह वंदना निगम के सहारे इस वर्ष होने वाले चुनाव में 'चुने' जाने की उम्मीद कर रहे हैं । अजय डैंग क्या कर रहे हैं, इस पर तो लीडरशिप का कोई बस नहीं है - लेकिन डिस्ट्रिक्ट गवर्नर वंदना निगम से तो लीडरशिप के नेता सवाल कर ही सकते हैं कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्हें लायंस इंटरनेशनल व लायनिज्म के साथ इस तरह का खिलवाड़ नहीं करना चाहिए ।
मल्टीपल काउंसिल की मीटिंग में विनोद खन्ना ने वंदना निगम को यही पाठ पढ़ाते हुए उन्हें डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद की उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई है । अपने नजदीकियों के बीच इस मामले में वंदना निगम भले ही विनोद खन्ना की प्रशासनिक हैसियत पर सवाल उठा रही हों, और बलविंदर सैनी पर दोषारोपण कर रही हों - लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि वास्तव में वह विनोद खन्ना से मिली नसीहत को गंभीरता से लेती हैं, या अजय डैंग से फायदा उठाते हुए उन्हें तवज्जो देती/दिलवाती रहती हैं ?

Monday, July 9, 2018

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू में वंदना निगम व श्याम निगम की 'धोखाधड़ी' से खफा दीपक राज आनंद व अजय डैंग द्वारा की जाने वाली कानूनी कार्रवाई वंदना निगम के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद को फिर से खतरे में डालेगी क्या ?

कानपुर । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर की कुर्सी पा चुकीं वंदना निगम तथा उनके पति श्याम निगम को अब अपने ही खेमे के लोगों की तरफ से धोखेबाज होने का आरोप सुनना/झेलना पड़ रहा है और अपनी गवर्नरी को बचाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है । उनके ही साथियों और नजदीकियों का कहना है कि गवर्नरी पाने के लालच में इन दोनों ने दीपक राज आनंद व अजय डैंग के साथ धोखा किया है । साथियों और नजदीकियों का कहना है कि यह दोनों दीपक राज आनंद व अजय डैंग के साथ धोखा नहीं करते और इनके अधिकार व सम्मान को बचाने के लिए प्रयास करते, तो भी वंदना निगम डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद पाती हीं - लेकिन दीपक राज आनंद व अजय डैंग के सम्मान व अधिकार को अनदेखा करके इन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए वह किसी की भी बलि चढ़ा सकते हैं । उल्लेखनीय है कि वंदना निगम हालाँकि यह दावा तो पहले से ही करती रही हैं कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के नाम पर जो भी गड़बड़झाला हुआ है, उसके लिए उन्हें नाहक ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है - जबकि उसके लिए पूरी तरह डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में दीपक राज आनंद जिम्मेदार हैं । वंदना निगम की इस बात का दीपक राज आनंद तथा दूसरे लोगों ने इसलिए बुरा नहीं माना, क्योंकि उन्हें लगा कि वंदना निगम डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच अपना भरोसा बनाये रखने के लिए ऐसा कह रही हैं । लोगों को लगा कि वंदना निगम को चूँकि गवर्नरी करनी है और इसके लिए डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच उनका भरोसा बने रहना जरूरी है, इसलिए वह यदि सारा दोष दीपक राज आनंद पर मढ़ रही हैं, तो दीपक राज आनंद को इसे अनदेखा/अनसुना कर देना चाहिए; आखिर खेमे के साथियों को मुसीबत के समय एक-दूसरे के लिए इतना तो करना ही चाहिए । निगम दंपति ने लेकिन लॉस वेगास में जो रवैया दिखाया और जिस तरह से दीपक राज आनंद व अजय डैंग के सम्मान व अधिकार को चुपचाप चोट पहुँचने दी, उसके चलते दीपक राज आनंद व अजय डैंग तथा खेमे के अन्य साथियों ने अपने आप को निगम दंपति के हाथों ठगा हुआ पाया है ।
दीपक राज आनंद, अजय डैंग तथा खेमे के अन्य सदस्यों का कहना है कि लायंस इंटरनेशनल ने जो फैसला लिया है, उससे ज्यादा झटका/धक्का तो उन्हें वंदना निगम और श्याम निगम के रवैये को देख कर लगा है । इन्होंने एकबार भी लीडरशिप के सामने यह नहीं कहा कि दीपक राज आनंद या अजय डैंग के साथ 'अन्याय' क्यों किया जा रहा है ? खेमे के लोगों का कहना है कि हो सकता है कि इनकी बात न सुनी जाती, और इनके कहने के बावजूद भी फैसला वही होता, जो हुआ है - लेकिन हमें इस बात की तसल्ली तो होती कि मुश्किल समय में यह हमारे साथ खड़े थे । लेकिन वंदना निगम और श्याम निगम की चुप्पी ने यह साबित किया कि ये सिर्फ मतलब के साथी हैं, और किसी के साथ भी कभी भी धोखा कर सकते हैं ।
वंदना निगम व श्याम निगम के प्रति उनके अपने खेमे में पैदा हुई नाराजगी तथा दीपक आनंद व अजय डैंग द्वारा लायंस इंटरनेशनल के फैसले की खामियों पर कानूनी सलाह लेने और अपने सम्मान व अधिकार के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के विकल्प पर विचार करने की खबरों से संकेत मिल रहे हैं कि वंदना निगम को गवर्नरी मिल तो गई है - लेकिन वह ज्यादा दिन उनके पास रह पायेगी, इसे लेकर लेकर संदेह है । लायंस इंटरनेशनल के फैसले में कानूनी खामी यह देखी/पहचानी जा रही है कि वंदना निगम और बलविंदर सैनी को 'प्रोमोट' करने के फैसले से साबित यह हो रहा है कि लायंस इंटरनेशनल ने डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को वैध माना/पाया है; और यदि सचमुच डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को वैध माना/पाया गया है तो उसी डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर 'चुने' गए अजय डैंग को उनका अधिकार क्यों नहीं दिया गया ? दरअसल डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू का झगड़ा डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के 'होने' या 'न होने' को लेकर था - एक पक्ष कह रहा था कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस हुई है, दूसरे पक्ष का दावा था कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस नहीं हुई है । लायंस इंटरनेशनल यदि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस 'होने' के दावे को सच मानता तो वंदना निगम व बलविंदर सैनी 'प्रोमोट' होते तथा अजय डैंग सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर घोषित होते; लेकिन यदि लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस 'न होने' के दावे को सच मानता, तो ये तीनों पद पाने के अयोग्य माने जाते - और फिर व्यावहारिकता के तकाजे से यह होता कि वंदना निगम व बलविंदर सैनी 'नोमीनेट' होते और अजय डैंग को कुछ नहीं मिलता । लायंस इंटरनेशनल के फैसले में पेंच लेकिन यह फँसा है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस की वैधता को लेकर तो कोई निर्णय नहीं लिया/दिया गया है, तथा वंदना निगम व बलविंदर सैनी को 'प्रोमोट' किया गया है । इन दोनों को 'नोमीनेट' की बजाये 'प्रोमोट' करने के फैसले से साबित होता है कि लायंस इंटरनेशनल ने डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को वैध माना है - तब फिर सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद पर उसमें हुई अजय डैंग की जीत को स्वीकार करने से क्यों इंकार कर दिया गया है ?
दीपक राज आनंद के बारे में लिए गए फैसले में तो और भी झोल देखा/पहचाना गया है । दीपक राज आनंद को लायनिज्म की छवि खराब करने के आरोप में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्त करने तथा उन्हें पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का ओहदा न देने का फैसला हुआ है । दीपक राज आनंद का कहना/पूछना है कि उन्होंने ऐसा क्या किया है, जिससे लायनिज्म की छवि खराब हुई है । उनका कहना है कि उनके खिलाफ कभी कोई आरोप ही नहीं लगा, और उन्हें 'अपराधी' घोषित करने से पहले किसी भी मामले में न उनका पक्ष लिया गया । उनका दावा है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में उन्होंने सभी काम पूरी दक्षता से किए हैं, और उनके किसी भी काम में कभी कोई शिकायत नहीं हुई; सदस्यता वृद्धि के काम में तो उन्होंने रिकॉर्ड स्थापित किया है । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के झमेले में भी उन पर जो आरोप लगे हैं, लायंस इंटरनेशनल ने उनमें भी किसी आरोप को सत्यापित नहीं किया है । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में कुछेक क्लब्स को वोटिंग अधिकार न देने का जो आरोप उन पर लगा है, उन्हें लेकर भी उनका कहना/पूछना है कि जिस आधार पर वह क्लब्स को वोटिंग अधिकार नहीं दे रहे थे, उस 'आधार' पर वोटिंग अधिकार देने से इंकार करने का अधिकार उन्हें लायंस इंटरनेशनल के नियम-कानून ही देते हैं । और सौ बात की एक बात - वंदना निगम व बलविंदर सैनी को 'प्रोमोट' करने के जरिये जब लायंस इंटरनेशनल ने डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को वैधता दे दी, उससे यही तो साबित हुआ है कि लायंस इंटरनेशनल ने तमाम आरोपों को खारिज कर दिया है - तब फिर उन्हें किस बात की सजा ? लायंस इंटरनेशनल ने यदि आरोपों को सही पाया होता, तो वह डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को अवैध घोषित करता और उसमें हुए फैसलों को अमान्य करता - वंदना निगम व बलविंदर सैनी को 'प्रोमोट' न करता ।
दीपक राज आनंद व अजय डैंग के अपने सम्मान और अधिकार को बचाने के लिए कानूनी कार्रवाई के विकल्पों पर विचार किए जाने की सूचना ने वंदना निगम के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद को खतरे में डालने की संभावना पैदा कर दी है । वंदना निगम को डर हुआ है कि कानूनी कार्रवाई के चलते उन्हें मिला डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद कहीं उनसे छिन न जाए । इस कारण से वंदना निगम और श्याम निगम तरह तरह से दीपक राज आनंद व अजय डैंग पर दबाव बन रहे हैं कि जो हुआ उसे एक दुःस्वप्न मान कर वह नई पहल की तरफ बढ़ें । दीपक राज आनंद व अजय डैंग और खेमे के दूसरे लोग लेकिन चूँकि लॉस बेगास में निगम दंपति द्वारा दर्शाये गए मतलबी व स्वार्थी रवैये से आहत महसूस कर रहे हैं, इसलिए वह अपने सम्मान और अधिकार को बचाने के साथ-साथ निगम दंपति को सबक भी सिखाना चाहते हैं । यानि डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू में उठा-पटक अभी और चलेगी तथा सीन में मजेदार ट्विस्ट यह आया है कि वंदना निगम और श्याम निगम को अपने ही लोगों के साथ की गई 'धोखाधड़ी' का भी भुगतान भुगतना होगा ।

Thursday, June 28, 2018

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक राज आनंद के खिलाफ हुई कड़ी कार्रवाई के चलते, गवर्नरी की आड़ में मनमानी व बेईमानी करने के मौके वंदना निगम से छिन गए हैं - और इस तरह उनके लिए गवर्नरी करने का सारा मजा ही खराब हो गया है

कानपुर । डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद से बर्खास्त किए गए दीपक राज आनंद को उनकी कारस्तानियों की सजा दिलवाने के बाद डिस्ट्रिक्ट के विरोधी खेमे के नेताओं ने वंदना निगम तथा उनके साथी पूर्व गवर्नर्स की नकेल कसने/कसवाने के लिए भी तैयारी शुरू कर दी है । लोगों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस के होने को लेकर झूठे तथ्य गढ़ने तथा लायंस इंटरनेशनल को गुमराह करने के जिस आरोप में दीपक राज आनंद को डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद से हटाया गया है और उन्हें 'पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर' की पहचान से भी वंचित कर दिया गया है, वह काम अकेले दीपक राज आनंद का ही नहीं है - बल्कि उस काम में वंदना निगम तथा कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की भी मिलीभगत थी, और इसलिए उन्हें भी दंडित किया जाना चाहिए । लोगों का कहना है कि जो कुछ भी हुआ, उसके लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर होने के नाते दीपक राज आनंद की जिम्मेदारी ज्यादा बनती है, इसलिए उन्हें जो सजा मिली वह उचित ही है; लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि दीपक राज आनंद यदि लायंस इंटरनेशनल के साथ 'बेईमानी' करने का साहस कर सके, तो इसलिए क्योंकि उन्हें फर्स्ट वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वंदना निगम तथा कुछेक पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स का खुल्ला समर्थन व सहयोग मिला - इसलिए उनकी मिलीभगत को यदि अनदेखा कर दिया गया तो वह आगे भी लायंस इंटरनेशनल को 'ठगने' तथा उसके साथ 'बेईमानी' करने का काम कर सकते हैं । लोगों का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस को लेकर फर्जीवाड़ा करने के लिए तकनीकी रूप से भले ही दीपक राज आनंद दोषी हैं, लेकिन असली मुजरिम वंदना निगम तथा उनके सहयोगी पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स हैं - इसलिए उन्हें भी ऐसा कोई सबक दिया जाना चाहिए, जिससे कि वह आगे कभी फर्जीवाड़ा और बेईमानी करने के बारे में सोच भी न सकें ।
लायंस इंटरनेशनल की तरफ से दीपक राज आनंद को सजा मिलने की घोषणा के बाद डिस्ट्रिक्ट के सत्ता खेमे के लोगों के बीच निराशा है, जबकि विरोधी खेमे के लोग बम-बम हैं - और इसीलिए विरोधी खेमे के लोगों ने सत्ता खेमे के नेताओं पर दबाव बनाने के लिए आक्रामक रवैया अपना लिया है । सत्ता खेमे के लोगों ने इस बात पर राहत महसूस की है कि वंदना निगम के लिए गवर्नरी करने का मौका बच गया है और उनकी स्थिति पर कोई आँच नहीं आई है । सत्ता खेमे के लोगों को यह भी भरोसा है कि विरोधी खेमे के लोगों ने वंदना निगम तथा कुछेक पूर्व गवर्नर्स को घेरने के लिए जो आक्रामकता दिखाना शुरू किया है, उसका उनके लिए कोई खराब नतीजा नहीं निकलेगा और विरोधी खेमे की आक्रामकता कुछ दिनों का शोर-शराबा बन कर ही रह जाएगी । सत्ता खेमे के नेताओं के सामने समस्या लेकिन दूसरी है, और वह यह कि वंदना निगम की गवर्नरी की आड़ में उनके लिए मनमानी करने के मौके छिन गए हैं । दीपक राज आनंद के खिलाफ कठोर फैसला करके लायंस इंटरनेशनल ने संकेत दिया है कि वह किसी भी तरह की 'बेईमानी' को बर्दाश्त नहीं करेगा । गौर करने वाली बात यह है कि लायंस इंटरनेशनल के सौ वर्षों से ज्यादा के इतिहास में यह पहला अवसर है, जबकि गलत रिपोर्टिंग के मामले में एक डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को न सिर्फ गवर्नर पद से बल्कि लायनिज्म से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है । इस फैसले से वंदना निगम पर दबाव बना है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वह नियमानुसार ही काम करें और किसी भी तरह की बेईमानीपूर्ण हरकत से दूर ही रहें ।
वंदना निगम के लिए मुसीबत की बात यह है कि उन्होंने तथा उनके पति पूर्व गवर्नर श्याम निगम ने अपने व्यवहार के चलते डिस्ट्रिक्ट में आम और खास लोगों को बुरी तरह नाराज किया हुआ है । डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में हुए गड़बड़झाले के बाद तो यह दोनों लोगों से बात-बेबात उलझते रहे हैं, और 'चोरी व सीनाजोरी' वाला रवैया दिखा कर लोगों से बदतमीजी करते रहे हैं । इसके चलते यह दोनों ही लोगों के निशाने पर हैं, और लोग मौके के इंतजार में हैं कि यह कोई गड़बड़ी करें तो वह इन्हें घेरें । ऐसे में, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में वंदना निगम पर दबाव बढ़ गया है । अपनी टीम के पदों को 'बेचने' तथा उम्मीदवारों से पैसे ऐंठने की उनकी योजनाएँ खतरे में पड़ गई हैं । मुसीबत की बात यह हुई है कि उन्होंने यदि ज्यादा चूँ-चपड़ की तो लोग विरोध व शिकायत करने के लिए तैयार ही बैठे हैं; उधर लीडरशिप की भौहें तनी हुई हैं ही । वंदना निगम के लिए समस्या की बात यह हुई है कि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के रूप में लोगों के बीच उनके लिए न तो सम्मान है, और न ही वह रौबदाब दिखाने की स्थिति में रह गई हैं - और इस तरह उनके लिए गवर्नरी करने का सारा मजा ही खराब हो गया है । हालाँकि उनके शुभचिंतकों का मानना और कहना है कि वंदना निगम यदि होशियारी व उदारता से काम लें और अपने रवैये को व्यवहारकुशल बनाएँ तो स्थितियों को काफी हद तक संभालने के साथ-साथ अनुकूल बना सकती हैं । देखना दिलचस्प होगा कि मुश्किल हो गए हालात को संभालने के लिए वंदना निगम अपने रवैये में कोई परिवर्तन व सुधार करती हैं, या पहले जैसे रवैये को बनाए रखते हुए अपनी मुश्किलों में और इजाफा करती हैं ।

Saturday, March 24, 2018

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 321 बी टू में अजय डैंग की उम्मीदवारी के पक्ष में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक राज आनंद तथा अन्य गवर्नर्स को दबाव में लेकर श्याम निगम व वंदना निगम ने डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट 'दिखाई'

कानपुर । अजय डैंग की उम्मीदवारी के जरिए डिस्ट्रिक्ट में अपनी चौधराहट दिखाने/जमाने के श्याम निगम और वंदना निगम के प्रयास के तहत नवीन गुप्ता को उम्मीदवारी वापस लेने के लिए जिस तरह से घेरा जा रहा है, उससे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच बदमजगी-सी पैदा होने लगी है । नवीन गुप्ता के कुछेक समर्थक नेताओं को तरह तरह के ऑफर/लालच लेकर निगम दंपति जिस तरह से अपनी तरफ मिला ले रहे हैं, उससे लगता तो है कि नवीन गुप्ता अपनी उम्मीदवारी पर टिके न रह पाएँ - लेकिन जो हो रहा है, उससे डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच पूर्व गवर्नर्स नेताओं के खिलाफ असंतोष जरूर पनप रहा है । हालाँकि नवीन गुप्ता की उम्मीदवारी को वापस करवाने के लिए जो तर्क दिया जा रहा है, उससे सिद्धांततः किसी को भी ऐतराज नहीं है - लेकिन बात तर्क के पीछे छिपे 'उद्देश्य' और नीयत की है । तर्क दिया जा रहा है कि डिस्ट्रिक्ट में जब पिछले कुछ वर्षों से सौहार्द बना हुआ है और सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का चुनाव/चयन सर्वसम्मति से हो रहा है, तब फिर इस वर्ष चुनाव के लिए युद्धभूमि क्यों सजाई जा रही है - और इसके जरिये डिस्ट्रिक्ट के सौहार्दपूर्ण माहौल को क्यों बिगाड़ा जा रहा है ? डिस्ट्रिक्ट में कई एक लोगों का कहना है कि सुनने में तो यह तर्क बहुत ही वाजिब और अच्छा लग रहा है; और वास्तव में हर कोई चाहता है कि चुनाव के नाम पर डिस्ट्रिक्ट में बदमजगी न फैले और पैसों की बर्बादी न हो - लेकिन सवाल और देखने की बात यह है कि डिस्ट्रिक्ट में चुनाव थोपने की कोशिश की किसने है और डिस्ट्रिक्ट में सौहार्द बनाये रखने के नाम पर नवीन गुप्ता की उम्मीदवारी की ही बलि लेने की कोशिश आखिर क्यों की जा रही है ? इस सवाल से दो-चार होते ही निशाने पर निगम दंपति आ जाते हैं ।
दरअसल सर्वसम्मति से सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुनवा कर डिस्ट्रिक्ट में सौहार्द बनाए रखने की 'इच्छा' यदि वास्तव में होती तो इस वर्ष महेंद्रनाथ गुप्ता सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के पद पर चुने जा रहे होते । उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष महेंद्रनाथ गुप्ता की उम्मीदवारी को इसी आश्वासन के भरोसे वापस करवाया गया था कि वह अगले वर्ष सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुन/चुनवाए जा सकते हैं । महेंद्रनाथ गुप्ता बेचारे सीधे/शरीफ व्यक्ति हैं, वह नेताओं के झाँसे में आ गए । मौजूदा वर्ष में भी उन्हें विश्वास रहा कि जिन नेताओं ने आश्वासन देकर उनसे उनकी उम्मीदवारी वापस करवाई थी, वह अपना वायदा निभायेंगे - और इसी विश्वास के भरोसे उन्होंने एक उम्मीदवार के रूप में लोगों के बीच अपनी सक्रियता को संयोजित किया । लेकिन जल्दी ही उन्होंने देखा/पाया कि पिछले वर्ष उनकी उम्मीदवारी को वापस करवाने तथा अगले वर्ष के लिए आश्वासन देने को लेकर आगे आगे रहने वाले निगम दंपति अजय डैंग को उम्मीदवार बना रहे हैं । निगम दंपति ने डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक राज आनंद के कुछेक 'स्वार्थों' को अजय डैंग से पूरा करवा कर उन्हें महेंद्रनाथ गुप्ता के साथ किए गए वायदे को भूलने तथा अजय डैंग की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए राजी कर लिया । दीपक राज आनंद पिछले लायन वर्ष में मल्टीपल की राजनीति में अपने 'स्वार्थों' को पूरा करने के लिए जब पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर किरण सिंह को धोखा देने से नहीं चूके, तब बेचारे महेंद्रनाथ गुप्ता ही उनके धोखे से कैसे बच पाते ? नवीन गुप्ता ने जब देखा/पाया कि महेंद्रनाथ गुप्ता के साथ धोखा करते हुए अजय डैंग की उम्मीदवारी लाई जा रही है, तो उन्होंने भी अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत कर दी ।
नवीन गुप्ता का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले पूर्व गवर्नर्स नेताओं ने कुछेक वर्ष उनके साथ भी वायदा किया हुआ है, जिस पर भरोसा करते हुए उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी । नवीन गुप्ता लेकिन इस बात को भूल रहे हैं कि लायन लीडर्स वास्तव में वायदा करते ही इसलिए हैं, ताकि उसे भूल सकें और तोड़ सकें । महेंद्रनाथ गुप्ता की तरह नवीन गुप्ता भी पूर्व गवर्नर्स नेताओं की वायदाखिलाफी के शिकार इसलिए भी हुए हैं, क्योंकि उनकी वकालत करने के लिए कोई दमदार गवर्नर आगे नहीं आया है । मजे की बात यह हुई है कि अजय डैंग की उम्मीदवारी के समर्थक नेताओं ने कानपुर/झाँसी का झगड़ा और खड़ा कर दिया है, जिसके तहत कहा जा रहा है कि झाँसी से लगातार गवर्नर कैसे बन सकते हैं ? यह तर्क अपने आप में धोखेभरा इसलिए है कि जब कानपुर से लगातार गवर्नर बन सकते हैं, तो झाँसी से क्यों नहीं बन सकते हैं ? जाहिर है कि बात तर्क की और वायदा निभाने की है ही नहीं, बात तो अपनी मनमानी चलाने की है । निगम पति-पत्नी ने अजय डैंग की उम्मीदवारी के संदर्भ में जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर दीपक राज आनंद तथा दूसरे पूर्व गवर्नर्स को दबाव में ले लिया है, उससे यह तो हो सकता है कि वह अजय डैंग को सेकेंड वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर चुनवा लें - लेकिन उनकी इस वायदाखिलाफीपूर्ण कार्रवाई से डिस्ट्रिक्ट के लोगों के बीच पूर्व गवर्नर्स नेताओं के प्रति बदमजगी तो पैदा हो ही जा रही है ।